मुंगेर जिले के बाढ़ राहत शिविरों में लगातार की जा रही है बाढ़ प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच

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– स्वास्थ्य जांच के बाद जरूरतमंद लोगों को समुचित इलाज के साथ दी जा रही है दवाइयां
– बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में टीका नाव के जरिये स्वास्थ्य विभाग की चलंत टीम द्वारा हो रहा टीकाकरण

मुंगेर, 20 अगस्त-

मुंगेर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में स्वाथ्य विभाग की टीम के द्वारा बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के स्वास्थ्य की जांच एवं उसके बाद समुचित उपचार करने के बाद आवश्यक दवाइयां भी दी जा रही हैं । इसके साथ ही इन बाढ़ राहत शिविरों में रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को जीविका दीदी के द्वारा तैयार किया गया गुणवत्तापूर्ण भोजन सुबह दोपहर और रात में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही छोटे- छोटे मासूम बच्चों के लिए भी दूध की व्यवस्था की गई है।
आरबीएसके के माध्यम घर- घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपी एम) नसीम रजि ने बताया कि जिला के वैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र जहां लोग बाढ़ की वजह से अपने घर में ही कैद हैं उन सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की चलंत टीम आरबीएसके के माध्यम घर- घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेगी। इसके साथ ही ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली आशा और एएनएम भी सभी घरों में भ्रमण कर सभी लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेगी और अपने कार्य से संबंधित फ़ोटो व्हाट्सएप पर लगातार अनिवार्य रूप से शेयर करेगी।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ” टीका नाव” के माध्यम से लोगों का लगातार किया जा रहा है टीकाकरण
उन्होंने बताया कि जिले के बाढ़ प्रभावित सदर प्रखंड, बरियारपुर, धरहरा एवं दियरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में टीका नाव के जरिये स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा लगातार लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही बाढ़ राहत शिविर में भी तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा स्वास्थ्य जांच एवम कोरोना टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि बाढ़ राहत केंद्र में रहने वाली महिलाओं एवं लड़कियों को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाने एवं व्यक्तिगत स्वच्छता (पर्सनल हाइजीन) के लिए आईसीडीएस कर्मियों के द्वारा सैनिटरी पैड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोग इन बाढ़ राहत शिविर में भी जाकर भोजन के साथ -साथ अपने स्वास्थ्य की जांच करवा सकते हैं । इसके साथ ही वो वहां कोरोना वैक्सीन की खुराक भी ले सकते हैं। इसके ही जिले के अन्य सेशन साइट पर भी नियमित रूप से सभी लोगों का कोरोना टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बहुत ही जल्द बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों के समुचित इलाज के लिए अस्थाई स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जाएगा।
कोरोना संक्रमण से परिवार और समाज को सुरक्षित रखने के लिए सभी लोग लें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज
उन्होंने बताया कि कोरोना वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित और 100 फीसदी प्रभावी है| इसलिये सभी लोगों को अपने साथ -साथ अपने पूरे परिवार और समाज को कोरोना संक्रमण से मुक्त रखने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लेना आवश्यक है। इसके बाद ही हम मुंगेर जिला को जल्द से जल्द कोरोना मुक्त बना सकते हैं। इसके साथ ही सभी जिलावासी को अभी भी कोरोना दिशा-निर्देश के अनुसार मास्क का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल के साथ ही शारीरिक दूरी के रूप मे एक- दूसरे से कम दो गज या छह फीट की दूरी बरतनी चाहिए । इसके साथ ही कुछ भी छूने की स्थिति में अपने हाथों को साबुन या हैंड सैनिटाइजर से साफ करना चाहिए।

खेती तो होती रहेगी, कोरोना से बचना है तो पहले टीका लेना ही पड़ेगा

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-गांव के लोगों को टीका लेते देखकर भी जागरूक हो रहे हैं लोग
-कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी

बांका, 20 अगस्त| कोरोना टीकाकरण को लेकर जिलेवासी पूरी तरह से जागरूक हो गए हैं। टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जागरूकता का असर तो लोगों पर पड़ ही रहा है, लेकिन गांव में एक-दूसरे को देखकर भी टीका लेने के लिए लोग सामने आ रहे हैं। दरअसल, गांव में टीका लेने वालों की लगातार संख्या बढ़ रही है। ऐसे में वैसे लोग जिन्होंने टीका नहीं लिया है, उन्हें लगने लगा है कि कहीं हमने टीका नहीं लिया तो यह सही नहीं होगा। आखिर कोरोना से बचाव को लेकर ही तो टीका दिया जा रहा है। हमको भी तो कोरोना से बचना है। इसलिए टीका तो लेना ही पड़ेगा।
काम रोककर गणेश पंडित अस्पताल आये और कोरोना का टीका लिया-
शुक्रवार को छत्रपाल गांव के गणेश पंडित सदर अस्पताल में टीका लेने के लिए आए थे। 26 साल के गणेश पंडित ने कहा कि हमलोग खेती में व्यस्त थे। इधर गांव के सभी लोग एक-एक कर टीका लेते जा रहे हैं। ऐसे में मुझे लगने लगा कि कहीं मैं पीछे नहीं रह जाऊं। इस वजह से आज मैंने अपना काम रोककर अस्पताल आया और कोरोना का टीका लिया। अब परिवार के सभी सदस्यों को भी दिलवाउंगा। इसी तरह डारा गांव के 35 वर्षीय लालू लैया भी शुक्रवार को टीका लेने के लिए सदर अस्पताल आए हुए थे। टीका लेने की प्रेरणा कहां से मिली, इस पर लालू लैया ने कहा कि गांव के अधिकतर लोगों ने टीका ले लिया था। मुझे लगने लगा कि कहीं मैं छूट न जाऊं। इसलिए मैं खेत का काम छोड़कर टीका लगवाने आया। खेती तो होती रहेगी। कोरोना से बचना है तो पहले टीका लगाना ही होगा। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी करते हैं कि यह अच्छी बात है कि लोग अब खुद भी जागरूक हो रहे हैं। ऐसा लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलने से हुआ। जागरूकता कार्यक्रम लगातार चलते रहने से लोगों में समझ बनी कि कोरोना से बचना है तो टीका लेना ही पड़ेगा।
350 से अधिक लोगों को पड़े टीकेः
उधर, बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत शुक्रवार को 350 से अधिक लोगों को कोरोना के टीके दिए गए। टीका लेने वालों में पहले और दूसरे डोज लेने वाले, दोनों तरह के लोग शामिल थे। टीकाकरण के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की कोई समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही समय पर आकर कोरोना टीका का दूसरा डोज अवश्य लेने के लिए कहा गया।
302 लोगों की हुई जांचः
उधर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को 202 लोगों की एंटीजन किट से कोरोना जांच की गई। जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। साथ ही 100 लोगों के सैंपल आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए लिया गया। हालांकि जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला, लेकिन सभी लोगों को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया।

सातवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन (OSICON-21) में महासागरीय अनुसंधान में भारतीय वैज्ञानिको का योगदान

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• राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र (एनसीपीओआर) में ओशन सोसाइटी ऑफ इंडिया -21 का राष्ट्रीय सम्मेलन
• बिहार के नवादा जिले के प्रख्यात ध्रुवीय वैज्ञानिक डॉ. अविनाश कुमार रहे संचालक
• भारत, अमेरिका और सिंगापुर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन
• महासागर विज्ञान के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करने के लिए कई पुरस्कार वितरित

पटना: महासागर विज्ञान की उपयोगिता एवं इसका जलवायु पर होने वाले प्रभाव को लेकर भारत में कई शोध किये जा रहे हैं I साथ ही इसको लेकर भारत सरकार की पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ऐसे शोधों को बढ़ावा भी दे रही हैI इसी कड़ी में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के गोवा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र में ओशन सोसाइटी ऑफ इंडिया का सातवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन (OSICON-21) का आयोजन हो रहा है I कोविड-19 महामारी के कारण इस सम्मेलन का आयोजन ऑनलाइन वर्चुअल माध्यम से किया गया है I “सतत विकास में महासागर आका योगदान” प्रसंग पर आधारित इस आयोजन में भारत, अमेरिका और सिंगापुर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों में कुल 13 आमंत्रित वार्ताएं दी जा रही हैं। 7 विषयों पर कुल 217 मौखिक प्रस्तुतियाँ होंगी। समुद्री अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधि वर्चुअल ओसिकोन-21 सम्मेलन में भाग लेते हुए सतत विकास के लिए महासागर की भूमिका पर चर्चा कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन अटल अवार्ड सहित कई राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके नवादा जिले के प्रख्यात ध्रुवीय वैज्ञानिक डॉ. अविनाश कुमार ने सह-समन्वयक के रूप में किया.
डॉ. एम. राजीवन, पूर्व सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार ने ओशन सोसाइटी ऑफ इंडिया-21 का उद्घाटन किया और महासागर अनुसंधान के महत्व और भारतीय गहरे महासागर मिशन कार्यक्रम की स्थापना के बारे में जानकारी प्रदान की।

समझौता विज्ञापन पर किया है हस्ताक्षर:
डॉ. एम. रविचंद्रन, निदेशक, एनसीपीओआर, और ओएसआई के अध्यक्ष ने अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में ओशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ओएसआई अब इंटरनेशनल सी बेड अथॉरिटी की यूनाइटेड नेशन असेंबली में पर्यवेक्षक और फेडरेशन ऑफ इंडियन जियोसाइंस एसोसिएशन का सदस्य है। हाल ही में ओएसआई ने भारतीय मौसम विज्ञान सोसायटी (आईएमएस) के साथ समुद्र और वायुमंडलीय समुदाय के साथ तालमेल के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है।

ओसन सोसाइटी ऑफ इंडिया ने किया सम्मानित:
डॉ. शैलेश नायक, निदेशक, राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान, बेंगलुरु एवं पूर्व सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को ओएसआई के प्रथम मानद फेलो के रूप में महासागर विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। डॉ. शैलेश नायक ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी अनिवार्य रूप से समुद्र पर निर्भर आर्थिक विकास है जो भारत में लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पर्यावरण और पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ समावेशी सामाजिक विकास सुनिश्चित करता है।

प्रो प्रसाद के भास्करन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर और प्रो जयचंद्रन के वी, केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (केएसबीबी) को ओएसआई के प्रतिष्ठित फेलो के रूप में चुना गया। डॉ. डी. श्रीनिवासन एंडोमेंट अवार्ड वर्ष 2021 के लिए डॉ. एम. ए. आत्मानंद द, विजिटिंग प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास और पूर्व निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी), चेन्नई को प्रदान किया गया। महासागर विज्ञान के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ पेपर, सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्ताव और ओएसआई पीजी निबंध पुरस्कार की श्रेणी के लिए कई पुरस्कार दिए गए।

वर्तमान में हो रहे अनुसंधान के कई विषयों पर हुई चर्चा :
इस ऑनलाइन सम्मेलन ने शोधकर्ताओं को अपने शोध विचारों और निष्कर्षों को अन्य हिंद महासागरीय समुदायों के साथ साझा करने और समुद्र विज्ञान में अनुसंधान से संबंधित वर्तमान मुद्दों पर चर्चा करने में सक्षम बनाया गया। तीन समानांतर सत्रों में, सम्मेलन में सात विषयों को शामिल करते हुए कई प्रस्तुतियाँ, आमंत्रित वार्ताएँ, मौखिक प्रस्तुतियाँ और पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल थी। जिसमें समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और महासागर की जैव-भू-रसायन, तटीय और खुली महासागर प्रक्रियाएं, जलवायु परिवर्तन, ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर, महासागर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, समुद्री भूविज्ञान और भूभौतिकी और महासागर विज्ञान में गणित जैसे मुद्दों पर चर्चा हुयी।

डॉ. अनिलकुमार एन, संयोजक OSICON-21 ने अपने स्वागत संबोधन में सम्मेलन की विस्तृत जानकारी देते हूए ऑनलाइन उपस्थित गणमान्य वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। OSICON-21 के उद्घाटन और समापन कार्यक्रमों का समन्वय सह-संयोजक, डॉ अविनाश कुमार, NCPOR द्वारा किया गया था। इस सम्मेलन में स्थानीय आयोजन समिति के सदस्यों में मुख्य रूप से डॉ. रोहित श्रीवास्तव, डॉ. रविदास नाइक, ललित अहिरवार, एवम डॉ. साबू पी ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समर्पित भाव से काम किया है।

टीबी को खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक करने की ली शपथ

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-सदर अस्पताल में टीबी विभाग और केजीपीटी के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित
-खुद के साथ सहकर्मियों और परिवार के लोगों को भी टीबी से बचाने की लोगों ने ली शपथ

भागलपुर, 20 अगस्त-

जनआंदोलन थीम के तहत अभी जिलेभर में टीबी को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चल रहा है। इसी कड़ी में सदर अस्पताल में टीबी को दूर भगाने के लिए लोगों को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) और टीबी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में सीडीओ डॉ. दीनानाथ और केएचपीटी की आरती झा समेत विभाग के सभी लोग शामिल हुए। इस दौरान सभी लोगों ने टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने की शपथ ली। समाज से टीबी को खत्म करने के लिए लोगों को खांसने के सही तरीके का पालन कराने की शपथ ली गई। साथ ही देश और समाज से टीबी को खत्म करने के लिए घर-घर जाकर जाकरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया गया। खुद के साथ सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों को टीबी से बचाने की लोगों ने शपथ ली।
लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं-
मौके पर सीडीओ डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। टीबी का अगर आप इलाज नहीं कराते हैं तो एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी समाप्त हो जाएगा।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः
दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः
टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।

बाढ़ राहत शिविर में दीदी की रसोई के माध्यम से परोसा जा रहा है गुणवत्तापूर्ण भोजन

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– मुंगेर के दो प्रखण्डों में चलाए जा रहे शिविर
– मुंगेर संग्रहालय में जीविका दीदी के द्वारा प्रतिदिन 4000 से 5000 फ़ूड पैकेट की जा रही है पैकेजिंग
– बाढ़ प्रभावित प्रखंड़ों में आपदा प्रबंधन विभाग कर रहा है जीविका दीदी के द्वारा निर्मित मास्क का वितरण

मुंगेर-

जिला में आई बाढ़ की विभीषिका में बेघर हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन के द्वारा जगह – जगह बाढ़ राहत शिविर चलाया जा रहा है। इन राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए दीदी की रसोई के माध्यम से जीविका के द्वारा सामुदायिक किचन का संचालन हो रहा है। यहां जीविका दीदी के द्वारा बाढ़ पीड़ितों के लिए तीन टाइम सुबह में नाश्ता, दोपहर का खाना के साथ ही रात में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। राहत शिविर में रहने वाले छोटे-छोटे बच्चों के लिए दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जीविका दीदी के द्वारा प्रतिदिन 1200 से 1500 लोगों के लिए तीन टाइम का गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार किया जा रहा
मुंगेर जिला में जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रितेश कुमार ने बताया कि मुंगेर के सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत आईटीसी चंडिका स्थान के पास स्थित नंद कुमार उच्य विद्यालय में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में दीदी की रसोई के माध्यम से जीविका दीदी के द्वारा प्रतिदिन 1200 से 1500 लोगों के लिए तीन टाइम का गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही छोटे – छोटे बच्चों के लिए दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा सदर प्रखंड के कुतुलपुर दियरा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के लिए धरहरा प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत हेमजापुर क्लस्टर के अमरपुर उच्च विद्यालय में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में जीविका दीदी के द्वारा दीदी की रसोई के माध्यम से तीन टाइम का गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार किया जा रहा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जीविका दीदी द्वारा तैयार मास्क का वितरण :
उन्होंने बताया कि जिला के विभिन्न प्रखंड़ों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा तैयार किया गया मास्क का वितरण किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा अभी तक कुल 4000 से 5000 बाढ़ पीड़ितों के बीच जीविका बहनों द्वारा बनाया गया मास्क वितरित किया गया है।

जिला मुख्यालय स्थित मुंगेर संग्रहालय में जीविका बहनों द्वारा 4 से 5 हजार फ़ूड पैकेट की पैकेजिंग :
जीविका के डीपीएम रितेश कुमार ने बताया कि जिला मुख्यालय स्थित मुंगेर संग्रहालय में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा तैयार कराए जा रहे फ़ूड पैकेट को जीविका बहनें ही तैयार कर रही हैं है। प्रतिदिन 50 से 60 की संख्या में जीविका बहनें 4000 से 5000 हजार फ़ूड पैकेट की पैकेजिंग कर रही हैं ।

सूर्यगढ़ा सीएचसी में आशा कार्यकर्ताओं का छः दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू

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– – स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया की टीम द्वारा संयुक्तरूप से दिया जा रहा प्रशिक्षण

लखीसराय-

जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं का मॉड्यूल 05, 06 एवं 07 का छः दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण गुरुवार से शुरू हो गया। उक्त प्रशिक्षण का उदघाटन जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रामप्रीत सिंह ने किया। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया की टीम के संयुक्त तत्वावधान में सूर्यगढ़ा बाजार स्थित एलआईसी ऑफिस के ऊपरी तल पर दिया जाएगा। जिसमें आशा कार्यकर्ताओं को लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी अन्य सेवाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। ताकि आशा कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकें और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुँचा सके । साथ ही लोगों को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलना सुनिश्चित हो सके। यह प्रशिक्षण केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक आशित कुमार, वैक्सीनेशन कोर्डिनेटर मुरारी कुमार एवं सुधीर कुमार द्वारा दिया जाएगा।

– गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण जरूरी :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रामप्रीत सिंह ने बताया, गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए इस तरह का प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इस तरह के प्रशिक्षण से ना सिर्फ बेहतर कार्य करने की जानकारी मिलती है। बल्कि, क्षमतावर्धन भी होता है और विभाग से संबंधित कार्य करने में आसानी मिलती है। इसीलिए, यह समय-समय यह प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है। ताकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं का आशा कार्यकर्ताओं को विस्तृत जानकारी मिल सके। प्रशिक्षण के दौरान खासकर नई सेवाओं की जानकारी से आशा कार्यकर्ताओं को अवगत कराने पर बल दिया जाता है।
– बैच वाइज दिया जाएगा प्रशिक्षण, :
सूर्यगढ़ा सीएचसी प्रभारी डॉ धीरेंद्र कुमार ने बताया, यह छः दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण बैच वाइज चयनित आशा एवं फ़ैसिलिटेटर को दी जा रही है। फिलहाल, दो बैच का एक साथ प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है, स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं का आशा कार्यकर्ता को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना। ताकि वह अपने क्षेत्र के लोगों को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा सके और लोगों को भी सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिल सके।
– 24 अगस्त तक होगा यह प्रशिक्षण :
सूर्यगढ़ा सीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार कुशवाहा ने बताया, इस प्रशिक्षण का समापन 24 अगस्त को होगा। यह प्रशिक्षण पूर्णतः आवासीय है। यानी सभी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थी प्रशिक्षण स्थल पर रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी । सभी लाभार्थियों के लिए प्रशिक्षण स्थल पर रहने, खाना-पीना समेत अन्य सभी व्यवस्थाएं की गई है। ताकि लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त कर सके।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

खगड़िया जिले में कोविड-19 के गाइडलाइन के पालन के साथ मनाया गया अन्नप्राशन

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– छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन, पौष्टिक आहार के महत्व की दी गई जानकारी
– अन्नप्राशन के साथ कोविड से बचाव की जानकारी और वैक्सीनेशन के प्रति किया गया जागरूक

खगड़िया-

गुरूवार को जिले के सभी प्रखंडों में कोविड-19 गाइडलाइन के पालन के साथ अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान जिले की सभी सेविका-सहायिका ने अपने-अपने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण कर लाभार्थी के घर जाकर छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी । ताकि बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण हो सके। वहीं, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर उचित पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। दरअसल, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण की दिशा में सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है।
– अन्नप्राशन के साथ कोविड से बचाव की जानकारी और वैक्सीनेशन के प्रति किया गया जागरूक :
आईसीडीएस के एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, अन्नप्राशन के साथ संभावित तीसरे लहर को देखते हुए कोविड से बचाव की जानकारी दी गई और इस महामारी से स्थाई निजात के लिए वैक्सीनेशन के प्रति भी जागरूक किया गया। ताकि तीसरा लहर से प्रभावित होने की आशंका कम हो और लोग सुरक्षित रह सकें। इसके लिए मास्क का उपयोग, शारीरिक का दूरी का पालन, हाथों को हमेशा साफ रखने, लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराने आदि जानकारी दी गई।
– अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी : –
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया गया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं । तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण हो पाएगा। इसके अलावा 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी।चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।

– पौष्टिक आहार की महत्ता की दी गई जानकारी :-
वहीं, केयर इंडिया के परिवार नियोजन योजना के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया, शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।

– इन बातों का रखें ख्याल : –
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

बांका में 450 लोगों को पड़े टीके,304 लोगों की जांच

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कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
टीकाकरण को लेकर क्षेत्र मेंष जागरूकता अभियान जारी
बांका-

कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। गुरुवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 450 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए तो 304 लोगों की जांच की गई। टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया। इसके अलावा सभी को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि गुरुवार को भी गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर काफी संख्या में लाभुक कोरोना का टीका लेने के लिए पहुंचे। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत गुरुवार को 450 लोगों को टीके दिए गए। अच्छी बात यह रही कि युवाओं के साथ अधिक उम्र के लोग और दूसरी डोज लेने वाले भी अच्छी खासी संख्या में टीका लेने के लिए केंद्र पर पहुंचे। टीका को लेकर जागरूकता अभियान भी जारी है।

जांच में कोई भी संक्रमित नहीं मिला: डॉ. चौधरी ने कहा कि गुरुवार को भी 204 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। इनमें से कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। वहीं आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए 100 लोगों के सैंपल लिए गए। जांच के बाद सभी लोगों को मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। बार-बार हाथ की धुलाई करने की सलाह भी दी गई। सभी को कहा गया कि बाहर से आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें।

टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी: डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन्हें भी कोरोना के खत्म होने तक गाइडलाइन का पालन करना है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक पूरी सतर्कता के साथ रहना जरूरी है। कोरोना को खत्म होने के लिए सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा। जिन्होंने टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें। घर से बेवजह निकलने से परहेज करें।

विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस -युवाओं ने दिया अद्भुत स्रिज्नात्मक्ता और संवेदनशीलता का परिचय

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एमिटी यूनिवर्सिटी पटना और यूनिसेफ ने ‘मैं भी रिपोर्टर’ का आयोजन किया

पटना: एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी पटना ने यूनिसेफ बिहार के सहयोग से 18 और 19 अगस्त, 2021 को दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की वीडियो मेकिंग और फोटोग्राफी प्रतियोगिता ‘मैं भी रिपोर्टर’ का आयोजन किया। एमिटी यूनिवर्सिटी पटना हर साल 19 अगस्त, जिसे विश्व फोटोग्राफी के रूप में भी मनाया जाता है, पर एमिक्लिक्स का भी आयोजन करती है, जिसे इस साल भी किया गया.

इस आयोजन का मुख्य विषय बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देना और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करना था, जहाँ 9वीं से 12वीं कक्षा, स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्रों को एक मंच दिया गया, जिसका उपयोग कर छात्रों ने दो अलग-अलग श्रेणियों – स्वतंत्र भारत में महिला और बाल अधिकार और सामान्य, में निर्मित वीडियो और तस्वीरों का प्रदर्शन किया।

यह कार्यक्रम कोविड-19 सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल के कारण एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हुआ, जिसमें दुनिया भर के 150 से अधिक कॉलेजों और स्कूलों से 500+ पंजीकरण हुए। यहां भी नारी शक्ति का उदय हुआ, जहां 70% से अधिक प्रतिभागी और प्रविष्टियां छात्राओं की थीं। छात्रों ने इस प्रतियोगिता का उपयोग बाल अधिकार, महिला अधिकारिता, समानता, कोविड -19 टीकाकरण, और बहुत कुछ विषयों पर अद्भुत तस्वीरैं और वीडियो दिखाने के लिए किया।

पटना विश्वविद्यालय, पटना महिला कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ फोटोग्राफी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, अमेरिकन स्कूल ऑफ धहरान, सऊदी अरब और अन्य कॉलेज के कई छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ वीडियो और तस्वीरों की श्रेणी में कुल 8 पुरस्कार दिए गए. विजेताओं का चुनाव सम्मानित जूरी सदस्यों द्वारा किया गया, जो उद्योग जगत के विभिन्न क्षेत्रों से आए थे. जूरी मेंबर्स ने विजेता का चयन करने से पहले प्रत्येक प्रविष्टि को बारीकी से देखा. सभी प्रतिभागियों को पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट भी दिए गए. वीडियो सेगमेंट में विजेता हैं- शाम्भवी राव, प्रियास्वरा भारती, सूर्यकांत कुमार और नेहा जैन। फोटोग्राफी सेगमेंट में विजेता हैं साकेत कुमार, संस्कार केशरी, तैयबा सिद्दीकी और अतुल अंकित प्रकाश हैं।
एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के कुलपति डॉ. टी.आर. वेंकटेश ने कहा कि इस ऑनलाइन आयोजन के पीछे का मकसद छात्रों को बाल अधिकार और महिला समानता के संदेश को बढ़ावा देने के लिए एक मंच का निर्माण था. एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के प्रतिकुलपति डॉ विवेकानंद पांडे ने बताया कि एमिटी यूनिवर्सिटी पटना और यूनिसेफ लंबे समय से एक साथ काम कर रहे हैं और यह विशेष आयोजन उभरते पत्रकारों और फोटोग्राफरों को विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण टिप्स और ट्रिक्स देना था.
अपने संबोधन में, सुश्री नफीसा बिंते शफीक, प्रमुख, यूनिसेफ बिहार ने बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा, समानता और सशक्तिकरण के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया, जहां उन्होंने बताया कि यूनिसेफ सरकारी एजेंसियों और शिक्षा, मीडिया और युवा लोगों सहित प्रमुख हितधारकों के साथ काम कर रहा है, जहाँ हमारा ध्यान सबसे हाशिए समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बच्चों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना है.

सुश्री निपुण गुप्ता, संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ बिहार, ने बताया कि यह पहल हमें किशोर लड़कियों और लड़कों की आंखों/दृष्टिकोण से दुनिया को देखने में मदद करेगी, विशेष रूप से वे बच्चों, महिलाओं के अधिकारों और Covid19 के प्रभाव को कैसे देखते हैं। उन्होंने बताया कि हम सभी सरकारी एजेंसियों को बाल श्रम की अवैध प्रथा की रिपोर्ट करने में मदद करके रिपोर्टर बन सकते हैं।

सुश्री श्वेता प्रिया, प्रोग्राम लीडर, एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी पटना ने जूरी सदस्यों-श्री प्रशांत रवि, श्री सुमन श्रीवास्तव, प्रो. जयप्रकाश विश्वकर्मा, प्रो. रुचि शुक्ला, श्री प्रशांत रंजन को उनके बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

नाथनगर रेफरल अस्पताल में लगा टीबी जागरूकता शिविर

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-टीबी से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने का लिया गया संकल्प
-स्वास्थ्य विभाग व केएचपीटी की तरफ से शिविर का किया गया आयोजन

भागलपुर-

जनआंदोलन थीम के तहत टीबी को लेकर जिलेभर में जागरूकता शिविर लगाया जा रहा है। गुरुवार को नाथनगर रेफरल अस्पताल में टीबी जागरूकता शिविर लगाया गया। इसका आयोजन स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) की तरफ से किया गया। इस दौरान रेफरल अस्पताल की पदाधिकारी डॉ. टीना हुसैन ने शिविर में मौजूद आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को टीबी के प्रति क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के लिए कहा। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में जाकर लोगों को टीबी के लक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए कहा। इस मौके पर केएचपीटी की भागलपुर हेड आरती झा, अस्पताल के एसटीएस कृति भारती, लैब टेक्नीशियन नीलू देवी, डीओ रोहित कुमार, बीसीएम किरण कुमारी, डॉ टीना हुसैन आदि थे।

टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं-
इस दौरान डॉ. टीना हुसैन ने कहा कि टीबी एक संचारी रोग है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में ड्रॉपलेट के जरिये आसानी से फैलता है। इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। जांच में अगर पुष्टि हो जाती है तो दवा का सेवन शुरू कर दें। टीबी का इलाज सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त है और यह सभी तरह के सरकारी अस्पताल में होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसके समुचित इलाज की व्यवस्था है। यदि किसी को तीन सप्ताह तक लगातार खांसी हो या फिर खांसी में खून आने लगे, बुखार और कफ आने की शिकायत हो तो तत्काल जांच कराएं।

जिनके घर में मधुमेह के मरीज, वे रहें सावधानः
डॉ. हुसैन ने कहा कि आजकल अधिकतर घरों में मधुमेह के मरीज देखे जा रहे हैं। इस वजह से लोग संतुलित आहार लेते हैं। लोग पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इससे भी लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी के घर में मधुमेह के मरीज हों तो डॉक्टर से पूछकर अपना आहार तालिका बनाएं, ताकि कुपोषण का शिकार होने से बचें और टीबी जैसी बीमारी से बचाव हो सके।

बच्चों के पोषण पर दें ध्यानः
डॉ. हुसैन ने बताया कि टीबी को लेकर बच्चों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे के पोषण में अगर कमी हो जाए तो उसे आसानी से टीबी अपनी चपेट में ले लेता है। इसलिए कम बच्चे ही अच्छे होते हैं। अगर आपके कम बच्चे होंगे तो उसका सही से ध्यान रख पाएंगे। उसके पोषण के प्रति जागरूक रहेंगे और वह टीबी समेत दूसरी बीमारियों से बचा रहेगा।

टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंढे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना

बचाव के तरीके-
1. जांच के बाद टी.बी.रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2.मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5.पौष्टिक खाना खाएं।योगाभ्यास करें।
6.बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7. भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।