कटोरिया रेफरल अस्पताल को अत्याधुनिक सुविधाओं से किया जा रहा है लैस

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यहां आने वाले मरीजों को इलाज से जुड़ी हर तरह की सुविधाएं मिलेंगी

पीने के पानी से लेकर एंबुलेंस की पार्किंग तक की व्यवस्था की गई है

बांका-

कटोरिया रेफरल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी. इसे लेकर तैयारी जोरों पर है. अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसे लेकर युद्धस्तर पर मरम्मत का काम चल रहा है.

अस्पताल के प्रभारी डॉ विनोद कुमार ने बताया कि यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसे लेकर हमलोग अस्पताल में लगातार सुविधाएं बढ़ा रहेबढ़ाई जा रही हैं. पहले लेबर रूम में 2 टेबल की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर अब तीन कर दिया गया है. ऑपरेशन थिएटर में अभी मरम्मत का काम चल रहा है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इस अस्पताल में बंध्याकरण को लेकर काफी संख्या में महिलाएं आती हैं. इसे लेकर ऑपरेशन थिएटर की भी क्षमता को बढ़ाई जा रही है.

हैंड वॉशिंग जोन मेंभी बनाया जा रहा: डॉ विनोद कुमार ने कहा कि अस्पताल में पीने के पानी के लिए कैंट लगाया गया है. साथ ही हैंड वॉशिंग जोन भी बनाया जा रहा है. कोरोना काल में इसकी आवश्यकता महसूस की गई. यहां आने वाले मरीज और उसके परिजन साथ में अस्पताल के कर्मी हर 2 घंटे के अंतराल पर हाथ धोते हैं. इसलिए इसकी व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा अस्पताल के पास दो एंबुलेंस है, उसके लिए भी पार्किंग बनाई गई है. मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की गाड़ियों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की गई है. कुल मिलाकर अस्पताल में मरीजों के इलाज से लेकर अन्य तरह की सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है. मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल का दरवाजा खटखटाना नहीं पड़े इस बात को ध्यान में रखते हुए हमलोग अस्पताल को तैयार कर रहेकिया जा रहा हैं.

अस्पताल में सभी तरह की दवा है मौजूद: डॉ विनोद कुमार ने कहा कि यहां पर आने वाले मरीजों को हर तरह की दवा मुफ्त में दी जाती है. अभी अस्पताल में सभी तरह की दवा मौजूद है. अस्पताल प्रबंधन ऑनलाइन ऑर्डर कर दवा मंगाता है. यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को या इस क्षेत्र के लोगों को दवा को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी.

कोरोना वायरस कीसंबन्धित गाइडलाइन का रखा जा रहा है ख्याल: डॉ विनोद कुमार ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के इलाज के दौरान कोरोना वायरस संबन्धितकी गाइडलाइन का पालन किया जाता है. अस्पताल के कर्मी और मरीज सामाजिक दूरी का पालन करते हैं. साथ ही स्वास्थ्यकर्मी और मरीज अनिवार्य तौर पर मास्क पहनते हैं. अगर मरीज के साथ कोई परिजन आते हैं तो उन्हें भी मास्क पहनने के लिए कहा जाता है. अस्पताल आने वाले व्यक्ति को हैंड सैनिटाइजर दिया जाता है. स्वास्थ्यकर्मी मास्क के साथ ग्लव्स भी पहने रहते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कमजोर नवजात की पहचान कर उसे बनाएं स्वस्थ

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कमजोर नवजात की पहचान और उसकी उचित देखभाल को लेकर दो दिवसीय ट्रेनिंग का समापन

आईसीडीएस द्वारा आयोजित दो दिवसीय ट्रेनिंग में जिलेभर की सभी सीडीपीओ हुई शामिल

बांका-

कमजोर नवजात की पहचान और देखभाल को लेकर जिले की सभी सीडीपीओ की दो दिवसीय ट्रेनिंग का समापन हो गया. आईसीडीएस द्वारा शहर के आयोजित ट्रेनिंग शिविर के पहले दिन सभी सीडीपीओ को कमजोर नवजात की पहचान के बारे में बताया गया, जबकि दूसरे दिन बुधवार को उसकी उचित देखभाल की जानकारी दी गई. डीपीओ रिफत अंसारी और धोरैया की सीडीपीओ कुमारी हेमा ने सभी सीडीपीओ को ट्रेनिंग दी. वहीं आईसीडीएस के जिला समन्वयक शम्स तबरेज और केयर इंडिया के कुमार राकेश ने ट्रेनिंग के दौरान तकनीकी तौर पर सहयोग किया.

ट्रेनिंग के दौरान डीपीओ रिफत अंसारी ने कहा कि कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत होती है. कोरोना काल में मां की चुनौतियां और बढ़ गयी हैं. कमजोर बच्चे की पहचान सबसे अहम है. अगर आप इसमें सफल हो जाते हैं तो उसे स्वस्थ बनाना बड़ी बात नहीं है. ऐसा देखा गया है कि कमजोर नवजात में तापमान की कमी की समस्या रहती है. इससे निजात पाने में कंगारू मदर केयर रामबाण साबित हो रहा है. कंगारू मदर केयर के जरिए मां या घर का कोई भी व्यक्ति नवजात को अपने सीने से चिपकाकर उन्हें गर्मी देते हैं. यह प्रक्रिया तब तक करने की सलाह दी जाती है जब तक बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम न हो जाए या फिर एक माह पूरा ना हो जाए।

रिफत अंसारी ने कहा कि कंगारू मदर केयर से शिशु को गर्माहट मिलती है,संक्रमण से बचाव होता है, बार बार स्तनपान करने में सुविधा मिलती है, इसके साथ ही अगर शिशु को दिक्कत हो तो उसकी तुरंत पहचान हो जाती है. कंगारू मदर केयर से बच्चे को स्तनपान कराने में मदद मिलती है. स्तनपान कराने के दौरान सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. जैसे कि बच्चे को छूने से पहले हाथ को साफ कर लेना चाहिए. इसके अलावा जब बच्चा पास में हो तो मास्क जरूर पहनना चाहिए. इन सावधानियों के साथ हम कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा जागरूक: ट्रेनिंग दे रही धोरैया की सीडीपीओ कुमारी हेमा ने कहा कि कमजोर नवजात की देखभाल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. आंगनबाड़ी सेविका की मदद से गांव में जाकर लोगों को कमजोर नवजात की देखभाल से संबंधित उपाय बताए जा रहे हैं. कमजोर नवजात पैदा नहीं हो, इसे लेकर गर्भावस्था की शुरुआत से ही देखभाल की जरूरत होती है.

कमजोर बच्चे की कैसे करें पहचान:
ट्रेनिंग के दौरान केयर इंडिया के कुमार राकेश ने कहा कि कमजोर नवजात की पहचान मुख्यतः 3 तरीके से होती है. इसमें पहला तरीका है उसका वजन 2000 ग्राम या इससे कम हो. दूसरा तरीका है कि बच्चा स्तनपान करने में सक्षम नहीं हो और तीसरा तरीका है कि बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो गया हो. इन पैमानों पर नवजात को जन्म के बाद परखने की जरूरत है और अगर बच्चा कमजोर पाया जाता है तो उसकी देखभाल शुरू कर देने की जरूरत है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.

• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.

• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.

• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.

• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.

• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.

• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें

• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों

• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें

• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के वैक्सीन से स्थाई समाधान की उम्मीद तो ठीक है पर सतर्कता भी जरूरी

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– वैक्सीन आने की खबर से लोगों में उत्साह, कोविड-19 से स्थाई निजात की जगी उम्मीद
– वैक्सीन आने तक गाइडलाइन का पालन करना जरूरी

खगड़िया-

कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक संदेश पहुंचाने के बाद लोगों में सकारात्मक प्रभाव रहा है। जिसके कारण लोगों में जागरूकता आई और लोगों ने गाइडलाइन का पालन किया। किन्तु, वैक्सीन आने तक गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का प्रभाव कम हुआ है, यह समाप्त नहीं हुआ है । इसलिए, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।

– स्थाई समाधान की उम्मीद तो ठीक पर सतर्कता भी है जरूरी :-
खगड़िया के गोगरी-जमालपुर निवासी युवक संजीव कुमार जायसवाल का कहना है कि जब से लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीन आने की खबर मिली है तब से लोगों में उत्साह है। दरअसल, लोगों को उम्मीद है कि अब कोविड-19 से स्थाई निजात मिल जाएगी। यह उम्मीद और उत्साह तो जायज है। किन्तु, अभी सतर्कता और सावधानी भी जरूरी है।

– लोगों को जागरूक करने में स्वास्थ्य कर्मियों की रही बड़ी भूमिका :-
संजीव बताते हैं कि कोविड-19 के शुरुआती दौर में जब लोग अपनों से भी परहेज कर रहे थे। उस वक्त मुश्किल भरे दौर में भी स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देते रहे । इसके अलावा कोविड-19 से बचाव के लिए भी लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों को मास्क पहनने के लिए किया जाता था प्रेरित :-
संजीव ने बताया कि कोविड-19 के दौर में जो भी लोग अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान जाते वहाँ उन्हें स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सकों द्वारा मास्क पहनने, शारीरिक दूरी पालन करने, सैनिटाइजर का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता था। यहाँ तक बिना मास्क पहनने वाले मरीजों का चिकित्सकों द्वारा इलाज नहीं करने की बात कही जाती थी। चिकित्सकों का यह प्रयास सिर्फ और सिर्फ समाज के हर व्यक्ति मास्क पहनें यह सुनिश्चित करने का था। हालाँकि, शुरूआती दौर में यह लोगों को खराब भी लगा। किन्तु, बाद में हर व्यक्ति उत्साह के साथ खुद पहनने लगे। जिसका पूरे समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से लगातार हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– अनावश्यक मुँह, नाक और ऑख नहीं छएं।
– मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।

जिलेभर में 9 से 5 वर्ष के बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने का अभियान शुरू

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– जिले के हसनपुर ऑगनबाड़ी केंद पर सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने किया अभियान का शुभारंभ

– जिले के सभी प्रखंडों में घर- घर जाकर बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलायेंगी आशा कार्यकर्ता

लखीसराय-

जिले भर में 09 माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों को पिलाई जाने जाने वाली विटामिन ए की खुराक के अभियान की शुरुआत बुधवार से हो गई। यह अभियान आगामी 26 दिसंम्बर तक जिले के सभी प्रखण्डों में आशा कार्यकर्ता द्वारा चलाया जाएगा। अभियान का शुभारंभ जिले के सिविल सर्जन डॉ.आत्मानंद राय ने हसनपुर गाँव स्थित ऑगनबाड़ी केंद संख्या 156 पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन ने बताया कि बच्चों को विटामिन ए पिलाने का अभियान प्रत्येक छह महीने पर चलाया जाता है। बताया कि इस दौरान 09 महीने से 05 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाई जाती है। इस अवसर पर जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती, डब्ल्यूएचओ से डॉ. वारा प्रसाद, केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान, बीपीएम मो. खालिद, लखीसराय पीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

बच्चों में विटामिन-ए की कमी होगी दूर :-
जिला सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उदेश्य बच्चों में होने वाली विटामिन ए की कमी को दूर करना है । दरअसल विटामिन ए की कमी के कारण हीं बच्चे बार-बार बीमार होते हैं। इस वजह से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास नहीं हो पाता है। इस अभियान के बाद बच्चों में पाई जाने वाली ये सभी समस्याएँ दूर होंगी और बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होगा।

घर-घर जाकर आशा कार्यकर्ता बच्चों को पिलाएगी विटामिन ए की खुराक :-
सिविल सर्जन डॉ. राय ने बताया कि विटामिन ए की छमाही खुराक पिलाने का अभियान 23 से 26 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाएगी और इस बात का ख्याल रखेगी कि एक भी बच्चा विटामिन ए की इस खुराक से वंचित न रह जाय। साथ हीं शत-प्रतिशत बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जा सके इसको लेकर बच्चे के अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा। उनके मुताबिक 09 से 12 माह के बच्चों को 1 एमएल और 1 वर्ष से 5 वर्ष तक के बच्चों को 2 एमएल विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी। नियमित टीकाकरण के दौरान पिछले 4 माह में जिन बच्चों को खसरे का टीका या बूस्टर डोज के साथ विटामिन ए की खुराक पिलाई जा चुकी है, ऐसे बच्चों को अभियान के दौरान विटामिन ए की दवा नहीं पिलाई जाएगी।

कार्यक्रम को शत-प्रतिशत सफल बनाने पर दिया जाएगा बल :-
सिविल सर्जन ने बताया कि विटामिन ए की खुराक कार्यक्रम को शत-प्रतिशत सफल बनाने पर बल दिया जा रहा है। इसको लेकर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा माइक्रोप्लान तैयार कर बच्चों को दवाई दी जाएगी। जिसके दौरान दो गृह भेंट कार्यक्रम एवं दो दिन ऑगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दवाई दी जाएगी। हर स्थिति में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि एक भी बच्चा कार्यक्रम से छूटे नहीं।

कोविड-19 के गाइड लाइन का किया जाएगा पालन :-
सिविल सर्जन के अनुसार बच्चों को दवाई देने के दौरान आशा कार्यकर्ता सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड-19 से बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का भी पालन करेंगी। जैसे दो गज की शारीरिक दूरी, मास्क व
ग्लब्स का उपयोग, सैनिटाइजर को हमेशा अपने साथ रखना सहित सुरक्षा के अन्य मानकों का भी ख्याल रखेंगे ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो।

कोरोना काल में इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
-अनावश्यक यात्रा से करें परहेज ।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से करें उपयोग ।

– बाहरी खाना खाने से पूरी तरह करें परहेज ।
– साफ-सफाई का विशेष रूप से रखें ख्याल ।
– गर्म व ताजा खाना का हीं करें सेवन ।
– किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत कराएं जाँच ।

कमजोर नवजात की पहचान कर उसकी देखभाल बहुत जरूरी: डीपीओ

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कमजोर नवजात की पहचान और उसकी उचित देखभाल को लेकर दो दिवसीय ट्रेनिंग का समापन

आईसीडीएस द्वारा आयोजित दो दिवसीय ट्रेनिंग में जिलेभर की सभी सीडीपीओ हुई शामिल

भागलपुर-

कमजोर नवजात की पहचान और देखभाल को लेकर जिले की सभी सीडीपीओ की दो दिवसीय ट्रेनिंग का समापन बुधवार को हो गया. आईसीडीएस द्वारा शहर के एक होटल में आयोजित ट्रेनिंग शिविर के पहले दिन मंगलवार को सभी सीडीपीओ को कमजोर नवजात की पहचान के बारे में बताया गया, जबकि दूसरे दिन बुधवार को उसकी उचित देखभाल की जानकारी दी गई. डीपीओ अर्चना कुमारी और खरीक की सीडीपीओ संगीता कुमारी ने सभी सीडीपीओ को ट्रेनिंग दी. वहीं आईसीडीएस के जिला समन्वयक अरविंद पांडे और केयर इंडिया की सुपर्णा टाट ने ट्रेनिंग के दौरान तकनीकी तौर पर सहयोग किया.

ट्रेनिंग के दौरान डीपीओ अर्चना कुमारी ने कहा कि कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत होती है. कोरोना काल में मां की चुनौतियां और बढ़ गयी हैं. कमजोर बच्चे की पहचान सबसे अहम है. अगर आप इसमें सफल हो जाते हैं तो उसे स्वस्थ बनाना बड़ी बात नहीं है. ऐसा देखा गया है कि कमजोर नवजात में तापमान की कमी की समस्या रहती है. इससे निजात पाने में कंगारू मदर केयर रामबाण साबित हो रहा है. कंगारू मदर केयर के जरिए मां या घर का कोई भी व्यक्ति नवजात को अपने सीने से चिपकाकर उन्हें गर्मी देते हैं. यह प्रक्रिया तब तक करने की सलाह दी जाती है जब तक बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम न हो जाए या फिर एक माह पूरा ना हो जाए।

कंगारू मदर केयर से शिशु को गर्माहट मिलती है. संक्रमण से बचाव होता है. बार बार स्तनपान करने में सुविधा मिलती है. इसके साथ ही अगर शिशु को दिक्कत हो तो उसकी तुरंत पहचान हो जाती है. अर्चना कुमारी ने कहा कि कंगारू मदर केयर से बच्चे को स्तनपान कराने में मदद मिलती है. स्तनपान कराने के दौरान सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. जैसे कि बच्चे को छूने से पहले हाथ को साफ कर लेना चाहिए. इसके अलावा जब बच्चा पास में हो तो मास्क जरूर पहनना चाहिए. इन सावधानियों के साथ हम कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा जागरूक: ट्रेनिंग दे रही खरीक की सीडीपीओ संगीता कुमारी ने कहा कि कमजोर नवजात की देखभाल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. आंगनबाड़ी सेविका की मदद से गांव में जाकर लोगों को कमजोर नवजात की देखभाल से संबंधित उपाय बताए जा रहे हैं. कमजोर नवजात पैदा नहीं हो, इसे लेकर गर्भावस्था की शुरुआत से ही देखभाल की जरूरत होती है.

कमजोर बच्चे की कैसे करें पहचान:
ट्रेनिंग के दौरान केयर इंडिया की डॉक्टर सुपर्णा टाट ने कहा कि कमजोर नवजात की पहचान मुख्यतः 3 तरीके से होती है. इसमें पहला तरीका है उसका वजन 2000 ग्राम या इससे कम हो. दूसरा तरीका है कि बच्चा स्तनपान करने में सक्षम नहीं हो और तीसरा तरीका है कि बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो गया हो. इन पैमानों पर नवजात को जन्म के बाद परखने की जरूरत है और अगर बच्चा कमजोर पाया जाता है तो उसकी देखभाल शुरू कर देने की जरूरत है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.

• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.

• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.

• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.

• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.

• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.

• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें

• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों

• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें

• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना टीका को लेकर नहीं पालें कोई भ्रम, अफवाहों से बचकर रहें

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सुरक्षा के सभी मापदंडों पर परखने के बाद ही लोगों को दिया जाएगा टीका

कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर कर रहा है तैयारी

बांका, 23 दिसंबर

कोरोना टीकाकरण को लेकर सरकार की घोषणा के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर इसकी तैयारी में जुट गया है. सरकार ने मुफ्त में सभी लोगों को टीका देने की घोषणा की है. सबसे पहले सरकारी और निजी स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना का टीका दिया जाएगा. इसके बाद बुजुर्गों, सरकारी कर्मचारियों फिर आमलोगों को कोरोना का टीका दिया जाएगा. कोरोना टीकाकरण को लेकर एक तरफ जहां आमलोगों में उत्साह का माहौल है, वहीं समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो टीकाकरण को लेकर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं. अफवाह फैलाकर लोगों में नकारात्मक भाव पैदा कर रहे हैं. ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है. अफवाह पर ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है.

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कोरोना टीका को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरे जोर से लगा हुआ है. सरकारी निर्देश का पालन किया जा रहा है. जिले में कोरोना के रखरखाव का इंतजाम कर लिया गया है. पहले चरण में पड़ने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भी चिन्हित कर लिया गया है. टीका आने के बाद लोगों को देने का काम शुरू कर दिया जाएगा.

टीका को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं: डॉ चौधरी ने कहा समाज में कोरोना के टीकाकरण को लेकर अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर तरफ से टीका को परखने के बाद ही आमलोगों को दिया जाएगा. इसलिए टीका को लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं है. आपको जो टीका पड़ेगा वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा और आपका कोरोना से बचाव करेगा. मन में किसी भी तरह का भ्रम नहीं पालें.

टीका आने तक कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: डॉक्टर चौधरी कहते हैं जब तक टीकाकरण हो नहीं जाता है, तब तक लोगों को सख्ती से कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. घर से निकलते वक्त मास्क जरूर पहनना चाहिए. साथ ही भीड़-भाड़ से बचे रहना चाहिए. घर हो या बाहर हर जगह सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए. तभी कभी आप कोरोना से सुरक्षित रहेंगे.

टीका पड़ जाने के बाद भी लापरवाह रहना ठीक नहीं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं टीकाकरण के बाद लोग कोरोना से दो सुरक्षित हो जाएंगे, लेकिन अन्य तरह की संक्रामक रोग भी होते हैं, जिसका बचाव सावधानी से कर सकते हैं. मास्क पहनने से कोरोना समेत अन्य बीमारियों से भी हमारा बचाव होता है. सामाजिक दूरी का पालन करने से किसी भी तरह का संक्रामक रोग लोगों को नहीं होगा. इसलिए कोरोना का टीका पड़ जाने के बाद भी लोग कोरोना से सावधानी बरतेंगे तो अच्छा रहेगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना पर युवा दिखे जागरूक, कोविड-19 टीकाकरण पर आयोजित प्रतियोगिता में हुए शामिल

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• सीफ़ार के सहयोग से क्विज,भाषण एवं लेखन प्रतियोगियता का हुआ आयोजन
• युवाओं की सकारात्मक सोच से दिखा जागरूकता का असर
• समुदाय को कोरोना पर जागरूक करने का युवाओं ने लिया संकल्प

जमुई, 23 दिसम्बर, 2020: कोरोना संक्रमण काल में युवाओं की जागरूकता सामुदायिक जागरूकता की सूत्रधार बन सकती है. इसी उद्देश्य के साथ सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफ़ार) संस्था द्वारा बुधवार को जिले के खैरा प्रखंड के कुर्वाटांड़ स्थित स्वर्गीय खूबलाल यादव उच्च विद्यालय प्रांगण में 30 युवाओं के बीच क्विज, भाषण एवं लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस दौरान युवाओं में कोविड-19 को लेकर जानकारी देखने लायक थी. कोविड-19 टीकाकरण पर केन्द्रित क्विज, भाषण एवं लेखन प्रतियोगिता में युवाओं की भागीदारी एवं उनकी जागरूकता आने वाले समय में सामुदायिक आंदोलन में तब्दील होने का संकेत था.

युवाओं को मिला सम्मान:

कोविड टीकाकरण के महत्व पर लेखन प्रतियोगिता में अजित आनंद, गौरव कुमार एवं अर्चना भारती ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पाकर अपने गुरु मंटू यादव सहित अभिभावकों को गौरवान्वित किया. वहीं भाषण कला में अपर्णा-प्रथम, गौरव-द्वितीय एवं सिन्टू कुमार तृतीय स्थान हासिल कर अपनी योग्यता सिद्ध किए. कार्यक्रम का संचालन जिला स्वीप आइकॉन बेबी कुमारी एवं शिक्षक मंटू यादव ने किया। मनोनीत जज मंडली में गिरिश कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, अजय कुमार एवं इसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक मतिकांत झा शामिल रहे। कार्यक्रम को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाते हुए अतिथि डाक्टर मनीष कुमार ने कोविड-19 संबंधित सवालों को युवाओं से पूछा जिसका प्रतिभागियों ने उत्सुकता पूर्वक जबाब देते हुए दर्शकों से खूब तालियाँ बटोरने में सफल रहे।
युवाओं की सक्रियता बड़े बदलाव का सूत्रधार:

सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के राज्य सहायक प्रबंधक रंजीत कुमार ने कहा युवाओं की सक्रियता एवं सहभागिता हमेशा ही बड़े बदलाव का सूत्रधार बनती है. उन्होंने प्रतियोगिता में युवाओं की कोरोना पर जागरूकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस छोटे से जगह पर भी युवाओं के बीच कोरोना को बहुत जानकारी है. उन्होंने कहा कि युवाओं की यह जागरूकता उन तक सीमित न होकर परिवार, समुदाय एवं जिले तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि कोविड-19 टीकाकरण होने से पूर्व जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है, जो युवाओं के माध्यम से समुदाय तक पहुंच सकती है.

शिक्षा का उपयोग लोगों को जागरूक करना भी है:

स्वर्गीय खूबलाल यादव उच्च विद्यालय के प्राचार्य मतिकांत झा ने कोरोना जैसे संवेदनशील मुद्दे पर युवाओं की भागीदारी की तारीफ़ करते हुए कहा कि आज के दौर में कोरोना को हराने का सबसे शक्तिशाली हथियार जागरूकता ही है. इस जागरूकता को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए युवाओं की शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अपने समाज को कोरोना से बचाने में उनकी भूमिका अन्य लोगों से अधिक मायने रखती है. देश के भविष्य का निर्धारण हमेशा युवाओं के हाथ में होता है. महामारी के कारण देश कई तरह की समस्याओं से संघर्ष भी कर रहा है. लेकिन कोरोना के खिलाफ़ चलायी जा रही मुहिम के नेतृत्व की बाग़ ड़ोर यदि युवा अपने हाथों में लेते हैं तो आने वाले समय में कोरोना को पूर्णता मात देने में सफलता मिलेगी.

कोविड-19 टीके की हो रही तैयारी:

खैरा पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक गिरिश कुमार ने बताया कि कोरोना-19 वैक्सीन को लेकर जिले से प्रखंड स्तर पर तैयारियां हो रही है. आने वाले समय में फेज वाइज सबका टीकाकरण सुनिश्चित करने की योजना है. लेकिन अभी भी कोरोना का संक्रमण खत्म नहीं हुआ है. इसलिए लोगो को मास्क, शारीरिक दूरी एवं हाथों की सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने प्रतियोगिता में युवाओं के शामिल होने पर उनको धन्यवाद ज्ञापित किया.

ठंड बढ़ने के साथ कोल्ड डायरिया के मामले बढ़ रहे, रहें सावधान

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बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा आ रहे इस बीमारी की चपेट में

कोल्ड डायरिया होने पर एंटी बायोटिक लेने की भूल नहीं करें

बांका, 22 दिसंबर।

शीतलहर और कोहरे के कारण सर्दी चरम पर पहुंच गया है।
तापमान 5 डिग्री से नीचे चला गया है। ऐसे मौसम में कोल्ड डायरिया के मरीज बढ़ने लगे हैं। पिछले 1 सप्ताह में दर्जनों मरीज इलाज कराने के लिए अस्पताल आ चुके हैं। ऐसे में इस बीमारी के प्रति सचेत रहना बहुत जरूरी है।

हर उम्र के लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत रहना चाहिए-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार के साथ लोगों को दस्त की समस्या होती है। इस वजह से इसे कोल्ड डायरिया कहते हैं। इसकी चपेट में आमतौर पर ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग आते हैं, लेकिन हर उम्र के लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत रहना चाहिए।

गुनगुने पानी ही पीया करें:
डॉ चौधरी कहते हैं कि इस मौसम में गुनगुने पानी ही पीना चाहिए। ठंडा पानी पीने से परहेज करना चाहिए। अगर किसी को इस तरह की शिकायत आती है तो उन्हें मूंग दाल की खिचड़ी या फिर ओआरएस का घोल लेना चाहिए। भूल से भी एंटीबायोटिक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह नुकसानदायक होता है। कोल्ड डायरिया को दिनचर्या में बदलाव कर ही दूर किया जा सकता है।

प्रतिरोधक क्षमता कम होने से लोग कोल्ड डायरिया के होते हैं शिकार:
डॉ.चौधरी कहते हैं कि दरअसल बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस वजह से ये लोग कोल्ड डायरिया की चपेट में ज्यादा आते हैं। बच्चों को गर्म कपड़े पहना कर रखें। साथ ही उसे हॉर्लिक्स और च्यवनप्राश का सेवन कराएं। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं बुजुर्ग लोग गर्म कपड़े तो पहने ही साथ ही धूप का सेवन करें। समय मिलने पर धूप में टहला करें। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और डायरिया से आपका बचाव भी होगा।

भोजन पर रखें नियंत्रण:
डॉ चौधरी कहते हैं कि आमतौर पर सर्दी के मौसम में लोग अत्यधिक तेल मसाले और गर्म खाना पर जोर देते हैं। इन चीजों से बचना चाहिए। तेल मसाले ना सिर्फ आपको नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि दूसरी बीमारियों की भी चपेट में ला देगा। गरम खाना उतना ही खाना चाहिए, जितना शरीर बर्दाश्त कर सके। अत्यधिक खाना किसी भी मौसम में नुकसानदायक होता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंडसैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के मुश्किल दौर में भी अपने कर्तव्य पर डटी रही कामिनी कुमारी

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– परवत्ता बाल बिकास परियोजना कार्यालय में सीडीपीओ के पद पर हैं तैनात

– मजबूत इच्छाशक्ति और साकारात्मक सोच के बदौलत मुश्किल दौर में पूरी की जिम्मेदारी

खगड़िया, 20 दिसंबर, 2020
कोविड-19 संक्रमण के दौर में भी तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों की ना सिर्फ अहमियत बढ़ी है। बल्कि, समाजहित में उनके द्वारा किए गए कार्यों का साकारात्मक प्रभाव भी रहा है। कोविड-19 के मुश्किल दौर में जब पूरा समाज परेशानियाँ के दौर से गुजर रहा था। तब कुछ लोग ऐसे विपरीत और विषम परिस्थितियों में भी लोगों के सेवा देने में पीछे नहीं हटे। इतना ही नहीं लोगों को सेवा देने के साथ-साथ कोविड-19 से बचाव को लेकर जागरूक अपनी दोहरी जिम्मेदारी पूरी की। यह सबकुछ के पीछे मजबूत इच्छाशक्ति और साकारात्मक सोच का अहम योगदान रहा। परवत्ता बाल बिकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ कामिनी कुमारी भी ऐसा ही लोगों में शुमार है। जिन्होंने कोविड-19 के मुश्किल भरे दौर में भी ना सिर्फ दोहरी जिम्मेदारियों को कुशलता से पूरा किया, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल के बदौलत साकारात्मक सोच के साथ सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का संदेश अपने कार्य क्षेत्र के लोगों तक पहुँचाने भी सफल रही। इतना ही नहीं कोविड-19 से बचाव के लिए विभाग में तैनात कर्मियों के अलावा आम लोगों को भी जागरूक करती रही। ताकि बढ़ते संक्रमण पर विराम लगे और लोग संक्रमण के दायरे से दूर रहें।

– कर्मियों के साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाकर मुश्किल दौर में भी पूरी की कार्य :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कोविड-19 के मुश्किल भरे दौर में जब लोग घर से बाहर निकलना खुद को असुरक्षित समझते थे। तब परवत्ता सीडीपीओ ने अपने कर्मियों के साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाकर ना सिर्फ विभागीय कार्यों को बखूबी अंजाम दिया। बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल के बदौलत साकारात्मक सोच के साथ कोविड-19 से बचाव के लिए कर्मियों के साथ-साथ आमलोगों को भी जागरूक किया और क्षेत्र भ्रमण के दौरान सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का संदेश समाज के अंतिम तक पहुँचाने में भी सफल रही। जिसके साकारात्मक प्रभाव भी रहा।

– वक्त मुश्किलों से जरूर भरा था पर जिम्मेदारी भी थी बड़ी :
सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने बताया कोविड-19 का शुरूआती वक्त निश्चित ही मुश्किलों से भरा था। किन्तु, मेरे उपर उससे बड़ी जिम्मेदारी थी। जिसके कारण मैं नया सवेरा की उम्मीद के साथ कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने में जुट गई। शुरूआती दौर में परेशानी हुई। किन्तु, बाद में लोगों का भी सहयोग मिलने लगा। इस दौरान मैं लोगों को बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन की जानकारी दी और गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी की। जिसका साकारात्मक प्रभाव भी रहा और लोगों के सहयोग एवं खुद का साकारात्मक आत्मबल और दृड़ निष्ठा के बल पर मैं दोहरी जिम्मेदारी पूरी करने में सफल रही।

– मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी पालन सुनिश्चित करने पर दिया बल :
लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक करने के दौरान सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने इस बात पर बल दिया कि कम से कम समाज के प्रत्येक व्यक्ति निश्चित रूप से मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी पालन करें। क्योंकि, कोविड-19 से बचाव के लिए सबसे बेहतर और आसान उपाय यही है। जो समाज के हर तबके लोग करने में भी सक्षम हैं। इसके अलाव उन्होंने लोगों को साफ-सफाई, खान-पान, लक्षण दिखते ही कोविड-19 जाँच कराने एवं स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करने समेत सरकार द्वारा जारी अन्य गाइडलाइन को भी पालन करने के लिए जागरूक की।

– कर्मियों का भी मिला साकारात्मक सहयोग :-
वहीं, सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने बताया कि इस दौरान कर्मियों का भी साकारात्मक सहयोग मिला। हर कर्मी हर स्थिति में साथ खड़ा रहते थे। इसी के बदौलत मैं दोहरी जिम्मेदारी पूरी करने में सफल रही।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से।
– घर से निकलने पर निश्चित रूप से मास्क का उपयोग करें।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल और सेनेटाइजर पास रखें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।

कोरोना का टीका पड़ जाने से जान तो बच जाएगी बेटा

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टीका पड़ने की सूचना से मीरजाफरी की दलित बस्तियों में उत्साह

खुद के साथ बच्चों की जिंदगी को लेकर आश्वस्त हुए वृद्ध लोग

भागलपुर, 22 दिसंबर

“पिछले 9 महीनों से परेशान थे. जबसे कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. हमलोग चिंतित थे कि कहीं कोरोना काल में जान ना चली जाए, लेकिन जब से टीका पड़ने की सूचना मिली है तबसे हमलोगों में उत्साह है. पहले हमलोग सोचते थे इस कोरोना काल में निपट जाएंगे, लेकिन जब से सरकार ने मुफ्त में टीका देने की घोषणा की है तबसे हमलोगों में उम्मीद जगी है. अब हमलोग कोरोना के बाद भी जिंदा रहेंगे और सामान्य रूप से अपना जीवन- बसर कर सकेंगे”. ऐसा कहना है खरीक प्रखंड के मीरजाफरी गांव के 65 वर्ष के नागेश्वर रजक का.

कोरोना से अभी तक बचा हुआ है गांव: प्रखंड मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव अभी तक कोरोना की चपेट से बचा हुआ है. यहां के लोगों ने शुरुआत से ही जागरूकता अभियान चलाया. इसका असर भी दिख रहा है. गांव के अभी तक कोई भी सदस्य कोरोना की चपेट में नहीं आए हैं. गांव की दलित बस्ती में भी कोरोना को लेकर लोग जागरूक रहे हैं. लोग मास्क पहनकर ही बाहर निकलते हैं और सामाजिक दूरी का पालन करते हैं.

टीका आने की सूचना से मिली राहत: दलित बस्ती के ही रहने वाले 68 वर्षीय प्रमोद दास कहते हैं जबसे कोरोना का दौर शुरू हुआ लोग खौफ में जी रहे थे. खासकर बूढ़े लोग ज्यादा चिंतित थे. जवान लोग तो शरीर से मजबूत होते हैं. वह कोरोना का दंश को झेल लेते, लेकिन हम बूढ़े लोग क्या करते. जब इसकी दवा भी नहीं आई थी तो एक बार अगर हमलोगों को हो जाता तो फिर बचना मुश्किल था, लेकिन जबसे सुना है इसका टीका आने वाला है. तब से हमलोगों ने राहत महसूस की है.

सरकार व स्वास्थ्य विभाग का हूं शुक्रगुजार: 64 साल के अर्जुन दास कहते हैं हमलोग सरकार और स्वास्थ्य विभाग का बहुत शुक्रगुजार हैं. उनलोगों ने हमलोगों का ध्यान रखा और कोरोना का टीका मुफ्त में दिलवाने की घोषणा की. नए जमाने की नई बीमारी के बारे में बहुत ही नकारात्मक बातें सुनी थी. हमलोगों को लग रहा था कि अब समय पूरा हो गया है. अपने हिस्से की बची-खुची जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन टीका आ जाने से अब हमलोग सामान्य जीवन जी सकेंगे.

बच्चों की जिंदगी के प्रति हुए आश्वस्त: वहीं 72 वर्षीय जयप्रकाश दास कहते हैं कि बेटा हमलोग तो अपनी जिंदगी जी चुके हैं, लेकिन बच्चों को लेकर चिंतित थे. अब जब सरकार मुफ्त में लोगों को टीका दिलवा देगी तो इससे हमारे बच्चों की जिंदगी सुरक्षित हो जाएगी. हमलोगों का क्या पता आज कोरोना है, कल कोई और बीमारी आ जाएगी. लेकिन जब सरकार इस तरह का प्रयास कर रही है तो लोगों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. जैसे ही कोरोना टीका बाजार में आ जाएगा, वैसे ही जो नई बीमारी होगी उसका भी टीका आ जाएगा. सही मायने में टीका आ जाने से हमलोग खुद से ज्यादा बच्चों की जिंदगी के प्रति आश्वस्त हो गए हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें