टीबी के मरीजों की पहचान और इलाज में सभी आयुष चिकित्सक निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका : सीएस

0

– जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में जिले के सभी आयुष चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
– टीबी मरीजों की सही समय पर पहचान और सही इलाज को ले संचारी रोग के नोडल अधिकारी की आयुष चिकित्सकों से अपील

लखीसराय-

टीबी मरीजों की पहचान और इलाज कराने में जिले के सभी पीएचसी और अस्पतालों में कार्यरत आयुष चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। टीबी मरीजों की सही समय पर पहचान और सही इलाज होने के बाद ही 2025 तक टीबी मुक्त लखीसराय बनाने का सपना संभव हो सकेगा| उक्त बातें बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति लखीसराय के सभागार में आयोजित आयुष चिकित्सकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ.आत्मानंद कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि यह तभी सम्भव है जब जिले के सभी पीएचसी स्तर पर काम कर रहे आयुष चिकित्सक अपने – अपने क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान कर उसे बेहतर इलाज के लिए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला यक्ष्मा केंद्र रेफर कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें।
पीएचसी और जिला यक्ष्मा केंद्र में मरीजों के लिए टीबी की जांच और इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध-
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ. पीसी वर्मा ने कहा कि जिले के सभी प्रखंडों में काम कर रहे आयुष चिकित्सक अपने आसपास रह रहे लोगों को दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी रहने के बाद उसे बलगम की जांच कराने के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजेंगे| जांच में टीबी की पुष्टि हो जाने के बाद सही समय पर सही इलाज के लिए स्थानीय पीएचसी या जिला यक्ष्मा केंद्र लखीसराय रेफर करेंगे। बताया कि जिले के सभी पीएचसी और जिला यक्ष्मा केंद्र में मरीजों के लिए टीबी की जांच और इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। साथ ही जिला यक्ष्मा केंद्र पर टीबी मरीजों की जांच के लिए सिविनेट की जांच और बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस अवसर पर जिले के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र चौधरी, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अशोक कुमार सिंह, जिले के गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ.सुरेश शरण, जिला स्वास्थ्यय समिति लखीसराय के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. खालिद हुसैन सहित कई पदाधिकारी सहित विभिन्न प्रखंडों से आये आयुष चिकित्सक मौजूद थे।

टीबी का लक्षण महसूस होते ही कराएं जाँच : –
टीबी का लक्षण महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देरी किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। जिला सदर अस्पताल सहित जिले के सभी पीएचसी तथा अन्य सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषण के तहत आहार के लिए सहायता राशि भी दी जाती है।

बचाव के उपाय : –
2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर या नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:—-
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– दोपहर के बाद बुखार रहना।
– खांसी में तथा बलगम में खून आना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्राधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक : एसपी राय

0

– एएनएम स्कूल सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी

मुंगेर, 24 फरवरी | जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्राधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसा नहीं करने वाले सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर बिहार राज्य प्रदूषण पर्षद के द्वारा कड़ी से कड़ी करवाई की जाएगी। उक्त जानकारी बुधवार को एएनएम स्कूल सभागार में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि एस पी राय ने दी । इसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों जैसे सदर और रेफरल अस्पताल, विभिन्न स्वाथ्य केंद्र और हेल्थ और वेलनेस सेंटर से आये हुए हॉस्पिटल मैनेजर, स्वाथ्य मैनेजर, जीएनएम और एएनएम शामिल हुए |
जैव चिकित्सकीय कचरों के प्रबंधन के दी गयी जानकारी –
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुंगेर के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक रूप नारायण शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सभी स्वास्थ्य कर्मियों खासकर जीएनएम और एएनएम को विशेष तौर पर जिले के विभिन्न अस्पतालों में किस तरह से जैव चिकित्सकीय कचरों का प्रबंधन करना है, के सम्बन्ध में केयर इंडिया की डीटीओएफ डॉ. नीलू के द्वारा विस्तार से जानकारी दी गयी | साथ ही इससे जुड़ी तमाम तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।
सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर का होना अतिआवश्यक-
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सिनर्जीक वेस्ट मैनेजमेंट टीम के प्रतिनिधि तपन कुमार और संदीप कुमार ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट के संग्रहण (कलेक्शन) के लिए सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर का होना अतिआवश्यक है। बताया कि विभिन्न हॉस्पिटलों में बायो मेडिकल कलेक्शन सेंटर के बन जाने से एक ही स्थान से पूरे अस्पताल का कचरा एक ही स्थान से जमा किया जा सकता है। इससे लोगों में संक्रमण (इन्फेक्शन) के फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है।
लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में बचे बायो मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना है –
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने कहा कि जिले के सभी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ और वेलनेस सेंटर पर काम करने वाले सभी लोगों को लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में काम करने के दौरान बचे बायो मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का सही तरीके से प्रबंधन करना है| ताकि इस कचरे से कोई भी संक्रमण का शिकार न हो।
प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए कलर कोटेड डस्टबिन रखना है –
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद एएनएम स्कूल मुंगेर की प्रभारी प्रिंसिपल रागनी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में आये सभी हॉस्पिटल मैनेजर, हेल्थ मैनेजर, जीएनएम और एएनएम को प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए कलर कोटेड डस्टबिन रखने की जानकारी दी गई।

बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत चार अलग- अलग रंग के डस्टबिन में करना है जैविक चिकित्सकीय कचरे का संग्रहण :
जिला स्वास्थ्यय समिति के जिला कार्यक्रम समन्वयक ( डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत अलग -अलग रंग के डस्टबिन में अलग -अलग जैविक चिकित्सकीय कचरे को जमा करना है।
पीला डस्टबिन – मानव शरीर का खून से सना आंतरिक भाग जो ऑपरेशन के दौरान निकलता है। इसके साथ ही बैंडेज, कॉटन अन्य सभी वेस्ट प्रोडक्ट जिसको जलाया या भस्मीकरण किया जा सके।

लाल डस्टबिन : माइक्रो बायोलॉजिकल या माइक्रो
टेक्निकल पदार्थ जैसे लचीला ग्लब्स, कैथेटर, सिरिंज या रिसाइकल होने वाले सभी प्लास्टिक से बने पदार्थ ।

नीला / सफ़ेद डस्टबिन : सभी तरह के शीशा से बोतल और टूटे ग्लास का हिस्सा । इसके साथ ही डिस्करडेड मेडिसिन्स और कठोर प्लास्टिक।

काला डस्टबिन : बिना सिरिंज की निडील, ब्लेड्स और धातु से बने सभी प्रकार के वेस्ट प्रोडक्ट ।

कोरोना को लेकर सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अलर्ट मोड पर

0

मरीज मिलने पर पड़ोस के लोगों की कराई जाएगी जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीम संपर्क में आए लोगों की भी करेगी जांच

भागलपुर, 24 फरवरी
कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग हो गया है. इसे लेकर सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया है. राज्य सरकार से निर्देश मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार सिंह ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को इसे लेकर निर्देश जारी किया है.
जिले में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा:
सिविल सर्जन के निर्देश के मुताबिक जिन इलाकों में फिर से कोरोना के मामले मिल रहे हैं, वहां पर माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा. पड़ोस में रहने वाले लोगों की कोरोना जांच कराई जाएगी. साथ ही उस इलाके में कोरोना की गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाएगा. शहरी क्षेत्र में चंपानगर, नाथनगर मसाक चक, मानिक सरकार और आदमपुर से हाल में एक-एक कोरोना के मरीज मिले हैं. अब इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीम जाएगी और लोगों की कोरोना जांच करेगी.

आवाजाही पर नहीं लगेगी रोक:
सिविल सर्जन ने बताया कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन में आवाजाही पर रोक नहीं लगायी जाती है. मरीज के पड़ोस के घरों में और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की कोरोना जांच कराई जाएगी. अगर कोई लक्षण वाला या फिर पीड़ित पाया जाएगा तो उसका इलाज कराया जाएगा.

मायागंज अस्पताल में भी जारी किया गया अलर्ट:
मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने भी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से लेकर आईसीयू के डॉक्टर एवं नर्स को पिछले साल की तर्ज पर कोरोना मरीजों के आने पर अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने कोरोना के संक्रमण से बचाव को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है.

हर हाल में करें कोरोना की गाइडलाइन का पालन:
सिविल सर्जन ने बताया कि कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में लोगों को पालन करना चाहिए. कोरोना का टीका आ गया है. इस वजह से ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं है, लेकिन जब तक कोरोना की चेन पूरी तरीके से टूट नहीं जाती है, तब तक लोगों को बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना चाहिए. भीड़-भाड़ से बचना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए

सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर छिड़कावकर्मियों के प्रशिक्षण का समापन

0

कालाजार से मुक्ति के लिए चलेगा अभियान, 3 मार्च से सिंथेटिक पायराथायराइड का होगा छिड़काव

जिले के 12 प्रखंडों के कालाजार प्रभावित गांव में जल्द होना है छिड़काव

भागलपुर, 24 फरवरी

जिले के 12 प्रखंडों में कालाजार से मुक्ति को लेकर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव 3 मार्च से किया जाएगा. इसे लेकर मंगलवार और बुधवार को सदर समेत जिले के 3 सरकारी अस्पतालों में छिड़कावकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया. इस तरह से दो दिनों तक चलने वाला प्रशिक्षण का समापन हो गया. इस दौरान केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक, केबीसी आनंद श्रीवास्तव और केटीएस ए मनन ने स्वास्थ्यकर्मियों को छिड़काव के तरीके बताए.

पूरी दीवार पर होगा छिड़काव:
केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि पहले दीवार में 6 फीट की ऊंचाई तक सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव होता था, लेकिन इस बार पूरी दीवार में छिड़काव कराया जाएगा. घर के अंदर सभी जगहों पर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव होगा. यह अभियान जिले के 12 प्रखंडों के 57 गांवों में 66 दिनों तक चलेगा.

जिले के चार प्रखंड हैं कालाजार मुक्त: केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि जिले के चार प्रखंड कालाजार से मुक्त हैं. नाथनगर, जगदीशपुर, नवगछिया और बिहपुर प्रखंड में कालाजार के एक भी मरीज नहीं हैं. इसलिए जिले के शेष बचे 12 प्रखंडों में छिड़काव कराया जाएगा.

कालाजार की रोकथाम को लेकर विभाग अलर्ट:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम अगले महीने से किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 4 प्रखंड कालाजार से मुक्त हैं, इसलिए वहां छिड़काव का काम नहीं होगा. केयर इंडिया के डीपीओ ने बताया कि छिड़कावकर्मियों को चिह्नित गांव की जानकारी दी गई है.

घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
डॉ पटेल ने बताया अब दवा का छिड़काव किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छररोधी क्रीम लगाएं. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई.

कालाजार की ऐसे करें पहचान:
डॉ पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं. उन्होंने बताया कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए.

परिवार नियोजन अभियान को सफल बनाने के लिए पुरुष जागरूकता सह सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन

0

– बेलदौर प्रखंड प्रखंड के बेलदौर गाँव स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 03 पर कार्यक्रम का आयोजन
– परिवार नियोजन योजना अपनाने के लिए पुरुष सहभागिता जरूरी, स्थाई और अस्थाई उपायों पर हुई चर्चा

खगड़िया-

जिले में चल रहे परिवार नियोजन अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए केयर इंडिया एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को केयर इंडिया का `परिवार नियोजन सुरक्षित है ʼ अभियान के तहत जिले बेलदौर प्रखंड के बेलदौर गाँव स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 03 पर पुरुष जागरूकता सह सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उक्त ऑगनबाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र के पुरुषों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद पुरुषों को केयर इंडिया एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार नियोजन योजना की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ हीं इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया गया। इस मौके पर केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय, प्रखंड प्रबंधक चेतन पाठक, सेविका अंगीरा कुमारी, आशा पुनम कुमारी आदि मौजूद थीं।

– परिवार नियोजन योजना को अपनाने के लिए घर के पुरुषों की सहभागिता जरूरी :-
कार्यक्रम के दौरान केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने कहा कि परिवार नियोजन योजना को अपनाने के लिए इच्छुक महिलाएं भी अक्सर पुरुषवादी सोच की शिकार हो जाती हैं । जिसके कारण वह इन योजना को अपनाने से वंचित रह जाती हैं । इसलिए, इस योजना को अपनाने के लिए खासकर घर के पुरुष की सहभागिता बेहद जरूरी है और जब पुरुष सहभागिता बढ़ेगी तो इच्छुक महिलाओं को इस योजना को अपनाने से कोई नहीं रोक सकता है। मैं आपलोगों से अपील करता हूँ कि परिवार नियोजन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, आपलोग पुराने ख्यालात एवं मन में पल रही अवधारणा से बाहर आकर अपने घर की महिलाओं को कम से कम इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें। इसे अपनाने से ही खुशहाल, शिक्षित और छोटा परिवार का निर्माण संभव है।
– स्थाई व अस्थाई उपायों को अपनाने पर भी हुई चर्चा :-
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक चेतन पाठक ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान स्थाई एवं अस्थाई उपायों को अपनाने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें मौजूद पुरुषों को बताया गया कि स्थाई व अस्थाई दोनों साधन पूरी तरह सुरक्षित हैं । दोनों में से किसी भी उपाय को अपनाने से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। किन्तु, अपनाने के पूर्व निश्चित रूप से चिकित्सकों से सलाह लें। जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में अस्थाई उपाय मुफ्त उपलब्ध हैं । इसलिए, जो महिलाएं अस्थाई उपाय अपनाना चाहती हैं वह कंडोम, छाया, अंतरा, काॅपर – टी समेत अन्य वैकल्पिक व्यवस्था अपना सकती हैं।

– पुरुष नसबंदी को लेकर भी किया गया जागरूक :-
सेविका अंगीरा कुमारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मौजूद पुरुषों को पुरुष नसबंदी को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि परिवार विकास मिशन के तहत सरकार द्वारा जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पुरुष नसबंदी की भी मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई गई। ताकि अगर महिलाएं शारीरिक या अन्य किसी परेशानी को लेकर बंध्याकरण कराने में असक्षम हैं तो ऐसी स्थिति में पुरुष भी नसबंदी को अपनाकर सरकार के मिशन को गति दे सकते हैं। इसलिए, जो भी इच्छुक पुरुष हैं वह नसबंदी को अपना सकते हैं। क्योंकि छोटा, खुशहाल व शिक्षित परिवार निर्माण एवं गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन योजना सबसे बेहतर और आसान उपाय है।

– स्वस्थ माँ एवं मजबूत बच्चा के लिए बच्चे के जन्म में तीन साल का अंतराल जरूरी :-
इस दौरान मौजूद पुरुषों को यह भी बताया गया कि स्वस्थ माँ एवं मजबूत बच्चा के लिए एक बच्चे के जन्म के बाद दूसरे बच्चे के जन्म में कम से कम तीन साल अंतराल रखना भी जरूरी है। क्योंकि, स्वस्थ माँ ही मजबूत बच्चा को जन्म दे सकती है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ- सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– ताजा और गर्म खाने का उपयोग करें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें।

कालाजार से मुक्ति के लिए 3 मार्च से जिले में सिंथेटिक पायराथायराइड का होगा छिड़काव

0

-सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
-जिले के 12 प्रखंडों के कालाजार प्रभावित गांव में जल्द होना है छिड़काव
-सदर अस्पताल के साथ कहलगांव और नवगछिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दिया गया प्रशिक्षण

भागलपुर-

जिले के 12 प्रखंडों में कालाजार से मुक्ति को लेकर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव 3 मार्च से किया जाएगा. इसे लेकर मंगलवार को सदर समेत जिले के 3 सरकारी अस्पतालों में छिड़कावकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया. इस दौरान केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक, केबीसी आनंद श्रीवास्तव और केटीएस ए मनन ने स्वास्थ्यकर्मियों को छिड़काव के तरीके बताए. सदर अस्पताल, नवगछिया और कहलगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में छिड़कावकर्मियों का प्रशिक्षण बुधवार तक चलेगा.

पूरी दीवार पर होगा छिड़काव:
केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि पहले दीवार में 6 फीट की ऊंचाई तक सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव होता था, लेकिन इस बार पूरी दीवार में छिड़काव कराया जाएगा. घर के अंदर सभी जगहों पर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव होगा. यह अभियान जिले के 12 प्रखंडों के 57 गांवों में 66 दिनों तक चलेगा.

जिले के चार प्रखंड हैं कालाजार मुक्त: केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि जिले के चार प्रखंड कालाजार से मुक्त हैं. नाथनगर, जगदीशपुर, नवगछिया और बिहपुर प्रखंड में कालाजार के एक भी मरीज नहीं हैं. इसलिए जिले के शेष बचे 12 प्रखंडों में छिड़काव कराया जाएगा.

कालाजार की रोकथाम को लेकर विभाग अलर्ट:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम अगले महीने से किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 4 प्रखंड कालाजार से मुक्त हैं, इसलिए वहां छिड़काव का काम नहीं होगा. केयर इंडिया के डीपीओ ने बताया कि छिड़कावकर्मियों को चिह्नित गांव की जानकारी दी गई है.

घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
डॉ पटेल ने बताया अब दवा का छिड़काव किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छररोधी क्रीम लगाएं. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई.

कालाजार की ऐसे करें पहचान:
डॉ पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं. उन्होंने बताया कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए.

खगड़िया में 120 को दिया गया कोविड-19 टीका का दूसरा डोज

0

– जिला अस्पताल में 100 एवं सदर पीएचसी 20 कर्मियों को दी गयी वैक्सीन
– स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के कर्मियों को दिया गया टीका
– वैक्सीनेशन अभियान की गति को रफ्तार देने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

खगड़िया-

कोविड-19 संक्रमण को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए खगड़िया में वैक्सीनेशन अभियान के तहत कोरोना टीका का दूसरा डोज पूरे जोर-शोर से दिया जा रहा है| दूसरा डोज अभियान की गति को रफ्तार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार को जिला सदर अस्पताल में 100 , पीएचसी में कुल 20 स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के कर्मियों को टीका दिया गया। वैक्सीन लेने के पश्चात सभी कर्मियों में काफी उत्साह दिखा एवं सबों ने कहा सुरक्षित है वैक्सीन। इसलिए, निर्भीक होकर कराएं वैक्सीनेशन।

– अभी कोविड-19 बरकरार, इसलिए सावधान रहने की जरूरत :-
खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि अभी कोविड-19 का संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में लापरवाही ठीक नहीं है। इसलिए, इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए सावधान रहें और स्थाई निजात के लिए निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं। यह खुद के साथ-साथ समाजहित में भी अच्छा कदम साबित होगा और भविष्य भी सुरक्षित होगा।

– वैक्सीनेशन अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आएं कर्मी :-
खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि वैक्सीनेशन के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है| कर्मियों को वैक्सीनेशन के बाद भी गाइडलाइन का पालन जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। वहीं, उन्होंने सभी कर्मियों से वैक्सीनेशन अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आने की अपील की | साथ हीं कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए टीका लगवाने को कहा । क्योंकि, कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है।
– वैक्सीनेशन के बाद भी जारी रखें एहतियात :-
केयर इंडिया के उदय कुमार ने बताया कि वैक्सीन लेने के बाद वैक्सीनकर्मी द्वारा वैक्सीन लेने वालों को एहतियात जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया गया। इस दौरान बताया गया कि मास्क का नियमित उपयोग एवं दो गज की शारीरिक दूरी का पालन समेत अन्य एहतियात जारी रखना है ।

– अफवाहों से बाहर आकर कर निर्भीक होकर कराएं वैक्सीनेशन :-
कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए अफवाहों से बाहर आकर निर्भिक होकर वैक्सीनेशन कराएं। साथ ही अपने अन्य सहयोगियों को भी प्रेरित करें। क्योंकि, वैक्सीन ही इस वैश्विक महामारी से स्थाई निजात का सबसे बेहतर विकल्प है। इससे ना सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे बल्कि आपके साथ-साथ आपका पूरा परिवार और समाज भी सुरक्षित रहेगा।

– वैक्सीन लेने के बाद सामान्य परेशानी होने पर घबराएं नहीं :-
वैक्सीन लेने के बाद सामान्य परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि, हल्का बुखार, वैक्सीन लेने वाले बाँह में सूजन, दर्द समेत अन्य सामान्य परेशानी हो सकती है। किन्तु, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, यह सामान्य परेशानी है। जो किसी भी वैक्सीन हो सकती है। यह परेशानी अन्य वैक्सीन लेने के बाद जिस तरह एक-दो दिन में स्वतः दूर हो जाती थी। उसी तरह कोविड-19 की वैक्सीन की भी सामान्य परेशानी स्वतः दूर हो जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

मैटरनल मोर्टेलिटी रेट (एमएमआर) को समाप्त करने में वंडर एप कारगर

0

– सुरक्षित संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व के लिए वंडर एप के जरिये की जाती है निगरानी
– मातृ – शिशु मृत्यु दर को समाप्त करने के उद्देश्य से रविवार को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने किया था वंडर एप को लॉन्च

मुंगेर , 23 फरवरी |

सुरक्षित संस्थागत प्रसव के दौरान मातृ – मृत्यु दर , मैटरनल मोर्टेलिटी रेट ( एमएमआर) को समाप्त करने उद्देश्य से रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने ” वंडर ” एप को लॉन्च किया। मालूम हो कि जून 2019 में यह एप सबसे पहले बिहार के दरभंगा जिले में लॉन्च हुआ था। उस समय दरभंगा जिले में कुल 6500 रोगियों में से गम्भीर बीमारियों से पीड़ित साढ़े 4 प्रतिशत रोगियों की पहचान (आइडेंटिफाइड) की गयी थी । इन रोगियों को बेहतर इलाज के लिए 108 ट्रांसपोर्ट सिस्टम के जरिये दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया था। उसके बाद राज्य सरकार ने एमएमआर को समाप्त करने के उद्देश्य से पूरे राज्य में लागू करने का निर्णय लिया था।
गर्भवती महिला का सारा डिटेल्स जैसे विभिन्न जांच रिपोर्ट “वंडर एप्प ” में सेव कर दिया जाता-
केयर इंडिया की डीटीओएफ डॉ. नीलू ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा सुरक्षित संस्थागत प्रसव के दौरान मातृ – शिशु मृत्यु दर या मैटरनल मोर्टेलिटी रेट ( एमएमआर) को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी प्रयास के तहत गर्भ धारण करने के साथ ही गर्भवती महिला का सारा डिटेल्स जैसे विभिन्न जांच रिपोर्ट “वंडर एप ” में सेव कर दिया जाता है। इसके बाद उसके जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की कमी मिलने के बाद यह एप एक अलार्म जेनरेट करता है। यह अलार्म स्वास्थ्य कर्मियों को कमी को दूर करने के लिए आवश्यक दवाओं के बारे में भी मदद करता है।

स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. नर्मदा कुपूस्वामी ने किया “वंडर एप ” को विकसित :
उन्होंने बताया कि स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायन्कोलॉजिस्ट ओबेस्टरेसियन) डा. नर्मदा कुपूस्वामी ने “वंडर एप ” को विकसित किया है। वो लगातार चार दशक तक प्रैक्टिस करने के बाद अभी अमेरिका के शिकागो शहर में रह रही हैं। बताया कि नर्मदा कुपूस्वामी ने एक मोबाइल प्लेटफॉर्म विकसित किया जिसे उन्होंने वुमनस ऑब्स्ट्रीकल न्यूनेटल डेथ एवोल्यूशन एंड रिडक्शन ( डब्लू.ओ. एन. डी. ई. आर. वंडर) नाम दिया जो मैटर्नल मोर्टिलिटी रेट ( एमएमआर) को समाप्त करने में मदद करता है।

” वंडर ” एप के माध्यम से कैसे कम होता है मैटर्नल मोर्टिलिटी रेट ( एमएमआर) ?
डॉ. नीलू ने बताया कि वंडर एप एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जो निम्न और मध्यम स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को अंटेनेटल केयर के प्रति आत्म विश्वास पैदा करता है। ये सभी स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिला के पंजीयन करने के साथ ही पूरे गर्भावस्था के दौरान एक निश्चित अंतराल पर निगरानी करती हैं । इसके साथ ही गर्भवती महिला का हिस्ट्री, लैब रिपोर्ट के साथ ही वाइटल साइन जैसे ब्लड प्रेशर, पल्स रेट ,ऑक्सीजन लेवल, टेम्परेचर को एप के माध्यम से निगरानी की जाती है। इसके बाद किसी तरह की प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर यह एप प्रतिकूलता की पहचान करने के लिए एक मैकेनिज़्म और अल्गोरिथम का निर्माण करता है। यह एप स्वास्थ्य कर्मियों को मरीज के हाई रिस्क होने पर उच्य स्तर के डॉक्टर से सम्पर्क करने के लिए अलर्ट जारी करता है।

कोरोना अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ,रहें सावधान

0

सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 18 पर पहुंची, 10 दिन पहले थी 7
5 दिन में जिले में 14 से ज्यादा कोरोना के मरीज मिले

भागलपुर, 23 फरवरी
पिछले कुछ दिनों से जिले में कोरोना के मरीजों की घटती संख्या को देखकर लोग निश्चिंत हो गए थे कि अब कोरोना खत्म हो गया. लेकिन 10 दिन पहले जिले में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या जहां 7 थी, वह मंगलवार को 18 पर पहुंच गई. पिछले 5 दिनों में कोरोना के 14 नए मामले सामने आए हैं, जबकि पिछले कुछ दिनों से नए मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही थी. फरवरी में ही 5 दिन ऐसे थे जिस दिन कि एक भी मरीज जिले में नहीं मिला था. इसलिए कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है. कोरोना को लेकर अभी और सावधान रहने की जरूरत है.

जिले का रिकवरी रेट 98.07 :
स्वास्थ्य विभाग की बेहतर व्यवस्था और लोगों की सावधानी की वजह से जिले का रिकवरी रेट 99.5 पर पहुंच गया था जो अब घटकर 98.07 पर आ गया है. यह सब लोगों की लापरवाही का नतीजा है.लोग जिस तरह से पहले कोरोना को लेकर सावधानी बरत रहे थे वैसी ही सतर्कता की अभी कुछ और दिनों तक जरूरत है. नहीं तो कोरोना जिले में दोबारा पांव पसार सकता है.

टीका आ गया पर सतर्कता भी जरूरी:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना का टीका आ गया है. अभी दूसरा चरण चल रहा है. जल्द ही तीसरा चरण शुरू होगा, जिसमें आमलोगों को भी टीका पड़ने लगेगा, तब तक लोगों को सावधान रहना चाहिए. टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. तीनों चरण समाप्त हो जाएंगे और नए मरीज भी नहीं मिलेंगे तभी हम मानेंगे कि कोरोना पूरी तरह से समाप्त हो गया है. इसलिए अभी सावधान रहें.

कुछ और दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत: जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकमल चौधरी कहते हैं कि कोरोना को लेकर अभी और सावधानी बरतने की जरूरत है. लोगों को मरीजों की संख्या पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उसमें उतार-चढ़ाव होता ही रहता है. इसलिए अगर मरीज कम भी मिलने लगे, ऐसा नहीं समझना चाहिए कि कोरोना अब खत्म हो गया है. इसलिए अभी लापरवाही नहीं बरतें और सावधान रहें.

गाइडलाइन का पालन करने की जरूरत: डॉ. चौधरी कहते हैं कि लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने की जरूरत है. घर से निकलते वक्त अनिवार्य तौर पर मास्क पहने| सामाजिक दूरी का पालन करें और भीड़भाड़ से बचें. इसके अलावा स्वच्छता का ध्यान रखें. हर दो घंटे पर हाथ की सफाई जरूर करें

कोविड-19 का प्रभाव जरूर कम हुआ पर अभी दौर नहीं हुआ है खत्म, इसलिए नहीं करें लापरवाही 

0
– कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए जारी रखें गाइडलाइन
– वैक्सीन ले चुके व्यक्ति को भी सतर्क और सावधान रहने की है जरूरत, थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत
खगड़िया-
कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए वैक्सीन आ चुकी है|र इस वैश्विक महामारी को जड़ से मिटाने के लिए लोग पूरी उत्साह के साथ वैक्सीन ले भी रहे  हैं। किन्तु, इसके साथ-साथ इस वैश्विक महामारी के संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए जारी गाइडलाइन के  पालन को भी जारी रखना जरूरी है। क्योंकि, वैक्सीन आने बाद एवं लोगों सतर्कता के कारण कोविड-19 का प्रभाव जरूर कम हुआ। किन्तु, अभी इसका दौर खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, ऐसे  में आपकी लापरवाही भविष्य के लिए ठीक नहीं है और ना ही यह अच्छा संकेत हैं। प्रभाव कम होने के कारण लोग यह सोचने लगे हैं कि कोविड-19 खत्म हो चुका है। किन्तु, आपकी यह सोच ना ही आपके लिए और ना ही आपके परिवार व  समाज के लिए ठीक है।
– वैक्सीन के साथ-साथ सावधानी भी जरूरी :-
जिला सिविल सर्जन  डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण  को जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन के साथ-साथ सावधान रहना भी जरूरी है। क्योंकि, लापरवाही के कारण देश के विभिन्न प्रदेशों की स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए, इससे बचाव एवं स्थाई निजात के लिए वैक्सीन तो जरूरी है ही। इसके साथ-साथ लोगों को बचाव से संबंधित जारी गाइडलाइन का पालन करना भी जरूरी है। क्योंकि, सतर्क और सावधान नहीं रहने पर बड़ी परेशानी होने की  प्रबल संभावना बनी रहती है।
– कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन की पूरी डोज जरूरी :-
वैक्सीन की पूरी डोज यानी दोनों डोज ले चुके केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया कि कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए हर व्यक्ति को वैक्सीन की पूरी डोज लेना जरूरी है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का दौर खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, वैक्सीन की पूरी डोज के साथ-साथ अभी लोगों को सतर्क और सावधान रहने की भी जरूरत है। मैं तमाम लोगों से अपील करता हूँ कि निर्भीक होकर उत्साह के साथ बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– वैक्सीन की दूसरी डोज जरूर लगवाएं :-
कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज जरूर लगवाएं। हालाँकि, हमारा राज्य वैक्सीन की पहली डोज लेने में देश के अन्य राज्यों के सापेक्ष सबसे अव्वल है। किन्तु, स्वास्थ्य विभाग की मानें तो बिना दूसरा डोज यानी वैक्सीन पूरी डोज लिए बेकार है। इसे सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी वैक्सीनेशन अभियान की गति को तेज करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। ताकि इस वैश्विक महामारी को जड़ से मिटाया जा सके।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन हमेशा करें  :-
कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए आप निश्चित रूप से घर से बाहर निकलने पर मास्क का उपयोग करें एवं दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करें। खासकर भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जैसे कि शादी समारोह या फिर किसी अन्य आयोजन में शिरकत के दौरान तो निश्चित रूप से करें। इससे ना सिर्फ आप कोविड-19 संक्रमण से दूर रहेंगे, बल्कि अन्य संक्रामक बीमारी से भी दूर रहेंगे और यह खुद के साथ-साथ समाजहित में अच्छा कदम होगा।
– वैक्सीन लें चुके व्यक्ति को भी सतर्क और सावधान रहने की जरूरत :-
वैक्सीन ले चुके व्यक्ति को कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का दौर खत्म नहीं हुआ। इसलिए, वैक्सीन लेने के बाद भी बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करते रहें। ताकि खुद के साथ-साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहे।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– घर से निकलने वक्त निश्चित रूप से मास्क लगाएं और सैनिटाइजर पास रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें और दूसरों को भी जागरूक करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।