निमोनिया के लक्षण दिखे तो नहीं करें लापरवाही

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-निमोनिया से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं
-सही समय पर कराएँ इलाज,
-बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया से विशेष तौर पर बचाने की जरूरत
विश्व निमोनिया दिवस आज –

भागलपुर, 11 नवंबर।
गुरुवार 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस है। इस बार थीम है ‘स्टॉप निमोनिया एवरी ब्रेथ कॉन्टस’। आमतौर पर लोग निमोनिया को साधारण बीमारी मान लेने की भूल कर देते हैं। इस वजह से यह कभी-कभी जानलेवा भी हो जाता है। दरअसल, बच्चे और बुजुर्गों में निमोनिया का असर ज्यादा होता है। इन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस वजह से ये लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं।

निमोनिया से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि निमोनिया में फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। फेफड़े में मवाद भर जाता और सूजन आ जाती है। इस वजह से बलगम वाली खांसी, सर्दी, बुखार और ठंड लगने लगती है। निमोनिया से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं। डॉक्टर से सलाह लेकर आप टीके लगवाकर स्वस्थ्य हो सकते हैं।

हाथों की नियमित तौर पर सफाई करें:
निमोनिया से बचाव के लिए स्वच्छता(हाइजीन) का ध्यान रखना जरूरी है। श्वसन संबंधित संक्रमण से बचने के लिए हाथों को लगातार धोते रहें। साथ ही हैंड सैनिटाइजर से सैनिटाइज करते रहें। इससे फेफड़े संक्रमित होने से बचे रहेंगे।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को करें मजबूत:
निमोनिया से बचाव के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए संतुलित आहार लेना चाहिए। समय मिलने पर योग और व्यायाम करना चाहिए। साथ में नींद की भी कमी नहीं होनी चाहिये। भरपूर नींद लेनी चाहिए।

धूम्रपान नहीं करें:
धूम्रपान के सेवन से भी श्वसन से संबंधित संक्रमण की आशंका रहती है। इसलिए धूम्रपान नहीं करें। धूम्रपान करने से पास रहने वाले लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा रहता है। धूम्रपान नहीं करने से वह भी बच जाएंगे।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के दौर में पूरी मुस्तैदी से दोहरी जिम्मेदारी निभा रहीं सेविका कुमारी अंशु

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– खगड़िया के गोगरी में संचालित केंद्र संख्या 148 की है सेविका
– कोविड-19 से बचाव को क्षेत्र में लोगों को करती रहीं जागरूक

खगड़िया, 11 नवंबर।
कोविड-19 से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने एवं इसकी रोकथाम के लिए आँगनबाड़ी कर्मियों का काफी सकारात्मक योगदान रहा है। ऑगनबाड़ी कर्मियों ने खुद की परवाह किए बगैर लोगों को जागरूक करने के साथ घर-घर जाकर कोविड-19 से बचाव जारी गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी किया। ऐसे ही ऑगनबाड़ी कर्मी में गोगरी के केंद्र संख्या 148 की सेविका कुमारी अंशु का भी नाम शामिल है। उन्होंने कोविड-19 के दौर में पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य का पालन किया। तमाम चुनौतियों के बावजूद कभी अपने जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी और मजबूत इच्छाशक्ति की बदौलत चुनौतियों को पीछे छोड़ लोगों को जागरूक करती रहीं ।

– कोविड-19 जाँच के लिए भी लोगों करती रहीं प्रेरित :-
गोगरी बाल विकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ नीना सिंह ने बताया कि सेविका कुमारी अंशु ना सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक और प्रेरित करती रहीं बल्कि, कोविड-19 जाँच के लिए लोगों को जागरूक कर स्वास्थ्य संस्थान तक जाने में मदद की। दरअसल, शुरुआती दौर में लोग इसे महज अफवाह मानकर जाँच कराने को इच्छुक नहीं होते थे। किन्तु, सेविका कुमारी अंशु ने ऐसे दौर में लोगों को जाँच के लिए प्रेरित और जाँच केंद्र तक पहुँचाने में भी सहयोग करती रहीं। जिसका सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि लोग खुद जाँच कराने के लिए सेविका कुमारी अंशु के घर आकर जाँच की प्रक्रिया की जानकारी लेने लगे और उत्साह के साथ जाँच को प्राथमिकता देने लगे।

– विभागीय कार्य में भी अव्वल रहीं सेविका कुमारी अंशु :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि कोविड-19 के दौर तमाम चुनौतियों के बावजूद विभागीय कार्य में भी सेविका अंशु कुमारी अव्वल रहीं । इन्होंने कोविड-19 के दौर में लागू लॉकडाउन की अवधि में भी घर-घर जाकर विभाग से संबंधित सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना की जानकारी दी और योजना का लाभ लोगों को दिलाने में भी अव्वल रही। इसके अलावा वह घर- घर जाकर गांव के लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करती हैं। कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को मास्क पहनने और घरों से कम निकलने की सलाह देती रहीं । लोगों को बाहर से घर आने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने आदि के लिए प्रेरित करती रहीं। वह लोगों को दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करने एवं बाजार या सब्जी मंडी में एक- दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह भी देती रहीं।

– जागरूकता का दिख रहा है असर : –
जागरूकता का गांव के लोगों में असर पड़ रहा है। बाहर निकलते वक्त लोग भीड़ लगाने से बच रहे हैं। लोगों ने मास्क पहनना शुरू कर दिया है। सैनिटाइजर का भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। सेविका कुमारी अंशु कहती हैं कि यह विपत्ति का समय है। इस वक्त लोगों को को बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभानी चाहिए। खासकर जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा है तब तक तो लोगों को निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए और इससे बचाव के लिए सतर्कता जारी रखना जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– हमेशा दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन करें।
– खुद के साथ दूसरों को भी जागरूक करें।
– लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

निमोनिया से बचाव के लिए सम्पूर्ण टीकाकरण जरूरी

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-विश्व निमोनिया दिवस आज
– सर्दियों के मौसम में निमोनिया के संक्रमण का ख़तरा
– न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) के वैक्सीनेशन से हीं निमोनिया से बचाव सम्भव
– इस वर्ष का थीम ‘स्टॉप निमोनिया, एव्री ब्रेथ कॉन्ट्स’

मुंगेर, 11 नवंबर। सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ हीं नवजात शिशुओं, बुजुर्गों व आम लोगों के निमोनिया से पीड़ित होने की संभावना बढ़ गयी है। इस बीमारी से नवजात शिशु से पांच वर्ष तक उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। नवजात शिशुओं एवं 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। जिससे उनमें निमोनिया के संक्रमण का खतरा काफी अधिक होता है। मालूम हो कि निमोनियां सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है जो बैक्टेरिया, वायरस और फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इस वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। इस बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का वैक्सीनेशन हीं है। निमोनियां की रोकथाम के लिए इस वर्ष का थीम ” स्टॉप निमोनियां, एव्री ब्रेथ कॉन्ट्स” रखा गया है ।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी प्रकाश चंद्र सिन्हा ने बताया कि निमोनिया से बचने का एकमात्र उपाय सम्पूर्ण टीकाकरण हीं है। उन्होंने बताया कि निमोनया जैसी बीमारी से बचने के लिए नवजात शिशु से लेकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण करना जरूरी है। निमोनिया से बचाव के लिए शिशु के डेढ़ माह, साढ़े तीन माह और नौ माह के होने पर न्यूमो कॉकल वैक्सीन लगाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसके साथ हीं नवजात शिशुओं को अन्य 12 तरह की बीमारियों से बचाव के लिए भी टीकाकरण कराना अनिवार्य है। इन बीमारियों में मुख्य रूप से पोलियो, ट्यूबर क्लोसिस(टीबी) , जैपनीज़ इंसेफलाइटिस, डिप्थीरिया, टेटनस, कुकरखांसी, हेपेटाइटिस बी, एच बी इन्फ्लूएंजा, मिजिल्स, रूबेला है। बच्चों का टीकाकरण कर उन्हें इन सभी बीमारियों से बचाया जा सकता है।

क्या है निमोनिया ?
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण होता है। आम तौर पर यह बीमारी बुखार या जुकाम होने के बाद हीं होता है। सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से यह बीमारी ज्यादा होती है। निमोनिया का प्रारम्भिक इलाज सीने का एक्स- रे करने के बाद क्लीनिकल तरीके से शुरू होता है। निमोनिया बैक्टेरिया, माइक्रोबैक्टेरिया, वायरल, फंगल और पारासाइट की वजह से उत्पन्न संक्रमण की वजह से होता है। इसका संक्रमण सामुदायिक स्तर पर भी हो सकता है।

निमोनिया से बचाव के उपाय :
ऐसे तो निमोनिया से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण हीं है । यह एक सांस संबंधी बीमारी है इसलिए कुछ सावधानी बरतने के बाद काफी हद तक इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके लिए नवजात एवं छोटे बच्चों के रखरखाव, खानपान एवं कपड़े पहनाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सर्दी के मौसम में हमेशा बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने एवं खाने- पीने में गर्म पदार्थो का हीं इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ हीं वैसे लोगों के संपर्क से दूर रखने की आवश्यकता है जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी हो। इसके साथ बुजुर्गों सहित अन्य लोगों को भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।

कोरोना काल में बरती जाने वाली सावधानी :
कोरोना काल में निमोनिया से बचने के लिए अति आवश्यक है कि सभी लोग हमेशा मास्क का उपयोग करें। इसके साथ हीं दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का भी इस्तेमाल निश्चित तौर पर करें। समय – समय पर साबुन या सैनिटाइजर से हाथ की साफ- सफाई भी निमोनिया से बचाव के उपाय हो सकते हैं।

कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन-,
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।

कोरोना से ठीक होने पर भी अपनी सेहत का रखें ख्याल

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योग और व्यायाम का सहारा लेकर खुद को रखें तंदुरुस्त

तेल और मसाले से युक्त भोजन करने से करें परहेज

बांका, 11 नवंबर।

कोरोना से बचने के लिए तो लोग एहतियात बरत ही रहे हैं, लेकिन कोरोना से ठीक होने के बाद भी एहतियात बरतने की जरूरत है। हाल के दिनों में देखा गया कि कोरोना से ठीक हुए कई मरीज गला सूखने की परेशानी लेकर डॉक्टर के पास आए। गला सूखने से प्यास नहीं लगती और उन्हें सूखी खांसी भी होती है।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए एहतियात बरतने की तो जरूरत है । लेकिन कोरोना से ठीक होने के बाद भी खुद को स्वस्थ रखने के लिए थोड़ा सचेत रहने की जरूरत है। इसमें योग, सही खानपान और शारीरिक क्रियाकलाप से मदद मिल सकती है।

करें प्राणायाम,सांस लेने की समस्या होगी दूर :
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में भूख नहीं लगने की समस्या देखी जा रही है। साथ ही सांस लेने में परेशानी हो रही है। कुछ लोग सीने में दर्द की शिकायत भी लेकर आ रहे हैं। ऐसे लोगों को प्राणायाम करना चाहिए। प्राणायाम से सांस लेने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा कपालभाति, अनुलोम-विलोम भी करें। यह काफी मददगार होगा।

खानपान का रखें ध्यान:
डॉ. चौधरी ने बताया कि किसी भी बीमारी में सही खानपान का ध्यान रखना चाहिए। अगर भोजन सही नहीं करेंगे तो वैसे ही आपका स्वास्थ्य सही नहीं रहेगा। ऐसे में आप बीमारी से कैसे लड़ेंगे। इसलिए दिन में कम से कम 3 बार नींबू पानी पिया करें। साथ में तेल मसाले वाले भोजन से परहेज करें। समय पर भोजन करें और भूखे पेट नहीं रहें।

सुबह तेज गति से टहलने की कोशिश करें:
डा.चौधरी ने कहा कि शारीरिक गतिविधियां बढ़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसलिए सुबह तेज गति से टहलने की कोशिश करें। हालांकि अभी सर्दी का मौसम शुरू हो रहा है, इसलिए टहलते जाते वक्त गर्म कपड़ा पहनना नहीं भूलें। गर्म कपड़े नहीं पहनने पर ठंड लगने से सर्दी, जुकाम या फिर वायरल से पीड़ित हो सकते हैं।

ठीक होने पर भी कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि कोरोना से ठीक हो जाने के बाद भी इसकी गाइडलाइन का पालन करें। दो गज की शारीरिक दूरी बना कर रहें। घर से निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं और घर में साफ सफाई का ध्यान रखें। अगर आप दूसरी बार संक्रमित हो जाएंगे तो परेशानी और बढ़ सकती है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

सुमन कार्यक्रम के तहत गर्भवती को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा

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– मातृ मृत्यु दर में आएगी कमी, सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवा
– प्रसव के बाद छः माह तक बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा
– मातृ मृत्यु की सूचना देने पर दी जाएगी प्रोत्साहन राशि

लखीसराय, 10 नवंबर।
बेहतर स्वास्थ्य सेवा के अभाव में प्रसव के दौरान प्रसूति महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। यहाँ तक कभी-कभी महिलाओं को जान भी गँवानी पड़ जाती है। किन्तु, अब महिलाओं को इन परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि, अब ऐसे महिलाओं को सुमन कार्यक्रम के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जाएगी । जिससे ना सिर्फ महिला की परेशानियाँ दूर होगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे। सुमन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ही है महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो और प्रसव के दौरान किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

– महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा, मातृ मृत्यु में आएगी कमी :-
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। किन्तु, जागरूकता के अभाव में कई बार समुदाय के लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अब सुमन कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाएं, प्रसव के बाद 6 माह तक महिलाएं एवं बीमार नवजातों को निः शुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना।

– मातृ मृत्यु की सूचना देने पर मिलेगा एक हजार रुपये :-
सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानियाँ होने पर 104 टॉल फ्री नंबर कॉल कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

– प्रसव के बाद छः माह तक बीमार प्रसूति और शिशु को निः शुल्क स्वास्थ्य सेवा :-
सुमन कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद आवश्यकतानुसार बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसे प्रसूति और शिशु की देखरेख करते हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता महिला के घर जाकर उनका स्वास्थ्य का हाल जानेंगे और वर्तमान स्थिति की स्थानीय पीएचसी को सूचना देंगे। इन सेवाओं का शत-प्रतिशत लाभ लोगों मिले इस बात का ख्याल रखा जाएगा। कार्यक्रम के तहत रेफरल सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए किसी भी महत्वपूर्ण मामले की आपात स्थिति के एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की गुंजाइश के साथ रेफरल सेवाओं का आश्वासन दिया जाएगा। जिसमें लाभार्थी को घर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा शामिल हैं । जटिलताओं के मामले एवं सिजेरियन प्रसव पर निः शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– घर से निकलने वक्त अनिवार्य रूप से मास्क लगाएँ और सेनेटाइजर साथ रखें।
– मुँह, नाक, ऑख छूने से बचें।

कोविड-19 की जाँच के दौरान संक्रमित हुई एएनएम जुली कुमारी, स्वस्थ होने के साथ ही पुनः कार्य पर लौटी

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– होम आईसोलेट होकर दी कोविड-19 को मात, लोगों को बेहतर सेवा देने की संकल्प लेकर कार्य पर लौटे

– सूर्यगढ़ा पीएचसी के चंदनपुरा स्वास्थ्य उप केंद्र पर हैं तैनात

लखीसराय, 10 नवंबर, 2020
कोविड-19 के दौर में सूर्यगढ़ा पीएचस के अंतर्गत चंदनपुरा स्वास्थ्य उप केंद्र पर तैनात एएनएम जुली कुमारी बुलंद हौसले और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी। इन्हें अपने क्षेत्र अंतर्गत लोगों की कोविड-19 जाँच करने की जिम्मेदारी मिली थी। जिसे इन्होंने बखूबी अंजाम दिया। इतना ही नहीं लोगों का कोविड-19 जाँच के साथ इससे बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी और लगातार सरकार के गाइड लाइन का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक भी करती रही।

जब बुखार हुआ तो कराई जाँच:

जुली लोगों की कोविड-19 जाँच के साथ अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी निष्ठा के साथ जारी रखी। इसी दौरान इन्हें एक दिन बुखार का एहसास हुआ। जिसके बाद इन्होंने खुद अपना भी कोविड-19 जाँच कराई। जिसमें रिपोर्ट पाॅजिटिव आई। इसके बाद इन्हें कोविड-19 संक्रमित होने की जानकारी मिली।

होम आईसोलेट में रहकर कोविड-19 को दी मात :

जब एएनएम जुली कुमारी को पता चला कि वह खुद कोविड-19 संक्रमित हो गई है तो वह खुद होम आईसोलेट हो गई। जहाँ आवश्यक इलाज के साथ-साथ बुलंद हौसले और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर कोविड-19 को मात दी।

-होम आईसोलेट के दौरान पीएचसी स्तर से मिला काफी सहयोग :

वहीं, एएनएम जुली कुमारी बताती है कि होम आईसोलेट के दौरान स्थानीय पीएचसी के चिकित्सकों एवं सहकर्मी सहित अन्य कर्मियों का काफी सहयोग रहा। चिकित्सकों के सहयोग से ही कोविड-19 को मात देने में वह सफल रही। इतना ही नहीं इस दौरान विभाग के अन्य पदाधिकारी का भी उन्हें काफी सहयोग मिलता रहा। हर दिन चिकित्सक घर आकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी लेते थे और आवश्यक चिकित्सा परामर्श देते थे।

लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के संकल्प के साथ पुनः कार्य पर लौटी:

एएनएम जुली कुमारी स्वस्थ होने के साथ लोगों को और बेहतर स्वास्थ सेवा देने की संकल्प के साथ पुनः कार्य पर लौटी और लोगों को अब बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे भी रहीं हैं। एएनएम जुली का कहना है कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले इसके लिए वह दृढ़ संकल्पित है। इस दौरान वह लोगों को कोविड-19 से बचाव को लेकर भी आवश्यक जानकारी दे रहीं हैं और जागरूक भी कर रहीं हैं।

कोविड-19 को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन जरूरी :

एएनएम जुली कुमारी ने बताया कोविड-19 को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ मजबूत इच्छाशक्ति होना भी जरूरी है। कोविड-19 से डरें नहीं, बल्कि चिकित्सा परामर्श कर पालन करते हुए मजबूत इच्छाशक्ति के साथ लड़े।

जाँच कराने में नहीं बरतें लापरवाही :

एएनएम जुली कुमारी ने कहा लोगों को कोविड-19 जाँच कराने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बल्कि, लक्षण दिखते ही जाँच कराना चाहिए। जाँच के बाद चिकित्सा परामर्श का पालन करते हुए आवश्यक इलाज कराना चाहिए।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :

– शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, कान छूने से बचें।
– सफर के दौरान हमेशा सेनेटाइजर पास में रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

पहले बुखार फिर खांसी हो तो कोरोना जांच जरूर कराएं: डॉ राजकमल चौधरी

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घर बैठे आराम से कर सकते हैं कोरोना बीमारी की पहचान
कोरोना की पहचान कर घर के अन्य सदस्यों का कर सकते हैं बचाव

भागलपुर, 10 नवंबर

पहले बुखार हो और इसके बाद खांसी तो निश्चित तौर पर कोरोना जांच करा लें. ऐसा हाल के दिनों में कोरोना वाले मरीजों की जांच में देखा गया. मायागंज अस्पताल में हाल के दिनों में कोरोना के जितने भी मरीज आए हैं, सभी में यह देखा गया कि उन्हें पहले बुखार हुआ. इसके बाद खांसी हुई.
मायागंज अस्पताल के डॉ राजकमल चौधरी बताते हैं डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कोरोना मरीजों को पहले बुखार होता है फिर खांसी होती है. इसके बाद मांसपेशियों में दर्द होती है, जी मचलने लगता है और फिर उल्टी होने लगती है. डायरिया होना कोरोना मरीजों का अंतिम लक्ष्य माना जाता है. मायागंज अस्पताल में हाल के दिनों में जितने भी कोरोना के मरीज आए, सभी में इसी तरह के लक्षण देखे गए. इस हिसाब से डब्ल्यूएचओ के निष्कर्ष की मायागंज अस्पताल में आने वाले मरीजों में पुष्टि हुई.

फ्लू में पहले खांसी फिर होता है बुखार: डॉ चौधरी कहते हैं कि आमतौर पर फ्लू में पहले खांसी होती है फिर बुखार होता है तथा इसमें सर दर्द और सूखी खांसी होती है. इस तरह से आप घर पर रहकर भी कोरोना और फ्लू के लक्षण को समझ सकते हैं और उस हिसाब से अपना इलाज करवा सकते हैं.

कोरोना के लक्षण दिखे तो घरवालों से बना लें शारीरिक दूरी: डॉ चौधरी का कहना है कि आप में जैसे ही कोरोना के लक्षण दिखने लगे तो घर के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रखें. खासकर घर के बुजुर्गों से. अलग बाथरूम का इस्तेमाल करें और घर के सदस्यों से बात करते वक्त मास्क का जरूर इस्तेमाल करें. इससे आपके घर के सदस्यों का बचाव होगा.

योग और व्यायाम करें: डॉ चौधरी कहते हैं कि कोरोना के लक्षण दिखे तो जांच करवा कर अपना इलाज करवाएं. डॉक्टर जो दवा दे उसका सेवन करें. इसके अलावा घर पर रहते हुए योग और व्यायाम करें. इससे आप की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, जिससे कोरोना से जल्द आप ठीक हो जाएंगे. शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से कोरोना से उबरने में मदद मिलती है. साथ ही नींबू पानी का अधिक से अधिक सेवन करें. गर्म पानी से गागल करें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के दौर में भी ऑगनबाड़ी सेविका रूबी कुमारी ने बुलंद हौसले व पूरी मुस्तैदी से निभाया अपना कर्तव्य

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– गोगरी प्रखंड के गोगरी पंचायत में संचालित केंद्र संख्या 225 में हैं कार्यरत

– तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने दायित्व से नहीं हटी पीछे

खगड़िया, 09 नवंबर।
ऑगनबाड़ी सेविका का काम पहले से ही काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल और उनमें शिक्षा की अलख जगाना कोई आसान काम नहीं है। गोगरी प्रखंड के गोगरी पंचायत में संचालित केंद्र संख्या 225 की ऑगनबाड़ी सेविका रूबी कुमारी ने कोविड-19 के दौर में भी बुलंद हौसले के साथ पूरी मुस्तैदी और जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का पालन किया। तमाम चुनौतियों के बावजूद कभी अपने जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी, बल्कि, बुलंद हौसले की बदौलत चुनौतियों को पूरा किया । इन्होंने विभागीय कार्यों के साथ – साथ कोविड – 19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभाई। बचाव के लिए आवश्यक जारी गाइडलाइन का पालन करने के लिए भी लोगों को जागरूक किया।

– कोविड-19 के साथ विभागीय कार्य को भी दिया अंजाम :-
गोगरी बाल विकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ नीना सिंह ने बताया कि इन्होंने कोविड-19 के दौर में न सिर्फ विभागीय कार्यों का निष्पादन मुस्तैदी के साथ किया , बल्कि कोविड-19 से बचाव के लिए भी बेहतर काम किया। कोविड-19 से लोगों को बचाव के लिए सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का संदेश घर – घर जाकर लोगों तक पहुँचाया। गाइडलाइन का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया।

– जागरूकता की दोहरी जिम्मेदारी कर रहीं पूरी :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर सेविका रूबी कुमारी को घर- घर जाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी मिली है। सेविका रूबी सुबह से ही अपने काम में जुट जाती हैं। वह घर- घर जाकर गांव के लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करती हैं। कोरोना से बचाव के लिए लोगों को मास्क पहनने और घरों से कम निकलने की सलाह देती हैं। लोगों को समझाती हैं कि बाहर से घर आने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें। वह लोगों को दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करने एवं बाजार या सब्जी मंडी में एक- दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह देती हैं।

– आते-जाते लोगों को कर रहीं हैं जागरूक : –
सेविका रूबी कुमारी ना सिर्फ अपनी डयूटी के दौरान लोगों को कोविड-19 से बचाव की जानकारी दे रहीं हैं। बल्कि डयूटी के लिए घर से जाने एवं डयूटी के बाद घर आने के दौरान भी रास्ते में मिलने वाले लोगों खासकर महिलाओं को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देकर जागरूक कर रहीं हैं।

– जागरूकता का दिख रहा है असर : –
जागरूकता का गांव के लोगों में असर पड़ रहा है। बाहर निकलते वक्त लोग भीड़ लगाने से बच रहे हैं। लोगों ने मास्क पहनना शुरू कर दिया है। सैनिटाइजर का भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। सेविका रूबी कुमारी कहती हैं कि यह विपत्ति का समय है। इस वक्त लोगों को को बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभानी चाहिए। खासकर जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा है तब तक तो लोगों को निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए और इससे बचाव के लिए सतर्कता जारी रखना जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– हमेशा दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन करें।
– खुद के साथ दूसरों को भी जागरूक करें।
– लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

दिवाली और छठ के अवसर घर आने वाले लोग ले सकते हैं सुविधा का लाभ

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-जिले के सभी पीएचसी में परिवार नियोजन की सुविधा है उपलब्ध
– कोविड-19 से बचाव को लेकर हर मानकों का रखा जा रहा ख्याल
– लोगों को बचाव से संबंधित उपायों की भी दी जा रही जानकारी

लखीसराय, 09 नवंबर।
कोविड-19 को लेकर पीएचसी में होने वाले परिवार नियोजन ऑपरेशन (बंध्याकरण) और नसबंदी की सुविधा उपलब्ध है। हालाँकि, जनसंख्या स्थिरीकरण और लोगों की सुविधा के लिए पीएचसी में स्थाई और अस्थाई दोनों तरह की व्यवस्था की गई है। ताकि लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो और लोग अपनी सुविधा के अनुसार लाभ ले सकें। वहीं, दीपावली व छठ के अवसर पर बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले अप्रवासी मजदूर त्यौहार मनाने के लिए अपने गाँव आते हैं। ऐसे मजदूर भी इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। जिससे जनसंख्या स्थिरीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा और लोग भी आसानी से सुविधा का लाभ ले सकेंगे।

– अफवाहों से रहें दूर, परिवार नियोजन की सुविधा अपनाएँ :-
जिला मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने लोगों से अपील करते हुए कहा अफवाहों से दूर रहें और परिवार नियोजन को अपनाएँ। इसके लिए पीएचसी स्तर पर स्थाई और अस्थाई दोनों सुविधा उपलब्ध हैं। अगर इस दौरान किसी प्रकार का भ्रम या अफवाह मन में हो तो सीधा चिकित्सकों से संपर्क कर इसे दूर कर लें। तभी छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का सपना साकार होगा।

– त्यौहार के अवसर घर आने वाले अप्रवासी मजदूर भी ले सकते हैं लाभ :-
दिवाली एवं छठ के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले अप्रवासी मजदूरों का आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे लोगों को भी यह सुविधा लेनी चाहिए और छोटा परिवार, खुशहाल परिवार को बढ़ावा देना चाहिए।

– पीएचसी से लेकर ग्रामीण स्तर पर भी उपलब्ध हैं अस्थाई उपाय :-
अगर कोई महिला परिवार नियोजन के लिए अस्थाई उपाय को अपनाना चाहती है तो ऐसी महिला के लिए पीएचसी से लेकर ग्रामीण स्तर पर आशा के पास सुविधा उपलब्ध है। पीएचसी में जहाँ कॉपर-टी, अंतरा, छाया आदि की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, आशा के पास कंडोम समेत अन्य सुविधा उपलब्ध हैं ।

– कोविड-19 से बचाव को पूरी सुरक्षा के साथ लोगों को दी जा रही है सुविधा :-
परिवार नियोजन ऑपरेशन एवं नसबंदी कराने आने वालों लोगों का कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर बचाव से पूरी सुरक्षा के साथ सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही कोविड-19 से बचाव के लिए हर मानकों का पालन किया जा रहा है और आवश्यक एहतियात बरती जा रही है। इसके अलावा लोगों को बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ भी दी जा रही हैं । ताकि लोग पीएचसी परिसर से बाहर और अपने घरों में भी सुरक्षा से संबंधित मानकों का पालन करें।

– आशा द्वारा भी किया जा रहा है जागरूक :-
बंध्याकरण एवं नसबंदी अभियान को गति देने एवं सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता द्वारा भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान ऑपरेशन के अलावा अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की भी जानकारी दी जा रही है। जैसे कि, पीएचसी में उपलब्ध अंतरा, छाया, कंडोम, कॉपर-टी आदि की जानकारी देकर लोगों को सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही लोगों को छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का संदेश दिया जा रहा है।

इन बातों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।

अस्पतालों में आज मरीजों के लिए रहेगी विशेष व्यवस्था

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मतगणना के चलते मरीजों के इलाज में नहीं होगी परेशानी
आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य कर्मी हैं तैयार

भागलपुर, 9 नवंबर

आज जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के मतों की गिनती होगी. इस वजह से मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हो, इसे लेकर अस्पतालों में विशेष व्यवस्था की गई है. मायागंज अस्पताल के अधीक्षक ने सभी विभागों के अध्यक्ष को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा है. साथ ही ओपीडी में भी पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए कहा है.

मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने कहा कि मतगणना के दिन मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो इसे लेकर असपताल द्वारा खास व्यवस्था की गयी है. अस्पताल के ओपीडी में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को समय से तैनात रहने के लिए कहा गया है. किसी तरह की लापरवाही नहीं हो, इसका भी ध्यान रखने के लिए कहा गया है.

डॉक्टरों की लगाई गई ड्यूटी: अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल के सभी विभागों में अतिरिक्त डॉक्टरों की ड्यूटी लगा दी गई है. अतिरिक्त डॉक्टर रहने से मरीजों की संख्या अधिक रहने पर भी कोई परेशानी नहीं होगी. साथ में समय से सभी का इलाज हो सकेगा. सभी जांच केंद्रों पर भी स्वास्थ्य कर्मी तैनात रहेंगे.

एंबुलेंस चालकों को तैयार रहने को कहा गया: डॉक्टर भगत ने बताया कि एंबुलेंस चालकों को भी तैयार रहने को कहा गया है. जैसा कि वोटिंग के दिन देखने में आया था कि बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं चलने से लोगों को परेशानी हुई थी. इसे देखते हुए एंबुलेंस चालकों को तैयार रहने को कहा गया है. मरीज को बाहर से लाने की जरूरत पहले पर तत्काल एंबुलेंस भेजा जाएगा.

सदर अस्पताल में भी विशेष व्यवस्था: मतगणना के दिन मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इस वजह से सदर अस्पताल में भी मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्था की गई है. स्वास्थ्य कर्मियों को समय से आने के लिए कह दिया गया है. साथ ही किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था की गई है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें