18 केंद्रों पर आज फ्रंटलाइन वर्करों को लगेगा कोरोना का टीका

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-कोरोना टीकाकरण का जिले में चल रहा है दूसरा चरण
-टीकाकरण के दौरान नहीं हो गड़बड़ी इसे लेकर रखी जा रही है नजर

भागलपुर, 16 फरवरी
जिले के 18 केंद्रों पर बुधवार को फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना का टीका लगेगा. सभी केंद्रों पर पूरी तैयारी रखने को कहा गया है. साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को भी इस दौरान केंद्रों पर समय से पहुंचने के लिए कहा गया है. लाभुकों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसका खास ख्याल रखने को कहा गया है. जिले में कोरोना टीकाकरण का चल रहा है दूसरा चरण. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि बुधवार को फ्रंटलाइन वर्करों के टीकाकरण के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो, इसका विशेष ख्याल रखने को कहा गया है. स्वास्थ्यकर्मी पूरी सतर्कता के साथ अपना काम करेंगे.

आधार कार्ड और विभाग का पहचान पत्र जरूर लाएं:
डॉ चौधरी ने बताया कि टीका लेने वाले लाभुक अपने साथ आधार कार्ड और विभाग का पहचान पत्र जरूर लाएं, ताकि कर्मी उसे मिलाकर टीका दे सकें. इससे किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी. इसे लेकर केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों को भी दिशा निर्देश जारी किया गया है.

दूसरा डोज लेने में नहीं करें लापरवाही: डॉ चौधरी ने बताया कि जिन लोगों ने कोरोना टीका का पहला डोज ले लिया है, वे लोग दूसरी डोज लेने में लापरवाही नहीं करें. जब तक आप कोरोना टीका का दूसरा डोज नहीं लेंगे तब तक आपकी टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी और आप कोरोना से सुरक्षित नहीं होंगे. इसलिए टीका का दूसरा डोज लेने जरूर आएं. अगर आप नहीं लेंगे तो पहला डोज भी बेकार हो जाएगा.

केंद्रों पर कोरोना की गाइडलाइन का किया जा रहा पालन: डॉ चौधरी ने बताया कि टीकाकरण के दौरान सभी केंद्रों पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. सभी स्वास्थ्यकर्मी मास्क पहने रहते हैं और सामाजिक दूरी का पालन करते हैं. साथ ही लाभुकों को भी ऐसा करने के लिए कहा जाता है.

कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित, नहीं करें संकोच: डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है. इसे लेने में किसी तरह का संकोच नहीं करें. टीका लेने के बाद 30 मिनट तक स्वास्थ्यकर्मी निगरानी करते हैं. इसके बाद भी अगर कोई समस्या आती है तो स्वास्थ्य विभाग उसे लेकर चौकस है. इसलिए टीका लेने के लिए जरूर आएं. इससे न सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे, बल्कि दूसरे लोग भी कोरोना से बचेंगे रहेंगे

स्वास्थ्यकर्मी रामपंत ठाकुर ने ली कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी डोज, कहा – पूरी तरह स्वस्थ हूँ

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– बोले स्वास्थ्यकर्मी – पहला डोज लेने के बाद नहीं है किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा, इसलिए उत्साह के साथ 28वें दिन दूसरा डोज भी लिया
– कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए पूरी डोज लेना जरूरी, इसलिए लें वैक्सीन की पूरी डोज

खगड़िया, 16 फरवरी|
जिले में शुरू हुए वैक्सीनेशन अभियान के तहत वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में भी स्वास्थ्य कर्मियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है| स्वास्थ्य कर्मी पूरे उत्साह के साथ वैक्सीन की दूसरी डोज ले भी रहे हैं। इसी कड़ी में खगड़िया सदर पीएचसी के स्वास्थ्यकर्मी रामपंत ठाकुर ने नियमानुसार वैक्सीन की पहली डोज़ लेने बाद 28 वें दिन वैक्सीन की दूसरी डोज ली। उन्होंने कहा कि मैं दूसरा डोज लेने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ हूँ। मुझे पहला डोज लेने के आज 28 दिन बीत गये। किन्तु, किसी प्रकार की कोई शारीरिक पीड़ा नहीं हुई। जो इस बात का जीता-जागता सबूत है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इससे किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं है। इसलिए, मैं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से भी अपील करता हूँ कि निर्भीक होकर वैक्सीन की दूसरी डोज भी लें।

– 16 जनवरी को ली थी वैक्सीन की पहली डोज :-
रामपंत ठाकुर ने बताया कि मैं वैक्सीनेशन अभियान के शुभारंभ के दिन यानी 16 जनवरी को वैक्सीन की का पहली ला डोज ली लिया थी था। इसके बाद मैं पूरी तरह स्वस्थ रहा। इसलिए, मैं अन्य सहकर्मियों समेत सभी लोगों से अपील करता हूँ कि वैक्सीन से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि, कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए उत्साह के साथ लेने की जरूरत है। क्योंकि, वैक्सीन से मेरे शरीर को किसी प्रकार का नकारात्मक नाकारात्मक प्रभाव नहीं है। बल्कि, कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए लाभदायक है। इसलिए, सभी लोगों को उत्साह के साथ वैक्सीन की का पूरी रा डोज लेनी ना चाहिए है।

– अफवाहों से रहें दूर, निर्भीक होकर कराएं वैक्सीनेशन :-
वहीं, रामपंत ठाकुर ने बताया कि वैक्सीन की पूरी डोज लेने के बाद भी जब मुझे किसी भी प्रकार की का शारीरिक परेशानी का सामना नहीं पड़ा तो मुझे इस बात एहसास हुआ कि इससे पूर्व जो भी वैक्सीन को लेकर समाज में नकारात्मक नाकारात्मक चर्चा चल रही थी,। वह महज एक अफवाह थी था। सच तो यह है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, वैक्सीन से किसी को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि, उत्साह के साथ वैक्सीनेशन कराना चाहिए।

– सामान्य परेशानी में घबराएं नहीं :-
वहीं, रामपंत ठाकुर ने यह भी कहा कि वैक्सीन लेने के बाद थोड़ा बहुत सामान्य परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि, हल्का हल्की बुखार, वैक्सीन लेने वाले बाँह में सूजन, दर्द समेत अन्य सामान्य परेशानी हो सकती ता है। किन्तु, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, यह सामान्य परेशानी है। जो किसी वैक्सीन से हो सकती ता है। यह परेशानी अन्य वैक्सीन लेने के बाद जिस तरह एक-दो दिन में स्वतः दूर हो जाती थी। उसी तरह कोविड-19 की के वैक्सीन की का भी सामान्य परेशानी स्वतः दूर हो जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिसेनेटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

टीबी अब लाइलाज नहीं, पर पूरी सतर्कता और सावधानी जरूरी

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– लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं जाँच, सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है निःशुल्क जाँच और इलाज की सुविधा
– सरकारी अस्पतालों में सही समय पर जांच और इलाज के बाद टीबी मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि

लखीसराय, 16 फरवरी|
टीबी एक संक्रामक बीमारी है लेकिन अब यह लाइलाज नहीं है। इससे बचाव के लिए पूरी सतर्कता और सावधानी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सही समय पर यानी शुरुआती दौर में ही लक्षण दिखने के बाद इसकी सही जांच और समुचित इलाज कराना भी जरूरी है। प्रारम्भिक दिनों में ही इस बीमारी का सही इलाज शुरू कराने से बीमारी से स्थाई निजात तो मिलती ही है साथ ही आप आसानी से इस बीमारी को मात भी दे सकते हैं। इसके लिए टीबी के शुरुआती लक्षण दिखते ही तत्काल जाँच कराने के साथ ही चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि लोग शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच कराएं और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद तत्काल चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराएं। इस दौरान इस बात का भी विशेष ख्याल रखें कि बीमारी के ठीक होने तक दवाई का क्रम छूटने न पाए।

टीबी के लक्षण दिखते ही तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में कराएं जाँच :-
जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद कुमार ने बताया कि टीबी के का लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच करानी ना चाहिए और जाँच के पश्चात चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इलाज कराना चाहिए| ताकि समय रहते आसानी के साथ इस बीमारी को मात दी जा सके और अन्य लोगों को भी सुरक्षित रखा जा सके। बीमारी से के स्थाई निजात के लिए शुरूआती शुरुआती दौर में ही जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है। जिले के सभी सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषक आहार लेने के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है।

बीमारी से स्थाई निजात के लिए सही समय और सही जांच और समुचित इलाज जरूरी :-
टीबी से स्थाई निजात पाने को सही समय पर सही जांच और समुचित इलाज जरूरी है। सभी सरकारी अस्पतालों में सही जांच के साथ छह महीने तक निःशुल्क इलाज के साथ ही दवाई की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही टीबी मरीज को आवश्यक पोषक तत्व की पूर्ति के लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन करने के लिए प्रति महीने पांच सौ रुरूपये की दर से पूरी अवधि तक उचित खान-पान के लिए सहायता राशि दी जाती है।

– टीबी से बचाव के उपाय : –
1. लगातार दो हफ्तों से ज्यादा खांसी रहने पर बलगम की जांच कराएं और जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीबी की कि दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– हमेशा मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को रुमाल या पेपर नैपकिन से कवर करें।
– टीबी मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद करने के बाद डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकने से परहेज करें।
– टीबी मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में ही रहें ।
– हमेशा पौष्टिक खाना खाएं व योग और व्यायाम करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़भाड़ र वाली जगहों और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:—-
– भूख न लगना या कम लगना तथा वजन का अचानक से कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार का रहना।
– खांसी , खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

कोरोना काल में इन मानकों का पालन कर कोविड-19 के संक्रमण से रहें दूर : –

– एक दूसरे से कम से कम छह फीट की शारीरिक – दूरी के नियम का हमेशा करें पालन ।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल ।
– एक निश्चित लगातार पर साबून या हैंड सैनिटाइजर से करें अपने हाथों को साफ ।
– घर से बाहर निकलने पर हमेशा करें मास्क का उपयोग।
– ऑख, नाक, मुँह को छूने से बचें। कुछ भी छूने से पहले और बाद में हाथ को साफ या सैनिटाइज करें।
– एक- दूसरे से बातचीत के दौरान सतर्कता का रखें विशेष ख्याल ।

आयुष्मान भारत योजना के 6.33 लाख लाभुकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाने को लेकर आज से आयुष्मान पखवाड़ा

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– 03 मार्च तक जिले के सभी 101 पंचायतों में कार्यपालक सहायक के द्वारा लाभुकों का बनाया जाएगा गोल्डन ई. कार्ड
– जिले भर में कुल 7, 77,239 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाने के निर्धारित लक्ष्य में से 1,44,061 लाभुकों का बनाया जा चुका है गोल्डन ई. कार्ड

मुंगेर, 16 फरवरी | आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत जिले के कुल 7,77,239 लाभुकों के निर्धारित लक्ष्य में से शेष बचे 6,33,178 लाभुकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाने के लिए 17 फरवरी से आयुष्मान पखवाड़ा की शुरुआत हो रही है। आगामी 3 मार्च तक चलनेवाले आयुष्मान पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी 101 पंचायतों में शिविर लगाकर कार्यपालक सहायक के द्वारा शेष बचे सभी लाभकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाया जाएगा। मालूम हो कि इससे पहले आयुष्मान पखवाड़ा आयोजित कर जिले के कुल 7,77,239 लाभुकों के निर्धारित लक्ष्य में से 1,44,061 लाभुकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाया जा चुका है।
सभी 101 पंचायतों में शेष बचे सभी लाभुकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाया जाएगा-
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना मुंगेर की जिला कार्यक्रम समन्वयक ज्योति कुमारी ने बताया कि आयुष्मान पखवाड़ा के दौरान पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर जिले के सभी 101 पंचायतों में कार्यपालक सहायक के द्वारा शेष बचे सभी लाभुकों का गोल्डन ई. कार्ड बनाया जाएगा। प्रखंड स्तर पर गोल्डन कार्ड बनाने और वितरण की देखरेख प्रखंड स्तर पर कार्यरत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक, जीविका के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, प्रखंड विकास पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि करेंगे। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर लाभुकों को चिह्नित करने के लिए प्रखंड स्तर के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, जीविका के अधिकारी और कर्मचारी को लाभुकों की सूची सौंप दी गई है। इस कार्य में आईसीडीएस की आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका से भी लाभुकों को चिह्नित करते हुए गोल्डन कार्ड बनवाने और वितरण करने में सहयोग की अपील की गई है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जिले के सभी सरकारी और दो सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध है इलाज की कि सुविधा :
जिला कार्यक्रम समन्वयक ज्योति कुमारी ने बताया कि इस योजना के तहत वर्ष सन 2011 के आर्थिक- सामाजिक जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति- जाति परिवार, किसी परिवार के दिव्यांग सदस्य जिसका देखभाल करने वाला कोई नहीं हो, जिसके घरों की कि दीवारें कच्ची हो, जो भूमिहीन परिवार हो या फिर ऐसा परिवार जिसमें कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं हो ऐसे सभी परिवार के लिए प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की इलाज की कि सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और दो सूचीबद्ध निजी अस्पताल में उपलब्ध है। उन्होंने उंन्होने बताया कि जिले सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल और सदर अस्पताल के साथ ही मुंगेर के लोहा पट्टी स्थित जीवन अवतार हॉस्पिटल होस्पिटल और कौड़ा मैदान स्थित नवजात शिशु कल्याण केंद्र (सिटी क्लीनिक) में सर्जरी कि सुविधा उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र से किया जाएगा लाभुक को चिह्नित चिन्हित :
उन्होंने उंन्होने बताया कि पंचायत स्तर पर प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से सम्बंधित भेजे गए पत्र तथा पुराने राशन कार्ड जिस पर 24 डिजिट का एक स्पेशल नंबर छपा हो के आधार पर लाभुक को चिह्नित किया जाएगा।

आयुष्मान भारत गोल्डन ई. कार्ड बनाने को ले लाभकों को किया जा रहा है जागरूक :
उन्होंने उंन्होने बताया कि आयुष्मान भारत गोल्डन ई.कार्ड बनाने को लेकर लाभुकों को जागरूक करने के लिए ई. रिक्शा जागरूकता रथ के माध्यम से माइकिंग की किया जा रही हा है। यह जागरूरुकता रथ जिले के सभी 101 पंचायतों में घूम-घूमकर माइकिंग के जरिये गोल्डन कार्ड बनाने को ले लोगों को जागरूक करेगी ताकि गोल्डन कार्ड बनाने के लक्ष्य को शत- प्रतिशत प्राप्त किया जा सके।

टीबी को मात देकर अब लोगों को इसके प्रति कर रही जागरूक

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-नारायणपुर प्रखंड के बलहा गांव की अनु देवी की कहानी
-आशा कार्यकर्ता के सहयोग से इलाज कराने पहुंची थी नारायणपुर अस्पताल

भागलपुर, 16 फरवरी

नारायणपुर प्रखंड के बलहा गांव की अनु देवी को एक साल पहले खांसी में खून आने लगा था. वह काफी डर गई थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें. लोगों को बताने से भी डर रही थी, लेकिन जब यह सिलसिला एक महीने तक चला, तब उसे लगा कि इसमें किसी से जरूर सलाह लेनी चाहिए. आखिरकार वह गांव की आशा कार्यकर्ता महिला देवी के पास गई. आशा उसे जांच के लिए नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गई, जहां जांच में उसे टीबी होने की पुष्टि हुई. इसके बाद उसका डर और बढ़ गया, लेकिन अस्पताल के डॉक्टर ने उसे बताया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है. इसका इलाज संभव है. इसके बाद उसका इलाज शुरू हुआ. छह महीने तक दवा का सेवन करने के बाद वह ठीक हो गई. अब वह पूरी तरह से स्वस्थ भी है.
कोई भी बीमारी हो तो डरना नहीं चाहिए-
अनु देवी का कहना है कि कोई भी बीमारी हो तो डरना नहीं चाहिए, बल्कि जांच कराकर उसका इलाज शुरू कर देना चाहिए. टीबी को लेकर तो बिल्कुल भी नहीं. मुझे ही देखिए, अगर चुपचाप रहती तो पता नहीं अभी क्या हो जाता. मेरा स्वास्थ्य कैसा रहता. अनु देवी अब न स्वस्थ हो गई है, बल्कि लोगों को भी इसके प्रति जागरूक कर रही हैं. अभी तक दो टीबी मरीजों में वह भय खत्म कर चुकी है और उसे इलाज के लिए प्रेरित भी किया.

लोगों ने पहले बना ली थी दूरी अब सभी कुछ हो गया सामान्य:
अनु देवी कहती हैं कि जब मुझे टीबी होने की पुष्टि हुई तो समाज के लोगों ने दूरी बना ली. आस-पड़ोस के लोग बातचीत करने से संकोच करते थे, लेकिन जब मैं ठीक हो गई तो अब लोग साथ आ रहे हैं. पहले वाली स्थिति हो गई है. मेरे साथ भेदभाव खत्म हो गया है और लोग पहले जैसा व्यवहार करते हैं.

जितना जल्दी शुरू करवाएंगे इलाज उतना जल्द हो जाएंगे ठीक:
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं कि अगर टीबी होने के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल अस्पताल आकर जांच कराएं. अगर टीबी हो जाने की पुष्टि हो जाती है तो अपना इलाज शुरू करवा लें. जितना जल्द इलाज करवाएंगे, उतना जल्द स्वस्थ हो जाएंगे. इसलिए इलाज करवाने में देरी नहीं करें.

टीबी का इलाज बिल्कुल मुफ्त है: डॉ. विद्यार्थी कहते हैं कि टीबी के इलाज की व्यवस्था मुफ्त है. इसलिए संकोच नहीं करें. आपको आर्थिक परेशानी भी है तो सरकारी अस्पताल में संपर्क करें. यहां पर न सिर्फ आप का इलाज मुफ्त में होगा, बल्कि ₹500 रुपया भी मिलेगा. इसलिए आर्थिक चिंता किए बगैर इलाज शुरू करवाएं.

कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन को सुरक्षित बताया , लोगों से की वैक्सीन लगवाने की अपील

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– जीएनएम स्कूल मुंगेर में 10 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया टीका का दूसरा डोज
– स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीनेशन अभियान के पहले दिन 16 जनवरी को लिया था टीका का पहला डोज

मुंगेर-

सोमवार को मुंगेर के हाज़ी सुजान स्थित कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल में कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित बताते हुए सभी लोगों से अपनी बारी आने पर कोरोना का टीका अवश्य लगवाने की अपील की। सदर अस्पताल मुंगेर में काम करने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रौशन, जीएनएम अनीता, जीएनएम सरोजनी कुमारी, जीएनएम रेखा कुमारी, जीएनएम मधु प्रिया कुमारी, जीएनएम अंकिता कुमारी, जीएनएम नीतू कुमारी, जीएनएम रूपम कुमारी, जीएनएम संगीता कुमारी एवं नरेंद्र कुमार सहित सभी 10 लोगों ने 16 जनवरी को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लेने के 28 दिनों के बाद सोमवार को वैक्सीन का दूसरा डोज लिया।
वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित बताया –
कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद सदर अस्पताल में जीएनएम मधुप्रिया ने बताया कि मैंने कोरोना वैक्सीनेशन महाअभियान के पहले दिन 16 जनवरी को यहीं पर कोरोना टीका का पहला डोज लिया था| सोमवार को वैक्सीन लगवाने के बाद 28 दिन पूरा हो जाने पर वैक्सीन का दूसरा डोज लेने आई हूँ। वैक्सीन का दोनों डोज लेने के बाद मैं अपने अनुभवों के आधार पर कहना चाहती हूं कि यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। इसको लेकर किसी को भी घबड़ाने कि जरूरत नहीं है। दूसरा डोज के लेने के बाद सदर अस्पताल में जीएनएम रेखा कुमारी ने बताया कि पहले और दूसरे डोज के वैक्सीनेशन के बीच 28 दिनों का अंतराल पूरा हो जाने के बाद मैने वैक्सीन का दूसरा डोज ले लिया है। वैक्सीन का पहला और दूसरा डोज लेने के बाद मैंने कोई परेशानी महसूस नहीं की। अपने अनुभवों के आधार पर लोगों से मैं यही अपील करना चाहती हूं कि आप लोग वैक्सीन को ले किसी प्रकार की भ्रांति का शिकार न होकर वैक्सीनेशन के लिए आगे आयें और खुद के साथ ही अपने परिवार और समाज को कोरोना संक्रमण के डर से बाहर निकालें।
कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद सदर अस्पताल में जीएनएम सरोजनी कुमारी ने बताया कि वैक्सीन का दोनों डोज लेने के बाद अपने अनुभवों के आधार पर यही कहना चाहती हूं कि वैक्सीन से किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है| इसलिये इसको ले किसी को भी घबराने की कोई जरूरत ही नहीं है। यह वैक्सीन हर किसी के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है| सभी लोगों को उनकी बारी आने के बाद अवश्य ही वैक्सीन लगवानी चाहिए।

सदर अस्पताल में ही कार्यरत जीएनएम अंकिता कुमारी ने बताया कि कोविड वैक्सीन का दोनों डोज लेने के बाद मुझे किसी प्रकार की कोई परेशानी या घबराहट महसूस नहीं हुई है। कोरोना की कि यह वैक्सीन हर किसी के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। मैं भारतीय वैज्ञानिकों को धन्यावाद देना चाहूंगी जिन्होंने मानवता की कि रक्षा के लिए इतने कम समय में कोरोना की कि वैक्सीन तैयार कर हम लोगों के बीच उपलब्ध करवाई है।

सदर अस्पताल में कार्यरत कार्ररत नरेंद्र कुमार ने बताया कि 16 जनवरी को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद खुद को पूरी तरह से फिट महसूस करने के बाद मैं अपने स्तर से अपने सहयोगी जो वैक्सीन लेने से हिचक रहे थे उन्हें भी वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया । सोमवार को वैक्सीनेशन का 28 दिन पूरा हो जाने के बाद मैंने वैक्सीन का दूदुसरा डोज भी ले लिया है। वैक्सीन का दोनों डोज लेने के बाद मैं में लोगों से यही अपील करना चाहूंगा कि सभी लोग लीग अपनी बारी आने के बाद अनिवार्य रूप से कोरोना वैक्सीन का दोनों डोज लें।
बिना आधार कार्ड आइडेंटिफिकेशन के किसी को वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी-
मौके पर मौजूद कोरोना वैक्सीनेशन महाअभियान के नोडल अधिकारी और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि सोमवार को जीएनएम स्कूल कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल में कुल 10 स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज दिया गया। इन सभी स्वास्थ्य स्वाथ्यय कर्मियों को कोरोना टीकाकरण महाअभियान के पहले दिन कोरोना की कि वैक्सीन लगाई गई थी। इस अवसर पर वैक्सीन लगाने वाले कर्मियों को निर्देश देते हुए उन्होंने बताया कि कोविड वैक्सीनेशन का पहला डोज हो या दूसरा डोज बिना आधार कार्ड आइडेंटिफिकेशन के किसी को वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी। आधार कार्ड अनिवार्य है।

समय पर इलाज शुरू हुआ तो टीबी को मात देने में सफल रही पूजा देवी, अब पूरी तरह हैं स्वस्थ

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– स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता के माध्यम से मिली सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध समुचित इलाज की जानकारी
– आशा कार्यकर्ता का रहा सकारात्मक सहयोग, इनकी ही देखरेख में शुरू हुआ इलाज

खगड़िया-

टीबी बीमारी को मात दे चुकीं खगड़िया के रहमपुर निवासी 30 वर्षीय पूजा कुमारी ( काल्पनिक नाम ) का मानना है कि समय पर इलाज शुरू कराने से ही मैं इस बीमारी को आसानी से ना सिर्फ मात देने में सफल रही, बल्कि मुझे इस बीमारी से स्थाई निजात भी मिली। पूजा बताती हैं कि उन्हें अचानक तेज खांसी हुई जिसके बाद स्थानीय चिकित्सकों से सामान्य खांसी समझ कर अपनी दवाई ली। किन्तु, आराम नहीं हुआ और दिनोंदिन परेशानी बढ़ती गई। जिसके बाद बातचीत के दौरान अपने पड़ोस की स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा ममता देवी को अपनी परेशानी बतायी | उन्होंने कहा कि चलिए आप सदर अस्पताल में जाँच करा लीजिए। वहाँ चिकित्सकों की देखरेख में अच्छा इलाज होता है। किन्तु, सरकारी अस्पताल का नाम सुनकर मैंने वहाँ नहीं जाने की बात कही तो उन्होंने कहा कि चलिए मैं हूँ ना आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं उनकी बात पर ही सरकारी अस्पताल गई। जहाँ जाँच के बाद मुझे टीबी होने की जानकारी मिली। जिसके बाद मैं काफी उदास हो गई और सोचने लगी कि अब क्या मेरा क्या होगा। किन्तु, अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने मेरा चेहरा देखकर कहा कि आप क्यों इतना उदास हो गये। यह कोई बड़ी बीमारी थोड़ी है। इसका इलाज यहीं हो जाएगा और आप पूरी तरह स्वस्थ हो जाइएगा। केवल आप चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज शुरू कराएं और नियमित रूप से दवाई का सेवन करें। जिसके बाद मैंने अपना इलाज उसी दिन से शुरू कर दिया ।

– आशा के माध्यम से ही मिली जानकारी और इलाज के दौरान भी रहा काफी सहयोग :-
पूजा देवी ने बताया कि आशा के ही माध्यम से मुझे सरकारी अस्पतालों में इलाज की समुचित व्यवस्था होने की जानकारी मिली एवं उनकी के ही ससाकारात्मक पहल से मैं सरकारी अस्पताल गई। जहाँ मेरा इलाज शुरू हुआ। इलाज के दौरान भी आशा ने काफी सहयोग किया की। जब से मेरा इलाज शुरू हुआ वो दो दिन, तीन दिन में मेरे रा घर आकर मेरा हालचाल लेती रही। वहीं, पूजा ने बताया कि इलाज के लिए अस्पताल कर्मियों ने हमसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति ली लिए एवं पूरा नाम पता पूछे। जिसके बाद मुझे दवाई भी दी दिए।

– समुचित इलाज के लिए दवाई की ली पूरी डोज :- वहीं, पूजा देवी ने बताया कि सदर अस्पताल में दवाई मिलने के साथ मैं नियमित रूप से चिकित्सा परामर्श के अनुसार दवाई का सेवन करने लगी गा। जिसके दौरान मुझे दो-तीन माह में ही लगने लगा कि मैं पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हूँ। किन्तु, मेरे मन को संतुष्टि नहीं हो रही थी। इसके बाद पुनः मैं आशा के साथ सदर अस्पताल गई। जहाँ फिर जाँच करवाई तो अस्पताल कर्मियों ने बताया कि आप अब ठीक हैं है। किन्तु, दवाई की डोज पूरी कर लें। इसके बाद मैं छः माह तक दवाई की पूरी डोज ली और अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ।

– इलाज के दौरान आर्थिक सहायता भी मिली :-
वहीं, पूजा ने बताया कि इलाज के दौरान मुझे छः माह तक पाँच सौ रुरूपये प्रति प्रतेक माह के हिसाब से सहायता राशि भी मिली। यह सहायता राशि मुझे बैंक खाते के माध्यम से दी गई। साथ ही अस्पताल से सभी दवाई भी मुफ्त मिली और आशा से लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मियों का भी काफी सहयोग मिला।

– टीबी होने पर घबराएं नहीं, अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित जाँच और इलाज की मुफ्त सुविधा :-
वहीं, पूजा ने कहा कि मैं अन्य लोगों से भी अपील करती हूँ कि टीबी बीमारी होने पर घबराना नहीं चाहिए। बल्कि, लक्षण दिखते ही स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच करानी ना चाहिए। दरअसल, यह एक सामान्य बीमारी है और समय पर जाँच कराने से आसानी के साथ बीमारी से स्थाई निजात मिल सकती है। इसके लिए अस्पतालों में मुफ्त समुचित जाँच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए, किसी भी लोगों को इलाज के लिए खर्च की भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा सरकार द्वारा सहायता राशि भी दी जाती है।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा रखें ख्याल।
– मास्क का नियमित रूप से करें उपयोग।
– साफ-सफाई का भी रखें विशेष ख्याल।
– बाहरी खाना खाने से करें परहेज।
– घर से बाहर निकलने पर निश्चित रूप से सैनिटाइजर का करें उपयोग।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से करें परहेज।

स्वास्थ्यकर्मियों को लगा कोरोना टीका का दूसरा डोज

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-जिले के 15 केंद्रों पर 1146 स्वास्थ्य कर्मियों को पड़ा टीका का दूसरा डोज
-टीकाकरण के दौरान केंद्रों पर सतर्कता का रखा जा रहा था पूरा ध्यान

भागलपुर-

कोरोना टीका का दूसरा डोज सोमवार को स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया. इसे लेकर जिले के 15 केंद्रों पर व्यवस्था की गई थी, जहां पर 1146 स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना टीका का दूसरा डोज दिया गया. इसे लेकर सभी केंद्रों पर पूरी तैयारी थी. स्वास्थ्यकर्मियों की टीम केंद्र पर तैनात थी. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि पहले चरण का टीका जिन स्वास्थ्यकर्मियों को पड़ा था, उनलोगों को टीका का दूसरा डोज सोमवार को दिया गया. जिस तरह से पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका पड़ा था उन्हीं के अनुसार दूसरे डोज की सूची तैयारी की गई थी. पहले चरण के दौरान ही सभी को बता दिया था कि आप लोगों को दूसरे चरण का टीका 28 दिनों के बाद दिया जाएगा. इसी के तहत सभी को टीका दिया गया.

दूसरा डोज पडने के बाद टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि जिन लोगों को टीका का दूसरा डोज पड़ गया, उनकी टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई. वह अब कोरोना से सुरक्षित हैं. सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज ले लेना चाहिए, जिससे वह भी कोराना से सुरक्षित हो जाएंगे.

कोरोना की गाइडलाइन का किया जा रहा था पालन:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि सभी केंद्रों पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा था. स्वास्थ्यकर्मी समय-समय पर अपने हाथ को सैनिटाइज कर रहे थे. दो गज की सामाजिक दूरी का भी पालन किया जा रहा था. सभी लोग मास्क पहने हुए थे.

टीका लेने के बाद भी कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन:
डॉ चौधरी ने बताया कि टीका लेने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. टीका लेने के बाद लोग सुरक्षित हो गए, लेकिन कोरोना एक संक्रामक बीमारी है और यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, इसलिए सामाजिक दूरी का पालन जरूरी है. इससे ना सिर्फ आप बचे रहते हैं बल्कि दूसरे लोग भी चपेट में नहीं आते हैं. साथ ही अन्य दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है.

बच्चे को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी मुस्कान

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-छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आएगा पास
-जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान

लखीसराय, 15 फरवरी –

बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है। माँ के दूध में शिशु के आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छ्ह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा स्तनपान, बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है। आंकड़े भी बताते हैं कि छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया होने की संभावना में भी क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद तक कमी लायी जा सकती है। स्तनपान माँ को स्तन कैंसर से भी बचाता है।
शुरुआती स्तनपान जरूरी :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि माँ के दूध की महत्ता को समझते हुए स्वास्थ्य महकमे का भी पूरा ज़ोर रहता है कि लेबर रूम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स यह सुनिश्चित कराएँ कराये कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर ही कराई जाये। नवजात को माँ का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये।
बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए-
यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण की का संभावना खतरा बनी ना रहती ता है।

प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक, शिक्षाविद, समाज सेवी, अभिनेता व नेता डॉ. राजेश कुमार ने राष्ट्र जागरूकता का किया लोकार्पण

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-जय सिन्हा

पटना. मुंबई से प्रकाशित होने वाली हिंदी मासिक पत्रिका प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक, शिक्षाविद, समाज सेवी, अभिनेता व नेता डॉ. राजेश कुमार ने अपने गृह शहर पटना से भी एक हिंदी मासिक मासिक पत्रिका राष्ट्र जागरूकता का प्रकाशन करना शुभारम्भ किया है. इस बारे में डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि उनकी इच्छा रही थी कि वे अपने गृह शहर पटना से भी एक पत्रिका का प्रकाशन करें जो जनवरी 2021 में पूरी हो गयी. राजेश साहब के बारे में यह विख्यात है कि वे कुछ-न-कुछ हमेशा क्रिएटिव व सोशल वर्क करते ही रहते हैं जिसका ताज़ा उदाहरण है कि उनहोंने अपनी कर्म भूमि मुंबई के अतिरिक्त अब अपनी जन्म भूमि पटना से भी राष्ट्र जागरूकता का प्रकाशन करना आरम्भ किया है. इस अवसर पर पटना के अनेक वरिष्ठ पत्रकार के साथ-साथ कुछ नेता, अभिनेता, शिक्षाविद, कलाकार व समाज सेवी भी उपस्थित थे. ज्ञात हो कि राष्ट्र जागरूकता का लोकार्पण डॉ. साहब ने पटना स्थित राष्ट्र जागरूकता के मुख्य कार्यालय में ही किया. इस अवसर पर समाज सेवी, वरिष्ठ पत्रकार व नेता डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि राजेश जी अपने प्रदेश के लिए कुछ करने की सोच हमेशा से रखते हैं और उनके इस काम की सराहना करता हूँ और आशीर्वाद देता हूँ कि वो राष्ट्र जागरूकता को राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका बनाने के साथ-साथ पत्रिका के माध्यम से पाठक व जनता में राष्ट्र के प्रति सच्ची जागरूकता लाने में भी अपना योगदान अवश्य देंगे. इसके साथ ही दिव्य रश्मि मासिक पत्रिका के सम्पादक डॉ. राजीव कुमार मिश्र ने भी राजेश जी को जहाँ अपना आशीर्वाद देकर उनकी सफलता की कामना की वहीँ विधि विमर्श मासिक पत्रिका के सम्पादक रण विजय सिंह के सम्पादक ने भी डॉ. साहब को शुभकामना दिया. इसके अतिरिक्त पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ता व राजेश जी के मित्र शिवानंद गिरी ने कहा कि वे राजेश जी को हमेशा से जानते हैं कि वो कुछ न कुछ नया करते ही रहते हैं और उनकी खासियत यह है कि इनके अंदर काम करने की एक बेचैनी रहती है. इस अवसर पर डॉ. साहब की मित्र व कलाकार रिया व शिखा के साथ-साथ कोरियोग्राफर सीमा कर्ण ने भी राजेश जी को राष्ट्र जागरूकता की सफलता के लिए अपनी शुभकामना दिया.