छोटी उम्र में बड़े काम, युवाओं ने लोगों को जागरूक कर गांव को रखा कोरोना मुक्त

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खरीक प्रखंड के मीरजाफरी गांव के युवाओं ने कोरोना को लेकर चलाया जागरूकता अभियान

5 हजार की घनी आबादी रहने के बावजूद गांव अभी तक बना हुआ है कोरोना मुक्त

भागलपुर, 11 दिसंबर

देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर. इस कहावत को चरितार्थ किया है खरीक प्रखंड के मीरजाफरी गांव के युवाओं ने. गांव की लगभग 5 हजार आबादी है. सघन आबादी रहने से गांव में कोरोना के संक्रमण की संभावना ज्यादा थी, लेकिन गांव के युवाओं ने अपनी जिम्मेदारी को समझा और लोगों को कोरोना को लेकर जागरूक किया. इसका परिणाम यह रहा कि आसपास के गांव में काफी संख्या में कोरोना मरीज मिलने के बावजूद यह गांव अभी तक कोरोना से अछूता है. यहां से अभी तक एक भी मरीज नहीं निकला है.

सबसे पहले प्रवासी भाइयों को समझाया: गांव में कोरोना के प्रति जागरूकता अभियान का नेतृत्व करने वाले 32 वर्षीय रंजन कुमार कहते हैं कि उनके गांव से बड़ी संख्या में लोग बाहर काम करते हैं. कोरोना काल जब शुरू हुआ तो वहां से वे लोग वापस घर आने की सोच रहे थे. उस समय तक इस इलाके में कोरोना ने अपना पांव नहीं पसारा था. उन्हें आशंका थी कि कहीं बाहर से आए लोगों से गांव के लोगों में कोरोना का संक्रमण नहीं हो जाए. इसलिए वह कुछ युवा दोस्तों के साथ मिलकर उनलोगों के आने के पहले से ही सतर्क हो गए. जब प्रवासी भाई आने लगे तो पास में बने क्वारंटाइन सेंटर में पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्होंने व उनके साथियों ने संभाली. वहां से अवधि पूरी होने के बाद ही उन लोगों को गांव में आने दिया.

शुरुआत में हो रही थी मुश्किल: जागरूकता अभियान में रंजन का साथ दे रहे 19 वर्ष के शिवम कुमार ने बताया कि शुरुआत में बहुत मुश्किल हो रही थी. घर के लोग बाहर से आए सदस्यों से मिलने को आतुर हो रहे थे, उनकी भावनाओं को नियंत्रित करना बहुत ही मुश्किल था. लेकिन जब हमलोगों ने घर के सदस्यों को समझाया कि यह आपकी भलाई के लिए ही कर रहे हैं तो वे लोग मान गए और क्वारंटाइन सेंटर पर मिलने से जाने से परहेज करने लगे. बाहर से आए प्रवासी भाई 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद ही घर गए.

बाहर से आए लोगों पर रख रहे थे नजर: स्नातक अंतिम वर्ष का छात्र 22 वर्षीय अमन किशोर कहते हैं कि बाहर से आए प्रवासी लोग अपने दोस्तों और घर के सदस्यों से चोरी-छिपे मिलने चले ना जाए, इसकी भी आशंका हमलोगों के मन में थी. इसलिए हमलोग सख्त निगरानी रखते थे. घर के सदस्यों के साथ गांव में उनके दोस्तों को समझाया कि अभी ऐसा ना करें. कुछ समय तक परहेज करें. उसके बाद आप अपनी पुराने दुनिया में लौटें.

गांव के लोगों को किया सतर्क: 18 साल के कुमार अमन कहते हैं कि सिर्फ प्रवासी भाइयों की देखभाल करने से ही कोरोना से बचना मुश्किल था. आसपास के गांव के कई लोग कोरोना की चपेट में आ गए थे. ऐसे में गांव के लोगों को बिना जागरूक किए कोरोना से बचना मुश्किल था. इसलिए हमलोगों ने घर-घर जाकर लोगों से मास्क पहनने की अपील की. बाहर से आने पर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करने को कहा. इसके अलावा लोगों से शारीरिक दूरी का पालन करने की बात भी कही. लोगों ने भी इसको माना और इसका परिणाम आप सबके सामने है.

जागरूकता अभियान चलाने से गांव के लोगों में विश्वास लौटा: 18 साल के ही नितिन कुमार कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए सतर्कता ही एकमात्र हथियार है. इसलिए हमलोगों ने इसी पर ध्यान दिया. इसमें हमारे गांव के लोगों का भी सहयोग रहा. आसपास के गांव में कोरोना पीड़ित मिलने से गांव के लोग खौफजदा हो गए थे, लेकिन जब उन्हें बचाव के उपाय समझाया तो उनमें विश्वास लौटा और लोगों ने बचाव के उपाय किए. इसका परिणाम यह है कि गांव अभी तक कोरोना मुक्त है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ओठ-तालू कटे बच्चों का होता है सुरक्षित ऑपरेशन

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– इस कार्यक्रम के तहत जमुई के खैरा गांव के एक बच्चे का करवाया गया ऑपरेशन
– सदर जमुई के सहयोग से बच्चे का पटना स्थित आईजीआईएमएस हॉस्पिटल में हुआ ऑपरेशन
जमुई, 10 दिसंम्बर : जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सिलाई टांड़ निवासी श्री राम साव के बच्चे विनय कुमार का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उसके कटे ओठ-तालू का ऑपरेशन हुआ। बच्चे का ऑपरेशन जमुई सदर हॉस्पिटल के सहयोग से पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में किया गया है।
खैरा गांव के एक वर्ष के बच्चे का हुआ सफल ऑपरेशन :
बच्चे के पिता श्री राम साव ने बताया कि आज से लगभग एक साल पहले उनके बच्चे विनय का जन्म खैरा प्रखंड क्षेत्र स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर हुआ था। जन्म से ही हमारे बच्चे का ओठ और तालू कटा हुआ था। इसके बाद उन्होंने सबसे पहले जमुई के शिशु रोग विशेषज्ञ एस.एन.झा से मिलकर अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने सदर हॉस्पिटल जमुई में कार्यरत डॉक्टर डॉ. नॉशाद से मिलने की बात कही। डॉ. नॉशाद से मिलने के बाद उन्होंने सदर हॉस्पिटल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कृष्णमूर्ति से मिलने की बात कही। इसके बाद उन्होंने डॉ. कृष्णमूर्ति से मुलाकात कर उनसे अपने बच्चे की परेशानी बताई तो उन्होंने अपने तरफ से हर सम्भव सहयोग करने का आश्वासन दिया। इसके बाद मेरे बच्चे की ऑपरेशन से पहले की सभी जांच करने के बाद ऑपरेशन के लिए बच्चे को स्वस्थ्य पाए जाने के बाद सदर हॉस्पिटल से रेफर करते हुए एम्बुलेंस से पटना स्थित आइजीआइएमएस हॉस्पिटल भेज दिया। जहां हमारे बच्चे के ओठ का सफल ऑपरेशन किया गया और तालू के ऑपरेशन के लिए चार-पांच महीने के बाद बुलाया गया है।

सदर जमुई के सहयोग से बच्चे का पटना स्थित आईजीआईएमएस हॉस्पिटल में हुआ ऑपरेशन:
लगभग एक वर्ष का बच्चा विनय कुमार की मां गीता देवी ने बताया कि विनय मेरा दूसरा बेटा है। इससे बड़ा बेटा विवेक कुमार लगभग चार साल का है। आज से लगभग चार महीने पहले मेरे बच्चे विनय कुमार के ओठ का ऑपरेशन हुआ है और चार-पांच महीने के बाद फरवरी में तालू के ऑपरेशन के लिए बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि आइजीआइएमएस पटना के डॉक्टर सतीश कुमार ने मेरे बच्चे को देखा और डॉक्टर नवीन मिश्रा ने ओठ का ऑपरेशन किया। उन्होंने बताया कि सदर हॉस्पिटल जमुई में ऑपरेशन से पहले की जांच से लेकर अन्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं मिली। डॉ. कृष्णमूर्ति ने जांच से लेकर पटना भेजने के साथ हीं ऑपरेशन होने तक लगातार संपर्क करते रहे।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर जन्मजात विक्रतियों वाले बच्चों को चिन्हित कर रही आरबीएसके टीम:
सदर हॉस्पिटल जमुई में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर बीएसके) के समन्वयक डॉ. कृष्णमूर्ति ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में कार्यरत पीएचसी एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर ओठ- तालू कटे बच्चों को चिन्हित करने के लिए आरबीएसके की काम कर रही है। इन केंद्रों पर चिन्हित बच्चों को प्राथमिक जांच-पड़ताल ले बाद सदर हॉस्पिटल भेजा जाता है। इसके बाद सदर हॉस्पिटल में आये बच्चों को उपलब्ध संसाधनों से ऑपरेशन से पहले की सभी जांच की जाती है और जांच के बाद बच्चे को ऑपरेशन के लिए स्वस्थ्य पाए जाने के बाद हॉस्पिटल के एम्बुलेंस से बिहार स्थित किसी भी मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल में रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चे को ऑपरेशन के रेफर करने के बाद ही टीम का काम समाप्त नहीं हो जाता है। बच्चे के ऑपरेशन होने तक और उसके बाद भी उसकी लगातार मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जाती है। इसके साथ हीं बच्चे का ऑपरेशन होने बाद सदर हॉस्पिटल के एम्बुलेंस से हीं वापस उसके घर भेजा जाता है।

कोरोना से जंग जीतकर मरीजों की सेवा में जुटी है डॉक्टर वंदना

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– प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असरगंज में कार्यरत हैं महिला चिकित्सक
– अदम्य साहस और मजबूत आत्मबल और मनोबल से जीती जंग
मुंगेर, 10 दिसंम्बर : कोरोना वायरस के संक्रमण ने किसी को भी नहीं छोड़ा चाहे वो डॉक्टर- नर्स हो या कोई अन्य लोग। कोरोना काल में जब भारत सरकार के निर्देश के बाद लगभग पूरा देश अपने- अपने घरों में कैद हो गया था। उस वक्त भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों के इलाज के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना जो लोग अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत थे, वो डॉक्टर, नर्स सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी हीं थे। इसी कड़ी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असरगंज में कार्यरत लेडी डॉक्टर वंदना भी है। जिन्होंने अपने जान की परवाह न करते हुए मानवता की रक्षा के लिए कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटी रही। हालांकि इस दौरान वो खुद भी कोरोना वायरस के संक्रमण से बच नहीं सकी और कोरोना संक्रमित हो गई।

मजबूत इच्छा शक्ति, आत्मबल और मनोबल से जीती जंग :
डॉ. वंदना ने बताया कि “जिस समय कोरोना के डर से कोई अपने घर से बाहर नहीं निकलना चाहता था। उस समय हमारे घर वाले भी कहते थे तुम्हें घर से बाहर जाने की क्या जरूरत है ?, क्या तुम्हें अपने जान की कोई परवाह नहीं है? लेकिन मैं सिर्फ इतना कहती थी कि मैं एक डॉक्टर हूँ और मेरा पहला कर्तब्य अपने पास आने वाले सभी मरीजों का इलाज करना है चाहे वो मरीज कोरोना संक्रमित हीं क्यों न हो। भले हीं इस दौरान में खुद कोरोना संक्रमित हो जाऊं। हालांकि मरीजों का ईलाज करते- करते मै खुद भी कोरोना संक्रमित हो गई और खुद को आईसोलेट करते हुए सेल्फ क्वारेंटाइन हो गई। इस दौरान मैंने इम्युनिटी बढ़ाने वाले पोषक तत्वों का पूरा इस्तेमाल किया। इसके बदौलत हीं कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरने में सफल हो पाई”।

कोरोना को मात देकर काम पर लौटी डॉ. वंदना
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असरगंज के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ललन प्रसाद ने बताया कि यू तो स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाला सभी स्वास्थ्य कर्मी एक कोरोना योद्धा हीं हैं। कोरोना काल में जिस तरह से अपनी जान की बाजी लगाकर स्वास्थ्य कर्मियों ने काम किया है वो किसी योद्धा से कम नहीं है। लेकिन जिस तरह से असरगंज पीएचसी में कार्यरत डॉक्टर वंदना ने अपनी दायित्वों का निर्वहन किया है वो काबिले तारीफ है। हालांकि इस दौरान वो खुद भी कोरोना संक्रमित हो गई। बावजूद इसके अपनी अदम्य साहस, आत्मबल और मनोबल के बदौलत कोरोना वायरस के संक्रमण को मात देकर अपने काम पर लौट आई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में करने वाले सभी स्वाथ्य कर्मियों को डॉ. वंदना के अदम्य साहस से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन आने तक बरतें ये सावधानी :
जब तक कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के वैक्सीन नहीं आ जाता है तब तक अनिवार्य तौर पर मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। क्योंकि अभी मास्क ही वैक्सीन है।

– भीड़- भाड़ वाले स्थानों पर जाने पर शारीरिक दूरी के नियम का अनिवार्य तौर पर करें पालन

– किसी भी चीज को छूने की स्थिति में अपने हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से करें साफ ।

लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ 16 दिवसीय अभियान का हुआ समापन

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• समाज में व्याप्त लिंग आधारित हिंसा को समाप्त करने में सभी का योगदान आवश्यक
• घर से ही जेंडर आधारित समानता की शुरुआत

•घर-परिवार से ही जेंडर समानता को प्रोत्साहित करने का प्रयास करना होगा

•30 प्रतिशत महिला 15 वर्ष की आयु से ही होती है शारीरिक हिंसा का शिकार

पटना 10 दिसंबर। सहयोगी संस्था द्वारा ‘क्रिया’ के सहयोग से मानवाधिकार दिवस के अवसर पर लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध मनाए जाने वाले 16 दिवसीय अभियान के समापन समारोह का आयोजन पैनाल उच्च विद्यालय, बिहटा के प्रांगण किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मनेर के विधायक भाई वीरेन्द्र के साथ पैनाल पंचायत की सरपंच बबिता देवी, सिमरी के मुखिया जवाहरलाल विश्वकर्मा, पंचायत समिति के सदस्य, आदि उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्रा सहित लगभग 200 महिला-पुरुषों के प्रतिभागिता की।
16 दिवसीय अभियान महिला हिंसा के विरुद्ध एक सशक्त अभियान है तथा इसके अंतर्गत स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक एवं संवेदनशील कर सभी के सहयोग का आह्वान करता है। जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध यह एक विश्वस्तरीय अभियान है जो 25 नवम्बर –‘महिला हिंसा को समाप्त करने के अन्तराष्ट्रीय दिवस’ से 10 दिसम्बर – ‘अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ तक मनाया जाता है। इस अभियान के आयोजन द्वारा जेंडर आधारित भेदभाव एवं हिंसा के प्रति लोगों को जागरूक कर इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का प्रयास किया जाता है।

सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में समुदाय को जागरूक करने का प्रयास:

इस अवसर पर सहयोगी संस्था की कार्यक्रम निदेशिका रजनी ने प्रतिभागियों को जानकारी देते हुए बताया कि सहयोगी संस्था अपने आरम्भ से ही सक्रीय रूप से महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा एवं इसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में समुदाय एवं विभिन्न हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलु हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा व्यक्तिगत मामला नहीं है, इन घटनाओं के कारण घर-समाज के विभिन्न सदस्यों पर बहुत गहरा मानसिक-मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव पड़ता है। समाज के संतुलित विकास में महिला-पुरुष दोनों की समान भागीदारी बहुत आवश्यक है, घर-परिवार को टूटने-बिखरने से बचाने के लिए घरेलु हिंसा एवं जेंडर हिंसा जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने की आवश्यकता है।

30 प्रतिशत महिला 15 वर्ष की आयु से ही होती है शारीरिक हिंसा का शिकार:

निदेशिका रजनी ने कहा कि उपस्थित प्रतिभागियों को लिंग आधारित भेदभाव एवं हिंसा की व्यापकता एवं भयावहता के बारे में बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NHFS-4) के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 15-49 वर्ष के आयु वर्ग की 30 प्रतिशत महिलाओं को 15 वर्ष की आयु से ही शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है, इसी आयु-वर्ग की 6 प्रतिशत महिलओं को उनके जीवन-काल में कम-से-कम एक बार यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है। लड़कियों-महिलाओ के शिक्षा, स्वस्थ्य-पोषण की स्थिति भी बहुत दयनीय है।

घर-परिवार से ही जेंडर समानता को प्रोत्साहित करने का प्रयास करना होगा: विधायक

मनेर के विधायक भाई वीरेन्द्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपने घर-परिवार से ही जेंडर समानता को प्रोत्साहित करने का प्रयास करना होगा, विशेषकर माता-पिता एवं अभिभावकों को अपने लड़के-लड़की के प्रति समान व्यवहार अपनाना होगा। उनके समान शिक्षा, पोषण को सुनिश्चित कराकर समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास आवश्यक है। सरपंच बबिता देवी ने भी समाज में व्याप्त घरेलु हिंसा को समाप्त करने के लिए सभी के योगदान की महता बताई। इस अवसर पर ढिबरा की महिला बेंड को भी सम्मानित किया गया। महिला बेंड की सदस्य ने कहा कि यह क्षेत्र पहले पुरुषों के एकाधिकार में था, विभिन्न विरोधों के बावजूद उन्होंने अपने निश्चय से इस कार्य को सफलतापूर्वक जारी रखा।
सहयोगी संस्था पटना के विभिन्न गांवों-बस्तियों में घरेलु हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा को समाप्त करने के लिए ठोस रणनीति के तहत अलग-अलग तरह के कार्यक्रम का आयोजन करती है, संस्था के द्वारा विभिन्न हितधारकों – महिला, पुरुष, किशोर, किशोरी, शिक्षक, सेवा-प्रदाताओं, पुलिस, मीडियाकर्मी, आदि के साथ अलग-अलग मंचों पर इस मुद्दे के प्रति जागरूकता बनाने की कार्य करती है। सामुदायिक स्तर पर बैठकों, उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन कर संस्था स्थानीय स्तर लोगों को जागरूक बनाने का कार्य करती है, नेटवर्क संस्थाओं के सहयोग से इस संस्था के द्वारा कई अभियानों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है।
सहयोगी द्वारा इस 16 दिवसीय पखवारे के दौरान विभिन्न गांवों, पंचायतों, प्रखंडों में बैठक, उन्मुखीकरण, नुक्कड़ नाटकों आदि के द्वारा सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराया गया। आज के 16 दिवसीय अभियान के समापन समारोह के अवसर पर सहयोगी की कार्यक्रम निदेशिका रजनी, कार्यक्रम समन्वयक उन्नति रानी, एडवोकेसी कोऑर्डिनेटर धर्मेन्द्र कुमार सिंह, सेशन कोऑर्डिनेटर राजू पाल के साथ सामाजिक संगठनकर्ता लाजवंती देवी, उषा देवी, संजू कुमारी, मुन्नी कुमारी, रिंकी देवी, बिंदु देवी, निर्मला देवी, सुरेन्द्र सिंह, नितीश कुमार उपस्थित रहे।

साफ-सफाई और बेहतर देखभाल से कमजोर नवजात को बनाएं स्वस्थ

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कमजोर नवजात की पहचान है सब सबसे अहम कड़ी

कंगारू मदर केयर इसमें हो रहा है रामबाण साबित

बांका, 10 दिसंबर

कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस लिहाज से कोरोना काल में मां की चुनौतियां और बढ़ गयी है. बेहतर साफ-सफाई एवं देखभाल के जरिए कोरोना संक्रमण काल में भी कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कमजोर बच्चे की पहचान सबसे अहम है. अगर आप इस में सफल हो जाते हैं तो उसे स्वस्थ बनाना बड़ी बात नहीं है. ऐसा देखा गया है कि कमजोर नवजात में तापमान की कमी की समस्या रहती है. इससे निजात पाने में कंगारू मदर केयर रामबाण साबित हो रहा है. कंगारू मदर केयर के जरिए मां या घर का कोई भी व्यक्ति नवजात को अपने सीने से चिपकाकर उन्हें गर्मी देते हैं. यह प्रक्रिया तब तक करने की सलाह दी जाती है जब तक बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम न हो जाए. इसके साथ-साथ सदर अस्पताल में रेडिएंट वार्मर की भी व्यवस्था है. बच्चा अत्यधिक कमजोर है तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है, जहां पर उसका उचित इलाज किया जाता है.

स्तनपान कराना नहीं भूलें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि बच्चे को स्तनपान कराना नहीं भूलें. हां, सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. जैसे कि बच्चे को छूने से पहले हाथ को साफ कर लेना चाहिए. इसके अलावा जब बच्चा पास में हो तो मास्क जरूर पहनना चाहिए. इन सावधानियों के साथ हम कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा जागरूक: कमजोर नवजात की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका की मदद से गांव में जाकर लोगों को कमजोर नवजात की देखभाल से संबंधित उपाय बताए जा रहे हैं. कमजोर नवजात पैदा नहीं हो इसे लेकर गर्भावस्था की शुरुआत से ही देखभाल की जरूरत है.

कमजोर बच्चे की कैसे करें पहचान:
कमजोर नवजात की पहचान मुख्यतः 3 तरीके से होती है. इसमें पहला तरीका है उसका वजन 2000 ग्राम या इससे कम हो. दूसरा तरीका है कि बच्चा स्तनपान करने में सक्षम नहीं हो और तीसरा तरीका है कि बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो गया हो. इन पैमानों पर नवजात को जन्म के बाद परखने की जरूरत है और अगर बच्चा कमजोर पाया जाता है तो उसकी देखभाल शुरू कर देने की जरूरत है.

कमजोर नवजात को 30 दिनों तक विशेष देखभाल की जाती है: कमजोर नवजात की बेहतर देखभाल के लिए कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसमें कमजोर नवजातों को 30 दिनों तक फॉलो-अप किया जाता है. इसके लिए फैसिलिटी स्तर से एनएनएम या डॉक्टर आशा एवं परिवार का 9 बार फॉलो-अप करती हैं. कमजोर नवजात के पहले 7 दिन तक अल्टरनेट डे पर आशा एवं परिवार का फॉलोअप किया जाता है. आठवां कॉल 14 वें दिन एवं 9 वां कॉल 30 वें दिन कर परिवार से कमजोर नवजात का हाल पूछा जाता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना मरीजों के चलते बन गया था कंटेनमेंट जोन, अब हो गया है मुक्त

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मई से लेकर अगस्त तक में 50 से भी ज्यादा मरीज सुरखीकल से निकले थे

लोगों का जागरूकता अभियान लाया रंग, अब लोग हो गए हैं भयमुक्त

भागलपुर, 10 दिसंबर

तिलकामांझी का सुरखीकल मोहल्ले में काफी रसूखदार लोग रहते हैं. शहर के बेहतर मोहल्लों में गिनती होती है, लेकिन कोरोना काल में यह कंटेनमेंट जोन बन गया था. मई से लेकर अगस्त तक यहां पर 50 से ज्यादा कोरोना के मरीज निकले. 4 महीने तक मोहल्ले में जगह-जगह पर बांस बल्ली लगा रहता था. इस वजह से यहां आने से भी लोगों में भय तह, लेकिन यहां के लोगों ने अपनी जिम्मेदारी को समझा और जागरूकता अभियान चलाया. लोगों को मास्क, ग्लव्स और हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया. इसका परिणाम है कि आज मोहल्ला कोरोना मुक्त हो गया है. लोग भयमुक्त माहौल में रहने लगे हैं.

मोहल्ले में चलाया जागरूकता अभियान: मोहल्ले के रहने वाले और बाबा टेंट हाउस चलाने वाले मिहिर कुमार झा कहते हैं कि कोरोना काल में बाहर से इस मोहल्ले में लोग आने से भी डरते थे. एक साथ कई मामले निकल जाने से मोहल्ले को चारों तरफ से सील कर दिया गया था. हर जगह पर बांस वाली लगा हुआ था. यह ऐसी बीमारी है, जिसका 1 दिन में इलाज भी संभव नहीं. इस वजह से हमलोगों ने जागरूकता अभियान चलाया और लोगों को समझाया कि कोरोना से कैसे बचा जा सकता है. इसी का परिणाम आज मिला है.

दुकान पर उसी को सामान दिया जो मास्क पहने रहते थे: मोहल्ले में किराना दुकान चलाने वाले राजेश कुमार कहते हैं कि जब यहां पर कोरोना मरीजों का निकलना शुरू हुआ था तब कोई घर पर आने से भी डरता था. उन्होंने भी अपनी दुकान बंद कर ली थी. फिर 1 दिन सोचा कि आखिर कब तक ऐसे रहेंगे. कुछ तो करना पड़ेगा. वह भी मिहिर जी के साथ जुड़ गए तथा उनके साथ लोगों को जागरूक करने लगे. इसके बाद उन्होंने अपनी दुकान खोली और दुकान पर उसी लोगों को सामान दिया करता था जो मास्क पहने रहते थे और सामाजिक दूरी का पालन करते थे. इसी का परिणाम है कि अब सब कुछ ठीक हो गया है.

पर्व त्यौहार पर भी अपनी जिम्मेदारी को निभाया: मोहल्ले के रहने वाले और रियल एस्टेट से जुड़े राकेश कुमार झा कहते हैं कि कोरोना ना काल में हमलोगों का व्यवसाय तो खत्म हो ही गया था तो सोचा क्यों ना जागरूकता अभियान ही चलाया जाए. आखिर कोरोना खत्म होगा तभी तो हमारा व्यवसाय भी चलेगा. यह सोचकर वह मिहिर जी के साथ जुड़े और सुबह-शाम, पर्व-त्यौहार के मौके पर लोगों को मास्क और हैंड सैनिटाइजर उपलब्ध करवाया. साथ ही सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया.

ग्राहक से कोरोना की गाइडलाइन का करवाते हैं पालन: मोहल्ले में जनरल स्टोर चलाने वाले रूपेश कुमार कहते हैं कि कोरोना ने तो व्यवसाय को चौपट कर ही दिया था. ऐसे में अगर जान भी नहीं बचाते तो क्या करते. घर में तो दिनभर बैठे रहते थे. इससे बेहतर था कि उस समय का कुछ इस्तेमाल किया जाए. वह भी जागरूकता अभियान में जुड़े औरबाकी लोगों के साथ सुबह शाम लोगों को जागरूक करने के साथ मास्क का वितरण करने लगे. अब मोहल्ला कोरोना मुक्त हो गया है. लोगों का आना-जाना भी शुरू हो गया है. सबसे सुखद बात यह है कि हम लोग भी अपनी दुकान फिर से चलाने लगे. दुकान पर आने वाले ग्राहकों से कोरोना की गाइडलाइन का पालन करवाते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

‘सूर्यदत्ता के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. संजय चोरडिया ‘लायन समाजरत्न पुरस्कार’ से सम्मानित

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पुणे :

लायन्स क्लब ऑफ पुणे ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी प्रतिष्ठान व लायन्स फ्रेंड्स के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफइंस्टीट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया को शेखर गायकवाड़ के हाथों तीसरे ‘लायन्स समाजरत्न पुरस्कार ‘ से सम्मानित किया गया। इस मौकेपर अंतर्राष्ट्रीय डायबिटीज-डे के अवसर पर आयोजित निशुल्क डायबिटीज जांच शिविर में डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. अश्विनी जोशी ने व्याख्यान दिया।

बावधन स्थित सूर्यदत्ता के बन्सीरत्न सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व पुलिस अधिकारी विट्ठल जाधव, वरिष्ठ पत्रकार सम्राट फडणीस, डॉ. सतीशदेसाई, डॉ . संदीप बुटाला, नगरसेवक दिलीप वेडे पाटिल, पूर्व नगरसेवक योगेश मोकाटे, लायन्स क्लब के पूर्व गवर्नर व मधुमेह जनजागरण कार्यक्रम के संयोजकलायन चंद्रहास शेट्टी, लायन श्याम खंडेलवाल, लायन सतीश राजहंस, आर के शहा, दीपक लोया, ज्योतिकुमार अग्रवाल, जीतेंद्र मैड, प्रकाश नारके, विजय रोडेउपस्थित थे.

इस मौके पर शेखर गायकवाड ने कहा, “कोरोनाने क्षेत्रों में बदलाव आ गया है. ऐसे समय पर शिक्षण, सामाजिक क्षेत्र में लगातार नए नए प्रयोग होने चाहिए. हमें आउट-ऑफ-डेट शिक्षा के बजाय अप-टू-डेट ज्ञान प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए. शिक्षा सामाजिक दृष्टिकोण से दी जानी चाहिए न कि व्यापारी दृष्टि से देनी चाहिए. डिजिटल तंत्रज्ञान को  आत्मसात करना चाहिए. छात्रों के मन में कोई भी शंकाए ना रहे,ऐसे प्रकार की शिक्षा देने का प्राध्यापकों का ध्येयहोना चाहिए. हम चीनी क्षेत्र में भी कई बदलाव कर रहे हैं. हम अभिनव पहल लागू कर रहे हैं.”

इस मौके पर प्रो. डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, ”यह पुरस्कार प्राप्त करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है. जरूरतमंद लोगों की सहायता करना हमारी सामाजिकजिम्मेदारी है. उसी भावनासे पिछले दो दशक से सूर्यदत्ता संस्था काम कर रही है. हम इनोवेटिव व शाश्वत शिक्षा प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं. ‘शेयरिंग इज केगेनिंग’ के सिद्धांत पर अपना ज्ञान, पैसा व समय अन्य लोगों को देते रहें.निस्वार्थ सेवा अपना उद्देश्य होना चहिए. पिछले आठ-नऊ महीने से करोनाने इन्सानियतका बंध और दृढ़ किया है.”

कार्यक्रम में विट्ठल जाधव ने भी संबोधित किया. प्रस्ताविक भाषण में चंद्रहास शेट्टी ने कहा, ”डायबिटीज़ को लेकर जनजागरण हेतु यह कार्यक्रम पिछले 17 सालोंसे आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्य करने वाले समाजसेवियों को सम्मानित किया जाता है.” कार्यक्रम का सूत्र संचालन प्रकाश नारके वआभार प्रदर्शन आर के शहा ने किया.

कोविड-19 के साथ बढ़ रहे ठंड में बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहना जरूरी

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– तापमान में लगातार हो रही गिरावट से बढ़ी लोगों की परेशानी

– हर स्थिति में मास्क का उपयोग व शारीरिक दूरी का करें पालन

खगड़िया, 09, दिसंबर, 2020
लगातार गिर रहे कुहासा से मौसम का मिजाज पूरी तरह ठंड में तब्दील हो गई है। जिसके कारण भारी ठंड का एहसास होने लगा और लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। ऐसे में कोविड-19 एवं ठंडजनित शारीरिक परेशानी से दूर रहने के लिए सावधान और सतर्क रहना बेहद जरूरी है। खासकर बच्चे और बुजुर्गों को तो और सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल, बच्चे और बुजुर्गों का रोग-प्रतिरोधक क्षमता युवाओं के सापेक्ष कमजोर होता है। जिसके कारण मौसमी बीमारियों के चपेट में आने का अधिक संभावना रहता है। इसलिए, खुद के साथ बच्चे और बुजुर्गों का भी विशेष ख्याल रखें।

कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन परेशानी से रहें दूर :-
खगड़िया सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि वर्तमान मौसम के दौर में हर लोगों को कोविड-19 का गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। साथ ही ठंड से बचाव के लिए भी सजग रहने की जरूरत है। ताकि किसी प्रकार का स्वास्थ्य परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और संक्रमण का भी खतरा उत्पन्न नहीं हो।

– कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति को ठंड के मौसम में होती है अधिक परेशानी :-
ठंड के मौसम में कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति को पूर्व के अनुसार अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मसलन, जो व्यक्ति इस मौसम के दौर में संक्रमित हो जाते हैं। उन्हें स्वस्थ होने एक माह के करीब का समय लग रहा है। इसलिए, वर्तमान दौर में कोविड-19 से बचाव के लिए और सतर्क रहने की जरूरत है। ताकि इन परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़े।

– हर स्थिति में मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी का पालन करें :-
कोविड-19 बचाव के सबसे बेहतर और आसान उपाय है मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी का पालन करना। इसलिए, हर स्थिति मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और हर जगह शारीरिक दूरी का पालन करें। क्योंकि ऐसा करने पर संक्रमण फैलने का खतरा ना के बराबर रहता है। इसलिए, मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी का पालन कर खुद के साथ-साथ दूसरों को भी सुरक्षित रखें और जिम्मेदार बनें।

– ठंड के मौसम सर्दी-खाँसी और बुखार हो जाती आम बीमारी :-
ठंड के आगमन के साथ ही सर्दी-खाँसी, बुखार, साँस संबंधी परेशानी समेत अन्य मौसमी बीमारियों का भी दौर शुरू हो जाता और यह आम बीमारी बन जाती है। यानी यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। ऐसे में सतर्क और सावधान रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रतिदिन धूप लगाएँ, सुबह में टहलें। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से गर्मी बनी रहेगी। जिससे आप उक्त परेशानी से दूर रह सकते हैं।

– गर्म व ताजा खाने का करें सेवन :-
ठंड के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए गर्म व ताजा खाना का सेवन करें। सुबह गुनगुना पानी पीएं। इससे शरीर का तापमान बढ़ेगा और आंतरिक अंग सही तरीके से कार्य करेगा। इसके अलावा बाहर आने-जाने के दौरान गर्म कपड़े साथ जरूर रख लें। ताकि अगर लौटते वक्त शाम हो जाए तो आपको ठंड का सामना नहीं करना पड़े। चाय में अदरक और दूध में हल्दी का सेवन करें और गुड़ का सेवन भी फायदेमंद होता है। यह न सिर्फ आपको ठंड से बचाव करेगा बल्कि अन्य बीमारियों से भी दूर रखेगा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से पालन करें।
– घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर पास में जरूर रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान हमेशा आवश्यक दो गज की दूरी का पालन करें।
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्यों से हाथ धोने की आदत बनाएँ।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व जांच

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– चिकित्सकों द्वारा दी गई सुरक्षित व सामान्य प्रसव की आवश्यक जानकारी

– शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने की दी गई जानकारी

लखीसराय, 09 दिसंबर, 2020
प्रत्येक महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व (एएनसी) स्वास्थ्य जाँच की जाती है। इसी अभियान के तहत बुधवार को जिले के सभी पीएचसी व अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जाँच की गई। इसके साथ ही मौजूद चिकित्सकों ने आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य व सामान्य प्रसव की जाँच कराने आई महिलाओं को आवश्यक जानकारियों के साथ महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान के बारे में भी चिकित्सकों ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी ।

इस दौरान शारीरिक दूरी का रखा गया ख्याल :-
गर्भवती महिलाओं के एएनसी जाँच के लिए पीएचसी में आयोजित शिविर में शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए महिलाओं की एएनसी जाँच की गई। जांच में महिलाओं की ब्लड, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्टबीट आदि की भी जाँच की गई। इसके बाद चिकित्सकों द्वारा आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परामर्श दी गई। एएनसी जांच के लिए शिविर में मौजूद महिलाओं को प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने की सलाह दी गई।

समय पर जाँच होने से हर समस्या हो जाती है दूर :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच कराना चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता लग जाता है। शुरूआती दौर में पता लगने पर हीं उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके।

शिशु-मृत्यु दर में कमी लाना है उद्देश्य :-
सरकार द्वारा प्रत्येक महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच के लिए की गई यह व्यवस्था शिशु-मृत्यु दर में कमी लाना इसका उद्देश्य है। सरकार द्वारा की गई यह ब्यवस्था मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में अच्छी पहल है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा, बल्कि शिशु-मृत्यु दर पर विराम भी लगेगा। इसके साथ ही जच्चा-बच्चा दोनों को अनावश्यक परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ेगा।

कोविड-19 से बचाव के लिए भी दी गई जानकारी :-
वहीं, चिकित्सकों द्वारा मौजूद महिलाओं को कोविड-19 से बचाव के लिए भी आवश्यक जानकारी दी गई और बचाव से संबंधित हर मानकों का ख्याल रखने को कहा गया। ताकि समाज के हर लोग संक्रमण के दायरे से दूर रह सकें।

ठंड के मौसम में गर्भवती महिला के लिए प्रोटीन युक्त आहार जरूरी :-
वहीं, चिकित्सकों द्वारा महिलाओं को बताया गया कि ठंड के मौसम में गर्भवती महिला को प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना जरूरी है और ठंडी चीजें खाने से दूर रहना चाहिए। ताकि शरीर को उचित पोषण मिल सकें। जिससे ना सिर्फ गर्भवती स्वस्थ रहेगी, बल्कि सुरक्षित प्रसव को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को वर्तमान दौर में सर्द हवाओं से बिल्कुल दूर रहना चाहिए और प्रतिदिन धूप में कुछ देर रहने की कोशिश करनी चाहिए। इससे शरीर में तापमान बढ़ेगा। जिससे गर्भवती के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ रहेगा। साथ ही सर्दी-खांसी समेत अन्य ठंडजनित मौसमी बीमारी से भी बचाव होगा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– यात्रा के दौरान निश्चित रूप से सैनिटाइजर पास में रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– मुँह, नाक और ऑख को अनावश्यक छूने से बचें और छूने के पूर्व अच्छी तरह हाथों की सफाई करें।

सही पोषण देकर बच्चे को रखें कुपोषण से दूर

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पोषण की कमी से बच्चे आ सकते हैं बीमारियों की चपेट में
बार बार बीमारियों से बच्चे हो सकते हैं कुपोषण के शिकार

बांका, 9 दिसंबर
सही पोषण हर किसी के लिए जरूरी होता है, लेकिन बच्चों के लिए खास तौर पर इस बारे में ध्यान देना चाहिए. अगर बचपन में किसी को सही पोषण मिल जाता है तो वह जीवन भर स्वस्थ रहता है. अगर सही पोषण नहीं मिला तो बच्चे तमाम बीमारियों की चपेट में आ जाते है और बार बार बीमारियों की चपेट में आने से वह कुपोषण का शिकार भी हो सकते हैं. इसलिए परिजनों को बच्चे के सही पोषण पर ध्यान देना चाहिए. शहरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी बताते हैं कि बच्चों का अगर सही पोषण प्राप्त तो उसका काफी दूरगामी प्रभाव होता है. इससे बच्चा ना सिर्फ उस समय स्वस्थ रहता है, बल्कि कुपोषण से भी दूर रहता है साथ ही भविष्य में भी वह बीमारियों से बचा रहता है. इसलिए मां-बाप को बच्चे के सही पोषण पर ध्यान देना चाहिए.

आहार और सही पोषण के अंतर को समझें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि लोग सामान्य आहार और सही पोषण के अंतर को समझ नहीं पाते हैं. खूब खिलाना सही पोषण नहीं है. इससे बच्चे की भूख तो मिट जाती है, लेकिन उसके शरीर को जिस चीज की जरूरत होती है वह नहीं मिल पाता. सही पोषण का मतलब होता है शरीर की आवश्यकता के मुताबिक भोजन. बच्चों को आवश्यकता के अनुसार भोजन देना चाहिए जिसमें प्रोटीन और विटामिन की मात्रा संतुलित हो. भरपूर भोजन देने से बचना चाहिए.

रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है मजबूत: डॉ चौधरी कहते हैं कि बचपन में सही पोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. जिससे उसके शरीर में किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने की क्षमता सामान्य लोगों के मुकाबले अधिक हो जाती है. इससे उसका बीमारियों से बचाव होता है.

सही पोषण नहीं मिलने से हो सकता है मोटापा का शिकार: डॉ चौधरी कहता है कि बच्चे को अगर सही पोषण नहीं मिलता है तो वह मोटापा का शिकार हो सकता है. जिससे वह कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाता है. साथ में कुपोषित होने का भी खतरा रहता है. इसलिए बच्चे को हमेशा सही पोषण देने की जरूरत है.

दाल और सब्जी का सूप रहता है फायदेमंद: डॉ चौधरी कहते हैं बच्चों को सामान्य आहार के साथ दाल और सब्जी का सूप अधिक से अधिक देना चाहिए. इससे बच्चों के शरीर को विटामिन और प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति होती है. इसके साथ बच्चों को सुबह और शाम में दूध देने की जरूरत है. इससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.

• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.

• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.

• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.

• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.

• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.

• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें

• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों

• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें

• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें