टेस्ट, ट्रैक एवं ट्रीट की रणनीति कोरोना के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा हथियार

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भारत सरकार के गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी मुख्य सचिव को लिखा पत्र

कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए टीकाकरण व जांच संख्या बढ़ाने पर बल

कोविड संक्रमण के प्रसार के प्रति सजग व सर्तक रहने के के लिए किया आगाह

पटना, 19 जून: कोविड 19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों में कोविड संक्रमण के मामलों में इजाफा देखने को मिला है. कोविड संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर कई राज्यों ने लॉकडाउन लगाया ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके. अब लॉकडाउन हटा लिया गया है अथवा कुछ विशेष नियमों के साथ प्रतिबंध को ढ़ीला किया गया है. लॉकडाउन हटा लिये जाने के कारण लोगों की भीड़ बाजार में बढ़ी है. इससे संक्रमण के प्रसार की संभावना बढ़ सकती है. इस दिशा में भारत सरकार के गृह सचिव ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को कोविड अनुरूप व्यवहारों का अनुश्रवण तथा नियमित जांच व आवश्यक इलाज सुविधा मुहैया कराते हुए संक्रमण के प्रति सर्तक रहने के लिए कहा है.

गृह सचिव ने मुख्य सचिवों को लिखा पत्र:

भारत सरकार के गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों व संघ प्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र के माध्यम से कहा है, हालांकि विभिन्न राज्यों में कोविड के एक्टिव मामलों में तेजी से कमी आयी है और इसे देखते हुए लॉकडाउन के नियमों में लोगों को छूट दी है एवं कोविड संक्रमण के मामलों की जमीनी स्तर पर स्थितियों का जायजा लेते हुए प्रतिबंध के नियमों को आसान किया गया है. लेकिन राज्यों व संघ प्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना है कि लॉकडाउन हटाने से पूर्व सभी तरह की प्रक्रियाओं की ध्यानपूर्वक जांच कर ली गयी है।

टेस्ट,ट्रैक एवं ट्रीट के नियमों के पालन पर बल:
गृह सचिव ने कहा है प्रतिबंधों को हटाने के साथ यह महत्वपूर्ण है कि कोविड अनुरूप व्यवहार का अनुपालन, कोविड टीकाकरण तथा टेस्ट—ट्रैक—ट्रीट के नियमों का अनुपालन किया जा रहा हो. संक्रमण का प्रसार न हो इसके लिए कोविड अनुरूप व्यवहारों का लगातार अनुश्रवण किया जाता रहे. कोविड अनुरूप व्यवहारों में मास्क का इस्तेमाल, हाथों की सफाई, शारीरिक दूरी तथा कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन आदि नियम शामिल हैं. गृहसचिव ने आगाह किया है कि कई राज्यों में लॉकडाउन के हटने से बाजार आदि में पुन: लोगों की भीड़ जमा होने लगी है. इस दौरान कोविड अनुरूप व्यवहारों के नियमों का पालन नहीं हो रहा है. इसलिए यह जरूरी है कि इन नियमों के पालन हर हाल में करवाया जाना सुनिश्चित हो. वहीं संक्रमण के लंबे समय तक रहने की संभावना के कारण टेस्ट—ट्रैक—ट्रीट की रणनीति को प्रभावी बनाया जाना महत्वपूर्ण है. इसके लिए कोविड संक्रमण की जांच की संख्या में कमी नहीं आये तथा संक्रमण के विभिन्न लक्षणों पर नजर रखा जाये. साथ कोविड 19 टीकाकरण की गति को बढ़ाया जाये ताकि कोरोना की बढ़ती चेन को रोका जा सके।

टीकाकरण कार्य में बिहार शीर्ष पर, 24 घंटे में रिकॉर्ड 6 लाख से अधिक हुए टीकाकरण

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• स्वास्थ्य मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी, सबसे अधिक टीका करने वाले राज्य बना बिहार

• टीकाकरण कार्य के साथ रैपिड एंटीजेन टेस्ट व आरटीपीसीआर जांच को दी प्राथमिकता

पटना-:

कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए हो रहे टीकाकरण कार्य में बिहार ने उल्लेखनीय कार्य किया है. अब यह देशभर में एक दिन में सबसे अधिक टीकाकरण करने वाला पहला राज्य हो गया है. इसकी जानकारी राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से दी है. स्वास्थ्य मंत्री ने टिवटर हैंडल से जानकारी देते हुए लिखा है कि बिहार एक दिन में सर्वाधिक टीकाकरण करने वाले देश का पहला राज्य बन गया है. केंद्र सरकार द्वारा टीके की आपूर्ति बढ़ाने एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण कार्य तेज गति से कर रहा है. बिहार 24 घंटे में रिकॉर्ड 6 लाख, 62 हजार 507 लोगों को टीकाकृत कर सभी राज्यों से आगे हैं.

विभिन्न राज्यों में हो रहे कोविड टीकाकरण कार्य में बिहार जहां शीर्ष राज्य है, वहीं उत्तरप्रदेश दूसरे स्थान पर है. कोविड टीकाकरण कार्य में शीर्ष दस राज्यों में मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं. बुधवार तक उत्तरप्रदेश में एक दिन में जहां 3 लाख 60 हजार 382 लोगों का टीकाकरण किया गया, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या 3 लाख 35 हजार 608 रहा. तमिलनाडु में 3 लाख 21 हजार 792, गुजरात में 2 लाख 48, 381, महाराष्ट्र में 2 लाख 34 हजार 352, कर्नाटक में 1 लाख 94 हजार 703, तेलंगाना में 1 लाख 72 हजार 496, ओडिशा में 1 लाख 51 हजार 666 तथा पश्चिम बंगाल में 1 लाख 19 हजार 271 रहा. अन्य राज्यों में एक दिन में हुए टीकाकरण की संख्या महज पांच अंकों में ही रही.

नियमित अनुश्रवण कार्य से बेहतर परिणाम मिले:

राज्य सरकार द्वारा कोविड टीकाकरण को लेकर नीतिगत फैसले लेने और उसके सफल क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के कंधे पर रही है. इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं. राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार द्वारा इसके अनुश्रवण तथा टीकाकरण के क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तर पर सिविल सर्जन को लगातार गाइडलाइन के माध्यम से आवश्यक कार्य किये जाने के लिए निर्देश दिये जाते रहे हैं. टीकाकरण कार्य के साथ साथ संक्रमण की पुष्टि के लिए अधिक से अधिक लोगों के आरटीपीसीआर व एंटीजेन टेस्ट को भी प्राथमिकता दी गयी है

100 लोगों को पड़े कोरोना के टीके

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शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चार केंद्रों पर हुआ टीकाकरण
30 मिनट की निगरानी के बाद सभी को जाने दिया गया घर

बांका, 14 जून-

जिले में कोरोना उन्मूलन को लेकर टीकाकरण अभियान लगातार चल रहा है। सोमवार को बारिश के मौसम में भी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत चार केंद्रों पर 100 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए। सभी लाभुकों को 30 मिनट की निगरानी के बाद घर जाने दिया गया। टीकाकरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया गया। टीका को लेकर लोगों के मन में जो भ्रम है, उसे दूर किया गया। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के मन में टीका को लेकर जो दुविधा है, उसे दूर किया गया। इस काम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। लोगों को घरों से टीकाकरण केंद्र पर लाने में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अपी भूमिका निभा रहे हैं।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि डीएच, बांका में 45 साल से अधिक उम्र के 10 लोगों को कोरोना के टीके पड़े। वहीं पीएचसी बांका में 18 साल से अधिक उम्र के 30 और 45 साल से अधिक उम्र के 20 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए। वहीं शहरी टीका एक्सप्रेस के जरिये 45 साल से अधिक उम्र के 30 लोगों का टीकाकरण हुआ। आरबीएसके की टीम के जरिये पंचायत टीका एक्सप्रेस से दोमुंहन पंचायत में 45 साल से अधिक उम्र के 10 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए।
युवाओं की बढ़ रही भागीदारीः डॉ. चौधरी ने कहा कि टीकाकरण में युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ-साथ 45 साल से अधिक उम्र के लोगों का भी अधिक से अधिक टीकाकरण करना है। इसे लेकर जागरूकता कार्यक्रम पर फोकस किया जा रहा है। हालांकि 45 साल से अधिक उम्र वाले भी लोग टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं, लेकिन इसकी और बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। टीकाकरण के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम में इस पर ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम जागरूकता अभियान के दौरान लगातार इस पर काम कर रही है। जारूकता अभियान और टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाक के साथ आरबीएसके और जीविक की टीम ने भी सहयोग किया। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी जागरूकता अभियान में भाग ले रहे हैं।
कोरोना के मामले कम हुए पर सतर्कता जरूरीः डॉ. चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के प्रयास और लोगों के सहयोग से कोरोना के मामले कम हो गए हैं। अब तो न के बराबर मरीज मिल रहे हैं, लेकिन अभी भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। घर से बाहर जाते वक्त अवश्य तौर पर मास्क पहनें। भीड़भाड़ से बचें। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करें। घर में भी इन बातों का पालन करें। कोरोना की चेन तोड़ने के लिए टीकाकरण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना। ऐसा करते रहने से लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। साथ ही दूसरे लोगों को भी संक्रमित नहीं करेंगे।

वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन ने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया

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नईदिल्ली-

वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन ने एसडीएमसी वॉयज प्राइमरी स्कूल छतरपुर मंदिर परिसर में कोरोना योद्धा अवार्ड का आयोजन किया। वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन के द्वारा ICMR के Spice Health मे कोविड-19 आर.टी. -पी.सी.आर. मोबाईल परीक्षण प्रयोगशाला मे कार्यरत सभी चिकित्सक, लैब टेक्निशियन, गार्ड व हाऊस कीपिंग स्टाफ को 24 घंटे फ्रंट लाईन मे सेवा देने के लिए परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद कोरोना योद्वा अवार्ड से सम्मानित करते हौसला बढाते संस्था के मानद् परामर्शक समाज सुधारक संजय भाई,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समाजसेवी के.एल.गुप्ता, प्रख्यात विचारक ई.सूर्यकान्त शुभचिंतक, युवा चिन्तक हरीश शर्मा, युवा समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा एवं युवा व्यवसायी सुभाष यादव के गरिमामय उपस्थिति मे किया गया।
इस मौके पर सोशल गुरु ने सभी कोरोना योद्धाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि जितनी आपकी तारीफ की जाए उतनी कम है। जब लोग घरों में बंद थे आपने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवारत रहे तभी हमलोगं सुरक्षित भी रहे। आपकी साहस और होसले को सलाम
इस मौके पर प्रख्यात विचारक ई सूर्यकांत शुभचिंतक ने कहा कि आज कोरोना योद्धाओं के जैसे हर फील्ड में ऐसे युवाओं की जरूरत है। जिस प्रकार से कोरोना योद्धाओं ने देश में कार्य किया है उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। आपको सम्मान देकर सस्था भी सम्मानित हुआ है।
इस मौके पर वीर अब्दुल हमीद फाउडेंशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के एल गुप्ता ने कहा कि परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का अवार्ड कोरोना योद्धाओं को देकर आज काफी खुशी हो रही है। देश सेवा में आप लोगों के द्वारा किए गए कार्यों की प्रंशसा होनी ही चाहिए। आपके किए गए कार्यों से आज देश आगे बढ़ रहा है हम इस संकट से भी आपकी सहायता से ही निकल रहे हैं।
इस मौके पर प्रयोगशाला के सीनियर साईन्टिफिक आफिसर डा.रिचा एवं डा.तनजिल ने कहा कि आपलोग पहली संस्था है,जो हमलोगों के दिन-रात सेवा को प्रोत्साहित करने के लिए हमारे बीच आए है।
यह कोरोना वारियर्स अवार्ड समारोह मे सभी लोग एक -दुसरे के अभिव्यक्ति से भावुक का क्षण देखने को मिला।

वैश्विक सेवा संस्था ‘लायन्स क्लब इंटरनेशनल’द्वारा प्रो. डॉ. संजय चोरडिया को मानद सदस्यत्व प्रदान

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पुणे : सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया को वैश्विक स्तर की सबसे बड़ी सेवा संस्था लायन्स क्लब इंटरनॅशनल द्वारा मानद सदस्यत्व प्रदान किया गया. ‘लायन्स क्लब’ के पूर्व प्रांतपाल डॉ. चंद्रहास शेट्टी ने चोरडिया को सभासदत्व का मानपत्र प्रदान किया. इस समय संगणक तज्ज्ञ व रोटरी क्लब इंटरनॅशनल के पूर्व प्रांतपाल डॉ. दीपक शिकारपूर, ‘सूर्यदत्ता’ की उपाध्यक्षा व सचिव सुषमा चोरडिया आदी उपस्थित थे. लायन्स क्लब इंटरनॅशनल के शताब्दी महोत्सव में भी डॉ. चोरडिया को ‘लायन्स सेंटिनिअल पुरस्कार’ और ‘लायन्स समाजरत्न पुरस्कार’ देकर सम्मानित किया गया था.

सदस्यत्व स्वीकार करने के बाद डॉ. चोरडिया ने कहा, “पिछले दो दशक से सूर्यदत्ता ग्रुप छात्रों का जीवनमान ऊँचा करने और उन्हें अच्छी शिक्षा देने का काम कर रही है. अकैडमिक के साथ छात्रों की सर्वांगीण प्रगति के लिए हम कई सरे उपक्रम ले रहे है. ग्लोबल लेव्हल के कई यूनिव्हर्सिटीज के साथ हम जुड़े हुए है. जिनके माध्यम से अभिनव उपक्रम हम छात्रों को पढ़ा सकते है. छात्रों रोजगाराभिमुख शिक्षा मिलने के लिए हम अलगअलग वर्कशॉप्स, सेमिनार्स व अन्य उपक्रमों को आयोजित करते है. उनके मन में अपना परिवार, देश के प्रति आदरभाव जागृत कर के उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने के हम प्रयास कर रहे है. सूर्यदत्ता संचालित सभी संस्थाए आयएसओ ९००१-२०१५ एनव्हीटी-क्यूसी-यूएसए सह प्रमाणित हुई है.”

डॉ. चंद्रहास शेट्टी ने कहा, “सूर्यदत्ता शिक्षण संस्था के माध्यम से शिक्षण व सामाजिक क्षेत्र में प्रा. डॉ. चोरडिया ने उल्लेखनीय कार्य किया है. सभी स्तर आये छात्रों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दने के उनका प्रयास सराहनीय है. उनका सामाजिक व शिक्षण क्षेत्र का योगदान देखकर लायन्स क्लब इंटरनॅशनलद्वारा उन्हें यह मानद सभासदत्व प्रदान किया जा रहा है. आनेवाले समय में सूर्यदत्ता ग्रुप व लायन्स क्लब इंटरनॅशनल के संयुक्त तत्वाधान में अनेक उपक्रम आयोजित किये जायेंगे.”

डॉ. दीपक शिकारपूर ने डॉ. संजय चोरडिया का अभिनन्दन करते हुए कहां की, सामाजिक जाणीव और जागतिक स्तर का शिक्षण उपलब्ध करने के लिए प्रयास कर रहे डॉ. चोरडिया का यह उचित सन्मान है. विश्व स्तर की संस्था लायन्स क्लब के माध्यम से उन्हें अपना सामाजिक कार्य और भी बढ़ने के लिए एक अवसर प्राप्त हुआ है.”

‘वन अर्थ-वन हेल्थ’-मोदी

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कोरोना महामारी के दौर में कार्बिस बे में सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं का समूह जी 7 को आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटली संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुनिया को ‘वन अर्थ-वन हेल्थ’ का संदेश दिया। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस दौरान पीएम मोदी की तारीफ की और उनके इस विचार को अपना समर्थन दिया। जानकारी के अनुसार शनिवार और रविवार के दिन कुल तीन सत्रों को पीएम मोदी द्वारा संबोधित किया जाना है। इनमें से पहला सत्र आज आयोजित हुआ।
गौरतलब है कि G7 दुनिया के सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके अंदर दुनिया के शक्तिशाली देश हैं। आज भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को भी इसके अंदर आउटरीच सेशन के अंतर्गत इनवाइट किया गया। इस वर्ष स‍म्मेकलन की थीम ‘Build Back Better’ है। इस बार के सम्मेिलन में थीम के आधार पर कोरोना वायरस महामारी के बाद अगली महामारी के लिए खुद को तैयार रखने जैसे मुद्दों पर ध्यारन दिया जाएगा।

सचिवालयकर्मियों एवं उनके परिवारजनों का हुआ टीकाकरण

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• स्वास्थ्य, पशुपालन एवं मत्सयपालन, गन्ना उद्योग एवं नगर विकास एवं आवास विभाग के कर्मी हुए शामिल
• राज्य सरकार द्वारा सभी को टीकाकृत करने की मुहीम का हिस्सा
• लोगों में दिखा टीकाकरण को लेकर उत्साह

पटना/ 12 जून-

राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी नागरिकों को टीकाकृत करने की मुहीम पूरे राज्य में जारी है. राज्य भर में 18 वर्ष एवं 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को टीकाकृत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में शनिवार को सचिवालय में सचिवालयकर्मियों एवं उनके परिवारजनों के लिए विशेष टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया. इस टीकाकरण सत्र में सरकार के चार विभाग स्वास्थ्य, पशुपालन एवं मत्सयपालन, गन्ना उद्योग एवं नगर विकास एवं आवास विभाग के कर्मी तथा उनके परिवारजनों को टीकाकृत किया गया.

राज्य सरकार द्वारा सभी को टीकाकृत करने की मुहीम का हिस्सा:
स्वास्थ्य विभाग में अंडर सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिन्हा ने बताया राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग राज्य के ज्यादा से ज्यादा योग्य नागरिकों को टीकाकृत करने के लिए संकल्पित है. इसी क्रम में शनिवार को राज्य सचिवालय में टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया. स्वास्थ्य, पशुपालन एवं मत्सयपालन, गन्ना उद्योग एवं नगर विकास एवं आवास विभाग के कर्मी तथा उनके परिवारजनों को टीका लगाया गया. आगे अन्य विभाग के कर्मी एवं उनके परिवारजनों को भी टीकाकृत किया जायेगा. सत्र में शामिल लोगों को पहला और दूसरा दोनों डोज देने की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.
दोनों डोज है जरुरी:
अंडर सेक्रेटरी ने बताया कोरोना के खिलाफ सुरक्षा चक्र मजबूत करने के लिए वैक्सीन के दोनों डोज लेना आवश्यक है. दोनों डोज लेने के बाद ही शरीर में कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. विभाग द्वारा लगातार इसके लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है.
लोगों में दिखा टीकाकरण को लेकर उत्साह:
सचिवालय में आयोजित टीकाकरण सत्र में कर्मी एवं उनके परिवारजनों के बीच कोविड टीकाकरण को लेकर खासा उत्साह देखा गया. ज्यादातर कर्मियों के सभी योग्य परिजन इस टीकाकरण सत्र में शामिल हुए और टीकाकरण करवाकर संक्रमण से सुरक्षा की ओर अपना कदम बढ़ाया. युवा लाभार्थियों ने भी बढ़ चढ़कर इस अभियान में हिस्सा लिया और प्रथम डोज लेने वालों ने तय समय पर दूसरा डोज लेने की प्रतिबद्धता जताई.
ऑन स्पॉट निवंधन की थी सुविधा:
सचिवालयकर्मी और उनके परिवारजनों के लिए आयोजित इस टीकाकरण सत्र में ऑन स्पॉट निवंधन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. लाभार्थी अपने पहचान पत्र की प्रतिलिपि दिखकर टीका लगवाते दिखे. सभी लाभार्थियों के लिए बैठने एवं जलपान के लिए समुचित व्यवस्था की गयी थी.

पर्यावरण बचाने के लिए 55 देशों की यात्रा, पांच साल में 60,000 किमी की पैडलिंग

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वर्तमान के समय में पर्यावरण एक बहुत बड़ा मुद्दा है। इसे जिस रफ्तार से खराब किया जा रहा है उसी रफ्तार से बचाने की भी मुहिम जोरो पर है। क्योंकि यह दुनिया सुरक्षित रहेगी तभी हम भी सुरक्षित रहेंगे। इस बात को डॉ राज ने समझा और लोगों को समझाने की भी ठानी तो यह मुहिम पर्यावरण बचाने की एक बहुत बड़ी मुहिम में शामिल हो गई। पिछले पांच सालों में एक एनवायरमेंट एक्टिविस्ट के रूप में डॉ राज ने पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल से की 55 देशों की यात्रा, पांच साल में 60,000 पैडलिंग करके यह साबित किया कि हौसला हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है।

 

शुरुआत, साल 2016 में साइकिल यात्रा से हुई। क्योंकि साईकल से चलने में किसी भी तरह का कोई प्रदूषण नहीं होता है। यह एक परिवहन का ऐसा साधन है जिसे हर आम आदमी अफ़्फोर्ड कर सकता है। साईकल बाबा बताते हैं कि इससे चलने में ना तो आपकी स्पीड बहुत ज्यादा होती है और ना ही बहुत कम। मतलब यह कि आप साईकल से चलते हुए भी संवाद कर सकते हैं जबकि मोटरगाड़ी से चलने में ऐसा नहीं होता और प्रदूषण का खतरा भी गहराता जाता है।

इसी क्रम में पहले डॉ राज ने एक एनवायरमेंट एक्टिविस्ट के तौर पर पर्यावरण का संदेश लेकर अपने देश में घूमे और फिर एक दिन ऐसा आया कि देश से बाहर विदेशी धरती पर इसी पर्यावरण बचाने के संदेश को लेकर निकल गए। कई देशों में जाकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाई और पेड़-पौधों के महत्व के बारे में लोगों को समझाया। वह कहते हैं कि प्रतिदिन तेजी से बढ़ते प्रदूषण का हाल ये हैं कि अब तो मानो सांसें भी कम पड़ने लगी हैं। भूकंप, बाढ़, सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को जिम्मेदार ठहराया है।

 

इस विषय के जानकारों का मानना है कि अगर हालात में बदलाव नहीं हुआ तो साल 2030 तक इंसान को रहने के लिए पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रह की तलाश करनी पड़ेगी। लेकिन यही स्थिति रही तो वह जगह भी कितने दिनों तक सुरक्षित रहेगी। इसलिए दुनिया के हर एक नागरिक को पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान देना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन करने से बचना चाहिए। जिस रफ़्तार से मौसम बदल रहा है उसे संतुलित नहीं किया गया तो कह दिन दूर नहीं जब इस धरती पर सांस लेना दुर्लभ हो जाएगा। हम सब साईकल बाबा की ही तरह अपने छोटे छोटे प्रयासों से एक बहुत बड़ी मुहिम खड़ी कर सकते हैं।

साइकिल बाबा उर्फ़ डॉक्टर राज की बात करें तो इन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएमएस किया और एक एनवायरमेंट एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने लगे। यह बचपन से ही पर्यावरण और पेड़-पौधों से काफी लगाव रखते थे। इनके पिता एक बैंककर्मी थे प्रकृति से उन्हें भी काफी लगाव था। यह गुण राज में अपने पिता से आया। पिता को पेड़-पौधों की देखभाल और खेतों की देखरेख करते उन्होंने अपने बचपन से देखा था बस तभी से उनके मन में पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा हुआ और फिर धीरे धीरे एक जुनून में परिवर्तित हो गया।

 

पर्यावरण को सुधारने के लिए अब तक वो साइकिल से ही करीब 55 देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने अब तक भारत, सिंगापुर, भूटान, कंबोडिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की यात्राएं की हैं। उन्होंने ये भी बताया कि जिन देशों में साइकिल से जाना संभव नहीं था ऐसी जगहों पर जाने के लिए उन्हें फ्लाइट का सहारा लेना पड़ा।अपनी इस मुहिम को पूरा करने के लिए उन्होंने अब तक साइकिल से करीब 60000 हजार किलोमीटर तक का सफ़र तय कर लिया है।

साइकिल बाबा का अपना एक यूट्यूब चैनल भी है जिसके करीब तकरीबन चार लाख सस्क्राइबर होने वाले हैं।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की इस मुहिम को साइकिल बाबा बड़े ही दिलचस्प तरीके से चला रहे हैं। लोगों को इसकी उपयोगिता बताने के लिए वो स्कूल और कॉलेज में जाकर प्लांटेशन कैंप आयोजित करते हैं जिसमें पेड़-पौधों के महत्व, उनकी देखभाल और उनसे जुड़ी कई अहम जानकारियां दी जाती हैं. इसमें पर्यावरण को बचाने में जुटे कई गैरसरकारी संस्थाएं भी उनकी मदद कर रही हैं। ‘साइकिल बाबा’ का कहना है कि आज में जियो कल की सोचो। अगर पर्यावरण नहीं होगा तो कुछ भी नहीं होगा। हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

जिन तरीके से इंसान प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है उसका कहर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है। उनका कहना है कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशों से ही काफी बदलाव आ सकता है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की भी जरूरत नहीं हैं बस थोड़ा सा पुरानी जीवनशैली को आत्मसात करना होगा। आज के समय में हम फल खाने के बाद इसके बीज को कूड़े में डाल देते हैं जबकि पहले हम इसे कटोरी में रखकर अंकुरित कर इसे जमीन में रोप देते थे। फल खाने के बाद बीज फेंकें नहीं बल्कि जमीन में रोप दें।धरती इतनी उपजाऊ तो है ही कि हजार में से 10 तो अंकुरित हो ही जाएंगे जो बड़े होकर पेड़ का रूप लेंगे। इस तरह आप पर्यावरण को बिना मेहनत किए ही फिर से बेहतर बना पाएंगे।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने 5 आरटीपीसीआर जांच वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना

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• 10 आरटीपीसीआर जांच वैन से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कोरोना जांच की सुविधा होगी उपलब्ध
• चलंत वाहनों की एक दिन में 1000 सैंपल जांच करने की है क्षमता
• बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं 5 आरटीपीसीआर जांच वैन

पटना/ 10, जून:

गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के प्रांगण से 5 मोबाईल आरटीपीसीआर वैन को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत, मनोज कुमार, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति समेत अन्य पदाधिकारीगण के साथ सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने बताया कि पूर्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 5 वैन को रवाना किया जा चुका है और अब कुल 10 आरटीपीसीआर जांच वैन द्वारा सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कोरोना जांच की सुविधा उपलब्ध होगी. ये 10 वैन जब राज्य के सुदूरवर्ती इलाकों में जायेंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच की सुविधा का विस्तार होगा और दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोग आसानी से अपनी कोरोना जांच करवा सकेंगे.

प्रतिदिन 1000 लोगों की जांच की है क्षमता:

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सभी चलंत वैनों की प्रतिदिन की जांच करने की क्षमता 1000 सैंपल की है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकेगी. कुल 10 आरटीपीसीआर जांच वैन द्वारा सरकार के टेस्टिंग, ट्रीटमेंट और ट्रैकिंग के लक्ष्य को प्राप्त करने में आसानी होगी. चलंत वैन द्वारा जांच रिपोर्ट 24 घंटे में लाभार्थी के मोबाइल पर उपलब्ध होगी.

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने उपलब्ध कराये वैन:

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया ये 5 आरटीपीसीआर जांच वैन बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा बिहार सरकार को उपलब्ध कराये गए हैं. फाउंडेशन कोरोना संक्रमण काल के शुरुआत से ही स्वास्थ्य विभाग को अपना तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है और स्वास्थ्य विभाग इसके लिए फाउंडेशन का आभार मानती है.

21 जून से फ्री वैक्सीनेशन फॉर ऑल- मोदी

पीएम मोदी ने सोमवार को देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार थमने के साथ ही दिल्ली समेत कई राज्यों में लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील दी जा रही है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना की दूसरी वेब से हम भारतवासियों की लड़ाई जारी है। दुनिया के अनेक देशों की तरह भारत भी बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममें से कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया है। ऐसे परिवारों के साथ मेरी पूरी संवेदना है। बीते 100 वर्षों में आई सबसे बड़ी त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक युग ने न देखी थी न अनुभव की थी। इतनी बड़ी महामारी से हमारा देश एकसाथ लड़ा है। कोविड से लड़ने के लिए बीते सवा साल में देश में एक नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। ऑक्सीजन रेल चलाई गई, नौसेना को लगाया गया।

पीएम मोदी ने कहा कि सबसे प्रभावी हथियार कोविड प्रोटोकॉल है। वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज पूरे विश्व में वैक्सीन की जो मांग है उसके तुलना में उत्पादन करने वाले बहुत कम है। अगर अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो कल्पना कीजिए भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? पिछले पचास सालों के इतिहास देखें तो भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाता था। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था। पोलियो की वैक्सीन हो, चेचक की वैक्सीन हो, हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों ने दशकों तक इंतजार किया था। 2014 में जब देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के आसपास था। वैक्सीनेशन के लिए हमने मिशन मोड में काम किया।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी दृष्टि में ये चिंता की बात थी। जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण चल रहा था, उस हिसाब से देश को शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब 40 साल लग जाते। हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को शुरु किया। मिशन इंद्रधनुष से युद्धस्तर पर वैक्सीनेशन किया। 5 सालों में वैक्सीनेसन कवरेज 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत हुई। हमने टीकाकरण की रफ्तार भी बढ़ाई और दायरा भी बढ़ाया। हमने बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कई नए टीकों को भी भारत के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया। क्योंकि हमें देश के बच्चों की चिंता थी, हमें गरीबों की चिंता थी। आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।