फाइलेरिया उन्मूलन के लिए पुलिस लाइन में शुरू हुआ एमडीए अभियान, पुलिस कर्मियों को खिलाई गई दवा

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– 800 पुलिस वालों को खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा
– पुलिस लाइन में कैंप कर लगातार खिलाई जा रही है दवा, जिले के विभिन्न गाँवों में भी चल रहा है अभियान

खगड़िया-

फाइलेरिया उन्मूलन को एमडीए(मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार स्वास्थ्य टीम द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों के विभिन्न गाँवों में घर-घर जाकर इस बीमारी से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खिलाई जा रही है। ताकि एक भी लोग दवाई खाने से वंचित नहीं रहें और अभियान सफल हो सके। इसी कड़ी में गुरुवार को खगड़िया पुलिस लाइन में एमडीए अभियान का शुरुआत की गई। जहाँ कैंप आयोजित कर एवं घूम-घूम कर तय मानकों एवं कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ डीएमओ डाॅ विजय कुमार एवं डीभीबीडीसी बबलू सहनी के नेतृत्व में अभियान की शुरुआत हुई और पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को दवाई खिलायी जाने लगी । वहीं, डीएमओ ने कहा, फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल व डीईसी की दवा का सेवन बहुत जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम पुलिस पदाधिकारियों, कर्मियों एवं पूरे जिले वासियों से अपील करता हूँ कि निश्चित रूप से पूरी तरह निःसंकोच होकर दवा खिलाने वाली टीम के सामने दवा का सेवन करें।
800 पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मियों को खिलाई जाएगी दवा :
डीभीबीडीसी बबलू सहनी ने बताया, एमडीए अभियान की शुरुआत के साथ ही जिले के विभिन्न प्रखंडों के विभिन्न गाँवों में गृह भेंट की तर्ज पर आशा कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर लोगों को खुद के सामने अलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं खिलाई जा रही हैं । ताकि एक भी व्यक्ति दवाई खाने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफल हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, गुरुवार से पुलिस लाइन में भी एमडीए अभियान की शुरुआत की गई। 800 पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को दवाई खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

– निर्धारित डोज के अनुसार खिलाई जा रही है दवा :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, सभी आयु वर्ग के लोगों को निर्धारित डोज के अनुसार दवाई खिलाई जा रही है। जिसमें 2 से 5 साल तक के बच्चों को 100 मिलीग्राम की डीईसी एवं 400 मिलीग्राम की अलबेंडाजोल की एक-एक गोली, 6 से 14 साल तक के किशोरों को डीईसी की दो एवं अलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अलबेंडाजोल की एक गोली खिलाई जा रही है।
– शत-प्रतिशत पुलिस वालों को दवाई खिलाना सुनिश्चित करने के लिए की गई है मेडिकल टीम तैनाती :
भीडीडीओ मो0 शहनवाज ने बताया, शत-प्रतिशत पुलिस वालों को दवाई खिलाना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस लाइन में मेडिकल टीम की तैनाती की गई है। जिसमें अलौली पीएचसी के भीबीडीएस अरूण कुमार, सदर पीएचसी खगड़िया के विनोद कुमार, मानसी के ओमप्रकाश यादव एवं केयर इंडिया के बीसी-भीएल नवीन गुप्ता, श्रवण कुमार को शामिल किया गया है।

– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसिल (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।

– इन बातों का रखें ख्याल :
– भूखे पेट दवा नहीं खिलानी है।
– किसी के बदले किसी अन्य को दवा ना दें और स्वास्थ्य कर्मी के सामने दवा खाएं।
– गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलानी है।
– 02 वर्ष छोटे बच्चे को दवा नहीं खिलानी है।
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भी दवा नहीं खिलानी है।

– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम: मंडलकारा के कैदियों, स्टाफ और उनके परिवारवालों को खिलाई गई फाइलेरिया की दवा

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– जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट के नेतृत्व में सात लोगों की टीम ने कैदियों को खिलाई दवा

मुंगेर-

मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत गुरुवार को मंडल कारा मुंगेर में सजा काट रहे कैदियों, जेल के स्टाफ और उनके परिवारवालों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट पंकज कुमार के नेतृत्व में सात लोगों की टीम गठित गई थी। टीम में जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट पंकज कुमार के अलावा पीसीआई से एमडीए एसएमसी राकेश , केयर इंडिया से ब्लॉक कॉर्डिनेटर वीएल अमरेश कुमार और नटराज कुमार, सीफार से जयप्रकाश कुमार, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर नवीन कुमार, फील्ड वर्कर विनोद कुमार शामिल थे।
जेल के कैदियों और जेलकर्मियों को फाइलेरिया के संक्रमण से बचाने के लिए दवा खिलाई गई-
मंडल कारा मुंगेर स्थित अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर मधु कुमारी ने बताया कि गुरुवार को मंडल कारा स्थित अस्पताल में कैदियों और जेल स्टाफ के साथ उनके परिवार वालों को फाइलेरिया (हाथी पांव) से बचाने के लिए अल्बेंडाजोल 400 एमजी की एक गोली और डीईसी 100 एमजी तीन गोली खिलाई गई। मंडल कारा मुंगेर के सहायक जेल अधीक्षक अजय कुमार ठाकुर ने बताया स्वास्थ्य विभाग मुंगेर की टीम के द्वारा मंडल कारा मुंगेर में सजा काट रहे कैदियों और जेल स्टाफ को फाइलेरिया के संक्रमण से बचाने के लिए दवा खिलाई गई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा यदि लगातार चार-पांच वर्षों तक एमडीए प्रोग्राम चलाकर सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई जाती है तो निश्चय ही आगामी कुछ वर्षों में मुंगेर सहित पूरे राज्य को फाइलेरिया से मुक्त किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि राज्य फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य की भी चिंता कर रही है यह बहुत ही स्वागतयोग्य है।
दो दिनों तक मंडल कारा मुंगेर में फाइलेरिया की दवा खिलाई जाएगी
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कन्सल्टेंट पंकज कुमार प्रणव ने बताया कि जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर अरविंद कुमार सिंह के निर्देशानुसार सात लोगों की टीम बनाकर गुरुवार को मंडल कारा मुंगेर में कैदियों, जेल स्टाफ और उनके परिवार वालों को फाइलेरिया से बचाव के लिए अपने सामने दवा खिलाई गई। उन्होंने बताया कि मंडल कारा में कैदियों, जेल स्टाफ और उनके परिवार वालों को फाइलेरिया कि दवा खिलाने का जेल आईजी पटना से निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही मंडल कारा मुंगेर के जेल अधीक्षक मनोज कुमार के द्वारा भी इससे संबंधित अनुरोध पत्र प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार दो दिनों तक मंडल कारा मुंगेर में फाइलेरिया की दवा खिलाई जाएगी। इस अवसर पर मंडल कारा स्थित अस्पताल के ड्रेसर अरविंद कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे। इस दौरान 500 से अधिक कैदियों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई।

कोविड-19 मेगा टीकाकरण अभियान के लिए 50 हजार का लक्ष्य: जिलाधिकारी

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– मीडिया कार्यशाला में दिखा विभागीय समन्वय
– प्रातः 7:00 बजे से टीकाकरण की होगी शुरुआत
– पंचायत वाइज वैक्सीनेशन साइट की है तैयारी

