आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल प्रणाली के लिए वर्चुअल कार्यशाला हुई आयोजित

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– कार्यशाला में जिला से लेकर प्रखंड तक के चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता जुड़े
– ग्रीन चैनल प्रणाली एवं एवीडी (वैकल्पिक टीका वितरण) बैग का बताया गया महत्व
– आशा, एएनएम को समय पर उपलब्ध होगी किट, स्वास्थ्य व्यवस्था में आएगी सुधार
– स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग दे रहा है केयर इंडिया

मुंगेर, 01 अक्टूबर।

राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा प्रदेश में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की कवायद लगातार जारी है। इसी क्रम में अब आरोग्य दिवस सत्रों पर दवाओं एवं अन्य सामग्रियों की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया को और सरल व निर्वाध रूप से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आरोग्य दिवस पर ग्रीन चैनल प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। गुरुवार को ‘आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल प्रशिक्षण’ को लेकर एक वचुर्अल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग दे रहे केयर इंडिया के टीम लीडर डॉक्टर दुर्भा रोहिणी कुमार ने आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने बताया स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर और नर्सों को सशक्त बनाने के लिए आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल के विकास को बल दिया जा रहा है। इसके तहत एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे नर्सों, आशा व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को सामान ढ़ोने की व्यवस्था से निजात मिलेगी। आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल के तहत ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे कि इन कर्मियों को समय पर निर्वाध रूप से स्वास्थ्य किट व संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना लक्ष्य:
कार्यक्रम में डॉक्टर बी.के मिश्रा, एसपीओ, एनीमिया मुक्त भारत, बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने बताया स्वास्थ्य विभाग लोगों तक सुगम व्यवस्था में मदद पहुंचाने की कवायद कर रहा है। आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल प्रणाली इसमें मील का पत्थर साबित हो सकता है। व्यवस्था के तहत आसान और सुगम मार्ग से एवीडी (वैकल्पिक टीका वितरण) केंद्र, आशा और एएनएम तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने बताया जिला सहित ब्लॉक स्तर पर नर्सों को सुरक्षित प्रसव और नवजात की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के इस कार्यक्रम में केयर इंडिया न केवल तकनीकी सहयोग बल्कि कार्यक्रम की सफलता के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्र (VHSND) पर एवीडी बैग उपलब्ध करा रहा है। जच्चा एवं बच्चा की सुरक्षा के साथ दंपत्ति को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना इसका लक्ष्य है

लाभार्थी स्तर पर सेवाओं की मांग को प्रोत्साहित किया जाएगा:
आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल प्रणालीमें आशा एवं एएनएम के सहयोग से समुदाय स्तर पर गर्भावस्था, मातृ-शिशु पोषण, परिवार कल्याण, किशोर स्वास्थ्य एवं प्रतिरक्षण संबंधी सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करना एवं उसकी गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। एवीडी किट में ग्लूकोमीटर, फीडर डॉप्लर, बीपी मशीन, ब्लड सुगर जांच सहित कई जरूरत की किट उपलब्ध रहेगी। इस किट बैग की मदद से समय पर एएनएम लाभार्थी को स्वास्थ्य लाभ दे सकेंगी।

ऐसे समझ सकते हैं ग्रीन चैनल की व्यवस्था को:
पहले चरण में पीएची दवा भंडार में ड्यूलिस्ट के अनुसार ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND) सत्रों के लिए दवा और सामग्रियों का किट तैयार किया जाएगा। इसके बाद एवीडी (वैकल्पिक टीका वितरण) द्वारा भंडार से तैयार किट को ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण मिशन दिवस सत्र स्थल पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम को टेली शीट के साथ सुपुर्द किया जाएगा। वहीं इसके बाद एएनएम द्वारा सत्र स्थल पर दवा और किट की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाएगा।

वर्चुअल कार्यशाला में इनकी रही उपस्थिति:
आरोग्य दिवस ग्रीन चैनल प्रणाली को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में जिला स्तर से डीआईओ, डीसीएम, डिस्ट्रिक्ट ड्रग स्टोर कीपर, केयर के डीटीएल, डीटीओ-आन और ब्लॉक स्तर से एमओआईसी, बीसीएम, केयर के बीएम, ड्रग स्टोर कीपर सहित विभिन्न स्वास्थ्य पदाधिकारी सम्मिलित हुए। वहीं कार्य्रकम के अंत में डॉक्टर पंकज कुमार मिश्रा, टीम लीडर, न्यूबॉर्न चाइल्ड हेल्थ, स्टेट रिसोर्स यूनिट पटना और डॉक्टर सरिता एसपीओ मैटरनल हेल्थ, बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने लोगों शामिल रहे।

जिले के सभी पीएचसी और हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर विश्व वृद्धजन दिवस पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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-हलसी बुनियादी सेवा केंद्र में वृद्ध सम्मान समारोह कार्यक्रम किया गया आयोजन,

-अंगवस्त्र से वृद्ध को किया गया सम्मानित

-जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक ने किया विधिवत उदघाटन

लखीसराय, 01 अक्तूबर, 2020
विश्व वृद्धजन दिवस के अवसर पर गुरूवार को जिले के हलसी बुनियादी सेवा केंद्र पर वृद्ध सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक प्रेमलता कुमारी ने हलसी निवासी स्वतंत्रता सेनानी 83 वर्षीय वृद्ध शिवधर महतो एवं 86 वर्षीय महिला जायरा खातुन को अंग वस्त्र देकर किया। इसके अलावे जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा समाज के बुजुर्ग व्यक्तियों का सम्मान किया गया। इस दौरान पदाधिकारियों व कर्मियों ने वृद्ध का कुशल-क्षेम पूछे और उनके समस्याओं को जाना। साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखने के लिए प्रेरित किया गया।

बुजुर्गों का स्वास्थ्य समेत अन्य आवश्यकता का रखें ख्याल

इस मौके पर लखीसराय के सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक प्रेमलता कुमारी ने कहा कि मौजूद लोगों से यह अपील किया कि अपने घरों में बुजुर्गों का स्वास्थ्य समेत अन्य आवश्यकता का ख्याल रखें। जैसे कि, खान-पान, उनके जरूरी आवश्यकता आदि का ध्यान रखें। बुजुर्गों के साथ अच्छा व्यवहार करें, उनका भावनात्मक ख्याल रखना भी जरूरी है।

जिले के सभी पीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में वृद्धों का किया गया स्वास्थ्य जाँच

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि विश्व वृद्धजन दिवस के अवसर पर जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर, अनुमंडल अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में वृद्ध व्यक्तियों का चिकित्सकों द्वारा बारीकी के साथ स्वास्थ्य जाँच किया गया। साथ ही उन्हें रहन-सहन, खानपान समेत सम्मानपूर्वक जानकारी दी गई। स्वस्थ शरीर के लिए नियमित रूप से व्यायाम, वाक आदि करने की भी जानकारी दी गई। जाँच के दौरान वृद्ध का मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया, पार्किंसंस, मनोभ्रंश, अल्जाइमर, हृदय रोग, कान-नाक -गला रोग एवं नेत्र आदि बीमारियों की जांच के साथ ही बीमारियों से बचाव के उपाय एवं खानपान से संबंधित उचित सलाह दी गयी। साथ ही आए परिजनों को बुजुर्गों को समय पर दवाई खिलाने, खान-पान का ख्याल रखने आदि की चिकित्सकों द्वारा जानकारी दी गई।

जिस घर में बुजुर्ग रहेंगे खुशहाल, उस घर में रहेंगी खुशियाँ

जिस घर में बुजुर्ग खुशहाल रहेंगे, उस घर में ही खुशियाँ का माहौल होगी और परिवार के अन्य सदस्य भी खुशहाल रहेंगे। इसलिए बुजुर्गों का हमेशा सम्मान करें और उनका विशेष ख्याल रखें। क्योंकि बुजुर्ग ही घर की खुशहाली है।

कोरोना से बचाव के लिए बुजुर्गों का रखें खास ध्यान

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आमलोगों के मुकाबले बुजुर्गों को कोरोना होने का ज्यादा खतरा

घर में बुजुर्गों की देखभाल करते रहें, उनकी सुरक्षा को लेकर उनका ध्यान रखें

बांका, 1 अक्टूबर

कोरोना काल में वैसे तो हर कोई सुरक्षित तरीके से रह रहा है. अपना बचाव कर रहा है, लेकिन बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. आज 1 अक्टूबर को बुजुर्ग दिवस भी मनाया जा रहा है, इसलिए इस मौके पर सभी को बुजुर्गों की बेहतर देखभाल का संकल्प लेना चाहिए. बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कोरोना से बच्चों और बूढ़ों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. बच्चों की तो प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. उनमें कोरोना के संक्रमण का खतरा कम होता है. लेकिन बुजुर्गों में अधिक होता है, इसलिए बुजुर्गों पर खास ध्यान देने की जरूरत है. कोरोना काल में बुजुर्गों की देखभाल बहुत आवश्यक है. उन्होंने बताया, आज बुजुर्ग दिवस के मौके पर स्वास्थ्य केन्द्रों में बुजुर्गों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच के साथ उनको इस उम्र मे होने वाली बीमारी के बारे मे भी जागरूक किया जा रहा है।

घर से बाहर नहीं निकलने दें: डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं ऐसा देखा जाता है कि घर के बुजुर्ग सदस्य अधिकतर बाहर रहना पसंद करते हैं. दरअसल, अवकाश ग्रहण करने के बाद उनके पास अधिक काम नहीं रहता है. इस वजह से वह अपना समय बाहर व्यतीत करना पसंद करते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं करने दें. बाहर जाने पर भीड़भाड़ कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए घर के सदस्यों को कोशिश करनी चाहिए कि बुजुर्ग घर से कम से कम बाहर निकले. अगर न निकले तो ज्यादा बेहतर रहेगा.

अगर घर से निकलें तो मास्क और ग्लव्स लगाकर: डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं मान लीजिए अगर बुजुर्ग घर के बाहर निकलने से मान नहीं रहे हो तो उन्हें मास्क पहनने के बाद ही निकलने दीजिए. साथ में अतिरिक्त मास्क भी दे दीजिए, ताकि खराब होने पर उसे बदला जा सके. उन्हें बता दीजिए कि मास्क जब गिला हो जाए तो उसे तुरंत बदल लेना है. ऐसा करना बेहतर रहेगा.

नाखून नहीं बढ़ने दें: अक्सर देखा जाता है कि बुजुर्ग लोग अपना नाखून पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. बेवजह बड़ा हो जाता है. ऐसे में घर के सदस्यों की जिम्मेदारी है कि बुजुर्गों के नाखून को समय-समय पर काट दिया करें. ऐसी जगहों पर कोरोना का वायरस आसानी से चिपकता है, जिससे कोरोना के संक्रमण का अधिक खतरा रहता है.

नाक और मुंह छूने से बचने की दें सलाह: डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं घर या बाहर जहां पर भी बुजुर्ग हो इस बात का ध्यान रखें कि वह अपने हाथ से मुंह को बार-बार नहीं छुए. आंख और नाक को भी कभी बार-बार नहीं छुए. कोरोना का ड्रॉपलेट मुंह, नाक और आंख के जरिए शरीर के अंदर प्रवेश करता है. इसलिए अपने बुजुर्गों को इस बात के लिए समझाएं कि ऐसा नहीं करें. अगर वह नहीं समझे तो आप उन पर नजर रखिए.

कोरोना मरीज से रखें दूर: डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं अगर घर में कोई कोरोना का मरीज हो तो बुजुर्ग को उससे बिल्कुल भी दूर रखें. अगर संभव हो तो दूसरे मकान में ले जाकर उनकी देखभाल करें. बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इस वजह से कोरोना के संक्रमण का खतरा आम लोगों के मुकाबले अधिक रहता है. इसलिए बुजुर्गों को कोरोना मरीज के संपर्क में नहीं आने दें.

पोषण के बारे ने जन जागरूकता के लिए समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय ने जारी किया पोषण टाल फ्री नंबर

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पटना, 30 सितम्बर: समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय ने आम जनता को पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है . कोई भी व्यक्ति टॉल फ्री नंबर 18001215725 पर फ़ोन कर पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) से जुड़ी जानकारियां घर बैठे प्राप्त कर सकता है.
श्री आलोक कुमार, निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय, ने कहा कि पोषण के बारे में जन जागरूकता के लिए यह टॉल फ्री नंबर जारी किया गया है. इसके माध्यम से हम आम लोगों के बीच आसानी से पहुँच सकते है और उन्हें सही जानकारी दी जा सकती है. अभी भी आम जनता के बीच बच्चों के पोषण से जुड़ी कई भ्रांतियां व्यापत है. इस पहल से इन भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिलेगी. जन जागरूकता के लिए यह एक अनूठी पहल है. शुरू किये गए इस निशुल्क: नंबर से बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं, किशोर-किशोरियों समेत पूरे परिवार के पोषण की जानकारी प्राप्त की जा सकती है. साथ ही इस हेल्पलाइन पर बच्चों के जीवन में शुरूआती वर्षों के महत्व, बच्चों के मस्तिष्क विकास की प्रकिया एवं प्रभावित करने वाले कारकों, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की अवधारणा एवं महत्व और 3-6 वर्ष के आयु के बच्चों की वृद्धि एवं विकास से जुड़ी हर जानकारी भी उपलब्ध है.
वॉइस ब्रॉडकास्ट की भी हुई शुरूआत
टॉल फ्री नंबर के साथ ही स्तनपान और बच्चों के पूरक आहार को लेकर वॉइस ब्रॉडकास्ट की भी शुरूआत की गई. इसके माध्यम से लोगों के मोबाइल पर बच्चों के पोषण से जुड़े संदेश भेजे जा रहे हैं . पोषण माह के दौरान वॉइस ब्रॉडकास्ट के में यह अपील की जा रही है कि शिशु को जन्म के तुरंत बाद मां का गाढ़ा पीला दूध दें. जन्म से छ: माह तक सिर्फ माँ का दूध दें एवं छ: माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को माँ के दूध के साथ उपरी आहार (मसला हुआ भोजन) दें. भोजन में अनाज, फल, सब्जी, अंडा एवं मांस-मछली इत्यादि शामिल करें
प्रभावशाली लोगों की अपील के माध्यम से लोगों को किया जा रहा है जागरूक
इससे के साथ ही बिहार से जुड़े कला, फिल्म, साहित्य, संगीत के क्षेत्रों के प्रसिद्ध लोगों द्वारा हर घर पोषण त्यौहार को अपनाकर कुपोषण दूर करने के लिए अपील की जा रही है ताकि सभी लोग अपने इस जन आन्दोलन का हिस्सा बन सकें.
इसके अलावा सभी आयु वर्गों के लिए ऑनलाइन पोषण प्रतियोगिता का भी आयोजन http: //icdsquiz.dtpl.bizपर किया जा रहा है जिसमे भाग लेकर प्रतिभागी पोषण चैम्पियन का प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं.

पोषण योद्धा बनेंगे बदलाव के सूत्रधार, आगे भी जगाते रहेंगे पोषण पर अलख

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• प्रत्येक माह पोषण योद्धाओं की कहानी आईसीडीएस करेगी मीडिया से साझा
• पोषण योद्धा की कहानी से समुदाय तक पहुंचेगी जागरूकता की बयार
• पोषण माह समापन के बाद भी पोषण की लहर चलती रहेगी

पटना/ 30,सितंबर: बुधवार को पोषण माह का समापन हो गया. कोरोना संक्रमण की चुनौतियों के बीच भी पोषण माह के दौरान पोषण की बयार घर-घर पहुँचती रही. पोषण माह के खत्म होने के बाद भी यह जागरूकता की लहर आगे भी कायम रहेगी. अब पोषण योद्धा अपने हाथों में जागरूकता की कमान थामेंगे. ऐसे तो पोषण योद्धा दिन-रात लोगों को जागरूक करने एवं लाभुकों तक पोषण सेवाओं को पहुँचाने में जुटे हैं. लेकिन इस बार पोषण योद्धाओं के संघर्ष एवं समुदाय में उनके बदलाव लाने के जज्बे की कहानी समुदाय को जागरूक करेगी. पोषण माह के समापन के बाद आईसीडीएस ने नई एवं अनोखी पहल की घोषणा की है. जिसके तहत प्रत्येक माह आईसीडीएस पोषण योद्धाओं की कहानी मीडिया के साथ साझा करेगी.

पोषण माह का अंत नहीं बल्कि यह एक नयी शुरुआत है:

आईसीडीएस, बिहार के निदेशक आलोक कुमार ने बताया कि बुधवार को भले ही पोषण माह का समापन हुआ हो. लेकिन पोषण की मुहिम अभी खत्म नहीं हुयी है. कोरोना संक्रमण के बीच भी लोगों ने पोषण माह में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है, जिसे नए शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है. उन्होंने बताया कि कुपोषण से सुपोषण की तरफ़ जाने वाले रास्तों में कई चुनौतियाँ है, जिसके साथ पोषण योद्धा संघर्ष कर लोगों के लिए सुपोषण के समतल रास्ते बनाने में जुटे हैं. कई ऐसे पोषण योद्धा हैं, जिन्होंने अपने पोषक क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है एवं बदलाव के सूत्रधार भी बने हैं. उनके संघर्षों एवं मेहनत की कहानी लोगों तक पहुंचनी चाहिए. इससे समुदाय में पोषण पर जागरूकता तो बढ़ेगी ही. साथ ही पोषण योद्धाओं का मनोबल भी बढेगा. इसलिए आईसीडीएस ने यह निर्णय लिया है कि मीडिया के साथ प्रत्येक माह पोषण योद्धाओं की कहानी साझा की जाएगी.

बदलाव की कहानी होगी कारगर:
बदलाव की कहानी अपने साथ विचारों के आंदोलन को संयोजे रहती है. यदि यही बदलाव किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए हो तो यह जनांदोलन में भी तब्दील होने की क्षमता रखता है. पोषण अभियान का उद्देश्य भी जन भागीदारी को बढ़ाना एवं पोषण को जनांदोलन में तब्दील करना है. पोषण योद्धाओं की कहानी इस दिशा में अहम भूमिका अदा कर सकती है.

हृदय रोगियों को कोरोना होने का ज्यादा खतरा

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ह्रदय रोगी के लिए भी प्रतिदिन टहलना जरूरी

हर तीसरे ह्रदय रोगी को मधुमेह होने का होता है ख़तरा

बांका, 30 सितंबर:

कोरोना का खतरा तो वैसे सभी लोगों को है, लेकिन हृदय रोगियों को विशेष तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है. हृदय रोगियों को आमलोगों के मुकाबले कोरोना होने का खतरा ज्यादा है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि हर तीसरा हृदय रोगी शुगर का भी मरीज होता है. शुगर यानी मधुमेह की बीमारी आमतौर पर शरीर का वजन ज्यादा होने पर होता है. शरीर भारी हो जाने के बाद सक्रियता कम हो जाती है. और जब शरीर निष्क्रिय रहता है तो कोरोना होने का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए ह्रदय रोगी प्रतिदिन 45 मिनट तक तेज गति से जरूर टहला करें. इससे कोरोना से तो बचाव होगा ही, साथ ही शुगर और हृदय रोग भी नियंत्रित रहेगा.

सदर अस्पताल में की जा रही है काउंसलिंग: सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि 29 सितंबर को हृदय दिवस था. उस दिन से 1 सप्ताह तक हृदय रोगियों की ओपीडी में काउंसलिंग की जाएगी। प्रतिदिन अस्पताल के ओपीडी में डॉक्टर हृदय रोगियों की जांच कर उन्हें उचित सलाह दे रहे हैं. कोरोना काल में उनकी जीवनशैली क्या हो, इस बारे में डॉ हृदय रोगियों को बता रहे हैं.

खान-पान में करना होगा सुधार: हाईपरटेंशन से बचाव के लिए हमें सबसे पहले खान-पान में सुधार करना होगा. शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी बताते हैं कि इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए सही खानपान होना बहुत जरूरी है. नमक और हाई पोटेशियम वाले पदार्थों का कम से कम सेवन करना चाहिए. भोजन में कम मात्रा में नमक लेने से हाईपरटेंशन की समस्या से बचा जा सकता हैं. खाने में हरी सब्जियों और सलाद का प्रयोग अधिक से अधिक करें. अधिक तेल मसाले के सेवन से बचना चाहिए. दूध और दही के ऊपर से छाली को हटाकर उसका सेवन करें.

लें भरपूर नींद: डॉ. चौधरी कहते हैं नींद पूरी नहीं होने से भी तनाव बढ़ता है. अभी जब घर में ही रहना है तो आठ घंटे सोने की कोशिश करें. हां, एक रूटिन के तहत नींद को पूरी करें. रात में जल्द सोएं और सुबह जल्द उठें. सुबह जल्द उठने से दिनभर ताजगी का अहसास होता है. कोशिश करें कुछ समय तक योग भी करें. इससे दिन खुशनुमा बीतेगा और तनाव से भी मुक्त रहेंगे.

दवा का सेवन नहीं छोड़े: हाईपरटेंशन के मरीज को नियमित दवा लेनी चाहिए. दवा छूटने से यह बीमारी खतरनाक स्टेज में पहुंच जाता है. सभी तरह की सावधानियों को बरतते हुए डॉक्टर के बताए अनुसार दवा को लेते रहें. साथ ही अगर संभव हो तो नियमित तरीके से हाईपरटेंशन की जांच भी कराते रहें.

सफलता पूर्वक पोषण माहाभियान का हुआ समापन

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-तमाम गतिविधियों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया गया पोषण का संदेश

-कुपोषण मुक्त समाज निर्माण पर दिया गया बल, लोगों को किया जागरूक

-पोषण के महत्व और उदेश्य की लोगों को दी गई जानकारी

लखीसराय, 30 सितम्बर, 2020
01 सितम्बर से जिले में चल रहे पोषण माह अभियान का बुधवार को सफलता पूर्वक समापन हो गया। इस दौरान पोषण माह को सफल बनाने के लिए पूरे माह तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को पोषण के महत्व और उदेश्य को विस्तारपूर्वक बताया गया और लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही लोगों को कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण के लिए आवश्यक जानकारी दी गई। ताकि लोग पोषण के महत्व और उदेश्य को समझ सकें। क्योंकि, यह तभी धरातल पर सफल होगा। जब लोग इसके महत्व को समझेंगे। हालाँकि, पूरे माह हुए तमाम गतिविधियों का साकारात्मक बदलाव भी दिखने लगे हैं। लोग अपने सामान्य दिनचर्या में बदलाव लाना शुरू कर दिए हैं। जो सामुदायिक स्तर पर साकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।

हर विभागों का मिला सहयोग, सफल रहा पोषण माह
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि पोषण माह को सफल बनाने के लिए हर विभागों का भरपूर सहयोग मिला। जैसे कि, जीविका, स्वास्थ्य, केयर इंडिया समेत अन्य विभागों ने भरपूर सहयोग की। इसी का परिणाम है कि पोषण माह पूर्ण रूप से सफल रहा है और लोगों के अंदर बदलाव दिखने लगा है। जो शुभ संकेत का प्रतीक है।

जिले के 06 प्रखंडों में हुआ कार्यक्रम का आयोजन
जिले सभी यानि 06 प्रखंडों में विभाग द्वारा कार्यक्रम की गतिविधि को लेकर जारी कैलेंडर के अनुसार निर्धारित तिथि के अनुरूप विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। साथ ही समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पोषण का संदेश पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास की गई। इस दौरान 93, 027 प्रकार के तरह-तरह का गतिविधि का आयोजन किया गया।

बच्चों से लेकर हर वर्ग के लोगों के लिए उचित पोषण की दी गई जानकारी
इस दौरान पूरे माह तमाम गतिविधियों के माध्यम समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चों के जन्म के साथ उनका उचित रहन, पोषण, देखरेख से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों तक के लिए उचित पोषण, रहन-सहन में बदलाव समेत अन्य जानकारियाँ दी गई। जिसके दौरान बताया कि कैसे बच्चे का सर्वागीण शारीरिक और मानसिक विकास होगा, युवा और बुजुर्ग कैसे स्वस्थ रहेंगे आदि की जानकारी दी गई।

स्वच्छता पर भी दिया गया बल

इस दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों को स्वच्छता की भी विशेष जानकारी दी गई और स्वच्छता पर बल देते हुए लोगों को इससे होने वाले फायदे को बताया गया। दरअसल, स्वच्छता से ही लोग स्वस्थ रहेंगे और जब लोग स्वस्थ रहेंगे तो उनकी शारीरिक व मानसिक विकास होगा। जिससे कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण होगा।

सदर अस्पताल में प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

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– वर्चुअल माध्यम से जुड़े जिले के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सिविल सर्जन ने किया संबोधित
– सुरक्षित प्रसव, गर्भवती और नवजात की सुरक्षा पर नर्सों के प्रशिक्षण का बताया गया महत्व
– प्रशिक्षण में केयर इंडिया दे रहा है तकनीकी सहयोग, एवीडी एवं ड्रिल बैग उपलब्ध कराया
– प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को बताया गया ड्रिल बैग की उपयोगिता एवं महत्व

मुंगेर, 30 सितम्बर।
नवजात और गर्भवती की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। वहीं कई ऐसी योजनाएं हैं जिसके पूर्ण कार्यान्वयन पर विभाग अति गंभिर है। जच्चा और बच्चा की पूर्ण सुरक्षा भी इसमें से एक है। इसी क्रम में बुधवार को मुंगेर के जिला स्वास्थ समिति सभागार में एक वर्चुअल स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यकम में सुरक्षित प्रसव, गर्भवती और नवजात की सुरक्षा पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम में सिविल सिविल सर्जन डॉक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने बताया आंगनबाड़ी से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक में बेहतर सुविधा प्रदान करने को लेकर लगातार कवायद जारी है। जच्चा एवं बच्चा की पूर्ण सुरक्षा और उचित जांच को बढ़ावा देने के लिए नर्सों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आपातकालीन मातृत्व एवं नवजात तत्परता (अमानत) ज्योति कार्यक्रम के तहत भी सभी स्टाफ नर्सेज और एएनएम की क्षमता को बनाए रखने तथा उनके कौशल को और ज्यादा निखारने के लिए उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया जा रहा है। इससे वह अस्पतालों में अपनी सेवा को और बेहतर ढंग से दे सकेंगी। केयर इंडिया इसमें तकनीकी सहयोग दे रहा है।

नर्सों को किया जा रहा है प्रशिक्षित, एवीडी उपलब्ध कराया गया :
सिविल सर्जन डॉक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने बताया जिले के कुल 9 ब्लॉक सहित जिला सदर अस्पताल के साथ 10 अस्पतालों की दो-दो नसों को सुरक्षित प्रसव और नवजात की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं कार्यक्रम में केयर इंडिया के अजय आर्या ने बताया ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्र (VHSND) पर केयर इंडिया की ओर से एवीडी (वैकल्पिक टीका वितरण) बैग उपलब्ध कराया गया है। जच्चा एवं बच्चा की सुरक्षा के साथ दंपत्ति को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना इसका लक्षय है।

ड्रिल बैग से मिलेगी मदद:
वहीं कार्यकम में बताया गया कि अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत सभी स्टाफ नर्सों और एएनएम को उनकी कौशल क्षमता को बनाए एखने के लिए केयर इंडिया की ओर से अमानत अस्पताल को ड्रिल बैग दिया गया है। ड्रिल बैग में बीपी मशीन, चाइल्ड टेस्ट व बेबी किट सहित अन्य आवश्यक जांच किट उपलब्ध रहेंगे। बैग में मौजूद किट की मदद से गर्भवती और शिशु के सेहत जानकारी नर्सों को मिलती रहेगी। इसकी उपयोगिता और कीट से स्वयं स्किल्ड होकर नर्स बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की दिशा में ओर अग्रसर होंगी।

वर्चुअल जूम कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण:
कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल जूम माध्यम से जुड़े जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को सिविल सर्जन डॉक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने ड्रिल बैग की उपयोगिता एवं उद्देश्य बताया। उन्होंने बैग के मौजूद किट का एक-एक कर प्रदर्शन करते हुए उसका महत्व और उपयोग भी सभी को समझाया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉक्टर पुरुषोत्तम कुमार के अलावा डीपीएम नसीब रजी, केयर इंडिया से अजय आर्या, डॉ. नीलू व अस्पताल की नर्स व अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग में कल से सामान्य मरीजों का भी इलाज होगा

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अस्पताल में अभी सिर्फ कोरोना मरीजों का ही हो रहा था इलाज
मेडिसिन विभाग को किया जा रहा है सेनीटाइज
कोरोना मरीजों की संख्या घटने पर अस्पताल प्रशासन ने लिया फैसला

भागलपुर, 30 सितंबर

मायागंज अस्पताल का मेडिसिन विभाग गुरुवार से सामान्य मरीजों के लिए भी खुल जाएगा. अब यहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ सामान्य मरीजों का भी इलाज हो सकेगा. अभी इमरजेंसी में ही सामान्य मरीजों का इलाज हो पा रहा था. दरअसल 5 अप्रैल को मायागंज अस्पताल को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर दिया गया था. तब से यहां पर ओपीडी में सामान्य मरीजों का इलाज नहीं हो रहा था. अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने कहा अस्पताल को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर देने के बाद ओपीडी में सामान्य मरीजों का इलाज बंद था, लेकिन कोरोना मरीजों की संख्या घटने के कारण अस्पताल प्रशासन ने अब सामान्य मरीजों का भी यहां पर इलाज शुरू करने का फैसला किया है.

कोरोना मरीज आइसोलेशन वार्ड में होंगे शिफ्ट: अस्पताल में 40 कोरोना मरीज ही इलाजरत हैं. इसलिए सभी को एक जगह अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा. पहले पूरे अस्पताल में सिर्फ कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था. अब कोरोना मरीजों की संख्या कम होती जा रही है, इसलिए उनका इलाज आइसोलेशन वार्ड में होगा.

मेडिसिन विभाग को किया जा रहा है सेनीटाइज: अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने कहा मेडिसिन विभाग में सामान्य मरीजों के इलाज से पहले उसे सैनिटाइज किया जा रहा है. यहां आने वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है. इस वजह से मेडिसिन विभाग की सफाई की जा रही है.

इलाज कराने वाले हर व्यक्ति का होगा कोविड 19 टेस्ट: डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया मेडिसिन विभाग में इलाज कराने वाले सामान्य रोगी का कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिया जाएगा. रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आती है तो मरीज का इलाज कोरोना वार्ड में किया जाएगा और अगर रिपोर्ट सामान्य रहती है तो ओपीडी में इलाज किया जाएगा. दूसरों में संक्रमण न फैले, इस वजह से सतर्कता बरती जा रही है.

स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर करेंगे इलाज: ओपीडी में तैनात स्वास्थ्य कर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर इलाज करेंगे. मरीज के साथ आने वाले परिजनों को भी बिना मास्क और ग्लव्स के नहीं आने दिया जाएगा. साथी ओपीडी में आने वाले हर व्यक्ति का हाथ गेट पर सैनिटाइज कराया जायेगा. इसे लेकर ओपीडी में मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर की पर्याप्त व्यवस्था की गई है.

मास्क और शारीरिक दूरी रखेगा संक्रमण से दूर

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– मास्क नहीं पहनने की मानसिकता के प्रति लोगों को होना होगा जागरूक
– संक्रमण का दौर खत्म नहीं हुआ है,अभी रखना होगा अपना विशेष ख्याल
– जबतक रखेंगे नियमों का ख्याल, तबतक संक्रमण से रहेंगे सुरक्षित

मुंगेर, 29 सितम्बर।

कोविड-19 को लेकर स्थिति आज भी जटिल है। दवा और वैक्सीन का अबतक उपलब्ध नहीं होना इसका मुख्य कारण है। हालांकि अनलॉक के बाद जीनव सामान्य गति से बढ़ रहा है, लेकिन अक्सर नियमों की हो रही अनदेखी आगे जाकर परेशानी बढ़ा भी सकती है। क्योंकि संक्रमण आज दबे पांव हरेक जगह मौजूद है, इसलिए प्रशासन द्वारा लोगों को सतर्क और जागरूक रहते हुए कार्य करने को कहा जा रहा है। वहीं इन दिनों जो सबसे बड़ी अनदेखी देखी जा रही है, वह शारीरिक दूरी और मास्क का न पहनना है। जैसे-जैसे लोग रोजमर्रा के कामों के लिए घरों से बाहर निकल रहे हैं, बाजार और सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है। इस दौरान कई लोग बिना मास्क और कई तो नाम मात्र के पहने नजर आते हैं।

इस वक्त एहतियात बरतने की है आवश्यकता:
मुंगेर की स्थानीय निवासी जितेंद्र कुमार कहते हैं कि अनलॉक में बाजार, दुकान व अन्य प्रतिष्ठान खुल चुके हैं। ऐसे में लोगों की आवाजाही और संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में सुरक्षा के नियमों की अनदेखी में कौन, कब संक्रमण के प्रभाव में आ जाएगा कहा नहीं जा सकता। इसलिए संक्रमण के दौर में बनती इस नई व्यवस्था को अन्यथा लेने की जगह, गंभीर होने की जरूरत है। काम के साथ साथ हम सबको अपनी सुरक्षा भी देखनी होगी। इसलिए अगर हम घर से बाहर हैं तो हमें स्वयं सतर्क ​हो जाने की जरूरत है। हम जितना सतर्क और सावधान रहेंगे, संक्रमण उतना ही हमसे दूर रहेगा।

नियमों का पालन करना और करवाना जरूरी:
वहीं राजन कहते हैं कि आज भी कोविड 19 के प्रभाव में आने वालों की संख्या कम नहीं है। हां, अखबारों व विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्ट में यह जरूर देखने को मिल रहा है कि उपचाराधिनों के ठीक होने का प्रतिशत बढ़ रहा है। यह अच्छी और सकारात्मक बात है। लेकिन इससे ​संक्रमण को लेकर निश्चित हो जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आज यह वृहद स्तर पर फैल चुका है, इसलिए हम अब भी सजग रहने की जरूरत है। मास्क और शारीरिक दूरी अधिकांश लोग अपना भी रहे हैं, लेकिन पूर्ण सुरक्षा तभी संभव है जब सभी लोग नियमों का पालन करेंगे और करवाएंगे। हम एक दूसरे का ख्याल रखते चलें तभी इस संक्रमण पर लगाम संभव है।

इसलिए जरूरी है मास्क और शारीरिक दूरी:
कोविड 19 के संक्रमण से बचाव के लिए अभी तक देश में कोई टीका या दवा नहीं आई है। ऐसे में इससे बचने के लिए हमें खास एहतियात बरतने की जरूरत है। मास्क का सही ढंग से इस्तेमाल और शारीरिक दूरी वर्तमान में ही एकमात्र इससे बचाव के उपाय हैं। हालांकि, आज अक्सर देखा जा रहा है कि लोग मास्क का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। मास्क से नाक व मुंह दोनों को ढ़कना है। लेकिन, अधिकांश लोग सिर्फ मुंह ढ़क रहे हैं या फिर गले पर लटका रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। वहीं, यह भी देखा जाता है कि जब दो लोग आपस में बातचीत करते हैं तो अक्सर मास्क उतार देते हैं, यह भी खतरनाक है और संक्रमण को न्योता देने जैसा है।

शारीरिक दूरी और मास्क पहनने वक्त इन बातों पर रखें ध्यान:
– घर से बाहर लोगों से दो गज या छह फीट की दूरी बनाए रखें।
– दुकान व बाजार में भीड़ लगाने या उस स्थिति में जाने से बचें।
– मास्क पहनने से पहले अपने हाथों को अच्छे से साफ कर लें।
– नाक व मुंह को मास्क से अच्छे ढंक लें, ध्यान रखें की इसमें गैप न हो।
– मास्क पहने हुए हैं तो उसे और चेहरे को बार-बार हाथों से छूने से बचें।
– साबुन या फिर सैनिटाइजर से हाथों को साफ करते रहें।