नियमित टीकाकरण कार्यक्रम- के तहत जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लगाया गया टीका

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– 12 अलग – अलग बीमारियों से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं व बच्चों को लगाया जाता है टीका

– कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए किया गया टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन

लखीसराय-

शनिवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लगने वाले टीका के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया की गई। इस कार्यक्रम में संबंधित आंगनबाड़ी क्षेत्र की कि एएनएम और सेविका – सहायिका ने महत्वपूर्ण भूमिका भुमिका निभाते हुए गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीका लगाया। इस अवसर पर टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गर्भावस्था के दौरान खानपान, रहन-सहन सहित बच्चों के समुचित भोजन और रखरखाव से सम्बंधित आवश्यक जानकारियाँ भी दी गयी ।

जिले के सभी पीएचसी क्षेत्र अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ नियमित टीकाकरण का आयोजन : –
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी क्षेत्र अंतर्गत ऑगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक सलाह देते हुए संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक किया । उन्होंने सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही प्रसव कराने की सलाह दी।

सुरक्षित प्रसव के लिए पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार जरूरी :-
नियमित टीकाकरण के लिए आयी गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि सुरक्षित प्रसव के लिए पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आहार लेना जरूरी है। क्योंकि, स्वस्थ शरीर वाली माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है और सुरक्षित व सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सकता है।

स्वच्छता पर दिया गया बल : –
टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता पर भी बल दिया गया। इसको ले गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत साफ- सफाई के साथ ही आसपास के परिसर के साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखने को कहा गया ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं हों।

इस दौरान कोविड-19 के गाइड लाइन का रखा गया ख्याल : –
टीकाकरण के दौरान कोविड-19 के हर मानकों का पालन किया गया। ताकि संक्रमण की का संभावना खतरा उत्पन्न नहीं हो सके सकें। इसके साथ ही टीकाकरण के लिए केंद्र पर आई गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए कोविड-19 से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

संस्थागत प्रसव को ले किया गया जागरूक :-
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया गया। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।

सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी : –
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के प्रसव पूर्व जाँच कराने के महत्व के बारे भी बताया । उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था करने की भी जानकारी दी ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से यहां अपना जाँच करा सकें। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि प्रत्येक माह की 09 तारीख को सभी पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की कि एएनसी जांच की जाती है । इसके साथ मौके पर मौजूद चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दी जाती है।

कोरोना काल में इन मानकों का पालन कर रहें कोविड 19 के संक्रमण से दूर : –
हमेशा दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का करें पालन ।
– भीड़ वाले जगहों पर जाने से करें परहेज ।
– अनिवार्य रूप से करें मास्क का उपयोग ।
– एक निश्चित अंतराल के बाद लगातार अपने हाथों को साबून या अल्कोहल युक्त पदार्थों से करें साफ।
– अपने ऑख, नाक, मुँह को अनावश्यक छूने से बचें।
– किसी से बातचीत करने के दौरान आवश्यक दूरी का रखें ख्याल

कोरोना टीकाकरण को लेकर सभी सरकारी कर्मचारियों की बनेगी सूची

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-टीकाकरण को लेकर सदर प्रखंड के अधिकारियों की हुई बैठक

-पहले चरण का काम हो चुका है पूरा दूसरे चरण की चल रही तैयारी

बांका-

कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग जोर-शोर से तैयारी कर रहा है. पहले चरण की सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दूसरे विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर दूसरे चरण की तैयारी में लग गए हैं. इसी सिलसिले में सदर प्रखंड के सभी अधिकारियों की शनिवार को बैठक हुई. बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी मौजूद थे.
कोरोना टीकाकरण को लेकर सरकारी कर्मचारियों की सूची बनाकर रखने को कहा-
बैठक में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने सभी अधिकारियों को कोरोना टीकाकरण को लेकर सरकारी कर्मचारियों की सूची बनाकर रखने को कहा.डॉ चौधरी ने कहा कि पहले चरण में सभी स्वास्थ्यकर्मियों को टीका पड़ेगा और दूसरे चरण में बुजुर्ग, गंभीर बीमारी से पीड़ित और पहले के कोरोना संक्रमित के साथ सभी सरकारी कर्मचारियों को टीका दिया जाएगा. इसे लेकर अभी से ही तैयारी शुरू कर देने की जरूरत है.अगर अभी से पूरी तैयारी रहेगी तो टीका आ जाने के बाद टीकाकरण में सुविधा होगी.

प्रखंड कृषि पदाधिकारी को स्टोर तैयार रखने को कहा: बैठक के दौरान डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि कोरोना का टीका जब आ जाएगा तो उसे जिला प्रतिरक्षण कार्यालय में रखा जाएगा. वहां पर इसके लिए पूरी व्यवस्था की गई है. अगर जरूरत पड़ी तो पशुपालन विभाग के कार्यालय का भी इस्तेमाल किया जाएगा.वहां पर भी फ्रीजर समेत कई सामान उपलब्ध हैं, जिससे टीका को सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है.इसे लेकर प्रखंड कृषि पदाधिकारी को स्टोर रूम को तैयार रखने को कहा गया है.

पहले चरण के लिए सूची हो चुकी है तैयार: डॉ चौधरी ने बताया कि पहले चरण में सरकारी और निजी स्वास्थ्यकर्मियों को टीका दिया जाएगा. इसे लेकर सूची तैयार हो गई है.सूची को वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है. टीका आ जाने के बाद कैंप लगाकर टीकाकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा. टीकाकरण को लेकर सरकार के हर निर्देशों पर हमलोग नजर रख रहे हैं. जैसे-जैसे निर्देश आता है उसको हमलोग फॉलो करते जा रहे हैं.| अब हमलोग टीका आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

अभी भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें: बैठक में मौजूद शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. बजरंग गुप्ता ने बताया कि टीका आने के बाद कोरोना की चेन टूटेगी और लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन तब तक लोगों को कोरोना को लेकर जारी की गई गाइडलाइन का हर हाल में पालन करना चाहिए|. ऐसा करने से न सिर्फ लोग कोरोना से बचे रहेंगे, बल्कि इसकी चेन भी नहीं बढ़ेगी. वैसे भी साफ-सफाई रखने और मास्क पहनने से न सिर्फ कोरोना से बचाव होता है, बल्कि अन्य दूसरी संक्रामक रोगों से भी हमलोग बचे रहते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

“न्यूट्रीउत्सव 2020” पर दो दिवसीय वेबिनार का हुआ समापन

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• पोषण को जन जन तक पहुंचाने के लिए सबका सहयोग जरुरी- डॉ. अनुपम
• रक्तचाप की समस्या को हलके में न लें- डॉ. आशीष सिन्हा
• पोषण को भोजन में शामिल कर करें संक्रमण से बचाव- डॉ. प्रमिला प्रसाद
पटना
कोविड-19 वैश्विक महामारी ने पोषण की महत्ता को सबके सामने उजागर किया है. समुचित पोषण स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इस बात को सभी जानते हुए भी अपने दैनिक खानपान में पोषक तत्वों को नियमित रूप से शामिल करने की जरुरत नहीं समझते. यह बात वैज्ञानिक शोधों और चिकित्सकों द्वारा साबित की जा चुकी है कि समुचित पोषण हमें कोविड-19 के अलावा भी कई रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है. पोषण के महत्त्व को समुदाय के सामने उजागर करने के उद्देश्य से इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर और अलाइव एंड थराइव के तत्वावधान में दो दिवसीय वेबिनार “न्यूट्रीउत्सव 2020” का आयोजन किया गया. इस वेबिनार की थीम अथवा विषय “समुचित पोषण द्वारा स्वस्थ जीवन- कोविड-19 के समय की चुनौतियाँ और अवसर” रखा गया है.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के नतीजे चुनौतीपूर्ण:
वेबिनार में अपने संबोधन के दौरान अलाइव एंड थराइव की वरीय राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने कहा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के नतीजे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के मुकाबले मातृ एवं शिशु पोषण के सूचकांक में बहुत उत्साहवर्धक स्थिति नहीं प्रस्तुत करते हैं. पोषण के सन्देश को घर घर तक पहुंचाने में सभी सहयोगी संस्थाओं का सहयोग अहम् होगा. किशोरी पोषण पर भी ध्यान देने की जरुरत है क्यूंकि एक पोषित किशोरी ही आगे चलकर पोषित माता बनती है और माँ और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है.
रक्तचाप की समस्या साबित हो सकती है घातक:
वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रख्यात ह्रदय रोग विशेषग्य डॉ. आशीष सिन्हा ने बताया लोगों को रक्तचाप की समस्या को हलके मंु लेने की आदत होती है. यह चिंताजनक स्थिति है क्यूंकि उच्च रक्तचाप से हृदयघात, लकवा, हैमरेज आदि जैसी घातक समस्या का सामना करना पड़ सकता है. जरुरी है की रक्तचाप की नियमित जांच की जाए और चिकित्सीय परामर्श का सख्ती से पालन किया जाए.
नियमित खानपान में पोषण को शामिल कर संक्रमण से पायें सुरक्षा:
इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर की उपाधयक्ष डॉ. प्रमिला प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा मजबूत प्रतिरोधक क्षमता के लिए नियमित खान पान में पोषक तत्वों को शामिल करना ही हितकर है. पोषक आहार कई तरह के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है और कोविड-19 महामारी के समय में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गयी है.
डायबिटीज से बचाव जरुरी:
पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के चीफ डाइटिशियन एंड एच ओ डी डॉ संजय कुमार मिश्रा ने डायबिटीज का कारण और उसे कम करने के उपाय पर बोलते हुए कहा आज देश में हर पांचवा व्यक्ति डायबिटीज से ग्रसित है। उन्होंने बताया अत्यधिक प्यास लगना, अत्यधिक भूख लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन में कमी होना, जल्दी थकावट महसूस करना एवं घाव का जल्दी ठीक ना होना डायबिटीज का मुख्य लक्षण है। डॉ मिश्रा ने ग्राफ के माध्यम से डायबिटीज के शुरुआती लक्षण और पूर्ण रूप से डायबिटीज ग्रसित होने के बारे में जानकारी दिया। साथ ही साथ उन्होंने डायबिटीज को कंट्रोल करने का भी उपाय बताएं, जिसमें पहले डाइट और एक्सरसाइज से शुरुआती लक्षणों को कंट्रोल करने की सलाह दिया। यदि उसके बावजूद भी कंट्रोल नहीं होता है तो डॉक्टरी सलाह के बाद दवाई और जागरूकता से उसे कंट्रोल करने की सलाह दी।

वेबिनार में अलाइव एंड थराइव की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, इंदिरा गाँधी अस्पताल से पल्लवी, डॉ. मनोज कुमार, सेक्रेटरी इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन के साथ अन्य एक्सपर्ट मौजूद थे.

कोरोना काल और सर्दियों के मौसम के बीच ट्यूबरक्लोसिस के खतरे से भी रहें सावधान

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– दो हफ्ते से अधिक समय से किसी प्रकार की सर्दी – खांसी होने पर तत्काल कराएं जांच, हो सकता है टीबी का खतरा
– टीबी का कोई भी लक्षण मिलने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर तत्काल कराएं बेहतर इलाज

लखीसराय-
जिले में सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ हीं लोगों में सर्दी- खांसी का होना आम हो गया है। उसमें भी उस समय जब पूरा देश पहले से ही कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से परेशान है। ऐसी स्थिति में लोगों को कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच टीबी जैसी बैक्टेरिया जनित संक्रामक बीमारी के प्रति भी काफी सावधान रहने की आवश्यकता है।

जिले के गैर संचार रोग पदाधिकारी डॉ. सुरेश शरण ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टेरिया के कारण होता है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है क्योंकि हवा के जरिये यह बीमारी एक से दूसरे इंसान के अंदर फैलता है। टीबी के मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह, नाक से निकलने वाली बारीक बूंदें इन्हें फैलती है। फेफड़ों के अलावे कोई दूसरा टीबी इतना संक्रामक नहीं होता है।

क्या है ट्यूबरक्लोसिस ?
यह एक बैक्टेरिया जनित एक संक्रामक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में संक्रमण होता है। इसे सामान्य रूप में यक्ष्मा, तपेदिक, एमटीबी या टीबी भी कहा जाता है। यह एक आम बीमारी है जो कई मामलों में घातक भी साबित होती है। यह बीमारी माइक्रो बैसिलस बैक्टेरिया के कारण होता है। यह बीमारी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। सही समय पर सही सही इलाज नहीं होने पर उसे बेकार भी कर सकता है। फेफड़ों के अलावे ये ब्रेन, यूटरस, मुंह, लीवर, गला आदि में भी हो सकता है। ज्यादातर मामलों में मरीजों में इसका कोई लक्षण देखने को नहीं मिलता है। लेकिन जहां लक्षण दिखाई देते है वो इस प्रकार के होते हैं –
लक्षण:
सर्दी – खांसी का होना : डॉ. सुरेश शरण ने बताया टीबी की वजह से फेफड़ा प्रभावित होता है। शुरू में मरीज को सुखी सूखी खांसी होती है फिर कुछ हफ्तों के बाद खांसी के साथ बलगम और खून भी आना शुरू हो जाता है। दो हफ्ते तक ऐसी स्थिति रहने के बाद तत्काल बलगम कि की जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा
– पसीना आना,
– बुखार का रहना,
– थकावट महसूस होना,
– वजन का घटना,
– सांस लेने में तकलीफ होनेहोना लक्षणों में शामिल है।

ट्यूबरक्लोसिस से बचाव के तरीके :
– ट्यूबरक्लोसिस के खतरे से बचाने के लिए बच्चे के जन्म के बाद हीं बीसीजी का टीका लगवाना आवश्यक है।
– टीबी चुकीचूंकि सांस सबंधी बैक्टेरिया जनित संक्रामक बीमारी है। इसका सबसे अधिक प्रभाव फेफरों पर पड़ता है इसलिए बीड़ी- सिगरेट सहित अन्य धूम्रपान से पूरी तरह परहेज बरतना आवश्यक है।
– टीबी से संक्रमित मरीज हमेशा अपने साथ एक प्लास्टिक का बैग रखें और उसमें ही थूकने के बाद उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह से बंद करने के बाद डस्टबीन में डालें। जहां -तहां थूकने से परहेज करें।
– टीबी मरीज हमेशा हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में हीं रहें।
– टीबी का मरीज हमेशा मास्क या रुमाल या अन्य कपड़े से अपने मुंह एवं नाक को ढकें ताकि मुंह के ड्रॉपलेटस के जरिये संक्रमण न फैल सके।
– टीबी का मरीज हमेशा ताजा औऱ पोस्टिकपौष्टिक खाना हीं खाये ताकि उसके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सके और वो स्वस्थ्य रह सके।

कोरोना को मात देने में भारत विश्व भर में सबसे आगे, रिकवरी रेट 96% से हुआ अधिक

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• पीआईबी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी जानकारी
• एक्टिव केसेस की संख्या घटकर पहुंची 2.57 लाख
• ठीक हुए कुल मामले सक्रिय मामलों की तुलना में 96 लाख से अधिक
• देशभर में 98 लाख से अधिक लोग उबर चुके संक्रमण से
• ब्रिटेन के म्यूटेंट वायरस से देश के 25 लोग मिले संक्रमित

पटना-

भारत ने कोविड के खिलाफ अपनी जंग में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। मरीजों के ठीक होने की दर आज राष्ट्रीय स्तर पर 96%(96.04%) को पार कर गई, जो कि विश्व में किसी भी देश द्वारा प्राप्त सबसे अधिक रिकवरी दर में से एक है। मरीजों के ठीक होने की संख्या में वृद्धि होने के चलते रिकवरी दर में सुधार हुआ है। वहीं ठीक हुए कुल मामलों की संख्या 98.6 लाख (98,60,280) को पार कर गई है, जो कि विश्व में सर्वाधिक है। सक्रिय मामलों और ठीक हो रहे मरीजों के मामलों में अंतर बढ़ता जा रहा है और यह 96,02,624 पर आ गया है। एक उपलब्धि यह है कि सक्रिय मामलों की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट आई है और वह घटकर 2.57 लाख हो गई है। देश में कुल पॉजिटिव मामले 2,57,656 हैं, जो कि कुल मामलों का सिर्फ 2.51 प्रतिशत हैं।

24 घन्टे में 21822 नए मामले, 26139 मरीज हुए ठीक:

बड़ी संख्या में कोविड मरीजों के प्रतिदिन ठीक होने के कारण मृत्यु दर में भी पर्याप्त गिरावट आ रही है और भारत में सक्रिय मामलों के दर्ज होने का रूख गिरावट की ओर है। पिछले 24 घंटों में देशभर में 21,822 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 26,139 ठीक हुए नए मामले दर्ज हुए हैं। इस तरह सक्रिय मामलों की संख्या में 4,616 की कुल गिरावट दर्ज की गई है।

देश के 10 राज्यों में लगभग 78% नए मरीज हुए ठीक:

नए ठीक हुए मरीजों के 77.99 प्रतिशत मामले 10 राज्यों /केन्द्रशासित प्रदेशों में पाए गए हैं। केरल ने जहां एक दिन में ठीक हुए सर्वाधिक 5,707 मामले दर्ज किए हैं, वहीं महाराष्ट्र ने 4,913 और छत्तीसगढ़ ने 1,588 मामले दर्ज किए हैं। इसी तरह वेस्ट बंगाल में 1557, कर्नाटक में 1217, उत्तरप्रदेश में 1202, राजस्थान में 1142, मध्यप्रदेश में 1061, तमिलनाडु में 1060 एवं दिल्ली में 940 मामले दर्ज किए हैं.

केरल में सर्वाधिक 6268 नए मामले प्रतिदिन दर्ज

नए मामलों में से 79.87 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में दर्ज किए गए हैं। केरल में सबसे अधिक 6,268 नए मामले प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्रर का नंबर है, जहां प्रतिदिन 3,537 नए मामले दर्ज हुए हैं। इसी तरह, वेस्ट बंगाल में 11718, छत्तीसगढ़ में 1069, उत्तरप्रदेश में 1025, कर्नाटक में 973, तमिलनाडु में 945, मध्यप्रदेश में 866, गुजरात में 799, एवं राजस्थान में 770 कोरोना के नए मामले सामने आये हैं.

महारष्ट्र में सबसे अधिक 90 नए लोगों की हुयी मौत

पिछले 24 घंटों में 299 मामलों में मौतें दर्ज हुई हैं। इनमें से 80.60 प्रतिशत मौतें 10 राज्यों/केन्द्रे शासित प्रदेशों में हुई हैं। महाराष्ट्र में एक दिन में सबसे ज्यािदा 90 मामलों में मौतें दर्ज की गई हैं। केरल और पश्चिम बंगाल दोनों जगह एक दिन में 28 मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं दिल्ली में 21, तमिलनाडु में 17, छत्तीसगढ़ में 14, मध्यप्रदेश में 13, उत्तरप्रदेश में 12, उत्तराखंड एवं पंजाब में 9 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुयी है.

जीनोम अनुक्रमण के बाद नए म्यूटेंट वायरस के कुल 25 मामलों का पता लगा

10 सरकारी प्रयोगशालाओं के संघ-आईएनएसएसीओसी ने अभी तक जीनोम अनुक्रमण के बाद ब्रिटेन से आए नए म्यूटेंट वायरस के कुल 25 मामलों का पता लगाया हैं। चार नए मामलों का पता पुणे स्थिति एनआईवी ने लगाया है और एक नये मामले का अनुक्रमण दिल्ली के स्थित आईजीआईबी ने किया है। सभी 25 लोगों को स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में एकांत (आइसोलेशन) में रखा गया है।

“न्यूट्रीउत्सव 2020” पर दो दिवसीय वेबिनार का हुआ शुभारंभ

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• मातृ पोषण है आने वाले पीढ़ी के सेहत की कुंजी- डॉ. सेबंती घोष
• नियमित खानपान में प्रोटीन का समावेश जरुरी- डॉ. जगमीत मदान
• “समुचित पोषण द्वारा स्वस्थ जीवन- कोविड-19 के समय की चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर वेबिनार का हुआ आयोजन
पटना-

कोविड-19 वैश्विक महामारी ने पोषण की महत्ता को सबके सामने उजागर किया है. समुचित पोषण स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इस बात को सभी जानते हुए भी अपने दैनिक खानपान में पोषक तत्वों को नियमित रूप से शामिल करने की जरुरत नहीं समझते. यह बात वैज्ञानिक शोधों और चिकित्सकों द्वारा साबित की जा चुकी है कि समुचित पोषण हमें कोविड-19 के अलावा भी कई रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है. पोषण के महत्त्व को समुदाय के सामने उजागर करने के उद्देश्य से इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर और अलाइव एंड थराइव के तत्वावधान में दो दिवसीय वेबिनार “न्यूट्रीउत्सव 2020” का शुभारम्भ किया गया. इस वेबिनार की थीम अथवा विषय “समुचित पोषण द्वारा स्वस्थ जीवन- कोविड-19 के समय की चुनौतियाँ और अवसर” रखा गया है.
अपने आस पास पहचाने पोषण के स्रोत:
वेबिनार का उद्घाटन करते हुए जयप्रकाश यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. फारूक अली ने बताया समुदाय भोजन भ्रान्ति से ग्रसित है. लोगों को यह समझने की जरुरत है कि भोजन में पोषक तत्वों का समावेश करने हेतु साधन हमारे आसपास उपलब्ध है और इसके लिए हमेशा महंगे फल अथवा ड्राई फ्रूट खाने की जरुरत नहीं है. पोषक तत्वों से उपयुक्त खाद्य पदार्थों का चयन करते समय उपलब्धता, कीमत और उसके पाचन प्रक्रिया को समझना जरुरी है. कोरोना वैश्विक महामारी ने हमें पोषण के महत्व से अवगत कराया है और प्रोटीन का समावेश अपने दैनिक आहार में कर हम जरुरी पोषण प्राप्त कर सकते हैं.
मातृपोषण है आने वाले पीढ़ी की सेहत की कुंजी:
वेबिनार को संबोधित करते हुए अलाइव एंड थराइव की राष्ट्रीय निदेशक डॉ. सेबंती घोष ने बताया समुचित मातृ पोषण, आने वाले पीढ़ी की सेहत की कुंजी है और इस बात को समुदाय तक पहुंचाना पोषण के क्षेत्र से जुड़े लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है.किशोरी पोषण एवं महिला का गर्भधारण से पहले से पोषण पर ध्यान देना आने वाली पीढ़ियों को पोषित एवं स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है. जीवन के प्रथम हजार दिन का सही उपयोग एवं प्रबंधन एक सुपोषित जीवन और स्वस्थ समाज की नींव रखने में अहम् भूमिका निभाते हैं. डॉ. घोष ने बताया बिहार में 60 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित है जो चिंताजनक स्थिति को उजागर करता है. मात्र 9 फीसदी महिलाएं अपने गर्भकाल में 180 आयरन की गोली का सेवन करती हैं जिससे उनमे एनीमिया की शिकायत सामान्यतः देखी जाती है. कोरोना महामारी के समय समुचित मातृपोषण का महत्त्व और बढ़ जाता है.
नियमित खानपान में प्रोटीन का समावेश जरुरी:
नियमित खानपान में प्रोटीन की महत्ता को उजागर करते हुए इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जगमीत मदान ने बताया रोज का भोजन हमारे लिए प्रोटीन और पोषण का स्रोत होता है. हमें अपने भोजन की थाली को देखकर यह सवाल करना चाहिए कि मेरी थाली में प्रोटीन कहाँ है, और अगर नहीं है तो उसे तुरंत अपने दैनिक खानपान में समाहित करने की जरुरत है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्रोटीन की भूमिका अहम् होती है और विटामिन सी, डी और जिंक को अपने हर आहार में शामिल करने की जरुरत है.
2030 तक होगा भूख का अंत:
वेबिनार को संबोधित करते हुए यूनिसेफ के न्यूट्रीशन एक्सपर्ट रवि पाढ़ी ने कहा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के तहत 2030 तक भूख का अंत का लक्ष्य रखा गया है. तात्पर्य यह है कि समुदाय में हाशिये पर रह रहे लोगों के बीच भोजन और पोषण दोनों पहुंचाने की जरुरत है और यह सामूहिक प्रयास से ही संभव है.
वेबिनार में अलाइव एंड थराइव की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, इंदिरा गाँधी अस्पताल से पल्लवी, डॉ. मनोज कुमार, सेक्रेटरी इंडियन डाइटएटिक एसोसिएशन के साथ अन्य एक्सपर्ट मौजूद थे

गर्भनिरोधक के उपयोग से अनचाहे गर्भ में बचाव, प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर करने में सहयोग

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-गर्भनिरोधक साधनों से कुल प्रजनन दर में आएगी कमी
-जिले में गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में 32 प्रतिशत तक की वृद्धि
– मिशन परिवार विकास के तहत विशेष सुविधा उपलब्ध

लखीसराय-
गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग से अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है। अनचाहे गर्भ से जहां माताओं को बच्चों के बेहतर देखभाल में मुश्किलें आती हैं , वहीं इससे माता एवं शिशु के स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना भी बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में 21 करोड़ से अधिक महिलाएं अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं। जिसका परिणाम राज्य के साथ जिले में भी देखने को मिला रहा है।
जिले में गर्भनिरोधक के उपयोग में बढ़ोतरी :
परिवार नियोजन के बेहतर परिणाम के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। सरकारी प्रयासों का ही ये परिणाम है कि सामुदायिक जागरूकता में कई चुनौतियों के बीच गर्भनिरोधक के उपयोग के साधन ने मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार लखीसराय जिले में 15 साल से 49 साल तक की 34.7 प्रतिशत महिलाएं किसी ना किसी गर्भनिरोधक साधन का उपयोग करती थी वहीं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार 67.0 प्रतिशत महिलाएं किसी ना किसी गर्भनिरोधक साधन का उपयोग कर रही हैं । जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार 34.4 प्रतिशत महिलाएं नवीन गर्भनिरोधक साधन का इस्तेमाल करती थीं। वहीं अब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार 50.4 प्रतिशत महिलाएं इस साधन का उपयोग कर रही हैं ।
कंडोम बॉक्स एक अच्छी पहल : जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया गर्भ निरोधक साधनों का उपयोग जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसको लेकर जिला स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर तक परिवार नियजोजन कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ।
वर्ष 2025 तक प्रजनन दर 2.1 करने का लक्ष्य: मिशन विकास परिवार के तहत वर्ष 2025 तक बिहार के प्रजनन दर को 2.2 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही परिवार नियोजन कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करने के लिए मिशन विकास परिवार के तहत कुछ विशेष सेवाओं को शामिल किया गया है। जिसमें नवीन गर्भनिरोधक साधन अंतरा एवं छाया, सारथी वैन से परिवार नियोजन पर जागरूकता, नवदंपति के लिए नयी पहेली किट एवं सामुदायिक जागरूकता के लिए सास-बहू सम्मेलन जैसी नवीन गतिविधियों को शामिल किया गया है।
गर्भनिरोधक के फ़ायदे
 मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी
 प्रजनन संबंधित स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाव
 अनचाहे गर्भ से मुक्ति
 एचआईवी-एड्स संक्रमण से बचाव
 किशोरावस्था गर्भधारण में कमी
 जनसंख्या स्थिरीकरण में सहायक

गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद होने वाली परेशानियां से अवगत हुईं एएनएम

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-सदर अस्पताल में चार दिवसीय अमानत प्रशिक्षण का समापन
-प्रशिक्षण लेने वाली एएनएम अपने- अपने क्षेत्र में इस पर करेंगी अमल

भागलपुर-

सदर अस्पताल में चल रहे चार दिवसीय अमानत प्रशिक्षण का गुरुवार को समापन हो गया.| चार दिनों तक एएनएम को केयर इंडिया के मेंटर ने सुरक्षित प्रसव के तरीके, नवजात शिशु को पुनर्जीवन, गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल और प्रसव के बाद होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने के तरीके बताए.|

160/110 से अधिक हो बीपी तो हो जाएं सावधान: प्रशिक्षण के अंतिम दिन एएनएम को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान कभी-कभी महिलाओं को चमकी की समस्या आने लगती है|. इसकी पहचान कैसे की जाए और इससे कैसे निजात मिले.| केयर इंडिया के मेंटर ने बताया कि सिर में दर्द होना, धुंधला दिखाई देना या फिर सूजन आने लगे तो इससे चमकी आने के संकेत मिलने लगते हैं.| साथ ही बीपी 160/ 110 से अधिक होने पर भी ऐसी समस्या आती है.| एमएम को ऐसी परिस्थिति से निपटने के तरीके बताए गए.|

प्रसव के बाद 6 सप्ताह तक रहें सावधान: केयर इंडिया के मेंटर ने बताया कि प्रसव के बाद 6 सप्ताह तक किस तरीके से निगरानी करनी है प्रसव का खतरा रहता है. इसे लेकर एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया| कि 6 सप्ताह तक किस तरीके से निगरानी करनी है, जिससे कि रक्तस्राव नहीं हो|. खासकर प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल किस तरीके से करनी है, यह बताया गया|.

स्वस्थ बच्चे का कैसे होता है जन्म, एएनएम को दी जानकारी: इससे पहले सोमवार और मंगलवार को एएनएम को बताया गया कि सामान्य प्रसव से स्वस्थ बच्चे का कैसे जन्म होता है और प्रसव के बाद चिंतित मां की सम्मानपूर्वक तरीके से देखभाल कैसे की जाती है बताए गए.| प्रशिक्षण के पहले दिन एएनएम को नवजात शिशु के की पुनर्जीवन की प्रक्रिया जन्म के 15 मिनट बाद कैसे की जाती है, इसे भी बताया गया.| मंगलवार को प्रशिक्षण के दूसरे दिन इसे करके दिखाया गया, ताकि प्रशिक्षण लेने वाली एएनएम अपने-अपने क्षेत्र में इस पर ठीक तरीके से अमल कर सकें.|

गर्भावस्था के दौरान आने वाली समस्याओं से कराया गया अवगत: एएनएम को प्रशिक्षण दे रही केयर इंडिया की मेंटर वीणा मलिक, जैनब कमाल और पूनम कुमारी ने बताया कि मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य अमानत प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है.| चार दिनों तक हम लोगों ने एएनएम को गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक किन-किन बातों का ख्याल रखा जाता है, कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं और उससे निपटने के तरीके बताए.|अब ये लोग अपने- अपने क्षेत्र में जाकर इस पर अमल करेंगे|. साथ ही अपनी सहयोगी को इस बारे में बताएंगी.|

मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है मकसद: मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अमानत प्रशिक्षण की शुरुआत की गई थी.| अब इसका असर जिले में दिख रहा है.| प्रशिक्षण जब से शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी देखने में आ रही आई है|. अमानत प्रशिक्षण के जरिए केयर इंडिया की के मेंटर हर महीने एएनएम और जीएनएम को किसी एक चीज की जानकारी देती हैं जिसे वह अपने क्षेत्र में जाकर बाकी एएनएम और जीएनएम को बताती हैं.| इसे एक महीने तक फॉलो किया जाता है|. फिर दूसरे महीने किसी दूसरी चीज की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान एक सप्ताह तक दी जाती है.|

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 गाइडलाइन का पालन कराते हुए कक्षाओं का होगा संचालन

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जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में चल रहा है साफ- सफाई का काम

भागलपुर-

राज्य सरकार के निर्देश के बाद 4 जनवरी से सभी 9 से 12वीं कक्षा के स्कूल खुल रहे हैं. सरकार ने स्कूल खोलने के साथ कोविड-19 गाइडलाइन का पालन कराने का भी निर्देश दिया है. इसे लेकर जिले के स्कूलों में जोर-शोर से तैयारी चल रही है. अभी सभी स्कूलों में सफाई का काम चल रहा है. स्कूल परिसर से गंदगी को साफ किया जा रहा है तो वहीं शौचालय को भी स्वच्छ बनाया जा रहा है.

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा कि स्कूल खोलने को लेकर सारी तैयारी पूरी की जा रही है. सरकार के निर्देश के अनुसार सभी स्कूलों में कोरोना वायरस की गाइडलाइन का पालन करवाया जाएगा. बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. इस काम में शिक्षकों को थोड़ी मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी, इसे लेकर उन्हें मानसिक तौर पर तैयार रहना पड़ेगा.

कल जिले के प्रधानाचार्य की होगी बैठक: स्कूलों में छात्र-छात्राओं से कोरोना की गाइडलाइन का किस तरह से पालन करवाया जाएगा, इसे लेकर 2 जनवरी को बैठक बुलाई गई है. बैठक में सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को बुलाया गया है. सभी प्रधानाचार्य को सरकार के निर्देशों से अवगत कराया जाएगा. उन्हें समझाया जाएगा कि कोरोना के नियमों का किस तरह से पालन करवाना है.

50% छात्रों को है आने की अनुमति: शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार 1 दिन में एक स्कूल के 50% छात्रों को ही आने की अनुमति मिली है. इसे लेकर भी तैयारी की गई है. एक कक्षा के आधे छात्रों को 1 दिन बुलाई जाएगी. कक्षा के बचे हुए छात्र-छात्राओं को दूसरे दिन बुलाया जाएगा. अगर कक्षा में छात्रों की संख्या ज्यादा है और संख्या को आधा करने पर भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन नहीं हो सकेगा तो उस स्थिति में उस कक्षा को सप्ताह में 2 दिन ही कराई जाएगी.

