स्कूली बच्चों व महिलाओं के बीच होगा आयरन की गुलाबी व लाल गोलियों का वितरण

0

– सीएचसी और पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी स्कूलों में आयरन गोलियों का वितरण करेंगे सुनिश्चित

– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को जारी किया पत्र

मुंगेर ,16 नवंबर। जिला में कोरोना संक्रमण की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं की गति धीमी होने के बावजूद अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूर्व की भांति जारी रखा गया है। इसमें कुपोषण व एनीमिया मुक्त भारत बनाने के लिए चलाया जाने वाला यह अभियान भी शामिल है। इस अभियान के तहत जिला के पात्र लाभुकों के बीच आयरन फॉलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां व सीरप का वितरण किया जाता है। इस अभियान को जिला में एक बार फिर से सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने जिला के सिविल सर्जन को पत्र भेज कर लंबित अधियाचना बिहार चिकित्सा सेवा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर निगम लिमिटेड (बीएमएसईसीएल) को भेजने का दिशा- निर्देश दिया है। ताकि, पात्र लाभुकों के बीच फिर से आयरन की गोलियां और सीरप का वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

बुधवार व गुरुवार को स्कूलों में सुनिश्चित होगा गुलाबी गोलियों का अनुपूरण :
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिला के सभी स्कूलों में आईएफए की गुलाबी गोलियों की उपलब्धता और वितरण की जिम्मेवारी जिला के सभी सीएचसी और पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की होगी। वो प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर आईएफए की गुलाबी गोलियों की आवश्यकता का आकलन कर ससमय विद्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही वो ये भी सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक बुधवार व गुरुवार को विद्यालय के माध्यम से गुलाबी गोली का अनुपूरण कराया जाये।
इसके साथ ही गृहभ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता सप्ताह में एक बार (बुधवार) को 5 से 9 वर्ष के विद्यालय ना जाने वाले बच्चों को गुलाबी गोली का अनुपूरण करवाना सुनिश्चित करेंगी। उन्होंने बताया कि उन्मुखीकरण के बाद आशा कार्यकर्ताओं को 6 से 59 माह के बच्चों को ऑटो डिस्पेंसर के द्वारा आईएफए सीरप का अनुपूरण भी कराना है।

उन्होंने बताया कि आशा के द्वारा वीएचएसएनडी सत्र स्तर पर (प्रत्येक सप्ताह एक गोली) 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं को (जो गर्भवती अथवा धात्री न हो) आयरन की लाल गोली का अनुपूरण करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी आशा की मांग के अनुसार आयरन सीरप एवं लाल गोलियां की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

इस आशय की जानकारी देते हुए जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी रचना कुमारी ने बताया कि जारी आदेश के अनुसार दवाओं का अनुपूरण कराया जाएगा। इसके बाद जिले में अभियान चला कर दवाओं का वितरण किया जाएगा। इससे पहले सभी आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण किया जाएगा। जिसमें उनको 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयुवर्ग की महिलाओं को (जो गर्भवती अथवा धात्री न हो) भी सप्ताहिक आवरण फोलिक एसिड अनुपूरण के तहत आयरन की लाल गोली के अनुपूरण पर जानकारी दी जाएगी। उन्मुखीकरण के बाद आशा की ये जिम्मेदारी होगी कि वीएचएसएनडी सत्र के दौरान 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयुवर्ग की महिलाओं (जो गर्भवती अथवा धात्री न हो) को सप्ताहिक आयरन फॉलिड एसिड लाल गोली अनुपूरण के संबंध में जागरूक करेंगी।

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर ढूंढ रहीं योग्य दंपति

0

-22 नवंबर से जिले में चलेगा परिवार नियोजन पखवाड़ा अभियान
-आशा लोगों को परिवार नियोजन के प्रति भी कर रहीं जागरूक
बांका, 16 नवंबर।
परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत जिले में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर योग्य दंपति को ढूंढ रही हैं। क्षेत्र में सर्वेक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ता लोगों से 22 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाले परिवार नियोजन पखवाड़ा के लिए दंपतियों से पूछकर उनसे सेवाओं के बारे में पूछ रही हैं। जो दंपति जिस सेवा को लेने में इच्छुक दिख रहे हैं, उनका नाम रजिस्टर्ड में दर्ज किया जा रहा है। मालूम हो कि परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत लोगों को अंतरा, कॉपर टी और कंडोम उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इस दौरान बंध्याकरण भी किया जाएगा। जो लोग अभी बंध्याकरण कराने की बात कह रहे हैं, उनका भी नाम रजिस्टर्ड किया जा रहा है। इससे पहले भी कोई बंध्याकरण में दिलचस्पी ले रहे हैं, उनका बंध्याकरण कराया जा रहा है।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि परिवार नियोजन सेवा सालों भर दी जाती है। 22 नवंबर से परिवार नियोजन पखवाड़ा चलेगा, इसे लेकर आशा कार्यकर्ता अभी इच्छुक योग्य दंपति की सूची बना रही हैं। जब पखवाड़ा शुरू हो जाएगा, तब सूची के अनुसार उन्हें वह सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। क्षेत्र में सर्वे के दौरान आशा कार्यकर्ता लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। उन्हें परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में भी जागरूक कर रही हैं।
इस बार पुरुष नसबंदी पर रहेगा फोकसः वैसे तो परिवार नियोजन में इससे संबंधित सभी तरह की सुविधा लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन इस बार पुरुष नसबंदी पर फोकस किया जाएगा। सर्वे के दौरान आशा कार्यकर्ता लोगों को पुरुष नसबंदी को लेकर भी जागरूक कर रही हैं। लोगों के मन में पुरुष नसबंदी से संबंधित जो भ्रम है, उसे दूर कर रही हैं। लोगों को आशा कार्यकर्ता बता रही हैं कि पुरुष नसबंदी कराने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। साथ ही महिलाओं के बंध्याकरण के मुकाबले यह काफी आसान भी है। इसलिए लोग पुरुष नसबंदी के तहत आगे आएं, यह अपील की जा रही हैं।
योग्य दंपतियों की होगी काउंसिलिंगः परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग भी की जाएगी। इस दौरान दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। उन्हें समझाया जाएगा कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। साथ ही पहला बच्चा 20 साल के बाद ही प्लानिंग करने की सलाह दी जाएगी। दो बच्चे बच्चे रहने से लोगों को आर्थिक सहूलियत मिलती है। उन्हें पढ़ाने से लेकर सही पौष्टिक देने में भी परिवार को सहूलियत होती है। साथ ही दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रहने से बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है, इससे वह भविष्य में होने वाले किसी भी बीमारी से लड़ने में सक्षम रहता है।

कोरोना टीका की पहली डोज ले ली, समय पर लूंगा दूसरी डोज

0

-जिले में कोरोना टीककारण को लेकर चल रहा है अभियान
-पहली के साथ दूसरी डोज पर भी किया जा रहा है फोकस
बांका, 16 नवंबर।
कोरोना टीकाकरण को लेकर जिले में अभियान जारी है। पहली डोज के साथ-साथ अब दूसरी डोज पर भी फोकस किया जा रहा है। साथ ही जिले सभी लोगों को टीकाकरण जल्द हो, इसे लेकर घर-घर दस्तक अभियान भी चल रहा है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों का टीकाकरण कर रहे हैं। इसके अलावा पहले की ही तरह सभी सेशन साइट पर भी टीकाकरण जारी है। जिले के सभी लोगों के टीकाकरण को लेकर हर तरह से प्रयास किया जा रहा है। दूसरी डोज समय पर लेंगे-
मंगलवार को गांधी चौक पर 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर टीका लेने आए लोगों का कहना था कि कोरोना टीका की पहली डोज भले ही देरी से ली, लेकिन दूसरी डोज समय पर लेंगे। भीटिया गांव के विभाष चंद्र सिंह का कहना है कि कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है, अब जैसे ही समय पूरा होगा दूसरी डोज ले लूंगा। टीका के प्रति मेरे मन में किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है, जो भी था वह दूर हो गया है। इसी तरह लखपुरा के रोहित कुमार का कहना है कि मैंने तो कोरोना का टीका ले ही लिया है, अब दूसरे लोगों को भी टीका लेने के लिए जागरूक करूंगा। साथ ही सतर्कता का भी पालन करूंगा, ताकि मुझे भी कोरोना नहीं हो और दूसरे लोगों को भी मुझसे कोरोना नहीं हो।
तेतरकोला के भवानी सोरेन कहते हैं कि जिले में टीका को लेकर लगातार अभियान चल रहा है। मैंने भी इस अभियान के तहत कोरोना का टीका ले लिया है। घर पर भी टीम आती, लेकिन उससे पहले ही मैं गांधी चौक जाकर कोरोना का टीका ले लिया। मेरे मन में अब टीका के प्रति किसी भी तरह का कोई डर नहीं है। अब समझ गया हूं कि कोरोना का टीका लेना फायदेमंद है। ककवारा के विक्की कुमार शर्मा कहते हैं कि टीका के प्रति मन में कोई भ्रम नहीं है। घरेलु कामकाज की वजह से टीका लेने में देरी हुई, लेकिन अब समय पर दूसरी डोज ले लूंगा। साथ ही दूसरे लोगों को भी कोरोना टीका लेने के लिए जागरूक करूंगा।
टीका की दोनों डोज लेना जरूरी- -शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि टीका की दोनों डोज लेना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति एक डोज लेने के बाद यह नहीं सोचे कि टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई। टीका की दोनों डोज ले लेने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। इसलिए सभी लोग जल्द से जल्द कोरोना टीका की दोनों डोज ले लें। साथ ही कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें।

दवाई व उचित आहार प्रबंधन से मधुमेह रोगी भी जी सकते हैं सामान्य जिंदगी : सिविल सर्जन

0

– सदर अस्पताल में निःशुल्क मधुमेह जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर का सिविल सर्जन ने किया उद्घाटन

– जीवन शैली में संतुलित भोजन के साथ योग और व्यायाम को भी स्थान दें मधुमेह रोगी

मुंगेर-

दवाई के साथ -साथ उचित आहार प्रबंधन कर मधुमेह रोगी भी जी सकते हैं सामान्य जिंदगी । उक्त बातें सोमवार को सदर अस्पताल परिसर में विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर 14 से 21 नवम्बर तक आयोजित निःशुल्क मधुमेह जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर का उद्घाटन करते हुए मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने कही। इस अवसर मुंगेर के गैर संचारी रोग डॉ. के.रंजन, राखी मुखर्जी सिहित कई महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर 14 से 21 नवंबर तक जिला के सभी अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क मधुमेह जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें लोग निःशुल्क अपने डायबिटीज, ब्लड प्रेशर सहित अन्य जांच निःशुल्क करवा कर चिकित्सक से निःशुल्क सलाह भी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि मधुमेह के रोगियों के लिए दवाई के साथ-साथ सही आहार प्रबंधन भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए उन्हें अपने भोजन में एक तिहाई भाग के रूप में हरी साग – सब्जी का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि शरीर को उचित मात्रा में विटामिन और मिनरल्स मिल सके। इसके साथ में रेशेयुक्त सब्जियों का प्रयोग एवं कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का इस्तेमाल करने से हमारा शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

दवाई और संतुलित भोजन के साथ -साथ नियमित योग और व्यायाम करें मधुमेह रोगी :
मुंगेर के जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के.रंजन ने कहा कि मधुमेह के रोगियों को संतुलित भोजन, मधुमेह की दवा के साथ-साथ नियमित योगाभ्यास और व्यायाम करना आवश्यक है। इसके साथ ही एक निश्चित अंतराल के बाद मधुमेह की जांच भी कराना आवश्यक है। इसलिए जिला के सभी मधुमेह के रोगी सहित अन्य लोग भी सदर अस्पताल सहित जिला के अन्य अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर 14 से 21 नवम्बर तक आयोजित की जा रही निःशुल्क मधुमेह सह चिकिसक परामर्श शिविर में मधुमेह की जांच करवा लें। उन्होंने बताया कि
– बार-बार पेशाब लगना
– अधिक प्यास लगना
– बेवजह वजन का घटना
– ज्यादा भूख लगना
एवम हमेशा संक्रमण का होना मधुमेह के लक्षण हैं वहीं
-संतुलित आहार लेना
– नियमित व्यायाम करना
– शराब और तम्बाकूयुक्त पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करना
– वजन एवम रक्तचाप पर नियंत्रण स्थापित करना और नियमित शर्करा की जांच कराना मधुमेह से बचने के उपाय हैं। उन्होंने बताया कि विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर निःशुल्क मधुमेह जांच और चिकित्सा और परामर्श शिविर का आयोजन ” यूनाइट फ़ॉर डायबिटीज ” अभियान के तहत किया जा रहा है।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता

0

– सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के हर मानकों का रखा जाता है ख्याल

खगड़िया-

प्रसव के दौरान गर्भवती एवं उनके परिजनों को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि, गर्भावस्था के अंतिम दौर यानी प्रसव के वक्त छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। इसलिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर किसी प्रकार का संकोच नहीं करें और संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दें। इससे न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी। हर महिला को गर्भधारण के साथ ही मन में सामान्य और सुरक्षित प्रसव को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं। दरअसल, हर महिला सामान्य और सुरक्षित प्रसव चाहती है। किन्तु, यह तभी संभव है जब संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जाएगी। क्योंकि, वहाँ प्रशिक्षण प्राप्त योग्य एएनएम एवं चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव करायी जाती है । इस दौरान किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत आवश्यक व्यवस्था की जाती है।

– सुरक्षित प्रसव के लिए उपलब्ध हैं पर्याप्त सुविधा, प्रसव के बाद दी जाती है आवश्यक जानकारी :-
सिविल सर्जन डाॅ अजय कुमार सिंह ने बताया सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को स्वास्थ्य एवं शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाती है। ताकि प्रसव के पश्चात भी माता एवं शिशु को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और होने पर तुरंत आवश्यक चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा सके।

– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :-
शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

– जिले के सभी पीएचसी में होती प्रसव पूर्व मुफ्त जाँच :-
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही एवं साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमतावर्धन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

डायबिटीज से बचाव में प्रोटीनयुक्त आहार की भूमिका अहम्- शेरील सालिस

0

• देश में 7.4 करोड़ आबादी है डायबिटीज से ग्रसित
• इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन द्वारा डायबिटीज प्रबंधन पर वेबिनार का हुआ आयोजन
• अनुशासित जीवनशैली से डायबिटीज से सुरक्षा संभव

पटना-

आज के समय में बिगड़ती जीवनशैली व अनियमित खानपान के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन गया है। इन्हीं बीमारियों में से एक है डायबिटीज यानी मधुमेह। हालांकि, डाइबिटीज भले ही एक सामान्य बीमारी है, लेकिन एक बार किसी को हो जाए तो जीवनभर मरीज का साथ नहीं छोड़ती। पूर्व के समय में यह बीमारी सिर्फ 50 साल से ऊपर के लोगों को होती थी, लेकिन आज ज्यादातर लोग इस गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं. विश्व मधुमेह दिवस के उपलक्ष में डायबिटीज प्रबंधन में प्रोटीनयुक्त आहार की भूमिका और मरीजों के उपचार पर इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया.
डायबिटीज से बचाव में प्रोटीनयुक्त आहार की भूमिका अहम्- शेरील सालिस
वेबिनार में मुख वक्ता एवं एक्सपर्ट शेरील सालिस, निदेशक, नरचर हेल्थ सोलयूशन, मुंबई ने डायबिटीज प्रबंधन में प्रोटीनयुक्त आहार एवं दिनचर्या पर विस्तार से जानकारी दी. शेरील सालिस ने बताया अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान एवं जागरूकता के अभाव में देश की बड़ी आबादी मधुमेह के समस्या से ग्रसित है. देश में 7.40 करोड़ लोग टाइप-1 अथवा टाइप-2 डायबिटीज के रोगी हैं. पूरे विश्व में हमारा देश डायबिटीज मरीजों की संख्या में दुसरे नंबर पर है जो चिंता का विषय है. लक्षण नजर आने पर अविलंब जांच और तत्पश्चात तुरंत चिकित्सीय सलाह से डायबिटीज से मुक्ति संभव है.
खाने की थाली में प्रोटीनयुक्त आहार को दें प्राथमिकता:
शेरील सालिस ने बताया, मधुमेह के रोगियों में जागरूकता का अभाव सामान्यतः देखा जाता है. ज्यादातर मरीज यह सोचते हैं कि चिकित्सक उनके खाने-पीने में कई रोक लगाते हैं और इसलिए वे स्वयं इलाज करने की कोशिश करते हैं. ताजे शोधों से यह स्पष्ट है की कम नहीं बल्कि सही आहार तथा दवाई डायबिटीज से मुक्ति का मार्ग है. भारतीय भोजन की थाली में कार्बोहायड्रेट और वसायुक्त सामग्रियों की मात्रा अधिक होती है और भोजन में प्रोटीन की समावेश पर ध्यान नहीं दिया जाता है. शेरील सालिस ने बताया, बहुत आसानी से हम अपने दैनिक आहार में प्रोटीनयुक्त खाद्यपदार्थों का समावेश बढ़ा सकते हैं और इसमें हरी सब्जियों और रंगबिरंगे मौसमी फल को शामिल करना सबसे सरल उपाय है.
मरीज की हालत में सुधार के बाद इंसुलिन की जरुरत नहीं:
शेरील सालिस ने बताया, मधुमेह के रोगियों के मन में यह भ्रांति रहती है कि अगर चिकित्सक ने उन्हें शुगर पर नियंत्रण के लिए इंसुलिन लेने की सलाह दी तो फिर उन्हें अपनी पूरी जिंदगी इंसुलिन की जरुरत पड़ेगी. लेकिन ऐसा नहीं है और मरीज की स्थित में सुधार होने पर तथा चिकित्सक की सलाह पर इंसुलिन का इस्तेमाल रोका जा सकता है. हाइपोग्लाईसेमिया या रक्त में शुगर की अत्यधिक कमी को रोकने में इंसुलिन की भूमिका अहम् होती है और इसके अभाव में मरीज कोमा में जा सकता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है.
नियमित व्यायाम एवं अनुशासित जीवनशैली से डायबिटीज से सुरक्षा संभव:
वेबिनार को संबोधित करते हुए टी.एम.बी. विश्वविद्यालय, भागलपुर के होम साइंस विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ममता कुमारी ने शेरील सालिस का धन्यवाद देते हुए बताया पेट और कमर पर वसा का अत्यधिक जमाव किसी को भी मधुमेह का रोगी बना सकता है. डायबिटीज से सुरक्षा के लिए पोषणयुक्त आहार, नियमित व्यायाम एवं अनुशासित जीवनशैली को अपनाना बहुत आवश्यक है.
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार, सचिव, इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन द्वारा किया गया. वेबिनार में कई चिकित्सक, डाइटिशियन एवं पोषण विशेषज्ञ, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि एवं अन्य ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की आरती उतारकर किया गया स्वागत

