डेंगू को लेकर रहें सतर्क, मच्छरों से करें अपना बचाव

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सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 6 वर्ड का अलग से है वार्ड

घर के आसपास नहीं होने दें पानी का जमाव, डेंगू से होगा बचाव

बांका, 8 अक्टूबर

स्वास्थ विभाग डेंगू को लेकर 25 जून से ही अलर्ट है. इसे लेकर सदर अस्पताल में अलग से 6 बेड का वार्ड भी बनाया गया है. डेंगू से पीड़ित मरीजों का वहां पर बेहतर इलाज की व्यवस्था है. लेकिन डेंगू को लेकर अब मौसम अनुकूल होता जा रहा है. तापमान गिरकर 30 के करीब पहुंच गया है. अभी के मौसम में ना गर्मी ज्यादा है और ना ही सर्दी. ऐसे मौसम में डेंगू के मच्छर ज्यादा पनपते हैं. ऐसा मौसम डेंगू के लिए अनुकूल माना जाता है. इसलिए अभी सावधान रहने की जरूरत है.
डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि सदर अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से इलाज की व्यवस्था है. लोग डेंगू के प्रति सचेत रहें. घर के आसपास पानी का जमाव नहीं होने दें. इससे मच्छर नहीं पनपेगा और आपका डेंगू से बचाव होगा. इसके बावजूद भी अगर आप डेंगू का शिकार हो ही गए तो सदर अस्पताल आ जाइए. यहां पर इलाज की समुचित व्यवस्था है. सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि यहां पर 6 बेड का अलग से डेंगू मरीजों के लिए वार्ड चल रहा है. जहां पर डेंगू मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

अभी के मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि हमलोग काफी पहले से डेंगू को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं. जब बारिश का मौसम समाप्त होता है और सर्दी शुरू होने वाली रहती है उस दौरान डेंगू के ज्यादा मामले सामने आते हैं. अभी से लेकर नवंबर महीने तक लोगों में डेंगू होने की आशंका अधिक रहती है. डॉ. चौधरी ने कहा अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है. डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई ले सकते हैं. बिना चिकित्सक की सलाह से दवा लेने पर शरीर से प्लेटलेट्स अचानक कम हो सकते हैं. सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें, बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है.

मच्छरदानी का करें इस्तेमाल: डॉ. चौधरी ने कहा कि घरेलू स्तर पर सावधानी बरतने से भी डेंगू को पांव पसारने से रोका जा सकता है. इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर के आसपास पानी को जमने नहीं दें. रात में सोते समय मच्छदानी का प्रयोग करें. डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, इसलिए दिन में विशेष तौर पर सतर्क रहें. घर में कूलर के पानी को बार-बार बदलते रहें. साथ ही घर के आसपास कोई ऐसा सामान हो, जिसमें पानी जमा हो जाता है तो उसे तत्काल हटा दें.

कैसे और कब होता है डेंगू: डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं. ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं. डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जून-जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है. इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं.

कोरोना संक्रमण के प्रति रहें सावधान: अभी कोरोना काल चल रहा है. इसलिए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. 2 घंटे के अंतराल पर हाथ को साफ करते रहना चाहिए. बाहर निकलते वक्त हमेशा मास्क पहने रहना चाहिए. साथ ही 2 गज की शारीरिक दूरी बनाकर रहना चाहिए. ऐसा करने से आप भी सुरक्षित रहेंगे और आप के साथ वाले भी

जब तक नहीं निकलती कोरोना की दवाई, तब तक नहीं करें ढिलाई

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घर या बाहर निकलने के दौरान कोविड 19 सुरक्षा मानकों का करें पालन

व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी का रखें

बांका, 8 अक्टूबर

कोरोना की दवाई अभी तक नहीं आई है. अब तक इसकी वैक्सीन भी तैयार नहीं की जा सकी है. ऐसे में कोरोना के प्रति सजग रहना जरूरी है. कोरोना कॉल 6 महीने से चल रहा है. अनलॉक के बाद से लोग अब पहले की तरह सामान्य दिनचर्या में लौट रहे हैं. सामान्य दिनचर्या में लौटना तो जरूरी है, लेकिन सावधानी के साथ ऐसा देखा जा रहा है कि बहुत सारे लोग सरकार द्वारा जारी कोविड 19 सुरक्षा मानकों का पालन किए बगैर ही बाहर निकल रहे हैं. बाजारों में दिख जा रहे हैं, जो कि सही नहीं है. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.
बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना काल 6 महीने से चल रहा है. अभी भी यह कब खत्म होगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. इस वजह से लोग सामान्य दिनचर्या जीने लगे है. ऐसे में सावधानी बहुत जरूरी है. लोगों को जब तक कोरोना की दवाई नहीं निकलती है तब तक उन्हें सतर्कता के साथ रहना होगा. कोरोना संक्रमण से बचाव के सारे नियमों का पालन करना बेहतर होगा.

हर 2 घंटे पर करें हाथ की सफाई: डॉ. चौधरी कहते हैं कि अपना काम करते हुए भी हर 2 घंटे पर हाथ को धोना नहीं भूलें. इसे अपनी जीवन का हिस्सा बनाएं. हाथ साफ रहने से ना सिर्फ कोरोना संक्रमण से बचाव होगा, बल्कि अन्य तरह की संक्रामक बीमारियों की चपेट में भी आने से बचेंगे. इसलिए हाथ धोना नहीं भूलें.

सही तरीके से पहने मास्क: डॉ. चौधरी कहते हैं कि जब भी घर से बाहर निकले या घर में समूह के साथ बैठकर बातचीत कर रहे हो तो मास्क पहनना नहीं भूलें. मास्क पहनने से भी ज्यादा जरूरी है मास्क को सही तरीके से पहने. अगर आप मास्क सही तरीके से नहीं पहनेंगे तो फिर उसे पहनने का कोई फायदा नहीं. बहुत सारे लोगों को देखा जा रहा है वह अपने मास्क को नाक से नीचे पहनते हैं या फिर बोलते वक्त मास्क को उतार देते हैं. ऐसा नहीं करें. पूरी तरीके से नाक तक मास्क पहने. साथ ही बातचीत के दौरान नीचे उतारने से बचें.

2 गज की दूरी का पालन करें: डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना संक्रमण से बचाव का सबसे अचूक हथियार है 2 गज की दूरी बनाकर रखना. शारीरिक दूरी रहने से कोरोना के संक्रमण का सबसे कम खतरा रहता है. अगर कोई व्यक्ति आपके साथ बातचीत के दौरान छींकता या खांसता भी है, तो उचित शारीरिक दूरी से संक्रमित होने से बचा जा सकता है. इससे निकलने वाला ड्रॉपलेट अधिकतम 2 गज की दूरी तक जाता है।

पान गुटखा खाकर बाहर नहीं थूके: डॉ. चौधरी कहते हैं कि वैसे तो पान और गुटका का सेवन ही नहीं करना चाहिए. यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है, लेकिन अगर आप इन सावधानियों को नजरअंदाज करते हुए इसका सेवन करते हैं तो बाहर में जहां-तहां थूकने से बचें. इससे आपका नुकसान तो हो ही रहा है, लेकिन दूसरे भी संक्रमित होने से बच जाएंगे.

नहीं करें अनदेखी, रहे संक्रमण से ऐसे सतर्क:
व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों व्यक्तियों ने मास्क पहने हों
कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 से मास्क व शारीरिक-दूरी ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय

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– शारीरिक-दूरी का हमेशा करें पालन, अनिवार्य रूप से करें मास्क का उपयोग

– खुद के साथ दूसरों को भी करें जागरूक व प्रेरित, नहीं बढेंगा संक्रमण

खगड़िया, 07 अक्तूबर, 2020
कोविड-19 से बचाव के लिए सबसे बेहतर और आसान उपाय शारीरिक-दूरी का पालन करना और अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करना है। इसलिए हमेशा चिकित्सकों के अनुसार निर्धारित शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें और मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। इतना ही नहीं खुद के साथ-साथ इसके लिए दूसरों को भी जानकारी दें और जागरूक व प्रेरित भी करें। क्योंकि जब दूसरों को जागरूक करना अपना जिम्मेदारी समझेंगे तभी संक्रमण की शिकायत पर विराम लगेगा और सामुदायिक स्तर पर लोग जागरूक होंगे। ऐसा करने पर कोविड-19 से ना सिर्फ आप सुरक्षित रहेंगे, बल्कि पूरा समाज भी सुरक्षित रहेंगे और संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं होगा।

नाक, मुँह और ऑख ही कोविड-19 के संक्रमण का मुख्य स्रोत
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 का संक्रमण नाक, मुँह और ऑख से ही शरीर में प्रवेश करना मुख्य स्त्रोत है। इसलिए, इससे बचाव के शारीरिक-दूरी का पालन करना और अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करना सबसे बेहतर और आसान उपाय है। इन दोनों गाइडलाइन का पालन कर लोग संक्रमण के दायरे से दूर रह सकता है। इसलिए, समाज के हर लोगों को इसे अपना आदतों में शामिल करना होगा। ताकि समाज के हर लोग कोविड-19 के खतरे से दूर रहें। इसके साथ-साथ खासकर यात्रा के दौरान लोगों को हैंड सेनेटाइजर का भी उपयोग करना चाहिए।

चिकित्सकों के सलाह के अनुसार ही करें दवाई का सेवन
डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कोविड-19 के दौर में इससे बचाव के लिए या फिर उपचाराधीन व्यक्ति चिकित्सकों के सलाह के अनुसार ही दवाई या अन्य उपाय का सेवन करें। दरअसल, ऐसा देखा जा रहा है कि लोग कोविड-19 के दौर में इससे बचाव के असीमित काढ़ा और दवाई का सेवन कर रहे हैं। जिसका लोगों के शरीर दुष्प्रभाव हो रहा है। काढ़ा का अधिक सेवन करने से पेट में दर्द, जलन, अचपच की समस्या लोगों में ज्यादा हो रही है। इसलिए, बेहतर होगा कि शारीरिक-दूरी, मास्क व चिकित्सकों के सलाह के अनुसार ही कोविड-19 से बचाव से संबंधित उपायों का पालन करें।

लापरवाही से लोगों में होता है संक्रमण का खतरा
डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उसके लिए कोविड-19 घातक नही है। बल्कि, गाइडलाइन का पालन में लापरवाही बरतने वाले लोगों के लिए यह घातक है। इसलिए, हरसंभव स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें और दूसरों को पालन करने के लिए प्रेरित करें।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे रहें सतर्क
 व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
 बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
 साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
 छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
 उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
 घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
 बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जिले मे गोदभराई रस्म का प्रखंड स्तर पर हुआ आयोजन

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गर्भावस्था में अच्छे पोषण पर दी गयी जानकारी
आखिरी दिनों में बेहतर पोषण शिशु के स्वस्थ के लिए जरुरी
लखीसराय/ 7 सितम्बर: जिले के सभी प्रखंड मे सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गृहभेट के द्वारा गोदभराई की रस्म का आयोजन किया गया. इस दौरान सात से नौ महीने की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गयी. इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों के देखभाल को लेकर कई जानकारी भी दी गयी.
गृह भ्रमण के द्वारा की गयी गोदभराई: शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आशा एवं सेविका के द्वारा लाभार्थी के घर पर जाकर गर्भवती महिलाओं को लाल चुनरी ओढा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई. महिलाओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट की गयी. इस दौरान पोषक आहार में फल और मेवे का वितरण हुआ. साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार सेवन के विषय में गर्भवतियों को भी जागरूक किया गया.
डीपीओ कुमारी अनुपमा ने बताया गर्भवती महिलाओ को गर्भावस्था मे खान-पान का हमेशा ध्यान रखना चाहिये. रोज हरे साग –सब्जी ,मूँग का दाल एवं अगर महिला मांसाहारी हो तो अंडे के साथ मछ्ली का प्रयोग सप्ताह मे दो से तीन बार जरूर करना चाहिये. इस दौरान वसा की भी जरूरत होती है. इसके लिए महिलाओं को चिकनाई पूर्ण खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए. सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में ही प्रसव कराना चाहिए. इसके लिए गाँव की आशा से नियमित सलाह भी गर्भवती महिलाओं को लेते रहना चाहिए ताकि गर्भ के आखिरी दिनों में किसी संभावित जटिलता से बचा जा सके।

आखिरी महीनों में जरुरी है बेहतर पोषण:
सदर की सीडीपीओ आभा कुमारी ने बताया गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है.इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है. इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है। इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती हैं. हरी साग-सब्जी, सतरंगी फल, दाल, सूखे मेवे एवं दूध के सेवन से आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है.
इस आयोजन के अवसर पर कोविड-19 का मानकों का पूरा ख्याल रखा गया। उन्हें इस संक्रमण से बचने हेतु मास्क के इस्तेमाल एवं शारीरिक दूरी रखने के लिए बताया ताकि कोविड -19 के संक्रमण से सुरक्षित रह सकें ।

मायागंज अस्पताल में इंडोर सेवा का आगाज, काफी संख्या में पहुंचे मरीज

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पहले दिन बड़ी संख्या में इलाज कराने के लिए पहुंचे सामान्य रोग के मरीज

कोरोना के मरीजों का अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड में चल रहा है इलाज

भागलपुर, 7 अक्टूबर

मायागंज अस्पताल में 6 महीने के बाद बुधवार से सामान्य मरीजों का इलाज फिर से शुरू हो गया. मेडिसिन विभाग में पहले दिन सैकड़ों की संख्या में इलाज कराने के लिए मरीज पहुंचे थे. सभी का बेहतर तरीके से इलाज किया गया. मालूम हो कि 5 अप्रैल को मायागंज अस्पताल को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज नहीं हो रहा था. सिर्फ कोरोना मरीजों का ही यहां पर इलाज हो रहा था, लेकिन कोरोना के मरीजों की संख्या जैसे ही घटने लगी और सरकार से अनुमति मिली तो एक बार फिर से यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया.

अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया अब पहले की ही तरह यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज हो रहा है. अस्पताल में 700 बेड हैं जिसमें से 600 बेड सामान्य मरीजों के लिए है, जबकि एक सौ बेड पर कोरोना के मरीजों का इलाज होगा. मेडिसिन विभाग में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है. इसे लेकर 7 दिनों का रोस्टर तैयार किया गया है.

12 से शुरू होगी ओपीडी सेवा: अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया इंडोर सेवा शुरू होने के बाद अब ओपीडी सेवा भी 12 अक्टूबर से शुरू कर दी जाएगी. इसे लेकर तैयारी चल रही है. साथ ही मायागंज अस्पताल में सामान्य मरीजों के लिए होने वाले सभी तरह की जांच भी जल्द ही शुरू हो जाएगी. यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को ईसीजी या ईको जैसे टेस्ट कराने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

3 दिनों तक कराया गया है सेनिटाइज: डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया मेडिसिन विभाग को पिछले 3 दिनों तक सेनिटाइज कराया गया है. आगे भी सुबह और शाम सेनिटाइज कराने की तैयारी है. मरीजों को और उसके परिजनों को मेडिसिन विभाग में आते वक्त सेनिटाइज करवाया जाता है. साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि मरीज या उसके परिजन मास्क या ग्लव्स पहने हैं या नहीं. साथ ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी भी मास्क पहने रहते हैं. समय-समय पर हाथ को भी सेनिटाइज करते रहते हैं.

5 अक्टूबर को मिला था निर्देश: स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल जिसे कि कोरोना अस्पताल में तब्दील किया गया था उसमें इंडोर सेवा शुरू करने का आदेश दिया था. मायागंज अस्पताल कोरोना अस्पताल में तब्दील हुआ था इस वजह से यहां भी इंडोर सेवा फिर से शुरू की गई है.

आसपास के जिलों समेत झारखंड से भी आते हैं मरीज: मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए पूर्व बिहार और कोसी-सीमांचल समेत झारखंड के गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले से भी मरीज इलाज कराने के लिए यहां आते हैं. अस्पताल में इंडोर सेवा शुरू होने से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है. साथ ही यहां के गंभीर मरीजों को अब इलाज कराने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. मायागंज अस्पताल में जब से इंडोर सेवा बंद थी गंभीर मरीजों को इलाज कराने के लिए पटना या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब मायागंज अस्पताल में इंदौर सेवा शुरू हो जाने से उन्हें इस मशक्कत से छुटकारा मिल जाएगा.

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे रहें सतर्क
 व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
 बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
 साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
 छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
 उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
 घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
 बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
 आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
 मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
 किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
 कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
 बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

घर आने वालों का हाथ जोड़कर करें अभिवादन

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हाथ मिलाकर मेहमानों का स्वागत करने से बचें

सतर्कता ही कोरोना संक्रमण से आपका करेगा बचाव, रखें ध्यान

बांका, 7 अक्टूबर

कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग जहां चौकस है, वहीं घर पर भी लोग एहतियात बरत रहे हैं. बाहर जाने से बच रहे हैं. साथ ही एक दूसरे के यहां आना जाना भी कम कर रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर रखते हैं कि कोई अगर हमारे घर में मेहमान आ जाए तो उसका स्वागत हम कैसे नहीं करें. मेहमानों का स्वागत करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन कोरोना काल में थोड़ी सी सावधानी बरतने की भी जरूरत है.

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना काल कब खत्म होगा, अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. इसलिए अब लोगों ने बाहर निकलना भी शुरू कर दिया है. कुछ महीने तक एक दूसरे के घरों में आना जाना बंद था, लेकिन अब यह भी शुरू हो गया है. ऐसे में थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है. घर आने वाले मेहमानों का हाथ जोड़कर अभिवादन करें. हाथ मिलाने से बचें. साथ में घर आए मेहमानों से भी उन चीजों का पालन करवाएं जो आप अपने घर पर कर रहे हैं. इससे आपकी सुरक्षा तो होगी ही, आपके घर आने वाले मेहमान में सुरक्षित रहेंगे.

बाहर से आने वालों का हाथ सैनिटाइज करवाएं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि कोई मेहमान जब आपके घर आए तो सबसे पहले उन्हें सैनिटाइजर दें और हाथ धोने के लिए कहें. हाथ सैनिटाइज करने के लिए बाद बातचीत करना शुरू करें. जब मेहमान चले जाएं. आप भी अपने हाथों को सैनिटाइज करना नहीं भूलें. और मेहमान जिन जगहों पर पर बैठे थे, वहां पर सैनिटाइज जरूर करें.

बात करते वक्त मास्क जरूर पहने: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ऐसा देखा जाता है कि लोग घरों में बात करते वक्त मास्क नहीं लगाते है. यह खतरनाक हो सकता है. जब पास में बैठे रहते हैं तो उस समय एक दूसरे में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. इसलिए आप खुद भी मास्क पहने और आपके घर में मेहमान आए हैं उन्हें भी मास्क के पहनने के लिए दें.

घर में रखें अतिरिक्त मास्क रखें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि घर में अतिरिक्त मास्क जरूर रखें. कोई मेहमान आए तो अगर उनके पास मास्क नहीं हो तो आपके पास जो घर में रखे हुए मास्क है वह उन्हें दे दें. साथ ही अगर मास्क गीला हो जाए तो उसे बदलने के लिए कहें. घर में मास्क रहने से आपको भी फायदा होगा. अगर कहीं बाहर निकल रहे हैं तो अतिरिक्त मास्क रखकर आप निकले. इससे आपका बचाव होगा. अगर रास्ते में बहुत अधिक टाइम हो गया या फिर गीला हो गया तो आप तुरंत उसे बदल सकते हैं.

आप भी जहां जाए इन नियमों का पालन करें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन नियमों का पालन आप अपने घर आने वाले मेहमानों से करवाएं, बल्कि आप भी जहां जाए तो इन नियमों का पालन करें. आप जैसे ही दूसरों के घर जाए तो हाथ को सैनिटाइज कर लें. साथ ही मास्क भी लगाकर रखें. वहां से निकलते वक्त भी एक बार आप अपने हाथों को जरूर सैनिटाइज कर ले.

शुरू होगा त्यौहारों का दौर, रहें सतर्क और सावधान

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-कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाऐ त्यौहार

-संक्रमण से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी

मुंगेर, 06 अक्टूबर, 2020
इस माह से त्यौहारों का दौर शुरू होगा जिसका शुभारंभ दुर्गा पूजा के साथ होगा। दुर्गा पूजा पूरे प्रदेश में शहर से लेकर गाँव तक हर छोटे-बड़े इलाकों में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। नौ दिनों तक लोग माँ दुर्गा की आराधना में सारवोर रहते हैं। किन्तु, इसबार कोविड -19 संक्रमण के कारण पहली बार पूजा के दौरान हर गतिविधियाँ बदली-बदली सी नजर आएगी। दरअसल, वर्तमान में कोविड-19 का दौर चल रहा है। इससे बचाव के लिए लोगों को जहाँ एक तरफ आस्था के विधि-विधान का पालन करना है। वहीं, दूसरी ओर कोविड-19 के गाइडलाइन का भी पालन करना होगा। जो लोगों के लिए एक चुनौती भी होगी।

कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाऐ त्यौहार
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ के पुरोषत्तम ने कहा कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को दोनों चुनौतियों को स्वीकार भी करना होगा। नहीं तो थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत खड़ा कर सकती है। इसलिए, कोविड-19 के गाइडलाइन पालन करते हुए त्यौहार मनाऐं। त्यौहारों के दौरान शारीरिक-दूरी बनाऐ रखें। मास्क, हैंड सेनेटाइजर का उपयोग करें। पूजा स्थल पर भीड़ नहीं लगाऐं। कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए त्योहार संपन्न कराने में प्रशासन का सहयोग करें।

खुद के साथ दूसरों को भी करें जागरूक
पूजा-त्यौहार के दौरान कोविड-19 के तमाम जारी गाइडलाइन का खुद भी पालन करें और दूसरों को जागरूक करें। दरअसल, जब सामुदायिक स्तर पर लोग गाइडलाइन का पालन करेंगे तभी संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं होगा। इसलिए, संक्रमण से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। वर्ना, थोड़ी सी भी लापरवाही बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।

पूजा स्थल परिसर में रहें विशेष सतर्क
पूजा स्थल परिसर में लोगों की भीड़ होने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिए पूजा स्थल विशेष सतर्क रहने की जरूरत है और लोगों भी सतर्कता से प्रेरित करने की आवश्यकता है। पूजा स्थल परिसर में खासकर मास्क, शारीरिक-दूरी, सेनेटाइजर का अनिवार्य रूप से पालन करें। साथ ही पूजा के दौरान एक-दूसरे का सहयोग करें। ताकि शारीरिक-दूरी की कड़ी बनी रहे और हर लोग गाइडलाइन का पालन करे।

प्रशासनिक स्तर भी की जा रही है पहल

पूजा-त्यौहार के दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन कराने के लिए प्रशासनिक स्तर से भी हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। इसे सफल बनाने के लिए प्रशासन का सहयोग करना जरूरी है।

जिले में 11 अक्टूबर से पल्स पोलियो अभियान की होगी शुरुआत

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-आशा व सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पिलाऐगी दो बूँद पोलियो की दवा

-अभियान को सफल बनाने के तैयारी पूरी, एक भी बच्चा छूटे ना, इसका रखा जाएगा ख्याल

लखीसराय, 06 अक्टूबर, 2020
जिले में शुरू होने वाले पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का 11 अक्टूबर से शुरुआत की जाएगी। जिसे सफल बनाने को लेकर आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों के कंधे पर जिम्मेदारी दी गई। साथ ही सुपरवाइजर समेत अन्य कर्मियों की टीम गठित किया गया है। इसके अलावे अन्य प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी कर ली गई है और इस दौरान इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि एक भी बच्चे पोलियो की दो बूंद दवा पीने से छूटे नहीं।

जिले के सभी प्रखंडों में पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद दवा
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया यह अभियान जिले के सभी प्रखंडों में चलाया जाएगा और सभी प्रखंडों में 11 अक्टूबर से ही अभियान का शुभारंभ होगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। अभियान शुभारंभ के दिन से ही शाम में स्थानीय सभी पीएचसी में ड्यूटी में लगे कर्मी रिपोर्ट जमा करेंगे और पीएचसी से पूरे प्रखंड का रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।

घर-घर जाकर बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूँद दवा
डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी में लगे ऑगनबाड़ी सेविका, आशा समेत अन्य कर्मी कोविड़ 19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुये घर-घर जाकर पाँच वर्षों तक के बच्चों को पोलियो की दो बूँद दवा पिलाऐंगे। साथ ही दवा पिलाने के बाद बच्चों का नाम, बच्चे के माता-पिता का नाम, गृह संख्या आदि विभाग द्वारा दी गई फारमेट में भरेंगे। साथ ही बाहर गये बच्चों का भी पूरी जानकारी लेकर फारमेट में भरेंगे और देर शाम दिन भर के कार्यों की रिपोर्ट स्थानीय पीएचसी में जमा करेंगे।

चौक-चौराहे से लेकर स्टेशन पर भी दवा पिलाने के लिए कर्मी रहेंगे तैनात
पल्स पोलियो अभियान के तहत एक भी बच्चा नही छूटे इसके लिए विभाग द्वारा व्यापक तैयारियाँ की गई। दरअसल, एक भी बच्चा छूटने पर वायरस फैलने का प्रबल संभावना रहता है। इसको लेकर जिले के चौक-चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर दवा पिलाने के लिए कर्मियों की तैनाती किए गए हैं। जो बाहर से आने-जाने वाले यानी सफर कर बच्चे को दवा पिलाऐंगे। ताकि सफर पर निकले बच्चे वंचित नही रहे।

कोविड-19 के गाइडलाइन का रखा जाएगा ख्याल

डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया बच्चों को दवाई पिलाने के दौरान कोविड-19 के गाइडलाइन का ख्याल रखा जाएगा। बचाव से संबंधित उपायों का पालन करते हुए कर्मी दवा पिलाऐंगे और खुद के साथ-साथ दूसरों का भी कोविड-19 से सुरक्षा का ख्याल रखेंगे। इसको लेकर विभागीय पदाधिकारियों द्वारा सभी कर्मियों को आवश्यक निर्देश का पालन करना होगा ताकि कोविड-19 के संकर्मण से सुरक्षित रह सकें ।

कोरोना मरीजों से मुक्त हुआ जेएलएनएमसीएच का मेडिसिन विभाग

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– अब यहां पर सामान्य मरीजों का भी किया जा सकेगा इलाज
– मेडिसिन विभाग में इलाज को लेकर अस्पताल प्रशासन की तैयारी पूरी

भागलपुर, 6 अक्टूबर

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) प्रशासन ने सामान्य मरीजों के इलाज को लेकर एक और कदम बढ़ा दिया है. अस्पताल के मेडिसिन विभाग को कोरोना मरीजों से मुक्त करा दिया गया है. अब यहां पर एक-दो दिनों में सामान्य मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा.

दरअसल, कोरोना काल के दौरान राज्य सरकार ने जेएलएनएमसीएच को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर दिया था. इस वजह से यहां पर सिर्फ इमरजेंसी में ही सामान्य मरीजों का इलाज हो रहा था. इंडोर सेवा बंद थी. यहां आने वाले सामान्य मरीजों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा जाता था. इसे लेकर यहां से डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम भी भेजी गई थी. लेकिन अब जब कोरोना के मरीजों की संख्या घटने लगी है तो अस्पताल प्रशासन ने यह फैसला किया है यहां पर सामान्य मरीजों का भी इलाज होगा. अस्पताल में जितने भी कोरोना के मरीज हैं सभी को कोरोना वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है. अब अस्पताल आने वाले कोरोना मरीजों का इलाज कोरोना वार्ड में होगा. जबकि सामान्य मरीजों का इलाज इमरजेंसी में होगा. अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने कहा कि कोरोना मरीजों की संख्या अस्पताल में अब कम होने लगी है. अभी 40 कोरोना मरीज इलाजरत हैं. कोरोना वार्ड में 100 बेड की जगह है. अभी जितने भी मरीज हैं सभी के इलाज के लिए कोरोना वार्ड में पर्याप्त जगह है. इस वजह से मेडिसिन विभाग के ओपीडी में सामान्य मरीजों का इलाज शुरू करने का फैसला लिया गया है.

मेडिसिन विभाग को किया जा रहा है सैनीटाइज: अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने कहा मेडिसिन विभाग में सामान्य मरीजों के इलाज से पहले उसे सैनिटाइज किया जा रहा है. यहां आने वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है. इस वजह से मेडिसिन विभाग की सफाई की जा रही है.

इलाज कराने वाले हर व्यक्ति का होगा कोविड 19 टेस्ट: डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया मेडिसिन विभाग में इलाज कराने वाले सामान्य रोगी का कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिया जाएगा. रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आती है तो मरीज का इलाज कोरोना वार्ड में किया जाएगा और अगर रिपोर्ट सामान्य रहती है तो ओपीडी में इलाज किया जाएगा. दूसरों में संक्रमण न फैले, इस वजह से सतर्कता बरती जा रही है.

स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर करेंगे इलाज: ओपीडी में तैनात स्वास्थ्य कर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर इलाज करेंगे. मरीज के साथ आने वाले परिजनों को भी बिना मास्क और ग्लव्स के नहीं आने दिया जाएगा. साथी ओपीडी में आने वाले हर व्यक्ति का हाथ गेट पर सैनिटाइज कराया जायेगा. इसे लेकर ओपीडी में मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर की पर्याप्त व्यवस्था की गई है.

कोरोना संक्रमण के प्रति स्वास्थ्यकर्मी लोगों को कर रहे जागरूक

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सदर अस्पताल के कर्मियों ने कोरोना संक्रमण के खिलाफ अभियान किया तेज

बांका, 6 अक्टूबर

सदर अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने कोरोना के खिलाफ अभियान को तेज कर दिया है. जिले में प्रतिदिन जांच जहां 5000 तक पहुंच गई है, वहीं लोगों को कोरोना से बचाव के तरीके युद्धस्तर पर बताए जा रहे हैं. चौक चौराहों से लेकर शिविर लगाकर लोगों की कोरोना जांच की जा रही है.

सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने मंगलवार को बताया कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर काफी सजग है. पिछले 6 महीने से लगातार लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक किया जा रहा है. लोगों को बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं. इससे लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है और इसका असर भी अब देखने को मिल रहा है. पहले जहां 1 दिन में कोरोना के 50 मरीज सामने आते थे अब वह संख्या घटकर 10 प्रतिदिन 10 से 15 पर आ गई है.

चुनाव का प्रशिक्षण ले रहे लोगों को भी किया जा रहा जागरूक: अमरेश कुमार ने कहा अभियान के तहत विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशिक्षण ले रहे जिले के कर्मियों को भी कोरोना के प्रति जागरूक किया जा रहा है. शहर के एक निजी स्कूल में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान आने वाले कर्मियों का सबसे पहले तापमान मापा जाता है. इसके बाद उन्हें हाथ सैनीटाइज करने की सलाह दी जाती है. इसके बाद ही कर्मियों को प्रशिक्षण केंद्र में अंदर जाने दिया जाता है.

मास्क और ग्लव्स पहनने की लोगों से अपील: अमरेश कुमार ने बताया प्रशिक्षण के दौरान आने वाले लोगों से मास्क और ग्लव्स पहनने की अपील की जाती है. मास्क गीला हो जाने के बाद उसे बदल देने की भी सलाह दी जाती है. प्रशिक्षण के दौरान लोगों से शारीरिक दूरी बनाकर रहने की अपील की जाती है. इसके अलावा हर 2 घंटे पर हाथ धोने को कहा जाता है. साथ ही हाथ को आंख, मुंह और नाक से स्पर्श नहीं करने की सलाह दी जाती है.

मेडिकल कचरा को डिस्पोजल करने के तरीके भी बताए जा रहे: कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने के दौरान स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स को डिस्पोजल करने के तरीके भी बता रहे हैं. लोगों को समझाया जा रहा है कि मास्क और ग्लव्स को इस्तेमाल करने के बाद जमीन में गाड़ दें. इधर-उधर नहीं फेंके. जमीन के नीचे इतना इतना अंदर गाड़ दें कि उसे कोई निकाल नहीं सके.

सदर अस्पताल में बनाई गई है एक टीम: अमरेश कुमार ने बताया कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक टीम बनाई गई है. जिसमें 4 डॉक्टर और एएनएम हैं. यह लोग जगह-जगह जाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं. चुनाव कर्मियों को भी यही लोग जाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं. उन्हें कोरोना के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.