कालाजार उन्मूलन की ओर अग्रसर है बिहार, अब मात्र 4 प्रखंड है  कालाजार से  प्रभावित 

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• बिहार में कालाजार  प्रभावित  प्रखंडों की संख्या 130 से घटकर  हुयी  4
• सिवान में मात्र एक प्रखंड है एंडेमिक
• सारण में  तीन प्रखंड है कालाजार से  प्रभावित
• वर्ष 2021 के लिए तैयार किया गया एक्शन प्लान
• सारण प्रमंडल के तीनों जिलों की हुई समीक्षा
सीवान-
कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग कृत संकल्पित है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के द्वारा कालाजार के प्रकोप के रोकथाम के लिए एनआईसी के माध्यम से वीडियो कन्फ्रेंसिंग की गयी। जिसमें जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन एवं अन्य स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा की गयी। सिवान के एनआईसी से बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी शामिल हुए। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने  बिहार के परिप्रेक्ष्य में प्रकाश डालते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को बताया  बिहार में 38 जिलों में से 33 जिला कालाजार से प्रभावित है। 2 सितंबर 2014 को कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की शुरूआत की गयी थी, उस समय 33 जिलों के 458 प्रखंड में से 130 प्रखंड कालाजार से प्रभावित थे। वर्ष 2014 में 8028 कालाजार के मरीज प्रतिवेदित हुए थे जो अब मात्र 1344 रह गये  हैं।
कालाजार प्रभावित प्रखंडों संख्या हुई 4:
स्वास्थ्य मंत्री मगंल पांडेय ने बताया कि बिहार में कालाजार अक्रांत प्रखंडों की 130 से घटकर मात्र 4 प्रखंड रह  गए हैं ।  उन्होंने  बताया  इसमें सारण जिले के गड़खा, परसा, दरियापुर, सिवान जिले के गोरेयाकोठी प्रखंड कालाजार  प्रभावित  है। कालाजार उन्मूलन को सफल बनाने के लिए वर्ष में चार बार सक्रिय मरीज खोज
अभियान चलाया जा  रहा है.वर्ष में  02  बार छिड़काव तथा प्रत्येक नये मरीज के प्रतिवेदित होने पर  दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है।कालाजार मरीजों के त्वरित खोज एवं ईलाज की व्यवस्था राज्य के 28 उपचार केन्द्रो पर रखी गयी है।
2021 तक कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य होगा पूरा:
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आश्वस्त किया  कि 2021 मेंकालाजार का उन्मूलन कर लिया जायेगा। इसके लिए एक्शन प्लान भी तैयार कर लिया गया है।केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के  विचारों  को ध्यानपूर्वक सुना एवं सुझाव देने के लिए  उन्हें  धन्यवाद दिया।
रोगी को श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाती है राशि:
कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं आशा को कालाजार के रोगियों को अस्पताल लाने की दिशा में प्रोत्साहन राशि 100 रुपये प्रति मरीज की दर से भुगतान किया जाता है। कालाजार मरीजों को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत भुगतान प्रक्रिया को भी सरल बना दिया गया है। अब नये संकल्प के आधार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भर्ती होने वाले मरीजों को वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा राशि का भुगतान किया जाता है।

कायाकल्प योजना को लेकर गोपालपुर, रंगरा और इस्माइलपुर पीएससी का निरीक्षण

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साफ सफाई से संतुष्ट निरीक्षण करने वाली टीम
जहां कमी दिखाई दी, वहां सुधार का दिया निर्देश
भागलपुर-
कायाकल्प अवार्ड को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को गोपालपुर, रंगरा और इस्माइलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया. इस दौरान अस्पतालों की साफ-सफाई से स्वास्थ्य विभाग की टीम संतुष्ट दिखी. जहां कमी नजर आई, वहां सुधार का निर्देश दिया गया. स्वास्थ्य विभाग की टीम में खगड़िया केयर इंडिया के डीटीएल डॉक्टर अभिनंदन, डीपीसी हेमलता जोशी, डीएएम पवन कुमार और भागलपुर केयर इंडिया से डीटीओ डॉक्टर राजेश कुमार और जिला स्वास्थ समिति के डॉ प्रशांत कुमार टीम में मौजूद थे. इस दौरान केयर इंडिया के एपिसोड जितेंद्र कुमार भी मौजूद थे.
गोपालपुर के पीएचसी प्रभारी डॉ सुधांशु कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल में साफ सफाई का जायजा लिया. टीम ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम भी गई. वहां पर साफ सफाई को देखा. टीम में मौजूद सभी लोग अस्पताल की साफ सफाई से संतुष्ट दिखे. उम्मीद है कि अच्छा परिणाम निकलेगा.
वहीं रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ रंजन कुमार ने कहा कि अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण के दौरान सभी मानकों पर खरा उतरा. टीम के सभी सदस्य यहां की व्यवस्था से संतुष्ट दिखे. उम्मीद है कि इसका बेहतर परिणाम आएगा.
इस्माइलपुर के डॉक्टर राकेश रंजन ने कहा कि सभी लोग अस्पताल में साफ सफाई से संतुष्ट थे. अस्पताल में कहीं कोई कमी नहीं थी. हमें उम्मीद है कि इस बार हम लोग कायाकल्प को लेकर बढ़िया प्रदर्शन करेंगे. वही निरीक्षण को आई केयर इंडिया भागलपुर के डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि तीनों ही अस्पताल में साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था थी. ऑपरेशन थिएटर साफ था. लेबर रूम में भी ठीक-ठाक व्यवस्था थी. जहां कुछ कमियां नजर आई, उसे दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है. टीम आज के प्रदर्शन के आधार पर नंबर देगी.
कायाकल्प मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य :
देश भर में कायाकल्प मूल्यांकन  कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य देश भर के स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ्ता की व्यवस्था रखने के साथ हीं लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रचार- प्रसार की व्यवस्था करना है. इसके साथ हीं संक्रमण की  रोकथाम की व्यवस्था,बायो मेडिकल कचरे का प्रबंधन करने के साथ हीं संक्रमण से रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कार्य करना है. कायाकल्प मूल्यांकन कार्यक्रम सदर अस्पताल  स्तर  पर 2015 में, पीएचसी स्तर  पर 2016 और सभी शहरी स्वास्थ्य केंद्रों तक 2017 तक शुरू किया गया. वर्ष  2015 के मई में तत्कालीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रकाश नड्डा ने देशस्तर पर कायाकल्प अवार्ड स्कीम की शुरुआत की थी

कोरोना काल और सर्दियों के मौसम मेंके बीच ट्यूबरक्लोसिस के खतरे से भी रहें सावधान

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– दो हफ्ते से अधिक समय से किसी प्रकार की सर्दी – खांसी होने पर तत्काल कराएं जांच, हो सकता है टीबी का खतरा
– टीबी का कोई भी लक्षण मिलने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर तत्काल कराएं बेहतर इलाज
लखीसराय, 30 दिसंबर : जिले में सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ हीं लोगों में सर्दी- खांसी का होना आम हो गया है। उसमें भी उस समय जब पूरा देश पहले से ही कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से परेशान है। ऐसी स्थिति में लोगों को कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच टीबी जैसी बैक्टेरिया जनित संक्रामक बीमारी के प्रति भी काफी सावधान रहने की आवश्यकता है।

जिले के ट्यूबरक्लोसिस विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश शरण ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टेरिया के कारण होता है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है क्योंकि हवा के जरिये यह बीमारी एक से दूसरे इंसान के अंदर फैलता है। टीबी के मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह, नाक से निकलने वाली बारीक बूंदें इन्हें फैलती है। फेफड़ों के अलावे कोई दूसरा टीबी इतना संक्रामक नहीं होता है।

क्या है ट्यूबरक्लोसिस ?
यह एक बैक्टेरिया जनित एक संक्रामक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में संक्रमण होता है। इसे सामान्य रूप में यक्ष्मा, तपेदिक, एमटीबी या टीबी भी कहा जाता है। यह एक आम बीमारी है जो कई मामलों में घातक भी साबित होती है। यह बीमारी माइक्रो बैसिलस बैक्टेरिया के कारण होता है। यह बीमारी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। सही समय पर सही सही इलाज नहीं होने पर उसे बेकार भी कर सकता है। फेफड़ों के अलावे ये ब्रेन, यूटरस, मुंह, लीवर, गला आदि में भी हो सकता है। ज्यादातर मामलों में मरीजों में इसका कोई लक्षण देखने को नहीं मिलता है। लेकिन जहां लक्षण दिखाई देते है वो इस प्रकार के होते हैं –
लक्षण:
सर्दी – खांसी का होना : डॉ. सुरेश शरण ने बताया टीबी की वजह से फेफड़ा प्रभावित होता है। शुरू में मरीज को सुखी सूखी खांसी होती है फिर कुछ हफ्तों के बाद खांसी के साथ बलगम और खून भी आना शुरू हो जाता है। दो हफ्ते तक ऐसी स्थिति रहने के बाद तत्काल बलगम कि की जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा
– पसीना आना,
– बुखार का रहना,
– थकावट महसूस होना,
– वजन का घटना,
– सांस लेने में तकलीफ होनेहोना लक्षणों में शामिल है।

ट्यूबरक्लोसिस से बचाव के तरीके :
– ट्यूबरक्लोसिस के खतरे से बचाने के लिए बच्चे के जन्म के बाद हीं बीसीजी का टीका लगवाना आवश्यक है।
– टीबी चुकीचूंकि सांस सबंधी बैक्टेरिया जनित संक्रामक बीमारी है। इसका सबसे अधिक प्रभाव फेफरों पर पड़ता है इसलिए बीड़ी- सिगरेट सहित अन्य धूम्रपान से पूरी तरह परहेज बरतना आवश्यक है।
– टीबी से संक्रमित मरीज हमेशा अपने साथ एक प्लास्टिक का बैग रखें और उसमें ही थूकने के बाद उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह से बंद करने के बाद डस्टबीन में डालें। जहां -तहां थूकने से परहेज करें।
– टीबी मरीज हमेशा हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में हीं रहें।
– टीबी का मरीज हमेशा मास्क या रुमाल या अन्य कपड़े से अपने मुंह एवं नाक को ढकें ताकि मुंह के ड्रॉपलेटस के जरिये संक्रमण न फैल सके।
– टीबी का मरीज हमेशा ताजा औऱ पोस्टिकपौष्टिक खाना हीं खाये ताकि उसके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सके और वो स्वस्थ्य रह सके।

कोविड-19 के मुश्किल दौर में भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे गौरव सोनी

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– तमाम चुनौतियों के बावजूद पूरी की दोहरी जिम्मेदारी
– आईसीडीएस कार्यालय में कार्यपालक सहायक पद पर हैं तैनात

खगड़िया, 30 दिसंबर, 2020
कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं जागरूकता मुहिम से जुड़े संदेशों को सामुदायिक स्तर तक पहुँचाने में जिले के आईसीडीएस कर्मियों का भी अहम योगदान रहा है। इन्होंने एक तरफ़ कोविड-19 की रोकथाम के लिए सरकारी गाइडलाइन को लोगों तक पहुँचाने का काम किया, वहीँ दूसरी तरफ़ इन गाइडलाइन का पालन करने के लिए भी लोगों को प्रेरित भी किया। ऐसे ही कर्मियों में खगड़िया जिला आईसीडीएस कार्यालय में कार्यपालक सहायक (डाटा ऑपरेटर) के पद पर तैनात गौरव सोनी का नाम शुमार है। इन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति की बदौलत अपनी दोहरी जिम्मेदारी पूरी करने में सफल रहे और विभागीय कार्यों के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के साथ- लोगों को न सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया बल्कि, बचाव की जानकारी देकर गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी किया है। लोगों के मन में कोविड-19 को लेकर चल रहे भय को भी दूर करने में गौरव सोनी की भूमिका अहम रही है ।

कोविड-19 के दौरान वाहन कोषांग की भी निभाई जिम्मेदारी :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कोविड-19 के दौर में कार्यपालक सहायक गौरव सोनी का जिला वाहन कोषांग में अतिरिक्त ड्यूटी लग गई। किन्तु, यह कभी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे और साकारात्मक आत्मबल से विभागीय कार्यों के साथ कोविड-19 के अतिरिक्त कार्यों को बखूबी अंजाम दिया।

– पूरी एहतियात के साथ अपने कार्यों पर डटे रहे गौरव :-
जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कोविड-19 के मुश्किल भरे दौर में भी गौरव सोनी खुद की भी सुरक्षा का ख्याल रखते हुए पूरी एहतियात के साथ अपने कार्यों पर डटे रहे। इस विषम परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। विभागीय जिम्मेदारी के साथ लोगों को कोविड-19 से बचाव को लेकर जागरूक करने की दोहरी जिम्मेदारी भी पूरी की। विभाग से जुड़ी सेविका-सहायिका समेत अन्य कर्मियों को भी जागरूक करते रहे और कर्मियों का हौसला बढ़ाते रहे।

जिम्मेदारी ने बढ़ाया हौसला और अपने कार्यों पर डटे रहें :-
कार्यपालक सहायक गौरव सोनी ने बताया स्थिति तो बहुत विषम थी। किन्तु, जिम्मेदारी ने उनके शरीर में नई ऊर्जा प्रदान की जिससे उनका हौसला बढ़ा और फिर वह अपने कार्यों में जुट गये। विभागीय कार्यों के -साथ विभागीय कर्मियों एवं आमलोगों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए वह जागरूक करते रहे ।

– कार्यों के दौरान एहतियात का रखा ख्याल :-
कार्यपालक सहायक गौरव सोनी ने बताया कार्य के दौरान वह खुद को भी संक्रमण से सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहे । इसके लिए हमेशा सेनेटाइजर और मास्क को सुरक्षा के रूप में साथ रखा। उनके अनुसार उनकी यही सतकर्ता उन्हें संक्रमण से दूर रखा. इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :

– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– आवश्यकतानुसार लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

कोरोना टीकाकरण को लेकर पहले चरण की तैयारी पूरी, दूसरे में लगाया जोर

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कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर कर रहा काम

दूसरे चरण में बुजुर्ग, गंभीर बीमारी के मरीज और पुलिसकर्मियों को लगेंगे टीके

बांका, 30 दिसंबर

कोरोना के टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है|. पहले चरण में जहां स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगेंगे, वहीं दूसरे चरण में जिले के बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति, कोरोना से पहले संक्रमित और पुलिसकर्मियों को टीके लगेंगे.| इसे लेकर विभाग जोर- शोर से तैयारी कर रहा है|. पहले चरण में जिन 10000 लोगों को टीके पड़ने हैं, उनकी सूची तैयार हो गई है|. अब दूसरे चरण को लेकर तैयारी चल रही है|.

सिविल सर्जन डॉक्टर सुधीर कुमार महतो ने बताया कि पहले चरण की तैयारी पूरी है|. हम लोग टीके का इंतजार कर रहे हैं|. साथ ही दूसरे चरण की तैयारी में भी लग गए हैं|. दूसरे चरण में बुजुर्गों के साथ गंभीर बीमारी के के मरीज को टीके पड़ेंगे|. इसके अलावा पुलिसकर्मी, तीनों सेना के जवान और पारा मिलिट्री के जवानों को भी दूसरे चरण में टीका दिया जाएगा|.

जिले में 6 जगहों पर टीका रखने की की व्यवस्था: डॉ. सुधीर महतो ने बताया कि जिले में 6 जगहों पर टीका को रखने के व्यवस्था की गई है|. बौसी रेफरल अस्पताल में टीका रखने का इंतजाम किया गया है|. वहां से बाराहाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भी कवर किया जाएगा|. इसी तरीके से रजौन में टीका रखने की व्यवस्था की गई है|. वहां से धोरैया का क्षेत्र कवर होगा|. कटोरिया से फुल्लीडुमर का क्षेत्र और शंभूगंज से अमरपुर का क्षेत्र कवर किया जाएगा|. इसके अलावा शहरी क्षेत्र में भी एक केंद्र बनाया गया है|. इस तरीके से पूरे जिले में टीकाकरण को लेकर तैयारी की गई है|.

टीकाकरण की तैयारी के बावजूद कोरोना को लेकर सतर्कता जारी: यह बात सही है कि टीकाकरण में अब ज्यादा दिन नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरत रहा है|. सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना जांच की व्यवस्था है|. पॉजिटिव आने वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है|. वहीं गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल में भर्ती करने की व्यवस्था है|.

कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: सिविल सर्जन ने बताया कि जब तक टीका नहीं आ जाता है, तब तक लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए|. घर से निकलते वक्त मास्क पहनना चाहिए|. भीड़भाड़ से बचना चाहिए|. साथ ही घर और बाहर में सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए|. ऐसा करने से ना सिर्फ कोरोना से बचाव होता है, बल्कि कई दूसरी संक्रामक बीमारियों से भी लोग बचे रहते हैं|.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.

• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.

• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें

• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.

• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.

• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.

• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें

• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों

• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें

• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन जीएवीआई बोर्ड के सदस्य नामित

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2021 से 31 दिसंबर 2023 तक करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

पटना-

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन को ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सिीन एंड इम्यू​नाइजेशन(जीएवीआई) द्वारा जीएवीआई बोर्ड के सदस्य के रूप में नामित किया गया है. वह अब दक्षिण पूर्व क्षेत्रीय कार्यालय सहित पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय का प्रति​निधत्व करेंगे. वर्तमान में कमान की बागडोर म्यांमार के मिंट हटवे के पास है. जीएवीआई के सदस्य के रूप में डॉ हर्षवर्धन 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2023 तक भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

आमतौर पर बोर्ड का सालाना अधिवेशन वर्ष में दो बार जून व नवंबर या दिसंबर माह में आयोजित किया जाता है. जबकि साल के मार्च अथवा अप्रैल में वार्षिक रिट्रीट का भी आयोजन किया जाता है. बोर्ड के सदस्यों को इन आयोजनों में स्वयं मौजूद रहना पड़ता है. जीएवीआई बोर्ड नीति निर्धारण में अपनी अहम भूमिका निभाता है. यह वैक्सीन एलायंस के कार्यकलापों की निगरानी व कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की देखरेख करता है.

जीवन रक्षा, गरीबी हटाने व दुनिया को महामारी के जोखिम से बचाने के लिए काम करने वाली जीएवीआई ने विश्व के गरीब देशों के 822 मीलियन बच्चों तक टीकाकरण की सुविधा मुहैया करायी है. तथा 14 मिलियन भविष्य में होने वाली मौतों को रोका है. वर्तमान में डॉ नोज़ी ओकोन्जो-लाविला जीएवीआई एलायंस बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर काम कर रहे हैं.

कोविड-19 से बचाव को आने वाली वैक्सीन की खबर से लोगों में जगी स्थाई समाधान की उम्मीद

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– युवाओं में है उत्साह, कहा कोविड-19 से मिलेगी स्थाई निजात

– खगड़िया के कासिमपुर के युवक राजेश कुमार ने कहा अभी एहतियात जारी रखने की जरूरत

खगड़िया-

कोविड-19 की आने वाली वैक्सीन को लेकर जहाँ स्वास्थ्य विभाग पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन के सफल संचालन के लिए आवश्यक तैयारियों में जुटा है । वहीं, वैक्सीन आने की खबर से लोगों में उत्साह का माहौल है। खासकर युवाओं में तो भारी उत्साह है। दरअसल, लंबे समय के बाद लोगों को कोविड-19 से स्थाई निजात की उम्मीद जगी है। वहीं, वैक्सीन आने तक लोगों को युवाओं द्वारा एहतियात जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना नहीं हो। दरअसल, युवाओं का मानना है कि एहतियात जारी रखने से संक्रमण की संभावना नहीं होगी ।

– अभी एहतियात जारी रखने की जरूरत :-
खगड़िया के कासिमपुर निवासी युवक राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि वैक्सीन आने की खबर से लोगों में उत्साह है। क्योंकि, लंबे समय के बाद कोविड-19 से स्थाई निजात की उम्मीद जगी है। । किन्तु, वैक्सीन आने बाद भी हर किसी को एहतियात जारी रखने की जरूरत है।
– वैक्सीनेशन के सफल संचालन के लिए सामाजिक सहयोग जरूरी :-
राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि वैक्सीनेशन के सफल संचालन के लिए सामाजिक सहयोग बेहद जरूरी है। क्योंकि, सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की पहल से वैक्सीनेशन सफल नहीं हो पाएगा। समाज के हर तबके के लोगों को सहयोग करने की आवश्यकता है। इसके लिए वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना जरूरी है।

– वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होना जरूरी :-
राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। ए समाज के शिक्षित युवाओं एवं बुद्धिजीवियों द्वारा वैक्सीनेशन की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने की जरूरत है। ताकि वैक्सीन आने के बाद समाज में किसी प्रकार के अफवाहों की समस्या उत्पन्न नहीं हो और समाज के हर तबके के लोग वैक्सीनेशन अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें ।

– हर किसी के लिए वैक्सीन जरूरी :-
वैक्सीन समाज के हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। वैक्सीन लगने के बाद ही लोगों को कोविड-19 से स्थाई निजात मिलेगी और लोग पूरी तरह स्वतंत्र होकर अपना कार्य कर सकेंगे। इसके लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।

– वैक्सीन का बेसब्री से है इंतजार :-
कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए लोगों को वैक्सीन आने का बेसब्री से इंतजार है। दरअसल, लोग लंबे समय से इस इंतजार में थे। जो अब दूर होगा और लोगों को स्थाई समाधान मिलेगा। किन्तु, वैक्सीन आने तक लोगों को सावधान और सतर्क रहना भी जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– जहाँ-तहाँ नहीं थूके।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

इटावा के डॉ. सूर्यकान्त बने आईएमए-एएमएस के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन

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भागलपुर-
प्रोफ़ेसर सूर्यकान्त को देश के चिकित्सकों की प्रमुख एवं प्रतिष्ठित संस्था इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन-एकेडमी ऑफ़ मेडिकल स्पेशियलिटीज (आईएमए-एएमएस) का राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन चुना गया है । डॉ. सूर्यकान्त लखनऊ के पहले चिकित्सक हैं, जिन्हें आईएमए की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चुना गया है । आईएमए देश की माडर्न सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन की एक राष्ट्रीय एवं प्रतिष्ठित संस्था है, जिस संस्थान में करीब चार लाख सदस्य हैं ।
​आईएमए की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हाल ही में चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें डॉ. सूर्यकान्त को वर्ष 2020-2022 के लिए यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है । कार्यकारिणी का गठन और प्रतिस्थापन सोमवार (28 दिसम्बर) को सम्पन्न हुआ । डॉ. सूर्यकान्त वर्ष 2018 में आईएमए लखनऊ के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में आईएमए के मानद प्रोफ़ेसर भी हैं । उन्होंने वर्ष 2019 में आईएमए एकेडमी ऑफ़ मेडिकल स्पेशियलिटीज उत्तर प्रदेश के चेयरमैन भी रह चुके हैं, इसके साथ ही वह कई वर्षों से आईएमए की उप्र और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं । हाल ही में डॉ. सूर्यकान्त को आईएमए की जर्नल के राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में भी नामित किया जा चुका है ।
डॉ. सूर्यकान्त के नाम दर्ज अन्य खास उपलब्धियां :
​डॉ. सूर्यकान्त इन्डियन कालेज ऑफ़ एलर्जी, अस्थमा एंड एप्लाइड इम्युनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसके साथ ही चेस्ट रोगों के विशेषज्ञों की राष्ट्रीय संस्थाओं नेशनल कालेज ऑफ़ चेस्ट फिजिशियन (एनसीसीपी) एवं इन्डियन चेस्ट सोसायटी के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं । इन्डियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी वह निभा चुके हैं । इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश ट्यूबरक्लोसिस स्टेट टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन का भी दायित्व वर्तमान में निभा रहे हैं । डॉ. सूर्यकान्त अब तक लगभग 127 अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के कई पुरस्कार व फेलोशिप अवार्ड से सम्मानित किये जा चुके हैं । इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा प्रतिष्ठित डाक्टर लैचमांस कैंसर अवेयरनेस एंड रिसर्च अवार्ड, आईएमए प्रेसिडेंट एप्रिसिएशन अवार्ड, आईएमए सीजीपी फेलोशिप व आईएमए के कई अन्य अवार्डों से सम्मानित किया गया है । इसके साथ ही वह 16 पुस्तकों के लेखक हैं और लगभग 500 से अधिक शोधपत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित कर चुके हैं और उनके नाम दो अमेरिकी पेटेंट भी शामिल हैं । डॉ. सूर्यकान्त जनसामान्य की चिकित्सकीय जागरूकता सम्बन्धी 600 से अधिक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित कर चुके हैं ।
​डॉ. सूर्यकान्त की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आईएमए के राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. अशोक राय, प्रदेश सचिव डॉ. जयंत शर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ए. एम. खान, डॉ. रुखसाना खान तथा आईएमए लखनऊ के पदाधिकारी डॉ. रमा श्रीवास्तव, डॉ. जी. पी. सिंह, डॉ. जे. डी. रावत तथा अन्य चिकित्सकों ने उन्हें बधाई दी है और लखनऊ के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि बताई है । डॉ. सूर्यकान्त ने आईएमए के सभी चिकित्सकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए यह आश्वासन दिया है कि अपने इस दो वर्ष के कार्यकाल में देश के विशेषज्ञ चिकित्सकों को देश की चिकित्सा क्षेत्र की प्रमुख बीमारियों के बारे में नवीनतम प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा समाज को विभिन्न बीमारी से बचाव के बारे में जागृत किया जाएगा ।

भागलपुर में कोरोना के 14 मरीज मिले, 9 हुए स्वस्थ

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– पिछले 15 दिनों से कोरोना के मामले लगातार कम होते जा रहे हैं
– कोरोना का रिकवरी रेट लगभग 98 प्रतिशत
– जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या 150 से भी कम
-अभी भी कोरोना को लेकर एहतियात बरतने की जरूरत

भागलपुर-

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास अब रंग लाता दिख रहा है। सोमवार को जहां कोरोना का 4 महीने बाद सिर्फ एक मरीज मिला था, वहीं मंगलवार को 14 नए मामले सामने आए। दूसरी ओर 9 कोरोना के मरीज स्वस्थ भी हुए हैं। पिछले 15 दिनों से कोरोना के मामले लगातार कम होते जा रहे हैं। पहले जहां एक दिन डेढ़ सौ तक मरीज मिल जा रहे थे, अब संख्या घटकर एक तक आ गई है। हालांकि इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर कुछ और दिन लोग सतर्क रह गए तो बहुत संभव है कि कोरोना की चेन भागलपुर में पूरी तरह टूट जाएगी।
कोरोना के मामले लगातार कम होते जा रहे- सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना के मामले लगातार कम होते जा रहे हैं। विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। जगह-जगह पर शिविर लगाकर जांच की जा रही है। इसका असर होता दिख रहा है। लोग भी जागरूक होते जा रहे हैं। यहां के लोगों ने कोरोना की गाइडलाइन का पालन अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। इसी का नतीजा है कि मामले लगातार कम होते जा रहे हैं।

98 प्रतिशत पहुंचा रिकवरी रेट:
जिले में कोरोना का रिकवरी रेट लगभग 98 प्रतिशत है। अभी तक लगभग 9200 मरीज मिले हैं। इनमें से 9000 से भी अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। अभी जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या 150 से भी कम है। जाहिर है कि जिले के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के कदम से कदम मिलाकर कोरोना की चेन तोड़ने में अपनी भूमिका निभाई है।

5,25,000 लोगों की अब तक हो चुकी है जांच:
सिविल सर्जन डॉक्टर विजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले में अब तक 5,25,000 लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है। तिलकामांझी चौक स्टेशन समेत शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में लगातार लोगों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था है। कोरोना के कम मरीज होने में जांच की संख्या बढ़ना भी एक महत्वपूर्ण कारण है. ।

अभी भी कोरोना की गाइडलाइन कब करें पालन: सिविल सर्जन ने बताया कि अभी भी लोगों को कोरोना को लेकर गाइडलाइन का पालन करने की जरूरत है. । बहुत ही मेहनत से हमलोग इस मुकाम तक पहुंचे हैं. अगर थोड़ी सी ढिलाई करेंगे तो वापस कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए अभी कोई भी ढिलाई नहीं करें. । घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं, सामाजिक दूरी का पालन करें और . भीड़भाड़ से बचें. ।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना वैक्सीन को लेकर आम लोगों को जागरूक कर रहे हैं स्वास्थ्यकर्मी

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– कोरोना वैक्सीन के लिए जागरूकता कार्यक्रम आवश्यक
– भारत सरकार द्वारा जारी किए गए तमाम मानकों को पूरा करने के बाद तैयार की गयी है कोरोना वैक्सीन

लखीसराय-

जिले में कोरोना वैक्सीन के जल्द आने की सम्भावनाओं के बीच सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं । पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और आईसीडीएस कर्मियों को कोरोना का वैक्सीन लगाने की घोषणा की गयी है। इसको लेकर सबों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है । साथ हीं वैक्सीन के भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन कि व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है । वहीं लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। इसी बीच लोगों के अंदर कोरोना वैक्सीन को ले कोई भ्रांति घर न कर जाय इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है।

लोगों को कोरोना वैक्सीन के प्रति विश्वास दिलाने के लिए ही सबसे पहले वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का किया जा रहा है वैक्सीनेशन :
लखीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रखंड अस्पताल प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि जिले के लोगों को कोरोना वैक्सीन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हीं सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों का वैक्सीनेशन होना है। ताकि जब वो लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए वैक्सीनेशन बूथ पर जाएँ तो लोगों को यह विश्वास दिला पाएं कि कोरोना का यह वैक्सीन हर किसी के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। लोगों को यह पता हो कि वैक्सीन लगाने से पूर्व सभी टीका कर्मियों ने खुद कोरोना का टीका लगवाया है।

भारत सरकार के सभी मानकों का पालन करते हुए तैयार किया गया है कोरोना का वैक्सीन :
लखीसराय पीएचसी में आयुष चिकित्सक के तौर पर कार्यरत डॉ. प्रेम आनंद ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए तैयार की गयी वैक्सीन पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए मानकों के अनुसार है। इसलिये लोगों को इसके प्रति पनपने वाली किसी भी भ्रांतियों से सावधान रहते हुए वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आने की आवश्यकता है।

नियमित टीकाकरण की तरह कोरोना टीकाकरण भी अतिआवश्यक :
लखीसराय के जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि नियमित टीकाकरण के तहत 12 तरह की बीमारियों से बचाव के लिए लगाए जाने वाले टीका की तरह हीं कोरोना का टीका सभी लोगों को लगवाना आवश्यक है। ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि पोलियो से बचाव के लिए जब वैक्सीन के तौर पर पोलियो ड्रॉप पिलाने के अभियान की शुरुआत हुई थी तो उस समय भी लोगों के मन में यह आशंका थी कि पता नहीं पोलियो पर नियंत्रण किया जा सकेगा या नहीं। बावजूद इसके आज के दिन भारत लगभग पोलियो मुक्त ही गया है। उसी तरह से कोरोना वैक्सीन के प्रति भी सकारात्मक सोच के साथ आगे आने की आवश्यकता है ताकि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को जल्द से जल्द रोका जा सके।

कोरोना का वैक्सीन आने तक सभी लोग अनिवार्य रूप से बरतें ये सावधानी :
– वैक्सीन के आने तक सभी लोग घर से बाहर निकलने पर अनिवार्य रूप से करें मास्क का नियमित इस्तेमाल। क्योंकि अभी मास्क हीं वैक्सीन है।
– किसी भी प्रकार की चीजों को छूने पर अपने हाथों को साबून या हैंड सैनिटाइजर से करें साफ ।
– घर से बाहर भीड़-भार वाले स्थान पर जाने पर शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए एक दूसरे से कम से दो गज या छह फीट की दूरी रखें।
– घर से बाहर खाने-पीने से करें परहेज, घर में बने खाना और पानी को दे प्राथमिकता ।
– अनावश्यक अपने मुंह, नाक कान और आंखों को छूने से करें परहेज ।