ठंड शुरू होते ही हाइपरटेंशन के मरीज बढ़े, रहें सतर्क

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खानपान का रखें ध्यान, करें व्यायाम

अधिक तेल मसाले वाले भोजन से बचें

बांका, 9 नवंबर

तापमान में गिरावट के साथ ही ठंड ने दस्तक दे दी है. इस वजह से लोग बीमारियों की भी चपेट में आने लगे हैं. पिछले कुछ दिनों में हाइपरटेंशन के भी नए मरीज देखे गए हैं. ऐसे मौसम में हाइपरटेंशन से बचने के लिए सावधानी की जरूरत है. ऐसा मौसम में खान-पान का ध्यान रखने और व्यायाम करने की जरूरत है.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में रक्त की धमनियों में थक्का जमा हो जाता है. इससे रक्त का प्रभाव अवरुद्ध हो जाता है. इस वजह से ब्रेन हेमरेज तथा लकवा मारने की भी आशंका बढ़ जाती है. दरअसल, आजकल लोग शारीरिक श्रम काम करने लगे हैं. इस वजह से लो मोटापे के शिकार हो रहे हैं. इसके अलावा खानपान में भी परहेज नहीं कर रहे हैं. यही कारण है कि हाइपरटेंशन के मामले ऐसे मौसम में बढ़ रहे हैं.

सुबह तेज गति से 45 मिनट तक टहला करें: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया हाइपरटेंशन होने की बड़ी वजह में से एक है शारीरिक क्रिया कम होना. अगर शरीर एक्टिव रहे तो इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि आप सुबह 45 मिनट तक तेज गति से टहला करें. अगर सुबह समय नहीं मिले तो किसी भी वक्त समय निकालकर तेज गति से जरूर टहलने की कोशिश करें. इससे ज्यादा भी टहल सकते हैं. यह आपके लिए फायदेमंद रहेगा.

खाने में तेल मसाले का कम प्रयोग करें: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया एक तो शारीरिक क्रियाकलाप कम हो जाता है. ऊपर से लोग खाने-पीने में भी ध्यान नहीं देते हैं. इस वजह से भी लोग हाइपरटेंशन के शिकार हो रहे हैं. ऐसे मौसम में तेल मसाले युक्त भोजन से परहेज करें. मौसमी फलों और सलाद का अधिक से अधिक सेवन करें. रात में कम खाना खाएं. ऐसा करने से भी हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले से डॉ धीरेंद्र कुमार ने दी कोविड-19 को मात,काम पर लौटे

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-मरीजों को सेवा देने के दौरान हुए कोविड संक्रमित,
– लखीसराय पीएचसी में पीएचसी प्रभारी के रूप में हैं तैनात

लखीसराय, 07 नवंबर।
लखीसराय पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ धीरेंद्र कुमार ने कोविड-19 के दौर में भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी पूरा किया और कभी अपने कार्य से पीछे नहीं हटे। इतना ही नहीं जब लोग एक-दूसरे को छूने से भी परहेज कर रहे थे उस दौर में भी डॉ धीरेंद्र पीएचसी में बगैर किसी परवाह के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रहे थे। साथ हीं मरीज व चिकित्सकों के बीच बेहतर संबंध का संदेश भी देते रहे । हालाँकि, इस दौरान ही वह खुद भी संक्रमित हो गये। किन्तु, घबराए नहीं, बल्कि बुलंद हौसले और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर कोविड-19 को भी मात देने में सफल रहे।

– स्वस्थ होने के साथ ही दुगुनी ताकत के साथ पुनः अपने कार्य पर लौटे :-
डॉ धीरेंद्र कुमार संक्रमित होने के बाद आइसोलेट हो गए थे। उन्होंने जरूरी इलाज के साथ-साथ मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले से कोविड-19 को मात दी। स्वस्थ होने के बाद तुरंत पुनः अपने कार्य पर लौटे और फिर से दुगुनी ताकत के साथ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं।

– कोविड-19 से घबराए नहीं, डटकर करें सामना :-
डॉ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि कोविड-19 से डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि, डटकर इनसे सामना करना चाहिए। इसे मात देने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और धैर्य होना जरूरी है। इससे कोई भी व्यक्ति आवश्यक इलाज के साथ कोविड-19 को मात दे सकता है । उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे कोविड-19 संक्रमित होने की जानकारी मिली तो कुछ पल के लिए घबराया। किन्तु, फिर सोचा मैं ही घबरा जाऊँगा तो सामान्य लोगों का क्या होगा। इसी सोच ने मेरे अंदर एक नई ऊर्जा भर दी और हम इसी साहस से कोविड-19 को मात देने में सफल रहे।

– लक्षण दिखते हीं कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन :-
डॉ धीरेंद्र कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 का लक्षण दिखते हीं तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच करानी चाहिए। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गयी चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। दरअसल, समय पर इलाज शुरू होने से बहुत जल्द स्वस्थ होने में काफी सहयोग मिलता है। वहीं आसानी से कोविड-19 को मात दिया जा सकता है।

– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल, शारीरिक-दूरी का करें पालन :-
डॉ धीरेंद्र कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। साथ ही हमेशा दो गज की शारीरिक-दूरी का पालन करें और मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। जबतक वैक्सीन-दवा नहीं आ जाती है तबतक मास्क और दो गज की दूरी का पालन करना बेहद जरूरी है।

– पीएचसी प्रभारी के अलावा वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी का संभाल रहे प्रभार :-
डॉ धीरेंद्र कुमार लखीसराय के पीएचसी प्रभारी के अलावा सदर अस्पताल लखीसराय में हीं वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी का प्रभार संभाल रहे हैं । तमाम चुनौतियों के बाबजूद दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दे रहे हैं।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, कान छूने से बचें।
– सफर के दौरान हमेशा सैनिटाइजर पास में रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

युक्ति योजना कार्यक्रम से सुरक्षित गर्भपात को मिलेगा बल, मातृ-मृत्यु दर में आएगी कमी

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– गर्भपात की समस्या से बचाव को महिलाओं को किया जाएगा जागरूक
– स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जाएगा ऑनलाइन प्रशिक्षण
– मातृ – स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र जारी कर दिए निर्देश

लखीसराय, 07 नवंबर।
सरकार एवं राज्य स्वास्थ्य समिति मातृ- मृत्यु दर पर रोकथाम के लिए पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है। इसको लेकर तमाम कार्यक्रम किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में युक्ति योजना कार्यक्रम के तहत सुरक्षित गर्भपात को बढ़ावा देने एवं मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने की योजना है। इसको लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस सम्बन्ध में मातृ स्वास्थ्य की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सरिता कुमारी ने पत्र जारी कर जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को दिशा –निर्देश दिए हैं । इस पत्र में इस कार्यक्रम को लेकर आयोजित होने वाले एक दिवसीय प्रशिक्षण में संबंधित कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

– सभी कर्मी प्रशिक्षण में होंगे शामिल, हर हाल में सफल होगा प्रशिक्षण
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि जिले के सभी संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण में शामिल होने का निर्देश दिया गया है । उनके अनुसार प्रशिक्षण के सफल संचालन को आवश्यक पहल की जा रही है। हर हाल में प्रशिक्षण सफल होगा।

– जूम एप्लीकेशन के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण :-
यह प्रशिक्षण जूम एप्लीकेशन के माध्यम से 11 नवंबर को जिले के सभी संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों एवं पदाधिकारियों को दिया जाएगा। जिसमें सुरक्षित गर्भपात को लेकर विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की सफलता को लेकर जिला स्तर पर आवश्यक पहल शुरू कर दी गई है।

– सुरक्षित गर्भपात को मिलेगा बढ़ावा और असुरक्षित गर्भपात की समस्या होगी दूर :-
राज्य सरकार की ओर से सुरक्षित गर्भपात को बढ़ावा देने एवं असुरक्षित गर्भपात की समस्या को दूर करने के लिए युक्ति योजना कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। ताकि महिलाओं को गर्भपात के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। इस योजना के तहत सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नि:शुल्क सुरक्षित गर्भपात की व्यवस्था उपलब्ध कराई गयी है ।

– मातृ-मृत्यु दर में आएगी कमी, सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बल
इस योजना के तहत न सिर्फ सुरक्षित गर्भपात कराई जाएगी बल्कि मातृ-मृत्यु दर में भी कमी आएगी। जिससे सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अनावश्यक परेशानियों से नहीं जूझना पड़ेगा।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का नियमित और अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर पास में रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, कान को अनावश्यक छूने से परहेज करें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

इलाज नहीं करवा कर अपने साथ दूसरों को परेशान नहीं करें

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-समाज में जागरूकता फैलाने की है जरूरत
-3 दिन से अधिक समय तक बुखार रहने पर कोरोना जांच जरूर कराएं
– इलाज नहीं कराने से कोरोना का संक्रमण लोगों में बढ़ता चला जाएगा

भागलपुर, 7 नवंबर।
कोरोना की जांच नहीं करवाओगे तो अपने साथ मुझे भी ले डूबोगे क्या? 5 दिन से तुमको बुखार है फिर भी लापरवाही बरत रहे हो। अपना इलाज कराओ और खुद के साथ लोगों को भी चिंतित होने से बचाओ।

तिलकामांझी चौक पर स्थित कोरोना के स्थाई जांच शिविर के पास छात्र अमित, राहुल से यह कह रहा था। अमित से जब इसे लेकर बात की तो उसका कहना था कि राहुल पिछले 5 दिनों से बीमार है। हमलोग एक ही कमरे में रहते हैं। 2 दिनों से इसे जांच के लिए कह रहे थे, लेकिन बात नहीं मान रहा था। आखिरकार शुक्रवार को मैं खुद ही इसे जांच कराने के लिए ले आया। अब यहां पर भी वह जांच कराने से भाग रहा है। इसके इस व्यवहार से मुझे भी डर लगने लगा है। अगर उसे कोरोना होगा तो हमें भी हो जाएगा। हम लोग साथ रहते हैं और एक साथ रहने पर बहुत सारे नियमों का पालन नहीं कर पाते हैं। वहीं राहुल का कहना है कि मुझे कोरोना नहीं है। बस मौसम में बदलाव होने से मैं थोड़ा बीमार पड़ गया हूं। एक-दो दिनों में सभी कुछ ठीक हो जाएगा। हालांकि थोड़ी देर में राहुल की कोरोना जांच हुई और वह निगेटिव पाया गया। इसके बाद अमित के जान में जान आई और उसने राहत की सांस ली।

इस तरह की लापरवाही नहीं करें:
मायागंज अस्पताल के डॉ. राजकमल चौधरी कहते हैं कि इस तरह की समस्या काफी आम है। लोग जब बीमार पड़ते हैं तो वह अपने से ही इलाज करने लगते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बार-बार यह अपील की जा रही है कि अगर 3 दिन से अधिक बुखार हो जाए तो कोरोना जांच जरूर कराएं। जांच नहीं कराने से इसका संक्रमण अधिक से अधिक लोगों में फैल सकता है और कोरोना को खत्म करने की जो मुहिम है उसे झटका लग सकता है।

सामाजिक भेदभाव की वजह से भी लोग करते हैं परहेज:
डॉक्टर चौधरी बताते हैं कि दरअसल कोरोना हो जाने के बाद समाज में थोड़ा भेदभाव हो जाता है। इस वजह से लोग जांच कराने से कतराते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। जांच कराने पर अगर कोरोना की पुष्टि हो जाती है तो वह व्यक्ति खुद को अलग रखकर दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकता है। इसके अलावा उसका भी इलाज सही तरीके से हो जाएगा।

समाज में जागरूकता फैलाने की है जरूरत:
डॉक्टर चौधरी बताते हैं कि कोरोना के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। कोरोना मरीजों के प्रति जो लोगों के मन में भ्रम की स्थिति है, उसे दूर करने की जरूरत है। ऐसा करने से कोरोना मरीजों से लोग भेदभाव नहीं करेंगे। इसके बाद लोग खुद ही कोरोना की जांच कराने आ जाएंगे और इस तरह की समस्या नहीं आएगी।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

बदलते मौसम में आदतों में लाएं बदलाव, रहेंगे मानसिक रोग से दूर

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-अकेलापन से बचें, खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें
-लोग सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के हो रहे हैं शिकार

बांका, 7 नवंबर।
बदलते मौसम और कोरोना काल में अपने आदतों में बदलाव लाएं। खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें। ऐसा कर आप मानसिक रोग से दूर रहेंगे। दरअसल हाल के दिनों में अस्पताल के ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों में मानसिक रोगियों की संख्या पहले के मुकाबले अधिक देखी जा रही है। ऐसे में इसका उपाय करना बहुत जरूरी हो जाता है।
बदलते मौसम में लोगों की मनोदशा बदल जाती है-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बदलते मौसम में लोगों की मनोदशा बदल जाती है। उदास रहने लगते हैं। हर साल ऐसा देखा जाता है जिस वक्त मौसम में बदलाव आता है, उस दौरान इस तरह के मामले बढ़ने लगते हैं। दरअसल बदलते मौसम में लोगों के सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है।

सुबह टहला करें और शरीर में धूप लगाएं:
डॉ. चौधरी बताते हैं कि मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों को सुबह कम-से-कम 45 मिनट तक तेज गति से टहलना चाहिए। साथ ही धूप का भी सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में ताजगी आती और उदासीपन दूर होता है। अगर आपके घर में कोई मानसिक रोगी लगे तो उन्हें यह दो काम जरूर करवाएं।

मेडिटेशन करें,इससे एकाग्रता आती है :
डॉक्टर सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि मेडिटेशन करने से एकाग्रता आती है। लोगों में भटकाव नहीं आता है। भटकाव नहीं आने से उदासीपन खत्म होता है। ध्यान इधर-उधर भटकता नहीं है। इस वजह से मानसिक रोगियों के लिए मेडिटेशन बहुत फायदेमंद रहता है।

टीवी देखें और लोगों के साथ बातचीत करें:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि मानसिक रोग अकेलापन की वजह से भी होता है। इसलिए मानसिक रोगी टीवी देख कर अपने इस अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। साथ ही लोगों से बातचीत कर भी अपना मनोरंजन कर सकते हैं। इससे उनमें भटकाव नहीं आएगा और मानसिक परेशानी से बचे रहेंगे।

खानपान पर भी रखें ध्यान:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि सही खानपान हर बीमारी में महत्वपूर्ण होता है। अगर खान-पान सही नहीं हो तो भी लोगों में उदासीनता की समस्या आती है। इसलिए अपना एक रूटीन बनाकर भोजन करें। सुबह टहलने के बाद फल का सेवन करें। दोपहर में सादा भोजन को तरजीह दें और रात में कम भोजन करें। इससे शरीर से संबंधित कोई परेशानी नहीं रहेगी। शरीर से संबंधित परेशानी रहने पर भी लोग उदासीन रहने लगते हैं। इसलिए खानपान का अवश्य ध्यान रखें। साथ ही अपने भोजन में विटामिन लेने का भी प्रयास करें। हरी सब्जी दूध और हॉर्लिक्स का सेवन करें।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के सकारात्मक संदेश फैलाने को युवाओं ने सोशल मीडिया पर शुरू किया कैंपेन

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– सरकार के गाइलाइन और कोविड-19 से बचाव के संदेश लोगों से कर रहे साझा
– लोगों को अफवाहों से दूर रहने को कर रहे प्रेरित

लखीसराय, 06 नवंबर।
कोविड-19 की रोकथाम एवं लोगों को अफवाहों से दूर रखने के सरकार की मुहिम में सहयोग करने को अब युवा पीढ़ी भी आगे आ चुका है। युवा पीढ़ी के लोग सोशल मीडिया ( जैसे कि फेसबुक, व्हाट्स एप, ट्वीटर आदि ) पर सरकार के सहयोग के लिए कैंपेन कर रहे हैं। यह सोशल मीडिया के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति तक कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी पहुँचा रहे हैं। साथ हीं अफवाहों से दूर करने के लिए तरह-तरह के सकारात्मक संदेश भी पहुँचा रहे हैं । ताकि लोग कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन पर यकीन करें, न कि अफवाहों को सही मानें।

– सोशल मीडिया से लोगों तक पहुँचा रहें हैं सकारात्मक संदेश :-
सोशल मीडिया पर कोरोना को लेकर कुछ इस तरह के सन्देश देखने को मिल रहे हैं …‘‘मैं कोविड-19 के दौरान भेदभाव एवं तिरस्कार के खिलाफ हूँ। कोविड-19 के दौरान फैल रही किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारियों को स्वीकार नहीं करूँगा’’। यह सोच यदि आप की आवाज बन रही है तो समझिए आप महामारी के इस दौर में यूथ चैम्पियन बनने को तैयार हैं। आपकी यह आवाज काफी मायने रखती है। यह विचारों को प्रकट करने का एक ऐसा नजरिया है जो कोरोना काल में किसी भी तरह के भेदभाव या तिरस्कार झेल रहे व्यक्ति को राहत पहुंचा सकती है। कोविड-19 के दौर में जिस रफ्तार से संक्रमण का प्रसार हुआ है। उसी रफ्तार से कोरोना को लेकर भेदभाव एवं तिरस्कार के मामले में भी वृद्धि हुई है। इसके खिलाफ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भी (togetherAgainstCOVID19) के तहत मुहिम शुरू कर चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यूथ को इस मुहिम की महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए उत्साह और दृढ़ता के साथ तिरस्कार और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने संबंधी गाइडलाइन जारी की है।

-तिरस्कार एवं भेदभाव को समझना जरूरी : –
सूर्यगढ़ा निवासी जय माता दी मेडिको दुकान के दुकानदार निरंजन कुमार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि कोविड-19 के दौर में लोगों में फैले तिरस्कार व भेदभाव के खिलाफ जागरूकता फैलाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जारी निर्देशिका में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में तिरस्कार का मतलब होता है आपकी बीमारी के चलते कोई व्यक्ति समुदाय आपको नकारात्मक तरीके से देखता है। महामारी के दौर में इसका मतलब यह होता है कि किसी एक बीमारी से जुड़े लोगों को चिन्हित कर उनके साथ भेदभाव या अलग व्यवहार किया जाए। उनकी सामाजिक स्थिति और छवि को नुकसान पहुंचाया जाए। इस तरह का व्यवहार उन लोगों को जो खुद बीमारी से जूझ रहे हो या उनकी देखभाल करने वाले परिवार सदस्य, दोस्तों और समुदाय के लोगों को प्रभावित कर सकता है।

– एडवोकेसी के माध्यम से सोच में आएगा बदलाव :-
सूर्यगढ़ा निवासी युवक अमरेश कुमार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि एडवोकेसी का मतलब है किसी मुद्दे को पहचानना और बदलाव की ओर काम करना। जारी निर्देशिका में बताया गया है कि एडवोकेसी के जरिए हम समाज के कमजोर वर्ग की आवाज उठाने में मदद करते हैं। क्योंकि जिन विचारों और परंपराओं में हम बदलाव लाना चाहते हैं। उनका असर इन्हीं वर्गों पर सबसे ज्यादा होता है। एडवोकेसी इसी सामूहिक आवाज का प्रयोग अधिकारों के बचाव और सुरक्षा के लिए करती है। साथ ही अलग-अलग कार्यों और नई शुरुआत में समर्थन करती है। यह बदलाव व्यक्तिगत स्तर, स्थानीय स्तर (उदाहरण के लिए स्थानीय सरकार, पुलिस, धार्मिक नेताओं या योर स्कूल) एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी हो सकती है।

– 2 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर आप भी कर सकते हैं मदद:-
सूर्यगढ़ा निवासी युवक मानस कुमार ने लिखा कि 2 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर आप भी कोविड-19 के खिलाफ मुहिम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कोविड-19 से संबंधित सही जानकारी के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विश्व स्वास्थ संगठन, यूनिसेफ दस्तावेजों को ही फॉलो करें, इसमें आपका 2 मिनट से कम का समय जाएगा। 10 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर कोविड-19 से जुड़े तथ्यों पर विडियो, थैंक्यू कार्ड एवं मिथकों को उजागर करने वाले पोस्ट लिखकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट या टि्वटर हैंडल से सोशल मीडिया संदेशों और ग्राफिक्स को अपने फेसबुक, व्हाट्सएप, स्नैपचैट इंस्टाग्राम या किसी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा करें। उचित दूरी बनाकर रखते हुए कोरोना वारियर्स के साथ खींची गई अपनी सेल्फी को सोशल मीडिया पर साझा करें। अपने कोरोना योद्धा को वीडियो कॉल करें और स्क्रीनशॉट ले या उचित दूरी रखते हुए तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर साझा करें।

– मिथकों को उजागर करने वाले पोस्ट शेयर करें :-
जारी निर्देशिका में बताया गया है कि कोविड-19 से संबंधित सही जानकारी देने वाले और मिथकों को उजागर करने वाले पोस्ट साझा करें। भ्रामक जानकारी न फैलाएं। इससे समाज में तिरस्कार और भेदभाव को रोकने में सहायता होगी। इस तरह के पोस्ट का प्रिंट लेकर आप उन्हें अपने आसपास चिपका सकते हैं। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करें। तिरस्कार का क्या मतलब है, और यह समाज और लोगों के लिए कितना हानिकारक है। इससे जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करें। लोगों को भेदभाव के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित करें।

– गलत जानकारी फैलाने वालों को रोकें :-
महामारी के दौर में ज्यादातर लोग परेशान और बड़े हुए हैं और इस मुश्किल समय में लोग कई बार गलत और गैर-तथ्यात्मक जानकारी साझा कर जाते हैं। अक्सर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि सही जानकारी कहां से मिल सकती है। जारी निर्देशिका में यह बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति या आपका दोस्त गलत जानकारी फैला रहा है तो उनसे मिलकर या फिर इनबॉक्स में मैसेज कर उनसे संपर्क कर सही तथ्यों को बताएं। याद रखें आपका उद्देश्य उन्हें नीचा दिखाना नहीं बल्कि उनकी सोच बदलना है। उन्हें बताएं कि जो बातें या सुझाव उन्होंने शेयर किया है उसका स्रोत विश्वसनीय नहीं है। उन्हें किसी विश्वसनीय स्रोत के बारे में जानकारी दें। जहां से वह सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अगर कोई भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है तो क्या करें :-
जारी निर्देशिका में यह बताया गया है कि अगर कोई भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है तो उन्हें यह बताएं कि वायरस किसी को भी प्रभावित कर सकता है और इसका किसी खास समूह के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तथ्य उपलब्ध कराएं और शांत तरीके से बताएं कि अलग-अलग लोग किस तरह प्रभावित हैं । उन्हें बताएं कि किसी एक समूह या वर्ग को अलग कर या उन्हें वायरस के लिए जिम्मेदार ठहराने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। इससे हिंसा बढ़ सकती है और इससे लोग जरूरत होने पर भी इलाज के लिए सामने नहीं आएंगे। जिससे बीमारी और बढ़ सकती है। इस समय एक दूसरे का साथ देना और सभी का सहयोग करना एक दूसरे के प्रति दया और करुणा का भाव जरूरी है। भले ही हम डरे हुए हों। खुद को संयमित रखें भले ही आप निराश या गुस्से में हों ।

कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन–
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

जिले में ऑगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण का हुआ आयोजन

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– गर्भवती महिलाओं व बच्चों को दिया गया नियमित टीकाकरण

– कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन के साथ हुआ टीकाकरण

लखीसराय, 06 नवंबर, 2020
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर शुक्रवार को गर्भवती एवं बच्चों को लगने वाले नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं सहायिका के साथ टीकाकरण की गई। इस दौरान टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह दी गई और गर्भावस्था के दौरान खान – पान, रहन – सहन समेत अन्य आवश्यक जानकारी भी दी गई।

– जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत टीकाकरण का हुआ आयोजन : –
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी अंतर्गत ऑगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक सलाह दी गई।

– सुरक्षित प्रसव के लिए पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार जरूरी :-
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाएँ व उनके परिजनों को बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के लिए पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आहार जरूरी है। क्योंकि, स्वस्थ शरीर वाली माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है और सुरक्षित व सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सकता है।

– स्वच्छता पर दिया गया बल : –
टीकाकरण के दौरान स्वच्छता पर भी बल दिया गया। इसको लेकर गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत साफ – सफाई समेत आसपास के परिसर को साफ – सफाई का विशेष ख्याल रखने को कहा गया। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं हों।

– सप्ताह में दो दिन लगाऐ जाते हैं टीके : –
नियमित टीकाकरण का सप्ताह में दो दिन आँगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजन किया जाता है। प्रत्येक सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

– कोविड-19 के गाइडलाइन का रखा गया ख्याल : –
टीकाकरण के दौरान कोविड-19 के हर मानकों का पालन किया गया। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो सकें। साथ टीकाकरण के लिए केंद्र पर आए गर्भवती एवं उनके परिजनों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी गई और कोविड-19 से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।

– संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक :-
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।

– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी : –
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती है और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– हमेशा शारीरिक – दूरी का पालन करें।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें।
– लगातार हाथों की साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से धोएं।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– किसी से भी बातचीत दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

सदर अस्पताल के इमरजेंसी में कुपोषित बच्चों की हो रही देखभाल

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पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन की जल्द होगी व्यवस्था

बांका, 6 नवंबर।
बांका के सदर अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र बंद हो जाने के बाद कुपोषित बच्चों की देखभाल अस्पताल के इमरजेंसी में हो रही है। दरअसल, पोषण पुनर्वास केंद्र चलाने वाली एजेंसी का कार्यकाल खत्म हो गया है। कोरोना और चुनाव के कारण नए सिरे से उसकी व्यवस्था अभी नहीं हो पाई है।
इमरजेंसी में कुपोषित बच्चों के इलाज की व्यवस्था-
सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में आने वाले बच्चों के इलाज़ और देखभाल की व्यवस्था अभी इमरजेंसी में की गई है। चुनाव खत्म होने के बाद नए सिरे से पोषण पुनर्वास केंद्र की व्यवस्था की जाएगी।

कुपोषित बच्चों की होती है देखभाल:
पोषण पुनर्वास केंद्र में आने वाले बच्चों की 21 दिनों तक देखभाल होती है। इस दौरान बच्चे को पोषण के प्रति जागरूक किया जाता है। सही पोषण क्या है, इसके बारे में बताया जाता है। बच्चे के साथ उसकी मां को भी रहने की छूट दी जाती है। 21 दिन में जब बच्चा स्वस्थ हो जाता है तो वहां से जाने की इजाजत दी जाती। अभी यह व्यवस्था सदर अस्पताल के इमरजेंसी में की गई है।

कुपोषित बच्चों को ढूंढने में आईसीडीएस करता है मदद: आईसीडीएस के कर्मी कुपोषित बच्चों को चिन्हित करते हैं। सेविका -सहायिका घर-घर घूमकर कुपोषित बच्चों की पहचान करती हैं। पहचान हो जाने के बाद उसे पोषण पुनर्वास केंद्र भेज दिया जाता है। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों में से भी कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है।

बच्चों के सही पोषण का रखें ख्याल:
सही पोषण नहीं मिलने से बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। इससे बचने के लिए परिजन द्वारा बच्चे की विशेष देखभाल की जरूरत है। बच्चा जब 6 महीने का हो जाए तो सिर्फ स्तनपान से उसका पोषण पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए उसे खिचड़ी, खीर जैसे पूरक आहार देना शुरू करें। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता चला जाए उसकी जरूरत के मुताबिक उसके भोजन का ध्यान रखें। एक साल के बाद उसे पर्याप्त मात्रा में दूध और हॉर्लिक्स देना शुरू करें। इससे बच्चा कुपोषित नहीं होगा।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना से बचाव के उपाय को आदतों में करें शामिल

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सर्दी के मौसम में भारी पड़ सकती है लापरवाही
सतर्कता नहीं बरतने पर आ सकते हैं कोरोना की चपेट में

बांका, 6 नवंबर

सर्दी का मौसम शुरू हो गया है. इस कारण कोरोना के जो मामले घटने लगे थे, वह भी अब धीरे-धीरे धीरे बढ़ने की संभावना हैं. ऐसे में हमें सतर्क हो जाने की जरूरत है. थोड़ी सी लापरवाही हमें कोरोना का शिकार बना सकता है. इसके लिए हमें कोरोना से बचाव के उपायों को अपनी आदतों में शुमार करना पड़ेगा.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना के मामले में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. कभी कम होते जा रहे हैं तो फिर बढ़ भी जा रहे हैं. दरअसल, जब मामले कम होने लगते हैं तो लोग थोड़े लापरवाह हो जाते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. इसी का नतीजा होता है कि फिर से मामले बढ़ने लगते हैं. कोरोना से बचाव को लेकर सरकार की गाइडलाइन का पालन करें.

मास्क लगाना नहीं भूलें: डॉ चौधरी कहते हैं कि कोरोना के संक्रमण का खतरा घर से बाहर निकलने पर ज्यादा रहता है, इसलिए घर से बाहर जब भी निकले मास्क लगाना नहीं भूलें. घर में भी एक साथ ज्यादा सदस्यों के साथ बैठे तो मास्क लगाना नहीं भूलें. इससे आपका तो बचाव होगा ही. आपके साथ वाले जान-पहचान के लोग भी कोरोना से बचे रहेंगे.

बाहर से आने पर हाथ को साबुन से धो लें और सैनिटाइज भी करें: बाहर से घर वापस आने पर हाथ को कम से कम 20 सेकंड तक जरूर साबुन से धोएं. हाथ धोने के बाद उसे सैनिटाइज भी कर लें. बाहर रहने के दौरान जो भी वायरस आया होगा, वह इसके बाद निकल जाएगा और कोरोना का खतरा भी कम हो जाएगा.

शारीरिक दूरी का करें पालन: घर से बाहर रहने के दौरान अनिवार्य तौर पर शारीरिक दूरी का पालन करें. कोरोना से बचाव का सबसे बड़ा हथियार शारीरिक दूरी है. डॉ चौधरी ने बताया किसी भी व्यक्ति की छींक या फिर खांसी के ड्रॉपलेट्स अधिकतम 2 मीटर तक ही जा सकता है. अगर आप 2 मीटर शारीरिक दूरी का पालन करेंगे तो दूसरे से संक्रमित होने से बच सकते हैं.

हाथ को मुंह, नाक और आंख पर ले जाने से बचें: जब आप घर से बाहर निकलते हैं तो इस दौरान हाथ से मुंह, नाक और आंख को छूने से बचें: इसी के जरिए कोरोना का वायरस शरीर के अंदर प्रवेश करता है. यह नियम घर पर भी लागू रखें.

कोरोना से बचाव के लिए इन उपायों को आदतों में करें शामिल
:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना काल में दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं सेविका संजू देवी

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बच्चों की देखभाल के साथ गांव के लोगों को कोरोना के प्रति भी कर रही जागरूक

चांदन प्रखंड के बेलवा नीचा टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 116 में है कार्यरत

बांका, 5 नवंबर
आंगनबाड़ी सेविका का काम पहले से ही चुनौतीपूर्ण है. छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना और उनमें शिक्षा की अलख जगाना कोई आसान काम नहीं है. कोरोना ने तो इस चुनौती को और बढ़ा दी है, लेकिन इस काम को बहुत जिम्मेदारी से कर रही है चांदन प्रखंड के भेलवा नीचा टोला गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 116 की सेविका संजू देवी. संजू देवी कोरोना काल में दोहरी चुनौती को मात दे रही है.
जागरूकता की दोहरी जिम्मेदारी कर रही पूरी: कोरोना संक्रमण को लेकर सेविका संजू देवी को घर- घर जाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी मिली है. सेविका संजू देवी सुबह से ही अपने काम में जुट जाती हैं. वह घर- घर जाकर गांव के लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करती हैं. कोरोना से बचाव के लिए लोगों को मास्क पहनने और घरों से कम निकलने की सलाह देती हैं. लोगों को समझाती हैं कि बाहर से घर आने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें. वह कहती है लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करने एवं बाजार या सब्जी मंडी में एक- दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह देती हैं.

जागरूकता का दिख रहा है असर: सेविका संजू देवी कहती हैं कि जागरूकता का गांव के लोगों में असर पड़ रहा है. बाहर निकलते वक्त लोग भीड़ लगाने से बच रहे हैं. लोग मास्क लगाकर ही बाहर निकलते हैं. सैनिटाइजर का भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो लापरवाही कर रहे हैं, लेकिन वह भी जल्द ही समझ जाएंगे. कोरोना का अतिरिक्त काम मिलने के बारे में वह कहती हैं कि यह विपत्ति का समय है. इस वक्त लोगों को बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभानी चाहिए. खासकर जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा है तब तक तो लोगों को निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए.

40 बच्चे हैं आंगनबाड़ी केंद्र में: भेलवा नीचा टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में 40 बच्चे हैं. इनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी संजू देवी उठा रही हैं. साथ ही बच्चों को प्राथमिक तौर पर शिक्षित करने का भी काम कर रही हैं. बच्चों के पोषण से लेकर हर तरह की जिम्मेदारी को वह बखूबी निभा रही हैं. इस काम में सहायिका भी उनका साथ दे रही हैं. संजू देवी 2005 से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 116 में अपनी सेवा दे रही हैं. वह बताती हैं कि अब तक सैकड़ों बच्चे यहां से शिक्षित होकर निकल चुके हैं. सारे बच्चे उनका आदर करते हैं. साथ में गांव के लोग भी उनके कार्य से काफी संतुष्ट हैं.

परिवार का भी मिल रहा सहयोग: सेविका संजू देवी कहती हैं कि अगर परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो वह अपना काम इतनी मजबूती से नहीं कर पाती. बच्चे तो पढ़ते हैं लेकिन घर पर पति मेरे काम में सहयोग करते हैं. इसी का परिणाम है कि मैं अपना काम बेहतर तरीके से कर पा रही हूं. दरअसल, फील्ड में काम करते वक्त मुझे घर के बारे में बहुत ज्यादा चिंता नहीं रहती है. यही कारण है कि वह अपने काम को सही तरीके से अंजाम दे पा रही है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें