आशा दीदियों को सुरक्षित गर्भपात के बारे में दिया गया प्रशिक्षण

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-चांदन में सुरक्षित गर्भपात पर जागरूकता लाने के बारे में कहा गया
-समाज के सभी लोगों को इसपर काम करने की बताई गई जरूरत

बांका, 27 अक्टूबर-

सुरक्षित गर्भपात कानूनी तौर पर वैध है या नहीं, इस बात की जानकारी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नहीं है। इसी जानकारी देने के उद्देश्य से शुक्रवार को चांदन प्रखंड में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में आशा दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आईपास के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रितेश रंजन ने सुरक्षित गर्भसमापन और गर्भपात कानून के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कई महिलाएं अनचाहे रूप से गर्भवती हो गईं। कोरोना के कारण वह अपना सुरक्षित गर्भपात भी नहीं करा पायीं। सरकारी अस्पतालों में मिल रही सुविधाओं से वह वंचित रह गईं। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इससे वह सुरक्षित तरीके से अपना गर्भपात करा सकेंगी। इसे लेकर समाज में जागरूकता लानी होगी। इस पर सभी लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।
सुरक्षित गर्भपात को लेकर परिजनों को ध्यान देने की जरूरतः रितेश रंजन ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट -1971 के तहत 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की कानूनी तौर पर इजाजत है। 1971 में बने इस कानून को लेकर हालांकि कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इसे लेकर परिजनों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बिचौलिये के संपर्क में नहीं पड़ना चाहिए। समस्या होने पर पास के सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में कानूनी तौर पर निःशुल्क गर्भपात की सुविधा है। विशेष परिस्थिति पैदा होने पर एंबुलेंस के जरिये महिला मरीज को अच्छी जगह भेजने की व्यवस्था मौजूद है। 12 सप्ताह तक एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 13 से 20 सप्ताह के अंदर तक दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में गर्भपात होनी चाहिए।
दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए जाएं मायागंजः आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के रितेश रंजन ने कहा कि भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में आठ प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका हो तो तत्काल एएनएम से संपर्क करना चाहिए। या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो तत्काल गर्भपात का निर्णय लेना चाहिए। अगर गर्भ नौ सप्ताह तक का है तो गोलियों से भी गर्भपात हो सकता है। गर्भपात जितना जल्द कराया जाता है, उतना ही सरल और सुरक्षित रहता है। चांदन रेफरल अस्पताल में सिर्फ पहली तिमाही में गर्भपात सेवा दी जाती है। दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल का रुख करना चाहिए। गर्भपात के साथ तत्काल गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करना चाहिए। गर्भपात और गर्भधारण के बीच छह महीने का अंतराल होना जरूरी है।

पूरी सुदंरता तन के साथ मन और दिमाग से भी होती है : डॉ श्वेता रामकृष्ण

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नई दिल्ली

बचपन की इच्छा। युवाओं की चाहत और सपने को पूरा करने की चाहत की कोई उम्र नहीं होती है। जब आप शुरूआत करें, तभी आपको मंजिल मिलेगी। हां, इसके लिए आपको अनुशासन के साथ खुद को समर्पित करना होगा। फैशन की दुनिया में एक उभरता हुआ नाम है डॉ श्वेता रामकृष्ण का। हाल ही में इन्हें डैज़ल मिसेज इंडिया इंटरनेशनल 2021 के रूप में ताज पहनाया गया है। डैज़ल मिसेज इंडिया इंटरनेशनल 2021-.2022 क्वीन के रूप में जिम्मेदारी संभालने के लिए ये खुद को भाग्यशाली मान रही है।

एक सैन्य परिवार से जुड़ाव और उसके बाद रैम्प पर कैटवॉक करना कितना मुश्किल होता है ? डॉ श्वेता कहती हैं कि जब आपने ठान लिया हो और पूरे परिवार का साथ मिलता है, तो मंजिल मुश्किल नहीं होती है। हां, आपको कोई मेंटर चाहिए। सही रास्ता दिखाने वाला चाहिए। परिवार ने पूरा साथ दिया। सपनों को अनुशासन के साथ कैसे साकार किया जाता है, इसे मैंने साबित किया है।

डॉ श्वेता रामकृष्ण कहती हैं कि आप तन के साथ ही मन से भी सुंदर बने। दिमाग को खुला रखेंगे। लक्ष्य के प्रति संकल्पित रहें, मंजिल मिलेगी ही। मुझे पारिसा कम्युनिकेशन के बारे में जानकारी मिली और सौभाग्यशाली हूं कि डैजल मिसेज इंडिया इंटरनेशनल का ताज मेरे माथे पर सजा।

अपने बारे में बताते हुए डॉ श्वेता कहती हैं कि यूं तो मुंबईकर हैं, लेकिन पूरा देश अपना है। एक सैन्य अधिकारी की पत्नी और एक खूबसूरत बेटी की मां बनने के बाद भी मेरी इच्छा थी कि रैम्प पर वॉक करूं। खुशी है कि यह सपना पूरा हुआ। अब मैं पूरी दुनिया घूमना चाहती हूं। डैज़ल प्लेटफॉर्म है किसी भी महिला के लिए सबसे अच्छा मंच जो ऊंची उड़ान भरने, अपने सपनों को जीने और समाज को कुछ लौटाने का विकल्प चुनती है, मेरे लिए यह अस्पतालों में गुणवत्ता प्रणाली में सुधार करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का तरीका है ताकि कोई भी मरीज समय पर इलाज के लिए कभी भी पीड़ित न हो। मैं भारत में हमारे समाज और चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुछ अच्छा करने का अवसर प्रदान करने के लिए डैज़ल निदेशक सुश्री तबस्सुम मैम और सुबोध जैन सर को धन्यवाद देती हूं।

राज्य में असुरक्षित गर्भपात से हर वर्ष 149 महिलाओं की मृत्यु- डॉ. संगीता बत्रा

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पटना/ 26 अक्टूबर-

“असुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारक है और समुदाय में इस विषय पर जागरूकता फैलाने में मीडिया की सबसे अहम् भूमिका है”. उक्त बातें सुरक्षित गर्भपात पर मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला में अपने संबोधन में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन की प्रमुख तकनीकी विशेषग्य डॉ. सरिता बत्रा ने बतायी. पटना के एक निजी होटल में सुरक्षित गर्भपात एवं स्वास्थ्य एवं प्रजनन अधिकार विषय पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा किया गया. कार्यशाला का शुभारंभ बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसियशन के कार्यपालक निदेशक स्वपन मजुमदार, आई पास के वरीय राज्य निदेशक निलेश कुमार एवं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च बिहार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
सुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में कारगर- स्वपन मजुमदार
बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसियशन के कार्यपालक निदेशक स्वपन मजुमदार ने बताया बिहार में एक वर्ष में होने वाले 12.5 लाख गर्भसमापन में से 84 प्रतिशत गर्भसमापन स्वास्थ्य केन्द्रों के बाहर होते हैं तथा 5 प्रतिशत गर्भसमापन अप्रशिक्षित सेवा प्रदाता द्वारा किये जाते हैं. असुरक्षित गर्भसमापन मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इस विषय पर कार्य करने की नितांत जरुरत है.
राज्य में असुरक्षित गर्भपात से हर वर्ष 149 महिलाओं की मृत्यु- डॉ. संगीता बत्रा
आईडीएफ की प्रमुख तकनीकी विशेषग्य डॉ. सरिता बत्रा ने बताया असुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारक है और बिहार में हर वर्ष 149 महिलाओं की मृत्यु असुरक्षित गर्भसमापन के कारण होती है. इस विषय को लेकर समाज में कई अवधारणा जुडी हैं. अगर इस विषय पर गंभीरता से काम किया जाए तो हर वर्ष असुरक्षित गर्भपात से होने वाली 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है. इस विषय पर एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है.
मीडिया की भूमिका सर्वोपरि:
सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च, बिहार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा समुदाय में इस नाजुक एवं महत्वपूर्ण विषय को लेकर चर्चा एवं जागरूकता फैलाने में मीडिया अग्रणी भूमिका निभा सकता है. मीडिया की विश्वशनीयता असुरक्षित गर्भसमापन जैसे विषय पर समुदाय में लोगों को इसके खतरे से अवगत कराने में एक सशक्त सहयोगी साबित हो सकता है. समुदाय में इस विषय को लेकर भ्रांतियों को दूर करने और चर्चा की शुरुआत करने में मीडिया का रोल सर्वोपरी है.
अपने धन्यवाद ज्ञापन में आई पास के वरीय राज्य निदेशक निलेश कुमार ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में इस तरह के और कार्यक्रमों में सबकी सहभागिता की उम्मीद जताई.
कार्यशाला में सांझा प्रयास नेटवर्क के सदस्य रामचंद्र राय, अपर्णा कुमारी एवं गीतिका शर्मा ने अपने अनुभव साझा किये. बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसियशन के खुर्शीद एकराम अंसारी ने सांझा प्रयास नेटवर्क के बारे में विस्तार से बताया और उम्मीद जताई की मीडिया असुरक्षित गर्भपात जैसे संवेदनशील विषय पर भी आगे अपना सहयोग जारी रखेगा.
इस अवसर पर सुरक्षित गर्भसमापन विषय पर फोटो गैलरी एवं मीडिया कलेक्शन को भी प्रदर्शित किया गया. कार्यशाला में आये सभी प्रतिभागियों ने सहमती जताई कि क़ानूनी व सुरक्षित गर्भसमापन की जानकारी व सेवाएं बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा.

कोविड-19 मेगा टीकाकरण पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन

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– प्रातः 7:00 बजे से टीकाकरण की होगी शुरुआत
– टीके से वंचित और प्रवासी कर्मियों को टीका लेने की जिलाधिकारी ने की अपील

लखीसराय, 26 अक्टूबर

जिलास्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने सर्वे के अनुसार टीके से वंचित लाभार्थियों एवं प्रवासी कर्मियों को कोरोना रोधी टीके लगाने के लक्ष्य के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया । इसके लिए सीफार एवं केयर इंडिया के सहयोग से कार्यशाला किये जाने के लिए डेवलपमेंट पार्टनर की सराहना की | उन्होंने कहा राज्य सरकार के निर्धारित 6 करोड़ टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है लेकिन इसबार आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं जीविका दीदियों को घर-घर जाकर लाभार्थियों को उत्प्रेरित कर लाभार्थियों को सेशन साइट तक लाने के लिए निदेशित किया | 18 वर्ष से ऊपर 84 दिनों से अधिक प्रथम डोज लेने वाले लाभार्थियों को दूसरे डोज के लिए शिक्षकों के द्वारा प्रेरित किये जाने को प्रमुखता से रखा | यहाँ तक कि असमर्थ व दिव्यान्गों को टीकाकरण स्थल पर लाने की विशेष व्यवस्था की गयी है | आगे स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को इंगित करते हुए बचे हुए वैक्सीन को कहाँ सदुपयोग करने हैं इसके लिए अद्यतन जानकारी रखने के निर्देश दिए |

दीपावली एवं छठपर्व में कोविड-19 टीकाकरण की विशेष व्यवस्था :

जिलाधिकारी ने आगामी दीपावली एवं छठ पर्व में कोविड-19 के टीके लगाने के बारे में योजना को सभी के समस्त रखा | जिसके तहत 18 वर्ष से ऊपर के चिह्नित लाभार्थियों को जो किसी कारणवश टीका नहीं लिया हो उसे तत्काल टीकाकृत करने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों को तैयारी करने के लिए कहा |
वहीं सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने प्रत्येक टीकाकरण स्थल की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए विभागीय समन्वय के महत्व को बताया । जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, समेकित बाल विकास परियोजना तथा जीविका सभी के समग्र प्रयास से ही लक्ष्य के पाने के बारे में बताया |
इसी क्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने कहा सभी वैक्सीनेटर और वेरिफायर को पहले से ही प्रशिक्षित किया जा चुका है | उक्त मेगा टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए 28 अक्टूबर को मीडिया बंधुओं को व्यापक कवरेज के लिए आगे आने के लिए आग्रह किया |

जिला स्वास्थ्य समिति के कार्यक्रम प्रबंधक मोहम्मद खालिद हुसैन ने टीके के वायल की उपलब्धता को सुनिश्चित करा लेने की जानकारी को साझा किया तथा फ्रंटलाइन वर्कर्स को सर्वे लिस्ट साथ रखने के बारे में बताया। उन्होंने प्रखंड स्वस्थ्य प्रबंधकों एवं सामुदायिक उत्प्रेरकों को अभियान की मॉनिटरिंग के नेतृत्व की जिम्मेदारी के सन्देश दिए |

केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान ने अभियान के प्रचार प्रसार के लिए माइक्रो प्लान व सिस्टेमेटिक योजना के अनुसार घर-घर एसएमएस, माईकिंग एवं वन टू वन प्रचार के बारे में बताया |

इसके बाद डॉ. रुचिका , विश्व स्वास्थ्य संगठन की एस.एम.ओ-आर.आर.टी ने टीकाकृत लाभार्थियों द्वारा अन्य लोगों को जागरूक करने और संभावित तीसरे लहर से बचने के बारे में चर्चा की। यूनिसेफ से नैयर उल आजम ने टीकाकरण स्थल पर आपातकाल सम्बंधित व्यवस्था के बारे में मीडिया कर्मियों को जानकारी दी।

अंत में जिलाधिकारी ने कार्यशाला के धन्यवाद् ज्ञापन सत्र में सभी से कोरोना के दिशा निर्देशों के अनुपालन करने के सन्देश के साथ समापन किया ।

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना से मजबूत होगी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा : डीडीसी

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– सदर अस्पताल समेत जिले के सभी पीएचसी में प्रधानमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण आयोजित
– जिले के पदाधिकारी लाइव प्रसारण में शामिल होकर योजना के उद्देश्य और महत्व से हुए अवगत

खगड़िया, 26 अक्टूबर।
सोमवार की शाम पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सदर अस्पताल समेत जिले के विभिन्न पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में पीएम के संबोधन का लाइव प्रसारण आयोजित किया गया। जिसमें उप विकास आयुक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा की उपस्थिति में सिविल सर्जन डाॅ अजय कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के केयर इंडिया के अन्य पदाधिकारी व कर्मी शामिल हुए एवं प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना। साथ ही उक्त योजना के उद्देश्य एवं महत्व को जाना। लाइव प्रसारण में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रयसी, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

– स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए सबसे बेहतर योजना :
उप विकास आयुक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा ने बताया, प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना (पीएमएएसबीवाई) पूरे भारत में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सबसे बड़ी योजनाओं में से एक होगी। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त होगी। इस योजना का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से महत्वपूर्ण देखभाल सुविधाओं और प्राथमिक देखभाल में अंतराल को पाटना है। प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना 10 विशेष रूप से चिह्नित किए गए राज्यों में 17,788 ग्रामीण स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को सहायता देगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर जोर देगी। इसके लिए सभी राज्यों में 11,024 शहरी स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पांच लाख से अधिक आबादी वाले देश के सभी जिलों में एक्सक्लूसिव क्रिटिकल केयर अस्पताल के माध्यम से गहन देखभाल सेवाएं उपलब्ध होंगी। जबकि शेष जिलों को रेफरल सेवाओं के माध्यम से कवर किया जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया, इस योजना से खगड़िया जिले को बहुत उम्मीदें हैं। योजना के क्रियान्वयन से जिले में चिकित्सा संबंधी आधारभूत संरचनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा, जिससे सभी जिलावासी लाभान्वित हो सकेंगे।

– जिले में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला का होगा स्थापना :
सिविल सर्जन डाॅ अजय कुमार सिंह ने बताया, प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के तहत जिलों में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेशनल इंस्टीट्यूशन ऑफ वन हेल्थ, 4 नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय अनुसंधान मंच, 9 जैव सुरक्षा स्तर प्रयोगशालाएं और पांच नए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

– स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता होगी विकसित :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, इस योजना का उद्देश्य देश के सुदूर हिस्सों में प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता विकसित करना है। साथ ही देश में ही अनुसंधान, परीक्षण और उपचार के लिये एक आधुनिक व्यवस्थित तंत्र विकसित करना भी है। केंद्र सरकार ने स्वस्थ भारत योजना के लिये चार-स्तरीय रणनीति बनाई है, जिसमें स्वच्छ भारत अभियान, योग, गर्भवती महिलाओं व बच्चों की समय पर देखभाल और उपचार जैसे उपायों सहित बीमारी की रोकथाम व स्वास्थ्य कल्याण को बढ़ावा देना है। साथ ही समाज के वंचित वर्ग के लोगों को सस्ता और प्रभावी इलाज मुहैया कराना और स्वास्थ्य अवसंरचना व स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की गुणवत्ता को बढ़ाना शामिल है।

कोरोना का पहला टीका लेने में देरी जरूर हुई पर दूसरी डोज समय से लेंगे

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-कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
-पहला टीका लेने वाले समय पर दूसरी डोज लेने की बात कह रहे

बांका, 26 अक्टूबर

कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम का खासा असर पड़ा है। यही कारण है कि अब काफी संख्या में लोग कोरोना का टीका लगवाने के लिए सामने आ रहे हैं। पहला टीका लेने वालों की संख्या में तो जिले में काफी बेहतर है ही, लेकिन अब टीका की दूसरी डोज भी लोग समय पर ले रहे हैं। साथ ही जो लोग पहली डोज ले रहे हैं, वह भी समय पर आकर दूसरी डोज लेने की बात कह रहे हैं।
गांधी चौक पर कोरोना टीका की पहली डोज लेने वाले विजयनगर के प्रदीप पोद्दार कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए टीका ही एकमात्र उपाय है। पहला टीका लेने में देरी जरूर हो गई, लेकिन समय पूरा होते ही टीका की बूस्टर यानी दूसरी डोज ले लूंगा। स्वास्थ्य के मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इस बात को मैं अब अच्छी तरह से समझ चुका हूं। बांका शहरी क्षेत्र के रहने वाले निरंजन कुमार यादव कहते हैं कि कोरोना का टीका काफी जांच और परीक्षण के बाद लोगों के लिए उपलब्ध हुआ है, इसलिए इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। इस बात को समझने में थोड़ी देरी हुई। वरना मैं तो पहले ही टीका ले लेता। पहला टीका ले लिया है। अब समय पर आकर दूसरा टीका भी ले लूंगा।
केवलडीह की वीणा कुमारी ने भी कोरोना टीका की पहली खुराक ही ली है, लेकिन दूसरी खुराक वह समय पर लेगी। टीका लेने के बाद वह कहती हैं कि स्वास्थ्य विभाग के लगातार जागरूकता कार्यक्रम के चलते रहने से हमलोग यह समझ सके कि कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। जब इस बात को समझ लिए कि टीका पूरी तरह से सुरक्षित है तो ले लिया। परिचित और जान पहचान वाले लोगों को भी टीका लेने के लिए कहूंगी। महेशडीह की शिवानी देवी कहती हैं कि टीका लेना बहुत जरूरी है। कोरोना को खत्म करने के लिए परिवार के सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है। इसलिए मैंने टीका की पहली डोज ले ली है। समय पर आकर दूसरी डोज भी ले लूंगी। साथ ही अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरूक करूंगी।
पर्व त्यौहार में रहें सतर्कः अभी त्यौहार का मौसम चल रहा है। दुर्गापूजा बीत गया है, लेकिन आगे छठ और दिवाली है। ऐसे में भीड़भाड़ बचने की कोशिश करते रहना चाहिए। मेला या पूजा के दौरान सावधानी बहुत जरूरी है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि निश्चित तौर पर अभी घर से बाहर जाते वक्त जरूरी तौर पर मास्क लगाएं। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक –दूसरे के बीच दो गज की दूरी का ध्यान रखें। बाहर से अगर कोई व्यक्ति त्यौहार पर घर आ रहे हों तो उनकी कोरोना जांच जरूर करवाएं। टीका नहीं लिया हो तो टीका दिलवाएं। साथ ही समय पूरा होने पर कोरोना टीका की दूसरी डोज अवश्य लें।

मायागंज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को किया जाएगा बेहतर

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-अस्पताल अधीक्षक के नेतृत्व में सभी विभागाध्यक्षों की हुई बैठक
-लक्ष्य के तहत हुई बैठक, केयर इंडिया के प्रतिनिधि भी थे मौजूद

भागलपुर, 26 अक्टूबर

मायागंज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर किया जाएगा। इसे लेकर मंगलवार को अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास के नेतृत्व में बैठक हुई। बैठक में सभी विभागों के अध्यक्षों के साथ केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी डॉ. राजेश कुमार मिश्रा और पटना से आए डॉ. हरीश नंदकरिनी भी मौजूद थे। बैठक में अस्पताल अधीक्षक ने सभी विभागाध्यक्षों से अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को बेहतर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मायागंज अस्पताल में आने वाले मरीजों के इलाज में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, इस बात का ध्यान रखें। जांच से लेकर इलाज तक समय पर हो।
डॉ. असीम कुमार दास ने कहा कि अस्पताल में इलाज की व्यवस्था पहले से ही बेहतर है, लेकिन सभी विभागाध्यक्षों से उसे और बेहतर बनाने के लिए कहा गया है। यहां पर इलाज लक्ष्य के मापदंडों पर होने के बाद यहां की रिपोर्ट केंद्र भेजी जाएगी, जहां से सर्टिफिकेट अगर मिलता है तो यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी। इसे लेकर सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है। अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि बैठक के दौरान अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसे लेकर जरूरी संसाधनों को बढ़ाने पर फोकस किया गया। अगर लक्ष्य के मुताबिक यहां का कामकाज रहा और सर्टिफिकेट मिला तो यह बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। बिहार के किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल को अभी तक इस तरह का सर्टिफिकेट नहीं मिला है।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है मायागंज अस्पतालः मालूम हो कि मायागंज अस्पताल में गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज किया जाता है। इसके लिए यहां पर अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। इस अस्पताल में गंभीर रोगों का इलाज हो जाने से मरीजों को निजी क्लीनिक में नहीं जाना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक तौर पर काफी राहत मिलती है। अगर सभी सुविधाएं अप टू डेट रहेंगी तो काफी संख्या में यहां पर मरीज इलाज के लिए आएंगे और उन्हें आर्थिक तौर पर काफी राहत मिलेंगी।
बिहार-झारखंड के 15 जिलों के मरीज आते हैं यहाः मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिहार और झारखंड के 15 जिलों के मरीज आते हैं। कोसी-सीमांचल से लेकर पूर्वी बिहार और झारखंड के गोड्डा, दुमका, पाकुड़ और साहेबगंज जिले से भी काफी संख्या में मरीज यहां पर इलाज के लिए आते हैं। उन सभी मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यहां पर इलाज की व्यवस्था को और बेहतर किया जा रहा है।

कोविड-19 की चुनौतियों के बीच पोषण पुनर्वास केंद्र में मिल रही बेहतर सुविधा

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– सात बच्चे हैं एडमिट, मिल रहा बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ, दिया जा रहा है आवश्यक परामर्श
– अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर भेजा जाएगा पोषण पुनर्वास केंद्र

लखीसराय, 25 अक्टूबर।
कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं से जिले में चल रहे पोषण पुनर्वास केंद्र में मिलने वाली सुविधाएं जरूर कुछ प्रभावित हुई थी। किन्तु, इन तमाम चुनौतियों के बाबजूद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग बेहतर सुविधा प्रदान कराने को लेकर अग्रसर है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन शुरू कर दिया गया है। केंद्र में वर्तमान में 07 बच्चे एडमिट हैं। सभी बच्चे को बेहतर सुविधा के साथ-साथ उचित चिकित्सा परामर्श मिल रहा है। ताकि केंद्र में एडमिट बच्चे जल्द से जल्द स्वस्थ्य होकर अपने घर वापस लौट सकें और कुपोषण की समस्या से स्थाई से रूप निजात मिल सके। इसके लिए केंद्र में तैनात मेडिकल टीम द्वारा बच्चों का उचित ख्याल रखा जा रहा है।

– कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है पोषण पुर्नवास केंद्र :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में भी बच्चों में पोषण की कमी से निपटने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है, जो कुपोषण की समस्या से पीड़ित बच्चों के बीच संजीवनी साबित हो रही है। वहीं, उन्होंने बताया, कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों को 14 दिनों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है। जहाँ कुपोषित बच्चों को डाक्टर की सलाह के अनुसार ही उनका खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है। यहां रखे गए बच्चे यदि 14 दिनों के अंदर कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाते हैं तो वैसे बच्चों को एक माह तक विशेष रूप से देखभाल की जाती है। पोषण पुर्नवास केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं नि:शुल्क होती हैं। यहां भर्ती हुए बच्चों के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही उसे यहां से डिस्चार्ज किया जाता है।

– पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती होने के लिए तय किए गए है ये मानक :
डीपीसी सुनील कुमार ने बताया, कुपोषण के शिकार बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत बच्चों की विशेष जांच जैसे उनका वजन व बांह आदि की माप की जाती है। इसके साथ ही छह माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बांई भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वो कुपोषित माने जाते हैं। वैसे बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके साथ ही दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा हो तो ऐसे बच्चों को भी यहां पर भर्ती किया जाता है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

खगड़िया सदर पीएचसी में 9-टू-9 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर का शुभारंभ

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– केयर इंडिया के सहयोग से वैक्सीनेशन सेंटर हुआ शुरू -सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकेंगे लोग
– जिले के सभी प्रखंडों में 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर का होगा शुभारंभ

खगड़िया, 25 अक्टूबर।
जिले में जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग और संकल्पित है । इसके लिए जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। इसके अलावा हर जरूरी कदम भी उठाए जा रहे और आवश्यक निर्णय भी लिए जा रहे हैं। जिसे सार्थक रूप देने के लिए केयर इंडिया की भी टीम स्वास्थ्य विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर अपनी जिम्मेदारी में जुटी हुई हैं। इसी कड़ी में खगड़िया सदर पीएचसी में केयर इंडिया के सहयोग से 9-टू-9 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर का शुभारंभ हुआ। जिसका उदघाटन सिविल सर्जन डाॅ अजय कुमार सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान एवं केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

– 09 बजे सुबह से 09 बजे रात तक दी जाएगी वैक्सीन, लोग अपनी सुविधानुसार ले सकेंगे वैक्सीन :
सिविल सर्जन डाॅ अजय कुमार सिंह ने बताया, 9-टू-09 वैक्सीनेशन सेंटर का सुबह के 09 बजे से लेकर 09 बजे रात तक संचालन होगा। जिससे खासकर वैसे लोगों को सुविधा होगी, जो कामकाजी हैं। यानी ऐसे लोग अपने कार्य का निष्पादन कर देर शाम भी वैक्सीन ले सकेंगे। इससे ना सिर्फ लोगों को सुविधा होगी बल्कि, वैक्सीनेशन अभियान को भी गति मिलेगी।

– वैक्सीनेशन सेंटर के सफल संचालन के लिए शिफ्ट वाइज मेडिकल टीम की तैनाती:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया 9-टू-9 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर के सफल संचालन के लिए शिफ्टवाइज मेडिकल टीम की तैनाती की गई है। जिसमें चिकित्सक, एएनएम, डेटा ऑपरेटर समेत अन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। पहली शिफ्ट 09 बजे से दोपहर के 03 बजे तक होगी और दूसरी 03 बजे से देर रात 09 बजे तक होगी।

– जिले के सभी प्रखंडों में 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर का होगा शुभारंभ :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया कि, जिले के शत-प्रतिशत लोगों का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को हर आवश्यक पहल की जा रही एवं जरूरी निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 9-टू-9 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर के स्थापना का निर्णय लिया गया है। जिसका जिले के सभी प्रखंडों में स्थापना होगी। ताकि वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति दी जा सके और लोग सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें।

– वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार को गति देने के लिए शुरू हुआ सेंटर :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जिले में कोविड वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए 9-टू-9 वैक्सीनेशन सेंटर का शुभारंभ किया गया। इससे जो अपनी दैनिकी कार्य में व्यस्तता के कारण वैक्सीन नहीं ले पाए थे अब वह भी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकेंगे। जिससे लोगों को भी सुविधा होगी और अभियान को गति मिलेगी।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

मुंगेर में लोगों को अब प्रतिदिन मिलेगी ई. संजीवनी टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा

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– मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन होगी मरीजों की स्वास्थ्य जाँच
– स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को दिए निर्देश
– एएनएम के सहयोग से मरीजों को ऑनलाइन मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा

मुंगेर, 25 अक्टूबर।
लोगों को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने को ले राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग एवं संकल्पित है। खासकर दुर्गम इलाके के लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले, इसके लिए सरकार काफी गंभीर है। इसे सुनिश्चित कराने के लिए अब लोगों को प्रतिदिन टेलीमेडिसीन ई.संजीवनी टेलीमेडिसिन की स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। इसमें ई.संजीवनी ओपीडी मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन मरीजों की स्वास्थ्य जाँच होगी। इस सुविधा को हर हाल में बहाल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग (बिहार सरकार) के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। पत्र में यह भी कहा है कि यह सेवा e Sanjeevani.in के प्रत्येक सोमवार, गुरुवार एवं शनिवार को तथा e Sanjeevani OPD के माध्यम से प्रत्येक मंगलवार, बुधवार एवं शुक्रवार को 09 बजे से 02 तक उपलब्ध है। किन्तु, अब यह सेवा प्रत्येक दिन 09 बजे से 04 बजे तक उपलब्ध कराया जाना है।

– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
मुंगेर के सिविल सर्जन डाॅ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि जिला में संचालित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिदिन टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा बहाल कराने को लेकर निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस सेवा के माध्यम से मरीजों की ऑनलाइन स्वास्थ्य जाँच होगी। इसके साथ ही उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं उचित दवाई के सेवन की जानकारी दी जाएगी। इससे ना सिर्फ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी बल्कि, आने-जाने के लिए लंबी दूरी का सफर भी नहीं करना पड़ेगा साथ ही अन्य अनावश्यक परेशानियों का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।

– एएनएम के सहयोग से मरीजों को मिलेगी ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा :-
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक विकास कुमार ने बताया कि टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वहाँ तैनात एएनएम के द्वारा ऑनलाइन विभाग द्वारा जारी पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एएनएम द्वारा मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा बल्कि उन्हें सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह निःशुल्क ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा।

त्यौहारों के मौसम में कोविड -19 संक्रमण से दूर रहने के लिए इन मानकों का करें पालन :

– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें ।
– समय पर खाना खाएं और अधिक देर तक भूखा नहीं रहें।

– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित।

– भीड़-भाड़ वाले जगहों जाने पर शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए अनिवार्य रूप से मास्क लगाकर ही जाएं।

– एक निश्चित आंतराल के बाद अपने हाथों को साबून या हैंड सैनिटाइजर से साफ करतें रहें ।