बांका में 950 लोगों को पड़े टीके 400 लोगों की जांच

0

-कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
टीकाकरण को लेकर क्षेत्र में जागरूकता अभियान जारी

बांका, 18 नवंबर

कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। गुरुवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 950 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए तो 400 लोगों की जांच की गई। टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया। इसके अलावा सभी को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि गुरुवार को भी गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर काफी संख्या में लाभुक कोरोना का टीका लेने के लिए पहुंचे। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत गुरुवार को 950 लोगों को टीके दिए गए। अच्छी बात यह रही कोरोना टीका की दूसरी खुराक लेने के लिए लोग भी अच्छी खासी संख्या में टीका लेने के लिए केंद्र पर पहुंचे। टीका को लेकर जागरूकता अभियान भी जारी है।

जांच में कोई भी संक्रमित नहीं मिला:
डॉ. चौधरी ने कहा कि गुरुवार को भी 200 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। इनमें से कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। वहीं आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए 200 लोगों के सैंपल लिए गए। जांच के बाद सभी लोगों को मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। बार-बार हाथ की धुलाई करने की सलाह भी दी गई। सभी को कहा गया कि बाहर से आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें।

टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी: डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन्हें भी कोरोना के खत्म होने तक गाइडलाइन का पालन करना है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक पूरी सतर्कता के साथ रहना जरूरी है। कोरोना को खत्म होने के लिए सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा। जिन्होंने टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें। घर से बेवजह निकलने से परहेज करें।

कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’- मंगल पांडेय

0

पटना-
स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के डॉक्टर, नर्स समेत इससे जुड़े समाजसेवियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा समारोह आयोजित कर ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है। टीकाकरण में उत्कृष्ट लोगों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में जहां कोरोना जांच और टीकाकरण तेजी से किया जा रहा है, वहीं टीकाकरण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भी सम्मानित किया जा रहा है।
श्री पांडेय ने कहा कि इसके तहत पहले चरण में 4 अक्टूबर को विभाग द्वारा जश्न-ए-टीका पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण में अह्म योगदान देने वाले पदाधिकारियों और टीकाकरण में सहयोग करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। सरकार के संकल्पित लक्ष्य पूरा होने के बाद पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण कार्य में सहयोग करने वाले सम्मानित किए जाएंगे। वैश्विक महामारी से बचाव को लेकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में डॉक्टर, नर्स के साथ साथ बड़ी संख्या में आमलोगों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। ऐसे लोगों के योगदान को उल्लेख करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जश्न ए पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल पर कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण कार्य को सफल बनाने में व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से उत्कृष्ट योगदान देने वालों के कार्य प्रविष्ट की गई, ताकि दूसरे लोगों उनके कार्य और प्रयास को जान सकें।
श्री पांडेय ने कहा कि विभाग द्वारा कोरोना टीका का प्रथम डोज और दूसरी डोज लगवाने में सामूहिक और व्यक्तिगत तौर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग सम्मानित किए जा रहे हैं। इस तरह के आयोजन से अन्य लोगों में भी सेवा की भावना जागृत होगी, जिससे कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी।

22 को मनेगा परिवार नियोजन दिवस

0

-परिवार नियोजन पखवाड़ा 22 नवंबर से 4 दिसंबर तक मनाया जाएगा
-जिले में अभी चल रहा दंपति संपर्क सप्ताह, आशा जा रहीं घर-घर

भागलपुर, 18 नवंबर
इस बार परिवार नियोजन दिवस 22 नवंबर को मनाया जाएगा। इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने परिवार नियोजन पखवाड़ा को लेकर हुई तैयारी बैठक में दी। सिविल सर्जन ने कहा कि 22 नवंबर से परिवार नियोजन पखवाड़ा भी शुरू हो रहा है। इसलिए उसी दिन बेहतर तैयारी के साथ दोनों आयोजन किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को इसे लेकर आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। मालूम हो कि सितंबर महीने से हर माह की 21 तारीख को परिवार नियोजन दिवस मनाया जाता है। इस दौरान सदर अस्पताल में स्टॉल लगाकर दंपतियों और महिलाओं को परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी दी जाती है।
22 को लगेगा मेलाः तैयारी बैठक में सिविल सर्जन ने 22 नवंबर को परिवार नियोजन पखवाड़ा को लेकर मेला लगाने का भी आदेश दिया। मेला का आयोजन जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा। मेला में लगे स्टॉल पर लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा अस्थायी सामग्री का भी वितरण किया जाएगा। अंतरा, कंडोम, कॉपर टी इत्यादि लोगों को उपलब्ध करायी जाएगी। साथ ही लोगों को इस बात के लिए भी जागरूक किया जाएगा कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।
दंपति संपर्क पखवाड़ा की रिपोर्ट 21 तक सौंपेः 22 से शुरू हो रहे परिवार नियोजन पखवाड़ा से पहले अभी जिले में दंपति संपर्क सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके तरह आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर योग्य दंपति को ढूंढ रही हैं। योग्य दंपति को ढूंढने पर आशा कार्यकर्ता को 300 रुपये भी दिए जाएंगे। साथ ही बंध्याकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए भी आशा कार्यकर्ता को 100 रुपये दिए जाएंगे। 21 तक दंपति संपर्क सप्ताह चलेगा। सिविल सर्जन ने उसी दिन इसकी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
योग्य दंपति को होगी काउंसिलिंगः परिवार नियोजन पखवाड़ा के दौरान योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग की जाएगी। उन्हें पहला बच्चा 20 साल के बाद और दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। छोटा परिवार रखने के क्या फायदे होते हैं, इसकी जानकारी दी जाएगी। साथ ही दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे वह भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में सक्षम होता है।

इस बार पुरुष नसबंदी पर रहेगा फोकसः 22 से शुरू हो रहे परिवार नियोजन पखवाड़ा में पुरुष नसबंदी पर फोकस किया जाएगा। इसे लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। लोगों को समझाया जाएगा कि पुरुष नसबंदी बहुत ही सरल है और इससे किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। बैठक में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी, डीपीएम मो. फैजान अशर्फी, आशा के जिला समन्वयक मो. जफरुल इस्लाम और केयर इंडिया के परिवार नियोजन कार्य़क्रम के जिला समन्वयक आलोक कुमार व सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी, बीएचएम और बीसीएम जुड़े थे।

विश्व बाल दिवस तैयारियों/बाल अधिकार सप्ताह के तहत बाल अधिकार यात्रा का शिक्षा मंत्री ने किया शुभारंभ

