कोरोना काल में यदि आपके घर में हो जाए कोई बीमार तो घबराएं नहीं

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सावधानी बरतकर बीमार व्यक्ति के स्वास्थ्य का रखें ख्याल
ज्यादा परेशानी हो जाने पर तत्काल डॉक्टर से करें संपर्क

बांका, 10 मई

अभी कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और काफी सारे लोग इसकी चपेट में भी आ रहे हैं. ऐसे माहौल में यदि घर का कोई सदस्य बीमार पड़ जाए तो घबराहट होने लगती है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. बल्कि उससे निपटने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाने की जरूरत है. घबराने से और परेशानी ही बढ़ेगी, इसलिए उसके निदान की ओर आगे बढ़ना चाहिए. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं अभी के माहौल में सामान्य सर्दी- खांसी भी हो तो लोग कोरोना ही समझ बैठते और डरने लगते हैं. डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि बीमारियों से लड़ने की जरूरत है. कुछ सावधानियां बरतकर इस परिस्थिति से उबरने की आवश्यकता है. अगर कोरोना ही हो जाएगा तो भी उससे उबरना ही पड़ेगा. इसलिए ऐसी परिस्थिति में इलाज शुरू करने की जरूरत है, न कि डरने की.

बीमार व्यक्ति को कर दें आइसोलेट:
डॉ चौधरी कहते हैं कि अगर घर में कोई व्यक्ति बीमार हो तो उसे आइसोलेट कर दें और उस व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें. साथ ही जिस कमरे में वह व्यक्ति रह रहा है, उसमें हवा आने की गुंजाइश का ध्यान रखने की जरूरत है. खिड़कियों और वेंटिलेशन को चारों तरफ से खोल कर रखें.

बीमार व्यक्ति के स्वास्थ्य की करते रहें निगरानी:
डॉ चौधरी कहते हैं आपके घर में अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसके स्वास्थ्य की निगरानी करते रहें. उससे इस बात की जानकारी लेते रहें कि उसे बुखार है या नहीं. पिछली बार कब आया था. सर्दी-खांसी की क्या स्थिति है. अगर स्थिति ज्यादा गंभीर दिखे तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें.

घर से बाहर एक ही आदमी निकला करें: डॉ चौधरी कहते हैं कि ऐसी परिस्थिति में अपने घर के किसी एक ऐसे व्यक्ति की पहचान कर लें जो पूरी तरह से स्वस्थ और सावधानी बरत रहा है. उसे ही जरूरत पड़ने पर घर से बाहर निकलने दें. साथ में इस बात का भी ध्यान रखें कि जब वह व्यक्ति बाहर जाए तो डबल लेयर मास्क पहने, सामाजिक दूरी का पालन करें और भीड़भाड़ में नहीं फंसे.

यह लक्षण दिखे तो तत्काल करें डॉक्टर से संपर्क:
अगर घर के बीमार व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो रहा हो या फिर चलने- फिरने में परेशानी हो रही हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. उसका इलाज शुरू करें. घर में सामान्य परिस्थिति तक ही इलाज ठीक है. स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू करवा दें.

सब तक वैक्सीन की पहुँच बनाने में लगा गेट्स फ़ाउंडेशन

भारत में भी अधिक से अधिक वैक्सीन पहुंचाने की कोशिश में बीएमजीएफ
• सीईओ ने कहा, फाउंडेशन ने दिया कई कंपनियों को लोन ताकि जल्द से जल्द अधिक से अधिक वैक्सीन बन सकें
• वैक्सीन बनाने में उपयोग होने वाले मटेरियल का भी भंडारण किया, कंपनियों के बीच तकनीक का आदान-प्रदान भी किया
• किसी भी बाधा को वैक्सीन के पहुंच के रास्ते में नहीं खड़ा होना चाहिए – सीईओ मार्क सूज़मैन

पटना, 10 मई 2021 ।
भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप को देखते हुए बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) प्रयासरत है कि ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन जल्द से जल्द पहुंचे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके।
फाउंडेशन के सीईओ मार्क सूजमैन ने शनिवार को बताया कि बीएमजीएफ की विभिन्न वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बातचीत चल रही है। फाउंडेशन ने वैक्सीन के निर्माण व सुचारू वितरण के लिए 3000 लाख डालर से ज्यादा का निवेश किया है। इसके अलावा 3000 लाख डालर का लोन कंपनियों को दिया है ताकि जल्द से जल्द भारत में वैक्सीन पहुंच सके। इसमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य 2000 लाख वैक्सीन तैयार कराने का है जिस पर तेजी से काम चल रहा है।
सीईओ ने बताया कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़वाने के लिए फाउंडेशन ने कई देशों की कंपनियों के बीच तकनीक का आदान-प्रदान कराया है। इसके अलावा वैक्सीन बनाने में उपयोग होने वाले मटेरियल का भंडारण भी कर रखा है ताकि किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न हो। उन्होंने आश्वस्त किया है कि फाउंडेशन आगे भी जनहित में काम करता रहेगा।
जिनको आवश्यकता है उन सभी लोगों को टीके लगवाना बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स के लिए अहम कार्य है। गेट्स फाउंडेशन अपने संसाधनों का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए करेगा कि काम जारी रहे और सफल रहे।

निजी स्वास्थ्य संस्थानों में किसी भी आयुवर्ग के लाभार्थियों का नहीं होगा नि:शुल्क टीकाकरण

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• अब निजी स्वास्थ्य संस्थानों को खरीदना होगा वैक्सीन
• निजी स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण के लिए सिविल सर्जन को देना होगा आवेदन
• कोविन पोर्टल पर अपलोड करना होगा लाभार्थियों की सूची

बांका-
जिले में वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चल रहा है। अब 18 वर्ष से 44 वर्ष तक लाभुकों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। अब निजी स्वास्थ्य केंद्रों में किसी भी लाभार्थी का टीकाकरण नि:शुल्क नहीं होगा। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिया है। राज्य सरकार के निर्णयानुसार 45 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लाभार्थियों का कोविड 19 टीकाकरण निजी स्वास्थ्य संस्थाओं के माध्यम से भी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये कोविड 19 टीकाकरण निःशुल्क किया जा रहा था। इसी क्रम में भारत सरकार से प्राप्त निदेशानुसार 1 मई 2021 से निजी स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड टीकाकरण हेतु निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा अपने स्तर से वैक्सिन क्रय कर टीकाकरण किया जाना है। अब किसी भी आयुवर्ग के लिये निजी संस्थानों को निःशुल्क वैक्सिन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं करायी जायेगी।

निजी केंद्र में टीकाकरण के लिए लेना होगा अनुमति:
जारी पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि पंजीकरण के लिए इच्छुक संस्थानों को सिविल सर्जन को टीकाकरण के लिए सत्र स्थल पर उपयुक्त जगह की उपलब्धता, वैक्सिन की प्राप्ति के लिए टीकाकर्मी की उपलब्धता, वैक्सीन भंडारण की क्षमता एवं एईएफ प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारी की सूचना सहित आवेदन प्रस्तुत करना होगी। आवेदन प्राप्ति के उपरांत सिविल सर्जन द्वारा अपने स्तर से जांच कराकर निजी स्वास्थ्य संस्थानों को कोविड 19 टीकाकरण केन्द्र संचालन की स्वीकृति प्रदान की जायेगी।

अनुमति मिलने के बाद कोविन पोर्टल पर करना होगा पंजीकरण:
सिविल सर्जन से स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत कोविड 19 टीकाकरण सत्र स्थल के संचालन के लिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों को कोविन पोर्टल पर पंजीकृत किया जायेगा। निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा अपने स्तर से वैक्सीन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए टीकाकरण का कार्य संचालित किया जायेगा। निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा टीकाकरण से आच्छादित लाभार्थियों को विवरणी कोविन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

18 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले लाभुकों करना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन:

18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लाभार्थियों का कोविड 19 का टीकाकरण ऑनलाइन किया जायेगा। किसी भी परिस्थिति में ऑफलाइन अथवा ऑनस्पॉट रजिस्ट्रेशन के माध्यम से नही किया जायेगा। कोविड 19 टीकाकरण के दौरान इसका सघन अनुश्रवण एवं औचक निरीक्षण सभी स्तर पर कराना सुनिश्चित किया जायेगा। ताकि भारत सरकार द्वारा निर्धारित लाभार्थियों का ही टीकाकरण कराया जा सके।

किसी के जीवन के साथ जो किसी को जीवन दे उसे रक्तदाता कहते है -डॉ. एन .पी. गाँधी

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कोविड संकट काल मे गाँधी दम्पति ने किया रक्तदान

जहाँ एक और कोरोना महामारी में हर और इंसान अपनी जान को बचाने में लगा है वही ,दूसरी और कोटा के युवा कपल डॉ नयन प्रकाश गाँधी ओ नेगेटिव एवं श्रीमती प्रीति गाँधी ओ पॉजिटिव ने हाल ही में कोरोनकाल के दौरान कोविड ,हार्ट ,थैलीसीमिया ,दुर्घटना ग्रस्त मरीजो हेतु मेड़तवाल नवयुवक संघ कोटा द्वारा आयोजित एवं रक्तकोष फाउंडेशन एवं वर्ल्ड यूथ आर्गेनाइजेशन कोटा इकाई के सयुक्त सहयोग से हाल ही में बुधवार को मेड़तवाल छात्रावास विज्ञान नगर कोटा में आयोजित इस भव्य रक्तदान शिविर में रक्तदान किया । रक्तदान शिविर में मेड़तवाल वैश्य सेवा समिति कोटा के अध्यक्ष एवं पुर्व वरिष्ठ नगर नियोजक यूआईटी श्री एस एन गुप्ता ,राधेश्याम गुप्ता ,नवयुवक संघ अध्यक्ष गुंजन गुप्ता ,सचिव गोपाल गुप्ता , श्रीमती चंदा गुप्ता ,शैलेन्द्र गुप्ता ,विवेक गुप्ता ,हिमांशु गुप्ता ,हर्षिल गुप्ता ,वेदांशी गुप्ता ,वर्ल्ड यूथ आर्गेनाइजेशन एवं रक्तकोष फाउंडेशन कोटा इकाई से डॉ. नयन प्रकाश गाँधी एवं कई सीनियर एवं युवा युवती महिलाओ ने कोरोना काल के संकटकाल में जूझ रहे मरीजो की असमय मृत्यु को देखते हुए बढ़चढ़कर उनके जीवन हेतु रक्तदान किया । गाँधी ने बताया कि उनके लिए सौभाग्य का क्षण था कि अनगिनत लोगो के जीवन को कोविड केयर सेंटर के बेहतर प्रबंधन में दिन रात सेवारत डीडीपीएस एवं एलन ग्रुप के निदेशक नवीन माहेश्वरी एवं राजस्थान सरकार के निदेशक एवं सयुक्त सचिव योजना विभाग आर्थिकी एवं संखियिकी निदेशालय राजस्थान सरकार डॉ. ओम प्रकाश बैरवा के जन्मदिवस के सुअवसर पर वह सपत्नीक कोविड के इस विकट काल मे उन्होंने रक्तदान किया। गाँधी दिशा डेल्फी एजुकेशन सोसाइटी कोटा के मानद सदस्य भी है । गाँधी ने आगे रक्तकोष फाउंडेशन के सक्रिय कार्यकर्ता एवं वर्ल्ड यूथ आर्गेनाइजेशन कोटा इकाई के अध्यक्ष एवं सयुक्त निदेशक डॉ. नयन प्रकाश गांधी ने बताया कि आगामी लगातार 18 उम्र से 45 तक के वेक्सीन लगाने की होड़ से रक्तदान की ब्लड बैंकों में भारी कमी को कई जगह बताया जा चुका है । इसी को देखते हुए यह रक्तदान शिविर आयोजित किया गया ।रक्तदान आसान एवं सुरक्षित प्रक्रिया है।सामान्य व्यक्ति एक बार रक्तदान कर तीन जानें बचा सकता है।स्वस्थ व्यक्ति ही रक्तदान कर सकता है, जिनकी उम्र 18 से 65 वर्ष तक हो। रक्तदाता की हीमोग्लोबीन 12.5 एवं वजन 45 किग्रा से कम नहीं होना चाहिए। – रक्तदान में कम से कम तीन माह का अंतर होना चाहिए।कई रिसर्च में बताया जा चुका बे ,रक्तदान करने से शरीर और स्वस्थ बनता है। डोनेट करने के बाद 24 घंटे में वापस शरीर में उतना ही ब्लड बन जाता है। बशर्ते आप खान-पानी सही रखें।रक्‍त के कणों का जीवन सिर्फ 90 से 120 दिन तक का होता है। प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्‍त का क्षय होता रहता है और नया रक्‍त बनता जाता है इसका हमें कोई अनुभव नहीं होता।ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है। एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। शिविर में कोरोना गाइड लाइन के नियमो का पालन किया गया ,अंत में कृष्णा रोटरी ब्लड बैंक द्वारा सभी रक्तदाताओं को सहभागिता प्रमाण पत्र दिया गया ।साथ ही डिजिटल रूप से रक्तदान जीवनदान सम्मान प्रशंसा प्रमाण पत्र वर्ल्ड यूथ ऑर्गेनेइज़ेशन एवं रक्तकोष फाऊंडेशन कोटा इकाई द्वारा भी सभी रक्तदाताओं को दिए जाएंगे । गाँधी ने बताया कि वैक्सीन से पूर्व हर स्वस्थ युवा युवती महिला पुरुष को रक्तदान अवश्य करना चाहिए ताकि कोरोनकाल में हुई ब्लड बैंकों में रक्त कमी को पूरा किया जा सके ,क्योकि वेक्सीन लगने के कुछ महीनों तक रक्तदान नही किया जा सकता है और आगामी कोरोना एवं हार्ट ,थैलीसीमिया ,डायबिटीज एवं आपातकालीन दुर्घटना ग्र्स्त मरीजो की बढ़ती संख्या एवम कोरोना के भयावह स्थिति को देखते हुए ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी निरन्तर देखी जा रही है अतः मानव धर्म निभाते हुए अफवाहों से दूर रहकर रक्तदान कर मानवीय जीवन को बचाने में हर जागरूक भारतीय इंसान होने के नाते पहल करनी चाहिए और दूसरों को प्रेरित करना चाहिए ।

“बच्चों के जीवन भर की यात्रा में उनकी सुरक्षा, संरक्षण और खुशहाली सुनिश्चित करें “: नफीसा शफीक, यूनिसेफ

रेलवे सुरक्षा बल (RPF), CHILDLINE और यूनिसेफ ने बिहार के 11 रेलवे स्टेशनों पर ‘सुरक्षित सफर’ की शुरुआत की

वापस लौटते हुए प्रवासियों के बीच संकटग्रस्त बच्चों को सहयोग एवं सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास

CHILDLINE को पिछले साल संकटग्रस्त बच्चों के संबंध में कुल 13,039 कॉल प्राप्त हुए

पटना, 8 मई 2021:

सुरक्षित सफर – प्रवासी बच्चों और परिवारों के सहयोग के साथ उन तक पहुंचने के एक संयुक्त पहल की शुरुआत आज रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF), CHILDLINE और UNICEF द्वारा एक ऑनलाइन ओरिएंटेशन के माध्यम से की गयी । बिहार में 11 रेलवे प्लेटफार्मों पर 150 से अधिक युवा मोबिलाइज़र तैनात किए गए हैं। वे COVID-19 उपयुक्त व्यवहार (CAB) के बारे में जागरूकता बढ़ाने में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और CHILDLINE की सहायता करेंगे और वापसी करने वाले प्रवासियों के बीच से उपेक्षा, दुरुपयोग और शोषण के प्रति संवेदनशील बच्चों और महिलाओं की पहचान करेंगे। वे उन्हें तत्काल सहायता (भोजन, चिकित्सा, अन्य आवश्यक जानकारियों ), के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और कल्याण हेतु विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए उपलब्ध कोविड देखभाल और बाल संरक्षण सेवाओं से जोड़ेंगे। यह जानकारी यूनिसेफ बिहार के बाल संरक्षण अधिकारी, गार्गी साहा ने प्रदान किया । 11 रेलवे स्टेशनों में गया, नरकटियागंज, मुजफ्फरपुर, कटिहार बक्सर, हाजीपुर, भागलपुर, दरभंगा, पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर और छपरा शामिल हैं।

यह पहल के अंतर्गत जीआरपीएफ, आरपीएफ, चाइल्डलाइन जैसे सहयोगी विभागों एवं संगठनों और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों का ऑनलाइन माध्यम से उन्मुखीकरण किया गया।

पिछले साल COVID -19 के कारण रिवर्स माइग्रेशन के कारण बाल शोषण की घटनाओं में वृद्धि देखी गयी, जिसमें बाल श्रम, तस्करी, घरेलू हिंसा जैसे जोखिम शामिल थे। COVID 19 की दूसरी लहर के दौरान, बच्चे और युवा तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। इस पहल का लक्ष्य लगभग 10 लाख प्रवासियों तक पहुंचना है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर शामिल हैं।

“महामारी के कारण पैदा हुआ आर्थिक संकट और पलायन, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु हैं, जिसके माध्यम से हम संवेदनशील बच्चों और महिलाओं की पहचान कर सकते हैं और तत्काल और दीर्घकालिक सहयोग प्रदान कर सकते हैं”, सुश्री नफीसा बिन्ते शफिक, यूनिसेफ, बिहार के प्रमुख ने कहा। सरकार और अन्य हितधारकों को बच्चे के पूरे जीवन चक्र के दौरान उनकी सुरक्षा और खुशहाली सुनिश्चित करना है।

मुज़फ़्फ़रपुर के एसपी रेल अशोक कुमार सिंह ने कहा, “हम महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोगों के प्रति एक उदाहरण स्थापित करने के लिए सभी भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि इन मामलों की अभियोजन और सजा की दर बढ़ सके”। उन्होंने लोगों से यह आग्रह किया कि पुलिस की मदद करें ।

सुश्री बीना कुमारी, एसपी, सीआईडी (कमजोर वर्ग), ने कहा, “बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को देखने के लिए प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ) होना चाहिए।” उन्होंने आगे बताया कि कर्मियों को बाल मनोविज्ञान की समझ होनी चाहिए ताकि बच्चों में यह विश्वास पैदा हो कि पुलिस और अन्य नामित अधिकारी उनकी ज़रूरत पड़ने पर उनकी मदद करने के लिए हैं।

सुशोभन सी, समन्वयक बिहार, चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन ने विस्तार पूर्वक चाइल्ड लाइन 1098 के बारे में बताया. जानकारी दी कि 1098 सारे SAARC देशो में भी कार्यरत है. उन्होंने कहा की पिछले वर्ष CHILDLINE को बिहार से बच्चों से कुल 13039 कॉल आये थे,जहाँ उन्हें आपातकालीन सेवा की जरुरत थी । श्री सुशोभन ने साइलेंट काल्स के बारे में बताया, जिसमे कॉल करने वाला व्यक्ति चुप रहता है और चाइल्ड लाइन के टीम को उनका विश्वास जितना पड़ता है तब जा कर बच्चे कुछ बोल पाते है.

निपुण गुप्ता ,संचार विशेषज्ञ UNICEF, बिहार ने मीडिया के महत्व के बारे में बताया , सकारात्मक खबरों से लोगो में एक विश्वास जागता है और सही सूचना जनता तक पहुचती हमें उम्मीद , सहयोग और सकारात्मकता
के संक्रमण को फैलाना है ओर covid को मिटाना है

सनत कुमार सिन्हा, निदेशक बाल सखा ने सभी को धन्यवाद दिया तथा रेलवे चाइल्ड लाइन टीम का मनोबल बढाया. उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के समय वालंटियर्स और रेलवे चाइल्ड लाइन की टीम निरंतर अपने काम में लगी हुई है.

सैफुर रहमान, बाल सुरक्षा सलाहकार UNICEF बिहार, ने परियोजना के डिजाईन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया
रिचा बाजपेयी ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।

मुंगेर जिला टास्क फोर्स कि सहायता से जिला स्तर पर खोजे जाएंगे ऐसे लाभार्थी और किए जाएंगे पंजीकृत

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-अब पहचान पत्र नहीं होने पर भी लगेगा कोरोना का टीका
– केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय ने जारी की गाइड लाइन


– बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे इस श्रेणी में

मुंगेर मई 2021

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय ने कोई पहचान पत्र न रखने वाले लोगों का टीकाकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक ऐसे लोगों को कोविन एप में पंजीकृत किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

मुंगेर के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. पंकज सागर ने बताया, मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, एनपीआर कार्ड या पेंशन पेपर में से किसी एक पहचान पत्र का होना जरूरी है लेकिन अगर किसी के पास यह पहचान पत्र नहीं हैं तो उन्हें वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता। इसी के मद्देजनर मंत्रालय ने ऐसे लोगों का टीकाकरण कराने के लिए गाइलाइन जारी की है। इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों को ढूंढने का काम जिले की टास्क फोर्स करेगी। वह अल्पसंख्यक विभाग, सामाजिक न्याय विभाग व समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है। इन लोगों का कोविन एप में पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिंग दर्ज कराया जाएगा। मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी। इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे जिसके बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

उन्होंने बताया , गाइडलाइन के मुताबिक जिले की टास्क फोर्स जिलास्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी जो अलग-अलग समूह के लोगों की पहचान के लिए फैसीलिटेटर नियुक्त करेगा। यह फैसीलिटेटर लाभार्थियों की पहचान करेगा। नोडल अधिकारी उपलब्ध डेटा के मुताबिक इन लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन सत्र का आयोजन कराएंगे।

कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध

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– प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर संस्थागत प्रसव के लिए आने वाली कोरोना संक्रमित गर्भवती को रेफर किया जाता है सदर अस्पताल
– कोरोना संक्रमित महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल लखीसराय में विशेष व्यवस्था

लखीसराय, 07 मई-

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच कोरोना गाइडलाइन और लॉक डॉउन के नियमों का पालन करते हुए सदर अस्पताल लखीसराय सहित जिले के रेफरल अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जा रहा है। सदर अस्पताल लखीसराय में कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं का भी सुरक्षित प्रसव कराया जा रहा है।
महिलाओं का सुरक्षित प्रसव प्रसूति एवम स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर और जीएनएम नर्स के द्वारा कराया जा रहा-
लखीसराय के सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र चौधरी ने बताया, जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जिले के सभी रेफरल अस्पताल के साथ- साथ सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव प्रसूति एवम स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर और जीएनएम नर्स के द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने बताया, जिले के रेफरल अस्पताल, प्राथमिक एवम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए आने वाली कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव वहां नहीं कराकर सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल लखीसराय रेफर कर दिया जाता है।
सदर अस्पताल लखीसराय में उपलब्ध है कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की सुविधा :
सदर अस्पताल लखीसराय के अस्पताल प्रबंधक नंदकिशोर भारती ने बताया यहां कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की गई है। यहां साफ- सफाई के साथ विशेष रूप से सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई है। यहां कोरोना प्रोटोकॉल का बहुत ही सख्ती के साथ पालन किया जाता है। संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए अलग से लेबर रूम का भी निर्माण किया गया है। कोरोना संक्रमित महिला के प्रसव के लिए आने के बाद लेबर रूम का विशेष तौर पर सैनिटाइजेशन किया जाता है। यहां काम करने वाले सभी स्टाफ के लिए मास्क, फेसशील्ड, पीपीई किट, ग्लव्स के साथ ही हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही बायो वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सभी मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सावधानी पूर्वक निस्तारण सुनिश्चित किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोरोना का संक्रमण फैलने न पाए और लोगों को इससे बचाया जा सके।
इन मानकों का ख्याल रख संक्रमण से रहें दूर
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा ख्याल रखें।
– मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– घर से बाहर निकलने पर निश्चित रूप से सैनिटाइजर साथ रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

खगड़िया जिले में कोविड-19 गाइडलाइन के पालन के साथ मनाया गया गोदभराई उत्सव

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– सभी प्रखंडों में कोविड-19 से बचाव को लेकर भी किया गया जागरूक
– गर्भवती एवं धातृ महिला को उचित पोषण की दी गई जानकारी

खगड़िया, 07 मई-

जिले में शुक्रवार को पूर्व से निर्धारित तिथि के अनुसार सभी प्रखंडों में गोदभराई उत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कोविड-19 गाइडलाइन के पालन के साथ मनाया गया। इस दौरान ऑगनबाड़ी सेविकाओं ने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण के तहत लाभार्थियों के घर जाकर गोदभराई की रस्म अदा की। साथ ही लाभार्थियों को पोषण से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कोविड-19 से बचाव के लिए जारी गाइडलाइंस का पालन किया गया। मंगल गीतों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया और गर्भवती महिला को उपहार के रूप में पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे। महिलाओं को उपहार स्वरूप पोषण की थाली भेंट की गयी, जिसमें सतरंगी व अनेक प्रकार के पौष्टिक भोज्य पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर गोदभराई की रस्म पूरी की गई। महिलाओं को पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इधर, आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह, एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार समेत संबंधित क्षेत्र की सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका ने क्षेत्र सेविका से कार्यक्रम की जानकारी ली और कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
– स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को दे सकती है जन्म :-
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह ने कहा, गोदभराई रस्म में सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ाकर और तिलक लगा कर उनके गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई। गर्भवतियों की गोद में पोषण संबंधी पौष्टिक आहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा, दाल आदि रखकर सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी गई। बताया गया कि गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पौष्टिक आहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।
– कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाया गया गोदभराई उत्सव :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए जिले के सभी प्रखंडों में गोदभराई उत्सव मनाया गया। इस दौरान शारीरिक दूरी, सैनिटाइजेशन समेत सुरक्षा के मद्देनजर अन्य बातों का विशेष ख्याल रखा गया। ताकि संक्रमण नहीं हो सके और सुरक्षित रहकर उक्त कार्यक्रम का समापन हो सके । वहीं,इस दौरान महिलाओं को बताया, शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। वहीं, कहा कि सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– एनीमिया प्रबंधन की दी गई जानकारी:-
परवत्ता सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने बताया, गर्भवती माता, किशोरियां व बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को भी प्रति सप्ताह आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक-एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए।
– डायरिया प्रबंधन की दी गई जानकारी:-
शिशुओं में डायरिया शिशु मृत्यु का कारण भी है। छह माह तक के बच्चों के लिए केवल स्तनपान (ऊपर से कुछ भी नहीं) डायरिया से बचाव करता है। साफ-सफाई एवं स्वच्छ भोजन डायरिया से बचाव करता है। डायरिया होने पर लगातार ओआरएस का घोल एवं 14 दिन तक जिंक देना चाहिए।

– स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर दिया गया बल:-
साफ पानी एवं ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है। शौच जाने से पहले एवं बाद में तथा खाना खाने से पूर्व एवं बाद में साबुन से हाथ धोना चाहिए। घर में तथा घर के आस-पास सफाई रखनी चाहिए। इससे कई रोगों से बचा जा सकता है।

कोविड संक्रमण काल में अनाथ हुए बच्चों का चाइल्ड केयर होम में रखा जाएगा ख़्याल

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– कल्याण विभाग के निदेशक – सह – मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों को दिया निर्देश
– राज्य में संचालित सभी बुनियाद केंद्रों का कोविड केयर सेंटर एवं टीकाकरण केंद्र के रूप में होगा उपयोग

बांका, 7 मई
कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में कई दंपत्तियों को अपनी जान गवानी पड़ी है. ऎसे में उनके पीछे उनके बच्चों की देखभाल करने वाला कोई शेष नहीं बचा है. इस महामारी में किसी ने अपने माँ-पिता में से किसी एक को खोया है तो किसी ने दोनों को. इस महामारी ने कितने बच्चे को अनाथ किया है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा तो सामने नहीं आया है, लेकिन ऐसे बच्चों को आज आगे बढ़कर मदद करने की दरकार है. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के निदेशक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सक्षम योजना) राज कुमार ने सभी जिले के जिला पदाधिकारियों को कोविड महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर आदेश जारी किया है. जिन बच्चों ने कोविड-19 की वजह से अपने परिवार का सपोर्ट खो दिया है या कोविड-19 के चलते उनके मां- बाप की जान चली गई है उन्हें अब किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत देखभाल और सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं को सुरक्षित रखने को समाज कल्याण विभाग ने गंभीरता दिखाई है-
कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उपजी परिस्थितियों तथा कोरोना संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने तथा समाज में सबसे वंचित समूहों यथा – बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं को सुरक्षित रखने के लिए समाज कल्याण विभाग ने गंभीरता दिखाई है. इसको लेकर समाज कल्याण विभाग के निदेशक – सह – मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी राज कुमार ने सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों को अनुरोध पत्र जारी किया है, जिसमें वंचित समूहों को जिला स्तर पर पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है.

बच्चों को चाइल्ड ट्रैफिकिंग में जाने से रोकने एवं इसके नियमित अनुश्रवण के निर्देश:

जारी पत्र में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की स्थिति में यदि कोई बच्चा अनाथ होता है तो प्रभावित बालक व बालिका को अविलंब चाइल्ड केयर होम में रखने के लिए जरूरी व्यवस्था किये जाने की भी बात कही गयी है. साथ ही कहा गया है इन परिस्थितियों में ऐसे अनाथ बच्चों को ट्रैफिकिंग में वृद्धि हो सकती है. अतः इसके नियमित अनुश्रवण की आवश्यकता पर भी बल देने के निर्देश दिए गए हैं। जारी पत्र में कहा गया है कि समाज में अभी वंचित समूह यथा – दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किए जाने की आवश्यकता है ताकि कोरोना महामारी की कठिन परिस्थिति में उन्हें सुरक्षित रखा जा सके.

101 अनुमंडलों में संचालित बुनियाद केंद्रों का कोविड केयर सेंटर अथवा वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में होगा उपयोग:

जारी पत्र में कहा गया है कि समाज कल्याण विभाग के अधीन कार्यरत स्टेट सोसायटी फॉर अल्ट्रा पुअर एंड सोशल वेलफेयर के सक्षम योजना अंतर्गत सभी 101 अनुमंडलों में संचालित बुनियाद केंद्र का कोविड केयर सेंटर अथवा वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में उपयोग किया जा सकता है. सभी जिले में संचालित मोबाइल थेरेपी एवं और आउटरीच वैन “संजीवनी सेवा” का उपयोग आउटरीच कार्य अथवा टीकाकरण के कार्य में यथासंभव करने की सलाह भी दी गयी है. वहीं कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु की परिस्थिति में लाभुक के परिवार को वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना का लाभ नियमानुसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

सस्ती कीमत में सूती कपड़े का डबल लेयर मास्क उपलब्ध करा रही जीविका दीदी

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खरीक प्रखंड में आस्था जीविका महिला संकुल संघ कर रहा काम
क्षेत्र के हर परिवार को छह-छह मास्क कराया जाएगा उपलब्ध

भागलपुर, 7 मई

कोरोना काल में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ हर वर्ग और समूह के लोग अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. सेविका, सहायिका या फिर जीविका दीदी, हर कोई अपने स्तर से इस महामारी पर नियंत्रण करने में योगदान दे रहा है. जीविका दीदी कोरोना से लड़ने के लिए लोगों को सूती कपड़े का बना डबल लेयर मास्क उपलब्ध करा रही हैं.खरीक प्रखंड में आस्था जीविका महिला संकुल संघ इस दिशा में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रहा है. इस संघ में 102 जीविका दीदी काम कर रही हैं. कोरोना से बचने के लिए क्षेत्र के हर परिवार को छह-छह मास्क उपलब्ध कराया जाएगा. इसलिए ये लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. जल्द से जल्द लोगों को मास्क मिल जाए, इस बात को ध्यान में रखते हुए ये लोग अपना काम कर रही हैं.

पंचायत प्रतिनिधि करेंगे बटवाने का काम:
खरीक प्रखंड में जीविका के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर बालदेव प्रसाद कहते हैं जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, हमलोग उसमें अपनी भूमिका निभा रहे हैं. पहली लहर के दौरान भी जीविका दीदी ने मास्क बनाकर लोगों को उपलब्ध करवाया था. दूसरी लहर में चुनौती बड़ी है, इसलिए हमलोगों ने बड़ा काम लिया है. इस बार सूती कपड़े का डबल लेयर मास्क बनाया जा रहा है. इस मास्क को हमलोग प्रखंड विकास पदाधिकारी को देते हैं. वह फिर पंचायत स्तर के प्रतिनिधि को देते हैं जो इसे बंटवाने का काम करते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि सूती कपड़े का बना हुआ डबल लेयर एक मास्क की कीमत सिर्फ ₹15 पड़ता है.

रोजगार का भी हो रहा सृजन:
बालदेव प्रसाद कहते हैं इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कोरोना काल में लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. अभी के इस माहौल में रोजगार मिलना आसान बात नहीं है लेकिन हमारे संघ में 102 महिलाएं काम करती हैं. जिनमें छह प्रवासी हैं. बाहर से आने के बाद इनलोगों को कामकाज की दिक्कत हो गई थी, लेकिन उन्हें मास्क बनाने का काम उपलब्ध कराया गया.
इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– जरूरी नहीं हर सर्दी-खांसी कोरोना ही है, इसलिए, निर्भीक होकर सकारात्मक सोच के साथ कराएं जाँच।
– अधिक जरूरी पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें ।
– घर में सकारात्मक माहौल बनाएं और रचनात्मकता कार्य करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।