संक्रमण फैलने से रोकता है मास्क, अनिवार्य रूप से करें उपयोग

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– खुद के साथ – साथ समाज हित में भी मास्क लगाना बेहद जरूरी
– जुर्माने नहीं, कोविड-19 से बचने के उद्देश्य से लगायें मास्क
– अभी सतर्कता और सावधानी ही कोरोना से बचाव का सबसे बेहतर उपाय

जमुई, 15 अक्टूबर ।
कोविड-19 संक्रमण का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, हमें और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, थोड़ी सी लापरवाही से भी संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो सकता है। हालाँकि, सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रही और इससे बचाव के लिए स्थायी उपायों की व्यवस्था में अग्रसर है। किन्तु, तत्काल कोविड-19 से बचाव के लिए के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करना बेहद जरूरी है। क्योंकि अभी सतर्कता और सावधानी ही कोविड-19 से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है।

– संक्रमण रोकने का सबसे बेहतर माध्यम है मास्क : –
जिला सिविल सर्जन डॉ विजेंद्र सत्यार्थी ने बताया कि मास्क संक्रमण फैलने से रोकता है। संक्रमण रोकने का यह सबसे आसान और बेहतर माध्यम है। इससे ना सिर्फ खुद सुरक्षित रहेंगे, बल्कि आपके सामने वाले लोग भी सुरक्षित रहेंगे। इतना ही नहीं मास्क लगाना खुद के साथ – साथ समाजहित में भी जरूरी है। इसलिए, अभी मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो सके।

– जुर्माने नहीं, कोविड-19 से बचाव को लगायें मास्क :
मास्क का उपयोग व्यापक पैमाने पर सुनिश्चित करने को लेकर पुलिस द्वारा भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान पुलिस चौक – चौराहे से लेकर बाजार तक चेकिंग अभियान चलाकर मास्क नहीं पहनने वाले लोगों से कोविड-19 के गाइडलाइन का उल्लंघन करने के आरोप में जुर्माना वसूला जा रहा है। जिसका सकारात्मक बदलाव भी देखा जा रहा है। किन्तु, जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि कोविड-19 से बचाव के लिए नियमित और अनिवार्य रूप से मास्क लगाना बेहद जरूरी है।

– शारीरिक – दूरी का हमेशा रखें ख्याल : –

कोविड-19 से बचाव के लिए के दो गज की शारीरिक – दूरी का पालन करना भी जारी गाइडलाइन के अनुसार महत्वपूर्ण है। इसलिए, हर जगह निश्चित रूप से दो गज शारीरिक – दूरी का हमेशा पालन करें। साथ ही अनावश्यक यात्रा नहीं करें। भीड़ – भाड़ वाले जगहों से परहेज करें। खुद के साथ – साथ दूसरों को गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित करें।

– सामुदायिक स्तर बदलाव से ही रूकेगा संक्रमण : –
कोविड-19 संक्रमण पर रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर बदलाव भी जरूरी है। क्योंकि, संक्रमण पर तभी रोक लगेगा और हम कोविड-19 से जीत सकते हैं। जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करेंगे। इसलिए, खुद के साथ – साथ दूसरों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए पालन करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें ।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

साफ़-सफ़ाई के प्रति रहें सतर्क, डेंगू होने का ख़तरा होगा कम

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सही प्रबंधन के आभाव में डेंगू हो सकता है जानलेवा
बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह है जरुरी

लखीसराय/15 अक्तूबर: मच्छर जनित रोगों में डेंगू अति गंभीर रोगों की श्रेणी में आता है. वैसे तो बरसात के मौसम में इस बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है। परन्तु जल-जमाव के कारण इस बीमारी के फैलने की संभावना अधिक हो जाती है। इसलिए कोरोना के इस काल में कोरोना के साथ–साथ डेंगू से बचाव के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है ।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया आम लोगों के बीच सही जानकारी नहीं होने के कारण उनके लिए डेंगू शब्द से ही खौफ़ लगता है. यदि इसके विषय में आम लोगों को पूरी जानकारी दी जाए तो लोगों के मन से डेंगू का भय ख़त्म हो सकता है. डॉ. कुमार ने बताया ऐडीज नामक मच्छर के काटने से डेंगू बुखार होता है. यह मच्छर साफ़ पानी में पनपता है जो ज़्यादातर दिन में ही काटता है. डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है. 3 से 7 दिन तक लगातार बुखार, तेज सर में दर्द,पैरों के जोड़ों मे तेज दर्द, आँख के पीछे तेज दर्द, चक्कर एवं उल्टी, शरीर पर लाल धब्बे आना एवं कुछ मामलों में आंतरिक एवं बाह्य रक्त स्त्राव होना डेंगू के लक्ष्ण में शामिल है. डेंगू का कोई सटीक ईलाज तो उपलब्ध नहीं है पर कुशल प्रबंधन एवं चिकित्सकों की निगरानी से डेंगू को जानलेवा होने से बचाया जा सकत है. इसलिए जरुरी है कि डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह ली जाए. डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा खाना ख़तरनाक हो सकता है. जिस गाँव में डेंगु के मरीज मिलते है उस गाँव में फांगिग कराया जाता है और मरीज को समुचित इलाज के लिए पटना मेडिकल काॅलेज भेजा जाता है।

सही प्रबंधन के आभाव में डेंगू हो सकता है जानलेवा: डेंगू मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं. साधारण डेंगू, डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम. ज़्यादातर लोगों को साधारण डेंगू ही होता है जो कुछ परहेज करने से ठीक हो जाता है. डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम गंभीर श्रेणी मे आते हैं. यदि इनका शीघ्र ईलाज शुरू नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है. डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीजों के उपचार के लिए रक्तचाप एवं शरीर में खून के स्त्राव का निरीक्षण करना जरुरी होता है. राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार 1 प्रतिशत डेंगू ही जानलेवा है, लेकिन बेहतर प्रबंधन के आभाव में डेंगू 50 प्रतिशत तक ख़तरनाक हो सकता है.
ऐसे करें डेंगू से बचाव
 आस-पास साफ़-सफाई रखें एवं घर और उसके आस-पास में पानी जमा होने ना दें
 सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें
 बच्चों को फुल आस्तीन की कमीज एवं फुल पैंट पहनाए
 चापाकल एवं नल के पास पानी जमा नहीं होने दें

कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का भी करें पालन
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे पर ‘सहयोगी’ ने बढ़ाया सफ़ाई का हाथ, लोगों को किया जागरूक

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• दानापुर एवं बिहटा के लगभग 25 गाँवों में चली मुहिम
• कोरोना काल में हैण्ड वाशिंग साबित हुआ रामबाण
• हाथों की धुलाई के प्रदर्शन एवं हाथों से बने पोस्टर ने खींचा लोगों का ध्यान

पटना/ 15, अक्टूबर: शहरों में तो कोरोना काल की शुरुआत से ही लोगों ने हाथों की सफाई को अपनी प्राथमिकता में शामिल कर लिया था. लेकिन अभी भी गाँवों की कच्ची सड़कें एवं सड़कों पर उड़ती धूल लोगों को हाथों की सफ़ाई से दूर करती रही है. ऐसे में गुरूवार को दानापुर एवं बिहटा के लगभग 25 गाँवों के बच्चे, महिलाएं एवं बुजुर्ग हाथों की सफाई के गुर सीखते दिखें. साथ ही बच्चें एवं महिलाएं हाथों में हैण्ड वाशिंग का संदेश देते हाथों से बने पोस्टर भी दिखे, जो यह कहने का प्रयास कर रहे थे कि हाथों की सफाई की बयार शहरों से गाँवों की तरफ़ होने लगी है. ऐसा दृश्य ‘सहयोगी’ संस्था के सहयोग से संभव हो सका. प्रत्येक साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे विश्व स्तर पर मनाया जाता है. इस बार के ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे की उपयोगिता एवं महत्ता दोनों अधिक है, क्योंकि पूरा विश्व अभी कोरोना संक्रमण से संघर्ष कर रहा है. ऐसे में ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे कोरोना को मात देने में रामबाण साबित हो सकता है.

हाथों की धुलाई कर लोगों को दिया संदेश:

हाथों की स्वच्छता कई रोगों से व्यक्ति का बचाव करता है. कोरोना संक्रमण काल में इसकी उपयोगिता अधिक बढ़ी भी है. लेकिन हाथों को साफ़ करने का सही तरीके की जानकारी अभी भी लोगों को नहीं है. विशेषकर ग्रामीण परिवेश में इस जानकारी की अधिक कमी है. इसे ध्यान में रखते हुए सहयोगी संस्था के कर्मियों ने दानापुर एवं बिहटा के लगभग 20 गाँवों में ग्लोबल हैण्ड वाशिंग के दिन हैण्ड वाशिंग की मुहिम चलायी, जिसमें हैण्ड वाशिंग का प्रदर्शन किया गया एवं लोगों को हाथों की स्वच्छता पर जानकारी दी गयी.

हाथों से बने पोस्टर ने खींचा लोगों का ध्यान:
हाथों की सफाई कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इस बात को कोरोना संक्रमण ने साबित किया है. ऐसे में हाथों की सफाई के विषय में समुदाय के व्यवहार में परिवर्तन सबसे जरुरी हो गया है. ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे के मौके पर सहयोगी संस्था के सहयोग से महिलाएं एवं बच्चे इसी व्यवहार परिवर्तन को करते भी दिखे. उनके हाथों में हाथों से बने पोस्टर पर ‘ स्वच्छता को अपनाओ, इसे अपना धर्म बनाओ’, ‘ हम सबका एक ही नारा, साफ़-सुथरा हो शहर अपना’ जैसे कई स्लोगन दिखे, जो इस बात की पुष्टि करते दिखे कि आने वाले समय में शहरों के साथ गाँवों में भी स्वच्छता की चर्चा घर-घर होने वाली है.

स्वच्छता महिला विकास में भी सहायक:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी सहाय ने बताया कि कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही हाथों की सफाई की उपयोगिता पर चर्चा बढ़ने लगी है. लेकिन हाथों की सफाई या स्वच्छता सिर्फ़ स्वास्थ पर सकारात्मक असर नहीं डालता, बल्कि यह सामाजिक विकास की भी बुनियाद खड़ी करता है. उन्होंने बताया कि हाथों की बेहतर सफाई करने से लोगों के व्यवहार में एक सकारात्मक परिवर्तन आता है. यह परिवर्तन भले ही छोटा दीखता हो, लेकिन ग्रामीण परिवेश के हिसाब से इसे एक अहम बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा सकता है. यदि ग्रामीण परिवेश के लोग हाथों की सफाई के प्रति इतने सतर्क हो जायें तो घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ़ भी सतर्क एवं मुखर आसानी से हो सकेंगे. जिस तरह संक्रमण को दूर करने के लिए हैण्ड वाशिंग जरुरी है, ठीक उसी तरह महिलाओं के विकास के लिए घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की सफाई भी जरुरी है.

सर्दी, फ्लू और कोरोना के अंतर को समझें

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– 100. 4 डिग्री से अधिक बुखार होने पर ही कोरोना
– सिर्फ साधारण बुखार होना कोरोना का नहीं है लक्षण
– बचाव हेतु कोविड अनुरूप आचरण का हर हाल में करें पालन

बांका, 15 अक्टूबर

सर्दी, फ्लू और कोरोना तीनों ही बीमारियों में बुखार होना आम बात है. लेकिन अभी कोरोना काल चल रहा है, इसलिए लोग साधारण बुखार को भी कोरोना मान लेते हैं. जबकि ऐसा नहीं है. सर्दी और फ्लू में 100 डिग्री से कम बुखार भी रह सकता है, लेकिन कोरोना संक्रमण में नहीं.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि 100.4 डिग्री से अधिक बुखार होने पर ही कोरोना संक्रमण का खतरा माना जा सकता है. हालांकि अब तो बिना लक्षण वाले भी कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप को हल्की बुखार हो या फिर सर्दी, आप यह मान बैठे कि आपको कोरोना संक्रमण हो गया है.

डॉक्टर से परामर्श कर लें उचित सलाह: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अभी मौसम में बदलाव हो रहा है. इस वजह से कई लोग वायरल की चपेट में आ रहे हैं. सर्दी-खांसी भी हो रही है. ऐसे में खुद से यह निर्णय नहीं लें कि आपको कोरोना हो गया है या फिर सामान्य वायरल बुखार, इसके लिए आप डॉक्टर के पास जाएं. वह आपकी जांच कर आपको उचित सलाह देंगे. बीमारी के अनुसार दवा देंगे और परहेज करने को बताएंगे. उसका पालन करें. इससे आपका स्वास्थ्य जल्द बेहतर हो जाएगा.

छींक आना कोरोना के लक्षण नहीं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि सिर्फ छींक आना कोरोना का लक्षण नहीं माना जाता है. साथ ही खांसी में बलगम निकले तो यह भी कोरोना के लक्षण में नहीं गिना जाता है. हां, अगर सूखी खांसी हो रही हो और उसके साथ बुखार भी है तो चिंता की बात जरूर है. इसलिए साधारण खांसी और सर्दी होने पर डॉक्टर की सलाह लें. वह जो दवा बताए, उसी का सेवन करें.

सांस लेने में तकलीफ होना कोरोना का सबसे मजबूत लक्षण: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि सांस लेने में अगर किसी व्यक्ति को तकलीफ हो रही है. उसका दम फूल रहा है तो यह कोरोना संक्रमण हो सकता है. इसे कोरोना का सबसे मजबूत लक्षण माना जाता है. हालांकि अब तो कोरोना के लक्षण का दायरा काफी बढ़ गया है और कई लोग बिना लक्षण वाले कोरोना के शिकार बने हैं. लेकिन अगर सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाए और कोरोना जांच कराएं.

कोविड अनुरूप आचरण का हर हाल में करें पालन: अगर आपको सर्दी हो या फिर फ्लू या कोई अन्य बीमारी कोरोना के लिए सरकार की गाइडलाइन का पालन अवश्य करें. कोविड अनुरूप आचरण का पालन कर ही संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों से दो गज की दूरी बना कर रहें. किसी के साथ बैठते वक्त मास्क अवश्य लगाएं और संभव हो तो हाथ में ग्लव्स भी पहने या समय-समय पर हाथों की सफाई करते रहें।

पोषण पर ध्यान देकर गर्भवती महिलाएं खुद के साथ बच्चे को भी रखें सुरक्षित

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प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर शरीर को बीमारी लड़ने के लिए करें तैयार

खुद की और शिशु की बेहतर सेहत के लिए रहन-सहन पर ध्यान देना है जरूरी

भागलपुर, 15 अक्टूबर

गर्भावस्था में महिलाओं को काफी संभल कर रहना पड़ता है. खासकर भोजन को लेकर. दरअसल, इससे न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी इसका असर पड़ता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पोषण पर खास ध्यान देने की जरूरत है. इस दौरान खुद और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पोषण को सबसे ऊपर रखने की जरूरत है.

स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा सिंह कहती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की बीमारी से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है, इसलिये अपनी और शिशु की सेहत को बेहतर करने लिये जरूरी है कि रहन-सहन और पोषण का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाए. शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाया जाए. गर्भावस्था में बीमार होने से अच्छा है शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाया जाए. इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

मौसमी फल का करें सेवन: गर्भावस्था के दौरान तेल और मसालेयुक्त भोजन से परहेज करना चाहिए. इस दौरान महिलाओं में खाने का लालच बढ़ जाता है. हमेशा स्वादिष्ट भोजन करने का मन करता है. इस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है. इस दौरान मौसमी फल का सेवन बहुत ही फायदेमंद हैं. बादाम, किशमिश, खजूर या फिर अखरोट का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है.

खुद के ऊपर तनाव को हावी नहीं होने दें: तनाव शरीर की बीमारी से लड़ने वाली ताकत को कम करता है. जो बात आपके दिमाग पर असर करती है, वह आपके शरीर पर भी असर करती है. इसलिए तनाव को अपने अंदर नहीं आने दें. हमेशा खुश रहने की कोशिश करें. जब आपको तनाव नहीं होगा तो आपके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत हमेशा मजबूत बनी रहेगी.

व्यायाम और योग करें: गर्भावस्था के समय खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है. इसमें व्यायाम करना बहुत ही फायदेमंद रहता है. प्रसव होने से पहले का योग न केवल गर्भवती महिलाओं को सेहतमंद रखता है, बल्कि तनाव भी कम करता है. गर्भावस्था के समय काम करते रहना भी बहुत फायदेमंद है. इस अवस्था में वजन भी नहीं बढ़ने देना चाहिए. इससे शुगर और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों से बचाव होता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद है.

डॉक्टर की सलाह को मानें: गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर ने विटामिन, फोलिक एसिड, कैल्सियम और शरीर की अन्य जरूरतों को पूरा करने वाले सप्लीमेंट की सलाह देते हैं. इसे लेना न भूलें. दरअसल, इस अवस्था में महिलाएं ज्यादातर समय घर के अन्दर ही बिताती हैं. इससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती है, इसलिये इसे लेना जरूरी है. हां, डॉक्टर की सलाह के बगैर ना लें.

कोरोना से बचाव के लिए इन बातों का रखें ख्याल

1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें.

2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें.

3. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी.

4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें.

5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें.

बीमारियों से दूर रहने के लिए साबुन से हाथ धोने पर दिया जा रहा बल

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• 15 अक्टूबर को मनाया जाता है ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे
• ग्लोबल हैंडवाशिंग डे पर यूनिसेफ व सामाजिक संगठनों ने चलाया अभियान
पटना, 14 अक्टूबर:  कोविड संक्रमण के दौरान मास्क के इस्तेमाल के साथ हाथों की नियमित साफ सफाई रखने पर भी जागरूकता बढ़ी है. साबनु पानी से 40 सेकेंड तक हाथों को धोना या इनकी उपलब्धता नहीं होने पर सैनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति लोग सचेत नजर आ रहे हैं. हाथों की साफ-सफाई रखने को लेकर राज्य में यूनिसेफ द्वारा भी अभियान चलाया गया है.
यूनिसेफ की बिहार ईकाई के वॉश विशेषज्ञ प्रभाकर सिन्हा ने बताया कि कोरोना आपदा की वजह से सभी लोग मुश्किल समय से गुज़र रहे हैं. और ऐसे समय में सभी तरह की बीमारियों को कम करने में हैंड हाइजीन का बहुत अधिक योगदान है. हैंड हाइजीन का ख्याल रख कर ही कोविड 19 से इस लड़ाई को जीता जा सकता है. हाथो की स्वच्छता प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कहा इस साल का विषय “सभी के लिए हाथ स्वच्छता” होना चाहिए.”
प्रभाकर सिन्हा ने बताया कि साबुन से हाथ धोने से कई तरह की बीमारियों की रोकथाम हो सकती है. जैसे, हैंडवाशिंग से डायरिया की 30 से 48 प्रतिशत तक रोकथाम की जा सकती है. हैंडवाशिंग से  तीव्र श्वसन संक्रमण को 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. हाथों की नियमित सफाई हैजा, इबोला, शिगेल्लोसिस, सार्स और हेपेटाइटिस-ई जैसे रोगों के संचरण की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. साथ ही कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देने वाले रोगाणुओं से सुरक्षित रखता है. भौगौलिक रूप से विशेषकर उष्णकंटिबंधीय क्षेत्रों में होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए हाथों की स्वच्छता जरूरी है.
हाथ धोने पर जागरूकता के लिए हैंडवॉशिंग डे:
गंदे हाथों की वजह से होने वाले बीमारियों के संचरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे यानि वैश्विक हाथ धोने का दिवस के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन को बीमारियों को रोकने और जीवन को बचाने के लिए साबुन जैसे सस्ते व प्रभावी तरीका की मदद से हाथ धोने के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इस दिन की महत्ता को समझने के लिए मनाया जाता है. हाथों की स्वछता को बढ़ावा देना और इससे जुड़ी सुविधाओं की उपलब्धता व इसके विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसके पहले श्रेणी में  हाथों की स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए  हैंडवाशिंग सुविधाओं, नियमित जल आपूर्ति, साबुन या अल्कोहल आधारित हैंड्रब  तक पहुंच में सुधार लाना,  दूसरे श्रेणी में हाथ की स्वच्छता पर व्यवहार परिवर्तन व हस्तक्षेपों पर काम करना और अंत में  हाथ की स्वच्छता सेवाओं और व्यवहार परिवर्तन के लिए काम वाली नीति, समन्वय, अधिनियम और वित्तपोषण जैसे घटकों को मजबूत करना है.
राज्य में खुले में शौच की दर अधिक:
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ सर्वे के मुताबिक बिहार के 67 प्रतिशत घरों में स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का उपयोग नहीं किया जाता है. यानी इन घरों के सदस्य खुले में शौच करते है. 22 प्रतिशत शहरी परिवारों की तुलना में 73 प्रतिशत ग्रामीण घरों के लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं. राज्य के राष्ट्रीय वार्षिक ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण 2018-19 के मुताबिक 566 सैंपल गांवों में से 31 खुले में शौच मुक्त थे और 535 ओडीएफ नहीं थे. वहीं 553 सैंपल आंगनवाड़ी में से 31 ओडीएफ थे और 522 ओडीएफ नहीं थे. 555 सैंपल स्कूलों में से 31 ओडीएफ थे और 524 खुले में शौचालय मुक्त नहीं थे. हालांकि, स्वच्छता के बुनियादी ढांचों में हाथों की सफाई के लिए साबुन और पानी की उपलब्धता और एक शौचालय का सामान्य रखरखाव शामिल है. सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार में अभी भी खुले में शौच जाने का प्रचलन है और साफ सफाई नहीं रखने से बीमारियों के फैलने की संभावना भी अधिक होती है.
बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच डायरिया या पेचिस जैसे जल-जनित रोगों के मामले बढ़ते देखे गये हैं. हालाँकि, 2015-16 में एक्यूट डायरिया के मामले में 5.1 लाख रोगियों की संख्या से घटकर 2018-19 में यह संख्या 3.3 लाख हो गयी. वहीं  2015-16 में पेजिश के 2.8 लाख मामले घटकर साल 2018-19 में 1.7 लाख पर आ गया. तीनों  सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलते हैं कि हैंडवाशिंग बीमारियों को रोकने के लिए एक सरल, सस्ती और प्रभावी विधि हैं. अगर हम स्वछता रख हैंडवाशिंग पर ध्यान दें  कई बीमारियों से बचा जा सकता है.
यूनिसेफ कर रहा हाथों को की सफाई पर जागरूक:
विभिन्न सरकारी विभागों, स्कूलों और स्वास्थ्य देखभाल ईकाईयों में 86 नो टच हैंड वाशिंग यूनिट लगाई गई हैं. हैंडवाशिंग को बढ़ावा देने के लिए, 6.57 लाख साबुन तथा 142 HCF वितरित किए गये हैं. इससे 10 लाख लोगों को लाभ मिला है. ऍफ़एचआईऐ फाउंडेशन इंटरनेट साथी कार्यक्रम के माध्यम से डिजिटल संचार सम्प्रेषण गतिविधियाँ या रिस्क कम्युनिकेशन और कम्युनिटी इंगेजमेंट  हस्तक्षेप से शेखपुरा, गया, नवादा, बांका और मुजफ्फरपुर जिलों के 1200 गांवों के 1.2  लाख परिवार के 5 लाख लोग लाभान्वित हुए. सोशल डिस्टेंसिंग, साबुन के साथ हैंडवाशिंग, मास्क का उपयोग और स्कूलों के विच्छेदन पर विभिन्न जागरूकता उत्पन्न करने वाली गतिविधियाँ की गईं.
शौचालय के इस्तेमाल पर इंटरनेट साथी से मिली मदद:
कंचन कुमारी, गया ज़िले की एक इंटरनेट साथी ने कहा, “हम हाथ शौचालय इस्तेमाल करने के बाद धोते थे लेकिन इंटरनेट साथी कार्यक्रम के बाद हमे हाथ धोने के बारे में और जानकारी मिली.  हमे बताया गया की कैसे पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों को दस्त की बीमारी हाथ न धोने से हो सकती है.  कोरोना की महामारी के बीच हमे और ध्यान रखना होगा ताकि हम अपना और अपने परिवार का बचाव कर सकें. ” कोविड-19 प्रतिक्रिया कार्यक्रम के तहत हैंडवॉशिंग पर जागरूकता पैक व्हाट्सऐप और फेसबुक के माध्यम से समुदाय में साझा किया जाता रहेगा. आगा खान फाउंडेशन) संवेदीकरण और 600 नगरपालिका हितधारकों, 500 आरडब्ल्यूए सदस्यों और 600 स्वच्छता कार्यकर्ताओं के साथ साझेदारी में शहरी पटना प्रतिक्रिया। एकेएफ के साथ साझेदारी में शहरी पटना में 600 नगरपालिका हितधारकों, 500 ग्रामीण कल्याण संगठन (आरडब्ल्यूए) के सदस्यों और 600 स्वच्छता कार्यकर्ताओं का संवेदीकरण किया और उनकी क्षमता को बढ़ाया गया है.
गया ज़िले की चांदनी देवी जो इंटरनेट साथी की लाभार्थी थी, उन्होंने कहा , “मुझे खुशी है की मैंने हाथ धोने की महत्वता को सीखा।  यह महिलाओं को उनके बच्चों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी सूचित करने और उनकी सुरक्षा करने के लिए एक बेहतरीन कार्यक्रम  है. मैं अपने परिवार को तो खाना भी नहीं देती जब तक मैं हाथ नहीं धो लेती।”

कोविड-19 से बचाव का सतर्कता ही सबसे बेहतर और आसान उपाय, इसलिए रहें सावधान

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– भीड़ – भाड़ ना लगा और ना लगाने दें, खुद भी रहें सुरक्षित, दूसरों का भी रखें ख्याल

-बदलते मौसम व गिरते तापमान में संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा

खगड़िया, 14 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 के संक्रमण का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। बल्कि अभी भी संक्रमण का खतरा उत्पन्न होने का प्रबल संभावना है। इसलिए, कोविड-19 से बचाव के लिए सतर्कता में लापरवाही नहीं करें। सतर्कता और सावधानी ही कोविड-19 से बचाव का सबसे बेहतर और आसान उपाय है। इसलिए, पूर्व की भाँति पूरी तरह सतर्क रहें। इससे ना सिर्फ खुद सुरक्षित रहेंगे, बल्कि पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे। दरअसल, अगर एक भी व्यक्ति संक्रमण के दायरे में आता है तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ सकता है। इसलिए, साफ – सफाई समेत अन्य आवश्यक बचाव से संबंधित उपायों का पालन करें।

– बदलते मौसम व गिरते तापमान में बढ़ सकती है संक्रमण का खतरा, इसलिए जारी रखें सतर्कता : –

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि बदलते मौसम व गिरते तापमान में संक्रमण खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, अभी और लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। साथ ही साफ – सफाई समेत मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा उत्पन्न नही हो।

– खुद के साथ दूसरों को भी करें जागरूक : –

कोविड-19 के संक्रमण से दूर रहने के लिए खुद के साथ – साथ दूसरों को भी जागरूक करने की जरूरत है। इससे खुद के साथ – साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे। इसके लिए लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देना चाहिए। जैसे कि, मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना, शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करना आदि की जानकारी देकर लोगों को भी जागरूक करें।

– मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से करें उपयोग : –

कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क और सेनेटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें और इसे अपने दिनचर्या में शामिल कर लें। ताकि इसका नियमित रूप से से उपयोग करने में भूलने की समस्या उत्पन्न नही हो।

बाहर से आने के साथ सबसे पहले हाथों की करें सफाई

बाजार समेत अन्य जगहों से बाहर से आने के साथ ही सबसे पहले अपने हाथों की अच्छी तरह साबुन से धोएं या फिर सेनेटाइज करें। इसके बाद ही घर में प्रवेश करें। साथ ही कपड़े को धूप में रख दें। साथ ही बचाव से संबंधित हर मानकों का पालन करें।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण के प्रति किया जा रहा जागरूक

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खरीक प्रखंड की पंचायत में शिविर लगाकर जीविका दीदी दे रही पोषण की जानकारी

1 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 30 नवंबर को जाकर होगा खत्म

भागलपुर, 14 अक्टूबर

खरीक प्रखंड की पंचायतों में गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण के बारे में जागरूक किया जा रहा है. प्रतिदिन किसी ना किसी पंचायत में शिविर लगाकर जीविका दीदी गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण की जानकारी दे रही हैं. उन्हें पोषण के फायदे गिना रही हैं.
जीविका के खरीक प्रखंड के प्रोजेक्ट मैनेजर बलदेव प्रसाद ने कहा कि एक अभियान के तहत यह काम किया जा रहा है. 1 सितंबर से अभियान शुरू हुआ है जो कि 30 नवंबर तक चलेगा. इस दौरान जीविका दीदी द्वारा प्रतिदिन एक पंचायत का चयन करते हैं और वहां की जो भी गर्भवती और धात्री महिलाएं हैं, उन्हें एक जगह बुलाकर सही पोषण के बारे में जानकारी दी जाती है. साथ ही जीविका दीदी उन्हें बताती है कि उन्हें इस अवस्था में किस तरह का आहार लेना चाहिए, जिससे उन्हें सही पोषण मिल सकेगा.

वीडियो दिखाकर किया जा रहा है जागरूक: शिविर में गर्भवती और धात्री महिलाओं को वीडियो भी दिखाया जाता है. वीडियो के जरिए उन्हें बताया जाता है कि किस अवस्था में कौन सा आहार लेना चाहिए जो उनके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही उनके बच्चे भी कुपोषित नहीं होंगे.

शिविर में थाली सजाकर महिलाओं को दी जाती है जानकारी: जीविका दीदी शिविर में आने वाली महिलाओं को थाली सजाकर बताती हैं कि उनके लिए क्या लाभकारी है. एक थाली में जीविका दीदी सब्जी व अनाज की वैरायटी रखती हैं और उन्हें बताती हैं कि उन्हें इसमें से कौन से अनाज कब खाना है या फिर कौन सी सब्जी का इस्तेमाल कब करना है.

धात्री महिलाओं को स्तनपान की दी जाती है सलाह: शिविर में आने वाली धात्री महिलाओं को जीविका दीदी स्तनपान की सलाह देती हैं. महिलाओं को बताती हैं कि इससे उनका भी स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और उनके बच्चे भी कुपोषित नहीं होंगे. अगर बच्चे 6 महीने से अधिक के हो जाए तो उसे स्तनपान कराने के साथ-साथ पूरक आहार का भी सेवन करवाएं. 6 महीने के बाद बच्चे सिर्फ स्तनपान के सहारे स्वस्थ नहीं रह सकता, इसलिए उन्हें पूरक आहार भी देना जरूरी होता है.

गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की सलाह: जीविका दीदी शिविर में आने वाली गर्भवती महिलाओं को अधिक से अधिक पौष्टिक आहार लेने की सलाह देती है. जो महिलाएं मांसाहार का सेवन करती है उन्हें मांस- मछली के साथ दूध भी अधिक लेने की सलाह देती हैं, लेकिन जो महिलाएं मांस मछली नहीं खाती हैं उन्हें हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करने को कहा जाता है. इसके साथ दूध भी अधिक से अधिक लेने के लिए कहा जाता है. इससे ना सिर्फ महिलाएं स्वस्थ रहेंगी, बल्कि उनके बच्चे भी कुपोषित नहीं होंगे.

कोरोना से बचाव के लिए इन बातों का रखें ख्याल

1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें.

2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें.

3. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी.

4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें.

5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें.

कोविड-19 के मानकों के साथ पिलाई जा रही पोलियो की दवा

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– चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों से लेकर घर-घर पिलाई जा रही है दवा

– मास्क, दस्ताना लगाकर कर्मी 0 से 05 साल तक के बच्चों को पिला रहें हैं दवा

लखीसराय, 13 अक्टूबर ।
जिले में पाँच दिनों तक चलने वाले पल्स पोलियो अभियान में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा चुकी है। इस अभियान के दौरान कुल 01.94 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाएगी। रविवार को शुरू हुए इस अभियान का समापन आगामी 15 अक्टूबर को होगा। अभियान को सफल बनाने के लिए आँगनबाड़ी सेविका, स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता समेत अन्य कर्मी कोविड-19 के हर मानकों का पालन करते हुए 0 से 05 वर्षों तक के बच्चों को पोलियो की दो बूँद दवा ( खुराक ) पिला रहे हैं। सुपरवाइजर समेत अन्य पदाधिकारी लगातार इस अभियान की मानिटरिंग कर रहे हैं। ताकि अभियान का सफलतापूर्वक समापन किया जा सकें।

मास्क, दस्ताना लगा और सैनिटाइजर
रख कर्मी पिला रहे हैं दवा
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान में लगे सभी कर्मियों को कोविड-19 से बचाव के लिए हर मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही बच्चों को कैसे दवा पिलाई जाएगी यह भी जानकारी दी गई। सभी कर्मी विभाग द्वारा दिए गए मास्क, दस्ताना लगाकर एवं सैनिटाइजर पास में रखकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इससे ना सिर्फ कर्मी सुरक्षित रहेंगे, बल्कि दवा पीने वाले बच्चे भी सुरक्षित रहेंगे। इससे संक्रमण की संभावना भी कम होगी। इसके अलावे कर्मियों द्वारा लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

अपनों का इलाज कराने जाते वक्त रहें सतर्क, कोरोना संक्रमण बन सकता है खतरा

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• अब तक 13 लोग अपनों के इलाज कराने के दौरान हुए हैं संक्रमित
• इलाज कराते वक्त कोविड अनुरूप आचरण के मानकों का करें पालन

भागलपुर, 14 अक्टूबर

कोरोना मरीजों का आंकड़ा तो धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, लेकिन लोग परहेज करने में अभी भी कोताही बरत रहे हैं. आमतौर पर देखा जा रहा है लोग अपना या अपने रिश्तेदारों के ईलाज के लिए अस्पताल आने पर कोरोना से पूरी सतर्कता बरतने में चूक कर रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना भी पड़ रहा है. जिले में अब तक 13 ऐसे मामले आए हैं, जो कि अपने परिजनों या रिश्तेदार का इलाज कराने गए और बाद में कोरोना संक्रमित होकर लौटे. इस तरह की लापरवाही से बचने की जरूरत है. तभी हम कोरोना को मात दे पाएंगे.
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर राजकमल चौधरी कहते हैं -अपनों का इलाज कराते हुए लोग थोड़ा अधिक भावुक हो जाते हैं. इससे बचने की जरूरत है. लोगों को यह समझना चाहिए कि सावधानी से ही कोरोना को मात दिया जा सकता है. इसलिए हम अगर किसी अपने जान-पहचान पहचान वाले का इलाज कराते हैं तो उस दौरान अधिक सावधान एवं सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसी स्थिति में लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करना चाहिए. मास्क और ग्लव्स को हमेशा पहने रखना चाहिए. इससे कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है.

अस्पताल में है पूरी व्यवस्था: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए अच्छी व्यवस्था है. इसलिए यहां पर जब मरीज का इलाज चल रहा हो तो डॉक्टर की बात मानें और मरीज के सीधे संपर्क में आने से बचें. आप जितना ख्याल मरीज का रखेंगे, उससे कम ख्याल यहां पर डॉक्टर नहीं रखते हैं. ऐसा देखा जाता है कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद मरीज के परिजन उनसे मिलने आइसोलेशन वार्ड चले जाते हैं और वह बाद में वह संक्रमित हो जाते हैं. ऐसा नहीं करें. इससे डॉक्टर भी परेशान होते हैं और लोगों का भी नुकसान होता है.

होम आइसोलेशन में बरतें सावधानी: अगर आपके घर में कोई कोरोना का मरीज हो और होम आइसोलेशन में उसका इलाज चल रहा है तो इस दौरान आप भी सतर्क रहें. मरीज जब तक ठीक ना हो जाए, तब तक आप उससे शारीरिक दूरी बनाकर रखें. कोरोना को लेकर सरकार की जो भी गाइडलाइन है, उसका पालन करें. ज्यादा दिनों की बात नहीं है. इक्कीस दिनों में मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएगा और फिर आप पहले जैसे साथ में रहते थे, उसी तरीके से रह सकेंगे. इसलिए लापरवाही नहीं बरतें.

अलग बाथरूम का करें इस्तेमाल: अगर आपके घर में कोरोना का मरीज हो तो आप उस बाथरूम का इस्तेमाल नहीं करें जिसका कि संक्रमित व्यक्ति इस्तेमाल कर रहा है. अगर करें भी तो बाथरूम जाने से पहले उसे सैनिटाइज कर दें. अगर संभव हो तो अलग बाथरूम का इस्तेमाल करें. अगर घर में दूसरा बाथरूम नहीं हो तभी उसका इस्तेमाल करें और उसे सैनिटाइज करना नहीं भूलें.

बुजुर्ग व्यक्ति को घर से हटा लें: अगर आपके घर में होम आइसोलेशन में कोई व्यक्ति रह रहा हो इस दौरान आपके घर में जो भी बुजुर्ग व्यक्ति उन्हें अपने रिश्तेदार के घर भेज दें या फिर अगर घर में ही रहने की मजबूरी हो तो बुजुर्ग व्यक्ति के लिए सारी व्यवस्था अलग से करें. इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी तरह से बुजुर्ग व्यक्ति कोरोना संक्रमित के संपर्क में नहीं आए आ जाए. बुजुर्ग व्यक्ति को कोरोना का ज्यादा खतरा रहता है, इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है.

हृदय या मधुमेह के रोगी भी रहें सावधान: कोरोना का खतरा बुजुर्ग के साथ ह्रदय और मधुमेह के रोगी को भी अधिक रहता है. अभी तक जितने भी कोरोना मरीजों की स्थिति गंभीर हुई है उनमें बुजुर्गों के साथ हृदय और शुगर के मरीज ज्यादा रहे हैं. इसलिए ह्रदय और शुगर के मरीज को कोरोना संक्रमित व्यक्ति के पास बिल्कुल भी नहीं जाना चाहिए. अगर एक बार ये लोग संक्रमित हो गए तो इन्हें ठीक होने में ज्यादा समय लग जाता है.