बांका में 1600 लोगों को पड़े टीके, 325 लोगों की जांच

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कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी

टीकाकरण को लेकर क्षेत्र में जागरूकता अभियान जारी

बांका, 20 अक्टूबर

कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। बुधवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 1600 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए तो 325 लोगों की जांच की गई। टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया। इसके अलावा सभी को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर काफी संख्या में लाभुक कोरोना का टीका लेने के लिए पहुंचे। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 1600 लोगों को टीके दिए गए। लोगो में कोरोना टीका को लेकर जागरूकता बढ़ी है| अब लोग समझ रहे हैं कि जितना जल्द टीका लेंगे उतनी ही जल्द कोरोना खत्म हो जाएगा| अच्छी बात यह रही कि 45 साल से अधिक उम्र के लोग भी अच्छी खासी संख्या में टीका लेने के लिए केंद्र पर पहुंचे। टीका को लेकर जागरूकता अभियान भी जारी है।

जांच में कोई भी संक्रमित नहीं मिला:
डॉ. चौधरी ने कहा कि 175 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। इनमें से कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। वहीं आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए 150 लोगों के सैंपल लिए गए। जांच के बाद सभी लोगों को मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। बार-बार हाथ की धुलाई करने की सलाह भी दी गई। सभी को कहा गया कि बाहर से आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें।

टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी: डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन्हें भी कोरोना के खत्म होने तक गाइडलाइन का पालन करना है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक पूरी सतर्कता के साथ रहना जरूरी है। कोरोना को खत्म होने के लिए सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा। जिन्होंने टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें। घर से बेवजह निकलने से परहेज करें।

प्रखंडों में भी 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र की शुरुआत

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-ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण पर जोर
-कोरोना उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
भागलपुर, 20 अक्टूबर
शहरी क्षेत्र में 12 घंटे के टीकाकरण केंद्रों की सफलता के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी शुरुआत हो गई है। जिले के सभी 16 प्रखंड में अब सुबह नौ से रात नौ बजे तक एक टीकाकरण केंद्र की शुरुआत की गई है। यहां पर लाभुक अपनी सुविधा के अनुसार आकर कोरोना टीका की पहली और दूसरी डोज ले सकते हैं। इस केंद्र पर भी एएनएम और टीका की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई है, जबकि डाटा ऑपरेटर और अन्य तरह के इंतजाम केयर इंडिया की ओर से की गई है। इसे लेकर प्रचार-प्रसार का काम भी केयर इंडिया की तरफ से करवाया जा रहा है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में टीकाकरण की गति काफी बेहतर रही है। अधिकतर लोगों ने कोरोना का पहला टीका ले लिया है। अब यहां पर दूसरी डोज पर फोकस किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी काफी संख्या में टीका लेने के लिए लोग सामने आ रहे हैं। ऐसे में वहां पर भी सुबह नौ से रात नौ बजे तक टीकाकरण की व्यवस्था होने पर टीका लेने वालों की संख्या और बढ़ेगी। अन्य केंद्रों पर भी पहले की ही तरह प्रतिदिन टीकाकरण चलता रहेगा। 12 घंटे के केंद्र पर लोग अपनी सुविधा के अनुसार भी टीका लेने के लिए आ सकते हैं। नौकरीपेशा और कामकाजी लोग, जिन्हें दिन में फुर्सत नहीं रहती है, वह शाम में आकर टीका ले सकते हैं। यहां पर रात नौ बजे तक टीकाकरण की व्यवस्था रहेगी। इन बातों को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी प्रखंडों में 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र की व्यवस्था की गई है।
दूसरी डोज पर फोकसः कोरोना टीका का पहला डोज लेने वालों की संख्या अच्छी खासी है। सभी लोगों को टीके की दोनों डोज लेना जरूरी है। कुछ लोग समय पूरा हो जाने के बाद भी दूसरी डोज नहीं ले सके हैं। ऐसे लोगों को लगातार चिह्नित किया जा रहा है। उसे फोन कर टीके की दूसरी डोज लेने के लिए कहा जा रहा है। सभी लाभुकों को टीके की दोनों डोज पड़ने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी, इसलिए एक डोज ले लेने के बाद ऐसा नहीं सोचें कि हमने टीका ले लिया है। दोनों डोज लेना जरूरी है, इसलिए समय पूरा होने पर दूसरी डोज अवश्य लें।
सर्वे का काम जारीः मतदाताओं की सूची के अनुसार जिले में टीका लेने और नहीं लेने वालों का सर्वे बुधवार को लगातार दूसरे दिन जारी रहा। आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर लोगों से इस बारे में पूछ रही हैं। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें टीका लेने को लेकर जागरूक भी कर रही हैं। सर्वे का काम पूरा हो जाने के बाद ऐसे लोगों को लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उस दौरान पहली और दूसरी डोज से वंचित लोगों को कोरोना का टीका दिलवाया जाएगा।