0

बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए और ज़्यादा काम करने को शिक्षा विभाग और यूनिसेफ़ संकल्पबद्ध
आने वाले 5 सालों में राज्य के सभी विद्यालय कंप्यूटर लैब से आच्छादित हो जाएंगे: राज्य परियोजना निदेशक, बीईपीसी
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों का अधिकार, इसे सुनिश्चित करना हम सबकी ज़िम्मेदारी: यूनिसेफ़ बिहार प्रमुख
पटना, 17 नवंबर: बाल अधिकार सप्ताह के तहत यूनिसेफ़ और शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित बाल अधिकार यात्रा को माननीय शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने आवास 5 सर्कुलर रोड से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान संजय कुमार, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक श्रीकांत शास्त्री, अपर राज्य परियोजना निदेशक रवि शंकर सिंह एवं सुनयना जी, विजय कुमार हिमांशु, निदेशक, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, बिनोदानंद झा, निदेशक, शोध एवं प्रशिक्षण, शिक्षा विभाग, बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल क़य्युम अंसारी एवं सचिव सईद अंसारी, यूनिसेफ़ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफ़ीक़, कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांडेय, एजुकेशन स्पेशलिस्ट पुष्प जोशी, संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता, पटना के ज़िला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार समेत यूनिसेफ़ के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
ज्ञात हो कि कोविड महामारी की वजह से लंबे समय तक स्कूल बंद रहे हैं जिससे बच्चों की पढाई-लिखाई का काफ़ी नुकसान हुआ है. इसे देखते हुए ‘सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पुनर्कल्पना’ को 20 नवंबर को मनाए जाने वाले विश्व बाल दिवस का थीम चुना गया है।
विभिन्न स्कूलों, किलकारी बाल भवन और नारी गुंजन के 150 बच्चे-बच्चियों सहित क़रीब 300 लोगों ने इस यात्रा में भाग लिया। तख्तियों पर शिक्षा एवं बाल अधिकारों से जुड़े प्रभावी संदेशों के साथ साइकिल और पैदल मार्च करते बच्चों के साथ यात्रा में शामिल वयस्कों ने भी लोगों को जागरूक करने के लिए बाल अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए।
इको पार्क पहुंचने पर यूनिसेफ़ और शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा सभी बच्चों का स्वागत किया गया। बच्चों द्वारा मिलकर ‘विश्व बाल दिवस’ का फ़ॉर्मेशन किया गया। इसके पश्चात ‘हमारी बात सबके साथ’ सत्र के अंतर्गत बच्चों ने ‘अगर मैं शिक्षा मंत्री होता/होती, तो क्या बदलाव लाता/लाती एवं हमारी शिक्षा कैसी हो’ विषय पर अपने विचार लिखे जिसे आयोजन स्थल पर डिस्प्ले किया गया। साथ ही, बच्चों ने अधिकारियों से विभिन्न मुद्दों पर सवाल भी पूछे जिसका उन्होंने जवाब दिया। कन्या मध्य विद्यालय, अमलाटोला की श्वेता रानी के सवाल ‘प्राइवेट स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा दी जाती है, हमारे स्कूलों में क्यों नहीं’ के जवाब में बीईपीसी के राज्य परियोजना निदेशक श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि अगले साल मार्च-अप्रैल तक 2000 स्कूलों में कंप्यूटर लैब लग जाएंगे। साथ ही, 3000 स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने पर काम चल रहा है। सरकार इस दिशा में तेज़ी से काम कर रही है और आने वाले 5 सालों में राज्य के सभी विद्यालय कंप्यूटर लैब से आच्छादित हो जाएंगे, ऐसा हमारा अनुमान है।
बालक मध्य विद्यालय, अमलाटोला के अंकित कुमार ने पूछा कि जब कोई सरकारी नौकरी करता है तो उसे बहुत सम्मान मिलता है, लेकिन सरकारी स्कूल में पढ़ने वालों को उचित सम्मान क्यों नहीं मिलता। इसके जवाब में डब्ल्यूएचओ के बिहार चीफ़ डॉक्टर सुब्रह्मन्या ने कहा कि पहले की तुलना में सरकारी स्कूलों में काफी सुधार हुआ है। लेकिन शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की भी बड़ी ज़िम्मेदारी है, अगर आप पूरी लगन और निष्ठां के साथ पढ़ाई करेंगे तो आपको ज़रूर सफलता मिलेगी। पटना की शिक्षिकाओं अंकिता कुमारी और निशि कुमारी द्वारा इस सत्र का संचालन किया गया।
यूनिसेफ़ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफ़ीक़ ने बाल अधिकारों पर बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने बच्चों को हर परिस्थिति का दृढ़तापूर्वक सामना करने की सलाह देते हुए कहा कि शिक्षा एक बहुत कारगर औज़ार है जिसके ज़रिए आप अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु हम सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं।
बच्चों के लिए बाल अधिकार के विभिन्न पहलुओं पर आधारित एक क्विज़ कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया जिसका संचालन टीचर्स ऑफ़ बिहार के शिव कुमार ने किया। सफल बच्चों को पुरस्कृत किया गया। ऑनलाइन मोड में यह क्विज (https://som.teachersofbihar.org/quiz/child-rights-quiz
20 नवंबर तक जारी रहेगा और सफल प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान नारी गुंजन की बच्चियों द्वारा समूह गान के साथ-साथ पिरामिड निर्माण किया गया। ‘बिहार में बच्चों की शिक्षा कैसी हो’ विषय पर बिहार यूथ फ़ॉर चाइल्ड राइट्स के आदित्य कुमार, किलकारी के करण कुमार एवं पूनम कुमारी तथा बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल की अंकिता कुमारी द्वारा लाइव पेंटिंग की गई।
भागलपुर की शिक्षिका नम्रता मिश्रा द्वारा पूरे सत्र का संचालन किया गया।

कालाजार प्रभावित मुंगेर के सात प्रखंडों की आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण कार्यक्रम जारी

0

– मंगलवार से गुरुवार तक चल रहा उन्मुखीकरण कार्यक्रम – 50 – 50 की संख्या में तीन बैच में आशा को दी जा रही है ट्रेनिंग

– बरियारपुर से आई 50 आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार के बारे में दी गई जानकारी

मुंगेर, 17 नवंबर। मुंगेर जिले के सात कालाजार प्रभावित प्रखंडों, मुंगेर सदर, बरियारपुर, जमालपुर, संग्रामपुर, टेटिया बम्बर, हवेली खड़गपुर, धरहरा से आई 150 आशा कार्यकर्ताओं को 50 -50 के तीन बैच बनाकर जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिस मुंगेर में कालाजार के प्रति उन्मुखीकरण किया जा रहा है। असरगंज और तारापुर प्रखण्ड में पिछले पांच वर्षों में कालाजार का कोई केस न मिलने के कारण वहां से कोई आशा कार्यकर्ता उन्मुखीकरण कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले रही है।
उन्मुखीकरण कार्यक्रम में हिस्सा ले रही आशा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर बिहार के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह अपर निदेशक राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अंजनी कुमार के निर्देशानुसार राज्य के 32 जिलों जिसमें मुंगेर भी शामिल है के कुल 10500 कार्यकर्ताओं का कालाजार को लेकर उन्मुखीकरण किया जाना है। इसी अभियान के तहत मुंगेर के सात कालाजार प्रभावित प्रखंड़ों से आई कुल 150 कार्यकर्ताओं को 50 – 50 के तीन बैच में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को कालाजार के विभिन्न पहलुओं के प्रति उन्मुखीकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार 16 नवंबर को सदर प्रखंड से 1, जमालपुर से 7, संग्रामपुर से 7, टेटिया बम्बर से 14, हवेली खड़गपुर से 21, कुल 50 आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसी तरह बुधवार 17 नवंबर को सिर्फ बरियारपुर से 50 आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। इसी प्रकार गुरुवार 18 नवंबर को बरियारपुर से 20, धरहरा से 14, सदर प्रखंड मुंगेर से 16 कुल 50 आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार के लक्षण और बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह के अलावा वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा, डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसलटेंट पंकज कुमार प्रणव, आयुष्मान भारत योजना की डीपीसी ज्योति कुमारी, फाइलेरिया नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. संतोष कुमार, केयर इंडिया के कालाजार ब्लॉक कॉर्डिनेटर अमरेश कुमार और नटराज कुमार, सभी संबंधित पीएचसी और सीएचसी के वेक्टर बोर्न डिजीज सुपरवाज़र और बेसिक हेल्थ वर्कर भी उपस्थित थे।

उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा ने कालाजार के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कालाजार बीमारी के कारण, कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम 2021, बालू मक्खी को खत्म करने के उपाय, कालाजार मरीज की पहचान, कालाजार की जांच और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट कालाजार डर्मल लिशमिनिएसिस (पीकेडीएल) या त्वचीय कालाजार के बारे में तमाम तकनीकी जानकारी दी।

उन्मुखीकरण कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसलटेंट पंकज कुमार प्रणव ने कालाजार के उपचार में आशा कार्यकर्ता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में कालाजार मरीजों की पहचान कर उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाएगी। वहां कालाजार की जांच करवाने के बाद पॉजिटिव मरीज का अगले छह महीने तक लगातार फॉलोअप करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि मरीज का उपचार पूर्ण हो। उन्होंने बताया कि आशा के द्वारा इस दायित्व के पूरा करने पर सरकार के द्वारा 500 रुपये प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था है । यह राशि उनके बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता को अपने स्वास्थ्य केंद्र से समय-समय पर अपने क्षेत्र के कालाजार मरीजों का विवरण लेना चाहिए और उनका रिकॉर्ड रखना चाहिए ताकि आईआरएस के लिए माइक्रोप्लान बनाने में मदद मिले और छिड़काव के समय उन क्षेत्रों को फोकस किया जा सके जहां कालाजार के मरीज पाए गए हैं।

सिविल सर्जन ने किया 9-टू-9 वैक्सीनेशन साइट का निरीक्षण, दिए आवश्यक निर्देश

0

– केयर इंडिया के सहयोग से विभिन्न प्रखंडों में चल रहा है 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर
– सुविधाजनक तरीके से योग्य व्यक्ति करा रहे हैं वैक्सीनेशन

खगड़िया, 17 नवंबर
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग सजग और संकल्पित है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जहाँ जिले में लगातार विशेष वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। वहीं, अब घर-घर दस्तक कार्यक्रम के तहत वैक्सीनेशन अभियान भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा केयर इंडिया के सहयोग से जिले के विभिन्न प्रखंडों में 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर भी चल रहा है। मिशन, एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो। वहीं, जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर का बुधवार को सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने निरीक्षण किया। जिसके दौरान उन्होंने डयूटी पर मौजूद कर्मियों से वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी ली। जिसके बाद उन्होंने वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

– वैक्सीनेशन से वंचित एक-एक व्यक्ति को चिह्नित कर किया जा रहा है टीकाकृत:
जिला सिविल सर्जन डॉ अमरनाथ झा ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में विभिन्न प्रकार से आवश्यक पहल की जा रही है। जिसका सकारात्मक परिणाम भी मिल रहा है। इसके अलावा किसी भी स्थिति-परिस्थिति में एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे, इसको लेकर एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर अबतक वैक्सीन से वंचित लोगों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसे सार्थक रूप देने के लिए ही जिले के सभी प्रखंडों में घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से संबंधित क्षेत्र की एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी, डेटा ऑपरेटर समेत अन्य कर्मियों की टीम घर-घर जाकर वैक्सीन से छूटे व्यक्ति का वैक्सीनेशन कर रहे हैं।

– सुविधाजनक तरीके से लोगों को दी जा रही है वैक्सीन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान के दौरान हर जगह वैक्सीन लेने वाले योग्य व्यक्तियों की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। ताकि वैक्सीन लेने के दौरान लोगों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से सुरक्षित माहौल में वैक्सीन ले सकें। साथ ही हर जगह कोविड प्रोटोकॉल का पालन के साथ लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। ताकि वैक्सीनेशन के दौरान किसी प्रकार के कोई संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। वहीं, उन्होंने बताया, इस महामारी से स्थाई निजात के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को वैक्सीन की पूरी डोज लेने की जरूरत है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– गर्म और ताजा खाना का सेवन करें।

सीओपीडी और अस्थमा में है अंतर,रहें सावधान

0

धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में सीओपीडी होने का खतरा सबसे अधिक
धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से बचने की कोशिश करें
बांका, 17 नवंबर
हर साल 17 नवंबर को क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम हेल्दी लंग्स- नेवर मोर इंपोर्टेंट है। यानी स्वस्थ फेफड़े से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है। आमतौर पर यह बीमारी वायु प्रदूषण से होती है। इस बीमारी में मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में इस रोग का खतरा अधिक रहता है। साथ ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रहने वाले में इस बीमारी के होने का खतरा रहता है। इसलिए धूम्रपान करने से तो दूर रहे हीं, साथ ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में भी आने से बचने की कोशिश करें। इसके अलावा हर तरह के धुएं और तेज गंध से दूर रहने की आवश्यकता है। इससे बचने के लिए घर की हवा को साफ रखने की जरूरत है। जो लोग सीओपीडी की चपेट में आ चुके हैं, वह इन शर्तों का जरूर पालन करें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े स्पंज जैसे होते हैं। सांस के जरिये जब हम ऑक्सीजन अंदर लेते हैं तो वह खून के अंदत घुल जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है, लेकिन सीओपीडी के मरीज के साथ ऐसा नहीं होता है। सीओपीडी के मरीज के अंदर ऑक्सीजन घुल नहीं पाती है। इस कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि मरीज की सांसें फूलने लगती हैं। कुछ लोग इसे अस्थमा समझने की भूल कर बैठते हैं। अस्थमा में ऑक्सीजन नहीं घुल पाने जैसी कोई समस्या नहीं होती है। अस्थमा फेफड़ों से संबंधित बीमारी होती है, जिस कारण लोगों को सांस लेने में कठिनाई होती है। सीओपीडी फेफड़ों में वायुमार्ग से जुड़ी बीमारी होती है। अस्थमा में श्वास नली सूज जाता है, जिससे श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इसलिए अस्थमा और सीओपीडी को एक समझने की भूल नहीं करें। सीओपीडी अस्थमा के मुकाबले ज्यादा खतरनाक होता है। इसलिए श्वांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
कोरोना काल में सीओपीडी के मरीजों को ज्यादा खतराः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना काल में सीओपीडी के मरीजों को ज्यादा खतरा रहता है। कोरोना के कारण सांस के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए अभी के समय में सीओपीडी के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। कामकाज के दौरान सांस की तकलीफ हो या फिर घबराहट हो तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा कफ के साथ लगातार खांसी, वजन कम होना, थकान इत्यादि भी सीओपीडी के लक्षण हैं।
बाहर निकलते वक्त मास्क लगाएः डॉ. चौधरी कहते हैं कि सीओपीडी के मरीज घर से बाहर निकलते वक्त हर हाल में मास्क लगाएं। मास्क लगाने से धूल, धुएं और तेज गंध से बचाव होगा। घर में साफ-सफाई के दौरान भी मास्क लगाएं। भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। तंबाकू, धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल भी नहीं करें। पौष्टिक भोजन के साथ व्यायान भी करें। इसके अलावा पानी अधिक पीने की कोशिश करें।

कोरोना का टीका है आसान, गंभीर रोगियों के लिए है रामबाण

0

बीमार होने के डर से कोरोना का टीका लेने में नहीं करें संकोच
जिले में कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
भागलपुर, 17 नवंबर
स्वस्थ आदमी के मुकाबले बीमार आदमी को कोरोना होने पर ज्यादा खतरा रहता है। अगर किसी को हार्ट की समस्या है या फिर हाइपरटेंशन है तो उनकी कोरोना के बाद स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है. इसलिए कोरोना का टीका लेने से संकोच नहीं करें। अगर कोरोना का टीका लिए रहेंगे तो गंभीर बीमारी से परेशान व्यक्तियों को भी राहत मिलेगी। शाहकुंड प्रखंड के दौना और सजौर में जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को यह बात समझाई तो लोग कोरोना का टीका लेने के लिए तैयार हो गए।

जागरूकता से आया बदलाव:
दौना गांव के मो. तस्दीक कहते हैं कि पहले उनलोगों के मन में कोरोना टीका के प्रति संकोच जरूर था, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने समझाया तो अब बात समझ में आ गई। लोगों के फायदे के लिए ही स्वास्थ्य विभाग इतनी मशक्कत कर रहा है। ‘मैंने कोरोना का पहला टीका ले लिया है, अब समय पर ही दूसरी डोज भी ले लुंगा।
इसी तरह दौना की ही बीबी चांदनी बेगम कहती हैं कि गांव-समाज में टीका के प्रति तरह-तरह की बातें होती हैं। गांव में रहते हुए उसे नजरअंदाज करना थोड़ा कठिन हो जाता है, लेकिन जब डॉक्टर साहब कहते हैं तो उनकी बात माननी पड़ती है। इसलिए मैंने कोरोना का टीका ले लिया। आखिर वह हमारे स्वास्थ्य को लेकर ही तो कह रहे हैं।
आशंकाओं को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने किया दूरः दौना गांव की ही रहने वाली खातून कहती हैं कि टीका लेने में कोई समस्या नहीं थी। बस पहले लेने से बच रही थी। अब काफी लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है। इसलिए मैंने भी ले लिया। गांव-समाज में तो तरह-तरह की बातें होती ही हैं, लेकिन एक जागरूक इंसान को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। कोरोना का टीका लेने के लिए सभी लोगों को सामने आना चाहिए। कोरोना टीका की पहली डोज लेने वाले सजौर के अमित चौधरी कहते हैं कि अब सभी तरह के भ्रम दूर हो गए हैं। मन में जिस भी तरह की आशंकाएं थीं, उसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दूर कर दिया है। अब तो समय पर दूसरी डोज लुंगा ही, साथ ही सतर्कता का भी पालन करूंगा। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाउंगा और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करूंगा।
समझाने पर टीका लेने के लिए तैयार हो जाते हैं ग्रामीणः दौना और सजौर गांव का दौरा करने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गए केयर इंडिया के डीटीओ आउटरीच डॉ. असद जावेद कहते हैं कि जागरूकता की कमी के साथ-साथ लोगों में निश्चिंतता का भाव था। उन्हें लग रहा था कि कोरोना कुछ दिनों में अपने आप चला जाएगा। इसके बाद फिर से सभी कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन जब हमलोगों ने ग्रामीणों को समझाया कि सभी कुछ पहले जैसा होने के लिए टीका लेना बहुत जरूरी है। अगर सभी लोग कोरोना टीका की दोनों डोज ले लेंगे तो कोरोना भी जल्द ही खत्म हो जाएगा। इसके बाद सभी लोग मान गए और टीका लेने के लिए तैयार हो गए।

शत-प्रतिशत लोगों को टीकाकृत सुनिश्चित करने को लेकर घर-घर वैक्सीनेशन अभियान शुरू

0

– जिले के विभिन्न प्रखंडों में शुरू हुआ घर-घर दस्तक अभियान
– वैक्सीन से वंचित लोगों को प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है टीका

खगड़िया, 16 नवंबर।
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार विशेष वैक्सीनेशन के तहत शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। साथ ही हर जरूरी निर्णय भी लिए भी लिए जा रहे और हर आवश्यक पहल भी की जा रही है। जिसका सार्थक परिणाम भी दिखने लगा है। वहीं, मंगलवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में घर-घर वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की गई। जिसके माध्यम से स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर वैक्सीन से छूटे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य टीम द्वारा अभियान चलाकर लोगों को टीका के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

– घर-घर जाकर वैक्सीन से छूटे व्यक्ति को चिह्नित कर दी जा रही है वैक्सीन :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, घर-घर वैक्सीन अभियान के तहत वैक्सीनेशन टीम एक-एक घर जाकर पूरे परिवार के सदस्यों के बारे में वैक्सीनेशन की जानकारी ले रही है। इस दौरान जो व्यक्ति अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं हैं, उन्हें चिह्नित कर ऑन द स्पॉट वैक्सीन दी जा रही है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन लेने से छूटे नहीं और शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने के उद्देश्य को गति दी जा सके। इस कार्य में संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता, ऑगनबाड़ी सेविका, जीविका दीदी समेत अन्य कर्मियों का काफी सहयोग मिल रहा है। जबकि, जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक, बीसीएम समेत अन्य अफसरों को मानिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

– वैक्सीनेशन के प्रति प्रेरित कर लोगों को दी जा रही है वैक्सीन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, घर-घर वैक्सीनेशन अभियान के तहत स्वास्थ्य टीम द्वारा लोगों को प्रेरित कर वैक्सीन दी जा रही है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन लेने से छूटे नहीं और शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इस दौरान वैक्सीनेशन टीम में शामिल सभी कर्मी एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी ले रहे हैं। इसके अलावा जागरूकता अभियान के माध्यम से भी जागरूक किया जा रहा है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने को चल रहा है सघन जागरूकता अभियान

0

– माइकिंग, बैनर-पोस्टर से लोगों को किया जा रहा जागरूक
– प्रवासियों का प्राथमिकता के आधार पर बनाया जा रहा है आयुष्मान कार्ड

बेगूसराय, 16 नवंबर।
जिले में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने को लेकर सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि एक भी योग्य व्यक्ति कार्ड से वंचित नहीं रहें और शत-प्रतिशत व्यक्तियों का कार्ड बनाया जा सके। इसको लेकर माइकिंग, बैनर-पोस्टर समेत अन्य माध्यमों से सघन जनसंपर्क सह जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बताते चलें कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पूरे भारतवर्ष में बीपीएल परिवारों के लोगों को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के सभी अस्पतालों एवं कुछ चिह्नित निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारियों की निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

– प्रवासियों का प्राथमिकता के आधार पर बनाया जा रहा है आयुष्मान कार्ड :
सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया, देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले कामगार (प्रवासी) दीपावाली एवं छठ जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार मनाने के लिए बड़ी तादाद में अपने गाँव आए हैं। जो त्यौहार समापन के साथ वापस जाने की तैयारी में हैं। किन्तु, जाने के पूर्व सभी लोगों का निश्चित रूप से कार्ड बन जाए, इसको लेकर ऐसे लोगों का प्राथमिकता के आधार पर कार्ड बनाया जा रहा है। ताकि ये लोग जिस प्रदेश में रहकर काम करते हैं, वहाँ भी जरूरी पड़ने पर सरकार के इस योजना का लाभ ले सकें।

– हैंडबिल वितरण कर लोगों को किया जा रहा है जागरूक :
आयुष्मान भारत योजना के डीपीसी प्रभात कुमार ने बताया, आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए जिले के रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों समेत अन्य सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर माइकिंग एवं बैनर-पोस्टर के माध्यम से सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सघन जनसंपर्क अभियान के भी माध्यम से हैंड बिल वितरण कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान लोगों को उक्त योजना से मिलने वाली लाभ की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि सभी योग्य व्यक्ति कार्ड बनवाकर उक्त योजना का सुविधाजनक तरीके से लाभ ले सकें और जिले में बन रहे कार्ड की रफ्तार को गति मिल सके।

– क्या है आयुष्मान भारत योजना ?
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पूरे भारत में आयुष्मान कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत राशन कार्डधारी परिवार के सदस्यों को सरकारी एवं चयनित निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। इस योजना में वर्ष 2011 के सामाजिक- आर्थिक एवं जातिगत जनगणना में चिह्नित गरीब परिवारों को पात्र बनाया गया है। इस योजना के तहत लाभार्थी परिवार पैनल में शामिल सरकारी या निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करवा सकते हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए उम्र की बाध्यता एवं परिवार के आकार को लेकर कोई बंदिश नहीं है। आयुष्मान भारत योजना में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार निर्वहन करती है। योजना को संचालित करने वाली नेशनल हेल्थ एजेंसी ने लोगों की सुविधा के लिए एक वेबसाइट और हेल्प नम्बर जारी किया है। बीपीएल परिवार के लोग लिस्ट में अपना नाम जांचने के लिए हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर सकते हैं या फिर mera.pmjay.gov.in वेबसाइट पर जाकर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं ।