बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी में चुनाव तारीखों का ऐलान, नतीजे 2 मई को

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इंडिया लाइव। चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार, 26 फरवरी की शाम नई दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी।


 

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया जाएगा। राज्य में पहले चरण के लिए 27 मार्च, दूसरे चरण के लिए 1 अप्रैल, तीसरे चरण के लिए 6 अप्रैल, चौथे चरण के लिए 10 अप्रैल, पांचवे चरण के लिए 17 अप्रैल, छठे चरण के लिए 22 अप्रैल, सातवें चरण के लिए 26 अप्रैल और आठवें चरण के लिए 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

EVM brouhaha was stage managed, says CEC Sunil Arora -
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा

असम में तीन चरणों में 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 को मतदान होगा। शेष दो राज्यों तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में एक ही चरण में मतदान होगा। वहां 6 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

सभी राज्यों में मतगणना 2 मई को होगी। उसी दिन नतीजे आ जाएंगे।

चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

चुनाव अधिकारी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स

चुनाव के दौरान कोरोना को लेकर सभी सतर्कता उपाय अपनाए जाएंगे। सभी चुनाव अधिकारी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स होंगे और उनका टीकाकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्वव्यापी कोरोना महामारी के बाद देश में विधानसभा चुनावों का यह दूसरा दौर है। पिछले साल अक्टूबर और नवंबर में बिहार में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे।

मतदान का समय एक घंटा बढ़ा

West Bengal Election Results 2019: All You Need To Know About West Bengal Lok Sabha Polls

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पश्चिम बंगाल समेत चुनाव वाले सभी राज्यों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती होगी। राज्य और केंद्रीय बल मिलकर काम करेंगे।

इस बार मतदान का समय एक घंटा बढ़ाया गया है। सभी मतदान केंद्र ग्राउंड फ्लोर पर होंगे। उम्मीदवारों को नामांकन की ऑनलाइन सुविधा दी जाएगी और सिक्यूरिटी मनी भी ऑनलाइन जमा की जाएगी। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार समेत पांच लोगों को घर-घर जाने की इजाजत दी जाएगी।

विधानसभाओं में विभिन्न दलों की स्थिति

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। इनमें 211 तृणमूल कांग्रेस के पास हैं। कांग्रेस के पास 44, लेफ्ट के पास 32, भारतीय जनता पार्टी के पास 3 और 4 सीटें अन्य के पास हैं।

पश्चिम बंगाल में अभी तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी और 2016 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले उसके वोट शेयर में 30 प्रतिशत की बंपर बढोतरी हुई थी। इसे देखते हुए विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी ने पूरा जोर लगा दिया है।

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असम

असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के पास 60 सीटें हैं। एजीपी के पास 14, कांग्रेस के पास 26, एआईयूडीएफ के पास 13, बीओपीएफ के पास 12 सीटें हैं। एक सीट अन्य के खाते में दर्ज है।

2016 में यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी।

केरल

केरल विधानसभा में 140 सीटें हैं। इनमें 84 एलडीएफ के पास हैं। 47 सीटें यूडीएफ, एक सीट भारतीय जनता पार्टी और 8 सीटें अन्य के पास हैं।

केरल देश में वामपंथ का आखिरी गढ़ है। यहां वाम दलों और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है। हालांकि 2016 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को  केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा था लेकिन उसने दस फीसदी वोट हासिल किए थे।

तमिलनाडु

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के पास 135 सीटें हैं। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के पास 88, कांग्रेस के पास 8 और एक सीट अन्य के पास है।

यहां अन्नाद्रमुक की सरकार है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (एआईएडीएमके) ने और 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) ने अच्छा प्रदर्शन किया था।

पुदुचेरी

केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में 30 विधानसभा सीटें हैं। यहां विधानसभा में तीन नामित सदस्य होते हैं। 2016 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 17 सीटें जीती थीं। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (एआईएडीएमके) को चार सीटों पर सफलता मिली थी। जबकि 9 सीटें अन्य के खाते में गई थीं।

पुदुचेरी में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है। कुछ दिन पहले तक यहां कांग्रेस की गठबंधन की सरकार थी। पिछले सप्ताह कांग्रेस के कुछ विधायकों के इस्तीफे के कारण मुख्यमंत्री नारायण सामी की सरकार अल्पमत में आ गई थी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने किया