लक्खीसराय-

जिले में 50 हजार लाभार्थियों को कोरोना रोधी टीके लगाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मीडिया कार्यशाला का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति, लक्खीसराय द्वारा किया गया | इस आयोजन में सहयोग सीफार और केयर इंडिया ने किया | कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं जीविका दीदियों को घर-घर जाकर लाभार्थियों को उत्प्रेरित करना है | उन्होंने बताया 3 माह से अधिक प्रथम डोज लेने वाले 18 वर्ष से ऊपर के लाभार्थियों को दूसरे डोज (जो मात्र 20 प्रतिशत ही लिए हैं) के लिए शिक्षकों के दल द्वारा प्रेरित किया जाएगा| यहाँ तक की असमर्थ व दिव्यंगों को टीकाकरण स्थल पर लाने की विशेष व्यवस्था की गयी है| आगे चिकत्सा प्रभारी पदाधिकारियों को इंगित करते हुए बचे हुए वैक्सीन को कहाँ सदुपयोग करने हैं इसके लिए अद्यतन जानकारी रखने के निर्देश दिए| उन्होंने बताया कि प्रातः 7:00 बजे से टीकाकरण की शुरुआत होगी| उनके अनुसार पंचायतवार वैक्सीनेशन साइट बनाने की तैयारी की जा रही है |
सभी वैक्सीनेटर और वेरिफायर को प्रशिक्षित किया गया है –
वहीं सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने प्रत्येक टीकाकरण स्थल की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए विभागीय समन्वय के महत्व को बताया | जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, समेकित बाल विकास परियोजना तथा जीविका सभी के समग्र प्रयास से ही लक्ष्य को पाने के बारे में बताया| इसी क्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया सभी वैक्सीनेटर और वेरिफायर को प्रशिक्षित किया गया है | उक्त मेगा टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए 2 अक्टूबर को मीडिया को व्यापक कवरेज के लिए आगे आने के लिए कहा |जिला स्वास्थ्य समिति के कार्यक्रम प्रबंधक मोहम्मद खालिद ने आवश्यक टीके की उपलब्धता को सुनिश्चित करा लेने की जानकारी को साझा किया और प्रखंड स्वस्थ्य प्रबंधकों को अभियान की मानिटरिंग के बारे में बताया |
कोरोना के दिशा निर्देशों के अनुपालन करने का जिलाधिकारी ने दिया संदेश –
इसमें जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) ने सेविकाओं-सहायिकाओं को दूसरे डोज से छूटे हुए लोगों को भी चिह्नित कर टीका लगवाने के लिए आगाह किया | जिला शिक्षा पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने विभाग से जुड़े सभी कर्मियों को गाँधी जयंती को शत-प्रतिशत कोविड-19 के टीकाकरण के लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने के बारे में बताया |केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान ने अभियान के प्रचार प्रसार के लिए माइक्रो प्लान व सिस्टेमेटिक योजना के अनुसार घर-घर एसएमएस, माइकिंग की बातों को बताया | इसके बाद डॉ. गीतिका शंकर, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एस.एम.ओ-आर.आर.टी ने टीकाकृत लाभार्थियों द्वारा अन्य लोगों को जागरूक करने के पक्ष को रखा | जिलाधिकारी ने कार्यशाला के धन्यवाद् ज्ञापन सत्र में सभी से कोरोना के दिशा निर्देशों के अनुपालन करने के सन्देश के साथ समापन किया |

अभी वो दिन भूले नहीं हैं, टीका भी लेंगे और सतर्क भी रहेंगे

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-सिर्फ टीका लेने से नहीं होगा, सावधानी भी है जरूरी
-कोरोना के खिलाफ अभियान में भी करते रहेंगे सहयोग

बांका-

कोरोना टीका को लेकर लोगों में जागरूकता का अच्छा खासा असर दिख रहा है। अब तो लोग कोरोना का टीका लेने के लिए सामने तो आ ही रहे हैं, साथ में सतर्क कहने की भी बात कह रहे हैं। गांधी चौक पर 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर दूसरी डोज लेने वाले अमरेंद्र ठाकुर कहते हैं कि मैंने टीका का दोनों डोज ले लिया है, लेकिन कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी को दोबारा पांव नहीं पसारने देने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। इसलिए टीका लेने के बाद भी सतर्क रहेंगे और दूसरे लोगों को भी सतर्क रहने के लिए कहेंगे।
मास्क भी पहनेंगे और सामाजिक दूरी का पालन भी करते रहेंगे-
इसी केंद्र पर दूसरी डोज लेने वाले रंजीत कुमार तांती कहते हैं कि अभी भी वो दिन भूले नहीं हैं। टीका तो ले लिए हैं, लेकिन कोरोना नहीं हो इसे लेकर खुद तो सतर्क रहेंगे ही। दूसरे लोगों को भी सतर्क रहने के लिए कहेंगे। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखेंगे। मास्क भी पहनेंगे और सामाजिक दूरी का पालन भी करते रहेंगे। बाहर से घर आने पर हाथ की भी धुलाई करते रहेंगे। श्रेया कुमारी एक कदम आगे जाकर कहती हैं कोरोना से बचने के लिए अभी सिर्फ टीका लिए हैं, लेकिन कोविड अनुरूप व्यवहार ( बिहेवियर) को अब आत्मसात कर लेंगे। टीका का दोनों डोज तो ले लिया है, लेकिन इसके साथ सावधानी भी बहुत जरूरी है।
खुद के साथ दूसरों को भी टीका दिलाना जरूरीः
कार्तिक कुमर गुप्ता कहते हैं कि अभी भी कुछ लोग संकोच कर रहे हैं| उन्हें घर से निकालने का काम लोगों को करना होगा। खुद के साथ पास-पड़ोस, समाज और रिश्तेदारी के सभी लोगों को भी कोरोना टीका की दोनों डोज दिलवाना पड़ेगा। हमलोगों को इस तरह से प्रयास करना होगा कि कोरोना दोबारा अपना पांव नहीं पसार सके। यह अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर तत्पर है। जिले में टीकाकरण को लेकर लगातार अभियान चल रहा है। इसका फायदा लोगों को उठाना चाहिए। आगे बढ़कर टीका लेना चाहिए। साथ ही दूसरों को भी समझाकर दिलवाना चाहिए।
लोगों का जागरूक होना बहुत ही सकारात्मक संकेतः
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि लोगों का जागरूक होना बहुत ही सकारात्मक संकेत है। सबसे ज्यादा जरूरी लोगों का जागरूक होना ही। अगर लोग जागरूक होंगे तो न सिर्फ वे टीका लेने के लिए सामने आएंगे, बल्कि कोरोना के प्रति सतर्क भी रहेंगे। इसका बहुत ही सुखद परिणाम होगा। कोरोना का संक्रमण लोगों में नहीं होगा। चूकि यह एक संक्रामक रोग है, इसलिए इससे खुद के बचाव के साथ दूसरों का भी बचाव होता है। इसलिए लोगों का सतर्क रहना बहुत ही जरूरी है। दूसरी ओर लोगों को जागरूक होने के बावजूद हमलोगों ने जागरूकता अभियान को जारी रखा है। कोई भी व्यक्ति अगर टीका लेने में संकोच करता है तो उसे समझाने की कोशिश करते हैं। जिले के हर व्यक्ति को टीका दिलाने को लेकर यह बहुत जरूरी है।

आज से 7 अक्टूबर तक बुजुर्गों की निःशुल्क जांच और इलाज

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-जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में रहेगी यह व्यवस्था
-राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों को लिखी है चिट्ठी

भागलपुर, 30 सितंबर-

1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस है। आज से सात अक्टूबर तक अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध सप्ताह मनाया जाएगा। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारी शुरू कर रखी है। इसे लेकर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में वृद्धों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिले के सभी अनुमंडल व रेफरल अस्पताल, सामुदायिक-प्राथमिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सदर अस्पताल में भी वृद्धों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए जाएंगी। इसे लकेर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को चिट्ठी भी जारी की है।
वृद्धावस्था में शरीर के कमजोर होने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियां आ जाती-
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर सभी सरकारी अस्पतालों में वृद्धजनों के लिए अलग से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। दरअसल, वृद्धावस्था में शरीर के कमजोर होने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियां आ जाती हैं। मधुमेह, उच्य रक्तचाप, गठिया, पार्किंसन्स, मनोभ्रंश, अल्जाइमर, हृदय रोग, आंख- कान- नाक और गला के रोगों से ग्रसित होने की संभावना बुढ़ापा में बढ़ जाती है। इन सभी बीमारियों की जांच से लेकर इलाज तक की व्यवस्था रहेगी। इसलिए 01 से 07 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक बुजुर्गों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किया जाएगा।
अस्पताल प्रभारियों को दिया गया है निर्देशः
सिविल सर्जन ने बताया कि सदर अस्पताल सहित नवगछिया और कहलगांव स्थित अनुमंडल अस्पताल और पीरपैंती, सुल्तानगंज व नाथनगर रेफरल अस्पताल के अलावा, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच-इलाज के साथ दवाओं का वितरण भी किया जाएगा। इसे लेकर सभी अस्पतालों के प्रभारी को निर्देश दिया जा चुका है। जिले के सभी अस्पतालों में भी बुढ़ापे में आमतौर पर होने वाली बीमारी से संबंधित जांच की तैयारी को लेकर निर्देश जारी किया है। कोई भी बुजुर्ग व्यक्ति अपने नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाकर इलाज करवा सकते हैं। हालांकि आम दिनों में भी सभी सरकारी अस्पतालों में न सिर्फ वृद्ध, बल्कि सभी लोगों के लिए निःशुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था रहती है। लेकिन वृद्ध दिवस को ध्यान में रखते हुए विशेष तरह की व्यवस्था की गई है।

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर 01 से 07 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक वृद्धजनों की होगी निःशुल्क स्वास्थ्य जांच

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– स्वास्थ्य संस्थानों में वृद्ध जनों के निःशुल्क स्वास्थ्य जांच के साथ ही विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए आयोजित होगा जागरूकता शिविर

– कार्यक्रम के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को जारी की चिट्ठी

मुंगेर-

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर 01 से 07 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से लेकर जिला के सभी अनुमंडल / रेफ़रल अस्पताल, सामुदायिक- प्राथमिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक वृद्ध जनों एवं वरिष्ठ नागरिकों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच के साथ- साथ आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्यक्रम के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को चिट्ठी जारी की है।
1 अक्टूबर को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस- मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 01 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस मनाया जाता है। वृद्धावस्था में शरीर के कमजोर होने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियां जैसे मधुमेह, उच्य रक्तचाप, गठिया, पार्किंसन्स, मनोभ्रंश, अल्जाइमर, हृदय रोग, आंख- कान- नाक एवं गला के रोगों से ग्रसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर 01 से 07 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक वृद्धजनों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किया जाएगा।
1से 7 अक्टूबर तक वृद्धजनों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर-
जिला के गैर संचारी रोग पदाधिकारी (एनसीडीओ) डॉ. के. रंजन बताया कि सदर अस्पताल मुंगेर सहित तारापुर अनुमंडल अस्पताल के साथ – साथ जिला के सभी रेफ़रल अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 01 से 07 अक्टूबर के दौरान सभी वृद्ध एवम वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच सह जागरूकता शिविर का आयोजन एवं दवाओं का वितरण किया जाएगा। इसके लिए पत्र के माध्यम से अनुमंडल अस्पताल तारापुर और जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को उक्त कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को ले आवश्यक निर्देश दिया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार से प्राप्त निर्देश के अनुसार “अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस” के अवसर पर 01 से 07 अक्टूबर तक वृद्धजनों के लिए आयोजित होने वाले निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता शिविर में उपचारित होने वाले वृद्ध मरीजों की जांच एवं वितरित होने वाली दवाओं से संबंधित आंकड़ों को शिविर आयोजन संबंधित फोटोग्राफ के साथ 10 अक्टूबर तक गैर संचारी प्रकोष्ठ, राज्य स्वास्थ्य समिति के ई.मेल nphcbihar@gmail.com पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना है।

विश्व हृदय दिवस : निःशुल्क चिकित्सा परामर्श सप्ताह का हुआ शुभारंभ

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– जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हुआ शुभारंभ
– चिकित्सकों द्वारा लोगों को हृदय रोग से बचाव के लिए दी गई आवश्यक जानकारी

खगड़िया, 29 सितंबर ।
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर बुधवार को जिले के सभी सरकारी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क चिकित्सा परामर्श सप्ताह का शुभारंभ हुआ। जिसका 05 अक्टूबर को समापन होगा। उक्त कार्यक्रम पीएचसी से लेकर अनुमंडल व जिला स्तरीय सभी अस्पतालों में हुआ। जिसमें चिकित्सकों ने मौजूद लोगों को हृदय रोग के कारण, लक्षण एवं उससे बचाव की विस्तार पूर्वक जानकारी दी । इस वर्ष ‘यूज हार्ट टू बीट कार्डियोवस्कुलर डिजीज’ थीम पर विश्व हृदय दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान सप्ताह भर लोगों को हृदय रोग से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जाएगी और जागरूक किया जाएगा। हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर सरकारी अस्पतालों में हो रही जाँच की जानकारी देंगी और जाँच कराने के लिए प्रेरित करेंगी।

– किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता हृदय रोग :
जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा, हृदय रोग किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। बच्चे, बूढ़े, युवा सभी लोग इससे पीड़ित हो सकते हैं। इसलिए, हर आयु वर्ग के लोगों को को इससे बचाव से संबंधित उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है। साथ ही चिकित्सा परामर्श के अनुसार उपचार कराना भी जरूरी है। साथ ही इस तरह की बीमारी से बचने के लिए लोगों को संतुलित भोजन के साथ रहन-सहन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहीं, उन्होंने बताया, पूरे सप्ताह सभी स्वास्थ्य स्थानों में आने वाले लोगों को पूरी तरह निःशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा।

– बीमारी का लक्षण दिखते ही कराएं इलाज :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, इस बीमारी का लक्षण दिखते ही इलाज कराना बेहद जरूरी है। दरअसल, समय पर इलाज कराने से इससे आपको स्थाई निजात मिल सकती है। अन्यथा यह बीमारी आपके जिंदगी का हिस्सा बन सकता है। इसलिए जैसे ही बीमारी का लक्षण दिखे कि तुरंत किसी अच्छे चिकित्सकों से इलाज कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श का हरसंभव पालन करना चाहिए। इससे ना सिर्फ आपको बीमारी से आराम मिलेगी, बल्कि बीमारी से स्थाई निजात भी मिलेगी।

हृदय रोग के कारण:-
-तम्बाकू एवं शराब का प्रयोग
-पूर्व में हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
-उच्च रक्तचाप
-मोटापा
-रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल
-शारीरिक निष्क्रियता
-मधुमेह
-असंतुलित आहार

हृदय रोग के लक्षण
-सीने में तीव्र दर्द, दबाव या शारीरिक श्रम के बाद अपच का आभास
-कंधे या हाथ में दर्द या दबाव
-जबड़ो में अकारण दर्द
-परिश्रम/सीढ़ी चढ़ने में साँस फूलना या बेहोशी होना
-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
-अकारण जी घबराना या पसीना आना
-धड़कन महसूस होना या चक्कर आना
-शरीर के किसी अंग या हिस्से में कमजोरी होना

हृदय रोग से बचाव के उपाय
-संतुलित आहार लें
-नियमित व्यायाम करें
-मदिरा या तम्बाकू युक्त पदार्थों का सेवन ना करें
-वजन एवं रक्तचाप की नियमित जाँच कराएं एवं उसपर नियंत्रण रखें।

अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर दी जाएगी आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श

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– सिविल सर्जन की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित, जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम एवं बीसीएम को दी गई प्रशिक्षण
– अति कुपोषित बच्चों को भेजा जाएगा पोषण पुनर्वास केंद्र

लखीसराय-

जिले में अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाएगा और आवश्यकतानुसार जरूरी चिकित्सकीय परामर्श दी जाएगी। जिसकी सफलता को लेकर बुधवार को सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम एवं बीसीएम व आरबीएसके की टीम शामिल हुए।
कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षक डॉ. विभूषण कुमार द्वारा बच्चों की कैसे स्क्रीनिंग की जाएगी, किस बच्चे को कुपोषित और किस बच्चे को अति कुपोषित माना जाएगा, साथ ही किस बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजना है और किस बच्चे को घर पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है आदि तमाम तय मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस मौके पर एसीएमओ डॉ रामप्रीत सिंह, डीआईओ डॉ. अशोक कुमार भारती समेत जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम एवं आरबीएसके की टीम मौजूद थे।

कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है पोषण पुर्नवास केंद्र :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में भी बच्चों में पोषण की कमी से निपटने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है. यह कुपोषण की समस्या से पीड़ित बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। वहीं, उन्होंने बताया, कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों को 14 दिनों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है। जहाँ कुपोषित बच्चों को डाक्टर की सलाह के अनुसार उनके खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है। यहां रखे गए बच्चे यदि 14 दिनों के अंदर कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाते हैं तो वैसे बच्चों को एक माह तक विशेष रूप से देखभाल की जाती है। पोषण पुर्नवास केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं नि:शुल्क होती है। यहां भर्ती हुए बच्चों के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही उन्हें यहां से डिस्चार्ज किया जाता है।

प्रशिक्षण प्राप्त पदाधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मियों को करेंगे प्रशिक्षित :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामप्रीत सिंह ने बताया, जिले के अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम एवं आरबीएसके की टीम को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें बताया गया कि ऑगनबाड़ी केंद्र स्तर पर बच्चों की स्क्रीनिंग कर अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करना है। जिसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त सभी पदाधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मियों जैसे कि एएनएम, आशा समेत अन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देंगे। जिसके बाद ऑगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण समेत आयोजित होने वाले अन्य कार्यक्रमों के दौरान अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी और आवश्यकतानुसार बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा।

पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती होने के लिए तय किए गए है ये मानक :
डीपीसी सुनील कुमार ने बताया, कुपोषण के शिकार बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत बच्चों का विशेष जांच जैसे उनका वजन व बांह आदि का माप किया जाता है। इसके साथ हीं छह माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बांई भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वो कुपोषित माने जाते है। वैसे बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके साथ ही दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा हो तो ऐसे बच्चों को भी यहां पर भर्ती किया जाता है।

550 से अधिक लोगों को लगे टीके, 330 की हुई जांच

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-जिले में कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
-टीकाकरण केंद्रों पर बड़ी संख्या में टीका लेने को आ रहे लोग
बांका, 29 सितंबर।
कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। जांच और इलाज के साथ-साथ टीकाकरण अभियान भी जिले में जोर-शोर से चल रहा है। बुधवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 550 से अधिक लोगों को कोरोना के टीके लगाए गए। इस दौरान पहली और दूसरी, दोनों डोज लगाई गई। उधर, दूसरी तरफ शहरी पीएचसी में 330 लोगों की कोरोना जांच हुई। जांच के दौरान कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। सभी को सतर्कता के साथ रहने की सलाह दी गई।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि कोरोना का टीका लेने के लिए काफी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। जिस दिन अभियान नहीं भी चलता है, उस दिन भी अच्छी-खासी संख्या में लोग टीका लेने के लिए सामने आते हैं। बुधवार को शाम सात बजे तक 550 लोगों का टीकाकरण हो गया था। इसके बाद भी टीकाकरण जारी था। टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट की निगरानी में रखा गया। किसी तरह की कोई समस्या नहीं आने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही समय पर आकर दूसरी डोज निश्चित तौर पर लेने के लिए कहा गया।
सतर्क रहने की दी गई सलाह: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को 220 लोगों की जांच एंटीजन किट से की गई। जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। वहीं 110 लोगों के सैंपल आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए लिया गया। डॉ. चौधरी ने बताया कि हालांकि जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला, लेकिन सभी को अभी सतर्क रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाते वक्त कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने के लिए कहा गया। मास्क पहनते हुए दो गज की दूरी बनाकर आवश्यक तौर पर रहने के लिए कहा गया।
बाजार में भीड़ लगाने से बचें: डॉ. चौधरी ने कहा कि कोरोना के मामले कम होने के साथ ही अब सभी कुछ सामान्य होने लगा है। हालांकि नए केस जरूर कम मिल रहे हैं, लेकिन अगर सावधान नहीं रहेंगे तो फिर कोरोना जल्द खत्म नहीं होगा। खासकर पर्व-त्यौहार का मौसम अब शुरू होने वाला है। इसलिए बाजार जाएं, लेकिन गाइडलाइन का पालन करें। अनावश्यक घरों से निकलने से बचें। ऐसा तब तक करें जब तक कि कोरोना खत्म नहीं हो जाता। सभी लोगों को कोरोना का टीका पड़ जाने के बाद कोरोना की चेन टूट जाएगी। तबतक सब्र बनाकर रहें।

कायाकल्प की टीम ने नवगछिया अनुमंडल अस्पताल का किया निरीक्षण

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-स्वच्छता के पैमाने पर अस्पताल की व्यवस्था को जाना और परखा
-निरीक्षण में 70 प्रतिशत अंक आने पर राज्य टीम करेगी निरीक्षण
भागलपुर-

कायाकल्प की टीम ने बुधवार को नवगछिया अनुमंडल अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम में आए मुंगेर सदर अस्पताल के मैनेजर तौसीफ हसनैन ने अस्पताल में स्वच्छता के पैमाने पर व्यवस्था को परखा। अस्पताल में साफ-सफाई को देखा। लेबर रूम की व्यवस्था को देखा। ओपीडी में मरीज को देखने की व्यवस्था को जांचा। वहां पर साफ-सफाई की व्यवस्था को देखा और अस्पताल के अधीक्षक से इस संबंध में जानकारी ली। अस्पताल के कर्मियों से हाथ धोने के तरीके को पूछा। कायाकल्प की टीम में आए मुंगेर सदर अस्पताल के मैनेजर संतुष्ट नजर आए।
कायाकल्प की टीम ने निरीक्षण के दौरान सफाई के साथ संक्रमण की स्थिति को भी परखा। अस्पताल में लगभग सभी जगहों पर जाकर देखा कि कहीं अव्यवस्था के कारण संक्रमण की स्थिति तो नहीं है। हालांकि ऐसा कुछ भी मौके पर दिखाई नहीं दिया। साथ ही अस्पताल के कर्मियों से पीपीई किट और हैंड ग्लब्स के बारे में भी जानकारी ली। उनसे इसके इस्तेमाल के बारे में भी पूछा। अस्पताल की नर्सों से सिजेरियन के दौरान किस तरह की सफाई व्यवस्था रखी जाती है, इसके बारे में पूछा। इसके मानक क्या हैं और उसका कितना ख्याल रखा जाता है, यह भी जाना। सफाई कर्मी कौन-से पीपीई किट पहनते हैं और पोछा किस तरह से लगाते हैं, इसके बारे में भी कायाकल्प की टीम ने जानकारी ली।
अनुमंडल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि कायाकल्प की टीम को अस्पताल की पूरी व्यवस्था से अवगत कराया। इस दौरान लेबर रूम से लेकर ओपीडी तक की सफाई व्यवस्था को दिखाया। कायाकल्प की टीम ने अस्पताल के कर्मियों से जो भी सवाल पूछा गया, उसका सभी ने सही-सही जवाब दिया। उम्मीद है कायाकल्प की टीम अनुमंडल अस्पताल के कर्मियों के जवाब से संतुष्ट होगी। साथ ही यहां की व्यवस्था को देखकर संतुष्ट हुए होंगे।

मालूम हो कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 15 मई 2015 में कायाकल्प अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को स्वच्छ और सुविधाजनक बनाना है, जो कि आमलोगों को लिए काफी उपयोगी साबित हो। इस निरीक्षण में बेहतर करने वाले अस्पतालों को पुरस्कार भी दिया जाता है। कायाकल्प की रैंकिंग में राज्य स्तर तक दावेदारी को लेकर 70 प्रतिशत तक अंक लाने की जरूरत होती है। इसके बाद राज्य स्तर की टीम निरीक्षण करने के लिए आती है, उसमें बेहतर करने वाले अस्पताल को नकद पुरस्कार भी दिया जाता है। अभी पेयर निरीक्षण के तहत एक जिले की टीम दूसरे जिले में निरीक्षण कर रही है।