रामगढ़ और लखीसराय पीएचसी पर आशा कार्यकर्ताओं को दी गई परिवार नियोजन जागरूकता अभियान की जानकारी 

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– प्रत्येक आरोग्य दिवस के दिन बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण के साथ परिवार नियोजन के साधनों के बारे में लोगों को करें जागरूक
– आशा को परिवार नियोजन जागरूकता अभियान में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करने का निर्देश
लखीसराय-
जिले के रामगढ़ और लखीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को आशा कार्यकताओं की बैठक हुई | इसमें परिवार नियोजन जागरूकता अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका विषय पर चर्चा की गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए जिले के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी  डॉ. देवेंद्र चौधरी ने बताया कि प्रत्येक आरोग्य दिवस पर बुधवार और शुक्रवार को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका के अलावा आशा कार्यकर्ता टीकाकरण के साथ – साथ वैसी महिलाएं जिन्हें कोई बच्चा न हो या जिन्हें कम से कम एक बच्चा हो या फिर गर्भवती महिलाओं को परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत के साथ स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे में जानकारी दें। साथ ही जीविका दीदी और केयर के प्रतिनिधि घर- घर जाकर नवदम्पति सहित अन्य दम्पतियों के साथ बैठक कर उन्हें परिवार नियोजन के महत्व के  बारे में बताएं| यह भी बताएं कि कैसे परिवार कि प्लांनिग कर आप अपने खुद के स्वास्थ्य के साथ – साथ अपने बच्चे के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुख- सुविधा बेहतर ढंग से उपलब्ध करवा सकते हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र पर लोगों को परिवार नियोजन के महत्व, स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे में दी जाती है जानकारी –
जिले के डीटीएल केयर नावेद उर रहमान ने आशा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि केयर इंडिया के ” परिवार नियोजन सुरक्षित है ” अभियान के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रत्येक आरोग्य दिवस के दिन ई. रिक्शा जागरूकता रथ के माध्यम से माइकिंग कर आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले सभी लोगों को परिवार नियोजन के महत्व के साथ -साथ स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे में जानकारी दी जाती है। आप सभी आशा कार्यकर्ता आरोग्य दिवस पर आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाली सभी लोगों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए प्रेरित करें।
परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों से लें सहयोग :
डीटीएल केयर ने आशा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी लोग परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए घर- घर जाने के दौरान पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि जैसे मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, विकास मित्र सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के भी सहयोग ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि जिले के टोटल फर्टिलिटी रेट को 3 से 2 लाने के लिए आवश्यक है  कि परिवार नियोजन के लिए चलाए जा रहे अभियान को एक मिशन के रूप में चलाया जाय। राज्य सरकार के द्वारा मिशन परिवार विकास अभियान के तहत  ऐसा किया भी जा रहा है| लेकिन निर्धारित लक्ष्य की  पूर्ति तभी संभव हो सकती है जब समाज के सभी वर्गों का पूरा सहयोग प्राप्त हो। इसके लिए आप सभी आशा कार्यकर्ताओं के ऊपर जिम्मेदारी बहुत बड़ी है । आप लोगों को इस अभियान को सफल बनाने में पूरा सहयोग देना है।

मुंगेर के तीन प्रखंडों के 45 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ई.संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा शुरू

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– जिले के सदर प्रखंड क्षेत्र के 21, जमालपुर प्रखंड क्षेत्र के 13 और बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र के 11 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम के द्वारा दी जा रही ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा
– सदर अस्पताल सहित जिले के विभिन्न पीएचसी पर कार्यरत छह डॉक्टरों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श को चुना गया

मुंगेर –

जिले के तीन प्रखंडों सदर प्रखंड, जमालपुर और बरियारपुर प्रखंड के 21, 13 और 11 स्वास्थ्य उप केंद्रों पर सोमवार से ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा की शुरुआत की गई। इस सेवा के माध्यम से प्रखंड क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम 4 जी सेवा से युक्त अनमोल टैब पर मरीज का नाम, पता और उसकी परेशानी रजिस्टर्ड करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉक्टर से ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर रही हैं | साथ ही बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर की प्रिस्क्रीप्शन की सॉफ्ट कॉपी या पीओएस( पॉइंट ऑफ सेल) प्रिंटर मौजूद रहने पर हार्ड कॉपी भी मरीज को उपलब्ध करवाती हैं । मालूम हो कि रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विस सहित अश्विन वेब पोर्टल, वंडर एप्प सहित कई सेवाओं की ऑनलाइन शुरुआत की थी। इसके साथ ही राज्य के 1700 स्वास्थ्य केंद्रों पर ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा शुरू करने के साथ ही ओपीडी सेवा के साथ ई. प्रिस्क्रीप्शन की प्रिन्टिंग करने की भी व्यवस्था की गई है ।

मुंगेर के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्रामिंग कोर्डिनेटर ( डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के उप स्वास्थ्य केंद्र ( हेल्थ सब सेंटर) पर ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एएनएम के माध्यम से टैब के जरिये टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉक्टरों के साथ ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श के साथ इलाज किया जाना है। प्रथम चरण में सोमवार से जिले के तीन प्रखंडों के 45 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत ऑनलाइन तरीके से डॉक्टर और मरीज के साथ सीधा संवाद स्थापित कर सलाह के साथ इलाज व दवाओं से सम्बंधित प्रिस्क्रिप्शन की हार्ड और सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने बताया कि सप्ताह में तीन दिन सोमवर, गुरुवार और शनिवार को सुबह 09 बजे से 02 बजे तक जिले भर से चुने गए छह डॉक्टरों के साथ तीन प्रखंडों के 45 एचएससी से एएनएम टैब के जरिये ऑनलाइन मरीजों के चिकित्सकीय परामर्श के साथ इलाज का प्रिस्क्रीप्शन प्राप्त करेंगी।

टेलीमेडिसिन सर्विस हब से जुड़े जिले के छह नामी- गिरामी डॉक्टर ऑनलाइन करेंगे मरीजों का इलाज :
डीपीसी विकास कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रौशन, डॉ. असीम , बरियारपुर पीएचसी के डॉ. अनिल कुमार, संग्रामपुर पीएचसी के डॉ. हसन सबा, हवेली खड़गपुर पीएचसी के डॉ. अंकित एवं जमालपुर पीएचसी के डॉ. संजय कुमार सुमन ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विस के तहत ऑनलाइन तरीके से मरीजों का इलाज करेंगे।

ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन को ले 28 जनवरी को जिले भर में किया गया था ड्राई रन :
उन्होंने बताया कि जिले में ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विस की लॉन्चिंग को ले पिछले महीने के 28 जनवरी को जिले भर में ड्राई रन का आयोजन किया गया था। बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा 21 जनवरी को जारी पत्र के अनुसार वैसे स्वास्थ्य उपकेंद्र (एचएससी) जो स्पोक के रूप में चिह्नित किये गए है वहां पीओएस ( पॉइंट ऑफ सेल) पर प्रिंटर लगाना है। इसके साथ ही वहां बिजली और इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करानी है। इसके तहत जिले के दो स्वास्थ्य उप केंद्र बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत कल्याणपुर करहरिया और सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हसनपुर में प्रिंटर इंस्टॉल किया गया।

क्या है ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन ऑनलाइन पोर्टल ?
उन्होंने बताया कि यह एक स्वत्रंत ब्राउज़र आधारित एप्लीकेशन है| जिसमें डॉक्टर से डॉक्टर और मरीज से डॉक्टर टेलीफोन आधारित चिकित्सकीय परामर्श देने की सुविधा है । यहां मरीज डॉक्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी समस्याओं/ बीमारी के बारे में बता सकते हैं ।
इसके तहत ई.संजीवनी टेलीमेडिसिन एप्प में लॉगिन करने के बाद केस जेनरेट कर हब से जुड़े डॉक्टर से परामर्श करना है| साथ ही सभी केस में प्रिस्क्रीप्शन जेनरेट करना भी अनिवार्य है, अन्यथा केस पोर्टल पर क्लोस नहीं होगा। इसके साथ ही जिस एचएससी पर प्रिंटर उपलब्ध है वहां प्रिंट निकालना और जहां उपलब्ध नहीं है वहां सॉफ्ट कॉपी तैयार करना अनिवार्य है। इस एप्प पर काम करने के लिए एएनएम के पास अनमोल टैब, 4 जी सिम,गूगल क्रोम, गूगल इंडिक के साथ ही रेडी रेकनर का होना आवश्यक है| साथ ही डॉक्टर के पास हेड फोन, वेब कैमरा और रेडी रेकनर का होना आवश्यक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हाइपरटेंशन के महत्व को समझा रही एएनएम मंजू वर्मा

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डीएमटी प्रशिक्षण के बाद काम करने के तरीके बदल गए
सन्हौला प्रखंड क्षेत्र के लोगों को इसका मिल रहा है फायदा

भागलपुर-
डीएमटी प्रशिक्षण की शुरुआत होने के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवा में काफी सुधार हुआ है. प्रशिक्षण लेने के बाद एएनएम अपने क्षेत्र में बेहतर काम कर पा रही हैं. चाहे वह प्रसव कराने का काम हो या फिर बीमारियों की पहचान से संबंधित काम. इसे एएनएम बेहतर तरीके से अंजाम दे रही हैं. सन्हौला प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैं काम करने वाली एएनएम मंजू वर्मा अपने क्षेत्र में मिसाल कायम कर रही हैं. वह न सिर्फ हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों की पहचान कर रही हैं, बल्कि उन्हें उचित सलाह भी दे रही हैं.
डीएमटी प्रशिक्षण से हमारे काम में काफी सुधार हुआ-
मंजू वर्मा कहती हैं कि वैसे तो हमलोग पहले भी अपने काम को बेहतर तरीके से कर रहे थे, लेकिन जब से डीएमटी प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है, तब से हमारे काम में काफी सुधार हुआ है. प्रशिक्षण के दौरान मेंटर काम के दौरान होने वाली छोटी-छोटी कमियों को भी दुरुस्त करने की सलाह देती हैं. पहले हमलोग पुराने तरीके से काम कर रहे थे, लेकिन जब से डीएमटी प्रशिक्षण मिला है, तब से अत्याधुनिक तकनीक के सहारे बेहतर काम कर पा रही हूं. सबसे बेहतर बात यह है कि हमारे काम से लोग भी संतुष्ट हो जा रहे हैं. इससे हमें काफी खुशी मिलती है.

अब तक सैकड़ों हाइपरटेंशन पीड़ित मरीजों की कर चुकी हैं पहचान:
मंजू वर्मा पिछले एक साल के दौरान सैकड़ों हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों की पहचान कर चुकी हैं. इसके अलावा वह सामान्य लोगों को भी इससे बचने की सलाह देती हैं. साथ में इससे बचने के लिए जीवनशैली में किस तरह का बदलाव लाना चाहिए, इसकी जानकारी वह आमलोगों को देती हैं. साथ ही संदिग्ध मरीजों की जांच के जरिए पहचान भी करती हैं. जांच में अगर हाइपरटेंशन होने की पुष्टि हो जाती है तो उसका इलाज शुरू करवाती हैं.

हाइपरटेंशन से बचने के लिए दिनचर्या में लाना होगा बदलाव:
मंजू वर्मा कहती हैं कि अगर आप अपने दिनचर्या में बदलाव ले आते हैं तो आप हाइपरटेंशन की बीमारी से पूरी तरह से मुक्त हो सकते हैं. इसके लिए खानपान का विशेष ध्यान रखना होगा. नींद पूरी करनी होगी. समय पर सोने की और जगने की आदत डालनी होगी. इसके अतिरिक्त सुबह कम-से-कम से कम 45 मिनट तक तेज कदमों से चलना पड़ेगा. अगर आप इन आदतों को अपनी जीवनशैली में शामिल कर लेंगे तो आप हाइपरटेंशन से बचे रहेंगे.

डीएमटी प्रशिक्षण के बाद एएनएम की दक्षता बढ़ी:
सन्हौला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ मृत्युंजय कुमार का कहना है कि वैसे तो हमारे अस्पताल की सभी एएनएम अपने क्षेत्र में बेहतर काम कर रही हैं. डीएमटी प्रशिक्षण के बाद निश्चित तौर पर सभी की दक्षता बढ़ी है. अब वह अपने काम को बेहतर तरीके से कर पा रही हैं. मंजू वर्मा ने तो हाइपोटेंशन के मरीजों की पहचान का एक रिकॉर्ड कायम किया है. इतने कम समय में इतने ज्यादा मरीजों की पहचान करना अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं है. सबसे रोचक बात यह है कि इसका फायदा क्षेत्र के लोगों को मिल रहा है, जिससे स्वास्थ सेवाओं में काफी सुधार हो रहा है

50 आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पड़ा कोरोना टीका का दूसरा डोज

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शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाभुकों का कराया गया टीकाकरण
टीका का दोनों डोज लेने के बाद लाभुक कोरोना से हो गए सुरक्षित

बांका, 22 फरवरी
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार को आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोरोना टीका का दूसरा डोज दिया गया. इस दौरान शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मैनेजर अल्पना कुमारी को भी कोरोना टीका का दूसरा डोज दिया गया. टीकाकरण के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया गया. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि सोमवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना टीका का दूसरा डोज लेने की प्रक्रिया काफी उत्साहजनक रही. अच्छी संख्या में केंद्र पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुँचीं. एएनएम ममता कुमारी और अभिलाषा कुमारी ने सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोरोना टीका का दूसरा डोज लगाया. 70 का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें 50 लोग दूसरा डोज लेने के लिए पहुंचे.

दूसरा डोज लेटर टीकाकरण की प्रक्रिया को करें पूरी:
डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना टीका का दूसरा डोज लेने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद ही आप कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित हो पाएंगे. इसलिए कोरोना टीका का दूसरा डोज लेने में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतें. समय पर आकर टीका ले लें. टीका का दूसरा डोज देने के दौरान शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी सुविधाएं उपलब्ध रहीं.

कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित: डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है. इससे किसी तरह का नुकसान नहीं है. कहा अफवाहों पर ध्यान नहीं दें और कोरोना का टीका लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने का काम करें. कोरोना एक संक्रामक बीमारी है| यह बीमारी एक से दूसरे में फैलने की आशंका रहती है. इस वजह से अगर आप टीका लेंगे तो सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी सुरक्षित रहेंगे.

टीकाकरण हो जाने के बाद भी गाइडलाइन का करें पालन: डॉ चौधरी ने बताया कि टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें. मास्क पहनकर ही घरों से निकलें और भीड़भाड़ में जाने से बचें. साथ में दो गज की सामाजिक दूरी का भी पालन करें. ऐसा करने से न सिर्फ आप कोरोना से बचे रहेंगे, बल्कि दूसरी अन्य बीमारियों से भी आपका बचाव होगा

73 वां अणुव्रत स्थापना दिवस पर देश भर में मीडिया के साथ अणुव्रत संवाद

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  1. 73 वां अणुव्रत स्थापना दिवस पर देश भर में मीडिया के साथ अणुव्रत संवाद

नई दिल्ली:
73 वें अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर देश भर में मीडिया के साथ अणुव्रत संवाद का आयोजन 1 मार्च 2021 को प्रात: 11 बजे से किया जा रहा है। अणुव्रत संवाद का मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति और अहिंसा के संदेश को फैलाने वाली अणुव्रत जीवन शैली देना है। अणुव्रत आंदोलन व्यक्ति सुधार पर विगत 73 वर्षों से निरन्तर कार्य कर रहा है ,अणुव्रत विश्व भारती इसमें पुरी शिद्दत से लगी हुई है। इसी संदेश को प्रचार प्रचार के लिए 1 मार्च 2021 को देश भर की सैंकडो समितियों द्वारा मीडिया में अणुव्रत संवाद का आयोजन किया जायेगा जिसमें हजारों कि संख्या में पत्रकार सम्मिलित होंगे और अणुव्रत आंदोलन के संदेश को मीडिया के माध्यम से विश्व भर में प्रसारित करने में सहयोग करेंगे। दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में इसी मद्देनजर अणुव्रत संवाद का आयोजन सुबह 11 बजे से 2 बजे तक किया जायेगा जिसमें दिल्ली के पत्रकार अपने अऩुभव भी साझा करेंगे।

मुख्य वक्ता में भारत सरकार में संसदीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल रहेंगे, साथ ही साथ अणुव्रत विश्व भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संचय जैन एवं राष्ट्रीय महामन्त्री श्री भीखम सुराणा कांफ्रेंस में मौजूद रहेंगे।

गौरतलब है कि अणुव्रत विश्व भारती अणुव्रत आंदोलन की प्रतिनिधि संस्था है। बिना किसी जाति, धर्म व लिंग भेद के मानव मात्र के हित को समर्पित यह आंदोलन अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्रीमहाश्रमण जी के आध्यात्मिक नेतृत्व में विकास करते हुए नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा ह

हमें समझना होगा देश बदल रहा है लेकिन किस राह में……..

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-चिरंजीत कुमार शर्मा (राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद, भारत)

मेरे दोस्तों मैं समय समय पर अपने लेखो द्वारा बताना या समझाने की कोशिश करता रहा हूं कि देश से बढ़कर कुछ नहीं होना चाहिए, देश की गरिमा से बढ़कर हमारे लिए हम भी महत्वपूर्ण नहीं हो सकते, हमारी संस्कृति वसुदेव कुटुम्ब कुम की है जिसमें पूरा विश्व हमारे लिए एक परिवार है और उसकी, संस्कृति, गरिमय आज और शांतिपूर्ण कल को महत्व दिया है। हमारी संस्कृति और इतिहास हमें बताती है हमारे पूर्वजों ने किस तरह अपनी वाणी से निकलें शब्दों को अपने जीवन से ज्यादा महत्व दिया है। हमारे इतिहास के पन्ने ऐसी गौरवशाली गाथा से भरे पड़े हैं जहां अपने शब्दों और अपने विचारों, अपने वादों को लोगों ने निभाकर अपने पुरुषार्थ का परिचय पूरे विश्व को दिया है,

जहां लोगों ने देश और उसकी गरिमा को विश्व के पटल पर कुछ इस तरह पहुंचाया कि विश्व और यूनाइटेड नेशन भी हमारे सामने नतमस्तक हुआ है ये हमे दुनिया में एक अलग पहचान दिलाता है।

मेरे दोस्तों लेकिन ना जाने क्यों आज हमारे समाज में इन पद चिन्हों पर चलने में कमी आयी है, हम अपने छोटे से स्वार्थ के लिए अपनी वाणी को इज्जत ना देते हुए कथनी और करनी में अंतर करते हैं, भ्रष्टाचार करने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, भ्रष्टाचार से पैदा की गई दौलत और उससे बनते दौलतमंद लोगों को समाज में हम इज्जत के पात्र समझते हैं और देते हैं, और ईमानदारी से जीवनयापन करने वाले और मेंहनतकश इंसान को इसलिए कम सम्मान देते हैं क्योंकि हमारे लिए इज्जत और सम्मान की कसौटी केवल धन दौलत बन गयी है जिसके कारण हर तरफ इसकी दौड़ में सभी शामिल होते जा रहे हैं और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।

फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और उसकी व्यवस्थाओं भी इन्हीं को अपना आदर्श मानती है इसलिए समाज में आर्थिक और सामाजिक और सांस्कृतिकके साथ सभी विकास व्यापार का रूप ले चुके हैं, जिसके कारण आपसी रिश्ते भी व्यापार की कसौटी पर बनते और बिगड़ते हैं।
मेरे दोस्तों ये किताबी बातें नहीं है गूढ़ सत्य है हमारी सोच और सामाजिक पृष्ठभूमि का, मैं रोज बड़े नजदीक से इसे महसूस करता हूं और सोचता हूं क्या यही नया भारत हैं आप सभी को इस पर चिंतन-मनन करना चाहिए।

दोस्तों हमारे देश की पहचान धूमिल हो रहीं हैं और उसका मुख्य कारण है राजनीति भ्रष्टाचार और राजनीतिक दलों की आगे बढ़ने की चाहत, जिसने राजनीति में झूठ, पाखंड, पैसा, गुंडागर्दी, झूठ बोलने और आम आदमी के अधिकारों के हनन को बहुत बढ़ाया है या यूं कहें वो चरम सीमा पर है, देश के राजनीतिक दल अपनी पृष्ठभूमि को बढ़ाने या स्थापित करने के लिए देशद्रोही ताकतों से सहायता या उनका समर्थन करने से भी नहीं चुकते, देश में सामाजिक आंदोलन राजनीतिक दलों की कठपुतली बन गयी है और आंदोलन के सही मुद्दे उनमें गौण हो गये है या समाप्त हो गये है और सही और ग़लत दोनों को अपने अपने अनुसार प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसमें आंदोलन के असली मुद्दे कहीं खो गये है और देशभक्ति की केवल डडी को ढौल पर बजाया जा रहा है लेकिन कर्म की कसौटी पर वो कहीं दिखाई नहीं देता।

मेरे दोस्तों अभी कुछ दिन पहले में बिहार में एक सम्मान समारोह में शामिल हुआ, क्योंकि मैं भी उसमें सम्मानित होना था इसलिए मैं अपने परम मित्र जो बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं उनके साथ सभी लोगों के विचारों को सुन रहा था क्योंकि उसमें प्रदेश के मीडिया हाऊस से भी लोग अपने विचार व्यक्त कर रहे थे और अपने आपको संविधान का चौथा स्तम्भ बताकर अपने विचारों की श्रेष्ठता साबित करने में लगें थे, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर भी उन्हें चौथा स्तम्भ मानकर सम्बोधन कर रहे थे और उसमें कुछ मीडिया कर्मी किसान आंदोलन को सही साबित करते हुए गांधी जी के वक्तव्य को समझा रहे थे कि उन्होंने साउथ अफ्रीका में किसी का हाथ पकड़ कर बोला था डरना नहीं, ना जाने क्यों मुझे ऐसा लगा जैसे वो वहां भी झूठ बोलकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं और फिर मैंने सोचा गांधीजी ने किसका हाथ पकड़ा था और किस परिपेक्ष में ना डरने को बोला था क्योंकि किसान आंदोलन आंदोलन नहीं है वो मुमेट है देश की सरकार को विश्व के पटल पर बदनाम करने के लिए, जो राजनीतिक दलों के फायदे और नुकसान से ओतप्रोत है जिसमें सरकार बनाने और बिगाड़ने के इरादे शामिल हैं क्योंकि कोई भी आंदोलन आम आदमी के अधिकारों का हनन करके अपने अधिकारों की वकालत नहीं करता लेकिन वो कह रहे थे और वो उतना ही झूठ था जितना उनका अपने आपको संविधान का चौथा स्तम्भ मानना, क्योंकि संविधान विशेषज्ञ और संविधान को मैं सही से समझता हूं जिसमें केवल तीन ही स्तम्भ है लेकिन उपमुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर चुपचाप उसे सुन ही नहीं रहे थे मान भी रहे थे क्योंकि कहीं ना कहीं उनकी वाणी में भी उनकी कार्यप्रणाली में अंतर समझ आ रहा था और शायद वो नहीं चाहते थे की वो मीडिया के लोगों के शब्दों को सही करें, शाय़द वहां गांधीजी के वो शब्द डरना नहीं डरा रहे थे।

दोस्तों गांधी जी के नाम को इस्तेमाल करके लोग अपने फायदे और नुकसान राजनीतिक दलों की विचारधारा को सही साबित करने में करते हैं लेकिन गांधीजी के शब्दों और उसमें छुपे संदेशों को हम लोग पढ़ने और समझने में मात खा गए जिसके कारण आज़ गांधीजी एक परिवार या आंदोलनकारियों के गलत मनसुबे जिसमें आम जनता के अधिकारों का हनन करके सरकारी और गैर-सरकारी कामों में बांधा डालने से ज्यादा कुछ नहीं है, जो हमारे देश को कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में प्रभावित कर रहा है, हमें इस पर भी चिंतन मनन करने की आवश्यकता है।

दोस्तों मैं मानता हूं हमारा देश बदल रहा है क्योंकि अगर ये नहीं बदलता तो विश्व में अन्न उगाने में तीसरा स्थान होने के बावजूद देश की उन्नीस प्रतिशत जनता रोज़ रात को भूखी नहीं सोती, भूखमरी इंडेक्स में हमारे स्थान 118 वा नहीं होता।

देश नहीं बदल रहा होता तो भ्रष्टाचार के ऊपर संसद में बात ना होकर देश मे विकास के मुद्दों पर चर्चा होती लेकिन यहां चर्चा का विषय आपका भ्रष्टाचार ज्यादा और हमारा कम पर होती है।

अगर देश नहीं बदल रहा होता तो देश में आरक्षण के कारण एक 220 रेक लाने वाले को वो कालिज पढ़ने को नहीं मिलता जो 22000 रेक लाने वाले आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को मिल जाती है।

देश नहीं बदल रहा होता तो कोई आंदोलन कारी आम आदमी के संविधानिक अधिकारों का हनन करके उसके चलने वाली सड़क पर अपना आंदोलन नहीं कर पाते।
और देश की सरकार उनके सामने असहाय होती।

देश नहीं बदल रहा होता तो राजनीतिक दलों में देश से पहले अपने विकास का एजेंडा ना होता।

देश नहीं बदल रहा होता तो ईमानदारी से काम करने वाले प्रोफेशनल को काम की कमी और भ्रष्ट प्रोफेशनल को काम ही काम नहीं होता।

हम बदल रहे हैं और बदल रहा है हमारे साथ देश लेकिन जिस राह पर हम बदल रहे हैं उसमें हमारी संस्कृति पहचान जिंदा रह पायेगी ये भविष्य को प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। चिंतन करें और आवाज लगाये सोयी हुईं अंतरात्मा को।

डीएमटी प्रशिक्षित जीएनएम अनामिका और प्रिया भारती ने सुरक्षित प्रसव के दौरान पीपीएच की जटिलताओं को सहजतापूर्वक सुलझाया

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– बेगूसराय के तेघड़ा पीएचसी में प्रसव के लिए आई अर्चना कुमारी के प्रसव के दौरान उत्पन्न जटिलता को सूझबूझ के साथ सुलझाया

बेगूसराय-
डीएमटी फैसिलिटी प्रशिक्षित जीएनएम नर्स अनामिका कुमारी और प्रिया भारती ने तेघड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए आई अर्चना कुमारी के प्रसव के दौरान उत्पन्न पीपीएच की जटिलता को सही समय पर पहचान कर सही तरीके से सुलझाया । बेगूसराय के महेश वारा निवासी राजेश कुमार पासवान की पत्नी 31 वर्षीय अर्चना का सुरक्षित प्रसव तेघड़ा पीएचसी में डीएमटी ट्रेनिंग प्राप्त जीएनएम अनामिका कुमारी और प्रिया भारती ने कराया था।

बेगूसराय जिले के तेघड़ा पीएचसी में अर्चना कुमारी का सुरक्षित प्रसव कराने वाली जीएनएम अनामिका कुमारी ने बताया कि 18 फरवरी को संस्थागत सुरक्षित प्रसव के लिए बेगूसराय के महेशवारा की अर्चना कुमारी रजिस्ट्रेशन नंबर 3764 / भर्ती हुई। अस्पताल में भर्ती होने के समय गर्भवती महिला का वाइटल सामान्य और बीपी 120/160 एमएमएचजी और एफएचआर 144/मिनट था। अस्पताल में भर्ती होने के वक्त गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) और कॉन्ट्रेक्शन भी ठीक था। इसके बाद महिला ने सुबह करीब 04. 30 बजे बिना किसी जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) के बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन 3395 ग्राम था। इसके बाद प्रसूति माता और उसकी बच्ची को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

प्रसूति की कॉम्प्लिकेशन को डीएमटी प्रशिक्षण प्राप्त जीएनएम ने सूझबूझ से किया हैंडल :
जीएनएम अनामिका कुमारी ने बताया बच्ची के जन्म के बाद अचानक से माता को ब्लीडिंग होने के साथ कॉम्प्लिकेशन होना शुरू हो गया। बताया कि सीसीटी ( कंट्रोल कोर्ड ट्रैक्शन) नियंत्रित तरीके से नाल का खिंचाव खून का झोका आने के बाद शुरू किया। फिर पेरिनियल और वेजाइनल कोनिकल टियर के लिए जांच की तो सब कुछ सामान्य था। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के बाद अर्चना का यूटरस संकुचित नहीं हो पाया था। यानी एटोनिक पीपीएच का केस था। उस समय ड्यूटी पर तैनात जीएनएम सिस्टर प्रिया भारती को बुलाया गया और फंडल मसाज देना शुरू किया गया । प्रिया ने आईवी फ्लूड सेट कर दोनों हाथ में एल्विन लगाया । इसके बाद हाथ में प्लेन आरएल व दूसरी हाथ में 20 आईवी ऑक्सीटोसिन डालकर 50 एमएम प्रति मिनट के अनुसार देना शुरू किया | कैथेटर लगाई गयी तो इसके बाद यूटरस कॉन्ट्रैक्ट हुआ और ब्लीडिंग भी बंद हो गई। बताया कि जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) की पहचान करने के साथ ही हम दोनों ने बेहतर ढंग से स्थिति को संभाला।

हम दोनों सिस्टर ने सही समय पर सही निर्णय लेते हुए स्थिति को बेहतर ढंग से किया हैंडल :
उन्होंने बताया कि हम दोनों सिस्टर ने सही समय पर सही निर्णय लेकर केस के प्रति अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई और बहुत ही बढ़िया तरीके से पीपीएच और शॉक का प्रबंधन किया । ड्यूटी पर तैनात दोनों डीएमटी प्रशिक्षण प्राप्त सिस्टर ने लगातार वाइटल साइन को ऑब्सर्ब किया और 30 मिनट के बाद माता के बीपी की जांच की तो बीपी120 /70 एमएम एचजी नोट किया गया। इसके बाद प्रसूति माता ने खुद को बेहतर महसूस करते हुए परेशानी से खुद को बाहर बताया । इसके बाद दिन के 11. 30 बजे माता और उसके बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

एनएमएस की अनुपस्थिति में जिम्मेदारी पूर्वक मरीज का ध्यान रखने के लिए काबिले तारीफ है डीएमटी मेंटर्स का प्रयास :
बेगूसराय जिले कि केयर इंडिया के फैमिली प्लांनिग कोऑर्डिनेटर ने बताया कि एनएमएस कि अनुपस्थिति में इन डीएमटी प्रशिक्षित मेंटर्स के द्वारा जिम्मेदारी पूर्वक रोगियों की देखभाल करने के साथ ही कॉम्प्लिकेशन को पहचानते हुए उसे सुरक्षित तरीके से हैंडल करना वाकई में काबिले तारीफ है। केयर इंडिया टीम और राज्य सरकार की पूरी टीम को दोनों डीएमटी मेंटर अनामिका कुमारी और प्रिया भारती पर गर्व है।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता

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– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा के हर मानकों का रखा जाता है ख्याल
– गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की परेशानी होने पर योग्य चिकित्सकों से ही कराएं जाँच

खगड़िया-

गर्भावस्था के दौरान हर महिलाओं के मन में सामान्य और सुरक्षित प्रसव को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं। दरअसल, हर महिला सामान्य और सुरक्षित प्रसव चाहती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की जरूरत है। दरअसल, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान यानी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हैं| जहाँ सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। इससे न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी।
– सुरक्षित प्रसव के लिए उपलब्ध हैं सुरक्षा की पर्याप्त सुविधा, प्रसव के बाद दी जाती है आवश्यक जानकारी :-
खगड़िया सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध है । इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को स्वास्थ्य एवं शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाती है। ताकि प्रसव के पश्चात भी माता एवं शिशु को किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा नहीं हो और होने पर तुरंत आवश्यक उपचार करा सकें।

– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :-
शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

– हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है मुफ्त जाँच:
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है| साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही। अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमतावर्धन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और दूसरों को जागरूक करें।
– बाहर निकलने पर सैनिटाइजर जरूर पास में रखें।
– बाहर का खाना खाने से बचें और जहाँ सुरक्षा के मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता हो वहाँ बिलकुल नहीं खाएँ।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

निक्षय पोषण योजना से टीबी मरीजों को पोषक आहार के लिए मिलती है 500 रुपये प्रति माह की आर्थिक प्रोत्साहन राशि

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– डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफर ( डीबीटी) का लाभ लेने के लिए टीबी का इलाज करवा रहे मरीजों को “निक्षय पोषण ” नामक वेबपोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद जारी करवाना पड़ता है नोटिफिकेशन
– इस योजना के तहत टीबी मरीज के साथ- साथ प्राइवेट डॉक्टर और ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी मिलती है आर्थिक प्रोत्साहन राशि

मुंगेर-

केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना ” निक्षय पोषण योजना ” के तहत टीबी मरीजों को पोषक आहार के लिए 500 रुपये प्रति माह की दर से इलाज शुरू होने के छह महीने तक आर्थिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है। डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफ़र (डीबीटी) स्कीम के तहत यह आर्थिक सहायता राशि दी जाती है | इसके लिए टीबी मरीजों को सबसे पहले जहां वो टीबी का इलाज करवा रहे हैं उस प्राइवेट डॉक्टर या अपने नजदीकी टीबी पर्यवेक्षक से मिलकर अपना सारा डिटेल्स (अकाउंट्स) ” निक्षय पोषण” वेब पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद नोटिफिकेशन जारी करवा लेना आवश्यक है।

” निक्षय पोषण योजना ” का लाभ लेने के लिए टीबी मरीजों के लिए क्या कुछ है आवश्यक :
इस योजना का लाभ सभी प्रकार के मरीजों जिनका इलाज सरकारी अस्पताल या प्राइवेट डॉक्टर के यहां चल रहा हो मिलता है | इसके तहत इलाज की अवधि तक 500 रुपए प्रति महीने पौष्टिक आहार के लिए दिया जाता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए टीबी मरीज के पास डॉक्टर का पुर्जा, आधार कार्ड या कोई भी सरकारी पहचान पत्र एवं बैंक पासबुक की छाया प्रति का होना जरूरी है | इन सबको अपने अस्पताल या प्राइवेट डॉक्टर के यहां जहां टीबी मरीज का चल रहा हो वहां जमा करना होता है| ताकि मरीज के नाम का नोटिफिकेशन जारी हो सके| जिससे उसे डीबीटी का लाभ मिल सके। डीबीटी के जरिये प्रोत्साहन राशि सिर्फ बचत (सेविंग) बैंक या पोस्ट ऑफिस ही मान्य है| बैंक एफडी,आरडी, पीएफ, चालू खाता मान्य नहीं है। इसके साथ ही वैसा बैंक खाता ही मान्य है जिसमें पिछले तीन महीने के दौरान लेन देन की गई हो या फिर जिस खाता में विदेश से किसी तरह के पैसा का लेन देन नहीं किया गया हो। इसके विपरीत जिस बैंक खाते में पिछ्ले तीन महीने से कोई लेन देन नहीं किया गया हो या फिर जो बैंक एकाउंट बंद हो उसमें डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर नहीं हो सकती है।

बेनिफिसरी के अलावा प्राइवेट डॉक्टर और ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी जाती है आर्थिक प्रोत्साहन राशि :
जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर में जिला टीबी/ एचआइवी समन्वयक शलेन्दु कुमार ने बताया कि “निक्षय पोषण योजना” के तहत टीबी मरीजों के अलावा प्राइवेट डॉक्टर को टीबी मरीज का नोटिफिकेशन कराने पर 500 रुपये और इलाज के बाद इलाज पूरी होने या आउटकम मिलने पर 500 रुपये कुल 1000 रुपये की आर्थिक प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से सरकार द्वारा दी जाती है। इसके साथ ही ट्रीटमेंट सपोर्टर के रूप में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका के साथ ही एनओआईसी से प्रशिक्षित वोलेंटियर को ड्रग सेंसेटिव फर्स्ट लाइन मरीज की पहचान कर नोटिफिकेशन करवाने पर 1000 रुपये और ड्रग रेस्टेन्ट सेकेंड लाइन मरीज की पहचान कर नोटिफिकेशन करवाने पर 5000 रुपये तक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सरकार के द्वारा दी जाती है।

जिले के सभी टीबी मरीज जिनका इलाज सरकारी या प्राइवेट डॉक्टर के यहां चल रहा है और जो इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं से अपील करते हुए जिला टीबी/ एचआईवी समन्यक शैलेन्दु कुमार ने कहा कि जिले भर के वैसे सभी मरीज जो टीबी की दवा खा रहे हैं और उन्हें ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही है वो सभी लोग तत्काल अपने प्राइवेट डॉक्टर जहां से वो टीबी का इलाज करा रहे हैं या नजदीकी यक्ष्मा पर्यवेक्षक से मिलकर अपना नाम और पूरा डिटेल्स ( बैंक डिटेल्स) सहित निक्षय पोषण ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाने के साथ नोटिफिकेशन जारी करवा लें| ताकि उन्हें डीबीटी के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा दी जारी आर्थिक प्रोत्साहन राशि मिल सके।

टीबी अब लाइलाज नहीं, पर पूरी सतर्कता और सावधानी जरूरी

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– लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं जाँच, सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है निःशुल्क जाँच और इलाज की सुविधा
– सरकारी अस्पतालों में सही समय पर जांच और इलाज के बाद टीबी मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि

बेगूसराय-

टीबी एक संक्रामक बीमारी है लेकिन अब यह लाइलाज नहीं है। इससे बचाव के लिए पूरी सतर्कता और सावधानी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सही समय पर यानी शुरुआती दौर में ही लक्षण दिखने के बाद इसकी सही जांच और समुचित इलाज कराना भी जरूरी है। प्रारम्भिक दिनों में ही इस बीमारी का सही इलाज शुरू कराने से बीमारी से स्थाई निजात तो मिलती ही है साथ ही आप आसानी से इस बीमारी को मात भी दे सकते हैं। इसके लिए टीबी के शुरुआती लक्षण दिखते ही तत्काल जाँच कराने के साथ ही चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि लोग शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच कराएं और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद तत्काल चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराएं। इस दौरान इस बात का भी विशेष ख्याल रखें कि बीमारी के ठीक होने तक दवाई का क्रम छूटने न पाए।

टीबी के लक्षण दिखते ही तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में कराएं जाँच :-
टीबी के का लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच करानी ना चाहिए और जाँच के पश्चात चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इलाज कराना चाहिए| ताकि समय रहते आसानी के साथ इस बीमारी को मात दी जा सके और अन्य लोगों को भी सुरक्षित रखा जा सके। बीमारी से के स्थाई निजात के लिए शुरूआती शुरुआती दौर में ही जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है। जिले के सभी सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषक आहार लेने के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है।

बीमारी से स्थाई निजात के लिए सही समय और सही जांच और समुचित इलाज जरूरी :-
टीबी से स्थाई निजात पाने को सही समय पर सही जांच और समुचित इलाज जरूरी है। सभी सरकारी अस्पतालों में सही जांच के साथ छह महीने तक निःशुल्क इलाज के साथ ही दवाई की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही टीबी मरीज को आवश्यक पोषक तत्व की पूर्ति के लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन करने के लिए प्रति महीने पांच सौ रुरूपये की दर से पूरी अवधि तक उचित खान-पान के लिए सहायता राशि दी जाती है।

– टीबी से बचाव के उपाय : –
1. लगातार दो हफ्तों से ज्यादा खांसी रहने पर बलगम की जांच कराएं और जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीबी की कि दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– हमेशा मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को रुमाल या पेपर नैपकिन से कवर करें।
– टीबी मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद करने के बाद डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकने से परहेज करें।
– टीबी मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में ही रहें ।
– हमेशा पौष्टिक खाना खाएं व योग और व्यायाम करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़भाड़ र वाली जगहों और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:—-
– भूख न लगना या कम लगना तथा वजन का अचानक से कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार का रहना।
– खांसी , खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

कोरोना काल में इन मानकों का पालन कर कोविड-19 के संक्रमण से रहें दूर : –

– एक दूसरे से कम से कम छह फीट की शारीरिक – दूरी के नियम का हमेशा करें पालन ।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल ।
– एक निश्चित लगातार पर साबून या हैंड सैनिटाइजर से करें अपने हाथों को साफ ।
– घर से बाहर निकलने पर हमेशा करें मास्क का उपयोग।
– ऑख, नाक, मुँह को छूने से बचें। कुछ भी छूने से पहले और बाद में हाथ को साफ या सैनिटाइज करें।
– एक- दूसरे से बातचीत के दौरान सतर्कता का रखें विशेष ख्याल ।