कोरोना को मात देकर कर्तव्य पथ पर लौटे डॉ विनोद कुमार

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कटोरिया रेफरल अस्पताल के प्रभारी 11 वर्षों से मरीजों का कर रहे इलाज

क्षेत्र में मरीजों के बीच भरोसे का दूसरा नाम है डॉ विनोद कुमार

बांका, 21 अक्टूबर
कोरोना काल में हर कोई सावधानी बरत रहा है. घर से कम निकल रहा है. लोगों से मिलने से बच रहा है, लेकिन इन सबके बीच स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दोहरी चुनौती है. इन मुशकित भरे हालातों में उन्हें अपना बचाव करते हुए लोगों की सेवा भी करनी है. इन्हीं में एक हैं, कटोरिया रेफरल अस्पताल में तैनात डॉ विनोद कुमार, जो ना सिर्फ मरीजों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि उन्हें कोरोना से बचाव के लिए जागरूक भी कर रहे हैं. इस दरम्यान वह कोरोना की चपेट में भी आए, लेकिन स्वस्थ होने के बाद दोबारा अपने काम में लग गए.

डॉ विनोद कुमार कहते हैं उनकी जिम्मेदारी है कि लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करें. रेफरल अस्पताल में उनकी नियुक्ति डॉक्टर के रूप में है. इस वजह से मरीजों का इलाज तो करना है, लेकिन वह यह समझते हैं कि इस संकट के समय अपनी तरफ से और क्या कर सकते हैं. यही सोच कर वह और उनकी पूरी टीम कटोरिया के लोगों की सेवा में लगी हुई है. इसका परिणाम भी सामने आने लगा है. कुछ दिन पहले तक लोग जांच कराने से घबराते थे, लेकिन आज ऐसी स्थिति हो गई है प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की कोरोना जांच हो रही है. अब तो कोरोना के मामले भी कम हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वह और उनकी पूरी टीम लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रही है.

मरीजों में विश्वास का दूसरा नाम बन चुके हैं डॉक्टर विनोद कुमार: कटोरिया रेफरल अस्पताल में पिछले 11 साल से डॉ विनोद कुमार अपनी सेवा दे रहे हैं. क्षेत्र का हर व्यक्ति इनके नाम से वाकिफ है. कई मरीज तो इनके समय में इलाज कराने के लिए रेफरल अस्पताल आते हैं. क्षेत्र के लोगों के लिए विश्वास का दूसरा नाम बन गए हैं डॉक्टर विनोद कुमार.

क्षेत्र के लोगों का भी मिल रहा है सहयोग: डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि जब तक आपको क्षेत्र के लोगों का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक आप सफल नहीं हो सकते. मेरी सफलता की वजह मेरे क्षेत्र के लोग ही हैं. जबसे कोरोना काल शुरू हुआ यहां के लोगों ने काफी सावधानी बरती. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि आप कटोरिया के ग्रामीण इलाकों में भी जाएंगे तो वहां पर आपको कोई मास्क बांटते दिख जाएगा तो कोई लोगों से शारीरिक दूरी का पालन करवाते दिख जाएगा. यही वजह है कि कटोरिया में कोरोना का इतना व्यापक असर नहीं हुआ जितना के अन्य जगहों पर हुआ.

परिवार के लोगों ने बढ़ाया हौसला: डॉ विनोद कुमार मूल रूप से रोहतास जिले के रहने वाले हैं. यहां पर उनके साथ उनकी पत्नी और बच्चे रहते हैं. पत्नी हाउसवाइफ हैं, जबकि दोनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि अगर परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो वह अपने काम को इतने अच्छे से नहीं कर पाते जितना किया. उन्होंने बताया जब वह कोरोना संक्रमित पाये गए थे, एक बार तो उन्हें ऐसा लगा कि अब क्या होगा. परिवार के अन्य लोग तो संक्रमित नहीं हो जाएंगे. लेकिन उनके बच्चों ने उनका हौसला बढ़ाया. पत्नी का भी सहयोग मिला. इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला. यही कारण है कि वह ठीक होने के तुरंत बाद मरीजों की सेवा में फिर से लग गए.

कोविड 19 बचाव को ले कर कर रहे जागरूक: डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि अगर संक्रमण से बचना है, तो इन मानकों का पालन करना आवश्यक है-
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के दौर में भी तमाम चुनौतियों के बावजूद बेहतर कार्य करती रही एल एस रिंकी कुमारी

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– खगड़िया जिले के चौथम बाल बिकास परियोजना कार्यालय में हैं तैनात

– विभागीय कार्यों के साथ – साथ कोविड – 19 से बचाव के लिए भी लोगों को करती रही जागरूक

खगड़िया, 21 अक्टूबर, 2020
खगड़िया जिले के चौथम बाल बिकास परियोजना कार्यालय में एल एस ( महिला पर्यवेक्षिका ) के पद पर तैनात रिंकी कुमारी कोविड-19 के दौर में भी तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी। बल्कि, मजबूत इच्छाशक्ति और बुलंद हौसले के साथ अपने विभागीय कार्यों को तो बेहतर तरीके से तो करती ही रहीं। इसके अलावे कोविड-19 संक्रमण से खुद भी सुरक्षित रही और कोविड-19 से बचाव के लिए भी क्षेत्र की सेविका के साथ – साथ आम लोगों को भी जागरूक करती रही।

– जिले में बेहतर कार्य के लिए जानी जाती है रिंकी : –
चौथम की सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने बताया कि एल एस रिंकी कुमारी कोविड-19 के दौर में भी वगैर किसी प्रवाह का अपने कार्यों को बखूबी अंजाम दी। पूर्व से भी यह बेहतर कार्य के लिए ना सिर्फ प्रखंड में जानी जाती है , बल्कि पूरे जिले में भी जानी जाती है।

– सामुहिक के साथ-साथ व्यक्ति गत रूप से भी लोगों को दी बचाव की जानकारी : –

एल एस रिंकी कुमार विभागीय कार्य के लिए क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोगों को समूह के साथ-साथ व्यक्तिगत यानी एक लोगों को भी कोविड-19 से बचाव को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी और उन्हें बचाव के प्रति सजग रहने के लिए जागरूक भी की। इस दौरान शारीरिक – दूरी का भी ख्याल रखी और इसके अलावे अन्य निर्देशों का भी पालन करते हैं।

– जिम्मेदारियाँ ने दूर कर दिया भय :-
एल एस रिंकी कुमारी ने बताया कि जब कोविड-19 का दौर शुरू हुआ था तो उस वक्त भय लगा था, किन्तु फिर सोचे कि मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है और हम ही डर जाएंगे तो फिर और लोगों का क्या होगा। इसी सोच ने मेरा मन के भय को दूर कर दिया और फिर विभागीय कार्यों के साथ – साथ लोगों को संक्रमण के दायरे से बचाने के लिए कोविड-19 के कार्यों में जुट गया और लोगों को जागरूक करने लगी।

– परिवार वालों का भी मिला सहयोग :-
एल एस रिंकी कुमारी ने बताया कि शुरुआती दौर में तो परिवार वाले सहमत नहीं थे। किन्तु, मेरी दृड़ संकल्पित इच्छाशक्ति देखकर परिवार वालों को सहमत होना पड़ा। परिवार वाले ना सिर्फ सहमत बल्कि सहयोग भी किया। दरअसल, लाॅकडाउन के कारण आने – जाने के सड़क पर गाड़ी की सेवा बंद हो गई थी। ऐसी स्थिति में परिवार के लोग बाइक से कार्यालय छोड़ने – लाने में सहयोग किए।

– जिले में कोरोना योद्धा के रूप में हो रही पहचान :-
एल एस रिंकी कुमारी के अपने कार्यों के बल पर जिले में अपनी पहचान कोरोना योद्धा के रूप में बनाई। इसके लिए वह तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी बल्कि जिम्मेदारी निभाने के लिए डटी रही।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर : –
– मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– हमेशा शारीरिक – दूरी का पालन करें।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ – सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– लगातार हाथों की साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से धोएं।

सही पोषण देकर बच्चे को रखें स्वस्थ

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पोषण की कमी से बच्चे आ सकते हैं बीमारियों की चपेट में

बच्चे को कुपोषण से दूर रखने के लिए दे सही पोषण

भागलपुर, 21 अक्टूबर

सही पोषण हर किसी के लिए जरूरी होता है, लेकिन बच्चों के लिए खास तौर पर इस बारे में ध्यान देना चाहिए. अगर बचपन में किसी को सही पोषण मिल जाता है तो वह जीवन भर स्वस्थ रहता है. अगर सही पोषण नहीं मिला तो बच्चे तमाम बीमारियों की चपेट में आ जाते है. इसलिए परिजनों को बच्चे के सही पोषण पर ध्यान देना चाहिए.
नारायणपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ विजेंद्र कुमार विद्यार्थी बताते हैं कि बच्चों का अगर सही पोषण प्राप्त तो उसका काफी दूरगामी प्रभाव होता है. इससे बच्चा ना सिर्फ उस समय स्वस्थ रहता है, बल्कि कुपोषण से भी दूर रहता है साथ ही भविष्य में भी वह बीमारियों से बचा रहता है. इसलिए मां-बाप को बच्चे के सही पोषण पर ध्यान देना चाहिए.

रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है मजबूत: डॉ विद्यार्थी कहते हैं कि बचपन में सही पोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. जिससे उसके शरीर में किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने की क्षमता सामान्य लोगों के मुकाबले अधिक हो जाती है. इससे उसका बीमारियों से बचाव होता है.

आहार और सही पोषण के अंतर को समझें: डॉक्टर विद्यार्थी कहते हैं कि लोग सामान्य आहार और सही पोषण के अंतर को समझ नहीं पाते हैं. खूब खिलाना सही पोषण नहीं है. इससे बच्चे की भूख तो मिट जाती है, लेकिन उसके शरीर को जिस चीज की जरूरत होती है वह नहीं मिल पाता. सही पोषण का मतलब होता है शरीर की आवश्यकता के मुताबिक भोजन. बच्चों को आवश्यकता के अनुसार भोजन देना चाहिए जिसमें प्रोटीन और विटामिन की मात्रा संतुलित हो. भरपूर भोजन देने से बचना चाहिए.

सही पोषण नहीं मिलने से हो सकता है मोटापा का शिकार: बच्चे को अगर सही पोषण नहीं मिलता है तो वह मोटापा का शिकार हो सकता है. जिससे वह कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाता है. साथ में कुपोषित होने का भी खतरा रहता है. इसलिए बच्चे को हमेशा सही पोषण देने की जरूरत है.

दाल और सब्जी का सूप रहता है फायदेमंद: बच्चों को सामान्य आहार के साथ दाल और सब्जी का सूप अधिक से अधिक देना चाहिए. इससे बच्चों के शरीर को विटामिन और प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति होती है. इसके साथ बच्चों को सुबह और शाम में दूध देने की जरूरत है. इससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

ग्रीन चैनल कार्यक्रम से सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवा

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– केयर इंडिया के सहयोग से जिले में स्वास्थ्य कर्मियों को मिला प्रशिक्षण
जिले में कार्यक्रम की हुई शुरुआत, क्रियान्वयन को स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण
– बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवा, लोगों को मिलेगी समुचित सुविधा

जमुई, 21 अक्टूबर।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति लगातार कवायद कर रही है। समिति हर हाल में बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने को लेकर कटिबद्ध दिख रही है । इसी कड़ी में बुधवार को जिले में ग्रीन चैनल कार्यक्रम की शुरुआत हुई । इसके सफल क्रियान्वयन और बढ़ावा देने के लिए के लिए पूर्व में ही जिले के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह प्रशिक्षण केयर इंडिया के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति में दिया गया । इस प्रशिक्षण से ग्रीन चैनल कार्यक्रम को ना सिर्फ बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा भी बेहतर होगी । लोगों को आसानी से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी।

– बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवा और सशक्त होंगे स्वास्थ्य कर्मी
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश प्रसाद ने बताया कि ग्रीन चैनल कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा तो बेहतर होगा ही इसके अलावे स्वास्थ्य विभाग के एएनएम, आशा समेत अन्य कर्मी सशक्त भी होंगे। साथ ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा।

– प्रसव से लेकर दवाई तक की व्यवस्था होगी सुदृढ़ : –
ग्रीन चैनल कार्यक्रम से सुरक्षित प्रसव को भी बल मिलेगा। इसके लिए उक्त कार्यक्रम के तहत एएनएम को प्रसव कराने की नई तकनीक के बारे में लगातार प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावे दवाई समेत अन्य स्वास्थ्य सेवा में सकारात्मक बदलाव होगा।

– स्वास्थ्य कर्मियों को सामान ढोने से मिलेगी निजात : –
ग्रीन चैनल कार्यक्रम से स्वास्थ्य कर्मियों की परेशानियाँ भी दूर होंगी। इन कार्यक्रमों के तहत ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि एएनएम समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर पूरा संसाधन उपलब्ध कराया जा सके और सामान ढोने की समस्या से निजात मिल सके।

– लाभार्थी स्तर पर सेवाओं की मांग को प्रोत्साहित किया जाएगा
ग्रीन चैनल कार्यक्रम के तहत आशा एवं एएनएम के सहयोग से सामुदायिक स्तर पर गर्भावस्था, मातृ-शिशु पोषण, परिवार कल्याण, किशोर स्वास्थ्य एवं प्रतिरक्षण संबंधी सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के साथ उसकी गुणवत्ता भी सुधारी जाएगी। एवीडी किट में ग्लूकोमीटर, फीडर डॉप्लर, बीपी मशीन, ब्लड सुगर जांच सहित कई जरूरत की किट उपलब्ध रहेगी। इस किट बैग की मदद से समय पर एएनएम लाभार्थी को स्वास्थ्य लाभ दे सकेंगी।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– व्यक्तिगत साफ – सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– हमेशा दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– अपरिचित लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक गाइडलाइन का ध्यान रखें।
– भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

जिले में आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह का शुभारंभ

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– आयोडीन के महत्व की दी जाएगी जानकारी, सेवन के लिए किया जाएगा जागरूक
– आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों की भी दी जाएगी जानकारी

लखीसराय, 21 अक्टूबर।
बुधवार को जिले में विश्व आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह का शुभारंभ हो गया। इस सप्ताह का 28 अक्टूबर को समापन होगा। पूरे सप्ताह के दौरान विभिन्न कार्यक्रम समेत अन्य गतिविधियां के माध्यम से लोगों को आयोडीन के महत्व की जानकारी दी जाएगी। लोगों को आयोडीन सेवन के लिए जागरूक भी किया जाएगा। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। ताकि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँच सकें और आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों पर विराम विराम लगे।

– सभी पीएचसी प्रभारी को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश : –
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि विश्व आयोडीन अल्पता बचाव सप्ताह के सफल संचालन के लिए जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पीएचसी स्तर पर लोगों को जागरूक करने, प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँचाने के लिए आवश्यक पहल करने को कहा गया है।

– आशा घर – घर पहुँचाएंगी आयोडीन के महत्व की जानकारी
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ीं आशा कार्यकर्ता घर – घर जाकर भी लोगों को आयोडीन के महत्व की जानकारी देंगी। इसको लेकर जिले के सभी पीएचसी में बैठक कर आशा कार्यकर्ता को जरूरी दिशा निर्देश दिया जाएगा। साथ ही आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी।

– बैनर – पोस्टर से भी लोगों को किया जाएगा जागरूक : –
बैनर – पोस्टर के माध्यम से भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आयोडीन के महत्व की जानकारी पहुँचाई जाएगी और जागरूक किया जाएगा। इसके लिए पीएचसी में बैनर – पोस्टर लगाया जाएगा। जिसके माध्यम से लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों एवं इसके महत्व का संदेश दिया जाएगा।

– आयोडीनयुक्त नमक के सेवन से इन बीमारियों से रहेंगे दूर
आयोडीन युक्त नमक सेवन से हमसब कई बीमारियों से दूर रहेंगे। जैसे,- घेघा रोग, बहरापन, अविकसित मस्तिष्क, गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, बौनाकद, सीखने और समझने की क्षमता, शारीरिक रूप से कमजोर, अपंग, मृत बच्चा पैदा होना, वयस्कों में ऊर्जा की कमी, जल्दी थकावट आदि। इसलिए, लोगों को आयोडीन युक्त नमक का ही सेवन करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

– आयोडीन युक्त नमक को ऐसे रखें सुरक्षित : –
आयोडीनयुक्त नमक को सुरक्षित रखने के लिए हवा बंद डब्बे में रखें। नमक के डब्बे को छायादार एवं सूखे स्थान पर रखें, चूल्हे से दूर रखें, खाने पकाने के अंत में नमक को डालें। इससे नमक सुरक्षित रहेंगे और नमक की क्षमता बनी रहेगी।

– जानें क्या है आयोडीन : –
आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है। जो मानव विकास और बढ़त के लिए आवश्यक है। जिसकी शरीर को विकास एवं जीने के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। आयोडीन का एक फायदा यह है कि यह थायराइड ग्रंथियों को सुचारु रूप से काम करने में मदद करता है और यह ग्रंथियां थाइराइड के हार्मोन्स छोड़ती हैं। जिससे शरीर का मेटाबॉलिक स्तर नियंत्रित रहता है और यह मेटाबॉलिक स्तर शरीर के कई अंगों की कार्यशीलता को प्रभावित करता है। जैसे- खाने को पचाने, भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने तथा सोने के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा आमतौर पर सामान्य विकास और बढ़त के लिए लगभग 100 – 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है और इस आवश्यकता की पूर्ति न होने पर व्यक्ति कई विकारों का शिकार भी बन सकता है।

– आयोडीन युक्त नमक सेवन से होने वाले लाभ : –
आयोडीन युक्त नमक का नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में आवश्यक आयोडीन की पूर्ति होती है। इससे
तेज दिमाग, स्वस्थ एवं ऊर्जा से भरपूर शरीर और कार्य क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है। गर्भवती महिलाओं द्वारा आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल करने से गर्भपात की समस्या भी नहीं होती है और स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है। इसके अलावा गर्भ में शिशु का शारीरिक व मानसिक रूप से पूर्ण विकास भी होता है।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
– मास्क का अनिवार्य रूप से करें उपयोग।
– बार – बार साबुन या अल्कोहलयुक्त हैंड सैनिटाइजर
से हाथों की अच्छी तरह करें सफाई।
– दो गज की शारीरिक – दूरी का हमेशा करें पालन।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।

महिलाओं की जागरूकता कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में होगा कामयाब

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सिटीजन जर्नलिस्ट: सुषमा कुमारी, आंगनबाड़ी सेविका, मनेर(पटना)

पटना/ 21, अक्टूबर: कोरोना संक्रमण के प्रसार को वर्तमन समय में दरकिनार नहीं किया जा सकता. वैज्ञानिक शोध से लेकर सरकारी दिशानिर्देशों तक सभी जगह कोरोना संक्रमण को सदी की सबसे गंभीर महामारी का तमगा भी मिल चुका है. वैश्विक स्तर पर यह पहली दफ़ा ही होगा जब लोग अचानक किसी संक्रमण के भय से सहम कर घरों में रहने को मजबूर हुए हों. इन तमाम मुश्किलों के बीच कुछ सकारात्मक पहल भी हुए जो व्यक्तिक स्तर से सामुदायिक स्तर तक बड़े बदलाव का साक्षी भी बना. यह बदलाव लोगों के व्यवहार परिवर्तन से शुरू होकर सामुदायिक बदलाव की कड़ी को जोड़ने में भी सफल रहा. कोरोना से बचाव के उपायों को अपनाकर लोगों ने यह साबित कर दिखाया कि चुनौती चाहे जितनी भी बड़ी हो सजगता उसका एक सशक्त समाधान हो सकता है. कोरोना अपने कदम शहरों के रास्ते गाँवों की कच्ची गलियों में भी बढ़ाता दिखा. कई लोगों के मन में यह आशंका भी उठी कि यदि कोरोना का रुख गाँवों की तरफ हुआ तो इसके प्रसार को रोकना सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती हो सकती है. लेकिन कोरोना के कदम गाँवों की कच्ची पगडंडियों पर संतुलन बनाने में नाकामयाब रहे. कोरोना गाँव में प्रवेश तो किया, लेकिन लोगों की एकजुटता के सामने कोरोना को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी. इसके पीछे कई वजह थे. समुदाय के लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने की ज़िम्मेदारी सरकार की तरफ़ से आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, आशा एवं एएनएम को दी गयी. यह सिर्फ़ जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं ने इसे एक चुनौती की तरह स्वीकार भी किया. कारण यह भी था कि उन्हें सिर्फ अपने समुदाय को सुरक्षित नहीं करना था, बल्कि ख़ुद को भी सुरक्षित करते हुए अपने परिवार को भी सुरक्षा प्रदान करनी थी.

महिलाओं को जागरूक करना असरदार हुआ साबित:

यदि ग्रामीण परिवेश की बात करें, तब आज भी महिलाओं की अपनी पहचान स्थापित करने की क़वायद बादस्तूर जारी है. लेकिन कोरोना काल में इन्हीं महिलाओं की जागरूकता ने कोरोना के प्रसार को रोकने की पहल भी की. लॉकडाउन के बाद आंगनबाड़ी केंद्र बंद करने पड़े एवं आईसीडीएस सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका घरों का दौरा करना शुरू की. यह अवधि काफ़ी महत्वपूर्ण साबित हुयी. गृह भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं ने महिलाओं के साथ काफ़ी समय व्यतीत किया, जिससे महिलाओं में कोरोना के विषय में जागरूकता भी बढ़ी एवं कोरोना से बचाव के उपायों के विषय में उनकी गंभीरता भी. महिलाओं की यह जागरूकता कारगर साबित होती दिखी. महिलाओं ने घरों से अपने बच्चों को निकलने से रोका एवं अपने घर के पुरुषों को भी मास्क, हैण्ड वाशिंग एवं शारीरिक दूरी की जरूरत पर चर्चा करना शुरू की. यह पहली दफ़ा था, जब पुरुष महिलाओं के सुझाव को तवज्जो देने पर मजबूर हुए. वहीं दूसरी तरफ़, जीविका दीदियाँ भी मास्क निर्माण कार्य में जुट गयी थी. यह सिर्फ एक महिला द्वारा मास्क निर्माण नहीं था, बल्कि कोरोना रोकथाम में महिलाओं की भूमिका की पटकथा भी तैयार कर रहा था. यही वह कड़ी थी, जहाँ गाँव में कोरोना के प्रति बचाव की बयार चलनी शुरू हुयी जो आज भी जारी है.

लोगों को देखकर बदलता है सुरक्षा का अर्थ:

यह सत्य है कि अभी भी कोरोना का खतरा कमा नहीं है. कोरोना के बढ़ते मामले रोज इसकी पुष्टि भी करते हैं. लेकिन धीरे-धीरे कहीं न कहीं लोगों की सोच से कोरोना का भय निकलता भी जा रहा है. सड़क पर चलने वाले लोगों के मास्क इस्तेमाल में कमी महसूस की जा रही है. ये संकेत खतरनाक परिणाम दे सकते हैं. बात यह भी है कि लोग आस-पास के लोगों को देखकर भी कोरोना के खतरे का अनुमान लगाने लगते हैं. याद रखें आपके चेहरे से हटने वाले मास्क आपके सामने वाले लोग को यह भी सन्देश देते हैं कि कोरोना का संक्रमण अब खत्म हो चुका है. आपका मास्क पहनना, हाथों की लगातार सफाई करना एवं शारीरिक दूरी को अपनाना आपके सामने वाले व्यक्ति को भी कोरोना संक्रमण के प्रति आगाह करता है. इसलिए कोरोना को रोकने में आपकी सजगता सबसे अधिक महत्वपूर्ण है

कोविड-19 से बचाव के लिए सतर्कता ही सबसे बेहतर उपाय

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– घर से निकलते ही मास्क लगाएँ और साथ में रखें सेनेटाइजर
– वैक्सीन आने तक मास्क और दो गज की दूरी है जरूरी
खगड़िया, 20 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सतर्क रहना हमारा फर्ज है और तत्काल सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे आसान और बेहतर उपाय है। इसके लिए हमें नियमित रूप से मास्क का उपयोग करना होगा, हमेशा शारीरिक – दूरी बनाए रखना होगा। साथ ही इसके लिए लोगों को जागरूक भी करना होगा। ताकि खुद के साथ – साथ पूरा समाज भी संक्रमण के दायरे से दूर रहे हैं।
– लोगों में बढ़ी है जागरूकता पर अभी और सतर्क रहने की जरूरत :-
खगड़िया निवासी युवक कुणाल कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर के सापेक्ष लोगों में काफी जागरूकता बढ़ी है और लोग कोविड-19 के गाइड लाइन का पालन भी कर रहे हैं। किन्तु, बचाव को लेकर अभी और सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का दौर खत्म नहीं हुआ है। वहीं, उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर लोग कोविड-19 महज एक अफवाह मान रहे थे। किन्तु, जब संक्रमण का शिकायत गाँव में मिलने लगा तो लोग धीरे – धीरे सतर्क होने लगे। वर्तमान में तो पूर्व के सापेक्ष लोगों में काफी साकारात्मक बदलाव हुए हैं। जिसका परिणाम भी साकारात्मक देखने को मिल रहें हैं।
– शुरुआती दौर में तो लगा कुछ नहीं है कोविड-19
कुणाल ने बताया कि शुरूआती तो दौर तो मुझे भी कोविड-19 की जानकारी मिली तो मुझे लगा यह कुछ नहीं है। किन्तु, इसके बाद जब मेरे आसपास के कुछ लोग बीमार हुए तो उनकी पीड़ा देखकर समझ में आया कि नहीं कोविड-19 है। इसलिए, इससे डरने नहीं मजबूत इच्छाशक्ति के साथ इनसे सतर्क रहने की जरूरत है। कुणाल ने कहा कि इसके लिए लोगों को सरकार के गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। साथ ही खुद के साथ – साथ दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
– लक्षण दिखते ही कराना चाहिए जाँच : –
कुणाल ने बताया कि जैसे ही कोविड-19 की जानकारी मिले या फिर लक्षण दिखे तो तुरंत स्थानीय पीएचसी या अस्पतालों में जाँच कराना चाहिए। दरअसल, समय पर समुचित इलाज कराने से सही और सटीक बीमारी का जानकारी मिलती है और चिकित्सकों को भी समुचित इलाज करने में आसानी होती है। वहीं, कुणाल ने कहा कि हमेशा शारीरिक – दूरी का पालन और मास्क नियमित उपयोग करना चाहिए।
– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

मंदिर में कोरोना की गाइडलाइन का करा रहे पालन

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श्रद्धालुओं को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे अकाउंटेंट अनुज कुमार मिश्रा
स्कूल से छुट्टी के बाद मंदिर पहुंच अपने काम में लग जाते

भागलपुर, 20 अक्टूबर।
नारायणपुर प्रखंड के भ्रमरपुर गांव में मां दुर्गा का सिद्ध पीठ मंदिर है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पास के ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों में भी है। इसलिए आसपास के गाँव से भी महती तादाद में श्रद्धालु यहां पर आते हैं। अभी कोरोना काल में भी प्रशासन के तमाम निर्देश के बावजूद कुछ लोग यहां पर आ ही जा रहे हैं। इस वजह से कभी-कभी भीड़ भी हो जा रही है। ऐसे में कोरोना के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था। लेकिन गांव के ही अनुज कुमार मिश्रा ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधे पर लिया है । शाम को जब लोग आरती के लिए मंदिर आते हैं, उस समय वे मंदिर के गेट पर खड़े हो जाते हैं। वे मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालू से कोरोना के नियमों का पालन करने के लिए कहते हैं।

दो गज की दूरी है जरूरी:
मंदिर आने वाले सभी लोगों से अनुज कुमार मिश्रा दो गज की शारीरिक दूरी बनाकर रखने को कहते हैं। भीड़ से बचने की सलाह देते हैं। दो लोगों के बीच 2 गज की दूरी का ख्याल रखने की अपील श्रद्धालुओं से लगातार करते रहते हैं।

मास्क और सैनिटाइजर जरूरी:
शाम के वक्त पूजा और आरती के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अनुज मास्क और सैनिटाइजर पास में रखने की अपील करते हैं। श्रद्धालुओं को कहते हैं कि आप मास्क पहनकर जरूर आएं। पास में सैनिटाइजर रखें। घर पहुंचने के बाद अपने हाथ को सैनिटाइज जरूर करें।

कस्तूरबा विद्यालय में अकाउंटेंट हैं अनुज :
प्रखंड क्षेत्र के कस्तूरबा विद्यालय में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं अनुज कुमार मिश्रा। उनसे जब पूछा गया कि इस कार्य के करने के पीछे प्रेरणा कहां से आई तो उन्होंने बताया कि पहले ऐसा लग रहा था कि इस बार भीड़ नहीं होगी। लेकिन माता के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालु कभी-कभार कोरोना की गाइडलाइन को भूल जाते हैं और भीड़ लग जाती है। मैंने सोचा कि किसी को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। शाम 4 बजे स्कूल से आने के बाद इस काम में लग जाता हूं।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जिले में कालाजार से बचाव के लिए डीडीटी का छिड़काव

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– कोविड-19 के साथ कालाजार से सतर्कता है जरूरी
– बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार, इसलिए रहें सावधान

लखीसराय, 20 अक्टूबर।
लखीसराय जिले में कोविड-19 के साथ कालाजार से बचाव के लिए भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे जोर-शोर के साथ डीडीटी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिले के लखीसराय प्रखंड में यह छिड़काव पूरा हो चुका है जबकि सूर्यगढ़ा एवं पिपरिया में पूरे जोर-शोर के साथ किया जा रहा है।चिकित्सकों के अनुसार कोविड-19 के अलावा कालाजार से भी बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है। क्योंकि, यह भी संक्रामक तरीके की बीमारी होती है।

– कालाजार से बचाव के लिए डीडीटी छिड़काव ही सबसे बेहतर उपाय : –

जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए गाँव – गाँव में डीडीटी का छिड़काव कराया जा रहा है। दरअसल, डीडीटी छिड़काव ही कालाजार से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। साथ ही इससे बचाव के लिए लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को साफ – सफाई समेत रहन – सहन में बदलाव करने की आवश्यकता है।

– बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार : –

कालाजार बालू मक्खी के काटने से फैलता है। डीडीटी के छिड़काव से ही बालू मक्खी के प्रभाव को पूर्णत: खत्म किया जा सकता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीडीटी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे बालू मक्खी को समाप्त किया जा सके।

– लक्षण दिखते ही करायें इलाज, सरकार अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित व्यवस्था

कालाजार का लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाँच कराएं और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार इलाज कराएं। सरकार अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही इन बीमारियों से बचने के जमीन ( सतह ) पर नहीं सोयें । मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।

– कालाजार के लक्षण : –
– लगातार रूक – रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना
– दुर्बलता
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है
– प्लीहा में नुकसान होता है

– मरीजों को आर्थिक सहायता का मिलता है लाभ
कालाजार से पीड़ित रोगी को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में बीमार व्यक्ति को राज्य सरकार द्वारा 6600 रुपए और केंद्र सरकार द्वारा 500 रुपए दिए जाते हैं। यह राशि कालाजार संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के समय में दिया जाता है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार संक्रमित रोगी को केंद्र सरकार की तरफ से 4000 रुपए दिए जाते हैं।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें ।
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

बदलते मौसम में बच्चों का रखें विशेष ध्यान

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तापमान ऊपर नीचे होने से बच्चे पड़ जा रहे बीमार
सर्दी, खासी और जुकाम से पीड़ित हो रहे बच्चे
बांका, 20 अक्टूबर।
मौसम में बदलाव हो रहा है। दिन का तापमान सामान्य से अधिक रह रहा है, जबकि रात में सामान्य से कम।  ऐसे मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। पिछले सप्ताहभर  में काफी संख्या में बच्चे इलाज करवाने के लिए अस्पताल आए हैं। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में काफी संख्या में बच्चे बीमार पड़ जा रहे हैं। इस वजह से उनकी विशेष देखभाल की जरूरत है। परिजनों को इस वक्त बच्चों पर खास ध्यान देना चाहिए।
रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है कम:
डॉ चौधरी ने बताया कि बदलाव वाले मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से वह बीमारी की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से अगर तापमान कम हुआ तो सर्दी बुखार की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
 कपड़े को रखें साफ:
बच्चे के कपड़े को हमेशा साफ रखें। कपड़े को गिला नहीं होने दें। अगर कपड़ा गीला हो जाए तो उसे तत्काल बदल दें। ऐसा करने से बच्चे बीमारी की चपेट में आने से बच जायेंगे। गीला कपड़ा पहने रहने से बच्चे सर्दी, खांसी, जुकाम या फिर अन्य कोई दूसरी बीमारी की चपेट में आ सकतें हैं।
3 दिन से अधिक बुखार हो तो कोरोना जांच कराएं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि बच्चे को अगर बुखार हो जाए तो डॉक्टर को दिखाकर दवा ले लें, लेकिन अगर बुखार 3 दिन से अधिक रह जाए तो उसकी कोरोना जांच करा लें। हालांकि बच्चों को कोरोना होने की आशंका कम रहती है। इसके बावजूद सावधानी बरतने में कोई बुराई नहीं है।
 कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें .
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें