“क्वेस्ट” कार्यक्रम के तहत शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

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• लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता के तत्वावधान में डीएवी स्कूल, परसा में हुआ कार्यशाला का आयोजन
• 25 शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
• सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की गयी स्थापित
• स्कूल के 300 से ज्यादा बच्चों की हुई निशुल्क नेत्र जांच
पटना/ 20 नवंबर-
जिला में प्रथम लायंस “क्वेस्ट” शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता के तत्वावधान में डीएवी स्कूल, परसा बाजार में 19 एवं 20 नवंबर को हुआ. डीएवी परसा बाजार के प्रधानाध्यापक सुमंत घोष ने दीप प्रज्वलित कर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया. लायंस क्लब इंटरनॅशनल की लायन पूनम राज ने कार्यशाला में प्रशिक्षु शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया एवं कार्यशाला का संचालन किया.
25 शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण:
दो दिवसीय कार्यशाला में स्कूल के 25 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया. इसके उपरांत शिक्षक स्कूल के किशोर छात्रों को किशोर/किशोरी स्वास्थ्य, जीवन की सही दिशा एवं स्वस्थ जीवनशैली के लिए तैयार करेंगे. मुख्य प्रशिक्षक पूनम राज ने बताया, प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को एक स्वस्थ और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है.प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन लायंस क्लब, पटना की गवर्नर लायन नम्रता सिंह ने किया.
सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की गयी स्थापित:
डीएवी स्कूल, परसा बाजार के प्रांगन में लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता के सौजन्य से एक सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की स्थापना की गयी. इस अवसर पर लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता की अध्यक्ष लायन नीता मिश्रा ने बताया किशोरावस्था जीवनकाल का सबसे संवेदनशील समय होता है और इस समय बच्चों में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं. इस समय उन्हें सही परामर्श देना सभी अभिभावकों एवं शिक्षकों की जिम्मेदारी है. किशोरियों में माहवारी स्वास्थ्य को लेकर इस समय असमंजस की स्थिति रहती है और ऐसे में इन्हें इस समय स्वच्छता के महत्त्व का ज्ञान होना जरुरी है. सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन द्वारा स्कूल की छात्राओं को सुविधा मिलेगी और वे माहवारी के दौरान कपड़ों का इस्तेमाल करने से बचेंगी.
स्कूल के बच्चों की हुई निशुल्क नेत्र जांच:
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आज शनिवार को डीएवी स्कूल, परसा बाजार के 300 से अधिक बच्चों की निशुल्क नेत्र जांच की गयी. लायंस क्लब द्वारा संचालित श्री साईं नेत्रालय के चिकित्सकों द्वारा निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया.
इस अवसर पर लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता की अध्यक्ष नीता मिश्रा एवं क्लब के सदस्य नंदा गर्ग, अनुपम श्रीवास्तव, सुनीता झुनझुनवाला, मौसमी दासगुप्ता, एवं अम्बरी रहमान ने दो दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज करायी.
ये है “क्वेस्ट” कार्यक्रम:
लायंस क्लब द्वारा संचालित “क्वेस्ट” कार्यक्रम किशोर एवं किशोरियों को जीवन की सही दिशा दिखाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य की महत्ता एवं एवं किशोरों की मानसिकता को समझकर उचित परामर्श देना“क्वेस्ट” कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है. किशोर/ किशोरियों तक इन बातों की सही जानकारी एवं उन्हें दिशा देने के लिए स्कूल के शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया

घर-घर जाकर टीबी मरीजों की हो रही पहचान

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-टीबी मरीज मिलने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जा रहा
-जिला को टीबी से मुक्त कराने को स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध
भागलपुर, 20 नवंबर।
जिला को 2025 से पहले टीबी से मुक्त कराना है। इसे लेकर जिला स्वास्थ्य समिति ने पूरी ताकत झोंक दी है। स्वास्थ्य विभाग को इस काम में कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) भी सहयोग कर रहा है। टीबी मरीजों की पहचान को लेकर जगह-जगह कैंप लगाने के साथ ही अब घर-घर जाकर भी टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसी सिलसिले में स्वास्थ्य विभाग और केएचपीटी की टीम रहमतनगर में 223 लोगों के घर गई। इस दौरान टीबी के तीन मरीज मिले। सभी मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
स्कूली बच्चों को किया जागरूकः उधर, मोहद्दीनगर स्थित मध्य विद्यालय में टीबी को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। स्कूल आए 222 बच्चों को टीबी से बचाव और इलाज की जानकारी दी गई। मौके पर 8 शिक्षक भी मौजूद थे। सभी लोगों को सही पोषण का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। यहां पर भी सभी लोगों की जांच की गई। जांच में कोई भी बच्चा या फिर शिक्षक टीबी के मरीज नहीं निकले।
छात्रों को दिलाई गई शपथः वहीं सुल्तानगंज स्थित आदर्श मध्य विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को टीबी उन्मूलन को लेकर शपथ दिलाई गई। साथ ही सभी लोगों को टीबी के लक्षण, इसके निःशुल्क इलाज और इलाज के दौरान पोषण योजना से मिलने वाले लाभ के बारे में बताया गया। इस दौरान स्कूल में 350 बच्चे और 19 शिक्षक मौजूद रहे।
संतुलित आहार लेः सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को टीबी से बचने के लिए सलाह दी जा रही है। लोग उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए सही पोषण भी जरूरी है। अगर सही पोषण नहीं मिलेगा तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाएंगे और उस पर टीबी की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए। आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और मिनरल्स की मात्रा जरूर होनी चाहिए।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके मेः डॉ. शर्मा ने कहा कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण कर जन्म से शारीरिक रूप से कमजोर शिशु का कर रहीं स्वास्थ्य परीक्षण, दी जा रही आवश्यक सलाह

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– केयर इंडिया की टीम के सहयोग से नियमित तौर पर शिशु का किया जा रहा है स्वास्थ्य अवलोकन
– कमजोर शिशु के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दी जा रही आवश्यक जानकारी

लखीसराय, 19 नवंबर।
जिले में जन्म से शारीरिक रूप से कमजोर शिशु को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग और संकल्पित है। इसको लेकर ऐसे शिशुओं का गृह भ्रमण कर नियमित तौर पर लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र की स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं को दी गई। इसके अलावा केयर इंडिया की टीम भी तकनीक रूप से भी भरपुर सहयोग कर रही है। वहीं, इसे सार्थक रूप देने के लिए जिलेभर की आशा कार्यकर्ता केयर इंडिया की टीम के सहयोग से गृह भ्रमण कर नियमित तौर पर कमजोर नवजात शिशुओं का लगातार स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। ताकि ऐसे शिशुओं को ससमय समुचित स्वास्थ्य सुविधाऐं उपलब्ध कराई जा सके और शिशु जल्द से जल्द से पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सके। साथ ही शिशु के माता-पिता समेत अन्य अभिभावकों को शिशु के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के साथ स्वस्थ्य शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारी दी जा रही है और किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत योग्य चिकित्सकों से जाँच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि शिशु का आवश्यकतानुसार समय पर उचित इलाज हो सके और किसी प्रकार की बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

– कमजोर जन्म लेने वाले शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए गृह भ्रमण कर जाना जाता है स्वास्थ्य का हाल :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, शारीरिक रूप से कमजोर जन्म लेने वाले नवजात शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए गृह भ्रमण कर जन्म के बाद पहले और दूसरे दिन लगातार उनका हाल जाना जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है, शिशु में जन्म के बाद से कितना शारीरिक विकास हुआ। उनके वजन में कितनी वृद्धि हुई समेत अन्य स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी ली जाती है। जिसके बाद आवश्यकतानुसार आवश्यक सलाह दी जाती है। वहीं, बताया, इसके बाद भी लगातार ऐसे शिशु का ध्यान रखा जाता है।

– स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है प्रेरित :
इस दौरान शिशु की माँ को शिशु के बेहतर, मजबूत तथा स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान यह जानकारी दी जा रही है कि रात में कम से कम शिशु को तीन से चार बार और दिन में 10 से 12 बार स्तनपान कराएं और इस सिलसिले को बच्चे के जन्म के बाद छः माह तक जारी रखें। इसके बाद ही ऊपरी आहार दें। तभी शिशु का सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास होगा और वह आगे भी ना सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत रहेगा बल्कि, शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होगी। वहीं, ठंड के मौसम में ऐसे शिशु की देखभाल समेत बरती जाने वाली अन्य सावधानियां के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

– साफ-सफाई की भी दी जा रही है जानकारी :
इस दौरान शिशु की माँ समेत अन्य परिवार वालों को साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखने की जानकारी दी जा रही है। जिसमें बताया गया, खासकर बीमार लोग शिशु को छूने के पूर्व निश्चित रूप से अपने हाथों की सफाई अच्छी तरीके से कर लें। शिशु को गीला कपड़ा पर नहीं सुलाएं और ना ही पहनाएं। आवश्यकतानुसार शिशु का कपड़ा बदलते रहें। व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी ख्याल रखें। घर समेत अन्य आसपास परिसर को भी साफ रखें। इससे ना सिर्फ शिशु सुरक्षित रहेंगे बल्कि, अन्य लोग भी सुरक्षित रहेंगे। साफ-सफाई हर किसी के लिए जरूरी है और इससे लोग कई प्रकार की बीमारियों से भी दूर रहते हैं। इसके बावजूद जच्चा-बच्चा किसी को भी किसी प्रकार की परेशानी हो तो तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। या फिर यहाँ के स्थानीय आशा कार्यकर्ता को सूचना दें। आपको तुरंत आवश्यक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अफवाहों से दूर रहें और एहतियात जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें और गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।

ऑगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन के साथ वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन -वैक्सीन से वंचित लोगों को किया गया टीकाकृत

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– छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन, -पौष्टिक आहार के महत्व की दी गई जानकारी
– अन्नप्राशन के साथ कोविड से बचाव की दी गई जानकारी और वैक्सीनेशन के प्रति किया गया जागरूक

खगड़िया, 19 नवंबर।
शुक्रवार को जिले के सभी प्रखंडों में संचालित ऑगनबाड़ी केंद्रों पर कोविड-19 गाइडलाइन के पालन के साथ अन्नप्राशन एवं वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन हुआ। जिसके माध्यम से जहाँ जिले के सभी सेविका-सहायिका ने अपने-अपने पोषक क्षेत्र में छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों का अन्नप्राशन कराया वहीं, हेल्थ टीम द्वारा वैक्सीनेशन से वंचित लोगों को टीकाकृत किया गया। साथ ही बच्चे की माँ को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी गई। ताकि बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण हो सके। वहीं, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर उचित पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। दरअसल, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण की दिशा में सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है।

– अन्नप्राशन के साथ कोविड से बचाव की जानकारी और वैक्सीनेशन के प्रति किया गया जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित ऑगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन कार्यक्रम के दौरान वैक्सीनेशन शिविर का भी आयोजन किया गया। जिसके दौरान मौजूद बच्चे के अभिभावकों को कोविड से बचाव की जानकारी दी गई और इस महामारी से स्थाई निजात के लिए वैक्सीनेशन के प्रति भी जागरूक किया गया। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और एक भी व्यक्ति वैक्सीन लेने से छूटे नहीं। साथ ही मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन, हाथों को हमेशा साफ रखने, लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराने समेत अन्य प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।

– अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी : –
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ्य शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया गया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और जन्म से छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं। तभी बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण हो पाएगा। इसके अलावा 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी।चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।

– पौष्टिक आहार की महत्ता की दी गई जानकारी :-
वहीं, केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।

– इन बातों का रखें ख्याल : –
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से मिली मदद, पानीपुरी विक्रेता विजय कुमार के गॉलब्लाडर का हुआ सफल ऑपरेशन

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– मुंगेर स्थित प्राइवेट सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हुआ विजय कुमार का ऑपरेशन

– गॉल ब्लाडर के ऑपरेशन के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत विजय कुमार को मिली 22, 500 रुपये कि आर्थिक मदद

मुंगेर, 19 नवंबर
प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजनांतर्गत आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनने के बाद मुंगेर के लाभुकों को इलाज में आर्थिक सहायता मिल रही है। इस योजना के तहत मुंगेर के घोषी टोला निवासी पानीपुरी का व्यवसाय करने वाले 43 वर्षीय विजय ने पिछले 9 मार्च 2021 को मुंगेर स्थित सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड में अपने गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन करवाया । इस बीमारी से वो 2016 से पीड़ित थे। इस दौरान वो कई डॉक्टरों से सम्पर्क किए लेकिन पांच परिवार में पानीपुरी बेचकर अपना परिवार चलाने वाले विजय कुमार 6,500 रुपए की मासिक आय में गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन करवाने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। इसी क्रम में अपने मित्र से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान गोल्डन कार्ड से 5 लाख तक के इलाज में आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी मिलने के बाद उम्मीद की किरण जगी। आयुष्मान गोल्डेन कार्ड बन जाने के बाद विजय कुमार ने भी इस योजना के अंतर्गत अपने गॉलब्लाडर के ऑपरेशन में सरकार से 22,800 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त की।

इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने वाले विजय कुमार पांच लोगों के परिवार में एक मात्र कमाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि मेरे परिवार में पत्नी 33 वर्षीय चंदा देवी के अलावा 75 वर्षीय मां राधा देवी, चौथी कक्षा में पढ़ने वाला 10 साल का बेटा और एलकेजी में पढ़ने वाली 5 वर्षीय बेटी आयुषी कुमारी है। इन सभी के पालन पोषण की पूरी जिम्मेवारी मेरे ऊपर ही है। लेकिन पिछले चार वर्षों से गॉल ब्लाडर में परेशानी की वजह से मैं हमेशा बीमार रहता था। मैं अपने घर के सामने ही पानीपुरी का ठेला लगता हूँ जिसमें मेरी पत्नी भी मेरी मदद करती है। अखबारों में विज्ञापन और अपने मित्र से आयुष्मान भारत योजना की जानकारी मिलने के बाद मैने अपना आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाया । इस कार्ड की मदद से मुंगेर स्थित सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में विगत 9 मार्च 2021 को मेरे गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन संभव हो पाया। इस दौरान लगभग 9 दिनों तक मैं हॉस्पिटल में भर्ती रहा । इस दौरान ऑपरेशन और पूरे इलाज में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत आर्थिक सहायता के रूप में मुझे 22, 800 रुपये प्राप्त हुए। सरकार के द्वारा यह योजना चलाने से मेरे जैसे कितने परिवार के लोग जो किसी न किसी गम्भीर बीमारी से पीड़ित और पैसों के अभाव में अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं उनके जान में जान है। अब मेरे जैसे गरीब से गरीब व्यक्ति भी निजी या सरकारी किसी अस्पताल में 5 लाख तक इलाज में आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकता है।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) ज्योति कुमारी ने बताया कि जिला में लगातार लाभुकों का आयुष्मान गोल्डन ई.कार्ड बनाने का काम जारी है। इसके साथ ही इस कार्ड की मदद से जिला सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ दो प्राइवेट हॉस्पिटल सिटी क्रिटिकल और जीवन अवतार हॉस्पिटल में लगातार लाभुकों का इलाज और ऑपरेशन किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुंगेर के घोषी टोला निवासी पानीपुरी का व्यवसाय करने वाले विजय कुमार और बिचा गांव मुंगेर के रहने वाले मनोज कुमार साह का मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन हुआ है।

जिले में टीबी मरीजों को चिह्नित करने के लिए चल रहा अभियान

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-कैंप लगाकर लोगों की जा रही जांच, मरीजों को इलाज की दी जा रही सलाह
-कैंप में मौजूद लोगों को टीबी से बचाव और इसके इलाज की दी जी रही है जानकारी

भागलपुर, 19 नवंबर
टीबी उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसी सिलसिले में स्वास्थ्य विभाग कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से जिलेभर में स्क्रीनिंग कैंप लगा रहा है। कैंप में जांच के बाद लक्षण वाले मरीज मिलने पर उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जांच और इलाज के लिए भेजा जा रहा है। इसी सिलसिले में नवगछिया के उर्दू मध्य विद्यालय में कैंप लगाया गया, जहां पर कि 150 लोगों की जांच हुई। इसमें 10मरीज चिह्नित हुए। सभी लोगों को नवगछिया अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी गई। साथ ही मौके पर मौजूद लोगों को टीबी से बचाव और इलाज के बारे में जानकारी दी गई। इसी तरह कहलगांव के वार्ड नंबर 5 और 6 में भी स्क्रीनिंग कैंप लगाया गया। यहां पर 75 लोगों की जांच की गई। इनमें से चार लोग लक्षण वाले मिले। सभी लोगों को जांच और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया। यहां पर भी मौजूद लोगों को टीबी से बचाव और इलाज की जानकारी दी गई।
टीबी को हल्के में नहीं लेः सीडीओ डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी समाप्त हो जाएगा।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः केएचपीटी की आरती झा ने बताया कि टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।

गर्भवती महिला कोरोना का टीका लेने में नहीं करें संकोच

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-गर्भस्थ बच्चे को भी कोरोना का टीका लेने से होगा फायदा
-कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान है जारी
बांका, 19 नवंबर

जिले में कोरोना टीकाकरण अभियान लगातार चल रहा है। काफी संख्या में लोगों ने टीके की पहली डोज ले ली है। अब कोरोना टीका की दूसरी डोज पर स्वास्थ्य विभाग फोकस कर रहा है। हालांकि अभी कुछ लोग हैं जिन्होंने पहली डोज नहीं ली है। ऐसे लोगों को जागरूक कर कोरोना का टीका देने का अभियान जारी है। कहीं-कहीं गर्भवती महिलाओं के कोरोना टीका लेने में संकोच की बात सामने आ रही है। उन्हें डर लग रहा है। कहीं टीका लेने से गर्भस्थ बच्चे पर असर ना पड़े, इसे लेकर उनके मन में संकोच है। ऐसा कुछ भी नहीं है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना का टीका अभी 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को लेना है। स्वस्थ्य, बीमार, बुजुर्ग, युवा हो या फिर गर्भवती महिलाएं। जहां तक गर्भवती महिलाओं की बात है तो उन्हें टीका लेने से दोहरा फायदा होगा। वह तो कोरोना से सुरक्षित हो ही जाएंगी। साथ ही उनके बच्चे को भी फायदा होगा। गर्भस्थ बच्चे को मां से ही सभी तरह के स्रोत प्राप्त होते हैं। इसलिए अगर मां कोरोना का टीका लेंगी तो गर्भस्थ बच्चे को भी फायदा होगा। बच्चे की भी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी। इसलिए गर्भवती महिलाएं कोरोना का टीका लेने में संकोच नहीं करें। जल्द से जल्द अपना टीकाकरण करवाएं।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के बच्चे को भी फायदाः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना का टीका लेने से न सिर्फ गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चे को, बल्कि स्तनपान करा रहीं महिलाएं और उनके बच्चे को भी फायदा होगा। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। साथ ही मां के साथ बच्चे भी कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। इसलिए गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ स्तनपान करा रहीं महिलाएं भी जल्द से जल्द कोरोना का टीका ले लें।
अब तो देर नहीं कीजिएः दूसरी ओर जिले में अब घर-घर जाकर लोगों को कोरोना का टीका दिया जा रहा है। एएनएम और डाटा ऑपरेटर घर तक पहुंचकर लोगों को कोरोना का टीका लगा रहे हैं। मौके पर ही लाभुकों का रजिस्ट्रेशन कर टीका दिया जा रहा है। इसलिए अब केंद्र तक आने का भी झंझट नहीं है, इसलिए जल्द से जल्द कोरोना का टीका ले लें। जितना जल्द सभी लोग कोरोना का टीका ले लेंगे, उतनी ही जल्द जिला कोरोना से मुक्त हो जाएगा।
कोरोना गाइडलाइन का पालन जरूर करेः डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भवती महिला हो या स्तनपान कराने वाली महिया या फिर कोई और, कोरोना का टीका लेने के बाद गाइडलाइन का पालन अवश्य करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचते हुए दो गज की दूरी का अवश्य पालन करें। साथ ही बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे। साथ ही आपके जरिये कोई दूसरा भी संक्रमित नहीं होगा।

जिले में स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाएं और होगी सुदृढ़, लोगों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा

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– कार्यपालक निदेशक ने दौरा कर जिले के स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया,दिए आवश्यक निर्देश
– स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाएं और मजबूत करने को लेकर राज्यस्तरीय टीम लगातार कर रही है निरीक्षण

लखीसराय, 18 नवंबर।
जिले में संचालित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध तमाम सुविधाएं और सुदृढ़ होगी एवं लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर पटना से आई स्टेट टीम द्वारा लगातार जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण कर बेहतर कायाकल्प के लिए सकारात्मक पहल की जा रही है। ताकि वर्तमान दौर के अनुकूल स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था पहले से और बेहतर हो सके और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधा के बीच स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले सकें।

– केंद्रीय टीम द्वारा जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का किया जाएगा मूल्यांकन :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया ने बताया, आगामी 21 नवंबर से 17 सदस्यीय केंद्रीय टीम द्वारा सात दिनों तक जिले में भ्रमण कर स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। जिसकी तैयारी को लेकर पटना से आई स्टेट टीम के नेतृत्व में आवश्यक पहल की जा रही है। इसके लिए जिले के एक-एक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का लगातार भ्रमण कर निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश भी दिया जा रहा है। ताकि स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाएं और मजबूत एवं हाई-टेक हो सके और लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके।

– कार्यपालक निदेशक ने भी जिले का भ्रमण कर स्वास्थ्य संस्थानों का किया निरीक्षण :
पटना से आई स्टेट टीम द्वारा जिले में स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण कर निरीक्षण किया जा रहा है। जिसका हाल जानने के लिए गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह भी लखीसराय पहुँचे। उन्होंने स्टेट टीम से मिलकर जिले के स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित आवश्यक जानकारी ली और खुद भी विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण कर निरीक्षण किया। जिसके बाद मौजूद टीम एवं जिले के स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ताकि हर हाल में स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाएं और मजबूत हो सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके।

गृह भ्रमण और परामर्श से हेमकला ने कुपोषण पर किया प्रहार

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• स्वच्छता और सम्पूर्ण टीकाकरण से सुपोषण को दे रही हैं बढ़ावा
• गर्भवती व धात्री माता के व्यवहार में हो रहा है बदलाव
• केंद्र आधारित गतिविधियों से नौनिहालों के अभिभावक हो रहे कायल

जमुई, 18 नवम्बर ।
ये सिद्ध हो चुका है बदलाव की पटकथा कठोर परिश्रम से ही लिखी जाती है । संसाधनों की प्रचुरता से केवल बदलाव संभव नहीं होता, बल्कि बदलाव की सोच भी काफ़ी महत्वपूर्ण होता है। जिले के सदर प्रखंड के वार्ड संख्या 7, शास्त्री कोलोनी, आंगनबाड़ी केंद्र सं.120 भी ऐसे ही बदलाव का साक्षी बना है। नियमित टीकाकरण के अभाव एवं कुपोषण से जूझ रहे इस क्षेत्र में आज सुपोषण की समतल राह तैयार होने लगी है जो इस आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका हेमकला सिन्हा के प्रयत्न से ही संभव हुआ है। विगत 14 वर्षों के लंबे अनुभव और स्नातक तक की पढाई से हेमकला अपने पोषक क्षेत्र की महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से लड़ने के लिए स्वच्छता और संपूर्ण टीकाकरण को नियमित कराने में सफ़ल हो पायी हैं।
गृह भ्रमण और परामर्श को बनाया हथियार :
हेमकला कहती हैं उन्होेंने क्षेत्र में स्वच्छता और टीकाकरण को लोगों के व्यवहार में शामिल कराने को एक चुनौती के तौर पर स्वीकार किया। इसके लिए उन्होंने किशोरियों और माताओं के समूह के माध्यम से नियमित बैठकों में चर्चा के साथ ही इसे अभियान का रूप दिया। उन्हें इस बात का एहसास था कि जब तक स्वच्छता के प्रति समुदाय में जागरूकता नहीं आएगी तब तक कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई मुश्किल ही रहेगी । इसके लिए उन्हें वार्ड पार्षद अल्का सिंह का भी लगातार सहयोग मिला। जिसमें गली मुहल्लों में गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माने के स्वरूप में समूचे मोहल्ले की सफाई एवं केन्द्र की सफाई आदि को सर्वसम्मति से लागू कराया गया। उन्होंने बताया ऐसे प्रयासों से लोगों में पहली बार स्वच्छता के प्रति गंभीरता भी दिखी। ऐसे नवाचारों को समुदाय ने सराहा भी और इस मुहिम में अपनी सहभागिता भी सुनिश्चित की।

अभिभावकों के बीच चर्चा से आया बदलाव:
हेमकला ने बताया उन्होंने इस बात को महसूस किया कि अभिभावकों को बाल कुपोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने पोषण ट्रैकर मोबाइल आधारित एप से बच्चों के वृद्धि चार्ट को भर कर कुपोषित बच्चों के अभिभावकों के बीच तुलनात्मक चर्चा की शुरुआत करायी। उन्होंने बताया शुरुआती दौर में कई ऐसे अभिभावक भी थे जो अपने बच्चों को टीका लगवाने से संकोच रखते थे। ऐसी स्थिति में उन्होंने एक नया रास्ता चुना । उन्होंने ऐसे अभिभावकों को उन अभिभावकों के साथ चर्चा में शामिल किया जो अपने बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण करवा चुके थे। इससे टीका लगवाने से इंकार करने वाले अभिभावकों में भी काफ़ी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
लक्षित समुदायों ने भी की प्रशंसा :
22 वर्षीय गर्भवती महिला काजल कुमारी ने कहा यह सेविका दीदी के प्रयासों का नतीजा था कि वह उन्होंने पहली तिमाही में टेटनेस के टीके लगवाने का बेसब्री से इन्तजार भी की एवं टीका लगवाया भी। वहीं पोषणयुक्त आहार की उपलब्धता के लिए दीदी के बताये रसोई वाटिका को अपने पति के सहयोग से लगाया तथा अब हरी साग-सब्जियों को दैनिक भोजन में शामिल जरूर करती हूँ ।
दूसरी बार मातृत्व लाभ पाने वाली एक माह के शिशु की माता 24 वर्षीय निभा कहती हैं उन्होंने तो स्वच्छता और टीकाकारण को सेविका दीदी से ही सीखा है और उनके बताए गए उपायों का पालन करने का परिणाम है कि आज वह और उनका शिशु दोनों स्वस्थ हैं |
समुदाय के साथ नियमित संवाद से कार्य हुआ आसान :
हेमकला के कार्यों प्रसंशा करते हुए महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी ने बताया उनका कार्य सभी से अलग इसलिए है कि वह समुदाय में अपनी एक परियोजना कार्यकर्ता की नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य के रूप में स्थापित करने में सफ़ल हुयी हैं। इससे वह लोगों से बेहतर संवाद स्थापित कर पाती हैं एवं स्वच्छता व टीकाकारण के लिए लोगों को आसानी से प्रेरित भी करती हैं।
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी नीतू न्यारिका कहती हैं हेमकला सिन्हा के कार्य करने के तरीके बाल मित्रवत होते हैं जिससे क्षेत्र के बच्चों व महिलाओं में स्वस्थ व्यवहारों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता है। वो पोषण को स्थानीय संसाधनों से प्राप्त करने के लिए लक्षित समुदाय को प्रेरित करती हैं। इसके पीछे उनका शिक्षा से जुडाव है। वो गौरवान्वित होकर कहती हैं मेरा साढ़े चार वर्ष का बेटा इसी केंद्र में सीखने जाता है और हेमलता से काफी जुडा हुआ है।
वार्ड पार्षद अल्का सिंह ने कहा हेमकला के परामर्श और खेल-खेल में सिखलाने का परिणाम ही है मेरी छोटी बेटी का आंगनबाड़ी केंद्र से स्वस्थ व्यवहारों के साथ निकल कर निजी विद्यालय में दाखिला मिल पाया। उनका कार्य हमेशा से सराहनीय रहा है ।

पोलियो की तर्ज पर चल रहा है घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान

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– मिशन • एक भी व्यक्ति वैक्सीन से छूटे नहीं और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो
– जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान

खगड़िया, 18 नवंबर

जिले में पोलियो की तर्ज पर लगातार घर-घर दस्तक के तहत वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से इस अभियान को सफल बनाने के लिए गठित स्वास्थ्य टीम अपने क्षेत्र में घर-घर दस्तक दे रही और वैक्सीनेशन से छूटे व्यक्ति को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दे रही है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से छूटे नहीं और अभियान का मिशन रुके नहीं तथा जल्द से जल्द संपूर्ण जिलेवासी पूर्ण रूप से टीकाकृत हो सकें। यही नहीं, इस अभियान के उद्देश्य को पूरी तरह सफल बनाने के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों में चल रहे घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान का प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर निरीक्षण भी किया जा रहा है। जिसके दौरान आवश्यकतानुसार आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। ताकि हर हाल में उक्त अभियान का उद्देश्य सफल और इस तरह की पहल के बावजूद भी कोई व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रह जाएं।

– अभियान की सफलता को लेकर सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, जिले के किसी भी क्षेत्र में एक भी व्यक्ति वैक्सीन से छूटे नहीं, इसी उद्देश्य से घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। जिसके सफल संचालन के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हर दिन वैक्सीनेशन का अपडेट लिया जा रहा है। ताकि अभियान की गति की जानकारी मिल सके और आवश्यकतानुसार जरूरी पहल की जा सके।

– वैक्सीनेशन के साथ प्रोटोकॉल पालन का जारी रखने के लिए भी किया जा रहा है प्रेरित :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, वैक्सीन से वंचित लोगों को घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन तो दी ही जा रही इसके अलावा लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो और सभी लोग सुरक्षित माहौल में वैक्सीनेशन करा सकें।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।