स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.0 किया लागू

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• आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को मिलेगा लाभ
• 867 पैकेजों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के 1574 इलाज की प्रक्रिया निर्धारित
• 53.92 लाख से अधिक योग्य लाभार्थियों को मिल चुका है गोल्डन कार्ड
• 2 लाख से अधिक लोगों का हो चुका है ईलाज
जमुई, 16 सितंबर: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित नवीन योजना हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.0 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार से लागू कर दिया गया है. एचबीपी 2.0 के तहत 867 पैकेजों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के 1574 इलाज की प्रक्रिया निर्धारित की गयी है. एचबीपी 2.0 के तहत अधिकाधिक निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जा सकेगा. इस पैकेज में शामिल विभिन्न बीमारियों के लिए तैयार की गयी 270 पैकेजों की दर में बढ़ोतरी की गयी है. साथ ही इसमें बीमारियों से संबंधित 237 नये पैकेज शामिल किये गये हैं. सर्जिकल पैकेज के तहत अब पांच लाख तक की सर्जरी की व्यवस्था है.
2 लाख से अधिक मरीजों का हुआ इलाज:
अब तक इस योजना के तहत लगभग 2 लाख 7 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है. लगभग 53.92 लाख से अधिक योग्य लाभार्थियों एवं लगभग 25.02 लाख परिवारों को गोल्डन कार्ड निर्गत किये जा चुके हैं.
569 सरकारी अस्पतालों में मिल रही सेवाएं:
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत बिहार राज्य में 569 सरकारी एवं 264 निजी अस्पतालों में सूचीबद्ध की गयी बीमारियों की इलाज से संबंधित आवश्यक सेवाएं दी जा रही हैं. इन सभी अस्पतालों में बायो आॅथेंटिकेशन के माध्यम से भर्ती एवं डिस्चार्ज करते समय मरीजों का अनिवार्य रूप से प्रमाणीकरण किया जाता है. अब तक इन अस्पतालों को लगभग 144 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है.
कोरोना आपदा के बीच भी सुविधा पहुँचाने का प्रयास:
कोरोना आपदा के बीच सरकार व स्वास्थ्य विभाग आमजनों तक समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से सतत प्रयास कर रही है. इस दिशा में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड का कार्य फिर से बहाल किया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक गोल्डन कार्ड के लिए लोगों को संपर्क करने के लिए जागरूक किया गया है. गोल्डन कार्ड बनाने के दौरान कोविड 19 प्रोटोकॉल का पालन भी किया जाना है.  इसे बनवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा कार्यकर्ताओं की मदद से जागरूकता लाते हुए कार्ड बनाने के लिए प्रेरित किया गया है. इस कार्य में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को भी अपना सहयोग सुनिश्चित करना है. स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड की मदद से गरीब परिवार को इलाज में बड़े पैमाने पर मदद मिल रही है.
क्या है आयुष्मान भारत योजना:
आयुष्मान भारत योजना गरीब लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. इसके तहत अलग अलग बीमारियों का इलाज कराया जा सकता है. यहां 5 लाख रूपये तक का इलाज किया जा सकता है. ग्रामीण व शहरी इलाके के रहने वाले लोगों के लिए इस योजना के तहत अलग अलग योग्यता रखी गयी है. आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी के इलाज में होने वाले खर्च को सरकार कवर करती है. सभी सरकारी अस्पतालों सहित सूचीबद्ध् किये गये निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्राप्त हो सकती है.

आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.0 लागू

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• 867 पैकेजों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के 1574 इलाज की प्रक्रिया निर्धारित
• 53.92 लाख से अधिक योग्य लाभार्थियों को मिल चुका है गोल्डन कार्ड
• 2 लाख से अधिक लोगों का हो चुका है ईलाज
पटना, 16 सितंबर: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित नवीन योजना हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.0 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार से लागू कर दिया गया है. एचबीपी 2.0 के तहत 867 पैकेजों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के 1574 इलाज की प्रक्रिया निर्धारित की गयी है. एचबीपी 2.0 के तहत अधिकाधिक निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जा सकेगा. इस पैकेज में शामिल विभिन्न बीमारियों के लिए तैयार की गयी 270 पैकेजों की दर में बढ़ोतरी की गयी है. साथ ही इसमें बीमारियों से संबंधित 237 नये पैकेज शामिल किये गये हैं. सर्जिकल पैकेज के तहत अब पांच लाख तक की सर्जरी की व्यवस्था है.
2 लाख से अधिक मरीजों का हुआ इलाज:
अब तक इस योजना के तहत लगभग 2 लाख 7 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है. लगभग 53.92 लाख से अधिक योग्य लाभार्थियों एवं लगभग 25.02 लाख परिवारों को गोल्डन कार्ड निर्गत किये जा चुके हैं.
569 सरकारी अस्पतालों में मिल रही सेवाएं:
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत बिहार राज्य में 569 सरकारी एवं 264 निजी अस्पतालों में सूचीबद्ध की गयी बीमारियों की इलाज से संबंधित आवश्यक सेवाएं दी जा रही हैं. इन सभी अस्पतालों में बायो आॅथेंटिकेशन के माध्यम से भर्ती एवं डिस्चार्ज करते समय मरीजों का अनिवार्य रूप से प्रमाणीकरण किया जाता है. अब तक इन अस्पतालों को लगभग 144 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है.
कोरोना आपदा के बीच भी सुविधा पहुँचाने का प्रयास:
कोरोना आपदा के बीच सरकार व स्वास्थ्य विभाग आमजनों तक समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से सतत प्रयास कर रही है. इस दिशा में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड का कार्य फिर से बहाल किया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक गोल्डन कार्ड के लिए लोगों को संपर्क करने के लिए जागरूक किया गया है. गोल्डन कार्ड बनाने के दौरान कोविड 19 प्रोटोकॉल का पालन भी किया जाना है.  इसे बनवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा कार्यकर्ताओं की मदद से जागरूकता लाते हुए कार्ड बनाने के लिए प्रेरित किया गया है. इस कार्य में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को भी अपना सहयोग सुनिश्चित करना है. स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड की मदद से गरीब परिवार को इलाज में बड़े पैमाने पर मदद मिल रही है.
क्या है आयुष्मान भारत योजना:
आयुष्मान भारत योजना गरीब लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. इसके तहत अलग अलग बीमारियों का इलाज कराया जा सकता है. यहां 5 लाख रूपये तक का इलाज किया जा सकता है. ग्रामीण व शहरी इलाके के रहने वाले लोगों के लिए इस योजना के तहत अलग अलग योग्यता रखी गयी है. आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी के इलाज में होने वाले खर्च को सरकार कवर करती है. सभी सरकारी अस्पतालों सहित सूचीबद्ध् किये गये निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्राप्त हो सकती है.

बच्चों का खिलाई गई एल्बेंडाजोल की गोली

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29 सितंबर तक चलेगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम
बांका, 16 सितंबर
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत बुधवार को बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई. साथ ही 5 साल तक के बच्चे को ओआरएस का घोल पिलाया गया. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर योगेश्वर मंडल ने बताया कि जिले भर के बच्चों को आज से 29 सितंबर तक एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी.साथ ही 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाया जाएगा.
1 से 2 साल तक के बच्चे को आधी गोली खिलाई जाएगी: डॉक्टर योगेश्वर मंडल ने बताया कि 1 से 2 साल तक के बच्चे को एल्बेंडाजोल की आधी गोली खिलाई जाएगी. 2 से 5 साल तक के बच्चे को गोली को चूर पानी में घोलकर पिलाई जाएगी. 5 साल से 19 साल तक के युवकों-युवतियों को पूरी गोली खिलाई जाएगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जा रही आशा कार्यकर्ता: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर घर जाकर आशा कार्यकर्ता बच्चों को गोली खिला रही हैं. आशा कार्यकर्ता 5 साल से कम उम्र के बच्चे को ओआरएस का घोल भी पिला रही हैं. कोई बच्चा छूट नहीं जाए इसे लेकर हर घर का रिकॉर्ड वह रजिस्टर में दर्ज कर रही हैं.
शहरी क्षेत्र में सेविका जा रही हैं घर घर: शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेविका लोगों के घर-घर जाकर बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली व ओआरएस के घोल पिला रही हैं. आंगनबाड़ी सेविका भी हर घर की रिकॉर्ड अपने रजिस्टर में दर्ज कर रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा छूट ना जाए.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगाया गया है स्टॉल; शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टॉल भी लगाया गया है. कोई भी परिजन अपने बच्चे को यहां पर लाकर एल्बेंडाजोल की गोली खिला सकते हैं या फिर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ओआरएस का घोल पिला सकते हैं. डॉक्टर बजरंग ने बताया कि सुबह 10:00 बजे से ही बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जा रही है. वहीं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि 29 दिसंबर तक 29 सितंबर तक यह कार्यक्रम चलेगा. अगर किसी के घर में आंगनबाड़ी सेविका नहीं जा सकी तो यहां आकर अपने बच्चे को दवा खिला या पिला सकते हैं

स्टेशन पर कोरोना जांच शिविर का जिलाधिकारी ने किया उद्घाटन

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– अधिक से अधिक लोगों से कोरोना जांच कराने की अपील
– जांच से ही टूटेगी संक्रमण की चेन
भागलपुर, 16 सितंबर
कोरोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है. इसी सिलसिले में बुधवार को स्टेशन चौक पर जांच शिविर का उद्घाटन जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने किया. उद्घाटन के बाद वहां पर मौजूद लोगों से अधिक से अधिक संख्या में जांच कराने की जिलाधिकारी डीएम ने की.
इस दौरान जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने कहा कि कोरोना की चेन जांच से ही टूटेगी. इसलिए जांच कराने में कोई भी कोताही नहीं बरतें. न सिर्फ लक्षण वाले लोग, बल्कि सामान्य लोग भी जांच शिविर में आकर अपनी जांच करवा सकते हैं. जांच में अगर संक्रमित पाए जाते हैं तो वहां पर मौजूद डॉक्टरों की सलाह पर तत्काल अमल शुरू कर दें.
जिले में प्रतिदिन 10000 से अधिक लोगों की हो रही जांच: इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि अभी जिले में प्रतिदिन लगभग 10000 लोगों की कोरोना जांच हो रही है. जांच जितनी अधिक होगी, उतनी ही जल्दी हम लोग कोरोना पर विजय पा लेंगे. शिविर के अतिरिक्त जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में भी जांच हो रही है. इसलिए लोग कहीं भी जाकर अपनी जांच करवा सकते हैं.
मास्क पहनने और शारीरिक दूरी पालन करने की अपील: कार्यक्रम का उद्घाटन के बाद जिलाधिकारी और सिविल सर्जन दोनों ने लोगों से घर से निकलते वक्त मास्क लगाने की अपील की. साथ ही भीड़भाड़ से बचने के लोगों को सलाह दी. जिलाधिकारी ने कहा कि 6 मीटर की शारीरिक दूरी का पालन जरूरी है, इससे कोरोना एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होगा. इसलिए शारीरिक दूरी का हमेशा ध्यान रखें.
तिलकामांझी में भी जांच शिविर का  हुआ उद्घाटन: शहर के एक और प्रमुख चौक तिलकामांझी में भी करोना जांच शिविर का उद्घाटन किया गया. वहां पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने एंटीजन किट से जांच की. तिलकामांझी में जांच शिविर के शुभारंभ होने का पता लोगों को पहले से थी इस वजह से काफी संख्या में वहां पर जांच कराने के लिए वह लोग पहुंचे थे.

संक्रमण काल में मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी

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– अनावश्यक तनाव लेने की जगह सतर्कता बरतते हुए सही जानकारी रखें
– परिजनों और दोस्तों संग अपनी समस्या साझा करें, उनकी मदद लें
– मानसिक रूप से मजबूत रहने पर ही चीजों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे
– बीमार या लगातार परेशान रहते हैं तो डॉक्टर से अवश्य मिलें और सलाह लें

मुंगेर, 16 सितम्बर।

कोविड-19 से पहले लोग संक्रमण की बीमारी को उतनी गंभीरता से नहीं लेते थे। आज कई माह बाद भी जब इसका प्रभाव कम नहीं हुआ है और न ही दवा और वैक्सीन है। ऐसे में लोग हरेक बीमारी को अति गंभीरता से ले रहे हैं। बीमारी की चपेट में आने से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा के उपाय अपना रहे हैं। इधर, देश में जब से लॉकडाउन लगा लोग घरों में सिमट कर रह गए। गृहणियों के साथ-साथ कामकाजी और घर से बाहर रहने वालो की दिनचर्या सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। आज अनलॉक होने के बाद भी संक्रमण का प्रभाव जारी है। ऐसे में परिवार के सदस्यों के साथ कई कामगार लोग अनिश्चित या अनजाने भविष्य को लेकर परेशानी भी महसूस कर रहे हैं। इस माहौल में लोगों में चिंता और तनाव भी देखा जा रही है। लोग मानसिक रूप से परेशान भी दिखते हैं। यह स्वास्थ को लेकर कोई बड़ी परेशानी न खड़ी कर दे, इसलिए ऐसे वक्त में बेहद सजग रहने की जरूरत है।

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना हरेक व्यक्ति के लिए जरूरी:
किसी भी अवस्था या परिस्थिति में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना हरेक व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी होता है। क्योंकि यह इंसानों के सोचने, महसूस करने और काम करने की ताकतों को प्रभावित करता है। इसके साथ ही इसका सीधा असर तनाव, रिश्ते और फैसले लेने पर भी पड़ता है। कोविड-19 के दौरान महिलाओं, युवाओं, स्कूली बच्चों और ऐसे कामकाजी लोग जिनका काम-धंधा बंद हो गया तथा जो घर में बैठ गए उन्हें थोड़ा बहुत मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा। युवा और बच्चे तो बड़े-बुजुर्गों के देखरेख में तनाव से काफी हद तक दूर रहे, लेकिन कामकाजी और घर गृहस्ती चलाने वालों की समस्या कम नहीं हुई।

परेशानियों का पा सकते हैं समाधान:
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉक्टर पुरुषोत्तम कुमार कहते हैं कि लोगों का मानसिक स्वास्थ्य न बिगड़े, उन्हें कोई अन्य समस्या व बीमारी न घेर ले इसको लेकर स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने के साथ-साथ कई कदम उठाए जा रहे हैं। अस्पतालों में इलाज की बेहतर व्यवस्था के साथ जानकारी व सहायता के लिए टोल फ्री नंबर के साथ कई ऐसे प्लेटफॅाम तैयार किए गए हैं, जहां से लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का हल पा सकते हैं। बिहार सरकार का ‘संजीवन एप’ और केंद्र का ‘आरोग्य सेतु’ एप भी इसमें अहम भूमिका अदा कर रहा है।

इस प्रकार रख सकते हैं स्वयं को मानसिक रूप से स्वस्थ:

– कोविड-19 का दौर कबतक रहेगा यह निश्चित नहीं है, इसलिए अनावश्यक तनाव लेने की जगह सतर्कता बरतें और सही जानकारी रखें। अगर आप बीमार या लगातार परेशान रह रहे हैं तो डॉक्टर से मिलें और विशेषज्ञ की सलाह लेते रहें।

– परिजनों, दोस्तों की मदद लें। उनसे बात करते रहें तथा उनसे अपनी समस्याएं साझा करें। जरूरी यह भी है कि उनके सुझावों पर अमल भी करें, याद रखे कि परेशानी में अपने ही सही रास्ता दिखाते हैं। उनसें मदद लेने में परेशानी नहीं है। झिझक ना करें।

– मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए जरूरी है कि आप मानसिक तौर पर मजबूत बनें। अगर आप मानसिक रूप से मजबूत हैं तो आप चीजों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और निर्णय ले पाएंगे।

– भावनात्मक स्वास्थ्य का भी ठीक बनाए रखना आपके परिवार के हिसाब से भी जरूरी है। इसी की मदद से आप अपनी और परिवार की जरूरतों और सुरक्षा को लेकर कदम उठा पाएंगे।

– समय पर भोजन लें, व्यायाम और योगा को दिनचर्या में शामिल करें तथा पूरी नींद लें। खुश रहें और दूसरों को भी रखने की कोशिश करें। वह काम करें जो आपको खुशी दे।

– राष्ट्रीय मानसिक जांच एवं स्नायु विज्ञान संस्थान (निमहांस) के टोल फ्री नंबर 080-46110007 पर कॉल कर मदद और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

डायरिया से बचाव को सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू

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– सीएस, एसीएमओ व डीआइओ ने दीप प्रज्जवलीत कर किया कार्यक्रम का उद्घाटन
– आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर हाथ धोने और ओआरएस का लाभ व विधि समझाएंगी
– डायरिया से बचाव व सुरक्षा के लिए बच्चों के परिजनों को जागरूक करना है लक्ष्य
लखीसराय, 16 सितम्बर:
जिले में डायरिया से होने वाली मौतों को कम करने और बच्चों के परिजनों को उनकी सेहत को लेकर जागरूक करने के लिए बुधवार को सदर अस्पताल के प्रांगन में ‘सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा’ का शुभारंभ हुआ। लखीसराय के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर देवेन्द्र डी चौधरी और जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलीत कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। कार्यक्रम के बाद डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने बताया कि इस अभियान के दौरान जिले भर में आशा कार्यकर्ता बच्चों और उनके अभिभावकों को घर-घर जाकर हाथ धोने का लाभ, हाथ धोने का तरीका, ओआरएस के लाभ व तैयार करने की विधि समझाएंगी। साथ ही प्रत्येक घर में बच्चों की संख्या और जरूरत के अनुसार ओआरएस पैकेट और जिंक टेबलेट और वितरण करेंगी।
ओआरएस का घोल व जिंक की टेबलेट दी जाएगी:
डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान पांच साल तक के बच्चों को ओआरएस का घोल व जिंक की टेबलेट दी जाएगी। इससे बच्चों में उल्टी व दस्त आदि की रोकथाम की जा सकेगी। साथ ही उनके पोषण को लेकर भी माताओं को जागरूक किया जाएगा। बच्चे के छह माह से ज्यादा होने पर उसे उपरी अल्पाहार और उसके बाद के बच्चों को पूर्ण आहार देने का तरीका और महत्व बताया जाएगा।
साबुन से हाथ धोने और स्वच्छता अपनाने पर जोर:
डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने बताया कि दस्त व निर्जलीकरण से होने वाली मृत्यु को ओआरएस व जिंक की गोली के साथ पर्याप्त पोषण देकर रोका जा सकता है। दस्त की रोकथाम के लिए साफ व स्वच्छ पानी पीना, समय समय पर हाथों को अच्छे से साबुन से हाथ धोना, साफ सफाई का ख्याल रखने का अहम योगदान होता है। इन आदतों को अगर लोग अपनाएंगे और बच्चों में शुरू से इसकी आदत डालेंगे तो इसका दूरगामी परिणाम होगा। अभियान के दौरान लोगों को इसपर जागरूक करने का भी कार्य किया जाएगा।
ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां पहुंचाना होगा सुनिश्चित:
डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने कहा कि पखवाड़े के दौरान आशा द्वारा आम घरों तक पोषण, स्वच्छता, पौष्टिक आहार, हाथ धोने के सही तरीके तो बताए जाएंगे ही, इस अभियान के माध्यम से 2 माह से 5 साल तक के दस्त से पीडित बच्चों तक ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने अभियान संबंधी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। अभियान की सपफलता के लिए इसकी निगरानी भी की जाएगी।

पोषण और स्वच्छता की घर-घर पहुंच रही महत्ता

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– जिले में एक से 30 सितम्बर तक मनाया जा रहा है पोषण माह
– कार्यक्रम और ​गतिविधियों से लोगों में देखी जा रही जागरूकता
– परिजनों को बताया जा रहा है स्वच्छता और पोषण का महत्व
– पर्यवेक्षिकाएं जगा रही हैं अलख, अभियान को मिल रहा है बल
लखीसराय, 15 सितम्बर
जिले में पोषण माह अभियान के तहत कई गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। विशेष कर पोषण और स्वच्छता को लेकर घर-घर अलख जगाया जा रहा है। लखीसराय आईसीडीएस की कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि पोषण माह (एक से 30 सितम्बर) के दौरान गर्भवती, नवजात, बच्चों और कोशोरियों के पोषण पर तो बल दिया ही जा रहा है, साथ ही कोविड-19 और स्वच्छता की जरूरत को देखते हुए इसके लिए कई गतिविधियों को भी अंजाम दिया जा रहा है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता और पर्यवेक्षिका गृहभ्रमण कर अपने पोषक क्षेत्र में स्वच्छता और पोषण की अलख जगा रही ​हैं। विशेष कर कोविड-19 को देखते हुए स्वच्छता का संदेश लेकर घर-घर तक पहुच रहीं हैं। इनकी जागरूकता भरी बातों को लोग आज सुनने के साथ अपनाने भी लगे हैं। साथ ही घर के सदस्यों के साथ आसपास और समुदाय स्तर पर एक सकारात्मक सोच भी पोषण और स्वच्छता को लेकर विकसित हो रही है।
समाज में पोषण और स्वच्छा की समझ विकसित करना लक्ष्य:
कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि पोषण अभियान को जन-आंदोलन बनाते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक पोषण और स्वच्छा की समझ को विकसित करना है। इसलिए घर से लेकर सामुदायिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रह हैं। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा अभियान की सफलता एवं व्यवहार परिवर्तन के लिए पोषण के पांच सूत्र दिये गए हैं। इसमें शिशु के पहले एक हजार दिन, पौष्टिक व उपरी आहार, अनीमिया प्रबंधन, डायरिया रोकथाम एवं स्वच्छता को शामिल किया गया है।
हर घर पोषण और स्वच्छता का त्यौहार:
कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि 30 सितंबर तक पोषण माह को हर घर पोषण और स्वच्छता का त्यौहार के रूप में मनाया जा रहा है। जिले के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों व गांवों में स्वच्छता एवं पोषण जागरूकता को जनांदोलन का रूप देने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों व नवतात का उत्तम स्वास्थ्य, पोषण आवश्यकता के प्रति जागरूकता, गर्भावस्था जांच, पोषण देखभाल, शीघ्र स्तनपान व्यवहार, सही समय पर ऊपरी आहार को लेकर लोगों को जागरुक करना है। इसके अतिरिक्त शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए आयरन सेवा एवं खाद विविधता से 5 वर्ष तक के बच्चों की शारीरिक वृद्धि, निगरानी, किशोरी शिक्षा को शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से आंदोलन का रूप देना है।
‘हाथ धुलाई’ और पोषण कार्यक्रम से दिख रही सजगता:
रामगढ़ चौ​क, आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-21 की लाभार्थी सुनिता कुमारी बताती हैं कि एक समय लोग हाथों की सफाई को लेकर उतना जागरूक नहीं थे। राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान जब ‘हाथ धुलाई’ जैसे कार्यक्रम और गतिविधियों को अंजाम दिया जाने लगा तो लोगों में इसके प्रति जागरूकता देखी जाने लगी। वहीं कुपोषण को खत्म करने और नवजात और गर्भवती की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जब पोषण का महत्व लगातार बताया जाने लगा तो लोगों में सकारात्मक सोच आने लगी। आज सभी बताएं निदेर्शों का पालन करते हैं। परिवार के सदस्य के साथ बच्चे तक बड़े ही उत्साह के साथ बताते हैं कि वे अब स्वास्थ्य और पोषण को लेकर सचेत रह रहे हैं।

डायरिया नियंत्रण व कृमि मुक्ति के लिए आज से शुरू होगा अभियान

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– 16 सितंबर से 29 सितंबर तक चलेगा पखवाड़ा, आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किया गया प्रशिक्षित
– कोविड 19 संक्रमण को देखते हुए कन्टेंमेंट जोन में नहीं चलाया जाएगा अभियान
भागलपुर, 15 सितंबर
 कोरोना संक्रमण काल में प्रभावित हुए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अब गति दी जा रही है। इस क्रम में 16 सितंबर से लेकर 29 सितंबर तक जिले में डायरिया नियंत्रण व कृमि मुक्ति के लिए संयुक्त अभियान चलाए जाएंगे, जिसकी तैयारी जिला स्वास्थ्य समिति ने पूरी कर ली है। राज्य स्वास्थ्य समिति से निर्देशों के अनुसार मंगलवार को आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षित किया गया है। दोनों कार्यक्रमों को एक साथ आयोजित करने से आशा गृह भ्रमण के दौरान ही कार्यक्रम से संबंधित सेवाएं भी प्रदान कर सकेगी। प्रशिक्षण में बताया गया कि कोविड 19 संक्रमण के प्रसार को देखते हुए समिति के निर्देशों के तहत जिले के कन्टेंमेंट जोन में कोई अभियान नहीं चलाए जाएंगे। यदि, इस बीच किसी कन्टेंमेंट जोन की अवधि समाप्त हो जाती है, तो राज्य स्वास्थ्य समिति व जिला प्रशासन के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस दौरान विटामिन ए की खुराक देने के लिए भी अभियान चलाया जाना था। लेकिन, विभाग ने अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया।
एक से 19 साल तक के बच्चों को दी जाएगी एलबेंडाजोल की दवा :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया जिले में नवजात मृत्यु दर एवं पांच साल के कम उम्र के बच्चों के मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से दोनों अभियान एक साथ शुरू किए जा रहे हैं। इन दो कार्यक्रमों के एक साथ आयोजन करने से अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 16 सितम्बर से 29 सितम्बर तक जिले के एक साल से 19 साल तक के बच्चों को एलबेंडाजोल की दवा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए एलबेंडाजोल की दवाएं प्राप्त हो चुकी हैं। जिनका आवंटन प्रखंडों में किया जा चुका है। गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बच्चों को एलबेंडाजोल की दवाओं को चूरकर अपने सामने अभिभावक द्वारा खिलाया जाना सुनिश्चित कराएंगी।
पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों को दी जाएगी ओआरएस और जिंक की खुराक :
डॉ.  चौधरी ने बताया राष्ट्रीय दस्त नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले के पांच साल तक के बच्चों को ओआरएस और जिंक की खुराक दी जाएगी। इस क्रम में प्रत्येक घरों में ओआरएस के पैकेट दिए जाएंगे। लेकिन, जिंक की गोलियां सिर्फ उन परिवारों को दी जाएगी, जिनके बच्चे दस्त से ग्रसित रहते हों। उन्होंने बताया कि दो से छह माह तक के बच्चों को जिंक की आधी गोली प्रतिदिन 14 दिनों तक देनी है। वहीं, छह से पांच वर्ष तक के बच्चों को प्रतिदिन जिंक की एक गोली दी जानी है। सबसे जरूरी बात यह है कि छह माह तक के बच्चों को यदि दस्त हो जाए, तो माताओं को स्तनपान कराते रहना है। ताकि, शिशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास हो सके।

अब और एक्टिव होगा संजीवन ऐप

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– राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक ने सिविल सर्जन को लिखा पत्र
– ऐप को पूर्णता उपयोग करने एवं निवारण के लिए आवश्यक निर्देश देने को कहा
– ऐप का प्रशिक्षण जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को दिया गया है
लखीसराय, 15 सितम्बर
सूबे में ‘संजीवन ऐप’ की उपयोगिता और महत्व को बढ़ावा देने के साथ आम जनों तक इसका लाभ सुनिश्चित करने की कवायद में स्वास्थ्य विभाग लगा है। बता दें कि यह ऐप आरोग्य सेतु एप की तर्ज पर बिहार सरकार द्वारा विकसित किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि यह ऐप कोरोना का इलाज करा रहे मरीजों की इलाज का रास्ता आसान बना देगा। यह ऐप संक्रमण काल में ऐसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है जो एक आम नागरिक और उपचाराधीन को जरूरत होती है। इसी कड़ी में राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सभी सिविल सर्जन सह सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति को ‘संजीवन ऐप’ को पूर्णता उपयोग करने एवं निवारण के संबंध में पत्र लिखा है। इसे विशेष रूप से एक्टिव बनाए जाने मो कहा है।
– होम आइसोलेशन की पूरी जानकारी
पत्र में बताया गया है कि कोरोना संक्रमण से बचाव और सुविधा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी आम जनों तक उपलब्ध कराने हेतु ‘संजीवन ऐप’ विकसित किया गया है। इसे गूगल प्ले स्टोर या स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार या राज्य स्वास्थ समिति, बिहार की वेबसाइट से मोबाइल पर डाउनलोड एवं इंस्टॉल कर आम जनों के द्वारा उपयोग किया जा रहा है। कार्यपालक निदेशक ने पत्र में बताया है कि ‘संजीवन ऐप’ का प्रशिक्षण वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को दिया गया है। राज्य स्तर से इसका प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने सिविल सर्जन, सदस्य सचिव जिला स्वास्थ्य समिति, बिहार से अनुरोध किया है कि वह जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को निर्देश दें कि ‘संजीवन ऐप’ के माध्यम से होम आइसोलेशन हेतु किए गए स्व-घोषणा को कोविड-19 बिहार वेब पोर्टल पर अप्रूव या रिजेक्ट करना सुनिश्चित करें ताकि स्व-घोषणा करने वाले मरीजों को स्वास्थ सुविधा उपलब्ध करायी जा सके।
– ओटीपी प्राप्त करते सैंपल लिया जाए
पत्र में यह भी कहा है कि ‘संजीवन ऐप’ के माध्यम से प्राप्त होने वाले सभी शिकायतों का निवारण ततक्षण करते हुए उक्त पोर्टल पर दर्ज करना सुनिश्चित करें, ताकि शिकायतकर्ता को शिकायत निवारण की जानकारी प्राप्त हो सके। इसी पत्र में यह भी कहा गया है कि जिले में कोविड-19 जांच हेतु कार्यरत सभी सैम्पल कलेक्शन सेंटर को निर्देश दें कि कोविड जांच हेतु उक्त ‘संजीवन ऐप’ के माध्यम से स्वयं पंजीकृत व्यक्तियों से ओटीपी प्राप्त करते हुए सैंपल लिया जाए एवं उक्त पोर्टल पर दर्ज करते हुए सैंपल जांच की कार्रवाई करना शुरू सुनिश्चित किया जाए।
‘संजीवन ऐप’ में उपलब्ध होने वाली सुविधाएं
– कोविड-19 जांच हेतु स्वयं पंजीकरण।
– नजदीकी जांच केंद्र की जानकारी।
– नजदीकी आइसोलेशन सेंटर की जानकारी।
– कोविड-19 जांच का परिणाम प्राप्त करना।
– होम आइसोलेशन के लिए स्व-घोषणा
– चैट बॉक्स की सुविधा।
– नजदीकी कोविड स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी।
– आइसोलेशन सेंटर में बेड की उपलब्धता की जानकारी।
– सामान्य प्रश्न पूछने की सुविधा।
– कोरोना की आम जानकारी की उपलब्धता/फीडबैक देने की सुविधा।
– राज्य एवं जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या मोबाइल नंबर की जानकारी।
– एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 पर चिकित्सक की सलाह व टोल फ्री नंबर 104 पर सीधे डायल करने की सुविधा।

पोषण माह को सफल बनाएगा अभियान

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– गांव से लेकर शहर तक लोगों को सही पोषण के बारे में किया जा रहा है जागरूक
– गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की दी जा रही है सलाह

बांका, 15 सितंबर
जिले में पोषण माह को सफल बनाने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम चल रहे हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को सही पोषण के बारे में जागरूक किया जा रहा है. गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जा रही है. वही बच्चों को पूरक आहार खिलाने को कहा जा रहा है।

– पोषण है बहुत जरूरी
डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि पूरे महीने पोषण को लेकर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. कुपोषण को दूर करने के लिए सेविका और सहायिका लोगों को घर-घर जाकर सही पोषण की जानकारी दे रही है. साथ ही आईसीडीएस के अन्य लोग भी इस काम में लगे हुए हैं. चौक- चौराहों और बाजारों में भी लोगों को सही पोषण लेने की जानकारी दी जा रही है.

– ऑटो, ई- रिक्शा से फैलाई जा रही जागरूकता
सदर से लेकर सभी प्रखंडों में जागरूकता रथ चल रहा है. कहीं ऑटो पर तो कहीं रिक्शे पर सवार होकर आईसीडीएस के कर्मी लोगों को सही पोषण की जानकारी दे रहे हैं. उन्हें इससे होने वाले फायदे के बारे में भी बताया जा रहा है. सही पोषण लेने से शरीर स्वस्थ रहता है. साथ ही निरोग जीवन जीते हैं इस बारे में लोगों को बताया जा रहा है.

– घर घर में जा रही सेविका और सहायिका
सेविका और सहायिका गांव के घर-घर में बच्चों की देखभाल कर रही हैं और उन्हें सही पोषण देने के लिए परिजनों को जानकारी दे रही है. परिजनों को बता रही है कि बच्चों को पूरक आहार दें. इससे उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी. साथ ही जिन बच्चे की उम्र 6 महीने से कम है उन्हें स्तनपान कराएं.

– सफाई के प्रति भी कर रही जागरुक सेविका-सहायिका लोगों के घर-घर जाकर ना सिर्फ पोषण की जानकारी दे रही है, बल्कि उन्हें स्वच्छता के प्रति भी जागरूक कर रही है. लोगों को बता रही है कि इस कोरोना काल में स्वच्छता का कितना महत्व है. स्वच्छ रहने से लव बीमारियों की चपेट में नहीं आते हैं. इसलिए घर में हमेशा साफ सफाई का ध्यान रखें.

– पोषण परामर्श केंद्र पर भी लोगों को मिल रही सलाह:
जिले के सभी प्रखंडों में पोषण परामर्श केंद्र खुल चुके हैं. वहां आने वाले लोगों को पोषण के बारे में बताया जा रहा है. गर्भवती और धात्री महिलाओं को मांस- मछली और अंडे का सेवन करने को कहा जा रहा है. जो महिलाएं मांस-मछली नहीं खाती है, उन्हें अधिक से अधिक दूध और हरी सब्जियां खाने को कहा जा रहा है.