विश्व पर्यावरण दिवस : 1000 से अधिक लोग पर्यावरण सुरक्षा मुहिम में हुए शामिल

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पटना-

पर्यावरण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व की सुरक्षा की बाग़-ड़ोर संभालती है. ऐसे में यह अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहें. विगत 2 सालों में कोरोना जैसी महामारी का आना कहीं न कहीं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति हमारी उदासीनता को उजागर करता प्रतीत होता है. कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों को सिर्फ़ ऑक्सीजन की कमी के कारण ही जान गंवाने पड़े हैं. यह वही ऑक्सीजन है जो पेड़-पौधे निःस्वार्थ भाव से हमारे लिए देते रहते हैं. वहीं, कोरोना संक्रमण ने रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में औषधीय जड़ी-बूटी की भी उपयोगिता किसी से छिपी नहीं है. सामान्य शब्दों में कहें तो पर्यावरण महामारी काल में भी हमारे लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता रहा. विश्व भर में प्रत्येक साल 6 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. इस बार का पर्यावरण दिवस अधिक मायने रखता है, क्योंकि हमारे साथ सम्पूर्ण विश्व आज इस महामारी से संघर्ष कर रहा है. इसलिए पर्यावरण की महत्ता को सार्थक बनाने की जरूरत और जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है. इस दिशा में घरेलू हिंसा एवं लिंग आधारित भेद-भाव जैसे मुद्दे पर कार्य कर रही सहयोगी संस्था इसे मुहिम की तरह चला रही है एवं अधिक से अधिक लोगों को इसमें शामिल करने का प्रयास कर रही है.

500 से अधिक औषधीय एवं फलदार वृक्षों का हुआ रोपण:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस को उनकी संस्था ने एक मुहिम का स्वरुप दिया है. इसका नतीजा है कि सहयोगी संस्था के सहयोग से अभी तक 500 से अधिक औषधीय एवं फलदार वृक्षों का हुआ रोपण किया गया है. वहीँ, इस जागरूकता मुहिम में अभी तक 1000 से अधिक लोग शामिल भी हुए हैं जो यह प्रदर्शित करता है कि लोग अब पर्यावरण सुरक्षा जैसे अति-महत्वपूर्ण विषय के प्रति संवेदनशील हो रहे हैं.

सहयोगी संस्था के केडर कर रहें है मुहिम में सहयोग:
रजनी ने बताया कि विगत 3 दिनों से पर्यावरण सुरक्षा की मुहिम सहयोगी संस्था के द्वारा चलायी जा रही है, जिसे सफल बनाने में संस्था के केडर के सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रकृति पर्यावरण को बढ़ने में सिर्फ़ सहयोग कर सकती है, जबकि इसे सुरक्षित रखने की नैतिक जिम्मेदारी हम सबों की है. हमें यह स्मरण में लाना ही होगा कि जितना हम पर्यावरण से निःशुल्क प्राप्त कर रहे हैं, कम से कम उसके बदले हम कुछ पौधों का रोपण कर उसे वापस जरुर करें. उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या किसी विशेष संस्था की जिम्मेदारी तक सिमित न रहे, बल्कि समाज के हरेक वर्ग के लोग इसके लिए आगे आयें एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ उसकी वृद्धि में भी सहयोग करें.

माहवारी स्वच्छता पर युवाओं ने खुल कर रखी अपनी राय, झिझक तोड़ने का दिया संदेश

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पटना- 28 मई-

किसी भी बदलाव की शुरुआत आवाज बुलंद करने से ही शुरू होती है. विशेषकर जब युवाएं एकजुट होकर किसी मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं तो बदलाव की बुनियाद और मजबूत हो जाती है. युवाओं की कुछ ऐसी ही एकजुटता विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर देखने को मिली. हाथों की कलाई पर उजले एवं लाल डॉट से ब्रासलेट बनाकर जहाँ युवाओं ने मासिक स्वच्छता के प्रति जागरूकता की मुहिम में ख़ुद को शामिल करते दिखे, वहीं कुछ युवाओं ने माहवारी स्वच्छता पर स्लोगन एवं विडियो जारी कर इस मुहिम को आगे ले जाने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की. बताते चलें युवाओं को माहवारी स्वच्छता जैसे अति-संवेदनशील मुद्दे पर एक मंच पर लाने का प्रयास सहयोगी संस्था द्वारा की गयी है. विगत कुछ दिनों से सहयोगी संस्था इस दिशा में कार्य करते हुए लगभग 1000 युवाओं को इस मुहिम में जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित की है.

युवाओं की सहभागिता लिखेगी बदलाव की कहानी:

सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने बताया कि’ माहवारी स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर लोगों की चुप्पी के कई अर्थ हैं. हमारा समाज महिलाओं को सभी तरह के अधिकार दिलाने की दुहाई करता दिखता तो है, लेकिन जब माहवारी स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जागरूकता बढ़ाने की बात आती है तो वही समाज इसे पर्दे की चीज कहकर दरकिनार भी कर देता है. परिवार एवं समाज का निर्माण हम सब से ही मिलकर हुआ है, जिसमें सबसे अधिक संख्या अभी भी युवाओं की है. इस लिहाज से युवाओं को इस मुद्दे पर जोड़ना जरुरी है. इसलिए सहयोगी संस्था ने इस दिशा में पहल करते हुए किशोर एवं किशोरियों को एक साथ जोड़कर माहवारी स्वच्छता पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने इस मुहिम में युवाओं के उत्साह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं था कि इस मुहिम में अन्य पड़ोसी राज्यों के युवा भी शामिल होंगे. लेकिन झारखंड राज्य के कुछ युवा इस मुहिम में शामिल होकर स्लोगन एवं अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक कर रहे हैं. यह एक अच्छी शुरुआत है. कोशिश की जाएगी कि इस मुहिम को और आगे ले जाया जाए.
माहवारी का रक्त जमता नहीं है-एक नारी की तरह:

गवर्नमेंट वीमेन कॉलेज की डिपार्टमेंट ऑफ़ केमेस्ट्री की असिस्टेंट प्रोफेसर कुमारी निमिषा ने इस पहल के लिए सहयोगी संस्था को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि माहवारी का खून वेन से निकलने वाला रक्त होता है जो कभी जमता नहीं है. ठीक यही स्ववभाव सभी नारी का भी है जो तमाम चुनौतियों में भी आगे बढ़ते रहती है. वह कहती हैं कि प्रत्येक महीने जो हमारा रक्त बहता है, उसके बदले हमें प्रकृति से रचनात्मकता भी मिलती है.

माहवारी से नफरत करना छोड़ें:

इको क्लब की इंचार्ज कंचन सिंह कहती हैं कि माहवारी से नफरत करना सभी को छोड़ना होगा. यही अगले पीड़ी के लिए रास्ता है. उन्होंने कहा कि माहवारी गहराई में एक नए जीवन को प्रदान करने की तैयारी है. इसे इसी रूप में लिया जाना चाहिए.

माहवारी के 7 दिन उत्सव होने चाहिए:

कक्षा 8 में पढ़ने वाली बोकारो की साक्षी कहती हैं कि लड़कियों को सबसे मजबूत रूप में ही चुना गया है. तभी तो वह माहवारी को आसानी से सह लेती है. उनके अनुसार माहवारी की अवधि को एक उत्सव के रूप में देखने और मनाने की जरूरत है. इससे लोगों के मन में इसके प्रति सोच भी बदलेगी और समाज में जागरूकता भी आएगी.

मासिक धर्म पर दूर करें अज्ञान, नारी शक्ति का करें सम्मान:

जागरूकता मुहिम को सशक्त करते हुए सुप्रिया कुमारी ने माहवारी स्वच्छता पर कई स्लोगन लिखकर लोगों को जागरूक किया. ‘मासिक धर्म पर दूर करें अज्ञान, नारी शक्ति का करें सम्मान’, माहवारी को न माने परेशनी, यह है नारी शक्ति की निशानी’ जैसे स्लोगन के जरिए सुप्रिया ने समुदाय को एक मजबूत सन्देश दिया.

‘सहयोगी संस्था’ ने बुधवार को 200 युवाओं को शामिल किया माहवारी स्वच्छता मुहिम

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पटना- 26 मई:

किशोर एवं किशोरियां के हाथों की हथेली और कलाई पर बने रेड डॉट को देखकर आपको आश्चर्य जरुर होगा. हो सकता है आप इसे आधुनिक समय की फैशन समझने की भूल भी कर लें. लेकिन हाथों पर रेड डॉट बनाकर किशोर और किशोरियां माहवारी स्वच्छता के प्रति लोगों को अगाह कर रहे हैं. कोरोना संक्रमण काल में युवाओं का यह प्रयास मासिक स्वच्छता के प्रति उनके साथ समाज के सभी लोगों को जागरूक करने की कोशिश है. युवाओं को इस मुहिम से जोड़ने के लिए घरेलू हिंसा एवं लिंग असामनता पर कार्य कर रही सहयोगी संस्था सोमवार से ही कार्य करने में जुटी है.

बुधवार को 200 किशोर एवं किशोरियों हुए मुहिम में शामिल:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी सहाय ने बताया कि बुधवार को 200 युवाओं को मासिक स्वच्छता की मुहिम में शामिल किया गया. जिसमें किशोरियों के साथ किशोर भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि 28 मई को विश्व मासिक स्वच्छता दिवस मनाया जाता है. इसे ध्यान में रखते हुए सहयोगी संस्था युवाओं को शामिल कर मासिक स्वच्छता पर समुदाय को जागरूक कर रही है. उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य 1000 युवाओं को इस मुहिम से जोड़ना है ताकी वे विभिन्न माध्यमों जैसे फेसबुक, ट्विटर, टेलीग्राम एवं व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया के जरिए 10000 लोगों तक मासिक स्वच्छता का सन्देश पहुंचा सके. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि मासिक स्वच्छता जैसा विषय महिलाओं पर केन्द्रित होने के बाद भी किशोर भी इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि बुधवार को किशोर एवं किशोरियों ने हाथों पर रेड डॉट बनाकर मासिक स्वच्छता पर लोगों को सन्देश दिया है. इस मुहिम को सहयोगी संस्था आगे भी जारी रखने का प्रयास करती रहेगी.
चुप्पी तोड़ने से ही सोच में आएगा बदलाव:
मासिक स्वच्छता की मुहिम से जुड़ी प्रियंका कुमारी ने कहा कि मासिक स्वच्छता पर हम जैसी किशोरियां जितनी अपनी चुप्पी तोड़ेंगी उतना ही समुदाय में इस बात पर झिझक ख़त्म होगी. उन्होंने कहा कि जब हम अन्य प्राकृतिक विषयों पर बेबाक होकर अपनी राय रख सकते हैं तो फिर मासिक स्वच्छता पर क्यों नहीं?
इसी मुहिम से जुड़ी अंशु कुमारी का कहना है कि जब तक हम मासिक स्वच्छता के प्रति नजरिया स्वयं नहीं बदलेंगे तब तक समुदाय की सोच में भी परिवर्तन आना मुश्किल है. उन्होंने कहा इसलिए वह सभी आज हाथों पर रेड डॉट अन्य किशोरियों के साथ समुदाय को भी इस पर खुल कर बात करने का संदेश दी है.

पुरुषों की भी है समान ज़िम्मेदारी:
मुहिम से जुड़े राहुल कुमार ने कहा कि समाज में महिलाओं के साथ भेद-भाव तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक पुरुष महिलाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि अभी भी मासिक स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर परिवार और समाज में खुल कर बात नहीं होती. यह सोचने का विषय का है कि क्या मासिक स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना सिर्फ़ महिलाओं की जिम्मेदारी है या इसमें पुरुषों की भी भूमिका जरुरी है? उन्होंने कहा कि वह इस मुहिम में शामिल है और इसमें अन्य पुरुषों को भी शामिल होना चाहिए.

बांका में टीका एक्सप्रेस ने पकड़ी रफ्तार

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पंचायत के साथ पेट्रोल पंप पर भी लोगों का किया गया टीकाकरण

गुरुवार को पीएचईडी कार्यालय के कर्मियों का किया जाएगा टीकाकरण

बांका, 26 मई

जिले में टीककारण अभियान काफी तेज गति से चल रहा है। अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण हो सके, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। बुधवार को जिलाधिकारी सुहर्ष भगत के निर्देश पर मोबाइल टीम ने पेट्रोल पंप के कर्मियों का भी टीककारण किया। वहीं, गुरुवार को पीएचईडी कार्यालय के कर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा। मालूम हो कि जिले में टीकाकरण अभियान को तेज करने के लिए टीका एक्सप्रेस यानी मोबाइल टीम को सोमवार से सक्रिय किया गया है। मोबाइल टीम को पंचायतों में लोगों का टीकाकरण करना था, लेकिन जिलाधिकारी के आदेश के बाद बुधवार से पेट्रोल पंप समेत अन्य जगहों पर भी जाकर लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया- टीकाकरण अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं। मोबाइल टीम अब पंचायत के अलावा दूसरी जगहों पर टीकाकरण कर रही है। बुधवार को पेट्रोल पंप पर लोगों को टीकाकृत किया गया । आज दूसरी जगह पर मोबाइल टीम जाएगी। इसके जरिये 18 और 45 साल से अधिक यानी कि दोनों कटेगरी में आने वाले लोगों का टीकाकरण होगा। मोबाइल टीम पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मियों का तो टीकाकरण किया ही। अगर कोई आम इच्छुक लोग भी टीका लेना चाहें तो ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन करवा कर ले सकते हैं।
कंझिया पंचायत में भी हुआ टीककारणः पेट्रोल पंप पर कर्मियों को टीका देने के बाद मोबाइल टीम यानी कि टीका एक्सप्रेस कंझिया पंचायत पहुंची। वहां पर मौजूद लोगों का ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन किया गया और इसके बाद टीका दिया गया। डॉ. चौधरी ने बताया कि पंचायत में टीकाकरण के साथ लोगों को टीका लेने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। कई ऐसे लोग होते हैं जिनके मन में तमाम तरह की गलतफहमियां होती हैं, जिसे स्वास्थ्य विभाग की टीम दूर कर देती है।
मंडल कारा में टीकाकरण का सत्र समाप्तः डॉ. चौधरी ने बताया कि मंडल कारा में चार दिनों से चल रहे टीकाकरण सत्र का बुधवार को समापन हो गया। इस दौरान लगभग 900 कैदियों को कोरोना का टीका दिया गया। आखिरी दिन बुधवार को लगभग 80 लोगों को टीका दिया गया। टीकाकरण के बाद सभी लोगों को 30 मिनट की निगरानी में रखा गया। साथ ही टीके के दूसरे डोज की तारीख भी बता दी गई। इस दौरान कैदियों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने को भी कहा गया। मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने को भी गया।
जिले भर में चल रहा जागरूकता कार्यक्रमः सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया टीकाकरण को लेकर जिले भर में जागरूकता कार्यक्रम चल रहा है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को टीका लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्हें टीकाकरण के फायदे समझा रहे हैं। अगर किसी के मन टीके को लेकर शंका रहती है तो उसे भी दूर किया जाता है। घर के सदस्यों को बताया जाता है कि अगर कोरोना से बचना है तो टीकाकरण जरूरी है। इसलिए नजदीकी केंद्र पर जाकर कोरोना का टीका अवश्य लें, यह लोगों को समझाया जाता है।

लखीसराय जिले में 86.2 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ रिकवरी रेट में लगातार हो रहा है सुधार

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– जिले में अभी हैं कुल 307 कोरोना संक्रमित मरीज
– स्वास्थ्य विभाग की सजगता और लोगों की सतर्कता का अब दिखने लगा सकारात्मक प्रभाव

लखीसराय, 25 मई-

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिले में लगातार चल रहे वैक्सीनेशन एवं जांच अभियान का अब सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। अस्पतालों एवं होम क्वारेंटाइन में इलाजरत संक्रमित मरीजों के रिकवरी रेट में अब लगातार वृद्धि हो रही है। ये ना सिर्फ लोगों के लिए राहत भरी खबर है बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की सजगता और सामुदायिक स्तर पर लोगों द्वारा बरती गई सतर्कता का भी सकारात्मक परिणाम है। इतना ही नहीं अब संक्रमितों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है। हालाँकि, अभी और सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग का यह मानना है कि यदि हम इसी धैर्य और संयम का परिचय देते हुए सतर्कता बनाएं रखें तो इस वैश्विक महामारी को निश्चित रूप से पूरी तरह मात देने में सफल हो सकते हैं। इसीलिए अभी इस वैश्विक महामारी को जड़ से मिटाने एवं स्थाई निजात के लिए और भी सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।

– 86.2 प्रतिशत हुई रिकवरी रेट, सामाजिक सहयोग रखें जारी :
जिले के सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया, जिले में रिकवरी रेट के ग्राफ में लगातार वृद्धि हो रही है। जो लोगों के सकारात्मक सहयोग का सकारात्मक परिणाम है। इसलिए, आगे भी जिले वासियों से इसी तरह सामाजिक सहयोग जारी रखने की अपील करता हूँ। इससे ना सिर्फ हम वैश्विक महामारी को मात देने में सफल हो सकते हैं। बल्कि, इसे पूरी तरह जड़ मिटा भी सकते हैं। इसलिए, सभी लोग एहतियात जारी रखें और सरकार के गाइडलाइन का पालन करें। वहीं, उन्होंने बताया, वर्तमान में जिले का रिकवरी रेट 86.2 प्रतिशत है। जो बेहद सुखद और राहत का आकड़ा है।

– संक्रमित मरीजों की संख्या में आ रही है गिरावट :
सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया, रिकवरी रेट के अलावा संक्रमित मरीजों की संख्या में भी भारी गिरावट आ रही है। यानी जितने लोग संक्रमित मिल रहे हैं। उससे दुगुनी की संख्या में लोग स्वस्थ भी हो रहे हैं । जो सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और लोगों की सजगता का सकारात्मक परिणाम है। इससे साफ है कि संक्रमित मरीज पूरी तरह चिकित्सा परामर्श का पालन कर इस महामारी को मात देने में सफल हो रहे हैं। इसी तरह चिकित्सा परामर्श का पालन जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जिले में संक्रमितों की संख्या शून्य हो जाएगी।

– मरीजों को मिल रही है बेहतर स्वास्थ्य सुविधा :
इस वैश्विक महामारी से संक्रमित होने वाले मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराया जा सके, इसको लेकर जिला स्वास्थ्य समिति बेहद सजग और गंभीर है। जिसका परिणाम यह है कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल भी रही है और लोग इस महामारी को मात भी दे रहे हैं। जिले में लगातार बढ़ रही रही रिकवरी रेट और घट रही संक्रमितों की संख्या भी इस बात का प्रमाण है। प्रत्येक मरीज को समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिले, इसको लेकर एक-एक मरीज पर नजर रखी जा रही है।

-कोरोना काल में इन मानकों का करें पालन कर कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– मास्क का करें उपयोग और शारीरिक दूरी के नियम का जारी रखें पालन।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक करें सेवन ।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल और सैनिटाइजर का हमेशा करें उपयोग ।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज एवं गर्म और ताजा खाना का सेवन करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

कोरोना संक्रमित मरीज सहित अन्य लोगों की मदद के लिए टीम बनाकर काम कर रहे हैं समाजसेवी पवन कुमार

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– होंम आइसोलेशन में रह रहे लोगों की मदद के लिए राशन सहित अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचा रहे हैं

– लॉकडाउन के दौरान गरीब-बेसहारा लोगों के बीच तैयार भोजन का पैकेट भी पहुंचाते हैं

– लोगों के बीच मास्क,साबुन और हैंड सैनिटाइजर भी कर हैं वितरित

मुंगेर, 25 मई-

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ ही जिले के समाज सेवी भी आगे बढ़ कर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए काम कर रहे हैं । इन्ही लोगों में से एक हैं समाज सेवी पवन कुमार । ये युवाओं की एक छोटी सी टीम बनाकर अपने स्तर से लोगों के बीच पहुंचकर उन्हें कोरोना संक्रमण से बचने के उपायों के साथ ही लॉक डॉउन के गाइड लाइन के अनुपालन के लिए भी लगातार प्रेरित और जागरूक कर रहे हैं।

जिला मुख्यालय मुंगेर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत घोसी टोला में रहने वाले युवा समाज सेवी पवन कुमार युवाओं की अपनी एक छोटी सी टीम बनाकर अपने आसपास के मुहल्लों मुंगेर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 28, 29 और 30 में घर- घर जाकर लोगों के घरों के मुख्य गेट के अलावा अन्य टचिंग पॉइंट को अपने स्तर से सैनिटाइज करने के साथ ही लोगों के बीच मास्क, साबुन के साथ ही हैंड सैनिटाइजर की बोतल का वितरण भी कर रहे हैं। इसके साथ ही वो होंम आइसोलेशन में रह कर अपना इलाज करवा रहे लोगों के बीच पहुंच कर उनके लिए दवा सहित अन्य आवश्यक मदद भी पहुंचा रहे हैं।

कोरोना और लॉक डॉउन के गाइड लाइन के अनुपालन के लिए लोगों को कर रहे हैं जागरूक :
समाज सेवी युवा पवन कुमार अपने युवा टीम के सहयोग से घर- घर जाकर लोगों को कोरोना गाइड लाइन के तहत मास्क का नियमित इस्तेमाल, शारीरिक दूरी के तहत कम से कम दो गज या छह फीट की दूरी का अनुपालन और हाथों कि नियमित साफ-सफाई के लिए साबुन या हैंड सैनिटाइजर के नियमित इस्तेमाल के लिए लगातार जागरूक कर रहें हैं। इसके साथ ही जिले में 5 मई से जारी लॉक डॉउन को देखते हुए लोगों से घर में रहकर ही अपना और अपने परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।

युवा समाज सेवी पवन कुमार ने बताया इस कोरोना काल में मैं और मेरी टीम यदि एक भी लोग को कोरोना संक्रमित होने से बचा पाते हैं या कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ्य होने में यदि कुछ भी योगदान कर पाते हैं तो ये हमलोगों के लिए बहुत ही खुशी की बात होगी। हमलोगों की पूरी कोशिश है कि हमलोग इस कोरोना काल में लोगों की हरसंभव मदद कर सके ताकि मानवता की सच्ची सेवा हो सके।
उन्होंने बताया हमारी टीम वैसे लोग जिनका रोजगार कोरोना संक्रमण या लॉकडॉउन की वजह से छूट गया है उनके बीच जाकर खाने- पीने की दिक्कत न हो इसके लिए राशन सामग्री का भी वितरण करते हैं। इसके साथ वैसे गरीब असहाय लोग जिनके सामने खाना खाने की भी समस्या है उनके बीच जाकर पका हुआ भोजन के पैकेट का भी वितरण कर रहे हैं।

खगड़िया जिले में कोविड टीकाकरण अब आपके द्वार अभियान का हुआ शुभारंभ

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– जिले के सभी पीएचसी में निकाली गई वैक्सीनेशन रथ, गाँव-गाँव मे लोगों का किया जाएगा वैक्सीनेशन

– 45+ आयु वर्ग के लोगों को मेडिकल टीम द्वारा दी जाएगी वैक्सीन की पहली डोज

खगड़िया, 25 मई-

कोविड-19 संक्रमण को पूरी तरह जड़ से मिटाने एवं लोगों को इस महामारी से स्थाई निजात दिलाने के जिले में लगातार वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान चल रहा है। जिसे और तेज गति देने के लिए प्रशासन बेहद गंभीर है और इसको लेकर हर जरूरी कदम भी उठाये जा रहे हैं। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन हो सकें और लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इसी कड़ी में सरकार के निर्देशानुसार मंगलवार को जिले में कोविड टीकाकरण अब आपके द्वारा अभियान का शुभारंभ किया गया। जिसके माध्यम से स्वास्थ्य टीम द्वारा गाँव-गाँव जाकर लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा। इस टीम में चिकित्सक एवं एएनएम को शामिल किया गया है।

– जिले के सभी पीएचसी में अभियान का हुआ शुभारंभ :
जिला के सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया, जिले में कोविड टीकाकरण अब आपके द्वारा अभियान का मंगलवार को शुभारंभ हो गया। इस अभियान का जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में शुभारंभ हुआ। सभी जगह टीकाकरण रथ को गाँव के लिए रवाना किया गया। अब गाँव-गाँव चलंत वैक्सीनेशन शिविर लगाकर लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। ताकि अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन हो सके।

– वैक्सीनेशन अभियान को मिलेगी गति, लाभार्थियों को भी होगी आसानी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, लोगों को वैक्सीन लेने में आसानी हो, इसके मद्देनजर सरकार द्वारा इस तरह के अभियान का शुभारंभ किया गया। ताकि लोगों को वैक्सीन लेने के लिए वैक्सीनेशन सेंटर नहीं जाना पड़े और आसानी के साथ अपने घर के पास ही वैक्सीन ले सकें। इससे ना सिर्फ लोगों को वैक्सीन लेने में आसानी होगी। बल्कि, वैक्सीनेशन अभियान की भी गति तेज होगी। वहीं, बताया, इस अभियान के तहत खासकर दुर्गम इलाके में स्थित गाँव में प्राथमिकता के आधार पर चलंत वैक्सीनेशन शिविर लगाकर लोगों को वैक्सीन दी जाएगी।

– बचाव के लिए भी दी जाएगी आवश्यक जानकारी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, इस दौरान लोगों को वैक्सीनेशन के साथ इस महामारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। जैसे कि, वैक्सीनेशन के बाद भी मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी पालन, साफ-सफाई का ख्याल समेत बचाव से संबंधित अन्य एहतियात जारी रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ताकि सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। वहीं, उन्होंने कहा, वैक्सीन लेना सभी लोगों के लिए जरूरी है।

– 45+ आयु वर्ग के लोगों को दी जाएगी वैक्सीन की पहली डोज :
इस अभियान के तहत स्थानीय पीएचसी स्तर से गठित की गई मेडिकल टीम निर्धारित तिथि के अनुसार संबंधित गाँव जाएगी। जहाँ 45+ आयु वर्ग के लोगों को ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन कर वैक्सीन की पहली डोज देंगे। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर हर मानकों का ख्याल रखा जाएगा। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो और सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर वैक्सीन ले सकें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गाइडलाइन का पालन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

10000 से अधिक लोगों तक मासिक स्वच्छता का संदेश पहुँचाने का लक्ष्य

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पटना/ 25, मई:

देश की प्रगति की कहानी सिर्फ़ सड़कों एवं ऊँची-ऊँची इमारतों से नहीं लिखी जा सकती और न ही सिर्फ़ संसाधनों की प्रचुरता से इसे परिभाषित किया जा सकता है. देश की सही प्रगति गाँव की उन कच्ची पगडंडियों से भी होकर गुजरती है जहाँ अभी भी किशोरियां एवं महिलाएं मासिक स्वच्छता जैसे बुनियादी चीजों से अवगत नहीं हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों की बात करें तो अभी भी राज्य में 41% किशोरियों माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूक नहीं हैं. इस लिहाज से अभी भी किशोरियों और समाज के अन्य लोगों को मासिक स्वच्छता पर जागरूक करने की बेहद जरूरत है. इस दिशा में घरेलू हिंसा एवं लिंग असामनता जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कार्य कर रही सहयोगी संस्था महत्वपूर्ण पहल करने वाली है. विश्व भर में माहवारी स्वच्छता पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 28 मई को विश्व मासिक स्वच्छता दिवस का आयोजन किया जाता है. सहयोगी संस्था इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए 1000 युवाओं को मासिक स्वच्छता पर सामुदायिक अलख जगाने के लिए एक साथ जोड़ेगी.

10000 लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी सहाय ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की भयावहता बहुत उजागर हुयी है. संक्रमण काल में ब्लैक फंगस जैसी नई समस्या भी देखने को मिल रही है. लेकिन इन सब से इतर गाँवों एवं शहरी स्लम में किशोरियों एवं महिलाओं का एक बड़ा समूह ऐसा भी है जो माहवारी स्वच्छता की जरूरत एवं उपलब्ध संसाधनों के उपयोग से इसे सुनिश्चित करने के विषय में बिल्कुल भी जागरूक नहीं है. इसके पीछे कारण सिर्फ़ संसाधनों की कमी नहीं हैं, बल्कि जागरूकता का आभाव है. इसे ध्यान में रखते हुए विश्व मासिक स्वच्छता दिवस के मौके पर सहयोगी संस्था 1000 युवाओं को अपने साथ जोड़ेगी जो विभिन्न माध्यमों जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर एवं अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से 10000 से अधिक लोगों को मासिक स्वच्छता पर जागरूक करेंगे. उन्होंने बताया कि मासिक स्वच्छता के आभाव में किशोरियों एवं महिलाओं में यौन संक्रमण जैसे कई रोग होने के खतरा बढ़ जाता है.

चुप्पी तोड़ना भी बेहद जरुरी:
रजनी सहाय ने बताया कि माहवारी एक प्राकृतिक घटना है. लेकिन समुदाय में इस पर खुल कर बात नहीं हो पाती है. शर्म एवं लज्जा के कारण गाँव की किशोरियाँ खुल कर इस पर न बात कर पाती हैं और न ही मासिक स्वच्छता की जरूरत को समझ पाती हैं. मासिक धर्म के दौरान एक महिला के गर्भाशय से रक्त और अन्य सामग्री वेजाइना के माध्यम से बाहर होती है। हर महीने 3-5 दिन तक जारी रहने वाली यह प्रक्रिया प्यूबर्टी (10-15 वर्ष) से शुरू होकर रजोनिवृति (40-50 वर्ष) तक चलती है। इस शारीरिक प्रक्रिया को हमारे समाज में अब भी कलंक और वर्जनो की दृष्टि से देखा जाता है। यही चुप्पी एवं ख़ामोशी किशोरियों एवं महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के विषय में जागरूक होने में बाधक बनती है. उन्होंने बताया कि इस मुहिम के दौरान सहयोगी संस्था अधिक से अधिक लोगों को माहवारी स्वच्छता के बारे में जागरूक करने का प्रयास करेंगी. उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि यह सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि वह अपने आस-पास के लोगों को भी इसके विषय में जरुर जानकारी दें.

कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए करें कार्य:
रजनी सहाय ने बताया कि अभी देश के साथ बिहार भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. इसलिए यह जरुरी है कि किसी भी तरह का भीड़ जमा न होने दें. माहवारी स्वच्छता की इस मुहिम को सोशल मीडिया एवं फोन कॉल के माध्यम से आगे बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बदलाव लाने की सोच के साथ यदि कार्य किया जाए तो हम कोरोना संक्रमण को तो मात देने के साथ मासिक स्वच्छता के लक्ष्य को भी आसानी से हासिल कर सकते हैं.

दिल्ली सरकार की नाकामी के कारण दिल्ली में 400 टीका केन्द्र बंद हो गए – डॉ आनंद शुक्ला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

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नई दिल्ली

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ आनंद शुक्ला ने कहा कि कोरोना महामारी के दूसरे वेव से जूझ रही दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल सरकार की नाकामियों के कारण दिल्ली में कोविड वैक्सीन की भारी कमी है और 16 जनवरी से शुरु हुए वैक्सीनेशन अभियान में पिछले 5 महीनों में मात्र 5 प्रतिशत दिल्लीवासियों को ही वैक्सीन के दोनो डोज लगे है, जबकि प्रतिदिन एक लाख टीकाकरण प्रतिदिन लगाने की घोषणा की गई थी। वास्तविकता में प्रत्येक दिल्लीवासी को वैक्सीनेट करने के लिए लगभग 2.5 करोड़ वैक्सीन की जरुरत है।

डॉ. आनंद शुक्ला ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने राज्य स्तर की 25 प्रतिशत वैक्सीन की हिस्सेदारी नही खरीदी है, जबकि निजी क्षेत्र और दिल्ली सरकार को 25-25 प्रतिशत कुल 50 प्रतिशत वैक्सीन स्वयं खरीदनी थी और बाकी 50 प्रतिशत वैक्सीन केन्द्र सरकार द्वारा खरीदी जानी है।

डॉ आनंद शुक्ला ने कहा कि कोविड महामारी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे गरीब लोग वैक्सीन की भारी कमी के कारण निजी केन्द्रों पर 900-1250 रुपये में टीका लगवाने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों के साथ सजिश कर रही, जबकि उनका निशुल्क टीकाकरण होना चाहिए।

डॉ आनंद शुक्ला ने कहा कि वैक्सीन उपलब्ध कराने में केन्द्र व दिल्ली सरकार की असंवदेनशीलता के कारण देश और दिल्ली की जनता कोविड महामारी से गंभीर रुप से प्रभावित हो रही है और गरीबों के साथ साजिश करके केजरीवाल सरकार नूरा-कुश्ती का फार्मूला अपना कर वास्तविक स्थिति से ध्यान भटकाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 18-44 वर्ष के लोगों के 400 टीका केन्द्र बंद हो गए है, जबकि 45 वर्ष से उपर के लोगों के लिए को-वैक्सीन के टीके खत्म है, जबकि निजी टीका केन्द्रों पर वैक्सीन उपलब्ध है। उन्होंने मांग की कि दिल्ली सरकार वैक्सीन के प्राईवेट कोटे को सरकारी कोटे में परिवर्तित करके जनता को निशुल्क वैक्सीन मुहैया कराऐ।
डॉ आनंद शुक्ला ने अरविन्द सरकार से यह पूछा कि अभी तक देशी टीका कम्पनियों को कितने ऑर्डर दिए है और 1 मई के बाद दिल्ली सरकार ने राज्य स्तर पर व दिल्ली के निजी अस्पतालों ने कितने टीके खरीदे है, इसकी जानकारी सार्वजनिक करके दिल्ली की जनता को बताएं।

 

 

कोरोना महामारी या कुछ……

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-चिरंजीत शर्मा
(राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद भारत)

सवालों के घेरे में कोरोना बीमारी, कोई साजिश, अस्पतालों और दवा कारोबारीयो का मौत का खेल, गलत दवाओं का प्रयोग या जरुरत से ज्यादा दवाओं का प्रयोग, एक सवाल नहीं ना जाने कितने सवालों से घिरी है ये कोरोना की बीमारी और देश की जनता इतनी असहाय है वो अपनों की लाशें तो उठा सकतीं हैं वो भी उनके बनाये गये ऐसे नियमों के अन्तर्गत जिसमें उनकी कलीई ना खुल जाये जिन्होंने मृतक का इलाज किया था, लेकिन बोल नहीं सकते बस तड़फ सकते हैं, रौ सकते हैं, तड़फ सकते हैं, लेकिन सवालों के जवाब नहीं मांग सकते शायद ये भी देश के अच्छे दिनों में से एक है, जिन्हें बर्दाश्त करना है सरकार के नियमों के नीचे दबकर।
लेकिन सवालो के जवाबों से भागा नहीं जा सकता वो देने ही होंगे चाहे इसके लिए वक्त लग जाये लेकिन मेरा विश्वास है ये देश उन लोगों का देश है जहां लोगों ने अपने हर सवाल का जवाब लिया है समय कोई भी हो, चाहे सावरकर बनकर, भगतसिंह बनकर या गांधी बनकर और ये चिंगारी जलनी शुरू हो गई है।

मेरे दोस्तों आश्चर्य की बात है इस बार कोरोना धीरे धीरे नहीं दो दिन में ऐसा फैला की मौतों का नंगा नाच देखा गया जो इसके फैलने पर ही सवाल पैदा करता है, ऐसा क्या बदला, वातावरण, जलवायु या कुछ और लेकिन जवाब है कुछ नहीं फिर क्या हुआ इसका जानने का हक देश के हर अंतिम व्यक्ति को होना चाहिए, किस तरह से लोगों का आइशोलेशन वार्डों में इलाज किया जा रहा है और कौन कर रहे हैं इसकी सी सी टी वी फुटेज हर व्यक्ति को देने में क्या जाता है ये हक है सभी का, पेनेडेमिक के नाम पर मौत का नंगा नाच नहीं होने दिया जा सकता और ये मेरा अपना अनुभव है अस्पताल में ये हुआ और यदि नहीं तो सभी लोगों को लम्बे चौड़े बिल और लाश के साथ सी सी टी वी फुटेज भी मिलनी चाहिए मेरा विश्वास है मौत के आंकड़ों में कमी आयेगी।

इस कोरोना बीमारी ने फोर्टिस अस्पताल नौएडा में मेरी माताजी का इलाज के दौरान हार्ट अटैक से निधन बताया, कारण पूछा तो बताया गया यकायक पौटेशियम बढ़ गया लेकिन यकायक कैसे इसका जवाब था कोरोना में कुछ भी हो सकता है जबकि
पौटेशियम बढ़ने के पीछे बहुत से कारण होते हैं। लेकिन पेनाडेमिक के नाम पर इसकी डिटेल रिपोर्ट मांगना कानूनी जुर्म है। क्या कानून हैं और कानून किसके लिए है मेरे अनुसार देश के लिए उनके नागरिकों से बढ़कर कुछ नहीं लेकिन वही अगर सवाल करना जुर्म है तो कैसी आज़ादी है हमारे देश में ये विचार करने का विषय है।
इसी दौरान मेरी पत्नी भी किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती थी जो पांच दिन रहीं उन्होंने बताया कि डाक्टर एक दिन आया था और उसने हमें बताया आप अगर सोच रहे हैं हम आपका कोरोना का इलाज कर रहे हैं तो आप गलतफहमी में है, क्योंकि उसका कोई इलाज है ही नहीं, फिर अस्पताल लोग क्यों जा रहे हैं, क्या वहां उनका शरीर प्रयोगशाला बना दी जाती है जहां कोरोना के नाम पर उनपर प्रयोग किये जा रहें हैं, सरकार को इस ध्यान देना जरूरी है क्योंकि अब देश ज्यादा सह नहीं सकेगा।

मुझे दौ लाख का बिल दिया गया जिसमें 25 हजार आक्सीजन के और 8 हजार नैबोलाइज चार्ज लगाये हुए थे, क्योंकि मेरी पत्नी को मामूली सिमटम थे इसलिए मैं दिन में हर पल की खबर उससे मौबाइल पर लेता रहा था और जानता था उसे आक्सीजन और नैबोलाइज नहीं किया गया था, मैंने वहां के एकाउंट वाले से बात की और उसे कहा आप बताओं आक्सीजन कब लगी उसने कहा ठीक है हटा देते हैं ये चार्ज, लेकिन इतना तो हम लगा ही रहे हैं चार्ज मैंने कहा बिना इस्तेमाल के वो हंस दिया मानों वो कह रहा हो पेनाडेमिक में सब चलता है, मन तो कर रहा था एक थप्पड़ रसीद कर दूं लेकिन कानून को समझता हूं और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उसे पूरी सिद्धत से निभाता हूं
दोस्तों ये तो मेरे साथ था जो बचकर आ गये लेकिन जो नहीं आ पाये उनके साथ क्या हुआ और क्या क्या लिया गया वो भी पेनाडेमिक के नाम पर और दबाया जा रहा है, बिना पहले हुई बीमारी और उनके कोमपलीकेशन को जाने हर व्यक्ति को डाक्टरों ने वाटसेप पर दवाईयां लिखकर भेज दीं, क्या वो रिक्ट नहीं करी होगी या वो रिक्ट करतीं ही नहीं है फिर तो ठीक है लेकिन करतीं हैं तो ये जाने बगैर दवाइयां दी गयी फिर वो डाक्टर कैसे थे जिन्हें ये कोमन बात समझ नहीं आ रही थी। और उन्होंने रिक्ट किया जिसका परिणाम सामने है मौतों का नंगा नाच और हम कुछ नहीं कर सकते लेकिन हम उस सरकार से सवाल कर सकते हैं जो राज तब करती है जब हम वोट करते हैं और ये सवाल सरकार को भी अस्पतालों से करने चाहिए कि वो ऐसा क्या करतें हैं जो लाखों करोड़ों के बिल बनाये जा रहे वो भी उस बीमारी में जिसकी कोई दवाई है ही नहीं, किस डाक्टर की ड्यूटी थी वो मरीजों को देख भी रहा था या ये सी सी टी वी से समझ आता है और ये संविधानिक हक है हर नागरिक का, विचार करें वो हम कर ही सकते हैं।

मेरे दोस्तों सवाल यह भी है कि जब एक नेचरोपैथी के डाक्टर ने लोगों को फल खिलाकर बिना एक भी मौत के लाखों आदमी ठीक कर दिये और बिना आक्सीजन स्पोर्ट् के आक्सीजन लेवल बढ़ाया, जब लोगों का आक्सीजन लेवल 50-60 पहुच गया था, जिसने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को चैलेंज किया की आप सिद्ध करो की कोरोना महामारी है और मैं सिद्ध करने को तैयार हूं ये महामारी नहीं है, महामारी के समय में तिनके का सहारा होता है उसने लाखों लोग ठीक किया है फिर क्यों नहीं देश की संसद उसे बुलाकर उसके अनुभव को समझती और प्रमाणिकता के तराजू पर तौलती और यदि बीमारी ठीक करने का रास्ता वहां से प्रशस्त होता है तो करने की कोशिश करती क्या मजबूरी है क्यों उसकी विडियो यूट्यूब से उडायी जा रही है देश की जनता के जीवन मृत्यु का सवाल है, देश के हर नागरिक की जान कीमती है, मेरी माताजी तो 73 वर्ष की थी लेकिन उनके परिवारों का क्या होगा जहां जवान आदमी लिपट गया, ये सवाल है जिनका जवाब देना ही होगा।

आज पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के बाबा रामदेव ने भी कोरोना बीमारी के इलाज के तरीके पर सवाल उठाए और वाजिब सवाल है जिनको प्रमाणिक करके गलत साबित करने की जिम्मेदारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की थी लेकिन उन्होंने उन पर उल्टा केस करने की बात कही, जिसपर बाबा रामदेव ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को ऐलोपैथिक से सम्बंधित 25 सवालों की खुली चिट्ठी भेजी, सवालों के जवाब का मैं भी इंतजार कर रहा हूं क्योंकि सवाल पैदा भी होंगे और उनका जवाब भी देना होगा।
लोगों की मौत व्यर्थ नहीं जायेंगी क्योंकि देश जानता है सवालों के जवाब कैसे लेने है।