वंचित परिवारों को सहयोग करने की हुई पहल, सहयोगी ने 84 परिवारों को राहत सामग्री का किया वितरण

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• क्रिया संस्था के सहयोग से राहत सामग्री की गयी वितरित
• पिछड़े एवं निर्धन परिवारों को राहत सामग्री कराया गया उपलब्ध
• राशन एवं स्वच्छता-सफाई से सम्बन्धी सामग्रियों का भी हुआ वितरण

पटना-
शुक्रवार को सहयोगी संस्था ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित परिवारों को राशन सामग्री एवं उनके व्यक्तिगत स्वच्छता-सफाई से सम्बंधित सामग्रियों का वितरण किया । कोविड-19 महामारी से उत्पन्न संकट काल में अत्यन्त पिछड़े एवं निर्धन परिवारों के बीच राहत सामग्री के द्वारा उन्हें तात्कालिक सहायता प्रदान की गई। सहयोगी संस्था के कार्यक्षेत्र में सम्मलित महिला, विधवा, विकलांग, वृद्ध, आदि को राहत सामग्री वितरित की गयी.

84 परिवारों में राहत सामग्री का हुआ वितरण:
इसके लिए सहयोगी ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की संस्था क्रिया के सहयोग से चिन्हित 84 परिवारों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध करायी. जिसमें चावल, आटा, दाल, तेल, हॉर्लिक्स, मसाले, नमक के साथ नहाने एवं कपड़े साफ़ करने के साबुन, सेनिटरी पैड को शामिल किया गया। राहत सामग्री का वितरण पटना के दानापुर प्रखंड के अंतर्गत हथियाकांध, जमसौत, रघुरामपुर पंचायत, मनेर प्रखंड के अंतर्गत सराय पंचायत एवं पटना शहरी क्षेत्र में जलालपुर, रूपसपुर, अभिमन्युनगर एवं कपाडियाटोला मलिन बस्तियों में जरूरतमंद परिवारों को किया गया। राहत सामग्री पैकेट में इन परिवारों के लिए 15 दिनों की सामग्री की व्यवस्था की गई। इसके अतिरिक्त संस्था द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में महामारी के दौरान प्रतिबंधित आवागमन के समय भी समुदाय को स्वच्छ-सुरक्षित बने रहने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग द्वारा जागरूक किया गया, असहायों को नजदीकी स्वस्थ्यकेंद्र तक पहुँचाने हेतु सहायता की गई।

कोरोना काल में कई लोगों की मुश्किलें बढ़ी है:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने बताया कि कोरोना ने न सिर्फ़ आम लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि इससे कई लोगों की जीविका भी प्रभावित हुयी है. कई लोगों के सामने अपने परिवार के लिए खाना जुटाना भी चुनौतिपूर्ण साबित हुआ है. ऐसे में इन परिवारों को राहत पहुँचाने के मकसद से सहयोगी ने एक छोटा सा प्रयास किया है.

वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहयोगी है प्रयासरत:
रजनी ने कहा कि कोरोना काल के इतर सामान्य दिनों में भी इन परिवारों की जीविका बहुत कठिनाई से चलती है। लेकिन लॉकडाउन एवं प्रतिबंधित आवागमन के कारण इनके घरों में राशन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की कमी में और इज़ाफा देखा गया। वहीं, सामान्यता इन परिवारों के पास विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों के लिए आवश्यक कागजात की भी कमी होती है. इससे वे इन लाभों से वंचित रह जाते हैं। इस दिशा में सहयोगी निरंतर प्रयास कर रही है. सहयोगी संस्था द्वारा किये जाने वाले हस्तक्षेपों से ऐसे परिवारों को योजनान्तर्गत लाभ सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक दस्तावेजों को बनवाने में सक्रिय रूप से सहायता की जाती है। इस तरह से सहयोगी वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने में निरंतर प्रयासरत है.
यह ज्ञातव्य हो कि सहयोगी द्वारा पटना के विभिन्न गांवों एवं मलिन बस्तियों में घरेलु हिंसा एवं जेंडर हिंसा के मुद्दे पर सामुदायिक जागरूकता का कार्यक्रम करती है एवं इस विषय पर सभी हितभागियों के साथ विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन कर अलग-अलग फोरम पर संवाद करती है। साथ ही, समुदाय के स्वच्छता-सफाई, रोजगार, आदि के मुद्दों पर भी विभिन्न अवसरों को उपलब्ध कराती है।
राहत सामग्री वितरण के अवसर पर सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी, धर्मेन्द्र कुमार, राजू पाल, उन्नति रानी के साथ सामाजिक संगठनकर्ता लाजवंती देवी, उषा देवी, रूबी कुमारी, संजू कुमारी, मुन्नी कुमारी, आदि उपस्थित रहे।

सामाजिक और आर्थिक विकास में सीएसआर की भूमिका बेहद सराहनीय – अश्विनी कुमार चौबे,केंद्रीय मंत्री

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दिल्ली:
कोरोना काल में सरकार के साथ-साथ कॉर्पोरेट जगत भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहें हैं। औद्योगिक घरानों और अन्य समाजसेवियों द्वारा सीएसआर धनराशि के तहत की जाने वाली मदद का महत्व कोरोना काल में बहुत अधिक बढ़ गया है और सीएसआर फंड इस भागीदारी को सुनिश्चित करने मे और भी अधिक सहायक सिद्ध हुई है।

इसी को देखते हुए सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन ने भारत विकास परिषद् के साथ मिलकर कोरोना काल के दौर में सीएसआर का महत्व और भूमिका को लेकर 5 अगस्त 2021 को दिल्ली के होटल लीमेरिडियन में आयोजन किया, जिसमे सीएसआर द्वारा स्थानीय हेल्थकेयर इको सिस्टम, आपदा तैयारी और प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला और सूची प्रबंधन प्रणाली एवं वित्तीय समावेशन और सभी हितधारकों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

इस कार्यक्रम में सरकार, प्रशासन, मीडिया, समाजसेवी, कॉर्पोरेट जगत आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सीएसआर के महत्त्व और इसकी भूमिका पर अपने विचार रखे।

सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक दीन दयाल अग्रवाल ने कहा कि कॉर्पोरेट द्वारा कोरोना काल में किये गये अथक प्रयासों से सब लाभवंवित हुए है और इस तरह के एक दिवसीय कार्येक्रमों से कॉर्पोरेट जगत को अपने सामाजिक दायित्वों को निभाने के लिए नई ऊर्जा मिलती है।

उपस्थित केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार समाज के हर वर्ग तक सहायता पहुँचाने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं जिसमे सीएसआर की अहम् भूमिका है।

केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि देश के अनेक प्राइवटे कंपनियों ने इस महामारी के दौरान अपना कर्तव्य निभाया और अपने सीएसआर फंड के द्वारा विभिन्न सेवा कार्यों मे पूरी मदद दी।

बालिका उच्च विद्यालय में तैयार हुआ ड्राइव—थ्रू काउंटर, कोविड टीकाकरण को मिलेगा बढ़ावा

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गाड़ी में बैठे—बैठे लोग लगवा सकेंगे कोविड टीका, सुबह छह से रात 9 बजे तक मिलेगी सुविधा
– कल जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन करेंगे ड्राइव—थ्रू काउंटर का उद्घाटन

भागलपुर, 9 अगस्त| कोविड टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की गयी है। इस पहल के तहत जिले में पहली बार ड्राइव—थ्रू वैक्सीनेशन सेंटर की शुरुआत होगी। ड्राइव—थ्रू वैक्सीनेशन सेंटर के लिए बालिका उच्च विद्यालय, घोषी टोला नाथनगर का चयन किया गया है। केयर इंडिया के सहयोग से जोर-शोर से इसकी तैयारी की जा रही है। 9 अगस्त को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा इस ड्राइव—थ्रू वैक्सीनेशन सेंटर का उद्घाटन किया जायेगा।

ड्राइव—थ्रू काउंटर पर वाहन से बिना उतरे करायें टीकाकरण:
कोविड टीकाकरण के लिए इस नई पहल से लोगों में उत्साह है। ड्राइव—थ्रू काउंटर लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। ड्राइव-थ्रू वैक्सीनेशन सेंटर का मतलब ऐसी जगह से हैं जहां लोग अपनी गाड़ी से बिना उतरे गाड़ी में बैठे—बैठे ही वैक्सीन लगवा सकते हैं। जिले में यह पहला ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन अभियान होगा जहां बुजुर्ग, दिव्यांगजन और महिलाएं अपनी गाड़ी से टीकाकरण केंद्र आकर अपना वैक्सीनेशन करवा सकते हैं। ड्राइव—थ्रू वैक्सीनेशन काउंटर इस बात को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है कि बुजुर्ग या बीमार लोग किसी अन्य के संपर्क में नहीं आएं और टीकाकरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सके। ड्राइव—थ्रू काउंटर पर लोग अपनी गाड़ियों से सीधे आकर वहां पर रजिस्ट्रेशन कराने के साथ गाड़ी में बैठे—बैठे ही टीका ले सकेंगे। इसके बाद वहां तैयार ऑब्जरवेशन पार्किंग में भेज दिया जायेगा, जहां पर 30 मिनट तक गाड़ी में ही वे खुद को ऑब्जरवेशन में रखेंगे। इस प्रकार की व्यवस्था की गई है कि लोगों के अधिक भीड़ वाले काउंटरों या अस्पतालों में जाकर लाइन में खड़े होना परेशानी भरा सबब होता है और उन्हें संक्रमण का डर भी सताता है। ऐसे लोगों के लिए बिना किसी डर सुरक्षित कार में बैठे—बैठे वैक्सीनेशन लगवाने की सुविधा होगी।
सेशन साइट पर होगा महिलाओं के लिए पिंक बूथ:
कोविड टीकाकरण सेशन साइट पर तीन विशेष प्रकार के काउंटर होंगे। पुरुषों के लिए जहां एक काउंटर बनाया गया है, वहीं दूसरा काउंटर पिंक बूथ के रूप में महिलाओं के लिये तैयार किया गया है। तीसरा काउंटर ड्राइव—थ्रू काउंटर है और यहां पर दिव्यांगजन तथा अत्यधिक बुजुर्ग लोग आसानी से टीका ले सकेंगे। यहां सुबह छह से रात नौ बजे तक कोविड टीकाकरण देने का काम किया जायेगा। टीकाकरण केंद्र पर कोविशील्ड की पहली व दूसरी डोज दी जायेगी। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार लोगों को कोवैक्सीन की दूसरी डोज मिलेगी।
इस व्यवस्था का जिलावासी उठाएं लाभ: सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने लोगों से अपील की है कि जिले में ड्राइव थ्रू काउंटर के माध्यम से अधिक से अधिक सुरक्षित रूप से टीका लेने की व्यवस्था की गई है। साथ ही पिंक बूथ पर महिलाओं के लिए टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था का जिलेवासी अवश्य लाभ उठाएं ताकि वे टीका लेकर कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षित रह सके।

स्तनपान कराने से बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता

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-सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के फ़ील्ड आउटरीच ब्यूरो (एफओबी) मुंगेर एवं रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा वेबिनार’ आयोजित
– विश्व स्तनपान सप्ताह पर वेबिनार

मुंगेर, 07 अगस्त| सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के फ़ील्ड आउटरीच ब्यूरो (एफओबी) मुंगेर एवं रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा शनिवार को विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर वेबिनार’ का आयोजन किया गया। वेबिनार में मुंगेर ग्रामीण की सीडीपीओ सुष्मिता, केयर इंडिया के डीटीओ ऑन तबरेज आलम और डीटीओएफ डॉ. नीलू भी हुई शामिल| वेबिनार को संबोधित करते हुए पटना दूरदर्शन केंद्र की उप निदेशक श्वेता सिंह ने कहा कि स्तनपान कराने से बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को भी चहिए कि वो स्तनपान कराने में मां को सहयोग करें| स्तनपान कराते समय धात्री महिलाओं को किसी अन्य काम में नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मां को स्तनपान कराने समय असहज नहीं होना चाहिए और न ही वहां उपस्थित समूह को घूरना चहिए।
बच्चों का पहला टीका जो कि स्तनपान होता है जरूर मिलना चाहिए
वेबिनार को संबोधित करते हुए मुंगेर की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) सुष्मिता ने कहा कि बच्चों का पहला टीका जो कि स्तनपान होता है जरूर मिलना चाहिए । उन्होंने बताया कि कामकाजी महिलाओं को चाहिए कि वे यदि कार्यस्थल पर अपने बच्चों को ले जाने में असमर्थ हैं तो उन्हें अपना दूध स्टोर करके जाना चाहिए ताकि घर में उपस्थित परिवार के सदस्य समय-समय पर बच्चों को पिलाते रहें।
बिहार में 1 घंटे के अंदर 31% बच्चों का स्तनपान कराया जाता
वेबिनार को संबोधित करते हुए केयर इंडिया मुंगेर के जिला तकनीकी पदाधिकारी, आउटरीच एवं न्यूट्रीशन, डॉक्टर तबरेज आलम ने विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बिहार के संदर्भ में बताया कि बिहार में 1 घंटे के अंदर सिर्फ 31% बच्चों का स्तनपान कराया जाता है । वहीं 6 माह तक के 58% बच्चों का स्तनपान कराया जाता है।
सुरक्षित जन्म के साथ स्तनपान पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए
वेबिनार को संबोधित करते हुए केयर इंडिया मुंगेर के जिला तकनीकी पदाधिकारी डॉ. नीलू ने कहा कि सामान्यतः हम लोगों का ध्यान बच्चों के सुरक्षित जन्म पर फोकस रहता है लेकिन स्तनपान पर भी हमें उतना ही ध्यान देना चाहिए। सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान बहुत सारी मां अपने बच्चों को तुरंत दूध नहीं पिला पाती हैं जबकि उन्हें चाहिए कि वह 1 घंटे के अंदर स्तनपान कराएं।
डब्बा बंद दूध का किसी भी तरह से प्रचार- प्रसार करना अपराध
वेबिनार को संबोधित करते हुए आईसीडीएस पटना के अनूप कुमार झा ने विश्व स्तनपान सप्ताह वर्ष 2021 की थीम ” स्तनपान की रक्षा एक साझा जिम्मेदारी” के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने आई एमएस एक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 2 साल तक के बच्चों के लिए किसी भी तरह का खाद्य सामग्री बेचना अपराध है। डब्बा बंद दूध का किसी भी तरह से प्रचार- प्रसार करना अपराध है |आईएमएस एक्ट के तहत स्टोर रोकने के लिए जिला स्तर पर सिविल सर्जन एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी को नियुक्त किया गया है।

वेबिनार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय कि मीडिया इकाई सहित गीत एवं नाटक से जुड़े विभिन्न पंजीकृत दल के टीम लीडर सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित हुए।

वेबिनार का संचालन मुंगेर के क्षेत्रीय प्रचार सहायक सुदर्शन किशोर झा और धन्यवाद ज्ञापन पटना के क्षेत्रीय प्रचार सहायक रीजनल आउटरीच ब्यूरो मोहन ने किया।

युवाओं के बीच शिक्षा एवं रोजगार पर अलख जगा रहे हैं डॉ. अजय 

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-युवा और समाज का मार्ग दर्शन करता है डॉ. अजय का यूट्यूब चैनल
-दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के टेकनिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज़ में हैं सहायक प्रोफ़ेसर
– जीवन के अनुभवों को समाज कल्याण में तब्दील करने की कर रहें हैं कोशिश
पटना: शिक्षा एक ऐसी पुल है जो व्यक्तिगत विकास को सामाज  के साथ जोड़कर एक प्रगतिशील राष्ट्र की मजबूत बुनियाद निर्मित करती है। ऐसे में शिक्षा का गुणवत्तापूर्ण होने के साथ युवाओं द्वारा शिक्षा के सही विकल्प का चुनाव करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके लिए सरकारी प्रयासों के इतर सामुदायिक सहभागिता की जरूत अधिक हो जाती है। डॉ. अजय कुमार सिंह इसी मुहिम को मूर्त रूप देने की कोशिश में जुटे हैं। पेशे से सहायक प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार सिंह नई दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के टेकनिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज़ में कार्यरत हैं। एक तरफ़ वह युवाओं को शिक्षित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया एवं यू ट्यूब जैसे लोकप्रिय माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार की बारीकियों से निः शुल्क अवगत भी करा रहे हैं।
ब्लॉग के माध्यम से बढ़ा रहे हैं जागरूकता:
डॉ. अजय  शिक्षण एवं जनसंचार से काफी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। बिहार के प्रतिष्ठित संस्थान पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्य करने से लेकर बिहार के प्रतिष्ठित अख़बारों में भी इन्होंने काम किया है। पत्रकारिता और जनसंचार के विभिन्न विषयों पर अध्यापन करने का अनुभव इनके लिए युवाओं की जरूरतों को समझने में कारगर साबित हुआ है। वहीं बचपन से ही शिक्षा के नए प्रयोगों को जानने का शौक इन्हें शिक्षा के तात्कालिक जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनने में सहायक साबित हुआ। इसी का नतीजा है कि डॉ. अजय हिंदी और अंग्रेज़ी में अब तक साढ़े तीन सौ से अधिक कविता लिख चुके हैं।
इनके ब्लॉग से जुड़ने के लिए निम्न लिंक का प्रयोग किया जा सकता हैं-
ज्ञान का विस्तार सर्वांगीण विकास की सूत्रधार
डॉ. अजय कहते हैं कि युवाओं को कक्षा में पढ़ाने के दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि ज्ञान का विस्तार ही सर्वांगीण विकास की सूत्रधार है। हर तरह की समस्या का समाधान का एकमात्र रास्ता ज्ञान ही है। सही और तार्किक ज्ञान के अभाव में ही युवाओं का एक वर्ग भटकाव के रास्ते पर है। सही समय पर सही ज्ञान तथा प्रेरणा अगर किसी को मिल जाए तो वह निश्चित ही सफलता के रास्ते पर ध्वज वाहक की भूमिका में  हमेशा आगे बढ़ेगा। भारत युवाओं का सबसे बड़ा देश है। लेकिन गरीबी एवं सही दिशा निर्देश के आभाव के कारण कई युवा अभी भी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाते। उन्होंने बताया कि युवाओं की इस समस्या से प्रेरित होकर उन्होंने समुदाय के युवाओं के साथ जन संवाद स्थापित करने की पहल की है।इसको लेकर वह यू ट्यूब चैनल के जरिए अपने लंबे अनुभव को युवाओं के साथ साझा करने की कोशिश कर रहे हैं।
चैनल तक पहुँचने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं-
चुनौती का सामना करने के लिए प्रेरणा ज़रूरी है
डॉ. अजय अपने अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि आज तक जितने भी महापुरुष हुए सब के जीवन में कोई न कोई प्रेरक बातें ज़रूर हुई है। प्रेरणा ऐसी चीज़ है कि एक बार अगर वह जीवन में प्राप्त हो जाए तो कोई लक्ष्य कठिन नहीं रह जाता। वर्तमान दौर सूचना और जनसंपर्क का दौर है। ज्ञान और जानकारी से माध्यम पटे पड़े हैं। सवाल महत्वपूर्ण यह है कि कोई सवाल का जवाब कितना सरल और सटीक तरीक़े से उत्तर किया गया है समझ उतनी ही गहरी बनती है।  कोई सवाल या तो आसान होता है या मुश्किल होता है। अगर उत्तर मालूम हो तो वह आसान है। अगर उत्तर नहीं मालूम हो तो उससे कठिन कोई सवाल नहीं। इस चैनल का मक़सद कठिन से कठिन सवालों का आसान और तार्किक जवाब तलाशने की कोशिश भी है।
चैनल तक पहुँचने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं-

यूनिटी परिवार की ओर से डॉ. शशि भूषण को जद यू के प्रदेश कार्यकारिणी का बनाया गया प्रदेश सचिव

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– यूनिटी के संयोजक अश्विनी कुमार के आवास परिसर में बैठक का हुआ आयोजन
– सभी तबके के लोगों को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता की गई जाहिर

पटना/ 3, अगस्त-

मंगलवार को ‘यूनिटी परिवार’ की ओर से डॉ शशि भूषण कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यकारिणी में बिहार प्रदेश सचिव के रूप में मनोनीत किये जाने के उपलक्ष्य में एक बैठक का आयोजन यूनिटी के संयोजक अश्वनी कुमार के भूतनाथ रोड स्थित आवास परिसर में हुआ। बैठक की अध्यक्षता प्रो (डॉ) रंगनाथ प्रसाद दिवाकर, पूर्व विभागाध्यक्ष, दर्शन शास्त्र विभाग, पटना वि.वि. ने की।

बैठक के दौरान प्रो. दिवाकर ने कहा कि हमारे संगठन के कई सदस्य आज विभिन्न क्षेत्रों में समाज के विकास के लिए अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। डॉ शशि भूषण कुमार अध्यापन के क्षेत्र में रहते हुए राजनीति में जिस प्रकार से सक्रिय हैं वह आने वाले समय मे प्रदेश की राजनीति को सही दिशा में ले जाएगा।

वंशवाद एवं जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ने की है जरूरत:

बैठक में डॉ कुमार ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश की अन्य पार्टियों में वंशवाद, परिवारवाद एवं जातिवाद का बोलबाला है ऐसे में जनता दल (यूनाइटेड) समाज के सभी तबकों एवं वर्गों को तरजीह देने वाली ऐसी पार्टी है जहां कोई भी व्यक्ति जिसमे समाज के लिये कुछ करने की इच्छा हो और क्षमता हो, उसके लिए इस पार्टी में पर्याप्त और समुचित अवसर उपलब्ध है। यही कारण है कि गैर राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि के होने बावजूद उनके जैसे साधरण व्यक्ति को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केवल उनकी योग्यता के आधार पर प्रदेश कार्यकारिणी में प्रदेश सचिव के पद पर मनोनीत किया है।

वंचितों के लिए चलाई जा रही योजना का करेंगे प्रचार-प्रसार:

इस दौरान यूनिटी परिवार के महासचिव प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने कहा कि डॉ कुमार के नेतृत्व में यूनिटी के सभी सदस्य आने वाले समय मे पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे और प्रदेश की सरकार द्वारा युवाओं, महिलाओं, पिछडो, अतिपिछड़ों, बहुजनों तथा वंचितों के कल्याणार्थ जो विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम चलाई जा रही हैं उसका प्रचार और प्रसार जन जन तक किया जायेगा ताकि उसका लाभ इन योजनाओं के लक्षित समूहों तक पहुँचे।

इस दौरान डॉ सुजीत कुमार निराला, डॉ रितेश गाँधी, श्री राघवेन्द्र नारायण, श्री राजीव रंजन, श्री पवन कुमार, बीपीएससी से चयनित प्रोबेशन पदाधिकारी श्री सच्चिदानंद कुमार, श्री मुकेश कुमार, श्री सुशील राव, श्री सुभाष कुमार, श्री अजय कुमार, श्री प्रिंस पटेल सहित सभी उपस्थित सदस्यों ने जदयू के नवनियुक्त प्रदेश सचिव डॉ शशि भूषण कुमार को सम्मानित एवं अभिनन्दन किया।

अंत मे धन्यवाद ज्ञापन श्री अश्वनी कुमार ने किया।

2011 से 2021 के बीच राज्य की औसत जनंसख्या वृद्धि दर सबसे कम: मंगल पांडेय

• जिलों के 500 स्वास्थ्यकर्मी ज़ूम एवं यूट्यूब के जरिये वर्चुअल रूप से जुड़े
• 70 सालों में राज्य की जनसंख्या हुई 4 गुनी, 1991 से 2001 के बीच सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर
• 5 सालों में कुल प्रजनन दर 3.4 से घट कर हुआ 3
• बालिकाओं की बेहतर शिक्षा परिवार नियोजन के उद्देश्यों को हासिल करने में होगा सहयोगी

पटना-

विश्व भर में भारत ही पहला देश है जिसने जनसंख्या नीति लागू किया। माता एवं बच्चा स्वस्थ एवं पोषित हों तथा प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त संसाधन प्राप्त हो, इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 1952 में देश में परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत हुई जो अभी तक जारी है। उक्त बातें राज्य स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को पटना के एक होटल में विश्व जनसंख्या दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

2011 से 2021 के बीच सबसे कम जनसंख्या वृद्धि दर:

श्री पांडेय ने कहा कि 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य है कि लोग परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रति संवेदनशील होकर इसकी जरूत को समझे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में बिहार की जनसंख्या 2.9 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 12.7 करोड़ हो गयी है। इस तरह से 70 सालों में राज्य की जनसंख्या 4 गुना से अधिक बढ़ी है। जबकि 1991 में राज्य की जनसंख्या 6.45 करोड़ थी, जो 2001 के बढ़कर 8.3 करोड़ हो गयी। इस अवधि के दौरान राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर सबसे अधिक यानी 28.6% रही है। वहीं, 2011 में राज्य की जनसंख्या 10.38 करोड़ थी ,जो अब 2021 में 12.7 करोड़ के आस-पास हुई है। इन 10 सालों में औसत जनसंख्या वृद्धि दर 22.3% ही है,जो इन 70 सालों में सबसे कम वृद्धि दर है।

कुल प्रजनन दर घट कर हुआ 3:
मंगल पांडेय ने कहा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार बिहार कुल प्रजनन दर कम करने में सफ़ल हुआ है। वर्ष 2014-15 में कुल प्रजनन दर 3.4 था, जो 2019-20 में घटकर 3 हो गया है। वहीं, बिहार की नवजात मृत्यु में भी 3 अंकों की कमी आई है. बिहार की नवजात मृत्यु दर जो वर्ष 2017 में 28 थी जो वर्ष 2018 में घटकर 25 हो गयी. अब बिहार की नवजात मृत्यु दर भी देश की नवजात मृत्यु दर(23) के औसत के काफ़ी करीब पहुंच गयी है. वहीं, वर्ष 2014 में बिहार की मातृ मृत्यु दर 165 थी, जो 2018 में कम कर 149 हो गयी. इस तरह 16 पॉइंट की कमी आई है. यह सुधार स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक सुधार का संकेत भी है.

आधुनिक परिवार नियोजन साधनों का इस्तेमाल बढ़ा:
श्री पाण्डेय ने बताया कि कोरोना काल के पहले आधुनिक गर्भनिरोधक साधन( छाया) के इस्तेमाल में बिहार देशभर में भी प्रथम था. इसके लिए क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा प्रशिक्षित भी किया गया. पहले गर्भनिरोधक सूई( अंतरा) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही उपलब्ध ही था, जो अब राज्य के 8500 उप-स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी उपलब्ध कराया गया है. उन्होंने बताया कि बालिकाओं की शिक्षा को बेहतर करने से परिवार नियोजन कार्यक्रम को अधिक सफ़ल बनाया जा सकता है. इसलिए सात निश्चय पार्ट-2 के तहत अब अविवाहित इंटर पास बालिकाओं को 10,000 रूपये की जगह 25000 रूपये एवं स्नातक पास विवाहित एवं अविवाहित बालिकाओं को 25,000 रूपये की जगह 50,000 रूपये दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन को सफल बनाने के लिए समुदाय के सभी वर्ग को भागीदारी करनी होगी, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या परिवार, समुदाय, राज्य एवं देश के प्रगति में बाधक है.

परिवार नियोजन के सूचकांकों में हुयी वृद्धि:
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि विगत 5 सालों में राज्य के परिवार नियोजन के सूचकांकों में सुधार हुआ है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2014-15 में बिहार में 24.1% लोग ही परिवार नियोजन के किसी साधन का इस्तेमाल करते थे, जो वर्ष 2020-21 में बढ़कर 55.8% हो गया है. वहीं, अनमेट नीड( ऐसे योग्य दम्पति जो परिवार नियोजन के साधन इस्तेमाल करना चाहते हैं पर उन्हें साधन उपलब्ध नहीं हो पाता है) भी 5 सालों में 21.2% से कम कर 13.6 % हो गयी है. साथ ही अर्ली मैरिज एवं 15-19 वर्ष में माँ बनने वाली किशिरियों की संख्या में भी सुधार हुआ है.

कोविड काल में भी परिवार नियोजन पर दिया गया ध्यान:
केयर इंडिया के पार्टी ऑफ़ चीफ़ सुनील बाबू ने बताया कि इस वर्ष के विश्व जनसंख्या दिवस की थीम ‘ कोविड-19 महामारी का प्रजनन क्षमता पर प्रभाव’ रखा गया है. इस दिशा में राज्य में कोरोना काल में भी परिवार नियोजन कार्यक्रम पर ध्यान दिया गया था. कोरोना काल के दौरान प्रवासियों में छाया गर्भनिरोधक गोली के वितरण से इसके इस्तेमाल में भी वृद्धि देखी गयी. पहले 18 साल तक की किशोरियां पहले बच्चे को जन्म देती थी, जो अब बढ़कर 19 साल हो गयी है.
इस दौरान सभी जिले के सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी सहित लगभग 500 लोग ज़ूम एवं यूट्यूब के वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे. कार्यक्रम में परिवार नियोजन के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सज्जाद, केयर इण्डिया के पद्मा बुगीनैनी, राजेश, संजय एवं सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

आशा कार्यकर्ताओं को सुरक्षित गर्भपात के बताए गए तरीके

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-नाथनगर रेफरल अस्पताल में असुरक्षित गर्भपात को लेकर दिया गया परामर्श
-कोरोना काल में सुरक्षित गर्भसमापन को लेकर हो रही समस्याओं पर हुई चर्चा

भागलपुर, 8 जुलाई-

कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसमें सुरक्षित गर्भपात भी प्रमुख समस्या रही है। इसे लेकर गुरुवार को नाथनगर रेफरल अस्पताल में परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत बैठक आयोजित की गई। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं को आईपास डेलवपमेंट फाउंडेशन के नरेश कुमार आर्या ने सुरक्षित गर्भसमापन और गर्भपात कानून के बारे में जानकारी दी। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनुपमा सहाय, बीसीएम किरण कुमारी और अस्पताल प्रबंधक अपर्णा कुमारी मौजूद थी।
नरेश कुमार ने कहा कि कोरोना काल में कई महिलाएं अनचाहे रूप से गर्भवती हो गईं। कोरोना के कारण वह अपना सुरक्षित गर्भपात भी नहीं करा पायीं। सरकारी अस्पतालों में मिल रही सुविधाओं से वह वंचित रह गईं। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इससे वह सुरक्षित तरीके से अपना गर्भपात करा सकेंगी। इसे लेकर समाज में जागरूकता लानी होगी। इस पर सभी लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।
20 सप्ताह तक गर्भ को कानूनी तौर पर समाप्त करने की है इजाजतः
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की कानूनी तौर पर इजाजत है। 1971 में बने इस कानून को लेकर हालांकि कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। सबसे पहली शर्त है सुरक्षित गर्भपात। इसे लेकर परिजनों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बिचौलिये के संपर्क में नहीं पड़ना चाहिए। समस्या होने पर पास के सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में कानूनी तौर पर निःशुल्क गर्भपात की सुविधा है। विशेष परिस्थिति पैदा होने पर एंबुलेंस के जरिये महिला मरीज को अच्छी जगह भेजने की व्यवस्था मौजूद है। 12 सप्ताह तक एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 12 से 20 सप्ताह के अंदर तक दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सरकारी अस्पताल में गर्भपात होनी चाहिए।

असुरक्षित गर्भपात से आठ प्रतिशत महिलाओं की हो जाती है मौतः
भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में आठ प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका हो तो तत्काल आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए। या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो तत्काल गर्भपात का निर्णय लेना चाहिए। अगर गर्भ नौ सप्ताह तक का है तो गोलियों से भी गर्भपात हो सकता है। गर्भपात जितना जल्द कराया जाता है, उतना ही सरल और सुरक्षित रहता है। यदि 12 हफ्ते या फिर तीन महीने से ज्यादा समय के गर्भ का गर्भपात कराना हो तो घबराना नहीं चाहिए। इसके लिए सदर अस्पताल और मायागंज अस्पताल का रुख करना चाहिए। गर्भपात के साथ तत्काल गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करना चाहिए। गर्भपात और गर्भधारण के बीच छह महीने का अंतराल होना जरूरी है।

‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम का हुआ वर्चुअल लाँच, संवरेगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का शैक्षणिक स्तर

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• ईसीसीई विषय पर सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स करेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
• नामांकन के लिए बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय से भरे जाएंगे ऑनलाइन फॉर्म
• पंजीकरण शुल्क को राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा वहन

पटना:
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की शैक्षणिक स्तर में सुधार लाने की दिशा में अब नयी पहल की गयी है. इसके लिए राज्य में ‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम की शुरुआत हुयी है, जिसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ई.सी.सी.ई.( प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) विषय पर 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स एवं और 1 साल का डिप्लोमा कोर्स कराया जाएगा. गुरुवार को राज्य के अपर मुख्य सचिव,समाज कल्याण विभाग ने ‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम की वर्चुअल शुरुआत की |
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का होगा क्षमता वर्धन
समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने बताया कि सुनंदिनी’ कार्यक्रम की शुरुआत से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का शैक्षणिक उन्नयन के साथ उनका क्षमता वर्धन भी होगा. ‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सर्टिफिकेट कोर्स एवं डिप्लोमा कोर्स करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी. इससे बड़ा लाभ समुदाय को मिलेगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की योग्यता एवं क्षमता में बढ़ोतरी होने से समाज कल्याण की मूल अवधारणा को फलीभूत करने में मदद मिलेगा तथा इस कोर्स के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के शैक्षणिक उत्थान एवं उनके कौशल में विकास संभव हो सकेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के आलोक में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के शैक्षणिक स्तर के उन्नयन के लिए आई.सी.डी.एस., समाज कल्याण विभाग एवं बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबीओएसई), के संयुक्त प्रयास से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता के सुदृढ़ीकरण एवं ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने के लिए ‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है.
निदेशक,समाज कल्याण निदेशालय श्री राजकुमार ने बताया समाज कल्याण निदेशालय अंतर्गत संचालित सभी बाल देखरेख गृहों में अवस्थित बच्चों के शैक्षणिक स्तर में विकास हेतु भी बी.बी.ओ.एस.ई द्वारा विशेष नामांकन कार्यक्रम की शुरुआत की गई है |इस कार्यक्रम अंतर्गत कक्षा 1- 8 तक की पढ़ाई हेतु 3 स्तरों की पाठयपुस्तकों को विकसित किया गया है | समाज कल्याण निदेशालय द्वारा संचालित पर्यावेक्षण एवं बाल सुधार गृह में आवासित करीब 700 बच्चों को बी.बी.ओ.एस.ई के माध्यम से पत्राचार कोर्स में नामांकित किया गया है.
आई.सी.डी.एस,निदेशालय के निदेशक आलोक कुमार ने बताया बिहार में लागू आई.सी.डी.एस कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती, धात्री एवं किशोरियों के स्वास्थ्य जांच, पूर्ण पोषण, स्कूल पूर्व शिक्षा (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा प्रदान करके बच्चे के संपूर्ण विकास करना है. उन्होंने कहा राज्य में कुल 114718 स्वीकृत आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिनके माध्यम से लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान की जाती हैं. उन्होंने बताया कि ‘सुनंदिनी’ कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स कर सकेंगी, जिससे प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी .
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आगे की पढाई के लिए किया जाएगा प्रेरित:
बी.बी.ओ.एस.ई के कार्यकारी पदाधिकारी दिनेश कुमार बिष्ट ने बताया वर्तमान में आंगनवाड़ी सहायिकाओं के चयन हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8 वीं पास तथा सेविकाओं के लिए 10वीं/मैट्रिक पास अथवा समकक्ष है। बी.बी.ओ.एस.ई के माध्यम से राज्य में कार्यरत न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता वाली इच्छुक सहायिकाओं को 10वीं / मैट्रिक तथा सेविकाओं को 12 वीं पास करने के लिए प्रेरित करेगा.
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय से भरे जाएंगे ऑनलाइन फॉर्म:
सुनंदिनी’ कार्यक्रम अंतर्गत शुरू किए गए सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स में निबंधन/ नामांकन के लिए संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय से ऑनलाइन फॉर्म भरे जाएंगे. बताते चलें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के आलोक में सभी आंगनवाड़ी सेविकाओं को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) विषय पर सर्टिफिकेट /डिप्लोमा कोर्स अनिवार्य किया गया है. बी.बी.ओ.एस.ई. से संबंधित कोर्स करने के लिए यह विशेष प्रावधान किया जा रहा है ताकि राज्य में कार्यरत सेविकाएं/सहायिकाएं यह कोर्स आसानी से कर सकें.
पंजीकरण शुल्क राज्य सरकार द्वारा होगा वहन:
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं के ई.सी.सी.ई. विषय पर सर्टिफिकेट/ डिप्लोमा कोर्स में पंजीकरण शुल्क बी.बी.ओ.एस.ई द्वारा 1500 रूपये प्रति शिक्षार्थी निर्धारित की गयी है. लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं के लिए ई.सी.सी.ई. विषय पर सर्टिफिकेट/ डिप्लोमा कोर्स में पंजीकरण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा.
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आगे की पढाई के लिए किया जाएगा प्रेरित:
वर्तमान में आंगनवाड़ी सहायिकाओं के चयन हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8 वीं पास तथा सेविकाओं के लिए 10वीं/मैट्रिक पास अथवा समकक्ष है। बी.बी.ओ.एस.ई के माध्यम से राज्य में कार्यरत न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता वाली इच्छुक सहायिकाओं को 10वीं / मैट्रिक तथा सेविकाओं को 12 वीं पास करने के लिए प्रेरित करेगा.
कोर्स मैटेरियल बाल विकास पदाधिकारी कार्यालय में होगा उपलब्ध:
इस पाठ्यक्रम में निबंधन / नामांकन के लिए संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय अध्धयन केंद्र के रूप में काम करेगा एवं संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी नोडल पदाधिकारी होंगी. पंजीकृत कोर्स मैटेरियल बी.बी.ओ.एस.ई के माध्यम से बाल विकास परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को कोर्स को पूरा करने में मदद के लिए बी.बी.ओ.एस.ई के माध्यम से ससमय ऑनलाइन संपर्क कक्षा का आयोजन किया जाएगा. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता का पंजीकरण www.bbose.org वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से कराया जाना है. ऑनलाइन फॉर्म भरने हेतु विस्तृत जानकारी बी.बी.ओ.एस.ई के वेबसाइट पर भी उपलब्ध करायी गयी है

7 लाख से अधिक लोग अब तक स्वस्थ हो चुके हैं : मंगल पांडे,स्वास्थ्य मंत्री,बिहार

• राज्य में कोरोना रिकवरी दर 98.30 फीसदी
• स्वास्थ्य मंत्री ने ट्वीट कर साझा की है जानकारी
• कोविड 19 टीकाकरण से संबंधित लिंक भी किए हैं साझा
पटना-.

राज्य में कोविड -19 टीकाकरण को लेकर महाभियान जोर -शोर से चल रहा है. सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक बड़े पैमाने पर टीकाकरण किया जा रहा है. टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन स्तर पर लोगों को जागरूक करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. यहाँ तक कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी अपने स्तर पर लोगों को टीकाकरण को लेकर जागरूक और प्रेरित करने में सक्रिय हैं.वे स्वयं ट्वीट करके टीकाकरण से संबंधित जानकारियाँ साझा कर रहे हैं .गुरुवार को भी स्वास्थ्य मंत्री ने ट्वीट करके कोविड -19 टीकाकरण के पंजीकरण के लिये लिंक साझा किया है .इसी ट्वीट में उन्होंने उस लिंक को भी साझा किया है जिससे लोग अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. उनके ट्वीट से इस बात की भी सूचना मिल सकती है कि कोविड 19 के इलाज के लिए अस्पतालों में बेड की उपलब्धता क्या है.साथ हीं उन्होंने उन टेस्टिंग सेन्टर के बारे में भी लिंक साझा किया है जो आपके घर के नजदीक में है. आम लोगों की सहूलियत के लिया स्वास्थ्य मंत्री ने आपके नजदीकी वैक्सीनेशन साइट का लिंक भी अपने ट्वीट में दिया है जहां आसानी से जाकर हम आप अपना टीकाकरण करवा सकते हैं.

लोग आसानी से करा सकते हैं शिकायत दर्ज:
कोविड 19 को लेकर तमाम तरह की जानकारी हासिल करने और अपनी शिकायत दर्ज करने के उन्होंने वह लिंक भी साझा किया है जहां हमें उससे संबंधित फोन नंबर मिलेगा. स्वास्थ्य मंत्री के साथ स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता का नतीजा है कि टीकाकरण के मामले में बिहार लगातार रिकार्ड बना रहा है .खासकर पिछले 7 दिनों में टीकाकरण ने काफी रफ्तार पकड़ी है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बुधवार की रात तक राज्य में 1.5 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है. जानकारी के मुताबिक हर दिन राज्य में 3.71 लाख लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है. गत 16 से 22 जून के बीच हीं 25.98 लाख ने वैक्सीन लगवायी है .

7 लाख से अधिक कोविड मरीज स्वस्थ हो चुके –

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अपने एक ट्वीट से यह जानकारी भी साझा की है कि सूबे में कोविड 19 से स्वस्थ्य मरीजों का आंकड़ा 7 लाख से पार कर चुका है. उनके मुताबिक अब तक 7,08,231 लोग स्वस्थ हो चुके हैं .बुधवार को उन्होंने ट्वीट किया था कि पिछले 24 घंटे में 398 मरीज स्वस्थ हो गए हैं .फिलहाल राज्य में कोरोना के कुल ऐक्टिव मरीज महज 2704 हीं हैं .इसके साथ हीं राज्य में रिकवरी रेट 98.30 हो गई है. यह राज्य के लोगों के लिया एक शुभ संकेत है. दूसरी ओर उनके इन ट्वीट पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा कोविड -19 को लेकर साझा किया गए लिंक-

1. कोविड -19 टीकाकरण पंजीकरण लिंक-
Selfregistration.cowin.govt.in
2. आपके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र –
Tiny.one/healthcentre
3. कोविड -19 से संबंधित जानकारी एवं शिकायत हेतु डायल करें – tiny.one/callnow
4. कोविड -19 हेतु बेड की उपलब्धता covid19health.bihar.gov.in/DailyDashboard…
5. आपके नजदीकी कोविड 19 टेस्टिंग सेंटर tiny.one/testingcentre
6. आपके नजदीकी वैक्सीनेशन साइट – tiny.one/vaccinationsite