राह चलते लोगों की भी हो रही कोरोना संक्रमण  की  जांच 

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जांच के जरिए तोड़ी जा रही कोरोना संक्रमण की चैन
बड़ी ढाका और कोर्ट परिसर में शिविर लगाकर लोगों की हुई कोरोना जांच
बांका, 22 सितंबर
कोरोना संक्रमण  की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग रोज नए-नए कदम उठा रहा है. पहले जांच की संख्या बढ़ाई गई, अब राह चलते-फिरते लोगों की भी कोरोना संक्रमण  जांच कराई जा रही है, ताकि संक्रमित व्यक्ति का सही तरीके से इलाज हो और लोगों में संक्रमण नहीं फैले.
इसी क्रम में मंगलवार को बड़ी ढाका स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में और कोर्ट परिसर में शिविर लगाकर लोगों की कोरोना जांच की गई. बड़ी ढाका में लगभग 185 लोगों की कोरोना जांच हुई. हालांकि जांच में कोई भी संक्रमित नहीं पाए गए. वहीं कोर्ट परिसर में 112 लोगों की जांच में 5 लोग संक्रमित पाए गए. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. अब तक काफी लोगों की जांच हो चुकी है. इस वजह से केंद्र पर आकर कम ही लोग जांच करा रहे हैं. इस वजह से हमलोगों ने फैसला किया है कि गांव-गांव और गली-गली में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जाए. जितने ज्यादा लोगों की जांच होगी कोरोना की चैन टूटने में उतनी मदद मिलेगी.
5000 लोगों के प्रति दिन हो रही है जांच: जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन 5000 लोगों की कोरोना जांच हो रही है. अभी तक जिले में एक लाख से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है. लगभग हर लोगों की जांच हो जाए इसी कवायद में स्वास्थ्य विभाग लगा हुआ है. इसी का परिणाम है की जगह-जगह जगह जांच शिविर लगाए जा रहे हैं.
घर पर सुविधा रहने पर ही भेजा जा रहा है होम आइसोलेशन में: जांच में संक्रमित पाए जाने पर उसी व्यक्ति को होम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है जिनके घर में इसकी सुविधा है. उस व्यक्ति के घर में अलग से शौचालय और कमरे की व्यवस्था होने पर ही लोगों को हम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है. साथ में मरीज को एक किट भी दिया जा रहा है जिसमें दवा के साथ मास्क और अन्य जरूरी सामान रहते हैं.
अन्य मरीजों को कोविड केयर सेंटर  में किया जा रहा भर्ती: जांच में जिन मरीजों को घर पर सुविधा नहीं है उसे कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाता है. जहां पर उसका पूरा ध्यान रखा जाता है. समय पर दवा और भोजन दिया जाता है. जांच के बाद  निगेटिव पाए जाने पर उसे घर भेजा जाता है.
कोरोना जांच के लिए गांवों में माइकिंग: कोरोना जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रही है. टीम के सदस्य लोगों को बता रहे हैं कि जांच कराने के क्या फायदे हैं. जांच कराने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है.
सरकार की गाइडलाइन का हो रहा पालन: स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही है. जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लव्स और मास्क पहने रहते हैं. इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा. इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं वहां किसी तरह का कोई खतरा नहीं है.

स्वस्थ हुए उपचाराधीन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए निर्देश

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– स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कोविड-19 संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद क्या करें
– स्वस्थ हुए लोग चिकित्सक व अस्पताल के संपर्क में रहते हुए परामर्श लेते रहें
– सकारात्मक व्यवहार रखते हुए आराम, आहार, नींद, दवा और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें
मुंगेर, 22 सितम्बर।
कोविड-19 संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा लगातार समय-समय पर दिशानिर्देश जारी किए जाते रहे हैं। लॉकडाउन से लेकर अनलॉक के विभिन्न चरणों में मानव जीवन की रक्षा  के लिए कई कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ समन्वय करते हुए अस्पतलों और कोविड केयर सेंटर में उपचाराधिनों की बेहतर देखभाल और इलाज की व्यवस्था की गई है। वहीं आम लोगों को सक्रमण के दौर में सुरक्षित रखने के उपायों को बताने के साथ सुविधाओं से युक्त सेवाओं का विकास किया गया। आरोग्य सेतु, संजीवन एप, मोबाइल वैन जैसी कई व्यवस्थाएं बनाई गईं। बेहतर ईलाज व्यवस्था के बाद स्वस्थ हुए उपचाराधीन दोबारा इसकी चपेट में न आ जाएं, इसके लिए भी स्वास्थ्य मंत्रालय सजग है। इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से ठीक हुए उपचाराधीनों के लिए प्रोटोकॉल जारी किया है।
सुझावों की विस्तार पूर्वक सूची भेजी है:
उपचाराधीन के स्वस्थ होने के बाद उसके द्वारा घर और बाहर अपनाएं जाने वाले व्यवहारों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुझावों की विस्तार पूर्वक सूची भेजी है। इसमें बताया गया है कि थकान, शरीर में दर्द, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में कठिनाई आदि अब तक के कोविड-19 के लक्षण हैं। इसके कई अन्य प्रकार और लक्षणों पर लगातार शोध की जारी है। वर्तमान में इससे बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता पर बल देने की जरूरी है। उपचाराधीन को स्वस्थ होने के बाद तीन से चार स्तर के नियमों का पालन करना चाहिए। इन सुझावों की सूची में स्वास्थ्य मंत्रालय ने योग जैसे हल्के व्यायाम, पूर्ण आहार लेने और काउंसलिंग कराने की सलाह को भी शामिल किया है। साथ ही आयुष मंत्रालय की तरफ से बताई गई इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं को लेने का भी सुझाव दिया गया है।
उपचाराधीन द्वारा अपने स्तर पर उठाए जाने वाले कदम:
कोविड-19 संक्रमण काल के दौरान जो नियमों का उपचाराधीन पालन कर रहे हैं, उन्हें सतत जारी रखे। (जैसे मास्क पहनना, हाथ धोना, शारीरिक दूरी आदि)। इसके साथ ही समय–समय पर पर्याप्त मात्रा में हल्का गर्म पानी पीते रहें। आयुष मंत्रालय की बताई गई इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन करें। अगर स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो घर के काम कर सकते हैं।  प्राणायाम, ध्यान और सांस से संबंधित योग करें। सुबह और शाम के वक्त टहलें। संतुलित पौष्टिक आहार के साथ पर्याप्त नींद लें और आराम करें। धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें। बताई गई दवाओं को नियमित रूप से लें। घर पर अपने स्वास्थ्य की जांच करें, जैसे- बुखार स्तर नापना, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, पल्स की रीडिंग आदि। वहीं अगर सूखी खांसी या गले में खराश है, तो गरारे करें और दवा लें।
सामुदायिक स्तर पर उठाए जा सकने वाले कदम:
कोविड–19 के संक्रमण से स्वस्थ हुए उपचाराधीन अपने मित्रों, परिजनों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से इलाज और स्वस्थ होने के दौरान के सकारात्मक अनुभव साझा करें। वार्तालाप और लोगों के व्यवहार परिवर्तन के लिए सोशल मीडिया, समुदाय स्तर के नेताओं, स्वयं सहायता समुह, सिविस सोसाइटी का सहयोग लें, इससे जागरूकता के साथ अन्य नकारात्मक विचार समाज से दूर हो सकेंगे। इसके साथ ही दोस्तों के संपर्क में रहें, जरूरत हो तो सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोचिकित्सक से सहायता  लें। योग और ध्यान कार्यक्रम और अभ्यास में हिस्सा लें। शारीरिक दूरी के नियमों को बढ़ावा दें।
ठीक होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेते रहें:
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार उपचाराधीन के अस्पताल या जहां से भी उसका इलाज हुआ से डिस्चार्ज होने के सात दिनों के अंदर उसका फॉलोअप लेना चाहिए। आगे के इलाज के लिए आपपास के किसी योग्य एलोपैथिक या आयुष चिकित्सक के पास परामर्श के लिए उपचाराधीन जा सकता है।
आयुष दवाओं की जानकारी और लेने की विधि:
स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए निर्देश में आयुष दवाओं की जानकारी और सलाह के बाद उसे लेने की विधि भी बताई गई है। इसमें बताया गया है कि प्रतिदिन दिन में दो बार एक ग्राम संशमनी वटी या गिलोय पाउडर 1 -3 ग्राम, 15 दिनों के लिए गुनगुने गर्म पानी के साथ लें। रोजाना दिन में दो बार अश्वगंधा 500 मिलीग्राम या अश्वगंधा पाउडर 1-3 ग्राम दो बार 15 दिनों के लिए लें। साथ ही प्रतिदिन एक आंवला या 1-3 ग्राम या आंवला पाउडर का इस्तेमाल करें। सूखी खांसी हो तो तो मुलेठी पाउडर 1- 3 ग्राम को गुनगुने गर्म पानी के साथ रोजाना दो बार लें। हल्दी सेवन पर बताया गया है कि इसे गर्म दूध के साथ आधा चम्मच सुबह/शाम ले सकते हैं। वहीं हल्दी और नमक से गरारे के साथ सुबह में एक चम्मच च्यवनप्राश के सेवन के लिए भी बताया गया है।

कोविड-19 की जाँच में तेजी लाने को लेकर जाँच का एएनएम ने उठाई जिम्मेदारी

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– गाँव-गाँव जाकर कर रही है कोविड-19 जाँच, लोगों को जाँच कराना हुआ आसान
– जाँच के साथ-साथ लोगों को किया जा रहा जागरूक, दी जा रही है बचाव की भी जानकारी
लखीसराय, 22 सितम्बर, 2020
कोविड-19 जाँच कराने में तेजी लाने एवं ससमय जाँच का लक्ष्य हर हाल में शत-प्रतिशत पूरा करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध और हर आवश्यक कदम उठा रहे हैं। जिससे जाँच की रफ्तार को गति मिले और ससमय लक्ष्य पूरा करने सफल रहे। इसको लेकर जाँच की जिम्मेदारी अब एएनएम के कंधों पर दी गई है। एएनएम भी पूरी मुस्तैदी के साथ जाँच की रफ्तार को गति देने में जुट गई है। जो ना सिर्फ इच्छुक व्यक्तियों का जाँच कर रही है, बल्कि लोगों को जागरूक और कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी भी दे रहे हैं। वहीं, एएनएम के इस तरह के कार्य से ना सिर्फ जाँच की गति में तेजी आई है, बल्कि लोगों को जाँच कराने में भी आसानी हो रही है।
जाँच की गति में आ रही है तेजी
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया एएनएम पूरी मुस्तैदी के साथ पूरे जोर-शोर से जाँच में जुट गई है और पूरे निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। जिसका परिणाम यह है कि पूर्व की भाँति जाँच की गति में तेजी आई है और धीरे-धीरे और तेज होती जा रही है। सभी एएनएम अपने-अपने पोषक क्षेत्र के ऑगनबाड़ी केंद्र पर लोगों की जाँच कर रहीं हैं। साथ ही एएनएम लोगों को जाँच के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
ऑगनबाड़ी केंद्र पर हो रही है जाँच
एएनएम द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में संचालित ऑगनबाड़ी केंद्र पर कोविड-19 जाँच की जा रही है। इस दौरान अगर कोई भी व्यक्ति जाँच कराने के लिए जानकारी के अभाव या फिर अन्य किसी कारणवश केंद्र पर नहीं आ पाते हैं तो ऐसे व्यक्ति का संबंधित क्षेत्र की आशा के साथ गृहभ्रमण कर एएनएम द्वारा जाँच की जा रही है। ताकि लोगों को जाँच कराने में किसी प्रकार का परेशानियाँ नहीं हो और लोग संक्रमण के दायरे से बाहर रहें।
लोगों को जाँच कराने में होने वाली परेशानी हुई दूर
इससे पूर्व कोविड-19 जाँच कराने वाले इच्छुक व्यक्ति को जाँच केंद्र या फिर नजदीकी अस्पताल जाना पड़ता था। जिसके दौरान लोगों जो परेशानियाँ होती थी। वह एएनएम द्वारा केंद्र पर ही जाँच करने से दूर हो गया। दरअसल, एएनएम द्वारा जाँच के साथ लोगों को कोविड-19 बचाव के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है। ताकि संक्रमण का खतरा से लोगों को बचाया जा सकें। इसके लिए एएनएम समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा हरसंभव अथक प्रयास की जा रही है।

अब किडनी रोगियों को डायलिसिस कराने के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से डायलिसिस यूनिट का किया उद्घाटन
बांका, 22 सितंबर
जिले के किडनी रोगियों को डायलिसिस कराने के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सदर अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का उद्घाटन किया. पहले दिन 2 मरीजों का डायलिसिस भी किया गया.
सिविल सर्जन सुधीर कुमार महतो ने बताया पहले सिर्फ सामान्य किडनी मरीजों का ही यहां पर डायलिसिस हो पाता था, लेकिन अब हेपेटाइटिस, कोरोना  और एचआईवी के संक्रमित मरीजों का भी यहां पर डायलिसिस होगा. यूनिट का उद्घाटन हो जाने से जिले के किडनी रोगियों को बहुत ही राहत मिलेगी.
स्वास्थ्य कर्मियों को किया गया है प्रशिक्षित: मालूम हो कि सदर अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के उद्घाटन से पहले स्वास्थ्यकर्मियों प्रशिक्षित किया जा चुका है. सभी स्वास्थ्यकर्मियों को डायलिसिस करने के तरीके बताए गए हैं. कर्मियों की ड्यूटी को लेकर रोस्टर भी जारी कर दिया गया है. किस दिन किन स्वास्थ्य कर्मी की ड्यूटी है, यह तय कर दिया गया है.
2.23 करोड़ की लागत से इंस्टॉल की गई है पांच मशीन: अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में हैदराबाद से अत्याधुनिक मशीन मंगवा कर इंस्टॉल की गई है. मशीन पर 2.23 करोड़ रुपए की लागत आई है. इन मशीनों पर कोरोना संक्रमित, एचआईवी और हेपेटाइटिस बी के मरीजों का भी डायलिसिस होगा. मशीन पूरी तरह से फूल प्रूफ है. इससे किसी भी तरह का कोई संक्रमण का खतरा किसी मरीज पर नहीं है.
सदर अस्पताल में पहले दो मशीन थी इंस्टॉल: अस्पताल प्रबंधक अमरेश कुमार ने बताया सदर अस्पताल में पहले से ही दो डायलिसिस मशीन इंस्टॉल थी. उस पर सिर्फ सामान्य मरीजों का ही डायलिसिस किया जाता था. कोरोना, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी के मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए भागलपुर या फिर पटना जाना पड़ता था, लेकिन सदर अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का उद्घाटन हो जाने से अब उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा.
शारीरिक दूरी का रखा जा रहा है ख्याल: कोरोना को लेकर डायलिसिस यूनिट में पूरी सतर्कता बरती जा रही है. इलाज के दौरान 6 मीटर की दूरी बनाकर सभी लोग रह रहे हैं. साथ ही स्वास्थ्यकर्मी मरीज व अन्य सभी लोग मास्क और ग्लब्स पहनकर ही यूनिट में जा रहे हैं. यूनिट में किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा नहीं है

जिंदगी की सुरक्षा के लिए जरूरी है सतर्कता

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– सामान्य होती जिंदगी में न भूल जाएं संक्रमण का खतरा
– नियमों को अपनाकर स्वयं के साथ समाज को रखें सुरक्षित
– मास्क, शारीरिक दूरी और सतर्कता ही है बचाव का उपाय
मुंगेर-
जिले में आज कोरोना संक्रमण के बीच जनजीवन सामान्य हो चुका है। विभिन्न कार्य क्षेत्रों में गति देखी जा रही है। लोग आम दिनों की तरह बाजार और सड़कों पर रोजमर्रा के कामों और जरूरतों को लेकर निकल रहे हैं। हालांकि इस दौरान मुख्य बाजार और सड़कों पर तो सतर्कता देखी जाती है, लेकिन गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर सही से मास्क पहनने से लेकर शारीरिक दूरी जैसी जरूरी नियमों की अनदेखी भी देखी जा रही है। सवाल उठता है कि ऐसे वक्त में जब जिंदगी हर पल संक्रमण के खतरे की आशंका से जूझ रही है, तो क्या हम सभी को इस माहौल के बीच खुद को सुरक्षित रखना जरूरी नहीं है।
समाज को सुरक्षित रखने की है जरूरत:
मनोविज्ञान से मास्टर कर चुकी शाहीन शमिम कहती हैं कि, लॉकडाडन के बाद अब लोगों ने सामान्य जीवन यापन शुरू कर दिया है। बाजारों में आपको पहले की तरह चहल-पहल नजर आएगी। हालांकि इस दौरान घर से बाहर निकलने के बाद बरती जाने वाली असावधानी इंसान की अपनी मौलिक प्रवृत्ति से जुड़ी हो सकती है। वह कहती हैं कि, इंसान एक सामाजिक प्राणी है, जो अधिक समय तक नियमों में बंधे रहना पसंद नहीं करता। हालांकि सभी लोग ऐसे नहीं हैं। कुछ लोग जहां संक्रमण काल को देखते हुए और समय की मांग यानी शारीरिक दूरी का पालन, सही तरीके से मास्क लगाने आदि को नहीं भूलते। वहीं दूसरी ओर इसके उलट विचार वाले भी हैं। आज चुनौती ऐसे ही लोगों को संभालते और जागरूक करते हुए समाज को सुरक्षित रखने की है।
उनके बारे में सोचें जो इससे प्रभावित हैं:
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉक्टर किंशुक पाठक कहते हैं, दरअसल, नियमों का पालन नहीं करने वाले लोगों में किसी तरह का फोबिया या डर नहीं पाया जाता। उन्हें समस्या को हल्के में लेने की आदत होती है। ऐसे लोग खुद को तमाम तरह के तर्क देकर अपने अहं को संतुष्ट करते रहते हैं। हो सकता है उन्हें उनकी अपनी सोच से कुछ समय के लिए तसल्ली मिलती हो। लेकिन उन्हें उनके बारे में भी एक बार अवश्य सोच लेना चाहिए जो इससे प्रभावित हो चुके हैं। जरा उनकी सोचिए, जिनका कोई अपना इसका शिकार हो चुका है। उन लोगों, परिवारों की पीड़ा को समझने की कोशिश कीजिए जो आज तक इससे उबरने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि जबतक आप सुरक्षित हैं और तकलीफ का दर्द नहीं समझ रहें हैं, समस्याओं को नजरअंदाज कर सकते हैं।
स्वयं करें पहले, आपके साथ दूसरे भी रहेंगे सुरक्षित:
अब तक काविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। वैक्सीन और टीका पर काम विश्वस्तर पर जारी है। इसलिए अभी इसके प्रभाव में आने से बचने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के बताए गए दिशानिर्देशों का पालन करना ही एकमात्र उपाय है। यदि घर से लोग बाहर निकलते हैं और संक्रमण का लेकर सचेत हैं तो यह सबसे अच्छा है। यह बताता है कि लोगों को अपनी जिंदगी और अपनों से प्यार है। यही उन्हें स्वयं के साथ दूसरों की जिंदगी को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित भी करता है।
कोरोना काल में इन व्यवहारों को अपनाना है जरूरी:
– सही जानकारी रखें, अफवाहों पर ध्यान और बढ़ावा ना दें।
– अपने आसपास स्वच्छता और सफाई का ख्याल रखें।
– समय-समय पर साबुन से अच्छी तरह हाथों को धोते रहें।
– छींकने और खांसने के दौरान अपने मुंह पर रुमाल रखें।
– जो बीमार रहते हैं उनका विशेष ख्याल और अलग कमरे में रखें।
– बाजार, दुकान में लोगों से प्रर्याप्त शारीरिक दूरी बनाकर रखें।
– बार-बार अपने चेहरे,नाक और आंखों को छूने से बचें।
– सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ ना लगाएं।
– अगर बुखार, खांसी और जुकाम की समस्या या अन्य कोई लक्षण नजर आए तो तुरंत जांच कराएं।

लखीसराय में सेविकाओं को पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण का दिया गया प्रशिक्षण

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– जिले के हलसी कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिक द्वारा दिया जा रहा है प्रशिक्षण
– अपनी क्यारी-अपनी थाली, होगा पोषण वाटिका का मूल मंत्र
लखीसराय-
पोषण माह के तहत सेविकाओं का पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण कार्यक्रम का द्वितीय चरण का प्रशिक्षण सोमवार से शुरू हो गया। जो जिले के हलसी कृषि विज्ञान केंद्र में दिया जा रहा है। जिसमें मौजूद सेविकाओं को कृषि वैज्ञानिक द्वारा सीमित संसाधनों के बीच कृषि से जुड़ने का तौर-तरीके बताऐ गये। यह प्रशिक्षण उक्त कृषि विज्ञान के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रेणु कुमारी, डॉ. उदय नारायण एवं डॉ. बिनोद कुमार सिंह द्वारा संयुक्तरूप से दिया गया। वहीं, इससे पूर्व प्रथम चरण में जिले के सभी सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
अपनी क्यारी, अपनी थाली से बेहतर होगा पोषण
इस अवसर पर आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने कहा कुपोषण, एनीमिया एवं अल्पवजन से समुदाय को बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में पोषण अभियान की शुरुआत की गयी है। इसे सफल बनाने के लिए पोषण माह के तहत तमाम गतिविधियाँ का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, उन्होंने ने कहा  अपनी क्यारी, अपनी थाली का मुख्य उद्देश्य पोषण वाटिका के सहयोग से गर्भवतियों एवं बच्चों के पोषण में सुधार करना है।
पोषण में बदलाव जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. रेणु कुमारी ने कहा कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण के लिए पोषण में बदलाव यानि उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसके लिए अपनी क्यारी, अपनी थाली मूल मंत्र साबित होगा। उन्होंने बताया कुपोषण का सामना हर आयु वर्ग के लोगों को करना पड़ता है। इसलिए इससे बचाव के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए।
कृषि से जुड़ेगे सेविका, खुद तैयार कर उगाऐंगे सब्जी
प्रशिक्षण में भाग लेने वाली सेविकाओं को सब्जी किट दिया गया। जिससे अब सेविका शिक्षा के साथ-साथ कृषि से भी जुड़ेगी और दूसरों को जोड़ने का काम करेंगी। दरअसल, सेविका सरकार की हर योजना को लोगों को घर-घर जाकर पहुँचाती हैं। अब खुद अपने केंद्र परिसर में सब्जी उगाऐंगी और दूसरों को भी बताएँगी कि कैसे कम और सीमित संसाधनों में भी खुद से सब्जियाँ उजाकर पोषण पर ध्यान दिया जा सकता है।
अब सेविका खुद से उगाई और बनाई सब्जी बच्चों को खिलाएंगी
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया पहले सेविका बाजार से सब्जी समेत अन्य खाद्य सामग्री खरीदकर और केंद पर बनाकर (पकाकर) खिलाती थी। किन्तु अब खुद से केंद्र परिसर में सब्जी उगाऐगी और बनाकर बच्चों को खिलाएंगी। जिससे पूर्व में खरीददारी के दौरान होने वाली परेशानी भी अब नहीं होगी और केंद्र पर पढ़ने वालों बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी मिलेगी।

कोरोना काल में दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं सेविका मुन्नी कुमारी

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• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 1 और 170 में बच्चों की कर रही देखभाल• कोरोना और पोषण को लेकर घर-घर जाकर लोगों को कर रही जागरूक
बांका-
कोरोना संक्रमण काल में मुश्किलों को बौना साबित करने की कोशिश में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आईसीडीएस कर्मी भी लगे हैं. संसाधनों की कमी कुछ समय के लिए समस्या खड़ी तो करता है, लेकिन यदि अपने कार्य को लेकर सेवा भाव हो तो यही मुश्किलें अवसर में बदल जाती हैं. सेविका मुन्नी कुमारी भी दोहरी चुनौतियों को मात दे कर यही साबित करने में जुटी हैं. मुन्नी कुमारी दुधारी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 1 के बच्चों की देखभाल तो कर ही रही हैं. साथ ही वह रामपुर चौक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 170 के बच्चों की भी देखभाल कर रही हैं. दुधारी आंगनबाड़ी केंद्र संख्या में 122 बच्चे हैं. जबकि रामपुर चौक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या में 103. यानी मुन्नी कुमारी एक साथ 225 बच्चे की देखभाल कर रही है एवं दोनों क्षेत्रों में पोषण सेवाएं सुनिश्चित कर रही है.  
आईसीडीएस के जिला समन्वयक शम्स तबरेज ने बताया मुन्नी कुमारी बहुत मजबूती से अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही हैं. कोरोना काल में उन्होंने बहुत ही साहस के साथ अपनी जिम्मेदारी को निभाया है. यही वजह है कि रामपुर चौक में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या का उन्हें अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. दोनों जगह की जिम्मेदारी को वह अच्छे से निभा रही हैं. साथ ही पोषण माह की गतिविधियों के आयोजन पर भी पूरा भी पूरा ध्यान दे रही हैं.  
कोरोना को लेकर कर रही जागरूक:सेविका मुन्नी कुमारी कोरोना से बचाव के मद्देनजर घर-घर जाकर लोगों को मास्क और ग्लब्स पहनने की सलाह दे रही हैं. साथ ही लोगों से शारीरिक दूरी का पालन करने को कह रही है. लोगों को भीड़भाड़ में नहीं जाने को लेकर एहतियात बरतने को कह रही हैं. सेविका मुन्नी कुमारी गांव के लोगों को हाथ धोने के तरीके भी बता रही हैं. कोरोना काल में सुरक्षित रहने के हर तरीके ग्रामीणों को वह बता रही हैं.
कुपोषण को दूर करने की बता रही उपाय: सेविका मुन्नी कुमारी कहती हैं जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से वह लोगों के घर-घर जाकर ही सारा काम कर रही है. अब जब से पोषण माह शुरू हुआ है तो उनके ऊपर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है. उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण काल में सुपोषण की अहमियत अधिक बढ़ी है. इसलिए वह अब लोगों को बेहतर पोषण की जरूरत के बारे में जागरूक कर रही है. गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पोषण की जरूरत अधिक होती है. सही मात्रा में सभी पोषक तत्वों को आहार में शामिल करने से उनका शरीर कैसे स्वस्थ रह सकता है, इस विषय में भी वह महिलाओं को जानकारी दे रही हैं. उन्होंने बताया स्तनपान एवं अनुपूरक आहार के बारे में पहले की तुलना में लोग अधिक जागरूक भी हुए हैं. ऐसे मुद्दों पर नियमित तौर पर जानकारी देते रहने से समुदाय में इसकी महता पर गंभीरता बनी रहती है.  
बच्चों को पढ़ाई को लेकर कर रही प्रशिक्षित: आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 170 में 3 से 6 साल के 52 बच्चे हैं, वहीं आंगनबाड़ी केंद्र संख्या एक में 3 से 6 साल के 62 बच्चे हैं. सभी को पढ़ाने का भी मुन्नी कुमारी कर रही हैं. बच्चे अगर पढ़ने में मन नहीं लगाते हैं तो उन्हें कौवा- मैना की कहानी सुना कर वह पढ़ाने का काम करती हैं. कहानी सुनकर बच्चे भी पढ़ने के लिए तैयार हो जाती हैं और मुन्नी कुमारी भी बहुत आसानी से अपना काम कर पाती हैं.

जिले को कालाजार मुक्त बनाने के लिए सिंथेटिक पायराथायराइड का हो रहा है छिड़काव 

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– जिले के 12 प्रखंडों के 79 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने किया है चिन्हित
– छिड़काव के दौरान कालाजार के लक्षण वाले लोगों की भी हो रही पहचान
भागलपुर-
जिले को कालाजार मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मी 12 प्रखंडों के 79 गांवों में सिंथेटिक पायथायराइड का छिड़काव करवा रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी गांव के घर-घर जाकर लोगों से स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ले रहे हैं. साथ ही घर के अंदर की दीवारों पर सिंथेटिक पायथायराइड की छिड़काव करवा रहे हैं. छिड़काव की निगरानी मलेरिया विभाग से की जा रही है. इस काम में केयर इंडिया भी सहयोग कर रही हैं. वहीं आशा कार्यकर्ता भी स्वास्थ्यकर्मी के साथ अपना योगदान दे रही हैं.
60 दिनों तक होगा छिड़काव: केयर इंडिया के डिस्ट्रिक्ट टीम लीड मानस मयंक ने कहा 15 सितंबर से छिड़काव का काम चल रहा है जो कि 60 दिनों तक चलेगा. इस दौरान छिड़काव के लक्षण वाले लोगों की भी पहचान की जा रही है. अगर इस दौरान कालाजार के लक्षण वाले कोई भी व्यक्ति मिलते हैं तो उनकी जांच कराई जाएगी. जांच में अगर कालाजार की पुष्टि होती है तो उनका इलाज कराया जाएगा.
स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया है प्रशिक्षण: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कालाजार से मुक्ति के लिए सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को छिड़काव के तरीके बताए गए हैं. उन्हें बताया गया कि जिले के कौन-कौन से गांवों में कालाजार के लक्षण वाले मरीज चिन्हित हुए हैं.
25 अगस्त से 2 सितंबर तक हुआ था सर्वे: जिले के 12 प्रखंडों में कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे का काम 2 सितंबर को पूरा हो गया था. 1 सप्ताह तक चले सर्वे में सिर्फ पीरपैंती प्रखंड में चार उपचाराधीन मरीज की पहचान हुई थी. जांच के दौरान सन्हौला प्रखंड में भी कुछ लक्षण वाले व्यक्ति पाए गए थे, लेकिन जांच में कालाजार की पुष्टि नहीं हुई. 25 अगस्त से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कालाजार मरीजों की पहचान के लिए सर्वे का कार्य कर रही थी. सर्वे के दौरान चयनित गांव में ही स्वास्थ्यकर्मी घर घर जाकर छिड़काव करवा रहे हैं.
कालाजार की रोकथाम को लेकर विभाग अलर्ट:  डॉ. पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. प्रभावित प्रखंडों के चिन्हित गांवों में छिड़काव का काम चल रहा है. उन्होंने बताया जिले के 13 प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे का काम किया था. जिले के 4 प्रखंड कालाजार से मुक्त है, इसलिए वहां छिड़काव का काम नहीं होगा.
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
डॉ. पटेल ने बताया अब दवा का छिड़काव किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई.
कालाजार की ऐसे करें पहचान: डॉ. पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज .को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते है. उन्होंने बताया कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए.

बुजुर्गों के प्रति अपनापन दिखाएँ, भूलने की बीमारी से बचाएं

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विश्व अल्जाइमर्स दिवस (21 सितम्बर) पर विशेष

– जितनी जल्दी पता चल जाए बीमारी का उतनी ही जल्दी दूर की जा सकती है बुढ़ापे की बड़ी समस्या
भागलपुर, 20 सितम्बर-2020 । उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारियाँ हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं । इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी बुढ़ापे में भूलने की आदतों (अल्जाइमर्स -डिमेंशिया) की है, ऐसे बुजुर्गों की तादाद बढ़ रही है । इसीलिए इस बीमारी की जद में आने से बचाने के लिए हर साल 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है । इसका उद्देश्य जागरूकता लाना है ताकि घर-परिवार की शोभा बढ़ाने वाले बुजुर्गों को इस बीमारी से बचाकर उनके जीवन में खुशियाँ लायी जा सकें ।
मायागंज अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. कुमार गौरव का कहना है कि बुजुर्गों को डिमेंशिया से बचाने के लिए जरूरी है कि परिवार के सभी सदस्य उनके प्रति अपनापन रखें । अकेलापन न महसूस होने दें, समय निकालकर उनसे बातें करें, उनकी बातों को नजरंदाज कदापि न करें बल्कि उनको ध्यान से सुनें । ऐसे कुछ उपाय करें कि उनका मन व्यस्त रहे, उनकी मनपसंद की चीजों का ख्याल रखें । निर्धारित समय पर उनके सोने-जागने, नाश्ता व भोजन की व्यवस्था का ध्यान रखें । अमूमन 65 साल की उम्र के बाद लोगों में यह बीमारी देखने को मिलती है या यूँ कहें कि नौकरी-पेशा से सेवानिवृत्ति के बाद यह समस्या पैदा होती है । इसके लिए जरूरी है कि जैसे ही इसके लक्षण नजर आएं तो जल्दी से जल्दी चिकित्सक से परामर्श करें ताकि समय रहते उनको उस समस्या से छुटकारा दिलाया जा सके । इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में से एक है कि जीवन शैली में एकदम से बदलाव आना जैसे- शरीर में आलसपन का आना, लोगों से बात करने से कतराना, बीमारियों को नजरंदाज करना, भरपूर नींद का न आना, किसी पर भी शक करना आदि ।

स्वास्थ्य विभाग मदद को तैयार :
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत “नेशनल प्रोग्राम फॉर द हेल्थ केयर ऑफ़ एल्डर्ली” (एनपीएचसीई) संचालित किया जा रहा है। इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों/वृद्धजनों के समुचित उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। हर जिले में इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती भी की गयी है । बुजुर्गों के लिए अलग वार्ड भी बनाए गए हैं । इसके अलावा उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर परामर्श के लिए मनोचिकित्सक तैनात किया गए हैं । मनकक्ष की व्यवस्था की गयी है, जहाँ पर काउंसिलिंग से लेकर इलाज तक की व्यवस्था होती है । समय-समय पर शिविर आयोजित कर भी बुजुर्गों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ीं समस्याओं का समाधान किया जाता है ।
डिमेंशिया के लक्षण :
रोजमर्रा की चीजों को भूल जाना, व्यवहार में परिवर्तन आना, रोज घटने वाली घटनाओं को भूल जाना, दैनिक कार्य न कर पाना आदि इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं । इसके चलते बातचीत करने में दिक्कत आती है या किसी भी विषय में प्रतिक्रिया देने में विलम्ब होता है । डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रोल, सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक, एनीमिया और कुपोषण के अलावा नशे की लत होने के चलते भी इस बीमारी के चपेट में आने की सम्भावना रहती है ।
जागरूक बनें, डिमेंशिया दूर करें :
इस भूलने की बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए जरूरी है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ ही मानसिक रूप से अपने को स्वस्थ रखें । नकारात्मक विचारों को मन पर प्रभावी न होने दें और सकारात्मक विचारों से मन को प्रसन्न बनाएं। पसंद का संगीत सुनने, गाना गाने, खाना बनाने, बागवानी करने, खेलकूद आदि जिसमें सबसे अधिक रुचि हो, उसमें मन लगायें तो यह बीमारी नहीं घेर सकती । इसके अलावा नियमित रूप से व्यायाम और योगा को अपनाकर इससे बचा जा सकता है । दिनचर्या को नियमित रखें क्योंकि अनियमित दिनचर्या इस बीमारी को बढ़ाती है । धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से दूरी बनाना ही हित में रहेगा । यदि डायबिटीज या कोलेस्ट्रोल जैसी बीमारी है तो उसको नियंत्रित रखने की कोशिश करें ।
फोन मिलाएं – समस्या का समाधान पाएं :
अगर आप मानसिक तनाव या चिंता महसूस कर रहे हैं तो राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के टोल फ्री नंबर- 080-46110007 पर कॉल करके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हर समस्या का समाधान पा सकते हैं ।
क्या कहते हैं आंकड़े :
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली की तरफ से अभी हाल ही में जारी एक एडवाइजरी में कहा गया है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में करीब 16 करोड़ बुजुर्ग (60 साल के ऊपर) हैं । इनमें से 60 से 69 साल के करीब 8.8 करोड़, 70 से 79 साल के करीब 6.4 करोड़, दूसरों पर आश्रित 80 साल के करीब 2.8 करोड़ और 18 लाख बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनका अपना कोई घर नहीं है या कोई देखभाल करने वाला नहीं है ।

पटना से चली पोषण जागरूकता रथ लखीसराय पहुंची, अब जिले में पोषण पर जगाएगी अलख

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-डीएम व डीपीओ के नेतृत्व में किया गया स्वागत, पुनः डीएम ने हरी झंडी दिखाकर रथ को किया रवाना

-विभिन्न जिलों में जाएगी रथ, पोषण का दिया जाएगा संदेश

लखीसराय, 20 सितम्बर।
पोषण माह को सफल बनाने के लिए जिला से लेकर राज्य स्तर पर व्यापक पैमाने पर तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सभी पदाधिकारी पूरी आस्था व उत्साह के साथ पोषण माह को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में पटना से चली राज्य स्तरीय पोषण जागरूकता रथ रविवार को लखीसराय पहुंची। यहां जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह एवं आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा के नेतृत्व में पदाधिकारी व कर्मी द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने रथ को हरी झंडी दिखाकर पुनः अगले गंतव्य के लिए लखीसराय से रवाना किया।

राज्य के सभी जिले में जाएगी रथ, पोषण का दिया जाएगा संदेश :

इस अवसर पर जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा पटना से चली राज्य स्तरीय पोषण जागरूकता रथ राज्य के सभी जिले जाएगी और पोषण का संदेश पहुंचाया जाएगा। इससे पोषण माह को सफल बनाने के लिए जिले में चल रहे तमाम कार्यक्रम में तेजी आएगी और लोगों को नया संदेश मिलेगा।

राज्य स्तरीय जागरूकता रथ से कार्यक्रम में आएगी तेजी :

वहीं, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने कहा कि राज्य स्तरीय पोषण जागरूकता रथ से स्थानीय पदाधिकारी व कर्मी को भी नया संदेश मिलेगा और कार्यक्रम की गति में तेजी भी आएगी। साथ ही स्थानीय पदाधिकारियों व कर्मियों को कार्य करने में नई उर्जा मिलेगी।

जिले में पोषण पर देगी संदेश:

जागरूकता रथ जिले में घूम-घूम कर पोषण पर जागरूकता फैलाएगी। इससे समुदाय में पोषण पर जागरूकता तो बढ़ेगी ही। साथ ही लोगों के बीच पोषण के प्रति आकर्षण भी बढ़ेगा।

जागरूकता रथ से ये जानाकरियां मिलेगी:

– नवजात को जन्म के पहले छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलायें
-छह माह के बाद बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार देना शुरू करें
– गर्भवती महिला की आंगनबाड़ी केंद्र पर रजिस्टेशन करायें
-बच्चों को खाना खिलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें
-गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का सेवन करें
-गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली जरूरी लेनी चाहिए