कायाकल्प की टीम ने सदर अस्पताल में सुविधाओं का लिया जायजा

0

-मुंगेर से आई टीम ने ओटी, ओपीडी और लेबर रूम को देखा
-सदर अस्पताल की व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट
भागलपुर, 2 दिसंबर| कायाकल्प की टीम ने गुरुवार को सदर अस्पताल का जायजा लिया। मुंगेर से आए डॉ. नीलू विश्वकर्मा और वहां के डीपीसी डॉ. विकास कुमार ने ओपीडी, ओटी, लेबर रूम इत्यादि का निरीक्षण किया। वहां की सुविधाओं के बारे में जाना। इन विभागों में तैनात कर्मचारियों से जानकारी ली। साथ ही इलाज कराने आए मरीजों से भी अस्पताल की व्यवस्था के बारे में जाना। डॉ. विकास कुमार ने कहा कि भागलपुर सदर अस्पताल में मरीजों के इलाज को लेकर व्यवस्था संतोषजनक है। ओपीडी से लेकर ओटी तक में सारी सुविधाएं उपलब्ध दिखीं। खास बात यह रही कि यहां इलाज के लिए आए मरीज भी अस्पताल की व्यवस्था से खुश दिखे।
वहीं डॉ. नीलू विश्वकर्मा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान सभी कुछ ठीक ठाक रहा। विभागों में तैनात कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई तो उनका भी जवाब संतोषजनक रहा। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन यहां पर सभी कुछ ठीक था। खासकर पिछले दिनों अलग-अलग ओपीडी में इलाज की व्यवस्था शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिली है। मरीजों को यहां पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। साथ ही इलाज के दौरान ओपीडी में भीड़ भी नहीं लगती है। निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल प्रभारी डॉ. राजू, मैनेजर जावेद मजूर करीमी, केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी डॉ. राजेश मिश्रा इत्यादि मौजूद रहे। इस निरीक्षण की रिपोर्ट भी जल्द ही आ जाएगी। इसके बाद यह पता चल पाएगा कि भागलपुर सदर अस्पताल को राज्य में कौन-सी रैंक मिली है।
पिछली बार दूसरी रैंक आई थीः कायाकल्प के निरीक्षण में पिछली बार सदर अस्पताल को सूबे में दूसरा स्थान मिला था। इसके तहत राशि भी मिली थी। अभी हाल ही में दिल्ली से आई लक्ष्य की टीम ने भी सदर अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस दौरान भी यहां की व्यवस्था से लक्ष्य की टीम खुश दिखी थी। हालांकि उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद यह पता चलेगा राष्ट्रीय स्तर पर सदर अस्पताल को कौन-सी रैंक मिलती है।
पहला स्थान आने पर 50 लाख की राशि मिलेगीः कायाकल्प की रैंकिंग में अगर सदर अस्पताल सूबे में पहले स्थान पर आता है तो 50 लाख की राशि मिलेगी। अगर दूसरा स्थान आता है तो 20 लाख की राशि मिलेगी। जो पिछली बार मिली थी। पहला और दूसरा स्थान नहीं आने पर भी अगर अंक 70 प्रतिशत से अधिक हुआ तो एक लाख रुपये की राशि मिलती है।

सीपीजे कॉलेज नरेला ने नव प्रवेशित छात्रों के लिए किया ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन

0

नईदिल्ली-

सीपीजे कॉलेज, नरेला (गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से संबद्ध) ने 1 दिसंबर, 2021 को बीबीए/बीबीए (सीएएम), बीकॉम (ऑनर्स) और आईटी के छात्रों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया। ओरिएंटेशन समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) एपी सिंह, यूएसआईसीटी, जीजीएसआईपीयू, दिल्ली, श्री युगांक चतुर्वेदी, महानिदेशक, डॉ. आशुतोष अग्रवाल, निदेशक और सुश्री नेहा मित्तल भास्कर, डीन, सीपीजे कॉलेज द्वारा सरस्वती वंदना के बीच पवित्र दीप प्रज्ज्वलित किया गया ।
इस अवसर पर महानिदेशक श्री युगांक चतुर्वेदी ने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) ए.पी. सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें तुलसी का पौधा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. उन्होंने छात्रों को अनुशासित, मेहनती, अपने साथियों और शिक्षकों का सम्मान करने के लिए भी प्रेरित किया। विद्वान वक्ता ने उनमें संस्था के प्रति अपनेपन और प्रेम की भावना विकसित करने के लिए प्रेरक कहानियाँ सुनाईं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कॉलेज उनकी तीन साल की शैक्षणिक यात्रा में सफल होने, चमकने और उत्कृष्टता प्राप्त करने में उनकी मदद करने की पूरी कोशिश करेगा।
छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. ए.पी. सिंह ने कहा, प्रिय छात्रों यह आप पर निर्भर करता है कि अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दे,; चाहे किसी विषम परिस्थिति से बचना हो, या विवेकपूर्ण व्यक्ति के रूप में उसका हिस्सा बनकर उसे सुलझाना हो। यदि आप सकारात्मक सोचते हैं तो आप निश्चित रूप से कदम बढ़ाएंगे और सही समाधान तक पहुंचेंगे।
डॉ. सिंह ने आगे कहा, नई शिक्षा नीति राष्ट्रीय लोकाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है। यह युवाओं के बेहतर भविष्य की दिशा में एक कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के अच्छे भविष्य का निर्माण करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने से आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।
अंत में सुश्री इश्मीत कौर सोढ़ी द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद प्रस्ताव के साथ ओरिएंटेशन कार्यक्रम का समापन हुआ, जिन्होंने मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए श्री सुभाष चंद जैन, अध्यक्ष, डॉ अभिषेक जैन, जनरल सेक्रेटरी का गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, महानिदेशक, नव प्रवेशित छात्रों, उनके माता-पिता और इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों को भी हार्दिक धन्यवाद दिया।

किशोरियों-महिलाओं ने समानता-सुरक्षा-सम्मान की माँग की

0

पटना-

महिलाओं के प्रति हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा एवं भेदभाव प्रचलित है, प्रायः इन घटनाओं को सामान्य मान लिया जाता है और महिलाओं के प्रति हिंसा करने वालों को बिना समुचित दण्ड दिए छोड़ देने की एक वैश्विक संस्कृति के रूप में अपना लिया गया है। जेंडर आधारित हिंसा में वैश्विक समस्या है और यह विश्व स्तरीय प्रयास की भी माँग करता है। 16 दिवसीय अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथा यह महिला के होने वाली हिंसा को लेकर चर्चा में है। यह अभियान महिला हिंसा के प्रति स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजानिक जानकारी उपलब्ध कराकर इसे रोकने का एक सशक्त प्रयास है। जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध 16 दिवसीय अभियान एक विश्वस्तरीय अभियान है, जो 25 नवम्बर – ‘महिला हिंसा को समाप्त करने के अन्तराष्ट्रीय दिवस’ से आरम्भ होता है तथा 10 दिसम्बर – ‘अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ तक मनाया जाता है। इस अभियान के द्वारा आम लोगों में जेंडर हिंसा एवं महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा के मुद्दे पर जागरूकता बनाया जाता है।

जेंडर आधारित हिंसा एवं भेदभाव के मुद्दे पर 16 दिवसीय अभियान:
सहयोगी संस्था के द्वारा जेंडर आधारित हिंसा एवं भेदभाव के मुद्दे पर आम लोगों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने के लिए 16 दिवसीय अभियान के साथ उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अंतर्गत अलग-अलग कार्यक्रमों-गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। आज जलालपुर, पटना में सहयोगी संस्था के द्वारा देर शाम एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय महिलाओं-किशोरियों के साथ किशोरों एवं पुरुषों की भी भागीदारी हुई। सहयोगी संस्था अपने आरम्भ से ही सक्रीय रूप से महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा एवं इसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में समुदाय एवं विभिन्न हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रयास कर रहा है। इस मुद्दे पर अपने द्वारा किये जाने वाले हस्तक्षेपों के अंतर्गत संस्था के द्वारा महिला-पुरुष, किशोर-किशोरियों, सेवा-प्रदाताओं, अधिकारियों, मीडियाकर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों, आदि के साथ मिल कर घरेलू हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा को समाप्त करने के लिए अलग-अलग स्तरों एवं मंचों के द्वारा प्रयास किया जाता रहा है।
महिलाओं और किशोरियों को मिले पुरूषों के समान आधिकार:
कार्यक्रम को देर शाम में आयोजित करने हेतु यह उद्देश्य था कि महिलाओं-किशोरियों को भी रात घर से बाहर निकलने के लिए पुरुषों के समान अधिकार मिले एवं बेतुकी-दकियानूसी परम्पराओं को समाप्त किया जाना चाहिए। इस अवसर पर सहयोगी की निदेशिका रजनी ने प्रतिभागियों को बताया कि हमारे समाज में महिला या किशोरियों के साथ कोई घटना होती है तो इसके लिए उन्हें ही जिम्मेवार ठहराया जाता है। पुरुषों का मानना है कि लड़की-महिला घर की इज्ज़त है, उन्हें मर्यादा में रहना चाहिए। वे मानते हैं कि लड़की-महिला देर शाम या रात में घर से बहार निकलेंगी तो उनके साथ दुर्घटना होगी। लोग घटना के कारणों की पड़ताल नहीं करते हैं, बल्कि इस बात पर विमर्श होता है कि वह देर से बाहर क्यों निकली, उसका पोशाक, मेकअप कैसा था। इस तरह की हिंसा केवल घर के बाहर ही नहीं होती है, घर में भी उनके साथ कई तरह हिंसा एवं भेदभाव बरते जाते हैं।
40% महिलाओं ने पति की हिंसा का सामना किया:
उन्होंने आगे बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS -5) के अनुसार 18-49 आयु-वर्ग की विवाहित महिलाओं में 40% महिलाओं ने पति की हिंसा का सामना किया है, इसी आयु-वर्ग में 2.8% महिला, जो गर्भवती थीं, ने शारीरिक हिंसा का झेला। 18-29 आयु-वर्ग की 8.3% महिलाओं ने 18 वर्ष तक की आयु पाने तक कभी-न-कभी यौनिक हिंसा का सामना किया। इसी तरह लड़कियों-महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आदि की भी हमारे घर-परिवार में अनदेखी की जाती है। हम इन अभियानों के आयोजन कर महिलाओं के सम्मान-समानता-सुरक्षा के लिए आवाज उठाते हैं एवं समुदाय एवं सभी हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाते हैं। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने भी कहा कि उन्हें भी पुरुषों की तरह दिन हो रात – बाहर निकलने की आजादी मिलनी चाहिए। घर के बाहर होने वाली हिंसा के मामले में किशोरियों-महिलाओं को दोषी नहीं समझा जाना चाहिए, पुरुषों को अपनी मानसिकता बदलने की ज़रुरत है, जब तक किशोरियों-महिलाओं को समान अधिकार-अवसर नहीं मिलेंगे, हम संतुलित विकास नहीं कर सकेंगे।
हमलोग भी खुलकर जीना चाहते हैं:
कार्यक्रम में भाग ले रही गंगो देवी ने कहा, “ हमलोग भी खुलकर जीना चाहते हैं, लेकिन शाम के समय निकलने पर लोग ताना मारते हैं, हमें डर भी लगता है। चिंता देवी कहा कि पुरुषों से बात करना होगा कि क्या सही है और क्या गलत है।“ पुरुष प्रतिभागी ने भी अपने विचार रखे, जनार्धन प्रसाद ने कहा, “ यह उचित समय नहीं है महिलाओं के साथ बैठक करने का, थोड़ा पहले करते तो बहुत महिला आतीं, और उनलोगों के लिए सुरक्षित भी रहता।“ इस अवसर पर अलख निरंजन सिंह ने कहा कि अगर समाज में बदलाव लाना है तो एक-एक करके लोगों को आगे आना होगा, और घर से महिलाओं का निकलना तो घर-घर की सोच पर निर्भर करता है। हम तो अपने घर की महिलाओं और बेटियों को नहीं रोकते हैं रात में बाहर जाने से, मेरा बेटा-बेटी तो रात में 10 बजे पढ़ कर आता है, उन्हें किसी से कोई मतलब नहीं रहता, कोई डर नहीं लगता। गाँव में सीसीटीवी कैमरा लगा रहेगा तो लोगों में डर कम लगेगा।कार्यक्रम में सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी के साथ अन्य कार्यकर्ताओं – उन्नति, उषा, धर्मेन्द्र, संजू, मनोज ने भाग लिया।

परिवार नियोजन पखवाड़ा: निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

0

– जिले में चल रहे पखवाड़ा का 04 दिसंबर को होगा समापन, सफलता को लेकर तेज हुई गतिविधि
– बच्चे दो ही अच्छे…छोटा परिवार सुखी परिवार…समझदारी दिखाइए, परिवार नियोजन का साधन अपनाइये

भागलपुर, 01 दिसंबर
जिले में चल रहे परिवार नियोजन पखवाड़ा का आगामी 04 दिसंबर समापन होगा। इसलिए, जो भी योग्य लाभार्थी अब तक परिवार नियोजन के साधन का लाभ नहीं ले पाएं, वह निर्धारित तिथि के अनुसार अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में लाभ ले सकते हैं। जिले के सभी पीएचसी में परिवार नियोजन की सुविधा उपलब्ध है| हर जगह जारी गाइडलाइन का पालन के साथ बेहतर सुविधा दी जा रही है। वहीं, पखवाड़ा की सफलता को लेकर हर हाल में निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए जिले में गतिविधि भी तेज कर दी गई है। जिसके माध्यम परिवार नियोजन को अपनाने के लिए योग्य दम्पत्तियों एवं उनके परिवार वालों को जागरूक किया जा रहा और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई तमाम सुविधाओं की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि अधिकाधिक लाभार्थी लाभ ले सकें और अभियान सफल हो सके। वहीं, निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के लिए सिविल सर्जन डाॅ उमेश कुमार शर्मा ने जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मैनेजर, बीसीएम समेत अन्य पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन जरूरी : सीएस डाॅ उमेश कुमार शर्मा ने बताया, छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन की सुविधा को अपनाना बेहद जरूरी है। इसलिए, योग्य महिलाओं को इस साधन को अपनाने के लिए बेहिचक आगे आना चाहिए। क्योंकि, जब आपका परिवार छोटा होगा तभी आपके पूरे परिवार को उचित परवरिश मिलेगी और आप अपने बच्चे को उचित शिक्षा देने में सक्षम रहेंगे। साथ ही बच्चे की उचित रहन-सहन के साथ परवरिश होगी| इसलिए, शादी के साथ ही परिवार की संख्या की योजना तैयार करें।
– स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे के लिए तीन साल का अंतर जरूरी :
स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे के लिए बच्चे के जन्म में तीन साल का अंतर रखना जरूरी है। इसलिए, अगर आप खुशहाल परिवार की जिंदगी जीना चाहते तो पहला बच्चा 20 के बाद और दूसरे बच्चे में कम से कम तीन साल का अंतराल जरूर रखें। इससे ना सिर्फ स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे होंगे बल्कि, जच्चा-बच्चा दोनों भविष्य में भी अनावश्यक शारीरिक परेशानी से दूर रहेंगे। दरअसल, तीन साल का अंतर रखने से माँ तो स्वस्थ रहती ही है साथ ही बच्चे की भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जिससे दोनों संक्रामक समेत अन्य बीमारियों से भी दूर रहता है। वहीं, उन्होंने कहा इस साधन को अपनाने से ना सिर्फ छोटा और सीमित परिवार होगा, बल्कि, जहाँ महिलाओं का शारीरिक विकास होगा वहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

मौसम में हो रहा है उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य को ले रहें सतर्क

0

-दिन में गुनगुनी धूप सेकें तो शाम के बाद सर्दी पड़ने पर हो जाएं सतर्क
-घर के बाहर जाते वक्त गर्म कपड़ें जरूर पहनें, ठंड से होगा आपका बचाव
बांका, 1 दिसंबर |

सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। तापमान लगातार गिर रहा है। बीच-बीच में कभी तापमान ऊपर भी आ जाता है। दिन में गुनगुनी धूप और रात में सर्दी रहने से भी लोगों को परेशानी हो रही है। किसी दिन कोहरा छा जाता है तो किसी दिन नहीं। दिन में धूप रहने और रात में कोहरा छाने से तापांतर भी अधिक रहता है। ऐसे मौसम में लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर शाम के वक्त घर से बाहर जाते वक्त गर्म कपड़े को जरूर पहन लेना चाहिए। ऐसा नहीं करना नुकसानदायक हो सकता है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि तापांतर जिस वक्त अधिक रहता है, उस दौरान सावधानी रखनी चाहिए। दोपहर बाद धूप रहती है। इस वजह से लोग बाहर निकलते वक्त गर्म कपड़े नहीं पहनते हैं, लेकिन शाम को लौटते वक्त सर्दी पड़ने लगती है। इस वजह से लोगों को सर्दी-खांसी होने लगती है। धूप की गर्मी के बाद एकाएक सर्दी को शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाता है। नतीजतन लोग बीमार पड़ जाते हैं। इसलिए सावधान रहना चाहिए। वैसे भी कहा जाता है कि सर्दी शुरुआत और अंत में ही लगती है। इस दौरान लोग लापरवाही करते हैं। इसका खामियाजा बीमार होकर चुकाना पड़ता है। इसलिए शाम में घर से बाहर निकलें तो गर्म कपड़े जरूर पहन लें।
सांस के रोगी रहें ज्यादा सतर्कः
डॉ. चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में सांस के रोगी को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। बादल और कोहरा रहने से धूल और धुआं आसमान की ओर नहीं जा पाता है। एक निश्चित ऊंचाई पर जाने के बाद ठहर जाता है। सांस के रोगी को यह नुकसान पहुंचाता है। इसलिए अभी के मौसम में जो भी सांस के रोगी हैं, वह शाम और सुबह में निकलने से परहेज करें। घर के बाहर का जो भी काम हो, उसे दिन में धूप रहने के दौरान ही निपटा दें। इस तरह का एहतियात बहुत जरूरी है।
कोहरे के दौरान सुबह टहलने नहीं निकलें –
डॉ. चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में सुबह-सुबह टहलने निकलना भी सही नहीं है। धूप निकलने के बाद सुबह की सैर के लिए निकलें। हाईपरटेंशन और सांस के मरीज बाहर टहलने के बजाय घर में ही योग या फिर व्यायाम करें तो अच्छा रहेगा। ऐसा मौसम बीमार लोगों के लिए सही नहीं होता है। घर में योग या व्यायाम करने के बाद धूप लगानें की कोशिश करें। ज्यादा फायदेमंद रहेगा। साथ ही सुबह में धूल और धुआं से होने वाले नुकसान से भी बचे रहेंगे।

क्लाइमेट फ्रेंडली ट्रांसपोर्टेशन, सेव एनर्जी, हारवेस्ट रेन वाटर और वेस्ट मैनेजमेंट कर क्लीमेंट चेंज के खतरे से रह सकते हैं सुरक्षित : सिविल सर्जन

0

– आरपीएमयू सभागार में नेशनल प्रोग्राम फ़ॉर क्लीमेंट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ विषय पर उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन
– कार्यशाला में शामिल हुए जिला के सभी पीएचसी और सीएचसी के एमओआईसी, बीएचएम और बीसीएम

मुंगेर, 30 नवंबर-
क्लाइमेट फ्रेंडली ट्रांसपोर्टेशन, सेव एनर्जी, सोलर एनर्जी, हारवेस्ट रेन वाटर और वेस्ट मैनेजमेंट कर क्लीमेंट चेंज के खतरे से रह सकते हैं सुरक्षित । उक्त बातें क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (आरपीएमयू) सभागार मुंगेर में आयोजित नेशनल प्रोग्राम फ़ॉर क्लीमेंट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ विषय पर उन्मुखीकरण कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने कही। उन्होंने बताया कि क्लाइमेट चेंज को ले भारत सरकार रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोमोशन में काफी प्रतिबद्धता के साथ जुटी है। हमलोग भी अपने नियमित जीवन में क्लीमेंट फ्रेंडली ट्रांसपोर्टेशन जिसमें कम से कम कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होने के साथ ही कम से कम वायू प्रदूषण हो का इस्तेमाल कर हम बहुत सारी बीमारी जैसे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी बीमारियों को भी मात दे सकते हैं इसके लिए आवश्यक है कि पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा दें ताकि कम से कम वायू प्रदूषण हो।

उन्मुखीकरण कार्यशाला में जिला भर के सभी पीएचसी और सीएचसी से आए मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि में बताया कि नेशनल प्रोग्राम फ़ॉर क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर लोगों को, हेल्थ केयर सर्विस प्रोवाइडर और पॉलिसी मेकर को आम आदमी के स्वास्थ्य पर क्लीमेंट चेंज के पड़ने वाले प्रभाव के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इसके साथ ही क्लीमेंट चेंज की वजह से होने वाली कमजोरी या बीमारियों के प्रति भी लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि क्लीमेंट चेंज एक वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर होने वाले विभिन्न प्रकार के परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। इसमें तापमान, वर्षा भी शामिल है। इसकी वजह से अर्थ वार्मिंग और समुद्र तल में बढ़ोतरी भी होने लगता है। तापमान में बढ़ोतरी होने से हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन जिसमें तापमान बढ़ने से शरीर से अत्यधिक मात्रा में पसीना निकलने लगता है साथ ही भारी वर्षा की वजह से प्रलयंकारी बाढ़ की स्थिति भी पैदा हो जाती है। ऐसी स्थिति में कई बीमारी जैसे हैपेटाइटिस, डायरिया, सांस संबन्धी बीमारी और वेक्टर बोर्न डिजीज के का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा हवा में जहरीली गैसों की मात्रा बढ़ जाने पर ह्रदय रोग और सांस संबंधी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक विकास कुमार ने बताया कि क्लीमेंट चेंज की वजह से सभी जगह की आबादी प्रभावित होती है लेकिन कुछ खास जगह या रिजन, समूह क्लीमेंट चेंज के हाईयर रिस्क में आते हैं इसमें कुछ खास आयु वर्ग जिसे बच्चे और बुजुर्ग और खास जेंडर जैसे गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 2030 से 2050 तक क्लीमेंट चेंज का सम्भावित समय है | इस अवसर पर केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू ने क्लीमेंट चेंज के तमाम तकनीकी पहलूओं से उपस्थित सभी स्वास्थ कर्मियों को रूबरू कराया ।

खगड़िया पहुँची नीति आयोग की टीम, अफसरों के साथ स्वास्थ्य संस्थानों का किया निरीक्षण

0

– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी
– सीएस, डीडीसी, डीआईओ, डीपीएम समेत अन्य अफसरों और केयर इंडिया की टीम के साथ किया निरीक्षण

खगड़िया, 30 नवंबर| स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण करने के लिए मंगलवार को नीति आयोग की टीम खगड़िया पहुँची। जहाँ स्वास्थ्य, आईसीडीएस, शिक्षा समेत अन्य विभागों का संबंधित विभाग के स्थानीय अफसरों के साथ निरीक्षण किया। जिसके दौरान टीम में शामिल कनन के नेतृत्व में सभी विभागों में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली गई । जिसके बाद संबंधित विभाग के अफसरों के साथ समीक्षात्मक बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान टीम ने जिला अस्पताल समेत जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों का भी निरीक्षण किया। जिसके दौरान टीम ने स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं को देखा और मौके पर मौजूद स्थानीय अफसरों से विस्तृत जानकारी ली। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं को और सुदृढ़ एवं मजबूत बनाने के लिए जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान अस्पताल में मौजूद मरीजों से भी अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली ।
– विभिन्न विभागों की ली गई विस्तृत जानकारी :
डीडीसी अभिलाषा कुमारी शर्मा ने बताया, केंद्र से आई नीति आयोग की टीम द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अलावा आईसीडीएस, शिक्षा समेत अन्य विभागों की भी विस्तृत जानकारी ली गई। जिसके बाद संबंधित विभागों के अफसरों के साथ समीक्षात्मक बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। वहीं, उन्होंने बताया, बुधवार को भी विभिन्न विभागों का टीम द्वारा निरीक्षण किया जाएगा।
– जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का किया गया निरीक्षण :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, दिल्ली से आई नीति आयोग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जिसके दौरान अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की बारीकी के साथ जानकारी ली गई । जिसके बाद समीक्षात्मक बैठक कर आवश्यक विचार-विमर्श किया गया ।
– टीम के साथ ये स्थानीय अफसर थे शामिल :
नीति आयोग की टीम के साथ स्थानीय अफसरों में डीडीसी अभिलाषा कुमारी शर्मा, सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, डीआईओ डाॅ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, डीटीओ-ऑन चंदन कुमार, डीटीओ-एफ हरे कृष्णा नायक समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी : सीएस

0

– जिले में विशेष वैक्सीनेशन अभियान के तहत मेगा कैंप का हुआ आयोजन, लोगों को दी गई वैक्सीन
– 04 और 14 दिसंबर को जिले में फिर होगा मेगा कैंप का आयोजन

लखीसराय, 30 नवंबर
कोविड-19 संक्रमण वायरस के प्रभाव को खत्म करने एवं जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसे और तेज गति देने के लिए मंगलवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। जिसके माध्यम से विभिन्न प्रखंडों में चिह्नित जगहों पर मेगा कैंप का आयोजन कर लोगों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी गई। ताकि वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस महामारी से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें । दरअसल, इस महामारी के प्रभाव को खत्म करने एवं संक्रमण के प्रभाव से दूर रहने के लिए वैक्सीन ही सबसे बेहतर विकल्प है।
– कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, इस महामारी से बचाव एवं इसके प्रभाव को खत्म करने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लेना जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि जो लोग अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं | वहीं जो व्यक्ति पहला डोज लेने के बाद दूसरा डोज लेने की निर्धारित समय पूरा कर चुके हैं, वह निर्धारित तिथि पर जरूर दूसरा डोज का वैक्सीनेशन कराएं। वहीं, उन्होंने बताया, लोगों को वैक्सीन लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके लिए जिले के सभी प्रखंडों में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। इसके अलावा घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान और जिले के विभिन्न प्रखंडों में 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर का भी संचालन नियमित तौर पर चल रहा है।
– वैक्सीन से वंचित एरिया को चिह्नित कर लगाया जाएगा वैक्सीनेशन शिविर :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, एक भी लोग वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो, इसको लेकर जिले में लगातार आवश्यक पहल की जा रही है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए मंगलवार को जिले के सभी प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। आगामी 04 और 14 दिसंबर को पुनः जिले में विशेष वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से ऐसे एरिया (गाँव) को चिह्नित कर शिविर का आयोजन किया जाएगा, जहाँ अब भी अधिक संख्या में लोग वैक्सीन से वंचित हैं। ताकि जिले के दुर्गम इलाके में आने वाले गाँव के भी शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और संक्रमण वायरस के प्रभाव से पूरा जिला सुरक्षित हो सके। साथ ही ईंट-भट्टा समेत अन्य जगहों पर कार्य करने वाले वैक्सीन से वंचित कामगारों को भी चिह्नित कर टीकाकृत किया जाएगा।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

विश्व एड्स दिवस आज : एड्स रोगी भी जी सकते हैं सामान्य जीवन

0

-एड्स के लक्षण दिखाई दे तो छुपाएं नहीं, इलाज करवाएं
-लोगों में जागरूकता फैलाने से एड्स जड़ से होगा खत्म

बांका, 30 नवंबर –

बुधवार को 1 दिसंबर है । 1 दिसंबर को पूरी दुनिया एड्स दिवस के रूप में मनाती है। इसका मुख्य मकसद लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है। इस बार का थीम वैश्विक एकजुटता है। यानी कि सभी लोग एकजुट होकर एड्स के प्रति जागरूकता फैलाएं और इसे जड़ से समाप्त करें। एड्स के प्रति लोगों को मन में तमाम तरह के भ्रम हैं, जिसे दूर करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। लोगों में जितनी जागरूकता बढ़ेगी, इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में उतनी मदद मिलेगी। कुछ लोग शर्म और बेइज्जती की वजह से भी एड्स जैसी गम्भीर बीमारी को छुपाते हैं। इस वजह से धीरे-धीरे बीमार पड़ने लगते हैं। सही जांच और जागरूकता की कमी के कारण मौत तक हो जाती है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में एड्स की मुफ्त में जांच की जाती और दवाएं भी दी जाती हैं।
एड्स का रोगी भी एक सामान्य जीवन जी सकता है-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि एड्स का रोगी भी एक सामान्य जीवन जी सकता है। अगर समय से सही इलाज हो और मरीज नियमित रूप से दवा लें। जिस तरह से हाईपरटेंशन के मरीज एक गोली खाकर लंबी जिंदगी जी सकते उसी तरह एड्स के मरीज भी दवा का सहारा लेकर सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसलिए अगर किसी को एड्स के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल इलाज करवाएं न कि इसे छुपाएं।
ऐसे फैलता है एड्स:
सामान्य तौर पर एड्स असुरक्षित यौन संबंध बनाने से, एचआईवी संक्रमित सुई या फिर सिरिन्ज का इस्तेमाल करने से, बिना जांच के रक्त लेने इत्यादि कारणों से एड्स फैलता है। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने को एड्स समझ लेते हैं, जो सही नहीं है। बल्कि एचआईवी पॉजिटिव होने के 8-10 साल के अंदर जब संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। तब उसे घातक रोग घेर लेते हैं और इस स्थिति को एड्स कहते हैं।
एड्स के ये हैं लक्षणः
एचआईवी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। अधिकतर मरीजों को सर्दी, जुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने का पता नहीं लगाया जा सकता। एचआईवी वायरस का संक्रमण होने के बाद उसके शरीर में धीरे-धीरे फैलना शुरू होता है। जब वायरस का संक्रमण शरीर में अधिक हो जाता उस समय बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। एड्स के लक्षण दिखने में आठ से 10 साल का समय भी लग सकता है। एड्स के कुछ प्रारम्भिक लक्षण हैं। जैसे वजन का काफी हद तक कम हो जाना, लगातार खांसी बने रहना, बार-बार जुकाम का होना, बुखार, सिरदर्द, थकान, शरीर पर निशान बनना, हैजा इत्यादि।
एड्स से ऐसे बचें:
एड्स पीड़ित साथी या व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। यौन संबंध बनाते वक्त कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। कंडोम इस्तेमाल करने में भी उसके फटने का खतरा रहता है। एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध नहीं रखें। खून को अच्छी तरह जांच कर ही उसे चढ़ाना चाहिए। कई बार बिना जांच के खून मरीज को चढ़ा दिया जाता है जो कि गलत है। इसलिए डॉक्टर को खून चढ़ाने से पहले पता करना चाहिए कि कहीं खून एचआईवी दूषित तो नहीं है। उपयोग की हुई सुई का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये एचआईवी संक्रमित हो सकते हैं। दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नाई से नया ब्लेड उपयोग करने के लिए कहना चाहिये।

लकी ड्रॉ से पुरस्कृत होंगे कोविड की दूसरी डोज लेने वाले लाभार्थी

0

● टीकाकरण को प्रोत्साहित करने के लिए लाभार्थियों को किया जाएगा पुरस्कृत।

●प्रत्येक सप्ताह एक लाभार्थी को मिलेगा बंपर तथा 10 को सांत्वना पुरस्कार।

जमुई, 29 नवम्बर ।
कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए टीके की दूसरी डोज लगवाने वाले को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार दिया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य समिति के निदेशानुसार डीएम अवनीश कुमार सिंह के नेतृत्व में कोविड -19 टीकाकरण के तहत द्वितीय डोज के आच्छादन में वृद्वि लाने के उद्देश्य से लाभार्थियों को उपहार देकर पुरस्कृत किया जाएगा।
राज्य में दूसरे डोज के लाभार्थियों के टीकाकरण में वृद्वि लाने के उद्देश्य को लेकर ड्यू लाभार्थियों द्वारा 07 दिनों के अंदर द्वितीय खुराक प्राप्त कर लिया जाता है तो उन्हें लक्की ड्रॉ के माध्यम से उपहार देकर पुरस्कृत किया जाएगा। कोविन पोर्टल के माध्यम से द्वितीय खुराक के लिए ड्यू लाभार्थियों में से जिन लाभार्थियों द्वारा उनके द्वितीय खुराक ड्यू होने के 07 दिनों के अंदर द्वितीय खुराक प्राप्त कर लिया जाता है तथा इनके टीकाकरण की स्थिति को पोर्टल पर नियत अवधि में अद्यतन कर दिया जाता है, उसी लाभार्थी को लक्की ड्रॉ के लिए योग्य पात्र माना जाएगा। लक्की ड्रॉ की अवधि 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गयी है। जिसके लिए लाभार्थियों के ड्यू खुराक की गणना के लिए 27 नवम्बर प्रथम दिन तथा 31 दिसंबर अंतिम दिन होगा। उक्त अवधि के दौरान साप्ताहिक लक्की ड्रॉ का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत 05 सप्ताह निर्धारित हैं। जिसमें प्रथम सप्ताह 27 नवम्बर से 03 दिसंबर , दूसरा सप्ताह 04 से 10 दिसंबर , तीसरा सप्ताह 11 से 17 दिसम्बर, चौथा सप्ताह 18 से 24 दिसम्बर तथा पांचवा सप्ताह 25 से 31 दिसम्बर तक रखा गया है।
27 नवम्बर से 03 दिसम्बर अर्थात प्रथम सप्ताह के लक्की ड्रॉ में चयनित विजेताओं का चयन 04 दिसम्बर को किया जाएगा तथा उन्हें आने वाले अगले शनिवार तक देय उपहार उपलब्ध कराया जाएगा। लक्की ड्रॉ के लिये निर्धारित समयावधि के दौरान प्रतिदिन कोविन पोर्टल से दूसरे डोज के ड्यू लाभार्थियों की सूची निश्चित रूप से संध्या 06 बजे अद्यतन किया जाएगा तथा संचयी रूप से अगले 07 दिनों तक इसका संधारण केयर इंडिया द्वारा उपलब्ध डीडीए के माध्यम से किया जाएगा। उक्त पुरस्कार योजना के तहत प्रति प्रखंड में एक विजेता को प्रति सप्ताह बम्पर पुरस्कार एवं 10 विजेता को प्रति सप्ताह सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा जो आगामी 05 सप्ताह तक आयोजित किया जाना है। सप्ताहिक विजेताओं में जिलावार सर्वोच्च पुरस्कार के लिए तीन विजेताओं का लक्की ड्रॉ के माध्यम से चयन कर पुरस्कृत किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि वर्णित तय तिथि के भीतर कोविड -19 से बचाव हेतु दूसरी डोज लेने वाले लकी ड्रॉ के जरिये चयनित लाभुकों को पुरस्कार के रूप में मिक्सर ग्राइंडर , गैस चूल्हा , वाटर फिल्टर , सीलिंग फैन , कंबल , इंडक्शन कुकटॉप , वाटर बोतल , कूकर , हेलमेट , डिनर सेट , टिफिन , फुटबॉल , क्रिकेट बैट , योगा मैट , दीवार घड़ी , 32 इंच एलईडी टीवी और डबल डोर रेफ्रिजरेटर उपहार स्वरूप दिया जाएगा।
उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि तय तिथि के भीतर कोविड – 19 से सम्बंधित टीका का दूसरा डोज लेकर स्वयं को संक्रमण से सुरक्षित करें और घोषित पुरस्कार योजना का लाभ उठाएं।