आईएनएसएसीओजी प्रयोगशालाओं ने सार्स कोविड-2 के म्यूटेंट रूप के जीनोम अनुक्रमण जांच के आरंभिक परिणाम किए जारी

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• 23 दिसंबर, 2020 की मध्यरात्रि से 31 दिसंबर, 2020 तक ब्रिटेन से आने वाली सभी उड़ानों पर अस्थायी रोक
• ब्रिटेन से आने वाले सभी विमान यात्रियों का अनिवार्य रूप से होगा आरटी-पीसीआर परीक्षण
• ब्रिटेन में पाए गए सार्स कोविड-2 के म्यू टेंट रूप से निपटने के लिए 22 दिसंबर को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को जारी किये गए मानक संचालन प्रोटोकॉल

पटना-

भारत सरकार ने ब्रिटेन में कोविड-19 विषाणु की नई प्रजाति सार्स कोविड-2 के पाए जाने की खबरों का संज्ञान लेते हुए इसके जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने और तथा इसके नियंत्रण और बचाव के लिए समय से पहले ही एक सक्रिय रणनीति तैयार कर ली है। रणनीति के अनुसार ब्रिटेन से आने वाले सभी विमान यात्रियों का अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर परीक्षण किए जाएंगे। साथ ही आरटी-पीसीआर परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए सभी नमूनों के जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने के लिए इन्हें इस काम के लिए चिन्हित दस सरकारी प्रयोगशालाओं अर्थात आईएनएसएसीओजी( भारतीय सार्स कोविड-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम) में भेजे जाएंगे।

26 दिसंबर को हुयी राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) की बैठक:

परीक्षण, उपचार, निगरानी और नियंत्रण रणनीति पर विचार करने और सुझाव देने के लिए कोविड-19 के संबंध में 26 दिसम्बर को राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) की बैठक आयोजित की गयी। 26 दिसंबर, 2020 की बैठक में राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई और यह निष्कर्ष निकाला गया कि सार्स कोविड-2 के नए म्यूटेंट रूप को देखते हुए मौजूदा राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल या मौजूदा परीक्षण प्रोटोकॉल में किसी तरह के बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है। एनटीएफ ने यह भी सुझाव दिया कि मौजूदा निगरानी रणनीति के अतिरिक्त यदि कुछ करना है तो कोविड के नए रूप के जीनोम अनुक्रमण की निगरानी बढ़ाने पर ज्यादा जोर देना बेहतर होगा। साथ ही ब्रिटेन में पाए गए सार्स कोविड-2 के म्यूाटेंट रूप से निपटने के लिए 22 दिसंबर को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को मानक संचालन प्रोटोकॉल जारी किये गए हैं.

ब्रिटेन से भारत लौटे 33000 यात्रियों की होगी जाँच:

25 नवंबर से 23 दिसंबर, 2020 की मध्यरात्रि तक लगभग 33,000 यात्री ब्रिटेन से भारत के अलग अलग हवाई अड्डों पर पहुंचे थे। इन सभी यात्रियों का राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की ओर से अपने यहां पता लगया जा रहा है और उन्हें आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। इन यात्रियों में से अब तक केवल 114 के नमूने पॉजिटिव पाए गए हैं। इन नमूनों के जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने के लिए इन सभी को इस काम के लिए चिन्हित दस (आईएनएसएसीओजी) प्रयोगशालाओं (एनआईबीएमजी,कोलकाता, आईएलएस भुवनेश्वर, एनआईवी-पुणे, सीसीएस-पुणे, सीसीएमबी-हैदराबाद, सीडीएफडी-हैदराबाद, इनस्टेम-बेंगलुरु, निमहास बेंगलुरु, आईजीआईबी-दिल्ली और एनसीडीसी दिल्ली) भेजा गया है।

ब्रिटेन से लौटे 6 विमान यात्रियों के नमूने सार्स-2 से संक्रमित मिले:

ब्रिटेन से लौटे 6 विमान यात्रियों के नमूने सार्स-2 से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से तीन का बेंगलुरु की निमहास प्रयोगशाला में, दो का हैदराबाद की सीसीएमबी प्रयोगशाला में और एक का पुणे की एनआईवी प्रयोगशाला में संक्रमित होने का पता चला है। इन सभी व्यक्तियों को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा की गई व्यवस्थाओं के अनुरुप स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में अलग अलग कमरों में रखा गया है। इन लोगों के साथ निकट संपर्क में आए लोगों को भी क्वारंटीन कर दिया गया है। इनके परिवार वालों, इनके साथ विमान में आए अन्य यात्रियों और दूसरे लोगों का भी पता लगाने के लिए सघन अभियान चलाया गया है। अन्य नमूनों के जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने का काम भी चल रहा है।

नया म्यूटेंट रुप सार्स कोविड-2 कई अन्य देशों में भी मिले:

यह महत्वमपूर्ण है कि अभी तक ब्रिटेन में कोविड का नया म्यूटेंट रुप सार्स कोविड-2 डेनमार्क, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इटली, स्वीडन, फ्रांस, स्पेन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कनाडा, जापान, लेबनान और सिंगापुर में पाया गया है। इसलिए स्थिति की सावधानीपूर्वक निगरानी की जा रही है और साथ ही नियमित रूप से राज्यों को इस बात की सलाह दी जा रही है कि वह निगरानी और नियंत्रण की अपनी व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखें और नमूनों की जांच कराने के लिए इन्हें चिन्हित प्रयोगशालाओं में भेजें।

अभी मॉर्निंग वॉक से करें परहेज, घर पर ही करें कसरत

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-बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता होती है कम, हो सकते हैं बीमार
-गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग भी इस मौसम बरतें अधिक सावधानी

बांका-

जिलेभर में अभी शीतलहर का दौर चल रहा है | तापमान 10 डिग्री से नीचे रह रहा है| ऐसे मौसम में तमाम तरह की बीमारियों की संभावना बनी रहती है| कोरोना काल भी चल रहा है| ऐसे में सतर्क रहना ही बेहतर है| मॉर्निंग वॉक करने वालों को भी अभी कुछ दिन घर पर ही कसरत करनी चाहिए| सुबह- सुबह धुंध के बीच टहलना तमाम तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है|
अभी के मौसम में घर पर ही योग या फिर व्यायाम कर लेना चाहिए-

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि किसी भी मौसम में लोगों को परहेज से ही रहना चाहिए| हां, यह बात सही है कि सर्दी के मौसम में थोड़ी सावधानी ज्यादा बरतनी पड़ती है.| इस मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार की समस्या आम बात है.| अगर ऐसे लक्षण दिखे तो ज्यादा चिंतित होने की बात नहीं है, लेकिन इससे बचने के लिए सावधानी जरूरी है.| सुबह में टहलने वाले लोगों को भी अभी कुछ दिन घर पर ही योग
या फिर व्यायाम कर लेना लेना चाहिए|.

बुजुर्ग और बीमारों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए खतरा:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि बुजुर्ग लोग या फिर बीमार व्यक्ति को ऐसे मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. ऐसे लोग तो भूल से भी मॉर्निंग वॉक पर ना निकलें.| दरअसल, बुजुर्गों लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है|, इससे वह बीमारियों की चपेट में आसानी से आ जाते हैं|. वहीं दमा, शुगर और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति के लिए भी ऐसे मौसम में निकलना ठीक नहीं है|. जिन्हें सांस की बीमारी है, उनको भी अभी सुबह-सुबह बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए|. धुंध में मौजूद नुकसानदायक कण से ऐसे लोगों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं.|

धूप निकलने पर घर से निकलें बाहर और शाम ढलने से पहले चले जाएं घर:
डॉक्टर. चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में आमतौर पर सुबह 10 बजे के बाद धूप आ जाती है|. उसके बाद लोग धूप सेक सकते हैं या फिर जरूरी काम से बाहर भी जा सकते हैं, लेकिन शाम ढलने से पहले घर आ जाने में ही बेहतरी है.| शाम होने के बाद कनकनी बढ़ने लगती है और धुंध भी छाने लगता है.|

सर्दी, खांसी या फिर वायरल होने पर डरे नहीं:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि सर्दी, खांसी या फिर वायरल की समस्या होने पर डरने की बात नहीं है.| इनमें से किसी तरह का लक्षण दिखे तो डॉक्टर से संपर्क कर अपना इलाज करा लें.| खुद से डॉक्टर बनने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए|. अगर लगातार तीन दिनों तक बुखार हो तो फिर कोरोना जांच करा लेनी चाहिए|.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कुंवर विजेंद्र शेखर बनें सीईजीआर के नए प्रेसिडेंट

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नईदिल्ली-
सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च के वार्षिक एक्जिक्यूटिव काउंसिल के मीटिंग वेबिनार के द्वारा संपन्न हुई। इस खास वेबिनार में कई इनेसेटिव पर चर्चा व मंथन हुई एवं समाज के लिए नए प्रयासों को अमलीजामा पहनाने के लिए विचार हुआ।
इस वर्चुअल मीटिंग में वर्ष 2021 के लिए नई कोर कमेटी का भी चुनाव किया गया। इस मौके पर शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर विजेंद्र शेखर को सर्वसम्मति से सीईजीआर के प्रेसिडेंट के रूप में चुना गया। इस मीटिंग की अध्यक्षता नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन के चेयरमैन केके अग्रवाल ने किया। इस खास मीटिंग को संबोधित करते हुए केके अग्रवाल ने कहा कि सीईजीआर के प्रेसिडेंट के रूप में काम करते हुए संजीव गोस्वामी ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनके अवधि में सीईजीआर ने नई ऊंचाईयों को छुआ। इनके द्वारा किए गए कार्य मील का पत्थर साबित होगें।
इस खास वेबिनार में एआईसीटीई के एडवाइजर(एप्रूवल) प्रो. आर हरिहरन को सीईजीआर के नए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट.एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल सीनियर वाइस प्रेसिंडेंट, प्रेसटिंज एजुकेशन फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ डेविस जैन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, एएएफटी के चांसलर डॉ संदीप मारवाह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट,आईएमएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन जेनरल सेक्रेटरी डॉ राकेश छारिया सीनियर वाइस प्रेसिडेंट,अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज के चेयरमैन डॉ अश्वनी लोचन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, एक्सआईएमई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के डायरेक्टर जेनरल प्रो. के पी आईसाक्क सीनियर वाइस प्रेसिडेंट,  अरूणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज के चेयरमैन अनंत सोनी वाइस प्रेसिडेंट.एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डॉ अनूपम चौकसे वाइस प्रेसिडेंट, सूर्यदत्ता ग्रूप ऑफ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ संजय बी चौरड़िया वाइस प्रेसिडेंट, एएसएम ग्रूप ऑफ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ संदीप पंचपाडें वाइस प्रेसिडेंट के रूप में चुनाव हुआ।
मेम्बर एक्जिक्यूटिव के रूप में रविश रोशन डायरेक्टर, सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) सारे इनेसिटिव को मार्गदर्शन एवं निर्देशत करते रहेंगे।
गौरतलब है कि सीईजीआर देश की एकमात्र एजुकेशन थिंक टैंक है जिसके पास चार इनोवेशन का क्रेडिट है। सीईजीआर लगातार एजुकेशन के विकास के लिए सम्मिट का आयोजन करती रही है। सीईजीआर के तत्वाधान में इंडियन एजुकेशन फेस्टिवल का आयोजन किया गया जिसमें एक साथ देश भर में 56 इवेंट हुए जिसमें एक्चुअल सम्मिट में हजारों प्रोफेसर और छात्रों ने भी भाग लिया। जिसकी चर्चा देशभर में हुई।

कोविड-19 का आने वाली वैक्सीन की सफलता को लेकर जिले में जोरों पर चल रही है तैयारी

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– वैक्सीन का के सुरक्षित रख-रखाव सहित सफलता समेत सफलता को को लेकर लेकर अन्य कार्यों में जुटा स्वास्थ्य विभाग

– सभी विभागों के कर्मियों का तैयार किया जा रहा है डाटाबेस

खगड़िया-

कोविड-19 का आने वाली वैक्सीन की सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी ताकत झोंक दी है और युद्ध स्तर पर आवश्यक तैयारियाँ में जुट गई है,। ताकि वैक्सीन आने के बाद किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं हो और वैक्सीन का सफल क्रियान्वयन हो सकें। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग कर्मियों ने आवश्यक कवायद तेज कर दी है। साथ ही वैक्सीन आने के पूर्व ही सारी तैयारियाँ पूरी कर लेने को लेकर जिला से लेकर प्रखंड स्तर के पदाधिकारी दिन-रात एक कर अपने कार्यों में जुट गये हैं।

– सभी विभागों के कर्मियों का तैयार किया जा रहा है डाटाबेस :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 का आने वाली वैक्सीन का के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। ताकि एक भी कर्मी वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रहें। हालाँकि, निजी स्वास्थ्य संस्थानों के के कर्मियों के डाटाबेस उपलब्ध होने कराने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। इसको लेकर निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संचालकों को लगातार रिमांडर किया भेजा जा रहा है। ताकि समय पर डाटाबेस अपलोड हो सकें। सके.

– 7 हजार 7000 से अधिक कर्मियों का तैयार हो चुका है डाटाबेस :-
वहीं, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवानंद पासवान ने बताया कि वैक्सीन की सफलता को लेकर सारी तैयारियाँ पूरे जोर-शोर के साथ किया जा रहा की जा रही है। अबतक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 7 हजार से अधिक कर्मियों का डाटाबेस तैयार किया जा चुका है। जिसमें निजी स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मी भी शामिल हैं। शेष कर्मियों का भी डाटाबेस युद्ध स्तर पर तैयार की जा रही है। सरकार के निर्देशानुसार सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों का वैक्सीनेशन किया जाना है।

– वैक्सीनेशन के दौरान सरकार के गाइडलाइन का किया जाएगा पालन :-
वैक्सीनेशन के दौरान सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का हर संभव पालन किया जाएगा एवं गाइडलाइन के अनुसार वैक्सीनेशन का कार्य किया जाएगा। ताकि किसी प्रकार का समस्या उत्पन्न नहीं हो। इसके अलावे अलावा सुरक्षा के भी हर मानकों का ख्याल रखा जाएगा।

– वैक्सीनेशन के बाद भी जारी रहेगा एहतियात :-
वैक्सीनेशन के बाद भी कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर एहतियात जारी रहेगा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग आमलोगों को भी लगातार जारी रहेगा। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो और पूरा समाज सुरक्षित रहें रहे।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप उपयोग करें।
– साफ सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें और बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और सेनेटाइजर पास रखें।
– शारीरिक दूरी का पालन करें।

कायाकल्प मूल्यांकन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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– केयर इंडिया की ओर से जिले के सभी पीएचसी में कार्यरत बीएचएम और मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी गई ट्रेनिंग

– प्रशिक्षण कार्यक्रम में कायाकल्प मूल्यांकन के लिए सभी आवश्यक पहलुओं से सभी लोगों को कराया गया अवगत

लखीसराय

सदर अस्पताल में सोमवार को जिले के सभी चिकित्साकर्मियों को कायाकल्प मूल्यांकन से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया | इसमें जिले भर से आये सभी हॉस्पिटल मैनेजर, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी,लेबर रूम इंचार्ज और जीएनएम नर्स शामिल हुईं |को आंतरिक और बाह्य स्तर पर बरती जाने वाली सावधानी और ध्यान देने योग्य पहलुओं से अवगत कराया-
जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान सदर हॉस्पिटल सहित जिले भर के सभी पीएचसी, एपीएचसी और रेफरल हॉस्पिटलों के हॉस्पिटल मैनेजर और मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज, लेबर रूम इंचार्ज को हॉस्पिटल के सभी विभागों में काम करने के दौरान आंतरिक और बाह्य स्तर पर बरती जाने वाली सावधानी और ध्यान देने योग्य पहलुओं से अवगत कराया गया।

कायाकल्प मूल्यांकन के लिए प्रमुख बिंदू :
कायाकल्प मूल्यांकन के लिए सबसे पहले सभी अस्पताल के सभी विभागों में साफ-सफाई का ध्यान रखना, लेबर रूम की व्यवस्था , लेबर रूम में मौजूद सभी उपकरण की वस्तुस्थिति, स्थान की उपलब्धता, डॉक्यूमेंटेशन की स्थिति सहित पूरे अस्पताल में बायोमेडिकल कचरा का उचित प्रबंधन करना आवश्यक है।

कायाकल्प मूल्यांकन के लिए किये जाने वाले कार्य :
इसके लिए सबसे पहले अस्पताल में साफ-सफाई की सही व्यवस्था करना, सैनिटाइजेशन और स्वच्छता की व्यवस्था , बायोमेडिकल कचरे का प्रबंधन, संक्रमण से रोकथाम की उचित व्यवस्था , सपोर्ट सर्विसेज की जानकारी देना और संक्रमण को रोकने के लिए प्रचार- प्रसार करना आवश्यक होता है।

कायाकल्प मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य :
देश भर में कायाकल्प मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य देश भर के स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ्ता की व्यवस्था रखने के साथ हीं लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रचार- प्रसार की व्यवस्था करना है। इसके साथ हीं संक्रमण की रोकथाम की व्यवस्था,बायो मेडिकल कचरे का प्रबंधन करने के साथ हीं संक्रमण से रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कार्य करना है। कायाकल्प मूल्यांकन कार्यक्रम सदर अस्पताल स्तर पर 2015 में, पीएचसी स्तर पर 2016 और सभी शहरी स्वास्थ्य केंद्रों तक 2017 तक शुरू किया गया। वर्ष 2015 के मई में तत्कालीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रकाश नड्डा ने देशस्तर पर कायाकल्प अवार्ड स्कीम की शुरुआत की थी ।

सामान्य प्रसव से स्वस्थ बच्चे का जन्म कैसे हो, सिखाए गए गुर

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– सदर अस्पताल में चार दिवसीय अमानत प्रशिक्षण का आगाज
-प्रशिक्षण लेने वाली एएनएम अपने- अपने क्षेत्र में इस पर करेंगी अमल

भागलपुर-

चार दिवसीय अमानत प्रशिक्षण का सोमवार को सदर अस्पताल में आगाज हुआ| इस दौरान एएनएम को केयर इंडिया के मेंटर ने सुरक्षित प्रसव के तरीके बताए.| एएनएम को बताया गया कि सामान्य प्रसव से स्वस्थ बच्चे का कैसे जन्म होता है| और साथ हीं बताया गया कि प्रसव के बाद चिंतित मां की सम्मानपूर्वक तरीके से देखभाल कैसे की जाती है.|

प्रशिक्षण के पहले दिन सोमवार को एएनएम को यह बताया गया कि नवजात शिशु के की पुनर्जीवन की प्रक्रिया जन्म के 15 मिनट बाद कैसे की जाती है, इसे भी बताया गया.| मंगलवार को प्रशिक्षण के दूसरे दिन इसे करके दिखाया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण लेने वाली एएनएम अपने-अपने क्षेत्र में इस पर ठीक तरीके से अमल कर सकें.|

आज प्रायोगिक तौर पर होगा प्रशिक्षण:
एएनएम को प्रशिक्षण दे रही केयर इंडिया की मेंटर वीणा मलिक, जैनब कमाल और पूनम कुमारी ने बताया कि मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य अमानत प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है.| आज हम लोगों ने एएनएम को सुरक्षित प्रसव को लेकर सैद्धांतिक बात बताई.| कल मंगलवार को इन लोगों को प्रायोगिक तौर पर करके दिखाएंगे.| साथ ही प्रशिक्षण के दौरान नवजात शिशु को के पुनर्जीवन प्रक्रिया जन्म के 15 मिनट बाद कैसे की जाती है इसकी भी जानकारी दी.| इन सब बातों को मंगलवार को करके दिखाएंगे.| जिसे स पर ये लोग अपने क्षेत्र में जाकर अमल करेंगे|.

प्रशिक्षण में कई नई बातों की जानकारी मिली:
वहीं ट्रेनिंग ले रही एएनएम पिंकी कुमारी और अंजनी कुमारी ने बताया कि प्रशिक्षण का पहला दिन हमलोगों के लिए काफी फायदेमंद रहा.| प्रशिक्षण के दौरान हमलोगों को बहुत सारी नई बातें बात सीखने को मिली.| जिसे हमलोग क्षेत्र में प्रसव कराने के दौरान अपनाएंगे.| इससे ना सिर्फ सुरक्षित तरीके से प्रसव हो सकेगा, बल्कि जच्चा और बच्चा भी स्वस्थ रहेगा.|

मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है मकसद: मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अमानत प्रशिक्षण की शुरुआत की गई थी.| अब इसका असर जिले में दिख रहा है|. प्रशिक्षण जब से शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी देखने में आ रही आई है.| अमानत प्रशिक्षण के जरिए केयर इंडिया के मेंटर हर महीने एएनएम और जीएनएम को किसी एक चीज की जानकारी देती हैं जिसे वह अपने क्षेत्र में जाकर बाकी एएनएम और जीएनएम को बताती हैं.| इसे एक महीने तक फॉलो किया जाता है.| फिर दूसरे महीने किसी दूसरी चीज की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान एक सप्ताह तक दी जाती है.|

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

नाथनगर में आशा कार्यकर्ताओं को 1 बच्चे वाले दंपति का सर्वे करने को मिला प्रशिक्षण

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• आशा कार्यकर्ताओं को एक फॉर्मेट में भरकर बताए गए सर्वे करने के तरीके

• 10 जनवरी तक आशा कार्यकर्ताओं का सर्वे कर देनी होगी रिपोर्ट

भागलपुर-

नाथनगर में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के 1 बच्चे वाले दंपति के सर्वे करने का प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण का आयोजन केयर इंडिया द्वारा कराया गया. इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं को बताया गया कि क्षेत्र में जाकर 1 बच्चे वाले दंपति, जिनकी उम्र 15 से 49 साल हो, उनकी पहचान करें. ऐसे दंपति की आरोग्य दिवस के अवसर पर काउंसलिंग की जाएगी. प्रशिक्षण के दौरान सीएचसी संजीव कुमार, बीसीएम किरण कुमारी और बीएचएम अपर्णा कुमारी मौजूद थीं.

नाथनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉक्टर अंजना कुमारी ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को एक बच्चे वाले दंपत्ति के सर्वे का प्रशिक्षण दिया गया है. उन्हें 10 जनवरी से पहले क्षेत्र के 1 बच्चे वाले दंपति की पहचान कर रिपोर्ट देनी है. रिपोर्ट आने के बाद आरोग्य दिवस पर उन लोगों की काउंसलिंग की जाएगी.

केयर इंडिया के परिवार नियोजन समन्वयक आलोक कुमार ने बताया कि ऐसे दंपति को चिन्हित करने का मकसद उन्हें एक से दूसरे बच्चे के बीच में कितना अंतराल हो, इसकी जानकारी देना है. इसे लेकर ही आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है. उन्होंने बताया इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं को एक फॉर्मेट उपलब्ध कराया गया, जिसे भरकर उन्हें बताया गया कि क्षेत्र में 1 बच्चे वाले दंपति का सर्वे कैसे करना है.

एक से दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल जरूरी: आलोक कुमार ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दंपति को यह बताया जाएगा कि एक से दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने के क्या-क्या फायदे हैं. उन्हें समझाया जाएगा कि अगर आप कोई दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखते हैं तो इससे ना सिर्फ बच्चे स्वस्थ होंगे, बल्कि मां भी स्वस्थ रहेंगी. बच्चे कुपोषित नहीं होंगे. उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहेगी, जिससे भविष्य में किसी भी बड़ी बीमारी का खतरा नहीं रहेगा.

नुक्कड़ नाटक कर परिवार नियोजन को लेकर किया जाएगा जागरूक: आलोक कुमार ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे करने के दौरान जहां पर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता कम दिखेगी या 2 से अधिक बच्चे वाले दंपति अधिक दिखेंगे, वहां एजेंसी के जरिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया जाएगा. नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को परिवार नियोजन के फायदे बताए जाएंगे. उन्हें समझाया जाएगा कि परिवार नियोजन से क्या फायदे हैं. कम बच्चे रहने से आर्थिक आजादी के विषय में भी लोगों को जानकारी दी जाएगी.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

40 से अधिक वाले ही नहीं, हर उम्र के लोग रहें सावधान

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कोरोना को लेकर अफवाहों से आम लोगों को सावधान रहने की जरूरत

कोरोना अभी पूरी तरह से टला नहीं है, इसलिए सावधानी बरतने में ही भलाई है

बांका-

सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्ट पढ़ने को मिल रहे हैं कि सिर्फ 40 से अधिक उम्र के लोगों को ही कोरोना हो सकता है या फिर जो लोग गंभीर बीमारी के शिकार है उन्हें लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है | कोरोना की चपेट में किसी भी उम्र के लोग आ सकते हैं| इसलिए हर उम्र के लोगों को इसके प्रति सचेत रहने की जरूरत है|
कोरोना के जितने भी मरीज मिले हैं, उसमें हर उम्र के लोग पाए गए-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना को लेकर तमाम तरह की अफवाहें उड़ती रहती हैं है|. लोगों को इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए|. अभी तक कोरोना के जितने भी मरीज मिले हैं, उसमें हर उम्र के लोग पाए गए हैं|. हां, यह बात सही है कि 40 से अधिक उम्रवाले लोग कोरोना हो जाने के बाद ज्यादा गंभीर हो जाते हैं.| जिनकी उम्र 40 से कम है, उन्होंने कोरोना को आसानी से मात दे दी है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि 40 से कम उम्रवाले लोग सावधान नहीं रहे.|

दमा, शुगर, हाइपरटेंशन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी वालों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत खतरा:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर किसी को दमा है या फिर शुगर, ऐसे लोगों को कोरोना होने की का ज्यादा संभावना रहती खतरा रहता है|. साथ ही हाइपरटेंशन और कैंसर से पीड़ित लोग भी कोरोना की चपेट में आ जाने के बाद गंभीर हो जाते हैं|. इस वजह से इन लोगों को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है|. जो व्यक्ति स्वस्थ है, वह कोरोना की चपेट में आने के बाद जल्दी उबर जाता है. लेकिन जो व्यक्ति पहले से बीमार है उसे उबरने में वक्त लगता है|.

कोरोना के मामले कम जरूर हुए, लेकिन खतरा अभी यह टला नहीं है:
डॉ.क्टर चौधरी कहते हैं कि पिछले कुछ समय से कोरोना के मामले कम जरूर आ रहे हैं|. साथ ही सक्रिय मरीजों की संख्या भी लगातार घटती जा रही है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि आप लापरवाह हो जाएं|. कोरोना से ठीक होनेवालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. फिर भी हमलोगों को सावधान रहना चाहिए|. 3 दिन तक अगर बुखार हो तो कोरोना की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए|. बीमारी का जल्द पता चलेगा और जल्द स्वस्थ हो जाएंगे.|

हर हाल में कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन:
डॉ.क्टर चौधरी कहते हैं कि अभी तक कोरोना का टीका आया नहीं है|. हालांकि जिस तरह की तैयारी चल रही है, उससे लग रहा है कि जल्द ही लोगों का टीकाकरण हो जाएगा. लेकिन जबतक ऐसा हो नहीं जाता है तबतक कोरोना को लेकर जो सरका र की गाइडलाइन है, उसका सख्ती से पालन करना जरूरी है|. जैसे कि घर से निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं,. भीड़ से बचें,. सामाजिक दूरी का पालन करें,. साथ ही समय-समय पर हाथ धुलाई करते रहें|.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

नाटापन के अभिशाप से लखीसराय जिले के 8% से अधिक बच्चों को मिली निज़ात

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• पांच सालों में नाटापन घटकर 42.7% हुआ
• कुपोषण बढ़ाने में नाटापन की होती है अहम भूमिका
• सरकार की कई पोषण कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन बना सहायक

लखीसराय 26, दिसम्बर : कुपोषण सिर्फ शारीरिक या मानसिक रूप से बच्चों को कमजोर नहीं करता, बल्कि इससे देश का विकास भी बाधित होता है. लेकिन कोरोना जैसे महामारी के दौर में बिहार में बच्चों के सुपोषण में बढ़ोतरी की खबर राहत पहुंचा रही है. हाल में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार विगत पांच सालों में राज्य में नाटापन( उम्र के हिसाब से लम्बाई का कम होना) में 5.4% की कमी दर्ज हुयी है, जबकि लखीसराय जिले 8% की कमी हुई है। जो यह दर्शाती है कि सरकार की पोषण संबंधी योजनाओं का समुदाय स्तर तक बेहतर क्रियान्वयन हुआ है. यह आंकड़े इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले सर्वेक्षण( 2015-16) में बिहार में 48.3% बच्चे नाटापन से ग्रसित थे, जो अब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (वर्ष 2019-20) के अनुसार घटकर 42.9% हुयी है. जबकि लखीसराय जिले में एनएफएचएस 4 (2015- 16) के आंकड़ों के अनुसार जिले में 50.6 प्रतिशत बच्चे नाटापन के शिकार थे जो अब एनएफएचएस 5 (2019-20) के आंकड़ों के अनुसार घटकर मात्र 42.7 प्रतिशत रह गया है।

जिले में बच्चों में पोषण की कमी से निपटने के लिए की गई पोषण केंद्र की स्थापना :
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया कि शत-प्रतिशत बच्चों में पोषण की समस्या दूर हो। इसके लिए हमलोगों पूरी तरह प्रयासरत हैं। साथ ही जिले में भी बच्चों में पोषण की कमी से निपटने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों को 14 दिनों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है।

नाटापन में आ रही लगातार कमी:
बच्चों में नाटापन अपरिवर्तनीय होता है. इसका मतलब है कि यदि बच्चे एक बार नाटापन के शिकार हुए तो उन्हें पुनः ठीक नहीं किया जा सकता है. इस लिहाज से इसमें कमी लाना काफी जरुरी है. इस दिशा में नाटापन में पिछले 15 सालों में बिहार में निरंतर कमी आयी है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-3 (वर्ष 2005-06) में बिहार में 55.6% बच्चे नाटापन के शिकार थे, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4(वर्ष 2015-16) में घटकर 48.3% हो गयी थी.

बच्चों में नाटापन होने के बाद इसे पुनः सुधार करने की गुंजाइश कम हो जाती है एवं यह बच्चों में कुपोषण की सबसे बड़ी वजह भी बनती है. इस लिहाज से नाटापन में आई कमी सुपोषित बिहार की राह आसान करने में प्रमुख भूमिका अदा करेगी. अपर्याप्त पोषण एवं नियमित संक्रमण जैसे अन्य कारकों के कारण होने वाला नाटापन बच्चों में शारीरिक एवं बौद्धिक विकास को अवरुद्ध करता है जो स्वस्थ भारत के सपने के साकार करने में सबसे बड़ा बाधक भी है.

बच्चों एवं महिलाओं के पोषण में आई सुधार:
आईसीडीएस निदेशक आलोक कुमार ने कहा कि राज्यत में बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्त1र में अपेक्षित सुधार लाने हेतु आई.सी.डी.एस. के माध्ययम से कई योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही है। जिसका अनुश्रवण एवं मूल्यांुकन विभिन्न स्तरों ICDS-CAS, आँगन-एप, RRS के माध्येम से किया जाता रहा है। जिसके फलस्वारूप स्वा्स्था एवं पोषण के कुछ संकेतकों में सुधार है। आगे भी हमें निरन्तपर इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है।

अन्य स्वास्थ्य एवं पोषण सूचकांकों में भी सुधार:
बिहार में पांच सालों में पोषण एवं स्वास्थ्य के कुछ विशेष सूचकांकों में आयी कमी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार विगत पांच सालों में बिहार में 6 माह तक केवल स्तनपान, संस्थागत प्रसव, महिला सशक्तीकरण, संपूरक आहार( 6 माह के बाद स्तनपान के साथ ठोस आहार की शुरुआत), कुल प्रजनन दर में कमी, 4 प्रसव पूर्व जाँच एवं टीकाकरण जैसे सूचकांकों में सुधार हुआ है। ये सूचकांक कहीं न कहीं नाटापन में कमी लाने में सहायक भी साबित हुए हैं। वहीं मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, समेकित बाल विकास सेवा सुदृढ़ीकरण एवं पोषण सुधार योजना (आई एस एस एन पी), पोषण अभियान एवं ओडीएफ़ जैसे कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन भी नाटापन में सुधार लाने में सकारात्मक प्रभाव डाला है.

नाटापन बच्चों के शारीरिक एवं बौद्धिक विकास में भी बाधक:
उम्र के हिसाब से लंबाई कम होना ही नाटापन कहलाता है। गर्भावस्था से लेकर शिशु के 2 वर्ष तक की अवधि यानी 1000 दिन बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास की आधारशिला तैयार करती है. इस दौरान माता एवं शिशु का स्वास्थ्य एवं पोषण काफी मायने रखता है। इस अवधि में माता एवं शिशु का खराब पोषण एवं नियमित अंतराल पर संक्रमण नाटापन की सम्भावना को बढ़ा देता है। नाटापन होने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध होता है. साथ ही नाटापन से ग्रसित बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक बीमार पड़ते हैं, उनका आई-क्यू स्तर कम जाता है एवं भविष्य में आम बच्चों की तुलना में वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ भी जाते हैं।

सामुदायिक जागरूकता भी जरुरी :

कुपोषण में कमी लाने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ समुदाय की भागीदारी भी जरुरी है. ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर माताओं की सक्रियता अधिक है। अभी भी पुरुष अपने बच्चे के पोषण को लेकर गंभीर नहीं है। गर्भवती महिला का स्वास्थ्य एवं पोषण, बच्चों का स्तनपान एवं संपूरक आहार जैसे बुनियादी फैसलों में पुरुषों की सहभागिता होने से कुपोषण के दंश से बच्चों को बचाया जा सकता है।

यूके में कोरोना वायरस के नए रूप को देखते हुए राष्ट्रीय कार्य बल सतर्क

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– कोविड- 19 की जांच, उपचार और निगरानी की रणनीतियों पर किया गया विचार- विमर्श

– भारत में इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की पहचान और इसके प्रसार पर रोकथाम की तैयारी

– पिछले 28 दिनों में यूके से आए सभी लोगों की सूची संबंधित राज्यों से की गई साझा

– 5 प्रतिशत पॉजिटिव मामले डब्ल्यूजीएस जाँच के लिए भेजे जाएंगे

– आरटीपीसीआर जांच के परिणाम मिलने के बाद ही यात्रियों को हवाई अड्डे से निकलने की होगी अनुमति

लखीसराय, 27 दिसम्बर: यूके ( यूनाइटेड किंगडम) में कोरोना वायरस के नए रूप के मिलने की पुष्टि हुई है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) काफ़ी सतर्क हो गया है। इसको ले आईसीएमआर ने नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद पॉल और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग में सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो. बलराम भार्गव की सह अध्यक्षता में कोविड-19 पर बने राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) की एक बैठक बुलाई। बैठक में एम्स के निदेशक प्रो. रणदीप गुलेरिया; भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई); निदेशक, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के अन्य प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की पहचान पर बल:

एनटीएफ द्वारा आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल में यूके में वायरस का नया रूप सामने आने की खबरों को देखते हुए सार्स-सीओवी-2 के लिए परीक्षण, उपचार और निगरानी की रणनीतियों में प्रमाण आधारित संशोधनों पर चर्चा करना था। वायरस के इस रूप में गैर समानार्थी (अमीनो एसिड में बदलाव) परिवर्तन, 6 समानताएं (गैर अमीनो एसिड बदलाव) और 3 विलोपन हैं। आठ परिवर्तन (म्यूटेशंस) स्पाइक (एस) जीन में मौजूद हैं, जो एसीई 2 रिसेप्टर्स की बाइंडिंग साइट (रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन) का वहन करते हैं, जो मानव श्वसन कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश का बिंदु है। एनटीएफ में सार्स-सीओवी-2 के साथ-साथ यूके वायरस के लिए वर्तमान राष्ट्रीय उपचार व्यवस्था, जांच रणनीति और निगरानी से संबंधित पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें जोर दिया गया कि चूंकि, वायरस के यूके संस्करण से वायरस का संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए भारत में इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की पहचान और इसके प्रसार पर रोकथाम काफी अहम है।

वायरस के नए स्ट्रेन को लेकर उपचार व्यवस्था में बदलाव की जरूरत नहीं :

एनटीएफ ने निष्कर्ष निकाला कि इस स्ट्रेन में परिवर्तन को देखते हुए वर्तमान उपचार व्यवस्था में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावे चूंकि आईसीएमआर ने सार्स- सीओवी- 2 के परीक्षण के लिए दो या ज्यादा जीन जांचों की वकालत करती रही है, इसलिए परीक्षण की वर्तमान रणनीति का इस्तेमाल करते हुए संक्रमित लोगों के बचने की संभावना कम ही है। एनटीएफ ने सिफारिश किया कि निगरानी की वर्तमान रणनीतियों के अलावे विशेष रूप से यूके से आ रहे यात्रियों में सार्स- सीओवी- 2 के लिए ज्यादा जीनोमिक निगरानी कराना अहम है। इसके अलावा, प्रयोगशाला जांच के एस जीन के सामने आने, पुनः संक्रमण के प्रमाणित मामलों आदि से संबंधित नमूनों में जीनोम सीक्वेंसिंग कराना भी खासा अहम होगा। सभी नमूनों के प्रतिनिधि नमूनों में सार्स- सीओवी- 2 की सामान्य जीनोमिक निगरानी जारी रखने और योजनाबद्ध गतिविधियों की आवश्यकता है। एनसीडीसी ने बताया कि भारत सरकार ने यूके में दर्ज सार्स- सीओवी-2 के परिवर्तित रूप की खबरों और इन खबरों पर दूसरे देशों की प्रतिक्रिया पर स्वतः संज्ञान लिया है। हालात की सक्रिय रूप से निगरानी की जा रही है। परिवर्तित वायरस का पता लगाने और रोकथाम के लिए एक रणनीति बनाई गई है।

भारत में सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर बरती जा रही सतर्कता :

वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए 21 दिसंबर से 23 दिसंबर, 2020 के बीच यूके से आए सभी यात्रियों की हवाई अड्डों पर जांच की गई थी। सिर्फ आरटी- पीसीआर जांच का परिणाम मिलने के बाद नकारात्मक रिपोर्ट वाले यात्रियों को ही हवाई अड्डे से निकलने की अनुमति दी गई है। जांच में पॉजिटिव मिले सभी यात्रियों को संस्थागत आइसोलेशन में भेज दिया गया है और उनके नमूनों को व्होल जीनोम सीक्वेंसिंग (डब्ल्यूजीएस) के लिए भेज दिया गया है। डब्ल्यूजीएस परिणाम में गैर परिवर्तित वायरस की पुष्टि होने के बाद ही, पॉजिटिव मामलों में वर्तमान प्रबंधन व्यवस्था के तहत संस्थागत आइसोलेशन से जाने की अनुमति दी गई है। पॉजिटव मरीजों के सभी संपर्कों को भी क्वारंटाइन केन्द्र में भेज दिया गया और आईसीएमआर दिशा- निर्देशों के तहत जांच की गई है।

नए स्ट्रेन से रोकथाम को लेकर की जा रही सामुदायिक निगरानी :

पिछले 28 दिनों में यूके से आए सभी लोगों की सूची संबंधित राज्यों के आव्रजन ब्यूरो के साथ साझा कर दी गई है। वहीं 25 नवंबर- 20 दिसंबर, 2020 के बीच यूके से आए सभी यात्रियों पर आईडीएसपी राज्य निगरानी इकाइयों (एसएसयू) और जिला निगरानी इकाइयों (डीएसयू) द्वारा नजर रखी जा रही है। आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के तहत इन यात्रियों की जांच की जा रही है और सभी पॉजिटिव मामलों में आइसोलेशन के लिए भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी पॉजिटिव मामलों के नमूनों को डब्ल्यूजीएस के लिए भेजा जा रहा है। इन पॉजिटिव मामलों के संपर्कों की निगरानी बढ़ाई जा रही है और इन संपर्कों को भी क्वारंटाइन केन्द्रों में भेज दिया गया है। पॉजिटिव मरीजों को 14 दिन बाद दो नमूनों की जांच नकारात्मक आने के बाद ही भेजा जा रहा है।

5 प्रतिशत पॉजिटिव मामले डब्ल्यूजीएस जाँच के लिए भेजे जाएंगे:
सभी राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों के 5 प्रतिशत पॉजिटिव मामलों को डब्ल्यूजीएस जांच के लिए भेजा जाएगा। देश में सार्स-सीओवी-2 के रूप के प्रसार की प्रयोगशाला और महामारी विज्ञान निगरानी के लिए एनसीडीसी, नई दिल्ली के नेतृत्व में एक जीनोमिक सर्विलांग कंसोर्शियम आईएनएसएसीओजी की स्थापना की गई है। इसके अलावा, यूके से लौटने वालों के 50 से ज्यादा नमूनों की प्रयोगशालाओं में सीक्वेंसिंग जारी है। कंसोर्शियम की अन्य प्रयोगशालाओं में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, दिल्ली; सीएसआईआर- जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान, दिल्ली; सीएसआईआर- सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद, डीबीटी- जीव विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर; डीबीटी- राष्ट्रीय बायोमेडिकल जीनोमिक्स संस्थान, कल्याणी; डीबीटी- इनस्टेम- राष्ट्रीय जैविक विज्ञान केंद्र, बेंगलुरु; राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएएनएस), बेंगलुरु एवं आईसीएमआर- राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे शामिल है।

सार्स- सीओवी-2 वायरस के यूके संस्करण का जल्दी पता लगाने और रोकथाम के लिए अतिरिक्त जीनोमिक निगरानी जारी रखने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, यह समझना अहम है कि अन्य आरएनए वायरस की तरह ही सार्स- सीओवी-2 में परिवर्तन जारी रहेगा। सामाजिक दूरी, हाथ साफ रखने, मास्क पहनने और उपलब्ध होने पर एक प्रभावी वैक्सीन से परिवर्तित वायरस की भी रोकथाम की जा सकती है।