आईजीआईसी शिविर के माध्यम से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का होगा इलाज, दी जा बेहतर सुविधा

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• 15 अक्टूबर को राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर का होगा आयोजन
• जन्म से लेकर 18 वर्षों के बच्चों में जन्मजात ह्रदय रोग की होगी पहचान एवं ईलाज
• राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिलेगी सुविधा

पटना- कोरोना संक्रमण काल में राज्य के लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आयी है. अब राज्य में जन्म से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क ईलाज प्रदान करने की राह पहले से अधिक आसान हो गयी है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के सहयोग से इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था(आईजीआईसी),पटना द्वारा 15 अक्टूबर को जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के ईलाज के लिए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा.

आरबीएसके वहन करता है खर्च:
इस स्वास्थ्य शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्षों तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान एवं जाँच कर उन्हें निःशुल्क उचित सलाह एवं ईलाज प्रदान करना है. इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना एवं राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार इस संबंध में पूर्व से ही कार्य कर रहे हैं. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना में बिहार के विभिन्न जिलों से आए बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं. बच्चों के ईलाज पर खर्च होने वाली राशि का वहन बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) के अंतर्गत निर्धारित पैकेज के अनुरूप किया जाता है.

संयुक्त प्रयास से राह हुयी आसान:
बिहार राज्य में छोटे बच्चों के हृदय रोग से संबंधित शल्य चिकित्सा कुछ समय पहले तक संभव नहीं थी. लेकिन अब राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार एवं इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो चुका है. कार्यक्रम के तहत राज्य के अन्य चिकित्सा संस्था जैसे इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था में ह्रदय रोग के ईलाज के लिए निःशुल्क सुविधा प्रदान की जा रही है.

हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को मिलेगी सुविधा, आईजीआईसी शिविर के माध्यम से करेगा ईलाज

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• 15 अक्टूबर को राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर का होगा आयोजन
• जन्म से लेकर 18 वर्षों के बच्चों में जन्मजात ह्रदय रोग की होगी पहचान एवं ईलाज
• राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिलेगी सुविधा

पटना/ 13, अक्टूबर: कोरोना संक्रमण काल में राज्य के लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आयी है. अब राज्य में जन्म से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क ईलाज प्रदान करने की राह पहले से अधिक आसान हो गयी है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के सहयोग से इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था(आईजीआईसी),पटना द्वारा 15 अक्टूबर को जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के ईलाज के लिए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा.

आरबीएसके वहन करता है खर्च:
इस स्वास्थ्य शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्षों तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान एवं जाँच कर उन्हें निःशुल्क उचित सलाह एवं ईलाज प्रदान करना है. इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना एवं राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार इस संबंध में पूर्व से ही कार्य कर रहे हैं. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना में बिहार के विभिन्न जिलों से आए बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं. बच्चों के ईलाज पर खर्च होने वाली राशि का वहन बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) के अंतर्गत निर्धारित पैकेज के अनुरूप किया जाता है.

संयुक्त प्रयास से राह हुयी आसान:
बिहार राज्य में छोटे बच्चों के हृदय रोग से संबंधित शल्य चिकित्सा कुछ समय पहले तक संभव नहीं थी. लेकिन अब राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार एवं इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था, पटना के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो चुका है. कार्यक्रम के तहत राज्य के अन्य चिकित्सा संस्था जैसे इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्था में ह्रदय रोग के ईलाज के लिए निःशुल्क सुविधा प्रदान की जा रही है.

कोविड-19 से बचाव के लिए जारी रखें सतर्कता, अभी भी संक्रमण का है खतरा

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-बदलते मौसम व गिरते तापमान में संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा

-खुद भी रहें सावधान और दूसरों को भी करें जागरूक

जमुई, 13 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 के संक्रमण का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। बल्कि अभी भी संक्रमण का खतरा उत्पन्न होने का प्रबल संभावना है। इसलिए, कोविड-19 से बचाव के लिए सतर्कता में लापरवाही नहीं करें। बल्कि, पूर्व की भाँति पूरी तरह सतर्क रहें। इससे ना सिर्फ खुद सुरक्षित रहेंगे, बल्कि पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे। दरअसल, अगर एक भी व्यक्ति संक्रमण के दायरे में आता है तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ सकता है। इसलिए, साफ – सफाई समेत अन्य आवश्यक बचाव से संबंधित उपायों का पालन करें।

बदलते मौसम व गिरते तापमान में बढ़ सकती है संक्रमण का खतरा, इसलिए जारी रखें सतर्कता

जमुई के अस्पताल उपाधीक्षक डॉ एस एन अहमद ने बताया कि बदलते मौसम व गिरते तापमान में संक्रमण खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, अभी और लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। साथ ही साफ – सफाई समेत मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा उत्पन्न नही हो।

खुद के साथ दूसरों को भी करें जागरूक

कोविड-19 के संक्रमण से दूर रहने के लिए खुद के साथ – साथ दूसरों को भी जागरूक करने की जरूरत है। इससे खुद के साथ – साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे। इसके लिए लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देना चाहिए। जैसे कि, मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना, शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करना आदि की जानकारी देकर लोगों को भी जागरूक करें।

बाहर से आने के साथ सबसे पहले हाथों की करें सफाई

बाजार समेत अन्य जगहों से बाहर से आने के साथ ही सबसे पहले अपने हाथों की अच्छी तरह साबुन से धोएं या फिर सेनेटाइज करें। इसके बाद ही घर में प्रवेश करें। साथ ही कपड़े को धूप में रख दें। साथ ही बचाव से संबंधित हर मानकों का पालन करें।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

बच्चों के पास नहीं करने दें किसी को धूम्रपान, फेफड़ों को पहुंचाता है नुकसान

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बौद्धिक विकास को भी करता है प्रभावित

भागलपुर, 13 अक्टूबर

सरकार द्वारा तमाम जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद लोग धूम्रपान की आदत छोड़ नहीं रहे हैं. यह आदत न सिर्फ उस व्यक्ति के लिए, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी नुकसान पहुंचा रहा है. बच्चों पर तो इसका खासा असर पड़ता है. बच्चों के पास धूम्रपान करने से जो धुआं उनके अन्दर जाता है, वह उनके फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है. साथ ही बौद्धिक विकास को भी रोकता है.
निजी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं धूम्रपान कई बीमारियों की जड़ हैं. इसका नुकसान पीने वालों के साथ पास में रहने वालों को भी होता है. बच्चों के लिए तो यह बहुत ही नुकसानदायक है. बच्चों के आसपास धूम्रपान करने से उसपर गहरा असर पड़ता है. उसका फेफड़ा संक्रमित होने का खतरा रहता है. साथ ही उसके बौद्धिक विकास पर भी इसका असर पड़ता है. साथ ही बच्चों में सांस की बीमारियां जैसे दमा, ब्रोंकाइटिस और न्यूमोनिया का जोखिम बढ़ाता है. इसलिए बच्चों के आसपास धूम्रपान नहीं करें. अगर संभव हो तो धूम्रपान को ही छोड़ दें.

याद्दाश्त को करता है कमजोर:
डॉ. विनय कहते है सिगरेट से निकलने वाले धुंआ दिमाग के उस हिस्से पर असर करता है, जहां से बच्चा सांस लेता है. दूसरों के धूम्रपान के धुंऐ से बच्चों की पढ़ने-लिखने की आदत पर असर पड़ता है. उनकी समझबूझ और याद्दाश्त को कमजोर करता है. इसलिए बच्चों के सामने हर हाल में धूम्रपान करने से बचना चाहिए.

धुएं से नींद आती है कम:
डॉ. विनय कहते है धूम्रपान करने से धुआं घर की चीजों में बस जाता है और बच्चों में घबराहट, खांसी और बलगम की शिकायत होने लगती है. इसका असर काफी समय तक रहता है. धूम्रपान के धुएं से नींद कम आती है. कान और कान के पर्दे के बीच संक्रमण का खतरा रहता है. बच्चों के गले की धमनियों को नुकसान पंहुचाता है, जो सिर और गले में ऑक्सीजनयुक्त खून को ले जाती हैं.

हाथों पर चिपक जाता है निकोटिन का समूह:
डॉ. विनय कहते है धूम्रपान करते वक्त तंबाकू के धुएं में मौजूद निकोटीन का समूह हवा में तैरता हुआ बच्चों के हाथों पर जाकर चिपक जाता है. ये कीटाणु हाथों पर दिखाई नहीं देते. जो लोग सोचते हैं कि अपने बच्चों के आसपास धूम्रपान न करना काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है. हवा में जो तंबाकू के कीटाणु मिले होते हैं, वे तैरते हुए दूर तक भी जा सकते हैं. धूम्रपान को छोड़ देना ही बच्चों को तंबाकू से होने वाले खतरे से बचा सकता है. धूम्रपान से आपके बच्चों को नुकसान पहुंचने का खतरा होता है जो कि उनके सेहत के लिए हानिकारक है.

खिलौनों पर भी चिपक जाता है निकोटिन:
डॉ. विनय कहते है तंबाकू के हानिकारण निकोटिन मिट्टी में, घर की सतहों से, धूम्रपान करने वालों के कपड़ों से और घर में मौजूद चीजों, यहां तक कि खिलौनों पर भी जाकर चिपक जाते हैं और हाथो-हाथ फैलते चले जाते हैं. इन चीजों के संपर्क में आने से शिशुओं और बच्चों में स्वास्थ संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं. जैसे सांस की बीमारी, कानों में संक्रमण, खांसी, दमा होती है.

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

कोविड-19 से सुरक्षा के साथ एसएनसीयू में इलाजरत शिशु को दी जा रही है बेहतर स्वास्थ्य सेवा

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-जिले के सदर अस्पताल में 06 बच्चे हैं इलाजरत, मिल रही है बेहतर सुविधा

-एनएससीयू से डिस्चार्ज के पश्चात एक वर्ष तक स्वास्थकर्मी बच्चे का रखेंगे ख्याल

लखीसराय, 20 अक्टूबर, 2020
जिले के सदर अस्पताल में चल रहे एसएनसीयू में इलाजरत शिशु को कोविड-19 से सुरक्षा के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए चिकित्सक से लेकर एएनएम तक कोविड-19 से बचाव के लिए हर मानकों का पालन कर रहे हैं और साफ – सफाई समेत अन्य आवश्यक एहतियात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। सरकार के सभी आवश्यक गाइलाइन का भी पालन कर रहे हैं। ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े और संक्रमण का खतरा उत्पन्न नही हो।

जिले के सदर अस्पताल में 06 बच्चे हैं इलाजरत

जिले के सदर अस्पताल में साँस से पीड़ित 06 बच्चे वर्तमान में इलाजरत हैं। जिसे प्रबंधन द्वारा एसएनसीयू की सुविधा आसानी के साथ दी जा रही है एवं इस दौरान बच्चे के सुरक्षा के मद्देनजर स्वास्थ कर्मी पूरी सतर्कता के साथ नवजात को यह सुविधा उपलब्ध करा रहें हैं। ताकि नवजात को अन्य परेशानियाँ से नही जूझना पड़े।

सतर्कता के साथ दी जा रही है एसएनसीयू की सुविधा

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया एसएनसीयू की सेवा अस्पतालों में चालू कर दी गई है। चिकित्सकों के नेतृत्व कर्मियों द्वारा पूरी सतर्कता के साथ सरकार के गाइलाइन का पालन करते हुए सुविधा दी जा रही है। ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े।

एसएनसीयू से डिस्चार्ज के बाद एक वर्षों तक शिशु का रखा जाएगा ख्याल

एसएनसीयू में इलाजरत बच्चे को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने बाद डिस्चार्ज होते है। किन्तु, ऐसे बच्चे का डिस्चार्ज के बाद एक वर्ष तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा ख्याल रखा जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता गृहभेंट की तरह बच्चे का घर जाते हैं और बच्चे की स्थिति से अवगत होती है। साथ परिजनों से आवश्यक जानकारी लें। जिसके बाद बच्चे के शरीर का वर्तमान स्थिति का स्थानीय पीएचसी या अस्पताल को रिपोर्ट करती हैं। उसके बाद निर्देशानुसार आगे की प्रक्रिया करती है। जिस क्षेत्र में आशा चयनित नहीं है उस क्षेत्र की ऑगनबाड़ी सेविका उक्त कार्य देखती है।

जरूरतमंद बच्चों का इलाज में भी करेंगी सहयोग

आशा या ऑगनबाड़ी सेविका ना सिर्फ बच्चे का हालचाल जानेंगे बल्कि जरूरतमंद बच्चों का समुचित इलाज के बच्चे के परिजनों को सरकारी संस्थान जाने के लिए प्रेरित करेंगे और अस्पताल जाने तक हर आवश्यक मदद करेंगे। इसके लिए विभाग द्वारा प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

नवजात को स्वस्थ रखने के लिए परिजनों को दी जाती है जानकारी

अस्पताल कर्मियों एवं चिकित्सकों द्वारा एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के पूर्व एवं बाद नवजात को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिए जाते हैं। ताकि नवजात का स्वस्थ शरीर निर्माण हो। इस दौरान बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक नियमित रूप से समय-समय पर स्तनपान कराने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, कोविड-19 के लेकर नवजात को स्तनपान कराने के दौरान मास्क का अनिवार्य रूप उपयोग करने व हाथों की अच्छी तरह से साबुन से धोने आदि की जानकारी दी जाती है।

क्या है एसएनसीयू सुविधा, किन बच्चों को दी जाती यह सुविधा

एसएनसीयू की सुविधा शिशु –
मृत्यु दर कमी लाने के लिए सरकार द्वारा बहाल की गई है। यह सुविधा वैसे बच्चे को दी जाती है। जिस बच्चे को जन्म के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्या होती है, जिसमें कम वजन के बच्चे, 9 महीने से कम समय में जन्म लेने वाले बच्चे एवं किसी गंभीर रोग से पीड़ित नवजात शामिल होते हैं।

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

नहीं करें लापरवाही, कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ

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घर से बाहर निकलते समय शारीरिक दूरी का करें पालन

घर में भी रहें सतर्क, साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान

बांका, 13 अक्टूबर

कोरोनावायरस के मामले अब जिले में कम होते जा रहे हैं. पहले जहां 1 दिन में 50 से अधिक मरीज मिलते थे, अब यह संख्या घटकर 10 के नीचे आ गई है. कोरोनावायरस के मामले का कम होना एक सुखद संकेत है, लेकिन उसके प्रति अभी भी सावधानी बरतना जरूरी है. सिविल सर्जन सुधीर महतो ने कहा हमें दिल्ली या फिर दूसरे प्रदेशों से सीख लेनी चाहिए, जहां कोरोना के मामले बहुत नीचे चले जाने के बाद लोगों की लापरवाही से दोबारा ऊपर चढ़ गया. इसलिए कोरोना के प्रति सावधान रहने की जरूरत है. यह खुशफहमी अभी नहीं पालने चाहिए कि कोरोना खत्म हो गया.

मास्क और ग्लव्स को बनाएं जरूरी हिस्सा: सिविल सर्जन सुधीर महतो ने कहा कि कोरोना को लेकर अभी सतर्क रहने की जरूरत है. जब तक इसका टीका नहीं आ जाता है लोगों को सावधानी से रहना चाहिए. कोरोना को लेकर सतर्कता बरती जा रही है. मास्क और ग्लव्स को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें. इसमें कोई नुकसान भी नहीं है. लोगों को उसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेना चाहिए. वैसे भी सावधानी में कोई बुराई नहीं है. इससे ना सिर्फ कोरोना संक्रमण से बचाव होगा बल्कि अन्य संक्रामित बीमारियों से भी सुरक्षित रखेगा.

बाहर से घर आने पर हाथ को सैनिटाइज करना ना भूलें: घर से बाहर निकलने के दौरान शारीरिक दूरी का पालन तो जरूरी है. साथ ही जहां पर हम पहुंचते हैं वहां हाथ को जरूरी तौर पर सैनिटाइज करें. साथ ही घर आने पर भी अपने हाथ को सैनिटाइज करें. अगर आपके घर पर कोई मेहमान आए तो उन्हें भी ऐसा करने को कहें.

साफ सफाई का रखें ध्यान: साफ सफाई हमें ना सिर्फ कोरोना से बचाता है, बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी हमारा बचाव करता है. इसलिए सफाई पर ध्यान रखें. घर पर तो सफाई रखे ही, साथ ही अपने कार्यस्थल को भी साफ सुथरा रखने की कोशिश करें. ऐसा करने से आप सुरक्षित रहेंगे, आपके साथ रहने वाले लोग भी सुरक्षित हो जाएंगे.

प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक डॉ. राजेश कुमार ने गृह ज्योति वेब मीडिया का दिल्ली में किया लांच

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प्रीमियर वर्ल्ड की संस्थापक एवं समाज सेविका अमिता ज्योति को उनके जन्म दिवस के अवसर पर प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक डॉ. राजेश कुमार ने अपनी पूरी टीम के साथ श्रद्धांजलि देते हुए 08 ऑक्टूबर को प्रीमियर वर्ल्ड नेटवर्क का विस्तार करने के क्रम में उनके नाम से ही प्रेरित होकर वेब मीडिया माध्यम के अंतर्गत गृह ज्योति का वेबसाइट, मोबाइल एप्प, यूट्यूब चैनल व लाइव वेब पोर्टल को लांच किया. ज्ञात हो कि प्रीमियर वर्ल्ड की संस्थापक अमिता ज्योति ने इस वर्ष ही 23 फरबरी को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था लेकिन अपने जाने से पहले प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक डॉ. राजेश कुमार को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित एवं प्रेरित करती रहीं जिसके परिणामस्वरूप 08 ऑक्टूबर को राजधानी दिल्ली में स्थित प्रीमियर वर्ल्ड के शाखा कार्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजित कर अमिता ज्योति को याद करते हुए 2 मिनट का मौन रखा गया और फिर उनका माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी.
गृह ज्योति के वेब मीडिया को ग़ाज़ियाबाद स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिहैबिलिटेशन के संस्थापक व निदेशक डॉ. वकील प्रसाद शाह के द्वारा लैपटॉप एवं मोबाइल पर क्लिक कर के लांच किया गया. इस अवसर पर डॉ. शाह ने कहा कि प्रीमियर वर्ल्ड की संस्थापक व समाज सेविका अमिता जोति वैसे तो अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्हें न सिर्फ प्रीमियर वर्ल्ड द्वारा बल्कि समाज की महिलाओं द्वारा सदा याद किया जाता रहेगा. हम सब उनके जन्म दिन के अवसर पर यह कामना एवं प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे साथ ही डॉ. शाह ने कहा कि अमिता ज्योति के मार्ग दर्शन पर चलते हुए डॉ. राजेश ने जो मीडिया का आज विस्तार किया है वह अपने आप में एक सराहनीय कदम है.
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजेश कुमार ने यह घोषणा किया कि अगले वर्ष 2021 से प्रत्येक वर्ष 08 ऑक्टूबर को समाज के विभिन्न वर्ग की महिलाओं को गृह ज्योति सम्मान दिया जाएगा. कार्यक्रम का संचालन प्रीमियर वर्ल्ड के उप-सम्पादक मानवेन्द्र कुमार ने किया. इस अवसर पर पत्रकारिता जगत के लोग भी मौजूद थे. ज्ञात हो कि इस अवसर पर प्रीमियर इंडिया व प्रीमियर नेशन के 2 और वेबसाइट, मोबाइल एप्प, यूट्यूब चैनल व लाइव वेब पोर्टल को भी लांच किया गया
—–ज्योतिष्मिता कोंवर

एक साथ गूंजी महिलाओं की आवाज, ‘अब और नहीं सहेंगे हिंसा’ की भरी हुंकार

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• सहयोगी संस्था ने महिलाओं का किया क्षमतावर्धन
• घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर महिलाओं की बढ़ी समझ
• महिलाओं ने हिंसा के खिलाफ़ आवाज बुलंद करने का लिया संकल्प

पटना/ 12, अक्टूबर: नवीन तकनीकी विकास देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर रहा है. कई स्तर पर बदलाव हो रहे हैं जो विकास की बुनियाद को मजबूती प्रदान करने का दावा भी कर रहे हैं. लेकिन इन दावों के बीच महिला सशक्तीकरण आज भी पानी में रुकी हुयी गाद की तरह है. एक तरफ ग्रामीण परिवेश में आज भी महिलाओं की शैक्षणिक एवं सामजिक स्तर चुनौतीपूर्ण है, वहीं इन चुनौतियों को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा और भी बदतर बना देती है. ऐसी हालात में महिलाओं का इसके प्रति जागरूक करना काफी जरुरी है. इस दिशा में सोमवार को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर कार्य कर रही सहयोगी संस्था ने बिहटा के मुसेपुर पंचायत के मुखिया कार्यालय में गाँव के चयनित महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर क्षमतावर्धन करने के मकसद से प्रशिक्षण दिया. इस दौरान महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के विषय में जागरूक किया गया एवं उन्हें अपने अधिकारों को लेकर सजग रहने की बात बताई गयी.

हुंकार से बदलेगी तस्वीर:

सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी सहाय ने बताया कि वक़्त आ गया है जब महिलाएं एकजुट होकर घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ हुंकार भरे. प्राचीन काल से ही कवि की कविता हो या लेखक के आलेख हो सभी जगह महिलाओं को सुंदरता की नुमाइश तक ही सीमित रखा गया. इसका ही कारण है कि महिलाओं के साथ रोज हो रहे यौन अपराध एक आम खबर की तरह हो चुकी है. उन्होंने बताया कि महिलाओं पर होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव या हिंसा के पीछे महिलाओं की खामोश स्वीकृति ही वजह है. यदि महिलाएं ठान लें कि वह अपने ऊपर होने वाली किसी भी तरह की छोटी या बड़ी हिंसा के खिलाफ़ आवाज बुलंद कर सकती है तो ऐसी हिंसा की मजबूत बुनियाद उसी वक़्त से टूटनी शुरू हो जाएगी. महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की समझ नहीं है. अगर समझ भी है तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है. ऐसी परिस्थति में महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की बारीकियां बताना जरुरी हो जाता है एवं उन्हें एक ऐसी स्थिति में पहुँचाना जरुरी है जहाँ से वह अपने कर्तव्यों के साथ अधिकार को समझ सकें इस लिहाज से ऐसे प्रशिक्षण उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होते हैं . सहयोगी संस्था निरंतर महिलाओं के क्षमतावर्धन के लिएप्रशिक्षण आयोजित करती है ताकि महिलाओं के अंदर घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की सिर्फ समझ ही नहीं विकसित हो बल्कि इसके खिलाफ उनके भीतर आवाज बुलंद करने की नेतृत्व क्षमता का भी विकास हो सके.

परिवर्तन के दौर में महिलाएं क्यों रहें पीछे:

सहयोगी संस्था के सेशन कोऑर्डिनेटर राजू पाल ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि आज देश बदल रहा है एवं प्रगति भी कर रहा है. इस बदलाव में महिलाओं की भी उतनी ही भूमिका है जितनी पुरुषों की है. देश का संविधान समानता के अधिकार का जिक्र करता है, जो सामान रूप से महिलाओं पर भी लागू होता है. घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर महिलाओं की चुप्पी इस समानता के अधिकार से उन्हें वंचित करने को मजबूर करते हैं. इस प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के हर पहलुओं की जानकारी दी गयी. इस दौरान यह भी देखा गया कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा को लेकर उनकी अपनी क्या राय है. उसके अनुसार इस विषय पर अधिक जानकारी दी गयी. उन्होंने बातया कि प्रशिक्षण समापन के बाद यह भी जानने की कोशिश की गयी कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा को लेकर उनकी कितनी समझ विकसित हो सकी है. प्रशिक्षण के बाद यह जानकर ख़ुशी भी हुयी कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर मिलकर मुखर होने की महिलाओं ने अपनी सहमति दी. प्रशिक्षण के दौरान सहयोगी की उन्नति रानी, धर्मेंद्र कुमार, बिंदु देवी, सुरेंद्र सिंह, रिंकी देवी, एवं निर्मला देवी भी शामिल हुईं।

छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी

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बच्चों के संतुलित पोषण से बौनेपन में आयेगी कमी
सही और संतुलित पोषण न मिलने से बच्चे बौनेपन के शिकार हो जाते

लखीसराय / 12 अक्टूबर।
बेहतर मातृ एवं शिशु पोषण सुनिश्चित कराना पहले से ही एक चुनौती रही है लेकिन कोरोना महामारी ने इस समस्या को और गति दे दी है। मातृ एवं शिशुओं को कुपोषण के दंश से बचाने के लिए पोषण पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना कि एक शरीर के लिए शुद्ध हवा।
डॉ. कुमारी पूजा बताती हैं सही और संतुलित पोषण न मिलने से बच्चे बौनेपन के शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रसव के एक घन्टे के भीतर ही शिशु को स्तनपान जरूर कराना चाहिए। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। वहीं जन्म के 6 महीने तक बच्चे को केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए।
छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी :
डॉ. कुमारी पूजा बताती हैं कि 6 माह के बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए 6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान से जरूरी पोषक तत्व बच्चे को नहीं मिल पाता है। इसलिए छ्ह माह के बाद अर्ध ठोस आहiर जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार जरूर देना चाहिए। दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ माँ का दूध भी पिलाते रहना चाहिए ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए। उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से ऊँचाई में वांछित बढ़ोतरी नहीं होने से शिशु बौनेपन का शिकार हो जाता है। इसे रोकने के लिए शिशु को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूर देना चाहिए।
शुरुआती 1000 दिन नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया पहले 1000 दिन नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है जो कि महिला के गर्भधारण करने से प्रारम्भ हो जाते हैं। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास अवरुद्ध हो सकता है जिसकी भरपाई बाद में नहीं हो पाती है। शिशु जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। शुरुआती 1000 दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है।
डॉ चौधरी ने बताया गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन और फॉलिक एसिड एवं केल्सियम की गोली लेना भी जरूरी है। एक गर्भवती महिला को आहार सेवन में अधिक से अधिक विविधता लानी चहिए।
गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती हैं एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त श्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। वहीँ कैल्शियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी जरूरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता है एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता।

कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन–
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

बायोमेडिकल कचरा के लिए मतदान केंद्रों पर रखी जायेगी पीली डस्टबीन

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राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा बायोमेडिकल कचरा निस्तारण संंबंधी निर्देश जारी

बायोमेडिकल कचरा ढ़ोने वाले कर्मियों को पीपीई किट पहनना होगा अनिवार्य

मुंगेर, 12 अक्टूबर: कोविड 19 के दौरान सुरक्षित चुनाव कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी गंभीरता से काम कर रहा है. मतदानकर्मियों व मतदाताओं को मास्क लगाने, साबुन से हाथ धोने व शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए चुनाव में हिस्सा लेने के प्रति जागरूकता लाने का काम स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया है. इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मतदान केंद्रों पर संक्रमण से बचाव के मद्देनजर सैनिटाइजर व मास्क की उपलब्धता भी सुनिश्चित करायी जायेगी. वहीं मतदान केंद्रों पर जमा होने वाले मेडिकल कचरों के सुरक्षित निस्तारण का भी ध्यान रखा जायेगा. स्वास्थ्य विभाग की ओर से मतदान केंद्रों पर डस्टबीन, बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण करने वाले कर्मियों की नियुक्ति, कचरा ढ़ोने वाले वाहन व अन्य प्रबंधन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं. इस दिशा में राज्य स्वास्थ्य समिति के बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कोषांग के सहायक निदेशक पीयूष कुमार चंदन ने पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है.

मतदान केंद्रों पर रखी जायेगी पीले रंग की डस्टबीन:
निर्देश के मुताबिक सभी मतदान केंद्रों पर 100 लीटर क्षमता वाले पीले रंग की तीन डस्टबीन रखी जायेगी. इनमें अलग अलग इस्तेमाल दस्ताने व मास्क तथा पीपीई किट डाला जाना है. डस्टबीन पर बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली 2016 में दिये गये बायो हैजार्ड का चिन्ह बना हुआ होना है. साथ ही बायोमेडिकल कचरा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक ढ़ोने के लिए पर्याप्त संख्या में वाहन मौजूद होंगे.

कचरा निस्तारण के दौरान पीपीई किट पहनना अनिवार्य:
बायोमेडिकल कचरा ढ़ोने व निस्तारण के लिए वाहनों के चालक के साथ उसका एक सहयोगी मौजूद होगा. दोनों डस्टबीन को लोड व अनलोड करने के लिए प्रशिक्षित होंगे. उनके मोबाइल पर एलीट्रेसेस ऐप डाउनलोड रहेगा ताकि वाहनों के लोकेशन पर निगरानी रखी जा सके. कचड़ा निस्तारण में लगे कर्मियों को पीपीई किट पहनना अनिवार्य रहेगा. ये कर्मी चुनाव खत्म होने के बाद ही मतदान केंद्र पहुंच कर डस्टबीन इक्ट्ठा करेंगे.

लोकेशन ट्रैकिंग के लिए पीएचसी पर कंट्रोल रूम:
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैयार कंट्रोल रूम की मदद से कचरा निस्तारण करने वाले वाहनों के लोकेशन को लगातार ट्रैक किया जाता रहेगा. मतदान केंद्र से कचरा लाने के बाद बायो मेडिकल कचरा निस्तारण करने वाले कर्मी इसकी सूचना कंट्रोल रूम को देंगे जिसके बाद जिला कंट्रोल रूम तथा रिटर्निंग आॅफिसर को इस बाबत अपडेट कराया जायेगा. सभी बायोवेस्ट का निस्तारण प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की देखरेख में होना है. बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण कार्य में लापरवाही या अनदेखी के लिए जिला कोविड नोडल पदाधिकारी तथा विधानसभा क्षेत्र में नियुक्त किये गये कोविड नोडल पदाधिकारी जिम्मेदार होंगे.

बायोमेडिकल वेस्ट प्रोटोकॉल के अनुसार करना है निस्तारण:
निर्वाचन प्रक्रिया के बाद मतगणना केंद्रों पर भी बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन व निस्तारण के लिए डस्टबीन रखने और बायोमेडिकल कचरों को ढ़ोने के लिए वाहन व कर्मी लगाये जायेंगे. पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि इन कचरों को ऐसी किसी जगह पर निस्तारित नहीं किया जाये जिससे लोक स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो. बायो मेडिकल वेस्ट प्रोटोकॉल के अनुसार ही कचरों को निस्तारित किया जाना है.

बायोमेडिकल वेस्ट बढ़ा सकता है संक्रमण की चुनौतियां:
बायोमेडिकल कचड़ों के सही निस्तारण नहीं होने पर कोरोना संक्रमण को जोखिम बढ़ सकता है. इस्तेमाल किये गये मास्क, दस्ताने व पीपीई किट जैसे अपशिष्टों का सही निस्तारण आवश्यक है. मतदान करने कई लोग आयेंगे. इनमें वैसे लोग भी हो सकते हैं जिनमें संक्रमण का कोई सीधा लक्षण नहीं दिख रहा हो लेकिन वे कोरोना संक्रमित हो. उनके इस्तेमाल किये गये मास्क या दस्ताने जैसे अपशिष्टों से संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है.