डेंगू और मलेरिया होने वालों को कोरोना नहीं होने की गारंटी नहीं

0

इस तरह की अफवाहों से रहे सावधान और बरतें सतर्कता

साफ सफाई और शारीरिक दूरी का पूरी तरह से रखें ध्यान

बांका, 25 सितंबर

कोरोना को लेकर तमाम तरह की अफवाहें सोशल साइट्स पर उड़ती रहती हैं. कभी मास्क पहनने से दिमाग से संबंधित बीमारी होने की बात कही जाती है तो कभी मांस मछली खाने से भी कोरोना होने का खतरा होने की बात कही जाती है. अब एक नई तरह की बात सोशल साइट्स पर देखने को मिल रही है. कुछ लोग पोस्ट कर रहे हैं कि जिसे कभी डेंगू या मलेरिया हुआ है उसे कोरोना नहीं होगा.

दरअसल ऐसा कहने वालों का तर्क यह है जिसे कभी डेंगू और मलेरिया हुआ है, उनमें एंटीबॉडी विकसित हो गई है जो कोरोना से मुकाबला करने में सक्षम है. इसलिए उसे कोरोना नहीं होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि जिसे कभी डेंगू या मलेरिया हुआ है उसे कोरोना नहीं होगा. दरअसल तीनों ही बीमारी का नेचर थोड़ा बहुत मिलता जुलता है. इस वजह से लोग मान बैठते हैं कि इन बीमारियों से उबरने के बाद शरीर में जो एंटीबॉडी विकसित हुई है, वह कोरोना से भी लड़ने में सक्षम है. ऐसा नहीं है. हां, यह बात सही है कि इन बीमारियों से उबरने वाले लोगों को तत्काल कोरोना नहीं होगा. लेकिन इसका लंबे समय तक प्रभाव नहीं होगा. शरीर में जो एंटीबॉडी विकसित हुई है, वह कुछ दिनों के बाद कमजोर पड़ने लगती है और वैसे व्यक्तियों पर भी कोरोना का उतना ही खतरा रहता है, जितना कि सामान्य लोगों को. इसलिए डेंगू और मलेरिया को मात देने वाले व्यक्ति भी लापरवाही नहीं बरतें और पूरी तरह से सतर्क रहें.

कोरोना को मात देने वाले भी 40 दिन के बाद पूरी तरह से रहें सतर्क: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि जिन लोगों ने कोरोना को भी मात दे दी है, वैसे लोगों में भी जो एंटीबॉडी विकसित हुई है वह 40 दिन के बाद कमजोर पड़ने लगती है. वैसे लोगों पर भी सामान्य लोगों की तरह ही कोरोना का खतरा रहता है. इसलिए लापरवाही नहीं बरतें. चाहे डेंगू से ठीक होने वाले हो या मलेरिया को मात देने वाले या फिर कोरोना से उबरे हो, अभी के माहौल में हर व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए.

घर से निकलते वक्त लगाएं मास्क: डेंगू, मलेरिया और कोरोना से ठीक हुए व्यक्ति भी घर से निकलते वक्त जरूर मास्क लगाएं. अगर संभव हो तो ग्लब्स भी पहन कर जाएं. शारीरिक दूरी का पालन करना नहीं भूलें. घर में साफ सफाई का भी रखें ध्यान. सतर्कता से ही हम कोरोना को मात दे सकते हैं. इसलिए किसी भी तरह की खुशफहमी नहीं पालें और सावधानी बरतें.

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 28 सितंबर से चलाया जायेगा अभियान

0

• सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान की होगी शुरुआत
• जागरूकता को लेकर मीडिया कार्यशाला हुई आयोजित
• एक भी व्यक्ति ना छूटे, हरेक घर तक पहुंचकर दी जाएगी दवा
• आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को खिलाएंगी दवा की खुराक
• जिले के 12 लाख 17 हजार 298 लोगों को दवा खिलाने का है लक्ष्य
. केयर इंडिया का रहेगा तकनीकी सहयोग

लखीसराय, 25 सितम्बर।

जिला स्वास्थ्य समिति, विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर इंडिया, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल एवं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में शुक्रवार को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की सफलता को लेकर एक मीडिया जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि 28 सितम्बर से जिले में राज्य व केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए एमडीए अभियान शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान जिले के हरेक घर तक पहुंचकर आशा कार्यकर्ता लोगों को डाई इथाइल कार्बामाजिन (डीईसी) एवं अल्बेंडाजोल दवा की खुराक अपने सामने खिलाएंगी। उन्होंने बताया कि जिले के 12,17,298 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यकम 28 सितम्बर से शुरू होकर अगले 14 दिनों तक चलेगा।

स्वास्थ्य टीम का हुआ गठन, निर्धारित है दवा की मात्रा:
कार्यशाला में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान का सफल क्रियान्वयन होगा। अभियान की सफलता के लिए 61 पर्यवेक्षकों, 1218 दवा वितरकों और 609 दलों के साथ स्वास्थ्य टीम का गठन कर दिया गया है। अभियान के दौरान दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को डाई इथाइल कार्बामाजिन (डीईसी) एवं अल्बेंडाजोल दवा की खुराक दी जाएगी। 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी। एलबेंडाजोल की दवा को चबाकर खाना है।

फाइलेरिया एक घातक रोग है:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉक्टर शान्तनु सेन ने बताया कि इस बीमारी से जुड़ी विकलांगता जैसे ब्रंक्रोफटियन फाइलेरिया में विभिन्न अंगों में सूजन के साथ हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) तथा ब्रजीयन फाइलेरिया में हाथीपांव और घुटने के नीचे पैर प्रभावित होते हैं। यह एक घातक रोग है। इसके कारण पीड़ित को काफी समस्याओं को सामना करना पड़ता है। इसकी दवा लाभप्रद है। किसे दवा नहीं लेनी चाहिए इसपर उन्होंने कहा कि फाइलेरिया की दवा खाली पेट दवा नहीं खानी चाहिए। साथ ही गर्भवती और दो वर्ष से कम वर्ष के बच्चों को दवा का सेवन नहीं करना है। उन्होंने बताया कि दवा सेवन से जी मतलाना, हल्का सिर दर्द एवं हल्का बुखार हो सकता है जो शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी के मरने के कारण होता है। इसलिए दवा का साइड इफ़ेक्ट मरीज के हित में ही है। हालांकि ज्यादा परेशानी होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।

केयर इंडिया का रहेगा तकनीकी सहयोग, कोई छूट न जाए इसका रहेगा ख्याल:
कार्यशाला में केयर इंडिया के जिला टीम लीड, मिस्टर नावेद ने बताया कि केयर इंडिया के 14 एक्सटर्नल मॉनिटर कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों से इसकी सफलता सुनिश्चित करेंगे। हरेक ब्लॉक में दो लोगों की टीम काम करेगी। ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों और विभिन्न समूहों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां को अंजाम दिया जाएगा। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की जानकारी और लाभ के साथ समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए घर-घर जाकर नुक्कड़ नाटक, बैनर पोस्टर जैसे माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जााएगा। कार्यक्रम के दौरान 13 दिन बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई व्यक्ति दवा के सेवन से छूट न गया हो, अगर कोई ऐसा मिलेगा तो उसे दवा की खुराक दिलाई जाएगी।

कर्मियों को मिलेगा पारितोषिक, केंद्रों में पहुंच चुकी है दवा:
सर्वजन दवा सेवन अभियान में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को विभाग द्वारा पारितोषिक भी दिया जाएगा। दवा वितरकों का पारितोषिक 200 घरों में खिलाने पर एकमुश्त 2400 रुपए है वहीं पर्यवेक्षकों को 175 रुपए प्रति दिन की दर में देय है। बता दें, कि जिले में राज्य द्वारा 28,006,020 डीईसी एवं 12,00,320 अल्बेंडाजोल दवा की आपूर्ति की गई है, जिसे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित कर दिया गया है।

कार्यशाला में इनकी रही मौजूदगी:
मीडिया कार्यशाला में एसीएमओ डॉक्टर देवेन्द्र चौधरी, डीपीएम मो. खालिद हुसैन, पीसीआई से प्रिंस कुमार, सीफार से राज्य प्रलेखन और प्रशिक्षण अधिकारी सरिता मलिक, मंडल समन्वयक कार्यक्रम अधिकारी श्याम त्रिपुरारी के अलावा विभिन्न मीडिया कर्मी एवं स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 28 सितंबर से चलाया जायेगा अभियान

• सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान की होगी शुरुआत
• जागरूकता को लेकर मीडिया कार्यशाला हुई आयोजित
• एक भी व्यक्ति ना छूटे, हरेक घर तक पहुंचकर दी जाएगी दवा
• आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को खिलाएंगी दवा की खुराक
• जिले के 12 लाख 17 हजार 298 लोगों को दवा खिलाने का है लक्ष्य
. केयर इंडिया का रहेगा तकनीकी सहयोग

लखीसराय, 25 सितम्बर।

जिला स्वास्थ्य समिति, विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर इंडिया, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल एवं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में शुक्रवार को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की सफलता को लेकर एक मीडिया जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया कि 28 सितम्बर से जिले में राज्य व केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए एमडीए अभियान शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान जिले के हरेक घर तक पहुंचकर आशा कार्यकर्ता लोगों को डाई इथाइल कार्बामाजिन (डीईसी) एवं अल्बेंडाजोल दवा की खुराक अपने सामने खिलाएंगी। उन्होंने बताया कि जिले के 12,17,298 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यकम 28 सितम्बर से शुरू होकर अगले 14 दिनों तक चलेगा।

स्वास्थ्य टीम का हुआ गठन, निर्धारित है दवा की मात्रा:
कार्यशाला में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान का सफल क्रियान्वयन होगा। अभियान की सफलता के लिए 61 पर्यवेक्षकों, 1218 दवा वितरकों और 609 दलों के साथ स्वास्थ्य टीम का गठन कर दिया गया है। अभियान के दौरान दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को डाई इथाइल कार्बामाजिन (डीईसी) एवं अल्बेंडाजोल दवा की खुराक दी जाएगी। 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी। एलबेंडाजोल की दवा को चबाकर खाना है।

फाइलेरिया एक घातक रोग है:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉक्टर शान्तनु सेन ने बताया कि इस बीमारी से जुड़ी विकलांगता जैसे ब्रंक्रोफटियन फाइलेरिया में विभिन्न अंगों में सूजन के साथ हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) तथा ब्रजीयन फाइलेरिया में हाथीपांव और घुटने के नीचे पैर प्रभावित होते हैं। यह एक घातक रोग है। इसके कारण पीड़ित को काफी समस्याओं को सामना करना पड़ता है। इसकी दवा लाभप्रद है। किसे दवा नहीं लेनी चाहिए इसपर उन्होंने कहा कि फाइलेरिया की दवा खाली पेट दवा नहीं खानी चाहिए। साथ ही गर्भवती और दो वर्ष से कम वर्ष के बच्चों को दवा का सेवन नहीं करना है। उन्होंने बताया कि दवा सेवन से जी मतलाना, हल्का सिर दर्द एवं हल्का बुखार हो सकता है जो शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी के मरने के कारण होता है। इसलिए दवा का साइड इफ़ेक्ट मरीज के हित में ही है। हालांकि ज्यादा परेशानी होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।

केयर इंडिया का रहेगा तकनीकी सहयोग, कोई छूट न जाए इसका रहेगा ख्याल:
कार्यशाला में केयर इंडिया के जिला टीम लीड, मिस्टर नावेद ने बताया कि केयर इंडिया के 14 एक्सटर्नल मॉनिटर कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों से इसकी सफलता सुनिश्चित करेंगे। हरेक ब्लॉक में दो लोगों की टीम काम करेगी। ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों और विभिन्न समूहों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां को अंजाम दिया जाएगा। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की जानकारी और लाभ के साथ समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए घर-घर जाकर नुक्कड़ नाटक, बैनर पोस्टर जैसे माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जााएगा। कार्यक्रम के दौरान 13 दिन बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई व्यक्ति दवा के सेवन से छूट न गया हो, अगर कोई ऐसा मिलेगा तो उसे दवा की खुराक दिलाई जाएगी।

कर्मियों को मिलेगा पारितोषिक, केंद्रों में पहुंच चुकी है दवा:
सर्वजन दवा सेवन अभियान में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को विभाग द्वारा पारितोषिक भी दिया जाएगा। दवा वितरकों का पारितोषिक 200 घरों में खिलाने पर एकमुश्त 2400 रुपए है वहीं पर्यवेक्षकों को 175 रुपए प्रति दिन की दर में देय है। बता दें, कि जिले में राज्य द्वारा 28,006,020 डीईसी एवं 12,00,320 अल्बेंडाजोल दवा की आपूर्ति की गई है, जिसे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित कर दिया गया है।

कार्यशाला में इनकी रही मौजूदगी:
मीडिया कार्यशाला में एसीएमओ डॉक्टर देवेन्द्र चौधरी, डीपीएम मो. खालिद हुसैन, पीसीआई से प्रिंस कुमार, सीफार से राज्य प्रलेखन और प्रशिक्षण अधिकारी सरिता मलिक, मंडल समन्वयक कार्यक्रम अधिकारी श्याम त्रिपुरारी के अलावा विभिन्न मीडिया कर्मी एवं स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

पर्यावरण सुरक्षा पर वेबीनार का हुआ आयोजन, धरती के सम्मान का दिया गया संदेश

0

बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन (BIFC), सिस्टर्स ऑफ़ नोत्र डैम और यूनिसेफ द्वारा आयोजित किया गया वेबीनार
“सीजन ऑफ़ क्रिएशन इंटर फेथ वेबिनार” में क्लाइमेट चेंज पर धर्मगुरुओं व बच्चों ने की चर्चा

पटना, 24 सितंबर: विश्व वायुगुणवत्ता रिपोर्ट 2019 के मुताबिक भारत को सबसे अधिक प्रदूषित देश बताया गया है. संयुक्त राष्ट्र की जेनेरल असेंबली द्वारा इस सप्ताह पर्यावरण बदलाव पर इस चर्चा को शामिल किया जायेगा. प्रदूषण आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत हानिकारक है. इन मुद्दों को देखते हुए सिस्टर आॅफ नौट्रेडैम ने बिहार ​इंटरफेश फोरम फॉर चिल्ड्रेन के साथ मिलकर फेथ लीडर्स स्पीरिचुअल कनेक्ट फॉर सीजन आॅफ क्रिएशन, जुबली फॉर अर्थ वेबिनार का आयोजन किया गया. वेबिनार का उद्देश्य धर्मगुरुओं को धरती की देखभाल के लिए एकजुट करना और पृथ्वी व पर्यावरण पर लोगों को जागरूक करने के उपायों पर विचारों को साझा करना था. इस मौके पर धर्मगुरुओं ने बच्चों के साथ मिलकर पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, और पृथ्वी को ईश्वरीय देन मानते हुए इसकी सुरक्षा के उपायों पर चर्चा की. प्रमुख वक्ताओं मेंसिस्टर ज्योतिषा कन्नमक्कल, मॉडरेटर और बीएफआईसी सदस्य, सिस्टर मैरी टेसी, अध्यक्ष, नोट्रे डेम, पटना की बहनें, सुश्री निखत सना, ईदारे शरिया, शामिल थी. वहीं श्री विजय कुमार जैन, दिगम्बर जैन मंदिर, श्री चन्द्र भूषण शर्मा गायत्री मंदिर प्रभाती, शेखपुरा, बी.के. काजल, राजयोग शिक्षक,, बी.के. संगीता, निदेशक, प्रजापिता ब्रह्मकुमारिज पटना और सुश्री निपुण गुप्ता, संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ तथा प्रतिभागियों में बिहार और भारत के बच्चे व युवा सहित रोम व इटली से सिस्टर्ज मौजूद रहीं. मैरी टैसी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि वैश्विक महामारी कोविड 19 ने विपदाओं पर व्यक्ति को जाति, पंथ, शक्ति, धन और प्रतिष्ठा से उपर उठना सिखा दिया है. उन्होंने का कि यह ईश्वर के निमंत्रण की तरह है हमें एक दूसरे का देखभाल करने के लिए एक परिवार की तरह एकजुट होने की जरूरत है. सभी धर्मों में शास्त्र का कहना है कि भगवान को सृष्टि की रचना के लिए धन्यवाद देना चाहिए और पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए. हमें इन महत्वपूर्ण समय में सकारत्मकता, सद्भाव और बंधुत्व फैलाने की आवश्यकता है. वेबिनार के दौरान उन्होंने पृथ्वी की रक्षा में सबके प्रयासों को बल मिलने की प्रार्थना भी की. वेबिनार के दौरान सिस्टर ज्योतिषा ने बताया दुनिया भर में ईसाई संप्रदाय सिंतबर से अक्टूबर तक सीजन आॅफ क्रिएशन महोत्सव के माध्यम से धरती की रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है. यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ सुश्री निपुण गुप्ता ने बीएफआइसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन द्वारा पिछले तीन सालों से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए काम किया जाता रहा है. अपने नेटवर्क, अनुयायियों और धार्मिक संस्थानों का उपायोग किया गया है. धर्मगुरू, वैज्ञानिक तथ्यों व धार्मिक शिक्षाओं के साथ लोगों को आज अच्छी जानकारी देकर प्रेरित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमारे लिए सामयिक है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी विश्व के राजनेता इस विषय परचर्चा करें और इस वर्ष बाल दिवस की थीम भी क्लाइमेट एक्शन रखा गया है. इदारा ए शरिया से सुश्री निखत सना ने कहा इस खूबसुरत धरती की हिफाज़त के लिए इस तरह से काम करना होगा कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी इसे अपने समय में देख सके. पृथ्वी की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है. लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि हम यह काम शांतिपूर्ण तरीके से करें और प्रेम और जागरूकता फैला कर लोगों के दिलोदिमाग को बदले. उन्होंने वेबिनार में पृथ्वी और लोगों की रक्षा के लिए प्रार्थना किया. दिगंबर जैन मंदिर से विजय कुमार जैन ने कहा कि पारिस्थितिक संकट और मानवता पर इसके प्रभाव पर चर्चा की. विशेष रूप से बच्चों पर इसके असर पर बात करते हुए उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण और विकास पर सरकार की पहल का पालन का अनुरोध किया. उन्होंने विशेष रूप से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की. सभी प्रतिभागियों से कहा कि वे स्वयं को शिक्षित करने और प्रदूषण को कम करने का हरसंभव प्रयास करें. गायत्री मंदिर प्रभाती से प्रतिनिधि चंद्रभूषण शर्मा ने बच्चों को आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों को सिखाने के महत्व पर चर्चा की और स्कूलों में बच्चों के लिए मानसिक शांति और विचार प्रबंधन प्रशिक्षण प्रदान करने के अपने संगठन के प्रयासों का वर्णन किया. इस मौके पर उन्होंने जीवन में आने वाली मुसीबतों का सामना करने और आंतरिक शांति का अनुभव करने के लिए ईश्वर से मदद की प्रार्थना की. प्रजापिता ब्रह्मकुमारी, पटना की निदेशिका ब्रह्मकुमारी बी.के. काजल और बी.के. संगीता ने धरती को बचाने के लिए पर्यावरण में सकारात्मक कंपन भेजने की शक्ति के बारे में बताया. उन्होंने कहा की हमें पर्यावरण में सकारात्मक कंपन भेजने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाने का प्रयास करना चाहिए. बी.के. संगीता जी ने प्रतिभागियों के साथ एक ध्यान प्रार्थना की ताकि सभी उस समय के लिए पर्यावरण में सकारात्मक स्पंदन ला सकें और प्रकृति के साथ संतुलन बनाने का प्रयास कर सकें. अंत में बच्चों और युवा साथियों ने अपने बनाये हुए चित्रों को प्रदर्शन के साथ पर्यावरणीय परिस्थितियों पर अपने विचारों का व्यक्त कर निरूपण और विनाश, और अज्ञान से ज्ञान और शांति आदि का संदेश दिया. आने वाली पीढ़िया क्या देखना चाहती हैं, इसका उन्होंने चित्रों और कविताओं के माध्यम संदेश ​भी दिया और सरकार से पर्यावरण सुरक्षा की अपील की. वेबिनार के अंत में विकासार्थ ट्रस्ट से सुश्री संगीता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.

लखीसराय में अमानत प्रशिक्षण को लेकर की गई समीक्षात्मक बैठक

0

-जिला स्वास्थ्य समिति में हुआ बैठक, केयर इंडिया के पदाधिकारी भी हुए शामिल

-सुरक्षित प्रसव पर दिया गया बल, दी गई आवश्यक जानकारी

लखीसराय, 24, सितम्बर, 2020
गुरूवार को जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय में अमानत प्रशिक्षण को लेकर स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में एक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। जिसमें जिले के सभी पीएचसी के अमानत प्रशिक्षित एएनएम शामिल हुई। बैठक में मुख्य रूप से मातृ एवं शिशु-मृत्यु दर पर रोकथाम लाने एवं बेहतर प्रसव समेत प्रसव से संबंधित अन्य विषयों पर चर्चा की गई और मौजूद कर्मियों को आवश्यक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण प्राप्त एएनएम कराऐगी बेहतर प्रसव

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया अमानत प्रशिक्षण बेहतर प्रसव कराने के लिए एएनएम को दी जाती है। इसलिए यह प्रशिक्षण प्राप्त कर एएनएम सुरक्षित प्रसव करा सकेंगी। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों की समझ बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में यह प्रशक्षिण महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण के दौरान दी जाती है प्रसव कराने की बेहतर जानकारी

केयर इंडिया के जिला टीम लीडर नाबेद उर रहमान ने कहा कि इस प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को प्रसव कराने के बेहतर तरीके की जानकारी दी जाती है। जिसमें नई तकनीक के साथ प्रसव कराने, प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने सहित जटिल प्रसव प्रबंधन जैसी अन्य जानकारियां दी जाती है। यह प्रशिक्षण ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देगा बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्य दर में भी कमी लाएगा।

जानें, क्या है अमानत प्रशिक्षण

यह केयर इंडिया के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा शुरू की गयी पहल है। जो मातृ एवं शिश के मृत्यु दर को कम करने के चलाया जा रहा है। इसके तहत एएनएम का क्षमता वर्धन कर उन्हें बेहतर प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ताकि प्रसव के दौरान होने वाले तमाम परेशानियों को खुद एएनएम दूर कर सकें।

मौके पर लखीसराय के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक सुकृति कुमारी, केयर इंडिया के मो. शाहिद, नर्सिंग मेंटर सुपरवाइजर सरिता कुमारी के अलावे जिला स्वास्थ्य समिति के जिला स्वास्थ्य प्रबंधक मो0 खालिद के साथ रविशंकर कुमार, पंकज कुमार आदि मौजूद थे।

मास्क पहनने से हृदय और दिमाग से संबंधित बीमारी का खतरा नहीं 

0
इस तरह की अफवाह पर ध्यान देने से बचें
ज्यादा कसा हुआ मास्क पहनने से करें परहेज
 भागलपुर, 24 सितंबर
कोरोना कल जब से शुरू हुआ है लोग काफी सतर्क हो गए हैं. बाहर निकलते वक्त लोग मास्क जरूर लगाते हैं. बहुत सारे लोग घर से बाहर निकलते वक्त ग्लव्स भी पहनते हैं.
लेकिन कुछ  फेसबुक एवं व्हाट्सएप जैसे सोशल साइट पर यह अफवाह फैल रही है कि मास्क पहनने से ह्रदय रोग हो जाता है. दिमाग से संबंधित बीमारी हो जाती है. ग्लव्स पहनने से हाथ की त्वचा खराब हो जाती है. लेकिन यह सब अफवाह है. सभी आधिकारिक स्रोतों ने इस बात पर विशेष  पर बल दिया है कि  घर से निकलते वक्त मास्क जरूर पहनें.
इस संबंध में निजी चिकित्सक डॉ विनय कुमार झा कहते हैं कि सही तरीके से मास्क पहनने से किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। मास्क और ग्लव्स ना सिर्फ हमें कोरोना से बचाता है, बल्कि दूसरी बीमारियों से भी हमारा बचाव करता है. किसी व्यक्ति के खांसने छींकने से जो ड्रॉपलेट निकलता है उससे बचाव के लिए मास्क पहना जाता है. इसलिए मास्क इस्तेमाल को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक बातों पर ध्यान न दें। मास्क पहनने से हृदय और दिमाग से संबंधित बीमारी बिल्कुल भी नहीं होती है.
मास्क का चयन करने में बरतें सावधानी:
डॉ विनय कुमार झा का कहना है कि मास्क नहीं पहनने के बजाय सही मास्क का चयन बहुत जरूरी है. मास्क खरीदते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि वह आपके साइज का है या नहीं. ज्यादा कसा हुआ मास्क तो नहीं है. ज्यादा कसा हुआ मास्क अधिक देर तक पहनने से झुंझलाहट जैसी परेशानी जरूर हो सकती है.  मास्क का चयन सावधानी से करें. संभव हो तो अंडानुमा आकार का मास्क पहने. यह सबसे बेहतर माना जाता है.
घर से बाहर निकलते वक्त रखें अतिरिक्त मास्क:
डॉ विनय कुमार झा कहते हैं कि घर से बाहर निकलते वक्त लोगों को अतिरिक्त मास्क जरूर रखना चाहिए. अभी गर्मी का मौसम चल रहा है. ज्यादा चलने से या फिर लंबे समय के बाद मास्क गीला हो जाता है. ऐसी स्थिति में मास्क को बदल लें. वरना मुंहासे या फिर तो अच्छा से संबंधित परेशानी का खतरा रहता है. इसलिए घर से निकलते हुए पास में जरूर मस्त रखें.
मास्क नहीं पहनना चाहते हैं तो बाहर कम निकले: डॉ विनय कुमार झा ने बताया अगर आपको मास्क पहनने में परेशानी होती है तो कोशिश कीजिए कि घरों से कम से कम निकले. इससे आपका बचाव भी होगा और मास्क पहनने से भी बच जाएंगे. वैसे भी कोरोना काल में लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए. बहुत जरूरी पड़ने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए.

घर में पोषण वाटिका बनाकर कुपोषण को करें दूर

0

कृषि विज्ञान केंद्र में सेविकाओं को किया गया प्रशिक्षित

पोषण माह को लेकर जिले भर में चल रहा है अभियान

बांका, 24 सितंबर

सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इसे लेकर जिले भर में तमाम तरह के कार्यक्रम चल रहे हैं. इसी सिलसिले में गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र में सेविकाओं को घर में पोषण वाटिका बनाने को लेकर प्रशिक्षित किया गया. प्रशिक्षण के बाद सेविका घर-घर जाकर लोगों को पोषण वाटिका बनाने के लिए जागरूक करेंगी.

प्रशिक्षण के दौरान मौजूद आईसीडीएस की डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया सही पोषण से ही कुपोषण को खत्म किया जा सकता है. इसके लिए घर में पोषण वाटिका बनाना बहुत महत्वपूर्ण है. घर में पोषण वाटिका रहने से लोगों को बिना बाहरी रसायन वाले साग सब्जी खाने को मिलेंगे, जिससे लोग स्वस्थ रहेंगे और कुपोषण भी खत्म होगा. इसी सिलसिले में जिलेभर की सेविकाओं को कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षित किया गया.

घर में मौजूद खाली प्लास्टिक में मिट्टी डालकर उगाए सब्जी: प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर मुनेश्वर प्रसाद ने जिलेभर की सेविकाओं को बताया कि घर-घर जाकर लोगों को घर में खाली पड़े प्लास्टिक में मिट्टी डालकर लौकी, करेली भिंडी आदि सब्जी लगाने के लिए प्रेरित करें. इन सब्जियों में किसी भी तरह का रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं करने के लिए कहें. इससे तैयार हरी सब्जियों के सेवन से किसी भी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होगा और लोगों को पूरी तरह से विटामिन से भरपूर सब्जियां खाने को मिलेंगे.

एनीमिया की भी समस्या होगी दूर: प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मुनेश्वर प्रसाद ने सेविकाओं को बताया खाद रहित सब्जियों के सेवन से शरीर को भरपूर विटामिन मिलता है. गर्भवती और धात्री महिलाएं अगर ऐसी सब्जियों का सेवन करती हैं तो उनमें एनीमिया की समस्या भी दूर होगी. साथ ही बच्चे भी स्वस्थ होंगे. महिलाएं स्वस्थ रहेंगी तो वह अपने बच्चे को भी नियमित तरीके से स्तनपान करा पाएंगी. इससे बच्चे भी कुपोषित नहीं होंगे.

घर-घर जाकर सेविका पोषण वाटिका बनाने के लिए करेंगी प्रेरित: प्रशिक्षण में मौजूद सेविका मुन्नी कुमारी और मंजुला कुमारी ने बताया “वैज्ञानिकों ने हमलोगों को घर में पोषण वाटिका कैसे बनाया जाता है, इसके बारे में बताया. घर में पोषण वाटिका बनने से क्या फायदा होता है, इस बात को हमलोगों ने समझा. अब हमलोग घर-घर जाकर लोगों को इसके लिए प्रेरित करेंगे.” कार्यक्रम में मौजूद आईसीडीएस के जिला समन्वयक शम्स तबरेज ने बताया कि सभी सेविका कल से घर-घर जाएंगी और लोगों को पोषण वाटिका बनाने के तरीके बताएंगे. इससे होने वाले फायदे की जानकारी भी लोगों को देंगी.

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरुआत

0

• मीडिया कार्यशाला में अभियान की सफलता में मीडिया की सक्रीय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर हुई चर्चा
• कोविड सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 28 सितंबर से चलाया जायेगा अभियान
भागलपुर
– राज्य स्वास्थ्य समिति एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल और सीफार(सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बुधवार को शहर के एक होटल में मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कोविड के सुरक्षा मानकों का किया जायेगा पालन:
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए स्टेट टास्क फोर्स की दिनांक 22 सितम्बर को आयोजित बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के सचिव सह कार्यपालक निदेशक, मनोज कुमार ने वेक्टर बोर्न डिजीजेज़ के जिला अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया था कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एमडीए के महत्व को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कोविड वैश्विक महामारी के दौरान भी एमडीए कार्यक्रम संपन्न कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सभी सुरक्षा सावधानियों (स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी) को अपनाने के महत्व पर बल दिया, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उपरोक्त11 फाइलेरिया प्रभावित जिलों में सभी पात्र लाभार्थी, फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करें।

मीडिया का सहयोग है जरुरी:
अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया, बिहार डॉ. बिपिन सिन्हा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं समृद्ध बिहार की परिकल्पना को सार्थक करने के लिए महामारी के दौरान भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को जारी रखने के महत्व को स्वीकार करते हुए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 11 जिलों में, 28 सितम्बर, से भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के मानकों को ध्यान में रखते हुए, एमडीए अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है ।इन 11 जिलों(भोजपुर, दरभंगा, किशनगंज,मधुबनी, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, लखीसराय, रोहतास, समस्तीपुर एवं वैशाली)में दो फ़ाइलेरियारोधी दवाओं, डीईसी और अल्बेन्डाज़ोल के साथ एमडीए अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान की सफलता मीडिया के सहयोग और कार्यक्रम के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर करेगी.

उम्र के अनुपात के हिसाब से खिलाई जाएगी दवा:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. राजेश पाण्डेय ने बताया विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया से जुड़ी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा (अंगोंमेंसूजन) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। यह एक घातक रोग है जिससे पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा सेवन कर बचा जा सकता है.इस अभियान में डीईसी एवं एलबेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जाएगी.2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी. एलबेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है.

इस दौरान प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के ध्रुव सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान के सफल किर्यान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली को और अधिक मज़बूत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तिथि के बारे में समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए आशा और आंगनवाडी के माध्यम से घर-घर जाकर, साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
सीफार के रंजीत ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि एमडीए लक्षित जिलों में जिला स्तरीय मीडिया बैठकों का आयोजन किया जायेगा ताकि कार्यक्रम के संबंध में लोगों तक उचित और महत्त्वपूर्ण जानकारियां पहुँच सकें. साथ ही उन्होंने मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय द्रष्टिकोण से दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करें।

इस दौरान ज़ूम के माध्यम से भी एमडीए लक्षित 11 जिलों के मीडिया कर्मी भी शामिल हुए.

बच्चे के क्रियाकलाप बताते हैं उनका विकास 

0
– जन्म के बाद से लगातार बदलते रहते हैं भाव, होता है मानसिक व शारीरिक विकास
– बच्चे के हाव-भाव से पता चलता है कि वह किस गति से आगे बढ़ रहा है
– दो, चार, छह, नौ और 12वें माह में दिखता है अलग-अलग बदलाव
– समन्वित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) की डीपीओ ने दी विस्तृत रूप से जानकारी
लखीसराय, 23 सितम्बर।
नवजात के जन्म से उसके एक वर्ष के होने तक उचित पोषण के अलावा उसकी शारीरिक क्रियाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है। उसके शारीरिक व्यवहार से उसके विकास का अंदाजा लगया जा सकता है। भूख लगने पर रोने, खुश रहने पर खेलने-हंसने से उसके उसके स्वस्थ रहने का अंदाजा लगाया जा सकता है। उसकी अन्य शारीरिक क्रियाओं से भी उसके विकास की गति की परख की जा सकती है। आईसीडीएस की डीपीओ कुमारी अनुपमा सिन्हा बताती हैं, यह काल (जन्म से एक वर्ष) उसके पूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास की रूपरेखा तय करती है। इस दौरान शिशु के क्रियाकलापों से उसकी विकास की गति की परख की जा सकती है।
जन्म के बाद दो माह के होने पर शिशु का विकास:
कुमारी अनुपमा सिन्हा बताती हैं कि शुरुआत के दिनों में नवजात शिशु के सिर का विशेष ख्याल रखना होता है। इस वक्त शिशु को सिर्फ एक ही तरह से सुलाना चाहिए ताकि उनके सिर पर खास दबाव न पड़े। आमतौर पर शिशु के सिर का मूवमेंट चार से पांच महीने के बाद अच्छे से घूमने लगता है। वहीं जन्म के दूसरे माह की सबसे बड़ा घटना शिशु की मुस्कान होती है। वह लोगों की बातों की ओर ध्यान भी देने लगता है। पहले माह में लगभग 20 घंटे और उसके बाद एक बार में थोड़े लंबे समय के लिए शिशु सोएगा।
चार माह के होने पर शिशु में आयेगा बदलाव:
चार माह के होने पर शिशु की दृष्टि लगातार बढ़ती रहती है। कुमारी अनुपमा सिन्हा बताती हैं, इस महीने वह एक जैसे दिखने वाले रंगों में अंतर करना और आकर्षित होना शुरू कर सकता है। हाथ पैर खुब मारने के अलवा खिलौनों से खेलना और दोनों हाथों से पकड़ बनाना शुरू करेगा। वहीं जब वह इन्हें पकड़ लेगा तो मुंह में डालने का प्रयास करेगा। रोने के अलावा व गुस्से का भी प्रदर्शन करना इस उम्र में शुरू कर देगा।
छह माह होने पर शिशु की बदली प्रवृति:
वह अब अपनी आखों और व्यवहार से गुस्से और प्रतिक्रिया को व्यक्त करेगा। इस उम्र में वह रोने के साथ-साथ संचार के अन्य तरीके भी सीखेगा। अब वह कुलबुलाकर, बड़बड़ाकर और अलग-अलग मुखाकृतियों व भावों के जरिये अपनी बातें बताते के लिए मेहनत करेगा। शिशु इस महीने में अपने दोनों दिशाओं में पलटना सीख जाता है।
नौवां माह और शिशु का विकास:
नौ महीने के बच्चा कुछेक कदम चलने लगेगा। हांलाकि इस दौरान उसे सहारे की जरूरत होगी। वहीं अब शिशु घुटनों को मोड़ना और खड़े होने के बाद बैठना भी सीखने लगेगा। वहीं शिशु अब अपनी जरूरतों जैसे खिलौने और इच्छाओं जैसे खाने को भी जाहिर करने लगेगा। इशारे जैसे टाटा, बाय बाय वह करना सीख जाएगा।
एक साल का होते ही शिशु में आयेगा यह बदलाव:
कुमारी अनुपमा सिन्हा कहती हैं 12वें माह यानि एक साल का होते ही शिशु के खेलने के तरीके में बदलाव आ जाता है। अब शिशु चीजों को उठाने और छोटी वस्तुओं को हाथ में लेकर घुमाना फिराना शुरू कर देगा। अब वह अपने पसंदीदा खेल पहले से ज्यादा शोर करने खेलेगा। चीजों को धकेलने, फेंकने और नीचे गिरा देना उसके लिए मजेदार होगा है। दूसरों को अपने खेल में शामिल करेगा। अकेले रहने पर रोने लगेगा। अब ज्यादा कदमों के साथ चलना शुरू कर देगा। यह सब क्रिया स्वस्थ रहते हुए बच्चा कर रहा है तो समझें की वह सामान्य और सही रूप से बड़ा हो रहा है। हालांकि इसक अलाव भी कई माध्य, जांच और चिकित्सीय जांच सलाह शामिल हैं जो आप लेकर उसके विकास की गति को परख सकते हैं

कोविड सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 28 सितंबर से चलाया जायेगा अभियान 

0
मीडिया कार्यशाला में अभियान की सफलता में मीडिया की सक्रीय एवं महत्वपूर्ण       भूमिका पर हुई चर्चा
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरुआत
लखीसराय / 23 सितंबर- जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम की सफलता को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल और सीफार(सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बुधवार को शहर पटना के एक होटल में मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कोविड के सुरक्षा मानकों का किया जायेगा पालन:
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए स्टेट टास्क फोर्स की दिनांक 22 सितम्बर को आयोजित बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के सचिव सह कार्यपालक निदेशक, मनोज कुमार ने वेक्टर बोर्न डिजीजेज़ के जिला अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया था कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एमडीए के महत्व को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कोविड वैश्विक महामारी के दौरान भी एमडीए कार्यक्रम संपन्न कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सभी सुरक्षा सावधानियों (स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी) को अपनाने के महत्व पर बल दिया, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उपरोक्त11 फाइलेरिया प्रभावित जिलों में सभी पात्र लाभार्थी, फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करें।
मीडिया का सहयोग है जरुरी:
अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया, बिहार डॉ. बिपिन सिन्हा ने कार्यशाला को संबोधित करते  हुए कहा  कि स्वस्थ एवं समृद्ध बिहार की परिकल्पना को सार्थक करने के लिए महामारी के दौरान भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को जारी रखने के महत्व को स्वीकार करते हुए बिहार सरकार ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 11 जिलों में, 28 सितम्बर, से भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के मानकों को ध्यान में रखते हुए, एमडीए अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है ।इन 11 जिलों(भोजपुर, दरभंगा, किशनगंज,मधुबनी, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, लखीसराय, रोहतास, समस्तीपुर एवं वैशाली)में दो फ़ाइलेरियारोधी दवाओं, डीईसी और अल्बेन्डाज़ोल के साथ एमडीए अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान की सफलता मीडिया के सहयोग और कार्यक्रम के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर करेगी.
उम्र के अनुपात के हिसाब से खिलाई जाएगी दवा:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. राजेश पाण्डेय ने बताया विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया से जुड़ी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा (अंगोंमेंसूजन) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। यह एक घातक रोग है जिससे पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा सेवन कर बचा जा सकता है.इस अभियान में डीईसी एवं एलबेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जाएगी.2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी. एलबेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है.
इस दौरान प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के ध्रुव सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान के सफल किर्यान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली को और अधिक मज़बूत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तिथि के बारे में समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए आशा और आंगनवाडी के माध्यम से घर-घर जाकर, साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
सीफार के रंजीत ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि एमडीए लक्षित जिलों में जिला स्तरीय मीडिया बैठकों का आयोजन किया जायेगा ताकि कार्यक्रम के संबंध में लोगों तक उचित और महत्त्वपूर्ण जानकारियां पहुँच सकें. साथ ही उन्होंने मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय द्रष्टिकोण से दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करें।
इस दौरान ज़ूम के माध्यम से भी एमडीए लक्षित 11 जिलों के मीडिया कर्मी भी शामिल हुए

रथ पर सवार होकर लोगों को कुपोषण से किया जागरूक

0
कुपोषण को लेकर पटना से चला जागरूकता रथ पहुंचा बांका
रथ को डीडीसी और डीपीओ ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
बांका, 23 सितंबर
सितंबर को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इसे लेकर जिले भर में तमाम तरह के कार्यक्रम हो रहे हैं. इसी सिलसिले में बुधवार को पटना से चला जागरूकता रथ बांका पहुंचा. रथ को डीडीसी रवि प्रकाश और डीपीओ रिफत अंसारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इसके बाद रथ पर सवार होकर आईसीडीएस के कर्मियों और सेविकाओं ने शहर में घूम- घूमकर लोगों को कुपोषण के बारे में जागरूक किया.
इस दौरान डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया पोषण माह को सफल बनाने के लिए आईसीडीएस जिले भर में तमाम तरह के कार्यक्रम कर रहा है. घर-घर जाकर लोगों को सही पोषण के बारे में सेविका बता रही हैं. साथ ही दीवारों पर स्लोगन लिखकर लोगों को अच्छे पोषण की जानकारी दी जा रही है. इसी सिलसिले में पटना से चला जागरूकता रथ बांका पहुंचा. रथ से जिलेभर में घूम-घूम कर लोगों को कुपोषण दूर करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. रिफत अंसारी ने बताया रथ में ऑडियो वीडियो भी है, जिसके जरिए लोगों को सही कुपोषण के बारे में दिखाया और सुनाया जा रहा है. जिले में जब यह रथ घूम रहा है तो इस दौरान लोगों को सही पोषण के वीडियो भी देखने को मिल रहे हैं और ऑडियो भी सुनाई दे रहे हैं.
सही पोषण, देश रोशन: आईसीडीएस के जिला समन्वयक शम्स तबरेज ने बताया रथ को घुमाने के दौरान हमलोग शहर के चौक चौराहों पर रुक- रुककर लोगों को कुपोषण दूर भगाने का संकल्प दिला रहे थे. रात से सही पोषण देश रोशन जैसे नारे लगा रहे थे. लोगों को साफ सुथरा और प्रोटीनयुक्त भोजन लेने की सलाह दे रहे थे. 6 माह से कम उम्र के बच्चों को स्तनपान कराने की गुजारिश गांववालों से कर रहे थे. रोचक बात यह रही के लोगों ने भी हमारी बातों का ध्यान से सुनी और इस पर अमल करने का भरोसा दिलाया.
छोटे-छोटे समूहों में किया जा रहा जागरूक: जिला समन्वयक शम्स तबरेज ने बताया कोरोना को देखते हुए छोटे-छोटे समूहों में कुपोषण से लोगों को जागरूक किया जा रहा है. जागरूकता कार्यक्रम के दौरान शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जा रहा है. साथ ही सभी लोग मास्क और ग्लव्स पहने हुए रहते हैं. हर आधे घंटे पर लोग हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं. गांव के लोगों को भी कोरोना से बचाव की सलाह देते हैं. लोगों को सफाई का ध्यान रखने के लिए भी कहा जाता है.
जागरूकता रथ से लोगों को मिल रही हैं ये जानाकरियां:
– नवजात को जन्म के पहले छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलायें
-छह माह के बाद बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार देना शुरू करें
– गर्भवती महिला की आंगनबाड़ी केंद्र पर रजिस्टेशन करायें
-बच्चों को खाना खिलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें
-गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का सेवन करें
-गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली जरूरी लेनी चाहिए