कोरोना टीकाकरण की तैयारी को ले जिले भर के सभी स्वास्थ्य पदाधिकारियों का ऑनलाइन प्रशिक्षण

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– ऑनलाइन प्रशिक्षण में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी सहित विभिन्न प्रखण्डों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने लिया हिस्सा

– प्रशिक्षण में राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी नरेंद्र कुमार सिन्हा ने कोरोना टीकाकरण के लिए दिए कई आवश्यक निर्देश

लखीसराय, 22 दिसंबर : कोरोना टीकाकरण की तैयारी को ले राज्य सरकार लगातार ऑनलाइन जूम के माध्यम से स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मियों को प्रशिक्षित करने का प्रयास कर रही है। इसी के मद्देनजर मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर निदेशक( प्रतिरक्षण) सह राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिन्हा ने डिजिटली तरीके से जिले भर के सभी स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मियों को कोरोना टीकाकरण के सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया।

लखीसराय के जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया मंगलवार को ऑनलाइन ट्रेनिंग में राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिन्हा ने कोरोना टीकाकरण अभियान में शामिल होने वाले सभी कर्मियों का आरटीपीसीआर कोरोना जांच कराने के साथ ही वैक्सीनेशन बूथ पर बरती जाने वाली सावधानी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कोरोना वैक्सीन के भंडारण और वितरण की मिली जानकारी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया ट्रेनिंग में कोरोना वैक्सीन के सदर हॉस्पिटल स्थित बड़ा रेफ़्रिजरेशन सेंटर पर भंडारण के साथ ही जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी पर बनाए गए कोल्ड चेन पर वैक्सीन के भंडारण के साथ जिला मुख्यालय से प्रखण्डों में बने कोल्ड चेन तक वैक्सीन के ट्रांसपोटेशन के रेफ़्रिजरेटेड वाहन की आवश्यकता होगी। जिसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

वैक्सीनेशन बूथ पर वैक्सीन के रखरखाव और वेस्ट मैनेजमेंट की दी गई जानकारी :
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया वैक्सीनेशन बूथ पर वैक्सीन के रखरखाव, वैक्सीन लगाने की तकनीक, सैनिटाइजेशन, मास्क का उपयोग के साथ ही टीकाकरण के बाद बचे कचरे का भी सही तरीके से प्रबंधन करने की जानकारी जिले के सभी स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मियों को मिली।

कोरोना का वैक्सीन आने से पहले सभी लोग बरतें ये सावधानी :
जब तक कोरोना वायरस का वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक सभी लोग मास्क लगाएं क्योंकि अभी मास्क ही वैक्सीन है।
– सभी लोग किसी प्रकार के चीजों को छूने के बाद अनिवार्य रूप से साबुन या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– घर से बाहर भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने की स्थिति में सभी लोग शारीरिक दूरी के नियम के तहत कम से कम दी गज या छह फीट की दूरी मेंटेन रखें।
– कोरोना का वैक्सीन आने तक घर से बाहर खाने- पीने की चीजों का नहीं करें इस्तेमाल, घर में भोजन को हीं दे प्राथमिकता।

कोरोना टीकाकरण को ले जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक सहित अन्य पदाधिकारियों का प्रशिक्षण

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– जिला स्वास्थ्य समिति के सभागर में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

– मौके पर डीपीएम, एसीएमओ, डीआईओ, डीटीएल केयर सहित कई अधिकारी और ट्रेनर मौजूद

मुंगेर-
कोरोना टीकाकरण अभियान को ले स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी जोर- शोर से शुरू कर दी है। इसी के मद्देनजर सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में जिले के विभिन्न अनुमंडल और प्रखण्डों में कार्यरत अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इससे पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी आशीष भारती, डीपीएम नसीम रजी, डीआईओ प्रकाश चंद्र सिन्हा, डीटीएल केयर डॉ. अजय आर्य ने संयुक्त रूप से किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए जिले अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी आशीष भारती ने बताया इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आप लोगों को कोरोना टीकाकरण को ले सभी आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर पीपीटी स्लाइड के माध्यम से उपस्थित सभी अधिकारियों को कोरोना टीकाकरण के लिए भारत सरकार के द्वारा जारी किए गए सभी तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया।

कोरोना वैक्सीनेशन के लिए कम से कम तीन कमरों के वैक्सीनेशन सेंटर की आवश्यकता :
पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी आशीष भारती ने बताया कोरोना वैक्सीनेशन के लिए सबसे पहले तीन कमरों की वैक्सीनेशन सेंटर की आवश्यकता होगी। इसके लिए इलेक्शन बूथ की तरह सामुदायिक भवन, पंचायत सरकार भवन सहित अन्य भवनों को चिन्हित किया जा सकता है। यहां वेंटिलेशन, सैनिटाइजेशन, टॉयलेट, पेयजल, इलेक्ट्रिसिटी सहित अन्य आवश्यक संसाधन मौजूद रहना आवश्यक है। वैक्सीनेशन सेंटर के तीन कमरों में पहला कमरा इन्ट्री के बाद वेटिंग रूम जहां वैक्सीन लगवाने के लिए आने वाले लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना है। दूसरा वैक्सीनेशन रूम यहां लोगों को वैक्सीन लगाया जाना है और तीसरा ऑब्सर्वेशन रूम, यहां वैक्सीन लगने के बाद लोगों पर होने वाली प्रतिक्रिया का 30 मिनट तक ऑब्सर्व करना है। इसके बाद हीं लोगों को उसके घर भेजा जाएगा। वैक्सीनेशन सेंटर पर जाने के लिए लोगों को मास्क पहनना आवश्यक है।

कोरोना वैक्सीनेशन टीम में शामिल होंगे पांच लोग :
कोरोना वैक्सीनेशन टीम कम से कम पांच लोग शामिल होंगे। पहला कर्मी सुरक्षा कर्मी होगा जो वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर गेट पर तैनात रहेगा। वो वैक्सीनेशन के लिए आने वाले सभी लोगों की जांच- पड़ताल करेगा कि लिस्ट के अनुसार सही ब्यक्ति आया है या नहीं। वो अनिवार्य तौर पर मास्क की चेकिंग करेगा। बगैर मास्क लगाए वैक्सीनेशन सेंटर पर किसी की भी इंट्री नहीं हो पायेगा। दूसरा ब्यक्ति वेटिंग रूम में उपस्थित रहेगा जो वैक्सीनेशन के लिए आने वाले सभी लोगों की मिलान को-वीन एप्प में दर्ज कराए गए लोगों के नाम,पता एवं डॉक्यूमेंट से करेगा। यहां आने वाले सभी लोगों को अपने साथ वही आइडेंटिटी प्रूफ लाने होंगे जो उन्होंने नाम रजिस्टर्ड करवाने के वक्त दर्ज कराया था। दूसरे ब्यक्ति के द्वारा पूरी तेर वेरिफिकेशन के बाद हीं कोई ब्यक्ति अंदर वैक्सीनेशन रूम में जा पाएगा। इसके बाद वैक्सीनेशन रूम में दो लोग तैनात रहेंगे। जिसमें से एक ब्यक्ति एक बार फिर से को-वीन एप्प के अनुसार क्रॉस चेक करेगा। इसके बाद अगला ब्यक्ति उसे कोरोना का वैक्सीन लगायेगा। इसके बाद एक ब्यक्ति रूम में मौजूद रहेगा और 30 मिनट तक वैक्सीन लगाए ब्यक्ति का ऑब्जरवेशन करने के बाद हीं उसे घर जाने देगा।

टीकाकरण जनित कचरे का हो सही प्रबंधन :
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पदाधिकारियों को टीकाकरण जनित कचरे के प्रबंधन की भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया वैक्सीनेशन सेंटर पर चार रंग लाल, पीला, हरा, और नीला के अलावे काले रंग का एक बड़ा प्लास्टिक रखना है। काले रंग के बड़े प्लास्टिक में सभी कचरा एकत्रित कर उसका सही प्रबंधन करना है।

कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक की जानकारी भी मोबाइल मेसेज के माध्यम से लोगों को दी जाएगी :
प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह बताया गया कि कोरोना वैक्सीनेशन की दूसरी खुराक के बारे में तारीख, समय और स्थान की सूचना भी मोबाइल मेसेज के जरिये हीं दी जाएगी।

सर्दियों के मौसम में लगातार गिर रहे पारा को देखते हुए रहें सावधान

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– ब्लड सुगर, बीपी, हार्ट, अस्थमा के मरीजों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता
– सर्दियों के मौसम में ठंड के बढ़ने के साथ हीं बढ़ जाती है वायरल फीवर, सर्दी, खाँसी, निमोनियां सहित कई बीमारियों कि समस्या

लखीसराय
दिसंबर बदलते मौसम में ठंड के महीने में पिछले कुछ दिनों से लगातार गिर रहे पारा को देखते हुए ठंड जनित बीमारियों के होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके मद्देनजर सभी लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों को और अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। मालूम ही कि सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ हीं लोगों में ठंड जनित बीमारियां जैसे वायरल फीवर, सर्दी – खाँसी, निमोनिया, बीपी,अस्थमा का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। इन बीमारियों से बचाव का एकमात्र उपाय सावधानी और सतर्कता हीं है।

ठंड से बचाव में नहीं करें कोई लापरवाही :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया सर्दियों के मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के दौरान लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति और भी सचेत रहने की आवश्यकता है। इसके साथ हीं लोगों को हमेशा ठंड से बचाव के लिए सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लापरवाही के कारण लोगों को ठंड का एक्सपोजर लग जा रहा है। जिससे लोग ठंड जनित बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।

बच्चे भी बदलते मौसम से हो रहे हैं प्रभावित :-
उन्होंने बताया कि बच्चे भी बदलते मौसम से प्रभावित हो रहे हैं। जिसके कारण वायरल, फीवर, सर्दी, खाँसी और निमोनिया से पीड़ित हो रहे हैं। हालाँकि, इसबार बच्चों में टाइफाइड और जौंडिस की शिकायतें नहीं के बराबर मिल रही हैं। इसका कारण लॉकडाउन के दौरान बच्चों का बाहरी खाना नहीं खाना माना जा रहा है। इसलिए, बच्चे के स्वास्थ्य प्रति भी सजग रहना जरूरी है।

सुगर, बीपी, हार्ट, अस्थमा के मरीज रहें सावधान :
बदलते मौसम में खासकर शुगर , बीपी, हार्ट, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल, ठंड के मौसम में बीपी और शुगर बढ़ जाता है। इसलिए, ऐसे लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। ताकि अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

इन मानकों का रखें ख्याल कर कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का हमेशा करें पालन ।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करते हुए दूसरों को भी करें प्रेरित ।
– घर से बाहर निकलने पर हमेशा अपने साथ रखें हैंड सैनिटाइजर ।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से करें परहेज ।
– घर से बाहर खाना खाने से बचें ।

कोरोना काल में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाकर शरीर को रखें स्वस्थ

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शारीरिक गतिविधियां बढ़ने से बिना संक्रमण वाली बीमारियों से होता है बचाव

घर से निकलते वक्त मास्क जरूर पहनें और खुली हवा में रहने की कोशिश करें

बांका, 21 दिसंबर।

कोरोना करोना काल में लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने लगे हैं।. लोग न सिर्फ मास्क और
ग्लब्स पहन रहे हैं, बल्कि स्वस्थ रहने के लिए अन्य एहतियात भी बरत रहे हैं. । बहुत सारे लोगों ने खाना-पीना पर नियंत्रण कर रखा है तो कुछ लोग योग और ध्यान मेडिटेशन कर खुद को स्वस्थ रख रहे हैं. । ये सारी चीजें तो जरूरी है हीं ही. इसके साथ साथ शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाकर भी लोग खुद को निरोग और स्वस्थ रख सकते हैं. ।
शारीरिक गतिविधियों से ना सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि तमाम रोगों से भी बचाव होता है–
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां तो पहले भी लोग करते थे, लेकिन कोरोना काल में ऐसा करने वालों की संख्या बढ़ी है. । पहले सिर्फ जागरूक लोग ऐसा करते थे, लेकिन कोरोना काल में आमलोगों का भी रुझान इस ओर बढ़ा है।. दरअसल, शारीरिक गतिविधियों से ना सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि तमाम रोगों से भी बचाव होता है।. खासकर वैसे रोग जिसका संक्रमण दूसरे से नहीं होता है।. वैसी वैसे बीमारियां शारीरिक गतिविधियां रहने से नहीं होती हैं।.

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता होती है विकसित: डॉ.क्टर चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।. इससे तमाम तरह की बीमारियों से लोगों का बचाव होता है।. अगर व्यक्ति किसी बीमारी की चपेट में आ भी गया तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अधिक रहने से वह व्यक्ति जल्द ही उस बीमारी से उबर जाता है।. इसलिए लोगों को शारीरिक गतिविधियों को करते रहना चाहिए।.

शुगर, हार्ट और हाइपरटेंशन से होता है बचाव: डॉक्टर चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से लोग शुगर, हाइपरटेंशन और हार्ट की बीमारियों से बचे रहते हैं।. यह सारी बीमारियां शरीर बढ़ने से हो जाती जाता है।. यानि वजन अधिक रहने से।. ऐसे ऐसी वजन बढ़ने से लोग शुगर की चपेट में आते हैं।. आमतौर पर जिस व्यक्ति को शुगर है वह व्यक्ति हाइपरटेंशन की भी चपेट में आ जाता है। फिर ह्रदय(हार्ट) की बीमारी की चपेट में आ जाता है ।. जो व्यक्ति शारीरिक गतिविधियां करते हैं वे इन सब बीमारियों से बचे रहते हैं।.

मानसिक तौर पर ही मिलती है राहत: डॉक्टर चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से लोग मानसिक तौर पर स्वस्थ रहते हैं।. जो व्यक्ति सुबह की सैर (मॉर्निंग वॉक) करता हो या फिर शरीर को ज्यादा समय तक सक्रिय (एक्टिव) रखता हो, उस व्यक्ति में किसी तरह का तनाव (स्ट्रेस) नहीं आता स्ट्रेस है।. इस वजह से वह मानसिक तौर पर मजबूत रहता है।. ऐसे व्यक्ति लोगों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हैं।.

बाहर निकलते वक्त इन बातों का रखें ध्यान: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कोरोना काल में घर से बाहर निकलना उचित नहीं है।. अगर आप घर में रहते हुए शारीरिक गतिविधियां कर रहे हैं या फिर योग और व्यायाम करने पर समय व्यतीत कर रहे हैं तो बाहर निकलने की जरूरत नहीं है, लेकिन घर पर नहीं कर रहे हैं तो बाहर निकलें।. लेकिन मास्क पहनकर ही बाहर निकलें| इसके अलावा भीड़- भाड़ से बचें।. किसी भी ऐसी जगह पर ना जाएं जहां पर खुली हवा नहीं आती हो।. खुली हवा आने से कोरोना के संक्रमण संभावना कम रहती है. । जो व्यक्ति इन सब बातों पर ध्यान देगा वह पूरी तरह से स्वस्थ रहेगा।.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

2 लाख 92 हजार बच्चों को कल से पिलाई जाएगी विटामिन ए की दवा

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जिलेभर में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को पिलाएंगी खुराक

विटामिन ए की दवा पिलाने से बच्चों का कई रोगों से हो सकेगा बचाव

बांका

जिले के 2 लाख 92 हजार बच्चों को कल से विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी. इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है. दरअसल, बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए विटामिन ए अनुपूरक कार्यक्रम की शुरुआत होगी. इसके तहत 9 माह से 5 साल तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी. नियमित टीकाकरण के दौरान पिछले 4 माह में जिन बच्चों को खसरे के टीके या बूस्टर डोज के साथ विटामिन ए की खुराक पिलाई गई है, वैसे बच्चों को अभियान के दौरान खुराक नहीं दी जाएगी.

इसे लेकर राज्य कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सिविल सर्जन व जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश जारी किया है. पत्र में कार्यक्रम को लेकर जिला, प्रखंड और ग्रामीण स्तर पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जानकारी दी गई है. बताया गया है कि विटामिन ए की सिरप 9 से 11 माह के बच्चों को 1 एमएल, जबकि 12 से 60 माह के बच्चों को दो एमएल की खुराक दी जाएगी.

निमोनिया डायरिया और रतौंधी जैसी बीमारी से होगा बचाव: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया विटामिन ए की दवा पिलाने से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, जिससे बच्चों में आंखों की रोशनी से संबंधित कोई बीमारी नहीं होगी. रतौंधी से बच्चों का बचाव होगा. साथ ही निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारी की भी चपेट में बच्चे नहीं आ पाएंगे. इसलिए जिले के लोगों से मेरी अपील है कि स्वास्थ्य विभाग तो विटामिन ए की दवा पिलाने के लिए चौकस है ही. यदि कोई आपका बच्चा छूट जाए तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर विटामिन ए का खुराक उसको जरूर दिलवा दें.

आशा कार्यकर्ताओं को दी गई ट्रेनिंग: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने कहा अभियान को लेकर आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दे दी गई है. 23 से 26 तारीख के दौरान आशा कार्यकर्ता घर घर जाकर बच्चों को विटामिन ए की खुराक देंगे. इसे लेकर एक माइक्रोप्लान तैयार किया गया है और इसमें आशा कार्यकर्ताओं को अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी सहयोग करेंगे.

कोरोना की गाइडलाइन का किया जाएगा पालन: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने कहा कि विटामिन ए की खुराक देने के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा. आशा कार्यकर्ता बच्चों को टच नहीं करेंगी. परिजन को एक साफ चम्मच लाने को कहेंगी, दूर से ही विटामिन ए की सिरप पिलाएंगी. बच्चे परिजन की गोद में रहेंगे.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

लखीसराय जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ अन्नप्राशन का आयोजन

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– छः माह से उपर के बच्चों को खिलाया गया पौष्टिक आहार
– डीपीओ ने जिले के दो केंद्रों पर अपने हाथों से बच्चे का कराया अन्नप्राशन
– कार्यक्रम के दौरान पोषण के महत्व की दी गई विस्तार से जानकारी

लखीसराय, 19 दिसंबर।
लखीसराय जिले के सभी प्रखंडों में शनिवार को अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान जिले के सभी सेविका ने अपने-अपने पोषक क्षेत्र के छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को गृह भेंट कार्यक्रम के तहत अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। इधर, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा समेत विभाग के अन्य पदाधिकारी व संबंधित क्षेत्र की पर्यवेक्षिका (एलएस) ने क्षेत्र भ्रमण कर अन्नप्राशन कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की।

– ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 127 व 56 पर डीपीओ ने खुद कराया अन्नप्राशन :-
जिले के ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 127 पोषक क्षेत्र की पूजा देवी के घर जाकर उनके 08 माह की पुत्री पायल कुमारी एवं केंद्र संख्या 56 पोषक क्षेत्र की ललिता देवी के घर जाकर उनके 07 माह के पुत्र अनुज कुमार को आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने गृह भेंट कार्यक्रम के तहत खुद अन्नप्राशन कराया और दोनों बच्चे को अपने हाथों से आहार खिलाया।

– अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी : –
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया कि इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं । तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण हो पाएगा। इसके अलावे 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।

– पौष्टिक आहार की महत्ता की दी गई जानकारी :-
शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। वहीं, कहा कि सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।

– स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर दिया गया बल:-
साफ पानी एवं ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है। शौच जाने से पहले एवं बाद में तथा खाना खाने से पूर्व एवं बाद में साबुन से हाथ धोना चाहिए। घर में तथा घर के आस-पास सफाई रखनी चाहिए। इससे कई रोगों से बचा जा सकता है।

– कोविड-19 से बचाव की भी दी गई जानकारी :-
कार्यक्रम दौरान लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी गई। जैसे कि, मास्क, दो गज की शारीरिक- दूरी, हैंड सैनिटाइजर का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही भीड़ से बचने की अपील की गयी।

– इन बातों का रखें ख्याल : –
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– व्यक्तिगत स्वच्छता और दो गज की शारीरिक-दूरी का रखें ख्याल।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएँ।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह को अनावश्यक छूने से बचें।

कोरोना वैक्सीन के लिए जिले के छह हजार से अधिक स्वाथ्यकर्मियों और आईसीडीएस कर्मियों का डाटा बेस तैयार

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– स्वास्थ्यकर्मियों और आईसीडीएस कर्मियों का नाम रजिस्टर्ड कर डाला जा रहा है ऑनलाइन पोर्टल पर

– नाम-पता रजिस्टर्ड कराने पर ही मिलेगी वैक्सीन
– वैक्सीन के भंडारण के लिए सदर अस्पताल के आरएचएस सहित जिले के सभी पीएचसी में बनाया गया है कोल्ड चेन

मुंगेर, 19 दिसंबर। कोरोना वायरस के संक्रमण से जिलेवासियों को बचाने को लेकर मुंगेर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग काफी सक्रिय है। कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर जिले भर में कार्यरत सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर, आईसीडीएस के अंतर्गत काम करने वाली आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका सहित लगभग छह हजार से अधिक कर्मियों का डाटा बेस तैयार कर लिया गया है। इन सभी लोगों का नाम रजिस्टर्ड कर ऑनलाइन पोर्टल पर डाला जा रहा है।

कोरोना वैक्सीन के भंडारण के लिए जिले भर के सभी पीएचसी में बनाये गए हैं कोल्ड चेन :
कोरोना वैक्सीन के भंडारण के लिए जिले भर में बनाए गए कोल्ड चेन संचालन की जिम्मेवारी संभाल रहे जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी प्रकाशचन्द्र सिन्हा ने बताया कि सदर अस्पताल परिसर स्थित आरएचएस में जिला स्तर पर एक बड़ा कोल्ड रेफ्रिजरेशन सेंटर बनाया गया है। इसके साथ हीं जिले भर के सभी पीएचसी पर एक कोल्डचेन बनाया गया है। जिलास्तरीय बड़े रेफ्रिजरेशन सेंटर से वाहन के माध्यम से आवश्यकतानुसार सभी पीएचसी पर बने कोल्डचेन पर कोरोना वैक्सीन को पहुंचाया जाएगा।

बगैर रजिस्ट्रेशन के किसी को भी नहीं मिल पाएगी कोरोना की वैक्सीन :
डीआईओ ने बताया कि बगैर रजिस्ट्रेशन कराए किसी को भी कोरोना की वैक्सीन नहीं मिल पाएगी। उन्होंने बताया कि वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के लिए सभी लोगों के पास फ़ोटो लगा हुआ रजिस्टर्ड दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा जॉबकार्ड, किसी पब्लिक लिमिटेड कंपनी का पहचान पत्र, पेंशन कार्ड का होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बगैर फ़ोटो लगे दस्तावेज के किसी का भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। उन्हें वैक्सीन भी नहीं मिल पाएगी।

28 दिनों के अंतराल पर लेने होंगे कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दो वैक्सीन :
कोरोना को लेकर सदर अस्पताल परिसर में स्थापित जिला नियंत्रण कक्ष के नोडल अधिकारी सह अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त निर्देश के अनुसार सभी लोगों को 28 दिनों के अंतराल के बाद कोरोना के दो वैक्सीन लगने हैं। क्योंकि कोरोना वैक्सीन की दो खुराक के बाद हीं लोगों का कोरोना वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी।

कोरोना संक्रमित मरीजों को 14 दिनों के बाद हीं लगेगी वैक्सीन :
डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को 14 दिनों के बाद हीं बीमारी का लक्षण पूरी तरह से समाप्त होने के बाद ही वैक्सीन लग पाएगी। उन्होंने बताया कि इन लोगों को भी 28 दिनों के अंतराल के बाद वैक्सीन की दूसरी खुराक लेनी होगी ।

रजिस्टर्ड किए गए लोगों को मोबाइल के माध्यम से समय के बारे में मिलेगी सूचना :
उन्होंने बताया कि कोरोना वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर्ड किए गए लोगों को वैक्सीनेशन के समय के बारे में मोबाइल के माध्यम से सूचना दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वैक्सीनेशन की पूरी व्यवस्था होने तक सदर अस्पताल सहित जिले भर के सभी पीएचसी, सीएचसी, अनुमंडल और रेफरल अस्पताल में कोरोना जांच की मौजूदा रफ्तार को कायम रखते हुए संक्रमण से बचाव के लिए सभी एहतियात बरतें जाएंगे।

कोरोना का वैक्सीन लगने के बाद लोगों को किस तरह बरतनी होगी सावधानी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी प्रकाशचंद्र सिन्हा ने बताया कि कोरोना का वैक्सीन लगने के बाद लोगों को आधे घंटे तक बूथ पर हीं विश्राम करना है ताकि किसी प्रकार का विपरीत प्रभाव (साइड इफेक्ट) होने पर तत्काल पता चल सके औऱ सही उपचार किया जा सके। उन्होंने बताया कि लोगों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक लगने के बाद भी मास्क पहनने की आदत नहीं छोड़नी होगी।

कोरोना का वैक्सीन आने तक सभी लोग बरतें ये सावधानी :
– घर से बाहर निकलने पर अनिवार्य रूप से लगाएं मास्क ।
– किसी भी प्रकार की चीज छूने की स्थिति में अनिवार्य रूप से साबून या सैनिटाइजर से अपने हाथों को करें साफ ।
– किसी काम से भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने पर काम से कम दो गज या छह फीट की दूरी के नियम का करें पालन
– आवश्यक अपने मुंह, नाक, कान को छूने से बचें। हाथों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद हीं चेहरे को छुएं।
– घर के बने भोजन या नाश्ता हीं करें, बाजार में कुछ भी खाने-पीने से करें परहेज ।

सर्दी, खांसी और बुखार हो तो जांच कराएं, डरे नहीं

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-बुखार होने से जरूरी नहीं कि आप कोरोना की चपेट में आ गए
-समय पर इलाज शुरू हो जाने से जल्द हो जाएंगे स्वस्थ

बांका-
सर्दी के मौसम में आम तौर पर सर्दी, बुखार और खांसी के मामले बढ़ जाते हैं। अभी कोरोना काल भी चल रहा है। कोरोना का भी लक्षण इन्हीं बीमारियों से मिलता- जुलता है। इस वजह से लोग जांच कराने से डरने लगते हैं। लोगों के मन में इस बात का डर रहता है कि जांच कराने पर कहीं कोरोना नहीं निकल जाए। ऐसे लोगों को डरना नहीं चाहिए, बल्कि जांच करानी चाहिए। अगर कोरोना हो भी गया तो सही समय पर पता चल जाने से उसका इलाज शुरू हो जाएगा और लोग जल्द स्वस्थ हो जाएंगे।

जांच और इलाज तत्काल करवाने से व्यक्ति जल्द स्वस्थ हो जाता —
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि दरअसल कोरोना का डर अभी लोगों के मन से गया नहीं है। सर्दी, बुखार होने पर भी उन्हें कोरोना का डर सताने लगता है, जबकि ऐसा होना नहीं चाहिए। अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है तो उसकी जांच और इलाज तत्काल करवाने से वह व्यक्ति जल्द स्वस्थ हो जाता है। साथ में दूसरे व्यक्ति भी संक्रमित होने से बच जाता है।

कोई जरूरी नहीं कि आपको कोरोना ही हो:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर आप ने जांच नहीं कराई और आप कोरोना से पीड़ित हैं तो अनजाने में आप कई और लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए इस तरह की लापरवाही नहीं बरतें और सर्दी, बुखार खांसी होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखा कर अपनी जांच करा लें। कोई जरूरी नहीं है कि आपको कोरोना ही होगा। अगर 3 दिनों तक लगातार बुखार रहा हो तभी आप कोरोना के शिकार हो सकते हैं।

घर के सदस्यों से बनाएं दूरी:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि अगर आप सर्दी- खांसी और बुखार से पीड़ित हों तो घर के सदस्यों से दूरी बनाकर रखें। लोगों से बात करते वक्त मास्क लगा लें। ऐसा करने से आप दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकेंगे। कोरोना हो या कोई और बीमारी, जागरूकता से ही इस पर लगाम लगाया जा सकता है। इसके लिए अपने बचाव के साथ दूसरों का भी बचाव जरूरी है। इसलिए अगर इस तरह की शिकायतें सामने आए तो घर के सदस्यों से दूरी बना कर रहें। बाहर जाने से बचें। अगर घर से बाहर जाएं तो सामाजिक दूरी का पालन अवश्य करें।

खुद से इलाज नहीं करें:
ऐसा देखा जाता है कि जो लोग डॉक्टर से दिखाने से डरते हैं, ऐसे लोग अपना इलाज खुद ही शुरू कर देते। बहुत हुआ तो मेडिकल दुकानवालों से सलाह लेकर दवा का सेवन कर लेते हैं। ऐसा बिल्कुल भी ना करें। ऐसा करना सही नहीं है। दवा का विपरीत असर (साइड इफेक्ट) भी होता है। बीमार पड़ने पर डॉक्टर को दिखाकर उनकी सलाह पर ही दवा का सेवन करें।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
•उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
•घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
•बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
•आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
•मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
•किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
•कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
•बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जिले में कोरोना टीकाकरण अभियान के लिए तैयार हैं शिक्षक

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– कोरोना टीकाकरण के दूसरे दौर में शिक्षकों का होना है टीकाकरण

– कोरोना टीकाकरण बाद हीं जिले में जिले में स्मूथ हो पाएगी शैक्षणिक ब्यवस्था

मुंगेर, 18 दिसंबर : कोरोना टीकाकरण अभियान को ले जिले में कार्यरत शिक्षक बिल्कुल तैयार हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से जिले भर के सभी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधि ठप है। स्कूल के बंद होने की वजह से शिक्षकों का दैनिक शैक्षणिक कार्य भी नहीं हो पा रहा है। हालांकि राज्य सरकार के आदेशानुसार शिक्षक स्कूल तो जाते हैं लेकिन शैक्षणिक कार्य से नहीं बल्कि गैर शैक्षणिक कार्य से। शिक्षकों को उम्मीद है कि कोरोना के बाद हीं स्कूल सही मायने में खुल पाएंगे और स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो पाएगी।

कोरोना वायरस के संक्रमण को ले सदर अस्पताल परिसर में स्थापित जिला नियंत्रण कक्ष के नोडल अधिकारी डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि कोरोना काल में स्वास्थ्य कर्मियों की तरह शिक्षकों ने भी अहम भूमिका निभाई है। स्कूलों में जब क्वारनटाइन बनाकर कोरोना संक्रमित लोगों को रखा गया था उस समय शिक्षकों ने ही अहम भूमिका अदा की थी।

कोरोना टीकाकरण के दूसरे चरण में शिक्षकों को लगना है टीका :
डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि कोरोना टीकाकरण के दूसरे चरण में शिक्षकों और पुलिस कर्मियों को टीका लगाया जाना है। इससे पहले प्रथम चरण में सभी स्वास्थ्य कर्मी और फ्रंट लाइन वर्कर को कोरोना का टीका लगना है।

टीकाकरण के तीसरे चरण में आम लोगों को लगना है कोरोना का टीका :
डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि जिले के सभी आम लोगों को कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण में टीका लगना है। इसके सभी आवश्यक तैयारियां जोर-शोर से की जा रही है।

कोरोना टीकाकरण के लिए तैयार हैं जिले के शिक्षक :
जिला मुख्यालय के मुफ़स्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत मध्य विद्यालय नवादा शंकरपुर में कार्यरत शिक्षक राजेश कुमार यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से मार्च के महीने से हीं स्कूल के बंद रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई- लिखाई ठप है। कोरोना का वैक्सीन आने के बाद अब उम्मीद जगी है कि बहुत हीं जल्द स्कूल में शैक्षणिक गतिविधि शुरू हो पाएगी।

स्कूल के बंद रहने से प्रभावित हुई है दिनचर्या :
जिले के बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत नया छावनी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका सुषमा कुमारी ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से स्कूलों के बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई- लिखाई के साथ हीं हमलोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई है। अब उम्मीद है कि वैक्सीन के आने के बाद बच्चों के साथ- साथ हम शिक्षकों की भी दिनचर्या नियमित हो सकेगी।

कोरोना टीकाकरण से जगी उम्मीद की किरण :
मध्य विद्यालय गौरीपुर, सफियाबाद मुंगेर में कार्यरत शिक्षक निर्मल कुमार ने बताया कि पिछले लगभग 9 महीने से स्कूलों के लगातार बंद रहने की वजह से बच्चों के साथ-साथ हम शिक्षिकों के अंदर भी निराशा घर करने लगी थी कि पता नहीं कब स्कूल खुलेंगे और पढ़ाई- लिखाई शुरू हो पाएगी। अब कोरोना टीकाकरण का अभियान शुरू होने के बाद उम्मीद की किरण दिखाई दी है कि बहुत हीं जल्द स्कूल बच्चों की उपस्थिति से गुलजार हो सकेगा ।

कोरोना टीकाकरण अभियान में सहयोग के लिए तैयार हैं शिक्षक :
कासिम बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत हसनगंज विद्यालय में कार्यरत शिक्षक इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि हम सभी शिक्षक कोरोना टीकाकरण अभियान में अपना सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इससे यह उम्मीद जगी है कि बहुत हीं जल्द स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो पाएगी।

कोरोना का वैक्सीन आने तक सभी लोग बरतें ये सावधानी :
– जब तक जिले कोरोना का वैक्सीन आ नहीं जाए सभी लोग अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें। क्योंकि वैक्सीन के आने तक मास्क हीं वैक्सीन है।
– किसी भी प्रकार की चीजों को छूने के बाद अनिवार्य रूप से साबून या सैनिटाइजर से करें अपने हाथों को साफ।
– घर से बाहर भीड़- भाड़ वाले स्थान पर जाने पर शरीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए कम से कम दो गज या छह फ़ीट की दूरी बनाए रखने की करें कोशिश ।

कमजोर नवजात शिशु के उचित देखभाल के लिए घर-घर जाकर जागरूक कर रही है टीम

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– केयर इंडिया की टीम के सहयोग से प्रखण्ड स्तर पर नवजात बच्चों होती है ट्रैकिंग

लखीसराय-
स्वास्थ्य विभाग के डब्ल्यूएनबी प्रोजेक्ट के तहत केयर इंडिया के सहयोग से जिले के सभी प्रखंडों में आशा दीदी घर-घर जाकर नवजात शिशु के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर रही है। इस कार्यक्रम में केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर, कम्युनिटी हेल्थ मैनेजर के साथ ही आशा एवं एएनएम बहनें घर-घर जाकर नवजात शिशु के वजन का जांच करती है। टीम यह जानने की कोशिश करती है कि जन्म के वक्त शिशु का वजन 2 किलो से कम तो नहीं है या फिर कहीं शिशु का जन्म निर्धारित समय से पहले तो नहीं हुआ है। इसके साथ ही टीम यह भी जानने की कोशिश करती है कि जन्म के बाद नवजात शिशु ठीक से अपनी मां का स्तनपान कर रहा है या नहीं। ऐसे बच्चों की पहचान होने के बाद केयर इंडिया के सहयोग से स्वास्थ्य की टीम बच्चों के उचित देखभाल के लिए उनके मां-बाप एवं अन्य लोगों को जागरूक करने का काम करती है।

नवजात शिशु की मां को साफ-सफाई और कंगारू मदर केयर तकनीक की दी जाती है जानकारी :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र चौधरी ने बताया टीम के द्वारा नवजात शिशु की मां को बच्चे का सही तरीके से साफ-सफाई रखने, कंगारू मदर केयर तकनीक से देखभाल करने और ठंड के मौसम में बच्चे को गर्म रखने को ले आवश्यक जानकारी दी जाती है।

सर्दियों के मौसम में कैसे रखें नवजात शिशु का ध्यान दी जाती है जानकारी :
डॉ. चौधरी ने बताया कि सर्दियों की मौसम में नवजात शिशु को गर्म रखने एवं निमोनिया जैसी संकामक बीमारी से बचाने के लिए कंगारू मदर केयर तकनीक के बारे जानकारी दी जा रही है ताकि नवजात शिशु की मृत्यु दर को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह प्रयास डब्ल्यूएनबी यानि वीक न्यू बोर्न प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। इसके तहत कमजोर नवजात शिशु की पहचान कर उसके उचित देखभाल के लिए उनकी मां एवं अन्य लोगों को जागरूक किया जाता है।

टीम में शामिल रहते है केयर इंडिया के प्रतिनिधि :
डॉ. देवेंद्र चौधरी ने बताया कि टीम में केयर इंडिया के प्रतिनिधि के तौर पर ब्लॉक मैनेजर, कम्युनिटी हेल्थ कोर्डिनेटर सहित कई अन्य लोग शामिल रहते हैं।

कोरोना काल एवं सर्दियों के मौसम में कैसे करें नवजात शिशु की देखभाल –
– सर्दियों के मौसम में नवजात शिशुओं को सबसे अधिक खतरा निमोनिया से होता है। इससे बचाव के लिए नवजात शिशु को हमेशा गर्म कपड़ें पहनकर या उसमें लपेटकर रखने की आवश्यकता है।
– घर के जिस स्थान पर नवजात शिशु को रखा जा रहा हो उस स्थान को बजी हमेशा गर्म रखने की आवश्यकता है। इसके साथ हीं बच्चे का बेड एवं उसके नैपकिन पैड को भी हमेशा सूखा रखने की आवश्यकता है।
– नवजात शिशु की मां को हमेशा अपने बच्चे को स्तनपान ही करना चाहिये ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो और वो कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो सके।
– नवजात शिशु के लिए आवश्यक टीका अनिवार्य तौर पर लगवाएं।
– नवजात शिशु को कई बीमारियों से बचाने के लिये उनकी मां को कंगारू मदर केयर तकनीक का सहारा लेना चाहिए।
इसके साथ हीं नवजात बच्चे की मां को अपने रहन- सहन, खानपान में काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि नवजात बच्चे के देखभाल में कोई चूक नहीं हो और नवजात शिशु की मृत्यु दर को कम किया जा सके।