कोरोना गाइडलाइन का पालन कराते हुए सामान्य मरीजों का इलाज शुरू

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6 महीने बाद मायागंज अस्पताल की ओपीडी सेवा शुरू
पहले दिन बड़ी संख्या में आए मरीज इलाज कराने के लिए

भागलपुर, 12 अक्टूबर ।
मायागंज अस्पताल में ओपीडी सेवा 6 महीने के बाद सोमवार को शुरू हो गई। ओपीडी में पहले दिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे। सभी मरीजों का इलाज कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए किया गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि इंडोर के बाद अब ओपीडी सेवा भी अस्पताल में शुरू हो गई है । अब यहां पर सामान्य मरीजों के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। जल्द ही सभी तरह की जांच भी अस्पताल में होने लगेगी। मरीजों के इलाज के दौरान कोरोना को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है। इसे लेकर डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं।

सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक चलेगी ओपीडी सेवा:
अधीक्षक डॉ भगत ने बताया कि मायागंज अस्पताल में अभी सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक सामान्य मरीजों के लिए ओपीडी सेवा चालू रहेगी। इस दौरान मरीजों का इलाज किया जाएगा। अगर इलाज के दौरान कोई गंभीर मरीज पाया जाता है तो उसे इमरजेंसी में भर्ती किया जाएगा। साथ ही अगर कोई कोरोना का मरीज मिलता है तो उसे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

इंडोर सेवा 7 अक्टूबर को हुई थी शुरू:
5 अप्रैल को मायागंज को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज बंद हो गया था, लेकिन 5 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निर्देश के बाद 7 अक्टूबर से इंडोर सेवा शुरू हुई और अब ओपीडी सेवा भी शुरू हो गई। अस्पताल में होने वाली जांच भी जल्द ही शुरू हो जाएगी।

ओपीडी को किया गया है सैनिटाइज:
डॉ भगत ने बताया कि इलाज के दौरान मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, इसे लेकर ओपीडी को 3 दिनों तक सैनिटाइज किया गया है। आगे भी इसे सैनिटाइज किया जाता रहेगा। साथ ही इलाज करने वाले डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मास्क लगाकर इलाज करेंगे। अस्पताल प्रशासन ने इसे लेकर विशेष व्यवस्था की है। साथ ही इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज और उसके परिजन भी बिना मास्क के ओपीडी में नहीं जा सकेंगे।

आसपास के जिलों समेत झारखंड से भी आते हैं मरीज:
मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए आसपास के जिलों समेत झारखंड से भी मरीज आते हैं। 6 महीने तक अस्पताल में सामान्य मरीजों का इलाज नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था लेकिन इंडोर और ओपीडी सेवा शुरू हो जाने से उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है। खासकर गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा और ना ही निजी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा।

कोरोना का संक्रमण नहीं हो, बच्चों को ड्रॉप पिलाते वक्त रखा जा रहा है इसका ख्याल

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जिले के 3.83 लाख बच्चों को पिलाया जाएगा पोलियो का ड्रॉप

5 साल तक के बच्चों को पिलाया जा रहा है पोलियो ड्रॉप

बांका, 12 अक्टूबर

जिले भर में 5 साल तक के बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाया जा रहा है. रविवार से शुरू हुआ यह अभियान गुरुवार तक चलेगा. इस दौरान 3.83 लाख बच्चों को ड्रॉप पिलाया जाएगा. आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविकाओं घर-घर जाकर बच्चों को पल्स पोलियो का ड्रॉप पिला रही हैं. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि जिले भर में 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की दवा दी जा रही है. 11 अक्टूबर को शुरू हुआ यह अभियान 15 अक्टूबर तक चलेगा. अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने और करवाने का निर्देश दिया गया है.
डॉ. मंडल ने बताया इस बार बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाते वक्त विशेष सावधानी बरती जा रही है. कोरोना संक्रमण को लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसका पालन किया जा रहा है. बच्चों में कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसे लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. एक माइक्रो प्लान के तहत पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है.

आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका जा रही घर-घर: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिला रही हैं. इस दौरान सभी स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर जा रही हैं. इसे लेकर इन लोगों को तैयारी के दौरान प्रशिक्षण दिया गया है. किस तरह से बच्चों को पोलियो की खुराक पिलानी है, यह भी बताया गया है.

दूर से ही बच्चों को पिलाया जा रहा है पोलियो का ड्रॉप: डॉ. मंडल ने बताया कि कोरोना को लेकर इस बार सावधानी बरती जा रही है. आशा हो या एएनएम या फिर आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका कोई भी बच्चों को छू नहीं रही हैं. दूर से ही बच्चों को ड्रॉप पिला रही हैं. पोलियो ड्रॉप पिलाते वक्त बच्चे मां की गोद में ही रहते हैं. अगर बच्चा बड़ा है और 5 साल का है तो उसे भी दूर से पोलियो का ड्रॉप पिलाया जा रहा है.

सार्वजनिक जगहों पर भी दवा पिलाने की व्यवस्था: डॉक्टर योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि अभियान के दौरान एक भी बच्चा छूट ना जाए, इसे लेकर सार्वजनिक जगहों पर भी पोलियो की दवा पिलाने की व्यवस्था की गई है. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत शहर के मुख्य चौक चौराहों और प्रखंडों के मुख्य केंद्र पर भी शिविर लगाकर बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाया जा रहा है. इसे लेकर अलग से एक टीम का गठन किया गया है.

जिले में पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का हुआ शुभारंभ

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-जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी ने बच्चों को दो बूँद पोलियो की पिलाकर अभियान का किया शुरुआत

-आज की आवाज, पोलियो रहित समाज

-कोविड-19 से सुरक्षा के मद्देनजर सभी कर्मियों को दिया गया मास्क व सेनेटाइजर

लखीसराय, 11 अक्टूबर, 2020
रविवार को जिले में पाँच दिनों तक चलने वाले पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ हुआ। इस अभियान का शुभारंभ जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बच्चों को दो बूँद पोलियो की दवा पिलाकर शुरूआत की। पाँच दिनों तक चलने वाले इस अभियान का आगामी 15 अक्टूबर को समापन होगा। इस दौरान ड्यूटी में लगे सभी कर्मियों चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन से घर-घर जाकर बच्चों को जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण दो बूँद पोलियो की दवा पिलाऐंगे। साथ इस बात का ख्याल रखेंगे कि एक बच्चा दवा पीने से छूटे नहीं।

जिले के सभी पीएचसी में अभियान का हुआ शुभारंभ

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान जिले के सभी पीएचसी में में शुभारंभ किया गया है। अभियान के सफलतम संचालन के लिए सुपरवाइजर एवं कर्मी का गठन किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता व ऑगनबाड़ी सेविका को शामिल किया गया है। जो घर-घर जाकर 0 से 05 वर्षों तक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाऐंगी। इसके अलावा चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी दवा पिलाने के लिए कर्मियों की तैनाती की गई है। ताकि सफर पर निकले बच्चे भी नहीं छूटे और शत-प्रतिशत बच्चों को दवा पिलाई जा सकें।

लगभग 2 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूँद खुराक

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया पूरे जिले में कुल 1.94 लाख बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य निर्धारित दिनों में पूरा किया जाएगा।

528 टीम का मानिटरिंग के लिए 159 पर्यवेक्षक का किया गया है गठन

पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में कुल 528 टीम का गठन किया गया है। जिसमें 422 टीम घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलाऐंगे। जबकि शेष टीम चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर बच्चों को दवा पिलाऐंगे। इसके मानिटरिंग के लिए कुल 159 पर्यवेक्षक की तैनाती की गई है। जो अभियान को सफल बनाने के लिए टीम द्वारा की जा रही कार्यो का मानिटरिंग करेंगे। टीम में कुल 1204 कर्मियों को शामिल किया गया है।

डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ भी करेंगे सहयोग

पल्स पोलियो अभियान का डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के पदाधिकारी व कर्मी भी मानिटरिंग करेंगे। साथ ही इसे सफल बनाने में आवश्यक सहयोग करेंगे।

कोविड-19 से सुरक्षा मद्देनजर कर्मियों को दिया गया मास्क व सेनेटाइजर

कोविड-19 सुरक्षा के मद्देनजर अभियान के शुभारंभ के पूर्व सभी कर्मियों को मास्क व सेनेटाइजर दिया गया। साथ ही कोविड-19 से बचाव के लिए के आवश्यक जानकारी दी गई और कोविड-19 से बचाव के लिए जारी हर मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान आज की आवाज, पोलियो रहित समाज, पोलियो हटाऐ, देश बचाऐं आदि जैसे स्लोगन पर बल देते हुए कर्मियों को टिप्स दिया गया। सभी कर्मियों को हर दिन नया मास्क दिया जाएगा। इसको लेकर पीएचसी स्तर पर कर्मियों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में मास्क व सेनेटाइजर का स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया है।

कोविड-19 का हर मानकों का रखा जाएगा ख्याल

पल्स पोलियो अभियान के दौरान कोविड-19 के हर मानकों का ख्याल रखते हुए अभियान का सफलता के साथ समापन होगा। इसको लेकर विभाग द्वारा मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करने, सेनेटाइजर का उपयोग समेत हर मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नही हो। साथ ही लोगों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए कर्मियों द्वारा आवश्यक जानकारी दी जाएगी। अभियान का शुभारंभ के मौके जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी, स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. खालिद, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ बारा प्रसाद, स्वास्थ्य प्रबंधक नंदकिशोर भारती, लखीसराय सदर के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार, यूनिसेफ के एसएनसी नैय्यर आजम आदि मौजूद थे।

कोरोना को लेकर सतर्कता के साथ महिलाओं और बच्चों को लगे टीके

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रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए लगाए जाते हैं टीके

बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाए जाते हैं टीके

बांका, 9 अक्टूबर

बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सरकार टीकाकरण अभियान चलाती है. इसके लिए हर सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों व सामुदायिक भवन पर बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीके लगाये जाते हैं. इसके तहत शुक्रवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर कोरोना संक्रमण बचाव को लेकर सतर्कता के साथ बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए. कुछ जगहों पर लोगों के घरों में भी जाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि कोरोना काल में भी टीकाकरण सुरक्षित तरीके से चल रहा है. चुनाव का भी उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर आने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार और शुक्रवार को बच्चे को लेकर जाएं. वहां पूरी सतर्कता के साथ टीकाकरण चल रहा है.

आईसीडीएस के जिला समन्वयक शम्स तबरेज ने बताया कि कोरोना काल के बाद अब चुनाव का समय चल रहा है. इसके बावजूद टीकाकरण अभियान को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. इसे लेकर सारी तैयारी की गई है. आंगनबाड़ी केंद्रों को उनकी जरूरत के सामान को उपलब्ध कराया गया है. शुक्रवार को बांका सदर प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 4 में भी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए. यहां पर 6 बच्चों और 11 गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए. एएनएम सुनीता कुमारी ने बताया इस दौरान बच्चों को बीसीजी, डीपीटी, पेंटा 1, पेंटा 2, पेंटा 3 के टीके लगाये गये. स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं एवं बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया गया. टीका लगवाने आई ममता देवी ने कहा हमलोगों को बीमारी से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई. साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषण किस तरह का हो इस बारे में बताया गया. सेविका ललिता कुमारी ने बताया कि मैंने गुरुवार को ही सभी को घर घर जाकर बता दिया था कि शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्र पर आना है. जहां पर बच्चे और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जाएंगे

इसलिए जरूरी है टीकाकरण: टीकाकरण का तत्काल लाभ है व्यक्ति की प्रतिरक्षा. यह किसी रोग के खिलाफ दीर्घकालिक, कभी-कभी जीवन भर सुरक्षा प्रदान करता है. शुरुआती बाल्यावस्था प्रतिरक्षा अनुसूची में अनुशंसित टीके बच्चों को खसरा, चेचक, न्यूमोकोकल रोग और अन्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. बच्चे ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं, अतिरिक्त टीके उन्हें उन रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं जो किशोरों और वयस्कों को प्रभावित करते हैं. साथ ही उन रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं जो दूसरे क्षेत्रों में यात्रा करने के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं.

टीके से बच्चों की होती है संक्रामक रोगों से सुरक्षा: टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है. टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें. कई जानलेवा रोगों की रोकथाम में टीकाकरण एक प्रभावी प्रक्रिया है.

नियमित टीकाकरण से कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव: शिशुओं व गर्भवती महिलाओं को नियमित प्ररिराक्षण कई तरह की बीमारियों से बचाता है. साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके. बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है.

टीकाकरण के दौरान कोरोना को लेकर बरती जा रही है सतर्कता: के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में टीकाकरण के दौरान कोरोना को लेकर सतर्कता बरती जा रही है. टीका देने वाली एएनएम व सेविका और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मास्क और ग्लव्स पहनी रहती हैं. साथ ही टीका दिलवाने के लिए आने वाले महिलाएं भी मास्क पहनी रहती है. आंगनबाड़ी केंद्र में उनका हाथ सैनिटाइज कराया जाता है.

कोविड-19 को मात देकर दुगुनी ताकत के साथ काम पर लौटे केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक

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• -खगड़िया सदर अस्पताल में हैं तैनात
• -कोरोना योद्धा के रूप में दिन रात निभा रहे अपना फर्ज
• -क्षेत्र में कार्य के दौरान हो गये थे संक्रमित

खगड़िया, 9 अक्टूबर ।
कोविड-19 वैश्विक महामारी के नाम से ही लोग दूरी बना लेते हैं। ऐसे में सदर अस्पताल खगड़िया में तैनात केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक तरूण कुमार कोविड-19 को मात देकर ना सिर्फ पुनः अपनी ड्यूटी पर लौटे बल्कि दुगुनी ताकत और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ अपना कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह अपने कार्यों के साथ-साथ लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देकर जागरूक भी कर रहे और पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

ड्यूटी के दौरान हुए थे संक्रमित
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक तरूण कुमार अपनी डयूटी के दौरान ही संक्रमित हुए थे। इनकी पिछले 10 जुलाई को कोरोना जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद इन्होंने आइसोलेट रहकर अपना इलाज करवाया। वह 26 जुलाई को फिर से अपने कार्य पर लौट आए।

पूरे परिवार के सदस्य हो गये थे पॉजिटिव

प्रखंड प्रबंधक कुमार के परिवार के कुल 09 महिला व पुरुष सदस्य संक्रमित हो गये थे। लेकिन प्रबंधक तरूण घबराऐ नहीं बल्कि पूरी सावधानी व सतर्कता के साथ पूरे परिवार का इलाज करवाया। जिससे पूरे परिवार के सभी सदस्य कोविड-19 को मात देने में सफल रहे।

कोरोना काल में चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रखंड प्रबंधक कुमार कहते हैं कि कोरोना काल में तो चिकित्सक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वह उचित चिकित्सा एवं चिकित्सकों के तत्परता से कोविड-19 को मात देने में सफल रहे। इसके लिए उन्होंने सभी चिकित्सकों को धन्यवाद भी दिया, जिन्होंने उनका ईलाज किया था .

कोरोना से डटकर करें मुकाबला
प्रखंड प्रबंधक ने बताया कि जिम्मेदारी के आगे कोरोना संकट बौना है। यह तो कुछ भी नहीं। इससे बड़ा भी संकट आ जाए तो भी पीछे नहीं हटने वाले। ड्यूटी के दौरान पता ही नहीं चला कि कब वह संक्रमित हो गए । जब संक्रमित हो गए तो उसका भी डटकर मुकाबला किया। कुछ ही दिनों के भीतर फिर से हर स्तर पर तैनाती के लिए वह तैयार हैं। उनकी मानें तो जरूरत है अपने हौसले को बरकरार रखने की। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोरोना संक्रमित होने पर घबराएँ नहीं, बल्कि उसका डटकर मुकाबला करें।

लोगों को कर रहे हैं जागरूक

कोविड-19 को मात देकर लौटे केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक कुमार अपने कार्यों के दौरान लोगों को भी जागरूक कर रहें हैं। वह सरकार के गाइलाइन का पालन करने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि मजबूत इच्छाशक्ति से कोविड-19 को हर कोई हरा सकता है। सिर्फ सावधानी और सतर्कता का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।

जिले के पीएचसी में फिर से बंध्याकरण और नसबंदी की सुविधा का हुआ शुभारंभ

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-कोविड-19 से बचाव को लेकर हर मानकों का रखा जा रहा ख्याल

-लोगों को बचाव से संबंधित उपायों का भी दी जा रही जानकारी

-जिले के तीन पीएचसी छोड़कर शेष सभी पीएचसी में बहाल हुई सुविधा

लखीसराय, 09 अक्टूबर, 2020
कोविड-19 को लेकर पीएचसी में होने वाले परिवार नियोजन ऑपरेशन (बंध्याकरण) और नसबंदी की सुविधा बंद हो गई थी, किन्तु अब फिर से यह सुविधा जिले के पीएचसी में शुरू हो चुकी है। हालाँकि, अभी तीन पीएचसी को छोड़कर शेष पीएचसी में शुरू हुई है। किन्तु, सभी पीएचसी में शीघ्र शुरू कराने को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द से जल्द शुरू कराने को लेकर विभाग के पदाधिकारी तत्परता के साथ आवश्यक कार्यों में जुटी हुई है।

कोविड-19 से बचाव के लिए पूरी सुरक्षा के साथ लोगों को दी जा रही है सुविधा
परिवार नियोजन ऑपरेशन एवं नसबंदी कराने आने वालों लोगों का कोविड-19 से बचाव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर नजर बचाव से पूरी सुरक्षा के साथ सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार का संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। साथ ही कोविड-19 से बचाव के लिए हर मानकों का पालन किया जा रहा है और आवश्यक एहतियात बरती जा रही है। इसके अलावे लोगों को बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ भी दी जा रही है। ताकि लोग पीएचसी परिसर से बाहर और अपने घरों में भी सुरक्षा से संबंधित मानकों का पालन करें।

शीघ्र शेष पीएचसी में भी सुविधा का होगा शुरूआत
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग समन्वयक अनुराग कश्यप ने बताया कि जिले के सूर्यगढ़ा, पीपररिया एवं रामगढ़ पीएचसी में बंध्याकरण एवं नसबंदी की सुविधा शुरू नही हो पाई। किन्तु यहाँ भी शीघ्र शुरू कराने की तैयारी है। जल्द से जल्द शुरू कराने को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शुरू होने के साथ लोगों बेहतर सुविधा के साथ सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए तेजी के साथ आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

आशा द्वारा भी किया जा रहा है जागरूक
बंध्याकरण एवं नसबंदी अभियान को गति देने एवं सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता द्वारा भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान ऑपरेशन के अलावे अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की भी जानकारी दी जा रही है। जैसे कि, पीएचसी में उपलब्ध अंतरा, छाया, कंडोम, कॉपर-टी आदि की जानकारी देकर लोगों को सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही लोगों को छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का संदेश दिया जा रहा है।

कोविड उचित व्यवहार अपनाकर रहें सुरक्षित

व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें
 बार-बार हाथ धोने की आदत डालें
 साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
 छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
 उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
 घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
 बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
 आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
 मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
 बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों व्यक्तियों ने मास्क पहने हों
 कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
 बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जेएलएनएमसीएच में 12 से शुरू हो जाएगी ओपीडी सेवा

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प्राचार्य और अधीक्षक के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया फैसला
2 दिन पहले अस्पताल में मरीजों के लिए शुरू हुई है इंडोर सेवा

भागलपुर, 9 अक्टूबर।
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में इंडोर के बाद अब ओपीडी सेवा भी 12 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। इसे लेकर प्राचार्य डॉ हेमंत कुमार सिन्हा और अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने एक बैठक की। बैठक में कई विभाग के अध्यक्ष भी मौजूद थे। बैठक में अस्पताल में ओपीडी सेवा शुरू होने के बाद आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। साथ ही उससे निपटने के उपायों पर बात हुई।
ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों की पहले कोरोना जांच होगी
अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि जेएलएनएमसीएच में प्रतिदिन 2,000 से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने के बाद कोरोना संक्रमण नहीं हो, इसे लेकर क्या तैयारी होनी चाहिए इस पर चर्चा की गयी। बैठक में तय हुआ कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों की पहले कोरोना जांच होगी। उसके बाद उनका इलाज शुरू किया जाएगा। अगर मरीज की स्थिति गंभीर हुई तो उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया जाएगा। वहीं सामान्य स्थिति रहने पर ओपीडी में इलाज किया जाएगा। इसे लेकर सभी विभाग के अध्यक्षों को तैयारी करने का निर्देश जारी कर दिया गया है।
ओपीडी को कराया जा रहा है सैनिटाइज:
अस्पताल अधीक्षक डॉ भगत ने कहा कि अस्पताल के ओपीडी को सैनिटाइज कराया जा रहा है। साथ में दो बेड के बीच में दूरी भी मेंटेन किया जा रहा है। कोरोना का संक्रमण मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों में नहीं हो, इसे लेकर हर तरह की सतर्कता बरती जा रही है।

ओपीडी में इलाज कराने वालों को मास्क और ग्लव्स पहनना जरूरी:
अधीक्षक ने कहा कि ओपीडी में इलाज कराने आने वाले हर मरीज को मास्क पहनना जरूरी है। साथ ही ग्लव्स भी पहन कर आना होगा। उनके साथ आने वाले परिजनों को भी ऐसा करना होगा। इसके लिए ओपीडी के बाहर पर्याप्त मात्रा में मास्क की व्यवस्था की जाएगी। ओपीडी के बाहर हाथ धोने के लिए व्यवस्था की जाएगी। साथ ही ओपीडी में घुसने से पहले हाथों को सैनिटाइज भी कराया जाएगा। इसके बाद सामान्य मरीजों का ओपीडी में इलाज शुरू होगा।
अभी इंडोर में नियमों का कराया जा रहा है पालन:
डॉ भगत ने कहा कि अभी इंडोर में इलाजरत मरीजों से इन नियमों का पालन करवाया जा रहा है। उनका इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मी भी गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं। इंडोर में आसपास के जिलों समेत झारखंड के भी कई जिलों से लोग इलाज करवाने के लिए आ रहे हैं। साथ ही कोसी- सीमांचल के भी मरीज यहां इलाज कराने के लिए आते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने जारी किया है निर्देश:
मालूम हो कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निर्देश के बाद जेएलएनएमसीएच में 7 अक्टूबर से इंडोर सेवा शुरू हुई है। अब ओपीडी सेवा शुरू करने की कवायद चल रही है। 5 अप्रैल को जेएलएनएमसीएच को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज बंद हो गया था। सिर्फ कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था, लेकिन अब यहां पर सामान्य मरीजों का भी इलाज शुरू हो गया है। इसे लेकर प्राचार्य और अधीक्षक ने एक बैठक की। बैठक में कई विभाग के अध्यक्ष भी मौजूद थे। बैठक में अस्पताल में ओपीडी सेवा शुरू होने के बाद आने वाली चुनौतियों व उससे निपटने के उपायों पर भी बात हुई।

घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर महिलाओं ने सीखा गुर, सहयोगी संस्था द्वारा किया गया क्षमतावर्धन

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• घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर महिलाओं में नेतृत्व की बनी समझ
• हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद करने की जरूरत पर महिलाओं की बनी सहमति
• ‘अब और नहीं हिंसा’ बना प्रशिक्षण का मूल-मंत्र

पटना/ 8, अक्टूबर: हिंसा की परिभाषा अभी भी समाज में शारीरिक आघात पर आकर ठहर जाती है. शायद यही वजह है कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा अपनी छाप समुदाय में छोड़ नहीं पाती है. महिलाएं घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के शिकार होने के बाद भी कभी वह शिकार होने की पुष्टि नहीं कर पाती तो कभी पुरुषों द्वारा बने सामाजिक ताने-बाने को तोड़कर अपनी आवाज बुलंद करने में असफ़ल हो जाती हैं. ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर महिलाओं का क्षमतावर्धन ही आखिरी रास्ता शेष बचता है. इस दिशा में गुरूवार को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर कार्य कर रही सहयोगी संस्था ने दानापुर के प्राथमिक विद्यालय, बन्धुटोला में गाँव के चयनित महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर क्षमतावर्धन करने के मकसद से प्रशिक्षण दिया. ‘अब और नहीं हिंसा’ को प्रशिक्षण का मूल-मंत्र बनाया गया एवं महिलाओं को इसके प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया.

हिंसा के खिलाफ़ लड़ाई के लिए हिंसा की समझ जरुरी:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी सहाय ने बताया कि महिलाओं द्वारा घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ़ आवाज बुलंद करने की बात करना बहुत आसान है. यह कहना तभी तक आसान मालूम होता है जब तक आप ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाओं के सम्पर्क में नहीं है. सहयोगी संस्था कई वर्षों से ऐसे ही संवेदनशील मुद्दे पर कार्य कर रही है. संस्था के कर्मी निरंतर महिलाओं के संपर्क में रहते हैं. विशेषकर ऐसी महिलाएं जो अपनी मूलभूत जरूरत यानी रोटी, कपड़ा और मकान के लिए हर दिन संघर्ष करती हों, उनकी सूची से घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा कहीं न कहीं गायब दिखती है. ऐसी महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की समझ नहीं है. अगर समझ भी है तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है. ऐसी परिस्थति में महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की बारीकियां बताना जरुरी हो जाता है एवं उन्हें एक ऐसी स्थिति में पहुँचाना जरुरी है जहाँ से वह अपने कर्तव्यों के साथ अधिकार को समझ सकें इस लिहाज से ऐसे प्रशिक्षण उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होते हैं . सहयोगी संस्था निरंतर महिलाओं के क्षमतावर्धन के लिएप्रशिक्षण आयोजित करती है ताकि महिलाओं के अंदर घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा की सिर्फ समझ ही नहीं विकसित हो बल्कि इसके खिलाफ उनके भीतर आवाज बुलंद करने की नेतृत्व क्षमता का भी विकास हो सके.

सकारात्मक बदलाव की पूरी उम्मीद:
सहयोगी की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर उन्नति रानी ने प्रशिक्षण के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा के हर पहलुओं की जानकारी दी गयी. इस दौरान यह भी देखा गया कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा को लेकर उनकी अपनी क्या राय है. उसके अनुसार इस विषय पर अधिक जानकारी दी गयी. उन्होंने बातया कि प्रशिक्षण समापन के बाद यह भी जानने की कोशिश की गयी कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा को लेकर उनकी कितनी समझ विकसित हो सकी है. प्रशिक्षण के बाद यह जानकर ख़ुशी भी हुयी कि घरेलू एवं लिंग आधारित हिंसा पर मिलकर मुखर होने की महिलाओं ने अपनी सहमति दी.

मतदान केंद्र पर मतदाताओं को कोविड- 19 बचाव हेतु उपलब्ध रहेगी समुचित व्यवस्था

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– हर दो घंटे में मतदान केंद्र परिसर का होगा सैनिटाइजेशन
– मतदान के मुख्य द्वार में मतदाताओं की होगी तापमान की जाँच
– प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ खुद भी सतर्कता बरतने की जरूरत

लखीसराय , 08 अक्टूबर, 2020
मतदान केंद्र मतदाताओं के लिए कोविड-19 के सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासनिक स्तर समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि मतदान के दौरान कोविड- 19 संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। इसके लिए हर दो घंटे पर मतदान केंद्र परिसर को पूरी तरह सैनिटाइजेशन कराया जाएगा। साथ ही शारीरिक-दूरी के पालन का विशेष ख्याल रखा जाएगा। मतदान केंद्र के मुख्य द्वार पर मतदाताओं की तापमान भी जाँच की जाएगी। इसके अलावे कोविड-19 से बचाव के लिए अन्य व्यवस्था भी उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ खुद भी सतर्कता बरतने की जरूरत
जिला सिविल –सर्जन डॉ आतमनद राय ने बताया की मतदान के दौरान कोविड-19 से बचाव के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ मतदाताओं को खुद भी सतर्कता बरतने की जरूरत है और गाइड लाइन का पालन करने की आवश्यकता है। जैसे कि, मतदान केंद्र पर जाने के दौरान मास्क अनिवार्य रूप से पहनें, सैनिटाइजर साथ रखें, मतदान केंद्र परिसर में शारीरिक-दूरी का निश्चित रूप से पालन करें। यह प्रयास ना सिर्फ आपको कोविड-19 से बचाव करेगा बल्कि प्रशासनिक तैयारी को सहयोग भी होगा

थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मतदाताओं को मिलेगी मतदान केंद्र प्रवेश की अनुमति
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आतमन्द राय ने बताया लोगों तापमान जाँच के लिए आशा की तैनाती होगी। जो मतदान केंद्र के मुख्य द्वार पर मतदाताओं का थर्मल स्क्रीनिंग करेंगी। इसके बाद ही मतदाताओं को मतदान केंद्र जाने की अनुमति मिलेगी। इसको लेकर प्रखण्ड बारी-बारी से आशा को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कोविड उचित व्यवहार अपनाकर रहें सुरक्षित

 व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
 बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
 साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
 छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
 उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
 घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
 बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
 आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
 मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
 बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों व्यक्तियों ने मास्क पहने हों
 कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
 बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

खान-पान का रखें विशेष ख्याल, सही पोषण ही करेगा बचाव

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– कोविड-19 के साथ मौसमी बीमारी की बढ़ी संभावना, रहें सावधान

– रहन-सहन के साथ-साथ साफ-सफाई का भी रखें ध्यान

लखीसराय, 08 अक्टूबर, 2020
लगातार बदल रहें मौसम के कारण कोविड -19 के साथ-साथ तरह-तरह के मौसमी बीमारी की भी संभावना बढ़ गई है। इसलिए, कोरोना संक्रमण के साथ इससे भी बचने के लिए हमें अधिक सावधान रहने की जरूरत है और इस दौरान साफ-सफाई तथा सही पोषण का ख्याल रखना बेहद जरूरी है क्योंकि सही पोषण और साफ-सफाई ही इन मौसमी बीमारियाँ से हमें बचाने में संजीवनी साबित होगा। इसके अलावा रहन-सहन में बदलाव की बेहद दरकार है।
पौष्टिक आहार का करें सेवन
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया बदलते मौसम में कई तरह के मौसमी बीमारियाँ का संभावना बढ़ जाती है। जैसे कि एलर्जी, सर्दी-खाँसी, बुखार समेत अन्य वायरल टाइप की बीमारी की चपेट लोग आ जाते हैं। इसलिए, इससे बचाव हेतु खान-पान का विशेष ख्याल रखना चाहिए और पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। खासकर बच्चों का सही पोषण का उनके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को विशेष ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने बताया मौसमी बीमारी से बचाव के लिए घर का बना खाना खाएं और पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी का सेवन करें। इसके साथ ही हरी सब्जी व साग का ज्यादा उपयोग करें, इससे हमारे शरीर में पोषक तत्व की कमी पूरी होती है और यह हमें बीमारी से लड़ने में सहयोग करता है।

शरीर में पानी की नहीं होने दें कमी:
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। इसके लिए लगातार शुद्ध पानी पिएँ और बाहर निकलने यानी यात्रा के दौरान पानी साथ लेकर चलें।

साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल:
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और घर से लेकर आसपास के जगहों पर भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराऐ। आसपास के लोगों को भी साफ-सफाई के प्रति जागरूक करें। इसके अलावे रहन-सहन के तरीके में भी वदलाव लाऐ। जो हमें बीमारी के दायरे से बचाएं एवं हम अस्पताल जाने से बचें।

घर से बाहर कोविड 19 सुरक्षा मानकों का पालन भी आवश्यक :
सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. आत्मानंद राय ने बताया त्यौहारों का समय आ रहा है इसलिए ख़रीदारी करने और रिस्तेदारों से मिलने के बहाने कोरोना वायरस के प्रति लापरवाही कहीं आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित ना हो, इसलिए घर में हीं रहने का प्रयत्न करें। यदि घर से बाहर निकलना जरूरी है तो मास्क जरूर पहने। साथ ही दूसरों से कम से कम 2 गज की दूरी जरूर बनाएँ और सार्वजनिक स्थलों पर नहीं थूकने से बचें। हर जगह साबुन और पानी उपलब्ध नहीं रहता। इसलिए सैनिटाइजर हमेशा अपने पास रखें और समय-समय पर इसे इस्तेमाल कर संक्रमण से खुद को और दूसरों को बचाएं। साथ ही बताया कोशिश करें की बाहर से संक्रमण घर के अंदर नहीं आ जाए। इसलिए बाहर से घर आने पर अपने शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें।