आत्मनिर्भर भारत में स्वावलंबिका का योगदान

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दिल्ली:
महिलाओं का विकास देश का विकास है। देश बदल रहा है महिलाओं की दशा में सुधार आ रहा है, समय के साथ साथ नारी शक्ति और सशक्त होती जा रही है। महिलाओं की आत्म निर्भरता उनकी जागरुकता और उनकी उन्नति न केवल उनके गृहस्थी के विकास में सहायक साबित होती है बल्कि देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है।

स्वतंत्र महिलाओं की पहचान को दिखाने, सम्मानित करने, एक मंच पर सभी क्षेत्रों के व्यक्तित्वों को जोड़ने, जश्न मनाने, वैश्विक नेटवर्क बनाने और समाज में महिलाओं की भूमिका को महसूस करने के लिए अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में स्वावलंबिका सम्मान समारोह 2021, 7 मार्च को दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

अवार्ड के लिए नामांकित कि गयी लेखिका और एचआर कंसलटेंट नीलीमा राजेश कामदार का मानना है कि समाज में महिलाओं के वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिये स्वावलंबिका बनाना ही महिला सशक्तिकरण है और महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी।

बता दें कि स्वावलंबिका सम्मान समारोह 2021 का आयोजन ईबीएस इंडिया इंक की संस्थापक, व्यापार और ब्रांड सलाहकार छवि हेमंत द्वारा किया जा रहा है। समारोह में व्यवसाय, सरकार, सामाजिक, राजनीति, मीडिया, कला और मनोरंजन उद्योग से व्यक्तित्व को सम्मानित किया जायेगा। साथ ही, महिलाओं को उनके बेहतरीन कार्यो के लिए, प्रशंसा प्राप्त करने और उनको उचित पहचान दिलाने का एक अवसर भी होगा।

“बढ़ती महिलाएं खिलते बाग” थीम के साथ उमड़ते सौ करोड़ अभियान का हुआ आयोजन

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• महिला हिंसा व शोषण के विरूद्ध किया गया आवाज बुलंद
•14 फरवरी से 08 मार्च तक सहयोगी संस्था द्वारा चलाया जाएगा अभियान
•पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर्बल गार्डन, किचन गार्डन, रूफ टॉप गार्डन, विंडो गार्डन को दिया जाएगा बढ़ावा

पटना/14 फ़रवरी 2021:

उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अन्तर्गत आज 14 फ़रवरी, 2021 को हथियाकांध पंचायत भवन, दानापुर, पटना में सहयोगी संस्था के द्वारा “उमड़ते सौ करोड़” अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों, महिलाओं, किशोरियों के द्वारा महिला हिंसा एवं शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद किया। इस अवसर पर महिला हिंसा को समाप्त करने के साथ–साथ धरती और पर्यावरण को सुरक्षित-संरक्षित रखने का भी आह्वान किया गया। इस अवसर पर लगभग 170 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

विभिन्न चुनौतियों का सामना करती है महिलाएं :

उमड़ते सौ करोड़ अभियान की राज्य समन्वयक एवं सहयोगी की प्रमुख रजनी ने इस अवसर पर कहा कि आज महिलाओं के समक्ष कई चुनौतियाँ एक साथ खड़ी हैं। एक ओर जहाँ वे परिवार के अन्दर, कार्यस्थल पर और सड़क पर हिंसा का सामना कर रही हैं तो दूसरी ओर व्यावसायिक (प्रोफेशनल) जिम्मेदारियों में बेहतरी का दबाव भी बना हुआ है। यही नहीं सामाजिक ताने-बाने के अंदर परिवार को बनाये रखने कि जिम्मेदारी भी महिलाओं के कंधे पर है। साथ ही, प्रकृति के साथ खिलवाड़ एवं प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों का सामना भी महिलाओं को ही करना पड़ रहा है। महिलाओं के लिए इस प्रकार की हिंसा किसी को भी मंजूर नहीं है। महिलाएं सभी जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सभी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि महिला के सम्मानपूर्ण स्थान एवं हिंसा मुक्त समाज के साथ हमारी धरती एवं पर्यावरण को बचाना भी महती आवश्यक है। इसके लिए सहयोगी संस्था द्वारा हर्बल गार्डन, रूफ टॉप गार्डन, विंडो गार्डन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गार्डन का उपयोग किसी की परिस्थिति वाले घरों में आसानी से किया जा सकता है। सहयोगी संस्था द्वारा 14 फरवरी से 08 मार्च “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” तक अभियान चलाया जाएगा जिसमें लोगों को इन चीजों की जानकारी देते हुए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा।

महिला हिंसा के विरुद्ध लोगों को जानकारी देने व संवेदित कार्य करने में सहयोगी संस्था की भूमिका सराहनीय :

इस अवसर पर पंचायत के मुखिया श्री रविन्द्र कुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सहयोगी संस्था के द्वारा इस क्षेत्र में महिला हिंसा के विरुद्ध समुदाय एवं हितधारकों को जानकारी देने एवं उन्हें इस मुद्दे पर संवेदित करने का कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में धरती एवं पर्यावरण को बचाने के मुद्दे को जोड़ने से यह और भी उद्देश्यपूर्ण हो गया है। सुरक्षित पर्यावरण होने से ही हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा, हमें इसके लिए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर एकजुट होकर प्रयास करना होगा। इस क्षेत्र में हम अधिक से अधिक पेड़-पौधों को लगाने के लिए एवं इस हेतु समुदाय को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण दिनों एवं अवसरों पर पौधारोपण और वृक्षारोपण का कार्यक्रम करेंगे। हमें पौधों-पेड़ों की सुरक्षा एवं देखभाल अपने बच्चों की तरह करना चाहिए।

धरती बचाने का बीड़ा भी महिलाओं को उठाना होगा:

देवप्रिया दत्ता ने कहा कि अब सभी महिलाओं को धरती बचाने का बीड़ा उठाना होगा। लोगों द्वारा दोनों का ही शोषण किया जा रहा है। खाद्य पदार्थों में अत्यधिक कीटनाशक दवाओं का उपयोग हो रहा है और वैसे खाद्य पदार्थ खा कर लोग बीमार भी हो रहे हैं। ऐसे पदार्थों के कहने से माताओं के गर्भ में ही बच्चों की मृत्यु भी हो रही है। महिलाएं किचन गार्डन लगाकर ऐसी समस्याओं को कम कर सकती हैं। हमें खुद को स्वास्थ्य रखने के लिए पृथ्वी और पर्यावरण को बचाए रखना होगा। हमें हर प्रकार के हिंसा से मुक्त होना होगा चाहे वह घरेलू हिंसा हो या फिर धरती व प्रकृति के साथ कि हिंसा। तभी हमारा बेहतर विकास संभव है।

धरती को सुरक्षित रखने के लिए महिला-पुरुषों की एकजुटता जरूरी :

वार्ड सदस्य श्रीमती देवंती देवी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला-पुरुष सभी को मिलकर हमारी धरती को सुरक्षित बनाये रखने के लिए एकजुट प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी हमारा अस्तित्व बना रहेगा।

इस मौके पर पंचायत के विभिन्न गांवों से महिला एवं किशोरियों ने अपनी प्रतिभागिता की एवं स्थानीय किशोरियों द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुति द्वारा समुदाय को महिला हिंसा को समाप्त करने के साथ हमारे पर्यावरण के प्रति भी सजग रहने के लिए आगाह किया।

लोकगीत की प्रस्तुति के साथ ही औषधीय व फूलों के पौधों का हुआ रोपण :

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकार श्री अर्जुन पासवान एवं उनके सह-कलाकारों के द्वारा लोकगीत भी प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रदूषण से होने वाले नुकसानों के बारे में बताया गया। इस अवसर पर महिला एवं किशोरी प्रतिभागियों के द्वारा सहयोगी द्वारा उपलब्ध कराये गए औषधीय एवं फूलों के पौधों का रोपण कर समुदाय को इस मुद्दे के प्रति प्रेरित किया गया, साथ ही यह अपील किया गया कि हम सभी अपने घर के आसपास पौधा एवं पेड़ लगाएँ एवं उन्हें संरक्षित रखें।

इस अवसर पर रजनी, देवोप्रिया दत्ता, उषा, राजू पाल, लाजवंती, बिंदु, निर्मला, संजू, रिंकी, उन्नति, मुन्नी, शारदा, धर्मेन्द्र, निर्भय, सुरेन्द्र, नितीश के साथ पंचायत के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे जिनमें मुखिया श्री रविन्द्र कुमार, नगर परिषद् अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र चौधरी, वार्ड सदस्य श्रीमती देवंती देवी एवं वार्ड सदस्य श्री राकेश सिंह ने प्रतिभागिता की। मंच का संचालन सहयोगी की कार्यक्रम समान्यवक उन्नति रानी ने किया।

आइजीआइएमएस में स्वा​स्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने कराया कोविड का टीका

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-कार्यपालक निदेशक व अन्य अधिकारियों ने भी टीका लगा कर लीगों को दिया सकारात्मक संदेश

-टीका सुरक्षित और असरदार, आमजन में टीकाकरण के प्रति विश्वास के लिए पहल

पटना, 22 ​जनवरी: कोविड टीकाकरण के पहले चरण में स्वास्थकर्मियों का टीकाकरण किया जा रहा है. इस टीकाकरण अभियान के तहत इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का कोविड टीकाकरण किया जा रहा है. शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने भी कोविड टीकाकरण कराया. उनके साथ राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने भी इस व्यापक टीकाकरण अभियान में हिस्सा लेकर टीका लिया. साथ ही सभी स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने कहा टीकाकरण कराने के लिए लोगों का प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है. टीकाकरण सुरक्षित और असरदार है. टीकाकरण के दूसरे और तीसरे चरण के लिए लोगों में को खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लेना चाहिए. भविष्य में किसी भी कोविड संक्रमण से बचाव के लिए ऐसा करना महत्वपूर्ण हो जाता है.

इं​दिरा गांध आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना में स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के अधिकारियों ने व्यापक टीकाकरण अभियान में शामिल कोकर टीका लेते हुए सभी के लिए मिसाल पेश की है. इस मौके पर बीएमएसआइसीएल के प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार झाा के अलावा राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी खालिद अरशद, उप सचिव राजेश कुमार, राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एनके सिन्हा व औषधि के उपनिदेशक मनीष रंजन आदि ने भी कोविड का टीकाकरण लिया. स्वास्थ्य विभाग से संयुक्त सचिव अनिल कुमार एवं विशेष कार्य पदाधिकारी सतीश कुमार सिन्हा ने भी कोविड का टीकाकरण लिया.

कोविड टीका सभी प्रमाणित वैक्सीन पूरी प्रक्रिया के गुजरने के बाद ही स्वीकृत की गयी है और पूर्णतया: सुरक्षित है. लोगों में इसके सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का कोई भ्रम नहीं रहे इस कारण विभाग के आला​ अधिकारियों ने इस टीके को लेकर सबको टीके के प्रति विश्वास दिलाने का काम किया है. टीकाकरण के पश्चात लाभार्थी को किसी प्रकार की परेशानी के प्रबंधन के लिए सत्र स्थल पर एईएफआई किट भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराने के निर्देश भी विभाग की ओर से दिये गये है. इसके साथ ही संबंधित टीकाकर्मी को इसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है.

कोविड टीकाकरण की पहली खुराक लिये जाने के 28 दिन बाद सभी अधिकारियो को दूसरी खुराक दी जायेगी. दूसरे डोज के 14 दिन बाद कोरोना के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. इसलिए टीके के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है. कोविशील्ड टीकाकृत लाभार्थी को कोविशील्ड व कोवैक्सीन टीकाकृत लाभार्थी को कोवैक्सीन का ही दूसरा दिया जाना है. विभाग की ओर से कहा गया है कि आमलोगों की तरह कोविड टीकाकरण कराने वाले लाभार्थी सावधानी के तौर पर मास्क का इस्तेमाल अवश्य करें. साथ ही शारीरिक दूरी व हाथों की सफाई का ​भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है

कोरोना का टीका लेने से नहीं होता है कोई साइड इफेक्ट: डॉ विनोद कुमार

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-मैंने भी टीका लिया, आप भी लेकर समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाएं
-कोरोना का टीका लेकर ही हम वायरस की चेन तोड़ने में हो पाएंगे सफल

भागलपुर, 22 जनवरी
‘कोरोना का टीका लेने से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. मैंने टीका लिया. मुझे कुछ नहीं हुआ. जिले में अब तक 4 दिन टीकाकरण हुआ है. अभी तक किसी को कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ है. इसलिए डरिए मत. कोरोना का टीका लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाएं. कोरोना का टीका लेकर ही हम कोरोना की चेन तोड़ने में सफल हो पाएंगे.’ यह कहना है नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ विनोद कुमार का. इन्होंने टीकाकरण के पहले दिन 16 जनवरी को टीका लिया. 7 दिन हो गया है इन्हें टीका लिए हुए, लेकिन किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ है. डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि कुछ शरारती लोग इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं. अभी तक इस तरह का कोई मामला नहीं आया है कि टीका लेने से किसी को कोई नुकसान हुआ हो. इसलिए कोरोना का टीका लेने के लिए आगे आएं. अगर आप टीका लेंगे, तभी हम कोरोना को खत्म कर पाएंगे.

बहुत सोच समझकर बनाया गया है टीकाकरण कार्यक्रम:
डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि टीकाकरण को तीन चरणों में बांटा गया है. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मी को रखा गया है. दूसरे चरण में गंभीर बीमारी के मरीज, बुजुर्ग और सरकारी कर्मियों को रखा गया है. आखिरी चरण में आमलोगों को रखा गया है. ऐसा सरकार ने बहुत सोच समझकर किया है. दरअसल, पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को रखा गया है. स्वास्थ्यकर्मी इसकी बारीकियों से अवगत होते हैं, इसलिए उन्हें चुना गया है. दूसरे चरण में जरूरतमंद लोगों को चुना गया है. इन दोनों पर जब टीका पूरी तरह से सफल हो जाएगा, फिर आमलोगों को इस दायरे में रखा गया है.
कोरोना से ठीक हुए लोगों को भी टीका लेने के लिए आगे आना चाहिए:
डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए कि हम कोरोना से ठीक हो गए हैं तो दोबारा नहीं होगा. कोरोना से ठीक हुए लोगों को भी टीका लेने के लिए आगे आना चाहिए. जो अभी पीड़ित हैं कोरोना से वे 14 दिन की अवधि पूरी होने के बाद ही टीका लें. कोरोना का टीका सभी को लेना जरूरी है. सभी लोग टीका लेंगे, तभी कोरोना की चेन टूटेगी.

टीका लेने के बाद नशे से रहें दूर:
डॉ. विनोद कुमार कहते हैं कि टीका लेने के बाद नशे का सेवन न करें. शराब का सेवन तो बिल्कुल भी नहीं. वैसे भी शराब बिहार में प्रतिबंधित है. स्वास्थ्य के लिए तो यह नुकसानदायक है ही, कानूनी तौर पर भी अपराध है. टीका के शोध में यह बात सामने आई है कि नशे के सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे टीका पूरी तरह से काम नहीं कर पाएगा. टीका से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही बढ़ती है. इसके बाद वह शरीर में एंटीबॉडी को विकसित करता है. इसलिए टीका लेने के बाद नशे का सेवन नहीं करें.

टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का करें पालन:
डॉ. विनोद कुमार कहते हैं कि कोरोना का टीका लेने के बाद भी जो सरकार की गाइडलाइन है, उसका पालन करना चाहिए. लोगों को मास्क पहनना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए. ऐसा करने से न सिर्फ कोरोना से बचाव होता है, बल्कि दूसरी भी कई संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है.

खगड़िया जिले में 24 घंटे मिल रही है एसएनसीयू की सेवा

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– 16 नवजात हैं एडमिट, दी जा रही है बेहतर स्वास्थ्य सेवा
– नवजात को एसएनसीयू में एडमिट कराने में केयर इंडिया भी कर रहा सहयोग
– चिकित्सक की मौजूदगी में दी जा रही है सेवा, सुरक्षा का रखा जा रहा है ख्याल

खगड़िया, 22 जनवरी|
राज्य स्वास्थ्य समिति स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ और बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिसका धरातल पर सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है| सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। इसी कड़ी में नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए अस्पतालों में एसएनसीयू की सेवा बहाल की गई है । जो चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रशिक्षित एएनएम द्वारा 24 घंटे दी जा रही है। साथ ही इस दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल भी ख्याल रखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के इस पहल से नवजातों के जरूरतमंद परिजनों की परेशानियाँ कम होते दिख रही है|
– 16 नवजात हैं एडमिट, मिल रही है समुचित स्वास्थ्य सेवा :-
एसएनसीयू प्रभारी डॉ आमोद कुमार ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य परेशानी से पीड़ित 16 नवजात एसएनसीयू में भर्ती हैं । जिसे बेहतर सुविधा के साथ स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है। साथ ही इलाज सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। ताकि नवजात को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके और किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर इलाज के पश्चात की जाने वाली आवश्यक देखरेख की भी जानकारी परिजनों को दी जाती है| उन्हें उचित देखरेख के लिए प्रेरित भी किया जाता है ।

– साँस से पीड़ित नवजात को दी जाती है एसएनसीयू सेवा :-
एसएनसीयू के चिकित्सक डॉ नरेंद्र कुमार ने बताया कि साँस से पीड़ित नवजात को जिले के अस्पतालों में एसएनसीयू की सुविधा आसानी के साथ दी जा रही है| इस दौरान बच्चे की सुरक्षा के मद्देनजर स्वास्थ कर्मी पूरी सतर्कता के साथ नवजात को यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ताकि नवजात को अन्य परेशानियाँ से नहीं जूझना पड़े।

– नवजात को स्वस्थ रखने के लिए परिजनों को दी जाती है जानकारी :-
एसएनसीयू के डीएमयू सुबोध कुमार ने बताया कि इलाज के पश्चात डिस्चार्ज करने के वक्त अस्पताल कर्मियों एवं चिकित्सकों द्वारा नवजात को स्वस्थ रखने के लिए परिजनों को आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिए जाते हैं। ताकि नवजात का स्वस्थ शरीर निर्माण हो। इस दौरान बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक नियमित रूप से स्तनपान कराने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, कोविड-19 के लेकर नवजात को स्तनपान कराने के दौरान मास्क का अनिवार्य रूप उपयोग करने व हाथों की अच्छी तरह से साबुन से धोने आदि की जानकारी दी जाती है।

– एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के दौरान साफ-सफाई का रखा जा रहा है ख्याल : –
नवजात को एसएनसीयू की सेवा उपलब्ध कराने के दौरान साफ-सफाई का पूरी तरह ख्याल रखा जाता है। इसके लिए चिकित्सक, कर्मी समेत अन्य लोग एसएनसीयू प्रवेश करने के पूर्व ही चप्पल-जूता तक प्रवेश द्वार पर ही खोल लेते हैं। ताकि अंदर परिवार में किसी प्रकार गंदगी से संक्रमण नहीं हो और शत-प्रतिशत साफ सफाई सुनिश्चित हो। इसके अलावे नवजात के परिजनों को भी साफ-सफाई से संबंधित आवश्यक जानकारी देते हुए पालन के लिए जागरूक किया जाता है। साथ ही साथ सरकार के गाइलाइन का भी पालन किया जाता है।

– नवजात को एसएनसीयू में एडमिट कराने में केयर इंडिया भी कर रहा है सहयोग :-
नवजात को एसएनसीयू में एडमिट कराने में केयर इंडिया के कर्मियों का भी सकारात्मक सहयोग दिख रहा है। केयर इंडिया के कर्मी पीड़ित नवजात के परिजन को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध एसएनसीयू सेवा की जानकारी देकर लोगों के मन में चल रहे सरकार स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति दुविधा को दूर कर रहे हैं। साथ ही उपलब्ध सुविधा की भी जानकारी देते हैं और एडमिट कराने तक आवश्यक सहयोग कर रहे हैं। जिसका अच्छा प्रभाव दिख रहा है और लोग पूरी उत्साह के साथ निर्भीक होकर सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले रहे हैं।

16 से 30 जनवरी तक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा है टीएचआर का वितरण

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– आंगन एप्प पर रजिस्ट्रेशन के बाद ओटीपी आने पर लाभार्थी के बीच किया जाता वितरण

– कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए लाभार्थियों के बीच किया जा रहा है वितरण

लखीसराय, 22 जनवरी 2021 : मकर संक्रांति के बाद 16 जनवरी से जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण किया जा रहा है। यह कार्यक्रम आगामी 30 जनवरी तक जारी रहेगा। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत सेविका और सहायिका ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद ही लाभार्थी के बीच टीएचआर का वितरण कर रही है।

आईसीडीएस लखीसराय कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) कुमारी अनुपमा ने बताया कि कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए 16 जनवरी से ही जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सिविका और सहायिका के द्वारा लाभार्थियों के बीच मोबाइल ओटीपी के वेरिफिकेशन के बाद टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका के द्वारा लाभर्थियों को कोरोना टीकाकरण के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि कोरोना वैक्सीन पूरी तरीके से सुरक्षित है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है इसलिये सभी लोग अपनी बारी आने के बाद निश्चित तौर पर कोरोना कि वैक्सीन लगवाएं।

टीएचआर वितरण के लिए लाभार्थी का आंगन मोबाइल एप्प पर किया जाता है रजिस्ट्रेशन :
उन्होंने बताया कि टीएचआर वितरण के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका के द्वारा सबसे पहले आंगन मोबाइल एप्प पर लाभार्थी का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराया जाता है। इसके बाद ओटीपी आने पर उसका वेरिफिकेशन होता है और पोषाहार लिखा हुआ वेरिफिकेशन कोड आने के बाद हीं लाभार्थी को पोषाहार दिया जाता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर लोगों के बीच किया जाता है टीएचआर का वितरण :
उन्होंने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर लोगों के बीच टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण किया जाता है। इनमें गर्भवती महिलाएं, धातृ माताएं सहित पोषण कि कमी से जूझ रहे बच्चे शामिल हैं। इन सभी लोगों के बीच टेक होम राशन ( टीएचआर) का वितरण किया जाता है।

टीएचआर के रूप में लाभार्थियों के बीच किया जा रहा पोषाहार का वितरण :
जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार के रूप में चावल, दाल, सोयाबीन, गुड़ के अलावे अन्य पोषक आहार का किया जा रहा है वितरण। इसके साथ हीं आंगनबाड़ी क्षेत्र कि सभी गर्भवती महिलाओं को गर्भवस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानी, खानपान में पोषक तत्वों कि उपलब्धता के साथ हीं गर्भवस्था के दौरान आने वाली परेशानियों सभी अवगत कराया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के गर्भ धारण करने पर गोद भराई का रस्म अदा कर उन्हें खानपान में पोषक तत्वों से युक्त भोजन खाने की सलाह दी जाती है।

भागलपुर के सदर अस्पताल में लगा परिवार नियोजन मेला

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-मेले में काउंसिलिंग कर लोगों को परिवार नियोजन को लेकर किया गया जागरूक
-जिले में 31 जनवरी तक चलेगा परिवार नियोजन पखवाड़ा, 31 मार्च तक संचार अभियान
भागलपुर, 22 जनवरी
परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत शुक्रवार को सदर अस्पताल में मेला का आयोजन किया गया. मेला का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सिंह ने किया. इस मौके पर डीपीएम फैजान अशर्फी और एसीएमओ डॉ. करमचंद भी मौजूद रहे. वहीं मेले में लगे स्टॉल पर काउंसिलर वंदना, स्वर्णलता और धर्मेंद्र लोगों को परिवार नियोजन को लेकर जागरूक कर रहे थे. मौके पर सिविल सर्जन ने कहा कि 31 जनवरी तक परिवार नियोजन पखवाड़ा चलेगा. जिले में आशा कार्यकर्ता घूम- घूमकर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक कर रही हैं. एएनएम काउंसिलिंग कर लोगों को परिवार नियोजन की जानकारी दे रही हैं. वहीं ई-रिक्शा और माइकिंग के जरिए भी लोगों को इसे लेकर जागरूक किया जा रहा है. जिले में 31 मार्च तक संचार अभियान भी चलेगा. इसके तहत भी परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है.
परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधनों पर जोर:
सिविल सर्जन ने बताया कि परिवार नियोजन को लेकर अस्थाई संसाधनों पर जोर दिया जा रहा है. मेले में लोगों को कंडोम, कॉपर टी, अंतरा और छाया के प्रति जागरूक किया जा रहा है. मेले में भी इन सब चीजों को लेकर स्टॉल लगे हैं. स्टॉल पर काउंसिलिंग कर लोगों को परिवार नियोजन के बारे में बताया जा रहा है.
एक से दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी:
मौके पर मौजूद केयर इंडिया की डॉ.सुपर्णा टाट ने कहा कि एक से दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रहना जरूरी है. इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है. बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. इस वजह से वह भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहता है. इसलिए हमलोग एक से दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने की सलाह दे रहे हैं.
एएनएम कर रही काउंसिलिंग: केयर इंडिया के आलोक कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन के साथ जिले में संचार अभियान भी चल रहा है.इसके जरिए एएनएम अपने क्षेत्र के एक बच्चे वाले दंपती की काउंसिलिंग कर रही है और उन्हें दूसरे बच्चे की प्लानिंग के बारे में बता रही हैं. उन्हें समझा रही है कि एक से दूसरे बच्चे के बीच कितना अंतर होना चाहिए. और यह आपके लिए कितना फायदेमंद है.
सदर अस्पताल से निकाली गई जागरूकता रैली: उधर दूसरी तरफ परिवार नियोजन को लेकर सदर अस्पताल से जागरूकता रैली निकाली गई. जिसमें आशा कार्यकर्ता और एएनएम के अलावा स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे. रैली सदर अस्पताल से निकलते हुए घंटा घर होते हुए कचहरी चौक तक गई. वहां से वापस सदर अस्पताल आई. इस दौरान रास्ते में लोगों को परिवार नियोजन को लेकर जागरूक किया गया. इस दौरान केयर इंडिया के डॉक्टर राजेश मिश्रा, सुष्मिता, शिवम और विकास मौजूद रहे.
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

परिवार नियोजन के फायदे से अवगत हुए क्षेत्र के दम्पति

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नाथनगर रेफरल अस्पताल में लगा परिवार नियोजन मेला
मेला में स्टॉल पर दंपतियों की काउंसलिंग की गई

भागलपुर-

गुरुवार से परिवार नियोजन पखवाड़ा का आगाज हो गया. दूसरी ओर परिवार नियोजन को लेकर संचार अभियान भी चल रहा है जो कि 31 मार्च तक चलेगा. इसे लेकर नाथनगर रेफरल अस्पताल में परिवार नियोजन मेला लगाया गया. मेला में स्टॉल लगाकर क्षेत्र के दंपतियों को परिवार नियोजन के बारे में बताया गया. मौके पर मौजूद रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ अंजना कुमारी ने बताया कि 31 जनवरी तक परिवार नियोजन पखवाड़ा चलेगा. इस दौरान क्षेत्र के दंपतियों को इसे लेकर जागरूक किया जाएगा. उन्हें इसके बारे में बताया जाएगा. इसके अलावा अभियान के तहत गांव-गांव गांव में ई रिक्शा के जरिए प्रचार- प्रसार कर लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक किया जा रहा है.

एक से दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल जरूरी:
मौके पर मौजूद केयर इंडिया के एफपीसी आलोक कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग में एक बच्चे वाले दंपतियों को दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने के बारे में कहा जा रहा है. उन्हें समझाया जा रहा है कि दो बच्चे के बीच अगर 3 साल का अंतराल रहता है तो इसके क्या फायदे होते हैं. दंपतियों को इस बात की जानकारी दी जा रही है कि अगर दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रहता है तो जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है. साथ ही बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है जिससे कि वह भविष्य में किसी भी प्रकार की बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है.

अस्थाई संसाधनों के बारे में दी जा रही है जानकारी:
आलोक कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान लोगों को परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधनों के बारे में बताया जा रहा है. उन्हें कॉपर टी के बारे में बताया जा रहा है. साथ ही कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा जा रहा है. इन संसाधनों का इस्तेमाल कर लोग परिवार छोटा और सुखी परिवार रख सकते हैं.

जागरूकता रैली भी निकाली गई:
लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करने के लिए ना सिर्फ मेला लगाया गया, बल्कि क्षेत्र में जागरूकता रैली भी निकाली गई. रैली में आशा कार्यकर्ता और एएनएम समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे. रैली के जरिए परिवार नियोजन की जानकारी लोगों को दी गई. आलोक कुमार ने बताया कि 31 तारीख तक रैली निकलती रहेंगी और मेले भी लगते रहेंगे. हमलोगों का प्रयास है कि गांव-गांव में सभी लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी जाए. मौके पर अपर्णा कुमारी, किरण कुमारी, मनीषा कुमारी, संजीव कुमार व अमृत मौजूद थे.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 को मात देकर दोगुनी ताकत के साथ पुनः कार्य पर लौटे चंदन कुमार सिंह

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– मजबूत इच्छाशक्ति और साकारात्मक सोच के बल पर तमाम चुनौतियों के बावजूद पूरी की दोहरी जिम्मेदारी
– खगड़िया में केयर इंडिया के डीटीओ – ऑन के पद पर हैं तैनात
– विभागीय कार्यों के दौरान ही हुए थे संक्रमित, होम क्वारेंटाइन में रहकर दी मात

खगड़िया-

कोविड-19 के दौर में जहाँ लोग अपने से भी मिलने से परहेज कर रहे थे वहीं, खगड़िया में तैनात केयर इंडिया के डीटीओ – ऑन चंदन कुमार सिंह कोविड-19 के उस मुश्किल भरे दौर में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे| वह मजबूत इच्छाशक्ति व सकारात्मक सोच के साथ लोगों को अपनी सेवा देते रहे। हालाँकि, इस दौरान वह कोविड-19 से संक्रमित हो गये। किन्तु, घबराये नहीं। बल्कि, मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले के बदौलत कोविड-19 को भी मात देने में सफल रहे। संक्रमित होने बाद वह आइसोलेट हुए। जहाँ समुचित इलाज के साथ-साथ मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले की बदोलत कोविड-19 को मात देकर पुनः दुगुनी ताकत से अपनी जिम्मेदारी निभाने कार्य पर लौटे।

– कोविड-19 को मात देने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी :-
डीटीओ – ऑन चंदन कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 को मात देने के लिए आवश्यक इलाज तो जरूरी है ही, इसके अलावा वे लोगों के अंदर मजबूत इच्छाशक्ति और धैर्य होना भी जरूरी है। इसकी के बदोलत तमाम लोग कोविड-19 को मात दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे कोविड-19 संक्रमित होने की जानकारी मिली तो कुछ पल के लिए घबराया। किन्तु, फिर सोचा मैं ही घबरा जाऊँगा तो सामान्य लोगों का क्या होगा। इसी सोच ने मेरे अंदर एक नई ऊर्जा उर्जा उत्पन्न की और फिर हम अपनी साहस से कोविड-19 को मात देने में सफल रहे हें।

– लक्षण दिखते ही कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन :-
चंदन कुमार सिंह ने बताया कि मुझे गला में परेशानी शुरू हुई। जिसके बाद मैंने रेपिड जाँच करवाया। इसमें मेरी रिपोर्ट निगेटिव आई। किन्तु, मैं रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था। जिसके कारण मुझे लगा कि आरटीपीसीआर जाँच भी करवानी चाहिए। जब मैं ने कराया तो उसमें मेरी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई। जिसके बाद मैं होम आइईसोलेट हुआ। जहाँ समुचित इलाज के साथ सकारात्मक सोच से कोविड-19 को मात देने में सफल रहा। इस दौरान मुझे सहकर्मियों एवं विभागीय पदाधिकारियों का काफी सहयोग मिला। इसलिए, मैं समाज के प्रत्येक व्यक्ति से अपील करता हूँ कि लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श का पालन करें।

– पूरी तरह सुरक्षित है वैक्सीन, नहीं है किसी प्रकार का साइड इफेक्ट :-
चंदन कुमार सिंह ने बताया कि मैं ने दो दिन पूर्व ही कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए जिले में आई वैक्सीन ली लिया है। जिसके बाद मुझे कोई परेशानी नहीं है। इसलिए, मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है और इसका किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं है और ना ही अबतक कहीं से भी गंभीर साइड इफेक्ट की खबरें सामने आई है। इसलिए, मैं हर व्यक्ति से अपील करता हूँ कि निर्भीक होकर वैक्सीनेशन कराएं। यही आपके बचाव के लिए सबसे बेहतर और स्थाई उपाय है।

– वैक्सीनेशन के बाद भी जारी रखें एहतियात :-
चंदन कुमार सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीननेशन के बाद बचाब से संबंधित एहतियात जारी रखें। ताकि भविष्य में भी किसी प्रकार का संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। इसके लिए कम से कम मास्क का नियमित उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन, साफ-सफाई का ख्याल समेत अन्य बचाव से संबंधित एहतियात को जारी रखें। दरअसल, ऐसा करने से सिर्फ हम ही नहीं बल्कि पूरा समाज भी अन्य संक्रामक बीमारी से दूर रहेगा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिसेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, कान छूने से बचें।
– सफर के दौरान हमेशा सेनेटाइजर पास में रखें।
– लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर की गुणवत्ता आकलन को ले लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने किया सदर हॉस्पिटल का दौरा

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– केयर इंडिया कि स्टेट टीम के डॉ. प्रवीण रंजन महाराणा के नेतृत्व में टीम ने की बैठक
– सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराने को ले लक्ष्य कार्यक्रम के तहत देश के अभी हॉस्पिटलों में किया जाता है गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का आकलन

लखीसराय-

सदर अस्पताल लखीसराय स्थित ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम की गुणवत्ता का लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रमाणीकरण के मकसद से केयर इंडिया की असेस्मेंट टीम ने गुरुवार को दौरा किया। केयर इंडिया स्टेट टीम से आए डॉ. प्रवीण रंजन महाराणा के नेतृत्व में असेस्मेंट टीम ने ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम में चल रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं को ले सदर हॉस्पिटल लखीसराय के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक कुमार सिंह, हॉस्पिटल मैनेजर नंद किशोर भारती, रिमोट पेशेंट मॉनेटरिंग (आरपीएम) के इंचार्ज रूप नारायण, डीटीएल केयर डॉ. नावेद उर रहमान, केयर इंडिया कि फैसिलिटी ऑफिसर आशा बाई सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम का निरीक्षण किया गया –
केयर इंडिया कि डीटीएल केयर नावेद उर रहमान ने बताया कि मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में दी जा रही सेवाओं में गुणवत्ता सुधार को ले भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा मार्च 2018 में लक्ष्य कार्यक्रम शुरू हुआ । इसी कार्यक्रम के तहत डॉ. प्रवीण रंजन महाराणा के नेतृत्व में केयर इंडिया कि स्टेट लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने गुरुवार को सदर हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम का निरीक्षण किया । इसके साथ ही यहां दी जा रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का आकलन भी किया। इसके साथ हीं लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने इस विषय पर हॉस्पिटल डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक कुमार सिंह, हॉस्पिटल मैनेजर नंद किशोर भारती, शिशु रोग विशेषज्ञ विभीषण कुमार सहित कई मेडिकल स्टाफ और अधिकारियों के साथ बातचीत की।

क्या है लक्ष्य कार्यक्रम ?
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18 मार्च 2018 में देश के सभी हॉस्पिटलों में लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर रूम में दी जा रही सुविधाओं के गुणवत्ता सुधार को ले लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के तहत प्रसूति के दौरान महत्वपूर्ण देखभाल के लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के स्तर पर प्रसूति सम्बंधी गहन देखभाल के लिए इंसेंटिव केयर यूनिट(आईसीयू) और सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटलों में प्रसूती देखभाल के लिए उच्य निर्भरता इकाइयों( एचडीयू) संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ हीं रेफरल हॉस्पिटल में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी यह सेवा क्रियान्वित है।

लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर के गुणवत्ता सुधार से मातृ और शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी :
उन्होंने बताया कि सभी हॉस्पिटल के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार के बाद देश में मातृ और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आएगी और मरीजों का सही इलाज सही समय पर किया जा सकेगा।

एनक्यूएएस के जरिये किया जाता है गुणवत्ता परक सुधार का आंकलन :
उन्होंने बताया कि सभी हॉस्पिटलों के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर रूम के गुणवत्तापरक सुधार का आकलन राष्ट्रीय गुणवत्ता अस्वाशन मानक (एनक्यूएएस) के जरिये किया जाता है। उन्होंने बताया कि एन क्यूएएस पर 70 प्रतिशत अंक पाने वाली प्रत्येक सुविधा को लक्ष्य प्रमाणित सुविधा का प्रमाणपत्र दिया जाता है। एनक्यू एएस के अंकों के अनुसार लक्ष्य प्रमाणित सुविधाओं का वर्गीकरण किया जाता है। इसके अनुसार 90%, 80% और 70% अंक हासिल करने वाली सुविधाओं को इसी के अनुसार प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर बैज प्रदान किए जाते हैं।