0

-डेढ़ साल से अधिक समय के बाद सोमवार को खुले जिले के आंगनबाड़ी केंद्र
-50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ कोरोना की गाइडलाइन का कराया गया पालन
भागलपुर-

कोरोना की वजह से डेढ़ साल से अधिक समय के बाद सोमवार को जिले के लगभग तीन हजार आंगनबाड़ी केंद्र खुल गए। पहले दिन बच्चों की आरती उतारकर स्वागत किया गया। सभी बच्चे मास्क लगाकर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे थे। जैसे ही बच्चे केंद्र पर पहुंचे, सभी को 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई साबुन से कराई गई। इसके बाद उन्हें पढ़ाई और पोषण से संबंधित जानकारी दी गई।
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अरविंद पांडेय ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र सोमवार को खुल गए। सभी केंद्रों पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराया गया। केंद्रों पर सरकार के निर्देश का सख्ती से पालन करवाया गया। साथ ही सभी बच्चों को केंद्र आने से पहले जरूरी तौर पर मास्क लगाने के लिए कहा गया। सेविका और सहायिका को भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में रखने के लिए कहा गया है। कोरोना गाइडलाइन के नियमों का हर हाल में पालन करवाने के लिए कहा गया है। सभी केंद्रों पर इसका पालन किया गया और आगे भी इस पर अमल किया जाएगा।
रंगोली बनाकर पोषण की दी गई जानकारीः नाथनगर प्रखंड की कजरैली पंचायत के तेतरहाट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 80 की सेविका रंजना कुमारी ने बताया कि हमारे यहां कुल 38 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। सोमवार को 16 बच्चे आए थे। एक दिन में 50 प्रतिशत ही बच्चों की उपस्थिति रहेगी, इसलिए 19-19 बच्चों का समूह बनाया गया है। किस बच्चे को किस दिन आंगनबाड़ी केंद्र आना है, इसकी जानकारी उनके परिजनों को दे दी गई है। सोमवार को हमलोगों ने बच्चे की सबसे पहले आरती उतारी। इसके बाद रंगोली बनाकर उन्हें सही पोषण की जानकारी दी गई। मेरे केंद्र पर आने वाले सभी बच्चों ने मास्क लगाए थे। केंद्र पर सामाजिक दूरी का पालन करवाया गया। बच्चे जैसे ही केंद्र पर पहुंचे, सभी की हाथ की धुलाई करवाई गई। इसके बाद पढ़ाई और पोषण पर बात हुई।
आज से शुरू हो जाएगा रूटीन कार्यः सोमवार को पहला दिन था, इसलिए सभी बच्चों को कैसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर रहना है और किन नियमों का पालन करना है, इस पर ध्यान दिया गया। मंगलवार से सभी जगहों पर 50 प्रतिशत उपस्थिति रहेगी। इस दौरान बच्चों को पढ़ाई और पोषण से संबंधित जानकारी दी जाएगी। पहले दिन उपस्थित 50 प्रतिशत बच्चों को जो जानकारी दी जाएगी, वही जानकारी अगले दिन आने वाले बच्चों को दी जाएगी। इसके बाद फिर आगे का काम होगा। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों को अगले किस दिन आना है और उन्हें उस दिन क्या क्या कार्यक्रम होगा, इसकी भी जानकारी दी गई।

जिले में आज से पल्स पोलियो की तर्ज पर होगा टीकाकरण

0

-स्वास्थ्यकर्मी घर-घर दस्तक देकर लाभुकों का करेंगे टीकाकरण
-मौके पर ही टीका लेने वाले लाभुकों का किया जाएगा रजिस्ट्रेशन
बांका-

कोरोना टीकाकरण को लेकर जिले में आज से घर-घर दस्तर अभियान की शुरुआत होगी। पल्स पोलियो की तरह इस अभियान को चलाया जाएगा। इस दौरान पिछले दिनों कोरोना का टीका लेने से इनकार करने वाले लोगों को भी टीका लगाया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी लोगों के घरों पर जाएंगे। जिस घर के सभी लोग कोरोना का टीका ले चुके होंगे, उनके घर के बाहर क्रॉस का निशान लगा दिया जाएगा। इसे लेकर बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्यकर्मी लोगों के घर-घर जाकर 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण करेंगे।
बनाई गई है मोबाइल टीमः घर-घर दस्तक अभियान को लेकर मोबाइल टीम बनाई गई है, जिसमें एक डेटा ऑपरेटर और एक एनएम होंगी। अभियान के दौरान डॉटा ऑपरेटर घर पर ही लाभुकों का रजिस्ट्रेशन करेंगे। इसके बाद एएनएम लाभुकों को टीका लगाएंगी। मोबाइल टीम की निगरानी को लेकर सुपरवाइजर की भी नियुक्ति की गई है। सुपरवाइजर पूरे अभियान पर नजर रखेंगे। अगर कहीं कोई कमी दिखी तो उसे सुपरवाइजर ठीक करवाएंगे। जिले भर में जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से टीके की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही प्रतिदिन घर-घर दस्तक अभियान की समीक्षा की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि मंगलवार को शुरू हो रहे अभियान को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बना दी गई है। जिले के सभी लोगों को जल्द से जल्द कोरोना का टीका लग जाए, इसे लेकर यह अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी लोगों के घर जाकर उन्हें टीका लगाने के साथ जागरूक भी करेंगे। अगर किसी के मन में कोई भ्रम होगा तो उसे भी दूर किया जाएगा। जिसने अब तक टीका नहीं लिया होगा, उसे पहली और जिन्होंने एक डोज ले ली होगी, उन्हें दूसरी डोज दी जाएगी। पहली डोज के साथ दूसरी डोज पर भी अभियान के दौरान फोकस रहेगा।
सतर्कता का करें पालनः सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में टीकाकरण अभियान की रफ्तार अच्छी है। कोरोना टीका की पहली डोज लेने वालों की संख्या अच्छी है। अब दूसरी डोज लेने के लिए भी काफी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। जल्द से जल्द सभी लोग कोरोना का टीका ले लें। साथ ही अभी भी सतर्कता का पालन करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचें और एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई करें। ऐसा करते रहने से कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे और आपसे किसी दूसरे व्यक्ति को भी कोरोना नहीं होगा।

मधुमेह रोगी दवाई के साथ उचित आहार प्रबंधन का भी रखें ध्यान

0

-मधुमेह रोगी दवा के साथ खुद पर नियंत्रण रख जी सकते हैं सामान्य जीवन
-विश्व मधुमेह दिवस पर सैंडिस कंपाउंड से निकाला गया जागरूकता अभियान
भागलपुर, 14 नवंबर
विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर भारतीय आहारिकी संघ (आईडीए) बिहार चैप्टर ने भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड (जयप्रकाश उद्यान) में सुबह स्वास्थ्य लाभ के लिए भ्रमण करने वाले नागरिकों के बीच मधुमेह में उपयुक्त आहार विषय पर जागरूकता अभियान चलाया। जागरूकता अभियान का शुभारंभ करते हुए आइडिया बिहार चैप्टर की अध्यक्ष सह विभागाध्यक्ष खाद्य एवं पोषण विभाग डॉ ममता कुमारी ने बताया कि मधुमेह रोगी में दवाई के साथ-साथ उचित आहार प्रबंधन का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।
उन्होंने कहा कि यदि हम उचित आहार प्रबंधन एवं योग व व्यायाम को शामिल कर, चिकित्सक के द्वारा सुझाए हुए दवाई का सेवन करें तो हम मधुमेह को अच्छे प्रकार नियंत्रण कर सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने अपने दैनिक आहार में एक तिहाई भाग हरी सब्जी लेने की बात कही, ताकि उचित मात्रा में विटामिन एवं मिनरल्स शरीर को मिल सके। सिंपल शुगर की जगह पर काम्प्लेक्स शुगर एवं नमक -चीनी और फैट कम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भोजन में रेशेयुक्त सब्जियों का प्रयोग, साबुत अनाज, प्रोटीन एवं कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का प्रयोग करने से हमारा शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ आनंद भगत, पूर्व विभागाध्यक्ष हड्डी एवं नस विभाग मेडिकल कॉलेज भागलपुर ने कहा कि हमें थोड़े-थोड़े अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लेने की आदत डालनी चाहिए। साथ ही अपने लिए गए भोजन से मिलने वाली कैलोरी एवं उसकी खपत पर भी ध्यान देना चाहिए। आज के समय में आरामदायक जीवन शैली एवं खान-पान पर नियंत्रण नहीं होने के कारण मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
दवाई के साथ योग और व्यायाम पर भी दें ध्यानः आईडीए के सचिव एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार ने कहा कि मधुमेह रोगियों को अच्छे प्रकार से नियंत्रण कर सामान्य जीवन जीने की दिशा में हमें उचित आहार, योग एवं व्यायाम, दवाई एवं समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है। हमें ऐसी जीवनशैली जीने की जरूरत है, ताकि हम मधुमेह के शिकार ही न हो, उसके लिए हमें अपने उम्र के अनुसार कैलोरी का सेवन, अपने भोजन में आहार विविधता यानी कि सभी पोषक तत्व की उचित मात्रा में सेवन हरी सब्जियों एवं फल को अधिक महत्व देते हुए स्थानीय भोजन एवं घर के बनाए हुए भोजन को थाली में लाने की जरूरत है। आज के समय में बाहर के भोजन का अधिक प्रयोग करने के कारण वसा, शुगर और चीनी तीनों की मात्रा शरीर में बढ़ रही है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है। कार्यक्रम में कई वरीय नागरिक एवं महिलाओं ने संबंधित प्रश्न किए, इसके उचित समाधान के लिए उत्तर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. महादेव प्रसाद साह, डॉ प्रमिला प्रसाद, डॉ. संदीप कुमार, कुसुम भारती, डॉ. जूली कुमारी, संतोष कुमार उपस्थित रहे।

कोरोना काल मे चुनौतियों का बावजूद बेहतर सेवा के लिए आइसीडीएस को स्कॉच सिल्वर अवार्ड से नवाजा गया

0

•आइसीडीएस द्वारा ईसीसीई के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान

पटना। वैश्विक महामारी कोरोना काल मे लॉक डाउन लागू किया गया था। उस दौर में आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया था। लेकिन उस दौर में भी सेविकाओं- सहायिकाओं के द्वारा घर-घर जाकर मोबाइल के माध्यम से ई – कंटेंट के जरिये प्रारंभिक बालावस्था एवं शिखा के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया गया। समाज कल्याण विभाग अंतर्गत समेकित बाल विकास सेवा आइसीडीएस को सराहनीय कार्य हेतु प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी द्वारा लाभुकों तक पहुंचायी गयी विभिन्न सेवाओं को सराहते हुए डिजिटल केटेगरी में यह अवार्ड बच्चों के ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा” के लिए दिया गया है। आइसीडीएस की ओर से निदेशक आलोक कुमार ने इस स्कॉच सिल्वर अवार्ड को प्राप्त किया है।

-कोविड के दौरान ईसीसीई द्वारा व्यवहार परिवर्तन:

कोविड 19 के दौरान बच्चों के व्यवहार को लेकर सर्तक रहने तथा अभिभावकों द्वारा बच्चों को सुरक्षात्मक वातावरण मुहैया कराते हुए अत्यंत संयमित और उत्सावर्धक व्यवहार करने पर जागरूकता लाने को काम किया गया। घर में नीरस माहौल एवं बच्चों में अवसाद नहीं हो, इसके लिए अभिभावकों को सुझाव दिये गये जिनमें बच्चों को विकासात्मक व रचनात्मक गतिविधियों में शामिल कर उनके दिनचर्या को व्यवस्थित करने की विभिन्न तौर तरीके बताये गये। इस आशय हेतु आईसीडीएस बिहार के द्वारा पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) से जुड़ी हर जानकारी घर बैठे प्राप्त की जा सकती है। बच्चों के साथ गतिविधि करने के लिए ईसीसीई कलेंडर एवं डिजिटल सामग्रियों की उपलब्धता आईसीडीएस वेबसाइट पर जनमानस के प्रयोग के लिए करायी गयी है। इनमें व्यायाम, चित्रकारी, कहानी सुनना, गीत गाना व रोल प्ले जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया. वहीं बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद पर बल दिया गया।

-जानिये क्या है स्कॉच अवार्ड:

स्कॉच अवार्ड यह अवार्ड स्वतंत्र संगठन स्कॉच डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रदान किया जाता है। अवार्ड देने की शुरूआत 2003 से की गयी. देश में एक सुदृढ़ शासन प्रणाली बनाये रखने और इस कार्य में लगे व्यक्तियों, परियोजनाओं व संस्थानों के प्रयासों की सराहना के लिए शुरू की गयी है। स्कॉच डेवलपमेंट फांउडेशन की ओर से यह पुरस्कार वित्तीय, सामाजिक व डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के लिए दिया जाता है। अवार्ड का उद्देश्य व्यवस्था में सकारात्मक व उल्लेखनीय बदलाव लाने के लिए पारदर्शिता व सहभागितापुर्ण लोकतंत्र सुनिश्चित करना है। इस फाउंडेशन के सदस्यों ने देश भर में घूम घूम कर सामाजिक, आर्थिक व डिजिटल समावेशन को लेकर गहन अध्यन किया और बेस्ट प्रैक्टीसेज का दस्तावेजीकरण किया है।

-चुनौतियों का सामना करने में मिलेगा बल:

कोरोना संकट काल में चुनौती के बावजूद सरकार द्वारा लाभुकों तक विभिन्न योजनाओं व सेवाओं का लाभ पहुंचाने तक नये रास्ते निकाले गये और इस काम का सुचारू क्रियान्वयन कर एक कृतिमान स्थापित किया गया है। जिला, प्रखंड व सामुदायिक स्तर पर किये गये इन प्रयासों के बाद अवार्ड से सम्मानित किये जाने को लेकर विभाग के लोग भी काफी उत्साहित हैं. इस अवार्ड से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी भविष्य में योजना व सेवाओं के क्रियान्वयन में आने वाले चुनौतियों का सामना करने में बल मिलेगा। स्कॉच अवार्ड बेटर गर्वेनेंस को लेकर परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इस कार्य को समुदाय स्तर पर क्रियान्वित करने में आंगनवाड़ी एवं आईसीडीएस कार्यकर्त्ता तथा सहयोगी संस्थाओं की अहम् भूमिका रही है।

इस दौरान आईसीडीएस की सहायक निदेशक श्वेता सहाय एवं प्रवीण चंद्रा ईसीसीई कंसलटेंट सहित अन्य लोग मौजूद थे।