कोविड-19 की वैक्सीन आने की खबर से युवाओं में खुशी

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– खगड़िया के युवक मनीष कुमार ने कहा – अब मिलेगी कोविड-19 से स्थाई निजात
– लंबे समय से था लोगों को वैक्सीन का इंतजार, लोगों में नया सवेरा की उम्मीद

खगड़िया-

कोविड-19 की आने वाली वैक्सीन के सफल क्रियान्वयन के लिए जहाँ स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारियाँ को अंतिम रूप देने में व्यस्त है। वहीं, लंबे समय से वैक्सीन का इंतजार कर रहे लोगों में उत्साह का माहौल है। खासकर युवाओं में तो भारी उत्साह है। दरअसल, समाज के हर तबके के लोग इस पल का लंबे समय से बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे । । हालाँकि, वैक्सीन आने तक एहतियात जारी रखने की भी जरूरत है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना उत्पन्न नहीं हो।

– अब मिलेगी कोविड-19 से स्थाई निजात :-
खगड़िया के युवक मनीष कुमार ने कहा कि लोग लंबे समय से जिस पल के इंतजार में थे वह घड़ी अब आने वाली है। कोविड-19 से बचाव के लिए आने वाली वैक्सीन की जानकारी मिलते ही लोगों में खुशी का माहौल है। लोगों के अंदर वैक्सीन आने की खबर से कोविड-19 से स्थाई निजात की उम्मीद जगी है। किन्तु, इन खुशियों के साथ लोगों को वैक्सीन आने तक एहतियात जारी रखने की जरूरत है।

– वैक्सीनेशन के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी :-
, मनीष कुमार ने कहा कि वैक्सीन के पूर्व तो समाज के हर तबके के लोगों को बचाव से संबंधित उपायों का पालन करना जरूरी है ही। इसके अलावे वैक्सीनेशन के बाद भी वैक्सीन ले चुके लोगों को भी एहतियात जारी रखने की जरूरत है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक वैक्सीनेशन के तुरंत बाद कोविड-19 समाप्त नहीं होगा । इसलिए, सभी लोगों को गाइडलाइन का पालन करते रहना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो।

– वैक्सीनेशन के सफल क्रियान्वयन के लिए सामाजिक सहयोग जरूरी :-
मनीष कुमार ने कहा कि वैक्सीनेशन के सफल क्रियान्वयन के लिए सामाजिक सहयोग बेहद जरूरी है। क्योंकि, सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की पहल से वैक्सीनेशन सफल नहीं हो पाएगा। समाज के हर तबके के लोगों को सहयोग करने की आवश्यकता है। इसके लिए वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना जरूरी है।

– वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होना जरूरी :-
मनीष कुमार ने कहा कि वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। समाज के शिक्षित युवाओं एवं बुद्धिजीवियों द्वारा वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने की जरूरत है। ताकि वैक्सीन आने के बाद समाज में किसी प्रकार के अफवाहों की समस्या उत्पन्न नहीं हो और समाज के हर तबके के लोग वैक्सीनेशन अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें ।

– हर किसी के लिए वैक्सीन जरूरी :-
वैक्सीन समाज के हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। वैक्सीन लगने के बाद ही लोगों को कोविड-19 से स्थाई निजात मिलेगी और लोग पूरी तरह स्वतंत्र होकर अपना कार्य कर सकेंगे। इसके लिए सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ हर किसी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी तय करने की भी जरूरत है। ताकि वैक्सीनेशन के सफल क्रियान्वयन को बल मिल सके ।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– जहाँ-तहाँ नहीं थूकें ।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस प्रोग्राम को ले जिले के सभी प्रखण्डों में आयोजित किए जा रहे ओरिएंटेशन कार्यक्रम

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– सिविल सर्जन द्वारा जिले के सभी पीएचसी में कार्यरत मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दिया गया है कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश
– सभी प्रखण्डों में टीकाकरण के लिए बनाए गए प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स और सुपरवाइजर के लिए आयोजित किए जा रहे हैं ओरिएंटेशन कार्यक्रम

लखीसराय-

जनवरी में आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस कार्यक्रम को लेकर बनने वाले प्रखंड स्तर टास्क फोर्स और सुपरवाइजर के ओरिएंटेशन के लिए जिले के सभी प्रखण्डों में कार्यरत पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मालूम हो कि जनवरी महीने से कोरोना टीकाकरण के लिए जिले भर में महाअभियान चलाया जाना है। इसके साथ हीं नियमित टीकाकरण का काम भी साथ-साथ चलना है। इसी के मद्देनजर सभी प्रखण्डों में काम करने वाले ब्लॉक लेवल टास्क फोर्स का ओरिएंटेशन आवश्यक है।
नियमित टीकाकरण और कोरोना टीकाकरण के लिए जिले में सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी-
जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि जिले में नियमित टीकाकरण और कोरोना टीकाकरण के लिए जिले में सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है। इसी के मद्देनजर जिले के सभी पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की देखरेख में सभी पीएचसी पर ब्लॉक लेवल टास्क फोर्स और सुपरवाइजर का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा ।
जिले के सभी प्रखण्डों में इस प्रकार से आयोजित की जा रही है
ओरिएंटेशन कार्यक्रम :
सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धीरेंद्र कुमार की देखरेख में पीएचसी परिसर में 4 जनवरी को सुबह 11 बजे से ब्लॉक टास्क फोर्स और सुपरवाइजर के ओरिएंटेशन के लिए कार्यक्रम आयोजित होंगे ।
इसी प्रकार से बड़हरिया पीएचसी में एमओआईसी डॉ. बिनोद कुमार की देखरेख में 05 जनवरी को, लखीसराय ग्रामीण में एमओआईसी डॉ. संदीप कुमार की देखरेख में 05 जनवरी को, लखीसराय शहरी में एमओआई सी डॉ. संदीप कुमार की देखरेख में 05 जनवरी को, पिपरिया में एमओआईसी डॉ. रोसेक की देखरेख में 04 जनवरी को और रामगढ़ चौक में एमओआईसी डॉ. कंचन की देखरेख में 05 जनवरी को ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित है । इसी तरह से हलसी पीएचसी में एमओआईसी डॉ. राजेश भारती की देखरेख में 06 जनवरी को पीएचसी परिसर में ब्लॉक टास्क फोर्स और सुपरवाइजर के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित है।

बांका के मलिन बस्तियों में कैंप लगाकर लोगों की हो रही जांच और इलाज

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-अब तक सैकड़ों लोगों का स्वास्थ शिविर में हो चुका है इलाज
-गंभीर से गंभीर बीमारी का भी शिविर में किया जा रहा है इलाज

बांका-

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से मलिन बस्तियों में कैंप लगाकर लोगों की जांच और इलाज किया जा रहा है. शिविर में आने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है. जांच के बाद उन्हें जिस तरह की बीमारी निकलती है, उसकी दवा दी जा रही है. अगर ज्यादा गंभीर बीमारी सामने आती है तो उसे इलाज के लिए उचित परामर्श दिया जाता है.
मलिन बस्तियों में कैंप लगाने का काम शुरू-
शहरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में लोगों को हर तरह स्वास्थ्य सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसकी कमी नहीं हो, इसी को देखते हुए हमलोगों ने मलिन बस्तियों में कैंप लगाने का काम शुरू किया गया है. वहां पर हर तरह की जांच और इलाज की सुविधा है. जांच के बाद मरीज को मुफ्त में दवा भी दी जाती है.

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाई गई है एक टीम: मलिन बस्तियों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक टीम बनाई गई, जिसमें डॉक्टर, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी हैं. ये लोग पहले उस क्षेत्र के लोगों को इसकी सूचना दे देते हैं कि कल आपके क्षेत्र में इतने बजे स्वास्थ्य शिविर लगेगा. अपनी जांच और इलाज के लिए आ जाइएगा. उसके बाद ये लोग उस दिन वहां पर जाकर शिविर लगाते हैं.

अब तक 10 स्वास्थ्य शिविर लग चुका है: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मैनेजर अल्पना कुमारी ने बताया कि अब तक 10 से अधिक मलिन बस्तियों में स्वास्थ्य शिविर लग चुका है. इस दौरान सैकड़ों लोगों की जांच और इलाज हुआ है. हमलोगों को कुल 12 कैंप लगाना है. यानी कि जल्द ही दो और शिविर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के क्षेत्र में लगाया जाएगा.

स्वास्थ शिविर में कोरोना की गाइडलाइन का होता है पालन: अल्पना कुमारी ने बताया कि मलिन बस्तियों में लगने वाले स्वास्थ्य शिविर में कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जाता है. सभी लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य होता है. सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए इलाज किया जाता है. अगर कोई कोरोना लक्षण संदिग्ध वाला व्यक्ति दिखता देखता है तो उसे तत्काल कोरोना जांच के लिए भेज दिया जाता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार

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-पहले चरण में जिले के 12 हजार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को लगेगा टीका
-सदर अस्पताल के जिला प्रतिरक्षण कार्यालय को बनाया गया है क्षेत्रीय टीकाकरण केंद्र

भागलपुर-

कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से चौकस है. संक्रमण को लगभग नियंत्रित कर लेने के बाद अब स्वास्थ विभाग टीकाकरण की तैयारी में जुट गया है. भागलपुर में पहले चरण के तहत में 12 हजार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को टीका दिया जाएगा. इसे लेकर सदर अस्पताल के जिला प्रतिरक्षण कार्यालय को क्षेत्रीय टीकाकरण केंद्र बनाया गया है.

सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह कहते हैं कि जिले में टीकाकरण की तैयारी जोर-शोर शोर से चल रही है. भागलपुर में दूसरे जिलों के लिए भी टीका रखने की व्यवस्था की गई है. पहले चरण में टीका पड़ने वाले लोगों की सूची तैयार हो गई है और उसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. पटना में इसे लेकर आज बैठक होगी, जिसमें जिले की तैयारी को अंतिम रूप दिया जाएगा.

क्षेत्रीय टीकाकरण केंद्र की क्षमता 12 लाख डोज रखने की: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि सदर अस्पताल में जो क्षेत्रीय टीकाकरण केंद्र बनाया गया है उसमें 12 लाख टीके के डोज रखने की क्षमता है. यहां पर 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर टीका को रखा जाएगा. यह पैमाना मानक के मुताबिक है. भागलपुर से जमुई, लखीसराय, बांका और मुंगेर जिले को भी कोरोना का टीका जाएगा.

मायागंज समेत जिले के 18 अस्पतालों में 54 आईएलआर लगेगा: मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार ने बताया कि मायागंज अस्पताल में भी टीकाकरण को लेकर तैयारी चल रही है. मायागंज समेत जिले के 18 सरकारी अस्पतालों में लगभग 54 आईएलआर लगाया जाएगा.1 आईएलआर में डेढ़ हजार डोज रखने की क्षमता होती है. इस तरह से जिले भर में कोरोना के टीकाकरण को कवर कर लिया जाएगा.

कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि टीकाकरण की तैयारी चल रही है. जल्द ही लोगों को टीके पड़ने लगेंगे, लेकिन अभी भी हमें कोरोना को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. घर से निकलते वक्त लोगों को मास्क जरूर पहनना चाहिए.घर के बाहर भीड़भाड़ से बचना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए. इसके अलावा 2 घंटे के अंतराल पर हाथ को भी धोना चाहिए. सफाई रखने से आप कोरोना ही नहीं, दूसरी बीमारियों से भी बचे रहेंगे.

कोविड संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन सुरक्षित और असरदार

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• वैक्सीन के लिए पंजीकरण अनिवार्य, दिखाने होंगे आईडी कार्ड
• कोरोना वैक्सीन स्वैच्छिक, 28 दिनों के अंदर लेने होंगे 2 डोज़
• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पुस्तिका जारी कर दी जरूरी जानकारी

भागलपुर-
राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए वैक्सीन देने की तैयारी जोरो पर है. इसके लिए चुनिंदा जिलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्राइ रन यानी पूर्वाभ्यास भी किया गया है. हालांकि वैक्सीनेशन को लेकर आमजन अब थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश के मन में टीकाकरण के प्रति कई सवाल भी हैं. इस दिशा में परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीकाकरण से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देते हुए एक पुस्तिका जारी कर टीकाकरण से संबंधित आंशकाओं व भ्रांतियों को भी दूर किया है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उच्च जोखिम वाले समूहों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन के लिए चिन्हित किया गया है. इन्हें तीन समूहों में बांटा गया है. पहले समूह में हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर शामिल हैं. दूसरे समूह में 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति तथा जो पहले से ही किसी रोग से ग्रसित हैं. इसके बाद अन्य आम लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराया जायेगा.

दूसरे देशों की तरह वैक्सीन भारत में भी प्रभावी:

भारत में कोरोना वैक्सीन उतनी ही प्रभावी होगी जितनी अन्य देशों द्वारा विकसित वैक्सीन, वैक्सीन परीक्षण के विभिन्न चरणों में इसकी सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है. सुरक्षा और प्रभाव की डेटा की जांच के आधार पर मंजूरी के बाद ही नियामक निकायों द्वारा वैक्सीन लगायी जायेगी.

कोविड वैक्सीनेशन के लिए पहले होगा पंजीकरण:
कोविड वैक्सीनेशन के लिए पात्र लाभार्थियों को पहले पंजीकरण कराना होगा. उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से वैक्सीनेशन और उसके निर्धारित समय के बारे में स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा सूचित किया जायेगा. पंजीकरण के लिए फोटो के साथ पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा.

पंजीकरण के लिए देने होंगे फोटो पहचान पत्र:

• आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आइडी एवं पैन कार्ड
• पासपोर्ट, जॉब कार्ड, पेंशन दस्तावेज मनरेगा कार्ड
• स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
• सांसदों, विधायकों, एमएलसी को जारी आधिकारिक प्रमाण पत्र
• बैंक, पोस्ट आॅफिस द्वारा जारी पासबुक
• केंद्र, राज्य सरकार या पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी सेवा आईडी कार्ड

इन कारणों से जरूरी है पंजीकरण व कागजात:

कोई व्यक्ति बिना पंजीकरण के कोरोना वैक्सीन नहीं प्राप्त कर सकता है. कोरोना वैक्सीनेशन के लिए पंजीकरण के बाद ही सत्र स्थल और समय की जानकारी दी जायेगी. फोटो आईडी पंजीकरण और सत्यापन दोनों के लिए जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इच्छित व्यक्ति को वैक्सीन लगाया गया है. ऑनलाइन पंजीकरण के बाद लाभार्थी को वैक्सीनेशन की नियत तिथि, स्थान और समय के बारे में अपने मोबाइल पर एसएमएएस प्राप्त होगा. कोरोना वैक्सीन की उचित खुराक मिलने पर लाभार्थी को उनके मोबाइल नंबर पर एक क्यूआर कोड आधारित प्रमाण पत्र भी भेजा जायेगा.

इन सावधानियों का भी करना होगा पालन:
कोरोना वैक्सीन लेने के बाद कम से कम आधे घंटे तक वैक्सीनेशन केंद्र में आराम करना चाहिए. यदि बाद में कोई असुविधा या बेचैनी महसूस होती है तो निकटतम स्वास्थ्य अधिकारियों, एएनएम और आशा को इसकी सूचना दें. कोरोना अनुरूप व्यवहारों जैसे मास्क पहनना, हाथ की सफाई और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाये रखने का पालन करें.

मधुमेह व उच्च रक्तचाप पीड़ित के लिए जरूरी:

यदि कोई कैंसर मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि जैसी बीमारियों की दवा ले रहा है तो वह भी कोरोना वैक्सीन ले सकता है. इनमें से एक या एक से अधिक स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले व्यक्तियों को एक उच्च जोखिम वाली श्रेणी माना जाता है. कोविड संक्रमितों को भी वैक्सीनेशनेशन की आवश्यकता है.

28 दिनों के अंदर लेनी होगी दूसरी खुराक:

कोरोना वैक्सीन व्यक्ति की रजामंदी के बाद ही दिया जाना है. यद्यपि. स्वयं की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को सीमित करने के लिए कोरोना वैक्सीन आवश्यक भी है. साथ ही वैक्सीन की पूरी खुराक पूरा करने के लिए 28 दिन के अंदर एक व्यक्ति द्वारा इसकी 2 खुराक लेने की सलाह दी गयी है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह स्पष्ट भी किया है कि कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक प्राप्त करने के दो सप्ताह बाद आमतौर पर एंटीबॉडी का सुरक्षात्मक स्तर विकसित होता है

जिले में 18 जीएनएम और 09 एएनएम को सुरक्षित प्रसव को लेकर दिया गया अमानत का प्रशिक्षण

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– केयर इंडिया की टीम द्वारा दिया गया प्रशिक्षण,
– 28 सितम्बर से 10 अक्टूबर तक चला प्रशिक्षण

खगड़िया-

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने एवं सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने के लिए जिले के 18 जीएनएम एवं 09 एएनएम को अमानत का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें केयर इंडिया के मेंटर ने जीएनएम को सुरक्षित प्रसव के तरीके, नवजात शिशु को पुनर्जीवन, गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल और प्रसव के बाद होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने के तरीके की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिले सके ।

– सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण :-
केयर इंडिया के डीटीएल आनंद कुमार ने बताया कि सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने को लेकर जिले भर के जीएनएएम को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सिमुलेशन ट्रेनिंग के माध्यम से अमानत मेंटर्स को ऑन द स्पॉट नहीं बल्कि डमी के माध्यम से सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जाता है। इस प्रशिक्षण में मरीजों की बुनियादी प्रक्रियाओं और उनमें आने वाली जटिलताओं की पहचान करने और उसका समुचित इलाज करने की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया इससे पहले सुरक्षित संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले भर में जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया था।

– कब, कहाँ की गई जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम :
डीटीएल आनंद कुमार ने बताया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में अलग-अलग तिथि में जीएनएएम को अमानत का प्रशिक्षण दिया गया। 28 सितम्बर से 03 अक्टूबर तक खगड़िया में 02 जीएनएम एवं गोगरी में 08 जीएनएम व 04 एएनएम, 05 से 10 अक्टूबर तक अलौली में 02 एएनएम व 02 जीएनएम, एवं परवत्ता में 03 जीएनएम 02 एएनएम, 12 से 17 अक्टूबर तक चौथम में 03 जीएनएम व 01 एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग में कुल 27 जीएनएम शामिल हुई।

– जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य :-
जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य जीएनएम को ऑपरेशन थिएटर रूम, लेबर रूम, ओपीडी समेत अस्पतालों के अन्य विभागों के बारे में विस्तृत रूप से तकनीकी जानकारी देना है। उन्हें इन विभागों में काम करने के लिए मरीजों से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं और जटिलताओं की जानकारी दी जाती है। ओरिएंटेशन ट्रेनिंग से पहले और बाद में जीएनएम नर्सो की टेस्ट ली गई। इस दौरान यह देखा गया कि प्रशिक्षण के बाद जीएनएम नर्सो का मार्क्स अधिक था। इससे यह जाहिर होता है कि ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम से जीएनएम नर्सो को काफी तकनीकी जानकारी मिली है।

– प्रशिक्षण के दौरान यह दी गई जानकारी :-
प्रशिक्षण के दौरान जीएनएम को पीपीई डोनिंग एंड डोफिंग, हैंड वाशिंग, वाइटल मॉनिटर, बीपी- पल्स रेट, टेम्परेचर चेकिंग, ऑक्सीजन लगाना, इंजेक्शन लगाना, कैथेटर लगाना, ऑटो क्लेव लगाना, लेबर रूम व्यवस्थित करना, बायोमेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का प्रबंधन करने के साथ ही मरीजों में होनी वाली जटिलताओं को पहचानने और उसे मैनेज करने के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया गया।

– प्रशिक्षित जीएनएम हर समस्याओं का आसानी करेंगी समाधान :-
प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित जीएनएम अस्पताल के किसी भी विभाग में काम करने के लिए खुद को सक्षम महसूस करेंगी। साथ ही मरीजों में होने वाली परेशानी को पहचान कर उसका सही तरीके से इलाज कर पाएंगी। जिससे सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे। इतना ही नहीं लंबे समय से चली आ रही महिला चिकित्सकों की कमी का अस्पताल को एहसास नहीं होगा और संस्थागत स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी।

– जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग से सुनिश्चित होगा सुरक्षित प्रसव :-
जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग से सुरक्षित प्रसव तो सुनिश्चित होगा ही इसके अलावा संस्थागत स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होगी। इसको लेकर जीएनएम को लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर से सबंधित सभी आवश्यक तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया। ताकि वो इन स्थानों पर मरीजों में होने वाली जटिलताएं पहचान कर, उसका सही समय पर समुचित इलाज कर सके। इस प्रशिक्षण के बाद मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के साथ हीं मातृ-शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में वैसे स्थानों पर जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी होगी वहां ये प्रशिक्षित जीएनएम नर्स स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की भूमिका अदा करेंगी ।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें और बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

संस्थागत सुरक्षित प्रसव कराने के लिए जिले भर में जीएनएम नर्सो को दी गई अमानत ओरिएंटेशन ट्रेनिंग

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– जिले के विभिन्न प्रखण्डों में पिछले तीन महीने के दौरान जीएनएम नर्सो के लिए अमानत ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन

– केयर इंडिया के सहयोग से जिले भर में जीएनएम नर्सो के स्किल डेवलपमेन्ट के लिए अमानत ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम

लखीसराय-

संस्थागत सुरक्षित प्रसव और मातृ – शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए केयर इंडिया के सहयोग से सदर अस्पताल हॉस्पिटल सहित जिले के विभिन्न अस्पताल हॉस्पिटल और पीएचसी में कार्यरत जीएनएम नर्सो को दी गई अमानत ओरिएंटेशन ट्रेनिंग ।

केयर इंडिया की कि ट्रेनर नर्स मॉनेटरिंग सुपरवाइज़र ने बताया कि अमानत ओरिएंटेशन ट्रेनिंग के माध्यम से जीएनएम नर्सो को ऑन द स्पॉट नहीं बल्कि डमी के माध्यम से सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मरीजों की बुनियादी प्रक्रियाओं के बेसिक प्रोसिजर और उनमें आने वाली ले जटिलताओं कॉम्प्लिकेशन की पहचान करने के साथ उसका समुचित इलाज करने की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि सुरक्षित संस्थागत प्रसव और मातृ- शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले भर में नई जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित की गई थी।

जिले भर में कब और कहां आयोजित की गई जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम :
प्रशिक्षक ने बताया कि जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड में सितंबर महीने में 6 नई जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित की गई। इसी तरह हलसी में अक्टूबर के महीने में 6 जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया की गई। सदर अस्पताल हॉस्पिटल लखीसराय में नवंबर के महीने में 5 नई जीएनएम नर्सो के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया की गई। इस प्रकार से पिछले तीन महीने के दौरान जिले के विभिन्न प्रखण्डों सहित सदर अस्पताल हॉस्पिटल लखीसराय में कुल 17 नई जीएनएम नर्सो के स्किल डेवलपमेंट डेवलोपमेन्ट के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया कि गई।

जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य :
जिले भर की जीएनएम नर्सो के लिए ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें हॉस्पिटल के सभी विभाग जैसे ऑपरेशन थिएटर रूम, लेबर रूम, ओपीडी सहित अन्य विभागों के बारे में विस्तृत रूप से तकनीकी जानकारी देना है। उन्हें इन विभागों में काम करने के लिए मरीजों से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं प्रोसिजर और जटिलताओं कॉम्प्लिकेशन की जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि ओरिएंटेशन ट्रेनिंग से पहले और बाद में जीएनएम नर्सो की टेस्ट ली गई। इस दौरान यह देखा गया कि प्रशिक्षण के बाद जीएनएम नर्सो का मार्क्स अधिक था। इससे यह जाहिर होता है कि ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम से जीएनएम नर्सो को काफी तकनीकी जानकारी मिली है।

ओरिएंटेशन ट्रेनिंग में जीएनएम नर्सो को इन बिंदुओं की दी गई जानकारी :
जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम से जीएनएम नर्सो की प्रैक्टिकल के साथ स्किल डेवलपमेंट किया जाता है। इस दौरान उन्हें पीपीई डोनिंग एंड डोफिंग, हैंड वाशिंग, वाइटल मॉनिटर,बीपी- पल्स रेट, टेम्परेचर चेकिंग, ऑक्सीजन लगाना, इंजेक्शन लगाना, कैथेटर लगाना, ऑटो क्लेव लगाना, लेबर रूम ब्यवस्थित करना, बायोमेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का प्रबंधन करने के साथ हीं मरीजों में होने वाले कॉम्प्लिकेशन को पहचानने और उसे मैनेज करने के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया गया।

आने वाले समय में प्रशिक्षित जीएनएम की भूमिका :
जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद जीएनएम नर्स तकनीकी रूप से इतनी सक्षम होंगी कि हॉस्पिटल के किसी भी विभाग में काम करने के दौरान आसानी से मरीजों में होने वाली परेशानी को पहचान कर उसका सही तरीके से इलाज कर पाएंगी। एक आंकड़ा आंकड़ों के अनुसार देश और राज्य में अभी भी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों को कमी है। ऐसा संभव है कि आने वाले दिनों में जहां स्त्री रोग विशषज्ञ डॉक्टर की कमी है वहां तकनीकी तौर पर दक्ष जीएनएम नर्स हीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की भूमिका में कार्य करेगी।

मातृ और शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में जीएनएम ओरिएंटेशन ट्रेनिंग की भूमिका :
ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्राप्त जीएनएम नर्स सुरक्षित संस्थागत कराने में अहम भूमिका अदा करेगी। जीएनएम नर्सो को लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर से सबंधित सभी आवश्यक तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया है ताकि वो इन स्थानों पर मरीजों में होने वाली कॉम्प्लिकेशन की पहचान कर उसका यही समय पर समुचित इलाज कर सके। इस प्रशिक्षण के बाद मातृ- शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के साथ हीं मातृ- शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में वैसे स्थानों पर जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी होगी वहां ये प्रशिक्षित जीएनएम नर्स स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की भूमिका अदा करेगी।

कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूलों का हुआ संचालन

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-मास्क पहने छात्र-छात्राओं को कराया गया सैनिटाइज

-दो पालियो में भी में चली कक्षाएं, दो गज की सामाजिक दूरी का हुआ पालन

भागलपुर-

भागलपुर के स्कूलों में सोमवार से 9वीं से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं शुरू हो गयीं. मास्क पहनकर स्कूल आए छात्र-छात्राओं को मुख्य गेट पर ही सैनिटाइज कराया गया. जिन छात्रों ने मास्क नहीं पहने थे उन्हें स्कूल प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराया गया.

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के लगभग सभी स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन कराया गया. दो गज की सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा गया. स्कूलों में साफ- सफाई का काम पहले ही करा लिया गया था. जीविका के जरिए स्कूलों को मास्क पहुंचा दिया गया था. हालांकि आज भी कुछ स्कूल को मास्क दिया गया. सभी स्कूल के प्रधानाचार्य को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया गया है. इसके लिए उन्हें राशि खर्च करने की भी अनुमति दी गई है.

एक बेंच पर दो छात्र बैठे: सरकार के निर्देश के मुताबिक कक्षाओं में एक बेंच पर दो छात्रों को ही बैठने दिया गया. 1 दिन में 50% छात्रों के ही आने की अनुमति थी. इस वजह से पहले दिन कम छात्र दिखे. बाकी छात्र अब मंगलवार को आएंगे. वहीं जिले के 9 स्कूलों में छात्रों की संख्या काफी अधिक है. वैसे स्कूलों में दोनों ही पाली में स्कूलों का संचालन किया गया. इसी तरीके से कुछ स्कूलों में सोमवार को सिर्फ छात्र आए. मंगलवार आज को छात्राओं को बुलाया गया है.

निजी स्कूलों में भी बेहतर व्यवस्था: जिले के सभी सरकारी स्कूलों में तो कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाया ही जा रहा था, वहीं जितने भी निजी स्कूल हैं वहां भी इसका ध्यान रखा जा रहा था. हालांकि निजी स्कूल में अधिकतर बच्चे खुद जागरूक दिखे. घर से ही मास्क पहने हुए आए थे सभी. छात्र-छात्राओं को कक्षा में प्रवेश से पहले सैनिटाइज किया गया.

स्कूलों को अपनी सुविधानुसार संचालन की छूट: जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि सभी स्कूलों को अपनी सुविधा के अनुसार संचालन की छूट दी गई है, लेकिन कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना होगा. छात्र छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. अगर किसी स्कूल में कोरोना की गाइडलाइन के पालन में लापरवाही बरती गई तो वहां कार्रवाई भी की जा सकती है

अमानत प्रशिक्षण के तहत 35 नई जीएनएम को किया गया है प्रशिक्षित

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प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी ने नई जीएनएम दे रही अपना योगदान

भागलपुर-

जिले में मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ जिसमें केयर इंडिया की मदद से जिले की 35 जीएनएम नर्सों को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण शिविर में जीएनएम नर्सों का कौशल विकास किया गया तथा उनको प्रसव के पूर्व व उसके दौरान की सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।

केयर इंडिया के डीटीएल डॉ निनकुश अग्रवाल ने बताया कि जीएनएम को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है. उन्हें मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में किस तरह से कमी लाना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया है. अभी वह अपने क्षेत्र में काम कर रही हैं और इसका फायदा भी मिल रहा है. प्रशिक्षित जीएनएम प्रसव के दौरान आने वाली जटिलता को चिन्हित कर रही हैं. जटिलता चिन्हित हो जाने से प्रसव का प्रबंधन आसान हो जाता है. इस वजह से मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती है.

लेबर रूम में काम करने का दिया गया है प्रशिक्षण: डॉक्टर अग्रवाल ने बताया, नवनियुक्त जीएनएम को लेबर रूम में किस तरह से काम करना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया है. अभी वह लेबर रूम में काम कर प्रसव के दौरान आने वाली समस्याओं की पहचान कर रही है. समस्याओं की पहचान समय पर हो जाने से प्रसव का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो जाता है. इससे मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल रही है.

नवजात शिशु के पुनर्जीवन की प्रक्रिया में दे रही योगदान: डॉक्टर अग्रवाल ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान जीएनएम को बताया गया था कि नवजात शिशु के पुनर्जीवन की प्रक्रिया जन्म के 15 मिनट बाद कैसे की जाती है. इसे करके भी दिखाया गया था, ताकि प्रशिक्षण लेने वाली जीएनएम अपने-अपने क्षेत्र में इस पर ठीक तरीके से अमल कर सकें. अभी वह अपने क्षेत्र में इस पर अमल कर रही हैं. इससे शिशु मृत्यु दर को काम करने में काफी मदद मिल रही है.

अगले दौर का प्रशिक्षण जल्द: डॉ अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी नई जीएनएम को दूसरे चरण का प्रशिक्षण जल्द दिया जाएगा. उस प्रशिक्षण में इन लोगों को मातृ और शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए कुछ और तरीके बताए जाएंगे. साथ ही इस काम से जुड़ी जटिलताओं के बारे में बताया जाएगा. इसके बाद वे लोग पूरी तरीके से प्रशिक्षित हो जाएंगे जिसका फायदा जिले के लोगों को मिलने लगेगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी ला रही हैं जीएनएम

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अमानत प्रशिक्षण के तहत 55 नई जीएनएम को किया गया है प्रशिक्षित
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी ने नई जीएनएम दे रही अपना योगदान

बांका, 4 जनवरी
जिले में मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ जिसमें केयर इंडिया की मदद से जिले की 55 जीएनएम नर्सों को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण शिविर में जीएनएम नर्सों का कौशल विकास किया गया तथा उनको प्रसव के पूर्व व उसके दौरान की सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।

बांका जिले में केयर इंडिया के डीटीएल डॉ संजय महापात्रा ने बताया कि जीएनएम को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है. उन्हें मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में किस तरह से कमी लाना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया है. अभी वह अपने क्षेत्र में काम कर रही हैं और इसका फायदा भी मिल रहा है. प्रशिक्षित जीएनएम प्रसव के दौरान आने वाली जटिलता को चिन्हित कर रही हैं. जटिलता चिन्हित हो जाने से प्रसव का प्रबंधन आसान हो जाता है. इस वजह से मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती है.

लेबर रूम में काम करने का दिया गया है प्रशिक्षण: डॉक्टर संजय महापात्रा ने बताया, नवनियुक्त जीएनएम को लेबर रूम में किस तरह से काम करना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया है. अभी वह लेबर रूम में काम कर प्रसव के दौरान आने वाली समस्याओं की पहचान कर रही है. समस्याओं की पहचान समय पर हो जाने से प्रसव का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो जाता है. इससे मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल रही है.

नवजात शिशु के पुनर्जीवन की प्रक्रिया में दे रही योगदान: डॉक्टर संजय महापात्रा ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान जीएनएम को बताया गया था कि नवजात शिशु के पुनर्जीवन की प्रक्रिया जन्म के 15 मिनट बाद कैसे की जाती है. इसे करके भी दिखाया गया था, ताकि प्रशिक्षण लेने वाली जीएनएम अपने-अपने क्षेत्र में इस पर ठीक तरीके से अमल कर सकें. अभी वह अपने क्षेत्र में इस पर अमल कर रही हैं. इससे शिशु मृत्यु दर को काम करने में काफी मदद मिल रही है.

अगले दौर का प्रशिक्षण जल्द: डॉ महापात्रा ने बताया कि पहले चरण का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी नई जीएनएम को दूसरे चरण का प्रशिक्षण इसी माह दिया जाएगा. उस प्रशिक्षण में इन लोगों को मातृ और शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए कुछ और तरीके बताए जाएंगे. साथ ही इस काम से जुड़ी जटिलताओं के बारे में बताया जाएगा. इसके बाद वे लोग पूरी तरीके से प्रशिक्षित हो जाएंगे जिसका फायदा जिले के लोगों को मिलने लगेगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें