सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाएँ पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें

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– गर्भावस्था के दौरान कोई भी परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से कराएं जाँच
– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, व्यक्तिगत साफ-सफाई का रखें ख्याल

लखीसराय, 05 नवंबर।
गर्भधारण के लिए महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सकता है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है।

स्वस्थ माँ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को दे सकती हैं बढ़ावा :-
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव तभी संभव है जब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ रहेंगी। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ महिलाएँ स्वस्थ रहती हैं बल्कि गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ और मजबूत होता है।

गर्भधारण के पूर्व शारीरिक और मानसिक रूप से रहें स्वस्थ :-
अगर कोई महिला गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो उन्हें तीन-चार माह पूर्व से योजना बनानी चाहिए। सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहिए। ताकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं हो।

गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :-
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व शिशु होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं हो।

– गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 से बचाव के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी :-
इस कोविड-19 के दौर में इससे बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को खासकर व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए। साथ ही मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करना चाहिए।

– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :-
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच सुविधा की व्यवस्था की गई है । जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।

– गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :-
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन और कैल्शियमयुक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

लखीसराय में एएनएम को ई-औषधि मोबाइल एप का दिया गया प्रशिक्षण

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– लखीसराय पीएचसी में केयर इंडिया द्वारा दिया गया प्रशिक्षण
– दवाई रखरखाव की व्यवस्था होगी सुदृढ़
लखीसराय, 05 नवंबर।
जिले के लखीसराय सदर पीएचसी में गुरुवार को एएनएम को ई-औषधि मोबाइल एप का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण केयर इंडिया के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण की अध्यक्षता पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ धीरेंद्र कुमार ने की। प्रशिक्षण में मौजूद सभी एएनएम को ई-औषधि मोबाइल एप की विस्तृत जानकारी दी गई। एप के संचालन की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण से दवाई रखरखाव की व्यवस्था पहले की तरह बेहतर और सुदृढ़ होगी। साथ ही तकनीक व्यवस्था के साथ दवाई का रिकार्ड रखने में सहयोग होगा।

ससमय दवा की उपलब्धता होगी सुनिश्चित :-
लखीसराय सदर पीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार द्वारा यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण से दवा की डिमांड आसानी के साथ पूरी की जाएगी। साथ ही दवाई के प्रकार, रखरखाव, एक्सपाइरी दवा की जानकारी समेत अन्य रिकार्ड रखने में एएनएम को सहयोग खासकर तकनीकी मदद मिलेगी ।

परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक करने पर दिया गया बल :-
स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए लोगों को परिवार नियोजन के स्थाई साधनों(बंध्याकरण तथा नसबंदी) के लिए जागरूक करने पर भी बल दिया गया। साथ ही अस्थाई परिवार नियोजन के लिए भी लोगों पीएचसी में उपलब्ध सुविधा की जानकारी देने की बात कही गयी। जिसमें कहा गया है कि लोगों को जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए अस्थाई तरीके की भी जानकारी दें। जैसे कि उन्हें बताएँ कि अगर कोई दंपत्ति ऑपरेशन कराने में सक्षम नहीं हैं तो ऐसे दंपत्तियों के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर कई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गयी है। जिसमें कंडोम, अंतरा, छाया, कॉपर – टी अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का उपयोग कर अस्थाई तरीके को अपना सकते हैं।

कोविड-19 जाँच रिपोर्ट ससमय करें जमा :-
प्रशिक्षण में मौजूद सभी एएनएम को निर्देश दिया गया है कि कोविड-19 जाँच कर ससमय पीएचसी मुख्यालय को रिपोर्ट जमा करें। साथ ही नियमित टीकाकरण काअच्छादन पूर्ण करने, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना संबंधी प्रपत्र एवं अन्यान्य विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मातृ एवं शिशु मृत्यु की हुई समीक्षा :-
प्रशिक्षण के दौरान मातृ एवं शिशु मृत्यु विषय पर भी विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने के लिए नोटिस जारी कर मेडिकल टीम तैयार किया गया। जो समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

इस मौके पर बीएम विनीत कुमार, जयकिशन रजक, नुसरत प्रवीण समेत पीएचसी के सभी एएनएम मौजूद थे।

इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– हमेशा दो गज की शारीरिक-दूरी का पालन करें और दूसरों को भी जागरूक करें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर पास रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।
– नाक, ऑख और मुँह को अनावश्यक नहीं छुएँ।

अभी का मौसम मच्छरों के लिए है अनुकूल, डेंगू को लेकर रहें सतर्क

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सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 6 बेड का अलग से है वार्ड
घर के आसपास नहीं होने दें पानी का जमाव, डेंगू से होगा बचाव

बांका, 5 नवंबर

तापमान में गिरावट का दौर जारी है. हल्की-हल्की ठंड लगनी भी शुरू हो गई है. अभी का मौसम मच्छरों के अनुकूल हो गया है. इस वजह से मच्छरजनित बीमारियों का भी खतरा लोगों में बढ़ गया है. इस तरह के मौसम में डेंगू होने का खतरा अधिक रहता है. इसलिए तब तक सतर्क रहें.
सदर अस्पताल के डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा डेंगू को लेकर अब मौसम अनुकूल होता जा रहा है. तापमान गिरकर 30 के करीब पहुंच गया है. अभी के मौसम में ना गर्मी ज्यादा है और ना ही सर्दी. ऐसे मौसम में डेंगू के मच्छर ज्यादा पनपते हैं. ऐसा मौसम डेंगू के लिए अनुकूल माना जाता है. लोग डेंगू के प्रति सचेत रहें. घर के आसपास पानी का जमाव नहीं होने दें. इससे मच्छर नहीं पनपेगा और आपका डेंगू से बचाव होगा. इसके बावजूद भी अगर आप डेंगू का शिकार हो ही गए तो सदर अस्पताल आ जाइए. यहां पर इलाज की समुचित व्यवस्था है.

सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 6 बेड का अलग से है वार्ड
सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया स्वास्थ विभाग डेंगू को लेकर 25 जून से ही अलर्ट है. इसे लेकर सदर अस्पताल में अलग से 6 बेड का वार्ड भी बनाया गया है. डेंगू से पीड़ित मरीजों का वहां पर बेहतर इलाज की व्यवस्था है. यहां पर 6 बेड का अलग से डेंगू मरीजों के लिए वार्ड चल रहा है. जहां पर डेंगू मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

अभी के मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि हमलोग काफी पहले से डेंगू को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं. जब बारिश का मौसम समाप्त होता है और सर्दी शुरू होने वाली रहती है उस दौरान डेंगू के ज्यादा मामले सामने आते हैं. अभी से लेकर नवंबर महीने तक लोगों में डेंगू होने की आशंका अधिक रहती है. डॉ. चौधरी ने कहा अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है. डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई ले सकते हैं. बिना चिकित्सक की सलाह से दवा लेने पर शरीर से प्लेटलेट्स अचानक कम हो सकते हैं. सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें, बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है.

मच्छरदानी का करें इस्तेमाल: डॉ. चौधरी ने कहा कि घरेलू स्तर पर सावधानी बरतने से भी डेंगू को पांव पसारने से रोका जा सकता है. इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर के आसपास पानी को जमने नहीं दें. रात में सोते समय मच्छदानी का प्रयोग करें. डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, इसलिए दिन में विशेष तौर पर सतर्क रहें. घर में कूलर के पानी को बार-बार बदलते रहें. साथ ही घर के आसपास कोई ऐसा सामान हो, जिसमें पानी जमा हो जाता है तो उसे तत्काल हटा दें.

कैसे और कब होता है डेंगू: डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं. ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं. डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जून-जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है. इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

चिरंजीत शर्मा को अंतर्राष्ट्रीय चेबर्स ऑफ कॉमर्स में अहम पद

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नईदिल्ली-

देश के जाने-माने औधोगिक सलाहकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक बार फिर अन्तर्राष्ट्रीय चेम्बर्स आफ कामर्स ने तेजी से बढ़ते हुए प्रोफेशनल के रूप में मनोनीत किया है।
चिरंजीत शर्मा बहुत ही उम्दा और बेहतरीन कार्य करने के लिए सलाहकार समूह में जाने जाते हैं, वे हर विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहते हैं और विचलित नहीं होते।
जिस तरह से वे हर केस को एक नयी उड़ान के साथ लेते हैं जिससे लगता है अभी उन्हें ऊंची मंजिल को पाने की ललक है।
पेशे से एडवोकेट चिरंजीत शर्मा का मानना है हर केस में छोटे छोटे पहलुओं पर विचार करना चाहिए और हर केस को इतनी शिद्दत से समझना चाहिए कि उसके लिए हर शब्द एक नया अध्याय लिखें और आपकी शब्दावली इतनी आसान होनी चाहिए जिसे हर व्यक्ति को समझने में आसानी हो।
एक्सीलेंट चेम्बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के निदेशक हरिओम शर्मा ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सर्वश्रेष्ठ है और आप विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकते हैं।
ईसीसीआई के प्रेसिडेंट अनूप मित्तल ने चिरंजीत शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से चिरंजीत शर्मा अपने कामों को अंजाम देते हैं इससे इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। ईसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट के रूप में भी इनका मार्गदर्शन मिल रहा है। हम इनके आगे के कार्यों की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
शिक्षिका धारना शर्मा ने चिरंजीत शर्मा को नए जिम्मेवारी पर बधाई देते हुए कहा कि इनकी विशेषता है कि कोई भी कार्य को बड़े ही लगन से करते हैं और जब तक कार्य पूरे नहीं होते उसके हर पहलू पर खास नजर रखते हैं जिससे इन्हें कार्यों को पूरा करने में सफलता हासिल होती है।

कोविड-19 के दौर में मानसिक तनाव से बचें ,सकारात्मक सोच करेगी बचाव

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– नियमित करें व्यायाम, अफवाहों से रहें दूर

लखीसराय, 04नवंबर।
इस कोरोना काल में लोगों की कई तरह की परेशानियाँ बढ़ गई हैं। ऐसे में लोग मानसिक तनाव से ग्रसित हो रहे हैं। हमें इस परिस्थिति में विशेष घबराने की जरूरत नहीं है। आप कुछ आसान उपाय का उपयोग कर इन तनाव से बच सकते हैं।

दिलचस्पी कार्यों में लें रूचि, तनाव से रहेंगे दूर :-
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि लोगों को इस कोरोना काल में अपने कार्यों में दिलचस्पी लेनी चाहिए। काम में गजब की ताकत होती है जो हमें खुशी के एहसास के साथ अपने उदेश्यों का बोध कराता है। इसलिए खुद को काम में व्यस्त रखें। हाँ इस बात का जरूर ध्यान रखें कि काम से तनाव उत्पन्न नहीं हो।

– सकारात्मक सोच के साथ दिन की करें शुरुआत :-
मानसिक तनाव का मुख्य कारण होता है हर समय किसी ना किसी काम को लेकर तनाव में रहना, जो धीरे-धीरे हमें मानसिक तनाव से ग्रसित कर देते हैं। ऐसे में हमें सुबह में किसी भी कार्य की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करनी चाहिए। क्योंकि कहा जाता है कि आप अपनी सोच जैसी सोच रखेंगे आप वैसा ही हो जाएंगे।

– नियमित रूप से करें व्यायाम :-
मानसिक तनाव से बचाव के लिए नियमित रूप से योग करें। योग हमारे शरीर को ऊर्जा के साथ-साथ नई सोच भी उपलब्ध कराती है। इसलिए योग करने से मानसिक तनाव से दूर हो सकते और पूरी तरह फिट रह सकते हैं। क्योंकि देखा जाता शारीरिक कमी के कारण भी लोगों में चिड़चिड़ापन आ जाता है।

– अफवाहों से रहें दूर :-
अक्सर देखा जाता है कि जितनी तेजी से कोई सच्ची घटना नहीं फैल पाती , उससे कई गुणा अधिक तेजी के साथ अफवाह फैल जाती है। जो लोग को परेशान कर देती है और लोग तनावग्रस्त हो जाते । इसलिए हमें अफवाहों से भी बचना बेहद जरूरी है।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– हमेशा दो गज की शारीरिक-दूरी का पालन करें और दूसरों को भी जागरूक करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– घर से निकलने वक्त निश्चित रूप से मास्क का उपयोग करें और सैनिटाइजर पास रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक और ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।

कोरोना काल में कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत: सीएस

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– कमजोर नवजात की पहचान सबसे अहम कड़ी

– चिन्हित कमजोर नवजातों को मिल रही बेहतर देखभाल

जमुई, 4 नवंबर

कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस लिहाज से कोरोना काल में मां की चुनौतियां और बढ़ गयी है. बेहतर साफ-सफाई एवं देखभाल के जरिए कोरोना संक्रमण काल में भी कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं. यह बातें जमुई के सिविल सर्जन डॉ. विजेंद्र सत्यार्थी ने बुधवार को सदर अस्पताल में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा कोविड-19 के दौरान कमजोर नवजात देखभाल पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में कही.

सिविल सर्जन डॉ. सत्यार्थी ने कहा कि कमजोर बच्चे की पहचान सबसे अहम है. अगर आप इस में सफल हो जाते हैं तो उसे स्वस्थ बनाना बड़ी बात नहीं है. ऐसा देखा गया है कि कमजोर नवजात में तापमान की कमी की समस्या रहती है. इससे निजात पाने में कंगारू मदर केयर रामबाण साबित हो रहा है. कंगारू मदर केयर के जरिए माँ या घर का कोई भी व्यक्ति नवजात को अपने सीने से चिपकाकर उन्हें गर्मी देते हैं। यह प्रक्रिया तब तक करने की सलाह दी जाती है जब तक बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम न हो जाए। इसके साथ-साथ सदर अस्पताल में रेडिएंट वार्मर की भी व्यवस्था है. बच्चा अत्यधिक कमजोर है तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है, जहां पर उसका उचित इलाज किया जाता है.

मां संक्रमित भी हो जाए तो स्तनपान कराना नहीं भूलें:

डॉक्टर सत्यार्थी ने कहा कि अगर मां कोरोना संक्रमित भी हो जाए तो बच्चे को स्तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिए. हां, सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. जैसे कि बच्चे को छूने से पहले हाथ को साफ कर लेना चाहिए. दिन में एक बार स्तन की भी सफाई जरूर कर लेनी चाहिए. इसके अलावा जब बच्चा पास में हो तो मास्क जरूर पहनना चाहिए. इन सावधानियों के साथ हम कोरोना काल में भी कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.

कार्यशाला के दौरान सेंटर फ़ॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के अपर राज्य प्रबंधक रंजीत कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में स्वाथ्य कर्मियों की तरह मीडिया कर्मियों ने भी अपना पूरा योगदान दिया है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफ़लता में मीडिया की हमेशा से ही भूमिका रही है एवं समुदाय के आखिरी व्यक्ति को जागरूक करने में मीडिया की सक्रियता को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा जागरूक: कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि कोरोना काल में कमजोर नवजात की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका की मदद से गांव में जाकर लोगों को कमजोर नवजात की देखभाल से संबंधित उपाय बताए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमजोर नवजात पैदा नहीं हो इसे लेकर गर्भावस्था की शुरुआत से ही देखभाल की जरूरत है.

कमजोर नवजात की पहचान के लिए इक्विपमेंट होना जरूरी: केयर इंडिया के डीटीएल संजय कुमार सिंह ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात कमजोर नवजात की पहचान है और इसके लिए जरूरी उपकरण होना जरूरी है. आमतौर पर सभी सदर अस्पताल में इसे लेकर डिजिटल मशीन उपलब्ध है. डिजिटल मशीन नहीं रहने से कमजोर बच्चे की पहचान में परेशानी होती है. अगर 50 ग्राम भी बच्चे का वजन कम है तो इसकी पहचान डिजिटल मशीन से ही की जा सकती है, जो मैन्युअल मशीन में छूट जाती है। उन्होंने कहा कि अगर एक बार बच्चे की पहचान हो गई तो फिर उसे स्वस्थ करना आसान हो जाता है.

कमजोर बच्चे की कैसे करें पहचान:

कमजोर नवजात की पहचान मुख्यतः 3 तरीके से होती है. इसमें पहला तरीका है उसका वजन 2000 ग्राम या इससे कम हो. दूसरा तरीका है कि बच्चा स्तनपान करने में सक्षम नहीं हो और तीसरा तरीका है कि बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो गया हो. इन पैमानों पर नवजात को जन्म के बाद परखने की जरूरत है और अगर बच्चा कमजोर पाया जाता है तो उसकी देखभाल शुरू कर देने की जरूरत है.

जन्म से पहले जन्म लेने वाले नवजातों को मौत का अधिक ख़तरा:

कार्यशाला के दौरान बताया गया कि नवजात शिशुओं में होने वाली मौतों में 35% बच्चे की मौत समय से पहले जन्म के कारण होती है. वहीं 32% बच्चे की मौत निमोनिया,सेप्सिस एवं डायरिया जैसी बीमारी से होती है.जबकि 19% मौतें बर्थ एसफिक्सिया के कारण होती है।

कमजोर नवजात को 30 दिनों तक विशेष देखभाल की जाती है:

कमजोर नवजात की बेहतर देखभाल के लिए कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसमें कमजोर नवजातों को 30 दिनों तक फॉलो-अप किया जाता है। इसके लिए फैसिलिटी स्तर से एनएनएम या डॉक्टर आशा एवं परिवार का 9 बार फॉलो-अप करती हैं। कमजोर नवजात के पहले 7 दिन तक अल्टरनेट डे पर आशा एवं परिवार का फॉलोअप किया जाता है। आठवां कॉल 14 वें दिन एवं 9 वां कॉल 30 वें दिन कर परिवार से कमजोर नवजात का हाल पूछा जाता है।

काउंसलिंग के वक्त दिया जाता है एक पासपोर्ट: जब कमजोर नवजात को लेकर परिजन की काउंसलिंग की जाती है तो उस वक्त उन्हें एक पासपोर्ट दिया जाता है, जिसमें बच्चे के लिए जरूरी अतिरिक्त देखभाल एवं खतरे के संकेत लिखे होते हैं।

कार्यक्रम में मुंगेर प्रमंडल के कार्यक्रम समन्वयक श्याम त्रिपुरारी, शिव शंकर भी मौजूद थे

दो गज की दूरी मास्क है जरूरी ,मास्क का करें हमेशा इस्तेमाल

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मास्क का सही तरीके से करें उपयोग ,नहीं तो आ सकते हैं संक्रमण की चपेट में

लखीसराय : 03 नवंबर :/ हम सब इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं की जब तक कोविड-19 की कोई दवा नहीं तब तक मास्क ही है इस संक्रमण से बचने का सबसे कारगर रास्ता। लेकिन मास्क को सही तरीके से इस्तेमाल करने की भी जरूरत है. सही ढंग से मास्क न पहनने का कोई मतलब नहीं रह जाता है. जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया अभी तक कोविड 19 संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं आई है। मास्क इस्तेमाल और उचित शारीरक दूरी का पालन करने से ही हम कोरोना से बच सकते हैं इस बात का आभास सभी लोगों को हो गया है. किन्तु सही तरीके से मास्क नहीं पहनने से लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं इसलिए लोगों को सही तरीके से मास्क कैसे पहनना चाहिए, यह बताना जरूरी है. जिससे लोग संक्रमण से बच सकें।

गंदा मास्क नहीं पहने:

सबसे पहले तो मास्क को साफ सुथरा रखना जरूरी है. गंदा मास्क पहनने से आपका बचाव नहीं होगा. इस बात का ध्यान रखें कि एक निश्चित समय के बाद मास्क को साफ करना जरूरी होता है. इसके लिए आवश्यक है कि आप अपने पास एक से अधिक मास्क रखें.

गीला होने पर मास्क को तत्काल बदलें:
डॉ राय ने बताया कि गीला होने पर मास्क मुंह से चिपक जाता है. ऐसे में बाहर से पड़ने वाली गंदगी मास्क के अंदर जाने का खतरा रहता है. इसलिए गीला मास्क नहीं पहने. गीला होने पर मास्क को तुरंत बदल लें.

एक दूसरे के साथ शेयर नहीं करें:
निहायत ही निजी तौर पर इस्तेमाल होने वाला वस्तु है. इसका लेन-देन नहीं करें. आप अपना मास्क दूसरे को नहीं दें और दूसरे का मास्क आप नहीं लगाएं. ऐसा करने से एक दूसरे की गंदगी आ- जा सकती हैं. इससे संक्रमण का भी खतरा हो सकता है.

सर्जिकल मास्क को 8 घंटे बाद के बाद बदल ले:
सर्जिकल मास्क का 8 घंटे के इस्तेमाल के बाद बदल लेना जरूरी होता है. इसके बाद उसमें गंदगी को रोकने की क्षमता नहीं रह जाती है. इसकी जगह सूती मास्क ज्यादा उपयोगी रहता है। वह बार-बार साफ कर उपयोग में लाया जा हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

अच्छे पोषण से दिमागी बुखार को मात

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-बेहतर पोषण दिमागी बुखार से बचाव में सहायक

– दिमागी बुखार से बचाव के लिए दोनों टीके जरूरी

लखीसराय / 3 नवम्बर : पूरी तरह से स्वस्थ्य बच्चा बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। कुपोषण सिर्फ शरीर को कमजोर ही नहीं करता बल्कि अन्य बीमारियों से होने वाले प्रभावों में भी वृद्धि करता है. बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार ऐसे तो मच्छर द्वारा काटने से होता है लेकिन कुपोषित बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार एक स्वस्थ बच्चे में होने वाले दिमागी बुखार की तुलना में अधिक गंभीर एवं जानलेवा साबित हो सकता है.

बेहतर पोषण कई रोगों से बचाव का रास्ता: बच्चों को जन्म से ही बेहतर पोषण की आवश्यकता होती है. बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध एवं अगले छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध बच्चे को इस उम्र में होने वाली बहुत सी बीमारियों जैसे डायरिया, निमोनिया, ज्वर एवं अन्य घातक रोगों से बचाव करता है. छह माह तक माँ का दूध एवं इसके बाद मसला हुआ अनुपूरक आहार के साथ 2 साल तक नियमित स्तनपान बच्चों को कुपोषण से दूर रखता है. मच्छरों से फैलने वाले कई रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं दिमागी बुखार जैसे घातक एवं गंभीर रोगों से होने वाले प्रभावों में बच्चों के बेहतर पोषण के कारण बहुत हद तक कमी आती है एवं बच्चा आसानी से इन रोगों के प्रभावों से बाहर भी आ जाता है.

टीके के साथ पोषण भी जरुरी: जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बतया दिमागी बुखार से बच्चों को बचाने के लिए नियमित प्रतिरक्षण में दिमागी बुखार का भी टीका शामिल किया गया है. दिमागी बुखार का पहला टीका 9 से 12 महीने तक के बच्चों को एवं 1 से 2 वर्ष की उम्र के बच्चों को दूसरा ख़ुराक दिया जाता है जिसे बूस्टर डोज़ भी कहते हैं. दिमागी बुखार क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से इसका वाइरस शरीर में प्रवेश करता है और सीधे दिमाग पर असर करता है. इससे बच्चों को दिमागी बुखार हो जाता है. जापानी बुखार में शुरू में फ्लू जैसे लक्ष्ण के साथ बुखार आना, ठंड लगना, थकान होना, सिर दर्द, उल्टी एवं दौरे आना आदि दिखाई देते हैं. यह बुखार काफी ख़तरनाक हो सकता है जिससे बच्चा अपंग एवं समुचित चिकित्सीय जाँच के अभाव में जानलेवा भी हो जाता है.
इस गंभीर रोग से मजबूती से लड़ने के लिए बच्चे का सुपोषित होना फायदेमंद होता है. सुपोषित बच्चे में दिमागी बुखार प्रभाव डालने के बाद भी काफी हद तक जानलेवा नहीं हो पता है. इसलिए बच्चों को दिमागी बुखार से बचाने के लिए टीके के साथ उनका बेहतर पोषण भी जरूरी है

मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले से कोविड-19 को मात देकर फिर से काम पर लौटे डॉ जवाहर साहू

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– लखीसराय के सूर्यगढ़ा पीएचसी में पीएचसी प्रभारी के रूप में हैं तैनात
– पीएचसी में ही मरीजों का जाँच के दौरान हो गये थे संक्रमित

लखीसराय, 02 नवंबर।
कोविड-19 के दौर में भी जिले के सूर्यगढ़ा पीएचसी प्रभारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे और लोगों को तमाम चुनौतियों के बाबजूद बेहतर चिकित्सा सेवा देते रहे। लोगों की कोविड-19 जाँच के दौरान वे खुद भी संक्रमित हो गये थे । पर घबराये नहीं और मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले की बदौलत कोविड-19 को मात देने में सफल रहे। वे स्वस्थ्य होकर दुगुनी ताकत के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने कार्य पर लौटे। वे फिर से इलाके के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं। संक्रमित होने बाद वे आइसोलेट हो गए थे ।

कोविड-19 को मात देने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी :-
सूर्यगढ़ा पीएचसी प्रभारी डॉ जवाहर साहू ने बताया कि कोविड-19 को मात देने के लिए आवश्यक इलाज तो जरूरी है ही। इसके अलावे लोगों के अंदर मजबूत इच्छाशक्ति और धैर्य होना भी जरूरी है। इसकी बदोलत हर कोई कोविड-19 को मात दे सकता है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे कोविड-19 संक्रमित होने की जानकारी मिली तो कुछ पल के लिए घबराया। किन्तु, फिर सोचा मैं ही घबरा जाऊँगा तो सामान्य लोगों का क्या होगा। इसी सोच ने मेरे अंदर एक नई ऊर्जा भर दी और हम इसी साहस से कोविड-19 को मात देने में सफल रहे।

लक्षण दिखते ही कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन :-
डॉ जवाहर साहू ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 का लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच करानी चाहिए। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दिए गए चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। दरअसल, समय पर इलाज शुरू होने से बहुत जल्द स्वस्थ होने में काफी सहयोग मिलता है। इससे आसानी के साथ कोविड-19 को मात दिया जा सकता है ।

– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल, शारीरिक-दूरी का करें पालन :-
डॉ जवाहर साहू ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। साथ ही हमेशा शारीरिक-दूरी का पालन करें और मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती है तबतक मास्क और दो गज की दूरी का पालन करना बेहद जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, कान छूने से बचें।
– सफर के दौरान हमेशा सैनिटाइजर पास में रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

उचित पोषण से बच्चों का होगा सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास

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– जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ माँ का दें दूध, इसके बाद अल्प ठोस आहार करें शुरू
– मसले हुए फल और सब्जियां निश्चित मात्रा और समय पर दें
– पाचन तंत्र होगा मजबूत

लखीसराय, 02, नवंबर।
उचित पोषण से ही बच्चों का सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास होगा और बच्चे तंदुरूस्त होंगे। इसलिए, शिशु को जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ और सिर्फ माँ का ही दूध सेवन कराएं। माँ का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता है। यह स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। माँ के दूध में मौजूद पोषक तत्व जैसे पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को न सिर्फ बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साथ ही बच्चे की पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए मां के दूध को शिशु का प्रथम टीका कहा गया है। जो छह माह तक के बच्चे के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, छह माह के बाद बच्चे के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें।

– मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार, ठोस आहार देती है मजबूती :-
माँ और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चे के लिए मां के दूध के साथ पोषण से भरे आहार के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। घर और परिवार के सदस्यों को बताया जा रहा है कि छह माह के बाद शिशु को माँ के दूध के अलावा ठोस और ऊपरी आहार देना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान शुरू किया गया बेहतर पोषण आहार शिशु को स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल बनाता है। हालांकि इस दौरान भोजन की मात्रा कितनी होनी चाहिए और बच्चे को क्या खिलाना है यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस वक्त मां और अभिभावक को सावधानी से यह फैसला लेना होता है कि उन्हें अपने शिशु के लिए कैसा ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करना चाहिए, जो उसके पाचन शक्ति और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखें।

– मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें बच्चे की प्रतिक्रिया :-
लखीसराय, सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ रूपा कुमारी ने बताया कि छह माह बाद बच्चे को स्तनपान कराने के साथ धीरे–धीरे तरल ठोस खाद्य पदार्थ देना चाहिए। बच्चे के पाचन में परेशानी न हो और उसे ग्रहण कर लें। इसलिए, उसे धीरे–धीरे मसले हुए फल और सब्जियां देना शुरू करें। बच्चा जैसे–जैसे दिलचस्पी लेना शुरू करें ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करें। हर सप्ताह में वृद्धि के अनुसार शिशु को रोजाना एक नए प्रकार का आहार देना आरंभ करें। अनाज के बाद जहां तक संभव हो बच्चे को मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें कि वह किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। यदि बच्चे ने ठोस खाद्य पदार्थों पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है, तो सुनिश्चित करें कि बच्चे को विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों (जैसे, मसला हुआ, नर्म या पका हुआ और सादा आहार) का स्वाद मिलता रहे। शिशु की बढ़ती शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए, मसली हुई सब्जियां और फल लगातार दिए जा सकते हैं।

– यह है बच्चे की आहार प्रणाली
– बच्चे के छह माह के होने के बाद से उसे हल्का ऊपरी आहार देना शुरू करें।
– शुरू में नरम खिचड़ी, दाल-चावल व हरी सब्जियां जैसे मसला हुआ आहार दें।
– 7 से 8 माह तक के बच्चों को दो कटोरी, 9-11 महीने के बच्चों को तीन कटोरी और 12 से 24 माह तक के बच्चों 4-5 कटोरी अच्छी तरह से कतरा व मसला हुआ आहार दें।

– इन लक्षणों से पता चलेगा कि बच्चा भूखा है या नहीं :-
न केवल आहार देना, बल्कि इसका पता लगाना जरूरी भी है कि बच्चा भूखा है या उसका पेट भर गया है। कुछ लक्षणों से हम इसका पता लगा सकते हैं। जैसे अधिक भूख लगने पर बच्चा रोने लगेगा। वहीं, बच्चे का मुंह को खुला रखना, उंगलियों और मुट्ठी इत्यादि को चूसने से पता चलता है कि बच्चा और अधिक खाना चाहता है या भूखा है। वहीं, जब बच्चा पर्याप्त खा चुका होगा तो वह अपना मुंह बंद कर लेगा या सिर दूसरी ओर घुमा लेगा। साथ ही पेट भरने पर बार-बार भोजन देने पर लेने से इनकार भी करेगा।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर,-

– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– सफर के दौरान हमेशा सैनिटाइजर पास में रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दो गज की दूरी का ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।