डीएमटी प्रशिक्षण से एनीमिया पीड़ित महिलाओं की पहचान में आई तेजी

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-जिले के अस्पतालों में काम करने वाली एएनएम की दक्षता भी बढ़ी
-डीएमटी प्रशिक्षण से जिले में मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी

भागलपुर, 20 फरवरी

जिले में डीएमटी प्रशिक्षण शुरू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में काफी बदलाव आया है. प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली एएनएम जहां अपने कार्य में दक्ष हुई हैं, वहीं एनीमिया पीड़ित महिलाओं की पहचान में भी तेजी आई है. इसका फायदा यह होगा कि कि जिले में मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी. केयर इंडिया के अनुसार, जब से डीएमटी प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है, तब से जिले के अस्पतालों में काम करने वाली एएनएम के काम करने की क्षमता बढ़ी है. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बेहतर तरीके से वह अपना काम कर पा रही हैं.

एनीमिया पीड़ित महिलाओं की पहचान में काफी तेजी आई: दरअसल, क्षेत्र में एएनएम ही काम करती हैं, इसलिए इनका पूरी तरह से दक्ष होना बहुत जरूरी होता है. आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका से सामंजस्य बिठाने में भी इन्हें अब सहूलियत हो रही है. ये लोग प्रशिक्षण लेने के बाद अपने क्षेत्र में काम को बेहतर तरीके से कर पा रही हैं. खासकर जब से यह कार्यक्रम शुरू हुआ है, तब से एनीमिया पीड़ित महिलाओं की पहचान में काफी तेजी आई है. दरअसल, एएनएम गर्भावस्था के पहले भी महिलाओं की खून जांच कर रही हैं. अगर महिलाओं में खून की कमी ज्यादा होती है तो उसे फोलिक एसिड की दवा लेने की सलाह दी जाती है. साथ ही खान-पान में क्या बदलाव करना है, उसकी सलाह दी जाती है.

हाइपरटेंशन की पहचान में भी मिल रही मदद: डीएमटी प्रशिक्षण शुरू होने के बाद हाइपरटेंशन से पीड़ित महिलाओं की भी पहचान तेजी से हो रही है. 35 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं की जिले में लगातार जांच हो रही है. जिसमें यह समस्या आती है उनका तत्काल इलाज शुरू कर दिया जाता है. यही कारण है कि मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है.

प्रसव कार्य में आने वाली जटिलताओं के बारे में समझाया जाता है: एएनएम को प्रशिक्षण देने वाली मेंटर जैनब कमाल कमाल और पूनम कुमारी ने कहा कि हर महीने हमलोग सभी अस्पतालों के दो-दो एएनएम को सदर अस्पताल में प्रशिक्षण देते हैं. उन्हें प्रसव कार्य में आने वाली जटिलताओं के बारे में समझाते हैं. इसके साथ-साथ हाइपरटेंशन व खून जांच की भी बारीकियों से अवगत कराते हैं. प्रशिक्षण लेने के बाद एएनएम अपने अस्पताल और क्षेत्र की एएनएम को इस बारे में प्रशिक्षित करती हैं और वह फिर उसी हिसाब से अपना काम करती हैं. इसका फायदा मिल रहा है.

मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है मकसद:
मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से डीएमटी प्रशिक्षण की शुरुआत की गई थी. अब इसका असर जिले में दिख रहा है. प्रशिक्षण जब से शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी देखने में आ रही आई है. प्रशिक्षण के जरिए केयर इंडिया के मेंटर हर महीने एएनएम और जीएनएम को किसी एक चीज की जानकारी देती हैं जिसे वह अपने क्षेत्र में जाकर बाकी एएनएम और जीएनएम को बताती हैं. इसे एक महीने तक फॉलो किया जाता है. फिर दूसरे महीने किसी दूसरी चीज की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान एक सप्ताह तक दी जाती है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

डीएमटी फैसिलिटी ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद सुरक्षित प्रसव के दौरान कॉम्प्लिकेशन को सहजता पूर्वक पहचान पा रही हैं नर्स

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– कॉम्प्लिकेशन को पहचानने के बाद क्रिटिकल कंडीशन को सुरक्षित तरीके से हैंडल कर पा रही हैं जीएनएम नर्स

– जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल में कार्यरत डीएमटी ट्रेनिंग प्राप्त जीएनएम रेणू और सरिता कुमारी ने कॉम्प्लिकेशन को पहचानते हुए सुरक्षित तरीके से इलाज किया

लखीसराय-
डीएमटी फैसिलिटी कि ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षित जीएनएम नर्स अपने – अपने अस्पताल में सुरक्षित संस्थागत प्रसव से पूर्व और प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली कॉप्लिकेशन को सही समय पर न सिर्फ पहचान कर पा रही हैं बल्कि उसका बेहतर और सुरक्षित तरीके से इलाज भी कर पा रही है। जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल में काम कर रही डीएमटी ट्रेनिंग प्राप्त करने वाली जीएनएम रेणू कुमारी और ललिता कुमारी ने 19 जनवरी को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए आई एक गर्भवती महिला का न सिर्फ सुरक्षित तरीके से प्रसव कराया बल्कि प्रसव के बाद कॉम्प्लिकेशन पैदा होने पर सूझबूझ दिखाते हुए अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर सुरक्षित तरीके से कॉम्प्लिकेशन को सफलता पूर्वक हैंडल किया।

लखीसराय जिले कि केयर इंडिया कि एनएमएस इंचार्ज सरिता बेग ने बताया कि पिछले महीने 19 जनवरी को संस्थागत सुरक्षित प्रसव के लिए जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल में 30 वर्षीय एक गर्भवती महिला (जीएसपी 4एल4 ए0) अपना गर्भवस्था पूरा होने के बाद दिन के लगभग 11. 40 बजे भर्ती हुई। सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती होने के समय गर्भवती महिला का वाइटल सामान्य और बीपी 110/70 एमएमएचजी और एफएचआर 140/मिनट था। अस्पताल में भर्ती होने के वक्त गर्भवती महिला को लेबर पेन और कॉन्ट्रेक्शन भी ठीक था। इसके बाद महिला ने दिन के 1.55 बजे बिना किसी कॉम्प्लिकेशन के बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन 2450 ग्राम था। इसके बाद प्रसूति माता और उसकी बच्ची को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

अचानक से प्रसूति माता को शुरू हुआ कॉम्प्लिकेशन तो डीएमटी प्रशिक्षण प्राप्त जीएनएम ने सूझबूझ दिखाते हुए कॉम्प्लिकेशन को किया हैंडल :
एनएमएस इंचार्ज सरिता बेग ने बताया कि वार्ड में शिफ़्ट होने के बाद अचानक से माता को ब्लीडिंग होने के साथ कॉम्प्लिकेशन होना शुरू हो गया। उस समय माता का बीपी जांच करने पर बीपी 50/40 एमएमएचजी था। उस समय ड्यूटी पर तैनात जीएनएम सिस्टर रेणू कुमारी और ललिता कुमारी ने कॉम्प्लिकेशन कि पहचान करने के साथ ही बेहतर ढंग से स्थिति को संभाला। कॉम्प्लिकेशन कि पहचान दोनों सिस्टर ने पीपीएच केस के रूप में करते हुए उसका इलाज शुरू किया। ड्यूटी पर तैनात दोनों सिस्टर ने दोनों साइड में कैनुला सेट करने के बाद 500 एमएलआरएल कि स्पीड से फ्लूउड के साथ ही इंजेक्शन के जरिये ऑक्सीटोसिन 20आई यू और 60 ड्रॉप्स प्रति मिनट और दूसरे और से 500 एमएलआरएल(प्लेन) पूरा फ़ास्ट देना शुरू किया। उसके बाद उसको यूरिनरी कैथेटर भी लगाया गया। इसके बाद माता का यूटरस कॉन्ट्रेक्ट करना शुरू कर दिया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पेशेंट को रेफर करने कि बात कर रहे थे लेकिन प्रसूति माता के परिजन इससे इंकार कर रहे थे।

दोनों सिस्टर ने सही समय पर सही निर्णय लेते हुए स्थिति को बेहतर ढंग से किया हैंडल :
उंन्होने बताया कि दोनों सिस्टर ने सूझबूझ दिखाते हुए सही समय पर सही निर्णय लेकर केस के प्रति अपनी पूरी जिम्मेदारी का निर्वाहन किया है और बहुत ही बढ़िया तरीके से पीपीएच और शौक़ का प्रबंधन किया । ड्यूटी पर तैनात दोनों डीएमटी प्रशिक्षण प्राप्त सिस्टर लगातार वाइटल साइन को ऑब्सर्ब किया और 30 मिनट के बाद माता के बीपी कि जांच की गई तो पहले 70/ 50 और उसके कुछ देर के बाद 90/60 एमएम एचजी नोट किया गया। इसके बाद प्रसूति माता ने खुद को बेहतर महसूस करते हुए परेशानी से खुद को बाहर बताया । इसके अगले दिन 10 जनवरी 2021 को माता और उसके बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

एनएमएस कि अनुपस्थिति में जिम्मेदारी पूर्वक पेशेंट का ध्यान रखने के लिए काबिले तारीफ है डीएमटी मेंटर्स का प्रयास :
लखीसराय जिले कि केयर इंडिया कि एनएमएस इंचार्ज सरिता बेग ने बताया कि एनएमएस कि अनुपस्थिति में इन डीएमटी प्रशिक्षित मेंटर्स के द्वारा जिम्मेदारी पूर्वक रोगियों कि देखभाल करने के साथ ही कॉम्प्लिकेशन को पहचानते हुए उसे सुरक्षित तरीके से हैंडल करना वाकई में काबिले तारीफ है।पूरे केयर इंडिया टीम और राज्य सरकार कि पूरी टीम को बड़हिया कि दोनों डीएमटी रेणू कुमारी और ललिता कुमारी पर गर्व है।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फ्रंटलाइन वर्करों को लगे कोरोना के टीके

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-जिले में कोरोना टीकाकरण का चल रहा है दूसरा चरण
-28 दिनों के बाद लाभुकों को पड़ेगा टीका का दूसरा डोज

बांका-

स्वास्थ्य विभाग कोरोना टीकाकरण को लेकर काफी चौकस है. कोई भी व्यक्ति छूट नहीं जाए, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका देने के बाद दूसरे चरण में फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना का टीका दिया जा रहा है. साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को टीका का दूसरा डोज भी पड़ रहा है. शुक्रवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना टीका का पहला डोज दिया गया. एएनएम ममता कुमारी ने सभी फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना का टीका लगाया.

30 मिनट तक की गई निगरानी:
लाभुकों को टीका पड़ने के बाद 30 मिनट तक निगरानी की गई. डॉ. अजय प्रताप इस दौरान मौजूद रहे. 30 मिनट तक अगर लाभुकों को कोई परेशानी नहीं होने पर 28 दिन के बाद दूसरा डोज के लिए आने को कहा गया. इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया. इस दौरान लाभुकों को कोरोना टीका का दूसरा डोज आवश्यक तौर पर लेने को कहा गया. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की सलाह दी गई. दूसरा डोज पड़ने के बाद ही उस व्यक्ति की टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी.

कोरोना की गाइडलाइन का किया जा रहा पालन:
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि यहां पर टीकाकरण अभियान काफी बेहतर तरीके से चल रहा है. स्वास्थ्यकर्मियों के बाद फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना का टीका लेने के लिए लगातार मौका दिया जा रहा है. लाभुक केंद्र पर आकर टीका ले रहे हैं. उनकी निगरानी की जा रही है. साथ ही टीकाकरण केंद्र पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन भी किया जा रहा है.

कोरोना का टीका लेकर निभाएं अपनी जिम्मेदारी: डॉ चौधरी ने कहा कि कोरोना का टीका हर किसी को लेना चाहिए. हालांकि यह उसकी इच्छा पर निर्भर है, लेकिन कोरोना का टीका लेकर लोगों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए. कोरोना एक संक्रामक बीमारी है. यह एक दूसरे से फैलता है. ऐसे में टीका लेने से न सिर्फ वह व्यक्ति सुरक्षित हो जाएगा, बल्कि दूसरे लोग भी सुरक्षित हो जाएंगे. इसलिए कोरोना का टीका अवश्य लें.

कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन:
डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना का टीकाकरण चल रहा है. पहला चरण पूरा होने के बाद दूसरा चरण चल रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही आमलोगों के लिए तीसरा चरण भी शुरू हो जाएगा, लेकिन इसके बावजूद लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. घर से निकलते वक्त अनिवार्य तौर पर मास्क पहनना चाहिए. साथ ही सामाजिक दूरी का भी पालन करें और भीड़ भाड़ में जाने से बचें.

दो बच्चे के बीच तीन साल का रखें अंतराल

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-चंपानगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अंतरा कैंप आयोजित
-कैंप में शामिल लोगों को परिवार नियोजन की दी गई जानकारी

भागलपुर-

दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है. इससे जच्चा और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहता है. बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे कि वह भविष्य में होने वाली बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है. दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए दंपति अस्थाई संसाधनों का सहारा लें. इसमें अंतरा सुई सहायक साबित हो सकती है. एक बार अंतरा की सुई ले लेने से 3 महीने तक आप निश्चिंत हो जाएंगे. यह बातें डॉ शमीम आलम ने शुक्रवार को चंपानगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित अंतरा कैंप के दौरान कही. इस दौरान मौके पर आई महिला एवं अन्य लोगों के साथ चिकित्सक ने परिवार नियोजन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. लोगों को परिवार नियोजन के फायदे गिनाए गए.

15 से अधिक लाभुकों को दी गई अंतरा सुई:
चंपानगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अंतरा कैंप के दौरान एएनएम सुमन कुमारी ने 15 से अधिक लाभुकों को अंतरा की सुई लगाई. इस दौरान केयर इंडिया के शिवम कुमार भी मौजूद रहे. लाभुकों का सर्वे आशा कार्यकर्ता द्वारा 10 जनवरी तक किया गया था.

जिले में जोर-शोर से चल रहा है संचार अभियान: केयर इंडिया के आलोक कुमार ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन को लेकर संचार अभियान चल रहा है. 31 मार्च तक चलने वाले इस अभियान के तहत जिलेभर में परिवार नियोजन को लेकर प्रचार अभियान जोर पकड़ रहा है. गांव में मीटिंग कराई जा रही है तो जगह-जगह पर जागरूकता रैली निकाली जा रही है. इसके जरिए लोगों को परिवार नियोजन की जानकारी दी जा रही है. साथ में इसके फायदे भी बताए जा रहे हैं.

एक बच्चे वाले दंपति की हो रही काउंसिलिंग: केयर इंडिया के आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के तहत हर बुधवार और शुक्रवार को आरोग्य दिवस पर एक बच्चे वाले दंपति की काउंसिलिंग की जाती है. आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित काउंसिलिंग में एएनएम दंपति को दूसरे बच्चे के लिए 3 साल इंतजार करने के लिए कहती हैं और इससे होने वाले फायदे के बारे में बताती हैं.
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

जटिल प्रसव के कुशल प्रबंधन की दास्तान लिख रहीं हैं मंजुलता

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• छह माह के प्रशिक्षण से बनीं डीएमटी, अन्य जीएनएम को कर रही है प्रशिक्षित
• मास्टर ट्रेनर के रूप में बनायी अपनी अलग पहचान
• अमानत ज्योति कार्यक्रम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में हुआ सुधार
पटना-

गर्भकाल और शिशु का जन्म परिवार में ख़ुशी के साथ एक नयी उर्जा का संचार करता है और नवजात की गूंजती किलकारी सुनने की ललक हर माँ की होती है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की एक अहम् कड़ी सुरक्षित प्रसव को माना जाता है. प्रसव के समय जटिलताओं का ससमय एवं समुचित प्रबंधन मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में अहम् भूमिका निभा सकता है. प्रसवकाल में चिकित्साकर्मियों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है और कर्मियों का लगातार क्षमतावार्धन किया जा रहा है.
इसी क्रम में केयर इंडिया द्वारा अमानत ज्योति कार्यक्रम के अंतर्गत नर्सों की ट्रेनिंग की जा रही है और उन्हें डीएमटी( डिस्ट्रिक्ट मेंटरिंग टीम) के रूप में अन्य नर्सों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गयी है.

नर्सो के कार्य क्षमता में हुई बढ़ोतरी:

वर्ष 2016 में प्रशिक्षण प्राप्त कर डीएमटी मंजुलता आज अपने कार्यकुशलता एवं ससमय निर्णय लेने की क्षमता से पहचानी जाती हैं. पहले जिला के दुलहिनबाजार प्रखंड में कार्यरत मंजुलता अभी फुलवारीशरीफ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं. मंजुलता बताती हैं सिमुलेशन ट्रेनिंग में दी गयी जानकारी ने उन्हें कई चीजों के समुचित प्रबंधन के लिए तैयार किया है और प्राप्त प्रशिक्षण से अब वह अपने कार्यक्षेत्र में उन्हें अपनाकर बेहतर प्रसव प्रबंधन करने में सक्षम हो रहीं हैं.

जटिलताओं की पहचान अब हुई असान:

मंजुलता ने बताया प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं को पूर्व ही समाप्त किया जा सकता है लेकिन इसके लिए उन जटिलताओं का समय पर पहचान जरूरी है। ओरिएंटेशन ट्रेनिंग के बाद आज वह प्रसव के लिए आई गर्भवती महिलाओं की मदद कर पा रहीं हैं. प्रसव के समय जटिलताओं की पहचान एवं उनका ससमय निवारण ताकि माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें इसमें प्रशिक्षण ने उनकी कार्यकुशलता को नए आयाम दिए हैं. आज वह अपने काम को बेहतर तरीके से कर पा रहीं हैं . वह बताती हैं प्रसव के उपरांत महिला और उसके परिवारजनों के चेहरे पर संतोष एवं ख़ुशी के भाव उन्हें प्रेरित करता है. .

लक्षणों की पहचान और मरीज की स्थिती करती है निर्णय लेने में मदद:

मंजुलता ने बताया गर्भावस्था और शिशु का घर में आगमन पूरे परिवार के लिए हर्ष का समय होता है. प्रसव का समय गर्भवती माताओं को मानसिक रूप से मां बनने के लिए तैयार करता है. प्रसव तिथि नजदीक आते ही थोड़ी बहुत घबराहट गर्भवती महिलाओं को होना सामान्य है. “ मैं सबसे पहले गर्भवती महिला की पूरी तरह से जांच करती हूँ और इसमें प्राप्त किया हुआ प्रशिक्षण मेरे लिए रामबाण साबित होता है. लक्षणों पर पैनी नजर और प्रसव के लिए आई महिला से निरंतर बातचीत मुझे ससमय सही निर्णय लेने में मदद करती है. किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति होने पर मैं चिकित्सक से सलाह लेती हूँ”.

कम से कम केस को रेफ़र करने का रहता है प्रयास:

मंजुलता ने बताया “प्रशिक्षण द्वारा किया गया क्षमतावार्धन रंग ला रहा है और मेरे द्वारा रेफ़र किये हुए मरीजों की संख्या न के बराबर है. मेरा प्रयास रहता है कि महिला का सुरक्षित प्रसव कराकर तुरंत नवजात को मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाना सुनिश्चित करूँ और माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ और सकुशल अपने घर जाए”

अमानत प्रशिक्षण से सुदृढ़ हुई प्रसव की सुविधाएं, मिल रही है बेहतर स्वास्थ्य सेवा 

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– संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने लगी प्रसूती महिलाएं, अस्पतालों की बदलने लगी तस्वीर
– जिले के मानसी पीएचसी में दिया जा रहा अमानत का प्रशिक्षण, सिखाए जा रहे हैं बेहतर प्रसव कराने के  तरीके
खगड़िया, 19 फरवरी|
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध प्रसव की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिले की जीएनएम एवं एएनएम को केयर इंडिया के सहयोग से अमानत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानियाँ से निपटने के लिए लेबर रूम में तैनात एएनएम एवं जीएनएम बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हो सकें। वहीं, इस प्रशिक्षण का अस्पतालों में सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। प्रशिक्षण से जहाँ अस्पतालों में उपलब्ध प्रसव की सुविधाएं सुदृढ़ हुई हैं । वहीं, प्रसूती महिलाएं संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने लगी हैं । जिससे पूर्व के सापेक्ष वर्तमान में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव की संख्या में वृद्धि हुई है| इससे अस्पतालों में प्रसूती महिलाओं की भीड़ बढ़ने लगी है। वहीं अस्पतालों की तस्वीर भी बदलने लगी है।
– जिले के मानसी पीएचसी में दिया जा रहा है अमानत का प्रशिक्षण :-
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया कि जिले के अस्पतालों में उपलब्ध प्रसव की सुविधाएं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार जीएनएम एवं एएनएम को अमानता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में जिले के मानसी पीएचसी में एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण मेंटर नवनीता द्वारा दिया जा रहा है। जिसमें बेहतर प्रसव, जटिल प्रसव, उचित प्रबंधन समेत अन्य आवश्यक जानकारियाँ दी जा रही हैं ।
– प्रशिक्षण प्राप्त एएनएम एवं जीएनएम  बेहतर तरीके से करा रही हैं  प्रसव :-
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त जिले के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात एएनएम एवं जीएनएम बेहतर तरीके से प्रसव करा रही हैं । जिससे ना सिर्फ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि, प्रसूती महिलाओं को उचित प्रबंधन के साथ स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है।
– प्रशिक्षण से सुदृढ़ होगी  प्रसव की सुविधाएं, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा :-
मानसी पीएचसी में प्रशिक्षण दे रही मेंटर नवनीता ने बताया कि अमानत प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जीएनएम एवं एएनएम को ऑपरेशन थिएटर रूम, लेबर रूम, ओपीडी समेत अस्पतालों के अन्य विभागों के बारे में विस्तृत रूप से तकनीकी जानकारी देना है। उन्हें इन विभागों में काम करने के लिए मरीजों से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं और जटिलताओं की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण के पहले और बाद में एएनएम एवं जीएनएम की टेस्ट ली जाती है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी  एएनएम एवं जीएनएम प्रसव के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए खुद को सक्षम महसूस करेंगी। जिससे प्रसव की सुविधाएं सुदृढ़ होगी और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा।
– सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने को लेकर दिया जा रहा है प्रशिक्षण :-
मेंटर नवनीता ने बताया कि सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने को लेकर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें सिमुलेशन ट्रेनिंग के माध्यम से अमानत मेंटर्स को ऑन द स्पॉट नहीं बल्कि डमी के माध्यम से भी सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जाता है। इस प्रशिक्षण में मरीजों की बुनियादी  प्रक्रियाओं और उनमें आने वाली जटिलताओं की पहचान करने और उसका समुचित इलाज करने की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया इससे पहले सुरक्षित संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले भर में जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया था।
– प्रशिक्षण के दौरान  दी जाती है यह जानकारी :-
प्रशिक्षण के दौरान नर्सों को पीपीई डोनिंग एंड डोफिंग, हैंड वाशिंग, वाइटल मॉनिटर, बीपी- पल्स रेट, टेम्परेचर चेकिंग, ऑक्सीजन लगाना, इंजेक्शन लगाना, कैथेटर लगाना, ऑटो क्लेव लगाना, लेबर रूम व्यवस्थित करना, बायोमेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का प्रबंधन करने के साथ ही मरीजों में होनी वाली जटिलताओं को पहचानने और उसे मैनेज करने के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया गया।
– प्रशिक्षित नर्स हर समस्याओं का आसानी से समाधान करने में खुद को सक्षम करेंगी महसूस :-
प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित नर्स अस्पताल के किसी भी विभाग में काम करने के लिए खुद को सक्षम महसूस करेंगी। साथ ही मरीजों में होने वाली परेशानी को पहचान कर उसका सही तरीके से इलाज कर पाएंगी। जिससे सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे। इतना ही नहीं लंबे समय से चली आ रही महिला चिकित्सकों की कमी का अस्पताल को एहसास नहीं होगा और संस्थागत स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी। इसको लेकर प्रशिक्षण में लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर से सबंधित सभी आवश्यक तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जाता है। ताकि वो इन स्थानों पर मरीजों में होने वाली जटिलताएं पहचान कर, उसका सही समय पर समुचित इलाज कर सके। इस प्रशिक्षण के बाद मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के साथ हीं मातृ-शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में मदद मिलेगी।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से  उपयोग करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें और बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

डीएमटी प्रशिक्षित जीएनएम और एएनएम नर्सो ने ज्ञानवर्धन और क्षमतावर्धन में डीएमटी ट्रेनिंग को बताया कारगर

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– फैसिलिटी और आउटरीच में जीएनएम और एएनएम को दी जाती है स्किल डेवलपमेन्ट ट्रेनिंग

– डीएमटी प्रशिक्षित जीएनएम और एएनएम नर्स आने वाले दिनों में अपने हॉस्पिटल में निभाएंगी डीएमटी मेंटर्स कि भूमिका

मुंगेर, 19 फरवरी-

सुरक्षित मातृत्व एवं नवजात शिशु की उचित देखभाल के लिए आपातकालीन मातृत्व एवं नवजात तत्परता (अमानत) कार्यक्रम के तहत सभी जीएनएम एवं एएनएम नर्सो को उनके अस्पताल में ही ऑन जॉब डीएमटी ट्रेनिंग दी जाती है। राज्य के सभी जिला अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र पर काम कर रही जीएनएम और एनएमएम को डीएमटी ट्रेनिंग देने का मुख्य उद्देश्य इनका तकनीकी और क्लीनिकली तरीके से ज्ञानवर्धन और क्षमतावर्धन करना है| ताकि इन स्थानों पर मातृ और शिशु दर को समाप्त करने के साथ ही लेबर रूम ऑपरेशन थियेटर में प्रसूता और उसके नवजात शिशु की सही तरीके से देखभाल की जा सके। मालूम हो कि अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अस्पतालों से दो- दो मेंटर्स का चुनाव कर उनका डीएमटी ट्रेनिंग के माध्यम से टेक्निकली और क्लीनिकली दोनों तरीके से ज्ञानवर्धन और क्षमतावर्धन किया जाता है। ये दोनों मेंटर्स अपने- अपने अस्पताल में जाकर अपने सहयोगी जीएनएम और एएनएम का ज्ञानवर्धन और क्षमतावर्धन करने में मेंटर्स की भूमिका निभाते हुए प्रशिक्षित करती हैं।

दो तरीके की होती है जीएनएम और एएनएम को दी जाने वाली डीएमटी ट्रेनिंग :
मालूम हो कि जीएनएम और एएनएम को दी जाने वाली डीएमटी ट्रेनिंग दो तरीके की होती है| पहला डीएमटी फैसिलिटी और दूसरा डीएमटी आउटरीच । डीएमटी फैसिलिटी ट्रेनिंग के तहत सभी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लेबर रूम, ऑपरेशन थियेटर में काम करने वाली स्टाफ नर्सो को प्रसव और ऑपरेशन के दौरान उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तकनीकी और क्लीनिकली ट्रेनिंग दी जाती है। इसी तरह आऊटरीच डीएमटी ट्रेनिंग के तहत सभी प्रखंडों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कार्यरत उप स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत एएनएम को गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, ब्लड प्रेशर जांच, हीमोग्लोबिन जांच, एनीमिया जांच, हाइपरटेंशन जांच के साथ ही अन्य जांच से सबंधित सभी आवश्यक जानकारी दी जाती है।

डीएमटी ट्रेनिंग के बाद क्रिटिकल कंडीशन को पहचानने और हैंडल करने में मिली मदद : नीतू
सदर अस्पताल मुंगेर के लेबर रूम में काम करने वाली जीएनएम नर्स और लेबर रूम इंचार्ज नीतू कुमारी ने बताया कि डीएमटी ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद विषम परिस्थिति (क्रिटिकल कंडीशन) को पहचानने और उसे हैंडल करने में काफी मदद मिल रही है। बताया कि सदर अस्पताल के लेबर रूम में पिछले डेढ़ वर्षों से काम कर रही हूँ। पहले प्रसव से पूर्व और प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली गंभीर स्थितियों को पहचानने और उसको हैंडल करने में परेशानी होती थी। नवंबर 2020 में डीएमटी फैसिलिटी ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद अब कोई परेशानी नहीं होती है। बताया कि माता का सम्मान पूर्वक स्वागत, उनका पंजीयन, उपलब्ध सुविधा के अनुसार सेवा के तहत सुरक्षित प्रसव और प्रसव उपरांत माता और उसके शिशु की उचित देखभाल हमलोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि काम के दौरान वह अपने सहयोगियों को ट्रेनिंग में सिखाई गई सभी तकनीकी और क्लीनिकल जानकारी से अवगत कराती हैं ।

केयर इंडिया की डीटीओएफ डॉ. नीलू ने बताया कि केयर इंडिया के सहयोग से अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत नर्सो के स्किल डेवलपमेन्ट के लिए लगातार डीएमटी ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है। इसके तहत जीएनएम नर्सो के ज्ञान वर्धन और क्षमता वर्धन के लिए डीएमटी ओरिएंटेशन, डीएमटी सिमुलेशन सहित कई अन्य ट्रेनिंग आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि जीएनएम और एएनएम को दी जाने वाली डीएमटी ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य इनको तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है ताकि सुरक्षित मातृत्व के साथ शिशु और मातृ मृत्यु दर को समाप्त किया जा सके।

डीएमटी ट्रेनिंग के बाद काम को सिलसिलेवार ढंग से करने में मिली मदद : सरिता
मुंगेर जिले के धरहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत शिवकुण्ड उप स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत एएनएम सरिता कुमारी ने बताया कि डीएमटी आउटरीच ट्रेनिंग लेने के बाद काम को सिलसिलेवार ढंग से करने में काफी मदद मिल रही है। बताया कि आरोग्य दिवस पर प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच के साथ ही उनकी एनीमिया जांच की जाती है। जांच में एनीमिया की स्थिति खराब रहने पर उसे पीएचसी रेफर कर देती हूँ और सामान्य रहने पर उसे आयरन की गोली के देने के साथ हरी साग- सब्जी खाने की सलाह देती हूँ। बताया कि इसके साथ गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन, हीमोग्लोबिन की जांच के साथ ही वजन, हाइट, महिला की पेट की भी ऊँचाई मापते हैं। बताया कि जांच के दौरान किसी तरह की जटिलता ( कंपलीकेशन) होने पर उसे पीएचसी रेफर करते हैं ।

केयर इंडिया के डीटीओ ऑन तबरेज आलम ने बताया कि डीएमटी आउट रीच के माध्यम से जो नर्सेज क्षेत्र में काम कर रही हैं| उप स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेवाएं दे रही हैं उनका ज्ञानवर्धन और क्षमतावर्धन में डीएमटी आउटरीच काफी कारगर साबित हुआ है। बताया कि ट्रेनिंग के पिछले दो मॉड्यूल में एनीमिया और हाइपरटेंशन का व्यापक असर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।

‘डेवलपमेंट ऑफ़ कोविड 19 वैक्सीन—इंडिया ए ग्लोबल हब’ विषय पर वेबिनार का आयोजन

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12 माह से कम समय में चुनौतियों के बीच तैयार किया गया कोविड वैक्सीन: डॉ रेनू स्वरूप

50 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग अत्यधिक जोखिम की श्रेणी में, कोविड टीकाकरण जरूरी

पटना-

कोविड 19 वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए तीन चरणों में आयोजित होने वाली कोविड टीकाकरण कार्यों को लेकर वेबिनार का आयोजन किया गया. इस वेबिनार का संचालन डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी व बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल बीआइआरएसी की चेयरपर्सन डॉ रेनू स्वरूप की अध्यक्षता में की गयी. इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य डॉ विनोद के पॉल, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी, त्रिवेदी स्कूल ऑफ़ बायोसांइसेज के निदेशक डॉ शाहीद जमील ने वेबिनार को संबोधित किया.

नई वैक्सीन का किया जा रहा क्लीनिकल ट्रायल:
कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए डॉ रेनू स्वरूप ने कहा कि कोविड 19 वैश्विक महामारी की रोकथाम व नियंत्रण करने में भारत ने बेहतरीन तरीके से काम किया है. कोविड 19 को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण को लेकर भी वैश्विक स्तर पर भारत में हुए कार्यों की प्रशंसा की जा रही है. उन्होंने कहा कोविड वैक्सीन को तैयार करने में कई चुनौतियाँ का सामना भी करना पड़ा है. महामारी की शुरूआत के साथ ही 12 माह से कम समय में चुनौतियों के बीच वैक्सीन तैयार किया गया है. चूंकि यह वायरस बिल्कूल नया था और वायरस से वैक्सीन तक की यात्रा को इस वायरस को पूरी तरह समझना पड़ा है. वायरस के कई वेरिएंट जिनमें यूएस, ब्राजील व अफ्रीकी शामिल हैं उन्हें भी समझा गया है. उन्होंने कहा कि हमलोगों के पास वायरस के निपटने के लिए दो तरह के वैक्सीन हैं. भविष्य के लिए अन्य वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है. वैक्सीन तैयार करने में वैज्ञानिकों व शोध से जुड़े विभिन्न समुदायों का राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान मिला है. भारत में 60 प्रतिशत ग्लोबल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है. और इस तरह भारत एक ग्लोबल हब के रूप में देखा जा रहा है. इसके लिए मैत्री कार्यक्रम का संचालन भी किया गया है.

कोविड संक्रमण से मरने वालों में 80 फीसदी लोग 50 साल की उम्र या इससे अधिक के:
डॉ विनोद के पॉल ने कहा भारत में कोविड वैक्सीन तैयार करने वाली कंपनियों व इस इंडस्ट्री ने नयी आशाओं का संचार किया है. सबसे पहले लोक स्वास्थ्य की सुरक्षा बहुत ही आवश्यक है. प्रथम चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत करने का काम किया गया है. दूसरे चरण फ्रंटलाइन वर्कर्स को चिन्हित कर टीकाकरण देने का काम किया गया है जो पत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोविड 19 की रोकथाम में लगे हुए हैं. तीसरे चरण में आमलोगों को शामिल किया गया है. इनमें कोविड संक्रमण के जोखिम श्रेणी में शामिल लोगों को टीकाकरण के लिए मुख्य रूप से लक्षित किया गया है. उन्होंने बताया भारत में कोविड संक्रमण से मरने वाले लोगों में 80 फीसदी लोग 50 साल की उम्र या इससे अधिक के हैं. इस आयुवर्ग के लोगों को अधिक सुरक्षित रखने की जरूरत है. जबकि दो तिहाई मृत्यु में पूर्व से कैंसर, डायबिटीज, दिल व लीवर रोग से ग्रसित लोगों की है. उन्होंने बताया अगले सात से आठ माह में कोविड के 65 करोड़ डोज उपलब्ध कराए जाएंगे. उन्होंने कहा 70 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों व 30 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीकाकृत किया जा चुका है. देश में 10000 वैक्सीन साइट बनाये गये हैं. निजी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर तैयार की गयी सत्र स्थलों की संख्या 2000 है. साइटस की संख्या को भविष्य में बढ़ाया जायेगा. वेबिनर के दौरान डॉ शाहीद जमील व अन्य विशेषज्ञों ने भी कोविड 19 वायरस की संरचनाओं व उसके म्यूटेशन प्रक्रिया पर प्रकाश डाला.

वेबीनार में शामिल वक्ताओं का स्वागत डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के एडवाइजर डॉ अलका शर्मा ने किया तथा प्रेसीडेंशियल रिमार्क इंडिया इंटरनेशनल के अध्यक्ष एनएन वोहरा ने दिया. वेबिनार को बिल एंड मिलिंडा गेट्स फांउडेशन, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल के प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट के प्रबंध निदेशक डॉ श्रीशेंदू मुखर्जी ने किया.
बिहार के विभिन्न जिलों के पत्रकार गण भी वेबिनार में शामिल हुए.

हबीबपुर एपीएचसी में लगा अंतरा कैंप, 24 लाभुकों को दी गई सुई

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संचार अभियान के तहत परिवार नियोजन को लेकर जिलेभर में चल रहे हैं कार्यक्रम

केयर इंडिया की टीम स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर लोगों को कर रही जागरूक

भागलपुर-

परिवार नियोजन कार्यक्रम को लेकर संचार अभियान के तहत हबीबपुर स्थिति एपीएचसी में गुरुवार को अंतरा कैंप लगाया गया। जिसमें 24 लाभुकों को सुई दी गई।लाभुकों को सुई एएनएम प्रेमलता कुमारी ने लगाई। मौके पर आशा फैसिलिटेटर कुमारी लता और सीमा तबस्सुम भी मौजूद थी। आशुतोष और सौरव आनंद ने कार्यक्रम को लेकर सारी तैयारी की।
मौके पर मौजूद डॉ. बीएन झा ने बताया कि परिवार नियोजन को लेकर लगातार कार्यक्रम चलाया जा रहा है।. कैंप लगाने से पहले आशा कार्यकर्ता के जरिए हमलोग इसकी सूचना लोगों तक पहुंचा देते हैं। अंतरा परिवार नियोजन को लेकर एक बेहतर संसाधन है।इससे किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। इस वजह से हमलोग लोगों को अंतरा की सुई लेने की सलाह देते हैं।

कंडोम और दवा का भी किया गया वितरण: मौके पर मौजूद केयर इंडिया के आलोक कुमार ने बताया कि इस दौरान 4 महिलाओं को अंतरा का टेबलेट भी दिया गया।साथ ही कंडोम का भी वितरण किया गया। जिस लाभुक ने जिसमें रुचि दिखाई उसको उसके अनुसार सेवा दी गई। परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधन पर हमलोग जोर दे रहे हैं।

31 मार्च तक चलेगा अभियान: मालूम हो कि अभी जिले में परिवार नियोजन को लेकर संचार अभियान चल रहा है जो कि 31 मार्च तक चलेगा। इसके तहत जिलेभर में परिवार नियोजन को लेकर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कहीं रैली निकाली जा रही है तो कहीं आरोग्य दिवस के अवसर पर एक बच्चे वाले दंपति की काउंसलिंग की जा रही है।

आज एक बच्चे वाले दंपति की होगी काउंसिलिंग: आलोक कुमार ने बताया कि शुक्रवार को एक बच्चे वाले दंपत्ति की काउंसलिंग की जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्र पर एएनएम काउंसलिंग करेंगी।साथ में केयर इंडिया की टीम भी मौजूद रहेगी। इस दौरान उन्हें दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने के लिए जागरूक किया जाएगा।

खगड़िया सदर पीएचसी में 140 को दिया गया कोविड-19 वैक्सीन का दूसरा डोज

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– पहले चरण के तहत पहला डोज ले चुके स्वास्थ्य एवं केयर के कर्मियों को दिया गया दूसरा डोज
– दूसरा डोज लेने बाद कर्मियों में दिखा उत्साह, कहा पूरी तरह सुरक्षित है वैक्सीन

खगड़िया-

जिले में कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीनेशन अभियान पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को खगड़िया सदर पीएचसी में 140 स्वास्थ्य एवं केयर इंडिया के कर्मियों को वैक्सीन का दूसरा डोज दिया गया। वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद कर्मियों में काफी उत्साह दिखा एवं कर्मियों ने कहा कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इससे किसी प्रकार का ना ही कोई साइड इफेक्ट है और ना ही शारीरिक पीड़ा। हमलोग नियमानुसार पहला वैक्सीन लेने के 28 वें दिन वैक्सीन का दूसरा डोज लिये एवं दूसरा डोज लेने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ हैं। पहला डोज लेने के का भी आज 28 दिन बीत गये। किन्तु, किसी प्रकार की कोई शारीरिक पीड़ा नहीं हुई। जो इस बात का जीता-जागता सबूत है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इससे किसी प्रकार का की साइड इफेक्ट नहीं है। इसलिए, मैं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से भी अपील करता हूँ कि निर्भीक होकर वैक्सीन का दूसरा डोज भी लें।

– हर हाल में निर्धारित समय पर पूरा होगा दूसरा डोज वैक्सीनेशन अभियान :-
खगड़िया सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि हर हाल में निर्धारित समय पर वैक्सीन के दूसरा डोज का वैक्सीनेशन अभियान पूरा होगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं है। साथ ही कर्मियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।

– दूसरा डोज लेने के बाद भी हूँ पूरी तरह स्वस्थ :-
वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद केयर इंडिया के चंदन कुमार ने बताया कि मैं पहला डोज लेने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ रहा और आज दूसरा डोज लेने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ हूँ। इसलिए, मैं अन्य सहकर्मियों समेत सभी लोगों से अपील करता हूँ कि वैक्सीन से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि, कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए उत्साह के साथ टीका लेने की जरूरत है। क्योंकि, वैक्सीन से मेरे शरीर को किसी प्रकार का नकानाकारात्मक प्रभाव नहीं है। बल्कि, कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए लाभदायक है। इसलिए, सभी लोगों को उत्साह के साथ वैक्सीन का पूरा डोज लेना चाहिए है।

– अफवाहों से रहें दूर, निर्भीक होकर कराएं वैक्सीनेशन :-
वहीं, केयर इंडिया के ही निशांत कुमार ने वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद बताया कि वैक्सीन की पूरी डोज लेने के बाद भी जब मुझे किसी भी प्रकार की का शारीरिक परेशानी का सामना नहीं पड़ा तो मुझे इस बात एहसास हुआ कि इससे पूर्व जो भी वैक्सीन को लेकर समाज में नकारात्मक नाकारात्मक चर्चा चल रही थी,। वह महज एक अफवाह थी था। सच तो यह है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, वैक्सीन से किसी को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि, उत्साह के साथ वैक्सीनेशन कराना चाहिए।

– सामान्य परेशानी में घबराएं नहीं :-
वहीं, केयर इंडिया के उदय कुमार ने बताया कि वैक्सीन लेने के बाद थोड़ा बहुत सामान्य परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि, हल्का हल्की बुखार, वैक्सीन लेने वाले बाँह में सूजन, दर्द समेत अन्य सामान्य परेशानी हो सकती ता है। किन्तु, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, यह सामान्य परेशानी है। जो किसी वैक्सीन से हो सकती ता है। यह परेशानी अन्य वैक्सीन लेने के बाद जिस तरह एक-दो दिन में स्वतः दूर हो जाती थी। उसी तरह कोविड-19 की के वैक्सीन की का भी सामान्य परेशानी स्वतः दूर हो जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिसेनेटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।