मायागंज अस्पताल में इंडोर और ओपीडी सेवा शुरू होने से मरीजों को मिली राहत

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20 दिन में इंडोर और ओपीडी में 15,000 से अधिक मरीज करा चुके हैं इलाज

जिले व आसपास के मरीजों को इलाज कराने के लिए नहीं जाना पड़ रहा है बाहर

भागलपुर, 27 अक्टूबर

मायागंज अस्पताल में इंडोर और ओपीडी सेवा शुरू हो जाने से मरीजों को राहत मिली है. सामान्य मरीज ना सिर्फ मायागंज अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं, बल्कि गंभीर मरीजों को भी इलाज कराने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है. पिछले 20 दिनों में अस्पताल में तकरीबन 15 हजार से अधिक मरीज अपना इलाज करवा चुके हैं. अभी 800 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं अस्पताल में इलाज कराने के लिए.

अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि जब से अस्पताल में इंडोर और ओपीडी सेवा शुरू हुई है तब से लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. पहले दिन 500 मरीजों का इलाज हुआ था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 800 मरीज प्रतिदिन हो हो गया है. अस्पताल अब पुराने स्वरूप में आ गया है. इंडोर सेवा के साथ जांच भी अस्पताल में शुरू हो गई है. मालूम हो कि मायागंज को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज 6 महीने से बंद था, लेकिन 5 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निर्देश के बाद 7 अक्टूबर से इंडोर और 12 अक्टूबर से यहां पर ओपीडी सेवा शुरू की गई है.

कोरोना की गाइडलाइन का किया जा रहा है पालन: अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि अस्पताल में इलाज करने के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स पहने रहते हैं. वहीं मरीज भी इन नियमों का पालन करते हैं. उनके साथ आने वाले परिजन भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हैं. जिनके पास मास्क नहीं रहता है उसे उपलब्ध कराया जाता है. अस्पताल को हर दिन सैनिटाइज भी कराया जाता है.

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है मायागंज अस्पताल: मायागंज अस्पताल पूर्वी बिहार का ना सिर्फ सबसे बड़ा अस्पताल है, बल्कि यहां पर मरीजों का अत्याधुनिक तरीके से इलाज करने की सारी व्यवस्था मौजूद है. गंभीर से गंभीर मरीजों का यहां पर आधुनिक तकनीक से इलाज किया जाता है. लगभग हर तरह की जांच और इलाज की व्यवस्था अस्पताल में मौजूद है.

बिहार झारखंड समय 15 जिलों के मरीज आते है यहां: अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि अस्पताल में भागलपुर व आसपास के जिलों के साथ झारखंड के कई जिलों के मरीज यहां पर इलाज कराने के लिए आते हैं. अस्पताल मैं ओपीडी सेवा नहीं चल रही थी तब इन मरीजों को इलाज कराने के लिए पटना या कोलकाता जाना पड़ता था. आप उन्हें राहत मिल गई है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

क्या आप यूथ चैंपियन बनने को तैयार हैं, आपकी आवाज मायने रखती है

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• कोविड-19 के खिलाफ़ सकारात्मकता फैलाएं, डर नहीं
• केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जारी की निर्देशिका
• आपका 2 मिनट से 15 मिनट का समय कोरोना से जुड़े भेदभाव पर पड़ेगा भारी

भागलपुर/ 27 अक्टूबर। ‘‘मैं कोविड-19 के दौरान भेदभाव एवं तिरस्कार के खिलाफ़ हूँ। कोविड-19 के दौरान फ़ैल रही किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकरियों को स्वीकार नहीं करूँगा’’। यह सोच यदि आप की आवाज बन रही है तो समझिए आप महामारी के इस दौर में यूथ चैम्पियन बनने को तैयार हैं। आपकी यह आवाज काफ़ी मायने रखती है। यह विचारों को प्रकट करने का एक ऐसा नजरिया है जो कोरोना काल में किसी भी तरह के भेदभाव या तिरस्कार झेल रहे व्यक्ति को राहत पहुंचा सकती है। कोविड-19 के दौर में जिस रफ़्तार से संक्रमण का प्रसार हुआ है, उसी रफ़्तार से कोरोना को लेकर भेदभाव एवं तिरस्कार के मामले में भी वृद्धि हुयी है। इसके खिलाफ़ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी #togetherAgainstCOVID19 के तहत मुहिम शुरू कर चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यूथ को इस मुहिम की महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए उत्साह और दृढ़ता के साथ तिरस्कार और भेदभाव के खिलाफ़ उठाने संबंधी निर्देशिका जारी की है।

तिरस्कार एवं भेदभाव को समझना जरुरी:
कोविड-19 के दौर में लोगों में फैले तिरस्कार व भेदभाव के खिलाफ जागरूकता फैलाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जारी निर्देशिका में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में तिरस्कार का मतलब होता है आपकी बीमारी के चलते कोई व्यक्ति समुदाय आपको नकारात्मक तरीके से देखता है। महामारी के दौर में इसका मतलब यह होता है कि किसी एक बीमारी से जुड़े लोगों को चिन्हित कर उनके साथ भेदभाव या अलग व्यवहार किया जाए। उनकी सामाजिक स्थिति और छवि को नुकसान पहुंचाया जाए। इस तरह का व्यवहार उन लोगों को जो खुद बीमारी से जूझ रहे हो या उनकी देखभाल करने वाले परिवार सदस्य दोस्तों और समुदाय के लोगों को प्रभावित कर सकता है।

एडवोकेसी के माध्यम से सोच में आएगा बदलाव:
एडवोकेसी का मतलब है किसी मुद्दे को पहचानना और बदलाव की ओर काम करना। जारी निर्देशिका में बताया गया है कि एडवोकेसी के जरिए हम समाज के कमजोर वर्ग की आवाज उठाने में मदद करते हैं। क्योंकि जिन विचारों और परंपराओं में हम बदलाव लाना चाहते हैं, उनका असर इन्हीं वर्गों पर सबसे ज्यादा होता है। एडवोकेसी इसी सामुहिक आवाज का प्रयोग अधिकारों के बचाव और सुरक्षा के लिए करती है, साथ ही अलग-अलग कार्यों और नई शुरुआत में समर्थन करती है। यह बदलाव व्यक्तिगत स्तर, स्थानीय स्तर (उदाहरण के लिए स्थानीय सरकार, पुलिस, धार्मिक नेताओं या योर स्कूल) एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी हो सकती है।

2 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर आप भी कर सकते हैं मदद:
2 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर आप भी कोविड-19 के खिलाफ़ मुहिम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कोविड-19 से संबंधित सही जानकारी के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विश्व स्वास्थ संगठन, यूनिसेफ दस्त्रावेजों को ही फॉलो करें, इसमें आपका 2 मिनट से कम का समय जाएगा। 10 मिनट से 15 मिनट का समय निकालकर कोविड-19 से जुड़े तथ्यों पर विडियो, थैंक्यू कार्ड एवं मिथकों को उजागर करने वाले पोस्ट लिखकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट या टि्वटर हैंडल से सोशल मीडिया संदेशों और ग्राफिक्स को अपने फेसबुक, व्हाट्सएप, स्नैपचैट इंस्टाग्राम या किसी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा करें। उचित दूरी बनाकर रखते हुए कोरोना वारियर्स के साथ खींची गई अपनी सेल्फी को सोशल मीडिया पर साझा करें। अपने कोरोना योद्धा को वीडियो कॉल करें और स्क्रीनशॉट ले या उचित दूरी रखते हुए तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर साझा करें।

मिथकों को उजागर करने वाली पोस्ट शेयर करें:
जारी निर्देशिका में बताया गया है कि कोविड-19 से संबंधित सही जानकारी देने वाली और मिथकों को उजागर करने वाली पोस्ट साझा करें। भ्रामक जानकारी न फैलाएं। इससे समाज में तिरस्कार और भेदभाव को रोकने में सहायता होगी। इस तरह के पोस्ट का प्रिंट लेकर आप उन्हें अपने आसपास चिपका सकते हैं। इसकी तस्वीरें हमारे साथ सोशल मीडिया पर शेयर करें। तिरस्कार का क्या मतलब है, और यह समाज और लोगों के लिए कितना हानिकारक है । इससे जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करें। लोगों को भेदभाव के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित करें।

गलत जानकारी फैलाने वालों को रोकें :
महामारी के दौर में ज्यादातर लोग परेशान और बड़े हुए हैं और इस मुश्किल समय में लोग कई बार गलत और गैर-तथ्यात्मक जानकारी साझा कर जाते हैं। अक्सर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि सही जानकारी कहां से मिल सकती है। जारी निर्देशिका में यह बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति या आपका दोस्त गलत जानकारी फैला रहा है तो उनसे मिलकर या फिर इनबॉक्स में मैसेज कर उनसे संपर्क कर सही तथ्यों को बताएं। याद रखें आपका उद्देश्य उन्हें नीचा दिखाना नहीं बल्कि उनकी सोच बदलना है। उन्हें बताएं कि जो बातें या सुझाव उन्होंने शेयर किया है उसका स्रोत विश्वसनीय नहीं है। उन्हें किसी विश्वसनीय स्रोत के बारे में जानकारी दें। जहां से वह सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अगर कोई भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है तो क्या करें:
जारी निर्देशिका में यह बताया गया है कि अगर कोई भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है तो उन्हें यह बताएं कि वायरस किसी को भी प्रभावित कर सकता है और इसका किसी खास समूह के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तथ्य उपलब्ध कराएं और शांत तरीके से बताया कि अलग-अलग लोग किस तरह प्रभावित है। उन्हें बताएं कि किसी एक समूह या वर्ग को अलग कर या उन्हें वायरस के लिए जिम्मेदार ठहराने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। इससे हिंसा बढ़ सकती है और इससे लोग जरूरत होने पर भी इलाज के लिए सामने नहीं आएंगे। जिससे बीमारी और बढ़ सकती है। इस समय एक दूसरे का साथ देना और सभी का सहयोग करना एक दूसरे के प्रति दया और करुणा का भाव जरूरी है। भले ही हम डरे हुए हो। खुद को संयमित रखें भले ही आप निराश हो या गुस्से में हो।

कई युवा आ भी रहे सामने: तिलकामांझी के राकेश ने बताया कि कोरोना के प्रति हमलोग पहले से समाज में जागरूकता फैला रहे हैं. आगे भी इस काम में अपनी भूमिका निभाएंगे. वहीं आदमपुर के सुमित ने कहा कि कोरोना के प्रति युवाओं को आगे आना होगा जागरूक करने के लिए. बूढ़ानाथ के रमेश ने बताया कि जिम्मेदारी बनती है लोगों को जागरूक करें.

राजद ने 15 साल के शासन में सत्ता को अपनी तिजोरी भरने का माध्यम बनाया- मोदी

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भागलपुर-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार करते हुए राष्ट्रीय जनता दल सहित विपक्ष पर तीखाप्रहार करते हुएशुक्रवार को आरोप लगाया कि बिहार के विकास की हर योजना को ‘‘अटकाने और लटकाने’’ वाले इन दलों ने अपने 15 साल के शासन में राज्य को ‘‘लगातार लूटा और सत्ता को अपनी तिजोरी भरने का माध्यम बनाया।’’ साथ ही प्रधानमंत्री ने दावा किया किबिहार की जनता भ्रम में नहीं है और उसने आत्मनिर्भरता के लिये नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग सरकार बनाने का मन बना लिया है। बिहार में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘ बिहार के लोगों ने मन बना लिया है, ठान लिया है कि जिनका इतिहास बिहार को बीमारू बनाने का है, उन्हें आसपास भी नहीं फटकने देंगे।’’ प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब बिहार के लोगों ने इन्हें (विपक्ष को) सत्ता से बेदखल कर दिया और नीतीश कुमार को मौका दिया तो ये बौखला गए और इसके बाद 10 साल तक इन लोगों ने संप्रग की सरकार में रहते हुए बिहार पर, बिहार के लोगों पर अपना गुस्सा निकाला। डेहरी ऑन सोन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे। मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन नेताओं को आपकी जरूरतों से कभी सरोकार नहीं रहा। ‘‘इनका ध्यान रहा है अपने स्वार्थों पर, अपनी तिजोरी पर रहा। ’’ उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भोजपुर सहित पूरे बिहार में लंबे समय तक बिजली, सड़क, पानी जैसी मूल सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। मोदी ने कहा राजग के विरोध में विपक्षी दलों ने मिलकर जो ‘पिटारा’ बनाया है, उसकी रग-रग से बिहार के लोग वाकिफ हैं। विपक्षी महागठबंधन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ जो लोग नक्सलियों को, हिंसक गतिविधियों को खुली छूट देते रहे, आज वे राजग के विरोध में खड़े हैं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी दल मिलकर आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी बिहार के निर्माण में जुटे हैं। बिहार को अभी भी विकास के सफर में मीलों आगे जाना है। नयी बुलंदी की तरफ उड़ान भरनी है।’’ उन्होंने लोगों को सचेत किया, ‘‘बिहार आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। अगर बिहार में विरोध और अवरोध को जरा भी मौका मिला तो बिहार की गति और प्रगति दोनों धीमी पड़ जाएगी।’’

मोदी ने अपने संबोधन के दौरान बिहार के लोगों को राजद नीत पूर्ववर्ती बिहार सरकार के शासनकाल के दौरान कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति को याद दिलाया। मोदी ने कहा, ‘‘ आज बिहार में पीढ़ी भले बदल गई हो, लेकिन बिहार के नौजवानों को ये याद रखना है कि बिहार को इतनी मुश्किलों में डालने वाले कौन थे?’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज भी बिहार की अनेक समस्याओं की जड़ में 90 के दशक की अव्यवस्था और कुशासन है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के लोग भूल नहीं सकते वो दिन जब सूरज ढलते का मतलब होता था, सब कुछ बंद हो जाना, ठप पड़ जाना। उन्होंने कहा कि वो दिन जब सरकार चलाने वालों की निगरानी में दिन-दहाड़े डकैती होती थी, हत्याएं होती थीं, रंगदारी वसूली जाती थी। राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये वो दौर था जब लोग कोई गाड़ी नहीं खरीदते थे, ताकि एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनकी कमाई का पता न चल जाए। उन्होंने कहा कि वो दौर था जब एक शहर से दूसरे शहर में जाते वक्त ये पक्का नहीं रहता था कि उसी शहर पहुंचेंगे या बीच में अपहृत हो जाएंगे। मोदी ने कहा कि आज बिजली है, सड़कें हैं, लाइटें हैं और सबसे बड़ी बात वो माहौल है जिसमें राज्य का सामान्य नागरिक बिना डरे रह सकता है, जी सकता है और अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ना इसी को कहते हैं।

तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरियों के वादें पर सवाल उठाते हुए मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने एक-एक सरकारी नौकरी को हमेशा लाखों-करोड़ों रुपये कमाने का जरिया माना,वो फिर बढ़ते हुए बिहार को ललचाई नजरों से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बिहार के नौजवानों को ये याद रखना है कि बिहार को इतनी मुश्किलों में डालने वाले कौन थे? ’’ गौरतलब है कि राजद नेता तेजस्वी यादव अपनी सभी रैलियों में रोजगार और विकास का मुद्दा उठा रहे हैं। तेजस्वी कहते हैं कि उनकी सरकार बनी तब पहली मंत्रिमंडल की बैठक में युवाओं को 10 लाख रोजगार देने के निर्णय पर मुहर लगेगी।

कोविड-19 से बचाव को सर्दियों में रहें और सतर्क , कोविड-19 गाइडलाइन के करें पालन

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– मास्क और दो गज की शारीरिक – दूरी ही अभी बचाव का सबसे बेहतर वैक्सीन

– चुनाव व त्यौहार में संक्रमण से बचने को रहें सावधान

खगड़िया, 23 अक्टूबर।
कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए सतर्क रहना होगा । इसके लिए हमें कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करना बेहद जरूरी है। दरअसल, वर्तमान में कोविड-19 के साथ चुनावी और त्यौहारी दौर भी चल रहा है। जिसके कारण संक्रमण बढ़ने की प्रबल संभावना है। हालांकि, इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग आवश्यक तैयारी में जुट गया है। ताकि हर स्थिति में संक्रमण के दायरे को रोका जा सके ।

– कोविड-19 बचाव के लिए सतर्कता है हर लोगों की जिम्मेदारी : –
खगड़िया के कासीमपुर गाँव निवासी युवक युगेश कुमार ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण की शिकायत मिलने का सिलसिला जारी है। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किन्तु, यह किसी एक नहीं बल्कि हर लोगों की जिम्मेदारी है। क्योंकि जब तक सब लोग सतर्क नहीं होंगे तब तक हम कोविड-19 के दायरे से दूर नहीं रह सकते हैं। इसके लिए लोगों को बचाव से संबंधित हर मानकों का ख्याल रखना चाहिए और चिकित्सा परामर्श का भी पालन करना चाहिए।

– कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाएं त्यौहार व करें मतदान : –
कोविड-19 के साथ होने वाले त्यौहार और चुनाव दोनों जगह लोगों की भीड़ होना लाजिमी है। किन्तु, ऐसे में हमें कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक गाइडलाइन का ध्यान रखना और पालन करते हुए त्यौहार मनाना व मतदान करना चाहिए। इससे ना सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे बल्कि दूसरे लोग भी सुरक्षित रहेंगे। इसके खुद के साथ – साथ दूसरों को भी जागरूक करने की जरूरत है।

– बचाव को लेकर लगातार किया जा रहा है जागरूक :-
कोविड-19 से बचाव के साथ त्योहार मनाने एवं मतदान करने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस के कर्मी व पदाधिकारी लगातार जागरूकता रैली समेत अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही कोविड-19 के जारी गाइडलाइन का पालन करने की भी अपील कर रहे हैं।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– हमेशा दो गज की शारीरिक – दूरी बनाएं रखें।
– मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें।
– बाहर का खाना खाने से परहेज करें।
– ना भी लगाएं और ना ही भीड़ में जाएँ।
– सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।
– खुद के साथ दूसरों को भी जागरूक करें।

एनीमिया मुक्त देश निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग लोगों को कर रहा है जागरूक

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– एनीमिया के कारण, लक्षण, बचाव की दी जा रही है जानकारी

– एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का करें सेवन

लखीसराय, 23 अक्टूबर।
एनीमिया मुक्त देश निर्माण को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति पूरी तरह संकलित है। इसके लिए जिला से लेकर पीएचसी स्तर पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा एनीमिया के कारण, लक्षण एवं इससे बचाव के उपाय की जानकारी दी जा रही है। ताकि हर हाल में सरकार द्वारा चलाई गई एनीमिया मुक्त देश निर्माण सफल हो सके और लोग इसके प्रति जागरूक हो सकें।

– एनीमिया से बचाव को प्रोटीनयुक्त खाना का सेवन जरूरी : –
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि एनीमिया खून की कमी से होती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए प्रोटीन व आयरन युक्त खाना का सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें। इसमें सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।

– लक्ष्मण दिखते ही कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन : –
एनीमिया का लक्षण दिखते ही अच्छे चिकित्सकों से तुरंत इलाज कराना चाहिए। चिकित्सा परामर्श का पालन करना बेहद जरूरी है। ताकि किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और बीमारी से पूरी तरह निजात मिल सके।

– ये हैं एनीमिया के लक्षण : –
एनीमिया बीमारी का शुरूआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि कमी होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज करायें ।

– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन : –
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली का मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि । यह आपके शरीर की कमी को पूरी करता एवं होमोग्लोबीन जैसी कमी भी दूर करता है। इससे एनीमिया बीमारी से बचाव हो सकता है।

– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल : –
गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ
शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भ के दौरान लगातार होमोग्लोबीन समेत अन्य आवश्यक जाँच करानी चाहिए। साथ हीं चिकित्सकों के परामर्श का पालन करना चाहिए।

– समय पर खाएं खाना : –
एनीमिया से बचाव के लिए समय पर खाना खाना भी जरूरी है। इसलिए, इस बात विशेष ख्याल रखें कि समय पर खाना खाएं और परिवार के अन्य सदस्यों का भी खान – पान का ख्याल रखें। खासकर घर के बच्चे और बुजुर्गों का खान – पान को लेकर विशेष ख्याल रखें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– दो गज की शारीरिक – दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें और छूने के पूर्व साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– घर से मास्क लगाकर ही निकलें।
– सैनिटाइजर साथ लेकर ही बाहर निकलें।
– साफ – सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दो गज की दूरी का ख्याल रखें।

कोरोना मरीज होम आइसोलेशन में गाइडलाइन का करें पालन

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गाइडलाइन का पालन नहीं करने से दोबारा हो सकते हैं संक्रमित
पिछले दिनों कई ऐसे मामले आ चुके हैं सामने, रहें सतर्क

बांका, 23 अक्टूबर।
कोरोना मरीजों को जब से होम आइसोलेशन में रहने की सुविधा मिली है, तब से देखा जा रहा है अधिकतर लोग होम आइसोलेशन में रहना ही पसंद कर रहे हैं। होम आइसोलेशन में रहना कोई गलत नहीं है, लेकिन इस दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। ऐसा देखा जा रहा है कि बहुत लोग होम आइसोलेशन में रहते वक्त गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। 10 दिन के बाद अपने आप खुद को फिट घोषित कर दे रहे हैं। इससे उनमें दोबारा कोरोना के लक्षण हो सकते हैं।
होम आइसोलेशन में सतर्क रहना जरूरी
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना के मरीजों को होम आइसोलेशन में 10 दिनों के लिए भेजा जाता है। उसके बाद भी मरीजों को काफी सतर्क रहना पड़ता है। लेकिन देखा जा रहा है कि 10 दिन पूरा होने के बाद मरीज खुद को स्वस्थ मान लेते और परहेज बंद कर देते हैं। यह ठीक नहीं है। हाल के दिनों में ऐसा करने वाले कई मरीज दोबारा आए, जिनमें कोरोना के लक्षण पाए गए।

दोबारा जांच जरूर कराएं:
डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि कोरोना मरीज होम आइसोलेशन में 10 दिन पूरा कर लेने के बाद खुद से ही अपने आप को स्वस्थ मान लेते और दोबारा जांच नहीं कराते हैं। ऐसा नहीं करें यह आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। 10 दिन बाद कोरोना जांच जरूर कराएं। जांच में अगर निगेटिव पाए गए तभी खुद को स्वस्थ समझें। इसके बाद भी पूरी तरह से सतर्कता बरतें।

घर में व्यवस्था हो तभी आइसोलेशन में जाएं:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि ऐसा देखा जा रहा है कि बहुत सारे ऐसे मरीज भी हैं जिनके घर में अलग से बाथरूम की व्यवस्था नहीं है। फिर भी वह हम आइसोलेशन में चले जा रहे हैं। ऐसा करने से बचें। अगर आपके घर में अलग रहने के लिए व्यवस्था नहीं है तो कोविड केयर सेंटर में भर्ती हो जाएं। वहां पर आपके लिए तमाम तरह की सुविधाएं हैं। साथ में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी है जो आप पर निगरानी रखेगी।

परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें:
डॉ चौधरी कहते हैं कि हम आइसोलेशन में रहते हुए कोरोना मरीज को कोई परेशानी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर लें। खुद डॉक्टर बनने की कोशिश ना करें। आपके डॉक्टर जो आपको सलाह दें उसका पालन करें।

: कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

छः माह की उम्र के बाद बच्चे के लिए स्तनपान के साथ पूरक आहार भी जरूरी

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– शिशु को जन्म के बाद छ: माह तक सिर्फ माँ के दूध से ही मिलती है पूरी ऊर्जा

– स्तनपान से ही बढ़ेगी शिशु का रोग प्रतिरोधक क्षमता

खगड़िया, 22 अक्टूबर।
राज्य स्वास्थ्य समिति शिशु के स्वस्थ शरीर निर्माण और देश में कुपोषण की दर में सुधार लाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। इसको लेकर तरह-तरह के कार्यक्रम व अभियान का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ताकि शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिले। इसको लेकर लगातार स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी प्रयासरत हैं ।

आईसीडीएस और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किया जा रहा जागरूक : –
आईसीडीएस और स्वास्थ विभाग द्वारा तरह-तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। मिशन एक कुपोषण की समस्या दूर हो। ऑगनबाड़ी सेविका और आशा द्वारा गाँव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक कर प्रेरित किया जा रहा है। जन्म के छ: माह तक माँ का दूध ही बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार माना जाता है। माँ का दूध न केवल पचने में आसान होता है बल्कि इससे नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। लेकिन 6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान से बच्चे के आवश्यक पोषण की पूर्ति नहीं हो पाती है। इसके बाद बच्चे के भोजन में अर्द्धठोस व पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए आदि जानकारी लोगों को दी जा रही है।

-बच्चों को छह माह के होने के बाद ऊपरी आहार जरूरी :-
खगड़िया सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि बच्चों को छह माह होने के बाद से ऊपरी आहार की शुरुआत करें। प्रारम्भ में बच्चे को नरम खिचड़ी व मसला हुआ आहार 2-3 चम्मच रोज 2 से 3 बार दें। फिर 9 माह तक के बच्चों को मसला हुआ आहार, दिन में 4-5 चम्मच से लेकर आधी कटोरी व दिन में एक बार नाश्ता, 9-12 महीने के बच्चों को अच्छी तरह से कतरा व मसला हुआ आहार जिसे कि बच्चा अपनी अंगुलियों से उठा कर खा सके देना चाहिए। इस उम्र के बच्चों को दिन में 1 -2 बार नाश्ता तथा 3-4 बार भोजन देना चाहिए। 12 से 24 माह तक के बच्चों अच्छी तरह से से कतरा, काटा व मसला हुआ ऐसा खाना जो कि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए बनता हो देना चाहिए। इस आयु में बच्चे को कम से कम एक कटोरी नाश्ता दिन में 1 से 2 बार व भोजन 3-4 बार दें।

-संक्रमण से लड़ने के लिए पौष्टिक आहार की जरुरत : –
पहले दो साल में जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते वे खांसी, जुकाम दस्त जैसी बीमारियों से बार-बार बीमार पड़ते हैं। बच्चे को इन सभी संक्रमणों से बचने और लड़ने के लिए पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। यदि बच्चा सही से ऊपरी आहार नहीं ले रहा है तो वह कुपोषित हो सकता है और कुपोषित बच्चों में संक्रमण आसानी से हो सकता है। बच्चे को ताजा व घर का बना हुआ भोजन ही खिलाना चाहिए।

– स्वच्छता का ख्याल रखना बेहद जरूरी : –
भोजन बनाने व बच्चे को भोजन कराने से पहले साबुन से हाथ धो लेने चाहिए। बच्चे का भोजन बनाने व उसे खिलाने में सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अच्छे से पानी से धोने के बाद ही फल व सब्जियों को उपयोग करना चाहिए। जिस बर्तन में बच्चे को खाना खिलायेँ वह साफ होना चाहिये।

-धैर्य के साथ खिलायें खाना :-
बच्चे को प्रतिदिन अनाज, दालें, सब्जियों व फलों को मिलाकर संतुलित आहार खिलायें। बच्चों को विभिन्न स्वाद एवं विभिन्न प्रकार का खाना खाने को दें क्योंकि एक ही प्रकार का खाना खाने से बच्चे ऊब जाते हैं। खाना कटोरी चम्मच से खिलाएँ। बच्चे को खाना बहुत धैर्य के साथ खिलाना चाहिये, उससे बातें करनी चाहिए। जबर्दस्ती बच्चे को खाना नहीं खिलाना चाहिए। खाना खिलाते समाय पूरा ध्यान बच्चे की ओर होना चाहिए। खिलाते समय टीवी, रेडियो आदि न चलाएँ।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन हमेशा करें।
– बार – बार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथों की अच्छी तरह सफाई करें।
– साफ- सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

कोरोना काल में फाइनेंस मैनेजमेंट के पास ज्यादा चैलेंज – एच. ई हयून को, राजदूत, दक्षिण कोरिया

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में छात्रों को संबोधित करते हुए दक्षिण कोरिया के राजदूत एच. ई हयून को ने कहा कि आज कोरोना काल में फाइनेंस मैनेजमेंट के पास ज्यादा चैलेंज आ गया है। लगभग सभी कंपनियों के बीच फाइनेंस की समस्या आई हुई है। आज कंपनियों को जहां उत्पाद के लिए वित्तीय प्रबंधन को देखना है वहीं कर्मचारियों के हितों का भी खास ख्याल रखना है ऐसे में डबल चैंलेज है मैनेजमेंट के पास। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन आवश्यक है तभी इस प्रतियोगी बाजार में कोई कंपनी रह सकती है।

एच. ई हयून को छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त प्रबंधन एक चैलेंज है लेकिन आज समझकर अगर आगे बढ़ा जाए तो कंपनियां को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। वित्त प्रबंधन पर ही कंपनियों को आगे बढ़ाती है। आज वैश्विक चैंलेंज है ऐसे में उत्तम प्रबंधन ही कंपनियों को बचा सकता है।

एच. ई हयून को ने कहा कि फाइनेंस के छात्रों को अब ज्यादा चैलेंज स्वीकार कर कार्य करने होंगे जिसके लिए वैश्विक स्तर पर ताजा जानकारी आवश्यक है। तभी सफलता हासिल हो सकती है। आज जिस तरह से वैश्विक बाजार में मंदी आई है अब इससे उबरने का भी समय आ गया है। पिछले घाटा को भरने का समय भी आ गया है। लेकिन इसके लिए बेहतर फाइनेंस प्रबंधन ही इस संकट से उबार सकता है।

एच. ई हयून को ने कहा कि एनडीआईएम बेहतरीन संस्थान है जहां से छात्रों ग्लोबल की जानकारी रखते हैं और यही सफलता का पहला मार्ग है। एनडीआईएम की विशेषता यह है कि यह संस्थान लगातार वैश्विक स्तर पर सेमिनार का आयोजन करता रहा है जिससे छात्रों के व्यक्तितव पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

लखीसराय जिले में 24 घंटे मिल रही है नवजातों को एसएनसीयू की सेवा

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– चिकित्सक व जीएनएएम के देखरेख में दी जा रही है सेवा
– कोविड-19 के गाइडलाइन का रखा जा रहा है ख्याल, दी जा रही है समुचित स्वास्थ्य सेवा

लखीसराय, 22 अक्टूबर।
राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ और बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में नवजात को अब अस्पतालों में 24 घंटे एसएनसीयू की सेवा बहाल की गई है। यह सेवा चिकित्सक एवं जीएनएएम ( ए ग्रेड नर्स ) की देखरेख में नवजात को दी जा रही है। इस दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का ख्याल रखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है। जिससे ऐसे जरूरतमंद नवजातों के परिजनों की परेशानियाँ दूर होते दिख रही और आसानी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल रहा है।

– बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ दी जा रही है एसएनसीयू सेवा :-
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ नवजातों को एसएनसीयू की सेवा दी जा रही है। साथ ही इस दौरान नवजात और उनके परिजनों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो इसका भी ख्याल रखा जा रहा है।

– साँस से पीड़ित नवजात को दी जाती है एसएनसीयू सेवा :-
साँस से पीड़ित नवजात को जिले के अस्पतालों में एसएनसीयू की सुविधा आसानी के साथ दी जा रही है। इस दौरान बच्चे की सुरक्षा के मद्देनजर स्वास्थ कर्मी पूरी सतर्कता के साथ नवजात को यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ताकि नवजात को अन्य परेशानियाँ से नहीं जूझना पड़े।

– एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के दौरान साफ – सफाई का रखा जा रहा है ख्याल : –
कोविड-19 को लेकर नवजात को एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के दौरान अस्पतालों में कर्मियों द्वारा साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। नवजात के परिजनों को भी आवश्यक जानकारी देते हुए बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। साथ ही साथ सरकार के गाइलाइन का भी पालन किया जाता है।

– नवजात को स्वस्थ रखने के लिए परिजनों को दी जाती है जानकारी :-
अस्पताल कर्मियों एवं चिकित्सकों द्वारा एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के पूर्व एवं बाद नवजात को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिए जाते हैं। ताकि नवजात का स्वस्थ शरीर निर्माण हो। इस दौरान बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक नियमित रूप से समय – समय पर स्तनपान कराने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, कोविड-19 के लेकर नवजात को स्तनपान कराने के दौरान मास्क का अनिवार्य रूप उपयोग करने व हाथों की अच्छी तरह से साबुन से धोने आदि की जानकारी दी जाती है।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– हमेशा दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– मास्क का इस्तेमाल हमेशा करें
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

कोरोना के प्रति कर रहे जागरूक, स्वच्छता की भी दे रहे सीख

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तिलकामांझी के सुर्खीकल मोहल्ले में चल रहा है अभियान
व्यवसायी मिहिर झा टीम बनाकर लोगों को कर रहे जागरूक

भागलपुर, 22 अक्टूबर।
कोरोना से बचाव को लेकर समाज के अलग-अलग वर्ग के लोग अपने-अपने तरीके से भूमिका निभा रहे हैं। कोई लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रहा है तो कुछ लोग बचाव की सामग्री बांटकर कोरोना काल में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं । तिलकामांझी के सुर्खीकल मोहल्ले के रहने वाले मिहिर झा भी इस मुहिम में लगे हुए हैं। वह ना सिर्फ लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं, बल्कि बचाव की सामग्री भी उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके साथ साथ स्वच्छता के भी अलख जगा रहे हैं।

टेंट हाउस चलाने वाले मिहिर झा कहते हैं कि कोरोना काल जब शुरू हुआ तो हमारा काम बंद हो गया। कुछ दिनों तक तो यह उम्मीद थी कि एक दो महीने की बात है। फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन जब कोरोना काल लंबा खींचता गया तो यह बात समझ में आ गई कि इसमें समाज के लोगों को भूमिका निभानी होगी। टेंट का काम फिलहाल बंद होने से मेरे पास कोई काम था नहीं। बेवजह वक्त बर्बाद हो जा रहा था। मैंने सोचा क्यों ना इसे सही उद्देश्य के लिए खर्च किया जाए।

सुबह- शाम लोगों को किया जागरूक:
सबसे पहले मैंने शाम के वक्त में लोगों को समझाना शुरू किया। प्रतिदिन शाम को 4 से 6 बजे तक मैं अपनी गली में खड़ा हो जाता और लोगों से सामाजिक दूरी का पालन करने की अपील करता था। जब मैंने यह काम शुरू किया तो मेरे साथ मोहल्ले के कुछ और लोग भी जुड़ गए। इसके साथ ही मेरे टेंट हाउस में काम करने वाले लोग भी मेरा साथ देने लगे। इसके बाद मैंने सुबह में भी यह काम शुरू कर दिया। इसका काफी फर्क भी पड़ा। शुरुआत में तिलकामांझी के आसपास के मोहल्लों में कोरोना के काफी मरीज पाए जा रहे थे, लेकिन पिछले कई महीनों से इसकी संख्या बहुत कम रह गई है।

कचरा फेंकने की आदत में कराया सुधार:
लोगों से दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करवाने के बाद फोकस सफाई की ओर गया। इसके बाद में लोगों को सड़क पर या फिर इधर-उधर कचरा फेंकने से मना करने लगा। मैं और मेरी टीम के सदस्य लोगों से नगर निगम के डस्टबिन में हीं कचरा फेंकने की अपील करने लगे । लोगों ने भी इसे सकारात्मक तौर पर लिया। आज आपको तिलकामांझी के सुर्खीकल मोहल्ले में सड़क पर कचरा नहीं दिखेगा। साथ ही लोग भी दो गज की सामाजिक दूरी का पालन करते दिखेंगे ।

लोगों को लापरवाही के प्रति चेताया:
सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी दौरान कोरोना के मरीजों की संख्या कम होने लगी तो लोग यह खुशफहमी मान बैठे कि अब कोरोना खत्म हो गया है। पहले लोग बिना मास्क घर से बाहर नहीं निकलते थे, लेकिन जब से कोरोना के मामले कम होने लगे पहले की ही तरह लोगों का आना जाना शुरू हो गया। इसके बाद मैंने लोगों के बीच मास्क बांटना भी शुरू कर दिया। जैसे ही लोग घर से निकले अगर उसने मास्क नहीं पहना है तो उसे मैं और मेरी टीम के सदस्य मास्क देने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि फिर से लोग मास्क पहन कर घर से निकलने लगे हैं।

दुर्गा पूजा में अभियान को किया तेज:
मिहिर कहते हैं कि यहां के लोग थोड़े आस्थावान हैं। वह पूजा पाठ करने से नहीं रुकेंगे। हमारा मकसद रोकना भी नहीं है, लेकिन कोरोना की जो गाइडलाइन है, उसका पालन करते हुए लोगों से पूजा करने की अभी हम लोग अपील कर रहे हैं। 26 अक्टूबर तक हमलोगों ने सुबह से शाम तक अपनी ड्यूटी लगा रखी है। इस दौरान झुंड में चल रहे लोगों से दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करवाते हैं। अगर कोई भी बिना मास्क के दिख गया तो उसे मास्क भी उपलब्ध कराते हैं। टीम के सदस्य के पास सैनिटाइजर भी उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर लोगों का हैंड सैनिटाइज भी कराया जाता है।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें