तीसरी तिमाही में सुरक्षित गर्भपात के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी

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-गर्भपात कानून के बारे में आशा फैसिलिटेटर और कार्यकर्ताओं को दी गई जानकारी
-अमरपुर रेफरल अस्पताल कोरोना काल में सुरक्षित गर्भसमापन को लेकर हुई बैठक

बांका-

कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसमें सुरक्षित गर्भपात भी प्रमुख समस्या रही है। इसे लेकर सोमवार को अमरपुर रेफरल अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटर के साथ आईपास डेलवपमेंट फाउंडेशन ने बैठक की। बैठक में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के नरेश कुमार आर्य ने आशा कार्यकर्ताओं को सुरक्षित गर्भसमापन और गर्भपात कानून के बारे में जानकारी दी। बैठक में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीप्ति सिन्हा और बीसीएम प्रभारी हीरालाल प्रसाद भी मौजूद थे।
इस दौरान आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के नरेश कुमार आर्य ने कहा कि कोरोना काल में कई महिलाएं अनचाहे रूप से गर्भवती हो गईं। कोरोना के कारण वह अपना सुरक्षित गर्भपात भी नहीं करा पायीं। सरकारी अस्पतालों में मिल रही सुविधाओं से वह वंचित रह गईं। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इससे वह सुरक्षित तरीके से अपना गर्भपात करा सकेंगी। इसे लेकर समाज में जागरूकता लानी होगी। इस पर सभी लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।
सुरक्षित गर्भपात को लेकर परिजनों को ध्यान देने की जरूरतः
नरेश कुमार आर्य ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की कानूनी तौर पर इजाजत है। 1971 में बने इस कानून को लेकर हालांकि कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इसे लेकर परिजनों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बिचौलिये के संपर्क में नहीं पड़ना चाहिए। समस्या होने पर पास के सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में कानूनी तौर पर निःशुल्क गर्भपात की सुविधा है। विशेष परिस्थिति पैदा होने पर एंबुलेंस के जरिये महिला मरीज को अच्छी जगह भेजने की व्यवस्था मौजूद है। 12 सप्ताह तक एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 13 से 20 सप्ताह के अंदर तक दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सरकारी अस्पताल में गर्भपात होनी चाहिए।

दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए जाएं मायागंजः
आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के नरेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में आठ प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका हो तो तत्काल आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए। या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो तत्काल गर्भपात का निर्णय लेना चाहिए। अगर गर्भ नौ सप्ताह तक का है तो गोलियों से भी गर्भपात हो सकता है। गर्भपात जितना जल्द कराया जाता है, उतना ही सरल और सुरक्षित रहता है। अमरपुर रेफरल अस्पताल में सिर्फ पहली तिमाही में गर्भपात सेवा दी जाती है। दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल का रुख करना चाहिए। गर्भपात के साथ तत्काल गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करना चाहिए। गर्भपात और गर्भधारण के बीच छह महीने का अंतराल होना जरूरी है।

सदर अस्पताल में दलालों की खैर नहीं

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महिला दलाल का सदर अस्पताल में चिपकाया गया फोटो
सिविल सर्जन ने शिकायत मिलने के बाद फोटो चिपकवाया
भागलपुर-

सदर अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसे लेकर अस्पताल प्रशासन सख्त हो गया है। खासकर दलाल के झांसे में आकर कोई मरीज इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल से निजी क्लीनिक में नहीं जाए, इसे लेकर अस्पताल प्रशासन सतर्क भी हो गया है। इसी कड़ी में अस्पताल के नोटिस बोर्ड पर महिला दलाल का फोटो चिपकाया गया है। इसके साथ ही स्पष्ट शब्दों में लिख दिया गया है कि इनके झांसे में आकर मरीज अस्पताल से बाहर इलाज कराने के लिए निजी क्लीनिक नहीं जाएं। यहां पर मरीज के इलाज की पूरी व्यवस्था है।
दरअसल, शनिवार के महिला दलाल के पकड़ाने के बाद सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने सख्त निर्देश दिया था। इस घटना के बाद सिविल सर्जन ने महिला दलाल का फोटो अस्पताल के नोटिस बोर्ड पर चिपकाने का निर्देश दिया था, जिस पर अमल हो गया है। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में दलालों को घुसने नहीं दिया जाएगा। साथ ही मरीजों को भी सतर्क करने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है। मरीज भी अगर दलाल को पहचानेंगे तो उनके झांसे में नहीं आएंगे। इसके बाद मरीज का इलाज आसानी से हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन इसे लेकर पूरी तरह से सतर्क है। मरीज औऱ परिजन भी सावधान रहें।
नर्सों की होगी जांचः सिविल सर्जन ने कहा कि लेबर वार्ड में मौजूद कुछ नर्सों की भी शिकायत मिल रही है। उनकी भूमिका की भी जांच हो सकती है। इस तरह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए नर्सों का विभाग भी बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में किसी तरह के नेटवर्क को नहीं चलने दिया जाएगा। एक महिला दलाल की पहचान हो गई है। कुछ अन्य दलालों की भी जानकारी मिली है, जिसे जल्द ही चिह्नित किया जाएगा। दलालों को चिह्नित करने के बाद उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दलालों के चक्कर में नहीं पड़ें मरीजः सिविल सर्जन ने बताया कि दलालों पर अस्पताल प्रशासन तो कार्रवाई कर ही रहा है। साथ ही मरीज और परिजन भी इनके चक्कर में नहीं पड़ें। यहां सभी तरह का इलाज होता है। व्यवस्था के तहत काउंटर पर पर्ची कटाकर ओपीडी में इलाज के लिए जाएं। अगर किसी तरह की कोई परेशानी होती है तो मुझे बताएं। तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सदर अस्पताल की व्यवस्था में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पर इलाज कराने के लिए आने वाले लोगों को सहूलियत हो, इसका खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा भी किसी तरह की परेशानी हो मरीज या परिजन शिकायत करें, कार्रवाई होगी।

मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच मौसमी बीमारियों से रहें सतर्क और सावधान

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– अपने घर के आसपास साफ- सफाई का रखें विशेष ख्याल
– मौसमी बीमारियों से बुजुर्गों व बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बरतें विशेष सावधानी

मुंगेर, 21 अगस्त| पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश एवं तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण मौसम में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके कारण कई मौसमी बीमारियों के होने की भी संभावना बढ़ गई है। इन दिनों लोग सर्दी, खांसी, बुखार सहित कई अन्य मौसमी बीमारियों के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में हमें काफी सावधान रहने की जरूरत है। इसके साथ ही मौसमी बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है कि सभी लोग समय पर खाना खाएं और अपने घर सहित आसपास की साफ- सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। मालूम हो कि साफ-सफाई हमें ना सिर्फ किसी एक बीमारी से बचाती है बल्कि, अनेकों बीमारी खासकर वायरल और संक्रामक बीमारियों से भी दूर रखती है। इसके अलावा साफ-सफाई से हमारे शरीर में शारीरिक ऊर्जा का भी संचार होता है।

