कोविड-19 के बीच विधानसभा चुनाव, गाइडलाइन का करें पालन, संक्रमण से रहें दूर

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– मतदान केन्द्रों पर शारीरिक – दूरी का पालन सुनिश्चित कराने को आवश्यक पहल में जुटे पदाधिकारी
– कोविड-19 संक्रमण से बचाव को मतदाताओं को जागरूक करेगा स्वास्थ्य विभाग

खगड़िया, 19 अक्टूबर ।
खगड़िया में बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण का चुनाव 28 अक्टूबर को होगा। मतदान की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक महकमा जुटा हुआ है । तमाम पदाधिकारी व कर्मी ससमय काम पूरा करने को दिन – रात एक कर कार्यों को निष्पादित कर रहे हैं। कोविड – 19 के बीच होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में दो गज की दूरी बहुत ही जरूरी है। इसे सुनिश्चित कराने को लेकर आवश्यक तैयारियाँ पूरे जोर-शोर के साथ की जा रही हैं । मिशन, मतदान केंद्र पर हर हाल में शारीरिक – दूरी का पालन सुनिश्चित कराना और मतदाताओं को संक्रमण के दायरे से दूर रखना।

– कोविड-19 संक्रमण से बचाव को मतदाताओं को जागरूक करेगा स्वास्थ्य विभाग : –

जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 से बचाव के लिए मतदान केंद्र पर मतदाताओं को जागरूक करने के स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी व कर्मी तैनात रहेंगे। ये अधिकारी और कर्मी मतदान के दिन मतदान केंद्र पर लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देंगे और शारीरिक – दूरी का पालन भी कराऐंगे। मतदान के पूर्व भी कोविड-19 से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा मतदाताओं को आवश्यक जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग संक्रमण के दायरे से दूर रहें।

– मतदान के दौरान गाइडलाइन का करें पालन, संक्रमण के खतरे से रहें दूर

मतदान के दौरान मतदान केंद्र पर सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन करें। इससे ना सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे बल्कि मतदान केंद्र पर अन्य मतदाता भी संक्रमण के दायरे से दूर रहेंगे। इसके लिए शारीरिक – दूरी का पालन, मास्क का उपयोग, सैनिटाइजर का उपयोग आदि करना जरूरी है।

– संक्रमण से बचाव को मतदान केंद्र पर ये सुविधाएं रहेंगीं उपलब्ध :-
कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए मतदान केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता भी तैनात रहेंगीं। जो मतदान के लिए आने वाले प्रत्येक मतदाता का प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग करेंगी। इसके बाद ही अंदर प्रवेश की अनुमति मिलेगी। मतदान केंद्र का पूरा परिसर हर दो घंटे पर सैनिटाइज किया जाएगा। कचरा निस्तारण के लिए पीले रंग की डस्टबिन रखी जाएगी । इसके अलावे अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –

– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें।
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

कोविड-19 के बीच बढ़ी डेंगू और चिकनगुनिया की संभावना, रहें सावधान

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– संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है डेंगू और चिकनगुनिया, इसलिए साफ – सफाई का रखें विशेष ख्याल
– स्थिर साफ पानी में पनपता है यह मच्छर, इसलिए नहीं होने दें जलजमाव
– सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित इलाज की व्यवस्था

लखीसराय , 19 अक्टूबर।
लगातार बदल रहे मौसम के कारण कोविड-19 के बीच डेंगु और चिकनगुनिया बीमारी की भी संभावना बढ़ गई है। इसलिए, सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए रहन – सहन में बदलाव के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की दरकार है। दरअसल कोरोना, डेंगु व चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरू होते हैं। कई लक्षण एक-दूसरे के समान हैं। जिसके कारण लोगों की बीमारी की पहचान करने में भी काफी परेशानी होती है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाँच कराने की जरूरत है। लोगों को कोविड-19 के दौर में डेंगु और चिकनगुनिया बीमारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि इसको लेकर सजग रहना चाहिए।

– लक्षण दिखते ही तुरंत करायें इलाज, अस्पतालों में समुचित व्यवस्था है उपलब्ध : –

जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत जाँच करानी चाहिए। जाँच की रिपोर्ट के अनुसार इलाज करानी चाहिए। ताकि लोगों की परेशानियाँ नहीं बढें और समय पर इलाज शुरू हो सके। इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।

संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है डेंगू और चिकनगुनिया : –
डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है। इसलिए, अगर आप दिन में सोते हैं तो अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर एवं सभी कमरे को साफ – सुथरा एवं हवादार बनाएं रखें। साथ ही आसपास भी साफ – सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके लिए अपने पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को भी जागरूक करें। ताकि इस बीमारी के दायरे से सामुदायिक स्तर पर लोग दूर रहें।

– स्थिर साफ पानी में पनपता है यह मच्छर, इसलिए नहीं होने दें जलजमाव
यह मच्छर स्थिर साफ पानी में पनपता है। इसलिए, घर समेत आसपास में जलजमाव नहीं होने दें। जलजमाव होने पर उसे यथाशीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था कर हटायें और पानी जमा होने वाले जगहों पर किरासन तेल या कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें। साथ ही टूटे – फूटे बर्तन, एसी / कूलर, फ्रीज के पानी निकासी ट्रे, पानी टंकी समेत अन्य जगहों पर पानी का जमाव नहीं होने दें।

– डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण : –
– तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द तथा ऑखों के पीछे दर्द होना
– त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान
– नाक, मसूढ़े से या उल्टी के साथ रक्त श्राव होना
– काला पैखाना होना

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

संक्रमण से बचाव को लेकर कोरोना जांच की गति तेज

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घर-घर जाकर आशा कार्यकर्ता लोगों की कर रही कोरोना जांच
त्यौहार व चुनाव को लेकर बढ़ रही भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग का फैसला

बांका, 19 अक्टूबर।
त्यौहार और चुनाव को लेकर बढ़ रही भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। कोरोना का संक्रमण नहीं फैले इसे लेकर जांच की गति तेज कर दी गई है। कोरोना की चेन तोड़ने के लिए आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं।
कोरोना जांच की गति हुई तेज
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग त्यौहारी सीजन और चुनाव को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद है। लोगों में किसी प्रकार कोरोना का संक्रमण नहीं फैले इसे लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है कोरोना जांच की गति तेज कर दी गई है । इससे कोरोना का संक्रमण कम होगा, साथ ही इसकी चेन भी टूटेगी।

बूथ पर आशा कार्यकर्ता वोटरों को कराएंगी हैंड सैनिटाइज:
डॉ चौधरी ने बताया के बांका में 28 अक्टूबर को वोटिंग है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारी की है। मतदान के दिन बूथ के बाहर आशा कार्यकर्ता मौजूद रहेंगी। वह मतदान के लिए आने वाले लोगों के हाथ सैनिटाइज करवाएंगी। साथ ही वोटरों को एक ग्लब्स भी मुहैया कराएंगी। मतदाता वोट डालने के बाद ग्लब्स को बूथ के बाहर रखे डस्टबिन में डाल देंगे। मेडिकल कचरा के डिस्पोजल की भी व्यवस्था की गई है, ताकि लोगों में इससे संक्रमण नहीं फैले।

तापमान सौ डिग्री से अधिक होने पर लोगों को रोका जाएगा:
डॉ चौधरी ने बताया कि वोट डालने के लिए आने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान अगर किसी के शरीर का तापमान 100 डिग्री से अधिक रहेगा तो उसे वहीं पर रोक दिया जाएगा। 20 मिनट के बाद फिर से उसकी जांच की जाएगी। दूसरी बार भी जांच में अगर उसका तापमान 100 से कम नहीं होगा तो उसे संदिग्ध कोरोना मरीज माना जाएगा।

संदिग्ध कोरोना मरीजों के लिए अलग से वोटिंग की व्यवस्था:
डॉ चौधरी ने बताया कि संदिग्ध कोरोना मरीजों के लिए अलग से वोटिंग की व्यवस्था की जाएगी। आखिर 1 घंटे में सिर्फ कोरोना के संदिग्ध मरीज ही अपना वोट डालेंगे। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनकर उनसे मतदान करवाएंगे। मतदान के बाद इन सभी संदिग्ध मरीजों की कोरोना जांच की जाएगी।

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

मायागंज अस्पताल में सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी सेवा अब दोपहर एक बजे तक

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– सामान्य मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बढ़ाई और सुविधा
– ओपीडी में इलाज कराने वाले सभी मरीजों की हो रही है कोरोना जांच

भागलपुर, 17 अक्टूबर

मायागंज अस्पताल प्रशासन एक-एक कर सभी सुविधाएं अस्पताल में बहाल करता जा रहा है. पहले इंडोर उसके बाद ओपीडी और अब ओपीडी की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है. पहले ओपीडी सेवा सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक चलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दोपहर 1 बजे तक कर दिया गया है. इससे बड़े पैमाने पर इलाज करने के लिए आने वाले सामान्य मरीजों को राहत मिलेगी. मालूम हो कि मायागंज अस्पताल को 5 अप्रैल को करोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज बंद हो गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निर्देश के बाद पहले इंडोर सेवा शुरू की गई. उसके बाद ओपीडी सेवा शुरू हुई.
मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया ओपीडी में बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है. मरीजों को इलाज कराने में कोई परेशानी नहीं हो, इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने समय को एक घंटा अधिक कर दिया. उन्होंने बताया 3 घंटे की ओपीडी में कुछ लोगों के लौटने की शिकायत सामने आई थी. उसे दूर करते हुए यह फैसला लिया गया है.

कोरोना मरीजों का आइसोलेशन वार्ड में चल रहा है इलाज: डॉ भगत ने बताया सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी चालू होने के बाद अब कोरोना मरीजों का इलाज अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड में चल रहा है. वहीं गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज इमरजेंसी में हो रहा है. अस्पताल में इलाज कराने वाले हर व्यक्ति की पहले कोरोना जांच हो रही है. उसके बाद उसका इलाज किया जा रहा है. अस्पताल आने वाले किसी मरीज में कोरोना का संक्रमण न फैले, इसलिए यह कदम उठाया गया है.

ओपीडी को लगातार किया जा रहा सैनिटाइज: डॉ भगत ने बताया इलाज के दौरान मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, इसे लेकर ओपीडी को लगातार सैनिटाइज किया जाता है. आगे भी इसे सैनिटाइज किया जाता रहेगा. साथ ही इलाज करने वाले डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मास्क लगाकर इलाज कर रहे हैं. अस्पताल प्रशासन ने इसे लेकर विशेष व्यवस्था की है. साथ ही इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज और उसके परिजनों मास्क लगाने के बाद ही प्रवेश कर सकते हैं.

आसपास के जिलों समेत झारखंड से भी आते हैं मरीज: डॉ भगत ने बताया मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए आसपास के जिलों समेत झारखंड से भी मरीज आते हैं. 6 महीने तक अस्पताल में सामान्य मरीजों का इलाज नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था लेकिन इंडोर और ओपीडी सेवा शुरू हो जाने से उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है. खासकर गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा और ना ही निजी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा.

नहीं करें अनदेखी, रहें कोरोना से सतर्क:
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें ।
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।

त्यौहारी सीजन शुरू है नहीं करें लापरवाही,बरतें सावधानी 

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चुनावी सभा में उमड़ रही है भीड़
पिछले कुछ दिनों से कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा बढ़ना चिंताजनक
मास्क पहनना नहीं भूलें
भागलपुर, 17 अक्टूबर।
स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी और प्रशासनिक सतर्कता की वजह से पिछले कुछ दिनों से कोरोना मरीजों का आंकड़ा घटने लगा था। लेकिन त्यौहार और चुनाव शुरू होते ही एक बार फिर से जिले में नए कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। आज से 1 सप्ताह पहले तक जहां प्रतिदिन 25 से 30 मरीज जिले में निकल रहे थे, वह अब बढ़कर 50 को पार कर गया है। यह चिंताजनक है जिसे लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी तरह की लापरवाही नुकसानदेह साबित हो सकती है।
लोगों के सहयोग से ही कोरोना पर काबू पाना संभव ,-
मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से धीरे-धीरे कोरोना काबू में आ रहा था, लेकिन अब लोग मान नहीं रहे हैं। बेवजह भीड़ लगा रहे हैं। बिना मास्क के निकल जा रहे हैं। इस तरह की लापरवाही से बचने की जरूरत है। बिना लोगों के सहयोग से कोरोना पर काबू पाना मुश्किल है। इसलिए लोगों को इस महामारी के खिलाफ सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
बेवजह घर से नहीं निकलें:
डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि देखा जा रहा है लोग कोरोना को लेकर उतने सतर्क नहीं रह गए है। शहर के चौक- चौराहा, चाय और पान दुकान समेत बाजारों में काफी भीड़ देखी जा रही है। इससे बचने की जरूरत है। घर से तभी निकलें जब काम हो। अन्यथा बेवजह भीड़ नहीं लगाएं और बाहर में शारीरिक दूरी का पालन करें। एक दूसरे से दो गज  की दूरी पर ही साथ खड़े रहें।
मास्क पहनना नहीं भूलें:
डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि कोरोना काल की जब शुरुआत हुई थी तो लोग काफी सतर्कता से रह रहे थे। घर से कम निकल रहे थे। निकल भी रहे थे तो मास्क पहनकर, लेकिन अब देखा जा रहा है के लोग मास्क पहनने में ढिलाई बरत रहे है। उन्हें लग रहा है कि अब कोरोना खत्म हो गया। मगर ऐसा नहीं है। अगर कोरोना खत्म भी हो जाए तो भी लोगों को मास्क पहनना चाहिए। इससे ना सिर्फ कोरोना, बल्कि कई दूसरी बीमारियों से भी बचाव होता है। संभव हो तो हाथ में ग्लब्स भी पहना करें।
बाहर से घर आने पर हाथ सैनिटाइज करना नहीं भूले:
 डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि सबसे पहले तो लोगों को अभी घर से निकलना ही कम चाहिए, लेकिन अगर घर से बाहर निकलते हैं तो जहां आप जाते हैं वहां पहुंचने पर हाथ को सैनिटाइज कर लें। साथ ही जब घर वापस आएं तो भी हाथ सैनिटाइज जरूर करें। अगर संभव हो तो अपने कपड़े और जूते को घर के बाहर ही रखें। इससे आप कोरोना से सुरक्षित रहेंगे।
साफ सफाई का रखें ध्यान:
 डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि सफाई हर बीमारी से हमारा बचाव करता है। इसलिए सबसे खास शर्त यही होनी चाहिए कि हम अपने घर को साफ रखें। जो हमारा कार्यस्थल है वहां पर भी सफाई का ध्यान रखें। घर को साफ सुथरा रखने का सबसे बेहतरीन तरीका यही है कि आप उसे कम से कम गंदा करें, इससे सफाई बनी रहेगी।
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

सास-बहू सम्मेलन से सफल होगा परिवार नियोजन

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– बेटे-बेटियों में चल रही फर्क की प्रथा होगी दूर, छोटा परिवार, खुशहाल परिवार को मिलेगा बल
– एक साथ सास – बहू को किया जा रहा है जागरूक, छोटा परिवार, खुशहाल परिवार के महत्व की दी जाएगी जानकारी

लखीसराय, 17 अक्टूबर।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाये जा रहे सास – बहू सम्मेलन कार्यक्रम से परिवार नियोजन को बल मिलेगा और जनसंख्या स्थिरीकरण का उद्देश्य सफल होगा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाँव स्तर पर सास – बहू सम्मेलन का आयोजन कर सास – बहू दोनों को एक साथ जागरूक जाएगा। सास – बहू स्वस्थ समाज की आधारशिला थीम पर मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के तहत परिवार कल्याण कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन होगा।

परिवार नियोजन के लिए सास – बहू का आपसी सामंजस्य महत्वपूर्ण : –
जिला मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने कहा कि सामाजिक व्यवस्थाओं में परिवार का बड़ा महत्व है। खासकर घर की सबसे बड़ी व बुजुर्ग महिला का । शायद, यही वजह होगा कि बहू का निर्णय कहीं ना कहीं सास की विचारधाराओं से प्रभावित रहता है। परिवार नियोजन के लिए सास – बहू का आपसी सामंजस्य महत्वपूर्ण है। इसके कारण सास और बहू को एक मंच पर साथ लाकर जागरूक किया जाएगा।

छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का दिया जा रहा है संदेश : –
सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम के माध्यम से खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का संदेश दिया जाएगा। दरअसल, आज भी देखा जा रहा है कि लोग परिवार नियोजन को उचित नहीं मानते हैं। खासकर पुराने ख्यालात के लोग तो इसे किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं मानते हैं। जो कि महज एक अवधारणा है और यह अवधारणा वर्षों से चली आ रही है। उक्त कार्यक्रम से ना सिर्फ लोग परिवार नियोजन के लिए जागरूक होंगे, बल्कि वर्षों से चली आ रही है बेटे – बेटियों में फर्क की अवधारणा भी दूर होगी। इसके लिए बच्चे दो ही अच्छे स्लोगन के माध्यम से सास – बहू को जागरूक किया जाएगा और छोटा परिवार के महत्व की जानकारी दिया जाएगा।

सही उम्र में शादी और शादी के दो वर्ष बाद ही हो पहला बच्चा : –
सास – बहू सम्मेलन कार्यक्रम के तहत लोगों को यह भी जानकारी दी जाएगी कि बच्चे की शादी सही उम्र पर ही करें। शादी के कम से कम दो साल बाद ही पहला बच्चा हो और दूसरे बच्चे में कम से कम तीन साल का अंतर हो। इससे ना सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण सफल होगा, बल्कि माँ और बच्चे दोनों स्वस्थ भी रहेंगे। स्वस्थ माँ से ही मजबूत बच्चा संभव है।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –

– व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर
का इस्तेमाल करें।
– छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
– उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
– घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
– बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
– आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
– मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
– किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
– कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
– बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

कोविड-19 पर रोकथाम के लिए जन – जन की भागीदारी जरूरी

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– सामुदायिक स्तर पर जब लोग होंगे जागरूक, तभी मिलेगी सफलता

– अभी खत्म नहीं हुआ है कोविड-19 का खतरा, इसलिए जारी रखें सतर्कता

खगड़िया, 16 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 पर रोकथाम एवं इससे बचाव को लेकर आवश्यक स्थाई समाधान के लिए सरकार पूरी तरह सजग है। इसके अलावा कोविड-19 पर रोकथाम के लिए जन – जन की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। इसलिए, खुद के साथ दूसरों को भी कोविड उपायों के पालन करने के लिए प्रेरित करें। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नही हो और कोविड-19 संक्रमण पर रोकथाम लगे।

-जन – जन की भागीदारी से कोविड-19 संक्रमण पर लगेगा विराम :

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि जन – जन की भागीदारी से ही कोविड-19 संक्रमण पर विराम लगेगा। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता एवं उनकी सहभागिता जरूरी है। इससे समाज प्रत्येक व्यक्ति जागरूक होंगे और कोविड-19 से बचाव के लिए के आवश्यक एहतियात का पालन करेंगे।

-लक्षण दिखते ही कराएं जाँच :

कोविड-19 का लक्षण दिखते ही जाँच कराना चाहिए। स्थानीय पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक मुफ्त जाँच की सुविधा उपलब्ध है। समय पर जाँच कराने से ना सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे, बल्कि पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे। क्योंकि जाँच में देरी करने पर कई लोग संक्रमण के दायरे में आ जाते हैं। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच कराएं।

मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से करें उपयोग : –

कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें। साथ ही दूसरों को भी उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। खासकर घर से बाहर निकलने के वक्त अनिवार्य रूप से मास्क लगाऐ और सेनेटाइजर साथ लेकर बाहर निकले।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

अभियान में छूटे बच्चों को पिलाया गया पल्स पोलियो का ड्रॉप

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– आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता और एएनएम ने घर-घर जाकर बच्चों को पिलाई पोलियो ड्रॉप
– कोविड19 मानकों के तहत ‘नो टच’ नियम का किया गया पालन
 भागलपुर, 16 अक्टूबर
पल्स पोलियो अभियान के तहत छूट गए बच्चों को शुक्रवार को पोलियो का ड्राप पिलाया गया. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर इन बच्चों को पोलियो का ड्राप पिलाया. इस दौरान कोविड19 मानकों का पालन किया गया. स्वास्थ्यकर्मियों ने बच्चे को बगैर छुए बगैर पोलियो की खुराक दी.
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि 11 अक्टूबर से पोलियो अभियान चलाया गया था जो 15 अक्टूबर तक चला। अभियान के दौरान जिले के अधिकतर बच्चों को दवा की खुराक दे दी गई थी. जो कुछ बच्चे छूट गए थे, उनकी लिस्टिंग कर उन्हें शुक्रवार को पोलियो का ड्राप पिलाया गया. इस क्रम में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और एएनएम द्वारा घर-घर जाकर कोविड19 मानकों का पालन कराते हुये बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाया.
‘नो टच’ नियम का किया गया पालन: डॉ मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि शुक्रवार को भी पहले की ही तरह ‘नो टच’ नियम का पालन किया गया. दरअसल, इस बार कोरोना काल में चल रहे अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को बच्चों को छूने का निर्देश नहीं दिया गया था. उन्हें समझाया गया था कि जिस वक्त आप बच्चे को ड्रॉप पिलाएंगे उस दौरान बच्चे को उसकी मां अपनी गोद में रखेंगी. अगर बच्चा 5 साल का है तो वह भी स्वास्थ्यकर्मियों से दूरी बनाकर रहेगा.
कोरोना को लेकर बरती गई सतर्कता: डॉ मनोज कुमार चौधरी ने कहा पोलियो ड्रॉप पिलाते वक्त एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा कोविड अनुरूप व्यवहारों का पालन किया गया। सभी के द्वारा मास्क और ग्लव्स भी पहन कर ही बच्चों को ड्रॉप पिलाया गया. साथ में बच्चे के परिजन ने भी मास्क पहन रखे थे. जिन बच्चों के परिजन ने मास्क नहीं पहन रखे थे, उन्हें मास्क पहनने के लिए कहा गया. जब वह मास्क पहन कर आ गए, तब उनके बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाया गया.
11 से 15 अक्टूबर तक चला अभियान: जिले के 6 लाख से भी अधिक बच्चों का 11 से 15 अक्टूबर तक पल्स पोलियो अभियान के तहत खुराक दी गई. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारी कर रखी थी. आशा, एएनएम और सेविकाओं को पहले से ही प्रशिक्षण दिया जा चुका था. साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति भी अभियान को लेकर काफी सजग था.
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का पालन भी जरूरी-
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेसकवर या मास्क पहनें।
– 2 गज की शारीरिक दूरी का पालन करें।
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

लक्ष्य कार्यक्रम से गुणवत्तापूर्ण प्रसव को मिलेगा बल 

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– मातृ एवं शिशु की अस्वस्थता व मृत्यु दर में आएगी कमी
– संस्थागत प्रसव को मिलेगा बढ़ावा, लोग देंगे प्राथमिकता
– केयर इंडिया का भी मिल रहा है सहयोग
लखीसराय, 16 अक्टूबर।
सरकार द्वारा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव के लिए लक्ष्य कार्यक्रम से ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा बल्कि इससे शिशु – मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी। इसका साकारात्मक बदलाव भी देखा जा रहा है। दरअसल, इस कार्यक्रम का उद्देश्य ही है प्रसव एवं प्रसव के बाद देखभाल में सुधार करना। इस कार्यक्रम के तहत लोगों को बेहतर सुविधा मिल रही है। जिसके कारण लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दे रहे हैं।
– जिले के सभी अस्पतालों में क्रियान्वित है लक्ष्य कार्यक्रम : –
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि लक्ष्य कार्यक्रम जिले के सभी अस्पतालों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही लोगों को इस कार्यक्रम के तहत बेहतर सुविधा मिल रही है। जिसके कारण लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दे रहे हैं।
– लक्ष्य कार्यक्रम से गर्भवती महिला की देखभाल में होगा सुधार : –
इस कार्यक्रम के तहत प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, प्रसव संबंधी गहन देखभाल इकाइयों और  उच्च निर्भरता इकाइयों ( एचडीयू ) में गर्भवती महिलाओं की देखभाल में सुधार होगा।  साथ ही प्रत्येक गर्भवती महिला और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म लेने वाले नवजात शिशु लाभान्वित होंगे। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सम्मानीय मातृत्व देखभाल (आरएमसी) की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस पहल के अंतर्गत बहुमुखी रणनीति अपनाई गई है। जिनमें बुनियादी ढांचागत सुधार, उन्नयन, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाना और प्रसूति गृहों में सुविधाओं में सुधार लाना शामिल है।
-लक्ष्य कार्यक्रम में केयर इंडिया भी कर रही है सहयोग :
लक्ष्य कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए केयर इंडिया भी सहयोग कर रही है और इस कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद कर रहे हैं। ताकि यह कार्यक्रम का लोगों को बेहतर तरीके से लाभ मिले।
इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें ।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें ।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

स्वस्थ्य तन, मन और जीवन के लिए साबुन से हाथ धोएं, हर धर्म में हाथ धोने और स्वच्छता का महत्व

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•हाथ धुलाई दिवस पर
स्वच्छता प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए धर्मगुरुओं ने की अपील

• स्वच्छता के प्रति के धर्मगुरुओं की भागीदारी के लिए वेबिनार का आयोजन

पटना: “अगर हम किसी भी धर्म को देखें तो पानी से पवित्रता और सफाई की मान्यता है। कभी भी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च में जाने से पहले पानी से पवित्रता का एक अनुष्ठान होता है। इसलिए लोगों को कोरोना की इस महामारी के वक्त में धर्मगुरुओं का साबुन से हाथ धोने के लिये कहना लोगों के ज़हन में पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।” प्रभाकर सिन्हा, वाश विशेषज्ञ, यूनिसेफ, पटना ने कहा कि 15 अक्टूबर ग्लोबल हैंडवाशिंग दिन अर्थात् वैश्विक हाथ धुलाई दिवस है। यह एक ऐसा दिवस है जो बीमारियों को रोकने और जीवन को बचाने के लिए साबुन के साथ हैंडवाशिंग, जो एक सस्ता और प्रभावी तरीका है, उसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और समझने के लिए समर्पित किया गया है।
बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन और यूनिसेफ ने ग्लोबल हैंडवाशिंग दिवस पर हैंडवॉशिंग को बढ़ावा देने में धर्म-गुरुओं की भागीदारी पर वेबिनार का आयोजन किया।

वेबिनार में धर्मगुरुओं ने की स्वच्छता पर चर्चा:

वेबिनार में धर्मगुरुओं और यूनिसेफ के तकनीकी विशेषज्ञयों ने धार्मिक और वैज्ञानिक तथ्यों को मिलाकर हाथों की सफाई पर चर्चा की। धर्मगुरुओं में मुख्य वक्ताओं में प्रोफ़ेसर सय्यद शाह शामीमउद्दीन अहमद मुनेमिआ, बी.के. ज्योति, सिस्टर ज्योतिषा कन्नमक्कल और मौलाना अनिसुर रेहमान क़ासमी शामिल हुए। यूनिसेफ से तकनीकी विशेषज्ञयों में प्रभाकर सिन्हा, सुधाकर रेड्डी, मोना सिन्हा, सोनिया मेनन, निपुण गुप्ता और पंकज कुमार, फ़िया फाउंडेशन, इंटरनेट साथी, सुधाकर रेड्डी , वाश अधिकारी, यूनिसेफ ने हाथ धोने के लिए वैज्ञानिक पक्ष और आँकड़ों को प्रस्तुत किया। उन्होंने उचित समय पर हाथ धोने के महत्व पर बल दिया जैसे शौचालय को उपयोग करने के बाद, छींकने या खाँसने के बाद या किसी संक्रमित वस्तु के सम्पर्क में आने के बाद। उन्होंने ने कहा की, “हाथ धोने से दस्त (डायरिया) संबंधी बीमारियों में 30 % से 48% तक तथा गंभीर श्व्सन संक्रमण में 20 % तक की कमी लायी जा सकती है। इन डायरिया रोंगों के कारण हुई मौतें में से 34000(लगभग 60 % ) बच्चों की मौत खराब स्वच्छता, खराब साफ सफाई या असुरक्षित पेयजल के कारण हुई।”

मोना सिन्हा, विकास के लिए संचार विशेषज्ञ ने कहा, “साबुन से हाथ धोने की आदत से कोरोना से बचाव हो सकता है। लेकिन हमें ध्यान रखना होगा कि यह आदत छूटे नहीं और हमें इसे कायम रखना होगा ताकि कई अन्य बीमारियों से बचाव होता रहे।”
बी.के. ज्योती, चिकित्सा और शिक्षा प्रभारी, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ने समझाया कि अगर हमें लोगों में साबुन से हाथ धुलाई की आदत को कायम रखना है तो हमें उनका हृदय परिवर्तन करना होगा। उन्होंने कहा की , बी.के. ज्योती, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ने कहा कहा की , “शरीर में जो होता है उसका प्रभाव हमारे मन पर भी पड़ता है। नहाने के बाद हमें अच्छा लगता है। हाथ धोने से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मन में ख़ुशी शांति का अनुभव होगा जिससे पूरे समाज का फ़ायदा होगा ।”

प्रोफ़ेसर सय्यद शाह शामीमउद्दीन अहमद मुनेमिआ ने कहा कि “इस्लाम धर्म में नमाज़ पढ़ने से पहले हम हाथ, पाव और अंत में मुँह भी साफ करते हैं। इसे वज़ु कहा जाता है। इसके मुताबिक पानी और अभी सबसे ज़रूरी साबुन का प्रभाव सब जगह होना चाहिए जैसे उंगलियों के बीच में, नाखूनों के बीच में| इस प्रक्रिया में पानी हाथ में लेकर उसका रंग देखा जाता है कि वह पानी साफ़ है एवं पीने के लायक है। यह प्रक्रिया हमें तीन बार हर नमाज़ से पहले करनी होती हैं। कोरोना के इस वक्त में हमें अपनी साफ सफाई और साबुन से हाथ धुलाई पर अधिक ध्यान देना होगा।” मौलाना अनिसुर रेहमान क़ासमी ने कहा की , “हर धार्मिक स्थल पर सबकी अनुमति से हमें हाथ धुलाई और सफाई का पोस्टर लगाकर लोगों को जागरूक करना होगा।”

गांव के महिलाओं को इंटरनेट व व्हाट्सएप के उपयोगिता पर ट्रेनिंग:

फ़िया फ़ाउंडेशन के पंकज कुमर ने कहा, “हमने गाँव की महिलाओं को इंटर्नेट और व्हाट्सएप के उपयोग में ट्रेनिंग देकर , इन 400 इंटरनेट- साथियों के साथ गांव-गांव में साबुन से हाथ धोने की जागरूकता बढ़ाई है।”
पिंकी देवी, एक इंटरनेट साथी ने बताया, ” हमें पहले बहुत दिक्क्त होती थी लोगों की सोच बदलने में। लेकिन हमने भी बार-बार बताया की हाथ की सफाई साबुन और पानी से होनी चाहिए. ये गीली मिट्टी नहीं चलेगी”।
सिस्टर ज्योतिषा कन्नमक्कल, नोट्रे डेम ने कहा की, “क्रिस्चन धर्म में कहा स्वच्छता में ईश्वर रहते हैं । उन्होंने बच्चों के द्वारा हाथ धोने के सही तरीक़ों का विडीओ दिखाया इंटनेट साथी से हम बहुत प्रेरित हुए हैं और हम अपने गांव-गांव में जागरूकता बढ़ाने के लिए इनकी तरह प्रयास करेंगे”
सुश्री निपुण गुप्ता, संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ ने कहा कि साबुन से हाथ धोना कायम रखना है चाहे कोरोना हो या न हो। सभी धर्म गुरु से अपील की कि हाथ की धुलाई, साबुन और साफ-सफाई की व्यवस्था अपने धार्मिक स्थलों पर ज़रूर करे और लोगों को तन मन से स्वस्थ रखने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएँ।

आंकड़ों की नजर में:

– असुरक्षित जल आपूर्ति एवं अपर्याप्त स्वच्छता एवं साफ़ सफाई 88% डायरिया रोग के लिए ज़िम्मेदार है।

– पाँच वर्ष से कम उम्र की कुल मृत्यु का 9.2% डायरिया रोंगो के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप 2013 में लगभग 6 लाख पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चें की मृत्यु हुई।

•इन डायरिया रोंगों के कारण हुई मौतें में से 34000 (लगभग 60 % ) बच्चों की मौत खराब स्वच्छता, खराब साफ सफाई या असुरक्षित पेयजल के कारण हुई।

•पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया कुपोषण का एक प्रमुख कारण है।