घर पर ही छठ मनाकर कोरोना से करें अपना बचाव

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जब तक दवाई नहीं निकल जाती है तब तक सावधानी ही बचाव है

भागलपुर, 19 नवंबर

छठ की तैयारी पूरी हो गई है. आज पहला अर्घ्य दिया जायेगा. इस बार कोरोना के साए में छठ पर्व मनाया जा रहा है. घाटों पर जाने के लिए तमाम तरह की बंदिशें हैं. इस वजह से लोग अभी भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि घर पर मनाएं छठ या बाहर. ऐसे लोग बाहर जाने से बचें और घर पर ही छठ मनाकर कोरोना से बचें.

मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि अभी के समय में घाट पर जाकर छठ मनाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं है. इसलिए लोग घरों पर ही छठ मनाए. वैसे भी पर्व जिंदगी बढ़ाने के लिए होता है ना कि जिंदगी देने के लिए. अभी भागलपुर का रिकवरी रेट 97% है. इसे बरकरार रखने के लिए एहतियात बरतना बहुत जरूरी है. कोरोना की जब तक कोई दवा नहीं मिल जाती है तब तक सावधानी से ही हम इसका बचाव कर सकते हैं.

बड़ी बाल्टी में पानी डालकर मनाएं छठ: छठ मनाने के लिए बहुत लोगों ने घर के आंगन में या फिर छत पर व्यवस्था कर ली है, लेकिन अभी भी जिन लोगों ने व्यवस्था नहीं की है वह घर में बड़ी बाल्टी या टब में पानी डालकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दे सकते हैं. इससे आप भीड़ से भी बच जाएंगे और आपकी पूजा भी हो जाएगी. इससे कोरोना के संक्रमण का खतरा भी कम रहेगा.

दूसरे शहर से आने वाले भी बरते सावधानी: उधर सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कि छठ के मौके पर बड़ी संख्या में दिल्ली या फिर अन्य शहरों से लोग घर आए हैं. उन्हें भी सावधानी बरतने की जरूरत है। शारीरिक दूरी का पालन करें और हमेशा मास्क लगाकर रहें. किसी भी वस्तु को छूने के बाद 20 सेकंड तक हाथ को जरूर धो लें.

जांच के लिए लगाए जाएंगे शिविर: सिविल सर्जन ने बताया कि छठ के दिन तिलकामांझी चौक और स्टेशन पर कोरोना जांच शिविर लगाया जाएगा. इसके अलावा अस्पतालों में भी जांच की व्यवस्था रहेगी. इसलिए अगर किसी भी तरह की परेशानी हो तो तत्काल अपनी कोरोना करा लें. इससे आप भी सुरक्षित रहेंगे और आपके संपर्क में आने वाले लोग भी.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

छठ घाटों पर रहेगी थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था

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स्वास्थ्य विभाग ने कर रखी है विशेष तैयारी

लोगों को कोरोना से बचाव के लिए किया जाएगा जागरूक

भागलपुर, 18 नवंबर

कोरोना काल में छठ को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार विशेष व्यवस्था की है. जिले के सभी छठ घाटों पर आने वाले लोगों के थर्मल स्कैनिंग की जाएगी. सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि छठ में अर्घ्य देने के लिए आने वाले सभी लोगों की जांच की जाएगी. अगर किसी का तापमान 100 डिग्री से अधिक पाया गया तो उसे भीड़ से अलग रहने के लिए कहा जाएगा.

संदिग्ध लोगों की होगी कोरोना जांच: सिविल सर्जन ने बताया कि थर्मल स्कैनिंग में जो व्यक्ति संदिग्ध दिखेगा उसकी कोरोना जांच की जाएगी. घाटों पर कोरोना जांच के लिए मेडिकल टीम तैनात रहेगी. जांच में अगर किसी के कोरोना ना होने की पुष्टि होती है तो उसे होम आइसोलेशन या फिर कोविड केयर सेंटर में इलाज के लिए भेजा जाएगा.

आशा कार्यकर्ता करेंगी जागरूक: छठ घाटों पर आशा कार्यकर्ता मौजूद रहेंगी और वह लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करेंगी. घाटों पर आशा कार्यकर्ता लोगों को भीड़ से बचने की सलाह देंगी. साथ में सभी से शारीरिक दूरी का पालन करने के लिए कहेंगी. लोगों से मास्क पहनने की भी अपील की जाएगी.

एंबुलेंस की रहेगी व्यवस्था: छठ घाटों पर अगर किसी की तबीयत ज्यादा बिगड़ती है तो उसे एंबुलेंस के जरिए इलाज के लिए भेजा जाएगा. इसे लेकर जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने-अपने इलाके में छठ घाटों पर एंबुलेंस की व्यवस्था करें.

घर में छठ मनाने की अपील: उधर दूसरी ओर डीएम प्रणव कुमार ने जिले के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह लोगों से बाहर के बजाए घर में छठ मनाने को तैयार करें. डीएम ने कहा कि ऐसा करने से भीड़ नहीं होगी और कोरोना संक्रमण से बचाव भी होगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

नवजात की बेहतर देखभाल से शिशु मृत्यु दर में कमी संभव : कार्यपालक निदेशक

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• 15 नवम्बर से 21 नवम्बर तक राष्ट्रीय नवजात सप्ताह, वेबिनार का हुआ आयोजन
• मेडिकल कॉलेज एवं जिला स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का होगा आयोजन
• प्रसव के दौरान एवं शिशु जन्म के 24 घंटे के भीतर 40% नवजातों की होती है मौत
• आवश्यक नवजात देखभाल शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में असरदार

पटना/ 18 नवंबर: बिहार के शिशु मृत्यु दर में कमी आयी है. फैसिलिटी एवं सामुदायिक स्तर पर नवजात शिशुओं को प्रदान की जाने वाली बेहतर देखभाल से ही यह संभव हो सका है. लेकिन अभी भी कई स्तर पर सुधार की जरूरत है. इस दिशा में 15 नवम्बर से 21 नवम्बर तक आयोजित की जा रही राष्ट्रीय नवजात सप्ताह काफी उपयोगी साबित हो सकती है. उक्त बातें राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बुधवार को राष्ट्रीय नवजात सप्ताह के ई-लांच एवं वर्चुअल उनमुखीकरण के दौरान कही.

बेहतर प्रयास से शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत के हुयी बराबर
कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि बिहार की शिशु मृत्यु दर 3 अंक घटकर राष्ट्रीय औसत के बराबर हो गयी है। वर्ष 2017 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 35 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 32 हो गयी। राज्य स्तर पर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की बेहतर क्रियान्वयन से ही यह संभव हो सका है. उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रसव पूर्व प्रैक्टिसेज, बर्थ एक्स्फिक्सिया, सेप्सिस एवं सुरक्षित प्रसव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि नवजातों को बेहतर ईलाज प्रदान करने एवं रोग प्रबंधन में एसएनसीयू(स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट), एनबीसीसी( न्यू बोर्न केयर कार्नर) एवं एनबीएसयू( न्यू बोर्न केयर स्टेबलाइजेशन यूनिट) की भूमिका बहुत अहम है. इसलिए यह जरुरी है कि फैसिलिटी बेस्ड इन सेवाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाए.

होलोस्टिक एप्रोच की जरूरत:
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बाल स्वास्थ्य डॉ. वीपी राय ने बताया कि बिहार की नवजात मृत्यु दर पिछले 7 वर्षों से 27-28 के बीच लगभग स्थिर थी। लेकिन वर्ष 2018 में 3 पॉइंट की कमी आई है. बिहार की नवजात मृत्यु दर जो वर्ष 2017 में 28 थी, वर्ष 2018 में घटकर 25 हो गयी। राष्ट्रीय नवजात सप्ताह के आयोजन का मुख्य उद्देश्य नवजात देखभाल में होलिस्टिक एप्रोच( सभी आयामों) को शामिल करना है, जिसमें शिशु जन्म के समय बेहतर देखभाल, शुरूआती स्तनपान एवं 6 माह तक सिर्फ स्तनपान, नाभी की देखभाल(गर्भ नाल को सूखा रखना), नवजातों में खतरे के संकेत की पूर्व पहचान, कंगारू मदर केयर एवं गृह आधारित शिशु देखभाल शामिल है. उन्होंने बताया कि 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं में होने वाली मौतों में 70% हिस्सा नवजात मृत्यु दर का होता है. इसलिए नवजात देखभाल की जरूरत अधिक है.

शुरूआती स्तनपान से नवजात मृत्यु दर में 22% की कमी:
यूनिसेफ के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. सैय्यद हुबेअली ने बताया कि विश्व भर में भारत में सबसे अधिक नवजातों( 54900) की मौत होती है जो कुल मौतों का 22% है. सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के तहत वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित जन्म 12 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए शुरूआती नवजात मौतों में कमी लाना बेहद जरुरी है, क्योंकि लगभग 80% नवजातों की मौत शिशु जन्म के 7 दिनों के भीतर ही होती है. वहीं 40% नवजातों की मौत प्रसव के दौरान या जन्म के 24 घंटों के भीतर हो जाती है. उन्होंने बताया कि जन्म के 1 घन्टे के भीतर नवजात का स्तनपान शुरू करने से नवजात मृत्यु दर में 22% की कमी एवं पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर में 13% की कमी लायी जा सकती है.

विभिन्न गतिविधियों का होगा आयोजन:
विमलेश कुमार सिन्हा, सहायक निदेशक, बाल स्वास्थ्य एवं पोषण, राज्य स्वास्थ्य समिति ने बताया कि इस बार के राष्ट्रीय नवजात सप्ताह की थीम-‘‘ एन्स्युरिंग क्वालिटी, इक्विटी एंड डिग्निटी फॉर न्यूबोर्न केयर ऐट एवेरी हेल्थ फैसिलिटी एंड एवेरीवेयर’’ रखी गयी है. इस दौरान मेडिकल कॉलेज एवं जिला स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया जाना है. इस दौरान मेडिकल कॉलेज में आने वाले नवजातों की सघन जांच एवं दिसम्बर माह के पहले सप्ताह में टेक्निकल वेबिनार का आयोजन जैसी अन्य गतिविधियाँ की जाएंगी. वहीं जिला स्तर पर एसएनसीयू द्वारा नवजातों की फोन पर फॉलो-अप, डीईआईसी( डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) पर नवजातों की स्क्रीनिंग एवं कोविड काल में लेबर रूम एवं डिलीवरी पॉइंट का रिव्यु आदि गतिविधियाँ की जाएगी.

प्रीटर्म प्रबंधन बेहद जरुरी:
इस दौरान केयर इंडिया के बाल स्वास्थ्य टीम लीड डॉ. पंकज मिश्रा ने प्रीटर्म की पहचान, इसकी जटिलताएं एवं प्रबंधन को लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पूर्व होने वाले जन्म प्रीटर्म की श्रेणी में आते हैं. यदि बिहार की नवजात मृत्यु दर को सिंगल डिजिट में ले जाना है तो प्रीटर्म जन्मे नवजातों का प्रबंधन काफी जरुरी है, जिसमें ऐसे बच्चों की ट्यूब फीडिंग, ब्रेस्टफीडिंग एवं ऑक्सीजन थेरपी के सही इस्तेमाल पर जोर देना होगा.
इस वेबिनार में राज्य के सभी जिलों के शिशु स्वास्थ्य नोडल के साथ अन्य अधिकारी शामिल हुए

बातचीत करने और सांस लेने से भी फैल सकता है कोरोना, रहें सतर्क

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मास्क लगाना नहीं भूलें, शारीरिक दूरी का करें पालन

जहां-तहां थूकने से बचें, दूसरे लोगों का रखें ख्याल

बांका, 18 नवंबर

कोरोना का संक्रमण आमतौर पर ड्रॉपलेट्स के जरिए होता है. कोई भी कोरोना पीड़ित अगर आपके नजदीक छींकता है या फिर खांसी करता है तो उसके जरिए निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से कोरोना के संक्रमण होने की संभावना रहती है. 2 लोगों के बीच बातचीत करने या फिर सांस लेने से भी ड्रॉपलेट्स बाहर निकलता है और वह दूसरे के शरीर में प्रवेश कर सकता है. इसलिए बातचीत करने के दौरान मास्क का प्रयोग और शारीरिक दूरी के पालन से ही कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि आमतौर पर लोग ऐसा समझते हैं कि खांसने- छींकने से ही ड्रॉपलेट्स बाहर निकलता है, लेकिन ऐसा नहीं है. सांस लेने और बातचीत करने के दौरान भी ड्रॉपलेट्स बाहर निकलता है. इसलिए इन चीजों को लेकर सावधान रहें.

मास्क लगाना नहीं भूलें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि बातचीत के दौरान मास्क लगाना नहीं भूलें. घर से जब भी बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं या फिर घर में भी किसी के साथ आप बातचीत कर रहे हैं तो जरूरी तौर पर मास्क लगाएं. कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क बहुत ही उपयोगी साबित हो रहा है. अपने साथ दूसरे लोगों को भी मास्क लगाने के लिए प्रेरित करें.

हर हाल में शारीरिक दूरी का पालन करें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी सबसे बड़ा हथियार है. भीड़भाड़ में रहने से बचें और एक-दूसरे के बीच 2 गज की दूरी का पालन करें. यह नियम घर पर भी लागू करें. आमतौर पर देखा जा रहा है कि बाहर रहने के दौरान लोग शारीरिक दूरी का पालन करते हैं, लेकिन घर में नहीं करते. ऐसा बिल्कुल भी नहीं करें.

जहां-तहां थूकने से बचें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अभी मौसम में बदलाव हो रहा है. लोग सर्दी खांसी से पीड़ित हो रहे हैं. ऐसा देखा जा रहा है कि सर्दी आने या फिर खांसी आने पर जहां-तहां थूकते हैं. इससे संक्रमण का खतरा रहता है. ऐसा बिल्कुल भी नहीं करें. इससे आप दूसरों को कोरोना की चपेट में आने से बचा सकेंगे.

पान- पुड़िया खाने से करें परहेज: हमारे समाज में एक बहुत बड़ा तबका है जो पान, गुटखा या फिर तंबाकू खाते हैं. इनकी आदत रहती है जहां-तहां थूकने की. यह बात साबित हो चुकी है कि धूम्रपान या फिर नशा करने वाले को कोरोना का खतरा ज्यादा है. ऐसे में नशा का सेवन कर आप अपना स्वास्थ्य तो खराब कर ही रहे हैं. जहां-तहां थूककर दूसरों को भी कोरोना की चपेट में ला दे रहे हैं. इस तरह की लापरवाही नहीं करें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना के नए लक्षणों को पहचानकर करें खुद का बचाव

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लक्षण का पता होने से पहले शुरू हो सकेगा इलाज

पहले इलाज शुरू हो जाने से मरीज जल्द होंगे स्वस्थ

बांका, 17 नवंबर

कोरोना का दायरा बढ़ता ही चला जा रहा है. नए-नए लक्षण लगातार सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कुछ नए लक्षणों के बारे में जानकारी साझा की है, जिसे जानना बहुत जरूरी है. अगर आप इन लक्षणों को जान जाएंगे तो कोरोना से सावधानी बरतने में आसानी होगी. साथ ही इलाज भी पहले शुरू हो सकेगा. इससे आप जल्द स्वस्थ भी हो जाएंगे.

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि किसी भी बीमारी का बेहतर इलाज तभी हो पाता है जब आप उसकी सही पहचान कर लेते हैं. और इसकी शुरुआत घर से हो जाए तो बेहतर है. डब्ल्यूएचओ ने जो कोरोना के नए लक्षण के बारे में बताया है, उसकी पहचान कर खुद को आप सुरक्षित रख सकते हैं. इससे कोरोना की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी.

ये हैं नए लक्षण: डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, गले में फोड़ा-फुंसी होना और तनाव होना भी कोरोना के लक्षण है. हाथ में खुजली होना, आंखों का लाल होना और शरीर में जहां-तहां दर्द होना भी कोरोना पीड़ितों में पाया गया है. इसके अलावा डायरिया के लक्षण भी कोरोना मरीजों में मिले हैं.

ये हैं गंभीर लक्षण: सांस लेने में दिक्कत होना सीने में दर्द होना और जाने-आने में परेशानी होना, यह कोरोना के गंभीर लक्षणों में से है. ऐसे कोई भी लक्षण खुद में या किसी और में दिखाई पड़े तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. थोड़ी सी लापरवाही ना सिर्फ आपका नुकसान करेगा, बल्कि समाज के कई लोगों को कोरोना की चपेट में ले सकता है.

ये हैं आम लक्षण: बुखार होना, कफ होना, थकावट का एहसास होना, खाने में स्वाद नहीं आना और किसी भी चीज की खुशबू का एहसास नहीं होना- यह कोरोना के आम लक्षण हैं. ऐसे लक्षण भी दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. कोरोना जांच करा लेनी चाहिए.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

राष्ट्रीय नवजात शिशु देखभाल सप्ताह पर सेमिनार का हुआ आयोजन

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· पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुआ सेमिनार का आयोजन
· नवजात मृत्यु दर में कमी लाने से शिशु मृत्यु दर में स्वत: आयेगी कमी
· पोस्टर एवं लेखन प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम होगा आयोजित
· जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाएं

पटना/ 17 नवंबर। नवजात की समुचित देखभाल उसके बचपन को खुशहाल बनाने के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके अलावा शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में इसकी बड़ी भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुए 15 से 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है। सप्ताह के दौरान समुदाय के सभी वर्ग के लोगों को नवजात शिशु देखभाल की जरूरत पर जागरूक किया जा रहा है। इस पर विशेष चर्चा के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिशु रोग विभाग के सेमिनार हॉल में ‘‘राष्ट्रीय नवजात सप्ताह-2020’’ पर सेमिनार आयोजित किया गया । राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, पटना से आये राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य, डॉ विजय प्रकाश राय की अध्यक्षता में यह सेमिनार आयोजित किया गया।

एक वर्ष में होने वाली कुल शिशुओं की मौत में तीन चौथाई मौत नवजातों में:
सर्वप्रथम डॉ एके जायसवाल, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग, पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने बैठक में आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कोविड-19 वैश्विक महामारी काल में शिशुओं की देखभाल के संबंध चर्चा की। उन्होनें बताया कि एक वर्ष में होने वाले कुल शिशुओं की मृत्यु में तीन चैथाई मृत्यु केवल नवजातों में होता है। अगर नवजात मृत्यु में कमी लायी जाए तो शिशु मृत्यु दर में स्वतः कमी आ जायेगी। सेमिनार में यूनिसेफ बिहार, पटना के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सैय्यद हुब्बै अली ने विस्तारपूर्वक इस दिवस के महत्व एवं आवश्यकता को बताया। उन्होनें बताया कि ‘‘राष्ट्रीय नवजात सप्ताह-2020’’ का विषय है – हर स्वास्थ्य संस्थान पर हर नवजात की देखभाल में गुणवत्ता, समानता एवं गरिमा सुनिश्चित करते हुए सुविधा प्रदान करना । इसी दिशा में आज का यह सेमिनार आयोजित किया गया ।

पोस्टर एवं लेखन प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम होगा आयोजित:

डॉ. विजय प्रकाश राय, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य, राज्य स्वास्थ्य समिति,बिहार पटना ने विस्तारपूर्वक राज्य में समुदाय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक षिषु स्वास्थ्य से संबंधित चल रहे कार्यक्रमों एवं सेवाओं पर चर्चा की । इस ‘‘राष्ट्रीय नवजात दिवस-2020’’ पर यूनिसेफ, बिहार के सौजन्य से पोस्टर एवं लेखन प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम भी आयोजित की जा रही, जिसमें पुरस्कार की घोषणा की गई है। इस सेमिनार में शिशु रोग विभाग के डॉ. अनिल कुमार तिवारी, डॉ. नीलम वर्मा, डॉ. भुपेंद्र नारायण, डॉ. अखिलेश झा तथा डॉ. आफताब आलम, सामूदायिक स्वास्थ्य सलाहकार, यूनिसेफ एवं डॉ अनुपमा झा, शिशु स्वास्थ्य सलाहकार, यूनिसेफ, पटना के साथ शिशु रोग विभाग, प्रसुति विभाग के कई चिकित्सक, सीनियर रेजिंडेट, पीजी,इंटन्र्स, चिकित्सक, स्टाफ नर्स इंचार्ज , स्टाफ नर्स इत्यादि मौजूद थे।

जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाएं:

डॉ. विजय प्रकाश राय, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य ने कहा कि नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिए जरूरी है कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक माँ एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। नवजात को तुरंत न नहलायें केवल शरीर पोंछकर नर्म साफ़ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराएं। जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और विटामिन ‘के’ का इंजेक्शन लगवाएं। नियमित और सम्पूर्ण टीकाकरण कराएँ। नवजात की नाभि सूखी एवं साफ़ रखें, संक्रमण से बचाएं और माँ व शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान दें और शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) की विधि अपनाएँ। शिशु जितनी बार चाहे दिन या रात में बार-बार स्तनपान कराएं। कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए छह महीने तक केवल माँ का दूध पिलाएं, शहद, घुट्टी, पानी आदि बिल्कुल न पिलाएं।

सप्ताह के मुख्य उद्देश्य:
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल करने के बारे में जनसमुदाय को जागरूक कर नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान और छह माह के बाद ऊपरी आहार देकर बच्चों को सुपोषित बनाना और शिशुओं का समय से नियमित टीकाकरण कराना आदि के बारे में विधिवत जानकारी देना नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का प्रमुख उद्देश्य है।

प्रदूषण और ठंड के दौर में निमोनिया से बचें

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-12 महीने से कम उम्र के बच्चों का निमोनिया से बचाव करें
-घर के 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों का भी रखें ख्याल

भागलपुर, 17 नवंबर।
मौसम में बदलाव हो रहा है। ठंड के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड व वायु प्रदूषण के बढ़ने से बुजुर्गों और नवजात बच्चों को निमोनिया होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में नवजात बच्चों व बुजुर्गों को अधिक सजग रहने की जरूरत है। खासकर 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को। अगर बच्चे व बुजुर्ग में निमोनिया के लक्षण दिखे तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।

हर रोज दो से तीन मामले निमोनिया के:
मायागंज अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि इन दिनों अस्पताल में हर रोज दो से तीन मामले निमोनिया के आ रहे हैं। जिले में होने वाली कुल मौतों मे से करीब 19 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण निमोनिया होता है। चूंकि यह समय कोरोना संक्रमण का है, ऐसे में एलर्जी वाले बच्चों में कोरोना संक्रमण की संभावना ज्यादा है।

मस्तिष्क और हृदय को पहुंचाता है नुकसान:
वरीय फिजिशियन डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि 65 साल से अधिक के बुजुर्ग, मधुमेह, कैंसर या फेफड़े को प्रभावित करने वाली बीमारी, किडनी, लिवर के बीमार, धूम्रपान करने वाले और उम्रदराज लोगों में भी निमोनिया की संभावना ज्यादा है। निमोनिया के जीवाणु मस्तिष्क और ह्रदय को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी के चारों तरफ की परत में सूजन (मेनिनजाइटिस) हो सकती है।

ये हैं निमोनिया के लक्षण:
– अचानक तेज बुखार के साथ छाती में दर्द, पसीना और अधिक पेशाब आना
-सिरदर्द, प्यास अधिक लगना, चेहरा व आंख का लाल होना
-सूखी खांसी , सांस लेने की गति बढ़ जाना, पीठ के बल लेटने में परेशानी होना
-फेफड़े में सूजन , नाड़ी की गति बढ़ना, बलगम के साथ खून आना, भूख लगना

बच्चों एवं बुजुर्गों को लगवायें निमोनिया का टीका:
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिन्हा बताते हैं कि निमोनिया होने की शुरुआत में एंटीबॉयोटिक दवा दी जाती है। निमोनिया से बचाव महत्वपूर्ण है, इसलिए बच्चों व 65 साल से अधिक उम्र वालों को निमोनिया का टीका लगा लें। इसके अलावा पर्याप्त नींद लें। नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ आहार लें। घर से बाहर निकलने पर मास्क से मुंह एवं नाक को अच्छी तरह से ढककर वायरस एवं बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों जैसे कोरोना, टीबी एवं निमोनिया ही नहीं बल्कि एलर्जी, अस्थमा और वायु प्रदूषण जनित तमाम बीमारियों से भी सुरक्षित रहा जा सकता है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

चित्रगुप्त पूजा बल, बुद्धि, साहस, शौर्य के लिए अहम-अनिल कु. मिश्र,प्रत्याशी,एमएलसी स्नातक सीट वाराणसी

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लखनऊ-
चित्रगुप्त जी की पूजा प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए वाराणसी से स्नातक एमएलसी प्रत्याशी अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि आज के पूजन का काफी महत्व है। चित्रगुप्त जी ने मां सरस्वती से विचार विमर्श के बाद लिपि का निर्माण किया और अपने पूज्य पिता के नाम पर उसका नाम ब्राह्मी लिपि रखा।
अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि चित्रगुप्त जी के द्वारा ईजाद किए गए लिपि को ही सर्वप्रथम उपयोग भगवान वेद व्यास के द्वारा सरस्वती नदी के तट पर उनके आश्रम में वेदों के संकलन से प्रारंभ किया गया। वेद के उपनिषाद, अरण्यक ब्राह्मण ग्रंथों तथा पुराणों का संकलन कर उन्हें लिपि प्रदान किया गया।
अनिल कुमार मिश्र ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज जो भी पढ़ने लिखने वाले लोग हैं उनसबके लिए गौरव का दिन है। चित्रगुप्त पूजा कलम से जुड़े सभी लोगों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। अतः यह पूजन विशेष रूप से अनिवार्य है। चित्रगुप्त पूजा बल, बुद्धि, साहस, शौर्य के लिए अहम माना गया है। पुराणों ग्रंथों में इस पूजन के बगैर कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। इस विशेष पूजा पर एक बार पुनः प्रदेशवासियों को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।

हेल्पिंग हैंड ट्रस्ट ने मनाई गरीबों संग दिवाली

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नई दिल्ली.
दीपावली के त्यौहार पर हम सब अपने घरों में मिठाइयां, सजावट का सामान, दीप आदि से अपने घर को रोशन कर लेते हैं, लेकिन झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीबों की दिवाली पर वे इन चीजों से वंचित रह जाते हैं. लेकिन इस बार दक्षिणपुरी बी ब्लॉक में रहने वाले गरीबों को ‘हेल्पिंग हैंड ट्रस्ट’ ने उन्हें मिठाई, दीपक, तेल आदि सामान देखकर उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का काम किया.
हेल्पिंग हैंड ट्रस्ट की अध्यक्षा देव कुमारी ने इस अवसर पर कहा कि मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि मैं जरूरतमंदों की मदद करूं, ईश्वर के आशीर्वाद से मेरे साथियों के साथ मैं जरूरतमंदों की हर संभव मदद करती हूं, आप सब लोगों के प्यार स्नेह आशीर्वाद सहयोग से यह सब संभव हो पाता है. आज इन सबको जरूरतमंद सामान देकर हम दीपावली का त्यौहार मना रहे हैं.
हेल्पिंग हैंड ट्रस्ट हमेशा जरूरतमंदों के साथ खड़ी रहती है. गरीब मरीजों को इलाज हेतु सहायता प्रदान करना, राशन प्रदान करना, गरीबों को शिक्षा हेतु राशि प्रदान करना आदि जरूरतों में संस्था हमेशा उनके साथ खड़ी रहती है.

क्षेत्र भ्रमण कर लोगों की कोविड-19 जाँच कर रहीं हैं एएनएम सीता कुमारी

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– मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यक्रम के तहत कर रहीं हैं जाँच
– लखीसराय पीएचसी अंतर्गत सिंहचक स्वास्थ्य उप केंद्र में हैं पदस्थ, लैब टेक्नीशियन का भी मिल रहा है सहयोग

लखीसराय, 13 नवंबर।
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सरकार की ओर से शुरू मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यक्रम को सफल बनाने एवं धरातल पर लाने के लिए जिले के लखीसराय पीएचसी में पहल शुरू की जा चुकी है। इसके तहत लखीसराय पीएचसी अंतर्गत सिंहचक स्वास्थ्य उप केंद्र में पदस्थ एएनएम सीता कुमारी पीएचसी के अलावा अपने पीएचसी के अधीनस्थ क्षेत्र में गाँव-गाँव जाकर लोगों की कोविड- 19 जाँच कर रहीं हैं। जिससे लोगों को न सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य सेवा लाभ मिल रहा बल्कि, जाँच की रफ्तार भी तेज हो रही है। लोगों को जाँच कराने में पूर्व की भाँति आसानी हो रही है।

– लैब टेक्नीशियन का मिल रहा है सहयोग :-
एएनएम सीता कुमारी ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण कर लोगों की कोविड-19 जाँच करने में पीएचसी के लैब टेक्नीशियन चंदन कुमार का भी काफी सहयोग मिल रहा है। जिसके कारण यातायात सुविधा से विहिन गाँव तक भी पहुँचकर लोगों की कोविड-19 जाँच की जा रही है। इससे जाँच कराने में भी लोगों को आसानी हो रही है। जिसके कारण लोग अब जाँच कराने में इच्छुक दिखते हैं।

– जाँच के दौरान शारीरिक दूरी का रखा जाता है ख्याल :-
मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यक्रम के तहत क्षेत्र भ्रमण कर लोगों की कोविड-19 जाँच के दौरान दो गज की शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जा रहा है। साथ हीं कोविड-19 से बचाव को लेकर अन्य आवश्यक उपायों का भी पालन किया जाता है। इसके लिए मास्क और सैनिटाइजर का भी उपयोग निश्चित रूप से किया जा रहा है।

– जाँच के साथ-साथ लोगों को बचाव को भी किया जा रहा है जागरूक :-
मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यक्रम के तहत क्षेत्र में लोगों की जाँच के साथ-साथ कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है। बचाव के लिए लोगों को हर मानकों का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी लोगों को व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करने आदि की जानकारी दे रहे हैं।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड -19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से करें उपयोग।
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें और इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करें।
– बाहर खाना खाने से परहेज करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
– भीड़-भाड़ वाले जगह से परहेज करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों ,सैनिटाइजर से हाथ धोने की आदत डालें।