जिले में संचालित 9-टू-9 वैक्सीनेशन साइट पर लगातार चल रहा वैक्सीनेशन अभियान

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– केयर इंडिया के सहयोग से जिले के विभिन्न प्रखंडों में चल रहा है 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर
– सुविधाजनक तरीके से योग्य व्यक्तियों को दी जा रही है वैक्सीन

लखीसराय, 29 नवंबर।
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग सजग और संकल्पित है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जहाँ जिले में लगातार विशेष वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसे और तेज गति देने के लिए जिले में घर-घर दस्तक कार्यक्रम के तहत वैक्सीनेशन अभियान भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा केयर इंडिया के सहयोग से जिले के विभिन्न प्रखंडों में 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर पर भी लगातार नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। मिशन, एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का सुनिश्चित हो। वहीं, जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीनेशन से वंचित लोगों को चिह्नित कर एवं सेकेंड डोज लेने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दी जा रही है।

– वैक्सीनेशन से वंचित एक-एक व्यक्ति को चिह्नित कर किया जा रहा है वैक्सीनेटेड :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में विभिन्न प्रकार से आवश्यक पहल की जा रही है। जिसका सकारात्मक परिणाम भी मिल रहा है। इसके अलावा किसी भी स्थिति-परिस्थिति में एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे, इसको लेकर एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर अबतक वैक्सीन से वंचित लोगों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसे सार्थक रूप देने के लिए ही जिले के सभी प्रखंडों में घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से संबंधित क्षेत्र की एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी, डेटा ऑपरेटर समेत अन्य कर्मियों की टीम घर-घर जाकर वैक्सीन से छूटे व्यक्ति का वैक्सीनेशन करा रहे हैं। वहीं, उन्होंने बताया, सभी 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटरों पर वैक्सीन की दोनों डोज दी जाती है।

– सुविधाजनक तरीके से लोगों को दी जा रही है वैक्सीन :
जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान के दौरान हर जगह वैक्सीन लेने वाले योग्य व्यक्तियों की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। ताकि वैक्सीन लेने के दौरान लोगों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से सुरक्षित माहौल में वैक्सीन ले सकें। साथ ही हर जगह कोविड प्रोटोकॉल का पालन के साथ लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। ताकि वैक्सीनेशन के दौरान किसी प्रकार की कोई संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। इस महामारी से स्थाई निजात के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को वैक्सीन की पूरी डोज लेने की जरूरत है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– गर्म और ताजा खाना का सेवन करें।

पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें गर्भवती महिलाएं

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-सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
– गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से कराएं जाँच
– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, व्यक्तिगत साफ-सफाई का रखें ख्याल

खगड़िया, 29 नवंबर।
गर्भधारण के साथ ही हर महिला सुरक्षित और सामान्य प्रसव की पहली चाहत रखती है। किन्तु, यह आसान भी नहीं है। इसके लिए हर गर्भवती महिलाओं को खुद के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत होती है। खासकर इस कोरोना काल और गिरते तापमान के कारण बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति और सजग रहना चाहिए। दरअसल, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ्य बच्चे का जन्म हो सकता है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव संभव होगा, बल्कि स्वस्थ बच्चे का जन्म भी होगा।

– स्वस्थ माँ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को दे सकती हैं बढ़ावा :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, सुरक्षित और सामान्य प्रसव तभी संभव है जब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ्य रहेंगी। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ महिलाएँ स्वस्थ रहती हैं बल्कि गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ और मजबूत होता है।

– गर्भधारण के पूर्व शारीरिक और मानसिक रूप से रहें स्वस्थ :
अगर कोई महिला गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो उन्हें तीन-चार माह पूर्व से योजना बनानी चाहिए और सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहिए। ताकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियां उत्पन्न नहीं हो ।

– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व प्रसव होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की जटिल परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी उत्पन्न नहीं हो।
– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच की व्यवस्था की गई है। जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन और कैल्सियमयुक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

सदर अस्पताल में अलग-अलग ओपीडी में मरीजों का इलाज शुरू

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-गायनी, शिशु रोग, दंत रोग, मेडिसीन, सर्जरी, हड्डी और नेत्र रोग के लिए बना है अलग-अलग कक्ष
-सभी कक्ष के बाहर डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया, अलग-अलग ओपोडी रहने से मरीजों को भी मिलेगी राहत
भागलपुर, 29 नवंबर।
सदर अस्पताल में सोमवार से अलग-अलग ओपीडी में मरीजों का इलाज शुरू हो गया। नई व्यवस्था के तहत गायनी, शिशु रोग, दंत रोग, मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी और नेत्र रोग के मरीजों का अब अलग-अलग कक्ष में इलाज शुरू हो गया। सदर अस्पताल के चार नंबर कक्ष में सर्जरी, छह नंबर में हड्डी रोग, कक्ष संख्या नौ में मेडिसीन और ओपीडी के नेत्र विभाग में बने ओपीडी में नेत्र रोगियों का इलाज शुरू हो गया। वहीं कक्ष संख्या सात में स्त्री एवं प्रसव और कक्ष संख्या दो में दंत रोग के मरीजों का इलाज होना शुरू हुआ। सभी ओपीडी कक्ष के बाहर डिस्प्ले बोर्ड लगा दिया गया है।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार से सभी ओपीडी को चालू कर दिया गया है। साथ ही ओपीडी रोस्टर ड्यूटी को तैयार कर सभी डॉक्टरों को दे दी गई है। अब यहां पर बदली हुई व्यवस्था के तहत मरीजों का इलाज होगा। सभी डॉक्टरों को ड्यूटी पर तैनात रहने के सख्त निर्देश दिया गया है। डॉक्टर के ड्यूटी पर नहीं रहने और मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसे लेकर सभी लोगों को सख्त निर्देश दिया गया है।
ओपीडी कक्ष में लगाया गया बेडः सदर अस्पताल में शुरू हुए सभी नए-नए ओपीडी में मरीजों के लिए बेड भी लगाया गया है, ताकि डॉक्टर आसानी से मरीजों की जांच कर सके। जांच के बाद मरीजों में बीमारी की पहचान होने के बाद उसका आसानी से इलाज हो सके। बेड रहने से मरीजों की जांच करने में डॉक्टर को ज्यादा आसानी होगी। बेड नहीं रहने पर मरीजों की ठीक से जांच नहीं हो पाती है, लेकिन अब बेड लग जाने से डॉक्टरों को भी आसानी होगी। साथ ही मरीजों का भी बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा।
मरीजों को भीड़ से मिलेगी राहतः सदर अस्पताल में अलग-अलग ओपीडी में मरीजों का इलाज शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। अब एक जगह भीड़ ज्यादा नहीं लगेगी। इससे मरीजों में संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। भीड़ नहीं रहने से डॉक्टर भी इत्मीनान से मरीजों को देख सकेंगे। अधिक भीड़ रहने पर जल्दी-जल्दी में डॉक्टर देखते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। साथ ही मरीजों को भी चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। मरीज जिस बीमारी से ग्रसित है, उसी ओपीडी में जाकर अपना इलाज करा सकेंगे।

जिले में कालाजार के छिपे हुए मरीजों की होगी पहचान

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-सदर अस्पताल में इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू
– प्रशिक्षण शुक्रवार तक चलेगा
भागलपुर, 29 नवंबर।
जिले को जल्द से जल्द कालाजार से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। अब जिले में कालाजार के छिपे हुए मरीजों की पहचान की जाएगी। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण सोमवार को सदर अस्पताल में शुरू हुआ। यह प्रशिक्षण शुक्रवार 3 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार के मरीजों की कैसे पहचान करनी है, इसकी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण डीएमओ डॉ. कुंदन भाई पटेल, डीवीडीओ रविकांत कुमार, केटीएस संजीव कुमार, केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक और कालाजार के प्रखंड समन्वयक सुमंत कुमार दे रहे हैं।
सोमवार को प्रशिक्षण के दौरान डीएमओ डॉ. कुंदन भाई पटेल ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही कालाजार के मरीजों को भूख नहीं लगने, कमजोरी और वजन में कमी की भी शिकायत होती है। क्षेत्र में यदि ऐसे लक्षण वाले कोई मरीज मिले तो उसे तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। वहां पर उस व्यक्ति की रैपिड टेस्ट होगी। टेस्ट में अगर कालाजार की पुष्टि होती है तो उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल आने के लिए कहें। यदि इलाज में देरी होती है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा की परत भी सूख कर झड़ती है। डॉ. पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है।
जिलेभर में 300 कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा है प्रशिक्षणः डीवीडीओ रविकांत कुमार ने बताया कि कालाजार के मरीजों की पहचान के लिए जिले की 300 आशा कार्यकर्ताओं का चयन किया गया है। क्षेत्र में यही लोग रहती हैं, इसलिए इन्हें लोगों के बारे में सही जानकारी रहती है। किस व्यक्ति को किस चीज की बीमारी है, इसकी जानकारी रहने से कालाजार के मरीजों की पहचान में मदद मिलेगी। अगर किसी भी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई देंगे तो तत्काल जांच कराने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को कहा गया है।
नवगछिया और बिहपुर प्रखंड कालाजार से मुक्तः डीवीडीओ ने बताया कि जिले के नवगछिया और बिहपुर प्रखंड कालाजार से मुक्त हैं। बाकी 14 प्रखंडों में यह अभियान चलाया जाएगा। पहले जगदीशपुर प्रखंड भी कालाजार से मुक्त था, लेकिन पिछले दिनों वहां भी एक मरीज पाया गया है। इसलिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस साल अभी तक जिले में कालाजार के 14 मरीजों की पहचान हो चुकी है। प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को सिथेंटिक पायथाराइड के छिड़काव के बारे में भी जानकारी दी गई। छिड़काव के दौरान पूरे कमरे को खाली कराने से लेकर अन्य जानकारी दी गई। अब पूरी दीवार पर सिंथेटिक पायथाराइड का छिड़काव कराना है। यह सुनिश्चित कराने के लिए आशा कार्य़कर्ताओं को कहा गया।
कालाजार की रोकथाम को लेकर विभाग अलर्ट: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम जल्द ही किया जाएगा। डॉ. पटेल ने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई।

एसजेएमसी में मनाया गया राष्ट्रीय संविधान दिवस

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– एसजेएमसी में 72वां राष्ट्रीय संविधान दिवस मनाया गया
– संवैधानिक दायित्व और समकालीन भारतीय मीडिया पर परिचर्चा आयोजित की गई
– संविधान की प्रस्तावना के पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई

पटना:
बिहार सरकार द्वारा आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में स्थापित स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में आज 72वां राष्ट्रीय संविधान दिवस मनाया गया जिसमें एमए प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस मौके पर एक परिचर्चा आयोजित की गई जिसका विषय था “संवैधानिक दायित्व और समकालीन भारतीय मीडिया”।
इस विषय पर अनन्या कुमारी, निखिल कुमार, शुभम कुमार, फहद फातमी और पूजा भगत ने अपने विचार प्रस्तुत किए। शुभम कुमार को प्रथम पुरस्कार मिला।
अनन्या ने अनुच्छेद 19 1 (ए) पर बात की और सुझाव दिया कि भारतीय मीडिया को अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। निखिल कुमार ने कहा कि प्रेस जो कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, उसकी भूमिका जनता को उनके अधिकारों और जिम्मेदारी का एहसास कराना है। शुभम कुमार ने यह कहकर चर्चा में योगदान दिया कि कोई भी स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है, इसलिए मीडिया को तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करना चाहिए। फहद फातमी ने मीडिया के पक्ष में मौजूद कानून के बारे में बात की। पूजा भगत ने कहा कि मीडिया हमारे समाज में छिपे तथ्यों को उजागर करता है।
इस अवसर पर निदेशक डॉ. इफ्तेखार अहमद, समन्वयक, डॉ मनीषा प्रकाश और संकाय सदस्य डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ अफाक हैदर और डॉ अमित कुमार उपस्थित थे।
इससे पहले भारत के संविधान की प्रस्तावना के पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

गर्भ में पल रहा शिशु अगर विकृत है तो गर्भ समापन वैध

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• आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन और समता ग्राम सेवा संस्थान के तत्वावधान में प्रशिक्षण का हुआ आयोजन
• जीविका दीदियों को सुरक्षित गर्भ समापन के बारे में दी गयी जानकारी
• 56 जीविका दीदियों को किया गया प्रशिक्षित
पटना/ 27 नवंबर- किसी महिला का गर्भवती होना उसके साथ पूरे परिवार के लिए हर्ष का समय होता है. लेकिन किसी कारणवश गर्भस्थ शिशु में कोई विकृति नजर आये तो यह सबके लिए चिंता और दुर्भाग्य का विषय होता है. एम.टी.पी. एक्ट के तहत अगर गर्भ में पल रहा शिशु विकृत अथवा अनियमित विकास से ग्रसित हो तो ऐसे शिशु का गर्भकाल के 20 सप्ताह तक चिकित्सकों द्वारा गर्भ समापन वैध है. इन बातों का प्रशिक्षण आज जीविका समूह की दीदियों को पटना सदर अंचल अंतर्गत कुर्जी के बिन टोली गाँव में 56 जीविका दीदियों को दिया गया. उक्त प्रशिक्षण का आयोजन आई पास संस्था और ग्राम सेवा संस्थान के तत्वावधान में किया गया.
गर्भ में पल रहा शिशु अगर विकृत है तो गर्भ समापन वैध:
सभी जीविका दीदियाँ जो विभिन्न समूहों से आती हैं उन्हें कार्यशाला में बताया गया की सुरक्षित गर्भ समापन कब और किन परिस्थितियों में जायज है.कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को विस्तारपूर्वक बताया गया कि वैध गर्भ समापन हमेशा प्रशिक्षित डॉक्टर के द्वारा ही सरकारी अस्पताल या सरकार से मान्यता प्राप्त नर्सिंग होम अस्पताल में मुफ्त में गर्भकाल के 20 सप्ताह तक समापन किया जा सकता है और यह वैध है.
उक्त कार्यशाला का संचालन और जीविका दीदियों का प्रशिक्षण आई पास संस्था की अन्वेषक पदाधिकारी श्रीमती विजयलक्ष्मी, समता ग्राम सेवा संस्थान के महामंत्री श्री रघुपति एवं श्री श्याम कुमार द्वारा किया गया.

निर्धारित समय पर कराएं कोविड सेकेंड डोज का वैक्सीनेशन और पाएं उपहार

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– निर्धारित एवं इसके बाद एक सप्ताह के अंदर भी सेकेंड डोज लेने वाले लाभार्थियों किया जाएगा पुरस्कृत
– 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक लकी ड्रा के माध्यम से किया जाएगा पुरस्कृत

खगड़िया, 26नवंबर।
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो, इसे सुनिश्चित करने को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए अग्रसर है। जिसे सफल बनाने के लिए जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। वहीं, सेकेंड डोज अभियान को भी गति देने के लिए भी हर जरूरी निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस बार निर्धारित समय पर एवं निर्धारित समय के बाद एक सप्ताह के अंदर वैक्सीन की दूसरा डोज लेने वाले लाभार्थियों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का दोनों डोज सुनिश्चित हो सके और सेकेंड डोज अभियान को भी गति मिल सके। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोग इस महामारी से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

– 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक लकी ड्रा के माध्यम से किया जाएगा पुरस्कृत :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, निर्धारित समय पर एवं निर्धारित समय के बाद एक सप्ताह के अंदर सेकेंड डोज लेने वाले लाभार्थियों को पुरस्कृत करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उन्होंने बताया, 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक लकी ड्रा के माध्यम से ऐसे लाभार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। वहीं, उन्होंने बताया, सेकेंड डोज अभियान को गति देने के लिए ऐसी पहल का निर्णय लिया गया है। इससे ना सिर्फ अभियान को गति मिलेगी। बल्कि, इस महामारी से लोग सुरक्षित भी होंगे।

– 27 नवंबर से शुरू होगी ड्यू गणना और 31 दिसंबर को होगा समापन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, लाभर्थियों के ड्यू खुराक की गणना के लिए 27 नवंबर पहला दिन और 31 दिसम्बर 2021 अंतिम दिन होगा। इस दौरान प्रखण्ड स्तर पर साप्ताहिक लकी ड्रा का भी आयोजन किया जाएगा। इसके लिए 27 नवंबर 2021 से 31 दिसम्बर तक कुल पांच सप्ताह निर्धारित है। जिसमें पहला सप्ताह 27 नवंबर से 3 दिसम्बर तक, 4 से 10 दिसम्बर तक, 11 से 17 दिसम्बर तक, 18 से 24 दिसम्बर तक और 25 से 31 दिसम्बर तक है। 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक अर्थात पहले सप्ताह के लकी ड्रा से चयनित विजेताओं/लाभार्थियों का चयन 4 दिसम्बर को किया जाएगा एवं आने वाले अगले शनिवार तक देय उपहार उपलब्ध करा दी जाएगी। लकी ड्रा के लिए निर्धारित समयावधि के दौरान प्रतिदिन कोविन पोर्टल से द्वितीय खुराक के ड्यू लाभाथियों की सूची को अचूक रूप से शाम 6 बजे तक अपडेट करने के साथ संचयी रूप से अगले 7 दिनों तक इसका संधारण केयर इंडिया के द्वारा उपलब्ध कराए गए डीडीए द्वारा किया जाएगा। संकलित आंकड़ों में से द्वितीय खुराक का टीका लकी ड्रा के पात्रता अनुरूप प्राप्त लाभर्थियों की सूची संधारित की जाएगी । लकी ड्रा के लिए सम्मलित करते हुए पत्र के साथ संलग्न एसओपी में निर्धारित दिशा-निर्देश के अनुसार विजेता को पुरस्कृत किया जाएगा।

– घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत लोगों को दी जा रही है जानकारी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जिले में चल रहे घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निर्धारित समय पर सेकेंड डोज का वैक्सीन लेने पर विभाग द्वारा पुरस्कृत करने की जानकारी दी जा रही है। ताकि योग्य लाभार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके और वह निर्धारित समय पर वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा जिले में नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान जारी है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।

नियमित टीकाकरण : गर्भवती और शिशु का कोविड वैक्सीनेशन के साथ जारी है नियमित टीकाकरण

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– तमाम चुनौतियों के बाबजूद जिले में नियमित तौर पर जारी है नियमित टीकाकरण
– ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन, गर्भवती महिलाओं व बच्चों को लगाया गया टीका

लखीसराय, 26 नवंबर।
जिले में कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ नियमित तौर पर लगातार नियमित टीकाकरण अभियान भी जारी है। ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय टीकाकरण हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। हालाँकि, जिले में लगातार चल रहे कोविड वैक्सीनेशन के कारण स्वास्थ्य विभाग को कर्मियों की कमी समेत अन्य परेशानियाँ का सामना जरूर करना पड़ रहा है। किन्तु, तमाम चुनौतियों को दरकिनार कर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति अग्रसर है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगातार कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जहाँ संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं सहायिका व आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती एवं शिशु का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं, कोविड वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है। इस दौरान नियमित टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह दी जा रही है और गर्भावस्था के दौरान खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, इस दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन एवं सुरक्षा के मद्देनजर हर मानकों का ख्याल रखा जाता है।

– जिले में जारी है नियमित टीकाकरण :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले में कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ नियमित टीकाकरण अभियान भी लगातार जारी है। जो जाने-अनजाने में नियमित टीकाकरण नहीं करवा पाई है, वह पूर्व की तरह निर्धारित दिन पर अपने नजदीकी ऑगनबाड़ी केंद्र में आकर टीकाकरण करवा सकती हैं। ताकि ससमय आपका नियमित टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। प्रत्येक सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण किया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया, इस दौरान कोविड वैक्सीनेशन के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

– परिवार नियोजन को लेकर महिलाओं को किया जा रहा है जागरूक :
नियमित टीकाकरण के दौरान मौजूद महिलाओं को परिवार नियोजन अभियान को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जिसमें उन्हें परिवार नियोजन अपनाने से होने वाले फायदे की विस्तार से जानकारी जाती एवं बच्चों के जन्म में कम से कम से दो साल का अंतराल रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। ताकि परिवार नियोजन पखवाड़ा को सफल बनाने के लिए महिलाएं आगे आ सकें। इसके अलावा गर्भवती की एएनसी जाँच की जाती है। जिसमें बीपी, वजन, सुगर समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच की जाती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया जाता है। साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी जाती है।

– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया जाता है कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती है और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

सदर अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी

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– कार्यक्रम में केयर इंडिया द्वारा जीएनएम, एएनएम, ममता सहित सफाई कर्मियों को दी गयी ट्रेनिंग

– कर्मियों को लाल, पीला, नीला और काला डिब्बा के उपयोग के बारे में दी गई जानकारी

मुंगेर, 26 नवंबर । सदर अस्पताल स्थित प्रसूति वार्ड में शुक्रवार को केयर इंडिया की टीम के द्वारा सभी स्वास्थ्य कर्मियों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी दी गई। इस अवसर पर केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू और उनकी टीम ने प्रसूति वार्ड में उपस्थित सभी जीएनएम, एएनएम, ममता कार्यकर्ता, सफाई कर्मी और सुरक्षा कर्मियों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के कचरा को जमा करने के लिए अलग-अलग लाल, काला, नीला और पीला रंग के कचरा के डब्बे में जमा किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कचरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किस रंग के डब्बे में किस प्रकार का कचरा जमा करना है ताकि सफाई कर्मियों को कचरा साफ करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नही हो।
स्वास्थ्य कर्मियों को सम्बोधित करते हुए केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित सभी स्वास्थ्य कर्मियों खासकर जीएनएम और एएनएम को विशेष तौर पर अस्पतालों में किस तरह से जैव चिकित्सकीय कचरों का प्रबंधन करना है इस संबंध में विस्तार से जानकारी देने के साथ ही इससे जुड़ी तमाम तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।
उन्होंने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट के कलेक्शन के लिए सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। विभिन्न हॉस्पिटलों में बायो मेडिकल कलेक्शन के बन जाने से एक ही स्थान से पूरे हास्पिटल का कचरा इक्कठा किया जाता है। इससे लोगों में इन्फेक्शन के फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाता है। लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में काम करने के दौरान बचे बायो मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना अति आवश्यक है ताकि इस कचरे से कोई भी संक्रमण का शिकार न हो।

बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत चार अलग- अलग रंग के डस्टबिन में करना है जैविक चिकित्सकीय कचरे का संग्रहण :
डॉ. नीलू ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत अलग -अलग रंग के डस्टबिन में अलग -अलग जैविक चिकित्सकीय कचरे को जमा करना है।
पीला डस्टबिन – मानव शरीर का खून से सना आंतरिक भाग जो ऑपरेशन के दौरान निकलता है। इसके साथ ही बैंडेज, कॉटन अन्य सभी वेस्ट प्रोडक्ट जिसको जलाया या भस्मीकरण किया जा सके।
लाल डस्टबिन : माइक्रो बायोलॉजिकल या माइक्रो
टेक्नीकल पदार्थ जैसे लचीला ग्लब्स, कैथेटर, सिरिंज या रिसाइकल होने वाले सभी प्लास्टिक से बने पदार्थ ।

नीला / उजला डस्टबिन : सभी तरह के शीशा से बोतल और टूटे ग्लास का हिस्सा । इसके साथ ही डिस्करडेड मेडिसिन्स और कठोर प्लास्टिक।

काला डस्टबिन : बिना सिरिंज का निडील, ब्लेड्स और धातु से बने सभी प्रकार के वेस्ट प्रोडक्ट ।

रेशमा कोरोना का टीका लेकर दूसरों को भी कर रही प्रेरित

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-गर्भवती महिलाओं का कोरोना टीका के प्रति भ्रम हो रहा दूर
-गोराडीह प्रखंड के पिथना की बीबी रेशमा कर रही जागरूक
भागलपुर, 26 नवंबर।
कोरोना टीका के प्रति अब गर्भवती महिलाओं का भी भ्रम टूट रहा है। इस वजह से न सिर्फ वह कोरोना का टीका ले रही , बल्कि दूसरी गर्भवती महिलाओं को भी कोरोना का टीका लेने के लिए जागरूक कर रही हैं। जिले के गोराडीह प्रखंड के पिथना गांव की बीबी रेशमा को भी पहले कोरोना का टीका लेने में डर लग रहा था, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उसे समझाया तो वह समझ गई। अब उसने न सिर्फ कोरोना का टीका ले लिया है, बल्कि दूसरी गर्भवती महिलाओं को भी टीका लेने के लिए कह रही हैं।
रेशमा कहती हैं कि किसी भी नई चीज के बारे में शुरुआत में लोगों को कम जानकारी रहती है। इस वजह से लोगों में झिझक रहती है। लेकिन समय के साथ जब जानकारी बढ़ जाती और उससे फायदा होने की बात रहती है तो लोग उसका समर्थन करने लगते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। पहले कोरोना टीका के बारे में नहीं जानती थी। इसलिए थोड़ा बचकर रहती थी। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीका लेने से मेरे साथ बच्चे को भी फायदा होगा तो मैंने जल्द से जल्द ले लिया। अब मेरे संपर्क में जितनी भी महिलाएं हैं, सभी को मैं इसके फायदे गिना रही हूं। कुछ ने तो कोरोना का टीका ले भी लिया।
कोरोना गाइडलाइन का भी कर रही पालनः रेशमा कहती है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जागरूकता कार्य़क्रम के दौरान समझाया कि कोरोना का टीका लेने के बाद भी लोगों को अभी सतर्क रहना है। कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना है। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाना और सामाजिक दूरी का पालन करना है। इस पर मैं अमल कर रही हूं। इस स्थिति में घर से बाहर तो जाना कम ही होता है, लेकिन घर के अंदर सामाजिक दूरी का पालन मैं अवश्य करती हूं। साथ ही घर के अन्य सदस्यों से भी करवाती हूं। इसके अलावा जिसे कोरोना का टीका लेने के लिए कहती हूं, उसे भी इसका पालन करने के लिए कहती हूं।
घर-घर दस्तक अभियान हो रहा सफलः केयर इंडिया के डीटीओ डॉ. असद जावेद कहते हैं कि घर-घर दस्तक अभियान के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना टीका लेने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। खासकर डॉक्टर या अन्य स्वास्थ्यकर्मी जब लोगों के घर जाकर टीका के बारे में बताते हैं तो लोगों पर इसका असर होता है। उन्हें लगता है कि ये हमारे फायदे के लिए ही तो घर पर आए हैं। यही कारण है कि अब गर्भवती महिला भी बड़ी संख्या में कोरोना का टीका लेने के लिए सामने आ रही हैं।