एकीकृत और कागज-रहित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए एप लॉन्च

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मेडिफ्री डिजिटल मोबाईल एप

नई दिल्ली/कोटा

: देश के वरिष्ट डाक्टरों की टीम ने एक अनोखा मोबाईल एप विकसित किया है जिससे अब देश में कहीं से भी एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है|
भारत में बना यह मोबाईल एप स्वास्थ्य सेवाओं को पूर्णतः कागज-रहित बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है| इस एप से रोगियों को चिकित्सकों, लैब्रटोरी, डाइअग्नास्टिक सेंटर और केमिस्ट की सेवाएँ एक ही मंच पर एकीकृत ढंग इस मिलती है| यह इस तरह का देश का पहला एप है जहां ऐलोपथी, होमोपथी और आयुर्वेद पद्धति के डाक्टर एक ही मंच पर उपलब्ध है|
इस एप पर रोगी खुद को निशुल्क पंजीकृत करवा सकते है जिसके उपरांत उन्हे मेडिकल रेकॉर्ड्स के लिए 12 MB का डिजिटल स्पेस मुफ़्त दिया जाता है| इस एप द्वारा डाक्टर से संपर्क करने पर रोगी की अनुमति से वह मेडिकल रेकॉर्ड्स को मोबाईल फोन पर ही देख सकता है|
“यह ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां पर सभी सेवा प्रदाता साझा मंच से सेवाएँ प्रदान करते हैजिससे समय और पैसे की बचत होगी हालांकि हमारा मानना है की रोगी को एक बार अवश्य डाक्टर से मिलने जाना चाहिए क्योंकि चिकित्सा विज्ञान में यह बहुत जरूरी होता है| सर्दी और जुकाम जैसे मामूली रोगों के लिए अनलाइन उपचार हो सकता है,’’ यह कहना है कोटा-स्थित डॉ पीयूष चत्तर, सह डायरेक्टर मेडिफ्री डिजिटल का|
मेडीफ्री डिजिटल निष्पक्ष मंच है क्योंकि इस एप से जुड़े किसी भी डाक्टर, केमिस्ट या लैब्र को बढ़ावा नहीं देता है| रोगी किस की सेवाएँ लेना चाहता है यह उसी पर निर्भर होता है| इस एप में रजिस्टर होने से पहले इसके फ़ायदों के विडिओ देख सकते है जिससे वह खुद से फैसला ले सकते है कि यह सुविधा उनके फायदे की है या नहीं| सभी विडिओ मेडिफ़री यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है| एक स्वस्थ्य व्यक्ति भी खुद को इस एप पर पंजीकृत कर सकता है| यह एप गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है और इसका इऑस वर्ज़न भी जल्द उपलब्ध होगा|
पंजीकृत रोगियों को डाक्टर द्वारा दिया गया नुस्खा एस एम एस (SMS), ई-मेल और एप मैसेज द्वारा भेज जाता है जबकि जो रोगी पंजीकृत नहीं है उन्हे नुस्खा ई-मेल और SMS द्वारा भेज जाता है| रोगियों की गोपनीयता के लिए विश्व का सबसे विश्वसनीय सॉफ्टवेयर ऐमज़ान वेब सर्वर (AWS) का इस्तेमाल किया गया है| इसके बावजूद भी पंजीकरण और स्पेस के लिए रगियों से कोई पैसा नहीं लिया जाता है हालांकि सेवा प्रदाता अपने हिसाब से सेवाओं के लिए फीस लेते है|
मेडिफ्री सॉफ्टवेयर संपर्क-रहित सेवा होने के कारण संक्रमण से बचाव भी करेगा जिनसे कोरोना वायरस, स्वाइन फ्लू और अस्पताल में होने वाले संक्रमण से भी बचाव होगा| “यह सुविधा भारत में मेडिकल टुरिज़म के लिए वरदान साबित होगी,’’ कहना है मेडिफ्री डिजिटल की नई दिल्ली स्थित को-डायरेक्टर डॉ पूनम बजाज का| कागज-रहित इस मोबाईल एप पर काम करना अमरीका में कागज रहित कंप्युटर स्वास्थ्य सेवाओं पर काम करने से ज्यादा सुविधा जनक है, डॉ बजाज कहती है|
डाक्टरों के लिए भी इस एप पर नुस्खा लिखना आसान है क्योंकि उन्हे एक ही बार दवा का नाम लिखना होगा और वह ऑटो सेव हो जाएगा| रोगियों को सलाह लेने के लिए अब शहरों की तरफ नहीं आना पड़ेगा क्योंकि वह पैसे देकर काल से किसी भी डाक्टर या स्पेशलिस्ट से बात कर सकते है और डाक्टर मोबाईल फोन पर ही रोगी का मेडिकल रिकार्ड देख सकेगा| डाइअग्नास्टिक सेंटर और केमिस्ट रोगियों को कम पैसों पर सेवाएं दे सकते है|
भारत में 12 लाख से ज्यादा एलोपथी, 2.5 लाख डेंटल और 9 लाख आयुष पद्धति के पंजीकृत डाक्टर रोजाना 1.5 करोड़ लोगों का उपचार करते है|
अमरीका में विश्व का सबसे विकसित कंप्युटर द्वारा संचालित हेल्थकेयर सेवाएँ है जिसमें वहाँ रहने वाले हर व्यक्ति की स्वास्थ्य रिपोर्ट उपलब्ध है| मेडिफ्री डिजिटल लगभग इसी प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करने का प्रयास है जो मोबाईल पर दी जा रही है| अमरीका में सतत घरेलू उत्पाद का 18% स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करते है जबकि भारत में यह प्रतिशत केवल 2% है हालांकि यहाँ की जनसंख्या USA से चार गुण ज्यादा है|

कोरोना काल की चुनौतियों को स्वास्थ्यकर्मियों ने अवसर में बदल डाला

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-दिन-रात काम कर कोरोना जैसी गंभीर और नई बीमारी से लोगों को बचाया
-कोरोना काल के अनुभव अब दूसरी बीमारी से पीड़ित के इलाज में आ रहे काम

बांका-

डेढ़ साल पहले जब कोरोना जैसी गंभीर बीमारी का प्रसार शुरू हुआ था तो आमलोगों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों के सामने भी कई चुनौतियां थीं। बीमारी नई थी, इस वजह से इससे निपटने के ज्यादा तरीके लोगों को मालूम नहीं थे, लेकिन एक कहावत है न करने से क्या नहीं होता है। इसे स्वास्थ्यकर्मियों ने चरितार्थ कर दिया। शुरुआत में संसाधन भी कम थे, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की दिन-रात की मेहनत ने लोगों को तो कोरोना से बचाया ही, साथ ही उन्हें चुनौतियों को भी अवसर में बदलने का अनुभव प्राप्त हुआ। अब यह अनुभव न सिर्फ कोरोना से बचाव में, बल्कि दूसरी बीमारियों के इलाज में भी काम आ रहे हैं।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि कोरोना काल में जिले के सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने बेहतर काम किया। जांच से लेकर टीकाकरण में स्वास्थ्यकर्मियों ने बेहतर योगदान दिया। अभी भी कोरोना के मामले भले ही नहीं आ रहे हों, लेकिन वे लोग उसी जतन से काम कर रहे हैं जैसे कि पहली और दूसरी लहर के दौरान कर रहे थे। जिले में लगातार कोरोना जांच हो रही है। साथ ही प्रतिदिन टीकाकरण भी चलाया जा रहा है। इसके अलावा बीच-बीच में अभियान भी चलाया जाता है, जिसमें स्वास्थ्यकर्मी पूरी ताकत लगाकर काम कर रहे हैं। अभी त्यौहार के मौसम में बाहर से आने वाले लोगों की जांच से लेकर टीकाकरण में वह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संसाधनों में हुई बढ़ोतरीः जब कोरोना की शुरुआत हुई थी तो संसाधन भी सीमित थे, लेकिन आज जिले में कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर हर तरह की व्यवस्था है। एंटीजन से लेकर आरटीपीसीआर जांच की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी शुरू हो गया है। इससे न सिर्फ कोरोना के मरीज, बल्कि अन्य बीमारियों के भी गंभीर मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी। पहले ऑक्सीजन को लेकर भागलपुर पर निर्भरता थी, जो कि अब खत्म हो गई है। अब कोरोना की आरटीपीसीआर जांच भी बांका में ही हो जा रही है। अगर किसी में कोरोना के लक्षण हैं और एंटीजन किट से पुष्टि नहीं हो रही है तो आरटीपीआर जांच के जरिये बीमार व्यक्ति की वास्तविक स्थिति का पता लगा लिया जाता है।
अन्य सेवाएं भी हुईं सामान्यः कोरोना की जब शुरुआत हुई थी तो संक्रमण से बचाव को लेकर अन्य सेवाएं थोड़ी प्रभावित हुई थीं, लेकिन कोरोना के मामले कम होते ही फिर से इसे चालू कर दिया गया है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि डेढ़-दो सालों के अनुभव से हमलोगों ने काफी कुछ सीखा है। जो अब काम आ रहा है। अब नियमित टीकाकरण समेत अन्य सेवाएं सामान्य हो गई हैं। लोग भी जागरूक हो गए हैं। स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ने से स्वास्थ्यकर्मियों को भी काम करने में सहयोग मिल रहा है।

कोरोना टीकाकरण को लेकर सर्वे शुरू

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-वोटर लिस्ट के जरिये क्षेत्र के लोगों का किया जा रहा सर्वे
-टीका लेने वाले और नहीं लेने वालों की हो रही है पचहान
भागलपुर, 19 अक्टूबर।
पंचायत चुनाव के वोटर लिस्ट के जरिये कोरोना टीकाकरण को लेकर जिले में सर्वे का काम मंगलवार से शुरू हो गया। आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर टीका लेने वाले और नहीं लेने वालों की पहचान कर रही हैं। टीका नहीं नहीं लेने वालों को टीका लेने के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। अगर उनके मन में कोरोना टीका के प्रति किसी तरह की दुविधा है तो उसे खत्म कर टीका लेने के फायदे बता रही हैं। सर्वे के दौरान टीका नहीं लेने वालों की पहचान के बाद इनलोगों के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें इनलोगों का टीकाकरण किया जाएगा।
नाथनगर प्रखंड की कजरैली पंचायत के तेतरहाट गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 80 की सेविका रंजना कुमारी ने बताया कि हमलोगों को क्षेत्र की वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। उसके अनुसार हमलोग घर-घर जा रहे हैं। घर के अगर किसी सदस्य ने दोनों टीका ले लिया है तो रजिस्टर में दो लिख दिया जाता है। अगर इसी तरह किसी ने एक टीका लिया है तो एक लिखा जाता है। साथ ही उस व्यक्ति को समय पर टीका की दूसरी डोज लेने के लिए भी कहा जाता है। अगर घर का कोई व्यक्ति कमाने के लिए बाहर चला गया है तो रजिस्टर में एक्स एस लिख दिया जाता है। अगर घर के किसी व्यक्ति ने टीका नहीं लिया है और समझाने के बाद भी टीका नहीं लेना चाहता है तो उसके कॉलम में एक्स आर लिखा जा रहा है। अगर समझाने के बाद टीका लेने के लिए तैयार हो जाता है तो ओके लिखा जा रहा है। अगर घर के किसी सदस्य की मौत हो गई हो और इसके बावजूद उस व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में मौजूद है तो उसके कॉलम में एक्स डी लिख दिया जा रहा है।
आज भी किया जाएगा सर्वेः जिले में कोरोना का टीका लेने और नहीं लेने वालों का सर्वे बुधवार को भी किया जाएगा। आज सर्वे का काम पूरा हो जाने के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट में चिह्नित लोगों को अभियान चलाकर टीका दिया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि सर्वे के दौरान टीका लेने और नहीं लेने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उनसे टीका नहीं लेने का कारण पूछा जा रहा है। कारण पता चल जाने के बाद उसकी समस्या को दूर कर टीकाकरण कराया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकसः सर्वे के दौरान जिले के ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के अधिकतर लोगों का टीकाकरण हो चुका है। यहां दूसरी डोज लेने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोगों ने अभी टीके की पहली डोज भी नहीं ली है। इसलिए उन्हें कोरोना टीका दिलवाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे का साथ लोगों को टीका के प्रति जागरूक करने का भी काम किया जा रहा है।

हम नहीं चाहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी ताउम्र फाइलेरिया (हाथी पांव ) जैसी बीमारी के साथ गुजारें, इसलिये खाई दवा : उमेश शर्मा

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– दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद जिला में एक बार से शुरू हुआ कार्यक्रम

– जमालपुर के वार्ड संख्या 5 निवासी उमेश शर्मा और स्वर्णलता देवी ने खाई दवा

मुंगेर, 19 अक्टूबर। हम नहीं चाहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी फाइलेरिया (हाथी पांव ) जैसी बीमारी के साथ बची हुई जिंदगी गुजारें। इसलिये खाई दवा । उपर्युक्त बातें मंगलवार को जमालपुर नगर परिषद के वार्ड संख्या 5 के रहने वाले 52 वर्षीय उमेश शर्मा ने फाइलेरिया की दवा अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खाने के बाद कही। उन्होंने बताया कि मेरे रिश्तेदार में एक व्यक्ति को फाइलेरिया या हाथी पांव की बीमारी हो गई थी। इसके बाद उन्हें इस बीमारी से निजात नहीं मिल पाई। इसलिए हम चाहते हैं कि मैं और मेरी पत्नी कभी भी इस बीमारी का शिकार नहीं हो। इसलिए मैंने खुद फाइलेरिया की दवा खाने के साथ-साथ अपनी पत्नी 40 वर्षीय स्वर्णलता देवी को भी फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी की टैबलेट खाने के लिए प्रेरित करते हुए अपने सामने दवा खिलवाई। मंगलवार को जमालपुर नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड संख्या 5 में पीसीआई एमडीए प्रोग्राम मुंगेर के एसएमसी राकेश कुमार, मिथिलेश कुमार के नेतृत्व में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इंदू देवी और रेखा कुमारी ने अपने सामने उमेश शर्मा, स्वर्णलता देवी सहित कई अन्य लोगों को फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की टैबलेट खिलवाई।

उमेश शर्मा की पत्नी 40 वर्षीय स्वर्णलता देवी ने बताया कि मंगलवार को फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए आई टीम के सदस्यों ने बताया कि साल में कम से एक बार भी फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी खाने के बाद हाथी पांव बीमारी होने की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाती है। मैं और मेरे पति दोनों ने आज फाइलेरिया की दवा खा ली है। इसके साथ बाद हमदोनों पति-पत्नी अपने आसपास रह रहे लोगों को फाइलेरिया की दवा खाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंसलटेंट पंकज कुमार प्रणव ने बताया कि फाइलेरिया या हाथी पांव एक गम्भीर बीमारी है। इस बीमारी से मुंगेर जिला भी काफी प्रभावित है। हाथी पांव के साथ- साथ हाइड्रोसिल का बढ़ जाना भी फाइलेरिया के ही कारण होता है। हालांकि एक छोटे से ऑपरेशन के बाद बढ़े हुए हाइड्रोसिल से तो निजात मिल जाती है लेकिन यदि किसी को हाथी पांव की बीमारी हो जाती है तो उसे ताउम्र उसके साथ ही गुजारना पड़ता है। इस बीमारी से बचने का एक ही जरिया है कि दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोग साल में कम से कम एक बार अवश्य फाइलेरिया की दवा अल्बेंडाजोल और डीईसी की टैबलेट का सेवन करें। उन्होंने बताया कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवम किसी गम्भीर बीमारी से ग्रसित लोग इस दवा का सेवन नहीं करें। हालांकि बच्चों को स्तनपान कराने वाली माताएं फाइलेरिया की दवा अल्बेंडाजोल और डीईसी की टैबलेट का सेवन कर सकती हैं।

जिला में 20 सितंबर से चल रहा है एमडीए अभियान :
पीसीआई के एमडीए प्रोग्राम एसएमसी राकेश कुमार ने बताया कि विगत 20 सितंबर से ही जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड़ों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के सहयोग से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका घर- घर जाकर लोगों को अपने सामने फाइलेरिया की दवा अल्बेंडाजोल और डीईसी खिला रही हैं। आमलोगों से अपील करते हुए उन्होने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को मुंगेर से दूर भगाने के लिए सभी जिला वासी जब भी उन्हें फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता की टीम उनके घर जाए तो वो स्वयं उनके सामने दवा खाने के साथ ही अपने परिवार के सभी लोगों, आस पास रहने वाले सभी लोगों और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी फाइलेरिया की दवा खाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि दो से पांच वर्ष तक के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक टैबलेट, पांच वर्ष से 15 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक टैबलेट तथा 15 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन एवं अल्बेंडाजोल की एक टैबलेट दिया जाना है। अल्बेंडाजोल की टैबलेट को चबाकर व डीईसी की टैबलेट पानी के साथ निगल कर खाना है। इन दवाओं को खाली पेट कभी भी नहीं खाना है अन्यथा नुकसान भी हो सकता है। यदि फाइलेरिया की दवा खाने के बाद किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी महसूस होती है तो तत्काल अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।

जिले में ग्लोबल आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह का शुभारंभ कल

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– आयोडीन के महत्व की दी जाएगी जानकारी, सेवन के लिए किया जाएगा जागरूक
– आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों की भी दी जाएगी जानकारी

लखीसराय, 19 अक्टूबर।
21 अक्टूबर गुरुवार को जिले में ग्लोबल आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह का शुभारंभ होगा। जिसका 28 अक्टूबर को समापन होगा। इस दौरान पूरे सप्ताह तरह-तरह के कार्यक्रम समेत अन्य गतिविधियां के माध्यम से लोगों को आयोडीन के महत्व की जानकारी दी जाएगी और सेवन के लिए जागरूक भी किया जाएगा। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। ताकि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँच सके और आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों पर विराम लगे। हर हाल में निर्धारित समय पर उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ सुनिश्चित करने को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

– सभी पीएचसी प्रभारी को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, गुरुवार से पूरे जिले में ग्लोबल आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह का शुभारंभ होना है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पीएचसी स्तर पर लोगों को जागरूक करने, प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँचाने के लिए आवश्यक पहल करने को कहा गया है।

– आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर भी पहुँचाएंगी आयोडीन के महत्व की जानकारी :
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर भी लोगों को आयोडीन के महत्व की जानकारी देंगी। इसको लेकर जिले के सभी पीएचसी में बैठक कर आशा को निर्देशित किया जाएगा। साथ ही आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी।

– बैनर-पोस्टर के माध्यम से भी किया जाएगा जागरूक :
बैनर-पोस्टर के माध्यम से भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँचाई जाएगी और लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए पीएचसी में बैनर – पोस्टर लगाया जाएगा। जिसके माध्यम से लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों एवं इसके महत्व का संदेश दिया जाएगा।

– आयोडीन युक्त नमक के सेवन से हम इन बीमारियों से रहेंगे दूर :
आयोडीन युक्त नमक का सेवन हमें कई बीमारियों से दूर रखता है। जैसे कि, घेघा रोग, बहरापन, अविकसित मस्तिष्क, गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, बौनाकद, सीखने और समझने की क्षमता ,शारीरिक रूप से कमजोर, अपंग, मृत बच्चा पैदा होना, वयस्कों में ऊर्जा की कमी, जल्दीे थकावट आदि बीमारियों से हमें बचाती है। इसके अलावे हमें कई परेशानियों से भी दूर रखती है। इसलिए, लोगों को आयोडीन युक्त नमक का ही सेवन करना चाहिए।

– आयोडीन युक्त नमक को ऐसे रखें सुरक्षित :
आयोडीन युक्त नमक को सुरक्षित रखने के लिए हवा बंद डब्बे में बंद कर रखें। नमक के डब्बे को छायादार एवं सूखे स्थान पर रखें, चूल्हे से दूर रखें, खाने पकाने के अंत में नमक को डालें। इससे नमक सुरक्षित रहेंगे और नमक की क्षमता बनी रहेंगी।

– जानें क्या है आयोडीन :
आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है। जो मानव विकास और बढ़त के लिए आवश्यक है। जिसकी शरीर को विकास एवं जीने के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। आयोडीन का एक फायदा यह है कि यह थायरायड ग्रंथियों को सुचारु रूप से काम करने में मदद करता और यह ग्रंथियां थायरायड के हार्मोन्स छोड़ती हैं। जिससे शरीर का मेटाबॉलिक स्तर नियंत्रित रहता और यह मेटाबॉलिक स्तर शरीर के कई अंगों की कार्यशीलता को प्रभावित करता है। जैसे- खाने को पचाने, भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने तथा सोने के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा आमतौर पर सामान्य विकास और बढ़त के लिए लगभग 100 – 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है और इस आवश्यकता की पूर्ति न होने पर व्यक्ति कई विकारों का शिकार भी बन सकते हैं।

– आयोडीन युक्त नमक सेवन से होने वाले लाभ :
आयोडीन युक्त नमक का नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में आवश्यक आयोडीन की पूर्ति होती है। इससे तेज दिमाग, स्वस्थ एवं ऊर्जा से भरपूर शरीर और कार्य क्षमता में भी बढ़ोतरी होती हैं। गर्भवती महिलाओं द्वारा आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल करने से गर्भपात की समस्या भी नहीं होती है और स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है। इसके अलावा गर्भ में शिशु का शारीरिक व मानसिक रूप से पूर्ण विकास भी होता है।

फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन:बचाव के लिए लोगों को किया जागरूक

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– स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से गोगरी प्रखंड के कुंदी गाँव में किया गया जागरूक
– फाइलेरिया और कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी दी गई जानकारी

खगड़िया, 19 अक्टूबर

जिले के गोगरी प्रखंड अंतर्गत कुंदी गाँव में फाइलेरिया एवं कालाजार उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया। जिसके दौरान उपरोक्त दोनों बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को विस्तृत जानकारी दी गई और फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जिले में चल रहे एमडीए अभियान के तहत इससे स्थाई निजात के लिए दवाई का सेवन करने के लिए प्रेरित किया गया। ताकि एमडीए अभियान की रफ्तार को गति मिल सके एवं अभियान सफल हो सके। साथ ही दोनों बीमारियों से लोग सुरक्षित हो सकें। जागरूकता टीम में डीएमओ डाॅ विजय कुमार, डीभीबीडीसीओ बबलू सहनी, केयर इंडिया के डीपीओ-भीएल कृष्णा कुमार भारती, भीबीडीसी रघुनायक कुमार, केयर इंडिया के प्रखंड समन्वयक श्रवण कुमार आदि मौजूद थे।

– फाइलेरिया और कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी दी गई जानकारी :
डीएमओ डाॅ विजय कुमार एवं केयर इंडिया के डीपीओ-भीएल कृष्णा कुमार भारती ने बताया, जागरूकता अभियान के दौरान फाइलेरिया एवं कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। जिसके दौरान यह बताया गया कि लक्षण महसूस होने पर तुरंत जाँच एवं उपचार कराएं। सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की सुविधा उपलब्ध है। ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके और बीमारी से आसानी के साथ स्थाई निजात मिल सके।

– फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई का भी कराया गया सेवन :
डीभीबीडीसीओ बबलू सहनी ने बताया, जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को जिले में चल रहे एमडीए अभियान के तहत दवाई का सेवन करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही मौके पर दवाई का सेवन भी कराया गया। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में शत-प्रतिशत लोगों को दवाई का सेवन सुनिश्चित कराने को लेकर लगातार एमडीए अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को दवाई का सेवन करा रही हैं।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।

– जानें, फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाइड्रोसिल (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।

विशेष कोविड वैक्सीनेशन महाअभियान : शिविर आयोजित कर लोगों को दी गई वैक्सीन

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– जिले के सभी प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन
– सेकेंड डोज लेने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर दी गई वैक्सीन

लखीसराय, 18 अक्टूबर

सोमवार को जिले में विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन कर लोगों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी गई। ताकि अधिकाधिक लोग वैक्सीनेटेड हो सकें और अभियान सफल हो सके। सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती एवं वैक्सीन वाइल की व्यवस्था की गई थी। ताकि एक भी लोग वैक्सीन की कमी से वैक्सीनेशन कैम्प से लौटकर वापस नहीं आयें और हर हाल में अभियान का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

– सेकेंड डोज लेने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर दी गई वैक्सीन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी गई। सभी सेंटरों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की व्यवस्था और पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती की गई थी। ताकि वैक्सीन लेने वालों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें। वहीं, उन्होंने बताया, सेकेंड डोज लेने वाले व्यक्तियों को सभी सेशन साइटों पर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दी गई। ताकि सेकेंड डोज को भी गति मिल सके और अभियान सफल हो सके। साथ ही निर्धारित समय पर लोगों को सेकेंड डोज की वैक्सीन देना सुनिश्चित हो सके।

– चाय दुकानदार विजय राम ने ली पहली डोज की वैक्सीन और लोगों से भी लेने की अपील की :
लखीसराय पीएचसी में आयोजित विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर में पुरानी अस्पताल गली निवासी 60 वर्षीय चाय दुकानदार विजय राम ने पहली डोज की वैक्सीन ली। वैक्सीन लेने के बाद उन्होंने कहा, इस महामारी से बचाव के लिए वैक्सीन की पूरी डोज लेने के साथ-साथ अभी और सावधानी और सतर्कता जारी रखने की जरूरत है। क्योंकि, लोगों के सहयोग और सावधानी के साथ-साथ सरकार के जरूरी कदम से भले ही संक्रमण की रफ्तार में काफी कमी आई है। किन्तु, अभी इस महामारी का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि सभी लोग हर हाल में प्रोटोकॉल के अनुसार वैक्सीन की पूरी डोज लें और सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें। वहीं, उन्होंने कहा, मैं चाय दुकानदार हूँ। जिसके कारण मेरे पास विभिन्न गाँवों के लोग चाय पीने आते हैं। इसलिए, मैं ही सुरक्षित नहीं रहूँगा तो मेरे ग्राहक कैसे सुरक्षित रहेंगे। इसी उद्देश्य से मुझे जैसे ही आयोजित शिविर की जानकारी मिली कि मैंने तुरंत वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्सीन ली।

– पूरी परिवार को सुरक्षित रखने के लिए महिलाओं को भी वैक्सीन लेना जरूरी :
बड़हिया प्रखंड के सहजादपुर निवासी बेबी ने भी लखीसराय पीएचसी परिसर में आयोजित विशेष वैक्सीनेशन शिविर में सेकेंड डोज की वैक्सीन ली। उन्होंने बताया, मैं एक गृहिणी हूँ। इसलिए, खुद की सुरक्षा के साथ पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए मैंने निर्धारित समय पर सेकेंड डोज की वैक्सीन ली। क्योंकि, एक महिला पर पूरा परिवार निर्भर रहता है। दरअसल, महिलाओं द्वारा बनाये गये भोजन को पूरे परिवार के लोग खाते हैं। ऐसे में महिलाओं को इस महामारी से खुद के साथ-साथ पूरे परिवार को सुरक्षित वैक्सीन की पूरी डोज लेना बेहद जरूरी है। इसलिए, मैं जिले के तमाम महिलाओं से अपील करता हूँ कि खुद के साथ-साथ पूरे परिवार को सुरक्षित रखने के लिए निश्चित रूप से वैक्सीन की पूरी डोज लें। यही सबसे बेहतर और कारगर कदम होगा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

कोविड-19 वैक्सीन से वंचित लोगों का महासर्वे शुरू, घर-घर जाकर मतदाता सूची के आधार पर सर्वे

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– सभी प्रखंडों में शुरू हुआ सर्वे, ऑगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं कर रहीं हैं सर्वे
– 20 अक्टूबर तक चलेगा सर्वे, वैक्सीन से वंचित लोगों की सूची तैयार कर किया जाएगा वैक्सीनेटेड

खगड़िया, 18 अक्टूबर

किसी कारणवश अबतक कोविड-19 वैक्सीन से वंचित लोगों को चिह्नित करने के लिए सोमवार से जिले में निर्धारित तिथि के अनुसार महासर्वे शुरू हो गया। जिसके माध्यम से सर्वे कार्य की ड्यूटी के लिए गठित स्वास्थ्य टीम में शामिल संबंधित क्षेत्र की ऑगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ता अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। जिसके दौरान पूरे परिवार के सदस्यों की जानकारी ली जा रही है कि किसने वैक्सीन ली और किसने नहीं ली। जिसके पश्चात अबतक वैक्सीन नहीं लेने वाले लोगों को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार की जाएगी। ताकि उन्हें हर हाल में वैक्सीनेटेड किया जा सके और एक भी लोग वैक्सीन से वंचित नहीं रहें। वहीं, हर हाल में सर्वे की सफलता को लेकर गोगरी की सर्वे टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से एक बैठक की। जिसमें हर हाल में सर्वे को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रयसी, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ चंद्र प्रकाश, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक रिपुंजय कुमार, प्रखंड प्रबंधक (केयर इंडिया) नीलम कुमारी आदि मौजूद थी।

– त्यौहार के अवसर पर दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों का प्राथमिकता के आधार पर सर्वे :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, निर्धारित तिथि के अनुसार पूरे जिले में ऑगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से मतदाता सूची के आधार पर सर्वे शुरू कर दिया गया है। इस दौरान किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीन से वंचित लोगों का तो सर्वे हो ही रहा साथ ही त्यौहार पर दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों का भी प्राथमिकता के आधार पर सर्वे किया जा रहा है। ताकि बाहर से आने वाले जो अबतक किसी भी कारण वश वैक्सीन से वंचित हैं, उन्हें वैक्सीनेटेड किया जा सके।

– ऑगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा मतदाता सूची के सहयोग से सर्वे :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, मतदाता सूची के सहयोग से वैक्सीन से वंचित लोगों का सर्वे किया जा रहा है। ताकि वैक्सीन से वंचित एक भी लोग सर्वे से छूटे नहीं और हर हाल में शत-प्रतिशत लोगों का सर्वे हो और जल्द से जल्द संपूर्ण जिले वासी पूर्ण रूप से वैक्सीनेटेड हो सकें। वहीं, उन्होंने बताया, बीसीएम एवं आशा फैसिलिटेटर की मॉनिटरिंग में ऑगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। एक भी लोग सर्वे से छूटे नहीं, इसको लेकर सर्वे टीम को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

– 20 अक्टूबर को तीन दिवसीय सर्वे का होगा समापन :
खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रयसी ने बताया, जिले में वैक्सीन से वंचित लोगों का सर्वे 20 अक्टूबर को संपन्न होगा। इसी निर्धारित समयावधि के अंदर सर्वे का कार्य पूरा किया जाना है। इस दौरान सर्वे टीम को वैक्सीन से वंचित लोगों की सूची भी तैयार करनी है और सर्वे टीम द्वारा तैयार सूची को जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। जिसके बाद 22 अक्टूबर को पूरे जिले में विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान का आयोजन कर सभी वंचित लोगों को वैक्सीनेटेड किया जाएगा। ताकि सभी वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित और शत-प्रतिशत लोग वैक्सीनेटेड हो सकें।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।