निमोनिया से बचाव के लिए संपूर्ण टीकाकरण जरूरी, बचाव के लिए रहें सतर्क

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– बदलते मौसम में बढ़ जाती है निमोनिया संक्रमण की संभावना , बच्चे का रखें ख्याल
– न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का वैक्सीनेशन से बचाव के लिए जरूरी

खगड़िया, 18 फरवरी|
बदलते मौसम में निमोनिया की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, बच्चे एवं बुजुर्गों का इससे बचाव के लिए विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। दरअसल, बच्चे एवं बुजुर्गों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। जिसके कारण इस बीमारी की चपेट में बच्चे व बुजुर्गों के आने की संभावना अधिक रहती है। क्योंकि, निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है| यह बैक्टेरिया, वायरस और फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इस वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। इस बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का वैक्सीनेशन ही है।

– जिले के सभी पीएचसी में उपलब्ध है निःशुल्क पीवीसी का टीका :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कि निमोनिया के प्रारंभिक लक्षण सर्दी-खांसी जैसे हो सकते हैं। ज्यादातर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इससे जल्दी ग्रसित हो जाते हैं। जिन बच्चों को पीवीसी का टीका नहीं पड़ा है, उन बच्चों को इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना अधिक रहती है। इस बीमारी में मवाद वाली खांसी, तेज बुखार एवं सीने में दर्द समेत अन्य परेशानी होती है। यह समुचित इलाज के अभाव जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस बीमारी को टीकाकरण से रोका जा सकता है। इसलिए, अपने बच्चों को संपूर्ण टीकाकरण के अंतर्गत पीएचसी में उपलब्ध निःशुल्क पीवीसी का टीका निश्चित रूप से लगवाएं।

– बच्चे को दो साल के अंदर संपूर्ण टीकाकरण कराने से कई शारीरिक परेशानियों का नहीं करना पड़ता है सामना :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ पासवान ने बताया कि बच्चे को जन्म के पश्चात दो साल के अंदर सभी तरीके के पड़ने वाले टीके जरूर लगवाने चाहिए। इससे बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत तो होती ही है इसके अलावा वह 12 से अधिक प्रकार की बीमारियों से भी दूर रहता है।

– जानें क्या है निमोनिया :-
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण होता है। आम तौर पर यह बीमारी बुखार या जुकाम होने के बाद ही होता है। सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से यह बीमारी ज्यादा होती है। निमोनिया का प्रारम्भिक इलाज सीने का एक्स-रे करने के बाद क्लीनिकल तरीके से शुरू होता है। निमोनिया बैक्टेरिया, माइक्रोबैक्टेरिया, वायरल, फंगल और पारासाइट की वजह से उत्पन्न संक्रमण की वजह से होता है। इसका संक्रमण सामुदायिक स्तर पर भी हो सकता है।

– निमोनिया से बचाव के उपाय : –
ऐसे तो निमोनिया से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण ही है । यह एक सांस संबंधी बीमारी है| इसलिए कुछ सावधानी बरतने के बाद काफी हद तक इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके लिए नवजात एवं छोटे बच्चों के रखरखाव, खानपान एवं कपड़े पहनाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सर्दी के मौसम में हमेशा बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने एवं खाने- पीने में गर्म पदार्थो का हीं इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ हीं वैसे लोगों के संपर्क से दूर रखने की आवश्यकता है जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी हो। इसके साथ बुजुर्गों सहित अन्य लोगों को भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।

– ये हैं निमोनिया के प्रारंभिक लक्षण :-
निमोनिया का प्रारंभिक लक्षण बुखार के साथ पसीना एवं कंपकपी होना, अत्यधिक खांसी में गाढ़ा, पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आना, तेज-तेज और कम गहरी सांस लेने के साथ सांस का फूलना ( जैसे कि सांस लेने के दौरान आवाज होना), होठ या अंगुलियों के नाखून नीले दिखाई देना, बच्चों में परेशानी व उत्तेजना बढ़ जाना है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

अच्छे पोषण से दिमागी बुखार को मात

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– बेहतर पोषण दिमागी बुखार से बचाव में सहायक
– दिमागी बुखार से बचाव के लिए दोनों टीके जरूरी

लखीसराय, 18 फरवरी-

पूरी तरह से स्वस्थ बच्चा बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। कुपोषण सिर्फ शरीर को कमजोर ही नहीं करता बल्कि अन्य बीमारियों से होने वाले प्रभावों में भी वृद्धि करता है| बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार ऐसे तो मच्छर द्वारा काटने से होता है लेकिन कुपोषित बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार एक स्वस्थ बच्चे में होने वाले दिमागी बुखार की तुलना में अधिक गंभीर एवं जानलेवा साबित हो सकता है|
बेहतर पोषण कई रोगों से बचाव का रास्ता:
बच्चों को जन्म से ही बेहतर पोषण की आवश्यकता होती है| बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध एवं अगले छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध बच्चे को इस उम्र में होने वाली बहुत सी बीमारियों जैसे डायरिया, निमोनिया, ज्वर एवं अन्य गंभीर रोगों से बचाव करता है| छह माह तक माँ का दूध एवं इसके बाद मसला हुआ अनुपूरक आहार के साथ 2 साल तक नियमित स्तनपान बच्चों को कुपोषण से दूर रखता है| मच्छरों से फैलने वाले कई रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं दिमागी बुखार जैसे गंभीर रोगों से होने वाले प्रभावों में बच्चों के बेहतर पोषण के कारण बहुत हद तक कमी आती है एवं बच्चा आसानी से इन रोगों के प्रभावों से बाहर भी आ जाता है|
टीके के साथ पोषण भी जरूरी :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि दिमागी बुखार से बच्चों को बचाने के लिए नियमित प्रतिरक्षण में दिमागी बुखार का भी टीका शामिल है| दिमागी बुखार का पहला टीका 9 से 12 महीने तक के बच्चों को एवं 1 से 2 वर्ष की उम्र के बच्चों को दूसरी ख़ुराक दी जाती है जिसे बूस्टर डोज़ भी कहते हैं| दिमागी बुखार क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से इसका वायरस शरीर में प्रवेश करता है और सीधे दिमाग पर असर करता है| इससे बच्चों को दिमागी बुखार हो जाता है| जापानी बुखार में शुरू में फ्लू जैसे लक्ष्ण के साथ बुखार आना, ठंड लगना, थकान होना, सिर दर्द, उल्टी एवं दौरे आना आदि दिखाई देते हैं| यह बुखार काफी गंभीर हो सकता है जिससे बच्चा अपंग एवं समुचित चिकित्सीय जाँच के अभाव में जानलेवा भी हो जाता है|
इस गंभीर रोग से मजबूती से लड़ने के लिए बच्चे का सुपोषित होना फायदेमंद होता है| सुपोषित बच्चे में दिमागी बुखार प्रभाव डालने के बाद भी काफी हद तक जानलेवा नहीं हो पता है| इसलिए बच्चों को दिमागी बुखार से बचाने के लिए टीके के साथ उनका बेहतर पोषण भी जरूरी है|

3 महीने तक किसी को बताया नहीं… आशा को जब पता चला तो करवाई जांच

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-जांच में टीबी की पुष्टि होने के बाद रानी देवी का हुआ इलाज शुरू
-6 महीने तक दवा चली तो हो गई स्वस्थ, नारायणपुर के बलहा की है रहने वाली

भागलपुर, 18 फरवरी
नारायणपुर प्रखंड के बलहा गांव की रहने वाली रानी देवी को एक साल पहले जब खांसी में खून आने लगा तो वह डर गई. उसके मन में यह आशंका घर कर गई कि कहीं मुझे टीबी तो नहीं हो गया. लोग उससे नफरत नहीं करने लगे, इस वजह से उसने यह बात किसी को बताई भी नहीं. यह सिलसिला 3 महीने तक चला. एक दिन आशा कार्यकर्ता रीता देवी को यह बात पता चला तो वह रानी के घर गई और उसे जांच के लिए समझाने लगी. लेकिन फिर भी वह इसे छुपाने लगी. 3 दिनों के प्रयास के बाद रीता, रानी को जांच के लिए अस्पताल ले जाने में कामयाब हो गई. इसके बाद जांच में उसे टीबी होने की पुष्टि हुई. फिर उसका इलाज शुरू हुआ. 6 महीने तक दवा चली और अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है.

टीबी का लक्षण दिखाई दे तो तुरंत करवाएं जांच:
अपनी गलती का अहसास रानी देवी को भी है. वह कहती है कि आशा बहन रीता ने मुझे बचा लिया. नहीं तो मैं पता नहीं कब ठीक होती. अगर सही समय पर मेरा इलाज नहीं होता तो मैं आज की स्थिति में नहीं होती. इसलिए मैं हर किसी से यही कहना चाहूंगी कि अगर किसी को टीबी का लक्षण दिखाई दे तो वह जांच करवा कर अपना इलाज शुरू करवाएं. इलाज हो जाने से आप जल्द स्वस्थ हो जाएंगे. इसके बाद अब मैं भी किसी को खांसी में खून की शिकायत आती है तो उसे जांच कराने की सलाह देती हूं.

बीमारी बताने में नहीं करें संकोच:
आशा कार्यकर्ता रीता देवी कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता थोड़ी कम होती है. बीमारी से लोग डरने लगते हैं. उन्हें सामाजिक बहिष्कार का डर सताने लगता है. इस वजह से लोग थोड़ा संकोच करते हैं बताने में, लेकिन हमलोगों का काम ही यही है. इस वजह से गांव की एक-एक घर के लोगों को जानती और समझती हूं. हमें जानकारी किसी न किसी माध्यम से मिल ही जाती है, जिसके बाद मैं उसे जांच कराने ले जाती हूं. अगर जांच में टीबी होने की पुष्टि होती है फिर उसका इलाज शुरू करवाती हूं.

देहाती इलाकों में बढ़ाया जा रहा है जागरूकता कार्यक्रम:
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी का कहना है कि जो देहात एरिया है, वहां आवागमन की सुविधा इतनी अच्छी नहीं है. वे लोग जागरूकता से थोड़ा अनजान रहते हैं. हमलोग वैसे गांव में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर जोर दे रहे हैं और लोगों को ना सिर्फ टीबी, बल्कि दूसरी बीमारी के इलाज के लिए भी जागरूक कर रहे हैं. अगर किसी को टीबी के लक्षण दिखे तो वह तत्काल अपनी जांच शुरू कर करवा लें और अगर जांच में टीबी होने की पुष्टि होती है तो इलाज करवाएं| इससे वह जल्द स्वस्थ होंगे.

बिल्कुल मुफ्त है टीबी का इलाज:
डॉ. विद्यार्थी कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज बिल्कुल मुफ्त में होता है. साथ में दवा भी मिलती है. ऐसे में आर्थिक परेशानी की वजह से इलाज करवाने में देरी नहीं करें. जैसे ही टीवी का लक्षण दिखाई दे, अस्पताल में आकर जांच करवाएं और अपना इलाज शुरू कर दें

स्पाइस एक्सप्रेस के बढ़ते कदम, लॉकडाउन में किए बेहतर काम

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-स्पाइस एक्सप्रेस का लॉजिस्टिक कंपनियों के साथ टाइअप

-देश के विभिन्न कोनों में नोडल सेंटर खोले गए

नईदिल्ली-

देश में अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ी है जहां देश में दिनों दिन व्यापार ब़ढ़ रहा है वहीं तेजी से लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है। टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट ने देश की अर्थव्यवस्था को गति बढाने के लिए कई योजनाएं बना रखी है और उसपर अमल कर रहहा है इसी कड़ी में टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट, स्प्रिंट जैसीं कंपनियों ने स्पाइस एक्सप्रेस के साथ टाइअप कर अपने कार्य को विस्तार किया है। स्पाइस एक्सप्रेस ने टाइ अप किए गए कंपनियों की कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट बेहतर कामों के लिए जाना जाता है।

स्पाइस एक्सप्रेस के सीईओ संजीव गुप्ता ने कहा कि आज देश में एस कार्ट, वासु लोजिस्टिक, टाइम बाउंड जैसी लॉजिस्टिक की कंपनियों ने अपने बेहतर काम से बाजार में अपना स्थान पाया है।

दरअसल आमतौर पर वाणिज्यिक लाभ के लिए जहाज, विमान, ट्रेन, वैन या ट्रक के द्वारा माल या उत्पाद को परिवहन करना कार्गो (या फ्रैट) कहलाता है। आधुनिक समय में, परिवहन के लिए बहुत लंबे-माल ढोने वाले इंटरमोडल कन्टेनर का उपयोग किया जाता है। टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट, स्प्रिंट के स्पाइस एक्सप्रेस के साथ कार्य करने से आसपास के व्यापारियों के साथ अन्य राज्यो के व्यापारियों को लाभ मिलेगा।

लॉकडाउन में लोजिस्टिक व्यापार तेजी से बढ़ा है जिसमें टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट, स्प्रिंट ने बेहतरीन सेवाएं दी है और अपना व्यापार को तेजी से बढ़ाया है और तेजी से कई नोडल  सेंटर खोलकर अपना विस्तार किया है।

बहरहाल सरकार ने तेजी से अर्थव्यवस्था को आगे बढाने के लिए कई तरह की योजनाओं का कार्यान्वित किया है। टाइम बाउंड, वासु लोजिस्टिक, एस कार्ट, स्प्रिंट ने भी स्टार्ट अप कर रहे युवाओं के लिए अवसर दिया है। और अपने कार्यों को विस्तार देने के लिए स्पाइस एक्सप्रेस से टाइअप कर कार्यों को और आगे ले जा रहा है

जिले में पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा है दूसरे चरण का कोविड-19 वैक्सीनेशन

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– जिले के सभी पीएचसी में चल रहा है वैक्सीनेशन, फ्रंटलाइन वर्करों को दिया जा रहा है टीका
– सममय निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में स्वास्थ्य विभाग ने झोंकी ताकत

लखीसराय-

जिले में कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए दूसरे चरण का वैक्सीनेशन अभियान पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा है। यह वैक्सीनेशन अभियान जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत बनाए गए सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर चल रहा है। जहाँ फ्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन दी जा रही है। वैक्सीनेशन अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है। ताकि हर हाल में ससमय निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सके और कोविड-19 को भी जड़ से समाप्त किया जा सके । जिससे पूरा समाज इस वैश्विक महामारी से स्थाई रूप से सुरक्षित हो सके । यह तभी संभव है जब हर व्यक्ति कोविड19 का टीका लेकर अपनी जिम्मेदारी पूरा करेंगे।

– दूसरे चरण में फ्रंटलाइन वर्करों का हो रहा है वैक्सीनेशन :-
कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान के दूसरे चरण के तहत फ्रंटलाइन वर्करों का वैक्सीनेशन हो रहा है। जिसमें फ्रंटलाइन वर्करों की श्रेणी में शामिल राजस्व, पुलिस, प्रशासनिक, पंचायत राज विभाग सहित अन्य विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारियों का पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन हो रहा है। वैक्सीनेशन की सफलता को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सारी तैयारियाँ पूरी कर ली है। इस चरण में स्वास्थ्य विभाग की पूरी कोशिश है कि इन विभागों के कोई भी पदाधिकारी व कर्मचारी वैक्सीन लगवाने से वंचित नहीं रहें ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को जड़ से मिटाया जा सके ।

– जिले के सभी पीएचसी में चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि ससमय निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए जिले के सभी पीएचसी में वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। ताकि वैक्सीन लेने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और वह आसानी के साथ अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन ले सकें। इसके अलावा वैक्सीनेशन अभियान को गति मिल सके ।

कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए सबका सहयोग जरूरी :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। इसके लिए हर व्यक्ति को तो टीका लेना ही चाहिए। साथ ही वैक्सीनेशन के बाद भी सुरक्षा के मद्देनजर गाइडलाइन का पालन भी जारी रखना जरूरी है। तभी इस वैश्विक महामारी का जड़ से खात्मा होगा।

– वैक्सीन को लेकर भ्रम से रहें दूर, पूरी तरह सुरक्षित है वैक्सीन, इसलिए निर्भीक होकर वैक्सीनेशन कराएं :-
कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए आई वैक्सीन को लेकर मन में किसी प्रकार का भ्रम नहीं पालें। दरअसल, वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ होने के कई दिन हो चुके हैं। किन्तु, अबतक कहीं से भी किसी प्रकार के गंभीर साइड इफेक्ट की खबरें सामने नहीं आई हैं । इससे तो यह साफ है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, निर्भीक होकर पूरे उत्साह के साथ हर व्यक्ति को वैक्सीन लेनी चाहिए। तभी हम कोविड-19 से स्थाई निजात पा सकते हैं।

– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें :-
वैक्सीन लेने के बाद भी कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक एहतियात जारी रखना चाहिए। इसके लिए पूर्व की भाँति मास्क का नियमित उपयोग, हमेशा शारीरिक दूरी का पालन समेत अन्य गाइडलाइन का पालन जारी रखें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

18 केंद्रों पर फ्रंटलाइन वर्करों को लगा कोरोना का टीका

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टीकाकरण केंद्रों पर दिशा निर्देश का किया जा रहा है पालन
टीका देने के बाद लाभुकों की 30 मिनट तक की जा रही है निगरानी

भागलपुर-

जिले में कोरोना टीकाकरण का दूसरा चरण चल रहा है. इसके तहत बुधवार को 18 केंद्रों पर फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना का टीका लगाया गया. टीका लगाने के बाद लाभुकों की 30 मिनट तक निगरानी की गई. इसके बाद उसे 28 दिन के बाद दूसरा डेज लेने की सलाह देकर छोड़ दिया गया. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि एक दिन 18 केंद्रों पर फ्रंटलाइन वर्करों को टीका दिया जा रहा है तो दूसरे दिन स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना का टीका का दूसरा दूसरा डोज दिया जा रहा है. अभी कुछ दिनों तक यह प्रक्रिया चलेगी. उसके बाद टीकाकरण का पहला और दूसरा चरण पूरा हो जाएगा.

आज स्वास्थ्यकर्मियों को पड़ेगा टीका का दूसरा डोज: जिले के 18 केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों को गुरुवार को कोरोना के टीका का दूसरा डोज दिया जाएगा. इसे लेकर पूरी तैयारी की गई है. केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गये हैं. टीकाकरण की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो, इसे लेकर खास निर्देश दिए गए हैं.

लाभुकों को टीका का दूसरा डोज पड़ जाने के बाद टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी: डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना टीका का दूसरा डोज पड़ जाने के बाद टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. इसके बाद वह व्यक्ति कोरोना से सुरक्षित हो जाएगा. हालांकि इसके बावजूद कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. इससे न सिर्फ आप कोरोना से सुरक्षित रहेंगे, बल्कि दूसरी बीमारियों से भी सुरक्षित रहेंगे.

आधार कार्ड और पहचान पत्र साथ में जरूर लाएं: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि टीका लेने के लिए आने वाले अपने साथ आधार कार्ड और पहचान पत्र जरूर लाएं. उसका मिलान करने के बाद ही टीका दिया जाएगा. टीकाकरण में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो, इसे लेकर यह व्यवस्था की गई है.

जिले में ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण का हुआ आयोजन

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– गर्भवती महिलाओं व बच्चों का दिया गया नियमित टीकाकरण

– परिवार नियोजन एवं संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया गया जागरूक

खगड़िया, 17 फरवरी, 2021
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार को गर्भवती एवं बच्चों को लगने वाले नियमित टीकाकरण कार्यक्रम हुआ। जिसमें संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं सहायिका के साथ टीकाकरण की गई। इस दौरान टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह दी गई और गर्भावस्था के दौरान खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी भी दी गई।

– जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत टीकाकरण का हुआ आयोजन : –
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत ऑगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग एवं केयर के कर्मियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक सलाह दी गई।

– परिवार नियोजन को लेकर महिलाओं को किया गया जागरूक :-
केयर इंडिया के राजेश पांडेय ने बताया कि नियमित टीकाकरण के दौरान मौजूद महिलाओं को परिवार नियोजन अभियान को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसमें उन्हें परिवार नियोजन अपनाने से होने वाले फायदे की विस्तार से जानकारी दी गई। ताकि परिवार नियोजन अभियान को सफल बनाने के लिए महिलाएं आगे आ सकें।

– स्वच्छता पर दिया गया बल : –
चौथम के केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार ने बताया कि टीकाकरण के दौरान स्वच्छता पर भी बल दिया गया। इसको लेकर गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत साफ – सफाई समेत आसपास के परिसर को साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने को कहा गया। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं हों।

– सप्ताह में दो दिन लगाऐ जाते हैं टीके : –
नियमित टीकाकरण का सप्ताह में दो दिन आँगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजन किया जाता है। प्रत्येक सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

– संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक :-
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।

– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी : –
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती है और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– हमेशा शारीरिक-दूरी का पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें।
– लगातार हाथों की साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से धोएं।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– किसी से भी बातचीत दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

परिवार नियोजन सुरक्षित है” कैम्पेन के तहत केयर इंडिया के द्वारा निकली गई जागरूकता रैली

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– मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के खड़िया गांव में स्वास्थ्यकर्मी और आईसीडीसी कर्मियों ने निकाली जागरूकता रैली
– घर- घर जाकर लोगों को किया गया जागरूक

मुंगेर, 17 फरवरी | राज्य सरकार के द्वारा जनवरी से 31 मार्च 2021 तक परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से राज्य भर में मिशन परिवार विकास एवं संचार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के साथ केयर इंडिया के द्वारा राज्य भर में ई. रिक्शा के माध्यम से आरोग्य दिवस के दिन प्रत्येक सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्र के समीप माइकिंग के जरिये लोगों को परिवार नियोजन के महत्व और जरूरत के साथ ही परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत बुधवार को मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत खड़िया गांव में केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर आकाश कुमार और कम्युनिटी हेल्थ कोऑर्डिनेटर अजीत कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य उपकेंद्र खड़िया क्षेत्र अंतर्गत काम करने वाली एएनएम अंजनी सिन्हा, आशा फैसिलिटेटर उषा किरण के साथ ही कई आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने परिवार नियोजन के प्रति योग्य दम्पतियों को जागरूक करने के लिए जागरुकता रैली निकाली।
आंगनबाड़ी केंद के समीप माइकिंग के जरिये परिवार नियोजन के महत्व के साथ ही स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे में लोगों को जानकारी दी गयी –
केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर आकाश कुमार ने बताया कि केयर इंडिया के कैम्पेन ” परिवार नियोजन सुरक्षित है” के तहत बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र में दो ई. रिक्शा के माध्यम से आरोग्य दिवस के दिन आंगनबाड़ी केंद के समीप माइकिंग के जरिये परिवार नियोजन के महत्व के साथ ही इसके स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे में लोगों को जानकारी दी जाती है। बताया कि इसके साथ ही केयर इंडिया के द्वारा प्रखंड क्षेत्र में काम करने वाली एएनएम, आशा फैसिलिटेटर, आशा कार्यकर्ता के साथ ही आंगनबाड़ी सेविकाओं के सहयोग से जागरूकता रैली निकालने के साथ घर- घर जाकर योग्य दम्पतियों को परिवार नियोजन के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है। इस दौरान ई. रिक्शा के द्वारा भी माइकिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह में दास टोला में स्थानीय एएनएम बबिता कुमारी और आशा फैसिलिटेटर ज्योति कुमारी के नेतृत्व में जागरूकता रैली निकाली गई।

घर- घर जाकर योग्य दम्पतियों से की जाती है मुलाकात :
उन्होंने उंन्होने बताया कि केयर इंडिया के नेतृत्व में एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी सेविका घर -घर जाकर नवदम्पतियों के साथ ही एक और दो बच्चों के माता – पिता के साथ मिलकर उन्हें परिवार को नियोजित (प्लान) करने से सम्बंधित सारी जानकारी विस्तार से दी जाती है। इस दौरान उन्हें सही समय पर गर्भ धारण करने, एक बच्चे के जन्म के बाद और उसका सही समय पर टीका करण कराने के साथ ही उसके पोषण का सही तरीके से ख्याल रखने की सलाह दी जाती है, ताकि बच्चा स्वास्थ्य य रह सके। इसके साथ ही दो बच्चों के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखने की सलाह दी जाती है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य य की रक्षा हो सके। योग्य दम्पतियों को एक अंतराल के बाद लगातार बच्चा होने के बाद माता के स्वास्थ्य य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से भी उन्हें अवगत कराया जाता है। उंन्होने बताया कि दम्पति सम्पर्क के दौरान उन्हें परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों के बारे रें में भी जानकारी दी जाती है।

पोषण पर ध्यान देकर गर्भवती महिलाएं खुद के साथ बच्चे को भी रखें सुरक्षित

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-प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए करें तैयार
-खुद और शिशु की बेहतर सेहत के लिए रहन-सहन पर ध्यान देना है जरूरी

बांका, 17 फरवरी

गर्भावस्था में महिलाओं को काफी संभल कर रहना पड़ता है. खासकर भोजन को लेकर. दरअसल, इससे न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि गर्भस्थ बच्चों पर भी इसका असर पड़ता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पोषण पर खास ध्यान देने की जरूरत है. इस दौरान खुद और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पोषण को सबसे ऊपर रखने की जरूरत है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि गर्भावस्था में शरीर की बीमारी से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है. इसलिये अपनी और शिशु की सेहत को पक्का करने लिये जरूरी है कि रहन-सहन और पोषण का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाए. गर्भावस्था में बीमार होने से अच्छा है प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाया जाए. इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

पौष्टिक आहार तथा मौसमी फल का करें सेवन
डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भावस्था के दौरान तेल और मसालेयुक्त भोजन से परहेज करना चाहिए. इस दौरान महिलाओं में खाने का लालच बढ़ जाता है. हमेशा स्वादिष्ट भोजन करने का मन करता है. इस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है. इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा का होना जरूरी है. इसलिए खाने में हरी साग-सब्जी, दाले, दूध, मौसमी फल का सेवन बहुत ही फायदेमंद है. इसके साथ ही बादाम, किशमिश, खजूर या फिर अखरोट का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है. बादाम और अखरोट में तो विटामिन और मिनरल की खान होते हैं.

व्यायाम और योग करें: डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भावस्था के समय खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है. इसमें व्यायाम करना बहुत ही फायदेमंद रहता है. प्रसव होने से पहले का योग न केवल गर्भवती महिलाओं को तंदरुस्त रखता है, बल्कि तनाव भी कम करता है. इसके साथ ही गर्भावस्था के समय काम करते रहना भी बहुत फायदेमंद है. इस अवस्था में वजन भी नहीं बढ़ने देना चाहिए. इससे शुगर और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों से बचाव होता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद है.

डॉक्टर की सलाह को मानें: जब चौधरी कहते हैं कि गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर विटामिन, फोलिक एसिड, कैल्सियम और शरीर की अन्य जरूरतों को पूरा करने वाले सप्लीमेंट की सलाह देते हैं. इसे लेना न भूलें. डॉ. चौधरी कहते हैं दरअसल, इस अवस्था में महिलाएं ज्यादातर समय घर के अन्दर ही बिताती हैं. इससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती है, इसलिये इसे लेना जरूरी है. हां, डॉक्टर की सलाह के बगैर न लें.

टीबी ग्रसित व्यक्ति को बोन टीबी होने की संभावना सर्वाधिक

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• हड्डियों में लगातार रहे दर्द तो हो जाएँ सावधान
• ससमय उपचार नहीं होने से लकवा से ग्रसित होने की रहती संभावना
पटना, 16 फ़रवरी-

हमारी हड्डियां कैल्सियम, फॉस्फोरस, विटामिंस और मिनरल्स से बनी होती हैं। इनमें से किसी भी पदार्थ की कमी हड्डियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। आजकल की तनावग्रस्त जीवनशैली भी हड्डियों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है क्यूंकि व्यस्तता की वजह से लोग हड्डी की किसी भी परेशानी को नजरंदाज करते हैं| टीबी भी आज के समय में एक आम, लेकिन गंभीर बीमारी बन गई है। यदि टीबी ग्रस्त व्यक्ति को हड्डी में दर्द हो रहा है या सूजन है, तो यह बोन संबंधी टीबी हो सकता है।
हड्डियों में लगातार रहे दर्द तो हो जाएँ सावधान:
संक्रमण के कारण स्वस्थ व्यक्ति भी इस बीमारी की चपेट में आ सकता है। इसे सेकेंड्री इंफेक्श न भी कहा जाता है। शहरों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम न के बराबर होता है। ऐसी स्थिति में ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना रहती है,जिससे हड्डियां कमजोर होने के साथ-साथ असहनीय दर्द भी होता है। ऐसे में जरा-सा चोट लगने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं अथवा टूट जाती हैं। आजकल का ऑफिस कल्चर भी हड्डियों के गंभीर रोगों को दावत देता है। लगातार काम करना,तनाव,कुर्सी पर बैठे रहने से सरवाइकल,पीठ में दर्द और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बेहद कम उम्र में ही सामने आने लगी हैं|
पीएमसीएच के हड्डी रोग विशेषज्ञ विशेषग्य और सर्जन डॉ. निर्मल नारायण बताते हैं शुरुआत में साधारण महसूस होने वाले ये दर्द यदि बढ़ जाएं या इन पर ध्यान न दिया जाए,तो व्यक्ति लकवाग्रस्त भी हो सकता है। पैरों में होने वाला दर्द थकान से भी हो सकता है या फिर इसके पीछे कोई दूसरा कारण भी हो सकता है। यदि व्यक्ति धूम्रपान करता है,तो इस दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए। धूम्रपान से भी हड्डियों की नसों में खून की सप्लाई रुक जाती है और दर्द होने लगता है,इसे बर्जर डिसीज कहते हैं। उपचार न होने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
बोन टीबी के कारण:
डॉ. निर्मल नारायण के अनुसार टीबी ग्रसित व्यक्ति को बोन टीबी होने की का संभावना खतरा सर्वाधिक होती ता है.| इसके अलावा संक्रमण, खानपान सही न होना, शारीरिक श्रम का अभाव, व्यायाम नहीं करना और विटामिन डी की कमी भी व्यक्ति को इस रोग की चपेट में ला सकता है.| डॉ. नारायण ने बताया शुरुआती स्तर पर यदि बोन ‘टीबी की पहचान हो जाए, तो इसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सर्जरी ही विकल्प होता है। बोन संबंधी टीबी में ज्यादातर मरीज दवाओं से सही हो जाते हैं किन्तु अगर बीमारी की पहचान देर से हुई है, तो सर्जरी करनी होती है।
डॉ. नारायण ने बताया रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। संतुलित भोजन जिसमें, आयोडिन और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा भी हो, उसे अपने रोजाना के आहार में शामिल करें। दर्द की को अनदेखी खा करने से यह बड़ी बीमारी बन सकती ता है।