सुरक्षा एवं असर के आंकड़ों की कसौटी पर खरी उतरी है वैक्सीन, इसके बाद ही मिली है प्रयोग की अनुमति: स्वास्थ्य मंत्रालय

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वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क लगाना जरूरी

भागलपुर-

कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में झिझक को काम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि वैक्सीन सुरक्षा एवं असर के तमाम आंकड़ों पर खरी उतरी है जिसके बाद ही सरकार द्वारा इसके प्रयोग की अनुमति प्रदान की गयी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने वैक्सीन के सुरक्षित होने एवं इसकी प्रभावशीलता से सम्बंधित आंकड़ों की जांच के उत्कृष्ट नतीजों के आधार पर ही वैक्सीन को मंजूरी दी है उसके बाद ही विभाग द्वारा वैक्सीनेशन आरम्भ किया गया है। कोरोना की वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है हालांकि स्वयं की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को सीमित करने के लिए कोरोना वैक्सीन की दो डोज आवश्यक है ।
ड्रग नियामक द्वारा कठिन जांच के बाद ही मिलता है वैक्सीन प्रयोग का लाइसेंस
आम लोगों पर किसी भी वैक्सीन के प्रयोग से पहले वैक्सीन कंपनी द्वारा किये गए समस्त परीक्षणों की जांच ड्रग नियामक द्वारा की जाती है जांच के परिणाम उत्साहवर्धक होने के पश्चात ही दवा कंपनी को वैक्सीन के प्रयोग का लाइसेंस प्रदान किया जाता है इसलिए सभी लाइसेंस प्राप्त कोरोना वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावकारी है।
देश में शुरू की गई कोरोना वैक्सीन उतनी ही प्रभावी है जितनी अन्य देशों द्वारा विकसित वैक्सीन वैक्सीन का परीक्षण के विभिन्न चरणों से इसकी सुरक्षा और प्रभाव कार्य सुनिश्चित किया है , स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है ।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बताया गया है वैक्सीन की प्रभावशीलता और कोरोना के प्रति एंटीबाडी विकसित होने के लिए वैक्सीन के दो डोज लेना अति आवश्यक है। वैक्सीन का प्रथम डोज लेने के 4 हफ्ते या 28 दिन बाद ही इसका दूसरा डोज दिया जाएगा। आमतौर पर कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लेने के 2 सप्ताह बाद कोरोना के प्रति एंटीबॉडी का निर्माण शुरू हो जाता है। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क लगाना, शारीरिक दूरी रखना एवं नियमित अंतराल के बाद हाथ धोना आवश्यक है।
सरकार ने इसके लिए सबसे पहले उच्च जोखिम वाले समूह को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन के लिए चयनित किया है। इसमें हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर शामिल है। वहीँ दूसरे समूह में 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति तथा वह लोग जो पहले से ही किसी रोग से ग्रसित है को यह वैक्सीन उपलब्ध करायी जायेगी। इसके बाद अन्य सभी जरूरतमंद को भी वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएगी।
कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति को भी वैक्सीन लगवाना है आवश्यक
अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद सही हो चुका है इसके बाद भी उसको वैक्सीन की दोनों डोज लेना आवश्यक है क्योंकि वैक्सीन उसके शरीर में एक मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र को विकसित करने में मदद करेगा। वहीँ संक्रमित व्यक्तियों को लक्षण खत्म होने के 14 दिन बाद तक वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए क्योंकि वह वैक्सीनेशन स्थल पर दूसरों में वायरस फैला सकता है।
अगर टीकाकरण के बाद कोई असुविधा या बेचैनी महसूस होती है तो निकटतम स्वास्थ्य अधिकारी एएनएम या मितानिन को सूचित करें । करोना अनुरूप व्यवहारों का पालन याद रखें जैसे कि मस्क पहनना, हाथ की सफाई और शारीरिक दूरी को बनाए रखना जो कम से कम 6 फीट या दो गज की हो, भी जरूरी है ।
जैसा अन्य वैक्सीन के साथ होता है कुछ व्यक्तियों में सामान्य प्रभाव हल्का बुखार हो सकता है राज्यों को कोरोना वैक्सीनेशन से संबंधित किसी भी दुष्प्रचार से निपटने के लिए कठोर व्यवस्था करना के लिए कहा गया है ।
कोई व्यक्ति कैंसर मधुमेह उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की दवा ले रहा है या ऐसे एक या एक से अधिक स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले व्यक्ति को उच्च जोखिम वाली श्रेणी माना जाता है । उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन कराने की आवश्यकता है । हेल्थ केयर प्रोवाइडर फ्रंटलाइन श्रमिकों के परिवारों को भी प्रारंभिक चरण में सीमित वैक्सीन की आपूर्ति के कारण इसे पहले प्राथमिकता वाले समूह मैं लोगों को प्रदान किया जाएगा ।

आशाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया आयोजन

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कार्यपालक निदेशक की अध्यक्षता में आशाओं ने सीखे गुर

15 दिनों तक चलेगा गृह आधारित शिशु देखभाल प्रशिक्षण

पटना-

बच्चों के जन्म के पश्चात उनकी घर पर होने वाली देखभाल संबंधित आवश्यक जानकारियां आमजन तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न स्तर पर प्रयास किये गये हैं. छोटे बच्चों के घरों पर उनके बेहतर पोषण सुनिश्चित करने और उनके आवश्यक टीकाकरण संबंधी जानकारी उनके माता पिता के साथ आशा के माध्यम से साझा की जा रही है. आशा के माध्यम से बच्चों का समय समय पर वजन व कद की जांच कर उनमें कुपोषण की स्थिति होने पर इससे निबटने के लिए दिये जाने वाले विभिन्न प्रशिक्षणों से उनका क्षमतावर्धन हो रहा है.

इन विषयों पर क्षमतावर्धन को ध्यान में रखते हुए राजधानी पटना के पाटलीपुत्र कॉलोनी स्थित एक निजी होटल में आशाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. गुरुवार से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 दिनों तक चलेगा. इस दौरान आशाओं को आशा मॉड्यूल 5, 6 व 7 की जानकारी दी जायेगी. साथ ही गृह आधारित शिशु देखभाल, गैरसंचारी रोग व शहरी आशा के कार्यों में प्रगति लाने के उद्देश्य से यह यह प्रशिक्षण काफी मददगार होगा.

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आशा प्रशिक्षण की महत्ता व उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा की गयी. उन्होंने बताया राज्य स्तरीय मूल प्रशिक्षकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाली संस्था केयर इंडिया के कर्मियों को जिला आशा प्रशिक्षक के रूप में तैयार किया जायेगा. सफल प्रतिभागियों द्वारा सभी आशा को आशा मॉडयूल 5, 6, 7 सहित गृह आधारित शिशु देखभाल व शहरी आशा तथा गैर संचारी रोगों की पहचान व उसकी जांच आदि के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा.

छोटे शिशुओं को बेहतर देखभाल प्रदान कराने के उद्देश्य से होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम से माताओं को छोटे बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन पर आवश्यक जानकारी देते हुए किसी जटिलता से निपटने की जानकारी दी जाती है. बच्चों को स्तनपान कराने के तरीकों सहित उनके पूरक आहार में शामिल पोषण वाले तत्वों के बनाने आदि की भी विधि बतायी जाती है. गृह आधारित देखभाल का उद्देश्य बच्चों में बेहतर पोषण की स्थिति तैयार करना, डायरिया प्रबंधन के लिए ओआरएस के घोल देने की विधि व जिंक टेबलेट का इस्तेमाल करना, कृमिमृक्त करना, टीकाकरण कराना और स्वस्थ्य जीवनकाल प्रदान करते हुए शिशु मृत्यु दर को कम करना है. ऐसे प्रशिक्षणों की मदद से आशा छोटे बच्चों में कुपोषण के चिन्हों को पहचान कर उनके प्रारंभिक विकास में सुधार लाने की दिशा में काम करती हैं.

इस मौके पर राज्य स्वास्थ्य समिति की अपर कार्यपालक निदेशक डॉ करुणा कुमारी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी आशा ईकाई के डॉ वाइएन पाठक, केयर इंडिया से चीफ पार्टी सुनील बाबु, टीम लीडर प्रणय कुमार, डॉ जयंती श्रीवास्तव उपनिदेशक प्रशिक्षण व अन्य पदाधिकारी शामिल थे

गुरुवार को 296 सत्र स्थलों पर 15592 लोगों को लगे टीके

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• कुछ लोगों को टीके से पहले रहना है सावधन
• सभी के लिए सुरक्षित और असरदार है टीका

पटना-

राज्य में 16 जनवरी से टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गयी है। सप्ताह में 4 दिन( सोमवार, मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार) ही लोगों को टीके लगाए जा रहे हैं। गुरुवार को राज्य के 296 सत्र स्थलों पर 15592 लोगों को टीके लगाए गए।

28 वें दिन टीके का दूसरा डोज:
सावधानी के तौर पर मास्क का इस्तेमाल, शारीरिक दूरी एवं हाथों की सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है. प्राधानमंत्री ने स्वयं टीकाकरण लॉन्च के दौरान इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि दवाई भी और कड़ाई भी.
जिन कोरोना योद्धाओं को कोरोना टीका का पहला डोज लगाया गया है, उन्हें 28 वें दिन दूसरा डोज दिया जाएगा. दूसरे डोज के 14 दिन बाद बाद ही कोरोना के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. इसलिए टीके के बाद भी सावधानी बरतनी जरुरी है.

ऐसी स्थिति में न लें टीका:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा यह आश्वस्त किया गया है कि कोविड टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है. टीके जल्द बनाए गए हैं, लेकिन पूरे नियमों का पालन किया गया ताकि यह सुरक्षित हो. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है जिन लोगों की दवा या किसी प्रकार के खाने की ऐलर्जी है,वह यह टीका न लगवाएं. गर्भवती, धात्री या ऐसी महिलायें जिन्हे गर्भवती होने की संभावना लग रही है उनको भी यह टीका नहीं लगवाया चाहिए. यह टीका 18 वर्ष से काम की उम्र के बच्चों के लिए भी नहीं है.

कोविड-19 वैक्सीन सभी के लिए सुरक्षित:

कोविड टीका सभी प्रमाणित वैक्सीन पूरी प्रक्रिया के गुजरने का बाद ही स्वीकृत की गयी है और पूर्णतया सुरक्षित है। चरणवार तरीके से इसे सभी को उपलब्ध कराने की सरकार की योजना है । टीकाकरण के पश्चात लाभार्थी को किसी प्रकार की परेशानी के प्रबंधन के लिए सत्र स्थल पर एनाफलीसिस कीट एवं एईएफआई कीट की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है तथा इसके लिए संबंध में टीकाकर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है.

परिवार नियोजन को लेकर गांव- गांव में लोगों को किया जाएगा जागरूक

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-10 दिनों तक जिले के सभी गांवों में किया जाएगा प्रचार- प्रसार
-सदर अस्पताल से सिविल सर्जन ने ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

बांका-

जिले में परिवार नियोजन पखवाड़ा का गुरुवार को आगाज हो गया. इस मौके पर सिविल सर्जन डॉक्टर सुधीर कुमार महतो ने सदर अस्पताल से ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. ई-रिक्शा से ऑडियो के माध्यम से 10 दिनों तक पूरे जिले के गांवों में लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक किया जाएगा. मौके पर सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने कहा कि आज से 31 जनवरी तक पूरे जिले में लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक किया जाएगा. लोगों को परिवार नियोजन के फायदे के बारे में बताया जाएगा. उन्हें समझाया जाएगा कि छोटा परिवार रखने से क्या फायदा होता है. इसके अलावा जिले में संचार अभियान भी चल रहा है जो 31 मार्च तक चलेगा. उसके जरिए भी लोगों को परिवार नियोजन की जानकारी दी जा रही है.

सभी सरकारी अस्पतालों से दो-दो ई-रिक्शा रोज खुलेगी:
मौके पर मौजूद डीपीएम प्रभात कुमार राजू ने बताया कि अगले 10 दिनों तक जिले के सभी सरकारी अस्पतालों से रोज दो-दो ई रिक्शा खुलेगी, जिसमें एक ऑडियो लगा रहेगा. ऑडियो से गांव- गांव में परिवार नियोजन को लेकर प्रचार होगा| ई-रिक्शा गांव में गया या नहीं इसके सत्यापन के लिए चालक को आंगनबाड़ी केंद्र जाना होगा. जहां सेविका और सहायिका चालक के पास मौजूद रजिस्टर में अपना हस्ताक्षर करेंगी. इससे यह पता रहेगा कि रिक्शा उस गांव में प्रचार के लिए गई या नहीं.

आशा कार्यकर्ताओं से सिविल सर्जन ने ली जानकारी:
ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाने के बाद सिविल सर्जन ने मौके पर मौजूद आशा कार्यकर्ताओं से परिवार नियोजन को लेकर जानकारी ली. उनसे पूछा कि आप क्षेत्र में किस तरह से जा रहे हैं. लोगों को किस तरीके से समझा रहे हैं. इस दौरान सिविल सर्जन ने आशा कार्यकर्ताओं को परिवार नियोजन को लेकर कुछ सलाह भी दी. आशा कार्यकर्ताओं को लोगों से परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधन का उपयोग करने के लिए जागरूक करने के लिए भी कहा गया.

अस्पतालों में स्टॉल लगाकर दंपति की काउंसलिंग की गई:
वहीं जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में स्टॉल भी लगाया गया था. स्टॉल पर क्षेत्र के आने वाले दंपतियों को परिवार नियोजन के बारे में समझाया जा रहा था. इस दौरान दंपतियों को बताया जा रहा था कि एक से दूसरे के बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखना जरूरी है. इससे ना सिर्फ माता स्वस्थ रहती है, बल्कि बच्चे भी स्वस्थ पैदा होते हैं.
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार देने की कवायद

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• पूरक पोषाहार की स्टॉक प्राप्ति के बाद सैंपलों की होगी जांच

• मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में पोषाहार जांच के निर्देश

पटना-

पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पूरक पोषाहार की गुणवत्ता का अब पूरा ध्यान रखा जायेगा. इसे लेकर महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. पूरक पोषाहार संबंधित निर्देशों में कहा गया है कि अब लाभार्थी को दिये जाने वाले पूरक पोषाहार खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दिये गये मानदंडों को पूरा करते हों जिसके तहत गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार देना सुनिश्चित किया जाना है.

निर्देश के मुताबिक लाभुक को दिये जाने वाले टेक-होम राशन को पहले भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) या राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला से जांच किया जाना अनिवार्य है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेवा से जुड़े अधिकारियों जैसे सीडीपीओ व सुपरवाइजर को आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूरक पोषाहार की स्टॉक की प्राप्ति के बाद सैंपलों की जांच जरूर करानी है. गर्म पके हुए भोजन दिये जाने की स्थिति में यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि खाना उचित तरीके से तैयार किया गया हो. इसमें रसोई घर की सही तरीके से सफाई व साफ पेयजल का ध्यान रखना भी शामिल है. राज्यों में निर्देश दिया गया है कि पूरक पोषहार की आपूर्ति श्रृंखला की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाये तथा किसी प्रकार की आपूर्ति में बाधा नहीं हो. पंजीकरण व भंडारण प्रक्रियाओं के तहत पोषाहार संबंधी मानकों का पालन हो रहा है,इसे भी सुनिश्चित करना है.

जिला स्तर पर डीएम होंगे नोडल अधिकारी:

पोषण की स्थिति का जायजा लेने व नियमकों का पालन करवाने के लिए जिला स्तर पर डीएम नोडल अधिकारी होंगे. जिलाधिकारी अनुश्रवण व निगरानी के लिए तैयार जिला पोषण समिति के अध्यक्ष होंगे. जिला पोषण समिति द्वारा नियुक्त किये गये पोषण विशेषज्ञ प्रमाणित होंगे. आइसीडीएस व पोषण कार्यक्रमों के संचालन के लिए समेकित बाल विकास पदाधिकारी डीएम के निगरानी में काम करेंगे. सीडीपीओ जिला स्तर पर पोषण की मदद से लाभार्थियों विशेष कर कुपोषित बच्चों की सेहत में हुए परिवर्तन की जांच करेंगे. वहीं उनकी जिम्मेदारी समय समय पर पूरक पोषाहार के सैंपल की जांच करवाने और खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता से जुड़े मानकों का पालन करवाने की भी होगी. ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता व पोषण दिवस व सामुदायिक स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर लाभुकों व क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करेंगे. प्रखंड स्तर पर ब्लॉक कंनवरजेंस एक्शन प्लान बनाने व इसके क्रियान्वयन का काम भी सीडीपीओ की जिम्मेदारियों में शामिल है.

राज्यों को यह निर्देश भी दिया गया है कि 31 जनवरी तक अतिकुपोषित बच्चों की सूची बनाकर उन्हे उचित उपचार दिया जाए और सभी ऐसे बचहोन को आयुष केंद्रों से जोड़ा जाए जहां उनका सर्वांगी विकास हो सके।

माँ के साथ साथ पोषण पंचायतों को भी यह जिम्मेवारी सौंपी गई है की वह जन आंदोलन के रूप में कुपोषण पर जागरूकता बढ़ाएँ| इसमें ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण कमिटी की अभी भूमिका रहेगी| समय समय पर कुपोषण पर भी ग्रामों में सर्वे होगा ताकि कुपोषण की स्थिति के बारे में पता लग सके|

इन बिंदुओं पर विशेष रूप से रखना है ध्यान:

• सीडीपीओ स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल आॅफिसर के साथ संयुक्त रूप से क्षेत्र भ्रमण करेंगे और मासिक बैठक कर अतिकुपोषित बच्चों के संबंध में जांच पड़ताल कर पोषण में सुधार लाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेंगे. मासिक बैठक की रिपोर्ट जिला स्तर पर साझा करनी है.

• आंगनबाड़ी केंद्रों के भ्रमण के साथ सीडीपीओ गर्भवती महिलाओं, नवजात व 6 माह के उम्र वाले बच्चों का गृह भ्रमण कर उसके पोषण के स्तर की विस्तृत जानकारी लेते हुए पोषण संबंधी आवश्यक परामर्श देना है. साथ ही आंगनबाड़ी सेविकाओं को नियमित गृह भ्रमण के प्रोत्साहित करना व इसके लिए प्रशिक्षण भी देना है

प्रसूति कक्ष और ऑपरेशन थियेटर की गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं के आकलन के लिए लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने किया सदर अस्पताल का दौरा

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– केयर इंडिया कि स्टेट टीम के डॉ. प्रवीर के नेतृत्व में असेस्मेंट टीम ने अधिकारियों के साथ की बैठक
– सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराने को ले लक्ष्य कार्यक्रम के तहत देश के अभी अस्पतालों में किया जाता है गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का आकलन

मुंगेर-

सदर हॉस्पिटल मुंगेर स्थित नवनिर्मित ऑपरेशन थियेटर रूम और लेबर रूम में मौजूद गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का लक्ष्य कार्यक्रम के तहत केयर इंडिया स्टेट टीम के असेस्मेंट टीम ने बुधवार को दौरा किया। केयर इंडिया स्टेट टीम से आए डॉ. प्रवीर कुमार के नेतृत्व में असेस्मेंट टीम ने ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम में चल रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं को ले सदर हॉस्पिटल मुंगेर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. रामप्रीत सिंह, हॉस्पिटल मैनेजर तौसीफ हसनैन, रिमोट पेशेंट मॉनेटरिंग (आरपीएम) के इंचार्ज रूप नारायण, लेबर रूम इंचार्ज नीतू कुमारी, डीटीएल केयर डॉ. अजय आर्य, डीटीओएफ डॉ. नीलू सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।

केयर इंडिया की डीटीओएफ डॉ. नीलू ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में दी जा रही सेवाओं में गुणवत्ता सुधार को ले 18 मार्च 2018 में लक्ष्य कार्यक्रम शुरू की गई। इसी कार्यक्रम के तहत डॉ. प्रवीर कुमार के नेतृत्व में केयर इंडिया की स्टेट लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने बुधवार को सदर हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम का निरीक्षण करने के साथ यहां दी जा रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का आकलन किया। इसके साथ हीं लक्ष्य असेस्मेंट टीम ने इस विषय पर हॉस्पिटल डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. रामप्रीत सिंह, हॉस्पिटल मैनेजर तौसीफ हसनैन, लेबर रूम इंचार्ज नीतू कुमारी सहित कई मेडिकल स्टाफ और अधिकारियों के साथ बातचीत की।

क्या है लक्ष्य कार्यक्रम ?
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18 मार्च 2018 में देश के सभी अस्पतालों में लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर रूम में दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता सुधार को ले लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के तहत प्रसूति के दौरान महत्वपूर्ण देखभाल के लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के स्तर पर प्रसूति सम्बंधी गहन देखभाल के लिए इंसेंटिव केयर यूनिट(आईसीयू) और सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटलों में प्रसूती देखभाल के लिए उच्य निर्भरता इकाइयों( एचडीयू) संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ हीं रेफरल हॉस्पिटल में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी यह सेवा क्रियान्वित हैं ।

लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर की गुणवत्ता सुधार से मातृ और शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी :
उन्होंने बताया कि सभी हॉस्पिटल के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में दी जा रही सुविधाओं की कि गुणवत्ता में सुधार के बाद देश में मातृ और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आएगी और मरीजों का सही इलाज सही समय पर किया जा सकेगा।

एनक्यूएएस के जरिये किया जाता है गुणवत्ता परक सुधार का आंकलन :
उन्होंने बताया कि सभी हॉस्पिटलों के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर रूम की के गुणवत्तापरक सुधार का आकलन आंकलन राष्ट्रीय गुणवत्ता अस्वाशन मानक (एनक्यूएएस) के जरिये किया जाता है। उन्होंने बताया कि एन क्यूएएस पर 70 प्रतिशत अंक पाने वाली प्रत्येक सुविधा को लक्ष्य प्रमाणित सुविधा का प्रमाणपत्र दिया जाता है। एनक्यू एएस के अंकों के अनुसार लक्ष्य प्रमाणित सुविधाओं का वर्गीकरण किया जाता है। इसके अनुसार 90%, 80% और 70% अंक हासिल करने वाली सुविधाओं को इसी के अनुसार प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर बैज प्रदान किए जाते हैं।

जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य प्राप्त करने को ले लोगों को करें जागरूक : जिलाधिकारी

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– परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने को ले निकाली गई जागरुकता रथ को जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
– जिले के सभी सात प्रखण्डों के लिए दो- दो जागरुकता रथ को समाहरणालय परिसर से डीएम ने किया रवाना

लखीसराय –

राज्य सरकार कि महत्वाकांक्षी परिवार नियोजन योजना की सफलता को ले राज्य भर में चलाया जा रहा मिशन परिवार विकास एवं संचार अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बुधवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिला समाहरणालय परिसर से जिले के सभी सात प्रखण्डों के लिए दो- दो जागरुकता रथ को डीएम ने हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए लोगों को जागरूक किया जाना बहुत ही आवश्यक है। इसके लिए केयर इंडिया के सहयोग से जिले के सभी सात प्रखण्डों में परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से दो- दो जागरूकता रथ निकाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनएचएफएस 5 के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले का कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टीलिटी रेट ,टीएफआर) 3.0 है। लेकिन इस रेट को 2.0 से नीचे लाने के लिए परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करना अति आवश्यक है।
सभी सात प्रखण्डों के लिए दो- दो जागरूकता रथ निकाले जा रहे-
लखीसराय जिले के डीटीएल केयर नावेद उर रहमान ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन योजना को सफल बनाने को ले 14 से 31 जनवरी तक मिशन परिवार विकास अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिले के सभी लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिले के सभी सात प्रखण्डों के लिए दो- दो जागरूरुकता रथ निकाले जा रहे है। उन्होंने बताया कि सभी सात प्रखण्डों के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के पास बुधवार और शुक्रवार को आरोग्य दिवस के दिन जागरूरुक ता रथ लगाकर माइक के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय आशा और एएनएम जागरूरुकता रथ के पास मौजूद रहकर रथ के पास आने वाले लोगों को परिवार नियोजन के साधनों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगी देगी ताकि लोग परिवार नियोजन के साधनों का निर्भीकता पूर्वक इस्तेमाल कर सकें सके।

मिशन परिवार विकास एवं संचार अभियान के तहत 31 मार्च तक जिले भर में चलाया जाएगा जागरू रुकता रथ : केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग कोऑर्डिनेटर (एफपीसी) अनुराग गुंजन ने बताया कि 20 जनवरी से 31 मार्च तक लोगों को फैमिली प्लानिंग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिले के सभी प्रखण्डों के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सप्ताह में दो दिन बुधवार और शुक्रवार को जागरूकता जागरुकता रथ के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।

एक से दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल जरूरी

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पीरपैंती-

प्रखंड क्षेत्र के 1 बच्चे वाले दंपति की बुधवार को काउंसलिंग की गई. इस मौके पर एएनएम सूरज मुर्मू ने इन दंपतियों को एक से दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने की सलाह दी. साथ ही उसके फायदे गिनाए. आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 339 पर इस दौरान 1 बच्चे वाले कई दंपति जुटे थे. इस मौके पर केयर इंडिया के डॉक्टर सुपर्णा टाट, जितेंद्र कुमार और कोमल कुमारी भी मौजूद थीं.

ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता जरूरी:

एएनएम ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस तरह की जानकारी देना बहुत जरूरी हो जाता है. अगर इन्हें जागरूक नहीं किया जाएगा तो इनके बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल नहीं होगा. फिर तमाम तरह की परेशानियां होंगी. इसलिए हमलोगों ने अभी संचार अभियान के तहत आरोग्य दिवस पर आंगनवाड़ी केंद्र जाकर एक बच्चे वाले दंपति को दूसरे बच्चे के लिए 3 साल इंतजार करने को कह रही हूं.

वहीं एएनएम कने बताया कि हमलोगों में एक बच्चे वाले दंपतियों को यह समझाया अगर आप दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखेंगे तो बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ रहेगा. मां एनीमिया से पीड़ित नहीं होगी. साथ ही बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी, जिससे वह भविष्य में तमाम तरह की बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहेगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.

• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.

• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .

• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.

• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.

• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.

• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें

• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों

• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें

• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

स्वस्थ माता और बच्चे के लिए तीन साल का अंतराल जरूरी

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-एक बच्चे वाले दंपति की काउंसलिंग कर एएनएम ने दी यह जानकारी
-सबौर के गोपालपुर में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 8 पर हुआ कार्यक्रम

भागलपुर-

संचार अभियान के तहत जिले में तमाम तरह के कार्यक्रम चल रहे हैं. बुधवार को जिले में जहां माइकिंग कर परिवार नियोजन के बारे में लोगों को जानकारी दी गई, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक बच्चे वाले दंपति की काउंसलिंग की गई. इस दौरान एएनएम ने दंपति को एक से दूसरे बच्चे के बीच कितने साल का अंतराल होना चाहिए, इसकी जानकारी दी. सबौर प्रखंड के गोपालपुर में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 8 पर एएनएम रंजू कुमारी और क्रांति कुमारी ने एक बच्चे वाले कई दंपतियों को दूसरे बच्चे के लिए 3 साल का इंतजार करने को कहा. दंपति को समझाया गया कि अगर दो बच्चों के बीच 3 साल का अंतराल रहेगा तो इससे जच्चा और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहेंगे.

ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता जरूरी:
एएनएम रंजू कुमारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस तरह की जानकारी देना बहुत जरूरी हो जाता है. अगर इन्हें जागरूक नहीं किया जाएगा तो इनके बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल नहीं होगा. फिर तमाम तरह की परेशानियां होंगी. इसलिए हमलोगों ने अभी संचार अभियान के तहत आरोग्य दिवस पर आंगनवाड़ी केंद्र जाकर एक बच्चे वाले दंपति को दूसरे बच्चे के लिए 3 साल इंतजार करने को कह रही हूं.

वहीं एएनएम क्रांति कुमारी ने बताया कि हमलोगों में एक बच्चे वाले दंपतियों को यह समझाया अगर आप दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखेंगे तो बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ रहेगा. मां एनीमिया से पीड़ित नहीं होगी. साथ ही बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी, जिससे वह भविष्य में तमाम तरह की बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहेगा.

11 बच्चे और दो गर्भवती महिलाओं को लगे टीके: इस दौरान आंगनवाड़ी केंद्र संख्या आठ पर 11 बच्चों और 2 महिलाओं को टीका भी लगाया गया. मालूम हो कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को हर बुधवार और शुक्रवार को टीका लगाया जाता है. इससे बच्चे स्वस्थ होते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे वह कई तरह की बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है. मौके पर केयर इंडिया के आलोक कुमार, मुकेश कुमार, अनंत अंशु, शिवम, पूजा कुमारी, सीमा कुमारी व सेविका प्रतिमा कुमारी मौजूद थी.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

तीसरे दिन बिहार में 301 सत्र स्थलों पर 14013 लोगों को लगे टीके

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• अब दवाई के साथ कड़ाई भी

• सभी के लिए सुरक्षित और असरदार है टीका

पटना-
राज्य के 301 सत्र स्थलों पर मंगलवार को 14013 कोरोना योद्धाओं को टीके लगाए गए। टीकाकरण के पहले दिन 18122 को एवं दूसरे दिन 14745 लोगों को टीके लगाए गए थे. सप्ताह में 4 दिन ही लोगों को टीके लगेंगे. अब अगला टीकाकरण गुरूवार को होगा.
प्रत्येक टीकाकरण केंद्र पर लाभार्थी के लिए समुचित व्यवस्था की गयी है. टीकाकरण के बाद टीकाकृत लाभार्थी की देखरेख भी की जा रही है. इसके लिए प्रत्येक सत्र स्थल पर 3 कक्ष बनाये गये हैं, जिसमें पहला कक्ष प्रतीक्षालय, दूसरा टीकाकरण कक्ष व तीसरा अवलोकन कक्ष बनाया गया है. अवलोकन कक्ष में टीकाकृत लाभार्थी को 30 मिनट तक स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में रखा जा रहा है.

दवाई भी और कड़ाई भी:

जिन कोरोना योद्धाओं को कोरोना टीका का पहला डोज लगाया गया है, उन्हें 28 वें दिन दूसरा डोज दिया जाएगा. दूसरे डोज के 14 दिन बाद बाद ही कोरोना के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. इसलिए टीके के बाद भी सावधानी बरतनी जरुरी है. सावधानी के तौर पर मास्क का इस्तेमाल, शारीरिक दूरी एवं हाथों की सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने भी टीकाकरण लॉन्च के दौरान इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि दवाई भी और कड़ाई भी.

कोविड-19 वैक्सीन सभी के लिए सुरक्षित:

कोविड टीका सभी प्रमाणित वैक्सीन पूरी प्रक्रिया के गुजरने का बाद ही स्वीकृत की गयी है और पूर्णतया सुरक्षित है। चरणवार तरीके से इसे सभी को उपलब्ध कराने की सरकार की योजना है । टीकाकरण के पश्चात लाभार्थी को किसी प्रकार की परेशानी के प्रबंधन के लिए सत्र स्थल पर एनाफलीसिस कीट एवं एईएफआई कीट की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है तथा इसके लिए संबंध में टीकाकर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है