– कई मौसमी बीमारियों से खुद को सुरक्षित रखने के लिए सभी लोग सही समय पर खाएं खाना :
सदर अस्पताल मुंगेर के अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ. पीएम सहाय ने बताया, मौसमी बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक है सभी लोग समय पर खाना खाएं और साफ- सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके साथ ही सभी लोग अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों का भी विशेष ख्याल रखें क्योंकि, बच्चे और बुजुर्गों को युवाओं की तुलना में मौसमी बीमारियों के दायरे में आने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए, हमें खुद के साथ-साथ बच्चे व बुजुर्गों का भी विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।
– अपने घर के आसपास नहीं होने दें जलजमाव :
उन्होंने बताया कि वर्तमान में बरसात का दौर चल रहा है। जिसके कारण जगह- जगह निचले हिस्से में बरसात के पानी का जलजमाव हो जाता है। जो अधिक दिनों तक रहने के कारण काफी दुर्गंध करने लगता है। इसके कारण जलजनित बीमारी के फैलने की संभावना प्रबल हो जाती है और धीरे-धीरे इसके महामारी का भी रूप लेने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिए, घर के आसपास जलजमाव का पानी नहीं रहने दें और वैकल्पिक व्यवस्था कर शीघ्र पानी की निकासी कराएं। इसके बाद पूरा परिसर में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराएं। इससे ना सिर्फ मौसमी बीमारियों से बचाव होगा बल्कि, जलजनित बीमारी से भी दूर रहेंगे।
बरसात के पानी के जलजमाव से डेंगू की प्रबल संभावना :
उन्होंने बताया कि बरसात अपने साथ कई तरह की बीमारियों को भी साथ लेकर आती है। इसलिए, बरसात के मौसम में लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल, बरसात के पानी का जिस जगह जलजमाव होता है और पानी वहाँ कई दिनों तक जमा ही रहता हैं तो उससे काफी दुर्गंध उठने लगता है। इसके साथ ही पानी में मच्छरों का भी बसेरा हो जाता है। जिसके कारण डेंगू, टाइफायड जैसी गंभीर बीमारियों के होने की संभावना बनी रहती है।
– बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से बाढ़ पानी निकलने के बाद साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :
उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से बाढ़ का पानी निकल जाने के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। जलजमाव वाले क्षेत्र से जलनिकासी के बाद वहां ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव अति आवश्यक है। इसके साथ ही अपने स्तर से अपने आसपास साफ -सफाई रखने के बाद ही कई मौसमी बीमारियों से अपने साथ-साथ अपने परिवार और समाज को विभिन्न मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से दूर रहें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।

विरोधों का सामना करने के बाद भी कर्तव्य से पीछे नहीं हटीं आशा फैसिलिटेटर हेमलता देवी

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– परबत्ता प्रखंड के कुल्हाड़िया पंचायत अंतर्गत भरसो गाँव की रहने वाली हैं हेमलता देवी
– बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बाबजूद लोगों को घर-घर जाकर कोविड-19 वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए कर रही प्रेरित

खगड़िया, 21 अगस्त-

जिले में कोविड-19 वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं का भी अहम योगदान रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को भी लोगों को वैक्सीनेशन एवं जाँच कराने के लिए प्रेरित करने तथा समाज में चली अफवाहों को दूर करने में काफी विरोधों का सामना करना पड़ा है। किन्तु, बाबजूद इसके अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तरह आशा कार्यकर्ता भी अपने कर्तव्य पथ से एक कदम पीछे नहीं हटी। बल्कि, सकारात्मक उम्मीद के साथ अभियान को सफल करने में जुटी रही। जिसका नतीजा भी सकारात्मक रहा। ऐसे ही आशा कार्यकर्ताओं में परबत्ता सीएचसी में कार्यरत परबत्ता प्रखंड के कुल्हाड़िया पंचायत अंतर्गत भरसो गाँव निवासी आशा फैसिलिटेटर हेमलता देवी का पूरे प्रखंड में नाम शुमार है। हेमलता, ना सिर्फ लोगों को वैक्सीन एवं जाँच कराने के लिए जागरूक करने में सफल रही। बल्कि, अफवाहों को भी मात देने में सफल रही।

– विरोधों की कभी नहीं की परवाह, अपने कर्तव्य पथ पर सकारात्मक उम्मीद के साथ चलती रही :
आशा फैसिलिटेटर हेमलता देवी ने बताया, शुरुआती दौर में यानी जब प्रखंड में वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी तब लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक करने का दौरान लोगों के काफी विरोधों का सामना करना पड़ा था। यहाँ तक कई बार काफी उग्र स्थिति से भी गुजरना पड़ा। किन्तु, ना ही कभी विरोधों की परवाह की और ना ही लोगों से उलझी। तमाम विरोधों और लोगों की उग्रता को झेलते हुए कठिन स्थिति में भी सरलता के साथ अपने कर्तव्य पथ पर डटी रही। जिसका परिणाम आज यह है कि अब मैं लोगों के घर नहीं जाती हूँ। बल्कि, लोग मेरे घर आकर पूछते हैं कि वैक्सीन कब और कहाँ पड़ेगा। जो मेरे लिए पूरे जीवन का सबसे बड़ा गर्व की बात है।

– बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बाबजूद भी अपने कर्तव्य पथ से पीछे नहीं हटी हेमलता :
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार ने बताया, जिस क्षेत्र में हेमलता कार्यरत हैं , वह क्षेत्र वर्तमान में पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। इसके बाबजूद कभी वह अपने कर्तव्य पथ से पीछे नहीं हटी और ना ही कभी थकी। बल्कि, पूरी निष्ठा और सकारात्मक उम्मीद के साथ बाढ़ की तबाही के बीच भी नाव समेत अन्य साधनों के माध्यम से गाँव-गाँव पहुँच कर लोगों को वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए प्रेरित करने में जुटी हैं| इनका शुरूआती दौर से वैक्सीनेशन अभियान में काफी सराहनीय कार्य रहा है। इन्होंने ना सिर्फ खुद बेहतर कार्य किया बल्कि, अपने क्षेत्र के अन्य आशा कार्यकर्ताओं को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया|

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

लखीसराय जिला के सभी पंचायतों में घर- घर जाकर कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर रही आशा और आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका

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– चिह्नित कुपोषित बच्चों को जिला मुख्यालय स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में करवाएगी भर्ती
– एनआरसी में 15 दिनों रहने के बाद ठीक होकर घर लौटने के बाद भी लगातार बच्चे के स्वास्थ्य की करेगी मॉनिटरिंग

लखीसराय, 21 अगस्त-

जिला को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से अब जिला के सभी प्रखंड़ों और पंचायत स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आशा फैसिलिटेटर के साथ – साथ आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर रही हैं। इसके बाद चिह्नित कुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल लखीसराय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराएंगी ।
जिले के कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का निर्णय
लखीसराय के सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि जिला के सभी कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के उद्देश्य से और कोरोना संक्रमण की सम्भावित तीसरी लहर को देखते हुए कोरोना गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन करते हुए आशा कार्यकर्ता, फैसिलिटेटर के साथ -साथ आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का निर्णय लिया गया है। सही पोषण तो देश रौशन अभियान के तहत चिह्नित किए गए सभी कुपोषित बच्चों को सही पोषण और समुचित इलाज के लिए उसके अभिभावक खासकर बच्चे या बच्ची की मां के साथ 15 दिनों के लिए सदर अस्पताल लखीसराय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा ।
पोषण पुनर्वास केंद्र लखीसराय में कुपोषित बच्चों के सही पोषण एवं समुचित इलाज की है व्यवस्था :
उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित चिह्नित किए गए बच्चे या बच्ची की एनआरसी के मापदंड के अनुसार फिर से जांच की जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि बच्चा किस हद तक कुपोषित है और उसका किस प्रकार से समुचित इलाज किया जा सकता है। कुपोषित बच्चों की जांच के दौरान यह देखा जाता है कि उम्र के अनुसार बच्चे का वजन है कि नहीं ,या बच्चे के बांह की गोलाई मापदंड के अनुसार है कि नहीं। इसके साथ ही बच्चे के दोनों पैर के बीच की दूरी मापदंड के अनुसार है कि नहीं। बच्चों में कुपोषण के स्तर की जांच के बाद बच्चे के सही पोषण एवं समुचित इलाज के लिए उसके अभिभावक के साथ अगले 15 दिनों के लिए भर्ती कर लिया जाता है।

एनआरसी में सही पोषण और समुचित इलाज के बाद डिस्चार्ज करने बाद भी आशा और आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका द्वारा की जाएगी मॉनिटरिंग :
उन्होंने बताया कि 15 दिनों तक एनआरसी में कुपोषित बच्चे के पोषण का सही तरीके से ख्याल रखने और समुचित इलाज पूरा हो जाने का बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इसके बाद भी आशा कार्यकर्ता, आशा फैसिलिटेटर आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका लगातार बच्चे की मॉनिटरिंग करती रहेंगी और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर बच्चे को पुनः एनआरसी में भर्ती भी करवाएगी। इसके बाद ही जिला के सभी कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के बाद उसका समुचित इलाज संभव हो पाएगा।

500 लोगों को पड़े टीके,300 लोगों की जांच

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कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
टीकाकरण को लेकर क्षेत्र में चल रहा जागरूकता अभियान

बांका, 21 अगस्त-
कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है| शनिवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 500 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए तो 300 लोगों की जांच की गई| टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया| किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया| साथ ही सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया| इसके अलावा सभी को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया|
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर काफी संख्या में लाभुक कोरोना का टीका लेने के लिए अभी भी पहुंच रहे हैं| शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत शनिवार को 500 लोगों को टीके दिए गए| दूसरी ओर सदर प्रखंड में काफी अधिक संख्या में लोगों का टीकाकरण होने के बावजूद क्षेत्र में टीका को लेकर जागरूकता अभियान भी जारी है|
जांच में कोई भी संक्रमित नहीं मिला:
डॉ. चौधरी ने कहा कि शनिवार को भी 200 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई|. इनमें से कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला|. वहीं आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए 100 लोगों के सैंपल लिए गए| जांच के बाद सभी लोगों को मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया|. बार-बार हाथ की धुलाई करने की सलाह भी दी गई.| सभी को कहा गया कि बाहर से आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें|. ऐसा करते रहने से लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे|. साथ ही दूसरे लोग भी कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे|
टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी:
डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन्हें भी कोरोना के खत्म होने तक गाइडलाइन का पालन करना है|. जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक पूरी सतर्कता के साथ रहना जरूरी है|. कोरोना को खत्म होने के लिए सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है|. जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा|. जिन्होंने टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें| घर से बेवजह निकलने से परहेज करें|

गाँधी मैदान स्थित मिस्सर पेट्रोल पंप में हुई ऑक्सीजन सेंटर की स्थापना

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• लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता और लायंस क्लब इंटरनेशनल के सहयोग से सेंटर की हुई स्थापना
• आम नागरिक एवं संस्थानों को मिलेगा निःशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर
• सेंटर है 5 कंसंट्रेटर से सुस्सजित
• 24/7 उपलब्ध होगी सुविधा
पटना/ 21 अगस्त

– कोरोना संक्रमण का खतरा अभी भी सभी के मन में व्याप्त है|. वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों द्वारा तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है और जनमानस को सचेत रहने की विनती की जा रही है|. कोरोना के दोनों दौर में ऑक्सीजन की कमी एक गंभीर और दुखद विषय रहा है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न चिकित्सीय संस्थानों को ऑक्सीजन की सुविधाओं से लैस किया जा रहा है.| तीसरी लहर की आशंका को ध्यान में रखते हुए लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता और लायंस क्लब इंटरनेशनल द्वारा एक मानवीय पहल की गयी है|. शहर के गाँधी मैदान स्थित मिस्सर पेट्रोल पंप में ऑक्सीजन सेंटर की स्थापना की गयी है जहाँ से कल रविवार से आमजनों एवं चिकित्सीय संस्थानों को निःशुल्क ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकेगी|
आमजन को नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी- नीता मिश्रा
लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता की अध्यक्ष लायन नीता मिश्रा ने बताया कोरोना संक्रमण का भय सभी के मन में अभी भी व्याप्त है और सभी इस संक्रमण की समाप्ति के लिए प्रयासरत हैं|. कोरोना अथवा किसी भी रोग से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा के दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत पड़ सकती है और इसे ध्यान में रखते हुए लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता और लायंस क्लब इंटरनेशनल के सहयोग से इस सेंटर की स्थापना की गयी है| यहाँ सभी को निःशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराया जायेगा, सिर्फ जरूरतमंद लोगों को खाली सिलिंडर लाना होगा और यहाँ से उन्हें भरा हुआ सिलिंडर निःशुल्क प्राप्त होगा| यहाँ ऑक्सीजन की सुविधा 24/7 उपलब्ध होगी और लायंस क्लब का प्रयास रहेगा की किसी भी जरूरतमंद को इस सेंटर से खाली हाथ वापस नहीं जाना पड़े|
लोग फोन पर प्राप्त कर सकते हैं जानकारी:
लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता द्वारा आमजन की सुविधा का ध्यान रखते हुए दो नंबर जारी किये गए हैं जिसपर फोन कर लोग ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता एवं इससे सम्बंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं|. ये नंबर हैं-
लायन रीता वर्मा- 94308 65270
लायन नंदा गर्ग- 91109 91782
लायंस क्लब ऑफ़ पटना- अनंता की अध्यक्ष लायन नीता मिश्रा ने मीडिया एवं आमजन से इस सेंटर के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने की अपील की|

बाढ़ में नाव पर सवार होकर ग्रामीणों को पहुंचाई जा रही स्वास्थ्य सुविधाएं

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-खरीक के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की नियमित तौर पर हो रही स्वास्थ्य जांच
-लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करवाने के लिए किया जा रहा जागरूक

भागलपुर, 21 अगस्त-

जिले में बाढ़ का प्रकोप है। गंगा और कोसी के जलस्तर में बढ़ोतरी से सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी है। इसके बावजूद स्वास्थ्यकर्मी अपने कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं। नाव पर सवार होकर स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। खरीक प्रखंड की लोकमानपुर पंचायत पूरी तरह से जलमग्न है। पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों के लोग छत या फिर ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी नाव से गांव-गांव घूमकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं।
खरीक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार सिंह ने बताया कि क्षेत्र के कई गांव बाढ़ में डूब गए हैं। लोग ऊंचे स्थानों पर जैसे-तैसे रह रहे हैं। ऐसे में बीमारियों का खतरा भी रहता है। इसलिए लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच बहुत जरूरी है। नियमित तौर पर अगर जांच होती रहेगी तो लोग स्वस्थ रहेंगे। अगर लोग स्वस्थ रहेंगे तो बाढ़ की चुनौतियों का भी डटकर सामना कर सकेंगे। यही कारण है कि हमलोगों ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा को बहाल रखी है।
बाढ़ पीड़ितों को कोरोना का टीका भी दिया जा रहाः
डॉ. सिंह ने कहा कि बाढ़ आने के बावजूद क्षेत्र में कोरोना टीकाकरण अभियान पर असर नहीं पड़ने दिया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी नाव पर सवार होकर बाढ़ पीड़ितों का टीकाकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांव के कई लोग टीका का पहला डोज ले चुके थे। उनके दूसरा डोज लेने का समय पूरा हो रहा था। ऐसे में टीकाकरण अभियान को जारी रखना बहुत जरूरी था। यही कारण है कि स्वास्थ्यकर्मी दिन रात एककर लोगों का टीकाकरण कर रहे हैं।
कोरोना के प्रति जागरूक भी किया जा रहाः
डॉ. सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में देखा जा रहा है कि लोग एक ही जगह पर एकत्रित हो जा रहे हैं। हालांकि ऐसा वह मजबूरी में कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दो गज की दूरी बनाकर रहने के लिए कहा जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी बाढ़ पीड़ितों की कोरोना जांच तो कर ही रहे हैं। साथ में लोगों से मास्क पहनने और साफ-सफाई के साथ सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील भी कर रहे हैं। इस भीड़ में अगर कोई कोरोना पीड़ित निकल गया तो उससे दूसरों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए कोरोना जांच बहुत जरूरी है।
बच्चों को दिया जा रहा पोषणयुक्त लड्डूः
सिर्फ स्वास्थ्यकर्मी ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका भी बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर बच्चों को पोषणयुक्त लड्डू बांट रही हैं। बच्चों के लिए दूध भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके साथ-साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है। इसे लेकर गर्भवती औऱ धात्री महिलाओं को बाढ़ आने से पहले ही चिह्नित कर लिया गया था।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती और धातृ महिलाओं को मिल रही है बेहतर स्वास्थ्य सेवा

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– नियमित की जा रही है स्वास्थ्य जाँच
– आईसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है जाँच
– स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर क्षेत्र में टीम द्वारा की जा रही है जाँच

खगड़िया, 20 अगस्त-

जिले में बाढ़ के कारण कई प्रखंड पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं एवं प्रखंड और जिला मुख्यालय से संपर्क भंग हो चुका है। किन्तु, प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर आईसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तत्पर एवं प्रयासरत है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सामुदायिक किचन समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई ही जा रही हैं । इसके अलावा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसको लेकर मेडिकल कैम्प का आयोजन कर लोगों को स्वास्थ्य सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके माध्यम से खासकर आईसीडीएस के सहयोग से गर्भवती एवं धातृ महिलाओं की लगातार स्वास्थ्य जाँच की जा रही है। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और सुविधाजनक तरीके से संबंधित महिलाएं स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले सकें।
– आईसीडीएस डीपी, डीसी एवं सीडीपीओ के नेतृत्व में हो रही है स्वास्थ्य जाँच :
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आईसीडीएस डीपीओ सुनीता कुमारी, डीसी अंबुज कुमार एवं संबंधित क्षेत्र के सीडीपीओ नेतृत्व में स्थानीय एल एस, एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा समेत अन्य कर्मियों द्वारा लगातार स्वास्थ्य जाँच की जा रही है। इस दौरान लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है। ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और सुविधाजनक तरीके से लाभ ले सकें।
– चिकित्सा परामर्श के साथ उचित पोषण की भी जा रही है जानकारी :
आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता कुमारी ने बताया, इस दौरान खासकर गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को चिकित्सा परामर्श के साथ उचित पोषण एवं गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और संबंधित महिला को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। इस दौरान जो गर्भवती महिला गर्भधारण का अंतिम स्टेप यानी नौवें महीने में गुजर रही है, उनका विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
– गर्भवती महिलाओं की जा रही है समुचित जाँच :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, इस दौरान गर्भवती महिलाओं का मेडिकल टीम द्वारा ब्लड, यूरिन, एचआईवी, बीपी, हार्ट-बीट, वजन आदि की कोविड प्रोटोकॉल के साथ जाँच की जा रही है। इसके अलावा कोविड से बचाव से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है। साथ ही गर्भवती एवं धातृ महिलाओं के लिए पौष्टिक फूड पैकेट तथा बच्चों के बीच पोषण युक्त लड्डू वितरित की जा रही है। ताकि पोषण से संबंधित समस्या उत्पन्न नहीं हो।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– यात्रा के दौरान निश्चित रूप से सैनिटाइजर पास में रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– मुँह, नाक और ऑख को अनावश्यक छूने से बचें और छूने के पूर्व अच्छी तरह हाथों की सफाई करें।

लखीसराय जिले में कोविड-19 प्रोटोकॉल के पालन के साथ चल रहा है नियमित टीकाकरण अभियान

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– ऑगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं व बच्चों को लगाया गया टीका
– परिवार नियोजन एवं संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया गया जागरूक, कोविड-19 से बचाव की भी दी गई जानकारी

लखीसराय, 20 अगस्त-

जिले में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन के साथ नियमित टीकाकरण अभियान जारी है। ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय टीकाकरण हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके । वहीं, शुक्रवार को जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती एवं बच्चों को लगने वाले नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं सहायिका के साथ टीकाकरण किया गया । इस दौरान टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी भी दी गई। वहीं, इस दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन एवं सुरक्षा के मद्देनजर हर मानकों का ख्याल रखा गया।
– जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण का हुआ आयोजन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस एवं केयर के कर्मियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक सलाह दी गई।
– परिवार नियोजन को लेकर महिलाओं को किया गया जागरूक :
नियमित टीकाकरण के दौरान मौजूद महिलाओं को परिवार नियोजन अभियान को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसमें उन्हें परिवार नियोजन अपनाने से होने वाले फायदे की विस्तार से जानकारी दी गई एवं बच्चों के जन्म में कम से कम से दो साल का अंतराल रखने के लिए प्रेरित किया गया। ताकि परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए महिलाएं आगे आ सकें। इसके अलावा गर्भवती की एएनसी भी जाँच की गई । जिसमें बीपी, वजन, सुगर समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच की गई ।
– कोविड-19 से बचाव को लेकर भी किया गया जागरूक :
टीकाकरण के दौरान मौजूद महिलाओं एवं उनके परिजनों को कोविड-19 से बचाव के लिए भी जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया, इस महामारी को रोकने के लिए मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन समेत अन्य एहतियात जारी रखें और सरकार व स्वास्थ्य विभाग के गाइडलाइन का पालन करें। इसके अलावा स्वच्छता पर भी बल दिया गया। इसको लेकर गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत साफ-सफाई समेत घर के आसपास परिसर को साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने को कहा गया। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं हों।
– संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक :
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।
– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती है और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– लगातार हाथों की साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से धोएं।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– किसी से भी बातचीत दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।