पहचान पत्र नहीं होने पर भी लगेगा टीका

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• स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन
• जिला स्तर पर खोजे जाएंगे ऐसे लाभार्थी और किए जाएंगे पंजीकृत
• बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे इस श्रेणी में

बांका, 07 मई 2021

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई पहचान पत्र न रखने वाले लोगों का टीकाकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इसके मुताबिक ऐसे लोगों को कोविन ऐप में पंजीकृत किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे. इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला शासन की होगी.

मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, एनपीआर कार्ड या पेंशन पेपर में से किसी एक पहचान पत्र का होना जरूरी है लेकिन अगर किसी के पास यह पहचान पत्र नहीं हैं तो उन्हें वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता. इसी के मद्देजनर मंत्रालय ने ऐसे लोगों का टीकाकरण कराने के लिए गाइलाइन जारी की है. इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे.

ऐसे लोगों को ढूंढने का काम जिले की टास्क फोर्स करेगी. वह अल्पसंख्यक विभाग, सामाजिक न्याय विभाग व समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है. इन लोगों का कोविन ऐप में पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिंग दर्ज कराया जाएगा. मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी. इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे जिसके बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा.

गाइडलाइन के मुताबिक जिले की टास्क फोर्स जिलास्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी जो अलग-अलग समूह के लोगों की पहचान के लिए फैसीलिटेटर नियुक्त करेगा. यह फैसीलिटेटर लाभार्थियों की पहचान करेगा. नोडल अधिकारी उपलब्ध डेटा के मुताबिक इन लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन सत्र का आयोजन कराएंगे.

कोरोना से ठीक हुए लोग भी लें टीका नहीं होगा कोई साइड इफेक्ट

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कोरोना की चेन तोड़ने के लिए अधिक से अधिक लोगों को टीका लेने की जरूरत
जितनी जल्दी अधिक से अधिक लोग टीका लेंगे, उतनी है जल्द कोरोना खत्म होगा

बांका, 7 मई
अभी कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में भी आ रहे हैं. दूसरी ओर कोरोना से निजात दिलाने को लेकर टीकाकरण अभियान भी चल रहा है. टीकाकरण अभियान में लोग बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रहे हैं, लेकिन कोरोना से ठीक हुए कुछ लोग तय नहीं कर पा रहे हैं कि टीका लें या नहीं. विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से ठीक हुए लोगों को भी टीका लेना चाहिए. इसमें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है.
कोरोना का टीका सबको लेना है-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कोरोना का टीका सबको लेना है. अगर सभी लोग नहीं लेंगे तो कोरोना को हमलोग कैसे हरा पाएंगे. इसलिए टीका तो हर किसी को लेना है. जो लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं उन्हें भी लेना है. उन्हें भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. जब सभी लोगों का टीकाकरण हो जाएगा, तभी हमलोग कोरोना की चेन तोड़ने में कामयाब हो पाएंगे. इसलिए जो लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं, वे लोग भी टीका लेने के लिए आगे आयें.

ठीक होने के 40 दिन बाद लें कोरोना का टीका:
डॉ चौधरी कहते हैं कोरोना से जो लोग ठीक हो गए हैं, वे लोग ठीक होने के 40 दिन बाद टीका लें. किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा. माना जाता है कि संक्रमण के 45 दिन पूरा हो जाने के बाद व्यक्ति टीका लेने योग्य हो जाता है. निगेटिव आने के 40 दिन बाद टीका लेने पर कोई परेशानी नहीं होती है.

अफवाह पर नहीं दे ध्यान:
डॉ चौधरी कहते हैं कि टीका को लेकर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों को दूर रहने की जरूरत है. पहले इसके साइड इफेक्ट की बात कही जा रही थी जो कि बिल्कुल भी सच नहीं है और अब कोरोना पीड़ित के सामने टीका लेने को लेकर संशय की स्थिति पैदा की जा रही है. जो सही नहीं है.किसी भी व्यक्ति को टीका लेने से कोई भी नुकसान नहीं होता है. हर किसी को कोरोना का टीका लेना है. इस बात को लोगों को याद रखनी चाहिए.

कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में करें पालन:
डॉ चौधरी कहते हैं कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में पालन करें. घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहनें. भीड़भाड़ में जाने से बचें और सामाजिक दूरी का पालन करें. दो व्यक्ति के बीच बात करते वक्त 2 मीटर की दूरी निश्चित तौर पर रखें. ऐसे उपाय करने से कोरोना की चपेट में आने से आप बचे रहेंगे.

डॉ. पी. डी. पाटील का निस्वार्थ, सेवा-भावी कार्य आदर्शवत कृष्ण प्रकाश का प्रतिपादन; ‘सूर्यदत्ता’ की ओर से डॉ. पी. डी. पाटिल को पहला ‘सूर्यदत्ता सेवा-रत्न राष्ट्रीय पुरस्कार-२०२१’ प्रदान

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पुणे : “शांत, संयमित रहकर दूरदर्शी और सामाजिक रूप से जागरूक डॉ. पी. डी. पाटिल का निस्वार्थ और सेवाभावी दृष्टिकोण के साथ किया गया समाज कार्य आदर्शवत है. शिक्षा, साहित्य, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र के लिए उनका कार्य प्रेरणादायक है, ऐसा प्रतिपादन पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश ने किया. सुर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट की ओर से सूर्यदत्ता एज्यु-सोशियो कनेक्ट इनिशिएटिव्ह के अंतर्गत उल्लेखनीय वैद्यकीय और सामाजिक कार्य के लिए अभिमत विद्यापीठ के कुलपती डॉ. पी. डी. पाटील को ‘सुर्यदत्ता सेवा-रत्न राष्ट्रीय पुरस्कार-२०२१’ कृष्ण प्रकाश के हाथों प्रदान किया गया.
इस समय सूर्यदत्ता के प्रा. डॉ. संजय चोरडिया ने डॉ. पी. डी. पाटील के नाम से मेरिट स्कॉलरशिप देने की घोषणा की. पिंपरी के डॉ. डी. वाय. पाटील विद्यापीठ में के विभिन्न चिकित्सा विषयों में टॉपर आये छात्र को पदवी प्रदान समारोह के दिन 11,000 रुपये का नकद पुरस्कार और स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा.
पिंपरी के डॉ. डी. वाय. पाटील सभागृह में संपन्न हुए कार्यक्रम में डॉ. डी. वाय. पाटील विद्यापीठ के  प्र-कुलगुरू डॉ. भाग्यश्री पाटील, विश्वस्त संचालक डॉ. स्मिता जाधव, कुलगुरू डॉ. एन. जे. पवार, सुर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया, उपाध्यक्षा और सचिव सुषमा चोरडिया, सल्लागार सचिन इटकर, संचालक प्रा. सुनील धाडीवाल, प्रा. मिलीना राजे उपस्थित थे. कोरोना के सभी नियमों का पालन करके डॉ. डी. वाय. पाटील विद्यापीठ में के कुलगुरू, कुलसचिव, अधिष्ठाता इनके उपस्थिति में ये कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. फेसबुक और युट्युब पे इस कार्यक्रम का लाइव प्रक्षेपण प्रसारित किया गया.
कृष्ण प्रकाश ने कहा, “कोरोना के कल में डॉ. पी. डी. पाटील और उनके टीम ने किया कार्य, अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन, डी. वाय. पाटील विद्यापीठ के माध्यम से किया गया शिक्षा कार्य सराहनीय है. उनकी दृढ़ता, कड़ी मेहनत, इच्छाशक्ति, हर काम में समर्पण का भाव प्रभावशाली है, ऐसे सेवाभावी व्यक्ति का सूर्यदत्ता परिवारने सम्मान किया और ओ पुरस्कार प्रदान करने के लिए मुझे बुलाया इसलिए मैं शुक्रगुजार हु. इससे ‘सूर्यदत्ता’ का भी सम्मान बढ़ा है. डॉ. डी. वाय. पाटील, सूर्यदत्ता जैसी संस्थाएं अच्छा काम कर रही हैं.”
डॉ. पी. डी. पाटील न कहा, “पिछले एक साल में कोरोना संकट में हमारे सभी डॉक्टरों, नर्सों, चिकित्सा कर्मचारियों की कड़ी मेहनत ने हजारों रोगियों का अच्छा इलाज किया है, इसकी ख़ुशी होती है. अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा हमारे सभी हॉस्पिटल में उपलब्ध है. राज्य के विभिन्न हिस्सों से, विभिन्न सामाजिक स्तर के मरीज यहां इलाज करके ठीक हुए हैं. उन्हें भोजन, स्वच्छता, सकारात्मक रहने के लिए मार्गदर्शन के रूप में ऐसी कई चीजें प्रदान की जाती हैं. यह पुरस्कार केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि हमारे सभी मेडिकल स्टाफ और संस्था के लिए है.”
भगवान और पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील की बदौलत हमारे सभी डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ लगातार इस कठिन समय में स्वर्गदूतों की तरह काम कर रहे हैं. अस्पताल २००६ में बनाया गया था और आज भी इसका इस्तेमाल हो रहा है. अच्छे कर्म करने के लिए मन को प्रेरित करना, कई लोगों के चेहरे पर की खुशी कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करती है. मुझे अपने सभी सहयोगियों पर गर्व है जो कड़ी मेहनत करते हैं,” ऐसा भी  डॉ. पी. डी. पाटील ने कहा.
प्रा. डॉ. संजय चोरडिया ने कहा  “डॉ. पी. डी. पाटील इन्होने वैद्यकीय और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देते हुए देश -विदेश के कई विद्यार्थियों को वैद्यकीय ज्ञान दिया है. इस साल में कोरोना संकट में गरीबों और जरूरतमंदों को निस्वार्थ, तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की उनकी पहल महत्वपूर्ण है. कई अन्य व्यक्ति, संस्था और निजी-सरकारी अस्पताल ऐसा कार्य कर रहे हैं.  ऐसे कठिन समय में अच्छा कार्य करने वाले व्यक्तियों को हर साल यह पुरस्कार दिया जायेगा. डॉ. पी. डी. पाटील को सम्मानित करते हुए मुझे खुशी हो रही है.”
सचिन इटकर ने धन्यवाद ज्ञापित किये. डॉ. पी. डी. पाटील को उनके सेवा-उन्मुख कार्यों के लिए धन्यवाद नहीं देना चाहिए बल्कि इस कार्य के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए, स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में एक ब्रांड बन गया है, और उनका समर्पित कार्य, दृढ़ता और इच्छाशक्ति हम सभी को प्रेरित करती है,ऐसा इटकर ने कहा. सायली देशपांडे ने सूत्रसंचालन किया. डॉ. एन. जे. पवार ने प्रास्ताविक किया.

कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीज घर पर भी हो सकते हैं ठीक

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पीड़ित को होम आइसोलेशन में रहकर नियमों का करना होगा पालन

घर के सदस्यों से दूरी बनाकर डॉक्टर की बताई गई दवाओं का करें सेवन

बांका, 6 मई
कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं. इनमें कुछ लोग हल्के लक्षण वाले होते हैं तो कुछ गंभीर. गंभीर मरीज को तो अस्पताल में भर्ती करना होता है, लेकिन हल्के लक्षण वाले मरीज अगर कुछ बातों को ध्यान में रखें तो घर पर भी आसानी से ठीक हो सकते हैं.
कोरोना के गंभीर मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती होना चाहिए:
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना के गंभीर मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती होना चाहिए. खासकर तब जब मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही और अस्पताल में भी मरीज भरे जा रहे हैं. ऐसे मरीज जिनमें लक्षण नहीं है और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है या फिर कमजोर लक्षण वाले मरीज घर पर भी कुछ सावधानियां बरतकर स्वस्थ हो सकते हैं.

सबसे पहले खुद को कर लें अलग:
डॉ चौधरी कहते हैं कोरोना के लक्षण पता चलने के बाद सबसे पहले होम आइसोलेशन में चले जाएं. इस बात का ध्यान रखें कमरा हवादार हो. इसके लिए कमरे की सारी खिड़कियां खोल दें. साथ ही अपने इस्तेमाल की चीजों को अलग कर लें. बाथरूम अगर कमरे से जुड़ा हो तो और भी अच्छी बात है. इससे आपसे दूसरे में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा.

डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई खाएं:
डॉ चौधरी कहते हैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को खुद से अपना इलाज नहीं करना चाहिए. जैसे ही कोरोना के लक्षण महसूस हो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और उनकी बताई गई दवा का सेवन करना चाहिए. लगातार शरीर का तापमान अधिक हो और दर्द हो तो 4 से 6 घंटे के अंतराल पर डॉक्टर द्वारा बताई गई बुखार की दवा का सेवन करना चाहिए.

शरीर में नहीं होने दें पानी की कमी:
डॉ चौधरी कहते हैं कोरोना मरीजों को शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए. पानी पीते रहना चाहिए. अगर आपको किसी भी चीज का स्वाद पता नहीं भी चल रहा है तो पौष्टिक भोजन करते रहें. हालांकि किसी भी तरह के भोजन करने से कोरोना के इलाज होने की बात का अभी तक पता नहीं चला है, लेकिन पौष्टिक भोजन करते रहें. इससे आपका शरीर जल्द स्वस्थ होने के लिए तैयार रहेगा.

कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में करें पालन: डॉ चौधरी कहते ह कि इन सब बातों के अलावा कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें. घर से बाहर नहीं निकलें. घर पर भी किसी से बात करते वक्त मास्क लगा लें और सामाजिक दूरी का पालन करें. ऐसा करते रहने से आप जल्द कोरोना से ठीक हो जाएंगे और आपसे दूसरों में भी संक्रमण नहीं होगा.

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– जरूरी नहीं हर सर्दी-खांसी कोरोना ही है, इसलिए, निर्भीक होकर सकारात्मक सोच के साथ कराएं जाँच।
– अधिक जरूरी पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें ।
– घर में साकारात्मक माहौल बनाएं और रचनात्मकता कार्य करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

मुंगेर में कुल 9918 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में 7596 हुए हैं स्वस्थ्य

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– जिले में एक्टिव केस 2242, गुरुवार को मिले 435 कोरोना पॉजिटिव
– कोरोना जांच के लिए लिया गया है कुल 464772 लोगों का सैम्पल

मुंगेर, 06 मई-

मुंगेर में गुरुवार तक कुल 9918 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से कुल 7596 मरीज कोरोना संक्रमण को हराकर स्वस्थ्य हो चुके हैं। सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र आलोक ने बताया जिले में लोगों के कोरोना संक्रमित होने की तुलना में अच्छी खासी संख्या में लोग कोरोना संक्रमण से जीतकर स्वस्थ्य भी हो रहे हैं।
गुरुवार को जिले में कुल 435 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए –
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र आलोक ने बताया गुरुवार को जिले में कुल 435 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं| जिसमें 296 पुरुष और 139 महिलाएं हैं। जिले के विभिन्न आइसोलेशन सेंटर में या होम आइसोलेशन में गुरुवार तक कुल 1376 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 50 मरीज मुंगेर के आइसोलेशन में भर्ती हुए जबकि 45 मरीजों को दूसरे जगह रेफर भी किया गया है। गुरुवार को 17 कोरोना पॉजिटिव मरीज मुंगेर के आइसोलेशन सेंटर में भर्ती किए गए हैं। उनके मुताबिक जिले के कुल 79 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण वजह से हो चुकी है। वहीं मुंगेर से बाहर जिले के कुल 15 लोगों ने भी कोरोना संक्रमण की वजह से अपनी जान गवां दी है।
कोरोना जांच के लिए कुल 464772 लोगों का सैम्पल लिया गया-
उन्होंने बताया कि जिले में गुरुवार तक कोरोना जांच के लिए कुल 464772 लोगों का सैम्पल लिया गया है। जिसमें से अभी कुल 2242 एक्टिव केस है। जिले में एंटीजन कोरोना जांच के लिए कुल 806 लोगों का सैम्पल लिया गया था। इसी तरह पीएमसीएच लैब पटना के लिए कुल 586 लोगों का सैम्पल संग्रहित किया गया। इसके अलावा ट्रूनेट जांच के लिए मुंगेर लैब में कुल 59 सैम्पल लिए गए थे ।
कोरोना गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन करते हुए ही अपने- अपने घरों से बाहर निकलें-
उन्होंने बताया राज्य सरकार के आदेश से जिले में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए बुधवार से एक बार फिर से लॉक डाउन लगाया गया है। इसलिये सभी लोगों से अपील है अनावश्यक अपने घरों से निकलने से परहेज बरतें। यदि किसी अनिवार्य कार्य से घर से बाहर निकलना जरूरी हो तो कोरोना गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन करते हुए ही अपने- अपने घरों से बाहर निकलें। अनिवार्य रूप से मास्क का इस्तेमाल करें। सामाजिक दूरी के नियम के तहत एक- दूसरे से कम से कम दो गज या छह फीट की दूरी बरतें। अपने हाथों की नियमित साफ- सफाई के लिए साबुन या हैंड सैनिटाइजर का नियमित इस्तेमाल करें तभी कोरोना वायरस के संक्रमण को पूरी तरीके से हराया जा सकता है। कहा सभी लोग देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए लॉक डॉउन के दौरान खुद भी कोरोना गाइड लाइन का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। सभी लोग इस अवधि में घरों से बाहर न निकलें और अपने परिवार के साथ अपना कीमती वक्त गुजारें| ताकि इस विभीषिका के वक्त पूरे परिवार को एक- दूसरे का साथ मिल सके और सभी लोग सामूहिक प्रयास से कोरोना संक्रमण से बचे रह सकें ।
इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– जरूरी नहीं हर सर्दी-खांसी कोरोना ही है, इसलिए, निर्भीक होकर सकारात्मक सोच के साथ कराएं जाँच।
– अधिक जरूरी पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें ।
– घर में सकारात्मक माहौल बनाएं और रचनात्मकता कार्य करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इम्युनिटी भी करें मजबूत

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हल्दी, लहसुन व अदरक इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
शरीर को पूरा आराम देना भी जरूरी, लें अच्छी नींद

लखीसराय, 6 मई-

कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उभर कर सामने आये हैं। इनमें एक सवाल रोग प्रतिरोधक (इम्युनिटी) को लेकर है। इम्युनिटी शरीर की वो प्रणाली है जो हमें रोगों से सुरक्षित रखती है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने खानपान का विशेष ख्याल रखें। आयुष मंत्रालय की ओर से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय बताये गये हैं।
जिला सिविल –सर्जन डॉ देवेंद्र चौधरी ने लोगों से कहा है कि सही खानपान से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर सकते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हाथ धोने व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का भी पालन भी करें।. बदलते मौसम में कई तरह के जीवाणु व विषाणु हमारे शरीर पर हमला करते हैं।. लेकिन यदि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है तो शरीर इन रोगाणुओं से अपना बचाव करने में सक्षम होता है।.
हल्दी व लहसुन इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार:
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में हल्दी व लहसुन का काफी महत्व है.। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी यह मानना है कि लहसुन एक अच्छा और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ है, और यह कई बीमारियों से लड़ने में कारगर है। लहसुन का इस्तेमाल अहले सुबह किया जा सकता है। सुबह सवेरे लहसुन की कुछ डलियां चबा कर खायें। इसके अलावा रात में सोते समय रोजाना एक गिलास दूध को आधा चम्मच हल्दी पाउडर के साथ उबाल लें और पीयें। इसके अलावा अदरक कफ और खांसी के इलाज के रामबाण माना जाता है। अदरक का सेवन कई तरह के संक्रमण और फ्लू से बचाता है।. अदरक की चाय व काढ़ा बना कर इसका इस्तेमाल रोजाना सुबह या रात सोते समय कर सकते हैं। जहां लहसुन निम्न रक्तचाप को नियंत्रित करता है वहीं अदरक कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है।
​आंवला, मौसमी व ​नींबू का करें रोजाना इस्तेमाल:
विटामिन सी का इस्तेमाल भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। विटामिन सी उन फलों में अधिक मात्रा में होते हैं जिनका स्वाद खट्टा होता है।. जैसे संतरा, मौसमी, स्ट्राबेरी, जामुन, नींबू व आंवला आदि का इस्तेमाल शरीर में व्हाइट् ब्लड सेल्स को बढ़ाने के लिए किया जाता है जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। सुबह सवेरे नींबू की चाय पीना हेल्दी माना जाता है।
ताजी हरी सब्जियों में होता है एंटीआॅक्सीडेंट:
ताजी हरी सब्जियां भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार हैं।. पालक में विटामिन सी काफी मात्रा में पायी जाती है। इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट शरीर को संक्रमण से बचाने में सहायता करता है। पालक को बहुत अधिक तेज आंच पर नहीं पकाना चाहिए। अन्यथा इसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
पर्याप्त नींद लेना नहीं भूलें:
इन सबके अलावा इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सबसे कारगर उपाय पर्याप्त नींद लेना है।. तनाव और थकान रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बनाते हैं।. इसलिए रोजाना आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। इससे शरीर को आराम मिलता है। इस दौरान मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया तेज हो जाती है और यह शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
आयुष मंत्रालय की है ये राय:
आयुष मंत्रालय द्वारा भी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कुछ उपाये बतायें गये हैं। इन उपायों का इस्तेमाल कर हम शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बना सकते हैं।
गुनगुना पानी पीयें.
तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ व मुन्नका का काढ़ा बनाकर पीयें.
हल्दी दूध का नियमित इस्तेमाल.

गर्भवती महिलाएं के लिए मजबूत इम्युनिटी जरूरी:
गर्भवती महिलाओं के लिए भी जरूरी है कि वे अपनी इम्युनिटी का पूरा पूरा ख्याल रखें।. पर्याप्त नींद के साथ पौष्टिक आहार लें।चूंकि इस समय शरीर में कई तरह से बदलाव हो रहे होते हैं इसलिए उनका इम्युन सिस्टम भी कमजोर होने लगता है।. ऐसे में उन्हें अपने सही खानपान का पूरा ख्याल रखना चाहिए।. क्योंकि खराब इम्युन होने से इसका असर गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। संतुलित आहार से शरीर को सभी तरह के विटामिन मिलते हैं। विटामिन डी एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट हैं और गर्भस्थ शिशु व मां की हड्डियां मजबूत करने के लिए भी फायदमंद है। अपने खाने में दूध, अंडा, दाल, हरी सब्जी आदि शामिल करें।

कोविड-19 से संक्रमित होने पर घबराएं नहीं, सकारात्मक सोच के साथ कराएं उपचार

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– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, रचनात्मक कार्य में खुद को रखें व्यस्त
– सकारात्मक सोच, संयम और सतर्कता से ही इस महामारी को मात देने का सबसे कारगर उपाय

खगड़िया, 06 मई-

कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को हर हाल में रोकने के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार जरूरी फैसले ले रहा है| इसके लिए दो दिन पूर्व ही सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में लाॅकडाउन लगाया जा चुका है। ताकि इस महामारी के बढ़ते प्रभाव पर विराम लग सके और लोग खुद सुरक्षित महसूस करें। क्योंकि, यह बीमारी नहीं, महामारी है और संक्रामक है यानी लोग इस महामारी के दायरे में एक-दूसरे के संपर्क में ही आने से आता है। इसलिए, इस महामारी की चपेट में कोई भी आ सकता है। किन्तु, अगर आप जाने-अनजाने में किसी भी कारणवश इस महामारी के दायरे में आ गए तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, इस महामारी को सकारात्मक सोच के साथ डटकर सामना करें और चिकित्सा परामर्श के अनुसार मजबूत इच्छाशक्ति के साथ अपना इलाज कराएं। क्योंकि, मनोवैज्ञानिकों की मानें तो आपका दिमाग में जो आएगा वहीं शरीर को महसूस होगा। इसलिए, महामारी को मात देने के लिए सकारात्मक सोच, संयम और सतर्कता ही सबसे कारगर उपाय है।

– कोविड-19 को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन और सकारात्मक माहौल जरूरी :-
खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव कुमार ने बताया, संक्रमित मरीजों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, इस महामारी को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन के साथ सकारात्मक माहौल जरूरी है। इसलिए, संक्रमित मरीजों को रचनात्मक कार्य में खुद को व्यस्त रखना चाहिए। ताकि महामारी की चिंता अधिक हावी नहीं हो सके । दरअसल, ऐसा देखा जा रहा है कि लोगों की बीमारी से अधिक उनके लिए अत्यधिक चिंता करना ही परेशानी बढ़ा रही है। इसलिए, हमेशा सकारात्मक रहें और चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराएं।

– किसी प्रकार के संदेह या परेशानी होने पर चिकित्सकों से करें संपर्क :-
अगर आप संक्रमित हैं और होम क्वारेंटाइन में रहकर अपना इलाज करा रहे हैं तो इस दौरान आपको को किसी प्रकार का संदेह या परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकों से संपर्क कर इन समस्याओं का समाधान करें। ताकि अनावश्यक बातें या संदेह आप पर अत्यधिक हावी नहीं हो सके और आपके अंदर नकारात्मक भावना भी उत्पन्न नहीं हो सके । दरअसल, चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक इलाज के साथ-साथ संयम, सतर्कता, सावधानी और सकारात्मक सोच के बल बड़ी संख्या में लोग इस महामारी को मात देने में सफल हो चुके हैं और आज पूरी तरह स्वस्थ भी हैं।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें:-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– आवश्यकतानुसार लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें और जरुरी काम से ही घर से बाहर निकलें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।

एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं, आईसीएमआर ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर जारी की नई गाइडलाइन्स

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• हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपीट नहीं करने की सलाह
• स्वस्थ व्यक्ति के लिए दूसरे राज्य की यात्रा करने पर टेस्ट अनिवार्य नहीं
• रैपिड एंटीजन टेस्ट के दायरे को बढ़ाने पर जोर

बांका-

देश में कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ़्तार के मद्देनजर आईसीएमआर ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की है. आईसीएमआर ने आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की संख्या में हुयी वृद्धि से प्रयोगशालाओं पर अत्यधिक दबाब बढ़ने की बात कही है. इसको लेकर आईसीएमआर ने कुछ जरुरी सलाह दिए हैं. आईसीएमआर ने कहा है कि एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की जरूरत नहीं है. साथ ही देश भर में एंटीजन टेस्ट के दायरे को भी बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है.

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपीट करने की जरूरत नहीं :

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर देशभर में अत्यंत संक्रामक हो रही है. इसके कारण संक्रमित होने के बाद लोग कई बार आरटी-पीसीआर टेस्ट भी करा रहे हैं. इसको लेकर आईसीएमआर ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपीट नहीं करने की सलाह दी है.

स्वस्थ व्यक्ति के लिए दूसरे राज्य की यात्रा करने पर टेस्ट अनिवार्य नहीं:
अभी तक दूसरे राज्य की यात्रा करने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट को अनिवार्य किया गया था. लेकिन टेस्ट की संख्या में हुयी अचानक वृद्धि से प्रयोगशालाओं को सही समय पर रिपोर्ट देने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए आईसीएमआर ने स्वस्थ व्यक्ति के लिए दूसरे राज्य की यात्रा करने पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता को खत्म करने की सलाह दी है. लेकिन यात्रा करने वाले लोगों को कोविड अनुरूप व्यवहार को सख्ती से अनुपालन करने की भी बात कही है. ससाथ ही आईसीएमआर ने भी यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति में फ्लू के लक्षण हों तो वह यात्रा करने से परहेज करें.

रैपिड एंटीजन टेस्ट के दायरे को बढ़ाने पर बल:
गाइडलाइन्स में कहा गया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट की शुरुआत देश में पिछले साल जून के महीने में की गयी थी. अभी इसकी उपलब्धता कान्टमेंट जोन एवं स्वास्थ्य इकाईयों तक ही सीमित है. आईसीएमआर ने रैपिड एंटीजन टेस्ट की उपलब्धता स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, कम्युनिटी सेंटर सहित अन्य उपलब्ध खाली जगहों पर सुनिश्चित करने की बात कही है. इसे सरकारी अस्पताल के साथ अन्य प्राइवेट अस्पतालों में भी उपलब्ध कराने की सलाह दी है. साथ ही रैपिड एंटीजन डेडिकेटेड बूथ की स्थापना शहर, क़स्बा एवं गाँव में भी करने की बात कही है ताकि आम लोगों को आसानी से टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध हो सके.

राज्यों को दिए गए ये अतिरिक्त सलाह:

• सभी राज्यों को उपलब्ध आरटी-पीसीआर टेस्ट क्षमता का पूर्ण उपयोग करने की सलाह दी गयी है
• एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद आरटी-पीसी आर टेस्ट से संक्रमण पुनः कन्फर्म नहीं करने की सलाह देना
• कोविड लक्षण वाले रोगी की रैपिड एंटीजन टेस्ट नेगेटिव आने के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की बात कही गयी है. लेकिन रिपोर्ट आने तक ऐसे मरीजों को होम आईसोलेशन में ही रहने की सलाह देना
• सभी आरटी-पीसीआर एवं रैपिड एंटीजन टेस्ट के परिणाम को आईसीएमआर पोर्टल पर अपलोड करना

होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य पर लगातार रखी जा रही नजर

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– गृह भ्रमण कर मरीजों के स्वास्थ्य का हाल जान रही है स्वास्थ्य टीम, दी जा रही जरूरी सलाह
– संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी किया जा रहा है चिह्नित

खगड़िया, 05 मई| कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते प्रभाव पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध है| हर हाल में संक्रमण के चेन तोड़ने के लिए लगातार आवश्यक कदम भी उठाये जा रहे हैं। इसी कड़ी में होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए स्वास्थ्य टीम द्वारा लगातार संक्रमितों के घर का भ्रमण कर रही है | साथ ही संक्रमितों को आवश्यकतानुसार जरूरी सलाह भी दी जा रही और इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। इस कार्य में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया के कर्मी भी सहयोग कर रहे और लगातार होम विजिट कर संक्रमितों मरीजों का स्वास्थ्य अवलोकन किया जा रहा है। इस दौरान संक्रमित मरीजों के परिजनों को भी इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है । ताकि हर हाल में संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके और सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके लक्षण महसूस होने पर तुरंत कोविड-19 जाँच कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

– गृह भ्रमण कर मरीजों का स्वास्थ्य हाल जान रही स्वास्थ्य टीम, ला जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों का लगातार 14 दिनों तक स्वास्थ्य अवलोकन किया जाना है। इस दौरान उनसे मिलकर उनके स्वास्थ्य का हाल जानना है| उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर आवश्यकतानुसार आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी देना है। साथ ही उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है या नहीं, इस बात का ख्याल रखना है| उनकी स्थिति से स्थानीय पीएचसी को अवगत कराना है। वहीं, बताया, स्वास्थ्य टीम द्वारा इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।

– संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी किया जा रहा है चिह्नित :-
होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता को दी गई। जिसका पालन करते हुए आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र ऐसे लोगों को चिह्नित कर स्थानीय पीएचसी को रिपोर्ट उपलब्ध करा रही हैं । इसके बाद निर्देशानुसार ऐसे लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिया जा रहा है।

– इस महामारी को रोकने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी :-
इस महामारी को रोकने के लिए लोगों को वैक्सीन जरूर लेनी चाहिए। इसलिए, वैक्सीनेशन के निर्धारित उम्र सीमा के दायरे में आने वाले सभी लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए। जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।

– कंटेन्मेंट जोन पर प्रशासन रख रही है नजर :-
जिले में बनाए गए कंटेनमेंट जोन पर प्रशासन लगातार नजर रख रही है। इस क्षेत्र के दायरे में आने वाले सभी लोगों की लगातार कोविड-19 जाँच की जा रही है। साथ ही इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। खगड़िया सदर के बीडीओ राजेश कुमार ने बताया, जिन गाँव में संक्रमित मरीज पाए गये हैं, उस गाँव में कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। ताकि संक्रमण की चेन को रफ्तार नहीं मिल सके ।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें और भीड़-भाड़ से दूर रहें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित।

नियमित टीकाकरण के साथ हुआ टीएचआर का वितरण

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सोशल डिसेन्सिंग का रखा गया खास ख्याल
गृह भ्रमण कर लाभार्थी के बीच टीएचआर का वितरण

लखीसराय, 5 मई-

जिले में बुधवार को नियमित टीकाकरण के साथ –साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में गृह भ्रमण कर टीएचआर वितरण किया गया। इस दौरान सभी धात्री महिला को सोशल डिस्टेन्सिंग एवं हाथ की धुलाई के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम में इस बात का भी ध्यान रखा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही न हो। धात्री महिलाओं के साथ नवजात का टीकाकरण व टीएचआर वितरण भी हुआ।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया टीकाकरण कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती माताओं को भी कोरोना संक्रमण से बचाव व टीकाकरण की जरूरत पर भी जागरूक किया। इसके साथ गृह भ्रमण द्वारा लाभार्थी के बीच टीएचआर का भी वितरण किया गया। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर आशा व अन्य मोबिलाइजरों द्वारा लाभार्थी अथवा उसके अभिभावकों में भी बुखार, सर्दी-खांसी के लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जाँच कराने की सलाह दी गई । व्यक्तिगत दूरी, मुंह को ढककर रखने व नियमित रूप से 40 सेकेंड तक हाथ धोने आदि की भी जानकारी दी गयी।
हर माह मिल रहा है टीएचआर:
जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक माह हजारों गर्भवती/धातृ महिलाओं, कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के बीच टीएचआर/टेक होम राशन का वितरण होता है। इस दिन इन्हें केन्द्रों पर चावल,दाल तथा सोयाबड़ी या अंडे दिये जाते हैं। उल्लेखनीय है कि टीएचआर के दिन धातृ व गर्भवती महिलाओं को जहां 3 किलो चावल व डेढ़ किलो दाल दिये जाते हैं, वहीं कुपोषित बच्चों को ढ़ाई किलो चावल एवं सवा किलो दाल के साथ सोयाबड़ी या फिर अंडे दिये जाते हैं। इसी तरह अति कुपोषित बच्चों को 4 किलो चावल व 2 किलो दाल के साथ सोयाबड़ी या फिर अंडे दिये जाते हैं।

घर-घर जाकर भी दे रहे हैं टीएचआर:
कोरोना संक्रमण को लेकर अभी लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। इस वजह से आंगनबाड़ी सेविका लोगों के घरों पर जाकर भी टीएचआर का वितरण कर रही हैं। साथ ही उन्हें कोरोना के प्रति जागरूक कर रही हैं।

नियमित टीकाकरण (रूटीन इम्यूनाइजेशन) कई तरह की बीमारियों से करता है बचाव:
शिशुओं व गर्भवती महिलाओं का नियमित टीकाकरण (रूटीन इम्यूनाइजेशन) उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है| इनमें कई बीमारियां शामिल हैं|. टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके| बीमारियां जैसे खसरा, टिटनस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है|