वोट देने के साथ टीका लेने में भी लोग दिखा रहे उत्साह

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-जगदीशपुर में 80 जगहों पर मतदान के साथ टीकाकरण की व्यवस्था
-जिले में कोरोना उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
भागलपुर, 29 सितंबर
पंचायत चुनाव के मद्देनजर बुधवार को जगदीशपुर में मतदान हुआ। इस दौरान प्रखंड के 208 बूथों में से 80 जगहों पर टीकाकरण की व्यवस्था की गई थी। जहां पर बड़ी संख्या में लोग टीका लेने के लिए सामने आए। वोट डालने के बाद जिनलोगों ने टीका नहीं लिया था, उनलोगों ने मतदान केंद्र के पास बने टीकाकरण केंद्र पर टीका लिया। साथ ही जिन लोगों ने पहली डोज ले ली थी, उनलोगों ने अपनी दूसरा डोज ली। मतदान के साथ कुल 1900 लोगों ने बुधवार को कोरोना का टीका लिया.

खीरीबांध में बूथ संख्या 8 के पास बने टीकाकरण केंद्र का जायजा लेने के लिए सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा और डीपीएम फैजान आलम अशर्फी भी पहुंचे। वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मी से दोनों ने टीकाकरण की जानकारी ली। सिविल सर्जन डॉ. शर्मा ने बताया कि जिले के सभी व्यक्ति का जल्द से जल्द टीकाकरण हो, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसी सिलसिले में मतदान केंद्रों के बाहर टीकाकरण की व्यवस्था की गई है, ताकि जो लोग टीका लेने से वंचित रह गए हैं, उनका जल्द से जल्द टीकाकरण हो जाए। साथ ही जिनलोगों ने पहली डोज ले ली है, समय पूरा होने पर वह दूसरी डोज भी ले लें। चुनाव के दौरान कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसे लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क है।
केयर इंडिया के कर्मी कर रहे सहयोगः जगदीशपुर प्रखंड में पंचायत चुनाव के दौरान हो रहे टीकाकरण में केयर इंडिया के कर्मी भी सहयोग कर रहे हैं। मतदान करने के लिए आने वाले लोगों को मोबलाइज करने का काम केयर इंडिया के कर्मी कर रहे हैं। वोट डालने वालों से पूछकर टीकाकरण केंद्रों तक ले जाने का काम कर रहे हैं। जिनलोगों ने एक टीका ले लिया है, उसे दूसरा टीका लेने के लिए कह रहे हैं। साथ वेरिफायर का भी काम कर रहे हैं। पोर्टल से संबंधित रजिस्ट्रेशन से लेकर अन्य सभी काम केयर इंडिया के कर्मी कर रहे हैं।
80 साल के इशाद ने लिया टीकाः खीरीबांध पंचायत में बूथ संख्या 8 के पास बने टीकाकरण केंद्र पर 80 साल के इशाद ने टीका लिया। टीका लेने के बाद उन्होंने कहा कि मेरी उम्र ज्यादा थी, इस वजह से मैं ज्यादा चल-फिर नहीं सकता था, लेकिन वोट टीकाकरण की व्यवस्था होने से मैं टीका ले सका। इसके लिए मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। इसी तरह 21 वर्षीय बीवी नाजबुन ने भी वोट डालने के बाद टीका लिया। 56 साल की बीबी अनगुनी ने टीका लेने के बाद कहा कि मतदान केंद्र के पास टीकाकरण की व्यवस्था होने से महिलाओं को काफी फायदा हुआ। जो महिलाएं बाहर नहीं जा सकी थीं, उनलोगों ने आसानी से वोट डालने के बाद अपना टीकाकरण करवा लिया।

डर ने मुझको जिन्दा रखा: संजय शेफर्ड

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देश के जानेमाने ट्रैवलर और ट्रेवल राइटर संजय शेफर्ड इन दिनों उत्तराखंड एक्सप्लोर कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान गरतांग गली, सत्ताल ट्रेक, सुमेरु पर्वत, पंचमुखी महादेव और अंत में लामा टॉप को सोलो ट्रेक किया है और अंत लामा टॉप से उतरते हुए रात हो गई और फंस गए। बावजूद इसके वह हिम्मत नहीं हारे समझ और संतुलन का परिचय दिया और जिन्दा बचकर मिशाल कायम की। वह बता रहे हैं कि कैसे खुदको बचाया। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये।

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इस बार मौसम हिमालय में ट्रेकिंग के अनुकूल नहीं है। जितने भी ट्रेकर्स आ रहे हैं ज्यादातर बिना ट्रेक किये ही वापस चले जा रहे हैं। मेरा मन ट्रेकिंग का नहीं था और मेरी तैयारी भी नहीं थी पर मौसम थोड़ा सही हो गया तो मैंने एक-एक करके एक सप्ताह के भीतर पांच ट्रेक किये और सब ठीक रहा।

गरतांग गली, सत्ताल ट्रेक, सुमेरु पर्वत, पंचमुखी महादेव और अंत में लामा टॉप जहां पर फंसा। हालांकि इन सबसे सबसे आसान ट्रेक यही है।

ट्रेक इजी था, कैलकुलेशन गलत हो गया।

इस ट्रेक में एक नहीं चार-पांच गलतियां एक साथ हुईं और यही कारण रहा कि सबकुछ फ़ेवर में होते हुए भी मौत के मुंह तक पहुंच गया। एक ऐसी जगह पहुंच गया जो खूंखार जानवरों के लिए जानी जाती है और भालू का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।

ट्रेक करने के लिए जो भी तैयारी होती है वह मैंने पूरी की थी पर समय का जो कैलकुलेशन था वह यह था कि सात बजे तक वापस चले जायेंगे। मुझे यह नहीं पता था कि छह बजे के बाद यह जंगल भरे पहाड़ अंधेरे से मुझे ढक लेंगे और मेरा निकलना मुश्किल हो जायेगा।

मैंने तकरीबन तीन बजे लामा टॉप का ट्रेक हर्षिल से शुरू किया जो कि महज़ दो किमी का है पर खड़ी चढ़ाई और संकरा रास्ता होने के नाते समय ज्यादा लग जाता है। मैं आगे बढ़ता रहा, बस आगे बढ़ता रहा, मुझे लगा कि इस ट्रेक पर मेरे जैसे और भी लोग होंगे पर पूरे रास्ते में मुझे एक भी व्यक्ति नहीं मिला।

करीब साढ़े पांच बजे मैं उस पहाड़ की सबसे ऊंची यानि कि लामा टॉप पर पहुंच गया। इस जगह पर छह जुलाई को दुनिया भर से लोग दलाईलामा का जन्मदिन मनाने आते हैं और इस जगह को आत्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है। बहुत मुश्किल से ट्रेक किया था और ऊपर पहुंचकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी।

मुझे लग रहा था कि जब ऊपर चढ़ाई में ढाई घंटे लगे हैं तो उतरने में डेढ़ घंटे लगेंगे और सचमुच इतना ही लगना था। मैंने फोटाग्राफी और वीडियोग्राफी की, कुछ दोस्तों से बात किया और तकरीबन 15 मिनट वहां बैठा रहा। बहुत ही शांत और बहुत ही सकूनदेह जगह है। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

छह बजे से मैंने लामा ट्रेक से वापसी शुरू की तो सचमुच उतारना आसान लग रहा था पर अचानक से अंधेरा हो गया, मतलब कि मानोंकी अर्धरात्रि का समय हो जबकि उस समय छह बज रहे थे। मैंने फोन की लाइट जलाया और नीचे उतरने लगा पर यह खतरनाक साबित हुआ। मेरा पैर फिसला और गनीमत ये रही कि बड़े से पत्थर से टकरा गया।

अगर पत्थर नहीं होता तो मैं तकरीबन 300 फ़ीट नीचे खाई में चला जाता। पूरी पहाड़ी पर घुप्प अंधेरा और आसपास कोई नहीं। मैंने ईश्वर को याद किया और एक जगह पर पांच मिनट तक शांत बैठ गया। गिरने के कारण मेरे दाएं हाथ में खरोंच आ गई थी और उसमें से खून निकल रहा था।

कुछ देर बाद मैंने फिर से चलना शुरू किया। एक घंटे में तकरीबन नीचे आ गया और जब 600 मीटर बाकि रह गया तो अंधेरे की वजह से रास्ता भटक गया पर मुझे लगा कि सही रास्ते पर हूं। अंधेरा इतना ज्यादा था कि कदम कहां पड़ रहे पता नहीं चल रहा था और एक गलत कदम पड़ा तो सीधे 300 फ़ीट नीचे खाई में पहुंच जाते।

फिर भी चलता रहा और तकरीबन एक किमी चलने के बाद नदी दिखाई दी जो विपरीत दिशा में बह रही थी और तब जाकर मुझे अंदाजा हुआ कि मैं तो रास्ता भटक गया हूं। इधर कैसे आ गया और कदम रुकते-रुकते फिसल गए और सीधे मैं नदी में जा पहुंचा। मेरे जूते भीग गए और मैं इस घटना से पूरी तरह से कांप गया।

लोग कहते हैं कि डरो मत लेकिन सच कहूं तो इस डर ने ही मुझे जिन्दा रखा। मैंने डरकर अपनी जीपीएस लोकेशन सभी को भेज दिया और स्पष्टतौर पर बताया कि मैं फंस चुका हूं और बिना मदद के बाहर नहीं निकल पाऊंगा। मैंने फोन की बैटरी और नेटवर्क देखा तो नेटवर्क पूरा था पर बैटरी सिर्फ 15% रह गई थी।

मैंने एक बार फिर से हिम्मत दिखाई लेकिन अंधेरा इतना ज्यादा था कि कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि कदम कहां पड़ रहे हैं और वहां से निकलना चाहा तो कोई रास्ता ही नहीं मिला। अब मुझे यह पूरा-पूरा अहसास हो गया था कि मैं फंस गया हूं। मैं बार-बार अपने आपसे यही कह रहा था कि हिम्मत नहीं हारनी है, हिम्मत नहीं हारनी है और अपने दिमाग को संतुलित करने की कोशिश कर रहा था।

मुझे नहीं पता था कि कोई बचाने आएगा कि नहीं लेकिन दूसरी तरफ उत्तराखंड पुलिस और उत्तराखंड पर्यटन को मेरी जीपीएस लोकेशन मिल गई थी। हरसिल के थानाध्यक्ष अजय शाह का फोन आया और एक बार उन्होंने कन्फर्म किया कि कहां हूं। मैंने उन्हें समझाया

सबसे पहले अपना जीपीएस ऑन किया और जिला पर्यटन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपने होमस्टे तो उनके होश उड़ गए क्योंकि यह पूरा क्षेत्र जंगली जानवरों से भरा हुआ है और भालुओं का बहुत ज्यादा खतरा रहता है और वहां 10-15 मिनट भी रहना मतलब की अपनी मौत को नेवता देना।

फिर मुझे यहां के बचाव दल प्रमुख राघवेन्द्र मधु और संदीप भाई का फ़ोन आया। मुझे कहा गया कि वहां से थोड़ा अगल बगल हो जाओ और जब तक हम ना पहुंचे कोई मोमेंट नहीं करना। मैंने अपने मन को बिल्कुल ही स्थिर कर लिया। ठंड बहुत ज्यादा थी। मैंने आग जलाने की कोशिश की लेकिन जली नहीं।

दूसरी तरफ पुलिस और स्थानीय बचाव दल ने तत्परता दिखाई और किसी अनहोनी से पहले पहुंचकर मुझे रेस्क्यू किया। सच कहूं तो मुझे तो अंदाजा भी नहीं था कि मैं किसी खड्ड में गिरा हुआ हूं। तकरीबन 10-12 लोगों के दल ने मुझे बाहर निकाला, उनकी पहली वर्डिंग यह थी कि सर आप घबड़ाना मत जरूरत पड़ी तो हम आपको दिल्ली तक सुरक्षित पहुंचाएंगे।

हरसिल में मुझे मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और मेडिकल ऑब्जेर्वशन में कुछ देर रखने के पश्चात मुझे मेरे होमस्टे तक पहुंचाया गया। मैंने अपना फोन ऑन करने की कोशिश की तो ऑन नहीं हुआ। शायद गिरने के कारण वह डैमेज हो गया था।

फिर मैंने खाना खाया और हल्दी दूध पीकर सो गया।

[ उत्तराखंड पुलिस, उत्तराखंड पर्यटन और विशेषतौर पर राघवेंद्र भाई, संदीप भाई, हरीश जी और यहां के थानाध्यक्ष अजय शाह का धन्यवाद। आप सबने मेरे डर को मुस्कराहट में बदल दिया ]

– संजय शेफर्ड

डॉक्टर अजय कुमार पाण्डेय लोजपा के महासचिव नियुक्त

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नईदिल्ली-

लोक जनशक्ति पार्टी ने डॉ अजय कुमार पाण्डेय को लोजपा का महासचिव मनोनित किया है। अजय कुमार पाण्डेय लोजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सचिव है। लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अजय कुमार पाण्डेय सहित तीन राष्ट्रीय महासचिव को मनोनित की है।

चिराग पासवान ने डॉक्टर अजय कुमार पाण्डेय की मनोनित करते हुए कहा कि इनके नेतृत्व में पार्टी सुदृढ़ होगी। गौरतलब है कि डॉक्टर अजय कुमार पाण्डेय लंबे समय तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में बतौर पत्रकार सक्रिय हैं। वे बड़े ही प्रखर तरह से पार्टी का विचार अब तक न्यूज चैनलों एंव अखबारों में रखते आए हैं। अजय पाण्डेय के पास तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, चुनाव आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट का भी प्रभार है। गौरतलब है कि अजय पाण्डेय का राजनीति में लंबा अनुभव है। वे पार्टी के लिए लगातार करते रहे हैं। बड़े ही शालीन तरीके से पार्टी के पक्ष को राजनीति के वाद विवाद में रखते आए हैं। अजय पाण्डेय बहुमुखी प्रतिभा के धनी है जो विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्टता रखते हैं जिसका लाभ लोजपा को मिलता रहा है।

वरिष्ठ साहित्यकार और उपनिदेशक गुरमीत बेदी ने दीप्ति के कविता संग्रह की सराहना की

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संवदेनशील कवयित्री हैं दीप्ति अंगरीश : गुरमीत बेदी

चंडीगढ़-
हिमाचल प्रदेश सूचना एंव जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार गुरमीत बेदी ने पत्रकार-लेखिका दीप्ति अंगरीश की पहली कविता संग्रह ‘एडल्ट चुस्कियां’ की सराहना की। हिमाचल भवन में लेखिका से मुलाकात के दौरान गुरमीत बेदी ने कहा कि दीप्ति की रचनाओं में झरनों जैसा आंतरिक संगीत भी है और नदियों जैसी रवानगी भी है। उनकी हर कृति सुर ताल में होती है और यही उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी ताकत है। जीवन का यथार्थ भी उनकी रचनाओं में झलकता है और अनुभव भी। उनकी रचनात्मक दृष्टि का कैनवस बहुत बड़ा है और शब्दों का भंडार भी लाजवाब है। अपनी कई रचनाओं में उन्होंने प्रकृति को भी बिम्ब बनाकर इस्तेमाल किया है और ऐसे बिम्ब बहुत जीवंत बन पड़े हैं। अपनी कई रचनाओं में उन्होंने बादलों, नदियों और घटाओं को प्रतीक बनाकर अपनी बात कही है और इससे उनकी रचनाओं की ताकत और बढ़ गई है।

वरिष्ठ साहित्यकार गुरमीत बेदी ने कहा कि कोई लेखक दिल्ली से इतनी दूर की यात्रा करके मुझसे मिलने आए और अपनी पुस्तक भेंट करें, यह उसकी संवेदशीलता और सरोकार को दर्शाता है। जिस आत्मीयता के साथ वो मिलने आई और पुस्तक भेंट की, वह काबिलेतारीफ है। उन्होंने कहा कि आम जीवन की संवदेनशीलता दीप्ति की कविताओं में भी दिखता है। इनकी रचनाओं में वैचारिक टकराव नहीं है बल्कि संवेदनशीलता के धरातल पर की रचनाएं बहुत देर तक मानस पटल पर अपना प्रभाव छोड़ती हैं।

वहीं, कवयित्री दीप्ति अंगरीश ने कहा कि जिस प्रकार से अपनी एक सरकारी मीटिंग को उपनिदेशक गुरमीत बेदी ने केवल मेरे लिए कुछ घंटों के लिए छोड़ा और उना से चंडीगढ़ आए और दोबारा उना गए, यह दिखातार है कि वे अपने वादों के कितने पक्के हैं। पहले उनकी रचनाओं को लेकर उनकी इज्जत करती रही हूं, इस मुलाकात के बाद मेरे लिए उनकी प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ गई है। दीप्ति अंगरीश ने कहा कि आमतौर पर बड़े लोग नौसिखिए को इतनी तवज्जो नहीं देते हैं, लेकिन उना से केवल मेरे लिए चंडीगढ़ के हिमाचल भवन तक आना, बहुत बड़ी बात है।

फाइलेरिया की रोकथाम को जागरूकता जरूरी

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-सर्वजन दवा सेवन पर लाभार्थियों की प्रतिक्रिया

-20 से 23 सितम्बर तक चला घर-घर दवा वितरण अभियान
-फ्रंटलाइन वर्कर्स को सामने दवा खिलाने का निर्देश

जमुई, 28 सितम्बर

जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाये गए सर्वजन दवा सेवन अभियान के प्रथम चरण में लाभार्थियों ने दवा का सेवन किया | 2 वर्ष से ऊपर के लोगों को डीईसी और अल्बेन्डाजोल का संयुक्त डोज आशा/ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खिलाया | 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे को डीईसी 100 एमजी की एक गोली, 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को डीईसी 200 एमजी की दो गोली, 15 से अधिक उम्र वर्ग के लोगों को डीईसी 300 एमजी की तीन गोली के साथ ही प्रत्येक लाभार्थी को अल्बेंडाजोल गोली की 400 एमजी खिलाने के लिए निर्धारित है | इसे गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और असाध्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को नहीं लेने की हिदायत भी दी गई है|
इसी सम्बंध में सदर प्रखंड के हांसडीह गाँव की आशा बतिना खातून ने बताया कि उन्होंने 30 लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया है | जिसमें मुस्तरी खातून-36 वर्ष, शहनाज खातून-39 वर्ष, हासिम अंसारी-45 वर्ष ने कहा कि दवा दिए गए निर्देशों के अनुसार खाया। इसमें कोई परशानी नहीं हुई |
दूसरी ओर खैरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र गढ़ी गाँव में कार्यरत आशा सुनीता ने सर्वजन दवा एक दर्ज़न लाभार्थियों को अपने सामने सेवन कराने की बात कही | जिसमें कुछ लोगों जैसे रानी देवी-28 वर्ष और 45 वर्षीय नज्बुल को दवा सेवन के थोड़े देर में मितली की शिकायत हुई जो स्वतः ठीक हो गया |
इस बाबत पर डॉ. रमेश प्रसाद, अवर चिकित्सा पदाधिकारी सह गैर संक्रामक बीमारियों के पदाधिकारी ने कहा राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त सूचना के अनुसार पल्स पोलियो राउंड को ध्यान में रख कर सर्वजन दवा सेवन को 26 से 30 सितम्बर तक रोक दिया गया है | पुनः एक अक्टूबर से दवा सेवन का कार्य सुचारू तौर पर चलाया जायेगा | इससे जुड़े तकनीकी पहलु पर उन्होंने कहा फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। जिसे आमतौर पर हाथी पांव भी कहा जाता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है। फाइलेरिया के प्रमुख लक्षण हाथ और पैर या हाइड्रोसिल (अण्डकोष) में सूजन का होना होता है। प्रारंभिक अवस्था में इसकी पुष्टि होने के बाद जरूरी दवा सेवन से इसे रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है।

विश्व हृदय दिवस पर 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मनाया जाएगा निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श सप्ताह

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– प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मनाया जाता है विश्व ह्रदय दिवस

– स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच के साथ लोगों को दी जाएगी हृदय रोग से बचाव संबंधी आवश्यक जानकारी

मुंगेर, 28 सितंबर।
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर 29 सितंबर से 05 अक्टूबर तक जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल से लेकर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर निःशुल्क चिकित्सकीय जांच एवं परामर्श सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन को चिट्ठी जारी की है। इस कार्यक्रम का आयोजन पीएचसी, सीएचसी, एपीएचसी, एचएससी के साथ – साथ से अनुमंडल व रेफरल अस्पतालों में भी किया जाएगा। जिसमें चिकित्सकों द्वारा लोगों का निःशुल्क चिकित्स्कीय जांच के साथ-साथ हृदय रोग के कारण, लक्षण एवं इससे बचाव की जानकारी विस्तार पूर्वक दी जाएगी। ताकि लोग ह्रदय रोग के लक्षणों को पहचान कर इससे बचाव को ले जागरूक हो सके।

– आशा कार्यकर्ता घर- घर जाकर हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों में हो रही निःशुल्क चिकित्सकीय जाँच की जानकारी देते हुए जाँच कराने के लिए करेगी प्रेरित :
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि विश्व ह्रदय दिवस पर 29 सितंबर से 05 अक्टूबर तक सदर अस्पताल से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होने वाले निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श सप्ताह के दौरान आशा कार्यकर्ता घर- घर जाकर हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों में हो रही निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जानकारी देते हुए उन्हें जांच कराने के लिए प्रेरित भी करेगी। इस कार्यक्रम को हर हाल में सुनिश्चित कराने को लेकर जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं ताकि हर हाल में निर्धारित तिथि एवं समय पर कार्यक्रम का शुभारंभ सुनिश्चित होने के साथ अभियान सफल हो सके।

– किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता हृदय रोग :
मुंगेर के गैर- संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि हृदय रोग किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। बच्चे, बूढ़े, युवा सभी लोग इस बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को इससे बचाव से संबंधित उपायों का पालन करना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार सही उपचार कराना भी जरूरी है।

– ह्रदय रोग का लक्षण दिखते ही कराएं सही इलाज :
गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि हृदय रोग का लक्षण दिखते ही इलाज कराना बेहद जरूरी है। दरअसल सही समय पर इलाज कराने से ही इससे स्थाई निजात मिल सकती है अन्यथा यह बीमारी आपके जिंदगी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए जैसे ही ह्रदय रोग का लक्षण दिखे तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद सही इलाज कराना चाहिए । इसके साथ ही पूरी इलाज होने तक हमेशा चिकित्सकीय परामर्श का हरसंभव पालन करना चाहिए। इससे ना सिर्फ आपको इस बीमारी से राहत मिलेगी बल्कि जिंदगी भी सुरक्षित हो सकेगी।

हृदय रोग के कारण :-
– तम्बाकू एवं शराब का अत्यधिक प्रयोग ।
– पूर्व में हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास।
– उच्च रक्तचाप ।
– मोटापा ।
– रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ।
– शारीरिक निष्क्रियता ।
– मधुमेह ।
– असंतुलित आहार एवं जीवन शैली का होना ।

हृदय रोग के लक्षण :
– सीने में तीव्र दर्द, दबाव या शारीरिक श्रम के बाद अपच का आभास।
– कंधे या हाथ में दर्द या दबाव ।
– जबड़ो में अकारण दर्द ।
– परिश्रम/सीढ़ी चढ़ने में साँस फूलना या बेहोश होना ।
– पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द ।
– अकारण जी घबराना या पसीना आना ।
– धड़कन तेज महसूस होना या चक्कर आना ।
– शरीर के किसी अंग या हिस्से में कमजोरी का होना।

हृदय रोग से बचाव के उपाय
– संतुलित आहार लें।
– नियमित व्यायाम करें।
– मदिरा या तम्बाकू युक्त पदार्थों का ना करें।
– वजन एवं रक्तचाप की नियमित जाँच कराएं एवं उसपर नियंत्रण रखें ।

जिले में पोषण माह की सफलता को लेकर गतिविधि हुई तेज, प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाया जा रहा है उचित पोषण का संदेश

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– ऑगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, जेल समेत अन्य जगहों पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर पोषण के प्रति किया जा रहा है जागरूक
– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ जिले में 01 सितंबर से मनाए जा रहे पोषण माह का 30 सितंबर को होगा समापन

खगड़िया, 28 सितम्बर।
जिले में इस माह को 01 सितंबर से ही पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। जिसका 30 सितंबर को समापन होगा। इस दौरान तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक उचित पोषण की जानकारी और पोषण माह के महत्व और उद्देश्य का संदेश पहुँचया जा रहा है। साथ ही इस अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए स्थानीय आईसीडीएस द्वारा लगातार तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मिशन, हर हाल में पोषण माह को सफल बनाने और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पोषण का संदेश पहुँचाने का। दरअसल, समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता से ही पोषण माह सफल होगा और सामुदायिक स्तर पर लोग जागरूक होंगे। वहीं, हर हाल में पोषण माह को सफल बनाने के लिए जहाँ जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को उचित पोषण की जानकारी दी जा रही है। वहीं, जिले के विभिन्न आँगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, जेल समेत अन्य जगहों पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

– जिले में लगातार तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को किया जा रहा है जागरूक :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, हर हाल में पोषण माह को सफल बनाने के लिए विभाग द्वारा एक कैलेंडर जारी किया गया था। जिसमें किस दिन किस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होना, यह निर्धारित किया गया था। विभाग के द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार बीते 01 सितंबर से ही जिले में पोषण मेला, जागरूकता रैली, स्लोगन लेखन, रंगोली समेत तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक उचित पोषण की जानकारी और इस अभियान के महत्व और उद्देश्य का संदेश पहुँचाया जा रहा है। जेल में बंद कैदी भी उचित पोषण की जानकारी से वंचित नहीं रहे, इसको लेकर जेल प्रबंधन के सहयोग से जेल में भी कार्यक्रम का आयोजन कर कैदियों को भी जागरूक किया गया। इसके अलावा जिले से लेकर प्रखंड स्तर पर संचालित ऑगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों समेत अन्य जगहों सहित गाँव के भी सार्वजनिक जगहों पर पोषण से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया गया।

– जिले के तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ लोगों का भी मिल रहा है सकारात्मक सहयोग :
अलौली सीडीपीओ किरण कुमारी ने बताया, पोषण माह की सफलता को लेकर जिले में गतिविधि तेज कर दी गई है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिले के विभिन्न विभागों के तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ जिला वासियों का भी सकारात्मक सहयोग मिल रहा है, जो काफी सराहनीय है। इसलिए, हर हाल में सफलतापूर्वक पोषण माह का समापन होगा। वहीं, उन्होंने बताया, कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को उचित पोषण की जानकारी दी जा रही है।

– बच्चों से लेकर हर वर्ग के लोगों को दी जा रही है उचित पोषण की जानकारी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद बताया, पोषण माह के माध्यम से कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों को उचित पोषण, रहन-सहन में बदलाव समेत अन्य जानकारियाँ दी जा रही है। जिसमें यह बताया जा रहा है कि कैसे बच्चे का सर्वागीण शारीरिक और मानसिक विकास होगा, युवा और बुजुर्ग कैसे स्वस्थ रहेंगे। इसके अलावा नवजात की माँ बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं एवं इसके बाद ऊपरी आहार देने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जा रही है। साथ ही बच्चे का सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास एवं धातृ महिलाओं के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए अन्य आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– कोविड प्रोटोकॉल का पालन जारी रखें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

आज से हृदय रोगियों को मिलेगा निःशुल्क परामर्श

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-जिले के सभी अस्पतालों में पांच अक्टूबर तक चलेगा शिविर
-राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने लिखा पत्र
बांका, 28 सितंबर।
बुधवार से पांच अक्टूबर तक सभी हृदय रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त परामर्श दिया जाएगा। दरअसल, बुधवार को विश्व हृदय दिवस है और पांच अक्टूबर तक विश्व हृदय सप्ताह मनाया जाएगा। इसी कड़ी में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में शिविर लगाया जाएगा। इसे लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में सदर अस्पताल के साथ पीएचसी, सीएचसी, एपीएचसी, एचएससी, अनुमंडल व रेफरल अस्पतालों में हृदय रोग के मरीजों के लिए परामर्श सप्ताह मनाने के दौरान शिविर लगाने के लिए कहा है। इसके तहत चिकित्सक लोगों की जांच के साथ-साथ हृदय रोग के कारण, लक्षण और इससे बचाव की जानकारी देंगे।
सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि हृदय दिवस के मौके पर सदर अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को निःशुल्क परामर्श देंगे। यहां आने वाले मरीजों को स्वस्थ रहने के तरीके बताएंगे। साथ ही इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी देंगे। मधुमेह औऱ उच्च रक्तचाप हृदय रोग होने का बड़ा कारण बनता है, इसलिए इन दोनों बीमारी के मरीज को भी निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा। दूसरी ओर आशा कार्यकर्ता घर- घर जाकर हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों में हो रही निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जानकारी देते हुए उन्हें जांच कराने के लिए प्रेरित भी करेंगी। एक सप्ताह तक हृदय रोगियों को घरों से निकालकर अस्पताल तक लाने का काम करेंगी।
बाहरी खाना से करें परहेजः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि अभी के समय में लाइफस्टाइल की वजह से भी काफी संख्या में लोग हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। फास्ट फूट का सेवन और कम नींद लेने की वजह से कम उम्र के लोग भी इसकी जद में आ रहे हैं। पहले हृदय रोग के मरीज अधिक उम्र के ही लोग होते थे, लेकिन अब किसी भी उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसलिए लोगों को खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर का खाना खाने पर जोर देना चाहिए और बाहरी खाना से परहेज करना चाहिए।
प्रतिदिन 45 मिनट तक टहलेः हृदय रोगियों को ही नहीं, बल्कि सामान्य व्यक्ति को भी प्रतिदन कम-से-कम 45 मिनट तक तेज कदमों से रोज टहलना चाहिए। इससे जो हृदय रोगी हैं वे तो स्वस्थ रहेंगे ही। साथ ही स्वस्थ लोग भी हृदय रोग की चपेट में आने से बचेंगे। साथ ही आठ घंटे तक सोने की कोशिश करें। नींद की कमी न सिर्फ हृदय, बल्कि दूसरी बीमारियों का भी कारण बनता है। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दें। शरीर शिथिल रखने से बीमारी का खतरा बढ़ता है।

कोविड मरीजों एवं उनके परिजनों को मनोवैज्ञानिक सहयोग की जरूरत, आइसीएमआर ने जारी की गाइडलाइन

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• ईलाज के दौरान चिकित्सकों को संवेदनशील रहने की जरूरत
• चिकित्सक ईलाज के दौरान अपने हावभाव का रखें विशेष ध्यान
• गलत हावभाव से रोगियों व परिजनों को मिलता है नकारात्मक संदेश
बांका, 28 सितंबर: कोविड मरीजों एवं उनके परिजनों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करना काफी महत्वपूर्ण है. इसको लेकर इंडियन कांउसिल फॉर मेडिकल रिसर्च(आईसीएमआर) ने गाइडलाइन जारी कर आवश्यक जानकारी दी है. जिसमें विशेष रूप से कोविड मरीजों के इलाज के दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों को चिकित्सकों द्वारा मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रदान करने की बात कही गयी है . आइसीएमआर ने ‘‘मैनुएल फॉर हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स इन प्रोवाइडिंग साइकोलॉजिकल सपोर्ट टू फैमिली मेंमबर्स इन बीरेवमेंट इन द टाइम ऑफ़ कोविड 19’’ नाम से गाइडलाइन जारी की है. गाइडलाइन में कहा गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कर्मियों के लिए यह आवश्यक है कि वह कोविड मरीजों के ईलाज करने के दौरान अधिक संवेदनशील रहें. खासकर उस समय यह और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब कोविड-19 संक्रमण से किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु हो गयी हो. ऐसी परिस्थिति में मनोवैज्ञानिक तरीके से रोगी के परिजनों का सहयोग करना आवश्यक हो जाता है.

गाइडलाइन के अनुसार कोविड-19 से होने वाली मृत्यु के बारे में परिवार के सदस्यों को जानकारी देने से पहले सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. ऐसे में मृत व्यक्ति के परिजनों को अधिक मनोवैज्ञानिक सहायता की जरूरत होती है. गाइडलाइन में सबसे पहले रोगी के दुख महसूस करने की क्षमता का होना आवश्यक माना गया है.दूसरी आवश्यक बात रोगी के बारे में इमानदार होने की कही गयी है. मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने वाले हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए आवश्यक है कि वह अपनी भावनाओं को ईमानदारी पूर्वक रोगी के परिजनों के सामने लायें.

चिकित्सकों का शारीरिक हावभाव डालता है प्रभाव:

गाइडलाइन में हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स द्वारा अपनाये जाने वाले शारीरिक हावभाव के बारे में भी चर्चा की गयी है. कई बार चिकित्सकों के हावभाव के कारण रोगी अथवा परिजनों तक गलत सूचनाएं चली जाती हैं. इसलिए इसके बारे में उन्हें सजग किया गया है. गाइडलाइन में कहा गया है कि इलाज के दौरान चिकित्सकों द्वारा उनके परिजनों से बातचीत करने का अंदाज भी महत्वपूर्ण हो सकता है. आंखों का दूसरी तरफ होना या नजर मिला कर बात नहीं करने का अर्थ रोगी की समस्याओं के संबंध में रूचि नहीं रखने का संकेत देता है. साथ ही यह गंभीर नहीं होने तथा नजरअंदाज करने के बारे में भी बताता है. इसलिए परामर्श देते समय चिकित्सकों द्वारा नजर मिला कर बात करना आवश्यक है. साथ ही भौहों के विभिन्न प्रकार के संकेतों की जानकारी दी गयी है. भौंहों को उचकाना जैसे हावभाव डरा होने का संकेत देते हैं. हावभाव में हाथों के मूवमेंट को शामिल किया गया है. इसमें हाथों को जोड़ कर रखने का संकेत सपोर्ट और उनके साथ होने की ओर संकेत देता है.

परामर्श देते समय चिकित्सकों को सावधान रहने की जरूरत:

गाइडलाइन में चिकित्सकों द्वारा कोविड मरीजों एवं उनके परिजनों को परामर्श देने के तरीके के विषय में जानकारी दी गयी है. यह कहा गया है कि परामर्शदाता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परामर्श दें. लेकिन इस दौरान उनकी आवाज बिल्कुल साफ होनी चाहिए ताकि रोगी या उसके परिजन आसानी से सुन सकें. ध्यान रखें कि आवाज ज्यादा भी तेज नहीं हो. यह अशिष्टता तथा प्रभुत्व का संकेत देता है. परारामर्श दिये जाने के दौरान बोली का साफ नहीं होना रोगी के मन में निराशा पैदा करता है. गाइडलाइन में कहा गया है कि हेल्थ केयर वर्कर्स कोविड-19 के संभावित सबसे खराब परिणाम के लिए भी परिवार के सदस्यों को सजग बनायें. परिवार में किसी सदस्य की अचानक मृत्यु परिवार के सदस्यों के लिए सबसे अधिक दुख देने वाली होती है. इसलिए सदस्यों को रोगी के तबीयत के बारे में जानकारी देते रहें ताकि उन्हें एकाएक होने वाले सदमा से बचाया जा सके. कोविड-19 रोगी की मृत्यु की पुष्टि हो जाने पर चिकित्सक परिवार से संपर्क करें और इसकी जानकारी दें. मृत्यु के बारे में वरिष्ठ सदस्यों से बात करें. मृत्यु के बारे में सरल शब्दों में बतायें. रोगी के मृत्यु के पश्चात यदि उन्हें यह जानकारी दी जा रही है तो उन्हें भावनात्मक सपोर्ट भी दें. उनसे भावनात्मक तरीके से उनके दुख में साझीदार बनें.

मैंने कोरोना टीका की दूसरी डोज ले ली, आपने लिया क्या

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-महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कर रहे अपील
-टीका की दूसरी डोज लेना कितना जरूरी, इसकी दे रहे जानकारी
भागलपुर, 28 सितंबर।
कोरोना टीकाकरण अभियान की जब शुरुआत हुई थी तो उस समय न सिर्फ महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भ्रम की स्थिति थी, बल्कि सामान्य लोग भी इसे लेकर आशंकित थे। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम की वजह से सारी शंकाएं दूर हो गई हैं। लोग अब कोरोना टीका का महत्व समझने लगे हैं। इसमें अल्पसंख्यक और महादलित समुदाय के लोग भी पीछे नहीं हैं।
खरीक प्रखंड के मीरजाफरी गांव के रहने वाले वरसात अंसारी कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए टीका लेना कितना जरूरी है, इससे अब कोई अनजान नहीं रहा। हमारे गांव के अधिकतर लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है। मैंने भी टीका की दूसरी डोज ले ली है। साथ ही मैं गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों से भी अपील करना चाहता हूं कि जल्द से जल्द कोरोना टीका की दोनों डोज ले लें। वरसात अंसारी की ही तरह अकबर अंसारी का कहना है कि लोगों में इस बात का अहसास है। टीका को लेकर सारी शंकाएं दूर हो गई हैं, इसलिए जल्द से जल्द सभी लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। शुरुआत में कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई थी, लेकिन वैसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि टीका जितना दूसरे लोगों को लिए जरूरी है, उतना ही अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए। इस मामले में हमलोग पीछे नहीं रहने वाले हैं।
दूसरी डोज दिलाकर रहेंगेः अल्पसंख्यक मोहल्ले की ही तरह महादलित टोले में भी टीका लेने वालों में उत्साह है। पहले इन मोहल्लों में स्वास्थ्यकर्मियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। खरीक बाजार स्थित महादलित टोले के वेदप्रकाश राहुल कहते हैं कि कोरोना का टीका लेना हमारे हित में है, इसलिए टीका लेने में भाल कौन पीछे रहेगा। हमलोगों ने दूसरी डोज के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है। कुछ लोग ऐसे जरूर देखे जा रहे हैं, जिन्होंने पहला टीका ले लिया है और दूसरे का समय पूरा हो गया है, लेकिन अबतक नहीं लिया है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर टीकाकरण केंद्रों तक ले जा रहे हैं। वहीं फरीदपुर महादलित टोले के श्रवण कुमार कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है कि महादलित समुदाय के लोग टीका नहीं लेना चाहते हैं। सभी लोग टीका लेने के इच्छुक हैं। हां, हमलोग यह जरूर सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी लोग टीका की दोनों डोज ले ले, कोई भी एक डोज लेने से वंचित न रह जाए।
सभी जाति औऱ संप्रदाय के लोग टीका लेने आ रहेः खरीक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार सिंह कहते हैं कि क्षेत्र में सभी जाति और संप्रदाय के लोग टीका लेने के लिए सामने आए। क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पहला टीका ले चुके हैं। सभी लोग समय पूरा होने पर दूसरी डोज भी ले लेंगे। अगर कोई दूसरी डोज लेने से वंचित हो जी रहा है तो उसे चिह्नित कर टीका दिलाने का काम चल रहा है। इसमें आमलोग भी भागीदारी कर रहे हैं। साथ ही मैं लोगों से यह भी अपील करना चाहता हूं कि टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें।