मौसम के अनुकूल बदल लें अपना व्यवहार, रहेंगे निरोग

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मौसम में हो रहा है उतार-चढ़ाव, नहीं करें लापरवाही
खानपान में विशेष तौर पर सतर्क रहने की जरूरत
गर्म कपड़े पहनकर टहलने निकलें

भागलपुर, 2 नवंबर।
मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। तापमान ऊपर नीचे जा रहा है। किसी दिन तेज धूप तो किसी दिन ठंड का एहसास। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही बीमार बना सकती है । मायागंज अस्पताल में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि ऐसे मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। आप सावधान नहीं रहते हैं तो वायरल का शिकार हो सकते हैं। खानपान में विशेष तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

गर्म कपड़े पहनकर टहलने निकलें:
डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि अक्सर देखा जाता है कि लोग सुबह टहलते वक्त कम कपड़े पहनते हैं, ऐसा नहीं करें। सुबह-सुबह तापमान कम रहता है और ठंडी हवा चलती है। इससे बचने के लिए गर्म कपड़े पहन लें। इससे आपका बचाव होगा और वायरल की चपेट में नहीं आएंगे।

रात में सोते वक्त भी बरतें सावधानी:
रात में सोने के दौरान पंखे को नहीं चलाएं। अभी के मौसम में पंखे चलाने पर ठंड लगती है तो नहीं चलाने पर गर्मी का एहसास होता है। आपके लिए पंखा नहीं चलाना फायदेमंद है। अगर आप पंखा चला कर सोते हैं तो सर्दी खांसी के शिकार हो सकते हैं। वायरल भी हो सकता है। इसलिए ऐसा नहीं करें। इसके अलावा गर्म कपड़े पहन कर सोने की कोशिश करें।

खानपान में रहें सावधान:
इस मौसम में भोजन को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। लोगों को मौसम के हिसाब से अपना खानपान रखना चाहिए। सर्दी के मौसम में बासी खाने से बचना चाहिए। ताजा भोजन करने की अधिक से अधिक कोशिश करें। साथ ही पानी को उबालकर पीयें।.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कोशिश करें:
अगर आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो आपको जल्दी कोई बीमारी नहीं होगी। इसलिए इसे मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए दाल, दूध और हॉर्लिक्स का अधिक से अधिक सेवन करें। साथ ही हरी सब्जी भी पर्याप्त मात्रा में लें। जो लोग नॉनवेज खाते हैं, वह मांस मछली भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खा सकते हैं।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

मतदान केन्द्रों पर स्वास्थ्य विभाग की मुकम्मल व्यवस्था, निर्भीक होकर करें मतदान

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भागलपुर की 5 विधानसभा सीटों पर आज डाले जाएंगे वोट

भागलपुर, 2 नवंबर।
भागलपुर जिले की 5 विधानसभा सीटों पर मंगलवार को वोट डाले जाएंगे। कोरोना काल में हो रहे चुनाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने मुकम्मल तैयारी कर रखी है। इसे लेकर हर मतदान केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है।

सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कि चुनाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। कोरोना के संक्रमण से बचाव को लेकर हर स्तर पर व्यवस्था की गई है। हर मतदान केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में हैंड सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स और पीपीई किट उपलब्ध हैं । इसलिए लोगों को निर्भीक होकर मतदान के लिए जाना चाहिए। मतदान के दौरान कोरोना का खतरा नहीं रहेगा।

मतदान केंद्र पर जाने से पहले मतदाताओं की होगी थर्मल स्कैनिंग:
मतदान केंद्र पर जाने से पहले आशा कार्यकर्ता मतदाताओं की थर्मल स्कैनिंग करेंगी। अगर किसी का तापमान 100 डिग्री से अधिक होगा तो उसे रोक दिया जाएगा। 15 मिनट बाद फिर से उसकी जांच होगी। अगर इस बार भी उसका तापमान 100 से अधिक रहा तो उसे बाद में मतदान करने का मौका मिलेगा। लेकिन अगर दोबारा जांच में 100 डिग्री से कम तापमान रहा तो उसे मतदान के लिए जाने दिया जाएगा।

कोरोना के मरीज आखिरी घंटे में करेंगे मतदान:
मतदान केंद्रों पर कोरोना मरीजों के लिए भी वोटिंग की व्यवस्था की गई है। आखिरी घंटे में कोरोना मरीज पीपीई किट पहनकर अपना वोट डालेंगे। साथ ही इस दौरान दोबारा जांच में जिनके तापमान 100 डिग्री से अधिक रहा होगा,वे भी इसी समय अपना वोट डाल सकेंगे।

वोटरों के लिए मास्क, ग्लब्स और हैंड सैनिटाइजर की रहेगी व्यवस्था:
मतदान केंद्र से 100 मीटर पहले स्वास्थ्यकर्मी मास्क, ग्लब्स और हैंड सैनिटाइजर लेकर मौजूद रहेंगे। मतदान के लिए आने वाले वोटरों को प्लास्टिक का ग्लब्स दिया जाएगा। साथ ही हाथ भी सैनिटाइज कराया जाएगा। जिसके पास मास्क नहीं रहेगा, उसे मास्क भी दिया जाएगा।

मतदान केंद्रों पर मेडिकल कचरा निस्तारण को भी बनाई गई है टीम:
मतदान के बाद जमा मेडिकल कचरे से कोरोना का संक्रमण दूसरे व्यक्ति में नहीं हो इसे लेकर एक टीम बनाई गई है। मतदान के दौरान मास्क, ग्लब्स के साथ जितना भी मेडिकल कचरा होगा, उसका व्यवस्थित तरीके से स्वास्थ्य कर्मी निस्तारण करेंगे। इसे लेकर जिले के सभी 5 विधानसभा क्षेत्र जहां मतदान हो रहा है वहां के लिए अलग-अलग टीम बनाई गई है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

गर्भवती महिलाएँ सुरक्षित प्रसव के लिए करें पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन

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– गर्भधारण के बाद किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से कराएं जाँच
– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, व्यक्तिगत साफ-सफाई का रखें ख्याल

लखीसराय, 31 अक्टूबर।
सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के पूर्व और बाद में पूर्ण रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है। तभी सुरक्षित प्रसव संभव है और स्वस्थ बच्चे का जन्म होगा।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रहना जरूरी :-
लखीसराय सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ रूपा कुमारी ने बताया कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव तभी संभव है जब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ रहेगी। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ महिलाएँ स्वस्थ रहती हैं बल्कि गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ और मजबूत होता है।

गर्भधारण के पूर्व शारीरिक और मानसिक रूप से रहें स्वस्थ :-
अगर कोई महिला गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो उन्हें तीन-चार माह पूर्व से योजना बनानी चाहिए और सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहिए। ताकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियां उत्पन्न नहीं हो ।

– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :-
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व शिशु होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं हो।

– गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 से बचाव के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी :-
इस कोविड-19 के दौर में इससे बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को खासकर व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए। साथ ही मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करना चाहिए।

– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :-
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच सुविधा की व्यवस्था की गई है । जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।

– गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :-
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन और कैल्शियमयुक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

हम आपके लिए मास्क पहनते हैं, आप हमारे लिए मास्क पहनें

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स्वास्थ्यकर्मी अब लोगों से मास्क पहनने को लेकर कर रहे अपील
स्वास्थ्यकर्मियों की यह अपील लोगों पर कर रही है असर
कोरोना से बचाव को लेकर लोग हो रहे हैं जागरूक

बांका, 31 अक्टूबर।
स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर लगातार अपना मुहिम चला रहा है। जागरूकता अभियान में तरह-तरह के उपाय कर लोगों से गाइडलाइन का पालन करवाया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी अब लोगों के मास्क पहनने को लेकर नए तरीके अपना रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी जगह-जगह जाकर लोगों से कह रहे हैं कि हम आपके लिए मास्क पहनते हैं, आप हमारे लिए मास्क पहनें । इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

शहरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि हाल के दिनों में देखा गया कि लोग पहले की तरह जीवन जीने लगे हैं। मास्क पहनना और दो गज की सामाजिक दूरी का ख्याल रखना भूल रहे हैं तो हम लोगों ने लोगों से मास्क पहनने को लेकर नई तरह की अपील की। इस अपील से लोगों को एहसास हो रहा है कि मास्क पहनना ना सिर्फ उनके लिए फायदेमंद है, बल्कि दूसरे को भी कोरोना से बचाता है। जब स्वास्थ्यकर्मी ऐसा बोलते हैं कि हम आपके लिए पहन रहे हैं आप हमारे लिए मास्क पहनें तो लोगों में अपराध बोध होता है और वह मास्क लगाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

मास्क सही तरीके से लगाने को भी सिखा रहे हैं स्वास्थ्यकर्मी:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ना सिर्फ लोगों से मास्क पहनने की अपील की जा रही है, बल्कि उन्हें सही तरीके से मास्क लगाने की सलाह भी दी जा रही है। लोगों को बताया जा रहा है कि मास्क कैसे पहनना है। बहुत सारे लोग मास्क पहनते वक्त नाक और मुंह को भी ढकते नहीं है। गले में लटका लेते हैं। ऐसा नहीं करने की लोगों को सलाह दी जा रही है।

मास्क लगाने से ऑक्सीजन की नहीं होती है कमी: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि दरअसल कुछ लोगों में ऐसा भ्रम है कि मास्क लगाने से ऑक्सीजन की कमी होती है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सूती कपड़े के मास्क में ऑक्सीजन जाने के पर्याप्त साधन हैं। इसलिए बेहिचक मास्क पहनें । यदि कोई समस्या हो तो सर्जरी मास्क लगाएं। वह पूरी तरह से आजमाया हुआ है। उससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है।

मास्क इस्तेमाल के बाद उसे फेंकने के तरीके भी बताए जा रहे:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि मास्क लगाने के बाद जब वह बेकार हो जाता है तो उसे सही तरीके से फेंकना चाहिए। जहां-तहां फेंकने से उससे संक्रमण का खतरा रहता है। मास्क अगर आप डस्टबिन में डाल रहे हैं तो उसे दो टुकड़े करके डालिए। सबसे बेहतर तो यह है कि इस्तेमाल किए हुए मास्क को जमीन के अंदर गाड़ दीजिए। इससे किसी तरह का खतरा नहीं रहता है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के दौर में भी अपने कार्यों को बखूबी अंजाम देते रहें अम्बुज कुमार

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– खगड़िया जिला आईसीडीएस कार्यालय में एनएनएम के जिला समन्वयक पद पर तैनात
– कर्मियों का भी बढ़ाते रहें हौसला, कोविड-19 से बचाव के लिए भी किए जागरूक
खगड़िया, 31 अक्टूबर, 2020
खगड़िया आईसीडीएस कार्यालय में एनएनएम के जिला समन्वयक पद पर तैनात अम्बुज कुमार कोविड-19 के दौर में भी अपने विभागीय कार्यों का बखूबी के साथ तो निष्पादन किए ही। इसके अलवा वह कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण पर रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक भी करते रहें। इस दौरान उन्होंने अपने सह कर्मियों के साथ-साथ एल एस, सेविका समेत अन्य कर्मियों का हौसला बढ़ाते हुये और हर लोगों को अपनी जिम्मेदारी का हवाला देकर कोविड-19 को लेकर मन में व्याप्त भय भी दूर किया।
कोविड-19 के दौर भी जिला समन्वयक का बेहतर रहा कार्य :-
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह ने बताया कि कोविड-19 के दौर में भी जहाँ लोग पूरी तरह भयभीत थे। वहीं, जिस प्रकार धैर्यपूर्वक सतर्कता के साथ एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार विभागीय कार्य के कोविड-19 से बचाव के लिए कार्य किए। वह वाकई काबिले तारीफ है। इनका कार्य करने अंदाज ही कुछ अलग है। जिसके कारण इस विषम दौर में विभागीय कार्य नहीं रुका। इन्होंने ना सिर्फ खुद कार्य किया, बल्कि विभाग के अन्य कर्मियों का भी सहयोग करते रहें और हौसला भी बढ़ाते थे। ताकि कार्य में किसी प्रकार का परेशानी उत्पन्न नही हो सकें।
जिम्मेदारी ने विषम परिस्थितियों में भी नहीं हटने दिए पीछे :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि कोविड-19 के शुरुआती दौर में उन्हें भी भय लगा था। किन्तु, उनके उपर इतनी बड़ी जिम्मेदारी थी। जिसे वह नहीं पूरा करते तो और अन्य लोग कैसे करते। इसी जिम्मेदारी ने उनको विषम परिस्थितियों में भी पीछे नहीं होने दिया और पूरी ताकत के साथ वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में जुट गये।
कार्यों के दौरान सतर्कता और सावधानी का रखा ख्याल :-
जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि कार्य के दौरान सतर्कता और सावधानी का भी ख्याल रखें और दूसरों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए के लिए जागरूक करते रहें।  सतर्कता और सावधानी के साथ ही आप और हम वायरस की चपेट में आने से बच सकते हैं। उन्होंने बताया शायद यही वजह रहा है कि आज भी वह संक्रमण के दायरे से दूर हैं।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान आम लोगों को भी किए जागरूक :-
जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ना सिर्फ अपने विभाग के कर्मियों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किए। बल्कि, जब भी वह जिले के किसी भी केंद्र पर निरीक्षण या किसी कार्यक्रम भाग लेने जाते थे तो वहाँ सेविका-सहायिका के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के आम लोगों को भी जागरूक करते थे। जिसके दौरान नियमित रूप से मास्क पहने, शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, सैनिटाइजर का उपयोग करने समेत कोविड-19 से बचाव के लिए अन्य आवश्यक जानकारी देते हुए पालन करने के लिए प्रेरित किए। साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने का अपील करते थे।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– आवश्यकतानुसार लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

कोरोना के मामले कम होना अच्छी बात पर खतरा अभी टला नहीं

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कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन का करें पालन

लापरवाही बरतने से कोरोना पर नहीं हो सकेगा नियंत्रण

भागलपुर, 30 अक्टूबर

स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयास के बाद जिले में कोरोना के मामलों में लगातार कमी आ रही है. पिछले 1 सप्ताह से हर दिन जिले में 25 से कम मामले आ रहे हैं बुधवार को तो काफी दिनों के बाद कोरोना मरीजों का आंकड़ा 1 अंक में आ गया था और सिर्फ 9 मरीज मिले थे. इसके बावजूद कोरोना के प्रति अभी भी सावधान रहने की जरूरत है.

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजकमल चौधरी कहते हैं कि कोरोना के मामलों में कमी स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम के साथ- साथ लोगों के प्रयास से भी हुई है. इसे अभी आगे और बरकरार रखना है. खासकर अभी सर्दी का मौसम आने वाला है. ऐसे मौसम में फ्लू के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं. इसलिए कोरोना से बचाव के लिए अभी सावधानी बरतने की जरूरत है. कोरोना के मामले कम जरूर हुए हैं, लेकिन इसका खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है.

जगह-जगह शिविर लगाकर हो रही है जांच: कोरोना की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर जुटा हुआ है. इसी का परिणाम है कि मामलों में लगातार कमी आती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम जगह जगह पर जाकर लोगों की कोरोना जांच कर रही है. सुखद बात यह है कि अब हजारों लोगों की जांच के बाद महज कुछ मामले ही सामने आ रहे हैं.

हर हाल में सामाजिक का करें पालन: राजकमल चौधरी बताते हैं शारीरिक दूरी का पालन करना बहुत जरूरी है. कोरोना के खिलाफ अभियान में यह सबसे बड़ा हथियार साबित हो रहा है. भीड़भाड़ में जाने से बचें और अगर जाएं भी तो 2 गज की शारीरिक दूरी का जरूर पालन करें. साथ ही कहीं जाने से पहले मास्क लगाना नहीं भूलें.

8000 से ज्यादा मरीज अब तक हो चुके हैं स्वस्थ: जिले में अब तक 8500 से ज्यादा मरीज मिले हैं. इनमें से 8019 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं. जबकि सक्रिय मरीजों की संख्या अभी 300 से अधिक है. पिछले 1 सप्ताह में लगभग 100 से अधिक मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे हैं. साथ ही होम आइसोलेशन में रहने वाले भी बहुत सारे मरीज स्वस्थ हुए हैं. साफ जाहिर है कि स्वास्थ विभाग की मुहिम रंग ला रहा है और लोग धीरे-धीरे कोरोना से छुटकारा पा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोरोना के साथ ही दूसरी संक्रामक बीमारियों के लिए भी फास्ट ट्रैक मोड अपनाना होगाः डॉ. श्रीवास्तव

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“कोरोना की नई चुनौती के बावजूद हम संक्रामक रोगों को सीमित रखने में कामयाब रहे”
हार्वर्ड टी.एच.चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इंडिया रिसर्च सेंटर और प्रोजेक्ट ‘संचार’ ने ‘ऑन द फ्रंटलाइन्स’ वेबिनार सीरिज के तहत बुधवार को ‘कोरोना काल में संक्रामक रोगों का प्रबंधन’ विषय पर वेबिनार आयोजित की।

भागलपुर, ‘कोरोना काल में संक्रामक रोगों का प्रबंधन’ विषय पर हार्वर्ड टी.एच.चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इंडिया रिसर्च सेंटर और प्रोजेक्ट ‘संचार’ की ओर से बुधवार को आयोजित वेबिनार के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पटना के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इसके विभिन्न पहलुओं को सामने लाया। इन विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना से निपटने के साथ ही हमें दूसरी संक्रामक बीमारियों के खतरे पर भी पर्याप्त ध्यान देना होगा।

डॉ. रजनी कांत श्रीवास्तव आईसीएमआर (ICMR)- रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC), गोरखपुर के निदेशक हैं और साथ ही आईसीएमआर (ICMR) मुख्यालय में हेड, रिसर्च, मैनेजमेंट, पॉलिसी, प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन का अतिरिक्त प्रभार भी इनके पास है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “हमारे यहां स्वास्थ्य के संसाधन सीमित रहे हैं और साथ ही स्वास्थ्य समस्याएं भी अधिक हैं। हमारे देश में आज भी मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और फाइलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों की समस्या बनी हुई है। ऐसे में कोरोना के आने के बाद इन बीमारियों के नियंत्रण उपायों पर प्रभाव जरूर पड़ा। लेकिन देश में कहीं ऐसा नहीं हुआ कि मलेरिया को डेंगू का प्रकोप काफी बढ़ गया हो। इन बीमारियों को भी काफी नियंत्रण में रखा जा सका। दूसरी संक्रामक बीमारियों से नियंत्रण को फास्ट ट्रैक मोड में ले जाना होगा। इनके लिए अलग से संसाधनों को उपलब्ध रखना होगा।”

इसी तरह ICMR की नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैथलॉजी की निदेशक रही डॉ. पूनम सलोत्रा का कहना है कि जब कोरोना वैश्विक महामारी आई तो इसके बड़े खतरे को देखते हुए उपलब्ध लोक स्वास्थ्य संसाधनों को काफी हद तक इसमें लगा दिया गया था। अब स्थिति काफी व्यवस्थित हुई है। लेकिन अभी भी स्वास्थ्य क्षेत्र का मानव संसाधन बड़ी मात्रा में कोविड-19 से निपटने में व्यस्त है। ऐसे में दूसरी बीमारियों की उपेक्षा की आशंका रहती है, जिसे हमें रोकना है। ऐसा नहीं हो कि दूसरी बीमारियों का खतरा और बढ़ जाए। इसी तरह हमें यह भी नहीं भूलना है कि एक साथ कोरोना और दूसरी संक्रामक बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे मलेरिया और कोरोना।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना में एसोसिएट प्रोफेसर और बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. वीणा सिंह ने कहा कि “पिछले साल की तुलना में बिहार में डेंगू और मलेरिया के मामलों में इस वर्ष ज्यादा अंतर नहीं देखा गया है। हालांंकि एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के मामलों में कमी आयी है।” एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मरीजों में डेंगू या चिकनगुनिया के एंटीबॉडी विकसित होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए कोरोना से ठीक हुए लोगों को भी दूसरी बीमारियों से सावधान रहने की जरूरत है। एक प्रश्न के जवाब में डॉ. सिंह ने आगाह किया की “अगर बुखार या फिर कोविड के लक्षण दिख रहे हैं, तो कोविड टेस्ट (RTPCR/ एंटीजन टेस्ट) ज़रूर करवाएं। प्लेटलेट्स गिनने के बाद डॉक्टर तय करेंगे कि डेंगू है या नहीं।”

कालाजार में उपयोगी होगा कंबिनेशन ट्रीटमेंट
बिहार में आज भी कालाजार का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में डॉ. सलोत्रा ने कहा कि रेजर्वायर Post-kala-azar dermal leishmaniasis (पीकेडीएल) के इलाज के लिए कंबिनेशन ट्रीटमेंट को शोध में काफी उपयोगी पाया गया है। लंबा इलाज हो तो अक्सर मरीज थोड़े सुधार के बाद उसे बीच में छोड़ देते हैं। इससे दवा प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाती है। कबिनेशन थेरेपी में दो दवाएं एक साथ देने से समय कम लगता है और कंप्लायंस अच्छी हो जाती है।

प्रभावी है जेई का स्वदेशी टीका
बिहार और उत्तर प्रदेश में बच्चों में बड़ी संख्या में होने वाली जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) को लेकर डॉ. श्रीवास्तव ने कई जानकारी दीं। उन्होंने कहा कि जेई के लिए चीन में विकसित टीका तो पहले से ही उपलब्ध था, इसके अलावा भारत में स्वदेशी टीका भी तैयार हो चुका है। आईसीएमआर की राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे ने भारत बायोटेक के साथ मिल कर इसका स्वदेशी टीका तैयार कर लिया है। सघन टीकाकरण से जेई के मामलों में काफी कमी आई है।

AES के 40-50% मामले स्क्रब टाइफस की वजह से
इसी तरह एईएस के लिए बस्ती और गोरखपुर के सात जिलों में अध्ययन किया गया। इससे पता चला कि एईएस के 40-50 प्रतिशत मामले स्क्रब टाइफस की वजह से होते हैं। यह बैक्टेरियल बीमारी है, जिसका इलाज उपलब्ध है। समय पर इसका इलाज हो तो वह एईएस के रूप में नहीं बदलेगा। यह पता चलने के बाद से एईएस के मामलों में कमी आई है। इसमें आरएमआरसी का बहुत योगदान रहा है।

कोरोना ने कई सीख भी दीं
डॉ. सलोत्रा ने कहा कि कोरोना की आपदा ने लोक स्वास्थ्य व्यवस्था को कई तरह की सीख भी दी है। जिस तरह कोरोना टीका विकसित करने की तेज प्रक्रिया अपनाई गई है, वह दूसरी बीमारियों के टीके के लिए भी अपनाई जा सकेगी। इसी तरह अमेरिका में एमआरएनए (mRNA) आधारित टीके बनाए जा रहे हैं। हमारे देश में बीमारियों की जांच को ले कर एक नया मजबूत ढांचा बन सका है। जो मोलेक्युलर जांच पहले सिर्फ बड़े केंद्रों पर होती थी, उसे अब दूर-दराज के इलाकों में भी उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इसी तरह अब ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिससे किसी क्षेत्र विशेष में एक साथ जिन एक तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा होता है, उनकी जांच एक ही बार में कर ली जाए। जैसे बिहार में मलेरिया और कालाजार की जांच एक साथ हो जाए। इस तरह क्रमिक रूप से ऐसी सभी बीमारियों का पूरा पैनल तैयार कर लिया जाए और उनकी जांच एक साथ कर ली जाए।

गलत सूचना से सावधान रहें
डॉ. श्रीवास्तव ने इन दिनों मैसेजिंग प्लेटफार्म और सोशल मीडिया के जरिए फैल रही गलत सूचनाओं से सावधान करते हुए इसे इंफोडेमिक का नाम दिया और इससे बचने को बहुत जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि व्हाट्सऐप पर आने वाली सूचना पूरी तरह गलत हो सकती है। इसी तरह गूगल पर उपलब्ध सभी सूचना सही नहीं होती। विश्वसनीय स्रोत से मिली सूचना पर ही भरोसा करें। डॉ. वीणा सिंह ने कोविड-19 के मरीजों को अवसाद से बचने के लिए खास तौर पर व्यायाम, योग करने, अपनी रुचि के लिए समय निकालने की सलाह दी। वेबिनार का संचालन ‘राजस्थान पत्रिका’ के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश केजरीवाल ने किया।

वेबिनार के बारे मेंः “On the Frontlines” सीरीज के तहत आज की इस वेबिनार का आयोजन ‘प्रोजेक्ट संचार’ और हार्वर्ड टी.एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ- इंडिया रिसर्च सेंटर की ओर से किया गया। इंडिया रिसर्च सेंटर हार्वर्ड टी.एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ का पहला ग्लोबल सेंटर है। इसे 2015 में स्थापित किया गया था। इसका नेतृत्व प्रो. के. विश्वनाथ करते हैं। ये हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में हेल्थ कम्यूनिकेशन के ली कम की प्रोफेसर हैं। साथ ही प्रोजेक्ट संचार का भी नेतृत्व करते हैं।

प्रोजेक्ट संचार के बारे मेंः प्रोजेक्ट संचार (साइंस एंड न्यूजः कम्यूनिकेटिंग हेल्थ एंड रिसर्च) का मकसद पत्रकारों को स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर काम करने के लिए अधिक सक्षम बनाना है, ताकि वे इन विषयों पर लोगों की जानकारी, नजरिये और लोक नीति को आकार देने के लिए नवीनतम वैज्ञानिक शोध और आंकड़ों का बेहतर उपयोग कर सकें। इस प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2019 से अब तक भारत के 9 राज्यों के 70 जिलों के लगभग 200 पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

कोविड-19 के दौर में एक कॉल पर जाँच के लिए पहुँच जाते थे डॉ प्रेमचंद आनंद

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– लखीसराय पीएचसी में हैं आयुष चिकित्सक के पद पर तैनात

– मोबाइल मेडिकल यूनिट के तहत लोगों को देते थे चिकित्सा सेवा

लखीसराय, 30 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 के दौर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वास्थ्य विभाग की रही है। चिकित्सक समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी अपनी जान की परवाह किए बगैर कोविड-19 संक्रमण पर रोकथाम लोगों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सेवा देने में अग्रसर रहें हैं। ऐसे चिकित्सकों में ही डॉ प्रेमचंद आनंद का नाम शामिल है। जो लखीसराय पीएचसी में आयुष चिकित्सक के पद पर तैनात हैं। डॉ प्रेमचंद वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में मोबाइल मेडिकल यूनिट के रूप में लोगों को बेहतर सुविधा दे चुके हैं। ये ना सिर्फ पीएचसी में लोगों को बेहतर सुविधा दिए हैं, बल्कि एक कॉल पर पीएचसी क्षेत्र अंतर्गत स्थित गाँव में पहुँच जाते थे। जहाँ लोगों का कोविड-19 जाँच के साथ-साथ बचाव को लेकर भी आवश्यक जानकारी देते थे।

कोविड-19 पर रोकथाम ही मेरा पहला कर्तव्य :-
डॉ प्रेमचंद आनंद ने बताया कि कोविड-19 के दौर में वाकई स्थिति काफी विषम थी। पूरा समाज के भयभीत था। मुझे भी शुरूआती दौर में भय लगता था। किन्तु, मेरे उपर जो जिम्मेदारियां थी उसे भी पूरा करना था। कोविड-19 पर रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करना मेरा पहला कर्तव्य था। इसी सोच ने मन के भय को दूर किया और फिर कोविड-19 पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अपने स्तर के होने वाले कार्य को सतर्कता के साथ पूरा किया। उन्होंने बताया सामुदायिक स्तर पर लोगों को कोविड-19 के खतरे बचाना ही उन्होंने अपना पहला कर्तव्य समझा। शायद, यही सोच ने उनके अंदर एक नई उर्जा उत्पन्न की और फोन आते ही वह लोगों की जाँच के लिए क्षेत्र चले जाते थे। ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा का एहसास हो और कोविड-19 पर रोकथाम लग सकें।

शहर से लेकर गाँव तक के लोगों का किया जाँच :-
डॉ प्रेमचंद आनंद ना सिर्फ गाँव के लोगों का कोविड-19 जाँच की। बल्कि, शहर के लोगों का भी जाँच किया और कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया। यानी जहाँ से उन्हें फोन आते थे वह वहाँ तुरंत लोगों को जाँच करने के लिए हाजिर हो जाते थे। इस दौरान उन्होंने खुद के साथ-साथ लोगों का भी सुरक्षा ख्याल रखा।

जिम्मेदारी के साथ-साथ सतर्कता और सावधानी का भी रखा ख्याल :-
डॉ प्रेमचंद आनंद बताते हैं, अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा के मद्देनजर नजर सतर्कता और सावधानी का भी विशेष ख्याल रखा। इसके लिए वह मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग किए और हमेशा शारीरिक-दूरी का पालन करते थे जिसके कारण आज भी वह संक्रमण के दायरे से दूर हैं तथा वह लोगों को भी इसको अपनाने को प्रोत्साहित करते थे।

जाँच के साथ-साथ लोगों को बचाव को लेकर भी किए जागरूक :-
डॉ प्रेमचंद आनंद लोगों का ना सिर्फ कोविड-19 जाँच करना ही अपना कर्तव्य समझा। बल्कि इससे भी दो कदम आगे बढ़कर कोविड-19 से बचाव के लिए भी लोगों को आवश्यक जानकारी देकर जागरूक किया। साथ ही लोगों से अपील करते हुए गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी किया। वह लोगों को बताते थे कि संक्रमण के बचाव के यही तीन मूल मंत्र हैं, जिन्हें अपनाकर संक्रमण से बचा जा सकता है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– आवश्यकतानुसार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– हमेशा शारीरिक-दूरी का पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– खुद के साथ दूसरों का भी सुरक्षा का ख्याल रखें।
– सेनेटाइजर साथ लेकर घर से निकलें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

बदल रहे मौसम में बच्चों की सेहत का रखें ख्याल

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– सावधानी बरतकर परिजन बच्चे को रख सकते हैं स्वस्थ
– उतार-चढ़ाव वाले ऐसे मौसम में नहीं करें लापरवाही

बांका, 30 अक्टूबर

मौसम में बदलाव हो रहा है. लगभग 1 सप्ताह से तापमान नीचे गिर रहा है. इस वजह से ठंड का एहसास भी होने लगा है. ऐसे में बीमारियों का भी खतरा रहता है. इस वजह से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. खासकर बच्चों की देखभाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि मौसम में बदलाव की वजह से हर वर्ग के लोगों को परेशानी होती है, लेकिन बच्चों का विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत है. ऐसे मौसम में अगर बच्चों की सही तरीके से देखभाल नहीं होती है तो उसे एलर्जी की समस्या हो सकती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ के साथ सर्दी और खांसी की भी परेशानी हो सकती है. इससे बचने का एकमात्र उपाय परहेज है. बच्चे के मां-बाप को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

खान-पान का रखें ख्याल: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि हम बच्चों के भोजन का सही तरीके से ध्यान रख कर उसे कई तरह की बीमारियों से बचा सकते हैं. इस मौसम में बच्चे को बासी या फिर ठंडा खाना नहीं दें. उसे हमेशा ताजी और गर्म खाना ही दें. इस बात का ध्यान रखें कि आइसक्रीम और अन्य ठंडी चीजों का सेवन बच्चे नहीं करे. इससे एलर्जी की समस्या बढ़ती है. साथ ही पानी को भी उबालकर पिलाएं.

गर्म कपड़े पहनाकर रखें: अभी के माहौल में कभी सर्दी तो कभी गर्मी का एहसास होने लगता है. जब गर्मी का एहसास होता है तो बच्चे गर्म कपड़ों को उतार देते हैं. परिजन को इस पर ध्यान देना चाहिए. इस तरह की लापरवाही से बचना चाहिए. दरअसल, मौसम में उतार-चढ़ाव की वजह से कब सर्दी लगेगी और कब गर्मी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. इसलिए बेहतर यही रहेगा कि हमेशा गर्म कपड़े बच्चे को पहना कर रखें.

खांसी या छींक आने वाले के संपर्क में दूसरे बच्चे को नहीं आने दें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर किसी बच्चे को खांसी है या फिर छींक आ रही हो तो उस बच्चे के संपर्क में दूसरे बच्चे को नहीं आने दें. साथ रहने पर दूसरा बच्चा भी संक्रमित हो सकता है. इसलिए अगर घर में एक से ज्यादा बच्चे हो और एक संक्रमित हो गया हो तो दोनों को अलग-अलग रखने की कोशिश करें.

ज्यादा परेशानी होने पर डॉक्टर से करें संपर्क: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर बच्चे को ज्यादा परेशानी हो तो खुद से दवा देने की भूल ना करें. वैसे तो किसी भी उम्र के लोगों को बिना डॉक्टर को दिखाए दवा नहीं देनी चाहिए. लेकिन बच्चों के मामलों में ऐसी भूल नहीं करनी चाहिए. इसलिए अगर किसी तरह की कोई परेशानी हो तो बच्चे को डॉक्टर से दिखा कर ही दवा लें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कंगारू मदर केयर को अपनाएं, इससे शिशु के स्वस्थ शरीर का होता है निर्माण

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– माँ की धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास, मिलता है आराम

– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु में होती है गर्माहट

लखीसराय, 30 अक्टूबर, 2020
समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता है। बल्कि ऐसे शिशु जन्म लेने बाद कई तरह के समस्याओं से घिर जाते हैं। एसे में शिशु के स्वस्थ शरीर के निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसमें कंगारू मदर केयर तरीके को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है।
बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास का निर्माण करने में काफी सहयोग करता है। बच्चा जब अपने माँ के नजदीक रहता है तो माँ और बच्चे के बीच भावात्मक रिश्ता मजबूत होता है। यह बिना खर्च सबसे अच्छा उपाय है।

क्या कंगारू मदर केयर, इसका उपयोग किस तरह होता है :-
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है। जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तपान बेहतर होता है। बच्चे का तापमान सही रहता है और वह इन्फेक्शन से दूर रहता है। बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इसका माँ का सीने पर सीधी पोजिशन में शिशु को चिपकाकर रखा जाता है। इस स्थिति में माँ का छाती पुरी तरह खुली होनी चाहिए। जिससे माँ की शरीर का गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सकें। इससे शिशु तापमान सही रहता है। कंगारू मदर केयर माँ के अलावा पिता व परिवार के अन्य सदस्य भी दे सकते है। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर का सुविधा देने वाले स्थस्थ हो।

– ठंड के मौसम में कंगारू मदर केयर बेहद जरूरी :-
ठंड के मौसम में तो कंगारू मदर केयर की महत्ता और बढ़ जाती है। इस उपाय का पालन करने से नवजात के परिजन कई तरह की परेशानियाँ से दूर रहते हैं। साथ ही बच्चे का लालन-पालन में किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ता है। दरअसल, ठंड के मौसम में नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। किन्तु, कंगारू मदर केयर का पालन करने से इन परेशानियाँ से भी दूर रहा जा सकता है।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– हमेशा शारीरिक-दूरी का पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित रूप से मास्क का उपयोग करें।
– घर से सेनेटाइजर साथ रखकर ही निकलें।
– बार-बार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।