निजी स्कूलों को भी कोरोना वायरस के नियमों का करना होगा पालन: जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि निजी स्कूलों से भी कोरोना वायरस की गाइडलाइन का पालन करवाया जाएगा. 2 जनवरी की बैठक में निजी स्कूलों के भी प्रधानाचार्य को बुलाया गया है. उन लोगों को भी सरकार के नियमों से अवगत कराया जाएगा. अगर इसमें विभाग की ओर से कोई मदद चाहिए होगी तो वह की जाएगी

कोविड-19 से बचाव को आने वाली वैक्सीन के सफल क्रियान्वयन के लिए युवाओं का सहयोग जरूरी

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– खगड़िया के कासिमपुर निवासी युवक बंटी कुमार ने कहा – वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को करेंगे जागरूक

– अफवाहों से लोगों को रहना चाहिए दूर, सही जानकारी से अवगत रहना जरूरी

खगड़िया, 31 दिसंबर, 2020
कोविड-19 से बचाव के लिए आने वाली वैक्सीन के वैक्सीनेशन के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग में कवायद तेज है। इसको लेकर युवाओं में खुशी देखी जा रही है। दरअसल, वैक्सीन का लंबे समय से लोगों को इंतजार है। क्योंकि, लोगों का मानना है कि वैक्सीन आने के बाद कोविड-19 से स्थाई निजात मिल सकती है। यही वजह है कि खासकर युवा वर्ग सहित हर तबके के लोगों में भारी उत्साह है। युवाओं में सिर्फ उत्साह ही नहीं है, बल्कि वह वैक्सीन आने तक लोगों को एहतियात जारी रखने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। ताकि यह संक्रामक बीमारी पुनः पाँव नहीं पसार सके ।

– वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को करेंगे जागरूक :-
खगड़िया के कासिमपुर निवासी युवक बंटी कुमार वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। ताकि वैक्सीन का सफल क्रियान्वयन हो सके और लोग अफवाहों से दूर रहें। कहा कि इसके लिए हर किसी को स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करना चाहिए। खासकर युवा वर्ग को वैक्सीनेशन की जानकारी लोगों तक पहुँचाने के लिए आगे आना चाहिए। जिससे कि समाज के हर तबके के लोग अफवाहों से दूर और सही जानकारी के करीब पहुँच सकें। दरअसल, समाज में किसी भी प्रकार की नई चीज आने के बाद तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो जाता है। इसलिए, इस तरह की समस्याएं उतपन्न नहीं हो। इसके लिए युवाओं को आगे आकर लोगों को जागरूक और सही जानकारी से अवगत कराने की जरूरत है।

– वैक्सीन आने तक एहतियात जारी रखने की जरूरत :-
खगड़िया के कासिमपुर निवासी युवक बंटी कुमार ने कहा कि वैक्सीन आने तक लोगों को एहतियात जारी रखने की जरूरत है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की समस्या उत्पन्न नहीं हो सके और पूरा समाज सुरक्षित रहे । कहा कि वैक्सीन आने की खबर से लोगों में उत्साह है। क्योंकि, लंबे समय के बाद कोविड-19 से स्थाई निजात की उम्मीद जगी है। वैसे लोगों को वैक्सीन आने बाद सतर्क रहना चाहिए।

– वैक्सीनेशन की सफलता के लिए सामाजिक सहयोग भी जरूरी :-
बंटी कुमार ने कहा कि वैक्सीनेशन की सफलता के लिए सामाजिक सहयोग भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की पहल से वैक्सीनेशन सफल नहीं हो पाएगा। समाज के हर तबके के लोगों को सहयोग करने की आवश्यकता है। इसके लिए वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना जरूरी है। ताकि लोग अफवाहों से पूरी तरह दूर रहें।

– वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होना जरूरी :-
बंटी कुमार ने कहा कि वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। समाज के शिक्षित युवाओं एवं बुद्धिजीवियों द्वारा वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने की जरूरत है। ताकि वैक्सीन आने के बाद समाज में किसी प्रकार के अफवाहों का दौर शुरू नहीं हो सके और समाज के हर तबके के लोग वैक्सीनेशन अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें ।

– हर किसी के लिए वैक्सीन जरूरी :-
वैक्सीन समाज के हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। वैक्सीन लगने के बाद ही लोगों को कोविड-19 से स्थाई निजात मिलेगी और लोग पूरी तरह स्वतंत्र होकर अपना कार्य कर सकेंगे। इसके लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।

– वैक्सीन का बेसब्री से है इंतजार :-
कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए लोगों को वैक्सीन आने का बेसब्री से इंतजार है। दरअसल, लोग लंबे समय से इस इंतजार में थे। जो अब दूर होगा और लोगों को स्थाई समाधान मिलेगा। किन्तु, वैक्सीन आने तक लोगों को सावधान और सतर्क रहना भी जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– जहाँ-तहाँ नहीं थूकें ।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।