जिले में छठ पूजा के बाद फिर शुरू होगा सास-बहू सम्मेलन

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– बेटे-बेटियों का फर्क होगा दूर, छोटा परिवार, खुशहाल परिवार को मिलेगा बल
– एक साथ सास-बहू को किया जाएगा जागरूक,

लखीसराय, 13 नवंबर।
लखीसराय जिले में छठ पूजा के समापन के बाद फिर से सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम शुरू होगा। इसके माध्यम से सरकार द्वारा चलाये जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम को बल मिलेगा और जनसंख्या स्थिरीकरण का उद्देश्य सफल होगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक कवायद शुरू कर दी गई है। इस कार्यक्रम का आयोजन पीएचसी स्तर पर किया जाएगा।

– परिवार नियोजन के लिए सास-बहू का आपसी सामंजस्य महत्वपूर्ण : –
जिला मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया इस कार्यक्रम का मुख्य उदेश्य यह है कि सास-बहु को एकसाथ परिवार नियोजन के लिए प्रेरित और जागरूक किया जा सके। दरअसल सामाजिक व्यवस्था में परिवार का बड़ा महत्व है। खासकर घर की सबसे बड़ी व बुजुर्ग महिला का। शायद, यही वजह होगा कि बहू का निर्णय कहीं न कहीं सास की विचारधाराओं से प्रभावित रहता है। परिवार नियोजन के लिए सास-बहू का आपसी सामंजस्य महत्वपूर्ण है। इसके कारण सास और बहू को एकसाथ जागरूक किया जाएगा।

– ग्रामीण महिलाओं तक अभियान का उद्देश्य पहुँचाने के लिए पीएचसी स्तर पर भी होगा कार्यक्रम :-
डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन जिला से लेकर पीएचसी स्तर पर भी होगा। ताकि इस अभियान के उद्देश्य से हर महिला अवगत हो सके । पीएचसी स्तर कार्यक्रम पर आयोजन करने का दूसरा उद्देश्य यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी सभी महिला तक कार्यक्रम का उद्देश्य पहुँचाया जा सके।

– छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का दिया जाएगा संदेश : –
डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम के माध्यम से खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का संदेश दिया जाएगा। दरअसल, आज भी देखा जा रहा है कि लोग परिवार नियोजन को उचित नहीं मानते हैं। खासकर पुराने ख्यालात के लोग तो इसे किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं मानते हैं। जो कि महज एक अवधारणा है और यह अवधारणा वर्षों से चली आ रही है। उक्त कार्यक्रम से ना सिर्फ लोग परिवार नियोजन के लिए जागरूक होंगे, बल्कि वर्षों से चली आ रही बेटे – बेटियों में फर्क की अवधारणा भी दूर होगी। इसके लिए बच्चे दो ही अच्छे स्लोगन के माध्यम से सास-बहू को एकसाथ जागरूक किया जाएगा और छोटा परिवार के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

– सही उम्र में शादी और शादी के दो वर्ष बाद ही हो पहला बच्चा : –
डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम के तहत लोगों को यह भी जानकारी दी जाएगी कि बच्चे की शादी सही उम्र पर ही करें। शादी के कम से कम दो साल बाद ही पहला बच्चा हो और दूसरे बच्चे में कम से कम तीन साल का अंतर हो। इससे ना सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण सफल होगा, बल्कि माँ और बच्चे दोनों स्वस्थ भी रहेंगे। स्वस्थ माँ से ही मजबूत बच्चा संभव है।

– उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी को मिलेगा पुरस्कार :-
डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –

– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

कोरोना से बचाव के लिए इस बार नहीं छोड़ेंगे पटाखे

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युवाओं ने इस बार शांतिपूर्वक तरीके से दिवाली मनाने का लिया निर्णय

त्यौहार के साथ अपना और पड़ोसियों के स्वास्थ्य का भी रखेंगे ख्याल

भागलपुर, 13 नवंबर

आज रोशनी का त्यौहार दीपावली है. इस दिन लोग एक दूसरे से मिलकर बधाई देते हैं और गिफ्ट के तौर पर मिठाई भेंट करते हैं. वहीं बच्चे और युवा वर्ग के लोग पटाखे फोड़कर अपनी खुशियों का इजहार करते हैं. इस बार दिवाली पर कोरोना का साया है. इस वजह से स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दे रहा है. भीड़-भाड़ से बचने की सलाह दे रहा है. एक-दूसरे से 2 गज दूरी का पालन करने को कह रहा है. साथ ही पटाखे के धुएं से भी बचने की सलाह दी जा रही है. ऐसे में भागलपुर के कुछ युवाओं ने इस बार पटाखे नहीं फोड़ने का संकल्प लिया है. इससे वह तो कोरोना से बचेंगे ही, आसपास के लोग भी सुरक्षित रहेंगे.

दूसरों को भी करूंगा जागरूक: बुढ़ानाथ चौक के रहने वाले कुंज बिहारी मिश्रा ने कहा कि “हर साल हम लोग दिवाली मनाते हैं. इस बार नहीं ही मनाएंगे तो क्या हो जाएगा. वैसे भी पटाखा फोड़ने के लिए और भी समय होते हैं. अगर हम पटाखा नहीं फोड़े और इससे स्वास्थ्य ठीक रहे. साथ ही पड़ोस के लोग भी स्वस्थ रहें तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता. इसलिए मैं पटाखा नहीं छोडूंगा. साथ ही दूसरों को भी इसे लेकर जागरूक करूंगा.”

इस बार पूजा पाठ में लगाऊंगा ध्यान: सुरखी कल के रहने वाले राकेश कुमार झा ने कहा कि “दिवाली सिर्फ पटाखे फोड़ने के लिए नहीं होते हैं. और भी रस्मो रिवाज इस त्यौहार में होते हैं. इस बार मैं अपना ध्यान पूजा पाठ में लगाऊंगा. मैं अच्छा भोजन करूंगा. साथ ही दीपावली मनाने के जो और पारंपरिक तरीके हैं उसमें ध्यान लगाऊंगा. अगर पटाखे नहीं फोड़ने से समाज का भला होता है तो मैं इस बार पटाखा नहीं छोडूंगा.”

मैं और मेरे दोस्त नहीं छोड़ेंगे पटाखे: मानिकपुर के रहने वाले थे पीयूष ने कहा कि “इस बार कोरोना को लेकर माहौल थोड़ा सा अलग है. मैं और मेरे जितने भी दोस्त हैं सभी लोगों ने फैसला किया है कि इस बार पटाखा नहीं फोड़ना है. सभी एक दूसरे के घर पर जाकर दीपावली की बधाई दूंगा और इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन करूंगा.”

घर के बच्चे को भी पटाखा नहीं छोड़ने के लिए तैयार कर लूंगा: “ज्योति बिहार के रहने वाले अनुज कुमार मिश्रा ने कहा कि मैं खुद तो पटाखा नहीं छोडूंगा. साथ ही घर के बच्चे को भी इसे लेकर मनाऊंगा. उसे समझा लूंगा कि पटाखे फोड़ने से क्या नुकसान होता है. मुझे उम्मीद है कि वह मेरी बात को मान लेगा और मेरे साथ खेलकूद कर दीपावली मना लेगा.”

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जीवनशैली में सुधार लाकर मधुमेह को रखें नियंत्रित

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विश्व मधुमेह दिवस आज-
-खानपान का रखें ध्यान, नींद लें भरपूर
-नियमित तौर पर मधुमेह की जांच कराते रहें

बांका, 13 नवंबर।
विश्व मधुमेह दिवस 14 नवम्बर को है। इस बार का थीम है नर्स और डायबिटीज। इसका मकसद है मधुमेह की रोकथाम में नर्सों की भूमिका को सामने लाना। आज के समय में अनियंत्रित जीवनशैली से लोग मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं। यह ऐसी बीमारी है जिसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

मधुमेह पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी,-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि मधुमेह पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। अगर नियंत्रण नहीं होता है तो किडनी और हार्ट पर असर पड़ता है। इसलिए जैसे ही आपको पता चले कि आप इसकी चपेट में आ गए हैं तो इस पर नियंत्रण करने की कोशिश शुरू कर दीजिए। हर महीने नियमित तौर पर इसकी जांच कराते रहें और शुगर को नियंत्रित रखें।

मीठा और तेल-मसाले युक्त भोजन से बचें:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अनियंत्रित खानपान मधुमेह होने का बड़ा कारण है। इस पर नियंत्रण रखकर मधुमेह पर हम लगाम लगा सकते हैं। मधुमेह रोगियों को तेल मसाले युक्त भोजन से परहेज करना जरूरी है। मीठा चीज खाने से परहेज करें। दूध, दही और घी का कम से कम सेवन करें। खाने में हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें। एक बार में अधिक खाने की कोशिश न करें। इसके बजाय थोड़ा- थोड़ा कई बार भोजन करें। जंक फूड खाने से बचें।

नींद पूरी करें, मधुमेह से बचें :
आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग नींद को प्राथमिकता नहीं दे पाते हैं। करियर में आगे बढ़ने के लिए भरपूर नींद नहीं ले पाते हैं। मधुमेह होने का एक कारण यह भी है। कितनी भी भागदौड़ वाली जिंदगी क्यों नहीं हो, कम से कम 6 घंटे की नींद जरूरी है। संभव हो तो 8 घंटे सोने का प्रयास करें।.

सुबह टहलना शुरू करें:
अगर मधुमेह के रोगी हैं तो निश्चित तौर पर सुबह तेज गति से टहला करें। मधुमेह होने का एक कारण शारीरिक गतिविधियां कम होना भी है। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ा देंगे तो इससे भी मधुमेह पर नियंत्रण पाया जा सकता है। मधुमेह पर नियंत्रण रहने से इससे संबंधित दूसरी बीमारियों से बचे रहेंगे।

धूम्रपान से करें परहेज;
मधुमेह होने का एक कारण धूम्रपान भी है। धूम्रपान से मधुमेह पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। इसलिए अगर मधुमेह रोगी हैं तो आज ही धूम्रपान छोड़ें। लोग अक्सर तनाव कम करने के लिए धूम्रपान का सेवन करते हैं। इसलिए तनाव नहीं लें। इससे धूम्रपान से भी बचे रहेंगे और मधुमेह से भी।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जिले में घर-घर जाकर टीएचआर वितरण कर रही ऑगनबाड़ी सेविका

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– सहायिका भी कर रही है वितरण में सहयोग
– कोविड-19 के गाइडलाइन का रखा जा रहा ख्याल
– विभागीय पदाधिकारी द्वारा की जा रही वितरण की मानिटिरिंग

लखीसराय, 12 नवंबर, 2020
शिशुओं में कुपोषण को कम करने में अनुपूरक आहार की अहम भूमिका मानी जाती है. क्योंकि 6 माह के बाद स्तनपान के साथ-साथ अनुपूरक आहार की जरूरत ज़्यादा होती है. क्योंकि इस दौरान नवजात शिशुओं के शरीर एवं मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है. इसी क्रम में जिला आईसीडीएस विभाग द्वारा टीएचआर (टेक होम राशन) का वितरण जिले में शुरू हो गया है। इसबार कोविड-19 के सुरक्षा के मद्देनजर घर-घर जाकर लाभार्थी के बीच टीएचआर का वितरण किया जा रहा है। यह वितरण संबंधित क्षेत्र की ऑगनबाड़ी सेविका द्वारा घर-घर जाकर की जा रही है। इस कार्य में सहायिका भी मदद कर रहीं है। साथ ही विभाग के पदाधिकारी जैसे कि सीडीपीओ, एलएस, प्रखंड समन्वयक समेत अन्य पदाधिकारी भी लगातार क्षेत्र का दौर वितरण कार्य का जायजा ले रहें हैं और इस वितरण का सफल संचालन के लिए सेविका को आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

– नियमानुसार तराजू से माप कर हो रहा है टीएचआर का वितरण :-
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया टीएचआर वितरण के लिए विभाग द्वारा दिया गया इलेक्ट्रॉनिक तराजू से मापकर लाभार्थी को राशन दिया जा रहा है। जिसमें गर्भवती व धातृ को 3 किलो चावल, 1 किलो 500 ग्राम दाल, अति कुपोषित को 4 किलो चावल, 2 किलो दाल, 500 ग्राम सोयाबीन एवं कुपोषित को 2 किलो 500 ग्राम चावल, 1किलो 250 ग्राम दाल व 300 ग्राम सोयाबीन दिया जा रहा है।

– जारी कोविड 19 गाइडलाइन के अनुसार हो रहा है टीएचआर का वितरण :-
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया सरकार के द्वारा जारी कोविड 19 गाइडलाइन का पालन करते हुए टीएचआर का वितरण हो रहा है। इस दौरान कोविड-19 से सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जा रहा है। इसके लिए सेविका और सहायिका वितरण के दौरान मास्क, सैनिटाइजर समेत अन्य सुरक्षा कवच का अनिवार्य रूप से पालन कर रहीं हैं। साथ ही टीएचआर वितरण के दौरान ऑगनबाड़ी सेविका द्वारा शारीरिक दूरी का ख्याल भी रखा जा रहा है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो।

– कोविड-19 से बचाव के लिए भी किया जा रहा है जागरूक :-
टीएचआर वितरण के दौरान लाभार्थी को आँगनबाड़ी सेविका और सहायिका द्वारा कोविड-19 से बचाव के लिए भी बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारी देते हुए जागरूक किया जा रहा है। जिसके दौरान लाभार्थी को व्यक्तिगत साफ-सफाई का ख्याल रखने, नियमित रूप से मास्क का उपयोग करने, भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करने, घर से निकलने पर निश्चित रूप से मास्क पहनने आदि की जानकारी दी जा रही है।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– सेनेटाइजर का उपयोग करने की आदत डालें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

कोविड-19 से बचाव को मुहिम चला कर लोगों को जागरूक कर रही हैं रूबी कुमारी

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– लखीसराय सदर ऑगनबाड़ी केंद्र की है सेविका
– लोगों का समूह तैयार कर चला रही जागरूकता मुहिम,

लखीसराय, 12 नवंबर।
कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने एवं सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा बचाव से संबंधित जारी गाइडलाइन को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने में ऑगनबाड़ी कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे ही ऑगनबाड़ी कर्मियों में सदर आँगनबाड़ी केंद्र की सेविका रूबी कुमारी का भी नाम शामिल हैं। इन्होंने न सिर्फ लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया बल्कि, जागरूकता मुहिम को गति देने और सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए एक समूह भी बनाया। जिसमें अपने पोषक क्षेत्र के युवाओं, सामाजिक कार्यों में भाग लेने वाले इच्छुक व्यक्ति को शामिल किया। जिसके बाद अपने क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी जागरूकता मुहिम चलाकर लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया। साथ हीं सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने में सफल रही व उन्हें गाइडलाइन का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया। सेविका के इस जागरूकता मुहिम का परिणाम भी सकारात्मक दिख रहा है ।

– बड़े पैमाने पर लोगों को जागरूक करने में सफल रहीं सेविका रूबी कुमारी :-
आईसीडीएस जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया कि सेविका रूबी कुमारी का लोगों को जागरूक करने में अहम योगदान रहा है। इन्होंने खुद एवं तैयारी की गई टीम के साथ मिलकर व्यापक पैमाने पर लोगों को जागरूक करने का काम किया और वह समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक बचाव से संबंधित मानकों को पहुँचाने में सफल रहीं।

– समूह के सदस्यों का मिला का सहयोग :-
सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि शुरुआती दौर में लोग कोविड-19 से बचाव के प्रति काफी लापरवाह दिखे। लोगों की लापरवाही से वह बहुत दुखी हुईं। जिसके बाद उन्होंने समाज के लोगों को जागरूक करने का कार्य शुरू किया। इस दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि एक समूह तैयार कर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। क्योंकि, अकेले दम पर व्यापक पैमाने पर लोगों को जागरूक करना संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र के युवाओं एवं अन्य सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने वाले लोगों के साथ बैठक की। जिसमें एक समूह तैयार कर फिर से जागरूकता मुहिम की शुरुआत की ।

– जागरूकता मुहिम की पहल रही सकारात्मक :-
सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि जागरूकता मुहिम का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब लोग मास्क का उपयोग, दो गज की शारीरिक दूरी का पालन समेत कोविड-19 से बचाव के लिए अन्य मानकों का पालन शुरू कर दिया है। उनके मुताबिक इस मुहिम में समाज के लोग खुद शामिल हुए और मुहिम को सफल बनाने में काफी सहयोग किया।

इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– यात्रा के दौरान निश्चित रूप से मास्क लगाएँ और सैनिटाइजर साथ रखें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक नहीं छूएं।
– खुद सतर्क रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।

दीपावली के इस त्यौहार पर खुशियां बांटे, संक्रमण का वायरस नहीं

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• गिफ्ट में दें मास्क व सेनिटाइजर, संक्रमण के प्रति करें जागरूक
• त्यौहार पर संक्रमण से सुरक्षा के प्रति नहीं हों लापरवाह
• सेनिटाइजर को आग से दूर रखें, पटाखे चलाने से भी बचें
• मेहमान घर आयें तो साबुन पानी से धुलवायें हाथ, दें ऑनलाइन बधाई

भागलपुर, 12 नवंबर: जगमग रोशनी का त्यौहार दीपावली दीयों के साथ खुशियां के आगमन का संकेत देने वाली है. दीपावली व लोक आस्था के त्यौहार छठ को लेकर लोग घर आने वाले अपनों के इंतजार में है. बाजार में खरीदारी कर रहे हैं और मिलने जुलने वालों के स्वागत की तैयारी में भी जुटे हैं. लेकिन यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कोविड संक्रमण काल से पूर्व की तरह इस बार की दीपावली बिल्कुल अलग है. इस दीपावली को कई मायनों में हमें ख़ास बनाना होगा. दीपावली का पर्व अंधेरों पर प्रकाश की जीत का है. अभी के दौर में कोविड-19 अंधेरों का पर्याय बनने को आतुर भी दिख रहा है. लेकिन हम थोड़ी सतर्कता एवं सावधानी से उजालों के पर्व दीपावली को संक्रमण मुक्त कर सकते हैं एवं त्यौहार की खुशी लोगों के साथ साझा कर सकते हैं. इसके लिए हमें संक्रमण के प्रति एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है. इसमें विशेषकर हाथ धोने, मास्क पहनने और दीपावली जैसे त्योहार पर भी 6 फीट की दूरी रखने जैसे नियमों का पालन जरूरी है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि दीपावली का त्यौहार खुशियां लेकर आता है. इसलिए हम लोग ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे की खुशियों में खलल पैदा हो. कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए खुशहाल तरीके से त्यौहार मनाएं.

दीपावली पर खुशियां बांटे, वायरस नहीं:

दीपावली को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पोस्टर जारी करते हुए दीपावली व छठ जैसे त्यौहारों पर बरती जाने वाली उपायों का आवश्यक रूप से ख्याल रखने की अपील की है. मंत्रालय ने अपील किया है कि इस घड़ी में हमें खुशियां बांटनी हैं ना कि वायरस और इसके लिए आवश्यक उपायों का पालन जरूर करें. यदि आपके पास मोबाइल फोन, लैपटॉप है तो इसके माध्यम से आॅनलाइन अपने रिश्तेदारों को दीपावली की बधाई दे सकते हैं.

सुरक्षित रहने के लिए इसका भी रखें ध्यान:

• घर पर ही रहकर दीपावली मनायें.
• तोहफा के आदान प्रदान को लेकर सर्तक व सजग रहें.
• कम भीड़भाड़ वाले समय में ही खरीदारी करें.
• आवश्यक सामानों की लिस्ट बनाकर एक ही दूकान से खरीदारी करें.
• बहुत अधिक बाजार घूम घूम कर खरीदारी करने से बचें.
• गिफ्ट में मास्क, सेनिटाइजर देकर संक्रमण के प्रति करें जागरूक

सेनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति रहें सचेत:

दीपावली पर सेनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति सचेत रहना जरूरी है. सैनिटाइजर में एल्कोहल होता है. यह आग तेजी से पकड़ता है. दीपक जलाने से पहले इसका इस्तेमाल नहीं करें. आतिशबाजी से दूरी बनायें. यदि दीप जला रहे हों तो सैनिटाइजर को अपने साथ नहीं रखें. इसे आग से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें. इस मौके पर घर में बनाये गये या डिब्बाबंद मिठाईयों का इस्तेमाल करें. दीपावली पर यदि घर पर कोई मेहमान पहुंचते है तो सबसे पहले साबुन पानी से हाथ धुलवायें. गले नहीं लगें व इसकी जगह उनका अभिवादन हाथ जोड़ कर करें. यदि उनके द्वारा कोई गिफ्ट दिया जाता है तो उसे सेनिटाइज कर लें.

धुंध के मौसम में कोरोना के संक्रमण से रहें सतर्क

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वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण के जरिए संक्रमण की संभावना

दो गज की शारीरिक दूरी का करें पालन, भीड़भाड़ से करें अपना बचाव

बांका, 12 नवंबर।

मौसम में बदलाव हो रहा है। सर्दी शुरू हो गई है। अब सुबह में धुंध बढ़ने लगी है। ऐसा मौसम हृदय रोग और अस्थमा के मरीजों के लिए नुकसानदायक होता है। साथ ही ऐसे मौसम में कोरोना के संक्रमण की संभावना भी बढ सकती है। इसलिए किसी तरह की लापरवाही नहीं करें।

शहरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना का संक्रमण ड्रॉपलेट्स से होता है। धुंध पड़ने से मौसम में नमी ज्यादा रहती है। इससे कोरोना के वायरस की आयु बढ़ जाती है। इससे वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण के सांस लेने के दौरान शरीर के अंदर प्रवेश करने की संभावना रहती है। इससे कोरोना के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

मास्क लगाना नहीं भूलें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में घर से बाहर निकलते वक्त मास्क लगाना नहीं भूले। मास्क सबसे कारगर उपाय है इन परिस्थितियों में बचाव का। साथ ही 2 गज दूरी का पालन अवश्य करें। भीड़ भाड़ में जाने से परहेज करें।

धुएं से बचें: ऐसे मौसम में किसी भी तरह के धुएं से बचने की कोशिश करें।धूम्रपान, अगरबत्ती या फिर धूप से अपना बचाव करें। धुएं के जरिए शरीर के अंदर कोरोना के वायरस जाने की संभावना रहती है। इससे अपना बचाव करें।

साग सब्जी व मौसमी फलों का सेवन करें: ऐसे मौसम में खाने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साग और हरी सब्जी का अधिक से अधिक सेवन करें।साथ ही मौसमी फलों को अपने आहार में शामिल करें। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, जिससे आपका शरीर कोरोना के वायरस से लड़ने में सक्षम रहेगा।

गर्म पानी का सेवन करें: ऐसे मौसम में अधिक से अधिक गर्म पानी का सेवन करें। गर्म पानी से गागल करने से गले में खराश की समस्या नहीं आएगी। साथ ही गर्म पानी पीने से शरीर के अंदर मौजूद अनावश्यक चीजें भी नष्ट हो जाएंगी। इसके साथ ही सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या से भी आप बचे रहेंगे।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

दीपावली पर देश का हर घर हो रोशन

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देश के जाने-माने औधोगिक सलाहकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय सचिव, ईसीसी आई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री चिरंजीत कुमार शर्मा जी जो अपने आप में एक अभूतपूर्व प्रतिभा के धनी होने के साथ साथ एक शानदार व्यक्तित्व के मालिक हैं, देश के राजनीतिक गलियारों में इनका नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता है। और अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर विश्व के जाने माने सलाहकारों के समूह में इनका अपना एक विशेष स्थान है। आज दिल्ली में इनके अधिकारिक कार्यालय में हमारे विशेष संवाददाता द्वारा मुलाकात की और उन्हें उनकी नयी जिम्मेदारी को वो कैसे भविष्य में निभायेंगे इस पर चर्चा की।
चिरंजीत शर्मा ने सबसे पहले राष्ट्रीय के साथ साथ अंतराष्ट्रीय स्तर पर पूरे विश्व को दीपावली की शुभकामनाएं दी उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि दीपावली हिन्दुओं के साथ साथ सभी धर्मों का महत्वपूर्ण त्योहार है, ये त्योहार अंधेरे पर उजाले की विजय हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत है। इसलिए इस त्योहार को हम सभी को उसी आनन्द और गरिमा से मनाना चाहिए।
राष्ट्र को दिये संदेश में उन्होंने कहा कि कोविड के कारण ये समय सभी के लिए मुश्किल भरा रहा है इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि देश के हर घर में उजाला किया जाय और पूरे विश्व को एक संदेश दिया जाय कि भारत में सभी एक है देश में भाषा और खान-पान अलग-अलग हो सकता है लेकिन हमारे त्योहार और हमारी मानयताऐ एक है। हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि किसी भी घर में किसी भी कारण से खुशहाली में कमी ना रहे इसके लिए उन सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है जो ईश्वर ने बहुत अधिक सामर्थ्यवान बनाये है।
उन्होंने देश के हर नागरिक को अपने शब्दों से महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि हर विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहना ही जिंदगी है। इसलिए मुस्कुराते रहना हर किसी की आदतों में शामिल रहनी चाहिए जिससे सभी की जिंदगी खुशहाल हो सके।

आओ मिलकर कुछ कर जाये
दीपावली के दीप जलाये
रोतो को हंसना सिखलाये
विश्व गुरु हम बनके दिखाये।

जीवन का एक लक्ष्य बनाये
जी जान से हम देश बनाये
सुख दुख में हम साथ रहेंगे
पूरे विश्व को हम ये समझाये।

दीपों से हम दीप जलाये
हर घर में उजियारा लाये
हर एक को हम गले लगाये
दीपावली को दीपक से ही मनाये
विश्व गुरु बनकर दिखलाये।

किशोरावस्था में एनीमिया रोकथाम के लिए घर-घर जाकर आयरन की दवा बाँट रहे हैं स्वास्थ्यकर्मी

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• विफ्स कार्यक्रम के तहत ऑगनबाड़ी सेविका और आशा बाँट रहीं हैं दवा
• कोविड-19 से बचाव के मद्देनजर घर- घर जाकर बाँटी जा रही है दवा
लखीसराय-
स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग है और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने को लेकर अग्रसर है। इसी कड़ी में किशोरावास्था में एनीमिया रोकथाम के लिए पूरे जिले के विभिन्न प्रखंडों में घर-घर जाकर आयरन की दवा बाँटी जा रही है। इस कार्य की जिम्मेदारी विफ्स कार्यक्रम (साप्ताहिक आयरन फोलिक एसीड अनुपूरण) के तहत स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता और ऑगनबाड़ी सेविका को मिली है, जो लगातार अपने-अपने पोषक क्षेत्र में दवा वितरण का कार्य कर रही है। साथ ही लोगों को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक सलाह भी दे रहीं हैं।
दवा वितरण पर दिया जा रहा बल:
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि किशोरावस्था में एनीमिया प्रबंधन काफी जरुरी होता है. किशोरियां भावी माताएं होती है. इस लिहाज से भी किशोरियों को एनीमिया से बचाव की जरूरत अधिक हो जाती है. इस दिशा में जिला स्वास्थ्य महकमा सजग है एवं साप्ताहिक आयरन फोलिक एसीड अनुपूरण के तहत  पूरे जिले में आयरन फोलिक एसिड की दवा वितरित कर रहा है। अभी के दौर में कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है. इसलिए कोविड-19 के गाइडलाइन का भी ख्याल रखा जा रहा है। साथ ही दवा वितरण के सफल संचालन के लिए सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और प्रखंड स्तर पर दवा वितरण की मानिटिरिंग करने को कहा गया है।
कोविड-19 से सुरक्षा के मद्देनजर बाँटी जा रही है घर-घर दवा :
कोविड-19 से सुरक्षा के मद्देनजर घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दवा बाँटी जा रही है। ताकि संक्रमण का कोई खतरा उत्पन्न नहीं है। इसके लिए दवा वितरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मी आवश्यक गाइड लाइन का पालन कर रहे हैं और मास्क, सेनेटाइजर व अन्य बचाव से संबंधित एहतियात बरत रहें हैं।
आयरन की दवा सेवन से दूर होगी खून की कमी की समस्या :
किशोरियों को आयरन की अधिक जरूरत होती है. किशोरावस्था में माहवारी शुरू के कारण प्रत्येक माह रक्त स्त्राव होता है जिसकी पूर्ति के लिए किशोरियों को अतिरिक्त आयरन की जरूरत बढ़ जाती है. शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड की दवा का सेवन करना जरुरी है. आयरन की अतिरिक्त जरूरत को पूरा करने के लिए आहार में भी आयरन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए. इसके लिए आहार में हरी साग-सब्जी, फ़ल, भुना हुआ चना एवं गुड आसानी से मिलने वाले खाद्य सामग्री है जो आयरन की कमी पूरी कर सकते हैं.
कोविड-19 से बचाव की भी दी जा रही है जानकारी :
दवा वितरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मी लोगों को कोविड-19 से बचाव की भी जानकारी दे रहे हैं। जैसे कि, मास्क का नियमित रूप से उपयोग करने, शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने आदि की जानकारी दी जा रही है।
इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
• साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से बार-बार हार धोने की आदत डालें।
• मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
• घर से बाहर निकलने वक्त निश्चित रूप से मास्क का उपयोग करें और सेनेटाइजर साथ में रखें।
• भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
• बाहर बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का पालन करें।

निमोनिया के ख़तरे से शिशु का बचाव, सुरक्षित शिशु की यही पहचान

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• 12 नवम्बर को मनाया जाता है विश्व निमोनिया दिवस
• निमोनिया से बचाव शिशु मृत्यु दर में लाता है कमी
• निमोनिया से बचाव में पीसीबी का टीका असरदार

भागलपुर-
शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया शामिल है. इसको लेकर सरकार सक्रिय रूप से अपनी भूमिका भी अदा कर रहा है. निमोनिया के कारण शिशुओं में होने वाले मृत्यु को रोकने के लिए निःशुल्क पीसीवी के टीके की शुरुआत करना सरकार की गंभीरता को प्रदर्शित करता है. लेकिन सरकारी कार्यक्रमों एवं प्रयासों के इतर शिशुओं को निमोनिया जैसे गंभीर रोग से बचाने के लिए सामुदायिक जागरूकता की भूमिका को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता. इसको लेकर प्रत्येक साल 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस के रूप में मनाया जाता है.

निमोनिया से बचाव में टीका असरदार:
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य, डॉ वीपी राय ने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है. बच्चों के लिए यह सबसे बड़ी जानलेवा संक्रामक बीमारी है. बैक्टीरिया से बच्चों को होने वाले जानलेवा निमोनिया को टीकाकरण कर रोका जा सकता है. बच्चों को न्यू मोकॉकल कॉन्जुनगेट वैक्सी्न यानी पीसीवी का टीका 6 सप्ताह, 14 सप्ताह एवं 9 वें महीने पर लगाने होते हैं. इस टीके को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है. साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों में आवश्यक टीकाकरण की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है. पीसीवी का टीका बच्चों को निमोनिया से बचाने में काफ़ी असरदार है.

नियमित स्तनपान निमोनिया से बच्चों का करता है बचाव:
केयर इण्डिया के राज्य टीम लीड, शिशु स्वास्थ्य, डॉ. पंकज मिश्रा ने बताया कि कोरोना संक्रमणकाल में बच्चों को निमोनिया से बचाने की अधिक जरूरत है. इसके लिए बच्चों का उचित ध्यान रखना काफ़ी जरुरी है. निमोनिया को दूर रखने के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी है. छींकते-खांसते समय मुंह और नाक को ढक लें. समय-समय पर बच्चे के हाथ भी जरूर धोने चाहिए. बच्चों को प्रदूषण से बचायें और सांस संबंधी समस्या न रहें इसके लिए उन्हें धूल-मिट्टी व धूम्रपान करने वाली जगहों से दूर रखें. बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त पोषण दें. यदि बच्चा छह महीने से कम का है तो उसे नियमित रूप से स्तनपान कराएं. इस दौरान स्तनपान के अलावा ऊपर से शिशु को पानी भी न दें. स्तनपान प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में जरूरी है. नियमित स्तनपान से भी बच्चा निमोनिया जैसे गंभीर रोग से सुरक्षित रहता है.

इन लक्षणों से निमोनिया की करें पहचान:

• तेज बुखार होना
• खांसी के साथ हरा या भूरा गाढ़ा बलगम आना
• सांस लेने में दिक्कत होना
• दांत किटकिटाना
• दिल की धड़कन बढ़ना
• सांस की रफ्तार अधिक होना
• उलटी होना
• दस्त आना
• भूख की कमी
• होंठों का नीला पड़ना
• कमजोरी या बेहोशी छाना

खतरे के लक्षण दिखने पर क्षेत्रीय कार्यकर्ता या नजदीकी अस्पताल से करें संपर्क:
निमोनिया ऐसे गंभीर रोगों की श्रेणी में शामिल है जो बच्चों में मौत का कारण बनता है. इस लिहाज से यह जरुरी है कि निमोनिया से ग्रसित बच्चों की शीघ्र पहचान की जा सके ताकि उन्हें सही समय पर ईलाज प्राप्त हो सके. यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत हो रही हो, छाती/ पसली अंदर धंस रही हो एवं तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हों तो तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क करना चाहिए