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नई दिल्ली-

चुनाव आयोग ने 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश के लिए चुनावी तारीखों का ऐलान कर दिया है। असम में 126 सीटों, तमिलनाडु में 234 सीटों, पश्चिम बंगाल में 294 सीटों, केरल में 140 सीटों और पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए चुनाव होगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि सभी राज्यों के चुनावी नतीजे 2 मई को आएंगे। पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव होंगे। मतदान का पहला चरण 27 मार्च को, 1 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा, 6 अप्रैल को तीसरे चरण का मतदान, 10 अप्रैल को चौथे चरण का मतदान, 17 अप्रैल को पांचवें चरण का मतदान, 22 अप्रैल को छठे चरण का मतदान, सातवें चरण का मतदान होगा 26 अप्रैल को होगा और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव होंगे

पहला चरण- 27 मार्च

दूसरा चरण- 1 अप्रैल

तीसरा चरण- 6 अप्रैल

चौथा चरण- 10 अप्रैल

पांचवां चरण- 17 अपैल

छठा चरण- 22 अप्रैल

सातवां चरण- 26 अप्रैल

आठवां चरण- 29 अप्रैल

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव

6 अप्रैल को होंगे; मतगणना 2 मई को होगी।

केरल विधानसभा चुनाव- 6 अप्रैल को होंगे; मतगणना 2 मई को होगी।

1 मार्च से कॉमन सर्विस सेंटर पर बनेंगे निःशुल्क आयुष्मान कार्ड

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• सीएससी पर आयुष्मान कार्ड बनाने के 30 रुपये नहीं देने होंगे शुल्क
• नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी और सीएससी ई गर्वेनेंस ने किया एमओयू पर हस्ताक्षर
• देश के 10 प्रदेशों में योजना प्रारंभ, बिहार में भी किया गया लागू

पटना-

नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी तथा कॉमन सर्विस सेंटर के बीच 18 फ़रवरी, 2021 को एमओयू पर हुए हस्ताक्षर के बाद अब बिहार सहित देश के 10 राज्यों में आयुष्मान कार्ड नि:शुल्क बनाया जा सकेगा. भारत सरकार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बात की जानकारी दी है. यह सुविधा 1 मार्च से प्रारंभ होगी. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इन रज्यों के लाभुकों को पीवीसी (पोलिविनाइल क्लोराइड) आयुष्मान कार्ड निःशुल्क दिए जाएंगे. इसको लेकर यह प्रक्रिया पहले चरण में 10 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में शुरू की जा रही है, जिसमें बिहार सहित मणिपुर, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा, नागालैंड, चंडीगढ़, पुदूचेरी, छत्तीसगढ़ तथा मध्यप्रदेश आदि शामिल हैं. अन्य प्रदेशों में भी नि:शुल्क पीवीसी आयुष्मान कार्ड वितरण की तिथि जल्द ही घोषित की जायेगी.

सीएससी पर नहीं देने होंगे 30 रुपये शुल्क:
नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी तथा कॉमन सर्विस सेंटर—ई गर्वेंनेंस द्वारा आपसी सहमति के बाद हुए करार के बाद लाभुकों के लिए पीवीसी आयुष्मान कार्ड नि:शुल्क बनाया जाना है. पूर्व में आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर पर 30 रुपये का शुल्क देना पड़ता था. आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध किये गये अस्पतालों में इलाज के लिए बनाये जाने वाले आयुष्मान कार्ड को अब बिना किसी शुल्क के जेनेरेट किया जाना है.

लाभुकों को मिलेगा पीवीसी प्रिंट किया कार्ड:
इस नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान भारत के लाभुकों को पहले पेपर आधारित कार्ड दिया जायेगा. फिर इसके बाद एक पीवीसी प्रिंट किया हुआ कार्ड दिया जायेगा. पीवीसी आयुष्मान कार्ड किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर से प्राप्त किया जा सकेगा. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने व इलाज आदि के लिए आयुष्मान कार्ड आवश्यक रूप से हो ऐसा नहीं है, बल्कि यह लाभुकों को चिन्हित करने की प्रक्रिया है. साथ ही इसकी मदद से स्वास्थ्य सेवाओं के मुहैया कराने में होने वाली गड़बड़िया व धोखेबाजी को रोकना है.

5 लाख रुपये तक इलाज की है व्यवस्था:

भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराये जाने की दिशा में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना एक मुख्य कार्यक्रम है. इस योजना के तहत सालाना प्रति परिवार प्रति 5 लाख रुपये का इलाज की सुविधा दी गयी है, जिसमें 10.74 करोड़ लाभुकों यानी लगभग 53 लाख परिवारों को दूसरे एवं तीसरे स्तर की चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिन्हित किया गया है. आयुष्मान भारत योजना के लाभुक को स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए कैश या पेपर आदि नहीं होने के बावजूद सुविधाएं मुहैया कराती है. के इलाज की सभी सुविधाएं मुहैया कराता है. इस योजना के तहत 937 हेल्थ पैकेज हैं. योजना के तहत देश के 32 प्रदेशों के 24000 से अधिक सरकारी व गैरसरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुयी थी. इस योजना के तहत अब तक 20911 करोड़ रुपये मूल्य के 1.67 करोड़ हॉस्पीटल ट्रीटमेंट दिए जा चुके हैं. पूरे देश में इस योजना के तहत 14 करोड़ आयुष्मान कार्ड लाभुकों को निर्गत किया जा चुके हैं.

एनएचए भारत सरकार की संस्था:
नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी भारत सरकार की संस्था है जिसके द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना की पूरी प्रक्रिया तथा प्रबंधन का डिजाइन किया गया है. नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित हैं और यह राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करती है

कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है पोषण पुर्नवास केंद्र

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कुपोषित बच्चों के विशेष खानपान व देखभाल की होती हैं सुविधाएं
जिले में नाटापन से ग्रसित बच्चों में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के अनुसार आया है सुधार

लखीसराय, 26 फरबरी-

कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार गंभीर है| कुपोषण से निबटने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किये गये हैं| पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे को 14 दिनों के लिए रखा जाता है| डाक्टर की सलाह के मुताबिक उनका खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है| यहां रखा गया कोई बच्चा 14 दिनों में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो वैसे बच्चों को एक माह तक यहां रख कर विशेष देखभाल की जाती है| भर्ती हुए बच्चे के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही यहाँ से डिस्चार्ज किया जाता है| पोषण पुनर्वास केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं निःशुल्क होती हैं ।
जिले में नाटापन से ग्रसित बच्चों की संख्या घटकर 42.7 प्रतिशत-
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपोर्ट के मुताबिक लखीसराय जिला में 5 वर्ष से कम आयु के सौ बच्चों में से 50.6 प्रतिशत बच्चों की लंबाई उनकी आयु के हिसाब थी यानी वे नाटापन से ग्रसित थे| . वहीं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के अनुसार जिले में नाटापन से ग्रसित बच्चों की संख्या घटकर 42.7 प्रतिशत है । अगर हम जिले में अपनी आयु से कम वजन वाले बच्चों की बात करें तो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण4 के अनुसार 47.3 फीसदी थी वहीं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 अनुसार घटकर 45 .1 फीसदी है ।
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानन्द कुमार ने बताया की जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या में आयी कमी से हमारा मनोबल बढ़ा है और हमारी यही कोशिश है कि हम इस क्षेत्र में और भी बेहतर तरीके से कार्य करें ।

ये हैं पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती के मानक:
बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित हैं| इनमें बच्चों की विशेष जांच के तहत उनका वजन व बांह आदि का माप किया जाता है| 6 माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बायीं भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वह कुपोषित है| उसे ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है| इसके साथ ही दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा हो तो ऐसे बच्चों को भी यहां पर भर्ती किया जाता है।
जानें पोषण पुनर्वास केंद्र पर मिलने वाली सेवाएं:
• रेफर किये गये बच्चों की पुन:जांच करना
• उनमें कुपोषण या अतिकुपोषण की पहचान करना
• बच्चे के पोषण का पूरा पूरा ख़्याल रखना
• बच्चों के पोषण पर अभिभावकों को उचित सलाह देना
• भर्ती हुए कुपोषित बच्चों की 24 घंटे पूरी देखभाल
• डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक फॉलोअप

कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण को लेकर तैयारी तेज

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-इसे लेकर आज और कल किया जाएगा ड्राई रन
तीसरे चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लगेगा टीका

भागलपुर, 26 फरवरी
जिले में कोरोना टीकाकरण अभियान तेज होता जा रहा है. पहले और दूसरे चरण के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तीसरे चरण की तैयारी में भी लग गई है. कोरोना टीका को लेकर तीसरे चरण का अभियान अगले महीने से शुरू होने वाला है. इसमें 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना का टीका दिया जाएगा. इसके पहले स्वास्थ्य विभाग तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता है. शनिवार और रविवार को जिले में इसे लेकर ड्राई रन किया जाएगा.

शनिवार और रविवार को ड्राई रन किया जाएगा-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि कोरोना टीकाकरण का पहला चरण और दूसरा चरण जिले में सफलतापूर्वक चल रहा है. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया. दूसरे चरण में फ्रंटलाइन वर्करों को टीका दिया जा रहा है. साथ ही अभी पहले चरण में टीका लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भी बूस्टर डोज दिया जा रहा है. अब विभाग तीसरे चरण की तैयारी में भी जुट गया है. इसे लेकर शनिवार और रविवार को ड्राई रन किया जाएगा. साथ ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को आवश्यक दिशा- निर्देश भी दे दिया गया है.

टीका का बूस्टर डोज लेने से नहीं चूके: डॉ चौधरी ने बताया कि जिन लोगों ने कोरोना टीका का पहला डोज ले लिया है, वे आवश्यक तौर पर दूसरा डोज ले लें. अगर आप दूसरा डोज नहीं लेंगे तो आपके टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी. ऐसा करने से कोरोना की चपेट में आने की आशंका रहेगी. इसलिए कोरोना टीका का दूसरा डोज अवश्य लें.

पूरी तरह से सुरक्षित है कोरोना का टीका:
डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है. इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. टीका लगने के बाद 30 मिनट तक स्वास्थ विभाग की टीम लोगों की निगरानी करती है. उसे कोई समस्या आएगी तो उसका तत्काल निदान किया जाएगा. इसलिए कोरोना का टीका लेने में संकोच नहीं करें और जब आपकी बारी आए तो केंद्र पर जाकर जरूर टीका लगवाएं.

कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: डॉ चौधरी ने बताया कि टीका लेने वाले व्यक्ति कोरोना की चपेट में आने से सुरक्षित हो गए हैं, लेकिन फिर भी वह कोरोना की गाइडलाइन का पालन करेंगे तो बेहतर रहेगा. दरअसल, कोरोना से बचने के लिए हमलोग मास्क लगाते हैं. सामाजिक दूरी का पालन करते हैं और भीड़भाड़ से बचते हैं. ऐसा करने से न सिर्फ कोरोना से बचाव होता है, बल्कि सांस से संबंधित बीमारी समेत अन्य कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होगा. इसलिए टीका लेने वाले लोग कोरोना की गाइडलाइन का पालन करेंगे तो बेहतर रहेगा. जिन लोगों ने अभी तक ठीक नहीं लिया है, वे लोग तो निश्चित तौर पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें

कोविड टीकाकरण के प्रति बढ़ा है विश्वास,उपायों पर अभी अमल करने की जरुरत

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– फील्ड आउटरीच ब्यूरो की पहल पर वेबिनार का हुआ आयोजन
– ‘हम सुरक्षित, तो देश सुरक्षित’ विषय पर विशेषज्ञों ने खूब की चर्चा
– सीफार, डब्ल्यूएचओ,पीरामल एवं यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
– प्रमुख वक्ता के रुप में शामिल थे जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी

सीतामढ़ी-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के सीतामढ़ी ईकाईं फील्ड आउटरीच ब्यूरो की तरफ से कोविड टीकाकरण अभियान के मद्देनजर हम सुरक्षित तो देश सुरक्षित विषय पर गुरुवार को वेबिनार का अयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रुप में सीतामढ़ी के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एके झा, सीफार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार, डब्ल्यूएचओ पूर्वी चंपारण के मेडिकल ऑफिसर डॉ एसएम त्रिपाठी, यूनिसेफ के पोषण सलाहकार अनूप कुमार झा,पिरामल फाउंडेशन के अतिरिक्त जिला परिवर्तन प्रबंधक विजय शंकर पाठक मौजूद थे। वेबिनार का शुभारंभ करते हुए फील्ड आउटरीच ब्यूरो के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी जावेद अख्तर अंसारी ने कहा कि अभी देश में एक साल के अथक प्रयास के बाद कोविड टीके का निर्माण हो पाया है। यह खुशी की बात है कि देश में अभी तक 1.70 करोड़ लोगों को टीका दिया जा चुका है। वहीं अब स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों के बाद एक मार्च से 50 के उपर के लोगों का टीकाकरण किया जाएगा। जिसके लिए सरकारी क्षेत्रों में 10000 टीकाकरण केंद्र तथा प्राइवेट क्षेत्रों के 20000 टीकाकरण केंद्रों को सूचीबद्ध किया गया है। वहीं टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्येश्य से पीआइबी निरंतर प्रयासरत है.
मीडिया की भूमिका अहम
मीडिया की अहम भूमिका पर चर्चा करते हुए सीफार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने कहा कि कोविड के प्रति अनुरुप व्यवहार की बात हो या टीकाकरण के प्रति लोगों के मन में आशंकाओं के मिटाने की बात हो। इन सभी बातों में मीडिया की भूमिका काफी अहम रही है। सीफार भी कोविड चैंपियन, एवं वॉरियर की कहानियों के माध्यम से लोगों को जागरुक करते आयी है, पर अभी भी लोगों के मन में टीके के बाद के प्रतिक्रिया को लेकर कुछ भ्रम है जिसमें धार्मिक, सामाजिक, व्यक्तिगत एवं सांस्कृतिक चुनौतियाँ शामिल है. मीडिया ही ऐसा माध्यम है जो लोगों की सोंच को बेहतर बना सकता है। मीडिया का यह प्रयास हो कि समुदाय स्तर तक जाकर लोगों की भ्रांतियों को मिटाकर उन्हें दूर करें। समाज से ऐसे चैंपियन को सामने लाना होगा जिनका लोग अनुसरण कर सकें। ऐसे में मीडिया की भूमिका टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ समुदाय में टीके के प्रति विश्वसनीयता को बढ़ाना भी है. इसके लिए मीडिया को इन मुद्दों पर निरंतर संवेदनशील भी बनाना होगा.
तीसरा चरण 1 मार्च से
वेबिनार मे जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एके झा ने कहा टीकाकरण के शुरुआती 3 से 4 दिनों में टीकाकरण को लेकर कुछ भ्रम था, पर जैसे- जैसे स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगने लगे उनके बीच एक मानसिक मजबूती आयी कि टीका पूर्णत: सुरक्षित है। जिसका नतीजा रहा कि यहां टीकाकरण का प्रतिशत बहुत ही अच्छा रहा। अभी फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लग रहा है और 1 मार्च से 50 की उम्र के बाद के लोगों को टीका लगेगा। अभी उनके सर्वे का काम चल रहा है। बुजुर्गों के लिए एक सर्वे हो चुका है। वहीं इसमें उन व्यक्तियों को भी टीका लगेगा जिन्हें मधुमेह , एवं बीपी की बीमारी है। टीका सदर अस्पताल तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों पर ही होगा। इन सबके बीच हमें हमेशा मास्क, सामाजिक दूरी और हैंड वॉश का इस्तेमाल करना होगा।
टीका लेने में भय कहीं नहीं दिख रहा
पूर्वी चंपारण डब्ल्यूएचओ के मेडिकल ऑफिसर डॉ एसएम त्रिपाठ ने बताया अब लोगों में टीकाकरण के प्रति भय नहीं दिख रहा। जिन्होंने पहला डोज लिया है वह निश्चीत ही दूसरे डोज के लिए भी आ रहे हैं। जहां यह प्रतिशत कम है वहां सिर्फ सूचनाओं के आदान प्रदान में कमी है। तीसरे चरण में बड़े स्तर पर टीकाकरण होना है.इसके लिए पंचायत स्तर पर भी इसकी उपलब्धता होने की संभावना है. वहीं इसी शनिवार तथा रविवार को तीसरे फेज के लिए ड्राइ रन भी होगा। एईएफआइ का प्रशिक्षण सभी नर्सों को मिला हुआ है जिससे कारण किसी भी टीकाकरण केंद्र पर कोई बुरी खबर नहीं मिली। हमें मीडिया में एएनएम और वैक्सीनेटर की भी स्टोरी लानी होगी ताकि उन्हें प्रोत्साहन मिले और लोगों में सकारात्मक संदेश जाए।
वेबिनार में यूनिसेफ के पोषण सलाहकार अनूप कुमार झा ने टीकाकरण के अहम हिस्सा संवाद का परिपेक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि उत्सुकता, घबराहट और उपाय ही ऐसे घटक है जो समाज से संवाद की चुनौतियों का खात्मा कर सकते हैं। वहीं उन्होंने कहा जब तक देश में 70 से 80 फीसदी लोगों को टीका लगने के बाद ही लोगों में हर्ड इम्यूनिटी का निर्माण होगा।

जनजागरुकता है जरुरी
पीरामल के विजय शंकर पाठक ने पीपीटी के माध्यम से जनजागरुकता से संबंधित एक वीडियो प्रस्तुत की और कहा कि भले ही अभी टीका पड़ रहा है पर हमें अभी भी एहतियात की जरुरत है। हमें खुद की सुरक्षा, प्रियजन की सुरक्षा और समुदाय की सुरक्षा के मानकों पर अमल करना होगा। अगर आप कोविड से ठीक हो गए हैं तो भी टीका अवश्य लगवाएं।यह कमजोर होती इम्यूनिटी को भी हर्ड में बदल सकती है। जेयास अख्तर ने वेबिनार का धन्यवादज्ञापन किया। वेबिनार में पटना दूरदर्शन के निदेशक(समाचार) विजय कुमार , पीआईबी बिहार के महानिदेशक एसके मालवीय भी शामिल थे।

किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण : पीसी वर्मा

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– टीबी है एक संक्रामक रोग लेकिन मरीजों की कतई न करें उपेक्षा
– संक्रमित होने की स्थिति में सही समय पर कराएं सही इलाज
– सभी सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है टीबी जांच और समुचित इलाज की सुविधा

लखीसराय, 25 फरवरी

किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण| इसलिये टीबी मरीजों की उपेक्षा कतई नहीं करें । उससे अपनत्व की भावना रखते हुए उसे टीबी की सही जांच और सही जगह पर इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। उक्त जानकारी लखीसराय के संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ. पीसी वर्मा ने दी । उन्होंने बताया कि कोरोना काल ने आम लोगों को दूसरी संक्रामक बीमारियों से भी बचाव करने के लिए सर्तक किया है। कोरोना काल में विशेषकर श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले संक्रामक रोगों से बचाव करना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके साथ भीड़भाड़ वाली जगहों पर एहतियात व सुरक्षा के पैमानों को व्यवहार में लाया जाना भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ऐसी ही श्वसन संबंधित संक्रामक बीमारियों में टीबी भी एक महत्वपूर्ण बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। डॉ. पीसी वर्मा ने सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के हवाले से बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने व बोलने से निकली बूंद में मौजूद टीबी बैक्टीरिया हवा के माध्यम से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचता है।

मिथ्याओं से बचें ताकि उपेक्षित नहीं हो संक्रमित :
डॉ. पीसी वर्मा ने बताया कि सीडीसी के मुताबिक टीबी संक्रमण को ले कुछ मिथ्याएं भी हैं । इन मिथ्याओं की वजह से लोग टीबी ग्रसित लोगों की उपेक्षा करने लगते हैं। टीबी ग्रसित लोगों के प्रति इस तरह से उपेक्षा किया जाना उसके इलाज में भी असुविधा ही पैदा करती है। आमलोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टीबी संक्रमण होने के सही कारणों की जानकारी लें। सीडीसी के अनुसार यह रोग हाथ मिलाने, किसी को खानपान की सामग्री देने या लेने, बिस्तर पर बैठने व एक ही शौचालय के इस्तेमाल करने से बिल्कुल भी नहीं फैलता है।

फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी :
उन्होंने बताया कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाता और वहीं बढ़ने लगता है। इस तरह से वो रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन व ब्रेन तक पहुंच जाता हैं। आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं | वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता है।

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमण की संभावना अधिक :
सीडीसी के मुताबिक ट्रयूबरक्लोसिस दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक लेंटेंट टीबी होता है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं लेकिन उनमें लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं| लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर इसका असर उभर कर देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों से टीबी रोगियों का पता चल पाता है।

ये लक्षण दिखें तो करायें टीबी जांच :
तीन माह या इससे अधिक समय से खांसी रहना, छाती में दर्द, कफ में खून आना
कमजोरी व थका हुआ महसूस करना।
वजन का तेजी से कम होना,
भूख नहीं लगना, ठंड लगना, बुखार का रहना,
रात को पसीना आना इत्यादि।

कोविड-19 टीकाकरण के तीसरे चरण के अभियान की तैयारी में जुटा स्वास्थ्य विभाग

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– तीसरे चरण के तहत 50 एवं इससे अधिक उम्र वाले लोगों को दिया जाएगा टीका
– एप पर होगा रजिस्ट्रेशन, फिर दिया जाएगा टीका

खगड़िया, 25 फरवरी|

कोविड-19 टीकाकरण के तीसरे चरण के अभियान की सफलता को लेकर स्वास्थ्य विभाग विभाग अभी से आवश्यक तैयारी में जुट गया है। ताकि वैक्सीनेशन अभियान शुरू होने के पूर्व ही सारी तैयारियाँ पूरी हो जाएं| तीसरे चरण के तहत 50 से अधिक उम्र वाले एवं इससे अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी । ऐसे लोगों को चिह्नित कर सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

– 21 मार्च से शुरू होगा तीसरे चरण का वैक्सीनेशन अभियान :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कि अगले माह 21 मार्च से तीसरे चरण का वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो जाएगा। हर हाल में निर्धारित समय पर तीसरे चरण के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ सुनिश्चित करने को लेकर सारी तैयारियाँ 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी । इसको लेकर जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ताकि निर्धारित समय पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो |

– 28 फरवरी तक स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का कार्य कर लिया जाएगा पूरा :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कि 28 फरवरी तक स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। जिसे हर हाल में पूरा करने के लिए जिले में काफी जोर-शोर से वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। बताया कि 02 मार्च से जिले के फ्रंटलाइन वर्करों को बूस्टर डोज देने का कार्य शुरू हो जाएगा। जिसे 20 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है।

– एप के माध्यम से होगा रजिस्ट्रेशन :-
तीसरे चरण के तहत वैक्सीन लेने वाले लोगों को विभाग द्वारा जारी एक एप पर रजिस्ट्रेशन होगा। इसके बाद ही वैक्सीन दी जाएगी वर्तमान में आशा कार्यकर्ता द्वारा अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर 50 एवं इससे अधिक उम्र वाले लोगों का आधार कार्ड एवं मोबाइल नंबर लिया जा रहा है।

– स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा वैक्सीनेशन के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक :-
तीसरे चरण के वैक्सीनेशन अभियान शुरू होने के पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमलोगों को वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक किया जाएगा। ताकि आमलोगों में मन में वैक्सीन को लेकर किसी प्रकार की दुविधा नहीं रहे एवं आमलोग भी उत्साह के साथ वैक्सीनेशन कराएं। जिससे वैक्सीनेशन अभियान को गति मिल सके ।

– स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के कर्मियों को दिया गया टीका का दूसरा डोज :-
वहीं, निर्धारित समय पर लक्ष्य पूरा करने को लेकर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीन का दूसरा डोज दिया जा रहा है। गुरुवार को भी स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के कर्मियों को वैक्सीन का दूसरा डोज दिया गया।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन पालन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी और बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।

“परिवार नियोजन सुरक्षित है” के प्रति लोगों को जागरूक करने को अभियान चला रहा है स्वास्थ्य विभाग

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– जिले के सभी पीएचसी औऱ आंगनबाड़ी केंद्रों पर आरोग्य दिवस पर ई. रिक्शा से माइकिंग कर रही है केयर इंडिया की टीम
– परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक करने को 31 मॉर्च तक जिले में चलेगा मिशन परिवार विकास एवं संचार अभियान
– केयर इंडिया अभियान के दूसरे चरण में शुरू कर रही है आईईसी और आशा टेक अवे कार्यक्रम

मुंगेर, 25 फरवरी-

राज्य के सभी जिलों में राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार जनवरी से 31 मार्च के बीच मिशन परिवार विकास एवं संचार अभियान जोर-शोर से चल रहा है। इसी अभियान के साथ लोगों को परिवार नियोजन के महत्व, जरूरत और साधनों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से केयर इंडिया की टीम विभिन्न जिलों में ई. रिक्शा के माध्यम से आरोग्य दिवस पर सभी पीएचसी और आगनबाड़ी केंद्रों पर माइकिंग कर लोगों को जागरूक कर रही है।
नव दम्पतियों को परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत दोनों के प्रति जागरूक किया जा रहा –
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कम्युनिटी मोबेलाइज़र ( डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि जिले में टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) को 2.0 लाने के लिए आवश्यक है कि नव दम्पतियों को परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत दोनों के प्रति जागरूक किया जाय। इसके तहत नवदम्पतियों सहित सभी दम्पतियों को सही समय पर बच्चा पैदा करने और दो बच्चों के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखने के लिए परिवार नियोजन के अस्थाई साधन अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है| ताकि बच्चों को सही पोषण, स्वास्थ्य , शिक्षा और जीवन स्तर मिल सके।

केयर इंडिया की फैमिली प्लानिंग कोर्डिनेटर ( एफपीसी) तस्नीम रज़ी ने बताया कि केयर इंडिया की टीम पूरे जिले में ‘परिवार नियोजन सुरक्षित है’ अभियान के तहत जागरुकता अभियान चला रही है। इसके तहत प्रत्येक आरोग्य दिवस पर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ई. रिक्शा के माध्यम से परिवार नियोजन के महत्व और आवश्यकता के बारे में माइकिंग कर जागरूक किया जा रहा है । उन्होंने बताया कि इसी अभियान के दूसरे चरण में अब आईईसी (इनफार्मेशन, एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन) के तहत जिला एवं प्रखंड स्तर पर उपयोग में लाई जाने वाली सभी सरकारी गाड़ियों, एम्बुलेंस एवं केयर इंडिया की गाड़ियों पर परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले स्लोगन और लोगो छपा स्टिकर लगाना आवश्यक कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्टिकर पर ‘ सही समय पर सही फैसला, परिवार नियोजन से बढ़ेगा हौसला’ स्लोगन लिखा हुआ है।

बताया कि अभियान के दूसरे चरण में ही ‘आशा टेक अवे’ के नाम से एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है । इसके तहत घर- घर जाकर आशा कार्यकर्ता, एएनएम और सेविका केयर इंडिया की टीम के साथ नवदम्पतियों सहित अन्य दम्पत्तियों से मिलकर दो बच्चों में अंतर रखने के लिए परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए जागरूक कर रही हैं । इसके साथ ही इनलोगों के द्वारा परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जागरुकता रैली भी निकाली जाती है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सभी आरोग्य दिवस पर सभी पीएचसी और आंगनबाड़ी केंद्रों पर आशा कार्यकर्ता सामूहिक रूप से महिलाओं को परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत के साथ ही इसके लिए अस्थाई साधनों के इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक कर रही हैं ।

जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्राधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक : एसपी राय

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– एएनएम स्कूल सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी

मुंगेर-

जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्राधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसा नहीं करने वाले सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर बिहार राज्य प्रदूषण पर्षद के द्वारा कड़ी से कड़ी करवाई की जाएगी। उक्त जानकारी बुधवार को एएनएम स्कूल सभागार में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि एस पी राय ने दी । इसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों जैसे सदर और रेफरल अस्पताल, विभिन्न स्वाथ्य केंद्र और हेल्थ और वेलनेस सेंटर से आये हुए हॉस्पिटल मैनेजर, स्वाथ्य मैनेजर, जीएनएम और एएनएम शामिल हुए |
जैव चिकित्सकीय कचरों के प्रबंधन के दी गयी जानकारी –
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुंगेर के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक रूप नारायण शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सभी स्वास्थ्य कर्मियों खासकर जीएनएम और एएनएम को विशेष तौर पर जिले के विभिन्न अस्पतालों में किस तरह से जैव चिकित्सकीय कचरों का प्रबंधन करना है, के सम्बन्ध में केयर इंडिया की डीटीओएफ डॉ. नीलू के द्वारा विस्तार से जानकारी दी गयी | साथ ही इससे जुड़ी तमाम तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।
सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर का होना अतिआवश्यक-
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सिनर्जीक वेस्ट मैनेजमेंट टीम के प्रतिनिधि तपन कुमार और संदीप कुमार ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट के संग्रहण (कलेक्शन) के लिए सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर का होना अतिआवश्यक है। बताया कि विभिन्न हॉस्पिटलों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर के बन जाने से एक ही स्थान से पूरे अस्पताल का कचरा एक ही स्थान से जमा किया जा सकता है। इससे लोगों में संक्रमण (इन्फेक्शन) के फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है।
लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में बचे बायो मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना है –
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने कहा कि जिले के सभी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ और वेलनेस सेंटर पर काम करने वाले सभी लोगों को लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में काम करने के दौरान बचे बायो मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना है| ताकि इस कचरे से कोई भी संक्रमण का शिकार न हो।
प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए कलर कोटेड डस्टबिन रखना है –
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद एएनएम स्कूल मुंगेर की प्रभारी प्रिंसिपल रागनी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में आये सभी हॉस्पिटल मैनेजर, हेल्थ मैनेजर, जीएनएम और एएनएम को प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए कलर कोटेड डस्टबिन रखने की जानकारी दी गई।

बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत चार अलग- अलग रंग के डस्टबिन में करना है जैविक चिकित्सकीय कचरे का संग्रहण :
जिला स्वास्थ्यय समिति के जिला कार्यक्रम समन्वयक ( डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत अलग -अलग रंग के डस्टबिन में अलग -अलग जैविक चिकित्सकीय कचरे को जमा करना है।
पीला डस्टबिन – मानव शरीर का खून से सना आंतरिक भाग जो ऑपरेशन के दौरान निकलता है। इसके साथ ही बैंडेज, कॉटन अन्य सभी वेस्ट प्रोडक्ट जिसको जलाया या भस्मीकरण किया जा सके।

लाल डस्टबिन : माइक्रो बायोलॉजिकल या माइक्रो
टेक्निकल पदार्थ जैसे लचीला ग्लब्स, कैथेटर, सिरिंज या रिसाइकल होने वाले सभी प्लास्टिक से बने पदार्थ ।

नीला / सफ़ेद डस्टबिन : सभी तरह के शीशा से बोतल और टूटे ग्लास का हिस्सा । इसके साथ ही डिस्करडेड मेडिसिन्स और कठोर प्लास्टिक।

काला डस्टबिन : बिना सिरिंज की निडील, ब्लेड्स और धातु से बने सभी प्रकार के वेस्ट प्रोडक्ट ।