महिला से अधिक सुरक्षित व सरल है पुरूष नसबंदी

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– नसबंदी पखवाड़े की सफलता को लेकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं आशा
– राज्य स्वास्थ्य समिति कार्यपालक निदेशक सह विशेष सचिव ने पत्र जारी कर डीएम एवं सीएस को दिए आवश्यक निर्देश

लखीसराय, 24 नवंबर।
जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर लखीसराय जिले में 14 दिवसीय पुरुष नसबंदी पखवाड़ा दो चरण में संपन्न होगा। पहले चरण में 23 से 29 नवंबर तक लोगों को नसबंदी पखवाड़े की सफलता को लेकर जागरूक किया जाएगा। जिसके दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को नसबंदी के लिए जागरूक और प्रेरित करेंगी। जबकि 30 नवंबर से 06 दिसंबर तक नसबंदी की जाएगी। नसबंदी जिले के पीएचसी समेत सभी अस्पतालों में की जाएगी । इस दौरान `परिवार नियोजन में पुरूष की साझेदारी जीवन लाएँ स्वास्थ्य और खुशहाली’ स्लोगन के साथ लोगों को नसबंदी के लिए जागरूक किया जाएगा। वहीं, पखवाड़े के सफल संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सह विशेष सचिव मनोज कुमार ने पत्र जारी कर जिलाधिकारी एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें पखवाड़े की सफलता के लिए निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए आवश्यक पहल करने को कहा गया है। ताकि हर हाल में निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सके।

– हर हाल में सफल होगा पखवाड़ा और पूरा होगा लक्ष्य :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि हर हाल में नसबंदी पखवाड़ा सफल होगा और निर्धारित लक्ष्य पूरा होगा। इसको लेकर आवश्यक पहल शुरू कर दी गई है। साथ ही पखवाड़े के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

– महिला से अधिक सुरक्षित और सरल है पुरूष नसबंदी :- स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिला नसबंदी से पुरष नसबंदी काफी सुरक्षित और सरल है। नसबंदी के आधे घंटे बाद ही पुरुष अपने घर जा सकते हैं। जबकि महिला को नसबंदी के दौरान कई तरह के परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है और काफी लंबा समय तक अस्पताल में ही रहना होता है। लोगों को जागरूक करने के दौरान आशा इस बात की जानकारी देकर लोगों को जागरूक कर रही हैं और पूर्व में पुरूष नसबंदी को लेकर व्याप्त भ्रांति को दूर कर रहीं हैं।

– घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं आशा :-
वहीं, पखवाड़े का सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं और लोगों छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का फायदे बताकर नसबंदी के लिए प्रेरित भी कर रहीं हैं। इस दौरान नसबंदी के लिए इच्छुक व्यक्ति का क्षेत्र की एएनएम से नाम भी पंजीकृत करवाया जा रहा है। ताकि नसबंदी के दिन लोगों को अस्पताल में पंजीयन के लिए इंतजार नहीं करना पड़े और पखवाड़े की रफ्तार को गति मिल सके।

– कोविड-19 के गाइड लाइन के साथ होगी नसबंदी :-
नसबंदी के दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है। ऑपरेशन थिएटर से लेकर पूरे अस्पताल परिसर की साफ-सफाई समेत बचाव से संबंधित अन्य आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। ताकि नसबंदी के दौरान संक्रमण की संभावना नहीं हो और लोगों को पूरी सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सेवा का लाभ दिया जा सके।

इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– यात्रा के दौरान निश्चित रूप से सैनिटाइजर साथ रखें।

कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क का उपयोग कर खुद और दूसरों को भी रखें सुरक्षित

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– कोविड-19 के दूसरे दौर में बढ़ी संक्रमण की संभावना, रहें सावधान

– मास्क पहनकर बनिए जिम्मेदार और संक्रमण रोकिए

खगड़िया, 23 नवंबर, 2020
बर्फीली हवाओं के कारण लगातार तापमान में गिरावट आ रही है और ठंड बढ़ने लगी है। जहाँ एक ओर लगातार मौसम में बदलाव हो रहा है। वहीं, दुसरी ओर कोविड-19 का दूसरा दौर शुरू हो गया है। जिसमें काफी तेजी के साथ संक्रमण फैलने की शिकायत आने लगी है। ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर हमें सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल, ठंड के मौसम संक्रमण बढ़ने की प्रबल संभावना बनी रहती है। जिसके कारण वर्तमान दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत बन सकती है। इसलिए, अभी खुद तो सावधान और सतर्क रहना जरूरी है ही, इसके अलावा दूसरों को भी जागरूक करना जरूरी है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण उत्पन्न नहीं हो और खुद के साथ-साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहें।

– बाहर से आने के साथ कराएँ कोविड-19 जाँच और रहें सुरक्षित :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में काफी तेजी के साथ कोविड-19 संक्रमण फैल रहा है। इसलिए, बाहर से आने वाले लोगों को आने के साथ ही कोविड-19 जाँच कराना जरूरी है। क्योंकि, कौन संक्रमित है या नहीं यह जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। जाँच के लिए लोकल लेवल पर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। ताकि जाँच में लोगों को परेशानी का सामना नही करना पड़े। इसलिए, जाँच के बाद गाँव व घर जाएँ और खुद के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को सुरक्षित रखें।

– खुद की जिम्मेदारी समझकर पहनें मास्क :-
कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीन आने तक सबसे बेहतर और आसान उपाय मास्क का उपयोग है। इसलिए, नियमित रूप से मास्क का उपयोग करें और दुसरों को भी प्रेरित करें। ऐसा करना सुरक्षा के साथ-साथ हर लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारी भी समझें। तभी कोविड-19 के संक्रमण पर रोकथाम हो सकता है।

– मास्क का उपयोग कोविड-19 संक्रमण से रखता है दूर :-
सिविल सर्जन ने बताया मास्क का उपयोग कोविड-19 संक्रमण से काफी हद तक दूर रखता है। दरअसल, मास्क संक्रमण रोकता है। इसलिए, मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। ताकि खुद के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर भी लोग संक्रमण से सुरक्षित रहें। उन्होंने बताया मास्क हमें 90 प्रतिशत संक्रमण के दायरे से दूर रखता है।

– मास्क का नियमित रूप से करें सफाई :-
मास्क उपयोग के दौरान इस बात ख्याल रखें कि मास्क अच्छी तरह साफ हो और फटा नहीं हो। इसके लिए मास्क को रोज धोएँ और धूप में अच्छी तरह सुखाकर ही उपयोग करें। साथ ही मास्क पहनने के बाद बार-बार लगाएँ-हटाएं नहीं।

– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :-
कोविड-19 से बचाव के व्यक्तिगत के साथ -साथ आसपास के परिसर की साफ-सफाई भी जरूरत हैं। क्योंकि, साफ-सफाई हमें हर तरफ के संक्रमण से बचाव करता है। इसलिए, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके लिए आसपास में गंदगी, जलजमाव नही होने दें।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
– बाहर से आने पर निश्चित रूप से कोविड -19 जाँच कराएँ।
– यात्रा के दौरान मास्क और सेनेटाइजर का निश्चित रूप से उपयोग करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।
– ऑख, नाक, मुँह अनावश्यक नहीं छुएँ।

जिले में 29 नवंबर से दूसरे चरण का पल्स पोलियो अभियान का होगा शुभारंभ

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– आशा व सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पिलएंगी दो बूँद पोलियो की दवा

– अभियान की सफलता को लेकर तैयारी में जुटे स्वास्थ्य विभाग, एक भी बच्चा छूटे ना, इसका रखा जाएगा ख्याल

लखीसराय, 23 नवंबर, 2020
जिले में 29 नवंबर से पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान के दूसरे चरण शुरू हो जाएगा। इसकी सफलता को लेकर स्वास्थ्य विभाग आवश्यक तैयारी में जुट चुका है। ताकि अभियान का शुभारंभ में किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो और सफलतापूर्वक अभियान का समापन हो सकें। इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों के कंधे जिम्मेदारी दी गई और सुपरवाइजर, मॉनिटर समेत अन्य कर्मियों की टीम गठित की गयी है। इस दौरान इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि एक भी बच्चे पोलियो की दो बूंद दवा पीने से छूटे नहीं।

– जिले के सभी प्रखंडों में पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद दवा :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया यह अभियान जिले के सभी प्रखंडों में चलाया जाएगा और सभी प्रखंडों में 29 नवंबर से ही अभियान का शुभारंभ होगा। इसको लेकर आवश्यक तैयारियाँ की जा रही है। अभियान शुभारंभ के दिन से ही शाम में स्थानीय सभी पीएचसी में ड्यूटी में लगे कर्मी रिपोर्ट जमा करेंगे और पीएचसी से पूरे प्रखंड का रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।

– घर-घर जाकर बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूँद दवा :-
पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी में लगे ऑगनबाड़ी सेविका, आशा समेत अन्य कर्मी घर-घर जाकर पाँच वर्षों तक के बच्चों को पोलियो की दो बूँद दवा पिलाऐंगे। साथ ही दवा पिलाने के बाद बच्चों का नाम, बच्चे के माता-पिता का नाम, गृह संख्या आदि विभाग द्वारा दी गई फॉर्मेट में भरेंगे। साथ ही बाहर गये बच्चों का भी पूरी जानकारी लेकर फॉर्मेट में भरेंगे और देर शाम दिन भर के कार्यों की रिपोर्ट स्थानीय पीएचसी में जमा करेंगे।

– चौक-चौराहे से लेकर स्टेशन पर भी दवा पिलाने के लिए कर्मी रहेंगे तैनात :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान के तहत एक भी बच्चा नही छूटे इसके लिए विभाग द्वारा व्यापक तैयारियाँ की जा रही है। दरअसल, एक भी बच्चा छूटने पर वायरस फैलने का प्रबल संभावना रहता है। इसको लेकर जिले के चौक-चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर दवा पिलाने के लिए कर्मियों की तैनाती किए गए हैं। जो बाहर से आने-जाने वाले यानी सफर कर बच्चे को दवा पिलाऐंगे। ताकि सफर पर निकले बच्चे वंचित नही रहे। साथ ही दवा पिलाने के बाद बच्चों के अंगुली में निशान भी लगाया जाएगा। ताकि किसी भी बच्चे को भूलवश जाने-अनजाने में दोबारा दवाई नही पिलाई जा सकें।

– कोविड-19 के गाइडलाइन का रखा जाएगा ख्याल
बच्चों को दवाई पिलाने के दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का ख्याल रखा जाएगा। बचाव से संबंधित उपायों का पालन करते हुए कर्मी दवा पिलाऐंगे और खुद के साथ-साथ दूसरों का भी कोविड-19 से सुरक्षा का ख्याल रखेंगे। इसको लेकर विभागीय पदाधिकारियों द्वारा सभी कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मास्क और सेनेटाइजर का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।
– अनावश्यक ऑख, नाक, मुँह नहीं छुएं।

पुरुष नसबंदी को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं आशा कार्यकर्ता

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-जिले में पुरुष नसबंदी जागरूकता पखवाड़ा का आगाज, 6 दिसंबर तक चलेगा
– परिवार नियोजन में पुरुषों की साझेदारी जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली है स्लोगन

भागलपुर, 23 नवंबर।
भागलपुर जिले में पुरुष नसबंदी जागरूकता पखवाड़ा का आगाज सोमवार को हो गया। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घ-घर जाकर लोगों को पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूक कर रही हैं। इस बार का स्लोगन परिवार नियोजन में पुरुष की साझेदारी जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली है। एसीएमओ डॉ. करमचंद ने बताया कि इस बार पुरुष नसबंदी पखवाड़े को दो चरण में बांटा गया है। पहले चरण में 23 से 29 नवंबर तक लोगों को जागरूक करने का काम किया जाएगा। उसके बाद 30 नवंबर से 6 दिसंबर तक नसबंदी की जाएगी। नसबंदी की सुविधा सभी सरकारी अस्पताल में मौजूद है।.

पीएचसी को 100 नसबंदी का दिया गया है लक्ष्य: डॉक्टर करमचंद ने बताया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को इस दौरान 100 नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है। रेफरल, अनुमंडल और सदर अस्पताल में इससे ज्यादा पुरुष नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त तैयारी कर ली गई है।

भ्रांतियों को किया जा रहा दूर:
आशा कार्यकर्ता जागरूक करने के दौरान लोगों को यह बता रही हैं कि पुरुष नसबंदी से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। नसबंदी के 30 मिनट बाद पुरुष घर जा सकते हैं। साथ ही वह 2 दिनों के बाद सभी कुछ सामान्य तरीके से कर सकते हैं। इसलिए पुरुष नसबंदी करवाने में किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। यह परिवार नियोजन का सबसे सुरक्षित तरीका है।

कोरोना की गाइडलाइन का किया जा रहा पालन:
पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ता 2 गज दूरी का पालन कर रही हैं। साथ ही मास्क भी पहन कर जा रही हैं। नसबंदी के दौरान भी यह नियम फॉलो किया जाएगा। जिले के कंटेनमेंट जोन में यह अभियान नहीं चल रहा है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना से ठीक हो चुके मरीज भी नहीं रहें लापरवाह

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शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए करें घरेलू उपाय

साथ ही कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का करें पालन

बांका, 23 नवंबर

मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है. सर्दी का मौसम लगभग आ चुका है और शुरुआत में ही लोग इसकी चपेट में आते हैं. ऐसे में किसी तरह की लापरवाही ठीक नहीं है. कोरोना से बचने के लिए आमलोग तो सावधानी बरतें ही, लेकिन जो लोग ठीक हो चुके हैं वह भी सावधान रहें. लापरवाह रहने पर दोबारा कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. इसके लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है. और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय सबसे कारगर है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन भी करें
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार होने की आशंका रहती है, इसलिए लापरवाही नहीं करें. ऐसे मौसम में लक्षण वाले कोरोना के मरीज काफी मिल रहे हैं जो कि चिंताजनक है. लक्षण वाले मरीजों को बिना लक्षण वाले मरीजों के मुकाबले अधिक परेशानी होती है. जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, वह भी सावधानी बरतें. दूसरी बार चपेट में आने पर ज्यादा परेशानी हो सकती है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं: डॉ चौधरी कहते हैं कि कोरोना को हराने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना बहुत जरूरी है. यह घरेलू उपाय के जरिए भी हो सकता है. इसके लिए जरूरी है कि आप पर्याप्त मात्रा में नींद लें. शरीर को आराम दें और खाने पीने में सतर्क रहें. मौसमी फल, दूध और हरी सब्जी का सेवन करें. साथ ही पानी को उबालकर पीने की कोशिश करें.

योग और व्यायाम करें: प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे कारगर उपाय है योग और व्यायाम. प्रतिदिन 45 मिनट से 1 घंटे तक योग करने की कोशिश करें. इसके अलावा अन्य शारीरिक कसरत भी कर सकते हैं. अगर आप बाहर निकलते हैं तो सुबह-सुबह कम से कम 45 मिनट तक तेज कदमों से जरूर टहलने की कोशिश करें. इससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी.

कोरोना से ठीक हो चुके मरीज एंटीबॉडी टेस्ट कराएं: डॉ चौधरी कहते हैं कि अगर आप नियमित तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं तो ठीक है, नहीं तो आपको नियमित अंतराल पर अपनी एंटीबॉडी टेस्ट करा लेनी चाहिए. इससे आपको पता चल जाएगा कि आपका शरीर कोरोना से लड़ने में कितना सक्षम है. जिस तरह की रिपोर्ट आती है उसके हिसाब से आप सावधानी बरतना शुरू कर दें. कोरोना से ठीक होने के बाद कुछ दिनों तक एंटीबॉडी रहती है, इसके बाद कमजोर पड़ने लगती है. इसलिए नियमित तौर पर एंटीबॉडी टेस्ट करा लें जब तक कोरोना की दवा नहीं निकल जाती है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डस्ट्रियल टेक्नोलोजी (के.आई.आई.टी.) के प्रतीयमान (वर्चुअल) दीक्षान्त समारोह के अवसर पर 7135 शिक्षार्थियों को डिग्री से सम्मानित किया गया

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हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दिनाँक 21 नवंबर 2020 को भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (के.आई.आई.टी.) डीम्ड विश्वविद्यालय ने 16वाँ वार्षिक दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया। इस समारोह में कुल 7135 छात्र एवं छात्राओं को वर्ष 2019-20 का स्नातक डिग्री प्रदान किया गया। वर्ष 2019-20 का यह समारोह वर्चुअल तरीके से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में कई गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया, जैसे मुख्य अतिथि के रूप में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एवं ग्रामीण बैंक के संस्थापक प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस, जो बांग्लादेश के निवासी हैं, साथ ही आर्ट ऑफ लिविंग के आध्यात्मिक लीडर एवं संस्थापक, परम पावन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर आमंत्रित थे।

इस समारोह में के.आई.आई.टी. विश्वविद्यालय ने परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर और इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के अध्यक्ष और एम.डी., श्री एस. के. चौधरी को डी. लिट. के ऑनोरिस कोसा उपाधि (डिग्री) से सम्मानित किया एवं भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक, डॉ. मृत्युंजय महापात्रा को डी.एस.सी. के ऑनोरिस कोसा डिग्री प्रदान किया गया।

इस दीक्षान्त समारोह के संभाषण में मुख्य अतिथि मुहम्मद यूनुस ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप अपने जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। शिक्षा एक अन्तहीन, लम्बी और कष्टकारक यात्रा है परन्तु आप सभी को यह सिखाती है कि पूरे विश्व को बदलने में आप कैसे सक्षम हो सकते हैं।

प्रो. यूनुस, जिन्हें माइक्रोक्रेडिट की सामाजिक नई खोज के क्षेत्र में वर्ष 2006 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था, का परिचय कराते हुए के.आई.आई.टी. एवं के.आई.एस.एस. के संस्थापक, प्रो. अच्युत सामंत ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्होंने ‘‘तीन जीरो की दुनिया” की कल्पना की है और लगातार उस पर काम भी कर रहे हैं, अर्थात पहला जीरो गरीबी (कोई गरीब न रहे), दूसरा जीरो बेरोजगारी (कोई बेरोजगार न रहे) एवं तीसरा जीरो शुद्ध कार्बन उत्सर्जन (स्वच्छ पर्यावरण)। उन्होंने के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय से ऑनर्स कोसा की डिग्री स्वीकार करने के लिए परम पावन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर, डॉ. मृत्युंजय महापात्रा और श्री एस. के. चौधरी का आभार व्यक्त किया।

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. यूनुस ने कहा कि पूरे विश्व में इस महामारी ने लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को नुकसान पहुँचाया है। संसार के 50 प्रतिशत लोगों को जीवन यापन करने के लिए संघर्ष करने के साथ-साथ इसने हमारे तंत्र की कमजोरियों को भी प्रकट किया है। विश्व को फिर से एक नया स्वरूप प्रदान करने का यह सुअवसर है, जो अधिक न्यायसंगत, अधिक समान और अधिक लचीला होगा। हमारी वर्तमान प्रणाली धन के धुव्रीकरण से ग्रस्त है क्योकि पूरे विश्व में 99 प्रतिशत धन मात्र एक प्रतिशत लोगों के पास में है जो काफी धनाढ्य लोग हैं, साथ ही उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के ऊपर भी लोगों को सचेत किया, जो निकट भविष्य में हमारे अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है, साथ ही उन्होंने स्नातकों को सम्बोधित करते हुए एवं उद्यमिता का विकल्प तलाशने का आग्रह करते हुए कहा कि अपनी कल्पना एवं सीखने की बदौलत आप दुनिया को एक नया रूप, नई संरचना प्रदान कर सकते हैं

अपने संबोधन में, मुख्य वक्ता परम पावन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने कहा, शिक्षा का उद्देश्य एक मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण करना है, जो नई चुनौतियों को अवसरों, व्यापकता और विनम्रता को हमेशा के लिए सीखने में परिवर्तित करने के लिए समर्थवान है। उन्होंने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आंतरिक शक्ति, दृढ़ता, धैर्य और रचनात्मकता के महत्व को रेखांकित किया। आध्यात्मिकता और विश्व शांति के क्षेत्र में उनके महान योगदान के लिए उन्हें हॉनोरिस कॉसा डी. लिट. के सम्मान से सम्मानित किया गया था। पुरस्कार में उल्लेख किया गया है, ‘दुनिया आपके कुछ मानवीय क्षेत्रों जैसे कोलंबिया, कोसोवो, इराक, सीरिया और ब्वजम कष्प्अवपतम के लिए संघर्ष को समाप्त करने हेतु आपकी मानवीय पहल के लिए ऋणी है।

के.आई.आई.टी. ने डॉ. मृत्युंजय महापात्रा को विज्ञान के साथ-साथ जीवन को बचाने हेतु चक्रवात की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए डी.एस.सी. के ऑनोरिस कोसा डिग्री से सम्मानित किया। डॉ. महापात्रा ने इस तरह के प्राकृतिक आपदाओं से अब तक 10,000 से अधिक लोगों को बचा चुके हैं, इसलिए कि उनकी सटीक भविष्यवाणियाँ अक्षरशः सही साबित होती है, अतएव ये लोगों में ‘साइक्लोन मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में विख्यात हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ कई दैविक चक्रवातों में सही साबित हुई हैं, जैसेकि 2013 में फाहलीन, 2014 में हुडहुड, 2018 में तितली, 2019 में फानी एवं 2020 में अम्फान, जिससे कई नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा की जा सकी है। डॉ. महापात्र ने अपने स्वीकृति भाषण में कहा कि यह पुरस्कार समाज में विज्ञान के योगदान के लिए एक मान्यता है जो छात्रों तथा विज्ञान के पेशेवरों (प्रेक्टिशनर्स) को प्रोत्साहित करेगा।

अपने स्वीकृति भाषण में श्री एस.के. चौधरी ने कहा, ‘‘के.आई.आई.टी. और इसकी सहयोगी संस्था के.आई.एस.एस ने गत दो दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में आश्चर्यजनक रूप से अतिबृहत योगदान दिया है। मैं समाज के लिए इस तरह से समर्पित एवं महान सेवा करने के लिए के.आई.आई.टी. और के.आई.एस.एस के संस्थापक को बधाई देता हूं।“ श्री एस.के. चौधरी के उत्कृष्ट नेतृत्व और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महान योगदान के लिए उन्हें डी. लिट. के ऑनोरिस कोसा उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनके नेतृत्व में इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने बड़ी छलांग लगाई है और महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पदचिह्नों के साथ एक अग्रणी इंजीनियरिंग और निर्माण संगठन बन गया है।

के.आई.आई.टी. विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. वेद प्रकाश, प्रो-कुलपति, पद्म श्री प्रो (डॉ) सुब्रत कुमार आचार्य, उप-कुलपति, डॉ. हृर्षिकेश मोहंती, उप-प्रा-कुलपति, प्रो. सस्मिता सामंत एवं रजिस्ट्रार, श्री ज्ञानरंजन मोहंती ने भी दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को संभाषण द्वारा सम्बोधित किया और अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।

अपने शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रखर प्रियेश (बी.टेक), सृष्टि राज (एम.टेक) और रोशन ओझा (बी.टेक) ने संस्थापक (फाउंडर) के स्वर्ण पदक जीते। इसी तरह से 23 छात्रों को कुलपति (चांसलर) के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जबकि 28 छात्रों को कुलपति (चांसलर) का रजत पदक मिला। पी.के. बाल मेमोरियल गोल्ड मेडल, पी.पी.एल. गोल्ड मेडल, नानीबाला मेमोरियल गोल्ड मेडल और श्री कृष्ण चन्द्र पांडा मेमोरियल गोल्ड मेडल भी इस अवसर पर प्रदान किये गये। 95 शोधकर्ताओं को पी.एच.डी. डिग्री से सम्मानित किया गया।

किशोर और किशोरियाँ वयस्क होने के दौर में कई बदलाव से गुजरते हैं

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-पापुलेशन कॉउंसिल द्वारा उदया अध्ययन में हुआ खुलासा
– किशोर और किशोरियों के प्रजनन स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत
-बिहार और उत्तरप्रदेश में 20000 से अधिक किशोर और किशोरियों का किया गया सर्वे
-किशोरावस्था पर राष्ट्रीय तकनीकी बैठक आयोजित करने की माँग

पटना, 20 नवंबर 2020:
10 से 19 वर्षके किशोर और किशोरियां, जो भारत की आबादी का लगभग पांचवा हिस्सा हैं, वे व्यस्क होने की अपनी यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और जैविक परिवर्तनों से होकर गुज़रते हैं। उनके अनुभवों, उनके लिए उपलब्ध संसाधन और सहयोग, उनके व्यवहार, क्षमता और स्वास्थ्य पर आजीवन प्रभाव डालते हैं। उदया अध्ययन पॉपुलेशन काउंसिल द्वारा किया गया अपने-आप का पहला लोंगीटूडिनल अध्ययन है जो बताता है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य में किशोर और किशोरियां कैसे व्यस्कता की ओर बढ़ रहे हैं। इस अध्ययन के पाए गए निष्कर्ष एक ऑनलाइन सेमिनार में आज प्रस्तुत किए गए।
उदया अध्ययन में 20,000 से ज़्यादा किशोर और किशोरियों का सर्वे किया गया जिसमें छोटी और बड़ी उम्र के लड़के, लड़कियां और विवाहित लड़कियां शामिल थी। यह अध्ययन पहली बार 2015-16 में 10 से 19 वर्ष के किशोर और किशोरियों के साथ किया गया और फिर उन्ही किशोर और किशोरियों का पुनः साक्षात्कार 2018-19 में किया गया जब वे 13-22 वर्ष के थे । इस अध्ययन की शुरुआत भी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) को अपनाने के साथ हुई जिससे इन तीन सालों के दौरान अध्ययन में शामिल किशोर और किशारियों की प्रगति को नापने का अवसर भी मिला। इस मौके पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में डिप्टी कमिश्नर (किशोर स्वास्थ्य) डॉ. ज़ोया अली रिज़वी ने कहा, “उदया अध्ययन द्वारा प्राप्त आंकड़े सरकार को उनकी नीतियों और उनके प्रभाव से संबंधित प्रमाण प्रदान करते है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि लड़कों और लड़कियों दोनों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।”
अध्ययन के आंकड़ों को प्रस्तुतकरने के बाद किशोरावस्था पर होने वाले निवेश को वरीयता देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, लिंग, सामाजीकरण, डिजिटल साधन की उपलब्धी और जीवनयापन से जुड़े अवसर वे कारक हैं जो वयस्कता में एक स्वस्थ्य और उपयोगी जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम के वक्ताओं में किशोर स्वास्थ्य और कल्याण-लैंसेट कमिशन के चेयरमैन प्रो..जॉर्ज पैट्टन, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद में किशोर शिक्षा कार्यक्रम की संयोजक प्रो. सरोज बाला यादव, विश्व स्वास्थ्य संगठन में किशोर यौन और प्रजनन के वैज्ञानिक डॉ. वेंकटरमन चंद्रमौली, कटकथा पपेट आर्ट ट्रस्ट के श्रीअविनाश कुमार, डेविड एंड लूसिल पैकार्ड फाउंडेशन केश्रीआनंद सिन्हा और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की की डॉ प्रिया नंदा शामिल थी।
प्रोफेसर यादव ने जोर दिया कि सरकार की विभिन्न एजेंसियों और विभागों को अलग-अलग काम करने के बजाय एक साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम देखते हैं कि कई तरह के पहल की गई हैं लेकिन प्रक्रियाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।” यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में किशोरावस्था स्वास्थ्य शोध के प्रोफेशनल फेलो जॉर्ज पैटन ने उदया अध्ययन के उस हिस्से पर जोर दिया जहां पाया गया कि किशोरियों के लिए किशोरावस्था के वयस्कता की उम्र में पहुंचने तक में गर्भवस्था की चुनौतियां बरकरार रहती हैं। “युवतियां शिक्षा, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य, गुणवत्तात्मक जीवन और पोषण के पैमानों पर पिछड़ रही हैं। जबकि यह किशोर एवं किशोरियों के सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन में किशोर यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के मुख्य डॉ. वेंकटरमन चंद्रमौली ने कहा, “किशोरियां अपने जीवन में कुछ करना चाहती हैं, लेकिन वे अलग-अलग तरह के बंधनों में खुद को शक्तिविहीन पाती हैं, और इसी स्थिति को हमें बदलना है।” उन्होंने हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर किशोरावस्था के विषय पर राष्ट्रीय तकनीकी बैठक आयोजित करने की मांग की।
पॉपुलेशन काउंसिल भारत के डायरेक्टर डॉ.निरंजन सग्गुरटी ने कहा, “उदया अध्ययन परिवार, समुदाय और सरकारी कार्यक्रमों पर ज़रूरी जानकारी प्रदान करता है जो किशोरों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं और कुछ कमियों को उजागर करता है जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है। हालांकि इस अध्ययन में बिहार और उत्तर प्रदेश में रहने वाली भारत की एक-चौथाई किशोरों की आबादी शामिल है, देशभर में इस तरह के और अध्ययन सरकार को किशोरावस्था से वयस्कता की ओर कामयाब परिवर्तन के लिए ज़रूरी और ठोस साक्ष्य प्रदान कर सकते हैं।”

समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कराता छठ पर्व– अनिल कु. मिश्र

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नईदिल्ली-

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के एमएलसी स्नातक प्रत्याशी अनिल कुमार मिश्र ने महापर्व छठ की शुभकामना देते हुए कहा कि आज हमें यह पर्व कई तरह की सीख देता है। हम उसकी आराधना करते हैं जो साक्षात रूप से हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं।

अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि आज जब पूरा विश्व पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्या से जूझ रहा है ऐसे समय में हमें कैसे प्रकृति के चीजों का उपयोग करना चाहिए यह पर्व दर्शाता है। निश्चिततौर पर कि सूर्य की उपासना का महापर्व छठ का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, हमें प्रकृति को विशेष ख्याल रखने का भी संदेश देती है। पर्यावरण संरक्षण और छठ पूजा के बीच गहरा संबंध है।

 

अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि छठ पर्व बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल में यह पर्व अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस पर्व की खास बात यह है कि पूरा समाज साथ मिलकर मनाते हैं। एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। चार दिनों तक जिस प्रकार से सहयोगात्मक भाव पूरे समाज में रहता है वह अद्भूत है। इस पर्व में खास तौर पर पूरा शहर और पूरा गांव मिलजुलकर सफाई करते हैं। छठ पर्व हमें एक साथ कई संदेश देता है। आज जब समाज में काफी मतभेद है। यह पर्व एकजुटता प्रदान करता है। इस खास पर्व पर देशवासियों को शुभकामनाएं।

केआईआईटी का दीक्षांत समारोह 21 नंवबर को, प्रो. मोहम्मद यूनुस होंगे मुख्य अतिथि

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-प्रो. मो. यूनुस बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के संस्थापक व नोबेल पीस विजेता हैं

 

नईदिल्ली-

 

कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रीयल टेक्नोलोजी (केआईआईटी) के दीक्षांत समारोह 21 नवंबर को आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष इस खास कार्यक्रम के लिए छात्रों का इंतजार रहता है जिसमें छात्र अपनी डिग्री लेकर आगे की नौकरी की तैयारी करते हैं। संस्थान की ओर से इस खास कार्यक्रम में विशेष व्यवस्था की जाती है। केआईआईटी दीक्षांत समारोह में विशिष्ठ अतिथि को आमंत्रित करती है जिससे की छात्रों में उत्साह बना रहे। इस बार बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के फाउंडर व नोबेल पीस पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस होंगे मुख्यअतिथि। खास बात यह है कि मो. यूनुस बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के फाउंडर हैं जिन्होंने एक मिसाल कायम किया है। मो. यूनुस वैश्विक स्तर पर युवाओं को मोटिवेशन लेक्चरर देते हैं। जिससे युवाओं को काफी लाभ मिला है। निश्चितरूप से इनके आने से युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।

मो. यूनुस युवाओं को स्वरोजगार के लिए कई योजनाओं को कार्यान्वित किया जिससे आज मिसाल दी जाती है। देश में आत्मनिर्भर भारत अभियान चलाया जा रहा है। निश्चिचतौर पर मो. यूनुस से छात्रों के रूबरू होने से युवा स्वरोजगार की ओर अग्रसर होंगे।

गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह में छात्रों को यह भी बताया जाता है कि आगे छात्र कठिनाइयों को मजबूती के साथ सामना कर सके। केआईआईटी इस बार दीक्षांत समारोह में खास आयोजन किया जिसे 21 नवंबर को किया जाना है। गौरतलब है कि अभी पूरे देश में संस्थान का साक्षात्कार चल रहा है जिसमें लाखों छात्र ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। केआईआईटी छात्रों को ऐसे तैयार करती है जिससे की अद्यतन जानकारी हो। यह केवल एक दिन में नहीं होता। इसके लिए संस्थान साल भर मेहनत करते हैं जिसके लिए ग्रुप डिस्कसन के साथ साथ कई सेमिनार भी आयोजित करते हैं।

विश्व बाल दिवस: यूनिसेफ़ द्वारा हर बच्चे के लिए सुरक्षित बिहार की अपील

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बाल अधिकार पर द्वारा ब्लॉगर्स मीट का आयोजन

पटना, 19 नवंबर: विश्व बाल दिवस के तत्वावधान में यूनिसेफ़ द्वारा 14 नवंबर से 20 नवंबर तक मनाए जा रहे बाल अधिकार सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियाँ चलायी जा रही हैं. इसी कड़ी में यूनिसेफ़, बिहार द्वारा ‘हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित दुनिया की परिकल्पना’ थीम पर ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर्स के साथ ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया.
“विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर लोगों को जागरूक करने वाले ब्लॉगर्स अपनी लेखनी के ज़रिए बाल अधिकार से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से आम जनमानस तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. बाल अधिकार दिवस, संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 में पारित बाल अधिकार समझौते की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है. इसके अंतर्गत ‘गो ब्लू’ नाम से एक सांकेतिक अभियान चलाया जा रहा है; नीला रंग बाल अधिकार का परिचायक है. इस बार के विश्व बाल दिवस थीम के तहत कोविड महामारी के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को प्रमुखता से उठाया गया है.” यूनिसेफ़ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने उक्त बातें कहीं.

‘बिहार के बच्चों पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव’ विषय पर अपनी प्रस्तुति में यूनिसेफ़ बिहार के प्रोग्राम मॉनिटरिंग एवं इवैल्यूएशन स्पेशलिस्ट प्रसन्ना ऐश ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा आदि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और कहा कि इस महामारी से बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. आगे उन्होंने मातृ व शिशु स्वास्थ्य, पोषण, स्कूली शिक्षा, स्वच्छता, सुरक्षा से जुड़े बुनियादी सुविधाओं की सुलभता और प्रयोग को लेकर यूनिसेफ़ बिहार और पापुलेशन काउंसिल इंस्टिट्यूट द्वारा 794 (चरण 1) और 790 (चरण 2) लोगों से बातचीत के आधार पर किए गए त्वरित समीक्षात्मक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 80% परिवार लॉकडाउन से प्रभावित हुए हैं. तकरीबन 64% लोगों की नौकरी चली गई है. खाद्य सुरक्षा की बात करें तो 40% परिवारों को खाने-पीने की समस्या हुई है. वहीं, 6-14 आयुवर्ग के स्कूली बच्चों में से केवल 46 फ़ीसदी बच्चों को मिड डे मील के बदले अनाज या राशि प्राप्त हुई है.

यूनिसेफ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सैयद हुब्बे अली ने कोविड काल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर रौशनी डालते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट और प्रसव पश्चात सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं. साथ ही, संस्थागत प्रसव और बच्चों का टीकाकरण का लाभ भी नहीं मिल पाया है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के अनुसार राज्य के 13% बच्चे कोविड से प्रभावित हुए हैं और 1% की मृत्यु दर्ज़ की गई है. राज्य में कोविड-19 के कारण कुल 824 मौतों में से 7 बच्चे शामिल हैं. अप्रैल 2020 में टीकाकरण के कारण 1 मिलियन बच्चे चूक गए क्योंकि 93000 सत्र लॉकडाउन के कारण रद्द कर दिए गए थे. मार्च, अप्रैल और मई 2020 में संस्थागत प्रसव 50% कम हो गया (स्रोत: HMIS रिपोर्ट)

यूनिसेफ़ के आपदा जोखिम न्यूनीकरण पदाधिकारी, बंकू बिहारी सरकार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है. असमय (70 दिन से घटकर 40-45 दिन औसत बारिश) और अल्प वृष्टि (1200 मिलीमीटर से घटकर 1000 मिलीमीटर) की वजह से बाढ़ और सुखाड़ में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है जिसकी वजह से पलायन की समस्या बहुत बढ़ी है. इसकी वजह से परिवार की आजीविका समेत बच्चों की खाद्य सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य, विकास और शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है. दुर्भाग्यवश, जलवायु परिवर्तन पर होने वाले संगोष्टियों में बच्चों को शामिल नहीं किया जाता है. लेकिन भागीदारी के अधिकार के तहत बच्चों को इन चर्चा-परिचर्चाओं की हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है.

यूनिसेफ़ दिल्ली के संचार पदाधिकारी इदरीस अहमद ने ब्लॉगर्स को संबोधित करते हुए कई ज़रूरी टिप्स दिए. साथ ही, उन्होंने वर्ल्ड चिल्ड्रेन्स डे के मद्देनज़र यूनिसेफ़ द्वारा कोविड काल में बाल सुरक्षा व अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर चले जाने वाली विभिन्न गतिविधियों जैसे गो ब्लू कैम्पेन, चिल्ड्रेन्स टेकओवर्स, ब्लॉग राइटिंग आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने ब्लॉगर्स से अपने प्लेटफार्म पर बाल अधिकार संबंधी मुद्दों पर लिखने का आग्रह किया. इस साल के थीम के मद्देनज़र उन्होंने बच्चों पर कोविड और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बारे लिखने का आवाहन करते हुए ज़रूरी बातें बताईं. ख़ास तौर पर युवा ब्लॉगर्स के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ट्रोल्स को अनसुना करते हुए अपने काम पर ध्यान देना चाहिए.

जानेमाने ब्लॉगर आनंद कुमार ने बच्चों और युवा ब्लॉगर्स को तथ्यों के बारे में अपडेट रहने की सलाह दी. उन्होंने बाल अधिकार से जुड़े मुद्दों को ब्लॉग के ज़रिए बढ़ावा देने के लिए युवा ब्लॉगर्स के लिए विशेष रूप से बेस्ट ब्लॉग प्रतियोगिता का आयोजन करने और ईनाम के तौर पर बाल मुद्दों से जुड़ी किताबें वितरित करने का सुझाव दिया.
कार्यक्रम में बिहार यूथ फ़ॉर चाइल्ड राइट्स से प्रियस्वरा और किलकारी से आकाश और अनीशा जलाल जैसे युवा ब्लॉगर्स , टीचर्ज़ आफ बिहारपटना वेमन्स कॉलेज , आमटी समेत अन्य स्थापित ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर्स ने हिस्सा लिया. जमात-ए-इस्लामी हिन्द से मोहम्मद शहज़ाद ने भी अपने विचार रखे.

Bihar – आंकड़ों पर एक नज़र
चिंताजनक शिशु मृत्युदर
जन्म के चौथे सप्ताह के भीतर प्रति 1000 25 शिशु की मृत्यु
5वां जन्मदिन मनाने के पूर्व प्रति 1000, 37 शिशुओं की मृत्यु (स्रोत: SRS, 2018)
कुपोषण
0-5 आयुवर्ग का हर दूसरा बच्चा कुपोषित है
1-4 आयुवर्ग के 44% बच्चे रक्ताल्पता का शिकार हैं (स्रोत: CNNS, 2016-18)
शिक्षा
कक्षा 1 में नामांकित 100 बच्चों में से सिर्फ़ 94 पांचवीं तक पहुंच पाते हैं
इनमें से सिर्फ़ 61 बच्चे आठवीं तक पहुँच पाते हैं
दसवीं तक यह संख्या घटकर 38 हो जाती है (स्रोत: U-DISE, 2017-18)
बाल विवाह
देश में बाल विवाह के सबसे ज़्यादा मामले
18 साल की क़ानूनी उम्र से पहले 40 फ़ीसदी लड़कियाँ ब्याह दी जाती हैं
12 फ़ीसदी किशोरावस्था में ही गर्भवती हो/मां बन जाती हैं (स्रोत: NFHS-4, 2015-16)
बाल श्रम
भारत के कुल बाल श्रमिकों का 11% बिहार से
10.88 लाख बच्चे बाल श्रम में लिप्त (स्रोत: भारत की जनगणना, 2011)