सैलून-पार्लर में सतर्कता बरतकर रहें सुरक्षित

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– सैलून जाएं तो वहां अनावश्यक वस्तुओं को छूने से बचें
– मास्क लगाए रखें और सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहें
– भीड़ से बचने के लिए पहले से समय और नंबर ले लें
– प्रयोग कपड़े की जगह पर ड़िस्पोजेबल कपड़े का इस्तेमाल करने को कहें

मुंगेर-

कोविड-19 के संक्रमण से सुरक्षा और बचाव के लिए जिले में पांच महीने से ज्यादा वक्त तक लॉकडाउन लगा रहा। इसके बाद जब लोग संक्रमण को लेकर सचेत और सुरक्षा के नियमों को अपनाने लगे, साथ ही जरूरत बढ़ने लगी तो इन सबको देखते हुए प्रशासन ने नियमों में छूट देनी शुरू की। अनलॉक के चरणों में फिर ऑफिस से लेकर मॉल, दुकान, बाजार और सैलून खुलने शुरू हो गए। हालांकि इन सब चीजों के खुलने और लागों का घर से बाहर निकलने का मतलब यह नही है कि संक्रमण का खतरा कम हो गया है। आज भी संक्रमण से प्रभावित लोगों की संख्या कम नहीं हुई है। इसलिए ऐसे वक्त में अब भी घर से बाहर निकलते समय पूरी सावधानी रखने की जरूरत है। दुकान, बाजार, ऑफिस जाना हो या फिर मॉल, हर जगह एहतियात बरतनी बेहद जरूरी है। वहीं सैलून व पार्लर खोलने की अनुमती भी मिल गई है। ऐसे में अगर आप अपने लंबे बालों को छोटा करवाने या फिर सफेद बालों में कलर करवाना चाहते हैं तो पार्लर और सैलून जाते समय कुछ सावधानियों का ख्याल रखकर संक्रमण के प्रभाव में आने से स्वयं को बचा सकते हैं।

सैलून व पार्लर में इन बातों का रखें ध्यान:
इस बात का ख्याल रखना सबसे ज्यादा जरूरी है कि आपने मास्क पहना है। घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाना कतई ना भूलें। बाहर या सैलून में मास्क ना निकालें, जबतक कि चेहरे पर मसाज या फिर फेशियल जैसी जरूरत ना हो। साथ ही अपने साथ सैनेटाइजर जरूर रखें। इससे समय-समय पर हाथों को साफ करते रहें। सैलून में मौजूद किसी भी चीज को बेवजह छूने से परहेज करें। अगर जरूरत हो तो ग्लव्स का इस्तेमाल करें। अगर किसी चीज को छूते हैं तो इसके बाद हाथों को तुरंत सैनेटाइज करना ना भूलें।

रविवार को रखना होगा खास ख्याल:
कामकाजी लोगों के लिए रविवार छुट्टी का दिन होता है। इस कारण इस दिन ज्यादातर लोग शेविंग और हेयर कटिंग करवाने सैलून-पार्लर पहुंचते हैं। इसलिए इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। अगर संभव हो तो पार्लर में जाने से पहले अपना नंबर और समय ले लें। इससे आप किसी भी तरह की भीड़ से बच सकेंगे। अगर हेयरकट ले रहे हैं तो कर्मी को कह सकते हैं कि वह प्रयोग हुए कपड़े की जगह पर ड़िस्पोजेबल कपड़े का इस्तेमाल करें। वहां पहले से मौजूद लोगों से दूरी भी बनाकर रखें।

लोगों को समय देकर आने के लिए कहते हैं:
स्थानीय चंड़िका स्थान रोड़ वासुदेवपुर के सैलून संचालक सन्नी कहते हैं कि पहले रविवार को लोगों की संख्या अच्छी रहती है। अभी सामान्य रूप से लोग शेविंग और हेयर कटिंग कराने आ रहे हैं। भीड़ न हो इसलिए लोगों को समय देकर उन्हें बारी-बारी से आने को कहते हैं। मास्क पहनने को लेकर भी जागरूक करते हैं। सुरक्षा के नियमों का पालन कर रहे हैं।

इन बातों का रखें विशेष ख्याल:

• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 मीटर की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें.
• अपनी कोहनी के अंदरूनी हिस्से में छींके, अपने हाथों की हथेलियों में न खासें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.

जिले में 28 सितम्बर से चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, एमडीए राउंड की होगी शुरुआत

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• आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को देंगी दवा की खुराक
• लोगों को जागरूक करने के साथ, बचाव के बताए जाएंगे उपाय

लखीसराय

जिले में 28 सितंबर से फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस दौरान दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को डाई इथाइल कार्बामाजिन (डीईसी) एवं एल्बेंडाजोल दवा की खुराक दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर देना शुरू कर दिया है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने बताया अभियान की सफलता की रूपरेखा बन चुकी है। जिले में 28 सितंबर से इसकी शुरुआत की जाएगी। इसको लेकर सभी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए गए हैं। एमडीए राउंड के दौरान कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को दवा की खुराक देंगी। यद्यपि, अभी कोरोना संक्रमण काल भी है, इसलिए अभियान के दौरान कोरोना से बचाव के सभी उपायों पर विशेष ध्यान भी दिया जाएगा.

फाइलेरिया एक गंभीर रोग है:

डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने बताया फाइलेरिया एक गंभीर रोग है. इसके कारण हाथी पांव एवं हाइड्रोसील की समस्या होती है. यह रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने की वजह से होता है। हाइड्रोसील के अधिकतम मामले फाइलेरिया के ही कारण होते हैं. लोगों में जागरूकता के आभाव के कारण लोग इसे नजरंदाज कर देते हैं, जबकि ऑपरेशन के जरिए इसका निदान संभव है. फाइलेरिया के कारण हाथी पांव( पैरों में अत्यधिक सूजन) होता है, जो एक दर्दनाक समस्या होती है. इससे ग्रसित लोगों को जीवन में कई तरह की समस्याएँ झेलनी पढ़ती है. हाथी पाँव का ईलाज संभव नहीं हो पाता है. इसलिए यह जरुरी है कि लोग फाइलेरिया जैसे गंभीर रोग से बचने की दिशा में अधिक ध्यान दें. इससे बचने के लिए लोग एमडीए राउंड में दवा का सेवन जरुर करें. उन्होंने बताया डाई इथाइल कार्बामाजिन(डीईसी) एवं एल्बेंडाजोल दवा फाइलेरिया के लिए रामबाण माने जाते हैं। हालांकि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से ग्रसित रोग के व्यक्तियों को यह दवा नहीं लेनी चाहिए। फाइलेरिया के लक्षण पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में फाइलेरिया की मुफ्त दवा उपलब्ध है। उन्होंने बताया जो लोग इसकी दवा ले रहे हैं, वह ध्यान रखें कि दवा को खाली पेट नहीं खाना है। कुछ खाकर ही दवा लें।

ये शुरुआती लक्षण आते हैं नजर:
फाइलेरिया यानी हाथी को जन्म देने वाले क्यूलेक्स जैसे मच्छर घरों के आसपास नाली, गड्ढों व घर के अंदर रुके हुए पानी में ही पनपते हैं। ठंड लगने के साथ तेज बुखार का रहना, हाथ-पैर की नसों का फूलना, दर्द होना, जांघ में गिल्टी उभर आना, एवं हाथ, पैर में सूजन आदि इस रोग के प्राथमिक लक्षण हैं।

ऐसे करें अपना व परिवार का बचाव:

• रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
• सोते समय ऐसे कपड़े पहनें जिससे शरीर का अधिकांश भाग ढका हो।
• बारिश के वक्त विशेष सावधानी बरतें,आसपास गंदा पानी जमा ना होने दें।
• नालियों में पानी रुकने ना दें, सफाई का विशेष ख्याल रखें।
• अपने घर व आसपास में गंदगी या कूड़ा जमा ना होने दें।
• पूरी बाजू के कपड़े पहने।

25 को होगी जागरूकता कार्यशाला:

सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफ़ार) के सहयोग से जिला वेक्टर बोर्न डिजीज द्वारा आगामी 25 सितम्बर को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता एवं जागरूकता को लेकर एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में जिले में संचालित योजनाओं, सुविधाओं और इस रोग से बचाव व सुरक्षा के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

जिले के सभी 2350 आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाओं ने  घर-घर जा कर कराया अन्नप्राशन 

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6 माह पूरा कर चुके बच्चों को खीर और खिचड़ी खिलाकर कराया गया अन्नप्राशन
अर्धठोस आहार के बारे में दी गयी जानकारी
बांका, 19 सितंबर
जिले के सभी 2350 आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेविका ने शनिवार को घर-घर जाकर 6 महीने पूरे कर चुके बच्चों का अन्नप्राशन करवाया. इस दौरान बच्चों को पूरक आहार के तौर पर खिचड़ी या खीर खिलाई गई. आंगनबाड़ी सेविकाओं ने, 6 माह से ऊपर के बच्चों को किस तरीके से पूरक आहार का सेवन करवाना है, इसकी भी जानकारी परिजनों को दी. आईसीडीएस की डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि अभी कोरोना की वजह से सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं. इस वजह से सेविका घर-घर जाकर बच्चों को अन्नप्राशन करवा रही हैं. हर महीने की 19 तारीख को यह आयोजन करवाया जाता है. बच्चों में कुपोषण खत्म करने के लिए आईसीडीएस लगातार अपना कार्यक्रम चला रहा है. साथ ही बताया अन्नप्राशन कराने के लिए सेविका अपने से तैयार कर खिचड़ी और खीर ले जा रही हैं. सेविका गांव के चिन्हित घरों में जहां छह माह के बच्चे हैं, वहां अन्नप्राशन करवा रही हैं.
6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान पर्याप्त नहीं: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि 6 माह पूर्ण होने के बाद शिशु को अधिक उर्जा की जरूरत होती है. इस दौरान उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से होता है. इसके लिए सिर्फ स्तनपान पर्याप्त नहीं होता है. इसलिए 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की भी जरूरत होती है.
अर्धठोस आहार के बारे में दी गयी जानकारी: जिला आईसीडीएस कार्यालय के कोऑर्डिनेटर शम्स तबरेज ने बताया अन्नप्राशन के दिन बच्चों को गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्थानीय मौसमी फल और दूध व दूध से बने उत्पाद खिलाया जाता है. तरल व पानी वाला भोजन जैसे दाल का पानी या माढ़ आदि न देकर उतना ही अर्धठोस आहार दिया जाता है, जितना बच्चे खा सकें. धीरे-धीरे भोजन की मात्रा, भोजन का गाढ़ापन बढ़ाये जाने की सलाह दी जाती है.
स्वच्छता के प्रति किया जागरूक: अन्नप्राशन कराने घर-घर गई आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका ने लोगों को स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया. बच्चे के परिजनों को हाथ धोने के तरीके बताए. साथ ही इस कोरोना काल में मास्क और ग्लव्स पहनने को लेकर भी जागरूक किया. लोगों को घर से कम निकलने की सलाह दी. साथ ही शारीरिक दूरी बनाए रखने की भी अपील की

“अपनी क्यारी, अपनी थाली” से जुड़कर सुपोषण का सपना होगा साकार :-राम सेवक सिंह

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• बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के तत्वावधान में वेबिनार सह पोषण कार्यशाला का हुआ आयोजन

• पोषण में कृषि विज्ञानं केन्द्रों की सहभागिता पर हुई चर्चा
• पोषण वाटिका विषय पर आंगनवाड़ी सेविकाओं को दिया गया प्रशिक्षण

लखीसराय, 18 सितंबर
राज्य में सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. कृषि को पोषण से जोड़ने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रयासरत है. कृषि उत्पादों में पोषक तत्वों को समाहित करने के विषय पर किये जा रहे कार्यों एवं पोषण वाटिका के महत्त्व को समझते हुए कृषि पोषण एवं पोषण वाटिका पर सविकाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के तत्वावधान में वेबिनार के माध्यम से शुभारंभ किया गया.

पोषण है स्वस्थ जीवन की कुंजी:
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार राम सेवक सिंह ने कहा “पोषण ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है. कृषकों द्वारा अपने उपज में पोषणयुक्त बीज का उपयोग कर कृषि उत्पादों में पोषक तत्वों को समाहित किया जा सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र इस दिशा में पोषक तत्वों से समाहित बीजों का सृजन कर सामुदायिक पोषक के सपने को पूरा करने में अहम् भूमिका निभा रहे हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने केंद्र में उपलब्ध भूमि पर कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा जनित बीजों का प्रयोग कर पोषण वाटिका का निर्माण कर सकती हैं. इससे लाभार्थियों एवं समुदाय तक पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की पहुँच का रास्ता सुगम होगा.

“अपनी क्यारी, अपनी थाली” से जुड़कर सुपोषण का सपना होगा साकार:
डॉ प्रेम कुमार, मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग ने कहा कि हमारा देश खाद्दान के मामले में तो आत्मनिर्भर है लेकिन समाज में कुपोषण व्यापत है. कुपोषण से मुक्ति के लिए मार्च 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राजस्थान के झुंझुनू से पोषण अभियान की शुरुआत की थी. पौष्टिक आहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि, अपने भोजन में दूध, अंडा, सोयाबीन और ताजे फल एवं हरी सब्जियां शामिल करें. साथ ही कृषि मंत्री ने व्यवहार परिवर्तन और न्यूट्री गार्डन पर भी जोर दिया. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा चलाये जा रहे “अपनी क्यारी, अपनी थाली” कार्यक्रम की तारीफ़ करते हुए डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि “अपनी क्यारी, अपनी थाली” से जुड़कर महिलाएं सही पोषण, देश रोशन के सपने को साकार कर रही है.

आपसी सहयोग से मिटेगा कुपोषण:
कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार अतुल प्रसाद ने कहा आपसी सहयोग और सहभागिता से कुपोषण का खत्म किया जा सकता है. जीवन के प्रथम 1000 दिन में पोषक तत्वों की आपूर्ति एक स्वस्थ एवं सुपोषित जीवन की आधारशिला तैयार करते हैं. आहार और व्यवहार में परिवर्तन कर कुपोषण से लड़ा जा सकता है. समुदाय में पोषण को लेकर अधिक से अधिक जागरूकता फैलाकर समुदाय में पोषण की अलख जगाई जा सकती है. बच्चों और महिलाओं के पोषण से ही समाज कुपोषण मुक्त हो सकता है.

स्तनपान से होती है सुपोषित जीवन की शुरुआत:

इस दौरान आईसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने बताया नवजात को छह महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके उपरान्त दो वर्ष तक स्तनपान के साथ समुचित उपरी आहार का समुचित प्रबंधन कर कुपोषण पर लगाम लगायी जा सकती है. साथ ही स्वच्छता के महत्त्व को समुदाय कर पहुंचकर पोषण माह में पोषण के सन्देश को लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

कृषि पोषण में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका अहम्:

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने सभी कृषि विज्ञान केंद्र में उपस्थित आंगनबाड़ी सेविकाओं को संबोधित करते हुए कहा बिहार कृषि विश्वविद्यालय कृषि पोषण हेतु जारी निरंतर प्रयास कर रहा है. विश्वविद्यालय अपने स्तर से कई तरह के फलों एवं सब्जियों से बने पदार्थों को पैकेजिंग कर किसानों को सीधे मुहैया करा रहा है। उन्होंने कृषि पोषण वाटिका योजना की भी जानकारी दी, जो विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र में चलाए जा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के पास उपलब्ध जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती हेतु बीज एवं अन्य तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि बच्चों को सही पोषण मिल सके।

डॉ आरके सोहाने निदेशक, प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने कार्यक्रम को संबोधित किया। भारत और बच्चों में कुपोषण की कमी के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका इसको बहुत आसानी से दूर करने का प्रयास कर सकती हैं। इसी कार्य को कृषि विज्ञान केंद्र अपने फार्म पर एक मॉडल बनाकर कर रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ आर एन सिंह, सह निदेशक, प्रसार शिक्षा बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर द्वारा की गई।

“पोषण है स्वस्थ जीवन की कुंजी” – राम सेवक सिंह

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• बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के तत्वावधान में वेबिनार सह पोषण कार्यशाला का हुआ आयोजन
• पोषण में कृषि विज्ञानं केन्द्रों की सहभागिता पर हुई चर्चा
• पोषण वाटिका विषय पर आंगनवाड़ी सेविकाओं को दिया गया प्रशिक्षण
भागलपुर/ 18 सितंबर- राज्य में सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. कृषि को पोषण से जोड़ने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रयासरत है. कृषि उत्पादों में पोषक तत्वों को समाहित करने के विषय पर किये जा रहे कार्यों एवं पोषण वाटिका के महत्त्व को समझते हुए कृषि पोषण एवं पोषण वाटिका पर सविकाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के तत्वावधान में वेबिनार के माध्यम से शुभारंभ किया गया.

पोषण है स्वस्थ जीवन की कुंजी:
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार राम सेवक सिंह ने कहा “पोषण ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है. कृषकों द्वारा अपने उपज में पोषणयुक्त बीज का उपयोग कर कृषि उत्पादों में पोषक तत्वों को समाहित किया जा सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र इस दिशा में पोषक तत्वों से समाहित बीजों का सृजन कर सामुदायिक पोषक के सपने को पूरा करने में अहम् भूमिका निभा रहे हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने केंद्र में उपलब्ध भूमि पर कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा जनित बीजों का प्रयोग कर पोषण वाटिका का निर्माण कर सकती हैं. इससे लाभार्थियों एवं समुदाय तक पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की पहुँच का रास्ता सुगम होगा.

“अपनी क्यारी, अपनी थाली” से जुड़कर सुपोषण का सपना होगा साकार:
डॉ प्रेम कुमार, मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग ने कहा कि हमारा देश खाद्दान के मामले में तो आत्मनिर्भर है लेकिन समाज में कुपोषण व्यापत है. कुपोषण से मुक्ति के लिए मार्च 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राजस्थान के झुंझुनू से पोषण अभियान की शुरुआत की थी. पौष्टिक आहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि, अपने भोजन में दूध, अंडा, सोयाबीन और ताजे फल एवं हरी सब्जियां शामिल करें. साथ ही कृषि मंत्री ने व्यवहार परिवर्तन और न्यूट्री गार्डन पर भी जोर दिया. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा चलाये जा रहे “अपनी क्यारी, अपनी थाली” कार्यक्रम की तारीफ़ करते हुए डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि “अपनी क्यारी, अपनी थाली” से जुड़कर महिलाएं सही पोषण, देश रोशन के सपने को साकार कर रही है.

आपसी सहयोग से मिटेगा कुपोषण:
कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार अतुल प्रसाद ने कहा आपसी सहयोग और सहभागिता से कुपोषण का खत्म किया जा सकता है. जीवन के प्रथम 1000 दिन में पोषक तत्वों की आपूर्ति एक स्वस्थ एवं सुपोषित जीवन की आधारशिला तैयार करते हैं. आहार और व्यवहार में परिवर्तन कर कुपोषण से लड़ा जा सकता है. समुदाय में पोषण को लेकर अधिक से अधिक जागरूकता फैलाकर समुदाय में पोषण की अलख जगाई जा सकती है. बच्चों और महिलाओं के पोषण से ही समाज कुपोषण मुक्त हो सकता है.

स्तनपान से होती है सुपोषित जीवन की शुरुआत:

इस दौरान आईसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने बताया नवजात को छह महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके उपरान्त दो वर्ष तक स्तनपान के साथ समुचित उपरी आहार का समुचित प्रबंधन कर कुपोषण पर लगाम लगायी जा सकती है. साथ ही स्वच्छता के महत्त्व को समुदाय कर पहुंचकर पोषण माह में पोषण के सन्देश को लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

कृषि पोषण में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका अहम्:

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने सभी कृषि विज्ञान केंद्र में उपस्थित आंगनबाड़ी सेविकाओं को संबोधित करते हुए कहा बिहार कृषि विश्वविद्यालय कृषि पोषण हेतु जारी निरंतर प्रयास कर रहा है. विश्वविद्यालय अपने स्तर से कई तरह के फलों एवं सब्जियों से बने पदार्थों को पैकेजिंग कर किसानों को सीधे मुहैया करा रहा है। उन्होंने कृषि पोषण वाटिका योजना की भी जानकारी दी, जो विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र में चलाए जा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के पास उपलब्ध जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती हेतु बीज एवं अन्य तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि बच्चों को सही पोषण मिल सके।

डॉ आरके सोहाने निदेशक, प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर ने कार्यक्रम को संबोधित किया। भारत और बच्चों में कुपोषण की कमी के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका इसको बहुत आसानी से दूर करने का प्रयास कर सकती हैं। इसी कार्य को कृषि विज्ञान केंद्र अपने फार्म पर एक मॉडल बनाकर कर रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ आर एन सिंह, सह निदेशक, प्रसार शिक्षा बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर द्वारा की गई।

“ बिहान ” ऐप से कृषि डेटा का होगा डिजिटलीकरण, किसानों को निर्णय लेने में होगी सहूलियत  

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• नये कृषि भवन का मुख्यमंत्री ने किया उद्धाटन, ‘बिहान’ एप एवं ऑनलाइन पोर्टल किया लांच
• एप की मदद से छोटे किसानों को भी उपलब्ध होगी कृषि से जुड़ी रियल टाइम जानकारी
 बांका/ 18, सितम्बर : राज्य में 121.25 करोड़ रूपये की लागत से नये कृषि भवन को तैयार किया गया है. राजधानी पटना के मीठापुर में अवस्थित इस भवन में कृषि विभाग के सारे कार्यालय होंगे. नया कृषि भवन 23.80 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि भवन का उद्धघाटन किया. इस मौके पर उन्होंने बिहान एप भी लांच किया. बिहार सरकार के कृषि विभाग ने राज्य के भीतर कृषि डेटा के डिजिटलीकरण और एक निर्णय समर्थन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए “ बिहान ” ऐप और ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जिससे किसानों को कृषि संबंधी कार्यों को आसान बनाने में सहूलियत होगी .
इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ‘बिहान’ एप कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में अच्छी पहल है. कृषि की जानकारी डिजिटल माध्यम से अब किसानों तक पहुंच सकेंगी. इसका बड़ा फायदा किसानों को होगा. छोटे किसानों तक खेती-किसानी की जरुरी जानकारियां आसानी से पहुंच सकेगी. यह राज्य में कृषि के क्षेत्र में एक नये बदलाव व क्रांति का संकेत है.
सूचना तकनीक की मदद से पहुंचेगी कृषि योजनाएं:
आधुनिक सूचना प्रोद्योगिकी तकनीक के इस्तेमाल से कृषि योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने में गुणात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से इस एप को लॉच किया गया है. कृषि क्षेत्र में सूचना तकनीक के योगदान को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री एवं बिल् गेट्स के बीच हुई बैठक में बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और कृषि विभाग के बीच सहयोग पर निर्णय लिया गया था. जिसके बाद कृषि विभाग एवं फाउंडेशन के बीच आपसी समन्वय से एग्रीक्लचरल डाटा इंफॉरमेशन डैशबोर्ड एज़ ए सर्विस परियोजना का निर्माण किया गया. बिहान एप इस योजना के एक प्रमुख घटक है. यह पहली परियोजना है, जो कृषि विभाग एवं बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में कार्यान्वित किया जा रहा है.
छोटे-छोटे किसानों को तकनीक से मिलेगा सहयोग :
इस संदर्भ में  बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से बिहार सरकार ने राज्य भर में डेटा के एकीकरण द्वारा बिहार में छोटे-छोटे किसानों के हित में काम करने के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है. इसके लिए मोबाइल और वेब आधारित एप को भी विकसित किया गया है जो रियल टाइम जानकारी एकत्रित करने में मदद करेगा. साथ ही ‘‘ बिहान’’ नामक यह प्लेटफ़ॉर्म विभाग को किसान और फसल की जानकारी की प्रदान करने और डेटा-संचालित निर्णयों को सक्षम करने में भी सहयोग करेगा. परियोजना को डिजिटल इंटेलिजेंस सिस्टम, एलएलसी (डीआईएसवाईएस) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है.
डिजिटल कृषि का समर्थन वर्तमान समय की जरूरत:
कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से  70% से अधिक लोगों को रोजगार देती है. कृषि क्षेत्र वर्तमान परिदृश्य में नए तकनीकों द्वारा संचालित एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जो एक सकारत्मक सूचक है. साथ ही यह कृषि उत्पादकता और लाभप्रदता के अगले स्तर तक ले जाने में सक्षम भी होगा. परिशुद्ध कृषि  आधुनिक कृषि क्रांति की तीसरी लहर बन गई है, जो यह समझ विकसित करती है कि कब और कैसे कार्य करने की जरूरत है.  डिजिटल इंडिया के युग में बड़ी मात्रा में डेटा की उपलब्धता के साथ यह सरकारी तंत्र और इसके संचालन के लिए “डिजिटल कृषि” का समर्थन करना जरूरी हो जाता है. भारत “डिजिटल क्रांति” के मामले में सबसे आगे है और कृषि क्षेत्र के लिए भी इसका अनुसरण करना महत्वपूर्ण है

‘लॉकडाउन खत्म हुआ है, संक्रमण का दौर नहीं’

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– सड़क, दुकान और बाजार में न लगाएं अनावश्यक भीड़
– अपनी बारी का करें इंतजार, हड़बड़ी में न करें खरीदारी
– मास्क पहने हुए हैं तब भी बरते दो गज की शारीरिक दूरी

मुंगेर, 18 सितम्बर।

कोविड-19 क्या है? यह सवाल अगर आपने सड़क और बाजार में किसी से पूछ लिया तो वह आपको ऐसी नजर से देखेंगे जैसे आप किसी दूसरी दुनिया से आए हों। इसका मतलब साफ है कि आज सभी लोग कोविड-19 और इसके संक्रमण से अच्छी तरह वाकिफ हैं। यह जरूर है कि महामारी की शुरुआत में लोग अचानक सहम गए थे। लेकिन समय के साथ जानकारियां बढ़ीं एवं स्वास्थ्य संगठनों, वैज्ञानिकों व चिकित्सकों की मदद से आम लोग पहले की तुलना में अधिक जानकर हुए हैं।वहीं सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नियमों को अपनाने के साथ लोगों ने जिंदगी के साथ चलते हुए जाना कि अब मास्क और दो गज की दूरी ही कोरोना वायरस से लड़ाई में सबसे सशक्त हथियार हैं।

मुंगेर बाजार में शाम के वक्त खरीदारी करने पहुंचे कुछ लोगों से बात करने पर कई नए तथ्य सामने निकल कर आए। रविकांत कहते हैं, आज सड़क खासकर बाजार में सही तरीके से मास्क लगाने, सावधानी और समुचित शारीरिक दूरी को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। अनलॉक में ऐसा न हो कि हम कहीं अधिक लापरवाह हो जाएं। खतरे को मानने, स्वीकार करने से इंकार कर देना और इसके पक्ष में जबरन तर्क गढ़ने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी ही।

इतने दिन संयम रखा तो अब क्यों नहीं:
धीरज रोजमर्रा का सामान लेने बाजार पहुंचे थे। धीरज कहते हैं, मास्क और शारीरिक दूरी को अपनाने से परहेज करने का कोई वजह ही नजर नहीं आता। हमारी अपनी सुरक्षा अपने हाथों में है। यदि इसे नकारेंगे तो मुसीबत उन्हें ही झेलनी होगी। लोगों ने इतने दिन संयम तो रखा ही है, तो अब क्यों नहीं। काम है तो घर से जरूर निकलिए, लेकिन अपनी सुरक्षा का ख्याल भी रखिए। ऐसा कुछ न करें जिससे की परेशानियां पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएं और हमें और अधिक दिक्कतें उठानी पड़ें।

भ्रम में रहना की संक्रमण खत्म हो गया है सही नहीं है:
अमित बताते हैं, आज ज्यादातर लोगों की बेसब्री का आलम यह है कि वह यह भूल गए हैं कि इस समय हमें पहले अपनी सुरक्षा के लिए सावधान होना है। पर ऐसा लगता है कि अनलॉक के कारण वे इस भ्रम में हैं कि अब यह जरूरी नहीं। सड़क पर पहले जैसी भीड़ नजर आती है। संक्रमण का भय का खत्म होना और भ्रम में रहना सही नहीं है। सभी सावधानी बरतेंगे और सुरक्षा के नियमों का पालन करें तभी हमारे साथ समाज सुरक्षित रहेगा।

घर से बाहर निकले तो अभी इन बातों का ख्याल रखना है जरूरी:
– घर से बाहर निकलें तो मास्क अवश्य पहन लें, सैनिटाइजर रखें।
– सड़क व बाजार में भीड़ लगाने व ऐसी जगहों पर जाने से बचें।
– बिना किसी उद्देश्य या औचित्य के यात्रा या भ्रमण करने से बचें।
– सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर जहां तहां नहीं थूंके।
– दुकान और बाजार में खरीदारी के वक्त शारीरिक दूरी बरतें।
– बाजार या सड़क पर खड़े होकर वार्ता करने न लग जाएं।
– ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सतहों जैसे दरवाजे का हैंडल आदि को छूने से बचें।
– अपने आसपास एवं स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग के लिए आरोग्य सेतु एप्प का इस्तेमाल कर सकते हैं।

‘माता एवं शिशु रहेंगे स्वस्थ तो घर में रहेंगी खुशियां’

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-सदर अस्पातल की स्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रूपा ने गर्भवती व शिशु के देखभाल की बताई महत्ता
– महिला के भोजन में विविधता और नवजात के लिए मां के दूध को बताया सर्वोत्तम आहार

लखीसराय, 18 सितम्बर।
“जन्म के एक घन्टे के अंदर शिशु को स्तनपान कराना जरूरी होता है। इससे शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। साथ ही शिशु के जन्म के छह महीने तक उसे केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए। वहीं छह माह बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए बच्चे के छह माह होने के बाद स्तनपान के साथ-साथ उसे अर्ध ठोस आहार जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार देना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही बच्चे को दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ मां का दूध भी पिलाते रहना चाहिए, ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए।” उक्त बातें सदर अस्पातल, लखीसराय की स्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रूपा ने मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के विषय में बोलते हुए कही।

डॉक्टर रूपा ने बताया सदर अस्पताल के साथ जिले में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत मातृ एवं शिशु देखभाल एवं पोषण पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया माता एवं शिशु रहेंगे स्वस्थ तो घर में भी खुशियां रहेंगी। इसी को ध्यान में रखते हुये पोषण माह के दौरान विशेष रूप से इस ओर कार्य हुआ है। साथ ही बुधवार 16 सितम्बर से बच्चों की देखभाल तथा उनकी सेहत को लेकर परिजनों को जागरूक करने के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा भी चलाया जा रहा है। इससे भी माताओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को रखता है स्वस्थ:
डॉक्टर रूपा ने बताया कि बच्चा कुपोषण मुक्त हो इसके लिए गर्भवती के सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन और फॉलिक एसिड एवं केल्शियम की गोली लेना भी जरूरी है। एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चहिए। गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती है एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त स्त्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।

कैल्शियम युक्त भोजन जरूरी:
कैल्शियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफी जरूरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता है एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता है। भोजन में कैल्शियम से भरपूर तत्व जैसे कि दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद के साथ मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, जूस, सोया और ब्रेड आदि शामिल कर सकते हैं।

जन्म के बाद पहले एक हजार दिन बच्चे के लिए महत्वपूर्ण:
डॉक्टर रूपा ने बताया कि गर्भावस्था और जन्म के बाद के पहले एक हजार दिन नवजात के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस दौरान मां के दूध के साथ उचित पोषण मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं बोद्धिक विकास सतत जारी रहता है। यहां अनदेखी पर जीवन भर इसकी भरपाई नहीं हो पाती है। शिशु के जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता हैं। वहीं शुरुआत के एक हजार दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बच्चे का बचाया जा सकता है।

परिजन बेफिक्र होकर आंगनबाड़ी केंद्र में कराएं टीकाकरण

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टीकाकरण हो जाने से 12 तरह की बीमारियों से होता है बचाव

भागलपुर, 18 सितंबर

जिले में कोरोना काल में भी सुरक्षित तरीके से टीकाकरण चल रहा है. परिजन बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र ले जाकर टीकाकरण कराएं. इससे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और 12 तरह की बीमारियों से बचाव होता है. जिन लोगों का सही तरीके से टीकाकरण हुआ है, उन्हें कोरोना भी ज्यादा परेशान नहीं कर रहा है, इसलिए टीकाकरण कराना नहीं भूलें. उक्त बातें जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने शुक्रवार को सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में कही.

डॉ. मनोज कुमार ने कहा, स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण को लेकर पूरी तरह से सजग है. इसमें आमलोगों की भी भागीदारी होनी चाहिए. लोगों को टीकाकरण को लेकर जागरूकता फैलानी चाहिए. टीकाकरण के दौरान कोरोना का संक्रमण नहीं हो इसे लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. एएनएम पूरी तरह से सुरक्षित होकर टीका लगा रही हैं. टीका लगाने के दौरान एएनएम मास्क और ग्लब्स जरूरी तौर पर पहन रही हैं. साथ ही परिजन भी बच्चे को ले जाते वक्त मास्क अवश्य रूप से पहने. इस दौरान आम लोगों को भी शारीरिक दूरी एवं मास्क इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं . कोरोना के संक्रमण के भय को छोड़कर लोगों को टीकाकरण कराना चाहिए. डॉ चौधरी ने बताया आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण पूरी तरह से सुरक्षित है. निजी अस्पतालों, क्लीनिक और सरकारी अस्पतालों में एक ही टीके पड़ते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में टीके के रखरखाव की बेहतर व्यवस्था है, इसलिए संस्थागत टीकाकरण की ओर ही लोगों को जाना चाहिए.

छूटे हुए बच्चों की बनाई जा रही है सूची: डॉ. चौधरी ने बताया कोरोना काल में 30 से 45 दिनों तक टीकाकरण कार्यक्रम जिले में प्रभावित हुआ. इस दौरान कुछ बच्चों का टीकाकरण नहीं हो सका था, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है. छूटे हुए बच्चों की सूची बनाई जा रही है और सभी बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा.

टीका पड़ने के बाद बच्चे को बुखार होने से घबराएं नहीं: कार्यक्रम के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया टीका पड़ने के बाद बच्चों को बुखार होना सामान्य प्रक्रिया है. इससे घबराएं नहीं. टीका पड़ने के बाद बच्चे की मां को इसे लेकर दवा दे दी जाती है उसका डोज बच्चे को दे दें. दवा का डोज पड़ने के बाद बच्चा एक-दो दिनों में ठीक हो जाएगा. साथ ही अगर बच्चे को बुखार है तो उस दौरान भी टीका दिलवाना चाहिए. इससे नुकसान नहीं होता है.

टीके के रखरखाव की है पूरी व्यवस्था: वेबिनार में यूएनडीपी के संदीप सिंह ने बताया जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से टीके के रखरखाव की निगरानी होती है. टीके के तापमान को समय-समय पर मापा जाता है. दो से 8 डिग्री तापमान के बीच टीके को रखा जाता है. अगर टीका में कोई समस्या आ गई है तो उसका भी पता चल जाता है, इसलिए टीकाकरण कराना पूरी तरह से सुरक्षित है.

केयर इंडिया कर रही है सहयोग: केयर इंडिया की डीटीओ डॉ. सुपर्णा टाट ने वेबीनार में बताया फील्ड में टीकाकरण को लेकर केयर इंडिया किस तरह से सहयोग कर रही है. डॉ. सुपर्णा ने बताया जिले के सभी पीएचसी की एक सूची बना ली गई है. साथ ही जितने भी आंगनबाड़ी केंद्र हैं उनकी सूची और वहां पर काम करने वाले लोगों की सूची बनाई गई है. उस हिसाब से स्वास्थ्य विभाग ने मास्क, सेनिटाइजर और ग्लब्स की व्यवस्था की है. इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है. अभी पूरी तरह से सुरक्षित है टीकाकरण.

आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर बुधवार और शुक्रवार को होता है टीकाकरण: वेबीनार में यूनिसेफ के एसएमसी अमित कुमार ने बताया जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार और शुक्रवार को टीकाकरण कराया जाता है. अगर कोई बच्चा छूट जाता है तो घर घर जाकर टीके लगाए जाते हैं. कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार और शुक्रवार के अलावा मंगलवार और गुरुवार को भी टीकाकरण होता है. इसके पहले आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और आशा कार्यकर्ता परिजन को जाकर इसकी सूचना दे देती हैं, ताकि परिजन बच्चे को समय पर जाकर टीकाकरण करवा सकें. अमित कुमार ने बताया सदर अस्पताल में सातों दिन टीकाकरण किया जाता है. अगर किसी के बच्चे को टीका नहीं लग सका है तो वह सदर अस्पताल में आकर टीका लगवा सकते हैं. साथ ही मायागंज अस्पताल में भी टीकाकरण होता है.

वेबिनार में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के स्टेट प्रोग्राम मैनेजर रणविजय सिंह, रंजीत कुमार एवं सरिता मालिक सहित पत्रकार मौजूद थे.

प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक डॉ. राजेश कुमार ने किया वेब मीडिया का उद्घाटन

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पटना–17  सितम्बर,

प्रीमियर वर्ल्ड नेटवर्क के अंतर्गत मुंबई से प्रकाशित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका प्रीमियर वर्ल्ड के स्वामी व सम्पादक डॉ. राजेश कुमार अपने जन्म दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की ही तरह इस वर्ष भी अपने गृह शहर पटना पधारें और हमेशा की तरह अपने जन्म दिन के अवसर पर कुछ न कुछ कार्यक्रम करने वाले बहु-आयामी प्रतिभा के धनी एवं प्रीमियर वर्ल्ड के सम्पादक, मॉडल, अभिनेता, समाज सेवी व शिक्षाविद डॉ. राजेश कुमार ने जहाँ पटना में प्रीमियर वर्ल्ड के प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन किया वहीं प्रीमियर वर्ल्ड के वेबसाइट, मोबाइल ऐप्प, यूट्यूब चैनल के साथ ही साथ लाइव वेब पोर्टल का भी उद्घाटन किया. इस अवसर पर पटना के जाने-माने रंगकर्मी, पत्रकार, समाज सेवी इत्यादि उपस्थित थे जिन्होंने डॉ. राजेश कुमार को शुभकामना दी और इनके वेब मीडिया के सफल होने के लिए अपना आशीर्वाद भी दिया.

इस अवसर पर प्रीमियर वर्ल्ड के उप-सम्पादक मानवेन्द्र कुमार, सहायक सम्पादक पिंकी देवी, सलाहकार सम्पादक ऐश्वर्या सिन्हा व समाचार सम्पादक जय सिन्हा के अतिरिक्त पटना से प्रकाशित होने वाली हिंदी मासिक पत्रिका विधि-विमर्श के सम्पादक रण विजय सिंह एवं उप-सम्पादक शिवानंद गिरी तथा बिहार कलाश्री पुरस्कार परिषद् के अध्यक्ष विश्व मोहन चौधरी संत ने अपने-अपने विचार रखते हुए प्रीमियर वर्ल्ड के वेब मीडिया की शुरूआत करने के लिए डॉ. राजेश कुमार के पहल की प्रशंसा की.


ज्ञात हो कि इस अवसर पर प्रीमियर वर्ल्ड के वेब मीडिया का डिजिटल माध्यम से गोरखपुर के विद्वान् ज्योतिषाचार्य मनीष पांडेय ने मंत्रोचारण कर के लाइव उद्घाटन कराया और डॉ. राजेश को शुभ आशीष दिया. इस अवसर पर सम्पादक डॉ. राजेश ने कहा कि आज के डिजिटल युग में वेब मीडिया का महत्व इतना बढ़ गया है कि अब इससे दूर नहीं रहा जा सकता और उन्होंने अंत में कहा कि प्रीमियर वर्ल्ड के संस्थापक स्व. अमिता ज्योति के जन्म दिवस के अवसर पर 08 अक्टूबर को वे तीन वेबसाइट के साथ-साथ मोबाइल ऐप्प एवं यूट्यूब चैनल का भी उद्घाटन करेंगे.